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Jehad e Razavi | H.I. Syed Zaigham Rizvi
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Record date: 28 May 2023
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:20]अल्हम्दुलिल्लाह [संगीत] अल्हम्दुलिल्लाह [संगीत] [संगीत] दुरूद और सलाम मोहम्मद और बेटे मोहम्मद
[1:41]अले सलाम की जबाते मुकद्दस पर हम है उसे खुदा की जिसने
[1:49]हमें और आपको कराने करीम विलायत है अमीरुल मन और मां की
[1:56]विलायत से मुक्तमस से किया हर बार अधिकारी अलग कर लो फिर
[2:04]एहसान है तो फिर है की उसने हमें और आपको यही और
[2:08]मौका इनायत फरमाया है की हम और आप इस वफा ने खुदा
[2:11]में मौजूद हैं और खास जी जिक्र में मशहूर हैं वो भी
[2:17]खुदा की तरफ से नामजत और चुने हुए हिदायत के मीनार हैं
[2:32]निजात की कश्ती हैं आज का जो दर्ज है इसका अनुमान जिहादी
[2:44]राजबी तरह के जिनके बड़े में हम फक्त अगर इस हद तक
[2:59]इनको जान के इनका नाम क्या है कब पैदा हुए कब शहादत
[3:08]हुई किसने शाहिद किया आवाज कितनी थी औलादें कितनी थी किसके बेटे
[3:20]थे और उसके बाद हमारी मार्फत का सिलसिला यहां खत्म हो जाए
[3:24]तो इतनी जानकारी जिसे कहते हैं इतनी मालूमात जो हमने जमा की
[3:31]है की मैं इस इमाम के लिए इस अंदाज की मालूमात रखना
[3:41]हूं तो कुरान कुछ इस अंदाज से जवाब देता है [संगीत] ऐसे
[4:01]पहचानते थे रसूल को जैसे अपने बेटों को पहचानते हैं की यहूदी
[4:13]रसूल अल्लाह को ऐसे पहचानते हैं जैसे की अपने बेटों को पहचानते
[4:19]हैं देखने से महसूस ऐसा होता की अगर रसूल अल्लाह का कोई
[4:35]ऐसा पहचानता हो जैसे कोई अपने बेटे को पहचानता हो तो इससे
[4:37]अच्छी बातें रहे हैं बस ऐसे ही पहचान रहे हैं जैसे आपस
[5:03]में एक दूसरे को पहचानते हैं इसका बेटा तो जहां शपथ निस्बतों
[5:14]से पहचान रहे हो कौन किसका बेटा इस अनुमान से ये रासमुल्ललाटों
[5:17]पे पहचानेगा पहचान पहचान रहे जबकि अल्लाह रसूल अल्लाह को हैसियत रसूल
[5:25]अल्लाह पहचान माना जाता है तो अब अगर कुरान ने उसूल बयान
[5:32]कर दिया तो ये उसूल फक्कड़ रसूल अल्लाह पर रुक नहीं जाएगा
[5:35]बल्कि जो नफ्स से रसूल है उसकी तरफ भी ये उसूल तबक
[5:41]हो जाएगा की ये इन ऐसा को भी फक्त इतना ही जान
[5:47]रहे हैं की इनके बेटे हैं वो उनके बेटे हैं और ये
[5:53]इनके बेटे हैं इमाम नहीं जान रहे हैं इमामे जमा नहीं जान
[5:55]रहे हैं इसीलिए हमने तारीफ में देखा की जो आए मां को
[6:06]इमाम के इशारों को समझते थे की इमाम अगर सफर का इरादा
[6:15]रखते हैं तो जुबान पर सवाल नहीं आता की क्यों सफर कर
[6:17]रहे हैं वहां क्यों जा रहे हैं यहां क्यों नहीं जा रहे
[6:22]जब इमाम ने सफर का इरादा कर लिया है तो आप हमारा
[6:27]सामान्य सफल आमादा पाएंगे खाने की जरूर भी नहीं पड़ेगी और वो
[6:35]जो वक्त इमाम को एक मुकद्दस हस्ती के तोर पर पता जानते
[6:38]थे की निस्बतें बहुत हम हैं मुकद्दस हैं काबिल एहतराम है तो
[6:44]उनसे मोहब्बत का तकाजा भी यूं ही कर रहे थे की ना
[6:48]जाइए ये कहां जा रहे हैं कत्ल हो जाएंगे यूं हो जाएगा
[6:50]अच्छा आप जा रहे हैं तो बच्चों को क्यों लेकर जा रहे
[6:54]हैं ये मोहब्बत का ताजा जरूर है की वो क्या का रहे
[7:06]हैं जुबान पर कोई सवाल ए रहा है नहीं ए रहा है
[7:11]क्यों क्योंकि मां में जमाने का दिया चलना है तो चलना है
[7:13]आसमान उधर हो जाए इसीलिए आप कहते हैं मैं गवाही दे रहा
[7:26]हूं आपने अल्लाह और रस के रसूल यहां तक के शहादत के
[7:34]मंजिल पर पहुंच गए वहां तक आपकी बात कहीं है तो यह
[7:39]जो हमारे दरमियां आते हैं जैसे 11 जिहाद आने वाली है इमाम
[7:44]से मनसुख है मैं कहता हूं की मोहम्मद से मानसून है हर
[7:50]वो तारीफ जो आपको और हमें खुदा की दी हुई नियत की
[7:58]तरफ मुड़ाबचे करें और उसके तोर पर उसके नतीजा के तोर पर
[8:05]मैं और आप खुदा से मुत्तसिल हो जैन खुदा का दिन कहलाता
[8:13]है तो आज का जो गुजरा हुआ दिन है ये खुदा का
[8:15]दिन कहलायेगा क्यों किस लिए की हम उसे नेमतें उजमा के ऊपर
[8:20]बात कर रहे हैं की खुदा ने जिसको मत कार दिया है
[8:26]वो इस जमीन पर आपके और मेरे लिए कैसे हिदायत का सर
[8:28]चश्मा है और परवरदिगार ए आलम के दिन की बक के लिए
[8:33]जी हां कैसे कर रहे हैं मालूमात बच्चों को देने के लिए
[8:42]फक्त से मालूमात है ये बच्चों को देने के लिए मालूमात है
[8:45]जवानों को और बुजुर्गों को यह मालूमात मालूमात की हद तक है
[9:04]अगर यह फैक्ट्स और फिगर्स बताते हुए खुद एक सवाल कायम करना
[9:14]चाहूंगा बहुत तवज्जो राखी जानते हैं की जब कभी भी आठवी इमाम
[9:19]का नाम आता है तो इनाम से बताइए उन्हें और शाही को
[9:37]रसायन का नाम सुनते ही हमने गरीब है तू तो तू उसका
[9:45]सिलसिला तो उसका नाम तो उसका और आपको पलटते हैं और फिर
[9:56]देखते हैं [संगीत] पहले तारीख हैरान र जाएंगे 202 हिजरी है जब
[10:29]तो इस ने तो यही लिखा है अगर 202 हिजरी आपकी शहादत
[10:41]की तारीफ ले ली जाए तो सफर के महीने 2002 हिजरी में
[10:47]शहादत है तो अब देखते यह है की इमाम रहे हैं सलाम
[10:51]मदीने में कब तक है तो हजरत ए रसूल ए जाकर यहां
[10:57]की थाती को अगर उठाया जाए तो उसमें रमजान के इतडे हिस
[11:09]में 201 हिजरी इमाम मदीना में नजर आते हैं और रमजान पहुंच
[11:28]जाते हैं तो फिर वक्त कितना लगाना बहुत मुक्तसर 6 महीने मुख्तार
[11:57]सर और अगर 2003 हिजरी भी ले ली जाए तो 6 महीना
[12:04]तो दोनों रिवायत को अगर लेते हैं तो 6 महीने से लेकर
[12:10]डेड साल ये अरसा इमाम का खुरासान ने गुजरा है आप सवाल
[12:16]ये पैदा होता है की इमाम ने इमामत की जिम्मेदारी कब समाधि
[12:21]है तो उसके लिए हम कहेंगे की जब शहादत कोई 183 हिजरी
[12:27]में साथ में इमाम की 25 राजा तो इमाम ने इमामत की
[12:34]जिम्मेदारी को संभाल तो अब 1183 वहां जोड़ी है जो की 6
[13:00]महीने से लेकर डेड साल तो सवाल ये पैदा होता है की
[13:04]18 साल इमाम कहां है और इस 18 साल में इमाम क्या
[13:15]कर रहे कुछ कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं अगर
[13:17]आपके पास वकालत ना हो तो ये खुद एक सवाल होगा की
[13:29]वो इमाम जो 20 साल इमाम है पहले दज में क्या मुझे
[13:30]इस उनवान से इमाम के 20 अखबार याद है नहीं याद अब
[13:39]अगर नहीं याद है मगर मैं यह मांग को जानता हूं की
[13:45]ये खाली अपना मुशायदा है तो कुरान रहेगा या रसूल अल्लाह जानते
[14:22]नहीं पहचानते की तरह जन के बाद अगली मंजिल फिर पहचान की
[14:30]होगी मैरिफत कितनी रखते हो जैसे जैसे मार्फत बढ़नी जाएगी वैसे वैसे
[14:33]जहरीलिएट से निकलते चले जाएंगे हदीस ये नहीं कहती की जो मा
[14:57]गया ऐसा मा गया की जो अपने इमाम को इल नहीं रखना
[15:03]था इल रखना हालाकात से नहीं बचता से बचती तो 20 साल
[15:09]में इमाम का जिहाद क्या है [संगीत] कहानी यह कोई साजिश तो
[15:38]नहीं है और अगर मेरी बात सुनकर अजीब लगे तो इस वक्त
[15:40]जो लोग मुझे इंटरनेट पर सुन रहे हैं खास और आप लोग
[15:44]जब यहां से वापस जाइएगा तो जाइए google.com.pk चाहिएगा और वहां लिखिएगा
[15:56]और फिर देखिएगा वह तस्वीर कौन से दिखता है लिखिएगा इससे लंबी
[16:07]जिहाद तो फिर देखिएगा वो तस्वीर कौन सी दिखता है जब उससे
[16:10]पूछते हैं की जिहाद क्या होता है तो वो तुम्हें कुछ मुंह
[16:14]छुपाई हुए लोग दिखता है जिनके हाथों में गोला बारूद होता है
[16:22]जो मस्जिदों में जाकर फैट जाते हैं जो बम ब्लास्ट करते हैं
[16:32]तो कहता है देखो यह क्या थे और जब इस्लामिक मिलिटेंट के
[16:49]नाम से इनको पहचान वत है तो कहता है जानते हो जिसे
[16:51]इस्लाम की बात करते हैं उसमें इसके अलावा और कुछ नहीं है
[16:57]तो कौन था जिसने हमारे जहां में ये जिहाद का उंस दाल
[17:02]दिया और बख्तिया नहीं इसके ऊपर सेमिनार होते हैं आपके पाकिस्तान के
[17:06]इस्लामी सल्तनत के अंदर भी की यह जो जिहाद की आयत है
[17:12]ये बच्चों के जहां तो बिगाड़ देती हैं बच्चों के कोर्ट से
[17:15]जिहाद की आयतें निकाल दीजिए कच्छ सहन है जो आपको और मुझे
[17:42]ये तस्वीर दिखता है वो इससे बिल्कुल मुख्तलिफ है [संगीत] जब चाहता
[18:10]कहते हैं और जहांदा कहते हैं तो उसका फर्क क्या है जब
[18:16]हम दम के साथ यानी पेस के साथ इसको पढ़ेंगे तो इसका
[18:22]मतलब ताकत होता है जो पैदा कहेंगे पता के साथ तो इसका
[18:33]मतलब होता है दिल अमृत [संगीत] से कोशिश करना की वहां पहुंच
[18:55]जो इसको ज्यादा कहते हैं अपनी पुरी यानी की जिसको कहते हैं
[18:59]कोई गोल हो उसे गोल को अचीव करने के लिए अपनी पुरी
[19:03]लगा दी जाए की मैं इस गोल को अचीव कर लूं इस
[19:07]पूरे प्रोसेस को ज्यादा कहते हैं और यहां से निकलता है जहां
[19:16]होता है उसको कहते हैं मुजाहिद मसलन हमारा गोल क्या आम करना
[19:30]क्या होगा हमारा गोल हुआ के साथ की मशरे से जल खत्म
[19:42]हो जाए एक बच्चा अपने घर से मदरसे के लिए निकाला है
[19:53]क्यों अपनी पुरी सिर्फ कर रहा है की मैं अपने जेहल को
[20:01]खत्म करके एलिम का वसूल कर लूं तो क्या कहलायेगा मुजाहिद इल
[20:07]के रास्ते में अगर मौत ए जाति है तो मौत नहीं होती
[20:13]शहादत होती है अब समझ में आया की तले पे इल का
[20:26]अगर बिस्तर पर भी मा गया है [प्रशंसा] अली मोहम्मद की मोहब्बत
[20:46]में मा जाना शहादत क्यों है आले मोहम्मद की मोहब्बत को दर्द
[20:55]करना और फिर दिल में तस्वीर होना के मैं भी ऐसा हो
[20:57]जाऊं हर हर गुजरा हुआ लम्हा उनकी तशी उनकी गुजर रहा हो
[21:03]ऐसे आलम में अगर मौत ना ए जाए तो मौत कहलाएगी या
[21:10]शहादत अब समझ में आया मोहम्मद ने मरना शहादत क्यों है यह
[21:13]पीछे हाथ हो यानी मुजाहिद हुए मैदान में मरना जरूरी नहीं है
[21:19]बिस्तर है क्यों नहीं सितारे का नाम जहां में आया जो की
[21:55]अपना सवाल किरदार मुअशरे में अदा कर रहा है ये जिहाद नहीं
[21:59]कर रहा तो और क्या कर रहा है एक डॉक्टर अगर कोई
[22:04]तंजीम टिप के मौजो पर बनी हुई है अगर डॉक्टर की कोई
[22:07]जमाई है और वो वोलंटीयरली बेसिस के ऊपर गुरव की तरफ हर
[22:12]तरफ हर उसे हिस में जा रहे हैं जहां पर 21 उंगलियां
[22:17]मौजूद नहीं है और वो चाहते हैं की मौशरे में सेहत और
[22:22]सलामते रहे एक मुस्तफा मुशरा ताशकील पे जहां पर बीमारियां ना हो
[22:26]तो ये डॉक्टर क्या कर रहा है चाहत कर रहा है तो
[22:31]क्यों नहीं कोई डॉक्टर की तंजीम का नाम जिहादी तंजीम के नाम
[22:35]से आया इसलिए की बताने वाले ने फक्र एक चेहरा दिखाए है
[22:40]जिसको अल हम पहले दज में तो कैथल कहते हैं जिहाद नहीं
[22:45]कहते [संगीत] बयान फार्मा दिया अब मुझे बताइए अब आपके सामने खींच
[23:16]रही है तो मुझे बताइए आपके कौन से इमाम ने जिहाद नहीं
[23:20]किया कहेंगे क्या बात कर रहे हैं उनका नाम फक्त हमारे लिए
[23:28]इतनी तकलीफ बख्शता है की हम अपनी जिम्मेदारियां की तरफ इशारा ना
[23:34]सफाकत अपनी जिम्मेदारियों को महसूस करते हैं मशहूर हो जाते हैं उसके
[23:40]अंदर उनके जिहाद को देखकर तो हम अपने जिहाद के लिए रोशनी
[23:43]तालाब करते हैं आपके कौन से इमाम ने कायम नहीं किया कायम
[23:48]किस कहते हैं कायम भी तो वही है की मैं जुल्मो होरो
[23:54]जुल्म और स्टेप दादा के निजाम के खिलाफ खड़ा हुआ हूं तस्लीम
[24:00]नहीं कर रहा जी अंदाज मुख्तलिफ मुख्तलिफ हैं लेकिन जिहाद सब कर
[24:35]रहे हैं कोई तलवार निकाल कर जिहाद कर रहा है कोई तलवार
[24:39]नाम में रख कर के हाथ कर रहा है कोई खुजाबो से
[24:44]जिहाद कर रहा है जो अहम के साथ जिहाद में शरीक हैं
[24:57]इसीलिए शेयर ने कहा ना दो हाथ आगे बाढ़ गई जो जुल्फिकार
[25:01]से नस्ल गाजिद कैट दी चादर की धार से है बस्ती शाहिद
[25:10]की खुशी में हर को गई कष्टीफा के लिए अगर मैदान में
[25:21]निकली हुई है [संगीत] अल्लाह रबल इज्जत ने रसूल को भेजो है
[25:58]बोलत अरसल नर्सल ना बिल्कुल निशानियां के साथ भेजो है वह अंजना
[26:04]मां अमल की तरह बाबुल मिजन और उनके साथ किताब को भेजो
[26:06]है मिजन को भेजो है लेकिन मुन्ना के लोग अगल के साथ
[26:15]कायम करें सारे कम खुदा ने किया रसूल को भेजो किताब को
[26:18]भेजो मिजान को भेजो सब खुदा का खुदा कर रहा है मगर
[26:23]आखरी कम कहता है नहीं हम नहीं करेंगे हम फैसिलिटेट करेंगे कम
[26:28]तुम करो हम तुम्हें देंगे ऐसा नहीं है की तुम हमारे मुकाबला
[26:48]पर ये कम करोगे की हमारी चाहिए तुम्हें जानता है मोहम्मद खुदा
[27:06]के अलावा कोई नहीं देगा जी जिंदगी को लेकर वो आपको और
[27:15]हमें बहकने पर ओला हुआ है ना इस जिंदगी को रखना में
[27:17]वह खुदा का मोहताज है और यह वह भी जानता है इसमें
[27:24]उसको कोई मसाला नहीं है इसीलिए उसको उसकी इज्जत का वास्ता देकर
[27:26]सवाल करता है की मुझे मोहलत दे फिर देख मैं क्या करता
[27:31]हूं कहा ठीक है तो दे दी तुझे वक्त मालूम था की
[27:34]मोहलत जो करता है करता है भर दूंगा जहन्नम को उन सब
[27:39]से जो तेरी बहकावे में आएंगे वो भी कहता है सबको बहकाऊंगा
[27:42]मगर जो तेरे मुखड़े पे हैं उनको तो नहीं आऊंगा उसके बाद
[28:05]वो जो भी अंबिया के पास गया जानता है नतीजा क्या होगा
[28:17]लेकिन गया के पास गए अंबिया की अजमत के पास गया हजरत
[28:23]इब्राहिम के पास तीन मकान पर ए गए उसके पास आया की
[28:30]नहीं आया जानता है नबी अल्लाह है उसके बावजूद अपना कम नहीं
[28:33]छोड़ रहा कंसिस्टेंसी अच्छी बात तो उससे भी सखी जा शक्ति है
[28:40]ना थकना नहीं है हम तबलीग करते हुए तक जाते हैं हम
[28:45]अल्लाह का कम करते हुए तक जाते हैं एक मर्तबा कितना मस्जिद
[28:47]ए जाएगा नहीं आया वो दूसरे दिन कहा की उनको बुला लो
[28:53]अपनी बाला से यह आप और मैं तक गए शैतान नहीं था
[29:03][संगीत] बैठ गए उसके बावजूद भी ए गया पता है वो जो
[29:38]चीज गायब हुई थी तुमने वहां अलमारी में देखा है उधर तो
[29:41]वहां तुमने देखा ही नहीं सब कुछ है कुछ ना कुछ करेगा
[29:52]तो शब्द दाल देगा नित में शक दाल देगा तो पता लगा
[29:56]जो इबादत भी कर रहे थे वो सबकी हालात में कर रहे
[30:01]हैं ये देखिए हर नहीं मनी उसमें तो बिल्कुल इस तरीके से
[30:03]भेजो तो सब कुछ खुदा ने लेकिन ₹900 [संगीत] में दे रहे
[30:13]हैं ऐसे हाथी तुम्हें दे रहे हैं की तुम यकीनन तुम्हारी मजाल
[30:17]नहीं है की तुम खुद किसी को बना सको हम तुम्हें बना
[30:19]के दे रहे हैं तुम्हें यह तो मैं बयान करेंगे तो बिल्कुल
[30:39]इस तरीके से आप इमा अल हसन और खास अंबिया अलेही वल्लम
[30:44]का एक नकटी है झंडा क्या हुआ इंसाफ नफीज हो जाए कबातुल्लाह
[30:56]से शुरू हुई जो मक्के से शुरू हुई रसूल अल्लाह ने जो
[31:03]तहरीर शुरू की मक्के से शुरू हुई आहिस्ता आहिस्ता उसे तहरीर का
[31:08]नतीजा क्या निकाला मदीना में इस्लामी फलाही रियासत यह उसे टिहरी का
[31:15]नतीजा है क्यों इसलिए की उसे इस्लामी फैलाही रियासत के अंदर क्या
[31:19]होगा हुकूमत हाफिज होगा और जमीन पर खुदा का कानून नफीज होगा
[31:25]इसने हुकूमत इस्लामी इस्लामी हुकूमत का बयान में से है क्यों लिया
[31:49]आदिल का बयान इसीलिए रसूल अल्लाह ने जब अपने वासी को पहचान
[31:56]वाया तो यही कहकर पहचान वाया मेरा हाथ और करेंगे तो मेरे
[32:07]अगल में और अली के एडल में कोई फर्क नहीं है आदि
[32:20]बराबर है बराबर है मौला अली ने वही बदनाम है उसके बाद
[32:33]आने वाले अहम ने भी इस अकाल के कायम के लिए कोशिश
[32:41]की कोशिशें को अगर क्रिप्टोग्लोबिकली देखें तो तीन हसन में प्रेजेंट कर
[32:45]दीजिए [संगीत] दूसरे दूर की आईना पांचवें इनाम से लेकर आठवी इनाम
[33:05]तक और अगर दिक्कत से देखें तो आठवीं अमाउंट की मदीना की
[33:10]जिंदगी था दूसरा दूर तीसरा दूर इमाम अली सलाम की और आसानी
[33:15]जिंदगी से लेकर और फिर अब तक इस कम को देखें तो
[33:24]कैसे नजर आता है इस अंदाज से नजर आएगा की पहले दूर
[33:27]के एम खून देकर उसे नन्ही सी कोप्पल की एवरी कर रहे
[33:36]हैं वो जो नानी सी कपल कोपल सलाम है उधर रसूल अल्लाह
[33:39]ने लगे है क्यों इसमें तनाव दख बन्ना है हिफाजत कर रहे
[33:50]हैं ना दाएं से ना बेन से एन सामने से ना पीछे
[33:54]से ना ऊपर ना नीचे खून देते हुए उन्हें हिफाजत फरमाए [संगीत]
[34:23]हम का सकते हैं की इस दूर के आए मां ने जहां
[34:27]दिन की शरारत बयान की है मुहाफिजत की है वहीं शाहिद खुश
[34:33]को वजह किया यानी आपकी और मेरी आईडेंटिटी को सिक्योरिटी आवाज ए
[34:46]रही कहानी से तकलीफ की आवाज ए रही तो इमाम अली सलाम
[34:51]ने रॉक दिया अंबर पैनल है बल्कि अमृत तो इसके दरमियां में
[35:04]है तो कहे पता है रुकना शुरू किया की नहीं इस नज़रिया
[35:09]से हमारा ताल्लुक नहीं है इस नज़रिया से हमारा ताल्लुक नहीं है
[35:15]वो नजरिया है उसकी हिफाजत करते हुए नजर आते हैं पूरा कैनवस
[35:41]देखना होगा अब नजर आएगा की जो तीसरी दौड़ के आयाम अपना
[35:46]कम अंजाम दे रहे हैं फाउंडेशन पिलर्स में दूसरे दूर के मजे
[35:48]हाथ है और उसे दूसरे दूर के अयम के जिहाद की फाउंडेशन
[35:53]पिलर्स में जाएंगे तो पहले तो और क्या हिम्मत है जिहाद है
[35:58]तो वो सब एक ही है इसमें कोई फराक नहीं है तीसरी
[36:02]दूर के आईने मैन क्या कम किया और क्या हालात नजर आए
[36:04]किस अंदाज का जिहाद हुआ बहुत मुक्तसर कर दो अब यहां पर
[36:09]और वो ये इस दूर के अंदर जहां इमाम अली सलाम वो
[36:12]कम तो कर ही रहे हैं जो दूसरे दूर के आएं मैं
[36:17]कर रहे थे साथ एक और अंदाज से पहचान पे जा रहे
[36:18]हैं आलम इस्लाम और आलम में अफवाहें की तरफ और वो क्या
[36:24]वो थे रहबर आपका तालु हो रहा है शायद हमारे लिए इस
[36:33]वक्त ये लफ्ज़ कोई बहुत ज्यादा मैन नहीं रखना लेकिन अपने जहन्नुम
[36:39]को अगर आप 200 मिसाइल में ले जैन आपके जिक्र को दबाया
[36:55]गया हो जहां उनके मैं बयान क्या करूं की इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम
[37:04]से फिरते बाद में कोई रिवायत नहीं मिल रही है कभी गौर
[37:08]की आपने इस बात पे की जब आपको ये रिवायत उठाते हैं
[37:13]फॉलो आबू अब्दुल्ला कल आबू अब्दुल्ला जिसे बयान करते हैं ये इसलिए
[37:22]की उसे दूर के आयरन मां ने बयान किया क्यों मौका ऐसा
[37:28]है इससे पहले मौका नहीं है नाम नहीं रख सकते थे आप
[37:33]उनके नाम से हदीस बयान करना तो छोड़िए यहां तक की मेरे
[37:35]नजर से कुछ ऐसी रिवायत गुजरी है की जिसके अंदर जब सनत
[37:39]बयान हो रही होती है ना तो जब सनत सनत पुरी जानी
[37:43]है रसूलल्लाह तक मसाला यह ए गया के बीच में मौला अली
[37:47]ए गए नाम ले नहीं सकते रहो और ऐसे सामने आए की
[38:21]शाही हिल कर र जाए की मालाओं बैठा है फस गया है
[38:27]बहुत से मामलात में पहले मामलाड़ियों की तहरी के उठी हुई मुख्तलिफ
[38:36]जगह अपने भाई को कत्ल करके बैठा है अमीन को मामून मलंग
[38:50]ने अपने भाई अमीन को कत्ल करवा दिया क्यों ताकि पुरी आलम
[38:55]के ऊपर मेरी गवर्नमेंट मेरी हुकूमत हो जाए तो खुद अब्बासी है
[39:26]और अब्बासी का घायल की मुखालिफत माल ले लिया है अल्वी भी
[39:31]इसे खिलाफ उठे हुए हैं अब्बासी भी इसके खिलाफ उठे हुए हैं
[39:40]तीसरा मसाला क्या तीसरा मसाला है वो मदीना में है और मदीना
[39:43]में जो हाथी की हकदार है मसाला यह है की वो नजरों
[39:48]से ओझल है किधर है क्या कर रहे हैं किस मिल रहे
[39:54]हैं तो वो तमाम वो भी प्रॉब्लम है ऐसा क्या कम किया
[39:58]जाए की मैं इन तीनों में आप पर कामयाब हो जाओगे बारबैक
[40:35]का था ये तुम्हारा आगे क्या हुआ कहते हैं की जब किसी
[40:43]ने मशवरा दिया की तुम्हें कम करो [संगीत] इनका दोस्त खत्म करो
[40:54]की यह दुनिया पर इनको तो यह जो हसन चाहिए इनको हुकूमत
[40:58]चाहिए इनको माल और चाहिए तो यहां किस तरीके से किसी नजर
[41:13]के सामने रखो तो क्या होगा यह होगा तो उनको जवाब दिया
[41:28]जाएगा की नहीं आप किसकी हुकूमत के खिलाफ कायम कर रहे हो
[41:32]उसे हुकूमत के खिलाफ जिसमें तुम्हारे इमाम भी मौजूद है इमाम का
[41:40]इंट्रोडक्शन और तीसरी दज में खुद चुके दारा हुआ है तो जब
[41:55]इनको हुकूमत में शामिल करेगा तो हिमायत ए जाएगी तो कम से
[42:00]कम एक साइड तो सीकर हो जाएगी अब अब्बासियों से भी बात
[42:04]करेगा इस पोजीशन में कहानियां किसके खिलाफ बात कर रहे हो मेरी
[42:06]जरा पावर तो देखो की ये मेरी अपनी सिपाही ये है और
[42:10]ये अल्वी अलग मेरे साथ खड़े हुए हैं तो इनको भी कंट्रोल
[42:15]करना आसन हो जाएगा तो बड़े-बड़े मुनजरे किया हैं और बड़ा अच्छा
[42:49]रिजल्ट इस बात का जवाब देने के लिए मुझे काफी टाइम चाहिए
[43:03]वो फिर बयान करूंगा लेकिन अभी सिर्फ इशारा कर डन जानते हैं
[43:10]जाइए जाके एक साफा के ऊपर पहले इमाम से लेकर आठवी इमाम
[43:13]को छोड़कर आगे मत तक शागिर्दों की फैरीज बनाई है मैं वेकैटन
[43:20]शागिर्दों की बात कर रहा हूं शॉर्टकट्स वालों की बात नहीं कर
[43:24]रहा हूं उनकी बात कर रहा हूं चल ए रहा हूं [संगीत]
[44:16]एक बात कहूंगा समझ जाएंगे [संगीत] फिरती यूनिवर्सिटी हैं उसे दूर में
[44:48]मैं आपसे कोई 20 साल पहले की बात होगी तो 197 की
[44:54]बात है 1997 [संगीत] हाई पर पुरी किताब समझ नहीं बात एक
[45:32]शख्स है जो फिट के ऊपर किताबें पर किताबें लिख रहा है
[45:37]कुछ तो प्रॉब्लम है [संगीत] इसका मतलब की कोई जंग इस तरह
[45:52]की जारी है की जी महज पर वो लाड रहा है अब
[45:56]हमने जब इस संसार से देखा तो हमें वो जंग नजर ए
[45:58]गई उनका नमाज की क्या जरूर है छोड़ दो खत्म पुराने जरूर
[46:09]थोड़ी है जो जरूरी है तुम क्या पढ़ोगे छोड़ दो जरूर नहीं
[46:31]है उन्होंने पुरी किताबें लिख दी इसके ऊपर का भाई यह है
[46:41]नमाज ये है ये है जकात ये है निकाह अल्लाह हूं अकबर
[46:47]मोहर्रम से निकाह तक जायज कर दिया था उन्होंने जब इन्होंने पुरी
[46:53]किताब लिखी किताब क्या कर रहे हैं यानी की 30 जमाना उसे
[47:01]जमाने में जो फिटना उठा हुआ है इमाम अलैहिस्सलाम ने अपने शागिर्दों
[47:08]को ऐसा तैयार किया की हर हर शागिर चलती फिरती यूनिवर्सिटी था
[47:12]और इमाम अली सलाम के अफ़गर की इस अंदाज सफा कर रहा
[47:18]था ये इमाम अली सलाम की ताई थी इसके लिए तो क्या
[47:23]थी अब यही चीज आज के दूर में काफी पेस्ट कीजिए 1440
[47:24]इसी में मेरा और आपका जिहाद क्या होगा हिंदू और क्या होगा
[47:33]इमाम अली सलाम के उल्लू और उनका विजन और मिशन इसको पे
[47:39]तक नहीं तक पहुंचाना इससे हटकर कोई विजन और मिशन नहीं है
[47:45]यहां तक की अगर समझा देता हूं उसे किसी मेरे सागर से
[47:53]पूछा मैं कर्बला जा रहा हूं बताइए मैं क्या लेकर जाऊं दुनिया
[47:57]पूछती है क्या लेकर आऊं वो का रहा है की आप लेकर
[48:03]जाऊं भी कर जाइए मतलब आप इमाम हुसैन अलैहिस सलाम को क्या
[48:10]देंगे की वो खुश होंगे [संगीत] लेकिन क्या चीज ये तो वो
[48:25]है जो अल्लाह वाला एक सल्लू ना आने नबी वो तो भेज
[48:34]रहा है यह बतलायो तुम क्या चीज डॉग की वो खुश हो
[48:36]जाएंगे हो सकता है कोई तुम्हें क्या तुम क्या का सकते हो
[48:40]क्या तुम क्या फलन वेट कर रहे हो मेरे दर्द को समझिए
[48:46]जी हां तुम दे सकते हो इमाम को खुश कर सकते हो
[48:50]कैसे खुश कर सकते हो जमीन के ऊपर कायम हो जाए वो
[49:06]बड़ी शिद्दत से उसे दिन को देख रहे हैं की कब मेरा
[49:10]फरजान जरूर करें और कब वो अदालत इंसाफ से जमीन पर हो
[49:15]जाए इमाम को तोहफा देना चाहते हो तो ये तोहफा दे दो
[49:16]क्यों इसलिए के वजूर नहीं फार्मा रहे हैं क्यों नहीं फार्मा रहे
[49:22]हैं नासिल वादा नहीं है नुसरत करने के लिए लोग अवेलेबल नहीं
[49:26]है तो आओ हम नसरी इमाम बनते हैं हम पहले दज में
[49:32]मैं नासिर बंता हूं दूसरे दज में मैं मोशन को तैयार करता
[49:38]हूं लेकिन सर हदीस की 25वें नंबर की आयत के ऊपर अमल
[49:40]करता हूं आज मशरा आमादा हो जाए उसे अगल को लेने के
[49:45]लिए जो रसूलल्लाह नफीज करना चाहते थे अगले ही लम्हे जोर हो
[49:51]जाए दुरूद पढ़िए मोहम्मद ए [संगीत] उलीमारी दे सकते हैं और अगर
[50:11]और करो तो यही देने के लिए जाते हैं खाली मैं आया
[50:18]हूं यहां इकरार करने के लिए की मेरा दिल आपके दिल के
[50:22]साथ जुड़ गया है अब जुड़ा होने को तैयार नहीं है यही
[50:27]चाहते हैं मां बस अगर जुड़ गया है तो हमसे तलाक करो
[50:32]मैं आपसे तालाब करता हूं क्या मैं तालाब करता हूं रिस्क कौन
[50:40]सा रिस्क मैं वो रिश्ता अलग कर रहा हूं की मैं आपके
[50:42]खून का बदला लेने वाले के साथ मिलकर जिहाद करो बताओ मांगा
[50:49]की नहीं मांगा यही तो मांगा यही तो लेकर गए थे नुसरत
[50:53]का तोहफा लेकर गए थे आपने फल में नासिर की सदा लगे
[51:00]थी ना लबैक या हुसैन [संगीत] करूंगा तो बस इसी तरीके से
[51:10]मामून ने अपने इस मजनू मकसद को हासिल करने के लिए इमाम
[51:12]अली सलाम को बुला लिया अभी वक्त खत्म नहीं है और जानते
[51:34]हैं नशा पूर्व फक्त वो तो उनका मसकन है लेकिन असनन सफर
[51:39]में रहते थे वो बसरा पहुंचे थे वह कभी यमन पहुंचे हुए
[51:42]क्यों एक हदीस फलन जगह पर मौजूद है एक उसका रवि वहां
[51:47]मौजूद है मौला अली की शान में एक हदीस है वो फलाने
[51:51]भी रिवायत की है यमन में राहत है यहां से सफर करके
[51:55]जा रहे हैं उसके खिदमत करते थे उसकी चुटिया उठाते थे कहता
[52:00]तुम्हें खुदा का वास्ता वी जिसे तुमने ये सुना है और जाते
[52:11]थे दूसरे मोहल्ले में इस मोहल्ले की रिवायत तो पता है उसे
[52:14]मोहल्ले में जाकर ढूंढ-ढूंढ कर उन्हें तलाश करते थे लिखने थे ताकि
[52:24]मौला अली की फजीलत को लिख सके इस तरीके से तुम झुठलाना
[52:30]चाहोगे तो झूठ लाना सबको इसलिए की उन मानबे से भी वो
[52:35]आई हुई हैं जी पर तुम्हारा दुनिया उनको नौकर के नाम से
[52:40]जानती है दुनिया हमको गुलाम के नाम से जानती है मुहांडिस है
[52:43]मोहद्देश उसे हदीस को लेने के लिए अगर नौकर बन जाए कहानी
[52:50]तो तुम्हारी नजर में नौकर होंगे लेकिन असलम कौन है क्या खिदमत
[52:53]कर रहे हैं अली अब यहां जवानों से मैं कहूं अगर आवाज
[52:58]सलाथर्वी एक रिवायत लेने के लिए यमन चलेगा तो मुझे बदलो मौला
[53:04]अली की शान या मौला अली से मा भी रिवायत लेने के
[53:11]लिए तुम्हारे शेल्फ के अंदर नल बराबर राखी हुई है अगर एक
[53:14]रिवायत लेने के लिए यमन जय जा सकता है कितनी बार कोली
[53:25]है नहीं खोलेंगे तुम तो हक अदा नहीं कर सकते इमामे राजा
[53:28]का हक के अदा करोगे वह कहेंगे मैंने अपनी जिंदगी खत्म कर
[53:39]दी एक रिवायत को लेने के लिए तुम्हें इतनी तौफीक ना हुई
[53:43]ठंडे-ठंडे मोहन के अंदर ऐसी के अंदर बैठे हुए तो मैं किताब
[53:49]नहीं पढ़ सकते मैंने पुरी जिंदगी खत्म कर दी ऐसा ही है
[53:55]तो समझिए मैंने मिसल दी है तो बस इमाम अली सलाम को
[53:57]बुला लिया गया अब इमाम का जिहाद क्या है अगल को कायम
[54:02]करना है अपने हक करना है सामने बैठा हुआ है और करता
[54:07]क्या है अपनी आई हमारा जिक्र खत्म हो जाए लेकिन आज भी
[54:49]हमारा जीते जिंदा है उसके बाद फिर मतलब हुए हैं की मामून
[54:59]यह बदला अगर यह खिलाफत जो तुम मुझे दे रहा है तेरी
[55:01]है और अल्लाह ने तुझे यह लिब से खिलाफत दिया है तो
[55:06]क्या हक पहुंचता है तुझे की जो लिबास तुझे खुदा ने पहनाया
[55:11]है वो उतार के तू किसी और को दे दे और अगर
[55:13]ये तेरा नहीं है तो फिर तुझे क्या हम पहुंचता है की
[55:18]जो चीज तेरी है ही नहीं वो तू किसी और को दे
[55:24]दे परेशान हो गया या अल्लाह क्या जवाब दे अपने समूह लेकर
[55:27]र गया इमाम ने उसके मकर को वहीं खत्म कर दिया मैं
[55:32]करूं और मैं कर रहा हूं बांदा [संगीत] किया और जब आपने
[55:49]इनकार किया है आपकी अभी के अभी यही पर तो इमाम ने
[56:09]फिर उसको कुबूल किया मुश्रुत काबुल किया और सराय रख दी ताकि
[56:13]मुहर्रेख लिखे की इमाम ने इनसराय पे काबुल किया है और वो
[56:19]सराय क्या है कहते हैं किसी को किसी मकाम से हटाऊंगा नहीं
[56:23]फतवा नहीं दूंगा कजामत नहीं करूंगा वो चीज जो के कायम है
[56:32]उसको तब्दील नहीं करूंगा बताइए जो ये कम नहीं करेगा तो फिर
[56:40]बलिए क्या करेगा मतलब [संगीत] [संगीत] जो फिजिक्स में पूछो वह कहती
[57:18]है की हां वो इंफिनिटी में मिल जाते हैं इंफिनिटी पे मिलती
[57:30]हैं जी दिन तुम्हें इंफिनिटी मिलेगी उसे दिन ये लाइन मिली हुई
[57:33]मिलेगी ना तो मैं कभी इंफिनिटी मिलेगी ना कभी यह लाइन मिलेगी
[57:39]ये तो खाने का अंदाज है तो इमाम अली सलाम ने वाली
[57:43]अधी भी इस अंदाज से काबुल की हां मैं काबुल तुम जो
[57:44]का रहे हो इस शर्ट मां लेट हूं जब ये सराय सामने
[57:48]रखते हैं तो गली आई है तो नल हो जाति है इमामे
[57:51]लेह सलाम का जिहाद इस अंदाज से नजर आता है की इमाम
[57:56]अली सलाम ने अपने हक दिवाकर दिखा दिया की पहचान बल्कि आलम
[58:06]में इस्लाम नफाकत अल में तमाम के अंदर इमाम अली सलाम नफरत
[58:10]की हैसियत है रहकर पहचाना गए बल्कि इस्लाम के पास हर मसाले
[58:20]का हाल मौजूद है इसीलिए अगर कोई सवाल इधर-उधर से आता था
[58:26]और खलीफा भी जवाब नहीं दे का रहा तो मजबूर होकर इन्हीं
[58:28]को सामने करता था और यही जवाब देते थे आने वाला भी
[58:32]कहता था की अगर यही सारे जवाब दे रहा है तो तुम
[58:35]यहां बैठ कर क्या कर रहे हो यहां से इमाम अली सलाम
[58:39]ने किस चीज को साबित किया अगेन अपनी इलामी बरतरी को साबित
[58:42]किया बिल्कुल उसे तरीके से जब आदम को खलीफा बनाया था तो
[58:49]आदम का जो क्रेडिबिलिटी है जो उनके ताबिल्लीअत है किस तरीके से
[58:53]सामने आई वो भी उनकी सिपेट इल की जो सामने आई इस
[58:58]सिफत से वो खलीफा पहचान ना पहचान पाएगा बिल्कुल इस तरीके से
[59:00]इमाम अली सलाम भी इस अंदाज से जिहाद करते हुए नफाकत खुद
[59:06]पहचान पे गए बल्कि सिया भी बहसीयतें पाओ में एक मच्छी और
[59:11]कॉम के तोर पर सामने आए की जो की इस तरफ आमादा
[59:16]थे एक हुकूमत सखी कर सकते हैं इस अंदाज से इमाम अलह
[59:18]सलातो सलाम ने इन्हें पहचान वादिया आज के दूर में अगर इमाम
[59:25]के हाथ से हमें कुछ लेना है सबक तो वो यही लेना
[59:29]है की जी तरीके से अली बिन मजेदार इमामे राजा के लिए
[59:33]इस अंदाज से सफर थे बिल्कुल इस तरीके से आज मैं अपने
[59:37]इमामे समाज के लिए सपरा हो जाऊं और हर वो कम करूं
[59:42]की जिससे जहूर की ज़मीन सजी होती हो उसको अंजाम दो परवरदिगार
[59:48]ए आलम से तो वहां हैं की हमें इस अंदाज से जिहाद
[59:54]करने की ट्राफी इनायत फरमाए परवरदिगार ए आलम से दुआ है की
[59:57]इमामे जमाने सलाम का जो वोट फार्मा और हमें उनके आवंशार में
[60:03]से फरार दे रहा हूं अल्लाह एक मर्तबा सुरा हम पढ़ कर
[60:10]तमाम अपने बुजिप्ट गण को शामिल करते हुए तमाम शुदाई मिलनाते जफरिया
[60:13]को शामिल करते हुए और खास ओला रब्बानी से रहालत कर चुके
[60:20]और आज तो अबासरत का नाम कितनी बार लिया गया उनको और
[60:24]अली बिन माझे और खास खास अली नकली को शामिल करते हुए
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