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Shia Mazhab kay Imtiazat | H.I. Syed Yawar Abbas
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23/04/07
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محاضرات
Record date: 05 Mar 2023 AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/almehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:13]बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह [संगीत] [संगीत] इमाम के तमाम दुश्मनों की निज
[1:19]तो नबुद्धि के लिए रायबरे के सई के दवम के लिए मिलकर
[1:26]बवाजे बुलंद सलामत [संगीत] मेरे नौजवान जवान साथियों अगर बच्चे याद करेंगे
[1:56]तो उनके कम आएगा क्या खुसूसियत है सिया मजहब की और मौजूद
[2:45]हो रही एरीज है आप खुद महसूस कर सकते हैं जो यहां
[2:50]हाले फसल बैठे हैं की इसमें बहुत गुंजाइश है बहुत गुफ्तगू की
[2:55]लेकिन सारे समेत का दो-चार न्यूटन की तरफ खाली इशारा करना चाहता
[2:58]हूं आपकी खिदमत में और जहां तक बात पहुंचेगी दुरूद पढ़ने हैं
[3:04]मोहम्मद वाले मोहम्मद पर सबसे पहले जो इशारा करना चाहता हूं मुक्तशरण
[3:11]वही है की इस मौजो की अहमियत तो जरूर क्या है क्यों
[3:15]है की इस पर बात की जाए मकाते और मजहिर से कैसे
[3:21]मुमताज है खुद ये बहस करने का फलताफा गया है क्या जरूर
[3:26]पद गई है क्या आप इस बात को करें बहुत साड़ी इसके
[3:29]जवाब हो सकते हैं उसमें से एक बहुत बड़ा मसाला यह है
[3:35]की मशरे में जो फरमाइए लेकिन मकाम अमल में कोठाई करते हैं
[3:56]असलम अमल नहीं करते बहुत बड़ी तादाद है वह लोग जो अमल
[3:59]नहीं करते वह इस वक्त खत्म नहीं है दूसरे गुरु की जो
[4:04]मुश्किल है वह है बड़ा अमली गुफ्तगू है की इंसान माल ही
[4:12]नहीं करता अमल का कोई भी मरहला हो चाहे वो हो अल्लाह
[4:15]हो चाहे वो बोले बाद हो उससे बिल्कुल है मसाला में मिसल
[4:34]डन अपने लिए और अपने छोटे दोस्तों के लिए एक अरसा हो
[4:39]गया उसको खाना खुदा में आते जाते एक अरसा हो गया उसको
[4:43]खाना है ना आए खाना है कोई भी इसको नहीं मानेगा की
[4:59]इसमें अगर इंसान में तब्दीली नहीं ए रही बावजूद अमल अंजाम देने
[5:04]के अमल अंजाम दे रहा है जहां तक हो सकता है फिर
[5:12]क्या वजह है की उसके अंदर वो खातिर खम्मा आलू कुछ ना
[5:19]कुछ तो यकीनन नज़र होता है रुमाल का एक इंसान अगर बगैर
[5:22]इरादे के हाथ पर बंद के भी एक इंसान को अगर हाथ
[5:28]पर बंद के बगैर इरादे के जबरदस्ती अगर समंदर में पानी में
[5:33]दाल दिया जाए तो कम से कम नतीजा क्या होगा उसका बदन
[5:35]भीगी जाएगा कम ही होगा तो यह तो यकीनन होता होगा खुदा
[5:40]के घर में आने से और इमामबाड़ा में जान से की जी
[5:45]तरीके से आप समझ रहे हैं की पानी के एक बड़े हिस
[5:49]में इंसान को दाल दिया जाए तो वो भीगी जाता है तो
[5:53]जैसे समुद्र फर्ज है तो ये खान है खुदा में भी और
[5:59]इमामबाड़ा में भी ये नूर का समंदर है तो इसमें कम से
[6:00]कम ये होता है की इंसान को कुछ ना कुछ असर होता
[6:02]है उसकी गुफ्तगू नहीं है मतलू बस सर और हर एक की
[6:08]ख्वाहिश है की मुझे वो जो मटरू असर है वो नहीं चाहिए
[6:17]इबादत का मतलब असर क्या है खुदा की बारगाह में दो किम
[6:22]की तरह दो किम की बात गज और दो किम से इंसान
[6:26]लौटेगा दोनों को कुरान में बयान किया है जुम्मे की नमाज में
[6:32]आप सूरज जमा में पढ़ने हैं ना तुरंत दूध तेल है और
[6:37]शहादत है जो मिल में गए रखना है और शहादत का भी
[6:42]मिल लगता है उसकी तरफ पलटाए जाएंगे सोमवार हुकुम बीमा कुंतल ए
[6:48]जान के बाद क्या हो जाएगा जो तुम करते थे वो परवरदिगार
[6:53]तुम्हें उसकी खबर देगा ये जो टुना है ये भी बाज गए
[7:05]मिसल डन बच्चों के लिए भगत है और उसको कहते हैं इसको
[7:26]पकड़ के लेक आओ ये कैफियत है और वह पहुंच जाति है
[7:31]और इस गुलाम को जो चुडा के भाग है रस्सी आका की
[7:36]इसको पकड़ के लेक आई है ये पकड़ के लेक आना लौटना
[7:40]है दूसरी कैफियत क्या है जो कुरान ने बयान की है वो
[7:42]बयान क्या की मशरूम मारूफ आया है आयत है इमाम हुसैन सलातो
[7:46]सलाम इराइल और अब भी की राज दिया तन मार दिया एक
[7:55]दफा कहते हैं जो जाकर पकड़ के लेक आओ गुलाम को ये
[8:00]रस्सी जोड़ा के भाग रहा है एकदम परवरदिगार की सदा आई है
[8:04]लोट ए अपने रब की तरफ महसूस कर रहे हैं पलटना दोनों
[8:12]है रुजू करता है अलग कैफियत है खुदा करें मुझे अपने मौजूद
[8:23]की तरफ जाना है कौन से इंसान किस चीज की ख्वाहिश करेगा
[8:31]पड़ा जाए और लोट आया जाए या खुदा उसको तालाब करें रुजू
[8:38]एक आशिक अपनी माशूक अपने माशूक की बारगाह में लौटे कौन सा
[8:44]मतलब है जिसकी मिसल आत्म में मिसल सैयद शहर सलातो सलाम है
[8:51]पलट आपने रब की तरफ किस हाल में के परवरदिगार तुझे राजी
[8:59]तू परवरदिगार से राजी हो जाहिर इमाम हुसैन सलातो अस्सलाम [प्रशंसा] नहीं
[9:24]दे रहा नहीं ले का रहा जो नतीजा उसे समाज में रखा
[9:30]है अब क्या ख्याल है आपका अमल में कमजोरी है इंसान की
[9:34]तरफ से अमल में कमजोरी है उसमें ताकत नहीं है अब पता
[9:44]है इसकी ताकत कितनी है एक आंसू रिवायत कहती है जब यह
[9:54]आंसू रुखसार पर गुजरा है तो इसके लिए इस रुखसार पर गुजरते
[9:56]ही जन्नत में ना जान कितने बाघ डैमेज हो जाते हैं आपने
[10:10]मैंने जो खुदा की बारगाह में सर रखा सजदा किया इस सजदे
[10:14]की जो कुवैत है वो तो अपनी जगह महफूज है मुझे क्यों
[10:20]नहीं मिल रही है अगर मिल गई है तो आपको पता है
[10:30]फिर यह कान वह सुनते हैं जो खुदा चाहता है मैं पहले
[10:33]भी यहां बयान कर चुका हूं यहां देखते है तो खुदा दिखता
[10:40]है अभी तक देख पे हम अभी तक सुन पे हम लोग
[10:43]अमाल में कोई मुश्किल नहीं है उनकी जो पावर है वो तो
[10:47]महफूज है बच्चों के लिए मिसल डन आप अगर बाहर निकाल कर
[10:59]आंखें बैंड कर दें तो क्या सूरज नहीं है या आपने आंखें
[11:05]बैंड की हुई है बाहर सूरज चमक रहा है अगर आम आंख
[11:13]बैंड कर ले तो क्या सूरज नहीं है नहीं कहा मैंने आज
[11:15]बैंड कर लिए तो परवरदिगार ने जो कुछ सजदे में या इमाम
[11:19]हुसैन के आंसू में रखा हुआ है वो तो है ही अपनी
[11:23]जगह मुझे क्यों नहीं मिल रहा सवाल है की नहीं है इबादत
[11:28]अंजाम देने वालों के लिए सवाल है वो चीज क्यों इसके इसकी
[11:36]एक बुनियादी मुश्किल क्या है जो मैं इस वक्त मेरे मौजूद है
[11:39]उसकी बुनियादी मुश्किल ये है की अमल करते हैं लेकिन तमाम अमल
[11:45]नहीं करते कुछ चीजों पर अमल करते हैं कुछ चीजों से गफलत
[11:50]करते हैं क्या यह चलेगा इससे कामयाबी हासिल नहीं होगी एक और
[12:11]मिसल डन बच्चों के लिए बात को समझने के लिए दूध बड़े
[12:12]मोहम्मद वाले मोहम्मद पर खूब तुम्हारी याद र जाएगी ये मिसल एक
[12:23]गांव में कुछ लोग रहते थे और उसे गांव के रहने वालों
[12:24]ने कभी हाथी नहीं देखा था क्या नहीं देखा था आपने तो
[12:30]देखा है ना हाथी जिसने ना देखा हो हाथी कभी उसको हाथी
[12:33]समझना हो बड़ी शादी से मिसल है बच्चों के लिए बच्चों में
[12:39]नक्श हो जाएगी हाथी समझना है किसको जिसने कभी ना देखा हो
[12:45]पूरा गांव है जिसने हाथी नहीं देगा हाथी किस कहते हैं आकाश
[13:17]सारे गांव में ऐलान कर दिया की हाथी को पहचाना है तो
[13:22]इस स्वराज से पहचानो इससे हाथी को देखो हाथी उसके इस तरफ
[13:28]है इस तरफ इंसान ने उसे सुर्ख से हाथी को देखा पहले
[13:33]आदमी ने उसने देखा क्या की हाथी का कम उसे वक्त उसे
[13:35]सुर्ख के आगे था कम है समझ के हाथी किस कहते हैं
[13:42]हाथी एक पर्दे के मैन एक चीज है दूसरा आया उसने सुन
[13:45]अच्छी हाथी क्यों होती है साउंड उसे सुन देगी क्या क्या नहीं
[13:50]हाथी पर्दे की मैनें नहीं होता हाथी पाइप की मैनें कोई चीज
[13:54]होता है [प्रशंसा] लेकिन निकले समझदार आदमी था अकलमंद आदमी था उसने
[14:26]कहा ये हाथी सुर्ख से नहीं पहचाना जाएगा [प्रशंसा] की हाथी क्या
[14:40]है वहां से पूरा हाथी देखा जब पूरा हाथी देख कर पलटा
[14:49]तो जाकर उन तीनों को कहा तुम तीनों गलत के हाथी पर्दे
[14:54]की मैनें है क्योंकि उसका कान है की उसने सुन ऐसी है
[15:01]हाथी सुकून की भी मैन तो उसका पर ऐसा है क्या फर्क
[15:05]है उन तीनों में और उसमें वो हाथी के किसी खास रिश्ते
[15:12]को देख रहे थे और इस को समझ रहे थे बस आई
[15:16]यही है यह चौथ जो था इसने जाके पूरा हाथ ही देखा
[15:18]यही हमारे साथ बुनियादी मुश्किल है यही इस मिसल के बाद खूब
[15:27]समझ सकते हैं की हमारे साथ बुनियादी मुश्किल क्या है हमारी बुनियादी
[15:31]मुश्किल यही है की हम दिन के किसी एक हिस को सुर्ख
[15:36]से देखते हैं बस और समझते हैं किसी ने सिर्फ नमाज को
[15:43]देखा का नमाज के अलावा कुछ है ही नहीं दिन में इस
[15:46]एंगल से सिर्फ हमारे आजकल के मिसल के एतबार से या और
[16:05]एक बहुत बड़ी मुश्किल अगर आप कुली देखें तो कोई मौलाना कायनात
[16:07]का सजदा देखा है वक्त तो कहते हैं अली तो बस सजदा
[16:12]करने वाले आबिद गुर्जर रहे हैं एक आदमी भगत नहीं अली जो
[16:15]है ना वो सूरज ही बंता है बहुत साड़ी जो इसमें मुश्किलात
[16:18]है आपको पता है लेकिन आपको जो जेम ही देखा है वो
[16:25]कहता है अली अब भी है अली मुख्तार भी है की मुश्किल
[16:27]है ना वैसे के अंदर इसके दिन की बिल्कुल अपने जैसा समझना
[16:33]लगता है एक मजाल ला माशा अल्लाह माशा अल्लाह खुदा समझ में
[16:36]लगता है इनके साथ मुश्किल क्या हुई है की यह स्वराज से
[16:42]देखना चाहते हैं वो अमल करने के बावजूद भी नतीजा नहीं लेते
[16:53]हैं नतीजा लेने के लिए आपको पूरा दिन देखना पड़ेगा आपका क्या
[17:08]ख्याल है हम जो दिलदार हैं हमें दिन 24 घंटे में कोई
[17:14]एक ऐसा एरिया है जहां दिन से फुर्सत मिल जाए 24 घंटे
[17:18]में कोई एक ऐसा वक्त आप फर्ज कर सकते हैं की वह
[17:22]आप वहां आप दिनदार होने से फरार है आपको वहां दिन नहीं
[17:27]है 24 घंटे में आपकी जिंदगी में कोई एक लम्हा है फर्ज
[17:30]करें आप समझे की नहीं भाई रात को सोएंगे अपनी मर्जी से
[17:37]ऑफिस में अपनी मर्जी चलाएंगे हो सकता है ये अगर आप दिनदार
[17:42]है मैं दिनदार हूं दिन ने इंसान की पुरी जिंदगी पर आका
[17:49]किया हुआ है जिंदगी का कोई लम्हा कोई हिस्सा आसानी है जो
[17:52]दिल से बाहर हो क्योंकि कुछ दिनदार वह होते हैं तो वक्त
[17:54]ही दिनदार होते हैं मतलब बंदगी वो करता है जो हमेशा दिनदार
[18:03]होता है हर मुकाम पे दिनदार होता है इसकी मुश्किल क्या होती
[18:07]है की हमने हमसे मुराद है उनकी बुनियादी वजह क्या है यहां
[18:20]से कुरान को समझना है इस्लाम के नाम पे बने हैं इसी
[18:28]कुरान की बुनियाद पर बने लेकिन क्या कर्ज फेमी की वजह से
[18:32]कुरानी तो है जिसको उसने आलम की आवाज उसने उसको उठाया हुआ
[18:42]है कुरान का एक हिस्सा है और फिर क्या होता है निरसा
[18:48]का शिकार हो जाता है मदद मांगना अल्लाह के अलावा किसी से
[19:00]मदद मांगना और मददगार उसमें नहीं जाना लेकिन जो लोग कहते हैं
[19:08]की सिर्फ खुदा से मदद मैंगो उनकी दलील कहां से होती है
[19:13]हदीस होती है कुरान होता है तर्जुमा भी सही है इसी आयत
[19:44]को बुलंद करके क्या कहते हैं की मदद नहीं मांगी जा शक्ति
[19:46]जरूर से अल्लाह के अलावा किसी से कुरान का रहा है तो
[19:51]क्या वो सही का रहे हैं या अली मदद कदला नहीं करना
[19:59]की अली मदद किस तरह ठीक है लेकिन मुश्किल को देखना है
[20:04]की मुश्किल क्या हुई है उनके साथ जितना सिया के अलावा जो
[20:09]मुजाहिद हैं सबके पास एक है कायनात के खिलाफ जो इन्होंने कायम
[20:17]किया नारा किया था कुरान की आयत लो हम्मा इल्लल्लाह के अलावा
[20:21]कोई हकीम नहीं है क्या होता है कुरान की है तो मुश्किल
[20:36]ऑन में नहीं है जिसकी गुंजाइश की गुंजाइश नहीं है [प्रशंसा] आंधी
[21:00]आयत पर अभी मैं बच्चों से अगर कहूं तो मुंहाफ करने में
[21:07]कितनी डर लगती है कुरान ने कहा अल्लाह तक रबू सलाद कहे
[21:10]के लिए आए मस्जिद में कहे के लिए नमाज पढ़ने हराम हो
[21:17]जाएगा नमाज पढ़ना कुरान क्या का रहा है अल्लाह रबल सालत नमाज
[21:22]के करीब भी बताओ इतनी सी अगर बाद में पहुंच डन बच्चों
[21:24]को तो पड़ेगा कभी नमाज वो कुरान का रहा है लेकिन नतीजा
[21:32]क्या होगा नतीजा जब होगा जब आदि आयत पढ़ दी जाए जब
[21:35]बच्चों को ये बता दिया जाए ये हरेक को नहीं का रहा
[21:40]था करो गुस्सा लाल कुरान सुकरा तब नमाज के करीब मरना मत
[21:45]जो जब नसे की हालात में हो लेकिन आप क्या बना दे
[21:52]या एक आयत से आप एक मसाले को हाल करने की कोशिश
[21:56]करें [प्रशंसा] किसी भी मौजो के सिलसिले से पूरे कुरान में क्या
[22:14]हुकुम दिया है जहां आप यह बयान कर रहे हैं की या
[22:18]का ना आबू बाया का नष्ट नहीं जहां कुरान ने बयान किया
[22:23]है वहीं तो कुरान नहीं तो कहा है वक्त अतिकुल अहल वसीला
[22:26]जब यहां कुरान यह का रहा है की यहां का नाबूत भैया
[22:29]का नाश्ते अगर आप इस आयत से गैर ए खुदा की मदद
[22:33]का इनकार करते हैं तो वक्त वो इल हिल वसीला अल्लाह की
[22:39]बारगाह में वसीला तलाश करो उसका क्या करेंगे मतलब यह नहीं है
[22:41]मसाला ये है की जमी है ना कुरान नहीं है तशरियों का
[22:46]सबसे पहले इम्तियाज और मरकाजी इम्तियाज क्या है की तसाहियों में कुरान
[22:50]हो या हदीस हो यह देखो रसूल अल्लाह ने इस मौजो के
[22:57]सिलसिले से मासूमों ने इस मौजो के सिलसिले से क्या-क्या कहा है
[23:03]आजकल जो फसाद हमारे जादू हुआ है एक हदीस ली अब बस
[23:09]यही है जी आप से आपने अपने मतलब मिसल डन मैं आपको
[23:25]दिखने वाले ने लिखत के तमाम बुजुर्गों के सबके फतवा नकल के
[23:35]सब फॉर्मेट हैं खून साथ चीजों पर है [प्रशंसा] लाना चाहता है
[23:47]इसलिए नीचे इमाम की एक हदीस दे दी और एड्रेस भी दे
[23:51]दिया एड्रेस भी सही है अगर आप उसे एड्रेस पर जाएंगे तो
[23:57]आपको पता चल जाएगा की एड्रेस चाहिए इमाम फॉर्मेट हैं पांच चीजों
[24:03]पर खून अब आप बताइए किसकी मानेंगे हम लेकिन अगर आप समझदार
[24:10]होंगे तो आप उसे एड्रेस पर जाकर इस में हमने सर्च किया
[24:13]इसको इस बैग में जिसने जिसने एक हदीस उदय है के मामले
[24:19]पांच चीजों पर खूब शरमाया है इस में कई हदीस ऐसी है
[24:23]जी हां जिसमें इमाम खुद का रहे हैं हो सबसे कुरान का
[24:48]सिलसिला ये हदीस का सिलसिला एक हदीस आपको मिल गई उसका भी
[24:53]पता नहीं है आपको या मुझे पता नहीं है की इस हदीस
[24:58]में एक हदीस तक और इमाम ने कहा है इस तक पहुंचने
[25:00]में कितनी बड़ी शहर है मैं आपसे कहूं की इमाम ने कहा
[25:07]है तो आप मेरी वजह से शादी काबुल करता है किसी के
[25:12]खाने से अभी इसी मसाले को मैं इसमें उलझन नहीं चाहता खुद
[25:15]को इसी मसाले को इमाम साथ चीजों पे भी का रहे हैं
[25:20]इमाम पांच चीजों में भी का रहे हैं कैसे हाल करेंगे इसे
[25:23]हाल कर लेंगे आप और मैं फिर उसके लिए बाकायदा पूरा एक
[25:30]मर्तबा है पूरा एक मास सिलसिला है जिसमें हाल होता है मसाला
[25:37]बहुत गुफ्तगू इसमें आपको महसूस कर रहे हैं बहुत गुफ्तगू की जा
[25:44]शक्ति है रात में से खुशबू या ताजुब इस तरीके का नहीं
[26:04]है गुफ्तगू करता है तो इसलिए करता है की पुरी इंसानियत की
[26:10]हिदायत करनी है अब बताइए किसी और के पास इमाम बारगाह जैसी
[26:16]नेमत मौजूद है जहां इतनी मुसा दो की हर एक को आने
[26:21]की इजाजत हो अगर आपका बुजुर्ग यहां जिनका तजरबा हो बाज माझा
[26:29]आदत ने आपको नहीं अहले सुन्नत को अगर उनका मकसद करता हो
[26:31]तो उनको नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है कल भी जमीयत एक
[26:40]चीज और आपकी सहमत हूं [संगीत] अगर फेयर इस बार भी आप
[26:55]देखें [प्रशंसा] विलायत से बड़ा तो कोई इम्तियाज है ही नहीं लेकिन
[27:19]विलायतें जेम वैसे ही अल्लाह सुभान अल्लाह वैसे ही रसूल को मानते
[27:26]हैं और वैसे ही रसूल के बाद अली को वाली मानते हैं
[27:31]कहां है ये विलायत का सिलसिला और इमामत का सिलसिला उससे हम
[27:35]जो हमारा और आपका आज के जमाने का मसाला है वो क्या
[27:41]है तशरियों के साथ में से जमीयत है दूसरा हम तारीन मसाला
[27:47]क्या है मुकाबला वी मुबारकजा मुकाबला किसके खिलाफ मुकाबला बादल के खिलाफ
[28:00]ना मुसलमान के खिलाफ ना मुसलमान के किसी फर्क के खिलाफ [प्रशंसा]
[28:29]आज के जमाने में भी अगर मुबारक यही तमाम अहम के जमाने
[28:35]में रहा है अगर आपने 250 साला इंसान नहीं पड़ी तो पढ़े
[28:38]जा के देखें उसमें किस तरह से कितना तकित की गई है
[28:42]उसमें मुकाबले मुबारक देगी की जो इमा आले मुसलातो अस्सलाम ने जब
[28:47]हम कहते हैं ना इमा का मुखालिफ आपके और हमारे साथ त्रासदी
[28:52]यही है की हमारे जहां में मुसलमान आता है मुसलमान नहीं है
[28:57]ना इस्लाम है हो सकता है मगर मुखालिफ होता है वो ज़िद
[29:05]ए इस्लाम होता है आपके सामने मौजूद है बत्तरीन मज़ालिम के बावजूद
[29:16]भी आए मां ने अपना हुसैन सलूक छोड़ ता है और कहता
[29:24]है की आपने मुझे नहीं पहचाना मौलाना कायनात ने कातिल की रसिया
[29:32]खुला दी क्यों मुबारक हो मुकाबला अल में मुखालिफ ए इस्लाम के
[29:49]खिलाफ है जो आज भी समझना की जरूर है जितना इस वक्त
[29:55]निजामी विलायक की तरफ से जितना ईश्वर निजाम में विलायत की तरफ
[30:02]से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ताहिद है किसी और किसी और
[30:06]के खिलाफ है सबसे ज्यादा किसके खिलाफ तायडे सबसे ज्यादा किस फॉक्स
[30:11]करते हैं जो अल में बातें है जो हमेशा से अपने आप
[30:20]को छुपाने की कोशिश कर रहा है की आज के जमाने में
[30:27]हर एक की जिम्मेदारी है हर एक की जिम्मेदारी के आलम को
[30:34]बुलंद करें सबसे ज्यादा आके जो मुनजरे हुए हैं बुनियादी मुनजारे आया
[31:00]विलायत पे हुए हैं या तौहीद पे हुए हैं जिगर किताबें पढ़ें
[31:08]उसमें तादाद देखें मुनाजों की सबसे ज्यादा मुनाजरा सबसे ज्यादा हिट जिसको
[31:13]किया गया है वो क्या है तौहीद सबसे ज्यादा तौहीद अल्लाह इल
[31:23]में इमामत हो सबसे ज्यादा कहां इस्तेमाल हुई है सबसे ज्यादा इल
[31:27]इमाम किस चीज के दिमाग के लिए इस्तेमाल हुआ है तौहीद सबसे
[31:33]ज्यादा इमामत सैफी अलिबाबा कहां इस्तेमाल हुआ है सबसे ज्यादा तौहीद के
[31:41]इबादत के लिए तो ये जो कायम है किसी भी करीम का
[31:46]चाहे वो जुबानी कायम हो चाहे वो वीजा हो चाहे वो बिल
[31:50]कलाम हो चाहे वो बिल आलम हो किसके खिलाफ हुआ है आज
[31:55]इसको बहुत ज्यादा बारीकी से समझना की जरूर है खुदा का रास्ता
[32:02]क्या हमारे तौहीद के खिलाफ जो है बात हो रही है और
[32:08]हमें समझ में नहीं जो खिलाफ मुकाबला इमाम हुसैन का कायम किस
[32:11]चीज के लिए हजल कायम इमामे हुसैन का तौहीद के परचम को
[32:22]बुलंद करना है और इस में साड़ी चीज खुद बी खुद पोशीदा
[32:28]है इसी तरीके से खुद मुबारक करना चाहिए पहले भी मैं यह
[32:46]जुमला यहां का चुका हूं आज दुनिया में कोई भी मुल्क अगर
[32:50]मुस्तफा होता है सही होता है मशरूम पूरा मुल्क मुसलमान भी ना
[32:54]हो अगर बादल के जुल्म की वजह से बसपा होता है उसकी
[33:00]निगाहें के इस मुल्क की तरफ होती है की हमारी मदद करेगा
[33:08]कौन सा मुल्क है जो हमारी मदद करेगा आपके हमारे सामने आपके
[33:34]हमारे सामने बिल्कुल आज के बिल्कुल बिल्कुल सामने की चीज बिल्कुल इसको
[33:38]महसूस करने की जरूर है इसको रिसर्च करने की जरूर है इस
[33:42]पे दिक्कत की जरूर है हमारे आपके हाथ में आखरी शायद जिंदगी
[33:51]की आखरी हो हो सकता है तो हम से पहले आखिरी हो
[33:54]इमाम सलातो सलाम के लिए ये 15 ये खुद नहीं मैं शाबान
[33:59]खुसूसियत से इसको तवज्जो दीजिए मैं और आप वो कुछ हासिल करने
[34:04]की कोशिश कीजिए जो इसमें मौजूद है कल भी एक जगह गुजारिश
[34:11]की आप तारती देखिए जनाबे जैनब सलामुल्लाह अलह शाबान शुरू हुआ है
[34:16]विलादतों का सिलसिला है आप क्या समझते हैं अचानक है तमाम है
[34:25]की तवज्जो करो [प्रशंसा] लेकिन यह सर आप और हमें चाहिए की
[34:48]हम आज के जमाने में इन चीजों पे खुसी तवज्जो दें मैंने
[34:51]बात को तमाम किया अपने ऊपर तवज्जो डन मैं ताकि मैं अपनी
[34:57]बड़ामली को मतलुक अमल तक ले जा सुकून जो अमल कर रहा
[35:03]हूं और उसमें तमाम जमाने को तवज्जो करूं नमाजी तो बहुत अच्छा
[35:08]हूं शहर अच्छा नहीं हूं नमाजी तो बहुत अच्छा हूं आदमी तो
[35:15]बहुत अच्छा हूं अच्छा भाई नहीं हूं नमाज ही तो बहुत अच्छा
[35:19]हूं आदमी तो बहुत अच्छा हूं बाकी मैं दोनों में खाली हूं
[35:21]पड़ोस में क्या गुर्जर रही है मुझे पता भी नहीं है यह
[35:26]क्या है यह वही है आधा अमल अंजाम दे रहा हूं आधा
[35:30]दिन पर मतलब कर रहा हूं बाकी है की मुझे फिक्र भी
[35:33]नहीं है और मुझे पता भी नहीं है
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