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[Majlis] Fatima Mohafiz-e-Wilayat | H.I Ali Afzal Rizvi
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في
محاضرات
Record date: 24 Nov 2024 - فاطمہ محافظ ولایت AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]ला हौला ला कुवता इल्ला बिल्लाह अली अजम अज बिल्ला मिन शैतान
[0:24]रम बिस्मिल्ला रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन ब ला अजमा मालि अ
[0:31]सलातो सलाम अला अशरफ अंबिया वल मुरसलीन तम नबीन रहमत आलमीन सदना
[0:38]व मौलाना अबुल कासिम मोहम्मद रीनल मासूमीन मजलू मन ला समाला फातिमा
[0:52]जहरा सती निसा आलमीन रूही अरवाल आलमीन आले राब मकदम हल फिदा
[1:01]अम्मा बाद काल सदना फातिमा सवात सलाम उल्ला अलहा अनास लम अनी
[1:11]फातिमा अबी मोहम्मद दरूद पढ़े मिलके मोहम्मद ले मोहम्मद इस व हम
[1:21]फतिम यानी शहादत हजरत जहरा मर्जिया सलात सलामुला अहा से मुत सिल
[1:29]है और दूसरी रिवायत के करीब करीब है दो तबार से शहादत
[1:34]जनाब जहरा मर्जिया सलामुला अलहा मनाई जाती है 75 दिन की रिवायत
[1:37]और 55 दिन की रिवायत जो एक ही रिवायत से खराज किए
[1:44]गए हैं दो अया लेकिन इसके अलावा एक और भी गैर मारूफ
[1:47]रिवायत मौजूद है इसमें 40 दिन की रिवायत मौजूद है बहराल जो
[1:53]भी तारीख हो जनाब जरा मर्जिया सलामुला अहा की शहादत की उसका
[1:57]एहतराम ना सिर्फ जरूरी है बल्कि जनाब जहरा सला के अदा जनाब
[2:02]जहरा सलाम उल्ला अलहा की सीरत जनाब जहरा सलाम उल्ला अलहा के
[2:07]उस आफाक पैगाम को समझना जरूरी है जो बीवी सलाम उल्ला अलहा
[2:10]ने अपनी मुख्तसर हयात में दिया क्योंकि जाहिर आपकी हयाते तैयबा जिंदगी
[2:17]के चंद सालों पर मुहीत है शी रिवायत की बुनियाद पर आपकी
[2:25]विलादत बसत के बाद पांचवे साल में हुई है यानी बसत की
[2:28]पांचवे साल में हुई है सुनी हजरात जनाब जहरा सलामुला अहा की
[2:32]विलादत को बेसस से कबल पा साल तसव्वुर करते हैं यानी जो
[2:40]डिफरेंस आया है पा साल बसत से पहले या पा साल बसत
[2:45]के बाद इसमें पूरे 10 साल का फर्क आ रहा है उनके
[2:47]नजदीक जनाब जहरा की हयाते तैयबा 28 साल है हमारे नजदीक जनाब
[2:54]जहरा सलामुला अहा की हयाते तैयबा 18 साल है बसत के बाद
[3:00]जनाबे जहरा सलामुला की विलादत हुई यानी जब आप सल्लल्लाहु अ वसल्लम
[3:06]मेराज पर तशरीफ ले गए मिलकर सवात पढ़े मोहम्मद ले मोहम्मद पर
[3:14]तो पूरा वाकया जो आपने सुन रखा है कि आपको सेब की
[3:18]सूरत में एक हदियाना और फि नूर सैयदा सलामुला रसूल खुदा सल्ला
[3:25]वसल्लम से मुंत किल हुआ शिकम मुतहर जनाब खदीजा सलामुला अलहा में
[3:29]और उसके लिए रसूला वसल्लम 40 दिन तक इबादत में मसरूफ र
[3:36]व पूरी तफसी त जो बाबे फजल आप सुनते हैं लेकिन क्योंकि
[3:38]हमारा मौजू फातिमा सलाम उल्ला अलहा मुहाफिज विलायत है इसलिए मैं इन
[3:47]तमाम तर फजल कमाला से सरफे नजर करते हुए आपके सामने चंद
[3:50]एक नुका बयान करना चाह रहा हूं मगर यह जुमला बयान करना
[3:57]जरूरी कि जनाब जहरा की हयाते तैयबा जाहिर 18 साल है यह
[4:01]18 साल की हयाते तैयबा की बरकत क्या है कि जब इमाम
[4:04]सादिक अ सलाम से किसी ने पूछा ना रसूलल्लाह यह जो लैलतुल
[4:10]कद्र और सूर कद्र में बार-बार एक लैल का जिक्र है इसके
[4:17]जाहिरी माना तो समझ में आ रहे हैं कि इससे मुराद माहे
[4:18]रमजान की वह रात है जिसको लैलतुल कदर कहा गया इसके मानवी
[4:24]माना क्या है आपने रिवायत सुन रख कुरान के 70 बावान है
[4:27]इसका बानी माना क्या है इमाम अली सलातो सलाम के चेहरे पर
[4:33]तबसुम आया कललो हिया जना फातिमा इस लल से मुराद मेरी दादी
[4:37]फातिमा जहरा सलाम उला यानी इमाम अली सलातो सलाम यह कहना चाह
[4:41]रहे कुरान में परवरदिगार ने कहा वदरा कमा ललल कद तुम्हें क्या
[4:46]मालूम है ललल कदर क्या है इमाम अली सलातो सलाम गोया यह
[4:52]फरमा रहेरा म फातिमा दुनिया को क्या मालूम है फातिमा क्या है
[4:55]आप और मैं जाहिरी तौर पर उनके 18 साला हयात को देख
[5:00]रहे हैं लेकिन एक हदीस कुदसी के जरिए मैं और आप समझ
[5:05]सकेंगे कि मामला कितना अहम है जनाब जरा मर्जिया सलामुला अलहा और
[5:09]उनकी विलायत का ओहदा जाहिरी तबार से आपके पास ना नबूवत का
[5:15]है ना इमामत का है लेकिन रुतबा इतना बड़ा है कि आपका
[5:18]एहतराम नबूवत भी करती हुई दिखाई दे रही है आपका एहतराम इमामत
[5:22]भी करती हुई दिखाई दे रही है सलात पढ़े मिलके मोहम्मद वा
[5:27]आले मोहम्मद सला मुहम्मद अच्छा इस हदीस कुदसी को बहुत ज्यादा बयान
[5:34]किया जाता है मगर इसमें बहुत कलम फसाई की गई है आप
[5:38]अगर जाकर नेट पर भी सर्च करेंगे तो आपको अंदाजा होगा कि
[5:44]इस हदीस कुदसी के हवाले से कितनी गुफ्तगू बाज लोगों ने किए
[5:48]खुसूस जो लोग विलायत अहले बैत अथर अलम सलाम के कायल नहीं
[5:53]है उनके कलम इस पर किस तरह से चले आपने रसूलल्लाह का
[5:58]एक लकब सुना होगा साहिबे लौला यह साहिब लौला आपको क्यों कहा
[6:04]जाता है क्योंकि हदीस कुदसी में हदीस कुदसी यानी अल्लाह का कलाम
[6:07]है कुरान में नहीं है मगर कलाम अल्लाह का है लला कालमा
[6:14]खल अफलाक आप ना होते तो मैं अफलाक को खक ना करता
[6:19]इसलिए आपको कहा जाता है साहिब लला लेकिन आ हदीस कुदसी फकत
[6:25]यही नहीं है आगे बढ़ी है आगे जाकर कहा का अली ना
[6:33]होते तो मैं आपको खलक ना करता फिर यहीं पर बात आक
[6:39]नहीं रुकी लला फातिमा लमा खलमा अगर फातिमा ना होती तो मैं
[6:42]आप दोनों को खलक ना करता अच्छा जब एक आम इंसान एक
[6:49]सादा जहन एक मारफ अले बैत सलाम से ना आशना फर्द जब
[6:52]इसको सुनता और पढ़ता है तो कहता है जनाब यहां तो फातिमा
[6:55]जहरा का मकाम रसूलल्लाह से बढ़ाया जा रहा है यहां नज बिल्ला
[6:59]अमीर मोम का मकाम रसूलल्लाह से बढ़ाया जा रहा य मकाम नहीं
[7:01]बढ़ाया जा रहा य जिम्मेदारियां बताई जा रही है अा क्या तुम
[7:08]यह गुमान करते हो तुम्हें अल्लाह ने ऐसे ही खलक कर दिया
[7:14]बगैर हिकमत के उस हकीम का हर काम हिकमत से लबरेज है
[7:16]अब रसूल अल्लाह को भेजने की कोई हिकमत थी या नहीं थी
[7:20]तो जरूर आप कहेंगे बिल्कुल रसूलल्लाह को भेजने की हिकमत थी वो
[7:26]क्या हिकमत थी उनकी रिसालत को पहुंचाना उनकी जिम्मेदारियों को को लोगों
[7:31]तक रूह शनास करना लोगों को उनकी सीरत से उस पैगाम को
[7:37]कि जो आसमानी था उसको इनके जरिए जमीनी करना और जमीन में
[7:42]नश्र करना यह रसूलल्लाह की जिम्मेदारी थी हदीस कुदसी क्या कह रही
[7:47]है लला कलमा खल अफलाक अदबी तबार से कलाम तबार से इस
[7:54]पर शिया उलमा ने भी बहुत खूबसूरत बहस की है बाज लोगों
[8:01]ने इसके बाज अदबी त को ढाल बनाकर इस हदीस कुदसी को
[8:03]रद करना चाहा शिया उलमा नेफा किया बाज ने कला तबार से
[8:10]जनाब कैसे मुमकिन है कि रसूल अल्लाह जिनकी वजह से सब कुछ
[8:15]खलक किया गया है उनके लिए कहा जाएगा यह ना होते तो
[8:18]आपको खलक ना करता और अगर वह ना होती तो आप दोनों
[8:20]को खलक ना करता यहां पर कल तबार से भी जवाब दिया
[8:23]जवाब क्या है अल्लाह हकीम है उसने रसूलल्लाह सल्ला अ वसल्लम को
[8:30]एक हिकमत के तहत भेजा उस हिकमत का तकाजा यह था कि
[8:33]रसूलल्लाह सला अ वसल्लम का दन लोगों तक पहुंचे यह दन ना
[8:40]पहुंच पाता अगर रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अ वसल्लम मिलक सवात पढ़े [संगीत]
[8:52]मोहम्मद इस आय मजीदा को और इसके अमल को मुझ तक और
[8:59]आप तक ना पहुंचाते ब रि सालता आ ब मूर मारूफ अगर
[9:02]आपने यह ना किया तो आपने बला रिसालत ना किया यहां पर
[9:09]बात फजीलत की नहीं होर य बात जिम्मेदारी की यानी विलायत अगर
[9:18]ना होती तो रसूल के आने का मकसद फौत हो जाता और
[9:22]फिर कला फातिमा अगर फातिमा ना होती तो विलायत भी ना बच
[9:28]पाती इस खातिर कहा गया कि अगर फातिमा ना होती तो आप
[9:32]दोनों को र्क ना करता यानी मकसद फौत हो जाता तो यहां
[9:36]अजमत को नहीं बयान किया जा रहा है यहां जिम्मेदारियों को बयान
[9:41]किया जा रहा है जनाबे जहरा मर्जिया वो हस्ती कि जो बाद
[9:45]रिसालत माब सल्लल्लाहु अ वसल्लम अमीरुल मोमिनीन अल सलातो सलाम की तात
[9:54]में सरगम नजर आ रही है और ऐसी इता की है जनाब
[9:54]जहरा सलामुल्लाह अलहा ने कि उलमा ने इनको हलका वस्ल करार दिया
[10:00]है रिसाल से इमामत का एक जंजीर को तसव्वुर करें उसके एक
[10:07]हिस्से को रिसालत तसर करें उसके दूसरे हिस्से को इमामत तसर करें
[10:13]इन दो हिस्सों को जोड़ने वाली जात हजरत फातिमा जहरा सलात सलामुला
[10:17]अलहा की है मिलके सलात पढ़ द मोहम्मद वा आले मोहम्मद पर
[10:22]सहद आगा यह दर्स है यहां अहले बैत अर अ सलाम के
[10:28]मारफ बयान किए जा रहे हैं मैं बगैर किसी मुबा के बगैर
[10:33]किसी खिताबत के आपके सामने चंद एक नुका बयान करना चाह रहा
[10:38]हूं क्योंकि अमूमन मजलिस में हम जब तकरीर कर रहे होते हैं
[10:46]तो खती बाना अंदाज होता है लेकिन कुछ एकेडमिक गुफ्तगू हो जाए
[10:53]कुछ प्रिंसिपल्स को बयान कर दिया जाए कुछ अहदा जनाब जहरा को
[10:56]बयान कर दिया जाए बहुत ही सादा अल्फाज के साथ फतिम यह
[11:01]जो अभी हम अया में आजा की तरह से इसको मना रहे
[11:05]हैं अजादारी हो रही है आप लोग मजाल में जा रहे हैं
[11:10]इसके हवाले से चंद एक चीजों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है
[11:14]बहुत जरूरी है मैं अक्सर यह कहा करता हूं कि फतिम की
[11:18]ताकत वह है कि दीन के लिए दीन को टॉमिक पार बनाने
[11:26]वाली जात हजरत फातिमा जहरा की है जिस तर आइटम के अंदर
[11:31]यह ताकत है ना कि उससे आप शहर के शहर रोशन करें
[11:34]उसमें यह सलाहियत भी मौजूद है कि शहर के शहर उससे ताराज
[11:41]हो जाए अगर आपने सही तरीके से फातम को जनाबे जहरा के
[11:47]पैगाम को जनाबे जहरा की सीरत को जनाबे जहरा के आदाब को
[11:54]पहुंचा दिया तो यह शहर रोशन करने के मतरा दफ है और
[11:57]अगर जरा सा अकल के पर जज्बात गालिब आए और अपने मिजाज
[12:04]के मुताबिक जनाब जहरा सलाम उल्ला अलहा की इस अजीम शहादत को
[12:07]पहुंचाना चाहा अमीरुल मोमिनीन अल सलातो सलाम की सीरत को छोड़कर अगर
[12:15]जनाब जहरा सलामुला अलहा की सीरत को पहुंचाना चाहि यानी क्या अग
[12:18]मुझसे और आपसे और पूरी कायनात से ज्यादा दर्द व दुख व
[12:24]सदमा जनाबे अमीर के दिल को था लेकिन आप देखिए जनाब अमीर
[12:32]सलाम उल्ला अले ने सलाम उल्ला अले ने किस तरीके से जनाब
[12:36]जरा सलामुला अल के अफ का पास रखा है 25 साल मौला
[12:40]अली अ सला सलाम ने ऐसे गुजारे हल आंख में काटा था
[12:47]हलक में हड्डी थी 25 साल ऐसे गुजारे मैं और आप जनाब
[12:53]जारा सलाम के जिक्र को वैसे पहुंचाए जैसे पहुंचाने का हक है
[12:56]सही बात पहुंचा दे हकीकत पहुंचा दे लेकिन अंदाज वह हो कि
[13:02]जो जिसमें तंज ना लगे जिसमें तान ना लगे जो हका पर
[13:09]मबन हो यानी आज पूरी दुनिया अरमन की तरफ निगाह उठा रही
[13:14]है आज पूरी दुनिया सद शदा सलातो सलाम को पहचानने की कोशिश
[13:20]कर रही है तो जब यह दुनिया अरबन की तरफ निगाह करती
[13:23]है तो मेरा और आपका नाम सामने आता है कि इस्लाम का
[13:28]एक मकतब है जिसको शिया के नाम से मसू किया गया शिया
[13:33]कौन है जो बाद रिसालत सलाहु अ वसल्लम हजरत अमीरुल मोमिनीन अली
[13:37]अबी तालिब अ सलातो सलाम की विलायत इमामत के कायल है दुनिया
[13:42]इस बात को जान रही कि बाबा हम रसूल अल्लाह के बाद
[13:46]अमीरुल मोमिनीन अली सलातो सलाम की विलायत के कायल है अमीर मोमिनीन
[13:49]अल सलातो सलाम को वली उल्लाह मानते हैं हमारे मजहब की बुनियाद
[13:53]यह है कि हम रिसालत के बाद इमामत के काइल है और
[13:58]खिलाफत भी हम इमामत में ही हसर करते हैं मिल के सलात
[14:00]पढ़े मोहम्मद वा आल मोहम्मद अब इसको बयान कैसे किया जाए क्योंकि
[14:09]आपके सामने जाहिरी बात है आपके बदरा तसन है एक वो फरक
[14:14]है मौजूद कि जो मेरे और आपके नजरी से हम अहंग नहीं
[14:16]है उनका इदा कुछ और है उनका दावा कुछ और है अब
[14:20]मुझे और आपको अगर अपने दावे को सही साबित करना है तो
[14:25]उस पर दलील लानी होगी और दलील कभी भी जज्बात के साथ
[14:30]नहीं आती है दलील हमेशा बुरहान व मतिक के साथ सामने आती
[14:40]है और उसका लब लहजा अलग होता है अब आप देखिए जनाब
[14:43]जरा सलाम ने क्या काम किया जनाब जरा सलामुला अलहा ने किस
[14:48]तरह से इस विलायत का दिफाई के पास कुरानी व रिवाई जखीरा
[15:00]मौजूद है कि जिसमें हम रसूल अल्लाह के बाद अमीरुल मोमिनीन अल
[15:04]सलाम को रसूल अल्लाह का जानशीन तसर करते हैं अच्छा इसको बयान
[15:09]करने में किसी किस्म का कोई आरब भी नहीं है दुनिया को
[15:13]मालूम बयान हो लेकिन बयान ऐसे हो कि जिसमें दूसरों की तौहीन
[15:19]ना हो दूसरों के जज्बात बंगता ना हो मैं अक्सर यह कहा
[15:25]करता हूं कि तबरा लोगों को जलाने के लिए नहीं जलने से
[15:30]बचाने के लिए है क्या मकसद है जलने से बचाने के लिए
[15:35]जलने से बचाने के लिए इसका मकसद यह कि आप दूसरों तक
[15:37]हक को पहुंचा दे ताकि आतिशे जहन्नुम से बच सके रसूल अल्लाह
[15:44]सल्लल्लाहु अ वसल्लम को तबीब दवार कहा गया यानी अपनी तिब को
[15:50]लेकर लोगों के दरदर पर जाकर रसूलल्लाह सल्ला अ वसल्लम ने हिदायत
[15:53]देना चाहिए जनाब जहरा सलामुला अलहा भी विलायत के लिए ऐसे ही
[16:00]तबीब दवार मदीना के घर घर पर जनाबे जारा विलायत का पैगाम
[16:03]लेकर गई है घर घर पर जनाबे जारा विलायत का पैगाम लेकर
[16:06]गई लेकिन आ आप मुझे बताइए कि जनाब जरा का साथ देने
[16:11]के लिए कितने अफराद आए कितने अफराद आए जनाब जरा का साथ
[16:14]देने के लिए इस हक और हकीकत को अगर मैंने किसी भी
[16:20]मुसलमान के दिल तक मुंत किल कर दिया तहकीक अपनी किताबों से
[16:29]करो जाकर अपनी किताब पढ़ो जरूरी नहीं है हर एक श का
[16:31]जुजिया के ऊपर कायल हो जाना बात कुल्लिया पर होनी चाहिए मसल
[16:39]अगर मेरे मददे मुकाबिल कोई ऐसा फर्द है जो विलायत मासूमीन का
[16:44]कायल नहीं है और मैं जनाब जहरा सलाम के जरिए उसको विलायत
[16:46]समझाना चाह रहा हूं तो मैं इस बात पर नहीं आऊंगा कि
[16:52]तुम भी अजान में अर मोम लीला कहो पहले तो मैं इस
[16:56]मरहले पर रहूंगा कि बाबा अभी अली को वली उल्लाह मानो और
[16:59]वली उल्लाह जब बनवाऊंगा तो सिर्फ बात विलायत नहीं जो सब मानते
[17:05]हैं जाहिरी विलायत को भी मानो यह जनाब जहरा ने समझाया है
[17:11]यह जनाब जहरा ने किया है तो हम जब कुल्ली बात करेंगे
[17:13]तो कम से कम यह बात तो करेंगे ना कि जनाब जहरा
[17:16]सलाम उल्ला अहा आप अपनी किताबों को भी अगर जाकर लोग पढ़े
[17:20]तो उसके अंदर इतना तो मौजूद है ना कि लोग दरवाजे पर
[17:22]आए लोगों ने आकर तहद की जनाबे जहरा दरबार में गई जनाबे
[17:30]जहरा ने अपनी विरासत का मुतालबा किया जनाबे जहरा सलामुला अलहा को
[17:34]विरासत नहीं दी गई जनाबे जहरा ने कुरान से इत दलाल किया
[17:40]उस कुरान के इस्लाम मुकाबिल एक हदीस को लाया गया यह तो
[17:47]कुल्ली बातें है ना इसमें तो किसी किस्म का कोई जज्बात नहीं
[17:50]है इसमें किसी किस्म की कोई खिताबत नहीं है इसमें तो कुल्ली
[17:56]तौर पर मैं और आप ये समझ कि ये सब हुआ यह
[17:59]सब मानते य हुआ फर्क यह है कि बाज लोग इसका थोड़ा
[18:07]सा शीरी और मीठा नरेट पेश करना चाहते हैं कि वह बात
[18:12]जनाब जहरा के जहन से बाज लोगों से मुराद आप समझ जो
[18:17]दायरे तयो से बाहर है जनाब जारा के जहन से हजरत फातिमा
[18:19]के जहन से वह बात निकल गई थी दुरुस्त है हम उनको
[18:22]खता पर नहीं मानते दुरुस्त है कि वह नज बिल्ला ताफ नहीं
[18:26]थी लेकिन उनके जहन से यह बात निकल गई थी जब सुना
[18:29]तो उसके बाद नाराज होकर पलट गई आपने बहुत सारे बयानात बाज
[18:33]इंटेलेक्चुअल्स के और बाज उलमा के सुने होंगे जो मकतब विलायत से
[18:40]ताल्लुक नहीं रखते हम क्या कहते हैं नहीं जनाब जनाबे जहरा सलाम
[18:42]उल्ला अलहा मासूमा थी जनाबे जहरा सलाम उल्ला लेहा के लिए सोचना
[18:48]भी हमारे नजदीक मुनासिब नहीं है कि हम यह कहे कि वह
[18:54]भूल गई थी जनाबे जहरा अपनी जिम्मेदारी को अदा करर थी जनाबे
[18:56]जहरा ने अपनी जिम्मेदारी को अदा किया है किस अंदाज से बाद
[19:03]रिसालत सल्ला वसल्लम जनाब जरा मदीना में आकर कह रनास फातिमा वाबी
[19:08]मोहम्मद जो सरनाम कलाम में मैंने बीबी के इन कलमा को आपके
[19:13]सामने बयान किया अग यह बात अगर जनाब जरा ने मक्का में
[19:15]कही होती तो शायद इसका कुछ और मतलब लेते हम मक्का में
[19:23]जनाब जरा ने य नहीं कहा अच्छा हिजरत के वक्त अगर जनाब
[19:28]जरा ने कही हो बात कि जब रसूलल्लाह सला वसल्लम मस्जिद कुवा
[19:35]पर रसूलल्लाह सला वसल्लम ने मस्जिद की बुनियाद रखी वहां पर अमीर
[19:41]मोमिनीन अ सलाम और जनाब जहरा आकर और जनाबे फातिमा बि असद
[19:43]आकर दीगर फतिम जनाब रसूल खुदा से उस वक्त मदीना की खवातीन
[19:48]को बता रही होती जनाब जहरा केलनी फातिमा वाबी मोहम्मद तो बात
[19:55]अलग होती बेटा जरा यहां पर डिस्टरबेंस कम कीजिए प्लीज तो बात
[20:03]अलग होती लेकिन जनाबे जहरा यह बात मदीना में उस वक्त कह
[20:06]रही कि जब रसूलल्लाह 10 मर्तबा फरमा चुके हैं मन अरफ फर
[20:13]जो इनको जानता है वह तो जानता है जो नहीं जानता वह
[20:18]जानले हाही नती फातिमा यह मेरी बेटी फातिमा है व कलबी और
[20:26]यह मेरा दिल है रूही अलती बना जमया और यह मेरी वो
[20:28]रूह है तो मेरे दोनों पहलुओं के दरमियान है मन फनी जिसने
[20:35]इनको अत उसने मुझे अजियत दी जिसने मुझे अजियत द उसने अल्लाह
[20:40]को अजियत दी उसके बाद जनाब जरा फातिमा ी मोहम्मद रसूलल्लाह फरमा
[20:51]चुके फातिमा तो मनी फातिमा मेरा टुकड़ा उसके बाद फातिमा आ कर
[20:55]केनी फातिमा भी मोहम्मद लोगों ने जनाबे जहरा [संगीत] को खुद रसूलल्लाह
[21:05]सल्लल्लाहु वसल्लम की जबानी सुना लोगों ने जनाबे जहरा को रसूल अल्लाह
[21:13]सल्लल्लाहु अ वसल्लम की जबानी ना सिर्फ के रसूल की जबानी सुना
[21:16]बल्कि कुरान की आयात के मुताबिक सुना के चा चादर ततीर में
[21:26]चादर ततीर का मरकज किरदार हजरत फातिमा सलामुला करार पाई लोगों ने
[21:30]मैदान मुहला में हजरत फातिमा जहरा सलामुल्लाह अलहा को इस्लाम की हक्का
[21:33]नियत के लिए रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अ वसल्लम के साथ देखा लोगों ने
[21:40]बदर के मौके पर ओहद के मौके पर खैबर के मौके पर
[21:45]खंदक के मौके पर जनाबे जहरा सलाम उल्ला अलहा के मरहम से
[21:48]इस्तफा किया लोग परेशान होते थे आकर जनाब जहरा के दरवाजे पर
[21:55]सवाल करते थे ले लेकर यहां से जाते थे जानते थे उसी
[21:59]मदीना में वह लोग भी थे कि जो जनाबे जहरा सलामुला अहा
[22:04]की चादर की बरकत से मुसलमान हुए थे उसी मदीना में वह
[22:10]लोग भी थे जो जनाब जहरा सलामुला के वजूद अथर के एजाज
[22:15]की वजह से मुसलमान हुए थे आप बताइए उस मजमे में आकर
[22:17]जनाब जरा का य कहना अनास लोगों लम जान लो अनी फातिमा
[22:23]मैं फातिमा हूं वभी मोहम्मद और मेरे बाबा मोहम्मद है सल्लल्लाहु अ
[22:27]वसल्लम तो आ इसके मानी मैं और आप सादा नहीं लेंगे इसका
[22:32]मकसद है कि जनाबे जहरा सलामुल्लाह अल हक तक पहुंचाना चाह रही
[22:36]है वो हक क्या है इसकी कई एक डायमेंशन हो सकती है
[22:40]कई एक जिहाद हो सकती है कई एक रुख हो सकते हैं
[22:41]लेकिन एक बात समझ में आ रही है कि जनाबे जहरा गोया
[22:43]यह बता रही हूं कि मैं जब शिकम मादर में थी तो
[22:46]मैं अपनी मां से हम कलाम होती थी क्यों क्योंकि मेरी मां
[22:50]को लोगों ने तन्हा कर दिया था इसलिए कि उन्होंने मोहम्मद रसूलल्लाह
[22:53]सल्लल्लाहु अल वसल्लम व यतीम अब्दुल्लाह से अत किया था मैंने उस
[22:57]वक्त दन की नुसरत को नहीं छोड़ा मैं जब शबे अबी तालिब
[23:03]में थी तो बहुत कम सिन थी मैंने उस वक्त दन की
[23:07]नुसरत को नहीं छोड़ा मैं जब शाब अबी तालिब से बाहर आई
[23:09]मेरी मां की शहादत हुई रसूल अल्लाह की पुछ पर आकर कु
[23:13]फार ने जानवरों की आला को लाकर रखा मैंने मशकी लेकर रसूल
[23:18]अल्लाह की पुश को पाक किया रसूल अल्लाह की पुश को धोया
[23:21]रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अ वसल्लम से उन खस काशा को दूर किया
[23:26]और उस वक्त जब मैं पा साल की थी तो मुशरिकीन मक्का
[23:32]पर नरीन की लमनी फातिमा जान लो मैं फातिमा वही फातिमा हूं
[23:35]अब सनों साल 18 है अब यह मेरे अल्फाज है तुम यह
[23:40]समझते हो तो कि मैं वली खुदा को छोड़ दूंगी लमनी फातिमा
[23:46]मैं फातिमा हूं मैं शिकम मादर से नुसरत दन करती चली आ
[23:54]रही हूं तुम इस बारे में तस करते हो कि फातिमा जहरा
[23:59]इस सिन साल में ह से पीछे हट जाएंगी और दिफाई दन
[24:04]का अमीर मोमिनीन काफाम सलामुला अलहा ने जो काम किया व यह
[24:11]काम था कि बाद रसूलल्लाह अली की शना करवाने में जितनी माविन
[24:16]जनाबे जहरा की जात करार पाई इतनी ज्यादा माविन कोई और शय
[24:19]करार नहीं पाई गीर की पहचान अगर करनी है तो जनाब फातिमा
[24:25]सलामुला ने उस गीर को बचाया है किस तरह से बचाया जिसके
[24:30]लिए तैयार किया अब वो चंद एक जुमला आप सुन लीजिए ताकि
[24:32]किसी के कल पर गरा ना गुजरे वाक हम यह बातें किसी
[24:37]को जलाने के लिए किसी से बुग रखते हुए या किसी का
[24:44]अनाद रखते हुए या किसी का तासु रखते हुए नहीं कर रहे
[24:46]हमारे बुग और हु का मेयार अल्लाह की जात है जिससे अल्लाह
[24:52]ने मोहब्बत का कहा है हम मोहब्बत करते जिससे अल्लाह ने बस
[24:57]का कहा है जो पैरामीटर्स बयान किए वही हमारे उसका मेयार होना
[24:59]चाहिए और ये मेयार तमाम मुसलमानों का होना चाहिए सिर्फ मेरा और
[25:03]आपका नहीं जो अल्लाह उसके रसूल उसके दीन के साथ है उसकी
[25:10]मोहब्बत दिल में होनी चाहिए जो अल्लाह रसूल और उसके दीन के
[25:13]खिलाफ है उसका बुग दिल में होना चाहिए और यह मेयार 1400
[25:19]साल पहले के लिए भी नहीं था देखिए बाहर तो मसला तबे
[25:24]का कुछ और तरीके से मिस इंटरप्रेट किया जाता है ना यहां
[25:27]पर कुछ और तरीका है यहां पर कुछ और तरीका है होशियार
[25:31]रहिए तबरा सिर्फ 1400 साल पहले वाली बाज शख्सियत के साथ मुख
[25:39]नहीं है हर दौर में जो भी दीन खुदा हर दौर में
[25:45]जो भी खुदा हर दौर में जो भी रसूल अल्लाह हर दौर
[25:50]में जो भी अहले बैत अ सलाम के मददे मुकाबिल आएगा उससे
[25:54]तबरा करना जरूरी है इसी तरीके से हर दौर में जो इनकी
[26:02]नुसरत करेगा उसकी मोहब्बत को दिल में रखना जरूरी है ये 1400
[26:05]साल पुराना खाली मामला जिस तरह कुरान फकत 1400 साल पहले के
[26:10]लिए नहीं था तमाम अवाम के लिए है तमाम जहानों के लिए
[26:12]है तमाम अरों के लिए है उसी तरीके से मोहब्बत अहले बैत
[26:17]और दुश्मना दीन खुदा का बुग दिल में रखना भी तमाम जमानो
[26:25]के लिए इसको जुज दन में लपेटकर मुकद्दस बनाकर फकत ताक पर
[26:30]ना सजाएं मसल तब तवला का मफू क्या है जिसका सही प्रोनंसिएशन
[26:34]तबली तब अरबी में क्या है इसका सही तरीका का मैं रसूलल्लाह
[26:39]सल्लल्लाहु अ वसल्लम की विलायत को इख्तियार करूं उनकी मोहब्बत को दिल
[26:46]में रखू उनकी सरपरस्ती को कबूल करूं उनके दुश्मनों से बेदारी करू
[26:50]समझ में आता है अमीर मोमिनीन के लिए समझ में आता है
[26:55]कि मौला की विलायत को कबूल करू उनके दुश्मनों से बजारी जनाबे
[26:58]जहरा की विलायत को कबूल करूं दुश्मनों से बजारी करूं समान ना
[27:05]अब मैं मकतब तश्य की दाखिली बात कर रहा हूं ये इमाम
[27:07]हसन से विलायत इमाम हसन की विलायत इख्तियार करूं उनके दुश्मन पर
[27:13]आसान अल्फाज में बोल देता हूं मौला से तवला करूं उनके दुश्मन
[27:17]से तबरा करूं इमाम हुसैन से तवला करूं उनके दुश्मन से तबरा
[27:23]करूं इमाम सज्जाद से तवला करूं उनके दुश्मन से तबरा करूं मजरत
[27:31]पूरी फेरस मुझे बयान करनी पड़ेगी इमाम बाकर से तवला करूं उनके
[27:35]दुश्मन से तबरा करूं इमाम सादिक से तवला दुश्मन से तबरा इमाम
[27:43]काजिम से तवला दुश्मन से तबरा इमाम रिजा से तवला दुश्मन से
[27:48]तबरा इमाम तकी से तवला दुश्मन से तबरा इमाम नकी से तवला
[27:54]दुश्मन से तबरा इमाम अकरी से तवला दुश्मन से तबरा इमामे जमाना
[27:58]का क्या होगा इमाम जमाना से तवला दुश्मन से तबरा होगा या
[28:08]नहीं होगा कौन है दुश्मन इमाम जमान का किसने आपके 11 आमों
[28:14]को शहीद किया किस सिस्टम के तहत आपके 11 आइमा शहीद किए
[28:17]गए विलायत से दूरी विलायत से इहरा वही सलाती वही बादशाह वही
[28:25]हुकूमत पर आने वाले हाकिम जिन्होंने 11 अम्मा को शहीद किया अब
[28:29]जब इमाम जमाना के दुश्मनों का नाम लिया जाए तो उसको सियासत
[28:34]क्यों कहा जाता है आपने सुना होगा बहुत दफा किसी ने अजीबो
[28:38]गरीब बात की थी कि फरिश्ते मजलिस में आते हैं जब सियासी
[28:42]बातें सुनते हैं तो उठक चले जाते हैं आका जान मुझे यह
[28:47]बताइए कि जनाब आपने कैसे फर्क कर दिया यानी जनाबे जहरा के
[28:49]दुश्मन से तबरा करना आपके नजदीक इबादत है इमाम जमाना के दुश्मन
[28:54]से तबर्रा करना आपके नजदीक इबादत नहीं बन रहा इसका मकसद है
[28:56]कि अगर ऐसे फिक्र के अरा सयद शोहदा के दौर में होते
[29:00]या जनाबे जहरा के दौर में होते तो जनाबे जहरा और सैयद
[29:04]शोहदा से कहते कि जनाब आप यह मौजूदा ताग के खिलाफ क्यों
[29:06]खड़े हुए सिर्फ फिरौन को बुरा कहिए सिर्फ नमरूद को बुरा कहिए
[29:13]क्योंकि इससे मेरे मफा दत नहीं टकरा रहे देखन जनाबे जहरा सलाम
[29:16]उल्ला अलहा ने अपने तमाम तर तकद्दुस के बावजूद अपने तमाम तर
[29:23]एहतराम के बावजूद अपने तमाम तर मकाम के बावजूद अपनी जात को
[29:27]दरो दीवार के दरमियान लाकर जख्मी होना बर्दाश्त किया घर में अशक
[29:34]का आना बर्दाश्त किया उस दरवाजे के तले दबकर अकिया के पांव
[29:40]के नीचे अजियत उठाना बर्दाश्त किया अली इब्ने अबी तालिब को एक
[29:44]लमहे के लिए तन्हा नहीं छोड़ा दुनिया ना समझ पाती कि विलायत
[29:50]क्या है मैं और आप जस्टिफाई ना कर पाते अमीर मोमिनीन अल
[29:52]सला सलाम की विलायत को अगर जनाबे जहरा की यह कुर्बानी ना
[29:59]होती जनाबे जहरा सलाम स्टास ना होता तो आप कुल्ली चीजों को
[30:01]तो हम दूसरों के सामने बयान कर सकते हैं ना आ बयान
[30:06]करने का अंदाज वो कि जो अंदाज अहले बैत ने दिया है
[30:10]मजरत के साथ वक्त थोड़ा ज्यादा हो गया बहुत सूरत के साथ
[30:14]आपके सामने य चंद एक नुका को बयान कर दूं ताकि यह
[30:19]मतलब सिमट जाए अब देखिए जनाबे जहरा दरबार में आई है आयात
[30:21]भी नहीं पढ़ूंगा आपके सामने जनाब जहरा दरबार में आई है जनाब
[30:27]जहरा सलामुला ने आकर अपने मीराज का मुतालबा किया है जबकि फदर
[30:32]नहीं बल्कि माले फै था जो रसूलल्लाह सल्लल्लाहु वसल्लम की हयाते तबा
[30:38]में ही रसूल अल्लाह ने अपनी बेटी जनाबे फातिमा को दे दिया
[30:41]था मीराज तो वो होती है ना वफात के बाद तकसीम हो
[30:44]यह तो रसूलल्लाह सल्ला अ वसल्लम ने अपने हयाते तैयबा में ही
[30:50]जनाब जहरा को दे दिया है कायल यद लेकर आए उसके जरिए
[30:54]में जनाबे जहरा का कोई और इस्तल कायम करना चाहे हर से
[31:01]पदक जनाब जरा जनाब जरा ने यहां पर मीराज का मतलब उठाया
[31:04]है क्यों क्योंकि मद्दे मुकाबिल ने मीराज के हवाले से एक ऐसी
[31:10]मुनकता हदीस को सुनाया कि जिसकी निस्बत रसूल की तरफ दी गई
[31:14]थी लेकिन उसका कोई रावी नहीं था बल्कि मैं कह दूं मौजू
[31:21]सिर्फ वही शख्स जो सुना रहे कहा मैंने नहीं सुना जनाबे जहरा
[31:27]सलामुला अलहा ने कहा अगर यह मसला हदीस क्या थी नन माशिया
[31:33]लानन मातर सना कोई वारिस छोड़ते ना विरासत लेते हम जो छोड़कर
[31:44]जाते व सदका होता है यह हदीस सुनाई गई जनाब जरा ने
[31:46]इसके मुकाबिल आयात सुनाई एक हदीस नहीं सुनाई बी ने उस मौके
[31:52]पर ख फया जाकर देख जनाब ने एक हदीस नहीं सुनाई है
[31:56]एक हदीस से इस मतलब पर लाल किया है इस खुतला बे
[32:01]जहरा के आने को सब मान रहे हैं जनाबे जहरा के सामने
[32:06]खलीफा अव्वल की ये हदीस सुनाना सब मान रहे हैं जनाबे जहरा
[32:09]सलाम उल्ला अलहा के जवाबाइकिरण तवार के साथ फातिमा बी ने नहीं
[32:35]सुनाई बीवी ने हदीस के मुकाबिल आया सुनाई है मेयार क्या बनाया
[32:40]जनाब आपने मेयार क्या है आपका आपका मेया यही है ना कि
[32:42]जो चीज भी कुरान से मुताज हो जो चीज कुरान से टकराए
[32:47]आपका बनाया हुआ मेदार उसको दीवार पर दे मारो तवज्जो कीजिए हदीस
[32:56]बीवी को सुनाई गई हदीस के सहत और सुकम पर भी बात
[33:02]नहीं कर रहा सही थी गलत थी यह बात अपनी जगह पर
[33:04]सुनाई गई हदीस जनाबे जहरा ने उसके मुकाबिल सुनाई कुरान की आयात
[33:11]अकल क्या कहती है किसको कबूल किया जाए आयात को ना जनाबे
[33:18]जहरा सलाम उल्ला अलहा ने हदीस के मुकाबिल फिर मैं कह रहा
[33:20]हूं सहत और सकम की बात नहीं है सही और गलत की
[33:23]बात नहीं है हदीस के मुकाबले पर आयात को सुनाया ये जो
[33:29]आयात जनाबे जहरा सलामुला सुनार हैसे दो मतलब हमारे सामने आ रहे
[33:33]हैं पहली बात यह कि तुम इस हदीस को आयात के मुकाबिल
[33:39]लेकर आ रहे हो जब आपस में ताज हो तोले फन जानते
[33:45]हैं कि क्या करना है दूसरी बात यह कि तुम में से
[33:50]कल किसी ने कहा था हना किताब अल्ला हमारे लिए अल्लाह की
[33:55]किताब काफी है जब अल्लाह के रसूल कह रहे थे कागज कल
[34:00]ला दो मैं तुम्ह ऐसी चीज लिख दू कि गुमराह ना हो
[34:01]उस वक्त तुमने कहा था हना किताब अल्ला हमारे लिए अल्लाह की
[34:08]किताब काफी है आज जब मैं अल्लाह की किताब से आयात सुना
[34:10]रही हूं तो तुम सामने एक हदीस लेकर आ रहे हो जिसका
[34:14]कोई और गवाह भी नहीं है और यह मामला विरासत का हमसे
[34:20]ताल्लुक रखता था हमारे बाबा को चाहिए था हमसे बयान करते तुमसे
[34:23]क्यों बयान किया तुमसे क्या ताल्लुक था कुरान की इस आयत की
[34:29]रू से नारा बचाओ अपने आपको और अपने बच्चों को आतिशे जहन्नुम
[34:32]से हमारे बाबा की जिम्मेदारी थी कि अगर यह मसला सही था
[34:37]तो हमारे बाबा को हमसे बयान करना चाहिए था तुम्हारा मीराज से
[34:41]क्या ताल्लुक था बाबा तुमसे क्यों बयान किया अग यह इलाल तो
[34:44]सब मानेंगे ना इसको आसान अंदाज से पेश करना मेरी और आपकी
[34:51]जिम्मेदारी है ताकि जिनके दिलों में मरज नहीं है वो हक के
[34:52]करीब है अब जनाबे जरा सलाम अलहा ने यह मामला हुआ है
[34:59]जनाब जरा जखमी होने के बाद ताजु के बाद बीवी ने जाकर
[35:05]खुतबा दिया अब जनाब जहरा सलामुला अहा ने आखरी वक्त तक अपने
[35:08]पैगाम को लोगों तक पहुंचा इतना सख्त स्टास था जनाब जारा सलाम
[35:13]कहा कि मुझे तारीख की शब में दफन करना मैं नहीं चाहती
[35:19]कि जिन्होंने आपकी हक को गस किया है वो मेरे जनाजे में
[35:25]आय देख रहे कितना पावरफुल स्टंस है जनाब जारा का आज तक
[35:29]कबरे मुतहर का नहीं पता शहर मदीना तेरी गलियों में अभी तक
[35:35]हम बिनते पैगंबर की लहर ढूंढ रहे हैं नहीं पता कि आपकी
[35:39]कब्र मुतहर हुजरा रसूल में है कब्र और मेंबर के दरमियान है
[35:46]या बकी में मदीना जाने वाले तीनों जगह पर जियारत पते हुए
[35:49]नजर आते हैं आज तक जनाबे जहरा का एतजाज जारी है यह
[35:53]जो जनाबे जहरा सलाम अहा पहुंची आगा आप इसको समझिए कि क्या
[35:58]मामला हुआ अल्लामा अमीनी के जरिए इस बात को हम खत्म करते
[36:00]हैं अल्लामा अमीनी के पास एक दफा आप किसी एयरपोर्ट या रेलवे
[36:04]स्टेशन पर बैठे हुए थे अल्लामा अमीनी कोई बहुत पुराने आलम दन
[36:07]नहीं है इसी सदी का शाहकार है अलामी साहिब किताब अल गदर
[36:14]आप किसी एयरपोर्ट या किसी टर्मिनल पर या स्टेशन पर बैठे हुए
[36:21]थे कुछ तालिब म आए जो मकतब तयो से ताल्लुक नहीं रखते
[36:23]थे आकर कहा आप अब्दुल हसन अमीनी है कहा जी कहा हमारे
[36:32]पास हमारी सवारी आने में मसलन 5 मिनट है आप हमें इस
[36:37]बात का जवाब दे अगर आपने सही जवाब दे दिया हमें काने
[36:41]कर दिया तो हम अभी मकतब विलायत कबूल कर लेंगे लेकिन जनाबे
[36:43]जहरा का क्या इकम था कहा सवाल क्या है कहा आप अली
[36:51]इब्ने अबी तालिब की अफजल के कायल क्यों है बाज अफराद से
[36:54]5 मिनट का वक्त है आ अफजल अमीर मोमिनीन का मौजू है
[37:01]इंतिहा पेचीदा दूसरी तरफ से भी शिद्दत पाई जाती है यहां से
[37:05]भी इस मामले को बड़ा हसास लिया जाता है उसका जवाब देना
[37:09]है यह वाक एक आलिम का ही काम है तीन हदीस के
[37:13]जरिए अल्लामा अमीनी ने इस मामले को हल किया अल्लामा अमीनी ने
[37:19]कहा तुम्हारे मुत में तुम्हारी किताबों में यह हदीस मौजूद है फातिमा
[37:24]तो ब मनी फातिमा मेरा टुकड़ा है फन बनी जिसने उनको गजब
[37:31]ना किया उसने मुझे गजब ना कियाना फनी जिसने इनको अत उसने
[37:39]मुझे अजियत द बिल्कुल मौजूद है अच्छा यह हदीस मौजूद है म
[37:46]मातल यामा जमाने मात मत जालिया जो भी अपने जमाने के इमाम
[37:56]की मफत के बगैर मर गया व जाहिल की मौत मरा जहालत
[37:57]और जाहिल त में फर्क है आप सब जानते होंगे जाहिल अत
[38:01]यानी कुफ्र की मौत कहा ये भी मौजूद है कहा ये बताओ
[38:06]जब फातिमा गई है तो उनका इमाम कौन था बात है अजलिन
[38:14]अमीरुल मोमिनीन की इस्तकलाल कहां से किया जा रहा है जनाबे जहरा
[38:19]के जरिए उम्मत में से कोई फर्द ऐसा है कि जो जनाब
[38:24]जहरा सलामुल्लाह अलहा के लिए तसव्वुर करे कि जनाबे जहरा सलामुल्लाह अलहा
[38:29]अपने जमाने के इमाम से आशना नहीं थी कोई फर्द ऐसा है
[38:37]जो आके ये कहे यह दो हदीस सुनाई और हदीस सुनाने के
[38:42]बाद जनाबे जहरा ने कहा जिनकी तुम अफजल के कायल हो तुम्हारी
[38:45]किताबों में हो कि फातिमा जहरा सलाम उल्ला अलहा उनसे नाराज गई
[38:50]नाराज गई यानी क्या आसान लफ्जों में कह दूं कि उनको जनाबे
[38:57]जहरा अपना पेशवा अपना रहबर अपना इमाम मानने के लिए तैयार नहीं
[39:00]थी जनाबे जहरा ने जिसको अपना इमाम माना है उसका उस जात
[39:05]का नाम है अली अबी तालिब अ सला [प्रशंसा] सलाम दरबार में
[39:13]आकर जनाब जारा सलाम जब मस्जिद में पहुंची जनाब जारा तो अमीर
[39:18]मोम अला सला ने कहा वापस चली जा वापस चली गई अपने
[39:21]इमाम के हाथ को थामा और जनाब जारा सलामुला अपने घर में
[39:26]आ गई यह एकदाम था जरा का आगा लोग समझ ना पाते
[39:31]विलायत को पहचान ना पाते इमामत की तफहीम ना हो पाती अगर
[39:39]जनाब जहरा सलाम उल्ला अलहा यह इकम ना करती बहुत शुभत फातम
[39:41]के साथ-साथ हमारे जवानों के कानों में डाले जाते हैं क्यों फातिमा
[39:44]जहरा दरवाजे पर गई अली जैसे शुजा मौजूद थे तो अली इने
[39:48]अबी तालिब ने क्यों दिफाई इब्ने अबी तालिब अल सलाम जैसे फाते
[39:57]खैबर शमशीर जन बेहतरीन मुजाहिद अपने हक से दिफाई कि जनाबे जहरा
[40:08]ने अपने हक विलायत को अमीरुल मोमिनीन के सामने रखा कि मौला
[40:14]मैं आपके दिफाई जनाबे जहरा दुरुस्त है अमीरुल मोमिनीन उनके शौहर है
[40:17]लेकिन शौहर के दिफाई खुदा के दिफाई हैं इसका जवाब दिया उलमा
[40:23]ने दूसरी इल्लत रहबर मोअज्जम ने बयान की कि अमीरुल मोमिनीन अल
[40:26]सलातो वसलाम ने तलवार क्यों नहीं उठाई जब हक उनका था कहा
[40:30]कि मौला की कजव के फैसलों में जाकर देखिए मौला के फैसलों
[40:32]में जाकर देखिए मौला की कजव के बाब में जाकर देखिए अमीरुल
[40:36]मोमिनीन के पास दो औरतें एक दावा लेकर आई कि यह बच्चा
[40:41]हमारा है दोनों ने दावा किया कि हमारा है मौला अली अ
[40:42]सलातो सलाम ने हर तरह समझाने की कोशिश की नहीं मानी अपने
[40:46]दावे से द बदार कोई भी नहीं हु इनमें से आखिर में
[40:50]मौला ने कहा कंबर तलवार लाओ बच्चे के दो टुकड़े कर दो
[40:51]जो हकीकी मां थी वो यह कहकर पीछे हो गई या अमीर
[40:56]मोमिनीन बच्चा मुझे नहीं चाहिए इसी को दे दीजिए जहां भी रहेगा
[41:02]जिंदा तो रहेगा अली इने अबी तालिब अ सलातो सलाम की कजव
[41:07]के फैसले ने बताया कि अमीरुल मोमिनीन ने वह 25 साल जो
[41:09]सबर किया है वह इस मां की तरह से किया रे जहां
[41:14]पर भी रहे बाकी तो रहे बाद में हमारे पास आ जाएगा
[41:18]बाकी रहेगा तो आएगा ना लेकिन अगर बाकी ना रहे दीन ही
[41:24]नाबू हो जाए तो इससे बड़ा खसा और कोई नहीं होगा इसके
[41:28]लिए अमीर सलाम ने 25 साल सबर किया है 25 साल सब्र
[41:34]एक मशहूर मारूफ फलस का जुमला है कि अली इने अबी तालिब
[41:39]के फाइल में बयान किया जाता है कि मौला अली अल सलाम
[41:44]ने हजार कुए खोदे यह फजीलत अली नहीं यह मुसीबत अली है
[41:47]यह मसाब अमीर मोमिनीन अ सलातो सलाम में से अली जैसी शख्सियत
[41:52]हो फसले काश करते हुए दिखाई दे कए खोदने में मशगूल हो
[42:00]जाए दरख्त लगाने में मशगूल हो जाए अगर जिसकी एक जर्बत सकलेन
[42:04]की इबादत से अफजल हो उस अली को उम्मत ने किसम मशगूल
[42:09]कर दिया लज नहीं है मेरे पास इसलिए मजबूरन यह लफ्ज इस्तेमाल
[42:14]करर हं उस उम्मत ने अली इने अबी तालिब अ सलातो सलाम
[42:17]को किस मकाम पर ला खड़ा किया वो जो के इमाम हो
[42:24]रहबर हो पेशवा हो हुज्जत खुदा थे वो कुए खोदते नजर आ
[42:30]रहे हैं कुए खोदना ऐब नहीं है कुआ खोदना नेकी है लेकिन
[42:32]आप मुझे खुद बताइए कि वह अली जो मुजाहिद हो जो शमशीर
[42:35]जन हो जिसकी एक जरब सकलैन की इबादत से अफजल हो उस
[42:39]अली से रहनुमाई लेनी थी या कुए खोदने पर मशगूल रखना था
[42:44]यह मुसीबत है अमीर मोमिनीन जनाब जहरा के बाद अमीर मोमिनीन अ
[42:51]सलातो सलाम की कैफियत यह थी कि मौला कुएं में जाकर अपना
[42:54]मुंह कुएं में डालकर बुलंद आवाज से गिरिया करते थे वो हमदम
[43:01]वो हमदिल वो हमराज वो हम सफर जब जनाबे जहरा सलामुला अलहा
[43:08]रुखसत हुई है बस दो जुमला सुन लीजिए तबक मत मुन अमीर
[43:12]मोमिनीन अल सलातो सलाम ने बच्चों से कहा बच्चों आहिस्ता रो रिवायत
[43:20]में कि बच्चे अपनी आस्तीन के कपड़े को अपने दांतों में दबाकर
[43:26]गिरिया कर रहे थे इमाम हसन और हुसैन अलसलाम जब आए हैं
[43:28]ना मां के लाशे पर इमाम हसैन ने इमाम हसन ने कहा
[43:32]या उ माहु कमीनी मेरे मदर मेरी मादर गिरामी मुझसे कलाम कीजिए
[43:37]अना इनकल हुसैन अना इनकल हसन मैं आपका बेटा हसन हूं इमाम
[43:42]हुसैन ने कहा या उमा कले मनी मादर गिरामी मुझसे कलाम कीजिए
[43:47]कहीं ऐसा ना हो कि मेरा दिल फट जाए फमू और मैं
[43:54]मर जाऊ यह सदमा था बच्चों के दिल पर आ फातिमा जैसी
[43:56]मा रुखसत हुई है अमीर मोमिनीन सबको चुप करा रहे थे लेकिन
[43:59]जब गुसल का मरहला आया मौला खुद बुलंद आवाज से रोने लगे
[44:03]असमा ने पूछा कि मौला क्या सबब है क फातिमा की पसलिया
[44:07]फातिमा का टूटा हुआ बाजू अब समझ में आए कि फातिमा मेरे
[44:14]सामने नमाज क्यों नहीं पढ़ती थी और जब कब्र में उतारा है
[44:17]ना तो अमीर मोमिनीन ने एक जुमला क जियारत में अमीर मोम
[44:20]सलाम अले साबरी सलाम हो आप पर है सब्र करने वालों में
[44:23]सबसे बड़े साबर वो अली जब कब्र में जनाब जहरा को उता
[44:28]कह फातिमा जब बाबा से मुलाकात कीजिएगा कहिए कि आपकी शहादत के
[44:31]सबब अली का सब्र कम हो गया और अली शर्मिंदा है कि
[44:35]आपने जो अमानत सही सालिम दी थी शिकस्ता पहलू के साथ लौट
[44:42]रहा है नाहिल जिस्म कान कल खयाल जनाबे जहरा का जिस्म इतना
[44:44]लागर हो गया था कि जनाबे जहरा के लिए रिवायत में आया
[44:48]है कि इस तरीके से था जिस तरह से कोई साया हो
[44:52]खुद अपने हाथों से कब्र में उतारा जनाबे जहरा को और अपने
[44:57]हाथों से क्र को बंद किया 40 कब जनाबे जहरा की बनाई
[45:01]गई है निशान बनाए गए अगर मैं यह कहूं कि फातिमा दफना
[45:07]नहीं गई बल्कि छुपाई गई है तो बेजा नहीं होगा सयान जलयान
[45:12]कनाला व इन्ना इले राजन परवरदिगार हमें सीरत जनाब जहरा को समझने
[45:21]की तौफीक अता फरमा जनाब जरा सलाम की खुदी को हासिल करने
[45:23]की तौफीक अता फरमा जनाब जहरा के सदके में हमारे सगीर कबीरा
[45:29]खताओं से सरफे नजर फरमा परवरदिगार जनाबे जहरा के सदके में हमारे
[45:32]नफ्स और रूह और मिजाज की इस्लाह फरमा परवरदिगार वास्ता मोहम्मद व
[45:38]आले मोहम्मद का जनाब जरा के सदके हमारे आमाल को कबूल फरमा
[45:41]हमारी सैयाद से हमारे वालदैन की सैत से कुल मोमिनीन मोमिना की
[45:46]सहीत से सरफे नजर फरमा बीबी जहरा के सदके में जिबे मुकाम
[45:49]को कामयाबी और तरकी अता फरमा पार चिनार के मोमिनीन को मुस्तहकम
[45:55]फरमा उनके जख्म हों को शिफा याफ फरमा फलस्तीन के मुस्तफार फरमा
[46:01]जनाबे जहरा के सदके में लमना शाम इराक ईरान पाकिस्तान के शिने
[46:06]अहले बैत की हिफाजत फरमा उनके सदके में हमारी मदद नुसरत फरमा
[46:12]तकरी नाजी नजदी दहशत गर्दों को आले सऊद आले खलीफा को तकरी
[46:14]नाज नजदी दहशत गर्द अमरीका इराल को नी नाबूत फरमा परवरदिगार वास्ता
[46:20]मोहम्मद वा आले मोहम्मद का जनाब जहरा के फर्जंद इमाम जमाना के
[46:23]जहूर में ताजल फरमा हमें मौला के आवान अंसार में शामिल फरमा
[46:27]उनके कल्ब मुतहर को हमसे राजी फरमा मास सलाम की ताली मात
[46:33]पर अमल करने की तौफीक अता फरमा रना तकल मनारी इला मला
[46:40]नबी याम स अले वसल्लीम तस्लीमा
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