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Wilayat Rah-e-Saadat H.I. Rooh-ul-lah Rizvi
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في
محاضرات
Record date: 02 July 2023 - ولایت راہ سعادت AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/almehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:13]बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल हमदुलिल्ला रब्बिल आलमीन अल्जी
[0:26]ला ला ला मु सलातो सलामिया मुरसलीन हबीब हबीब इला आलमीन अल
[0:55][संगीत] मोहम्मद मा बलाम जमाने लमी रा मदा ला तबार ताला फ
[1:20]किताब करीम बिला मता रम बिस्मिल्ला रहमान रहीम अल्ला लीमन नाया दरूद
[1:42]मोहम्मद मोहम्मद [संगीत] पर दलम का सान उसका शुक्र उसने य नेमते
[1:52]य मुनास बत हमें अता की के हम इन मुख्तलिफ मुनास सबतो
[1:57]में जो पूरे साल अल्लाह ताला ने करार दी हैं उनको वसीला
[2:02]बनाते हुए अपनी सहादत के लिए अहले बैत अ सलातो सलाम के
[2:09]जिक्र से अपने आप को नूरानी करते हैं जो अया गुजरे अया
[2:12]मेंे दहे अव्वल जो था जिल हज का अशरा ला यह तमाम
[2:20]हम देखते हैं उसके अंदर जो वाकत पेशा आए हजरत मूसा अल
[2:26]सलातो सलाम की वो दास्तान आपके सामने वाज है के जो हम
[2:29]मगरिब की नमाज के दौरान एक मुस्तहसन की गई है जिसके अंदर
[2:37]हम उस आयत की तिलावत करते हैं कि जब खुदा मुताल ने
[2:39]हजरत मूसा अ सलातो सलाम से वादा किया मि कात के लिए
[2:43]30 दिन का और उसके बाद उसको 10 दिन बढ़ा दिया यह
[2:47]वो 10 दिन थे जो खास तौर पर खुदा मुताल ने बढ़ाए
[2:51]थे अगरचे दोनों तरफ हजरत मूसा अ सलातो सलाम उम्मत दोनों का
[2:54]इम्तिहान था हमें ताकीद की गई कि इसको याद करें फिर रोज
[2:59]अरफ आया इमाम बाकला सलाम की शहादत का दिन आया इमाम हुसैन
[3:04]सलाम के मक्के से कयाम का दिन आया जनाब मुस्लिम की शहादत
[3:06]का दिन आया रोज ईद आया यह तमाम अया व है जो
[3:11]हमें दर हकीकत अल्लाह ताला की विलायत की जानिब लेकर जा रहा
[3:15]है यानी ईद भी क्या भी दर हकीकत पलटना है फितरत की
[3:17]जानिब वो कौन है हमारी हकीकत क्या है हमारी फितरत क्या है
[3:22]फतला फना या ददा मुताल पूरे साल मुख्तलिफ आयाम में मुख्तलिफ मुनासिब
[3:30]से हम चाहता है कि हम उसके तहत विलायत करार पा जाए
[3:36]अब ये अशरा जो जारी है यानी 10 लहज से 18 लहज
[3:42]के ये आयाम दर हकीकत इमामत और विलायत से मंसूब आयाम है
[3:44]अगरचे इसके बाद भी हम देखें ईद मुबा हला के अंदर भी
[3:50]अहले बैत सला सलाम की सदाकत हका नियत की गवाही उनकी इमत
[3:55]की गवाही और साथ-साथ फिर वही अल्लाह ताला की विलायत और उसकी
[3:58]तौहीद का मारका दर हकीकत जो वहां पर पेश आ रहा है
[4:03]ब ये तमाम अया जितने ऐसे आयाम जिसमें हम अहले बैत सला
[4:09]सलाम का जिक्र करते हैं आने वाले माहे मुहर्रम है इससे पहले
[4:11]गुजरे हुए आयाम है अहले बैत की विलादत की तारीखें है अहले
[4:17]बैत सलातो सलाम की शहादत की तारीखें हैं मुख्तलिफ चीजें ईद आती
[4:20]है यह सब की सब हमें दर हकीकत अल्लाह की जानिब लेकर
[4:25]जा रही है लिहा इन्ह अया उल्लाह कहा जाता है ये वो
[4:27]दिन है जो हमें अल्लाह की याद दिलाते हैं हमें अल्लाह की
[4:30]तरफ पलटते हैं ये अया जो गुजर रहे हैं और आने वाला
[4:35]वो अजीम दिन कि जैसे ईद उल्लाह अकबर कहा गया है कि
[4:40]अल्लाह की जानिब से बुजुर्ग तरीन ईद करार दिया गया है वो
[4:42]ईद गदर जिसके अंदर अमीर मोमिनीन अली इने अबी तालिब अ सलातो
[4:47]सलाम की विलायत का एक ऐलान किया गया एक दफा दरूद भेज
[4:49]मौला की जात के [संगीत] ऊपर अब ये तमाम चीजें क्यों अंजाम
[4:59]दी जा रही है इसको हमें गर करने की जरूरत है कि
[5:01]यह माजरा क्या है हमें खुदा मुताल कहां से कहां लेकर जाना
[5:05]चाहता है और उस सफर का यह जो रास्ता अल्लाह ताला तय
[5:11]कराना चाहता है हमें इसका सबब इसका वसीला इसका जरिया खुदा मुताल
[5:14]ने किस चीज को करार दिया खुदा मुताल इंसान को खल्क करने
[5:23]के बाद फखर मुबा हात करता है दीगर मखलूक परतला या बेहतरीन
[5:28]खक करने वाला किसको इंसान को जब खल्क करता है तो उसके
[5:32]बाद अपने आप फखर मुबा अपने आप पर करता अगर गौर करें
[5:38]तो हम देखें जब हम वाक पैदा होते हैं तो आया हमारे
[5:44]अंदर ऐसी सलाहियत होती है ऐसी कुदरत ऐसी कुवत ऐसी सिफात हमारे
[5:48]अंदर होती है हम बहुत ज्यादा कुदरत मंद होते हैं बाकी तमाम
[5:53]मखलूक यानी खुदा जिस मखलूक के ऊपर फख कर रहा है इसका
[5:54]मतलब क्या है कि वो तमाम मखलूक से ज्यादा बा फजीलत है
[5:59]ज्यादा बेहतर है ज्यादा अच्छी लेकिन जब हम लक होते हैं जब
[6:05]हम पैदा होते हैं आसान अल्फाज में दख मुताल भी इस बात
[6:07]को बयान कर हम भी देखते क्या कहता है हमें इस हाल
[6:20]में पैदा किया गया कि हम कोई चीज नहीं जानते थे हम
[6:26]या किसी चीज का नहीं रखते थे किसी चीज का दर्क नहीं
[6:31]रखते थे फिर खुदा मुताल ने क्या किया हमारे लिए समात को
[6:35]करार दिया बसालत को करार दिया कल्ब को करार दिया दिल को
[6:37]हमारे करार दिया किस लिए ताकि हम शुक्र अदा कर सके यानी
[6:42]एक तरफ खुदा मुताल कह र ये ऐसी मखलूक है के जिसके
[6:46]ऊपर मैं फक्र महसूस कर रहा हूं और दूसरी तरफ कह रहा
[6:49]है कि जब हम तुम्हे पैदा कर रहे हैं तो तुम तो
[6:54]कुछ जानते ही नहीं थे हमने जानने के तरीके सहादत का जरिया
[6:56]जो टूल्स थे जो अजार थे वो तुम्ह आता लेकिन तुम पैदा
[7:03]अशरफुल मखलूक नहीं हुए थे तुम पैदा ऐसे नहीं हुए थे कि
[7:08]तुम सिर्फ इस अपने इस पहले जो तुम्हारा वजूद है इसके ऊपर
[7:11]इफा कर लो और तुम तमाम फरिश्तो से ज्यादा अफजल हो जाओ
[7:15]नहीं हमने तुम्ह जरिया दिया था वसीला दिया था कि तुम इसके
[7:20]जरिए इन वसी के जरिए य जो हम खुदा मुताल कह र
[7:21]है कि हमने तुम्हारे लिए समात करार दी बसत करार दी दिल
[7:25]करार दिया ताकि इसके जरिए क्या करो तुम अशरफ मखल बन दर
[7:30]हकीकत यानी देखि दो चीज इंसान अशरफुल मखलूक खलक हुआ लेकिन आया
[7:39]क्या तक तक इंसान एक एक इंसान हम सब अशरफ मखलूक लक
[7:44]हुए नहीं हमें दर हकीकत अशरफ उल मखलूक बनने के लिए खल्क
[7:47]किया गया वो और जवा है जो खास है जिन्ह जब खल्क
[7:52]किया गया तो वो अशरफ मलूका थी वो अंबिया तमाम फरिश्तों से
[7:58]अफजल थी तमाम मलूका से अफजल थी उनके अंदर बड़े-बड़े पहाड़ों से
[8:03]ज्यादा कुदरत मौजूद थी क्यों क्योंकि उनका हक तस्रा कर सकते थे
[8:08]वो पहाड़ को अपनी जगह से हिला सकते थे वो पत्तन के
[8:12]अंदर जबान अता कर सकते थे लेकिन आया हर इंसान जब पैदा
[8:14]होता है तो ऐसे ही होता है नहीं हर इंसान पैदा होता
[8:18]है ऐसा नहीं होता ये अल्लाह के खास औलिया है जिनकी यह
[8:23]सिफत करार दी गई कि उन्हें खल्क की खल्क ही इस बुनियाद
[8:28]के ऊपर किया गया है इन सिफात के साथ खल्क किया गया
[8:30]हमारे लिए रास्ता तय करना अगरचे उसके अंदर भी फलसफे दक मबाजार
[8:38]आया वो जो सफर तय किया जाता है उसकी क्या हकीकत है
[8:45]ये तमाम चीजें अपनी जगह लेकिन वो जो उनकी हकीकत है आया
[8:50]वो इस चीज से यानी हमारे जैसी है नहीं फर्क करती है
[8:52]बहुत सारी चीजें लिज हमें ये सफर तय करना है हमें तारी
[8:58]कियों से निकलकर रोशनी की जानिब जाना है हमें असफल साफिन से
[9:01]निकलकर तम की जानिब जाना हमें जलमा से निकलकर नूर की जानिब
[9:07]जाना है हमें फना फसाद से निकलकर नेकियों की जानिब जाना है
[9:13]रने पहले भी आपके सामने जिक्र किया र दुनिया हनाना क्योंकि अगर
[9:19]दुनिया में हसना नहीं मिली तो इसका मतलब है इंसान आखरत में
[9:26]हना नहीं पा सकता अब इंसान ने सफर त करना जमत से
[9:28]अपने आप को निकालना है मुसीबतों से अपने आप को निकालना है
[9:32]मुश्किलात से अपने आप को निकालना है नाकामी से अपने आप को
[9:34]निकालना है जहालत जब कुरान कह रहा है कि लाल यानी तुम
[9:41]जाहिल हो तुम्हें किसी चीज का इल्म नहीं है तुम्हें तो चलने
[9:44]के अंदर दो साल लग जाते हैं हम ताकत दिखाते हैं बकरी
[9:48]का बच्चा पैदा होता है व पैदा होने के कुछ घंटों बाद
[9:50]चलना शुरू हो जाता है इंसान का बच्चा पैदा होता है वो
[9:54]दो साल लग जाते हैं उसे अपने पाव पर खड़े होने में
[9:57]तुम फक्र किस चीज के ऊपर कर रहे हो अ मे मोमिनीन
[10:01]ने बयान किया कि तुम तुम्हारा आगाज माय महीन है तुम्हाराय तुम्हारी
[10:04]इब्तिदा नजिस है तुम्हारी इंतहा नजिस है तुम मुर्दार हो जाते हो
[10:08]तुम्हें हाथ लगाने के लिए पहले गुसल देना पड़ता है किस चीज
[10:12]के ऊपर फक्र कर रहे हो तुम हां खुदा मुताल फक्र कर
[10:18]रहा है तो हमें देखना चाहिए कि खुदा कहां किस चीज के
[10:21]ऊपर फक्र कर रहा है खुदा इंसान की उन सलाहियत के ऊपर
[10:26]फख्र कर रहा है कि अगर इंसान इसी समात को इसी बसारी
[10:32]दिल को इसी शऊर को इसी अकल को बए काड लेकर आए
[10:36]तो अपने आप को फरिश्तों से ज्यादा बा फजीलत करार दे सकता
[10:39]है अपने आप को अशरफुल मखलूक करार दे सकता है अपने आप
[10:44]को जुमात से निकाल कर [संगीत] तुम्हारे लिए हिदायत का वसीला दे
[11:03]दिया हमने जरिया तुम्हारे लिए दे दिया हमने समात दी हमने अजार
[11:07]तुम्हें दिए टूल्स तुम्हें दिए और इन अजार के जरिए इन आजा
[11:10]जवारे के जरिए तुम्हें क्या काम अंजाम देना है यह भी हमने
[11:16]तुम्हें बता दिया लकम तकर ताकि तुम शुक्र इलाही अल्लाह की जो
[11:18]अजीम तरीन नेमत है उनका शुक्र अदा कर सको और जब तुम
[11:25]यह शुक्र अदा करोगे नतीजा क्या निकलेगा नतीजा निकलेगा तुम कुर्बे इलाही
[11:28]को हासिल कर सकोगे तुम कुर्बे इलाही को हासिल करोगे यानी क्या
[11:33]यानी तुम अपना सफर असफल साफिन सेन तमीम तक का तय करना
[11:37]शुरू कर दोगे तुम अपने आप को इलाही रंग के अंदर डाल
[11:42]दोगे इलाही सिफात तुम्हारे अंदर वजूद में आना शुरू हो जाएंगे देखिए
[11:48]अल्लाह कोई मैटर तो नहीं है माददा तो नहीं है कि मैं
[11:49]र बतन इल्ला जब कहता हूं तो नमाज पढ़ने के बाद में
[11:53]थोड़ा सा मादी तौर पर मेरा जिस्म अल्लाह के करीब आ जाता
[11:59]है नहीं दर हकीकत कुर्ब क्या है कुर्ब यानी अपने आप को
[12:03]इलाही सिफात से मुजैन करना जितना जितना अल्लाह देखि हमारे यहां बहुत
[12:07]सारी दास्ताने मशहूर है बहुत सारी कहावत मशहूर है कहा जाता है
[12:12]ना कि देखि आशिक जो होता है वो अपने माशूक के रंग
[12:17]में ढल जाता है अगर इंसान वाक अल्लाह की मोहब्बत अहले बैत
[12:19]अ सलातो सलाम की मोहब्बत उसके वजूद के अंदर आ जाए तो
[12:25]अब इसके अंदर वो शबाहत पैदा होना शुरू हो जाती है बलाम
[12:30]की इला फुरसत मिली आपके सामने बयान हो करूंगा हमारे पास मुख्तलिफ
[12:37]जयारा मुख्तलिफ दुआओ के अंदर इस बात को बयान किया गया कि
[12:41]अहले बतला सलाम के वजूद के अंदर तमाम के तमाम इलाही कमाला
[12:51]मौजूद है बल्कि इतनी सरात के साथ बयान हुआ कि ला फर
[12:55]खुदा तेरे और तेरे इन बंदों के दरमियान कोई फर्क नहीं है
[13:01]मगर क्या है मगर तू इनका खालिक है य तेरे मखलूक है
[13:05]त इनका माबूद है य तेरे बंदे हैं और यही राता हमारे
[13:09]और अ बत के दरमियान भी बरकरार हो सकता है हम वो
[13:11]तमाम कमाला जो अ बत सलाम के पास मौजूद है अले बत
[13:16]देख खुदा बील नहीं है खुदा जवाद है अले बत सलाम भी
[13:21]बील नहीं है अले बत जवाद है देने वाले अता करने वाले
[13:25]सखी है ऐसा नहीं है कि उनके खजाने में कमी आ जाएगी
[13:26]अगर वो कुछ हमें दे देंगे हम जितना जितना उनके करीब होते
[13:33]जाएंगे वो तमाम सिफात जो अहले बैत अ सलातो सलाम में मौजूद
[13:35]है वो हमें देने को तैयार है एक फर्क रह जाएगा हमारी
[13:40]अपनी नहीं होंगी उनकी दी हुई होंगी और ये जितने कमाला हम
[13:46]अपने अंदर वुजूद में लाते जाएंगे दर हकीकत हम अहले बैत अल
[13:48]सलातो सलाम की विलायत में अपने आप को करार देते जाएंगे ये
[13:53]वो रास्ता है जो अहले बैत अल सलातो सलाम के बगैर मुमकिन
[13:57]नहीं है तय होना तकनी तौर पर भी मुमकिन नहीं है खुदा
[14:04]मुताल ने इस कायनात को खल्क किया उनकी विलायत पर खलक किया
[14:10]तकन उनके वजूद से इस कायनात को वजूद बख्शा गया हमारे पास
[14:16]मुफस्सल वाज रिवायत मौजूद है तकनी तौर पर मेरा इयार नहीं है
[14:24]इसके अंदर मैं मानू ना मानू इस हक को उनसे छीन नहीं
[14:26]सकता जो तकनी तियारा हैय एक श आ आके बोले कि मैं
[14:31]खुदा को नहीं मानता कि मेरा खालिक है तो क्या खुदा उसका
[14:36]खालिक नहीं रहेगा नहीं तुम्हारे मानने ना मानने से फर्क नहीं पड़ता
[14:41]कि तुम्हारा खालिक खुदा मुताल है या नहीं है तुम मानो ना
[14:46]मानो अल्लाह ही तुम्हारा खालिक है अल्ला ही तुम्हारा राजिक है अल्लाह
[14:50]ही तुम्ह तुम्हारा परवरदिगार और रब है तुम्हारे मानने या ना मानने
[14:55]से इसके अंदर कोई फर्क नहीं पड़ता बिल्कुल ऐसे ही तकनी मामलात
[15:02]के अंदर जो अ बत सलाम के फजल है जो कमाला है
[15:03]हम द में पढ़ते हैं समा कहा है वो जिसके सबब जमीन
[15:11]और आसमान जुड़े हुए हैं यह तो हम हर जुमे तिलावत करना
[15:18]इस चीज की जरत जामिया में जाए मुख्तलिफ इबारत जरत जामिया के
[15:23]अंदर जरत रबिया के अंदर घर से में हर बात हर जगह
[15:27]नहीं करनी चाहिए य मैं इस बात को कबूल करता हूं हर
[15:29]किसी के अंदर इतना जर्फ नहीं होता कि व हर बात को
[15:34]मनोन ऐसे ही कबूल कर ले अले बत सलाम ने भी बाज
[15:38]बातें अपने खास शयो के लिए करार दी खास का तर्जुमा मैं
[15:43]आपके सामने पिछली दफा कर चुका हूं यानी हर किसी की समझ
[15:45]में आने वाली य बात नहीं होती थी हो सकता है हता
[15:48]बजर हम यानी एक ही अकी के मानने वाले अफराद के शर
[15:53]के अंदर भी मुख्तलिफ फर्क है लेकिन उसकी क्या ताल होती है
[15:56]क्या हकीकत है फिलहाल हम उसको बहस नहीं करें लेकिन हमारे पास
[16:01]है कि हत्ता शिकम मादर के अंदर य जो इजाफा या कमी
[16:07]वाके होती है तलाम आपके जरिए होती है बारिश आपके जरिए बरसाई
[16:10]जाती है हड्डिया आपके जरिए जोड़ी जाती है टूटे दिल आपके जरिए
[16:17]जोड़े जाते यह मुबा नहीं है यह हकीकत बयान हो रही है
[16:22]कि इस कायनात का वजूद ल अगर हुज्जत इलाही ना हो तो
[16:28]जमीन अपने अहल के साथ तबाह बर्बाद हो जाए लेकिन इसके अंदर
[16:34]मेरा इयार नहीं है मेरे मानने ना मानने से मेरे अंदर कमाला
[16:37]आएंगे ना मानने से मेरे अंदर नक्स आएगा लेकिन यह हक जो
[16:43]अल्लाह ताला ने अहले बैत सला सलाम को तकन अता किया है
[16:50]इसके अंदर कोई जरर वाके नहीं होगा ब जा पहले गुस्ता कुछ
[16:53]मता की जानिब और फिर मैं आगे बढ अल्लाह ताला ने इंसान
[16:58]को खल्क किया किस लिए ताकि व अपने आप को जलमा से
[17:03]निकाल कर नूर की जानिब ले हमने जिस आयत की तिलावत की
[17:05]हम आत कुरसी के अंदर बच्चे बच्चे को हमारे याद है अल्ला
[17:10]लीना आमन मनर अल्लाह क्या है अल्लाह वली है यहां पर अपना
[17:18]ता ल से नहीं करा रहा यहां पर अपना ता ने से
[17:21]नहीं करा रहा बता रहा कि मैं कौन हूं मैं वली हूं
[17:25]किनका वली हूं किनका मौला हूं मोमिनीन का मला अब ये जो
[17:31]अल्लाह वली है मोमिनीन का क्या करता है नर वली का काम
[17:35]क्या होता है वली का काम यह होता है कि वह अपने
[17:39]मल्ला अल को जिसके ऊपर व विलायत रखता है उसको जुल मात
[17:45]से निकाल कर नूर की जानिब ले जाए अब यहां पर सबसे
[17:46]बड़ी मुश्किल क्या है मुश्किल इंसान की कि इंसान को अल्लाह ताला
[17:52]ने बातिर ल्क किया चाहे तो इस विलायत को कबूल करें चाहे
[17:55]तो इस विलायत को कबूल ना करे कबूल करेगा तो जलमा से
[18:01]नूर की तरफ का सफर तय करने लग जाएगा अगर कबूल नहीं
[18:06]करेगा तो रास्ता दूसरा क्या है रया जो इंकार करते इस विलायत
[18:15]का कुफ्र यानी हमेशा जाहिरी तौर पर यानी कुफ्र से मुराद य
[18:18]नहीं है कि इंसान बु की परस्तिश करे कुफर से मुराद क्या
[18:23]कु से मुराद उस विलायत के मातहत अपने आप को करार ना
[18:26]दे क्या होगा उसके औलिया कौन है उसका वली कौन है ता
[18:31]गूत है ये क्या करते हैं ये इंसान को नूर से जुमात
[18:39]की तरफ लेकर चले जाते हैं अब इंसान खुद अपने आप को
[18:46]चेक करे अगर वो किसी भी अमल से अपने आप को जुमात
[18:47]से निकाल कर नूर की जानिब लेकर जा रहा है इसका मतलब
[18:51]वो जो सफर तय कर रहा है व मात विलायत है और
[18:55]अगर वो अपने आप को देख र है कि मेरा कल गुजरा
[19:00]हुआ कल बेहतर था आने वाले कल से यानी आने वाला दिन
[19:03]रोज बरोज क्या हो रहा है नाज बिल्ला खुदान स्ता बदतर हो
[19:07]रहा है इसका मतलब क्या है कि वह जुमात से नूर की
[19:11]तरफ सफर त नहीं कर रहा बल्कि नूर से जुमात की तरफ
[19:16]आ रहा है और अल्लाह इन आयात के जरिए वाज कर रहा
[19:17]है कि हम ऐसा नहीं हो सकता कि हम एक कांस्टेंट हालत
[19:21]के अंदर रहे ना नूर से जुमात की तरफ जाए ना जुमात
[19:25]से नूर की तरफ जाए आपके सामने बहुत सारी इबारत इस तरह
[19:30]की मौजूद रि वाया जिसम ने फरमाया कि खसारे में है वो
[19:33]शख्स जिसके दो दिन बराबर हो दो दिन एक जैसे हो क्यों
[19:39]क्योंकि मोमिन व है कि जिसका हर आने वाला दिन उसे जुमात
[19:43]से नूर की जानिब लेकर जा रहा है क्यों क्योंकि वो जिनके
[19:45]मात विलायत है व अशरफ मखलूक है वो अल्लाह के खास बंदे
[19:51]हैं इसको य जेब नहीं देता कि इसके दो दिन एक जैसे
[19:56]हो जाए बच्चों के लिए मैं अपने छोटे भाइयों के लिए मल
[19:58]के साथ वाज कर मिसाल के र पर कल मैं कम पढ़ा
[20:02]था मैंने तो आज मुझे क्या होगा ज्यादा पढ़ना होगा कल मेरी
[20:06]नमाज के अंदर खुलूस नहीं था तो आज क्या होना चाहिए नमाज
[20:09]में खुलूस होना चाहिए कल मैं मेरी नमाज में मसलन खुलूस कम
[20:14]था आज खुलूस ज्यादा होना चाहिए परसों उससे ज्यादा होना चाहिए यानी
[20:17]आहिस्ता आहिस्ता मेरा रु मेरी तरक्की मेरे वजूद की तरक्की होती रहनी
[20:22]चाहिए हर आने वाला दिन मेरे गुजरे हुए दिन से बेहतर होना
[20:26]चाहिए अगर यह नहीं हो रहा एक जै भी देना तो इमाम
[20:30]फरमा रहे नुकसान में हो क्यों क्योंकि अल्लाह ताला ने तुम्ह एक
[20:33]सरमाया दिया वो सरमाया तुम्हारा जाया हो रहा है उम्र हमारा वक्त
[20:38]ये जमान जाया हो रहा है बस जब सरमाया जाया हो रहा
[20:43]है तो इसका मतलब क्या है कि तुम खसारे में हो तुम
[20:45]नुकसान में और फिर इमाम फरमाते हैं कि अगर किसी का आने
[20:49]वाला दिन यह तो बात थ कि दो बराबर दिन हो अगर
[20:52]किसी का आने वाला दिन बदतर हो उसके गुजरे हुए दिन से
[20:57]तो वो मलून है यानी इमाम मासूम लानत कर रहा है उस
[21:01]के ऊपर यानी अब अगर मेरी मिसाल के तौर पर परसेंटेज पहले
[21:03]कम आई थी गचे अगर मैं उसकी बात नहीं कर रहा कि
[21:08]मैंने कोशिश पूरी की थी लेकिन परसेंटेज दर हकीकत एक जाहिरी मजर
[21:11]है ना मैं सिर्फ मिसाल के लिए वाज कर रहा हूं हो
[21:14]सकता है किसी ने कोई मुश्किल पेश आ गई हो तो बिल
[21:16]फर्ज उसकी परसेंटेज कम हो गई हो लेकिन अगर मैं अच्छा नहीं
[21:22]पढ़ता था आज उससे भी बुरा पढ़ रहा हूं तो क्या हो
[21:24]जाएगा इसका मतलब है मैं पीछे हट रहा हूं मैं नुकसान यानी
[21:29]आप सर्च करें आप मैट्रिक में अगले साल आप किसम आएंगे फेल
[21:34]हो गए तो क्या करेंगे मैट्रिक में लेकिन आप इतने बुरे हो
[21:36]जाए कि सामने वाला बोले टीचर बोले प्रिंसिपल बोले कि नहीं भाई
[21:41]इसे मैट्रिक में भी नहीं रखो इसे क्या करो नाइन में लेके
[21:43]आ जाओ फिर क्या करो एट में लेके आ जाओ तो अब
[21:47]कितना यह शख्स नुकसान में होगा इंसान तसर करे अहले बैत अ
[21:52]सला सलाम का मानने वाला क्योंकि उनके तहत विलायत करार पाता है
[21:56]लिहाजा तहते विलायत करार पाने का मतलब क्या है कि यह जुमात
[22:03]से निकलकर बुराइयों से निकल कर नका से निकलकर कमाल की जानिब
[22:06]हरकत करता है हर दिन आने वाला बेहतरी की जानिब होता है
[22:11]हर रोज तरकी करता है पीछे नहीं हटता अपनी जगह पर ठहरा
[22:16]भी नहीं रहता हमेशा तरकी करता है हमेशा आगे बढ़ता है और
[22:19]अब क्यों क्योंकि य अल्लाह के तहत विलायत है और अब देखें
[22:25]अब थोड़ा सा बड़ों के लिए मैं बयान कर दू बच्चे भी
[22:27]सुने यह जो बाज दफा हमारे य या यही जो फजल बयान
[22:31]होते हैं बाज दफा कमाला अ बतला सलाम के बयान होते हैं
[22:36]इसके अंदर बाज दफा शुभ डाल दिए जाते हैं मसल तौहीद खतर
[22:41]में पड़ जाती है मसलन यानी यह हो गया तो मसलन अल्लाह
[22:44]के पास क्या बचेगा फर्क क्या बचेगा नहीं अल्लाह के पास ये
[22:48]कमाल जाती है अल्लाह को किसी ने अता नहीं किया अहले बतला
[22:53]सलाम को यह कमाल अता किया गया यानी अहले बैत की विलायत
[22:55]अल्लाह की विलायत के तूल में उसके उसके मुकाबले पर नहीं है
[23:02]यह अल्लाह की विलायत केल में व काम जो अल्लाह ताला क
[23:08]र अला अल्लाह जब रस अल्लाह को वली करार देता है जबला
[23:17]को वली करार देता है तो वली का काम भी यही बयान
[23:22]करता है यना ता करा अल्लाह वली है और कुरान में बा
[23:26]ार है अल्ला ही वली है कुरान में अल्ला हुल वली सिर्फ
[23:34]और सिर्फ अगर वली कोई है तो कौन है अल्लाह लेकिन दूसरी
[23:36]आयात हमारे सामने मौजूद है अल्लाह कह रहा है मैं वली हूं
[23:41]तुम्हारा वली कौन है अल्लाह है रसूल है वो लोग है जो
[23:46]ईमान लाते हैं और हालत रुकू में जकात देते हैं इसका मतलब
[23:49]क्या है यह बात टकरा नहीं रही है अल्लाह बता र है
[23:53]कि हा दतन अगर किसी के पास विलायत है तो किसके पास
[23:57]है सिर्फ और सिर्फ अल्लाह ताला के पास अब अब अगर यह
[23:59]विलायत अल्लाह ताला अपने खास बंदों को अता कर दे तो तुम्ह
[24:04]हक हासिल नहीं है कि तुम इनकी तहत विलायत से निकल आओ
[24:10]इनकी मुखालफत करो इनकी तात ना करो इनके उस मकाम इमत के
[24:13]ऊपर मकाम विलायत के परर शक करो क्यों क्योंकि तूल में अल्ला
[24:19]ताला की विलायत के जेल के अंदर है और जब कुरान रसल
[24:21]अल्ला को मुखातिब करता है क्या बयान करता है बिस्मिल्ला रहमान रहीम
[24:27]अलिफ लाम रा किताब रसूल य किताब हमने आपके ऊपर नाजिल की
[24:31]किस लिए नान वो काम जो किसका काम था अल्लाह का काम
[24:43]करना किसने रसूलल्लाह ने अंजाम देना है ने क्या नारा बुलंद किया
[24:54]था ला हुमा इला ला गलत नारा है गलत है गलत नारा
[24:59]नहीं कुरान की आयत हैला खुदा मुताल के सिवा किसी और को
[25:06]ह के हुकम नहीं है ह हुकूमत नहीं है किसके मुकाबिल बुलंद
[25:09]किया गया य नारा अल्लाह के करार दिए हुए हाकिम के मुकाबिल
[25:14]क्या फरमाया मला सलाम ने कलम बाल के बात सही कर रहे
[25:24]अल्फाज सही है लेकिन जो मुराद है वो क्या है वो गलत
[25:26]अल्लाह खुद आ अपने अकाम को इमेंट नहीं करेगा ना नहीं करेगा
[25:33]उसके लिए जरूरी है कोई अमीर हो कोई हाकिम हो कोई रहबर
[25:37]हो ला लोगों के लिए जरूरी है कि उनका कोई अमीर कोई
[25:43]रहबर हो कोई हाकिम हो जाहिरी तौर पर जिसके हाथ में कानून
[25:47]हो जिसके हाथ में हुकूमत हो और व इन कवानी को इंप्लीमेंट
[25:53]करे अब खवा का नारा बुल करना खवा क तो कोई हाकिम
[25:58]नहीं है लेकिन वो कह रहे इंप्लीमेंट भी आकर अल्लाह करे अमीर
[26:03]मोमिनीन उनकी मुराद को वाज करना चाह रहे बस य जो हिदायत
[26:10]का रास्ता है जो तकन अल्लाह ताला वली कर वली है उसने
[26:18]अहले बैत सला सलाम को वली करार दिया तन भी जब कह
[26:20]र रसूल अल्लाह को ये शरीयत हमने आपको अता की किस लिए
[26:25]वो काम जो अल्लाह का उनवान वली है वो रसूल आप अंजाम
[26:30]दे यह किताब हम आपको अता कर रहे इंसानों को जलमा से
[26:41]निकाल कर किसकी तरफ ले जाए नूर की जानिब ले जा और
[26:47]य इंसान जितना जितना अपने आपको अ बत की विलायत के मातहत
[26:50]करार देता जाएगा यह विलायत अता होती जाएगी नी र पर हमारे
[26:55]लिए जब तक न मौजूद ना हो किसी की विलायत तकनी हमारे
[27:01]लिए हुज्जत नहीं रखती लेकिन तशरीफ मौजूद है कि गै बत के
[27:09]अंदर विलायत के बाज मराब अहले बैत अ सलातो सलाम ने अपने
[27:12]ऐसे मानने वालों को अता किए जो उनके हलाल और हराम के
[27:18]ऊपर नजर रखते हैं जो उनकी तामा को सही जानते हैं जो
[27:20]अपनी हवा हस के ऊपर कंट्रोल रखते हैं जो अपने मौला की
[27:26]मुलक अतात करते हैं जो मुत्त होते हैं परहेज गार होते हैं
[27:31]जो आदिल होते हैं अहले बैत कुरान अहले बैत की तामा से
[27:32]सरशर होते हैं अब यहां पर भी अगर हमारे पास नस मौजूद
[27:38]है चाहे वो अकल के जरिए हो चाहे वो रिवायत के जरिए
[27:43]हो यहां पर इश्का नहीं बनता कि हम आके तराज करने लगे
[27:48]कि नहीं यह तो मसलन उन जैसे नहीं है हां ये उन
[27:49]जैसे नहीं है उन जैसा कोई नहीं हो सकता लेकिन उन्होंने कुछ
[27:57]इख्तियार इसको अ कि इसका मतलब यह नहीं है कि हम नाज
[28:01]बिल्ला मुकाय कर रहे हैं इसका मतलब ये नहीं है हम नाज
[28:02]बिल्ला मुकाबले पर लेकर आ रहे हैं जिस तरह बाज जो वहाबी
[28:07]फिक्र के अफराद है वो जब भी आप अहले बैत सला सलाम
[28:11]के फजल बयान करें वो समझते हैं अल्लाह के मुकाबले पर लाके
[28:14]आ रहे नहीं अहले बैत अला के बाद जो कुछ मौजूद है
[28:19]वो अल्लाह ताला का दिया हुआ है हां तकन मौजूद है उसके
[28:24]चंद जो मैंने बयान किया कि बा फलस मस ऐसे हैं जो
[28:27]हर जगह काबिल नहीं है कि हम हर महफिल के अंदर उसको
[28:31]आसानी से हल कर सके लेकिन हमारे पास न मौजूद है कैसे
[28:33]है यह हर किसी के बस की बात नहीं है क्या है
[28:38]यत ने हम बयान कर दिया बिल्कुल ऐसे ही यानी इंसान जितना
[28:43]जितना अपने आप को अले बैत की विलायत के मातहत करार देता
[28:48]जाए वो विलायत उसका हिस्सा बनती जाएगी वो सिफात उसके अंदर आती
[28:51]जाएंगी व कमाला इसके अंदर आते जाएंगे और जितना जितना य कमाला
[28:58]आते जाएंगे अहले बैत अ सलातो सलाम इसको दूसरों के ऊपर विलायत
[29:01]अता करते जाएंगे ये तकनी प्रोसेस है ये दूसरों की हिदायत का
[29:07]वसीला बन जाएगा ये दूसरों को जुमात से निकाल करर नूर की
[29:10]तरफ लेकर चला जाएगा शर्त क्या है शर्त ये कि खुद जुमात
[29:16]से निकल चुका हो खुद तारी कियों में ना डूबा हो खुद
[29:20]बुराइयों का शिकार ना हो तो ये फाद शय मोती नहीं होती
[29:25]यानी जिसके पास मेरे पास अगर कुछ नहीं है मैं आपको नहीं
[29:28]दे सकता लिहाज य विलायत और फिर व उस आयत का सहारा
[29:33]लेते हुए इमा [संगीत] रीला पाको पाकीजा है इनसे दूर है अब
[29:56]जितना जितना कोई इनके करीब होता जाएगा व भी क्या होगा से
[29:59]दूर होता जाएगा वो भी पाको पाकीजा होता जाएगा और जिस तरह
[30:06]अहले बैत सला सलाम पाक पाकीजा है यानी ताहिर है साथ साथ
[30:12]क्या है मुताहिर भी है यानी दूसरों को पाक करने की सलाहियत
[30:15]भी रखते देखि फ के अंदर हम कुल पानी की मिसाल दी
[30:21]जाती है ना कलील पानी हुकम के उनवान से सिर्फ कलील पानी
[30:24]क्या होता है कलील पानी वो होता है जिसके अंदर हल्की सी
[30:32]भी नजासत डल जाए रंग भू जायका तब्दील ना हो तो भीय
[30:35]पानी क्या हो जाएगा नजस हो जाता है कुर्बानी क्या होता है
[30:41]कि जब तक उसका रंग बू जायका तब्दील ना हो यह पानी
[30:46]नजस नहीं होता अब कोई एक ऐसा पानी तसर करें कि जिसका
[30:48]रंग बू जायका तब्दील नहीं हो सकता हो अब ऐसे कुण से
[30:55]अगर इंसान अपने आप को जोड़ दे देख देख एक तरीका क्या
[31:00]है पाकी का कि कलील पानी बिल नजस हो गया ना इसको
[31:04]कु से मुसल कर दो जैसे हीय कु से मुसल हो जाएगा
[31:10]कुल की सिफात इसके अंदर आ जाए अब यह पानी जो खुद
[31:15]नजस था उस इते साल के बाद ना सिय खुद नजस है
[31:21]बल्कि दूसरों को पाक भी कर सकता है ठीक है या जैसे
[31:25]मुसल हो गया से अब य खुद भी नजस नहीं है खुद
[31:29]भी माहिर है और दूसरों को भी पाक कर सकता है अब
[31:31]आ जाए हमारे असल दोबारा मौजू की जानिब अहले बैत सला सलाम
[31:36]को इंसान वो बहरे बेक तसर करे कि जिसके अंदर किसी नजासत
[31:42]का तसर मौजूद नहीं है ठीक है क्यों क्योंकि इनसे रिज को
[31:48]दूर कर दिया गया और जब दूर कर दिया गया अब जो
[31:52]इनके करीब जाता जाएगा इसका मतलब क्या है कि वो रिज से
[31:54]वो बुराई से वो जुमात से वो नापाक से व फशा मुकरा
[32:00]से दूर होता जाएगा और नेकियों की तरफ जाता जाएगा नूर की
[32:03]तरफ जाता जाएगा और एक मर्तबा व आएगा यह इतना उनसे मुसल
[32:08]हो गया है कि अब जो इसके नजदीक होगा वो भी नमाज
[32:14]से निकलता जाएगा वो भी बुराइयों से निकलता जाएगा हमारे पास है
[32:17]मोमन की सिफात य जब दूसरा मोमिन उसको देखता है तो उसे
[32:22]खुदा मुताल याद आ जाता है कैसे क्योंकि इसके अंदर व विलायत
[32:27]य अपने आप को से सड़ शल कर चुका ना सिर्फ ये
[32:31]कि खुद बुराई से दूर है बल्कि ये दूसरों को बुराई से
[32:35]बचाने का सबब है अच्छा दोस्त कौन होता है अच्छा दोस्त वो
[32:38]होता है जो हमें हम हमें बुराइयों से बचाए हमें अच्छाइयों की
[32:44]तरफ लेकर जाए ठीक है अब क्यों क्योंकि वो अहले बैत की
[32:49]सीरत पर अमल कर रहा है वो अहले बैत का मानने वाला
[32:50]है अहले बैत की विलायत के मातहत जब वो अहले बैत की
[32:54]विलायत के मातहत है तो वो अब हमें बुराइयों से बचाएगा अच्छाइयों
[33:02]की जानिब लेकर जाएगा बस ये सफर जो है अगर हम इस
[33:04]तरह तय करें यानी अपने आप को बुराइयों से निकालते जाए नूर
[33:08]की तरफ लेकर जाते जाए अच्छाइयों की तरफ लेकर जाते जाए और
[33:13]रिज से अपने आप को दूर करते जाए लिका उल्लाह खुदा मुताल
[33:15]की तरफ अहसन तकविम की तरफ अशरफुल मखलूक होने की तरफ ये
[33:19]सफर तय करते जाएं तो इसका मतलब क्या है कि ये सफर
[33:23]जो हमारा तय हो रहा है ये अहले बैत अल सलातो सलाम
[33:28]की विलायत के मातहत है और अगर ये नहीं हो रहा तो
[33:29]अपने आप को चेक करें आया खाली हम यानी वो जो दन
[33:33]है हमारा वो सिर्फ हमारी जबान का चटकारा तो नहीं है सिर्फ
[33:37]हम मजे के लिए सिर्फ तफरी के लिए अ बतला सलाम का
[33:42]नाजिला नाम ले रहे हो लेकिन उनके तहते विलायत अपने आपको को
[33:45]करार ना दे रहे बस यह जो आने वाले दिन है यह
[33:51]जो गुजरे हुए दिन है ये जो आने वाले दिन है उसके
[33:52]बाद माहे मुहर्रम ये सब वो मुनास बत वो असबाब है कि
[33:58]जिनसे जिनके अंदर अगर हम तस्सल करें अल्लाह ताला से अहले बैत
[34:04]सला सलाम से अपना राबता बरकरार कर ले तो बाकी दिनों की
[34:06]निस्बत ज्यादा आसान है क्यों क्योंकि ये अमला है अल्लाह ताला ने
[34:12]इनको अपने आप से मंसूब करार दिया इनको अपने औलिया से मंसूब
[34:15]करार दिया इसके अंदर कुदरत ज्यादा है इसके अंदर ताकत ज्यादा है
[34:19]अगर हम इन आयाम के अंदर कोशिश करें कि हमारा राबता अपने
[34:22]जमाने के इमाम से हो जाए हमारा राबता अले बैत सला सलाम
[34:26]से बन जाए हमारा ता खुदा मुताल से बन जाए हम इलाही
[34:31]सिफात को हम अलवी सिफात को अपने वजूद के अंदर ढालना शुरू
[34:33]कर दें तो अब यह सफर बाकी साल की निस्बत ज्यादा आसानी
[34:39]के साथ ज्यादा सुरत के साथ कम हजीना देकर कम वक्त लगाकर
[34:45]कम मेहनत कर कर क्यों क्योंकि अल्लाह ने हमें ये बहाने अता
[34:47]किए अल्लाह ने ये मुनास बत अता की है किसी तरह हम
[34:50]अपनी फितरत की तरफ पर लड़ जाए किसी तरह हम अहले बैत
[34:54]अल सलातो सलाम की तरफ पलट जाए किसी तरह हम खुदा वंदे
[34:55]मुताल की उस हका नियत की जाने सफर शुरू कर दे इंशाल्लाह
[35:00]खुदा मुताल से दुआ है कि खुदा मुताल इन आने वाले आयाम
[35:06]के अंदर हमें यह तौफीक अता करे कि हम रोज बरोज ज्यादा
[35:11]से ज्यादा सुरत के साथ अहले बैत अ सलातो सलाम के कुर्ब
[35:13]को हासिल कर सके खुदा मुताल ये तौफीक अता करे कि हम
[35:19]अहले बैत अ सला सलाम के कुर्ब हासिल करने के जरिए रोज
[35:24]बरोज लाह की मंजिल और कुर्ब इल्ला तक रसाई पैदा कर सके
[35:26]मुताल इन अम के सदके हमारे तमाम गुना सगीरा कबीरा को माफ
[35:33]फरमाए हमें रोज बरोज नेकियों की तरफ कदम बढ़ाने तम की तरफ
[35:38]सफर करने की तौफीक नसीब फरमाए दुनिया में जहां जहां मोमिनीन कुफर
[35:42]तबार के खिलाफ त के खिलाफ बड़सर पकार है खुदा मुताल उनको
[35:49]मजीद मदद नुसरत अता फरमाए हम सबको उनकी हिमायत की तौफीक नसीब
[35:53]फरमाए दुनिया में जहां जहां कुफर इतक बार आलम इस्लाम के खिलाफ
[35:56]मुस्लिमीन के खिलाफ साजिशें कर रहे हैं अभी आपने देखा कि एक
[36:03]जगह कानूनी तौर पर बकायदा कुरान की तौहीन कराई गई खुदान मुताल
[36:07]इस्लाम के खिलाफ इन तमाम साजिशों को कुफल और इस्तकबाल की जानिब
[36:13]पलटा दे हम सबको उनकी मुखालिफत उनके खिलाफ उनके जुल्म बरबरी के
[36:17]खिलाफ उनके तहीन के खिलाफ सदाए एतजाज बुलंद करने की तौफीक अता
[36:23]फरमाए हम सबका शुमार इमाम जमाना के आवान अंसार में फरमाए इंकलाब
[36:26]इस्लामी को इमाम जमाने के आलमी इकलाब से मुसल फरमाए रोज बरोज
[36:33]इस इंकलाब को मजीद तरक्की और रु अता फरमाए हम सबको इसकी
[36:35]हिमायत की तौफीक नसीब फरमाए इमाम जमाना के जहूर में ताजल फरमाए
[36:43]हम सबको उनकी राह में शहादत नसीब फरमाए रना तकल मना इमरत
[36:47]या अरहम रान पर मोहम्मद मोहम्मद सवात
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