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Safar e Imam hussain A.S kay Ehdaf | H.I. Dr. Syed Muzafar Hussain Rizvi
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في
محاضرات
Record date: 19 Feb 2023 AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/almehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:14]बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अली सलाम [संगीत] बक्शी की हम इस गुनाह को
[1:10]मसरूफ याद के दौर प्रस्त के दौर में जहां इंसान अपनी जिंदगी
[1:25]आलम सलाम के सीरत उनके अखबार के हवाले से इस तरह तबीयत
[1:36]ही प्रोग्राम बिल्कुल सैयद शाहदरा इमाम अली मकाम इमाम हुसैन alaihissalato वसल्लम
[1:52]के मकसद और हड़प को जिसमें आप खुद इसी इस्लाह का जिक्र
[2:00]करके मदीना छोड़ रहे हैं और आज हम और आप यहां जमा
[2:04]है या दुनिया भर में जहां जहां दिन के हवाले से प्रोग्राम्स
[2:09]का नकद होता है सेमिनार इसका कॉन्फ्रेंस का और इस तरह तरह
[2:16]की कुर्बानी की क्या आपकी कुर्बानी रेगा नहीं गई की जाहिर लोगों
[2:24]ने समझा की शायद सैयद शाहदा दुनिया से रुखसत हुए यजीद जाहिर
[2:29]कामयाब हुआ नहीं आज ये सब कुछ बता रहा है की नहीं
[2:34]हुसैन कामयाब हो गए हुसैन जिस मकसद को लेकर चले द वो
[2:37]मकसद यही था की इस्लाह करें तरबियत करें उम्मत की तरबियत करें
[2:43]ये जो कुछ भी हो रहा है तरबियत ही प्रोग्राम सैयद शाहदा
[2:45]की उसे कुर्बानी की कामयाबी की निशानी है हमारा मौजूद इमाम अली
[2:54]मकाम इमाम हुसैन अली shahto अस्सलाम के सफर जो मदीने से मक्का
[3:01]और मक्का के अंदर आप देख कुछ अरसा गुजारा इस इन वैन
[3:03]से गुफ्तगू और क्या द आपके सफर के इस मौजों पर गुफ्तगू
[3:09]करेंगे इंशाल्लाह चंद मार जाता आपके सामने पेश करूंगा क्या द तीन
[3:21]तरह के अपराध है तीन तरह के फिट रखने वाले लोग हैं
[3:26]की जिन्होंने सैयद shahdab के सफर और उनके कायम के makkasit को
[3:30]बयान किया एक तो तब का वो है जो बुक्स में बहुत
[3:38]कुछ बयान कर चुका की हुसैन का मकसद क्या था एक तबक
[3:40]वो है जिन्होंने शहीदों के मकसद और hadab को समझा और कहा
[3:45]की यह आदमपुर मकसद था एक तब का दरमियां समझते हुए मैरिफत
[3:51]हुसैन narakate हुए अपनी जान से कुछ ताजी याद करके कुछ आधार
[3:56]पर makashit करके हुसैन का मकसद ये था हालांकि यह तीनों आदाब
[4:00]और मक्का से अपने जहां और अपनी फिक्र के मुताबिक पेश कर
[4:03]रहे हैं वह तब का की जो सैयद शाहदरा के और आलम
[4:07]मोहम्मद से बर रखता है वो तबका तो ये कहता है नज़र
[4:12]आता है की हुसैन का मकसद कायम का मकसद सफर का मकसद
[4:17]तदार पर काबिज होना यानी [संगीत] पर खुद आना चाहते द या
[4:27]जिस तरह की दो shehjadon की जंग थी कोई ऐसी की बड़ी
[4:29]अहमियत नहीं रासउल्लाह अफराद है जिन्होंने हुसैन की hakimt नहीं राखी उन्होंने
[4:40]भी कुछ याद पेश किया जिस तरह ईसाइयों का कॉन्सेप्ट रहमान का
[4:47]वो कहते हैं हज़रत इस alaihissa तू सलाम ने अपनी जान दी
[4:49]और अपनी उम्मत के गुनाहों को bakswa दिया हज़रत इस ने अपने
[4:56]आप को सूली पर चड्ढा दिया और उसका मकसद क्या था [संगीत]
[5:02]गुनाहों से पाक कर दिया कुर्बानी हज़रत इस दे रहे हैं और
[5:07]गुनाह जो है उम्मत के हो पाक हो रही और यही bimarifat
[5:11]कुछ लोग हैं जो ये कॉन्सेप्ट रखते हैं की संयुक्त सौदा ने
[5:14]उम्मत की बक्शीश के लिए कुर्बानी पेश की तो शहादा की कुर्बानी
[5:21]के बाद उम्मत की बक्शीश हो गई अब हमें कुछ करने की
[5:28]जरूरत नहीं है इसलिए तो श्रद्धा का खून आपके कुर्बानी आपके खान
[5:32]वादे की कुर्बानी यह बता रही है की आपने उम्मत के गुनाहों
[5:35]के बख्शीश के लिए कुर्बान हुए हैं आप और आपके कुर्बानी से
[5:40]उम्मत के सारे गुनाह बख्श दिए गए और अब आप कुछ करने
[5:44]की जरूरत नहीं है जो मक्का से खुद बयान किए उससे कुछ
[5:54]ताजिया करके पेश करता है की इमाम हुसैन का मकसद क्या था
[5:56]उसमें से जो उन्होंने समझा खुद अपने ताजिया के मुताबिक की संयोजन
[6:05]के भैया तालाब की गई थी यजीद ने 72 अब मदीना रहने
[6:07]के काबिल ना रहा और हुसैन मदीने में रहते तो कत्ल हो
[6:14]जाते लिहाजा हुसैन जान बचाकर मदीना छोड़ के निकल गए क्योंकि यजीद
[6:21]ने हुकुम दिया था गवर्नर को मदीने के गवर्नर को की अगर
[6:27]इतना करें तो सर कलम कर दो तब हुसैन के पास कोई
[6:30]चारा ही नहीं था वो क्या करते मदीना ना छोड़ते इसलिए की
[6:33]सर कलम करने का हुकुम था लिहाज ना जान बचाने के खातिर
[6:38]मदीना छोड़के मुताबिक अपने कोटा फिक्री के मुताबिक जो है यह पेश
[6:46]कर रहे अफसोस का मकान तरीके से मदीना छोड़ के निकले द
[6:57]क्या ना किया और खामोशी से जान बचाकर निकल गए अंदाज़ में
[7:00]जब इतना बड़ा काफिला लेकर निकल रहे हैं और मारूफ रास्ते से
[7:07]मक्के की जानिब जा रहे हैं आप अकेले जाते जिस तरह दूसरे
[7:10]असम में अब्दुल्ला जिनके बारे में खामोशी से मक्के की तरफ चले
[7:20]और गैर मारो रास्ते से जान बचाकर निकल गए की जहां पर
[7:27]इंसान जान बचाता वर्ण तो कत्ल कर दिए जाते या भैया कत्ल
[7:34]कर देंगे क्या किया बिल्कुल नहीं किया आप तारीफ को देखें बुलाया
[7:40]था गवर्नर तीन asahvikaran को तीन शख्सियत को तालाब किया था उनके
[7:49]नाम लिखा था और गए कौन दरबार में गवर्नर के दरबार में
[7:57]सिर्फ संयुक्त सौदा गए बाकी तो जान चुके द की क्या होने
[7:59]जा रहा है और बहुत बड़ा काफिला लेकर निकले जो जवान है
[8:12]वो भी मौजूद है तो एक बड़ा काफिला निकल रहा है तो
[8:15]इसमें कोई नहीं का सकता है की खामोशी से हुसैन निकले इसलिए
[8:17]हमें पता ना चला और आप अपने हिसाब से ताज़्जिया करें की
[8:23]हुसैन क्यों निकले अब आओ ये सैयद शाहदा कुछ का के निकले
[8:29]हैं अपने हड़प को बयान किया है सैयद सौदा ने या नहीं
[8:31]तो बाजे अंदाज़ में जगह-जगह मुखड़े मकाम आकर बिल्कुल जनाबे hannafiya को
[8:36]वसीयत करते हुए अपना वसीयतनामा जो दिया है उसमें भी ये बजे
[8:41]अंदाज़ में आपने बयान फरमाया innilam वाले मैन हर्ष तू लिटिल रसूल
[8:57]अल्लाह रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहके निकल रहे हैं लोगों सन
[9:19]रहा मैं क्यों मदीने छोड़ के जा रहा हूं तो आपने ऐलान
[9:24]फरमाया की innilamma खुश मैं नहीं निकल रहा फसाद के लिए कोई
[9:30]ikhtedar के लिए कोई ताकत की वजह से निकल रहा हो या
[9:34]कोई फसाद करना चाहता जुल्म करना चाह रहा हूं की आप कहेंगे
[10:03]इसलिए निकले द आप कहे इसलिए निकले द वो इमाम हुसैन इसलिए
[10:07]कायम कर रहे द जब किसी के सोड़ा khudwaji अंदाज़ में बयान
[10:09]करने में तो उम्मत की सलाह करने तो यह सारे ताज़्जिया जो
[10:16]है इनकी कोई वैल्यू नहीं रही जब saiyuddh सोड़ा खुद बयान करके
[10:18]निकल रहे हैं और दूसरी बात यह नहीं की आप हॉर्स से
[10:22]निकल रहे हैं या या की आप अचानक निकल रहे क्योंकि bhaiyaat
[10:26]का हुकुम हुआ और सही तो यशोदा के पास चारा नहीं था
[10:30]चलो नहीं यजीद बर्सर ektada अचानक आया ना saiyuddh शोहदा का कायम
[10:36]अचानक हुआ सैयद shahdab भी पहले से कायम की तैयारी कर रहे
[10:41]द बल्कि यजीद के दौर खिलाफत दो साल पहले मक्के की सरजमीं
[10:47]पर मीणा के मुकाम पर आपके खुद बात अपने लोगों को जमा
[10:51]करके आपने फरमाया लोगों यजीद के खिलाफत दो साल पहले saiyuddh शोहर
[10:57]बयान फार्मा रहे हैं की लोगों दिन पर अमल नहीं हो रहा
[11:04]मैं देख रहा हूं की यह आहिस्ता-आध दिन को खत्म करना चाहते
[11:09]सीरते रसूल पर अमल नहीं हो रहा सीरत आमिर नहीं हो रहा
[11:16]यह वहां से अंदाज़ में आपका बयान है की जो कुछ हो
[11:19]रहा है वो आईने दिन नहीं है इस्लाम नहीं है बल्कि इस्लाम
[11:23]के हाथी के चेहरे को मास करके पेश किया जा रहा है
[11:28]इसका मतलब ये हुआ की सैयद सौदा ने कोई अचानक यजीद की
[11:32]भैया की वजह से यजीद के मुकाबला में सामना ए नहीं आप
[11:38]पहले से तैयार द आप मौके की तलाश में द हर चीज
[11:41]का एक मौका माहौल होता है हर जगह हर बात नहीं की
[11:45]जा सकती हर जगह हर कोई एग्जाम नहीं उठाया जाता एक मौके
[11:49]की तलाश होती है की कब मौका मिले तो ये कम का
[11:50]अंजाम इधर यजीद ने भैया तालाब की इधर से ये दुश्मनी से
[11:54]तैयार द की जो कुछ यजीद ने करना है वो 2 साल
[11:59]पहले से आपने बयान किया था की क्या होने जा रहा है
[12:03]दिन के साथ क्या हो रहा और आगे 2 साल बाद जब
[12:07]यजीद आएगा तो उसने क्या करना सल्लाला [प्रशंसा] हु आपका वो बेहतरीन
[12:25]खस्मा हसन के हमेशा माय हो जालिम के साथ हमेशा बरसाना बेकार
[12:40]रहो मददगार के चले गए यहां से कैसे मुमकिन है की हुसैन
[12:52]किसी जालिम के हुकूमत पर खामोशी से रहे तो ये सारी चीज
[12:55]अचानक हुसैन को चूंकि भैया तालाब हुई थी तो और कोई चारा
[12:59]नहीं था फिर कायम भी करना था नहीं द सफर का आगाज
[13:23]किया संयुक्त सौदा मदीने से कहीं और चले जाते हैं मक्का क्यों
[13:27]गए जानते हैं की अब मैं जो मैसेज देना चाह रहा हूं
[13:29]अब मैं जो कायम करना चाह रहा हूं की पुरी दुनिया के
[13:34]मुसलमान तक मेरा पैगाम अगर पहुंच सकता है तो वो बेहतरीन जगह
[13:36]मक्कतुल मुकर्म वो मरकज है वहां दुनिया भर के मुसलमान भाई तो
[13:43]अल्लाह के जियारत के लिए तशरीफ़ लेट वहां जाकर अगर मैं अपना
[13:48]पैगाम दूंगा तो वो दुनिया भर के मुसलमान मेरा पैगाम हर हर
[13:51]जगह तक पहुंचाएंगे तो बेहतरीन जगह हुसैन के कायम के लिए और
[13:58]हुसैन पहले जुमले में यहां पर ये बिकाऊ जैसे मैंने शुरू में
[14:01]कहा था उससे कोई गलतफहमी ना हो की हुसैन को हुकूमत नहीं
[14:09]चाहिए हुसैन हुकूमत के लिए नहीं जा रहे द आप मुझे बताएं
[14:24]तो उसके लिए जरूरी है की हुकूमत भी हो तो इस तरह
[14:30]नहीं है की हुकूमत नहीं चाहिए थी रोको मत चाहिए थी तभी
[14:36]तो हमने कायम किया और कायम में क्या करना था उसे उम्मत
[14:38]को आमादा करना था की अजीब जैसा बाद वक्त इंसान बरसे लायक
[14:45]नहीं है लिहाज तुम कायम करो जब कायम होगा सब हुसैन का
[14:50]साथ देंगे तो हुसैन ही रह पाओगे हुसैन ही कैद होंगे हुसैन
[14:55]ही हकीम होंगे तो हुसैन तो हुकूमत मिलेगी हुसैन को तो फिर
[14:58]आप पूरे मुल्क के अंदर पुरी दुनिया के अंदर इस्लाम को फैला
[15:02]सकते हैं तो इस तरह समझे की हुसैन को हुकूमत नहीं चाहिए
[15:08]थी नहीं हुकूमत बहुत जरूरी है गहरी हुकूमत हो तो उससे बड़ा
[15:13]कम हो सकता है वो अलग बात है की आयु में तारीख
[15:17]तो साला हमको जाहिर हुकूमत से mainroom कर दिया गया उनके हक
[15:21]कर दिया गया सरकारी दो जहां मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम किया
[15:37]उसके बाद फिर आहिस्ता दिन को mukhtalim मकान पहुंचा इसलिए की आप
[15:45]हुकूमत बरसाने आपके पास फौज है आपके पास लश्कर आपके पास फॉलोअर्स
[15:50]तो यह वाला जुमला ये गलतफहमी में ना हो की हुसैन को
[15:54]इतजार नहीं चाहिए था एक कदर क्यों चाहिए था ikhtedar दो तरह
[15:59]के लोग हो जाते हैं एक ikhtedar इसलिए चाहते हैं की अपनी
[16:02]दुनियादारी पैसे कमाए दौलत कमाए और बादशाह हाथ करें एक दफा या
[16:10]रसूलुल्लाह कूफा जब दाखिल हुए तो लोगों को ऐलान करके कहा लोगों
[16:27]मैं अली अपना bitalib इस वक्त दाखिल हो रहा हूं कूफा में
[16:32]जिस हाल में दाखिल हो रहा हूं देखो मेरे पास क्या है
[16:34]मेरे पास एक सवारी है मेरे पास जो समान आप देख रहे
[16:39]हैं बस कल मैं यहां से जाऊं अगर इससे ज्यादा मेरे पास
[16:43]देखोगे तो समझ लेना मैंने सब किया है यही इसी हालत में
[16:49]जाऊंगा मैं कोई ikhtedar में आने के बाद कोई mohallat बना के
[16:53]दौलत का mamuga नहीं जैसे अमीर दाखिल हुए हैं जब जाएगा इस
[16:58]मुल्क से तो वैसी कैफियत में जाएंगे तो फिर समझ लेना की
[17:01]अदालत के साथ हुकूमत हुई तो वो अदालत कायम करने के लिए
[17:06]हुकूमत जरूरी है तो सैयद सौदा तो पहले अमन उसे अदालत के
[17:11]लिए लोगों को हम वादा करना चाह रहे हैं लिहाज आपने सफर
[17:13]का आगाज क्यों किया मदीने से मक्के की तरफ उसकी वजह यही
[17:19]थी की आपका कायम आपका पैगाम पुरी दुनिया तक पहुंच सके और
[17:23]आप गए भी गवर्नर के दरबार में भी गए बुलाया तो तीन
[17:28]अपराध को था तीन के नाम द लेकिन एक ही दो में
[17:33]पहले ही समझ लिया था की क्या होने जा रहा है सही
[17:36]तो शहर ने कहा तुम्हें जाऊंगा और आप गए और आपने गवर्नर
[17:38]को भी बता दिया की अगर आप मुझसे बेहतर कर रहे हो
[17:42]तो ठीक है कल जब लोग जमा होंगे तो वहां पता चलेगा
[17:46]की कौन हकदार है भाई आज किसे कहते हैं छोटे बच्चे हमारे
[17:51]सामने बैठे हैं लब्ज भैया का नाम तो सुनते bhaiyaat का मतलब
[17:54]क्या है बास का मतलब जब हाथ उनके हाथ में देते हैं
[17:56]तो उसका मतलब मैंने अपने आप को बेच दिया है गहरी ऐतबार
[18:01]से यानी मैंने अपने आपको भेज दिया आप कहेंगे जंग करो तो
[18:12]जंग करो आप कहेंगे जंग नहीं करना तो जंग नहीं करना यानी
[18:16]मैं अपने आपको आपके मोती करार दे रहा हूं आप मेरे आका
[18:21]है मुमकिन है की सैयद शाहदा अपना हाथ ये सैयद shohuda कहा
[18:26]तो नहीं है इमाम हुसैन को सिर्फ तन्हा अगर हाथ देना होता
[18:31]तो भी मुमकिन ना था तो यहां तो फकत तन्हा हाथ हुसैन
[18:35]का नहीं है ये हाथ आदम alaihissalah तो सलाम का है ये
[18:40]आदम से लेके खत्म तक तमाम अंबिया का हाथ हुसैन का हाथ
[18:44]है आज अगर हुसैन का हाथ उधर जाता तो ऐसा होता की
[18:47]सारों के हाथ में मूसा अपना हाथ दिया है रसूल अल्लाह ने
[18:53]अपना हाथ दिया मुमकिन नहीं है जुमले बता रहा है की ऐसी
[19:02]मिस्त्री करता था जितने अंबिया गुजरे हैं वो हुसैन वो अपने-अपने जमाने
[19:24]के हुसैन और उनके जमाने में जो-जो उनसे टकराया वो उनके जमाने
[19:27]के यजीद है लिहाजा सैयद शाहदा यह देख रहे हैं की अज़ीज़
[19:37]जो मांग रहा है कोई मामूली बात नहीं कर रहा और हुसैन
[19:42]मुमकिन है की वहां दे सके निकले मरवाने बैठा हुआ था उसने
[19:58]हकीम से कहा बेहतरीन मौका है सर कलम कर दो अभी हुसैन
[20:03]निकल गए तो फिर हाथ नहीं आएंगे और यह जुमला आवाज़ बुलंद
[20:10]की और बनी हाशिम के जवान दाखिल हो गए तलवारे लेकर सैयद
[20:15]सौदा ने जवानों को रोका रुक जाओ तुम्हारी जरूरत की तुम ये
[20:23]जुमला कहो खुदा का असर कलम कर दो ज्यादा ऐलान करके निकले
[20:29]हैं ऐसा नहीं है की कोई अचानक खौफ था की अब मार
[20:33]दिए जाएंगे तो फिर आपने कहा की चलो अब क्या करूं मदीना
[20:35]छोड़ दो एक था और जो आपने बयान कर दिया अब आप
[20:46]सवाल ये है की रसूल खुदा की उम्मत की सलाह किस बात
[20:52]पे करना चाह रहे क्या हुआ है उम्मत को क्या उम्मत नमाज़
[20:55]नहीं पद रही थी बेहतरीन नमाज पढ़ रही थी हर मस्जिद में
[21:00]नमाज़ हो रही थी क्या उम्मत रोज़ नहीं रख रही थी तो
[21:06]रोजे भी तो रख रही थी क्या उम्मत हज वजह नहीं ला
[21:09]रही थी तो हज के लोग ए रहे द जो जॉन गा
[21:14]रहे इतनी jhakaat भी दे रही बताओ अमल कर रही है तो
[21:19]जब उम्र सारे किस तरह की सलाह करना चाहते हैं क्या खराबी
[21:25]है जिसकी सलाह करना चाहते हैं नमाजे रोजा हज जकात जो आज
[21:31]भी हो रहा है उसे वक्त भी हो रहा था पता चला
[21:34]की नमाज़ रोजा हज जकात काफी नहीं है hajjaka दिया इबादत फकत
[21:47]काफी नहीं है या आई हो अल्लाह दिन तक साहिबा ने ईमान
[21:58]वालों तकवा इख्तियार करो इमाम बिली muttabi हो गई अब चौथा जो
[22:37]है कम है वह सबसे हम है तो पता चला की उसे
[22:47]वक्त सारा कुछ हो रहा था नमाज़ ज़कात सब कुछ हो रहा
[22:51]था जो नहीं हो रहा था वो क्या हो रहा था kunuma
[22:53]asadiki मंजिल पर नहीं द सैयद तो सोड़ा यही कहना चाह रहे
[22:58]सच्चे को छोड़ के यजीद जैसे की बैट कर रहे हो तो
[23:03]कुरान हमें ये आवाज़ दे रहा है की देखो इस खुश प्रेमी
[23:07]में मुतला ना होना के नमाजे बहुत पड़ी है रोजे बहुत रखें
[23:12]हज भी बहुत किया ज़कात भी दे दिया है सारी लेके अंजाम
[23:14]दिए अगर बच्चों के साथ ना हो तो क्या हो के साथ
[23:21]नहीं है तो कुछ भी नहीं है देखो तुम्हारी नमाजे रोजा हज
[23:27]का सब कुछ हो रहा है और हुसैन कब छोड़ के जा
[23:35]रहे हैं वह काबे का तवाफ कर रहे हैं हुसैन काबे को
[23:36]बचाने जा रहे हैं तवज्जो है लोग खुश काबे की तरफ सफर
[23:43]कर रहे हैं की काबे का तवाफ करें और सवाह हासिल करें
[23:46]सैयद शौहुदा काबे को बचाने के लिए सफर कर रहे हैं तवाफ
[23:53]करके शबाब कम ना है की काबे को बचाना ज्यादा काबे के
[24:00]हुरमत को पीएमएल होता कब बचेगा तो फिर तवाफ होगा काबे की
[24:05]हुरमत बचेगी तो तवाफ होगा नमाज बचेगी तो मस्जिद होंगी तो नमाज़
[24:11]होगा आज यहां नमाज़ हो रही है सैयद सौदा की मारहाण ने
[24:14]मिलना था से लेकर जो अदाओं पर मक्का से यजीद के द
[24:19]वो आहिस्ता-आहिस्ताव आते हो रहे द और यजीद ने जो कुछ भी
[24:26]किया उसमें यही चीज आज उम्मत इस तरह मतलब नहीं है की
[24:29]मस्जिद जिसका इतना है की आज अगर कहीं पर मस्जिद गिरने की
[24:34]बात होती है तो सारे मुसलमान खड़े हो जाते हैं हम मस्जिद
[24:38]को गिरने नहीं देंगे बहुत अच्छी बात है मस्जिद का मकाम मर्तबा
[24:41]है लेकिन यही जब मस्जिद है नबवी में घोड़े बंधवा रहा था
[24:47]जब यह यजीद मस्जिद को पीएमएल कर रहा था अज़ान बंद हो
[24:52]गई थी 3 दिन तक मस्जिद अभी मैं अज़ान नहीं हो रही
[24:56]थी रोज़ रसूल की जो है पे hurmati हो रही थी मुसलमान
[25:00]क्या कर रहे द वैसे तो मस्जिद है ना आज एक गली
[25:05]में भी अगर आपने मस्जिद बनाई नाम मस्जिद कहा गया तो मुसलमान
[25:07]जान देने के लिए तैयार होते हैं मस्जिद ए नबवी तो तमाम
[25:12]दुनिया की masajjat में मुक़द्दस तरीन मस्जिदों में से एक मस्जिद मस्जिद
[25:18]नबी कर रहा है मुसलमान खलीफ़ातुल मुस्लिम का रहे हो उसे हुसैन
[25:22]अली शाह तो सलाम यही जुमला का रहे हैं तुम देख नहीं
[25:26]रहे हो मस्जिद नबवी को पीएमएल जो हुसैन पहले देख रहे द
[25:38]लोग तो बाद में जाकर समझ गए की हुसैन ने जो पहले
[25:42]बुलाया था सैयद शोहरत चीजों को जानते हुए अपने टारगेट और मकसद
[25:50]और हड़प को muaaiyan करने के बाद मदीना छोड़ के निकले तकलीफ
[25:55]है हुसैन को की मदीना छोड़ रहे हैं की मेरे हबीब तुम
[26:06]बार-बार मक्के की सर जमीन की तरफ देख रहे हो यानी बता
[26:12]रहे हो की मक्का अगर ये जालिम ये मुशरिकीन मक्का मुझे मजबूर
[26:14]ना करते तो एक खुदा की सरजमीं है मक्का तुल मुकर्रमा मैं
[26:20]तुझे छोड़ के हरगिज़ ना जाता हुसैन रसूल अल्लाह को भी बड़ा
[26:25]अरमान था बहुत तकलीफ थी की मक्का छोड़ के आपको मदीना जाना
[26:30]पड़ा अभी मदीना मदीना मुनव्वर ना था अभी मक्के की फजीलत थी
[26:33]मदीना मदीना मुनव्वर तो रसूल के आने के बाद हुआ है रसूल
[26:37]अल्लाह कहते द की मैं मक्का छोड़ रहा हूं मुझे ये तकलीफ
[26:40]है लेकिन क्या करूं मजबूर जालिम इस बात पर मजबूर कर रहे
[26:45]हैं और का रहे द की सर जमीन ए नाना के शहर
[26:53]में तुझे छोड़ के जा रहा हूं ये बहुत ना गवार है
[26:54]मेरे लिए लेकिन मुझे कायम करना है मुझे जुल्म के खिलाफ होना
[27:00]है और उसके लिए लाजिम है की मैं मक्का जाऊं और मक्के
[27:05]की सरजमीं पर जा के अपने पैगाम को पुरी दुनिया तक पहुंचाओ
[27:07]की मैंने यजीद के खिलाफ कायम का ऐलान किया है दुनिया भर
[27:13]के मुसलमान तक मैसेज जाए और अब जो भी साथ देने के
[27:16]लिए ज्यादा 28 तारीख लिखिए से मुलाकातें करते खुद लिखते हैं बसरा
[27:43]वालों के लिए उनके सरदारों के लिए आपने खुद खत भी लिखा
[27:48]है उन चार साधे चार महीने के अंदर आपने लोगों से मुलाकातें
[27:53]की लोगों को मत जो है दावत दी कायम के दावत दी
[27:58]और यजीद की हुकूमत के बारे में बताया दुनिया को यजीद के
[28:03]किरदार को दुनिया के सामने पेश किया सबक अपने आप को नबी
[28:07]का नुमाइंदा करार दे रहा है तो हुसैन को गवारा ना था
[28:18]की नाना के दिन को मास करके दुनिया के सामने बुराई समझता
[28:24]नहीं था जहां तक के गवर्नर साहब मुसल्ले में शराब की बोतल
[28:30]लपेटे नमाज़ पढ़ते द और जब तीन की जगह उन्होंने चार पढ़ा
[28:38]दी तीन पढ़ा दी किसी ने अब अगर कोई कहता है पीछे
[28:42]से माशा अल्लाह पीछे नमाजी तो सब अच्छे अच्छे नमाजी नाका मोहतरमा
[28:46]क्या कर दिया हमने तो फजर की दो की जगह आपने तीन
[28:50]पढ़ा दी तो अब उसको एहसास नहीं हुआ की मैंने तीन पढ़ा
[28:52]दिया गलत किया वो कहते हैं चार पढ़ा डन और पढ़ा डन
[28:56]कहो तो मैं और पढ़ा डन उसको अहमियत नहीं ना बस इसलिए
[29:00]की जो मुसल्ले पर शराब लेकर ए जाए और सब देख रहे
[29:06]हैं की शराब में नशे में चूर है उसको अपनी गलती का
[29:10]एहसास नहीं हो रहा है बल्कि उल्टा मजाक उदा रहा है दो
[29:11]नहीं तो अब इस इंसान को लोग कैसे बर्दाश्त कर रहे हो
[29:18]सैयद शहर इंसान की इस गफलत को खत्म करने के लिए निकले
[29:24]और इस गफलत और इस हालत और सुस्ती की इतना कुछ होता
[29:33]देख रहे हैं और फिर भी खामोश है जिस पर आज माशा
[29:38]अल्लाह हमारे पाकिस्तान की आवाम को आप देख ले आए दिन जुल्म
[29:43]के पहाड़ तोड़े जाते हैं मजदूर गरीब आदमी गुरबत की जो है
[29:48]लकीर से नीचे जा रहा है लेकिन जुल्म के खिलाफ आवाज़ बुलंद
[29:51]करने के लिए तैयार नहीं है इस तरह जब सो जाती हैं
[29:57]तो इसके लिए इनको जगाने के लिए बेहोश होता है इंसान उसको
[29:59]पानी की छिड़काव करते हैं तो वो होश में ए जाता है
[30:04]लेकिन जब खोमेटे ऐसी सो जाती हैं और उनका जमीर मुर्दा हो
[30:10]जाता है तो उनको पानी की चित नहीं खून की चित लगानी
[30:13]पड़ेगी अभी मुझे खून देना होगा उन्होंने कसम खाई कहा की हम
[30:38]घर नहीं जाएंगे जब तक अपनी जान कुर्बान ना करेंगे 3000 का
[30:41]रिवायत के अंदर तस्कर है की 3000 लोगों ने कसम खाई की
[30:47]अब हम घर नहीं जाएंगे इसलिए की हमने बहुत बड़ा गुनाह किया
[30:51]अब इसका कफारा यही है की हम अपनी जान कुर्बान करेंगे इस
[30:55]जुल्म के खिलाफ आवाज़ बुलंद करें तो जब जुल्म की खिलाफ आवाज़
[30:58]बुलंद करने में देर हो जाए अब आप मुझे बताएं या इन्होंने
[31:06]भी जान तो कुर्बान की सैयद shohuda के लिए की लेकिन क्या
[31:09]सैयद सोड़ा के लिए ये जो 3000 का लश्कर कुर्बानी दे रहा
[31:13]है वो जो 72 का लश्कर है बराबर है ये भी हुसैन
[31:18]के लिए जान कुर्बान कर रहे हैं लेकिन उसे वक्त कर रहे
[31:21]हैं जब पानी सर से गुजर चुका है मदीने वालों को कह
[31:25]के हुसैन निकले लेकिन मदीना वाले खामोश लेकिन जब हुसैन की शहादत
[31:31]हुई और यजीद ने हमला किया मदीने को तरस किया मुकदरत की
[31:34]असहबियत की बेहुरमति की साहबों को सहावी करम को कतलम किया वाकई
[31:41]हीरा मारूफ मस्जिद नबी को पीएमएल किया वैसे तो अभी मैं घोड़े
[31:48]बंदे हैं असफल बनवा दिया इस सबके बाद फिर मदीना वाले जाग
[31:50]गए हो हुसैन ने अगर पहले काश के हुसैन का साथ देते
[31:54]तो ये कुछ ना देखते तो आज हम देख रहे हैं अब
[31:59]ख्याल ए गया की गलती हो गई बहुत देर हो गई इतने
[32:04]साहब काट हो गई मस्जिद हो गई है अगर हुसैन का साथ
[32:11]अगर पहले देते तो ये कुछ ना होता तो वहां भी इनका
[32:15]जो काफिला लश्कर है अगर हुसैन का साथ देते 72 की जगह
[32:19]अगर 3000 आते तो नक्शा बदलता नहीं बदलता कर्बला की जंग का
[32:23]नक्शा ही बदल जाता अगर वो 3000 कुर्बानी पहले नहीं हुसैन के
[32:28]साथ देते बाद में करो फिर लश्कर पे लश्कर फिर कायम पे
[32:33]क़यामत इसका मतलब है बेडर हो गए सैयद शोधन है बेडर किया
[32:39]है आपकी वजह से बेदारी ए गई दुनिया के सामने लेकिन देर
[32:43]हो गई थी हेमा मालिनी मकाम कब यह जुमला है की जब
[32:47]कभी तुम जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाने में देर करोगे तो फिर
[32:52]फिर जब उठोगे तो खून बहुत ज्यादा देना पड़ेगा ज्यादा कुर्बानी की
[32:56]जरूरत पड़ेगी इफ्तार में तो चंद कुर्बानियां पर आपका कम हो सकता
[33:01]है लेकिन जैसे देर हो जाएगी तो ज्यादा से ज्यादा कुर्बानियां देनी
[33:03]पड़ेगी फिर भी मुश्किल हो जाएगा इंकलाब लाना तो सैयद और शोहदा
[33:10]तो इनीशिएट अभी तो यजीद बरसानीयर नहीं आया तब से हुसैन अली
[33:13]ने दुनिया को आगे किया मुसलमान को आगाह किया क्या होने जा
[33:17]रहा है क़यामत तक आने वाले इंसानों के लिए की अगर तुम
[33:29]बेदार देखो आज हमारे पाकिस्तान की आप बात करें या गरीब अब
[33:34]मुश्किल है उसके लिए वक्त गुजरना मुश्किल हो गया है लेकिन कौन
[33:40]आवाज़ उठा जिन्होंने आवाज़ उठानी थी वह सब तो साथ हो गए
[33:42]हुसैन के साथ कौन आवाज़ उठा सकता है हाथ दे दिया था
[33:47]इसीलिए जब यह कहा जाता है की हुसैन एक हुसैन अगर कोई
[33:53]याद करते तो क्या होता जब सारे मुसलमान नीत कर ली थी
[33:57]सारे मुसलमान में सब ए जाते हैं बड़े-बड़े भी ए जाते हैं
[33:59]सब ने baiyahat कर लीजिए हुसैन भी कर लेते तो क्या होता
[34:04]तो इसका जवाब अल्लाह मद्दू साहब ने दिया है इस्लामी के बनी
[34:11]वो बहुत खूबसूरत जवाब दे वो कहते हैं तुम ये क्यों नहीं
[34:16]कहते हो की जब हुसैन ने बात नहीं की थी तो सब
[34:21]ने क्यों बीट की थी हुसैन है मरकज हुसैन अगरबत्ती कैसे मुमकिन
[34:25]है जहां मुस्तफा के नुमाइंदे यह जो मुलाका हो की जब हुसैन
[34:39]ने नहीं की थी तो बाकियों ने bhaiyaat कैसे कर ली की
[34:42]जब हक के सरदार को हक के नुमाइंदे को तन्हा छोड़ दिया
[34:49]जाता है तो फिर जुल्म हो जाती है लिहाज सैयद shahfar का
[34:57]आगाज मक्के के अंदर मक्के की तरफ जनाब यही था की जो
[35:03]की उम्र का था अच्छा फिर मक्का क्यों छोड़ा हमारा टॉपिक जो
[35:06]है मक्के तक है लेकिन मक्के क्यों छोड़ा इस पर जुमले बयान
[35:12]कर रहा तो इसलिए छोड़ा की मक्के के अंदर लोगों से मुलाकातें
[35:14]हो जाती पैगाम फिर मक्का क्यों छोड़ा उसके भी कई जवाब आते
[35:21]हैं एक जवाब भी चाहता था की बेहतरीन मौका है बेहतरीन मौका
[35:29]है की हुसैन को मक्के में कत्ल करो ताकि पूरी दुनिया के
[35:36]मुसलमान आते हैं उनके अंदर दहशत फैल जाएगी मेरे हुकूमत की अजीब
[35:39]जब हुसैन को नहीं छोड़ेगा आओ नहीं छोड़ता और मक्के की हुरमत
[35:43]को नहीं देता तो फिर हम कौन है उसके मुकाबला में आने
[35:47]वाले तो मेरी दहाशक पूरे आलम सलाम में फैल जाएगी बेहतरीन मौका
[35:51]हुसैन की लोगों को यह कहता देखो इतना मजबूर किया हुकूमत को
[36:12]की हम मजबूर हो गए खाने कब की हुरमत को भी हमने
[36:16]देख सके हुसैन को कत्ल करना पद गया लेकिन हुकूमत के खिलाफ
[36:21]ये मक्के की सरजमीं जो अमन की जमीन है यहां पर आकर
[36:23]इन्होंने फसना फसाद बरपा करने की कोशिश की अब मजबूर हो गए
[36:28]यानी इतना मजबूर किया एक ऐसा प्रबंध आम करना था सैयद सौदा
[36:30]समझ गए द की यह क्या चाह रहा है बस 14 से
[36:51]पूछा जाए की आप अपने मकसद में कामयाब हो या नहीं आपने
[37:02]मुकद्दर के समझ की चादर को कुर्बान किया आप जिस मकसद के
[37:07]लिए कायम कर रहे द कामयाब हुए और आज हम अपने आप
[37:13]की तरफ देखें की आया saiyuddh यशोदा के लिए जो किया वो
[37:16]हम कर रहे हैं बस यह पैगाम के साथ गुफ्तगू तबाह तवज्जो
[37:22]से प्लीज सुनिएगा आज हम क्या कर रहे हम वह कर रहे
[37:27]हैं जो हुसैन ने किया के साथ किया हुसैन के साथ हुआ
[37:46]क्या हुसैन के ऊपर उनकी आवाज़ के ऊपर तलवारे चली ऐसा है
[37:52]हुसैन पर तलवार चली हम क्या कर रहे हैं हम भी तलवारे
[37:58]चला रहे हैं हम तलवारे कहां चला रहे हैं अपने ऊपर चला
[38:03]रहे खान पर yajidiyon ने हुसैन पर खंजर चलें आज खंजर हम
[38:12]उन पर चला रहे हैं अपने ऊपर चला रहे हैं यह कम
[38:17]जो हुसैन पर हुए हैं वो हम अंजाम दे रहे हैं हुसैन
[38:21]ने जो किया वो अंजाम क्यों नहीं दे रहे हुसैन ने क्या
[38:25]किया हुसैन ने क्या किया आज अगर थोड़ा सा हाजिर की तरह
[38:33]mutavajjo हो जाए हुसैन ने क्या किया और हम क्या कर रहे
[38:37]हैं वो किया जो हुसैन ने yajidiyon के साथ किया ये करना
[38:47]होता है निकले आज दुनिया में जालिमो की चीजे किसने निकलवाई सुलेमानी
[38:57]ने वो किया की यजीदी आज चीख रहे हो तो आए द
[39:02]कोबरा के रोजे अकदास को मिसामा करने वो तो कर्बला में सैयद
[39:07]सौदा और अमीर अल मोमिनीन के रोजों को मिसामा करने आए द
[39:09]सुलेमानी ने ऐसा कम कर दिया अयातुल्लाह सैतानी ने ऐसा कम कर
[39:16]दिया अयातुल्लाह ने वो कम कर दिया की आज उनकी चीखने निकल
[39:23]रही जिस मकसद के लिए आए द रोज़ जैनब को तबाह करने
[39:30]के लिए लेकिन हसन नसरुल्लाह ने वो कर दिया की उनकी चीजे
[39:35]निकल गई शाम छोड़ के भाग गए फिर जब कर्बला की तरफ
[39:39]ए गए तो आयात सुल्तानी का फतवा और सुलेमानी की एकमात्र मिली
[39:42]वहां से चीखने निकल गई और वहां से बर्बाद होकर नामुराद होकर
[39:49]भाग गए आज हुसैन जो किया वो ये है हमें ये करना
[39:52]है की yajidiyon की चीखें निकले इस वक्त के यजीद की चीखें
[39:59]किसकी निकल रही हैं आल साउथ किस घबराया हुआ है माशाल्लाह हमारे
[40:19]तालुकात नहीं हो सकते भाई क्यों नहीं हो सकते सबके सब अमेरिका
[40:23]से हो सकते हैं इसराइल से हो सकते हैं सबके साथ हो
[40:24]सकते हैं ईरान के साथ क्यों नहीं हो सकते क्या इसलिए नहीं
[40:28]हो सकते वो मेहंदी का इंतजार कर रहे हैं और हम मेहंदी
[40:32]का इंतजार नहीं हम मेहंदी से लड़ेंगे अब आपने मेहंदी की नुसरत
[40:39]करनी है तो मेहंदी का किरदार अपने आज भी चीख निकलवाए उसको
[40:42]आज इसराइल का badrajan चीख रहा है हमें जिससे खौफ है वो
[40:47]तो ईरान है या पाकिस्तान है ये आत्मी ताकत है की जिस
[40:52]समय खतरा है आप खतरा बन जाए उसे वक्त तन्हा द क्या
[40:59]जरूरत थी जब पूरे आलम इस्लाम ने यजीद की थी तो यजीद
[41:02]को क्या जरूरत ये हुसैन के पीछे लग जा रहा है तो
[41:06]क्या होता उसको भी पता है की हुसैन का मकाम क्या है
[41:11]आज दुनिया के अंदर देखे की दुनिया के सारे जालिमो अमेरिका [संगीत]
[41:21]अली के चाहने वालों से घबराते उनको पता है मरहब याद है
[41:27]उनको आज वह प्ले कार्ड उठा कर दिखा रहे हैं देखो marhap
[41:32]खबर दोबारा बरपा करने नहीं देंगे और इधर से भी जवाब आता
[41:37]है या खैबर के मानने वाले के मानने वाले जिंदा हैं एक
[41:42]बार फिर खबर बोबा करने के लिए तैयार है बस मैसेज यही
[41:47]है हमें वो करना है जो हुसैन ने किया yajidiyon से के
[41:52]साथ yajidiyon की चीखें यजीद की चीखने निकल गई हजारों का लश्कर
[41:56]हुसैन की तन्हा और 75 और 72 के लश्कर के हजारों के
[42:01]लश्कर भेज रहा है इसलिए की घबराया हुआ है दारा हुआ है
[42:06]डराओ हुसैनी बांके आपका कम यजीद को लार्ज अंदाज़ करना उनको डरावना
[42:13]हमको खूब ज्यादा करना है takud को खूब अदा करना है ताबूत
[42:19]को का मुकाबला करना है बस यही हुसैन का पैगाम है कैमा
[42:25]क़यामत तक आने वालों के लिए की नहीं जैसा उज्जवल नहीं कर
[42:29]सकता जब भी जालिम मुकम्मल ना आए उसे जालिम के खिलाफ बेकार
[42:33]होने का नाम हुसैनिया द और हुसैन
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