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Muqawamat Rah-e-Nehzaty Zainabi | H.I Zaigham Ali Rizvi
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24/11/11
In
Lectures
Record date: 10 Nov 2024 - مقاومت راہ نہضت زینبی AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:17]आले मोहम्मद इला मलात सनबी या अय हजीना आमन सलू अलेही व
[0:36]सल्लिम तस्लीमा बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्ला रहमान रहीम अल हमद लिही
[0:59]व सलातो सलाम अला अहा अल हमदुलिल्ला जालना मिनल मुत करीम ला
[1:11]अमीर मोमिनीन ल मासूमीन अ सलाम दरूद पर मोहम्मद [प्रशंसा] वा अमा
[1:29]बादला सुभान मता मजीद र हमी बिस्मिल्ला रहमान रहीम बीन अयाला नतान
[1:57]दरूद पर मोहम्मद [संगीत] तमाम तर तारीफें खुदा वहद ला शरीक के
[2:12]लिए दरूद और सलाम मोहम्मद और अहले बैत मोहम्मद अल सलातो सलाम
[2:15]की जवाद मुकद्दसा पर हमद है उस खुदा की के जिसने हमें
[2:23]और आपको कुराने करीम विलायत अमीरुल मोमिनीन और दीगर आमा अल सलाम
[2:28]की विलायत से मतमस कि परवरदिगार आलम का लुफ है एहसान है
[2:37]तौफीक है के उसने हमें यह तौफीक इनायत फरमाई के हम और
[2:40]आप इस वक्त खाना खुदा में मौजूद हैं और नूरन आला नूर
[2:47]खाना खुदा में उन हस्तियों का तस्करा सुन रहे हैं के जिन्होंने
[2:52]अपनी जात को उस जात में फना कर दिया जो बाकी है
[2:58]तो परवरदिगार आलम ने इन हस्तियों को यह मर्तबा इनायत फरमाया है
[3:04]कि इनके तजक को जमानो मकान की कुयू से आजाद कर दिया
[3:08]आज का यह मुख्तसर सा दर्स जिस शख्सियत के उन नजत से
[3:22]उस नजत से मुतालिक है कि जिसे हम म कावत राहे नजत
[3:37]जनबी परवरदिगार आलम ने जहां मखलूक से अहद लिया अलस बरक क्या
[3:48]मैं तुम्हारा रब नहीं और याद रहे कि जब भी कभी सवाल
[3:54]किया जाता है तो सवाल करने के मुख्तलिफ अंदाज होते हैं कभी
[3:58]सवाल हल कह कर किया जाता है कभी सवाल का अंदाज यह
[4:06]होता है कि सवाल करने वाला जहल रखता है और जिससे सवाल
[4:11]किया जा रहा है वह इल्म रखता है तो वह अपने जहल
[4:12]को खत्म करने के लिए सवाल करता है बसा औकात सवाल इस
[4:19]तरह किया जाता है कि सवाल करने वाला इल्म रखता है लेकिन
[4:26]जिससे सवाल किया जा रहा है वह मुमकिन जहल रखता है क्लासरूम
[4:28]में उस्ताद जब सवाल करता है तो यही कैफियत होती है कि
[4:34]अगर उस्ताद सवाल कर रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है
[4:38]कि उस्ताद जहल रखता है बल्कि जिन शागिर्द से सवाल हो रहा
[4:43]है तालिब इमों से सवाल हो रहा है वह मुमकिन जहल रखते
[4:45]हैं तो उन पूछा जा रहा है कि मालूम भी है तुम्हें
[4:49]इस बात का या नहीं मालूम है लेकिन एक तीसरा अंदाज सवाल
[4:54]का वो हुआ करता है कि जब सवाल करने वाला भी इल्म
[4:55]रखता है और जिससे सवाल किया जा रहा है तमन वो भी
[5:01]इल्म रखता है सवाल करने वाले को भी मालूम है कि यह
[5:06]इल्म रखता है और यकीनन सवाल करने वाला भी इल्म रखता है
[5:12]ऐसे मौकों पर जब उसके बावजूद सवाल किया जाए तो यह सवाल
[5:14]कोई जहल खत्म करने के लिए नहीं होता बल्कि किसी अहमियत को
[5:20]उजागर करने के लिए होता है जैसे अगर मैं आपसे सवाल करूं
[5:28]कि क्या हम इस वक्त मस्जिद में नहीं बैठे मुझे भी मालूम
[5:32]है कि हम मस्जिद में बैठे हैं आपको भी मालूम है कि
[5:36]हम मस्जिद में बैठे हैं हम दोनों को मालूम है कि हम
[5:39]सब मिलकर यहां मस्जिद में ही बैठे तो उसके बाद अगर सवाल
[5:42]किया जाए तो इसका क्या माना यानी हम किसी बात पर जोर
[5:48]दे रहे हैं कि कोई काम ऐसा हो रहा तो मैं आपकी
[5:53]तवज्जो दिला रहा हूं कि आपको क्या हो गया क्या हम इस
[5:55]वक्त मस्जिद में नहीं बैठे इसका जवाब क्या होगा ऐसे सवाल का
[5:59]जवाब ना हां में दिया जा सकता है ना ना में दिया
[6:06]जा सकता है वह सवाल के जिसमें हमें भी इल्म है सामने
[6:10]वाले के पास भी इल्म है और सवाल यूं किया गया है
[6:15]कि क्या ऐसा नहीं है अगर खुदा पूछ रहा है कि अलस
[6:20]बरक क्या मैं तुम्हारा रब नहीं हूं अब अगर इसका जवाब हां
[6:25]में दे दिया जाए तो इसका मतलब है कि हां आप हमारे
[6:26]रब नहीं है और अगर कहा जाए क्या मैं तुम्हारा रब नहीं
[6:31]हूं इसका जवाब अगर ना में दे दिया जाए तो इसका मतलब
[6:37]यही होगा हां नहीं आप हमारे रब नहीं है तो हां में
[6:38]भी नफी हो जाएगी ना में भी नफी हो जाएगी ऐसे सवाल
[6:43]का जवाब फकत एक तरह से दिया जा सकता है बला क्यों
[6:47]नहीं जैसे कि शहजादे ने बाबा से पूछा था अलना हक क्या
[6:54]हम हक पर नहीं तो इस सवाल का जवाब ना हा में
[7:00]दिया जा सकता ना ना में दिया जा सकता है बल्कि वहां
[7:05]पर भी जवाब यही आया बला क्यों नहीं तो शहजादे ने कहा
[7:07]बाबा कोई फर्क नहीं पड़ता हम मौत पर जा पड़े या मौत
[7:12]हम पर आ पड़े यह किसी हकीकत की तरफ इशारा करता हुआ
[7:18]किसी हकीकत को उजागर करता हुआ सवाल होता है तो वही हकीकत
[7:20]को उजागर करने वाला सवाल परवरदिगार आलम ने तमाम मखलूक से किया
[7:27]क्या मैं तुम्हारा रब नहीं सब ने कहा बला क्यों नहीं यानी
[7:30]हर हर नफसिलिन है इस बात का तो यकीनन सबने इस बात
[7:53]का ऐलान किया अगरचे उसने मुख्तलिफ मकामा के ऊपर कुराने मजीद में
[7:58]अंबिया से भी अहद लिया मिसाक नबी नबियों से उसने मिसाक लिया
[8:01]वो भी अहद उसने अंबिया अल सलाम से लिया और यह कह
[8:06]कर लिया कि जब तुम्हें हम किताब दें जब हम तुम्हें हिकमत
[8:11]दें और तुम्हारे पास वह रसूल आ जाए कि जो तस्दीक करे
[8:16]उसकी जो तुम्हारे हाथ में है तो तुम उस पर ईमान ले
[8:17]आना और उसकी मदद और नुसरत करना यानी अंबिया अल सलाम से
[8:24]तकाजा किया जा रहा है कि तुम उस नबी पर ईमान ले
[8:28]आना तो यह ना कह दीजिएगा कि नबी माज अल्लाह काफिर थे
[8:32]कि उनके ऊपर ईमान ले आएंगे तो यकीनन हमारे मुसलमान बहुत जल्दी
[8:35]करते हैं कि जनाब फलाना ईमान इस वक्त लाए वो ईमान उस
[8:42]वक्त लाए अगर अंबिया अलैहिम सलाम को भी देखें तो परवरदिगार आलम
[8:45]खुद उनसे तकाजा कर रहा है कि जब वह नबी तुम्हारे दरमियान
[8:50]में आ जाए तो तुम उन पर ईमान ले आना तो अब
[8:54]अगर उनकी दावत पर लब्बैक कहती हुई खदीजा नजर आ रही हो
[8:57]उनकी दावत पर लब्बैक कहते हुए मौला अली न नजर आ रहे
[9:01]हो तो उनमें ईमान लाना इस माना में नहीं होगा कि पहले
[9:07]मुसलमान नहीं थे अब ईमान ला रहे हैं बल्कि इस माना में
[9:09]होगा कि वह हजरत इब्राहीम अलैहि सलाम की शरीयत पर अमल कर
[9:15]रहे आप ऐलान नबूवत फरमा रहे हैं अब आपकी शरीयत का कलेमा
[9:20]पढ़ रहे दरूद परर मोहम्मद वाह नुसरत के ऐतबार से मदद के
[9:28]तबार से तो जैसे अंबिया अल सलाम से मदद का वादा लिया
[9:30]जा रहा तो यहां पर नासिरा नबी अपनी नुसरत का ऐलान कर
[9:35]रहे हैं अपनी मदद का ऐलान कर रहे हैं यह वह अहद
[9:40]है जो परवरदिगार आलम ने अंबिया अल सलाम से पहले ही ले
[9:44]रखा है बस उसी अहद का पास बहुत से मोमिनीन ने रखा
[9:51]मिनल मनी रिजाल सदला मोमिनीन में से बहुत से मर्द ऐसे हैं
[9:56]कि जिन्होंने अपने उस अहद को पूरा किया जो अल्लाह ने उनसे
[10:02]लि और यकीनन बहुत से शख्सियत ऐसी है कि जो अपने उस
[10:05]अहद पर कायम दायम है और उस मिशन पर है जो परवरदिगार
[10:11]आलम आपके और हमें जहां देखना चाहता है इसी अंदाज से इसी
[10:17]मिशन की अलमदार शख्सियत बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा की शख्सियत हमें
[10:21]नजर आईद वही हैद वही का है बस फर्क सिर्फ इतना है
[10:31]कि आल में पस्त में आने के बाद बहुत से लोग अपने
[10:32]उस अहद को भूल गए याद रखा तो अंबिया ने याद रखा
[10:37]याद रखा तो आले रसूल ने उसे याद रखा याद रखा तो
[10:42]उसी नहज को आगे बढ़ाती हुई बीबी जैनब ने उस अहद को
[10:48]याद रखा जो अल्लाह ने उनसे किया और इस राह में जिस
[10:50]कुर्बानी को भी देने की मंजिल आई आपने दरे नहीं किया यहां
[10:56]तक के अगर किसी खातून के साथ यह मामला हो जाए कि
[11:02]उसके घर वालों को उसके करीबी रिश्तेदारों को उसके भाई को उसके
[11:06]बहन उसके बेटों को उसके रिश्तेदारों को उसकी नजरों के सामने कत्ल
[11:14]कर दिया जाए और इस अंदाज से उन्हें बे गरो कफन कर्बला
[11:16]की सरजमीन पर छोड़ दिया जाए तो किसी भी खातून के औसान
[11:22]खतम हो जाते हैं तवज्जो है एक मकाला हम पढ़ रहे थे
[11:27]और उसके अंदर जो साइकेट्रिस्ट माहिर नफ्स ये लिखता है कि तीन
[11:35]मवा के ऐसे कि अगर उन तीन में से कोई एक मौका
[11:40]आ जाए तो किसी भी खातून के औसान खता हो जाते हैं
[11:41]और पहला मौका यह कि अगर घर में आग लग जाए तो
[11:47]आग को देखकर किसी भी खातून के औसान खता हो जाते दूसरा
[11:52]मौका यह कि अगर शदीद जलजला आया हुआ हो तो किसी भी
[11:57]खातून के औसान खत्म हो जाते हैं और तीसरा मौका अगर नजर
[12:02]के सामने किसी चाहने वाले की मैयत पड़ी हुई हो तो उस
[12:04]मैयत को देखकर किसी भी खातून के औसान खता हो जाते हैं
[12:10]यह फितरत का तकाजा है यह फितरत है कि यकीनन वह अपने
[12:16]उस जज्बात पर काबू नहीं रख सकती अब आ जाइए कर्बला ना
[12:19]फकत यह कि आग है ना फकत यह कि जलजला है ना
[12:24]फकत ये कि नजरों के सामने एक नहीं दो नहीं कितने 18
[12:30]बनी हाशिम की लाशें पड़ी हुई हैं किस अंदाज से पड़ी हुई
[12:35]हैं तो अब अगर इन तीनों में से कोई एक वाक हो
[12:35]जाए उसमें किसी भी खातून के औसान खता हो सकते हैं हां
[12:40]अगर औसान खता नहीं हो रहे तो आले रसूल के औसान खता
[12:45]नहीं हो रहे नहीं हो रहे तो बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा
[12:51]के औसान खता नहीं हो रहे यह वह नजत इस्लामी है यह
[12:53]वो किरदार जैनब है कि जिन्होंने कर्बला की व तहरीक जो अपने
[13:00]पहले मरहले में दाखिल हो गई और अपने पहले मरहले के तमाम
[13:06]तक पहुंच गई यह किरदार जैनब है जिसने उसी तहरीक को दूसरे
[13:09]मरहले में दाखिल किया और उस तहरीक को कहां तक पहुंचाया उस
[13:16]61 हिजरी से निकालकर आज 1446 हिजरी में भी वही तहरीक अपने
[13:20]पूरे अबो ताब के साथ मौजूद है यह किसका किरदार है यह
[13:26]जैनब सलाम उल्ला अलहा का किरदार है अगर इस उनवान से देखिए
[13:33]तो दुनिया में जहां पर भी मुकाती तहरीक इस वक्त बुलंद है
[13:37]तो उसमें यह मुकाम की तवाना यह रोशनी यह कहां से ले
[13:43]रहे हैं व यकीनन बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा ही की शख्सियत
[13:46]का असर है उन्हीं का किरदार है कि वहां से हम यह
[13:53]तवाना ले रहे इसी अहद को पूरा करते हुए बीबी जैनब की
[13:57]कदमों में लर नहीं आया और उस वक्त भी आपने वह किरदार
[14:03]अदा किया कि जिसको कहते हैं कि वह किरदार जो शहादत से
[14:10]पहले हजरत अब्बास अदा कर रहे जो शहादत से पहले मुस्लिम बने
[14:13]सजा अदा कर रहे जो हबीब इने मजहिर किरदार अदा कर रहे
[14:18]असबे हुसैनी जो किरदार अदा कर रहे जो अली अकबर किरदार अदा
[14:20]कर रहे आयात हक की छाव में इत का फूल थी जैनब
[14:27]कहीं अली थी कहीं पर बतलहा हैं कभी बतलहा हैं और कहां-कहां
[14:41]पर अगर खेमों की मुहाफिज का मामला हो तो पहरे पर खड़ी
[14:43]जैनब नजर आ रही अगर बच्चों को जमा करने का मामला हो
[14:48]तो सरब और रहबरी जैनब करती हुई नजर आ रही अगर सैयद
[14:54]सज्जाद को मुहाफिज का मामला हो तो वक्त के इमाम की मुहाफिज
[14:57]करती हुई शख्सियत हमें बीबी की नजर आ रही यह वो नजत
[15:03]जनबी है कि जिसका हौसला कर्बला के शोलों को देखकर पस्त ना
[15:06]हुआ यकीनन आसमान खून रोया इसमें कोई शक नहीं लेकिन बीबी जैनब
[15:15]के कदमों में लर्ज नहीं आया बस अजज इसीलिए उस अहद को
[15:22]पूरा करते हुए मैं आऊंगा कुछ नकाद की तरफ लेकिन जिस आयत
[15:24]से मैंने बात को शुरू किया यह आयत सूर रोम की आयत
[15:29]है 10 नंबर की आयत है जो कि अपनी गुजर्ता न आयात
[15:34]का निचोड़ है और वो बीबी जैनब जो वक्त के ताग की
[15:39]आंखों में आंखें डालकर इस्तकाम्या है चादर लूटी जा चुकी है याद
[15:47]रखिए यह जैनब वो है यह बातें हम मसाब में सुनते हैं
[15:51]ना तो इसलिए हम गौर नहीं करते लेकिन बहरहाल आज मैं अपने
[15:55]आप पर बहुत जबत कर कर यह बातें यहां पर बयान कर
[15:58]रहा कि बीबी जैन वो जैनब है कि जो कल जब जलजला
[16:05]था जब आग थी जब प्यारों की मयत सामने थी तो भी
[16:10]आपके औसान अपनी जगह मौजूद हैं कि इमाम जमान से इतना मरबूपल्ली
[16:29]नहीं है समझ में आया बीबी जैनब की चादर का मामला क्या
[16:33]है वह जैनब के जिसे बेपर्दा बाहर जाना गवारा नहीं है जलकर
[16:40]मरना गवारा है वही जैनब कर्बला से कूफा और कूफा से शाम
[16:42]और यह शराबी के दरबार में मौजूद बे मकना चादर समझिए एक
[16:49]एक लमहा गोया जल के मरना आसान होगा लेकिन जैनब के लिए
[16:57]एक एक लम्हा गुजारना जलकर मरने से ज्यादा सख्त था उस मौके
[17:02]के ऊपर जालिम की नजरों में निगाहें डालकर अगर कोई यह आयत
[17:09]पढ़ रहा हो के बुरा है जिन्होंने अपने दामन हयात को बुराइयों
[17:14]की सियाही से दागदार करके अपने खुदा की आयात की तजब की
[17:21]और आयात परवरदिगार का मजाक उड़ाया यानी यह बेहुरमति जो तू कर
[17:28]रहा है आले रसूल की यह आले रसूल की बे मती नहीं
[17:29]है यह आयात कुरानी है जिसकी तू बेहुरमति कर रहा है यह
[17:34]जो तू मजाक उड़ा रहा है यह तू आयात कुरानी का मजाक
[17:38]उड़ा रहा है ना कि तू फकत और फकत रसूल अल्लाह की
[17:43]आल का मजाक उड़ा रहा आयत भी पढ़ी तो वही पढ़ी कि
[17:46]यह जो तूने हमें रस्सियों में जकड़ कर खड़ा किया है यकीनन
[17:49]तूने अपने लिए बुरा किया है हमारे लिए हमें तो परवरदिगार आलम
[17:54]ने हमने जो कुर्बानी उसकी राह में पेश की उसने कबूल की
[17:57]है यह बीबी जैनब लान कर रही है अपनी तहरीक की कामयाबी
[18:02]की कि हम वो है कि जो कत्ल होकर भी सुर्खरू हुए
[18:09]हैं त वो है कि जो कातिल बनकर तू जलील रुसवा हुआ
[18:14]है पस अजीजो इस तबार से जब हम देखते हैं अगरचे यहां
[18:17]मामलात कुछ और भी थे जिसको मैं वक्त की नजाकत को देखते
[18:22]हुए मुख्तसर कर रहा हूं इस तबार से जब हम बीबी जैनब
[18:30]सलाम उल्ला अलहा की शख्सियत को देखते हैं तो मौला मुत अली
[18:33]इब्ने अबी तालिब अल सलातो वसलाम कि यह बड़ी बेटी कि जिसका
[18:45]यम विलादत अभी गुजरा एक रिवायत के मुताबिक पाच जमादी उल अव्वल
[18:49]मदीना में आपकी विलादत बा सहादत हुई आपका इसमे गिरामी रखने की
[18:57]जब मंजिल आई तो रिवायत हमें बतलाती है कि रसूल अल्लाह उस
[19:01]वक्त मदीना में मौजूद ना थे तो जनाबे अमीर से कहा गया
[19:07]कि बच्ची का नाम तजवीज कीजिए तो मेरे मौला ने अपने मौला
[19:13]का इंतजार किया के रसूल अल्लाह को आ लेने दो वही इस
[19:16]बच्ची का नाम जो है वो तजवीज फरमाएंगे एक दिन के बाद
[19:20]रसूल अल्लाह या दो दिन के बाद रसूल अल्लाह मदीना में वारद
[19:22]हुए और जब आपको मालूम चला कि बेटी की विलादत हुई है
[19:29]आपने बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा को अपनी आगोश में लिया सीने
[19:36]से लगा लिया और सीने से लगाने के बाद चेहरा अकस की
[19:38]तरफ नजर करते हैं और कहते हैं यह जैनब है जैनब अपने
[19:44]बाप की जीनत है यानी यह वह है जो अपने बाप के
[19:51]लिए जीनत है यहां में रोक कर अपने तमाम सामन को एक
[19:58]जुमला कहूंगा चौथे इमाम का वो कल याद है कलना जना तलना
[20:04]शना हमारे लिए बाय से जीनत बनो हमारे लिए बाय से नंग
[20:12]आर ना बनो यह चौथे इमाम यह जुमला फरमा रहे हैं यह
[20:18]अपने चाहने वालों से यह हुकम दे रहे हैं उन्हें कि कू
[20:25]कुू सीम है हो हमारे लिए बन जाओ हमारे लिए जीनत यानी
[20:31]अब मैं लफ्ज बदल कर आपके सामने इस हकीकत को रखूं गोया
[20:33]जमाने का इमाम अपने नासिर से कह रहा कुलना हमारे लिए जीनत
[20:43]बन जाओ तो अगर जीनत और इमाम जमान को इस अंदाज से
[20:49]जोड़ दीजिए जनाबे अमीर कौन है अनावली मैं और अली इस उम्मत
[20:56]के बाप हैं और वो जो इस उम्मत के बाप हैं यह
[21:01]जैनब उन अब्बा के लिए जीनत करार पा रही दरूद पर मोहम्मद
[21:09]वा अब वा वो है यह उम्मत के दो बाप वो है
[21:15]कि अगर यह ना होते तो यह उम्मत भी ना होती और
[21:19]जैनब वो है जो इन अब के लिए जनत करार पा रही
[21:25]जैनब अपने बाप की जीनत बस अजीज आपके अलका बात में से
[21:32]आलमा गरे मलेमा खुदा की कसम अगर कोई और लकब हम तक
[21:38]ना पहुंचता य एक लकब बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा की इमत
[21:46]के लिए काफी हो आलमा गर मलेमा क्या मतलब ऐसी आलमा के
[21:52]जिसको किसी ने तालीम ना दी हो गर मालिमा यानी के क्या
[21:59]यानी कि किसी ने तालीम ना दी हो तो जब किसी ने
[22:04]तालीम नहीं दी तो किसने तालीम दी यानी जिस इस्मत की आगोश
[22:06]में है वहीं से तालीम ले रही हैं यह वो है कि
[22:11]जो वही से तालीम ले रहा और यह जैनब को तालीम दे
[22:16]रहा किसी आम शख्स ने किसी गैर मासूम ने इन्हें तालीम नहीं
[22:24]दी तालीम उसी ने दी है जिसको खुदा कह रहा कि हमने
[22:26]तुम्हें वो भी सिखा दिया जो तुम नहीं सीख सकते थे उसने
[22:32]बीबी जैनब की तालीम दी तो बस बबी जैनब की अगर असास
[22:38]को देखें तो रसूल खुदा नजर आ रहे हैं मौला अली नजर
[22:44]आ रहे हैं आलिम गैरे मलेमा ना करार पाए तो और क्या
[22:47]करार पाए इसके अलावा सिद्दीक सुगरा महद सा जाहिदा फाजिला शरी कतल
[22:57]हुसैन हुसैन के मिशन में शरी सन राया बिल लदा आठवे इमाम
[23:06]के लिए कहते हैं ना अदा तो यहां पर आपका लकब भी
[23:12]है रा दिया बीवी जहरा का लकब भी है रा दिया उसी
[23:16]की तस्वीर बनकर बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा हमारे सामने नजर आती
[23:20]वह खातून के जो ना फकत यह कि खवातीन के लिए नमूना
[23:27]बल्कि उनका किरदार अगर तहरीक के उ से देखें तो हर हर
[23:34]नफसिलिन सलाम उल्ला अलैहा की शख्सियत में हमें नजर आ जाता है
[23:55]यहां आपकी उम्र मुबारक तकरीबन पा साल या एक रिवायत में सा
[24:03]साल के करीब पहुंचती है तो अपने नाना की वफात मुलाहिजा फरमा
[24:07]हैं तकरीबन सा साल की बच्ची यह हमारे यहां की सात साल
[24:13]की बच्ची नहीं है यह अहले बैत के घराने की सात साल
[24:18]की बच्ची है इस मामले में महद सा भी है यानी रिवायत
[24:23]नकल कर रही हैं अपने नाना से अपने बाबा से इस अंदाज
[24:26]से के यह फरमा या रसूल अल्लाह ने यूं फरमाया रसूल अल्लाह
[24:32]ने जलील उल कद्र शख्सियत मुसलमानों की किताबों में इस अंदाज से
[24:37]भी नजर आई बस अजीजो तकरीबन रसूल अल्लाह के 95 या 75
[24:44]दिन के बाद आपकी वालिदा माजदा का भी इंतकाल हो गया और
[24:50]उसके बाद आपने अपने घराने में अपने घर में मौजूद जो हुज्जत
[24:54]खुदा है उसकी मदद और नुसरत का सिलसिला जारी हो सारी रखा
[25:01]वक्त कम है इशारा कर रहा हूं याद रखिएगा कि जब बीबी
[25:03]जहरा सलाम उल्ला अलैहा का भी आखिरी वक्त नजदीक आया था तो
[25:09]बीबी जैनब की शख्सियत को सामने रखते हुए जरा इस रिवायत को
[25:12]सुनिए कि बीबी जैनब को ही इशारे से अपने करीब बुलाती हैं
[25:17]और कुछ वसीयत फरमा हैं जबकि घर में हसन भी मौजूद है
[25:22]हुसैन भी मौजूद है लेकिन बीबी जैनब की शख्सियत को जरा मुलाहिजा
[25:26]रखिए और उसके बाद बुलाकर कुछ वसीयत फरमा है एक बक्सा है
[25:33]एक संदूक है उसको आपके हवाले करती हैं कहती हैं बेटा इस
[25:36]संदूक को खोलो तो जब संदूक खुलता है तो उसमें से कफन
[25:42]बरामद होता है रिवायत जरा तवील है मैं तबल रिवायत नहीं पढ़
[25:49]सकूंगा कुछ तबकात बरामद होते हैं और यह बीबी जैनब के सुपुर्द
[25:52]कर दिए जाते हैं यह आपकी उस अमानत दारी की तरफ इशारा
[25:58]करता हुआ नजर आ रहा कि बीबी जहरा भी जानती हैं कि
[26:04]अगर मेरी कोई शरीक करार पा सकती है तो वह यह सानि
[26:06]जहरा ही है कि जहरा तो नहीं होगी लेकिन कोई होगी जो
[26:11]जहरा जैसी होगी और अपने वक्त की हुज्जत की मदद और नुसरत
[26:16]वैसे ही करेगी जैसा कि बीबी जहरा ने रसूल अल्लाह की मदद
[26:19]और नुसरत की इस तबार से हजरत बीबी जैनब सलामुल्लाह अलैहा का
[26:27]किरदार तहफ्फुज इस्लाम में हमें मिसालीडिंग नजर आता है हजरत जैनब वो
[26:32]अजीम हस्ती है जिन्होंने इस्लाम के तहफ्फुज के लिए सब कुछ कुर्बान
[26:35]कर दिया आपने इस्लाम की खातिर बहुत सी मुश्किलात का सामना किया
[26:42]बहुत से मजलिन बर्दाश्त किए अपने अजीजो अकारिक की कुर्बानी कर्बला के
[26:51]उस तपते सहरा में बीबी जैनब की वो लाजवा कुर्बानी यकीनन सदियों
[26:56]याद रखी गई है और ता कयाम कयामत याद रखी जाती रहेगी
[27:02]इस जमीन में जब हमने आशूर के खास उस कर्बला के मैदान
[27:09]में बीबी जैनब के किरदार को देखा तो असरे आशूर के बाद
[27:11]हजरत जैनब के लिए जो मुश्किल तरीन मोहिम मोहिम तरीन काम था
[27:19]वह पैगाम हुसैनी के अहदा को उम्मत तक पहुंचाना था याद रखिएगा
[27:24]यानी बीबी जैनब की तहरीक का एक नकाती एजेंडा वो मम हुसैनी
[27:32]को अवामो नास तक पहुंचाना था यह नहज जैनब है यह अजम
[27:36]जैनब है इसीलिए हम कहते कि कर्बला फकत रस्म नहीं है कर्बला
[27:48]फकत बजम नहीं है बल्कि कर्बला अजम है कर्बला रज्म है रज्म
[27:54]हुसैनी है अजम जैनब है जो लोग कर्बला को फकत रसू मात
[28:04]तक महदूद करते हैं मन्नत मान ली मन्नत चढ़ा ली आज फला
[28:06]इमाम बारगाह आज फला इमाम बारगाह किसलिए वहां मन्नत उठाई थी यहां
[28:14]मन्नत बढ़ाई थी कुछ लोगों के लिए कर्बला फकत मन्नत और मुरादों
[28:17]के गुसूल का जरिया है कि जैसे कोई एटीएम मशीन होती है
[28:22]कि उसमें से फकत कैश निकलता है तो कर्बला भी एक ऐसी
[28:24]मशीन है जहां से कारोबार में बरकत निकल आती है और औलाद
[28:29]निकल आती है जहां बच्चियों की शादियां हो जाती हैं जहां गोदे
[28:34]हरी हो जाती हैं और इस की बहुत सारी चीजें जो कर्बला
[28:36]से मन्नत मुरादों से मिल जाती हैं जो यकीनन मिल जाती हैं
[28:41]जैसे बहुत से लोग कुरान करीम से फकत और फकत यही दुआएं
[28:44]मांगते हैं कि मेरे जोड़ों का दर्द ठीक हो जाए मुझे बड़ा
[28:48]पुराना दमा हो गया है वो ठीक हो जाए और दमा ठीक
[28:51]भी हो जाता है जोड़ों का दर्द भी ठीक हो जाता लेकिन
[28:53]अल्लाह ने कुरान जोड़ों के दर्द को ठीक करने के लिए नाजिल
[28:58]नहीं किया ये किसी का मतलब नहीं है यह कोई हकीम का
[29:03]नुस्खा नहीं है कि इससे पुराना दमा ठीक हो जाए अगरचे दमा
[29:05]ठीक हो जाएगा लेकिन कुरान को नाजिल करने का मकसद यह नहीं
[29:09]था कि वह तुम्हारी यहां की बीमारियों को दूर करेगा कुरान के
[29:12]नाजिल करने का मकसद यह था कि वह तुम्हारी बातन बीमारियों से
[29:17]शिफा करेगा वह तुम्हें वहां पहुंचा देगा जहां परवरदिगार आलम तुम्हें देखना
[29:22]चाहता है तो बिल्कुल उसी तरीके से जिन लोगों ने कर्बला से
[29:28]फकत रसू मात को ले लिया फकत चंद फवाइव ले लिया वो
[29:29]अपनी मुरादों को पहुंच गए लेकिन बीबी जैनब सलामुल्लाह अलैहा की नजत
[29:35]को अगर देखते हैं तो वहां हमें एक नकाती एजेंडा यह नजर
[29:40]आता है कि अपने इमामे जमान की तहरीक को जिंदा रखना और
[29:42]उनके मिशन को आगे बढ़ाना यह अजम जैनब है चाहे इस राह
[29:49]में बेटे कुर्बान करने पड़े बस ये फर्क है मैं रसम से
[29:55]बेटे मांग लूंगा लेकिन जब अजम जैनब को देखूंगा तो वह बेटे
[29:58]कुर्बान करती हुई नजर आएंगी मैं अपने कारोबार में बरकत मांग लूंगा
[30:03]लेकिन मैं अगर इस अंदाज से कर्बला वालों पर नजर करूंगा तो
[30:09]मुझे यकीनन बहुत से लोग इस अंदाज से नजर आएंगे कि जिनका
[30:16]वेल एस्टेब्लिश कारोबार है और उसके बावजूद अपने कारोबार को खत्म करके
[30:20]सैयद शोहदा से मिल गए कि यही हमारी जन्नत है यही हमारा
[30:22]मकाम है कर्बला वालों की जिंदगी में देखते हैं अगर कब वालों
[30:29]की मांओं को देखते हैं तो वह अपने बच्चे को जब रोता
[30:33]हुआ देखती हैं बैठे हुए तो यह नहीं पूछती कि बेटा क्यों
[30:35]रो रहे हो बल्कि कासिम को देखकर उनकी वालिदा यह सवाल करती
[30:40]है तुम अभी तक जिंदा हो तुम अभी तक जिंदा हो तो
[30:46]वह बच्चा रोते हुए यही कहता है कि वालिदा गिरामी कई मर्तबा
[30:49]जा चुका हूं इजाजत नहीं मिल रही है यह कर्बला की माएं
[30:54]हैं कि अपने बच्चों को वक्त के इमाम की राह में कुर्बान
[31:00]होते हुए देखना चाहती हैं और एक बहरहाल मैंने सिर्फ इशारा किया
[31:03]कि फर्क कहां कहां नजर आ रहा तो इस ऐतबार से बीबी
[31:09]जैनब का मिशन यही है कि अपने भाई के नहीं इमाम जमान
[31:13]के उस कयाम के अहदा को लोगों तक पहुंचाए ताकि शोहदा का
[31:16]खून जाया ना जाए एक बहुत बड़ी फिलासफी है उलूम कुरान के
[31:22]ऊपर बड़ी गहरी नजर रखती हैं बिनते शाती नाम तो आयशा अब्दुल
[31:30]रहमान है इजिप्त में पैदा हुई और तकरीबन उलूम कुरान पर बड़ी
[31:38]गहरी नजर रखती हुई कुछ तफा सर भी इनकी तरफ से मौजूद
[31:40]है एक तफसीर भी इन्होंने लिखी है रिसर्चर है लिटरेचर की प्रोफेसर
[31:48]है काहिरा यूनिवर्सिटी में उन्होंने एक बड़ी जखम किताब बीबी जैनब सलाम
[31:53]पर लिखी मेरे मकतब से उनका ताल्लुक नहीं और वो फकत एक
[31:58]जुमले में बीबी ज की पूरी तहरीक को सेमो देती है और
[32:00]कहती है कि हजरत जैनब ने वाक कर्बला के असरात को अब
[32:08]दियत बख्शी है इस एक जुमले में उन्होंने पूरी नजत जनबी को
[32:16]समेट दिया अब दियत दवा बक्श दिया यानी के कर्बला जो एक
[32:18]दिन का वाकया क्या सुबह से शुरू हुआ असरे आशूर पर खत्म
[32:24]हो गया अगर बीबी जैनब के किरदार को एक तरफ कर दो
[32:29]तो मालूम भी नहीं चलेगा जंगल में क्या हुआ तो मालूम भी
[32:31]नहीं चलेगा ये कौन है जिन्होंने शाम के दरबार को हिला दिया
[32:36]ये कौन है जिसने इब्ने जियाद के दरबार को कूफा में हिला
[32:41]दिया यह नजत जनबी ही है जिसने इस अंदाज से कर्बला को
[32:45]दबाम बख्शा है आपने वो खुतसेम को खत्म कर दिया बच्चों को
[32:55]समझाने के लिए दज्जाल दजल से है दजल धोखे को कहते हैं
[32:58]फ को कहते हैं दज्जाल बहुत ज्यादा धोखा देने वाला दजल धोखा
[33:07]दज्जाल धोखा देने वाला दज्जाल बहुत ज्यादा धोखा देने वाला यह तुम्हारे
[33:13]वक्त का मीडिया दज्जाल है बहुत धोखा देता है होता कुछ है
[33:20]दिखाता कुछ है यह तुम्हारे हुक्मरान जो मुख्तलिफ चैनल्स पर तुम्हें बैठे
[33:24]नजर आते हैं आपस में लड़ते हुए नजर आते हैं प्रोग्राम खत्म
[33:26]होने के बाद मिलाकर एक तरफ चले जाते हैं हंसते हुए कि
[33:31]देखो कितनी आवाम को हमने इस तरीके से बेवकूफ बना दिया अगर
[33:36]इनकी बेवकूफियां यूं इस अंदाज से बनाते रहते हैं इनकी कुर्सी सलामत
[33:40]रहती है पूरी हुकूमत दज्जाल पर चलती है दज्जाल यानी के क्या
[33:43]बहुत धोका देने वाला बीबी जैनब सलाम उल्ला अलैहा का किरदार देखिए
[33:51]वो शाम है के जहां पर जब जनाबे अमीर के कत्ल की
[33:57]खबर पहुंची थी तो पूछने वाला पूछ रहा कि अली को मस्जिद
[34:01]में कत्ल किया अली और मस्जिद क्या अली मस्जिद जाते थे जहां
[34:06]दजल का आलम यह हो कि अहले बैत अल सलाम का तारुफ
[34:08]ऐसा पेश किया गया हो कि माज अल्ला बाद के अली एक
[34:14]डाकू का नाम है अली जो है वह मस्जिद से कोई ताल्लुक
[34:19]नहीं रखता है उस एनवायरमेंट में उस माहौल के अंदर अगर बीबी
[34:22]जैनब वहां जाकर अहले बैत का तारुफ पेश कर रही हो दज्जाल
[34:27]के दजल को खतम कर रही हो यजीद की हुकूमत जो कायमी
[34:32]दजल के ऊपर है अगर उस दजल को खत्म कर रही हो
[34:37]तो यजीद का तख्त लरज नहीं जाएगा तो क्या होगा वो बीबी
[34:39]यह है नजत जनबी तो याद रखिए नजत जनबी का मतलब यही
[34:45]है कि अगर यजीद का तख्त लरज रहा है तो समझ जाओ
[34:49]जो नजत है व नजत जैनब है लेकिन यह तुम्हारी तहरीक कैसी
[34:55]तहरीक है जिससे बातिल को कोई मसला नहीं है वो खुद फैसिलिटेट
[34:57]करता है तुम्हें कि हां आओ इधर आ जाओ इधर अपना जुलूस
[35:02]निकालो इधर अपना फला काम करो उसको कोई प्रॉब्लम नहीं है उससे
[35:05]इसका मतलब समझ में आ रहा है मैं कहां की बात कर
[35:08]रहा हूं अगर तुम वहां पर जुलूस निकाल लो तो तुम खुश
[35:11]हो रहे हो कि देखो कितना बड़ा जुलूस निकल रहा लेकिन पीछे
[35:14]मौजूद इसराइल है पीछे मौजूद वही अमेरिका है वही अपने नापाक साजिशें
[35:20]करने वाला है लेकिन तुम खुश हो के नहीं मेरा तो मजलिस
[35:22]तो हो गई मेरी ये तुम्हारी मजलिस कैसी है जिससे यजीद को
[35:27]कोई फर्क नहीं पड़ रहा है इसका मतलब तुम्हें री कंसीडर करना
[35:32]पड़ेगा कि इसके अंदर फकत कोई रसम बाकी रह गई है अजम
[35:34]जैनब रुखसत हो गया है अगर अजम जैनब होता तो वक्त का
[35:42]यजद इस वक्त लरज अंगुर बदन होता वह तुमसे खाफ होता वह
[35:46]तुमसे खौफ जदा होता बस अजीजो तो हजरत जैनब के शोला और
[35:53]खुद जिनको त बसी ने अली इब्ने ताऊस ने अल्लामा मजलिसी रहमान
[36:00]ने अब्दुल्लाह बहरानी ने खास सैयद मोहसिन अमीन आमली और अहमद अली
[36:06]शिबली ने अपनी कुतुब के अंदर जगह दी है दीगर मुहसीन ने
[36:10]और मुखन ने अपनी कुतुब के अंदर बीबी जैनब के उन खुतहना
[36:15]खुतबा कफे में देती हैं वह लोग कि जिन्होंने कल मुस्लिम का
[36:22]साथ छोड़ दिया मुस्लिम तन्हा हो गए नतीजे के अंदर क्या हुआ
[36:25]नतीजे में वो नहज जो अपने एक तमाम तक पहुंच नहीं थी
[36:31]ना पहुंची उस अंदाज से और य मुस्लिम को दारुल इमारा पर
[36:36]लटका दिया गया किनकी वजह से कुछ लोगों ने साथ छोड़ दिया
[36:39]था ना जब यह काफिला लुटा हुआ कफे में आया तो वही
[36:44]साथ छोड़ने वाले थे और अब रो रहे थे पीट रहे थे
[36:49]बीबी जैनब ने उनकी तरफ नजर की और इस अंदाज से कहा
[36:55]खामोश हो जाओ उसको खामोश हो जाओ रावी कहता है हुसैन बिन
[37:01]बशीर यह रिवायत कर रहा कि जब वह लोग चीख रहे थे
[37:02]रो रहे थे पीट रहे थे बीबी जैनब ने उस जलाल के
[37:08]आलम में कहा खामोश हो जाओ ऐसी खामोशी हो गई कि लोग
[37:14]तो लोग जानवरों की आवाजें भी बंद हो गई यहां तक के
[37:19]ऊंट के गले में लटकी हुई घंटी की आवाज भी बंद हो
[37:20]गई समझ में आई बात यह है अली की बेटी इस जलाल
[37:26]के आलम में कहा खामो तो ऐसी खामोशी छा गई उसके बाद
[37:33]एक तवील खुतबा दिया एक हिस्सा आपके सामने पेश करूं कहती हैं
[37:36]कि खुदा की रावी कहता है खुदा की कसम उस दिन तक
[37:40]किसी खातून को इस इफत हया के साथ खिताब करते हुए नहीं
[37:46]देखा था ऐसा खुतबा दिया जैसा जनाबे अमीर खुतबा दे रहे हो
[37:48]उसी लहजे में कहती हैं सब तारीफें खुदा वंदे मुताल के लिए
[37:55]और दरूदो सलाम हो मेरे नाना मोहम्मद पर और उनकी तैयब ताहिर
[38:03]नेको पाको पाकीजा औलाद पर अम्मा बाद ऐ अहले कूफा ऐ अहले
[38:06]फरेब मकर क्या अब तुम रोते हो खुदा करे तुम्हारे आंसू कभी
[38:13]खुश्क ना हो और तुम्हारी आहो खुवा फुगा कभी बंद ना हो
[38:15]अफसोस है ऐ अहले कूफा तुम पर ये उन लोगों से मुखातिब
[38:20]है जिन्होंने मुस्लिम का साथ छोड़ दिया था वगरना अहले कूफा कुछ
[38:24]ऐसे भी हैं जिन्होंने साथ दिया है ये उनसे क्योंकि सामने वो
[38:27]लोग हैं जो कल साथ छोड़ चुके थे तो उनसे कह रही
[38:32]हैं ऐ अहले कूफा कि तुमने रसूल के किस जिगर को पारा
[38:38]पारा कर दिया और उनका कौन सा खून बहाया और उनकी कौन
[38:39]सी हत के हुरमत की और उनकी किन-किन मस्तूरा को बेपर्दा किया
[38:45]तुमने ऐसे आमाल शनिया का इतका किया कि आसमान गिर पड़े जमीन
[38:48]शगा फ्ता हो जाए पहाड़ रेजा रेजा हो जाए तुमने कतले इमाम
[38:54]का जुर्म शनी जुर्म शनी किया है जो पिनहा वस में आसमान
[39:02]और जमीन के बराबर है अगर इस कदर बड़े अगर इस कदर
[39:04]बड़े आसमान इस कदर बड़े मुसीबत के अंदर तुमने आले रसूल को
[39:11]मुब्तला किया कि आसमान भी खून बरसाने लगा 40 रोज तक रिवायत
[39:14]मौजूद है कि आसमान ने खून बरसाया है पस अजीजो यह खुतबा
[39:20]ऐसा कि लोगों के जमीर को झिंझोली का एक गिरो निकलता है
[39:30]और वह भी इस राह के अंदर शहादत से हम किनार होता
[39:35]अगरचे उस शहादत का कोई नतीजा बरामद ना हुआ लेकिन यह जो
[39:37]जमीनों को झंझोट दिया बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा ने यह खुतबा
[39:43]ता कयामत सोए हुए जमीनों को जगाने के लिए काफी है यह
[39:49]है नहज जैनब ना कि खुद अपनी तवाना को कम कर रही
[39:51]बल्कि जहां जहां से गुजर रही हैं वहां वहां पर एहसास निदा
[39:55]मत भी बढ़ रहा है एहसास मुकाम यानी अपने तहरीक को इस्लाम
[40:04]की सर बुलंदी के लिए इस अंदाज से अपने आप को पेश
[40:06]करने के जज्बे को बीबी जैनब का खुतबा बढ़ाता हुआ नजर आ
[40:13]रहा शाम के खुतहां बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा ने अपने खुदबुदा
[40:22]रब्बिल आलमीन व सल्लल्लाह अला रसूल वाही अजमान तो सवाल होगा ना
[40:30]वो आल कौन सी है जिस पर आप दरूद भेज रही हैं
[40:33]तो पता चला वो वही तो आल है जो इस वक्त रस्सियों
[40:34]में जकड़ी हुई इस मलान के दरबार में खड़ी हुई है आले
[40:39]रसूल पर जगह-जगह दरूद भेजकर बता रही हैं कि अल्लाह तो वोह
[40:44]है जो मोहम्मद और आले मोहम्मद पर दरूद भेज रहा है और
[40:46]यह कैसे मुसलमान है कि जो आले रसूल को रस्सियों में जकड़े
[40:50]हुए इस अंदाज से उसके बाद कहती हैं कि बुरा हो जो
[40:55]आयत मैंने आपके सामने तिलावत की और फरमा है यजद क्या तू
[40:58]समझता है कि तूने हम पर जमीन के गोशे और आसमान के
[41:03]किनारे तंग कर दिए हैं और रसूल की आल को रस्सियों में
[41:08]जकड़ लिया है और जंजीरों में जकड़ कर दरबदर फहराने से तू
[41:11]खुदा की बारगाह में सरफराज हुआ और हम रुसवा हुए हैं क्या
[41:16]तेरे ख्याल में हम मजलूम होकर जलील हो गए और तू जालिम
[41:18]बनकर सर बुलंद हो गया क्या तू समझता है कि हम पर
[41:22]जुल्म करके खुदा की बारगाह में तुझे शानो शौकत हासिल हो गया
[41:27]है ये सवालात बीवी चुपते हुए सवाल कर रही हैं किस लिए
[41:33]नतीजा क्या है नतीजा बयान कर रही हैं कि जिसे तू इज्जत
[41:35]समझ रहा है असलन बदतर जिल्लत है जो तेरे हिस्से में आई
[41:41]है और जिसे तू जिल्लत समझ रहा है बखुदा वो जिल्लत नहीं
[41:46]वो तो इज्जत है जो अल्लाह हमारे रसूल को दे रहा है
[41:48]इसीलिए कहती हैं वहां पर जब यह मलन एक रिवायत है कि
[41:55]इब्ने जियाद ने यह आयत पढ़ी और दूसरी रिवायत है कि यहां
[42:01]कवी रिवायत यह है कि आले जियाद ने इब्ने जियाद ने यह
[42:03]वाली आयत इस अंदाज से देखकर पढ़ी केतो जमन तवल मंतशा तो
[42:07]बीवी ने टोक दिया कि कुरान की आयत को अपने मतलब के
[42:12]लिए इस्तेमाल ना कर यानी कि खुदा की कसम इज्जत तो खुदा
[42:14]ने हमें अता की है जिल्लत तुझे अता की है तेरे हिस्से
[42:19]में जिल्लत आई है तू हमें कत्ल करके जलील हो गया है
[42:25]इसीलिए शायर ने क्या खूब कहा घोड़े तो दौड़े लाशए शब्बीर पर
[42:28]मगर तारीख ने यजद को पामा कर दिया दो हाथ आगे बढ़
[42:38]गई जो जुल्फिकार से नस्ले यजद काट दी चादर की धार से
[42:45]आबाद अलकमा पे है बस्ती शहीद की खुश्की में गर्क हो गई
[42:49]कश्ती यजीद की ये है बीबी जैनब सलामुल्लाह अलहा की नहज कि
[42:55]जो ताग को नाको चने चपवा रही हैं उस मगरूर के उस
[43:01]गुरूर को नाक रगड़ रही है बीवी जैनब शाम के खुतहा मुख्तलिफ
[43:05]जगहों पर एक और जुमला आपकी ह दिया करूंगा कि बीबी जैनब
[43:10]की नजत का एक नकाती एजेंडा इमाम हुसैन के मिशन को आगे
[43:12]बढ़ाना तो उस जालिम के दरबार में कहती हैं कि आज तू
[43:17]अपनी जाहिरी फता की खुशी में सरमस्त है मसर्रत और शादमानी से
[43:24]सरशर होकर अपने गालिब होने पर इतरा रहा है और खिलाफत के
[43:27]हमारे मुसलमा हुकूक को गस करके खुशी और सुरूर का जशन मनाने
[43:35]में मशगूल है इन जुमलो में बीबी ये फरमा रही कि गोया
[43:42]खिलाफत खिलाफत और रहबरी हम अहले बैत का हक है जो तू
[43:44]गस करके बैठा हुआ है यानी हमारे मुकाबले पर जो भी इस
[43:50]तखत पर बैठेगा ससब होगा अहले बैत अल सलाम के हक को
[43:55]ससब कर कर बैठा होगा इसलिए कि इसके हकदार तो हम अहले
[43:57]बैत अ सलाम है हदीस सकलेन इस बात पर शाहिद है लाने
[44:02]गदर इस बात पर शाहिद है कि रसूल अल्लाह ने इ बताओ
[44:11]अगर तुम्हारा रहबर होना चाहिए तो वह इनकी इतर से हटकर कोई
[44:17]होना चाहिए बीबी जैनब ने उस खुदे के अंदर यह इरशाद फरमाया
[44:20]रहती दुनिया तक कोई ताग यह खाम खयाली में ना रहे कि
[44:26]रहबरी का हक उसका है बीबी जैनब ने उस दरबार में बयान
[44:31]कर दिया कि हम वो अहले बैत है जिसे खुदा ने रहबरी
[44:37]के लिए चुना है यह नजत जनबी है बस इस एक नकाती
[44:39]एजेंडे पर अगर कायम रहते हैं आपके और मेरे इमाम इस वक्त
[44:44]पर्दा गैब में है बताओ नजत जनबी क्या कहती है ने नजत
[44:50]जनबी बहुत तवज्जो काश मेरे पास वक्त और होता तो इसको मैं
[44:53]मजीद आगे बयान करता लेकिन मैं इसको मुख्तसर कर दूं इस बात
[44:57]पर क्योंकि खुद पूरा नहीं पढ़ूंगा लेकिन उस खुबे की अहमियत बयान
[45:00]करने के लिए आपको एक वाकया नकल करूंगा लेकिन जरा बुलंद आवाज
[45:04]में दरूद पढ़ दीजिए तव बहुत तवज्जो आयला मराश नजफी नाम सुना
[45:14]कम में जाइए उनकी एक बहुत बड़ी लाइब्रेरी भी है तो भयो
[45:21]ना कहिए कि लाइब्रेरियन थे बहुत बड़ी शख्सियत थे आरिफ थे सामरा
[45:25]से बलद आ रहे थे सैयद मोहम्मद के यहां आज भी आप
[45:31]जाते हैं तो वह इलाका जरा अजीब है डिस्टर्ब एरिया है थोड़ा
[45:36]अहले बैत के चाहने वाले जरा कम है शिया कम है उस
[45:37]इलाके में तो आयतुल्लाह मशी नवी जिस वक्त पया आ रहे थे
[45:43]तो उस वक्त तो और भी थोड़ा सुसान इलाका था रास्ता भटक
[45:48]गए इधर से उधर हो गए आजकल का माहौल तो नहीं कि
[45:53]मकब लगे हुए हो और खैर उस रास्ते पर आज भी उतने
[45:54]मकब नहीं है तो उस जमाने में तो और भी नहीं पानी
[45:58]खत्म हो गया पास प्यास का गलबा है फरमाते हैं कि ऐसी
[46:03]कैफियत आ गई कि मुझे दिखाई नहीं दे रहा था करीब था
[46:08]कि इंतकाल हो जाए क्या देखा कि कोई आ रहा है मेरे
[46:09]पास पानी पिलाया उसने मुझे जब मैंने पानी पिया तो मेरी नजरों
[46:16]में मेरी निगाहों में रोशनी गोया वापस लौट आई मैंने एक जुमला
[46:19]कहा आरिफ थे बहुत से मामलात में ऐसा होता है कि मुलाकात
[46:25]हो जाने के बाद मालूम होता है कि आने वाला कौन था
[46:32]लेकिन आयतुल्लाह मराश नजफी बस एक नजर देखी कदमों में गिर गए
[46:35]कोई दूसरी बात नहीं की कहा मौला मुझे नसीहत कीजिए समझ गए
[46:45]आने वाला कौन है इमाम अलैहि सलाम ने आठ नसीहत की उन
[46:51]आठ नसीहत में से आठवी नसीहत क्या थी कहा शाम के दरबार
[46:58]में जैनब बिनते अली के खुदबुदा का इमामे जमाना से तवज्जो है
[47:16]61 हिजरी में श्याम के दरबार में बताओ वक्त का इमाम मौजूद
[47:23]था या नहीं था सैयद सज्जाद इमाम थे दरबार में मौजूद थे
[47:30]कितने लोग जानते थे कि वक्त का इमाम भी कोई होता है
[47:36]और जो होता है वह इस वक्त दरबार में मौजूद है नहीं
[47:37]जानते थे तो मैं कह सकता हूं कि इमाम गैब में थे
[47:42]तो अब इनको अपना तारुफ पेश करना है अब बताओ बीबी जैनब
[47:50]ने जो खुतबा इरशाद फरमाया माहौल ऐसा हो गया कि इमाम सामने
[47:56]आए और कहा कि इजाजत है कि मैं इस लकड़ी के के
[47:57]तख्ते पर जाऊं और फिर जाकर अपना तारुफ पेश कियाना मनानी फनी
[48:09]तो यह मौका किसने फराह किया इमाम को अपना तारुफ पेश करने
[48:14]के लिए बीबी जैनब सलाम उला तो गोया इशारा मिल रहा कि
[48:23]अगर अपने इमाम जमाना को अगर जुहूर के लिए जमीना साजी करती
[48:27]हुई जैनब सलाम उल्ला अलहा का व खुतबा ना होता तो उस
[48:32]अंदाज से मेरा मौला खिताब ना कर पाता और उस खिताब के
[48:37]बाद यजद का तखत हिल करर रह गया मजबूर हो गया इनको
[48:38]छोड़ने के लिए तायब नहीं हुआ था मजबूर हो गया था उस
[48:43]शाम में जहां अहले बैत का तारुफ क्या पेश किया गया था
[48:48]आज इस अंदाज से तारुफ हुआ कि दज्जाल का दजल कट के
[48:53]रह गया किसकी मरह मिन्नत बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा की उस
[48:57]न के मरह मि यानी अपने इमाम जमाना से जुड़े रहकर उनके
[49:03]जुहूर के लिए हर वो काम करना कि जिससे उनके जुहूर की
[49:11]जमीना साजी होती हो नजत जैनब है 1446 हिजरी में आज मेरे
[49:13]और आप पर जिम्मेदारी है कि अपने इमाम जमान के जुहूर के
[49:18]लिए तुम जो काम अंजाम कर दोगे वह वही नजत जनबी होगी
[49:23]जिस पर तुम अमर अलामत कर रहे होगे अगर अपने इमाम जमान
[49:26]के मकसद का कर रहे होंगे तो वो वही न हजत जैनब
[49:31]है जो वो अपने वक्त के जमाने के इमाम का दिफाई हुई
[49:32]हमें नजर आ रही थी पस अजीजो मुख्तसर करो बिल्कुल उसी अंदाज
[49:40]से जब इमाम हुसैन ने इस्तगासा बुलंद किया तो औरतों की आवाजें
[49:45]बुलंद हो गई अली इब्न हुसैन मरीज आए लेकिन जब अपने वक्त
[49:51]के इमाम मैं फिर कहूंगा बाबा मु कातिल में लिखा है तारीख
[49:54]कहती है बाबा की आवाज आ रही जी ना उनके वक्त के
[49:59]इमाम बुला रहे थे हल में ना सरना तो यहां से टूटा
[50:05]हुआ नेजा लेकर लड़खड़ाते कदमों के साथ अपने वक्त के इमाम की
[50:08]नुसरत के लिए जा रहे तो बताओ उनको मुहाफिज कौन कर रही
[50:15]हैं बीबी जैनब सलाम उल्लाह अलहा वक्त के इमाम की मुहाफिज करती
[50:19]हुई वक्त नहीं है कि बयान करूं दो मकामा के ऊपर और
[50:23]जालिम ने चाहा कि इनको कत्ल कर दे बीबी जैनब ने खुद
[50:27]को स सज्जाद पर गिरा दिया कि पहले मुझे कत्ल करो उसके
[50:32]बाद इनको कत्ल करना लेकिन बहरहाल इस अंदाज से सैयद सज्जाद की
[50:35]जान को दो से तीन मकामा के ऊपर बीबी जैनब ने इस
[50:40]अंदाज से बचाया है अपने वक्त के इमाम की इस अंदाज से
[50:46]नुसरत करती हुई हमें नजर आती है बस इमाम सज्जाद को दिलासा
[50:48]देती हुई भी बीबी जैनब ही नजर आती हैं कि जब वो
[50:52]अपने बाबा को देख रहे थे एक अजीब नजर से देख रहे
[50:56]थे रो नहीं रहे लेकिन करीब था कि रूह परवाज किया जाए
[51:02]तो बीबी जैनब सामने आकर कहती हैं कि आप हमारे अजदाद का
[51:06]मेरे बाबा का आपसे अहद है वादा किया है उन्होंने यहां कबर
[51:14]बनेंगी यहां कुछ लोग आएंगे और यहां कब बनाएंगे मजार तामीर होंगे
[51:18]उन्होंने हमसे अहद किया है कि हमारे चाहने वाले इन कब्रों की
[51:25]जियारत के लिए आएंगे कयामत तक उन मकामा मुकद्दसा पर जो लोग
[51:28]जा रहे हैं यह उनके अजदाद का बीबी जैनब से अहद है
[51:34]कि यहां पर लोग आएंगे और वह जो तुम्हारी नहज है उससे
[51:41]तवाना लेते हुए अपना किरदार अदा करते रहेंगे इसीलिए जालिम को खौफ
[51:44]था उन कच्ची कब्रों से मुत वक्किल उन कच्ची कब्रों को मिटाना
[51:52]चाहता था उसके बैल उस कब्र पर नहीं जा पा रहे क्या
[51:54]मसला है तुम्हें उन कब्रों से मसला कब्रों से नहीं था मसला
[51:59]उस तहरीक से था कि जब इनके चाहने वाले इन कब्रों पर
[52:05]आते हैं तो अजम जनबी को लेकर वापस चले जाते हैं वह
[52:06]यफ है इस अजम जनबी से तो जहां बातिल के पैर लरस्सों
[52:19][संगीत] कि जोड़ जोड़ अलग हो चुका है लाश प पा माल
[52:29]हो चुके हैं वहां से लेकर कर्बला से कूफा कूफा से शाम
[52:34]शाम से फिर कर्बला कर्बला से फिर मदीना और तकरीबन एक साल
[52:40]या दूसरी रिवायत को ले ले तो दो साल कर्बला की मुबल
[52:42]बनकर नजत जनबी हमें नजर आ रही है और आज भी अगर
[52:46]हम देखते हैं चाहे वह लुबनान हो चाहे वह फलस्तीन हो चाहे
[52:52]वो पारा चना के मोमिनीन हो जहां जहां भी हुसैनिया इस वक्त
[52:56]की नजरों में नजरें डाले हुए गाड़े हुए खड़ी हुई है उसके
[53:02]पैरों की इस्तकामेश्वरी का जवाब नहीं है अगर होता तो वो टेबल
[53:26]टॉक करता अगर होता तो वो तुम्हें कोई नजरिया देता अगर यह
[53:29]नजरिया सही नहीं है तो कोई सही नजरिया देता लेकिन चूंकि उसके
[53:34]पास कोई नजरिया नहीं है इसीलिए दहशतगर्दी का रास्ता अपनाता है कभी
[53:38]बच्चों को मारता है कभी औरतों को मारता है कभी अस्पतालों पर
[53:41]बम गिराता है कभी स्कूलों पर बम गिराता है यह उसकी शिकस्त
[53:46]है जैनब अली की बेटी आज भी यजीद की निगाहों में निगाहें
[53:53]डालकर वही जुमले कह रही है जो शाम के दरबार में कहे
[53:54]थे ना तू रहेगा ना तेरा तख्त रहेगा खुदा की कसम जो
[54:00]कर चुका है और कर ले तू हमारी वही को मिटा नहीं
[54:04]सकेगा हम आले मोहम्मद के जिक्र को मिटा नहीं सकेगा आज यहां
[54:11]कत्ल होकर शहादत पेश करके यह तमाम के तमाम मुजाहिदीन सुर्खरू है
[54:15]और तुम जुल्म करके थक रहे हो तुम जुल्म करके शिकस्त खोदा
[54:21]हो चुके नतीजा क्या निकला नतीजा गुफ्तगू पूरी तकरीर को समेट दें
[54:25]इस नतीजे में आपने अपने सिया स किरदार से दुनिया वालों को
[54:31]यह बता दिया कि इस्लाम की नजर में जिहाद और सियासी फलियन
[54:35]कर्दगी सिर्फ मर्दों से मख सूस नहीं है खवातीन भी अपना भरपूर
[54:43]किरदार अदा करती हुई नजर आती हैं बल्कि खवातीन भी इस मैदान
[54:46]में मर्दों के शाना बशा है अपनी हैसियत के मुताबिक किरदार अदा
[54:51]कर सकती हैं जैसे बीबी जैनब सलाम उल्ला अलहा ने अपना किरदार
[54:58]अदा किया आप ने दम तोड़ते दीन को फिर से जिंदगी दे
[55:01]दी अल्लाह ह अकबर इस्लाम के तहफ्फुज में अपना एक अहम किरदार
[55:09]अदा किया यह वाकया कर्बला ही का असर था कि इस्लाम एक
[55:12]दफा फिर जिंदा हो गया इसीलिए शायर भी क्या खूब कह रहा
[55:20]कि इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद बस अजीजो दुआ
[55:27]है हमें खास इस शख्सियत से जो हमें रिजक चाहिए वह यही
[55:29]चाहिए कि वो अहद जो परवरदिगार आलम ने आपसे मुझसे हम सबसे
[55:35]लिया इस शख्सियत से हम वो रिस्क ले कि उस अहद पर
[55:39]कायमो दायम रहे और जब कलमा पढ़े ला इलाहा इल्लल्लाह तो इसका
[55:42]मतलब यही होना चाहिए कि कोई निजाम नहीं है सिवाय खुदा के
[55:48]निजाम के खुदा के निजाम के अलावा अगर कोई निजाम आप पर
[55:51]मुसल्लत किया जाए तो यह जिल्लत है यह जिल्लत का रास्ता है
[55:55]और यह वही जुमला फिर आपके साम आ जाएगा कि जहां सद
[55:59]शोहदा ने कहा इ रनी ब ब इस पुकारे जाने वाले के
[56:13]बेटे ने मुझे दो रास्तों के दरमियान खड़ा कर दिया है एक
[56:17]रास्ता वही रास्ता है जो जिल्लत का रास्ता है यानी कि मैं
[56:22]इसके निजाम को कबूल कर लू इसके दजल को कबूल कर लू
[56:29]इसकी ता को इसकी इस्तेमा यत को इसकी जो इस्लाम दुश्मन जो
[56:33]कवानी है इनको कबूल कर लू यह जिल्लत का रास्ता है और
[56:39]दूसरा रास्ता अपने वजीफे पर अमल करते हुए चाहे इसकी राह में
[56:41]मुझे शहीद होना पड़े वह कत्ल का रास्ता है वह शहादत का
[56:47]रास्ता है वह असलन अजमत का रास्ता है तो कहा बन सलती
[56:52]वला तो यकीनन एक मुश्किल रास्ता है सिलत का रास्ता है कि
[56:55]जहां पर जान देनी है और एक जिल्लत का रास्ता है तो
[57:02]है हात मिन जिल्ला जिल्लत हमसे दूर है हम सर कटा सकते
[57:09]हैं सर झुका नहीं सकते आखिरी शेर पढ़कर अपनी तकरीर को खत्म
[57:13]करूं झुकाना चाहा था जिस सर को शाम वालों ने शिकस्त देखिए
[57:22]उस सर को खुद उठा के चले ये है बीबी जैनब सलाम
[57:31]उल्ला अलहा और आपकी आल की आपकी आपके र फका की आपके
[57:39]घर वालों की आले रसूल की फता कि जिस सर को शाम
[57:45]वाले झुकाना चाह रहे उस सर को खुद उठाकर चल रहे यजीद
[57:47]को हुसैन का सर तो मिला लेकिन झुका हुआ नहीं मिला उठा
[57:54]हुआ ही मिला परवरदिगार आलम से दुआ है कि हमें बीबी सलामुला
[57:58]अलहा की शख्सियत से मुकाम का रिजक नायत फरमा परवरदिगार जहां जहां
[58:05]भी मुसलमान कुफर के साथ नबरत आजमा है वहां उनकी मदद और
[58:08]नुसरत फरमा परवरदिगार इमाम जमान अल सलाम बिल्कुल वैसा ही है जैसे
[58:15]हम चाहते हैं हमें ऐसा बना दे जैसा इमाम जमान हमें देखना
[58:17]चाहे इमाम जमान अल सलाम के दिल को उनके जुहूर के जरिए
[58:26]से शाद और खुशनूर फरमा हमें उनके आवान अंसार में से करार
[58:34]दे रना रहमते
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