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Shehzadi BiBi Fatima A.S Ka jehad | H.I. Muhammad Ali Ghayoori
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محاضرات
Record date: 08 Dec 2024 - شھزادی فاطمہ کا جہاد AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]अ बिल्ला मन शतान रम बिस्मिल्ला रहमान रहीम हीनता हुर नासन सल्ला
[0:25]अला मुहम्मद रीन अला सला मुहम्मद वाले मुहम्मद ल फरज ला समा
[0:37]बतला फन रही लना ले तोरा मकदम फिदा बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्लाहु
[0:48]कुल वली हसन सलात कालेही वाला आबा फ सा फ कु सा
[0:53]वली हाफ कानासर दलील वाना हतास व महा ला अल्ला सलेला मोहम्मद
[1:09]वा महम्मद फर बिस्मिल्ला रहमान रहीम लाला आदा अजमा अम्मा बाद काला
[1:22]तबारक ताला फ किताब करीम बिस्मिल्लाह रहमान रहीम या आमन हला तिजार
[1:30]अली न बिल्ला रसूली व जाहिद बवाल कोनस लिकम रकन कुतु तालम
[1:41]य फरल नक ल जनाज महार व मसान बतन फ जनाद लिकल
[1:53]फलम राना नसर मिनला करीब ब मम सब मिलकर बुलंद आवाज से
[1:58]दरूद पढ़ मोहम्मद बरे कुल हमारी जिंदगी में कुराने करीम और चारदा
[2:13]मासूमीन अल सलातो सलाम की जवाद मुकद्दसा की एक अजीब तासीर होनी
[2:20]चाहिए बहरहाल कुरान से हमारा राबता अहले बैत से हमारा राबता मुस्तहकम
[2:24]होना चाहिए जाते जाते फरमाया हजरत नेर किताब महसूस य होता है
[2:36]कि मकतूब सूरत में जब तालीमाबाद दी तो अहले बैत अहार की
[2:51]सूरत में जो है वह पेश किया यानी उन्हें देखता चला जाए
[2:55]यह ऐसा ही है जैसे कि कुरान की आयतों को इंसान मुजस्सम
[2:57]देख रहा है और इन्हीं कुरानी की आयतों को अगर इंसान जो
[3:02]है वह क्या है लिखता यानी अहले बैत के किरदार को अगर
[3:03]लिखता चला जाए तो वह कुरान की आयतें बनती चली जाती है
[3:07]तो बहरहाल एक अजीब अ खूबसूरत राबता है कुरान करीम और अहले
[3:13]बैत अथर अलम सलातो सलाम के मा बैन हमारी भी जिम्मेदारी बनती
[3:15]है कि अपनी जिंदगी में इस कैफियत को एहसास कर सके आइए
[3:21]हम कुरान करीम की निस्बत से और इसी तरह से वह उलमा
[3:25]वो मराज कराम के जो बहरहाल अहले बैत अथर तक हम तक
[3:27]अहले बैत अथर तक हमें पहुंचाते हैं यह देखें कि हमारा राबता
[3:32]कैसा है अजीजो कबल इसके कि मैं अपने मौजू से मुतालिक गुफ्तगू
[3:34]करूं और मैं इस सिलसिले में सूर मुबारक सफ की चार आयत
[3:39]लेकर आया हूं आयत नंबर 10 11 12 और 13 और मौजू
[3:42]तीन हिस्सों पर मुश्त मिल है जाहिर मुझे 40 मिनट दिए गए
[3:47]हैं तीन हिस्सों पर मुश्त मिल है अहमियत जिहाद कुरान करीम की
[3:52]रोशनी में दो जिहाद का माना क्या है तीन शहजादी ने कैसे
[3:59]जिहाद ब जलाया कबल इसके कि मैं इन तीन जिसे कह सकते
[4:03]हैं मराल तकरीर को आपकी खिदमत में पेश करूं बतौर कुल कुराने
[4:05]करीम से अपने राब को हमें मुस्तहकम बनाना पड़ेगा और इसी तरह
[4:10]उलमा रब्बानी से अपने राबे को मुस्तहकम बनाना पड़ेगा इस व गै
[4:13]बत का जमाना है मौला आका हमारी निगाहों के सामने नहीं है
[4:18]लेकिन उन्होंने एक सिस्टम दिया है ऐसा नहीं है कि हमें खुदा
[4:21]नखता लावारिस छोड़ दिया एक सिस्टम दिया है वह सिस्टम यह है
[4:26]कि जो भी दीन शनास है दीन को अच्छे तरीके से जानता
[4:28]है दुनिया की मोहब्बत में उसका दिल मुस्तक नहीं है लोगों की
[4:34]जिम्मेदारी है कि उसको फॉलो करें म हम जैसे तुल्ला क्या करते
[4:39]हैं अवाम उनासुर दे मराज किराम से मराज किराम क्या है अजीजो
[4:47]दर वाक इंसान को जमाने के इमाम तक पहुंचाने का होल एंड
[4:52]सोल रास्ता अजीजो इस गबतला और कोई रास्ता नहीं बस थोड़ी देर
[4:55]के लिए अपनी जिंदगियां उठाकर देखें कि कुरान से हमारा राबता और
[5:00]उन उलमा से राबता कि जो मौला वाका तक मुझे और आपको
[5:04]पहुंचाते हैं कितना है अगर खुदा नख्वा स्ता इस राबता में कमी
[5:06]है चाहते ना चाहते हम सिरात मुस्तकीम से भटक जाते हैं इसी
[5:10]तबार से जो है वो फिसल जाते हैं अपने राबे को इंशाल्लाह
[5:12]कुरान से और उन उलमा से कि जो इंसान को जो है
[5:17]वो जिंदगी गुजारने का तरीके का सिखाते हैं इंशाल्लाह बेहतर तौर पर
[5:20]उस्तव कर पाएंगे सब मिलकर एक बुलंद आवाज से दरूद पढ़ द
[5:26]मोहम्मद और उनके आ स अला महम्मद आले मोहम्मद कुरान से राबता
[5:31]के लिए मुझे ऐसा लगता है शायद आपने आयाम फतिम में हतमान
[5:34]जो है वो क्या है इस किस्से को सुना होगा दोबारा से
[5:36]सुन ले अजीजो दिलों को तरोताजा कर देता है जब इंसान आलिम
[5:41]है बरहक के साथ हां वो जो जमाने के इमाम से इंसान
[5:45]को जोड़े जब उनके साथ जिंदगी बसर करता है तो उसका एक
[5:48]असर इंसान की जिंदगी में यह नुमा होता है कि कुरान करीम
[5:50]की आयतें उसके लिए मोम हो जाती हैं कुरान करीम की आयतों
[5:54]से वो बहर मंद होने लगता है देखें ये एक दो आयतों
[5:59]से आपको कैसा लगता है मसल ये आयत शहजादी जब घर के
[6:00]कामों को बजा लाया करती थी तो य इस आय करीमा की
[6:03]तिलावत फरमाया करती थी उस जमाने की सखियां कैफियत ये होती थी
[6:09]कि जब आ हजरत आते थे शहजादी के घर में आ हजरत
[6:14]अहमद मुस्तबादा मुस्तफा सल्लल्लाह अ और देखते थे कि बेटी की हालत
[6:24]यह है कि ऊंट की बनी ऊंट की खाल की बनी हुई
[6:27]चादर आपने जो है वह क्या है अपने शानों पर रखी हुई
[6:28]है बच्चों को जो है वो उनकी गजा के असबाब फरा हम
[6:32]कर रही है अपने हाथों से जो है वह क्या है चक्की
[6:35]पीस रही है गंदम तो इस घराने में होता नहीं था ज
[6:38]पीस रही है तो उस मौके पर आ हजरत की आंखों में
[6:42]आंसू आ जाते थे और आपकी जबान अकदर त दुनिया ब हलावत
[6:48]आखिरा बेटा फातिमा दुनिया की सखियों को गुजार ले और इसके ववज
[6:51]में परवरदिगार मुताल की बारगाह से आखिरत की हलावत और मिठास तक
[6:56]रसाई हासिल कर ले तवज्जो चाहता हूं शहजादी बाज औकात मिलता है
[6:58]कि असब जब दरे शहजादी पर आए तो देखा कि कामों को
[7:02]बजा लाते हुए इस आय करीमा की तिलावत कर रही है देखें
[7:05]ये इतना सा फिकरा है कैसा लगता है आपको वला खरका तर्जुमा
[7:10]इसका ये है जो कुछ भी अल्लाह के पास है खैरून क्वालिटी
[7:15]के तबार से बहुत बेहतर है असल कंपैरिजन नहीं है उसका दुनिया
[7:17]की जो है वो क्या है अश्या के साथ व अब हां
[7:21]और हमेशा बाकी रहने वाला है दुनिया की कोई भी शय जवानी
[7:25]से लेकर पैसे से लेकर मकाम और मर्तबा मेरे आपके पास बाकी
[7:27]नहीं रहने वाला बस अगर क्वांटिटी को मुकाय करें तो वहां की
[7:32]क्वांटिटी भी जो है व काबिले हां मुकाय नहीं है अगर क्वालिटी
[7:34]को आप मद्देनजर रखें तो इंसान वाक तसव्वुर नहीं कर सकता जो
[7:38]कुछ परवरदिगार मुताल मुझे और आपको वहां पर अता करने वाला ये
[7:41]इतनी सी आयत अजीजो इंसान को हां इंस्पायर करने के लिए इंसान
[7:45]को जिसे कह सकते हैं हा तरोताजा करने के लिए काफी नहीं
[7:50]है मेरे साथ मिलकर पढ़ दीजिए इस आयत को वल्ला अक्सर बितर
[7:56]में दोस्तों से कहता हूं या खाना खा करर आए घर जाकर
[8:01]खाएंगे हमारे दोस्त हमसे कहा करते थे या जो है वो चाय
[8:02]पीक आए हो घर जाकर पियोगे वैसे तो मेहमान नवाजी ना करें
[8:06]मेरे भाई हा थोड़ा सा आयत को मेरे साथ पढ़े और कुछ
[8:11]ना कुछ जिसे कह सकते हैं सारी आवाज मेरे कानों में पड़े
[8:14]वल्लाला रका आसान नहीं है मेरे भाई याद करना भी आसान है
[8:22]वल्ला रका दुनिया में कभी आपको फाइनेंशियल परेशानी है बीमारी है हां
[8:30]पर कोई भी किसी भी तबार से परेशानी है बेहतरीन आयत है
[8:33]इंसान को ताकत अता करती है चार दिन की ये जिंदगी है
[8:35]कोशिश करें कि हमारी जानिब से कोताही ना हो इस वक्त ममल
[8:39]कते खुदा दाद पाकिस्तान में जो कैफियत हमारी है अजों बहुत सारी
[8:42]कोताही हमारी अपनी है जिसकी बिना पर हम इन सखियों को उठा
[8:46]रहे हैं ये वो फसल है कि जिसे हमने अपने हाथों से
[8:49]ऐसे जो है वो क्या है चाहा है वगरना हम अगर अपने
[8:50]किरदार को इंडिविजुअली और जो है वो क्या है सोशली बेहतर बना
[8:54]ले तो यह कैफियत नहीं होनी चाहिए पाकिस्तान के बाशिंदों की जहां
[8:57]जिस इलाके में जाकर पूछो अगर रोटी कपड़ा मकान की की क्या
[9:01]सूरत हाल है गैस लाइट और पानी की क्या सूरत हाल है
[9:05]वाक ना गफ्ता बे कहीं से लगता नहीं है कि शहर कराची
[9:06]के बाशिंदे ऐसा लगता है किसी गांव दूर दराज के जो है
[9:10]वो क्या है बाशिंदे क्यों इसलिए कि हमने सिलसिले में सोचा नहीं
[9:12]अहले बैत अथर ने हमसे चाहा है कि सियासी बुनियाद पर भी
[9:16]कदम आगे बढ़ाओ यह मकाम अच्छे लोगों के लिए यह मकाम पाकीजा
[9:18]लोगों के लिए जब फास और फजिर के हाथ में दे दिया
[9:22]जाएगा तो यही होगा उनसे और क्या तवको है कि वो इसी
[9:27]तरह से जो है वो क्या है मुल्क की असास और बुनियाद
[9:30]को खोक कर रहे होंगे लिहाज इंसान जहां पर खुद की गलती
[9:32]नहीं हो अल्लाह की जानिब से बीमारी है अल्लाह की जानिब से
[9:36]जो है बहरहाल जो है व क्या बेटी का रिश्ता नहीं आ
[9:39]रहा मन किसी वजह से तलाक हो गई या हजारों परेशानी है
[9:41]फाइनेंशियल क्राइसिस है फरमाया जब बहुत ज्यादा इंसान दुनिया में जो है
[9:46]वो क्या परेशान हो रहा हो य आया करीमा बहुत खूबसूरत है
[9:47]इंसान को यह बताती है कि भाई चार दिन की जिंदगी वला
[9:51]र पढ़ दे एक मर्तबा क्या शान है माशाल्लाह सामन की बुलंद
[9:59]आवाज से पढ़ मोहम्मद जनाब फिजा का यह वाकया अजों वाक शहजादी
[10:10]की कनीज है इस जुमले पर तवज्जो कीजिएगा जो इस घराने की
[10:15]खिदमत करता है यह घराना उसे बहुत कुछ अता करता है बहुत
[10:21]कुछ अता करता है अ जनाब फिजा का आपके बुढ़ापे और जो
[10:22]है व क्या कह सकते हैं सिन रसीदा कैफियत में जो है
[10:27]वो यह किस्सा मशहूर और मारूफ है आप देखिए इस घराने ने
[10:31]इस खादिमा को क्या मकाम मर्तबा अता कर दिया कि सूर दहर
[10:33]की आयतें जहां मौला कायनात के लिए नाजिल हो रही है जहां
[10:38]शहजादी के लिए नाजिल हो रही है जहां हां हसन हुसैन अल
[10:42]सलातो सलाम के लिए नाजिल हो रही है वहां सूर दहर की
[10:43]आयत हजरत फिजा के लिए भी नाजिल हो रही है तमाम मोहसिना
[10:46]इस्लाम हस्तियों के लिए खुसूसियत से शहजादी फिजा सलाम उल्ला अलहा के
[10:49]लिए बुलंद आवाज से दरूद पढ़ दे मोहम्मद महम्मद अब दो तीन
[10:59]मिनट में किस्सा आपको सुना दूं देखें कितना खूबसूरत वरना रुक रुक
[11:01]के पढ़े तो बहुत प्यारा किस्सा है कि बहरहाल रावी ये कहता
[11:06]है कि मैं जो है वो एक बयाबान से जो है वो
[11:10]एक बहरहाल सहरा से गुजर रहा था ऐसे में मैंने एक जो
[11:13]है वो बूढ़ी खातून को देखा कि जो य को तन्हा है
[11:14]मैंने आगे बढ़कर सवाल किया आप कौन है सुना है किस्सा मेरे
[11:19]भाई नहीं सुना सुना हुआ है हां हम बुजुर्गों ने सुना हुआ
[11:24]है जी हां कहा आप कौन है उन्होंने जवाब में कहा ल
[11:25]सलाम फलम बात करने से पहले इंसान सलाम से आगाज करें हां
[11:32]कितने इस्लाम की खूबसूरत जो है वो क्या कह सकते हैं एक
[11:41]तालीमाबाद बात है कि चूंकि हमें उसके माना की खबर नहीं है
[11:58]तो एक जानिब से सलाम करते हैं दूसरी जानिब से कस्टमर पर
[12:02]मीठी छुरी भी फेर रहे होते हैं हा सेलर क्या कर रहा
[12:03]होता है जैसे ही कस्टमर आता है उससे कहता है सलाम अलेकुम
[12:06]यानी अल्लाह से मैं दुआ कर रहा हूं कि यह बेचारा हर
[12:10]किस्म की परेशानियों से महफूज रहे वो बेचारा तेरे से महफूज नहीं
[12:12]है हां माल भी सही नहीं दे रहा है कीमत भी सही
[12:16]नहीं लगा रहा और क्या कह रहा है सलाम अलेकुम व ये
[12:19]कैसी सलामती अल्लाह से मैं कह रहा हूं कि इसको सलामती अता
[12:20]कर और खुद मुझसे बेचारा महफूज नहीं है मुझसे महफूज नहीं लिहाज
[12:26]उसने आगे बढ़कर सलाम किया कहा के आप यहां पर य को
[12:33]तन्हा कैसे कुराने करीम की आयत पढ़ी मय दिला फ माल मन
[12:36]मुल जिसकी अल्लाह हिदायत कर दे वह गुमराह नहीं होता ने दरवा
[12:39]इशारा किया कि मैं अपने काफिले से बिछड़ गई हूं अब दो
[12:44]सवालात के जवाबाइकिरण से रखा हुआ था जाहिरी तबार से भी मुजन
[13:03]हो फिक्र के तबार से भी रब की जानिब तवज्जो रहे इंसान
[13:05]की साथ है मेरे अजों फिर सवाल किया कि आप कहां से
[13:10]आ रही है जवाब में आयत पढ़ी यना मका दूर इलाके से
[13:13]आ रही कहां जा रही है जवाब में कहा ला ह बैतुल्लाह
[13:17]के लिए जा रही कितने दिनों से अपने काफिले से जुदा है
[13:21]जवाब में आयत पढ़ी छ दिनों से जुदा कहा कि आपको कुछ
[13:26]खाने पीने की जरूरत है भूख तो नहीं लगी है जवाब में
[13:29]आयत पढी हमने नबियों के लिए वो जस थोड़ी करार दिए कि
[13:34]जिन्हे खाने पने की जरूरत नहीं है बहरहाल इंसानी जो है वो
[13:38]लिबास है उसके तकाज हैं खाने की जरूरत है खाना फराह किया
[13:40]अब जब खाना खा लिया तो तेज तेज चलने लगी मोमिना तो
[13:43]इन्होंने आगे बढ़कर कहा इतना तेज चलने की जरूरत नहीं है जवाब
[13:47]में उन्होंने कहा लाला अल्लाह किसी इंसान को उसकी वसत से उसकी
[13:51]ताकत से ज्यादा तकलीफ नहीं देता है जितनी मेरे अंदर ताकत है
[13:55]मैं चल रही हूं आगे अच्छा यह जो साब थे यह सवारी
[13:58]पर थे जाहिर ऊंट की सवारी पर थे कहा बेहतर आप मेरे
[13:59]साथ बैठ जाइए ताकि बेहतर तरीके से मैं आप आपको काफिले तक
[14:03]पहुंचा दूं उस मौके पर आयत पढ़ी ता अगर इस आलम में
[14:09]दो खुदा होते तो यह आलम क्या हो जाता हा खत्म हो
[14:14]जाता इसमें फिना फसाद हो जाता आज दुश्मन के अहम तरीन हरबो
[14:19]में से हरबा है सात साला बच्चे से लेकर 70 साला बूढ़ा
[14:20]जो है व इस हरबे का शिकार है और हरबा क्या है
[14:23]मेहरम ना मेहरम के मसाइल में हमारी आंखों को क्या कर दिया
[14:27]है ना बीना कर दिया समा को क्या कर दिया है हां
[14:30]समात नाबी नहीं होती मेरे भाई हां आंखें नाबी हो गई और
[14:32]समात क्या हो गई है हां बहरे हो गए हक नहीं सुन
[14:37]पाता इंसान अगर चाहते हैं कि हक से मोहब्बत में आपके इजाफा
[14:42]हो जाए चाहते हैं कि हक सुझा ई देने लगे हक दिखाई
[14:45]देने लगे आज मोमिन कहता है मौलाना साहब समझ में नहीं आ
[14:47]रहा उलमा आपस में इख्तिलाफ नजर रखते हैं खब डॉक्टर भी इख्तिलाफ
[14:51]नजर रखते हैं इंजीनियर भी इख्तिलाफ नजर रखते हैं वहां पे तो
[14:53]सारे काम आपको समझ में आ रहे होते हैं कि किससे घर
[14:55]बनाना है इलाज किससे करवाना है क्यों इसलिए कि वहां पर मैं
[14:59]और आप संजीदा है यहां पर संजीदा नहीं है एक सवाब की
[15:00]पोटली है जिसे भरने के लिए हम लोग जो है वो क्या
[15:03]है मस्जिद इमाम बारगाह में आ जाते हैं मौलाना कुछ भी पढ़े
[15:06]हमें सवाब तो मिल रहा है ना ऐसे थोड़ी है मेरे भाई
[15:07]जितना गौर और फिक्र करेंगे आपके सवाब में सवाब कुछ है ही
[15:12]नहीं वही आपके फिक्र की शफाफ जिंदगी गुजारने का सही अंदाज यह
[15:18]है सवाब खुदा की बारगाह में क्या मिलेगा जब मुझे समझ में
[15:20]आ जाए मैंने कैसे जिंदगी बसर करनी है बहरहाल यहां पे आपको
[15:24]रोकना नहीं चाहता अपने मौजू से मुत्त सिल होना चाहता हूं एक
[15:26]बुलंद आवाज से दरूद पढ़ दे मोहम्मद और उनके आगे बढ़कर जो
[15:35]है वो जब इन्होंने यह आयत पढ़ी तो वह खुद जो है
[15:39]वो क्या सवारी के जानवर से उतर आया और कहा मजमा आप
[15:43]बैठ जाइए यह बैठ गई जैसे ही बैठी अभी जब हम आभ
[15:47]रहे थे तो जो साहिब साहिबे जिसे कह सकते हैं सैयारा हां
[15:49]जो गाड़ी चलाने वाले थे उनके जाहिर फरजंद ही थे बहुत अच्छा
[15:54]लगा मुझे मैंने कहा बेटा कोई आयत पढ़ो उसने कहा सुभान जब
[15:57]सवारी के जानवर पर इंसान बैठ गाड़ी में भी बैठे बहरहाल इंसान
[16:02]यह ना समझे कि सब कुछ मेरे कंट्रोल में सब कुछ उसके
[16:03]कंट्रोल में है सु ने इस आ करीमा की तिलावत की बहल
[16:12]सवारी का जानवर चलता चला गया यहां तक के एक काफिला नजर
[16:13]आया कहा मोमिन इस काफिले में आपका कोई जानने वाला माजर चाहता
[16:20]हं एक दरूद पढ़ मोहम्मद अला स मोमिना इस काफिले में आपका
[16:28]कोई जानने वाला है चार आयत पढ़ी लीत फ व मा मोहम्मद
[16:37]ला रसूल या याया किता या मूसा इनी अनला चार आयत पढ़ी
[16:43]दरवा पैगाम दिया कि य चार अफराद है उन्होंने भी आगे जाकर
[16:45]लान किया दाऊद हा मोहम्मद मूसा हा यया जैसे यह चार नाम
[16:51]लिए चार जवा वहां से बरामद हुए इस मोमिना से सवाल किया
[16:54]इन चार जवानों से आपका क्या रिश्ता है जवाब में कहा माल
[16:59]बनन हयानिया हां दरवा मेरे बेटे हैं हां हर सवाल का जवाब
[17:02]आयतों के जरिए से जैसे ही बच्चे करीब आए अभी तक जो
[17:07]मोजमा उनसे खिताब कर रही थी अब अपने बच्चों से खिताब किया
[17:13]और आगे बढ़कर कहा या अबर हो इर मरता क अमीन जनाबे
[17:17]शब की बेटी का जिक्र है कि जब जो है वो क्या
[17:21]है हजरत मूसा को अपने बाबा की खिदमत में लेकर पहुंची तो
[17:23]कहा बाबा इन्ह अपने पास रख लीजिए यह कवी भी है कुवत
[17:27]भी रखते हैं और अमानत दार भी है कि इस मौके पर
[17:30]भी रुक कर अजीजो इस आयत के इस हिस्से को आपकी खिदमत
[17:31]में पेश करना चाहता हूं कि जनाब शब ने सवाल किया बेटा
[17:35]यह तो समझ में आता है तुमने पूरा किस्सा सुनाया कि वो
[17:38]डोल के जो 10 अफराद मिलकर उठाते थे हजरत मूसा ने य
[17:40]को तन्हा उठा लिया लेकिन बेटा इनकी अमानतदीने बेहतरीन एंप्लॉय जनाबे शब
[17:47]की बेटी के इस बयान की रोशनी में जिसे कुरान ने अपनी
[17:50]जीनत करार दिया है एंप्लॉय के अंदर दो सिफत होनी चाहिए नंबर
[17:56]एक अपना काम उसको आता हो नंबर दो ईमानदार हो काम भी
[18:00]आना चाहिए ईमानदार भी होने चाहिए अगर काम नहीं आता है तो
[18:05]भी नुकसान पहुंचाएगा काम आता है लेकिन ईमानदार नहीं है तो भी
[18:08]नुकसान पहुंचाएगा जैसे इस वक्त हमारे माशे को उठा के देख लीजिए
[18:12]क्या सूरते हाल है बहरहाल जनाबे शब ने सवाल किया बेटा लेकिन
[18:15]इनकी अमानत दारी का आपको कैसे पता चला कहा जब मैं इनको
[18:18]कहने लगी कि मेरे बाबा आपको बुला रहे हैं तो इन्होंने कहा
[18:20]कि इजाजत दीजिए मैं आगे बढ़कर चलूंगा आप मेरे पीछे आइए क्योंकि
[18:25]हमें अल्लाह ने ये तालीम दी है कि कभी खवातीन के पीछे
[18:29]ना चला जाए अफसोस के साथ कह पड़ता है कि आज भी
[18:29]बसों में हमारे यहां जो सिलसिला है खवातीन आगे होती है मर्द
[18:33]हजरात पीछे होते हैं वालय कि आप ईरान में उठाकर देखें वहां
[18:35]पर मर्द हजरात आगे खवातीन पीछे इस्लामी ऐतबार से बहरहाल आपकी निगाह
[18:41]जिस कदर ना महरम से दूर रहे परवरदिगार मुताल उतनी जो है
[18:44]वो क्या है आपकी नूरानिया में इजाफा होगा बाबा मैंने यहां से
[18:48]इनकी इमानदारी अमानतदीने है तवज्जो चाहता हूं अजीजो फिर बहरहाल बच्चों से
[18:53]दरवा के इस आयत के जरिए से पैगाम दिया कि इसे कुछ
[18:57]हदियाना मेरी जो है वो खिदमत की है मुझे बि मैं बिछड़
[19:00]गई काफिले तक पहुंचा दिया बहरहाल बच्चों ने जो कुछ था उसे
[19:02]अता किया उस मौके पर फिर उस मोजमा की जबान पर जुमले
[19:08]आए ला और अल्लाह जो है वह क्या है हां जिसके लिए
[19:09]चाहता है दुगना अता करता है या दर वाक अपने बच्चों को
[19:13]पैगाम दिया कि नहीं कुछ और भी दो कुछ और भी दिया
[19:16]उस मौके पर उस शख्स ने इन बच्चों से सवाल किया किय
[19:19]मजमा जोज कुरान की आयत के कुछ नहीं पढ़ती है कहा यह
[19:20]कनीज जहरा है 20 साल से जोज आयत कुरानी की और कुछ
[19:26]नहीं पढ़ रही है सब मिलकर बुलंद आवाज से दरूद पढ़ दे
[19:29]मोहम्मद इस कैफियत को मद्देनजर रखते हुए मुझे बताइए हमारी क्या हालत
[19:39]है आप तो अवाम उ नास में से हैं हम तुल्ला आप
[19:44]की क्या कैफियत है अ फरमाया गया कमस कम 50 आयतें इंसान
[19:46]रोजाना पढ़े कमस कम अजीजो क्या कैफियत है बताइए मुझे या तिलावत
[19:51]कुरान नहीं पाई जाती है अगर पाई भी जाती है तो इंसान
[19:52]तर्जुमे पर गौर किए बगैर तिलावत किताबे खुदा को बजा ला रहा
[19:57]होता यही वजह है अजों जो माशे में नूरानिया आनी चाहिए वो
[19:59]मुझे और आपको नजर बोलिए नहीं आ रही है नमाज इशा के
[20:04]बाद सूर वाकया का पढ़ना बहुत अच्छी बात है और इसके वजह
[20:08]से रिजक में इजाफा होता है लेकिन ए मेरे भाई काश कि
[20:12]तू उसके तर्जुमे पर गौर कर लेता तो तेरे रिजक मादी और
[20:14]मानवी दोनों में इजाफा हो जाता कुरान इंसान को वह सुकून अता
[20:20]करता है जो कहीं नहीं है बहरहाल अ घड़ी की सोइया इससे
[20:21]ज्यादा इजाजत नहीं दे रही आ जाइए मैं अपने मौजू पर अपने
[20:24]मौजू के लिए मैं तीन जो है वो जिसे कह सकते हैं
[20:28]मरहले में मैंने अपने मौजू को तकसीम किया था नंबर एक कुरान
[20:32]में जिहाद की अहमियत इसके लिए मैंने सूर मुबारक सफ की आयत
[20:35]नंबर 10 से 13 चार आयतों का इंतखाब किया तवज्जो से सुनिए
[20:41]या आमन सूर सफ कुराने करीम का 61 वा सूर कुराने करीम
[20:43]में कितने सूरे हैं बच्चों 114 61 नंबर के सूरे का नाम
[20:51]क्या है सफ हां और उर्दू में हम जो कहते हैं नमाज
[20:52]की सफ उसी से मुरत तरीके से लोगों का खड़ा रहना इसी
[20:57]सूर की आयत नंबर चार चार है अल्लाह पसंद करता है कि
[21:02]लोग उसकी राह में जो है वह क्या है सफ बस्ता किता
[21:06]करें और दुश्मन से लड़े क बनियान मसू ऐसे लड़े जैसे सीसा
[21:09]पिलाई हुई दीवार होती है तन्हा आदमी नहीं लड़ सकता अजीजो लेकिन
[21:17]जब हां वातस बबला बोलिए जमीन अल्लाह की रस्सी को मिलकर थामे
[21:20]एक घराना अगर मिल जाए एक महल्ला मिल जाए एक शहर एक
[21:25]मुल्क के अफराद अगर मिलकर एक अमर में कदम आगे बढ़ाए उसकी
[21:27]जो है वो खूबसूरती कुछ और होती है बहरहाल देखिए लबो लहजा
[21:31]कुरान का देखिए याम अलीम आज भी जो है व कम्युनिकेशन स्किल्स
[21:38]में जो लोग जाते हैं उनको सिखाया जाता है कि भाई ऐसे
[21:42]बात करो कि सामे की और सुनने वाले की तवज्जो अपनी जानिब
[21:48]देखि कुरान का लबो लहजा ईमान वालों आया हम आया मैं रहनुमाई
[21:50]ना करूं तुम्हारी ऐसी तिजारत की जानिब जो तुम्हें अजाब अलीम से
[21:58]निजात दे दे दर्दनाक अजाब से बचा ले जी फौरन इंसान के
[22:00]कान खड़े होते हैं नहीं यह पहली आयत परवरदिगार कैसे अजाब अलीम
[22:08]से अपने आप को बचाओ फरमाया न बिल्ला रसूले हा ईमान लाओ
[22:10]अल्लाह और उसके रसूल पर व तु जाहि दूना ब अमवा और
[22:17]जिहाद करो अपने मालों के जरिए से और अपनी जानों के जरिए
[22:23]सेय तुम्हारे लिए बहुत अच्छा है अगर तुम मफत रखते बस अगर
[22:30]इंसान अजाब अलीम से अपने आप को बचाना चाहता है दो काम
[22:36]करने पड़ेंगे एक ईमान दो बोलिए जिहाद फिर से देखि मैं आयत
[22:38]को पढ़ रहा हूं अजाब अलीम से कैसे बच पाओगे न बिला
[22:43]रसूले तु जादक ताम एक ईमान दो जिहाद और जिहाद की दो
[22:54]किस्में कुरान ने इस आयत में बयान कर द एक अपनी जान
[22:57]के जरिए से जिहाद करो दो अपने माल के जरिए से जिहाद
[23:02]करो परवरदिगार अगर मैंने यह कर लिया तो तू उसके वज में
[23:04]मुझे क्या देगा र तुम्हारे गुनाहों को हम माफ कर देंगे यल
[23:10]जनात और तुम्हें दाखिल करेंगे और वह तुम्हें दाखिल करेगा यानी परवरदिगार
[23:17]उन बागत में जिनके नीचे से नहर जारी है व मसान त
[23:21]बतन फ जन्ना और हमेशा हमें अदन माने जा विदानी के हमेश
[23:27]कीी के ज नाते अदन याने यह जन्नत की खास किस्म है
[23:33]बहिश्त की खास किस्म है दरवा के इशारा है यानी हमेशा वाली
[23:35]बहिश्त में परवरदिगार मुताल जावेदान बहिश्त में तुम्हें पाको पाकीजा रहने की
[23:39]जगह अता करेगा तुम्हारे मगफिरत का तोहफा है और तुम्हें बागत का
[23:44]तोहफा है और उन बागा में अच्छे-अच्छे घर नहीं मालूम शुमाल पाकिस्तान
[23:47]में कभी आप गए या नहीं गए मुझे शुमाल ईरान देखने की
[23:50]जो है वो क्या है अल्लाह ने तौफीक अता फरमाई दी वाक
[23:55]इंसान हैरान हो जाता है चारों जानिब से दरख्तों का जो है
[23:57]वो साया हो दरमियान में आपके लिए घर हो नीचे से जो
[24:00]है वो नहर जा रही हो मैं आज से 20 साल पहले
[24:02]एक मर्तबा गया हूं अभी भी रात को सोते वक्त वो जो
[24:06]नहर के जाने की आवाज है अभी भी मेरे कानों में है
[24:08]अजज कितनी खूबसूरत रब तबारक ताला ने दुनिया बनाई है नहीं मालूम
[24:15]आखिरत क्या होगी अजों कहा कि अगर तुम ईमान और जिहाद का
[24:17]सहारा ले लो हम तुम्हें जो है वो क्या है मगफिरत का
[24:21]तोहफा भी अता करेंगे और बहस के हकदार भी बना देंगे और
[24:25]फिर उसके बाद अला आप चाहे तो उस बाद वाले जुमले को
[24:29]दो अलहदा अलहदा ची शुमार करें मुमकिन है चाहे तो एक चीज
[24:31]शुमार करें अल्लाह तुम्हारे गुनाहों को माफ फरमा देगा और तुम्हें उन
[24:34]बागत में दाखिल करेगा जिसके नीचे से नहरे जारी है और पाको
[24:39]पाकीजा मकान भी अता करेगा उन बागत में कि जो हमेशा हमेशा
[24:43]के लिए तुम्हारे लिए फराह किए गए चाहे दो हदय ले ले
[24:45]चाहे एक ले ले आसानी के लिए हम अभी दो ले लेते
[24:47]हैं मगफिरत का तोहफा और जन्नत और बहिश्त का तोहफा फरमाया इस
[24:52]पर इफा नहीं कर रहा है परवरदिगार अगर तू ईमान और जिहाद
[24:58]के साथ है दो तोहफे तेरे लिए और हैं वखरा और इसके
[25:00]अलावा भी परवरदिगार मुताल जो है वह दो हदय को तुम्हारे लिए
[25:04]लिए हुए हैं जो तुम्हें पसंद है और वह क्या है यह
[25:07]जुमला हमारे माश में मशहूर है यहां पर कुछ और है मेरे
[25:08]भाई आप देख रहे हैं एक बुलंद आवाज से दरूद पढ़ दे
[25:12]मोहम्मद [संगीत] औरन और इसके अलावा भी कुछ हदा है अल्लाह की
[25:22]जानिब से जिन्ह तुम पसंद करते हो यह जुमला हमारे माशे में
[25:27]मशहूर है नसर मिनल्लाह जी मेरे भाई वतन करीब नसर मिनल्लाह वतन
[25:34]करीब ये सूर सफ की आयत नंबर जी मेरे भाई 12 का
[25:40]हिस्सा है यानी यह कब मिलता है एक मुसलमान को एक मुसलमान
[25:45]माशे को जब व यह दो काम करे एक ईमान दो जिहाद
[25:50]ईमान का ताल्लुक आपके कल्ब से है जिहाद का ताल्लुक आपके बोलिए
[25:53]अमल से है अगर अमल में माश मुजाहिद बन जाए अपने माल
[26:00]के जरिए से अपनी औलाद के जरिए से अपनी जबा के जरिए
[26:04]से अपने नुफा के जरिए से परवरदिगार आखिरत की निस्बत से मगफिरत
[26:11]और बहिश्त का तोहफा अता करेगा दुनिया की निस्बत से दो तोहफे
[26:14]क्या है नसर मिनल्लाह अल्लाह की जानिब से मदद तुम्हारे शामिल हाल
[26:17]होने वाली है तन करीब आखिरत में नहीं अज इसी दुनिया में
[26:22]परवरदिगार मुताल सालेहीन के हाथों में कुदरत देने वाला है कररी फते
[26:28]मक्का की सर में वतन करीब सुल हुदबे परवरदिगार मुताल आप देखें
[26:35]23 साल के अरसे में हुकूमत किसके हाथों में आ गई अल्लाह
[26:38]के रसूलों के हाथों में आ गई अल्लाह के रसूल वो मक्का
[26:42]के जिसमें रह नहीं सकते थे उसी मक्का में फाते बनकर जो
[26:43]है वो दाखिल हो रहे हैं अगर मुसलमान सही तरीके से कदम
[26:48]आगे बढ़ाए तो परवरदिगार मुताल इस दुनिया का नजम नसक भी उसके
[26:53]हाथों में देना चाहता है जरूरत क्या है अजों जिहाद मकाम अमल
[26:56]में जिहाद की जरूरत है आखरी आया करीमा यह है के व
[27:00]बरल मोमिनीन और मोमिनीन को बशारत दे दो यानी आखरी आयत का
[27:02]आखरी हिस्सा है मोमिनीन को बशारत दे दो जब तुम उसकी राह
[27:06]में इस तरह से कदम आगे बढ़ाओ ग परवरदिगार मुताल भी तुम्हें
[27:09]महरूम नहीं फरमाए का सब मिलकर एक बुलंद आवाज से दरूद पढ़
[27:12]दे मोहम्मद औरन स यह जिहाद की फजीलत मैंने आपकी खिदमत में
[27:19]पेश कर दी अ मेरे पास 12 से 13 मिनट रह गए
[27:21]दो हिस्से बाकी है एक यह कि जिहाद का दक माना क्या
[27:26]है या मैं आपसे सवाल करूं और अपने आप से सवाल कर
[27:29]आया इस वक्त मैं और आप मुजाहिद है या नहीं है कुरान
[27:32]ने कहा यह सारे हदा यानी दुनिया में भी तुम सुकून से
[27:37]जिंदगी बसर करोगे आखिरत में भी खुदा की बारगाह में मकाम और
[27:40]मर्तबा है कब जब दिल झुक जाए यानी मोमिन हो जाओ मकाम
[27:46]अमल में क्या हो जाओ बोलिए हां मुजाहिद जिहाद करने लगो मेरा
[27:52]आपसे सवाल जैसे ही हम कहते हैं मुजाहिद हमारे जहन में कौन
[27:56]आता है लड़ने वाला बिल्कुल सही बात हमारे जहन में वो आता
[27:59]है कि जो तलवार से हां दुश्मनों के मुकाबले में लड़ रहे
[28:03]है कुरान करीम की इन आयतों को अगर मद्देनजर रखें तो इससे
[28:05]समझ में आता है कि जिहाद का यह माना नहीं है जिहाद
[28:08]का माना इससे वसी तर है वह जिहाद का एक मिस्दा है
[28:12]कि जब आप तलवार से क्या कर रहे होते हैं दुश्मन के
[28:16]मुकाबले में लड़ रहे होते हैं वालय के कुरान करीम की सूर
[28:18]मुबारक सफ की ये चार आयतें बयान कर रही है कि जिहाद
[28:22]हर वह जगह कि जहां पर हर वह शोब हयात जहां पर
[28:27]दुश्मन ने हर्डल्स और रुकावट आपके सामने खड़ी कर दी है आप
[28:32]आगे बढ़कर क्या करते हैं उन हर्डल रुकावट को हटाते हैं ठीक
[28:34]है अब आ जाइए एक एक करके मैं यहां पर जिहाद की
[28:38]जो है वो काइंड और किस्मों की जानिब इशारा करना चाहता हूं
[28:43]सब मिलकर एक बुलंद आवाज से दरूद पढ़ दे मोहम्मद अगर दुश्मन
[28:50]ने बनीन इंसान के लिए जहालत के हर्डल और मवाने खड़े कर
[28:55]दिए तो जिहाद क्या है हां बुल आवाज से जिहाद क्या है
[29:04]इल्म अगर दुश्मन ने सकाफत तबार से जो है वो यलगार कर
[29:06]दी है चारों जानिब से हमारे जवानों की निगाहें फिक्र सोच हम
[29:12]गम जो है वो क्या है सकाफत यलगार मोबाइल नहीं मालूम लैपटॉप
[29:15]क्लिप्स जलील और रुसवा कर रहा है तो यहां पर इस दुश्मन
[29:19]के मुकाबले का तरीके का क्या होगा इस्लामी सकाफत को आप इंट्रोड्यूस
[29:24]करवाए जितना अच्छा मसल इस्लामी सकाफत क्या है मोमिनीन को जन्नत में
[29:30]एक अहम तरीन सिफत क्या मिलने वाली है मुत सारे के सारे
[29:32]तकिया लगा के बैठे होंगे मसनद पर एक दूसरे से आपस में
[29:36]बातचीत कर रहे होंगे इस वक्त हमारे माशे में बातचीत बोलिए मोमिनीन
[29:40]नमाज पढ़ते हैं जल्दी भागो भाई एक दूसरे से बातचीत नहीं करते
[29:46]घर में मौजूद मियां बीवी बच्चे आपस में बातचीत रह रहे सब
[29:48]साथ है हर एक के हाथ में एक खिलौना मौजूद है हत्ता
[29:53]आपस में भी बात करनी हो तो पैगाम देकर बात कर रहे
[29:57]हो अजीब हो गया है खब उनकी जानिब से यलगार है अब
[30:02]एक एक तरीके का यह है आप लोगों को एक दूसरे से
[30:05]राबता मुस्तहकम बनाने के लिए जो है वोह क्या है हां दावत
[30:07]दें दूसरी जानिब से उनकी यलगार मोबाइल की सूरत में हमारे जवान
[30:11]की जिम्मेदारी है इसी सोशल मीडिया के जरिए से दुश्मन हमारे खिलाफ
[30:13]इस्तेमाल कर रहा है क्या हमारा जवान क्या मुसलमान मोबाइल नहीं बना
[30:15]सकता वो मोबाइल बनाते हैं एक लड़का और लड़की का हाथ आगे
[30:18]बढ़ता है ऐसे जो है वो क्या है पहले मरहले में आपके
[30:21]जहन में जो है वो देखें आपकी फिक्र को वो किसी और
[30:22]जानिब ले जाना चाहते हैं इसके बजाय आप अगर मोबाइल बनाए ऐसा
[30:26]कि जब वो खुले तो लिखा हुआ है अलम क्या तू जानता
[30:30]नहीं है कि खुदा तुझे देख रहा है वही मोबाइल जो दुश्मन
[30:37]अपने लिए इस्तेमाल करना चाहता है आप उसको बिस्मिल्लाह करें मुसलमान मारा
[30:43]कब तक कंज्यूमर रहेगा कब तक हम लोग फकत हां वह बनाते
[30:45]चले जाएंगे और हम अपना कीमती पैसा खर्च करते हुए खरीदते चले
[30:50]जाएंगे यह कब तक होगा क्यों मेरे और आपके पास फिक्र नहीं
[30:52]है कि भाई वो बहुत पीछे थे हमें पीछे करके अब इस
[30:55]तरह से दुनिया में आगे बढ़ गए एक दिन हम भी जो
[30:58]है वो क्या आगे बढ़ आज इकलाब इस्लामी इसकी बेहतरीन मिसाल है
[31:02]कैसे खड़ा हुआ अपने पैरों पर इसलिए कि बाज जगहो पर आगे
[31:05]बढ़ गया जब तक आप आगे नहीं बढ़ेंगे दुश्मन तो आपके जो
[31:09]है व क्या है हां किसी तबार से आपको इजाजत नहीं देगा
[31:13]फॉर एग्जांपल आप आ जाइए फाइनेंशियल फाइनेंशली व आपको डिस्टर्ब कर रहा
[31:17]है अब यहां पर जिहाद क्या है बोलिए यहां पर जिहाद क्या
[31:23]है जी जी फॉर एग्जांपल बिजनेस करना चाहिए अब जितने हमारे बिजनेसमैन
[31:29]है साहिबान सर्वत है जी जाफर तैयार का कोई भाई इधर बैठा
[31:32]हो नाराज नहीं होएगा मैं मुझे मैं तो आपको जानता ही नहीं
[31:34]हूं यहां पर बैठा हुआ है ज्यादा पैसा हो गया अब क्या
[31:38]करें गरीब और अमीर में एक चीज में मुश्तरका है दोनों जो
[31:40]है वोह क्या है शादी बिया की तकरीब के लिए जो है
[31:43]वोह क्या है कप बोर्ड या जहां लिबास रखे होते हैं उसको
[31:47]खोलते हैं गरीब भी कहता है क्या पहनू अमीर भी जब खोलता
[31:54]है हां तो कहता है क्या पहनू लेकिन उस बिचारे का क्या
[31:59]पहनू इसका क्या पहनू में जमीन आसमान फर्क है अल्लाह ने आया
[32:02]ज्यादा पैसा इसलिए दिया है कि एक गाड़ी के बाद दूसरी गाड़ी
[32:06]एक प्लॉट के बाद दूसरा प्लॉट देखें हल बिन मजीद तो है
[32:08]हम कहते हैं ना खुदा मेरे वो गुनाह माफ कर दे जो
[32:11]हां मेरे अब्बा जान मेरी वालिदा मेरे बीवी बच्चों को भी नहीं
[32:14]है तो मेरे भाई वो प्लॉट जिसकी खबर बीवी बच्चों को भी
[32:16]नहीं है चुप के लिया हुआ है हां बोले बता दूंगा तो
[32:19]जो है ना बीवी जो है ना बाद में परेशान करेगी खब
[32:21]इंसान जो है वो हल मिन मजीद के चक्कर में फुल टाइम
[32:24]जो है वो दुनिया में लगा ये अल्लाह ने ज्यादा पैसा इसलिए
[32:26]नहीं दिया था सहू फराह करें अपने बीवी बच्चों को लेकिन अगर
[32:32]आप लग्जरियस की तरफ चले गए उसका कोई एंड नहीं है वो
[32:35]हर चार दिन के बाद हमारे यहां मशहूर है कि भाई चार
[32:37]दिन थोड़ा सा और वेट कर लेता तो एक अहां अपडे अप
[32:40]टू डेट मोबाइल खरीद लेता खब ये वो लोग सेकंड सेकंड प
[32:45]नए-नए मोबाइल ला रहे हैं बहरहाल यह सारे जिहाद की किस्में आप
[32:47]जो है वो क्या है जंगी महास पर लड़े यह भी जिहाद
[32:51]है अल्लाह आपको नेकी दे जहालत के महाज पर लड़े यह भी
[32:56]जिहाद है सकाफत महाज पर आप लड़े यह भी जिहाद है इक्त
[32:58]सादी महाज पर आप लड़े यह भी जिहाद है इस वक्त फॉर
[33:02]एग्जांपल सही खबरों का लोगों तक पहुंचना यह बहुत बड़ा जिहाद है
[33:06]मलिकत खुदा पाकिस्तान में सही खबर पहुंचती नहीं है हम तो ईरान
[33:08]में रहते हैं छोटी सी बात मिसाल के पर कुछ महीने पहले
[33:11]मसलन यहां से जो है वो लोग फोन करके हमसे पूछ रहे
[33:15]थे क्या रहबर ने जो है वो क्या है जंगी लिबास पहन
[33:16]लिया है जैसे चाहते हैं यह लोग जो है वो क्या है
[33:19]बातों को मोड़ते हैं तोड़ते हैं और मुसलमान मशरा उन्हीं बातों की
[33:22]रोशनी में जो है वो एनालाइज कर रहा होता है मैं अपने
[33:25]जवानों से हाथ जोड़कर अर्ज करूंगा यह जो क्या कह स सियासी
[33:30]और जो है वो इस किस्म की जो आप टीवी पर एक
[33:32]एक घंटा जो है वो लोगों को देख रहे होते हैं मामूल
[33:33]ये लड़ रहे होते हैं और जो है वो एक दूसरे के
[33:36]खिलाफ नहीं मालूम कितनी बद अखलाक हो रही होती छोड़ दे अजीजो
[33:40]खब यह भी जिहाद है मैं जानता हूं खुद अपने माशे में
[33:43]हमारे सोल्जर बाजार में बाज मोमिनीन को मैंने देखा उन्होंने सियासी सही
[33:47]खबरों को लोगों तक पहुंचाना शुरू किए बहुत बड़ा जिहाद है यह
[33:50]सारे जिहाद हैं कि जो मैंने और आपने करने हैं अल्लाह तबारक
[33:54]ताला आखिरत भी अता करेगा दुनिया भी अता करेगा मेरा वक्त खत्म
[33:56]हो गया अजों शहजादी का जिहाद आयाम फातम में आपने बारहा मुख्तलिफ
[34:02]तरीकों से सुनाया इस तरीके से भी सुन ले चांद वजू हात
[34:06]की बिना पर मौला के हाथ पैर बंद हो गए थे मौला
[34:10]जिहाद नहीं कर पा रहे थे चंद वजू हात की बिना पर
[34:14]इमाम जिहाद नहीं कर पा रहे थे नंबर एक उस जमाने की
[34:18]काफिर ताकतें अल्लाह के रसूल के इस दुनिया से जाने के सबब
[34:23]मुसलसल उनकी निगाह थी कि कोई डिस्टरबेंस इस्लामी माशे में हो हम
[34:26]हमला कर दें रूम और इस्लाम की ताकत है एक बड़ी तादाद
[34:30]में मुसलमान अभी फतेह मक्का के बाद उसके कानों में जो है
[34:32]वो इस्लाम की आवाज पहुंची अभी-अभी मुसलमान हुआ है वो लिहाजा वो
[34:38]इस्लाम को उस गहराई के साथ जानता नहीं है तीन मुनाफिकन जो
[34:40]पहले से दरमियान में मौजूद थे वो रेशा दवा निया कर रहे
[34:49]हैं चार वो जो अपने आप को अल्लाह के रसूल का वाकई
[34:51]उम्मती करार दे रहे थे मुहाजिरीन और अंसार में से वो भी
[34:56]जो है वो क्या है दुश्मनों के रंग में रंग गए हैं
[35:00]सकी फा में देखिए किस तरह से अजीजो खिलाफत का बंटवारा हो
[35:03]रहा है लिहाजा मौला इस मौके पर तलवार से जिहा खुतबा शेख
[35:08]शया को उठा के देखें इंसान रोता है अजों रोता है गि
[35:10]चिल्लाता है मौला फरमाते हैं दो रास्ते थे अली के पास या
[35:15]अली कटे हाथों से लड़ता मैं मसाब नहीं पढ़ने वाला लेकिन यह
[35:18]जुमला रोने के लिए काफी है तवज्जो करें मौला फरमाते हैं या
[35:23]अली कटे हाथों से लड़ता नहीं था अली के पास कोई मददगार
[35:26]फरमाया 20 आदमी होते इस्तकाम्या ज्यादा ही थी कहा जाओ सर के
[35:32]बाल मुंडवा के लाओ जाओ सर के बाल मुंडवा के लाओ आज
[35:35]सुबह एक मोमिन मिला कहा हम अपनी फैमिली के साथ उमरे पर
[35:38]जा रहे हैं इंशाल्लाह परवरदिगार मुताल साहिबान ईमान को भी उमरे और
[35:41]हज की सहादत से बहर मंद फरमाए मक्का और मदीना के इन
[35:47]अजीजो मकामा को जालिमों के चुंगल से आजादी अता फरमाए वाक इस
[35:49]वक्त ऐसे ही आप जा देखिए मैं मुझे बहुत अरसे से तौफीक
[35:53]नसीब नहीं हुई लेकिन जो अफराद जाते हैं अजों एक लग्जरियस एक
[35:55]फकत दुनिया बनाने के लिए उन्होंने ऐसा सिलसिला कर दिया कि लोग
[35:59]बस उन्हीं जाहिरी चीजों में जो है वो मगन हो जाते हैं
[36:02]तो वहां पर उनके बच्चे कह रहे थे हम राजी नहीं है
[36:03]कि हमारे बाबा जो है वो क्या सर मुंडवा है हां हां
[36:06]हमें अच्छा नहीं लगेगा बाबा का चेहरा ख इमाम ने इसी तरीके
[36:10]से इम्तिहान लिया कि जाओ सर के बाल मुंडवा के ले आओ
[36:14]दूसरे दिन कितने अफराद आए चार पांच जो सर के बाल देने
[36:21]को तैयार नहीं है वह जिहाद करेगा अली के साथ आज बसा
[36:22]कात मोमिन और मोमिना का यही इम्तिहान है मैं इस जुमले को
[36:27]बारहा कहता हूं इंशाल्लाह तवज्जो के साथ सुनिए दाढ़ी में दीन नहीं
[36:29]है लेकिन क्या बात है दाढ़ी में दीन नहीं है लेकिन बोलिए
[36:39]दीन में दाढ़ी है ऐसा नहीं है कि अगर किसी ने दाढ़ी
[36:45]रखी हुई है बस वो दीनदार है क्योंकि दाढ़ी में दीन नहीं
[36:47]है लेकिन दीन में दाढ़ी है परवरदिगार को पसंद है बसा कात
[36:51]जो है वो क्या है मोमिन से चार बाल दाढ़ी के नहीं
[36:53]रखे जाते मोमिना से चार बाल सर के छुपाए नहीं जाते और
[36:58]हमारा कि अल अजल अल अजल या मौलाना या साहिब जमान खौफ
[37:03]क्या कैसे होगा अज बहरहाल मौला अब इस वक्त जिहाद नहीं कर
[37:10]सकते थे कलील से असब रह गए थे मिक दद सलमान हो
[37:11]अबूजर हां जुबैर यही अफराद रह गए सही है इन सबके मुंह
[37:16]बंद कर दिए गए अगर यह शोर भी मचाते उसी वक्त मार
[37:21]दिए जाते सिया घटा छाई हुई है मौला खुद फरमाते हैं इतना
[37:23]भयानक मंजर था जो बच्चे को बूढ़ा कर दे जो बूढ़े को
[37:28]जमीन गीर कर दे जो इंसान को लिका उल्लाह के मरहले पर
[37:33]पहुंचा दे ऐसे लेकिन अली ने देखा कि इसमें बेहतरी ऐसे मौके
[37:35]पर शहजादी ने क्या किया मेरे भाई जिहाद किया तीन हिस्सों की
[37:42]तरफ इशारा करना चाहता हूं जबान से जिहाद किया माल से जिहाद
[37:47]किया जान से जिहाद किया और बहरहाल यह वो बातें हैं कि
[37:49]जो आप आयाम फातम में सुन चुके हैं अजों खुतबा फत किया
[37:53]जबान से जिहाद है लोगों तुम्हारी हालत क्या थी गदला पानी पीते
[37:57]थे पत्ते खाते थे मेरे बाबा ने तुम्हें तुम लड़ते थे तुम
[38:03]थे क्या जान के दुश्मन थे मेरे बाबा ने तुम्हें एक बना
[38:05]दिया और जितनी मुश्किल आती थी मेरा बाबा अपने भाई को भेजता
[38:11]चला जाता था और मुशरिकीन और यहूद नसा की जानिब से जो
[38:13]मुश्किल आती चली जाती थी हां उनके भाई मेरा शौहर उस आग
[38:19]को जो है व बुझाता चला जाता था लोगों तुम्हें क्या हो
[38:24]गया है क्यों तुम इस घराने से दूर हो रहे हो अंसार
[38:26]और मुहाजिरीन की खवातीन मिलने के लिए आई है अयादत के लिए
[38:31]आई है फरमाया मैं तुम्हारी दुनिया से नफरत करती हूं मुझे तुम्हारे
[38:33]मर्दों से जो है वो बगज है क्यों ऐसा कर रहे हो
[38:37]इस्लाम की हरी भरी खेती उजड़ रही है जबान से जिहाद हता
[38:43]मैं सोच रहा था तो अजों यह भी जबान ही का जिहाद
[38:48]है के बाज लाइनों से शहजादी ने गुफ्तगू करना छोड़ दी थी
[38:50]यह जबान से जिहाद है बात नहीं करेगी और जब बहुत इसरार
[38:54]किया फरमाया अली आपका घर है मैं आपकी जौजा हूं और आने
[38:58]वालो ने आकर कहा कि जो है व हम आपसे माफी के
[39:01]तलबगार हैं पहले बात नहीं की फिर बाद में फकत इतना कहा
[39:02]अल्लाह के रसूल से सुना है जिससे फातिमा राजी उससे जो है
[39:08]वह रसूल राजी और अल्लाह राजी और जिससे जो है वह क्या
[39:11]है शहजादी नाराज उससे रसूल भी नाराज और अल्लाह भी नाराज इला
[39:18]फातिमा मेरे बाबा से सुना है तुमने कि फातिमा की रिजा में
[39:23]रब की रिजा फातिमा की नाराजगी में रब की नाराजगी पाई जाती
[39:27]क सुना है मैं खुदा को गवाह करर देती हूं मैं तुम
[39:29]दोनों से नाराज हूं शिया सुन्नी ने लिखा है अजों इ इन
[39:32]चीजों को किताबों में देखिए जबान से जिहाद बाज जगहो पर बोलकर
[39:39]बाज जगहो पर जो है वह क्या है खामोश रहकर माल से
[39:45]जिहाद अजों यह जो फदर था यह शहजादी को बाबा ने हदियाना
[39:47]फदर दर वाके खैबर से मुत सिला यहूदियों की एक सरसब्ज और
[39:52]शादाब जगह का नाम है कि जब उन्होंने देखा कि खैबर के
[39:56]यहूद इस तरह से जो है वो क्या है हार गए तो
[39:59]उन्होंने कहा कि हम जो है वह आपसे बगैर लड़े जो है
[40:02]व मामला और मुसा करना चाहते हैं और जितना हमारी महसूल और
[40:04]पैदावार है इसका आधा हिस्सा जो है व हम आपको दे देंगे
[40:08]आ हजरत के जो है वो हाथों में था ल आयत नाजिल
[40:12]हुई जिसके सबब से आ हजरत ने यह बाग किसे हदियाना अपनी
[40:14]बेटी को कि फकत इसकी सालाना जो दराद थी आप शहजादी और
[40:20]मौला के तरीके का को देखें अजीजो जिंदगी को इस पैसे से
[40:24]खूब आलम इस्लाम को जो है वह क्या है हां शहजादी और
[40:26]मौला जो है वह नवाज रहे थे और उस जमाने के जो
[40:30]गरीब और जिसे कह सकते हैं परेशान हाल अफराद हैं उनकी जो
[40:33]है वह परेशानियों के दूर करने का मुदा वा किया जा रहा
[40:35]था जिहाद बिल माल बस अजों मैंने खत्म किया आखरी शय हां
[40:42]जिहाद बिल बिन नफ्स अपनी जान के जरिए से शहज बाज उलमा
[40:49]यह कहते हैं कि शहजादी जो दरवाजे पर आई है दर वाके
[40:50]यह अपनी जान के जरिए से अली इजाजत दीजिए मैं बात करती
[40:55]हूं शायद यह रसूल की बेटी का तेराम मद्दे नजर रखते हुए
[41:00]वापस पलट जाए यही वजह तारीख ने लिखा है कि एक बड़ी
[41:01]तादाद वापस पलट गई वापस पलट गई एक तादाद कुछ अफराद रह
[41:07]गए कि जिन्होंने हद के हुरमत बिनते रसूल खुदा बहरहाल शहजादी ने
[41:11]अपनी जान दी अपना माल दिया अपनी औलाद दी हजरत मोहसिन की
[41:16]शहादत हुई लेकिन इस जरिए से जो है वह शहजादी ने ता
[41:22]अबद हमेशा हमेशा के लिए दीन मुबीन इस्लाम की हिफाजत का एहतमाम
[41:24]किया हम सबकी भी जिम्मेदारी बनती है अजों इस सिलसिले में गौर
[41:28]और फिक्र करें कि अपने माल के जरिए से अपनी जान के
[41:32]जरिए से अपनी औलाद के जरिए से इज्जत और मकाम और शरफ
[41:33]के जरिए से जो अल्लाह तबारक व ताला ने मुझे और आपको
[41:36]अता किया है जिहाद करें अजीजो यह चार दिन की जिंदगी है
[41:40]इसने गुजर जाना है इसने खत्म हो जाना है जब हम इस
[41:41]राह में कदम आगे बढ़ाएंगे मुझे और आपको महरूम नहीं किया जाएगा
[41:46]उन्हीं उमू में से एक अमर शहजादी का वसीयत नामा है वसीयत
[41:49]नामा खुद शहजादी के जिहाद का हिस्सा था कि जिसमें फरमाया अली
[41:54]मुझे रात के वक्त गुसल देना रात के वक्त कफन देना रात
[41:58]के वक्त मुझ पर नमाज पढ़ के मुझे दफना देना मैं नहीं
[42:00]चाहती हूं कि यह अफराद मेरे जनाजे में शरीक होने पाएं और
[42:04]मुझ पर नमाज पढ़ने पाएं बहराल परवरदिगार मुताल की बारगाह में सिके
[42:07]दिल से दुआ तलब करते हैं मेरे परवरदिगार हमारी इस कलील सी
[42:11]इबादत को अपनी बारगाह में कबूल और मकबूल फरमा हमारे गुनाह ने
[42:14]कबीरा और सगीरा माफ फरमा जिस तरह से अहले बैत अलम सलातो
[42:19]अस्सलाम ने तेरी राह में जिहाद किया है हमें भी अपनी जान
[42:21]के जरिए से अपने माल के जरिए से अपनी औलाद के जरिए
[42:24]से अपनी इज्ज़त और शरफ के जरिए से तेरी राह में जिहाद
[42:28]करने की तौफीक अता फरमा हम सबको शहजादी के बेहतरीन आवान अंसार
[42:31]में से करार दे परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद और आले मोहम्मद का
[42:37]कल्ब मुतहर इमाम जमान को हमसे राजी और खुसू फरमा वाक इस
[42:40]वक्त इमाम आंसू नहीं अजों खून रो रहे हैं आयाम फतिम में
[42:45]भी और इस जमाने के नशे बो फराज अजज वाक अगर यह
[42:48]जमाना भी मुझे और आपको बेदार नहीं कर पा रहा है तो
[42:49]हम कब बेदार होंगे अ एक एक लाख के करीब अफराद का
[42:56]जख्मी हो जाना 50 हजार की तादाद के बराबर अफराद का जो
[43:00]है वह मारा जाना अजों थोड़ी देर के लिए सोचे किस तरह
[43:04]से इंसानियत का मजाक उड़ाया जा रहा है फलस्तीन और गज्जा में
[43:09]किस तरह से लब के मोमिनीन को किस तरह से अजों शाम
[43:10]की बदलती हुई सूरते हाल यह सब हमसे इस बात का तकाजा
[43:13]कर रही है परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद और आले मोहम्मद का दुनिया
[43:18]में जहां कहीं पाकीजा फितरत इंसान मुसलमान हैदर कर्रार के चाहने वाले
[43:22]हुसैन के मातम दार आबाद है उनकी जान माल इज्जत और आबरू
[43:23]की हिफाजत फरमा जो दुश्मन से बरसर बैकार है दुश्मनों पर पर
[43:28]फता और नुसरत और कामयाबी और कामरा अता फरमा परवरदिगार खुसूसियत से
[43:32]फलस्तीन के मुसलमानों को दुश्मनों पर गलबा अता फरमा खुसूसियत से लब
[43:35]के मोमिनीन को दुश्मनों पर गलबा अता फरमा शाम की सूरते हाल
[43:41]बदलती हुई सूरते हाल है मेरे परवरदिगार वो जो पाकीजा नफू हरम
[43:43]मुतहर की हिफाजत कर रहे हैं परवरदिगार इन मुहाफिज दीन की हिफाजत
[43:49]फरमा तुझे वास्ता मोहम्मद और आल मोहम्मद का अगर आप थोड़ा देखें
[43:51]अजों तो यह सारी चीजों के पीछे वह दरख्त के जो जिसके
[43:56]साए में परवरदिगार मुताल जो है वह क्या है यह नूरानिया अता
[43:58]फरमा रहा है मेरे परवरदिगार इंकलाब इस्लामी को मौला आका जमाने के
[44:05]इमाम के इंकलाब जहानी से मुलक फरमा इंकलाब इस्लामी को दुश्मन के
[44:09]गजन से महफूज फरमा दाखिली और खारिज दाखिली मुनाफिकन और बीर जो
[44:15]है वो दुश्मनों के शर से महफूज फरमा ऐ परवरदिगार जुमला मोमिनीन
[44:17]अपने दिलों में हाजत लिए हुए हैं हर वह हाजत जिसका पूरा
[44:22]होना तेरी मस्लत में कबूल मकबूल फरमा जो बे औलाद है औलाद
[44:24]सालहा अता फरमा जो रिस्क के सिलसिले में परेशान है उनकी परेशानियां
[44:29]दूर फरमा ऐ परवरदिगार हमें आपस में इत्तेहाद और इत्तेफाक की नेमत
[44:33]से मालामाल फरमा लमाए रब्बानी की नेमत से मालामाल फरमा इस साल
[44:36]और हर साल तेरे घर की तेरे नबी के घर की अहलेबैत
[44:38]अल सलातो सलाम के मजरात मुकद्दसा की मख सूसन सरजमीन मक्का और
[44:44]मदीना जन्नतुल बकी के मजरात की जियारत से बहर मंद फरमा मजरात
[44:46]की आबाद कारी के असबाब की फरा हमी फरमा कल्बे मुतहर इमाम
[44:51]जमान को हमसे राजी और खुशनूर फरमा हमारा शुमार आपके आवान और
[44:54]अंसार में फरमा और आपके जुहूर में ताजल फरमा रा
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