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Palestine or Ummat e Muslima | H.I. Haafiz Syed Haider Naqvi
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في
محاضرات
Record date: 19 Nov 2023 - فلسطین اور اُمت سلمہ AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. ❓یوم القدس کب منایا جاتا ہے؟ ❓ مسئلہ فلسطین کس چیز کی چابی ہے؟ ❓ فلسطین کے ظاہری صدر کا نام کیا ہے؟ ❓ پروڈکٹ کا بائیکاٹ کیا ہماری ذمہداری ہے؟ For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:12]अ बिल्लाह मिन शैतान रम बिस्मिल्ला रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन अस्सलातो
[0:23]वस्सलाम अला सदल अंबिया मुरसलीन हरी मुत जबीन काल अल्लाह ताला फिल
[0:40]कुरानिल हकीम हुआ असदल कालीन बिल्ला मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम
[0:54]अल्लादी सल ब लित मन फली लकम तकर व सरलक मा फ
[1:11]समावा मा फिल अ जमी मन इन फया यत सदला अलीम सवात
[1:24]पढे [संगीत] मुहम्मद [संगीत] हम लोग बतौर मुसलमान बतौर उम्मत मुस्लिमा यह
[1:49]जो अया गुजार रहे हैं व बहुत ही तलक और बहुत ही
[1:59]मुसीबत के आयाम अलबत्ता यह तलक और यह मुसीबत जिसमें जितना एहसास
[2:13]है जो जितना बेदार है उतना ही महसूस कर सकता है तो
[2:26]जब कमों की जिंदगी में इस तरह के हालात आते हैं तो
[2:38]अगरचे वह बहुत ही तकलीफ दे दर्दनाक होते हैं लेकिन अगर उन
[2:50]कमों में जिंदगी की रमक बाकी हो तो व इन तल कियों
[2:58]की वजह से अपनी राह दुरुस्त कर लेते हैं अपनी सूरते हाल
[3:04]पर नजर सानी करते हैं यानी वह यह सोचते हैं कि अगर
[3:14]हम सही जा रहे होते तो फिर दूसरों के हाथों इतनी मुसीबत
[3:20]और इतनी जिल्लत का शिकार क्यों होते वह भी हमारी तरह ही
[3:29]के इंसान हैं देखने में तो हमने क्या नहीं किया और उन्होंने
[3:39]क्या किया है कि आज वह मुसलमानों के साथ यह सुलूक कर
[3:46]रहे फलस्तीन में फलस्तीन में तो जरा व बगैर मेकअप के कर
[3:55]रहे हैं वरना पाकिस्तान वाले यह ना समझे कि पाकिस्तान में व
[4:03]कुछ नहीं कर रहे फलस्तीन में तो उनके हुकूक इंसानी के दावों
[4:14]से उनके दुनिया में अमन अमान के दावों से इंसानियत के दावों
[4:23]से सबसे नकाब उतर गई है उनके चेहरे से फलस्तीन में पाकिस्तान
[4:29]जैसे हमारे जैसे मुल्कों में तो व बड़ा खूबसूरत नकाब लगा के
[4:36]नुकसान करते हैं मैंने आपके सामने दो आयात की तिलावत की है
[4:44]इन आयात के तनाज में आज की हमारी यह गुफ्तगू होगी और
[4:53]जो मौजू हमने रखा है मसला फलस्तीन और उम्मत मुस्लिमा इस मौजू
[5:03]से हमारी क्या मुराद है बिल्कुल साफ और आसान मसला फलस्तीन उम्मत
[5:15]मुस्लिमा का मसला है लेकिन इस मसले के बारे में उम्मत मुस्लिमा
[5:20]उसे क्या करना चाहिए था और वह क्या कर रही है जो
[5:27]करना चाहिए था वह क्यों नहीं कर रही और जो कर रही
[5:34]है वह क्यों कर रही है सोचना चाहिए इस पस्ती में और
[5:46]इस जिल्लत में पहुंचने के असबाब क्या है तो आयात की तरफ
[5:55]तवज्जो फरमाइए कुराने मजीद की एक सूर है सूर मुबारका जातिया य
[6:01]उसके बिल्कुल इबत की आयात है जब उसको पढ़ने का आगाज किया
[6:13]जाए तो चंद आयात के बाद य आयात आती है खूब तवज्जो
[6:16]फरमाइए तर्जुमे की तरफ अल्लाह इन आयात में क्या फरमा र और
[6:24]इन आयात में इन आयात का मौजू एक अहम ीन मौजू है
[6:32]और यह वह चीज है कि जो एक बड़ा सबब है उन
[6:37]असबाब में से जिनकी वजह से आज मुसलमान उम्मत इस जिल्लत और
[6:46]पस्ती का शिकार हुई पड़ी बल्कि इन आयात के लिए सुनने के
[6:58]लिए आपके जनों को ज्यादा आमादा करने के लिए एक दो सवाल
[7:03]है कि जो खास तौर पर यह फलस्तीन वाला मसला जो 7
[7:10]अक्टूबर के बाद से जिसका आगाज हुआ तो यह सवाल जहन में
[7:16]आए तो मुख्तलिफ शहरों में पाकिस्तान के पहले पंजाब में और फिर
[7:21]अभी यहां पर तो मोमिनीन के सामने जहां भी हाजिर होने का
[7:27]मौका मिला तो वहां पर उनसे यह सवाल पूछे आपसे भी पूछना
[7:29]चाहता हूं एक सवात पढ़े मोहम्मद ले [संगीत] महम्मद हमारी दुआओं में
[7:45]से कुछ दुआएं ऐसी है जो हम अल्लाह से कसरत से मांगते
[7:50]हैं कसरत से मांगी जाने वाली दुआओं में से एक दुआ रिजक
[7:56]में बरकत की दुआ है जितने भी बड़े यहां पर बैठे हैं
[8:06]शायद ही कोई हो जो रिजक में बरकत की दुआ ना मांगता
[8:09]हो तो तवज्जो फरमाइए जब हम अल्लाह से रिजक में बरकत की
[8:18]दुआ मांगते हैं तो हम अल्लाह से क्या चाह रहे होते हैं
[8:23]रिजक में बरकत के हमारे जहन में क्या माना होता अभी छोड़
[8:29]दे कि असल में क्या माना है जो हमारे अवाम उ नास
[8:36]के जनों में रिजक में या अल्लाह हमारे रिजक में बरकत अता
[8:40]फरमा एक दूसरे को कह रहे होते हैं अल्लाह ताला आपके रिजक
[8:44]में बरकत अता फरमाए तो इसका माना क्या होता है अल्लाह से
[8:49]हम क्या मांग रहे होते हैं मैं बताता हूं अगर आप सब
[8:51]को लगे कि नहीं यह नहीं होता तो आप मुझसे मेरी इस्लाह
[8:57]फरमा दीजिएगा हम बिल उमू जब रिजक में बरकत की दुआ मांगते
[9:02]हैं अल्लाह ताला से तो हम अल्लाह से यह कह रहे होते
[9:09]हैं कि हमारे पैसे ज्यादा हो जाए हमारे पास माल ज्यादा हो
[9:12]जाए फरवानी हो जाए उस माल से हम दुनिया की सारी जो
[9:22]आसाय हैं जो काम भी हम करना चाहते हैं हमारे जहन में
[9:25]हम कर सके हमारे पास माली मसाइल ज्यादा हो जाए ऐसा ही
[9:31]है रिजक में बरकत से यही मुराद होती है सवाल बड़ा इंपॉर्टेंट
[9:37]है जो आपसे करना चाहता हूं और आपने जवाब जरूर देना है
[9:44]जो पूछू शॉर्ट जवाब बिल्कुल कि यह रिजक में बरकत की दुआएं
[9:58]चाहे अल्लाह के नबी से हम तक पहुंची हो चाहे आइमा अहले
[10:00]बैत से हम तक पहुंची हो ठीक है ये रिजक में बरकत
[10:07]के लिए मांगी जाने वाली दुआएं तावीज तावीज भी मिलते हैं ना
[10:16]रिजक में बरकत के जी और बाज औकात हो सकता है आपके
[10:23]पीर साहब आपको कोई चेला भी बता दे रिजक में बरकत का
[10:28]दुआ बता सकते हैं तावीज बता सकते हैं और कोई चिल्ला कोई
[10:35]वजीफा रिजक में बरकत का दिन में हजार मर्तबा यह पढ़ो 100
[10:41]हज मर्तबा यह पढ़ो रिजक में बरकत होगी यही चीजें है ना
[10:47]तो आप दुआ नाम रखें तावीज नाम रखें चिल्ला नाम रखें वजीफा
[10:54]नाम रखें सवाल यह है सवाल यह है कि यह चीजें रिजक
[10:59]में बरकत के लिए की जाने वाली यह चीजें यह हम मुसलमानों
[11:08]के पास ज्यादा है या अमेरिका के पास ज्यादा है किसके पास
[11:18]जादा नहीं सवात पढ़े मोहम्मद [संगीत] वा सवाल नहीं मैं कह रहा
[11:31]हूं कि यह रिजक में बरकत की रिजक नहीं कह रहा बरकत
[11:37]की दुआएं यह हमारे पास ज्यादा है हम ज्यादा मांगते हैं या
[11:40]वह वोह तो लिफ्ट नि कराते वो तो जो क्रिश्चन भी है
[11:46]संडे को चले जाते हैं चर्च में हम तो हर वक्त ताकी
[11:50]बात में पता नहीं कितने कितने वजीफे कर रहे होते हैं घरों
[11:54]में खवातीन घंटा घंटा मुसल्ले से नहीं उतरती बाज तो इतनी पक्की
[12:00]होती है कि उनसे बात करो जवाब ही नहीं देती क वजीफा
[12:03]कर रही खबरदार को बीच में बोले तो कोई वजीफे की तासीर
[12:09]ना खत्म हो जाए समझ रहे मेरी बात को बस दोबारा सवाल
[12:18]दोहरा रहा हूं रिजक में बरकत की दुआएं तावीज वजाइनल यह हम
[12:28]मुसलमानों के पास ज्यादा है या अमेरिकियों के पास ज्यादा है यूरोपिय
[12:38]के पास ज्यादा है हमारे पास ज्यादा है दूसरा अहम सवाल वजीफे
[12:42]तो हमारे पास ज्यादा है लेकिन रिजक किनके पास ज्यादा है किनके
[12:52]पास गैर मुस्लिमों के पास क्या वजह क्या वज कभी सोचा इस
[13:06]पहलू पर आपने जो मसलन दुनिया के बड़े-बड़े अरबपति बिलियन जैसे व
[13:18]पुराना बिल गेट्स जैसे एलोन मस्क जैसे और दुनिया के बड़े-बड़े अरब
[13:25]पति यह इनकी तादाद गैर मुस्लिमों में ज्यादा है या मुसलमानों में
[13:31]इनसे नहीं जाकर पूछते कि आपके पास कौन सा तावीज है और
[13:38]आपका पीर आपका मौलाना साहब कौन है जो आपको वजाइना हैं रिजक
[13:41]में बरकत के एक और बात कहता हूं अमेरिकियों में फिर दीन
[13:56]की एक बू है अमेरिकी जो है ज्यादातर मसीही है बिलख मसीही
[14:02]हो या यहूदी हो फिर एक तरह से दीन है उन कि
[14:09]चाइना के पास कौन से तावीज है यह तो बिल्कुल बेदीन है
[14:14]इनके रिजक में बरकत कहां से आ रही है कि इतने चंद
[14:21]सालों में यह अमेरिका के मुकाबले में आकर खड़ा हो गया है
[14:24]इनके पास कौन से तावीज है एक तो यह कि इनके पास
[14:34]कौन से तावीज है दूसरा यह कि हमारी दुआओं में और ताजों
[14:39]में तासीर क्यों नहीं है कि हम इनके जरिए हम इन कमों
[14:41]के मुकाबले में आकर खड़े हो जाते इन कमों ने इल्म के
[14:56]मैदान में तरक्की की है हमने वजफ और चिल्लों के मैदान में
[14:59]तरक्की की है बताता हूं आपको गौर से सुनिए हमारे जमाने में
[15:07]वह वजीफे और चिल्ले आ गए हैं कि जो अल्लाह ताला ने
[15:12]रसूल पाक को भी नहीं बताए हुए थे दुश्मन दूर रखने का
[15:19]वजीफा दुश्मन दूर रखने का तावीज है ना हमारे पास मिलते हैं
[15:31]ना ठीक यह तुम पहन लो दुश्मन दूर रहेंगे अल्लाह के नबी
[15:35]को नहीं पता था इस तावीज का ना इस वजीफे का इमाम
[15:39]हुसैन को भी नहीं पता था वरना कर्बला में उन्हें एक भी
[15:43]तीर ना लगता सामने जब लश्कर आया था उनका तो इमाम हुसैन
[15:51]पढ़ के फूक देते दुश्मन दूर वाला कोई वजीफा और इमाम हुसैन
[15:56]की जुबान अतहर से बढ़कर किस जुबान में तासीर होगी वजीफा जो
[16:04]जुबाने करती हैं रसूल अल्लाह से बढ़कर किसकी तासीर वाली जुबान होगी
[16:10]इसलिए मैं कह रहा हूं के सीरत अमीरुल मोमिनीन क्या गवाही दे
[16:22]रही है मसल जंगे जमल के लिए जब लश्कर आमने सामने हुए
[16:27]तो मौला ने कुछ पढ़ के फूका सिफीन में क्या किया था
[16:37]और सफीन में जंग जब जंग खराब होने लगी तो मौला के
[16:43]पास कोई वजीफा नहीं था जिसको पढ़ के फकते जांग ठीक हो
[16:46]जाती उनके नेजो से कुरान ही गायब कर देते मौला जो उन्होने
[16:51]नेज पर उठाए थे अल्लाह के नबी अल्लाह के नबी जो अल्लाह
[17:02]को की जात के बाद सबसे बड़ी हस्ती है उनकी सीरत उनकी
[17:09]जिंदगी जब आप पढ़े तो आपको क्या मिलता है कि जब उनको
[17:17]मुश्किलात दरपेश आती थी बड़े चैलेंज दरपेश आते थे तो वह खुद
[17:19]मैदान में निकलते थे जहमत उठाते थे या नहीं वजीफा पढ़ के
[17:24]वह काम कर लेते थे क्या मिलता है आपको तारीख में रसूल
[17:30]पाक आपको मैदान बदर में नजर आते हैं सिपाहियों के साथ या
[17:35]मस्जिद नबवी में बैठ के कुछ पढ़ के फकते हुए नजर आते
[17:40]हैं कुफ फार मक्का की तरफ कुछ चीजें ऐसी हैं यह मैं
[17:47]क्यों बातें कर रहा हूं मेरी मुराद हरगिज यह नहीं है कि
[17:54]मैं नाजु बिल्लाह दुआ की तासीर का कोई इंकार कर कर रहा
[17:59]हूं जो वाकय साबित शुदा हो सही मानों में मन घड़तय कोई
[18:07]वजीफा कि मैं उसका इंकार कर रहा हूं इंकार नहीं कर रहा
[18:12]लेकिन मैं इस बात की तरफ तवज्जो करवाना चाह रहा हूं कि
[18:17]जब यह सब हम कर रहे हैं और है भी हमारे पास
[18:21]ज्यादा तो फिर क्यों नहीं यह चीजें हमारे अंदर बरकत का बायस
[18:24]बन रही और क्यों नहीं हम मसलन दुश्मन अपने दुश के मुकाबले
[18:29]में खड़े हो सकते अभी आपको पता है वाला मकाम हजरत आईएमएफ
[18:45]तशरीफ लाए हुए थे पाकिस्तान में आईएमएफ को तो जानते हैं ना
[18:56]जो नहीं जानते म फ करें जो ना जानता हो तो उनका
[19:01]तारुफ यह है कि जो आपने पीछे बिजली के ज्यादा बेल भरे
[19:06]हैं वह उन्हीं चौधरी साहब की वजह से भरे हैं ताकत देखी
[19:12]उनकी पावर देखें इस पावर को आप वजीफे से पीछे कर सकते
[19:18]हैं करके दिखाएं पाकिस्तान के सारे तावीज देने वाले और वजीफे बताने
[19:26]वाले सबको इकट्ठा करें और उनसे कहे आप माशाल्लाह इतनी करामात वाले
[19:30]हैं आपको तो उधर से करामात मुंत किल हुई है जो सूरज
[19:35]को नीचे बुला के अपनी वह बोटिया भून लिया करते थे बारबीक्यू
[19:42]करते थे सूरज को सूरज को नीचे बुला के और दीवारों को
[19:45]हुकम दे तो दीवारें दौड़ पड़ती हैं आप सब इकट्ठे होकर जाए
[19:50]ना जरा फलस्तीन के बॉर्डर पर खड़े होकर कोई वजीफा करें जिससे
[19:53]इसराइल के मिसाइल रुक जाए करें इस उम्मत को जो दीन के
[20:06]नाम पर जहालत का शिकार है उसको जागने की जरूरत है कि
[20:11]क्या नहीं कर रही यह उम्मत जिसकी वजह से अल्लाह ने इसकी
[20:17]दुआओं के अंदर से तासीर भी हटा दी दुआए हो रही है
[20:22]या नहीं हो रही इसराइल के खिलाफ आज से नहीं हो रही
[20:28]75 80 साल और मुसलमानों के सभी फिरके इसराइल के खिलाफ दुआ
[20:43]मांगते हैं और जिन जिन जगहो को मुकद्दस तरीन समझा जाता है
[20:47]मुसलमानों के यहां ख शिया हो ख अहले सुन्नत हो उन सब
[20:51]जगहों पर इसराइल के खिलाफ दुआए रो रो के मांगते हैं लोग
[20:55]इसराइल को हुआ कुछ लेकिन हम य उम्मत ऐसी सुला दी गई
[21:06]है य सोचते ही नहीं है कि क्यों नहीं दुआए कबूल हो
[21:11]रही वैसे तो हमें खुद पर बड़ा मान है किसी कोई कहता
[21:18]है मैं तो रसूल पाक आखरी अल्लाह के नबी का उम्मती हूं
[21:25]कोई मैं तो मौला अली का मान वाला हूं तो क्यों नहीं
[21:34]इतनी बड़ी हस्तियों के मानने वाले होने के बावजूद अल्लाह क्यों नहीं
[21:40]सुन रहा यह गौर करने की बात है और जब तक इस
[21:45]तरफ पलट के हम नहीं देखते कि आया जो अल्लाह ने हमसे
[21:53]मुतालबा किया है वह मुतालबा पूरा करने की कोशिश करके हम दुआ
[21:59]मांग रहे हैं या वह मुतालबा हमने बुला ही दिया और सिर्फ
[22:05]दुआओं पर हम आ गए हैं अगर अल्लाह का हमसे कोई मुतालबा
[22:09]है और अल्लाह ने यह फरमाया कि अगर तुम यह करोगे तो
[22:15]मैं तुम्हारी मदद का वादा करता हूं तो याद रखिए अगर हम
[22:22]वह अल्लाह का मुतालबा पूरा ना करें उसकी तरफ तवज्जो ना करें
[22:26]तो फिर जितनी मर्जी दुआए मांगते रहे यह तो 75 80 साल
[22:31]नहीं 75 100 साल दुआएं मांगते रहे यह दुआएं अल्लाह की बारगाह
[22:36]में कबूल नहीं होगी जैसा कि हमें हम देख रहे हैं इसराइल
[22:42]के खिलाफ खाना काबा में दुआए नहीं होती होती है मस्जिद नबवी
[22:49]में नहीं होती होती है मशद में नहीं होती होती है कुम
[22:55]में नहीं होती होती कर्बला नजब कामन सामरा कौन सा मुकद्दस मकाम
[23:04]है जहां पर लोग रो रो के आज खासतौर पर आज कल
[23:09]के दिनों में बददुआ नहीं कर रहे इसराइल के लिए और फलस्तीनियंस
[23:14]जगह सोचे तो सही इतनी बड़ी तादाद में शिया अहले सुन्नत हो
[23:24]बबी हो हर कोई कहता है ना हम हक प दूसरे हक
[23:27]पर नहीं चलो जो जो जो हक पर है वह भी दुआएं
[23:34]मांग रहा उसकी सुन लेता अल्लाह उसकी भी नहीं सुन रहा मैं
[23:38]जोर दे रहा हूं इस नुक्ते पर ताकि आप सोचे यह उम्मत
[23:48]जिस चीज का शिकार हो चुकी है मैं आपको मिसाल देता हूं
[23:53]कि कोई शख्स बीमार हो मरीज हो वो एक बेहतरीन माहिर तबीब
[24:01]के पास जाए डॉक्टर के पास जाए डॉक्टर उसे चेक करें और
[24:06]उसे कहे कि यह नुस्खा है इस पर मैंने चंद दवाइयां लिख
[24:15]दी और इसी पर मैंने चंद चीजों से परहेज लिख दिया तुम
[24:26]इस पर अमल करो तो इस नुस्खे को इस्तेमाल करो तो मैं
[24:34]तुम्हें सेहत याबी की गारंटी देता डॉक्टर यह कहे समझदार मरीज उस
[24:44]नुस्खे को लेकर आए और कहे कि डॉक्टर ने कुछ ज्यादा नहीं
[24:48]गोलिया लिखती उसने म तीन लिखी हो एक मैं नहीं खाऊंगा ख
[24:57]ु से आके एक एक गोली एक टेबलेट क मैं नहीं खाता
[25:03]इसका जायका जरा तल है बाकियों का जरा सही है यह सिरप
[25:11]पिऊंगा मीठा है वह सिरप नहीं पिऊंगा मीठा नहीं है और यह
[25:14]जो डॉक्टर साहब ने मुझे क फला चीज नहीं खानी डॉक्टर तो
[25:20]बादशाह है मेरा तो गुजारा नहीं हो सकता इसके बगैर मैं तो
[25:26]खाऊंगा यानी डॉक्टर की हिदायत में अपनी मर्जी कर ले और कुछ
[25:34]चीजें डॉक्टर की डॉक्टर ने कहा था सारे पर अमल का नतीजा
[25:41]शिफा है और वह बंदा कुछ चीजें अपनी मर्जी के मुताबिक बीच
[25:43]में से कम कर दे और फिर इस इंतजार में हो कि
[25:48]इतना माहिर डॉक्टर है शफात मन होगी शिफा होगी या नहीं होगी
[25:58]नहीं होगी दीन के साथ उम्मत मुस्लिम माने हमने यह किया चंद
[26:06]मैदान है जिसमें अल्लाह ने हमसे पुरजोर तकाजा किया कि इन मैदानों
[26:13]में आगे बढ़ो हम उन मैदानों में आगे नहीं बढ़े मसलन मसल
[26:22]अभी जो आयात सुनाऊंगा इनका मौजू साइंस है और साइंस की तरफ
[26:32]आगे बढ़ने की शदीद दावत है अल्लाह की तरफ से और बड़े
[26:37]जबरदस्त अल्फाज में अभी आपके सामने रखता हूं तो हमने इस साइंस
[26:47]में तहकीकात की जगह वजफ और नए नए चिल्लों की साइंस में
[26:51]तरकी कर स्टोरिया सुने आप जाकर ये बाज जो बैठे होते हैं
[26:56]मलंग टाइप के बंदे दरबा ार पर जो मोजत वो आपको सुनाए
[27:00]आप दंग रह जाए सुने भी होंगे आपने यह वाकया बड़ा मशहूर
[27:07]है कि जनाब फलान अब मैं नाम नहीं लेता कोई हर्ट ना
[27:12]हो जाए फलान बड़े वली अल्लाह थे वह गुजर रहे थे तो
[27:14]उन्होंने देखा कि उनके पास कुछ बोटिया थी सीख प अपना बारबीक्यू
[27:19]साथ लेकर फिर रहे थे तो उन्होंने वहां पर कुछ खवातीन ने
[27:24]चूल्हे जलाए हुए थे तो उन्होंने कहा कि मैं अपनी बोटिया भुन
[27:26]सकता हूं तो उ औरतो ने कहा कि नहीं नहीं अपना काम
[27:30]करो वो जलाल में आ गए काश आज भी किसी को जलाल
[27:35]आ जाए इसराइल पर इतने ज्यादा यह सारे बैठे हुए हैं तो
[27:39]वो जलाल में आए उन्होंने सूरज की तरफ देखा उन्होंने कहा कि
[27:46]सूरज को इशारा किया कि नीचे आ मैंने बोटिया बनी है सूरज
[27:52]नीचे आ गया सवा नेजे प आ गया उन्होंने अपनी वो जो
[27:59]सीख थी वो उने ऊपर की और वो बार्बी क्यू उनका तैयार
[28:04]हो गया उ सूरज को इशारा किया वापस चला गया फिर उन्होंने
[28:06]औरतों से कहा कि तुमने बोटी नहीं बूने दी ना देखो अगर
[28:11]मैं इसको वापस ना भेजता सारी दुनिया तबाह हो जाती अब आप
[28:13]सोचो कि यह जिसने भी यह गप छोड़ी है ठीक है उस
[28:18]जाहिल को मालूम ही नहीं है कि सूरज का फासला अगर इतना
[28:22]हो जाए तो कुछ बचेगा ही नहीं जमीन के साथ आपको पता
[28:25]है सूरज इतना गर्म सवा नेजे पर बुला लि लेकिन आप चले
[28:34]जाए देहातों में सिं के पंजाब के यह दास्तान मजे ले लेकर
[28:40]सुनाते हैं और वह इल्म के मैदान में जो उम्मत ने तरक्की
[28:41]की उसके नतीजे में हर जगह पर इल्म पाया जाता है लोग
[28:46]बैठ के वाह वा अच्छा सवा सूरज आ गया था ऐसे करते
[28:54]हो सकता है अमेरिका के किसी गांव में भी ऐसे लोग मिल
[29:01]जाए आपको लेकिन अगर आप इधर से ऐसे लोग निकाल मुसलमानों में
[29:03]से उधर से इधर बहुत ज्यादा निकलेंगे उधर थोड़े निकलेंगे क्योंकि इधर
[29:07]स्टोरियां बहुत ज्यादा है उधर इतनी स्टोरियां नहीं है क्योंकि उनके पास
[29:16]स्टोरियो का टाइम कम है वो काम ज्यादा करते हैं हमारे पास
[29:21]फराग ज्यादा है लिहाजा स्टोरियां स्टोरिया और फिर स्टोरियां सुन के वो
[29:27]स्टोरी सुनाता है फिर कहता है उन्हीं पीर की तरफ से मैं
[29:32]तुम्हें यह तावीज दे रहा हूं इससे तो ये हो जाएगा इससे
[29:36]यह हो जाएगा ले रहे हैं लोग तावीज लेकिन अकवाले में उसी
[29:41]पस्ती और जिल्लत का शिकार तो एक बड़ा मैदान साइंस है अल्लाह
[29:48]ने कहा यह तुम्हें करना है हमने नहीं किया जब हमने नहीं
[29:57]किया तो फिर जिन्होंने किया रिजल्ट उन्हीं को मिलेगा मिसाल के तौर
[30:07]पर दो बंदों से दो दो इंसान हो दो इंसान हो एक
[30:14]मुसलमान हो एक काफिर हो उनसे कहा जाए के तुम्हें समंदर का
[30:18]एक बड़ा लंबा सफर करना है समंदर में तूफान भी आ जाते
[30:24]हैं कश्तियां डूब भी जाती हैं लिहाजा तुम तैरना सीख लो अगर
[30:30]रास्ते में कोई मसला हो जाए कश्ती गर्क हो जाए तो तुम्हें
[30:35]तैरना आना चाहिए इनमें से एक बंदा यह कश्ती जाए समंदर में
[30:45]और तूफान आ जाए कश्ती गरक होने लगी दोनों पानी में गिर
[30:52]जाए मुसलमान भी और काफिर भी आप बताइए कौन बचेगा दोनों में
[31:02]से मुसलमान या काफिर किसे बचना चाहिए किससे बचना चाहिए जिसे तैरना
[31:11]आता है उसे बचना चाहिए अल्लाह का कानून यह है यहां पर
[31:21]जो हमसे गलती होती है हम क हम कहते हैं मोजा होगा
[31:25]क्या होगा यानी जो चीज अल्लाह की बनाई हुई इस कायनात में
[31:33]इसका कानून क्या है कि जो चीज पानी में तैर नहीं सकती
[31:37]व गरक होगी हम अगर यह कहे कि मैंने तैरना नहीं सीखना
[31:41]यानी अल्लाह ही के कानून का तकाजा पूरा नहीं करना किसी और
[31:45]ने तो नहीं बनाया ना यह अल्लाह ने बनाया है मैं कहूं
[31:49]कि या अल्लाह मैंने तेरे कानून का तकाजा पूरा नहीं करना लेकिन
[31:52]तूने मुझे गर्क नहीं होने देना अल्लाह कहता है हो गर्क फिर
[31:57]यह हो रहा है मुसलमानों के साथ और फिर मैं वापस पलट
[32:04]हूं इसकी सबसे बड़ी मिसाल अल्लाह के रसूल है खंदक खुद खोदी
[32:09]या नहीं खोदी किसलिए खोदी ताकि दुश्मन को रोका जा सके जंगी
[32:17]जंगी इक दम था हिफाजत इ कदाम था आपको कुरान की आयत
[32:25]में मिलेगा कि जब उद में जंग के लिए निकले थे अल्लाह
[32:30]फरमाता है सूर आल इमरान में ताल के जब आप निकले थे
[32:39]अपने घर वालों के पास से और जब आप मोमिनो को मोर्चों
[32:45]में बिठा रहे थे या जंग के जंगी चीजों का माहिर बंदा
[32:48]मोर्चे दे सकता है ना जिसको जंग ंग का पता ही वो
[32:52]थोड़ी मोर्चों को जानता है कैसे फौजी को कहां बिठाना है 50
[32:56]बंदा तीर अंदाज का वहां खड़ा किया और वो कितने कितनी एग्जैक्ट
[32:59]बात थी उन्होंने जगह छोड़ी जिसकी वजह से बाद में जीती हुई
[33:05]जंग का पासा पलट [संगीत] गया यह अमली कदम उठाए और साथ
[33:17]दुआ भी की ठीक है हम क्या करते हैं अमली कदम की
[33:20]तरफ तवज्जो नहीं करते इस साइंस में बहुत आगे निकल गए हैं
[33:26]दुआओं की तावीज की ओर चल इतना इसकी तरफ तवज्जो कर ली
[33:31]है कि अमल के मैदान की तरफ से तवज्जो हट गई अब
[33:38]यह जो मैं आपको मिसाल दे रहा हूं इसमें से कोई बंदा
[33:41]कह सकता है जी हो सकता है अल्लाह कुछ भी कर सकता
[33:45]है हो सकता है तो फिर अगर हो सकता है तो फिर
[33:48]फलस्तीन में क्यों नहीं हो रहा फिर यह जो पाकिस्तान की गरीब
[33:56]आवाम जो सो कॉल्ड आशिका रसूल भी है ये गुरबत की चक्की
[33:58]में पिस रहे हैं क्यों नहीं हो सकता है तो क्यों नहीं
[34:03]हो रहा क्यों नहीं इनकी इस मुश में तालीम की हालत बेहतर
[34:08]हो रही क्यों नहीं आम बंदे की जिंदगी उसको जिंदगी की बुनियादी
[34:11]सहूलियत उसे क्यों नहीं मयस्सर हो रही हमें क्या लॉलीपॉप दिया गया
[34:15]है अल्लाह चाहेगा हो जाएगा तुम सबर करो काम ना करना और
[34:26]अल्लाह पर डाले रखना यह जहालत और गुमराही है यह दीन नहीं
[34:30]है और इसका नतीजा हम देख रहे हैं अल्लाह ने अपनी मदद
[34:42]का वादा उनसे किया कि जिनको जो सलाहियत अल्लाह ने ऑलरेडी दी
[34:45]है वह उनको बरू एकार लाएं मैदान अमल में निकले मेहनत करें
[34:51]और फिर अल्लाह से दुआ मांगे ना कि कामचोर घर बैठ के
[34:55]अल्लाह से दुआ मांगे इसकी गवाही ना आपको सीरत रसूल में मिलेगी
[35:04]ना आपको सीरत अमीरुल मोमिनीन में मिलेगी ना आपको बाकी अहले बैत
[35:10]अहार की सीरत में य मिलेगी कहीं नहीं मिलेगी आपने पढ़ी है
[35:14]कोई झूठी रिवायत भी कि अल्लाह के रसूल जब लश्कर लेकर निकले
[35:19]तो एक बड़ा तावीज डाला हर एक सिपाही की गर्दन में तावीज
[35:25]तकसीम फरमाए कि यह गले में डाल लो इससे दुश्मन तुम्हारे दूर
[35:29]हो है जनजल बला में कोई हिदायत दे रहे हैं कि दांत
[35:37]अपने पीस लेना और कदम अपने जमा लेना और आखिरी बंदे पर
[35:40]अपनी निगाह रखना कि तुम्हें उसको मारना है ताबीज का तो जिक्र
[35:44]ही कोई नहीं और यही मौला इसी नजल बला में यह जुमला
[35:51]भी है मौला का जो ये सारी बात जो मैं कर रहा
[35:55]हूं इसका एक मौला के लफ्जों में सबूत है बल्कि असल में
[36:00]तो सीखा ही कुरान और उनसे तो मौला फरमाते हैं के अमल
[36:08]किए बगैर यानी मेहनत किए बगैर दुआ मांगने वाला उस शख्स की
[36:14]तरह है जो बगैर कमान के तीर चला रहा हो इसका क्या
[36:20]मतलब एक बंदा कमान में तीर रख के चलाए दूसरा कहे मेरा
[36:27]अल्लाह पर तवक मेरा मौला करम फरमाए तीर मारे किसका तीर सही
[36:34]दूर जाएगा कमान वाले का ये जो मौला के नाम से धोखा
[36:36]दे रहे है ना असल में मौला ही की नाफरमानी मौला ने
[36:41]कहा कमान में रख के चला लेकिन यह कह रहा है मैं
[36:46]कमान में रख के नहीं चलाऊंगा मौला करम फरमाए का मौला कहता
[36:49]फिर जलील हो तो तुझे चलना था मेरी रहनुमाई पर ना कि
[36:56]मेरी रहनुमाई पर ना चले और फिर नाम मेरा इस्तेमाल करें फिर
[37:02]हो जलील तू आज मुसलमानों के साथ य हो रहा है दुआएं
[37:08]मांग रहे हैं लेकिन अल्लाह ने जिन चीजों का मुतालबा किया वह
[37:13]नहीं करते उनमें से एक मैदान साइंस का मैदान है तवज्जो कीजिए
[37:20]सलवाद पढ़े मोहम्मद लेहला सला महम्मद मैं आपके सामने यह ताकि मैं
[37:38]तर्जुमा भी ऊपर से पढ आपके सामने एक दफा फिर सवात पढ़
[37:42]दे मोहम्मद ले मोहम्मद मैंने अर्ज किया कि ये सूरतुल जासि सूरतुल
[37:55]जासि की आयत नंबर 12 12 और 13 यह दो आयात मैंने
[38:08]पढ़ली बच्चे भी हमारे बेटे जो बैठे हैं जरा गौर से सुने
[38:13]चूंकि अल्लाह करे आपका कल जो है वह हमारे आज से बेहतर
[38:19]हो और वो मैदान में मैदान अमल में आने से ना कि
[38:25]मैदान तावीज में आने और मैदान चिल्ला में आने से सुनिए यह
[38:32]तावीज चिल्लो का ना जिनको कंफर्म फायदा होता है वह है वह
[38:37]देने वाले और बताने वाले या उनके फैंस बढ़ जाते हैं उनका
[38:42]इज्जत राम बढ़ जाता है या उनको जो हदा वगैरा मिलते यह
[38:47]तो कन्फर्म है ताजों का फायदा लेकिन जो ले रहा होता है
[38:53]तावीज उसे कितना फायदा होता है अला बतर लाजिम है हर तावीज
[39:02]देने वाले पर दुआ बताने वाले पर अगर वह जाहिल नहीं है
[39:08]और आलिम है कि वह बताए कि यह तावीज फकत एक हिस्सा
[39:12]है एक हिस्सा तेरी मेहनत है अल्लाह ने तुझे अकल दी है
[39:14]अल्लाह ने तुझे हाथ पैर दिए तेरे अंदर मेहनत की सलाहियत रखी
[39:19]है वह तू नहीं करेगा तो यह तावीज उसका हल नहीं है
[39:21]लेकिन यह बेईमान बताते ही नहीं है इनको अव्वल तो होते पता
[39:28]भी नहीं होता लेकिन अगर पता भी हो तो नहीं बताते तो
[39:31]क्योंकि पब्लिक है ना सुस्त व कहेगी मेहनत ही करनी है तो
[39:35]मैं तेरे पास किस लिए आया हूं मैं तो तेरे पास आया
[39:37]इसलिए कि कोई शॉर्टकट बता जब मैं जाकर बोल खुल जा सम
[39:43]सम वो खुल जाए आगे सोने के ढेर लगे हो मैं अमीर
[39:47]हो जा ऐसी चीज चाहती है व सूरतुल जातिया आयत नंबर 12
[39:54]गौर से सुनिए एक एक लफ्ज अल्लाह लदी सरल कोमल बह अल्लाह
[40:07]है जिसने सरा मुसर कर दिया मुसर का मतलब क्या होता है
[40:14]हम एक दुआ पढ़ते हैं जब सफर पर जाने लगते जब सवारी
[40:18]पर बैठते हैं हम क्या पढ़ते हैं सुभान अलजी सर लना हर
[40:27]ऐब से पाक है वो जात जिसने सखरा मुसर कर दिया लना
[40:35]हमारे लिए हा इसको जिस चीज में बैठे हो उस जमाने में
[40:38]घोड़े होते होंगे ट होते होंगे और आज गाड़िया है बाइक्स जो
[40:43]भी चीज हवाई जहाज है इंशाल्लाह कल आप मार्स पर जा रहे
[40:48]होंगे रॉकेट पर बैठ के आप यही पढ़ेंगे सुभान अलदी सरना हा
[40:53]व मा कुनाल मुकनी सखरा का कम से कम मत इसके माने
[41:04]के कई दरजा है सखरा का कम से कम मतलब यह है
[41:11]कि अल्लाह ने इसे ऐसा बना दिया कि हम इससे फायदा उठा
[41:14]सकते लेकिन आपको पता है हत्ता कि जानवरों को भी जब लाया
[41:20]जाता है तो उनसे फायदा उठाने के लिए पहले उनकी ट्रेनिंग की
[41:26]जाती है चाहे घोड़े हो घोड़ों को ट्रेन किया जाता है तब
[41:28]वो फिर उसके बाद अपने सवार के इशारे भी समझते हैं और
[41:32]बेहतरीन सवारी भी साबित होते यानी कुछ अल्लाह ने उसके अंदर रख
[41:36]दिया पोटेंशियल लेकिन कुछ इंसान को करना है ताकि फिर वह सर्विस
[41:45]उससे ले सके जो अल्लाह ने उसके अंदर सलाहियत रख दी इस
[41:51]दुनिया की हर चीज यही है किसके सामने व अपनी सर्विसेस पेश
[41:58]करेगी वह चीज जो उसके बारे में पहले तो रिसर्च करेगा कि
[42:06]कैसे करना ठीक है फिर उसके बाद उस रिसर्च के नताइएपीजीईटी इस
[42:27]अल्लाह के कानून को समझिए उसी को रिजल्ट देंगी इस दुनिया की
[42:35]चीजें जिसने उन पर मेहनत की उनके राज समझे आप आज जितनी
[42:45]इजात है जिन्होंने इंसानी जिंदगी में इंकलाब बरपा कर दिया वो दुआओं
[42:52]और ताजों की वजह से नहीं हुई वो मेहनत की वजह से
[42:57]ई जब मैं दुआ और तावीज और इसका नाम लूं तो याद
[43:00]रखिए मैं यह नहीं कह रहा कि दुआ तावीज की तासीर नहीं
[43:02]है नज बिल्लाह मैं इससे मेरी मुराद क्या है अमल का अल्टरनेट
[43:11]बनाकर दुआ कर मस न्यूटन बैठा हू या अल्लाह कोई राज पता
[43:14]चल जाए आज दुनिया दुनिया में कोई राज मुझे बता दे उसको
[43:19]पता चल गया कि जनाब कशिश शकल होती है जमीन में और
[43:25]जनाब न्यूटन लॉ उसने बना दिया मुशाहिद किया देखा तजुर्बा किए फिर
[43:31]नतीजा यह वह मैदान है जो हमने छोड़ा अल्लाह यह फरमा रहा
[43:37]है अल्लाह लदी अल्लाह है वह जिसने चकि कायनात का बनाने वाला
[43:43]कौन है जिन कवानी पर आपको अपने आसपास जितने फिजिक्स कहे आप
[43:46]उसे केमिस्ट्री कहे बायोलॉजी कहे यह जितनी चीजें चल रही है इन
[43:49]पर जो कानून हाकिम है उनका बनाने वाला कौन है वही जिसने
[43:54]यह कायनात बनाई है कोई साइंस दान इन चीजों को बनाने का
[43:59]दावेदार नहीं कश्फ के दावेदार कोई कहे ना मैंने लोहे में यह
[44:04]तासीर रख दी है झूठ बोल यह जो कश्ती पानी में तैरती
[44:11]है यह मैंने मेरे पैदा होने से पहले ऐसा नहीं था मैंने
[44:13]पानी में तासीर रख दी है झूठ बोल रहा होगा हो सकता
[44:17]है अगर किसी नेय दावा किया हो पुराने जमाने में तो लोग
[44:21]अपनी जहालत की वजह से मान गए हो ठीक है लेकिन जब
[44:23]राज खुला तो पता चला नहीं पानी ना इसकी ना इसके बाप
[44:28]की ना इसके दादा की किसी की नहीं सुनता पानी का अपना
[44:32]एक कानून है जो अजल से कश्फ कौन करेगी साइंस करेगी मुशाहिद
[44:37]करने वाला कश्फ करेगा देखिए अल्लाह है जिसने सखर लकम तुम्हारे लिए
[44:44]मुसर कर दिया किसको अल बहर समंदर को अल्लाह के मुसर करने
[44:56]का मतलब क्या है कि तुम समंदर से कितने फायदे उठाते लेकिन
[45:02]चूंकि वह तुम्हारा नहीं अल्लाह का ले कभी-कभी जब गुस्से में आ
[45:08]जाए तो फिर तुम्हारे कश्तियां भी डब देता है बल्कि तुम्हारे शहरों
[45:10]पर भी चढ़ दौड़ता है सुनामी की शक्ल लेकिन यहां सखरा का
[45:16]मतलब क्या है अल्ला ताला खुद बता रहा देखिए मुसर कर दिया
[45:22]तुम्हारे लिए अल बहर समंदर को किस लिए तज फल ताकि कश्ती
[45:29]चले ताकि कश्ती चले फी है उसमें समंदर में और इंपॉर्टेंट बात
[45:39]क्या है अम उसके अमर से अल्लाह के हुकम से कश्ती चले
[45:45]अब यहां पर सुन तवज्जो फरमाए कश्ती आया हर कश्ती छोटी बड़ी
[45:55]जब उसने सफर शुरू करना होता है तो अल्लाह अलग से ऑर्डर
[45:58]जारी करता है ओके करता है तब चलती है अल्लाह के अटल
[46:05]कानून की तरफ इशारा है कि अल्लाह ने पानी को ऐसा बनाया
[46:10]है कि कश्ती उसमें चलेगी डूबेगी नहीं आम हालात में वरना वो
[46:21]तूफान वगैरह में डूबने के और असबाब वो बन जाते हैं लेकिन
[46:29]आम हालात में हजारों टन वजनी जहाज लोहे के पानी में तैर
[46:36]रहे हैं अब जिन्होंने य पढ़ा हुआ सिंपल सा बड़ा सादा सा
[46:43]साइंस का कानून है फिजिक्स में पढ़ाते हैं व लॉ ऑफ फ्लोटिंग
[46:46]बॉडीज य जो जो चीजें पानी में तैरती हैं क्यों तैरती है
[46:53]क्या कानून एक कानून अटल कानून अगर उस कानून के तकाज पूरे
[46:59]करें तो हजारों नहीं लाखों टन वजनी हो नहीं डूबेगा पानी उसे
[47:07]थाम लेगा अटल और अगर उस कानून के तकाज ना पूरा करे
[47:12]इतनी सी सुई हो पानी उसे गर्क कर देगा अपने अंदर यह
[47:19]इंसान ने जान लिया मुशाहिद के नतीजे में ज बड़े इत्मीनान से
[47:26]करोड़ों अरबों खर्च करके इतने बड़े-बड़े जहाज बनाते इत्मीनान है कि इसने
[47:32]पानी में तैरना है पानी का वह अटल कानून पता चला अल्ला
[47:36]ताला उसकी तरफ इशारा फ यह अल्लाह का अमर है अल्लाह ने
[47:43]पानी को हुकम दिया है कि वह कश्ती को चलाएगा अपने अंदर
[47:48]गर्क नहीं करेगा थाम लेगा आगे चले तत मन फ और य
[47:56]अल्ला ने किस लिए किया और ताकि तुम अल्लाह का फजल तलाश
[48:02]करो तिजारत करो कश्तियों में जाओ समंदर में मछलियां पकड़ो अपने खाने
[48:10]पीने का बंदोबस्त करो बेचो तिजारत आज इतनी सारी तरक्की हो गई
[48:15]सबसे ज्यादा तिजारत इंसान की अभी भी समंदर के जरिए होती है
[48:22]ऑयल जहाजों में जाता है हवाई जहाज नहीं बैरी जास ऑयल टैंक
[48:30]तो आज भी दुनिया में यह समंदर के मस जो मुसर किया
[48:37]अल्लाह ने इंसान फायदा उठा लेकिन यह समंदर की तसर इससे कौन
[48:48]ज्यादा फायदा उठाएगा जो कश्ती बनाने की सनत में ज्यादा मेहनत करेगा
[48:53]ज्यादा रिसर्च ना कि जो क ज्यादा तावीज बांध देगा हमारे इधर
[49:00]पीआई वाले पहले अपनी नाली की वजह से राबिया करते हैं फिर
[49:07]जहाज उड़ाने के काला बकरा जिबा करते हैं ताकि जहाज महफूज रहे
[49:13]अब अगर फर्ज करें जहाजों को चेक करने के स्टैंडर्ड है जो
[49:18]उन कंपनी ने बनाए हुए हैं उनके पुर्जे देखने के जितने भी
[49:25]मेरिटस और स्टैंडर्ड और एसओ पीस है वो पूरे की जाए बेहतरीन
[49:28]वो वो इंसान पूरे ना करे और कहे कि मैं काला बकरा
[49:33]देक जहाज बचा लूं यह अहमक है वो असल हका से सर्फ
[49:43]नजर करके और इन चीजों को उसका अल्टरनेट समझ लेना यह इस
[49:47]उम्मत की गुमराही हों में से एक बड़ी गुमराही जागते नहीं है
[49:54]इंतजार में रहते हैं अभी हो रहा है अभी और र है
[49:58]पीर साहब कहते हैं वो इस महीने हो जाना था तुम्हारा मसला
[50:00]हल लेकिन वो सितारा टूट के पता नहीं किधर चला गया तो
[50:03]थोड़ा सा मसला मैं अभी नया चिल्ला कर रहा हूं ताकि वो
[50:09]सितारा अपने ट्रैक वापस आ जाए तुम्हारा कारोबार ऐसे खवाबों में लगाए
[50:13]रखते सुनिए तत मन फ और ताकि तुम अल्लाह का फजल तलाश
[50:21]करो वला अलकम तकर और वो जो कुरान का असल मकसद और
[50:27]ताकि तुम शुक्र गुजार बन या सारी नेमतों से इस्तफा करो और
[50:33]जब तुम जानते हो कि समंदर में य तासीर तुमने नहीं रखी
[50:39]ना तुमने बनाया इसको तो फिर उस जात के शुक्र गुजार बनो
[50:40]कि जिस जो इन सब चीजों का लिक अब यहां इस आयत
[50:49]में दो लफ्ज आपने याद रखने दो बातें एक यह मुसर किया
[50:55]अल्लाह ने और मुसर कर करने की आगे वजाहत की कैसे मुसर
[50:57]किए अल्लाह के हुकम से कश्ती चलती है ताकि तुम फायदे उठाओ
[51:03]फायदे कौन उठाएगा जो बनाएगा कश्ती नी अल्लाह ने यहां पर यह
[51:11]नहीं कहा कि अल्लाह ने समंदर भी मखर कर दी है और
[51:12]कश्ती भी वही बनाएगा मेरे और आपके लिए तो नहीं बनाएगा जिस
[51:18]नबी ने साढ़े 00 साल अल्लाह के लिए धक्के खाए थे उसको
[51:23]भी अल्लाह ने कहा खुद बना हजरत नूह अल्लाह कश्ती नहीं बना
[51:31]सकता अल्लाह ताला कहता आपने 50 साल आपकी बड़ी हिम्मत है अब
[51:34]आप कुछ ना करें अभी आप बस बैठ जाए और मैं आपको
[51:38]इसमे आजम एक बताता हूं आप देखें कैसे लकड़ियां दरख्तों से कटकट
[51:41]के आती है और जनाब कश्ती बनती जाती है जैसे बाज मैजिक
[51:45]वाली चीजों में करके छो दिखा रहे होते हैं जुटती जाएगी और
[51:49]आप बैठे आपने हिलना ही नहीं है फरिश्ते एक एक जानवरों का
[51:52]जोड़ा पकड़ेंगे कश्ती में रख देंगे फिर आपको आके बड़े अदब से
[51:57]उठाएंगे जाके कश्ती में रख देंगे कश्ती चलना शुरू हो जाएगी ऐसा
[52:00]हुआ अगर किसी के लिए बनता तो हजरत नू के लिए बनता
[52:05]था कि सा स साल अल्लाह की राह में अपनी कौम की
[52:11]अजियत बर्दाश्त की ताने बर्दाश्त की फिर भी जब हजरत नूह को
[52:13]अल्ला ने फरमा दिया कि नूह अब आप टेंशन ना ले मैं
[52:17]आपको बता रहा हूं कि जिन्होंने आप पर ईमान लाना था वो
[52:22]ला चुके अब बाकियों को छोड़ दे और आप क्या करें वस
[52:23]आप कश्ती बनाओ आप कश्ती बनाओ और इंतजार करो इनके ब इनको
[52:34]छोड़ दो इनके लेकिन कश्ती खुद बनाओ वह काम जो बंदे को
[52:39]करना है जब बंदा व भी अल्लाह की तरफ डालना शुरू कर
[52:44]दे वहां से उसकी गुमराही का आगाज होता और बहुत सारे मामलात
[52:46]में उनमें से एक य इल्म और साइंस का मैदान है मुसलमान
[52:50]इस गुमराही का शिकार हो मजम तौर पर बात कर रहा हूं
[52:58]मजबूरी तौर पर ये चाहते हैं दुआओं से व काम करा ले
[53:00]जिसके लिए अल्लाह ने कहा था तुम्हारा अमल जरूरी है मेरा तो
[53:06]आखिरी नबी सरदार अंबिया भी वह भी मैदान में जाएगा वह भी
[53:12]जख्मी होगा बाज औकात बाज औकात खून से उसका बदन भर जाएगा
[53:15]इतना खून बहेगा पत्थर लगेंगे उसको तुम्हारे घर बैठे कैसे करूंगा तुम
[53:20]कौन से खेत की भूली हो कि तुम मेहनत ना करो तुम
[53:25]जहमत ना उठाओ और तुम्हें हर चीज प्लेट में डाल के सामने
[53:32]देते अल्लाह ताला कुछ भी कर सकता है कभी भी कर सकता
[53:36]है मोजा करामत वो कर सकता है सारे असबाब उसके हाथ में
[53:40]है लेकिन उसने फरमाया तुम इसके इंतजार में नहीं रहोगे मैंने करना
[53:43]हुआ तो कहीं कर दूंगा तुम्हारी अहलिया देखकर लेकिन तुम अपनी मेहनत
[53:49]छोड़ दो और कहो कि अल्लाह ताला जो चाहे कर सकता है
[53:51]मैं क्यों करूं वो किसी ने एक मजाक उड़ाया हुआ था कहा
[54:00]हुआ था एक जापानी बंदा और एक अरब जापानी और अरब उनका
[54:05]जोक बनाया हुआ था कि जापानी के ऊपर जुमला लिखा हुआ था
[54:10]कि वह जापानी कह रहा है कि जब जब दूसरे यह काम
[54:11]कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकता तवज्जो फरमा रहे
[54:18]जब दूसरे काम कर सकते हैं यह वाला तो मैं क्यों नहीं
[54:23]कर सकता और अरब के ऊपर लिखा हुआ कि जब दूसरे कर
[54:27]सकते हैं तो फिर मैं क्यों करूं
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