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Bad Az Karbala Baqay-e-Deen Main Imam Sajjad Ka Kirdar | H.I Ali Afzal Rizvi
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In
Lectures
Record date: 17 Nov 2024 - بعد از کربلا بقائے دین میں حضرت امام سجاد کا کردار AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:18]बमला ही अदला र आलमी [संगीत] [संगीत] मोहम्मद [प्रशंसा] मोहम्मद भी है
[1:00]और उसके साथ साथ इमाम सज्जाद अ सलातो सलाम से मंसूब है
[1:06]लिजा तरीके का इ दरस का यही होता है कि जो मुनाजत
[1:12]करीब हो उसी हवाले से गुफ्तगू होती है में मुसर आपके सामने
[1:20]इमाम सजाद की में से उन हालात और अवाल को बयान किया
[1:28]जाएगा बाबला ने दन के लिए आजन हम तक पहुंचा है और
[1:40]दन शनास लोग आप सब जानते हैं कि कर्बला का वाकया वाकया
[1:44]था जिसने इस्लाम को बचाया यह जब हम कहते हैं कि इलाम
[1:52]को कलाने बचाया इससे दर हकीकत मुराद क्या होती है इससे हमारा
[1:56]इरादा क्या होता है कि हम क कर्बला के वाक लाम को
[2:02]बचाया इमाम हुसैन सला सलाम जब निकले थेम सलाम ने कहा था
[2:09]इमा मैं अपने जला की उमत की इला के लिए निकल रहा
[2:14]ह वो कौन सी खराबी इम सलाम ने देखी थी जिसकी इलाह
[2:19]के लिए इमाम हुसैन अ सला सलाम निकले थे मेरी और आपकी
[2:25]नजर में खराबी क्या है मेरी र में खराबी किसे कहते ये
[2:29]एक अहम सवाल फिर हम इमाम सज्जाद अ सलातो सलाम तक आएंगे
[2:33]फिर उनका इस दिन के बका के लिए काम देखेंगे और इमाम
[2:37]सज्जाद अ सला सलाम ने किस अंदाज से तयो की बका के
[2:43]लिए इस्लाम की बका के लिए क्या कमात किए इसको समझने की
[2:49]कोशिश करें इमाम हुसैन अ सलाम जिस इस्लाह के लिए जा रहे
[2:54]हैं वो इस्लाह नमाज के अरकान की तालीम है या नमाज के
[2:59]वाज बात की तालीम है या नमाज के मुस्ता बात की तालीम
[3:09]मा उ ज ला के लिए निकल किस की ला के लिए
[3:16][संगीत] निकल कभी हमने अपने आप से सवाल किया तो हमारे पास
[3:24]जवाब हो जनाम हुसन सलाम और जहां जहां इमाम हुसैन सलाम ने
[3:36]कोई भी तकरीब देखी कोई भी बिगाड़ देखा उसकी इमाम हुसैन सलाम
[3:39]ने इला की तूल हयात में यही मामला था अगर एक पीर
[3:45]मर्द एक बुजुर्ग गलत अंदाज से वजू कर रहा है तो उसकी
[3:49]इलाह का अंदाज अलग है एक शख्स अगर अकामा दन के अंदर
[3:56]कोई गलती कर रहा है उसकी इस्लाह का अंदाज अलग है लेकिन
[3:59]एक श हाकिम बनकर बैठ जाए और अपने आप को खलीफ रसूल
[4:06]कहे और उसके बाद शरीयत की धजिया उड़ाए उसकी इलाह का अंदाज
[4:14]अलग है हम जब इमाम हुसैन अ सला सलाम के कयाम की
[4:15]तरफ निकाह करते हैं तो इमाम हुसैन अ सलातो सलाम ने वाज
[4:23]तौर पर यजद की बैत के खिलाफ कयाम किया है इमाम सज्जाद
[4:27]अ सला सलाम ने सद शदा सलाम के बाद उसी काम को
[4:37]आगे बढ़ाया जब हम आ मासला की की तर करते सवात प
[4:40]मोहम्मद ले मोहम्मद हम कहते मोहद मोहद मोहद मोहम्मद वा सब के
[4:55]सब एक ही नूर है य जुमला आपने बारबार सुने है ना
[5:00]इनका पहला भी मोहम्मद इनका आखरी भी मोहम्मद इनका औसत भी मोहम्मद
[5:05]य सब के सब मोहम्मद कमा सुने कर्बला को हम एक तन्हा
[5:12]मुजर मोत सलाम की सीरत में हया त में गाना य मसला
[5:22]नहीं समझते इसकी पॉइंट को हमारे बच्चे समझने की कोशिश करें कला
[5:32]कौन सी जंग है कर्बला जमल सिफीन नहर बान का तस सुल
[5:37][संगीत] है ऐसा नहीं है कि इमाम आकर इस पहली ज में
[5:44]शामिल हो रहे जो मैंने आपसे क जमल सन हरवान का तस
[5:52]यानी क्या जंगे जमल इमाम अली अ सलाम मुसल की जंगे सन
[5:56]इमाम अली सलाम पर मुसल की गई जिसको हम कहते जंग तली
[6:02]इसी तरीके से जंग रवान खवारिज को बना दिया गया इस्लाम मुस्लिमीन
[6:09]के लिए व खतरनाक बने बिलार उनसे जंग हुई इसके बाद अमीर
[6:12]मोमिनीन एक और जंग की तैयारी कर रहे थे शहादत से पहले
[6:18]अमीर मोमिनीन एक और जंग की तैयारी कर रहे थे वो काम
[6:23]जो सफीन में अधूरा रह गया था इमाम अली अ सला सलाम
[6:28]उसी काम को आगे बढ़ाना चाहते थे लेकिन इमाम अली अलाम शहीद
[6:30]कर दिया गया अब इमाम हसन मुस्त आ इमाम हसन ने आते
[6:36]ही कागज मंगवा लि सु के लिए इमाम हसन मुस्त सला सलाम
[6:40]ने नखला पर पड़ाव डाला नखला पर पड़ाव डालने के बाद इमाम
[6:47]हसन अ सला सलाम लश्कर को आमादा करके लेकर गए लोग अपने
[6:50]अपने ईमान को बेचकर मददे मुकाबिल लश्कर में चले गए हालात ऐसे
[6:57]हो गए कि अगर इमाम हसन मुस्त सला सलाम सुन ना करते
[7:00]तो नाम निशान ना होता इमाम ने सु की शरा ी बेहतरीन
[7:05]शरा [संगीत] लाम पर मुसल मुक्तस गुफ्तगू होनी चाहिए बारबार होनी चाहिए
[7:12]ताक लोग समझे सु क्या थी और सु के मानी क्या है
[7:16]माना यह नहीं है म मुकाबिल फरी से राजी हो गए सुल
[7:22]के माना य नहीं इमाम अने एंडोस कर दिया इमाम ने कुछ
[7:31]शरा रख के माना जंग को रोका जाए मकत जंग को रोका
[7:33]जाए आतिश बस की जाए सीस फायर किया जाए इस जंग को
[7:37]किसी और मरहले केपर मर कर दिया जाए इसी जंग को इमाम
[7:42]हुसैन अ सला सलाम ने कर्बला के मैदान में अंजाम दिया और
[7:46]फिर इमाम हुसैन अ सला सलाम ने जिस जंग को रोका है
[7:52]उस जंग को इमाम जमान अ सला सलाम आकर मुकम्मल करेंगे आप
[8:02]समझ रहे हैं सीक्वेंस अभी मैं बद उदो खैबर खंदक को इसलिए
[8:07]बयान नहीं कर र कि वक्त तुलानी ना हो जाए वो सब
[8:11]तो जनों में क्लियर है इमाम अली अल सलाम की जंग का
[8:15]क्या मकसद था वही मकसद इमाम हसन के निकलने का था वही
[8:20]मकसद इमाम हुसैन अली सलातो सलाम का इस राह में क्या हुआ
[8:23]अमीरुल मोमिनीन शहीद किए गए इमाम हसन शहीद किए गए इमाम हुसैन
[8:30]शहीद किए गए अब मरला आयाम सज्जाद का इमाम सज्जाद अ सला
[8:37]सलाम का दौर वो है मरवान जैसा सफक त पर बैठा हुआ
[8:40]है इमाम सज्जाद अ सला सलाम का दौर व है क्या अब
[8:47]कर्बला के वाक के बाद लोगों की मानत एक तरफ अले ईमान
[8:53]की मानत में जफा हुआ दूसरी तरफ वो अफराद जो मुत थे
[8:59]जो साथ ना देने वाले थे जिन्ने नहीं कहा था जो फरजंद
[9:01]रसूल खुदा के साथ नहीं निकले थे उनकी रूहानियत में पस्ती आई
[9:07]है वो बहुत बुलंदी से गिरे फिर वाक हिरा उस वाक में
[9:16]मदीने को ताराज कर दिया गया मक्का की दीवार को काबे की
[9:21]दीवार को मुन कर दिया गया काबे के गिलाफ को जला दिया
[9:27]गया आप समझते इन सब का असर खामोश लोगों प नहीं हो
[9:32]रहा था इस वक्त जो मसला हमारी जिंदगी में चल रहा है
[9:37]दो सूरते है क्या मैं जालिम के मुखालिफ हूं या जालिम के
[9:41]साथ हूं बीच वाली कोई सूरते हाल नहीं है अच्छा उसका असर
[9:47]क्या हमारी मानवी जिंदगी पर कुछ नहीं होगा मसब मैं और आप
[9:53]अगर खुदा ने तौफीक दी है फलस्तीन के मुस्त के लिए लन
[9:57]के मोमिनीन के लिए पैसा भेज रहे हैं उसका मेरी रूह पर
[10:01]कोई असर नहीं हो रहा है हम अगर उनके लिए नमाज में
[10:05]दुआ कर रहे हैं तो इसका हमारी रू पर कोई असर नहीं
[10:07]हो रहा है हम में से अगर कोई कुदरत मंद हो वत
[10:11]रखता हो उसकी बात इस काबिल हो अगर वो जबान से कोई
[10:16]काम कर रहा हो तो क्या उसका रू पर कोई असर नहीं
[10:19]पड़ रहा है अब इसी दायरे को आप आगे बढ़ाइए एक श
[10:25]ऐसा हो जो मनसब हुकूमत पर हो जो इदार रखता हो वह
[10:30]चाहे तो उनकी मदद और नुसरत के लिए बहुत सारे काम कर
[10:36]सकता है अगर वह नहीं कर रहा तो क्या उसका उसकी रूह
[10:38]केपर कोई असर नहीं पड़ रहा यह मामला रूहानी नहीं है क्या
[10:47]यानी व अपनी निगाहों के सामने फलस्तीन के मुसलमानों को मरता हुआ
[10:51]देख रहा है बच्चों को मरता हुआ देख रहा है उसको अपने
[10:57]से काम है उसको अपने किंगडम को आगे बढ़ाना है उसको अपने
[11:01]मंसूबों को तकल तक पहुंचाना है उसने 2030 का एक मंसूबा अपने
[11:08]जहन में बनाया हुआ है उसके लिए वो जगह जगह काम करता
[11:10]फिर रहा है मगर उसको यह होश नहीं है कि मुसलमानों पर
[11:14]क्या गुजर रही है आप मुझे बताइए क्या उसकी रूहानियत इससे बढ़ेगी
[11:17]या पस्त होगी दन का ताल्लुक आपके किसके साथ है यह रूह
[11:22]जब मुझे अंदर से अंगी देती है तो उसके बाद मेरा बदन
[11:27]मुतह होता है यह रूह मुझे अंदर से बेदार कर के वक्त
[11:29]नमाज जोहर हो गया उसके बाद में मुसल्ले पर आऊंगा यह रूही
[11:36]मर जाए यह रूही जखमी हो जाए यह रूही बेदार ना रहे
[11:39]तो उसका असर मेरी जिंदगी के ऊपर पड़ेगा मेरी दीनदार पर पड़ेगा
[11:45]अब आइए दोबारा इमाम हुसैन अल सलातो सलाम की तरफ इमाम हुसैन
[11:48]अली सलातो सलाम एक बेदार मुस्त सवात प मिलके मोहम्मद वा आल
[11:56]मोहम्मद [संगीत] इमाम हुसैन अ सलाम ने मुसलसल लोगों को अपनी तरफ
[12:06]दावत दी थी अच्छा आप कर्बला के वाकए को अगर जरा इस
[12:12]र से सोचे पूरा मक्का इमाम हुसैन के साथ होता पूरा मदीना
[12:18]इमाम हुसैन के साथ होता पूरा कूफा इमाम हुसैन के साथ होता
[12:23]पूरा बसरा इमाम हुसैन के साथ होता तो कर्बला की जंग का
[12:29]न क्या होता आप मुझे बता कला की क्या हो अलग होता
[12:40]या नहीं होता रोज आशूरा रोज गम के अलावा क्या होता अगर
[12:46]यह पूरा इस्लामी मुशरा इमाम हुसैन अ सला सलाम के साथ आ
[12:51]जाता पूरा भी छोड़ दीजिए 50 फीस भी अगर इमाम हुसन सला
[13:01]सलाम के साथ आ जाता तो नक्शा क्या होता या 50 फीसद
[13:09]ने भी साथ नहीं दिया अब उस साथ ना देने का असर
[13:14]क्या हुआ होगा इस्लाम माश में लयर हल माना की सदा पर
[13:21]लब्बैक ना कहने का असर आप समझते हैं रूहे बड़ी कबी रही
[13:26]होंगी रूहानियत बड़ी बाली रही होगी फरजंद रसूल खुदा का साथ नहीं
[13:36]दिया गया फरजंद रसूल खुदा कतल कर दिए गए उनके बच्चे मेंब
[13:41]गया सहरा के अंदर स फरात पर कतल कर दिए गए प्यासे
[13:46]इसका रूहानियत असर नहीं पड़ा होगा ऐसा असर रूहानियत पर पड़ा था
[13:53]के फिर यजद की जुरत और बढ़ी और उस मलून ने मदीना
[13:55]पर हमला किया मक्का पर हमला किया अब सवाल उन लोगों से
[14:01]जिन्होने का साथ नहीं दिया बच गए किसलिए नहीं निकले थे य
[14:11]हमारी इत नाम े में मदीना के रा के वाक में क्या
[14:19]नहीं हुआ हो गई बचत रूहानियत बिल्कुल बस्त हो गई ी इमाम
[14:23]सजा कर्बला के वा के बाद इस रयत को बेदार करने के
[14:30]लिए रूह को स्ट्रंग करने के लिए ताब रू मजबूत होगी तो
[14:37]इंसान का अमल भी मजबूत नजर आएगा जो आपको बड़े बड़े फैसले
[14:40]करते हुए लोग नजर आते हैं ना यन के लिए बड़ी बड़ी
[14:46]कुर्बानिया देते हुए लोग नजर आते हैं लोग रनी र पर बड़े
[14:53]मजबूत होते हम रूह की मजबूती को तस्बी के फेरने में समझते
[14:56]मजबूत होगी एक तस्बी जहरा आपकी रूह की मजबूती के लिए काफी
[15:04]है अगर दिल से हो त जनारा जब हजरत सि तारा सलाम
[15:12]मिलके सलात प [प्रशंसा] मोहम्मद कनी का मुतालबा करने रसूलल्लाह के पास
[15:19]आई रसल ने त जनारा [संगीत] फमा ये एक तस्बी जनाब जहरा
[15:26]बड़ी कुवत की हाल है जब मेरी रूह मजबूत होगी तो मेरा
[15:33]बदन खुद बुद राहे खुदा में आगे बढ़ेगा उसके लिए मुझे कुछ
[15:40]सस एक्सरसाइ की जरूरत नहीं है उसके लिए मुझे तन साजी की
[15:43]जरूरत नहीं है मेरी रूह मुझे बेदार करेगी और मुझे उस मैदान
[15:49]में लेकर आएगी य इमाम सजाद सला सलाम ने इस रूह की
[15:54]बेदारी के नु [संगीत] दिया मानत इ त हो चुकी है मान
[16:02]इतनी पस्त हो चुकी है खुदा पर यकीन बिल्कुल नहीं रहा है
[16:04]सब कुछ हुक्मरानों को समझा जा रहा है इमाम ने उस माश
[16:09]के अंदर दुआ के जरिए रूहानियत का एक सर शुरू बाद कर्बला
[16:15]वो दौर है जिसमें इमाम सज्जाद अ सला सलाम को तकरीर करने
[16:23]की इजाजत नहीं दी जा रही क्योंकि जानते जो इन्होने शाम में
[16:26]तकरीर की थी व वही हमारी बुनियाद को हिलाने के लिए काफी
[16:32]थी अना इनो मक्का वामना अना इनो जमजम सफा मैं मक्का और
[16:39]मिना का फरजंद हूं मैं चाहे जमजम का फरजंद हूं मैं सफा
[16:44]और मरवा का फरजंद हूं तकरीर काफी थी ये क्या कहना चाह
[16:47]रहे इमाम सज्जाद सलाम दरबार के दरबार य इमाम सज्जाद अ सला
[16:53]सलाम को जब हम अपने जहन में लेकर आते हैं तो क्योंकि
[16:57]हमने खास कुछ मता मसाब के हवाले से सुन रखे होते हैं
[17:00]एक इंतहा नातन लागर बीमार शस हमारे जहन में अगर हम विजला
[17:07]कर रहे हैं बहुत बड़ी खता है इमाम सज्जाद अ सला सलाम
[17:12]ते खुदा है हुत खुदा नका से पाक होता है इमाम सजाद
[17:23]द मरी नहीं थे हिकमत परवरदिगार आलम के तहत आशूरा के दिन
[17:29]चंद दिनों की मरीजी इमाम सज्जाद अल सलातो सलाम की थी हां
[17:34]आशूर के वाके वाले रोज ताकि उन पर से जिहाद साक हो
[17:38]जाए उठ जाए इमाम सज्जाद अली सलातो वसलाम शदीद मरीज थे शदीद
[17:40]बुखार में थे लेकिन ऐसा नहीं है कि इमाम सज्जाद अ सलातो
[17:45]वसलाम की पूरी जिंदगी बुखार में गुजरी है नाजु बिल्लाह बारहा आप
[17:48]ये मता सुनते हैं और उस शख्स ने असीर रंजो महन होने
[17:55]के बावजूद जो कूफा और शाम की राहों में खुतबा दिए हैं
[17:59]जो दरबार यजीद में खुतबा दिया है यजद की हुकूमत को लाने
[18:04]के लिए काफी था ऐसा खुतबा था कि यजीद का अपना बेटा
[18:09]40 दिन से ज्यादा उस तक् पर नहीं बैठा यह कह कर
[18:13]उतर गया कि इस तख की बुनियाद आले मोहम्मद के खून पर
[18:15]है इमाम सज्जाद अ सला सलाम के खुदे का असर था वो
[18:20]शामी मर्द जो राहे इमाम सज्जाद में शहीद कर दिया गया इमाम
[18:26]सज्जाद अ सला सलाम के सब्र हौसले का नतीजा था अब इमाम
[18:31]सलाम को मदीना पटाया गया इमाम सजाद सलाम मदीना आ गए मदीना
[18:39]आने के बाद इमाम सजाद सलाम ने एक तरफ खिताबत की इजाजत
[18:45]नहीं है दूसरी खिताब करते हैं तो इमाम सजाद सलाम की बात
[18:51]सुनने वाले जितने भी अफराद है उनको या कत्ल कर दिया जाएगा
[18:55]यार कर लिया जाएगा की इतनी गहरी नजर ने क्या काम किया
[19:02]दुआओ के जरिए दन के मारफ को पहुंचाया है कौन सा दौड़
[19:08]सब शतम अमीर मम सलाम पर कब र उमर बिन अब्दुल अज
[19:16]के दौर में यानी इमाम सज्जाद अलाम का दौर वो है कि
[19:20]जब लोग देख रहे हैं कि मनाब से अमीर मोमिनीन अला सलाम
[19:26]को बुरा भला कहा जा रहा है बनया के फज जा रहे
[19:30]बनया की शान में कसीद कहे जा रहे बनया की अ को
[19:35]बयान किया जा कौन [संगीत] बया ला कौन मनया जिनके बारे में
[19:46]रसूला [संगीत] ने अगर इनको त देखो शदीद अल्फाज इस्तेमाल उनके म
[20:01]मुकाबल अली मामला हो गया यानी कैसा ब हु मामला समझाने के
[20:12]लिए बात करला इस तरफ हैना कला इस तरफ है कल को
[20:18]सबका मिजाज ऐसा हो जाए कि उस तरफ करके नमाज पढ़ रहे
[20:21]हो अजीब बात नहीं यही हो गया था यही हो गया लीस
[20:28]फजल रसूला ने बयान किए उस पर लान की जा रही थी
[20:33]और जिनके ल को रसूला ने बमला किया है उनकी मद सराई
[20:39]की जा रही थी किबला तब्दील हो गया था किस माना में
[20:41]मादी तबार से तो लोगों के जिस्म इसी तरफ थे लेकिन मानवी
[20:47]तबार से रूही तबार से बानी तबार से लोगों की रूह उन
[20:54]महला की तरफ झुक रही थी जो बनया के यूं किबला तब्दील
[21:00]हुआ था यहां तो अगर कोई ये वाला किबला तब्दील हो रूह
[21:07]का बड़ा खतरनाक हो जाता है क्योंकि यह वाला किबला तो नजर
[21:12]आ रहा है ना कोई भी आएगा आपको सीधा कर देगा जनाब
[21:17]किबला इस तरफ है किबला इस तरफ है आपके बदन को दुरुस्त
[21:19]सम कर देगा लेकिन अगर रूह उस तरफ किबला उस कबले की
[21:24]तरफ सजदा रेज हो तो किसी को पता भी नहीं चलेगा जाहिरी
[21:29]तौर पर ये मादी सर यहां झुक रहा होगा मानवी तबार से
[21:33]वहां पर कासा इंसान खड़ा हुआ होगा आप इन हालात को देखें
[21:38]तो आज के हालात का बहुत अच्छी तरह से तजिया कर सकते
[21:43]हैं इमाम सज्जाद सला सलाम ने क्योंकि इमाम हुत खुदा थे रूह
[21:46]शनास थे तबीब रूह थे इमाम सज्जाद अ सला सलाम ने इसकी
[21:54]दवा और मजब के लिए दुआओं को तालीम किया आप जाकर सही
[22:02]सजा सज्जादिया की सही सजाद सजाद की तमाम द का नहीं ऐसा
[22:09]नहीं कि जितनी दुआ इमाम सज्जाद की सब सही सज्जादिया में सही
[22:13]सज्जादिया में इमाम के चंद मुंतखाब दुआए मौजूद है एक सवात पढ
[22:19]मोहम्मद [प्रशंसा] ो चंद मुत जिस तर अर मम सलाम का तमाम
[22:35]कमात का मजमुआ नहीं है चंद मुत इमाम के त इमाम कमात
[22:46]उसके अलावा क है उसके अलावा कई इस स सजाद के अलावा
[22:54]सजाद की कई द लेकिन आप जाकर स सज्जादिया के जरिए समझ
[23:01]में तो आ जाएगा इमाम का लहन क्या है इमाम का अंदाज
[23:05]क्या है आपरा दुआ का अंदाज देख अमन हम दुआ मांगते हैं
[23:09]कैसे पहले दरूद पढ़ते हैं आखिर में दरूद पढ़ते हैं बीच में
[23:15]हमारी दुआ होती है एक सलीका सिखाया गया इमाम सजाद सला सलाम
[23:22]की दुआओ में हर चंद फरो के बाद अल्ला सलेला मोहम्मद ल
[23:30]मोहम्मद अतु सलीला मोहम्मद ली मोहम्मद बार बार मोहम्मद ल मोहम्मद की
[23:34]तरफ मुत किया जा रहा है ये दुआए नहीं आगा यह दुआए
[23:38]नहीं है बल्कि दीन का पूरा जखीरा है दन के मारफ का
[23:45]पूरा जखीरा है इन दुआओं के जरिए इमाम सज्जाद अ सलातो सलाम
[23:47]ने लोगों को मुत किया कि किस समत में जा रहे हो
[23:52]किस तरफ तुम्हारा चेहरा है तुम्हारे बदन जाहिरी तौर पर मक्का की
[23:57]तरफ झुक रहे काब उल्लाह की तरफ झुक रहे हैं लेकिन दरअसल
[24:04]तुम्हारी रूह कहीं और झुक चुकी है उनको आजाद करवाने के लिए
[24:12]इमाम सज्जाद सला सलाम नेय काम किया अब जो श आपको इमाम
[24:14]नहीं मानता जो श आपको हुज्जत खुदा नहीं मानता वह कम से
[24:24]कम इतना तो मानता है कि इमाम सज्जाद अ सला सलाम जाहिद
[24:30]परहेज गार इबादत गुजार आब शज दार है मुश के अंदर उस
[24:37]वक्त भी रा था उस वक्त के लोग भी आकर ऐसे अफराद
[24:42]से दुआ करवाया करते कुछ मकत कुछ ताज कुछ दुआ इमाम की
[24:46]ऐसी है म एक श आया और आने के बाद उसने कहा
[24:51]रस अल्ला यह मानता है कि फरजंद रसूल खुदा है यह मानता
[24:54]है मुत है यह मानता है परग है ये मानता है सज्जाद
[24:59]है यानी बहुत ज्यादा सजदा गुजार है लेकिन हुज्जत खुदा तस्लीम नहीं
[25:04]कर रहा है विलायत इमाम सज्जाद अ सलाम को नहीं मान रहा
[25:09]है इमामत इमाम सज्जाद अ सला सलाम का कायल नहीं है एक
[25:11]मुत और परहेज गार शख्स होने की हैसियत से इमाम के पास
[25:15]आता है आकर कहता है मेरा बच्चा बहुत बीमार है इमाम अल
[25:19]सलातो सलाम उसको एक दुआ तालीम करते हैं कहा ये पढ़ो भी
[25:23]इसके गले में डालो भी शिफा या हो जाएगा वो शिफा याबो
[25:24]जाता है आप मुझे बताइए उस बच्चे को याद नहीं रहेगा तमाम
[25:29]उम्र मुझे किसकी दुआ से शिफा मिली [संगीत] है याद नहीं रहेगा
[25:39]आपके ल में अब वो बच्चा किसका मुबल बनेगा चाहते हुए या
[25:45]ना चाहते हुए वह जब भी इस बात को कोट करेगा लोगों
[25:50]के अजन आले मोहम्मद की तरफ मुत होंगे खुद बखुदा उस तरफ
[25:59]जाएगा कि किसकी दुआ के नतीजे में इस शख्स को इस मुजी
[26:05]मर्ज से निजात मिली जब तमाम अतिबा ने जवाब दे दिया था
[26:09]किसकी दुआ के नतीजे में इसको शिफा मिली एक काम इमाम सज्जाद
[26:14]अल सलातो वसलाम का यह था कि लोगों के अंदर मानवीय को
[26:18]बहाल करें लोगों के अंदर रूहानियत को कवी करें अल्लाह पर यकीन
[26:22]को अल्लाह के वजूद पर तवक को इमाम स्ट्रंग करें जब भी
[26:30]इंसान दुश्मन के सामने झुकता है ना बातिल के सामने झुकता है
[26:34]सलाती जर के सामने झुकता है इसका मकसद इसके अंदर तौहीद उर
[26:39]कम है य जो आज आपको बादशाह सुल्तान हो वजीर आजम हो
[26:43]सदर हो मुख्तलिफ मु मालिक के नजर आ रहे हैं ना कि
[26:47]जो इसराइल के सामने घुटने टेकने के लिए तैयार है क्यों क्योंकि
[26:51]व अपना खुदा उसको समझ रहे हैं वो समझ रहे कि अगर
[26:55]हमने इसका साथ नहीं दिया तो हमारा नुकसान होगा लेकिन अगर तवल
[27:00]हो लेकिन अगर भरोसा हो खुदा की जात पर भरोसा हो ला
[27:11]जो अल्लाह का तकवा इयार कर अल्लाह उसके लिए आसान राह तैयार
[27:16]कर देता है आसानी से निकाल देता है जो अल्लाह पर तवक
[27:21]करे व खुदा उसके लिए काफी हो जाता है अगर यह आज
[27:26]के हुक्मरान समझ ले तो मसला ही कहां है अब आपको समझ
[27:34]में आया कि यहां इतना इत्मीनान क्यों है नसरुल्ला शहीद कर दिए
[27:38]गए रईसी शहीद कर दिए गए हनिया शहीद कर दिए गए सवार
[27:43]शहीद कर दिए गए फिर भी इतना इत्मीनान क्यों है बाबा यह
[27:47]सब शहीद हुए इनका खुदा मौजूद है जो नसरुल्ला को नसरुल्ला बनाने
[27:54]वाला है जो हनिया को हनिया बनाने वाला है जो सनवाड़ को
[27:57]सनवाड़ बनाने वाला है खुदा मौजूद है ना जब खुदा मौजूद है
[28:02]तो खुदा बंदे मुताल पर तवल करो व तुम्हारे अंदर और दूसरों
[28:03]के अंदर यह जुरत पैदा कर देगा कि दयो नला सामने आएंगे
[28:09]जब खुदा पर यकीन होता है तो यह होता है और जब
[28:13]खुदा पर यकीन नहीं होता तो माया पर इंसान भरोसा करने लगता
[28:18]है यह दो ही सूरते बीच की मदल कोई सूरत नहीं है
[28:22]जो मैंने इदा में कहा था या आप बातिल के मुखालिफ होंगे
[28:25]या आप जालिम के मुखालिफ होंगे या जालिम के सा होंगे ये
[28:31]बीच में खड़े रहने वाला कोई मसला नहीं है कि जब दिल
[28:34]चाहा इस तरफ चला गया जब दिल चाहा उस तरफ चला गया
[28:38]खामोशी और सुकू वाला मरहला ही नहीं इमाम सज्जाद अ सला सलाम
[28:45]ने इनके दिल में खुदा की तौहीद को खुदा के वजूद को
[28:51]उजागर किया अपनी दुआओं के जरिए खुदा है उनको अपना खालिक मत
[28:55]मानो उनको अपना राजिक मत मानो जब तुम उनको अपना राजिक नहीं
[29:02]मानोगे उनको अपना खालिक नहीं मानोगे उनको मसर नहीं मानोगे अल्लाह ही
[29:06]के वजूद को मसर मानोगे तो तुम्हारी जिंदगी में तौहीद अक्स नजर
[29:10]आएगा ये जो बिनाए ला इलाहा इल्लल्लाह सैयद शोहदा अ सलातो सलाम
[29:15]को कहा जाता है वो उस तौहीद अकीदेअरेस्ट आलम की जात इसलिए
[29:32]कहा जाता है बना ला इलाला इमाम सज्जाद सला इसी तरह मुत
[29:38]किया अपनी दुआओ के जरिए दूसरा उर आले मोहम्मद की अजमत आले
[29:44]मोहम्मद की फजीलत आले मोहम्मद का मर्तबा यह इन दुआओ में आपको
[29:52]नजर आएगा तीसरा मरहला उन दुआओ में जो बड़े जली और बड़े
[29:57]वाजे तरीके से एहसास होता है वह है मात का मसला बिलार
[30:03]इस जहान से पलटक हमें एक मकाम पर जाना है यानी तौहीद
[30:10]मोहम्मद और माद ये इमाम सज्जाद अ सला सलाम की दुआओ में
[30:16]आपको वाज तौर पर बहुत ज्यादा नजर आएंगे तौहीद का असर बहुत
[30:26]नजर आएगा मोहम्मद ले मोहम्मद अ सलाम की तरफ यानी हुज्जत खुदा
[30:30]की तरफ चाहे वो रिसालत की सूरत में हो या इमामत की
[30:37]सूरत में लोगों का रुजू करना इसके लिए आपको बहुत सारे उसके
[30:40]अंदर पॉइंट्स मिल जाएंगे उन दुआओ में मजम और इसी तरीके से
[30:45]कयामत और माद जब हम खुदा वंदे मुताल की बारगाह में हाजिर
[30:48]होंगे तो फिर उस दिन पता चलेगा कि यहां जिंदगी कैसे गुजारी
[30:53]है इस तरफ इमाम सज्जाद ने पढ अब इमाम ने एक तरीके
[30:57]से मानत को लोगों के अंदर परवान चढ़ाया आप इमाम सजाद सलाम
[31:01]की याया तबा में यह सुनते रहते हैं किमाम निकलते थे जाकर
[31:04]बाजारों में गलियो कचों में जाकर मसा पड़ा करते थे कब को
[31:10]देखकर मसा पड़ा करते थे हम उसको सिर्फ आंसू बहा करर हम
[31:15]वहा से उठकर चले जाते इसके पर गर नहीं करते किम सजाद
[31:19]क्यों करते क्या सबब था जब भी पूछा जाता था मौला सबसे
[31:27]ज्यादा मुसीबत क्या कहते थे अ शाम अ शमशाम क्यों शाम क्यों
[31:33]सवाल है शाम क्यों करे हम अपने आप से सवाल शाम क्यों
[31:39]आगा इसकी इलत भी बयान की जाती है कि शाम में मुसीबत
[31:43]ज्यादा आई क्या कर्बला में मुसीबत नहीं आई कर्बला क्या मदीना में
[31:50]मुसीबत नहीं [संगीत] आई आप जाइए जाकर की वावाया को देखिए इमाम
[31:58]साद उस रिवायत को देखें जिसमें ये जो मारका जो कल आपने
[32:04]शहादत की मजलिस में शिरकत की है जनाब जरा सलाम की शहादत
[32:05]का सकी का अमीर मोम अलाम के हक के नजाने का इसको
[32:10]किस तरीके सेमा ने बयान किया क्या यहां मुसीबत नहीं आई क्या
[32:17]कूफा में मुसीबत नहीं आई क्यों शाम और फिर सबसे बढ़कर क्या
[32:23]कर्बला में मुसीबत नहीं आई शाम क्यों क्या शाम इमाम बताना चा
[32:30]रहे फसाद की जड़ क है कहां से हुकम सादर हो रहा
[32:38][संगीत] है मासूमी सलाम की हया तबा को जब तक मैं और
[32:45]आप उस असर में हाजिर होकर नहीं समझेंगे की सीरत ऐसे ही
[32:53]नहीं समझ में आ जाएगी अपने आप को उसर महसूस करना होगा
[32:59]अपने आप को अपने वजूद को 6 हिजरी में महसूस करना होगा
[33:04]उसके बाद इमाम सजला समझ में आे क्या हुआ पूछा जा रहा
[33:11]सबसे ज मुसीबत शाम शाम क्यों मला चलते बयान की जा लेन
[33:18]दरल क्या है फसाद की जड़ शाम में बिगाड़ की जड़ शम
[33:23]में वही से हुकम हुआ तो आया वहीं से हुकम हुआ तो
[33:30]इयाद ने हरकारे भेजे वहीं से हुकम हुआ तो सद शदा सलाम
[33:35]को कतल किया गया वहीं से बैत का मुतालबा किया गया है
[33:37]वही पर शोदा के सरों को ले जाया गया है वही पर
[33:40]अहले बैत को असर करके ले जाया गया किसके हुकम पर दुश्मन
[33:46]ने बहुत चुपना चाहा इमाम सज्जाद अ सला सलाम ने छुपने नहीं
[33:52]दिया इमाम सज्जाद सलाम ने बमला किया बेदार किया इमाम सज्जाद सला
[34:01]सलाम ने लोगों को मुतजेंस हक की तरफ लाने के लिए एक
[34:20]वसीला थी असल जात इमाम सज्जाद अ सलातो सलाम थी कि जिनको
[34:22]अल्लाह ने हुज्जत बनाकर जमीन पर भेजा था और उस हुज्जत खुदा
[34:26]ने दन का वा वात में इम सजाद सलाम की हया त
[34:31]में कुछ ऐसे नकाते जो वाक श ु आवर है जिको देखकर
[34:37]इंसान मुजब होता है कि किस तरीके से इमाम सज्जाद सला सलाम
[34:44]ने इस दन शरीयत काफ किया गुलाम कनीज का व दौर था
[34:50]उस गुलाम कनी खरीद जाते थे बेचे जाते थे इमाम बर्दा फरोश
[34:52]के बाजार में जाते गुलाम जहा पर बिकते उस बाजार में जाते
[34:57]जाने के बाद नावान गुलाम को लेकर आते क्या त नावान गुलामों
[35:05]को खरीदने की क्या वजह थी नावान गुलामों को रीद नावान गुलामों
[35:09]को आसान कर दू बात को नावान गुलामों के ऊपर कमजोर गुलामों
[35:14]के ऊपर लोगों की नजर कम पड़ती थी सोचिए इसको दूसरी चीज
[35:27]यह है कीमत भी यकीन उनकी कम होती होगी तीसरी चीज ये
[35:31]है कि वो मुश के ठुकराए हुए अफराद में शुमार होते थे
[35:37]गुलाम वैसे ही उस माश में जाकर सोचिए लाम ने कितनी ताकीदा
[35:42]की है गुलाम के साथ हुस सुलूक करने की अदल करने की
[35:48]इंसाफ करने की उसकी जाती जरूरियत के ख्याल रखने की अकीदा है
[35:52]आपको जाके की किताबों में मिलेगा बात बात पर इस्लाम ने गुलाम
[35:58]को आजाद करने का रोजा जानबूझ कर नहीं रखा कफे क फारे
[36:04]के तौर पर क्या आता है तीसरा ऑप्शन गुलाम को आजाद करना
[36:09]ये कफारा जो इस तरीके से सामने आ रहे हैं एक रोजाना
[36:14]रखने पर गुलाम आजाद करना जमन बयान करता चलू या रोजा एक
[36:20]बहुत अहम इबादत है इस तरफ भी तवज्जो रहे गुलाम को आजाद
[36:24]करना है या 60 रोजे लगातार रखने है या 60 मिस्कीन को
[36:27]खाना खिलाना है यह जो आपके सामने कफारा आ रहा है जिसम
[36:31]आ गुलाम को आजाद करना इलाम ने बात बात पर गुलाम आजाद
[36:32]करने का हुकम दिया है कफारा के बाद में जाकर देखिए प्रमोट
[36:38]नहीं किया इमाम ने इस्लाम ने स्लेवरी सिस्टम को आजाद और राहे
[36:46]हल बताया इमाम अ सलाम क्या करते बाजार में जाते कमजोर हो
[36:51]नावान हो लागर नावान गुलामों को खरीद कर लेकर आते पहली चीज
[36:57]ये उन पर लोगों नजर नहीं पड़ती थी दूसरी चीज ये कीमत
[37:02]कम होती थी तीसरी चीज ये केशरे के ठुकराए हुए अफराद होते
[37:08]थे दिल टूटा हुआ होता था दिल टूटा हुआ होता था पहले
[37:15]तो गुलाम की कोई इजत नहीं गुलामों में भी वो गुलाम जो
[37:17]लागर हो जो कमजोर हो जो ना तबा हो उस गुलाम की
[37:23]उसकी तो गुलाम भी इज्जत नहीं करते होंगे इमाम अ सलाला अपने
[37:29]घर में लेकर आते लाने के बाद इमाम सज्जाद अ सला सलाम
[37:32]जब सुरे का वक्त आता दतन का वक्त आता दतन बछवा गुलाम
[37:37]अपने मिजाज के मुताबिक अलग दतन बिछाते इमाम का दस्तरखान अलग बिछाते
[37:44]इमाम आते आकर देखते देखते कहते ये दो दतन क्यों बिछे हुए
[37:47]हैं यह अलग अलग दस्त कान क्यों है वो जवाब देते एक
[37:52]आप आका है आपका दस्त एक हम गुलाम है हमारा दस्त कते
[37:55]हम सब अल्लाह के बंदे हैं एक ही दस्तान पर बैठकर खाएंगे
[38:00]दरूद पढ़े मिलके मोहम्मद ले मोहम्मद पर बहुत अहम पैगाम है एक
[38:12]ही दस्तरखान पर बैठकर खाएंगे हम सब अल्लाह के बंदे हैं क्या
[38:19]बल कर रहेम य इजत नफ्स को मासरे के ठुकराए हुए लोग
[38:26]जब दिल होता है ना आगा तो दिल में खुलूस आता है
[38:34]ये अहम मरहला है टूटे हुए दिल की तफी हक को बहुत
[38:42]तेजी से पहुंचाती है अगर किसी शिकस्ता कल्ब की दिलज मैं और
[38:49]आप करे ना तो यकीन जानिए विलायत के करीब लाना बहुत आसान
[38:54]होगा अब आपको समझ में आ रहा है कि फलस्तीन में मस्जिदे
[38:58]बैतुल मकद के इमाम जमात क्यों इतनी आसानी से जनाबे जारा के
[39:04]दर पर आ गए जिसकी एक पूरी जिंदगी नास बियत में गुजरी
[39:06]हो जिसकी पूरी जिंदगी मुखालफत अहले बैत में गुजरी हो जिसने पूरी
[39:13]जिंदगी अहले बैत अर सलाम की मुखालफत की हो कैसे सनली वो
[39:15]जनाब जहरा सलाम अहा की बारगाह में आकर तौबा का खग हो
[39:21]रहा है ये आपकी हिकमत अमली की वजह से या आपके महाराजे
[39:25]की पॉलिसी की वजह से सिर्फ एक वो इमाम जमात नहीं कभी
[39:30]तसवर किया था कि गजा में जश्ने गदर होगा कभी तसव्वर किया
[39:35]था कि गजा में सद शोहदा सलातो सलाम का शहादत का जिक्र
[39:39]होगा कभी तसव्वुर किया था कि आपका मुस्तैद आपका फकी इस वक्त
[39:49]पूरी मुकाम को सरबला करते हुए दिखाई दे रहा है चाहे यमन
[39:54]हो चाहे लनानवी टूटे हुए दिलो की इमदाद करना बहुत जरूरी काम
[40:04]है इमाम सज्जाद अला सलाम से सीखा है इमाम सज्जाद अ सला
[40:09]सलाम ने सिखाया किनको लेकर आए जिनके दिल शिकस्ता है दस्तरखान अलग
[40:13]अलग बिछाए इमाम सज्जाद सलाम ने क एक जगह बिछाओ कहा आका
[40:17]हम गुलाम है हम सब अल्लाह के बंदे हैं सब एक दस्तरखान
[40:24]पर बैठेंगे इजत नफ्स को बहाल किया जब इज्जत नफ्स बहाल हो
[40:28]गई [संगीत] वह अपनी हैसियत को पहचानने लगे अपनी इंसानियत को उन्होने
[40:34]दर् कर लिया दन का दर्ज देना शुरू किया बाहर जाकर खिताब
[40:41]नहीं कर सकते मदरसा नहीं खोल सकते खुले आम दन के मारफ
[40:47]को बयान नहीं कर सकते इमाम सजाद ने क्या गुलामों को खरीदा
[40:51]खरीदने के बाद इत नफ्स को बहाल किया बहाल करने के बाद
[40:56]दन का दर्स दिया दीन का दर्स जब एक हद तक दे
[41:01]दिया उनका निकाह करवाया उनको माश में आजाद छोड़ दिया ऐसे 1000
[41:04]गुलाम इमाम सज्जाद अल सलातो सलाम के हैं जो मुबल इस्लाम व
[41:10]मुबल तश्य बनकर मुश के अंदर फैल [प्रशंसा] गए ये जो आप
[41:18]बाद की रिवायत सुनते हैं ना इमाम बाकर अल सलातो सलाम की
[41:23]इमाम सादिक अल सला सलाम की फकी रिवायत काल बाकर काल साद
[41:25]काल बाकर काल सादिक अल सलाम य इमाम सज्जाद अल सलातो सलाम
[41:31]के उस सिस्टम का नतीजा था कि जिसकी वजह से इमाम बाकर
[41:36]अल सलातो सलाम को दर्स देने के लिए महल फराम हुआ अब
[41:40]आपको समझ में आया अ मोहम्मद खर मोहम्मद त मोहम्मद का मतलब
[41:47]क्या है कहां से बात चली है रसूल अल्लाह से रसूल अल्लाह
[41:49]के बाद जनाबे जहरा वसल करने वाली इमामत से इमामत का मरहला
[41:54]आया इमाम अली शहीद कर दिए गए इमाम हसन शहीद कर दिए
[41:59]गए इमाम हुसैन शहीद कर दिए गए इमाम सज्जाद अ सला सलाम
[42:04]ने यह काम किया बिल आखिर इमाम सज्जाद भी शहीद कर दिए
[42:05]गए इमाम बाकर अ सलातो सलाम ने रसूल अल्लाह की उस सही
[42:11]शरीयत और दीन को लोगों के सामने पेश किया इमाम साद अ
[42:15]सला सलाम ने पेश किया आज फ इमाम सादिक अल सलाम जो
[42:20]आप सुनते हैं ना जिसकी वजह से मुझे और आपको जाफरी कहा
[42:22]जाता है फ जाफरी कहा जाता है ये दरअसल पीछे के तमाम
[42:27]की काविश का नतीजा है दरअसल यह फ जाफरी फ मोहम्मदी है
[42:33]य तमाम मासूमी सलाम की काविश का नतीजा कि आज दन सही
[42:40]और सालिम शक्ल में किसी ना किसी हद तक हम तक पहुंचा
[42:46]है और इसकी तकल होगी इमाम जमान अलाला फ शरीफ के वजूद
[42:50]अ तो हम ये कहते ना कि अगर हम मिट जाने वाले
[42:54]होते अगर हम खत्म हो जाने वाले होते अगर हम निशान मिट
[42:58]जाते तो हमें कर्बला में मिट जाना चाहिए था सजाने क्या किया
[43:06]मिटने नहीं दिया माम सजाद कारवान को आगे बढ़या खुदा का इरादा
[43:09]य था खुदा का इरादा य था खुदा का इरादा य है
[43:18]शेर सुन दुनिया ना रहेगी मगर इस्लाम रहेगा शीर बहल तेरा नाम
[43:25]रहेगा खुदा का इरादा य है दन तो रहेगा तयो तो रहेगी
[43:34]मुकाम तो रहेगी अब तो रहेगा बातिल की मुखालफत तो रहेगी अहम
[43:38]ये मैं कहां हूं मैं किस तरफ खड़ा हूं इमाम सज्जाद के
[43:47]दौर में होता किस तरफ खड़ा होता इमाम हुसैन के दौर में
[43:52]होता किस तरफ ड़ा होता इमाम बाकर के दौर में होता किस
[43:53]तरफ खड़ा होता आज इमाम जमान के दौर में किस तरफ खड़ा
[43:58]हूं अहम ये सब बाकी रहेगा मसला ये कि मैं दीनदार रहूं
[44:08]मेरी रूह अल्लाह के आगे सजदा रेज रहे ये अहम मसला है
[44:14]इमाम सज्जाद अल सलाम के कामों में हम क्या देखते हैं दुआ
[44:17]मुनाजात रूहानियत की बहाली दन की तरफ रबत दिलाना लोगों को कर्बला
[44:23]के वाक की तरफ बारबार मुत करना ताकि सद शदा सलातो सलाम
[44:29]के इस अजम शहादत का फलसफा समझ में आ सके और गुलामों
[44:35]को खरीदना इजत न को बहाल करना उनको दन सिखाना दन सिखाने
[44:42]के बाद दवाज कराना एक पूरा शिया नवादा तैयार करके माश में
[44:47]शिया नवादा तयार करन कर दिया इस्लाम नाम मोहम्मदी के मुबल को
[44:53]तैयार करके मशम सज्जाद ने छोड़ा के नतीजे में आज ये दन
[45:00]और इसकी हकीकत अलुला हमारे पास है दुआ करते परवरदिगार आलम से
[45:04]परवरदिगार मोहम्मद ले मोहम्मद हमला की सीरत को समझने की उस अमल
[45:14]करने की तौफीक इनायत फरमाए मकतब तयो को मुद मुसम फरमाए गुहाने
[45:17]कुफ निफा को मुर फरमाए मिलत इस्लामिया को लाय अर मोम विला
[45:23]जनारा फरमाए परवरदिगार अपने आखरी हुज्जत के जहूर में ताजल फरमा हमें
[45:31]उनके आवान अनसार में शामिल फरमा उनके कलब मुतहर को हमसे राजी
[45:34]फरमा मका रहबरी आला स नाई और मशा आला सतानी की हिफाजत
[45:42]फरमा जिब मुमत की तकात में इजाफा फरमा उसको बाज उनके बाजुओ
[45:49]को मजीद कुवत और ताकत और हौसला अता फरमा गुहाने कुफर निफा
[45:51]को मुर फरमा हम सबकी दुआओं को मुस्तजाब फरमा मुस्त फीन फलस्तीन
[45:55]यमनो लनो बहन की मदद नुसरत फरमा [संगीत] रना लामा [संगीत] [प्रशंसा]
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