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Fatimiya umeed e Tajeel e Zahoor Hujjat | H.I Syed Yawar Abbas
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في
محاضرات
Record date: 01 Dec 2024 - فاطمیہ امید تعجیل ظہور حجت AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]इमाम के जहूर में ताजल के लिए इमाम के रकाब में जिहाद
[0:19]और शहादत की तौफीक के स सूल के लिए इमाम के तमाम
[0:24]दुश्मनों की बिल खुसूस अमेरिका इसराइल की श्तो नाबू के लिए तमाम
[0:27]मुकान मुजाहिदीन की कामयाबी के लिए मिलकर बा आवाज बुलंद सलवाद बिल्ला
[0:40]मन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन अल्जी लकना बाद
[0:52]लदी जालना मिनल मुत कीना लाय मौलाना अर मोमिनीन [संगीत] ना मिनल
[1:03]बाना फल मलू अल हमदुलिल्ला जालना मिनल मुत नार ते सु सलातो
[1:15]सलाम अला शर अंबिया वल मुरसलीन हबीब ला आलमीन अल्ल सुमिया समा
[1:29]अहमद नाल कास रीनल मासूमीन अजनाला राला [हंसी] लल्ला हकीम फकीम बिल्ला
[2:06]मन शैतान रजी बिस्मिल्ला रहमान रहीम लकर सना मूसा बयाना का मन
[2:17]मानर र बयाला इन फ जालि कलाया शकर दरद प मोहम्मद आल
[2:30]मोहम्मद बुजुर्गा मोहतरम और बदरा अजीज इस वक्त की गुफ्तगू के लिए
[2:41]सूर इब्राहीम की पांचवी आयत को सरनाम कलाम करर दिया है इरशाद
[2:48]रब्बुल इज्जत हो रहा है वल कद अरसल नासा बयाना हमने यकीनन
[2:55]मूसा को अपनी आयात के साथ इर साल किया आयत में जनाब
[2:59]मूसा को हुक्म दे रहा है के मूसा अनज मका मन मानूर
[3:08]मूसा तुम अपनी कौम को जुल मात से निकालो नूर में दाखिल
[3:14]करो और यह जलमा से निकालना नूर में दाखिल करना यह नबूवत
[3:20]के फलसफे का असली और आखरी और निहाई हद है कि वह
[3:27]भटके हुओ को गुमराह को का तरीका और अंबिया की जिम्मेदारी क्या
[3:34]है कि वह गुमराह को जलमा से निकालते हैं और नूर में
[3:37]दाखिल करते हैं कुरान ने कई फलसफे कुरान ने बयान किए अंबिया
[3:43]के और नबुवत के जिस तरीके से सूर जुमा में परवरदिगार ने
[3:46]फरमाया के पैगंबर की जिम्मेदारियां क्या है पैगंबर की जिम्मेदारी यह है
[3:56]कि यही आयात कि वो आयात इलाही की तिलावत करते हैं व
[3:59]तकिया करते हैं वल किताब पहला मरहला कि वह तालीम किताब देते
[4:07]हैं और फिर इसी तरीके से तालीम हिकमत य यह पूरा निजाम
[4:12]तालीम और एजुकेशनल सिस्टम है जो यहां बयान हुआ है कि तिलावत
[4:18]से बात शुरू होती है और फिर तालीम हिकमत पर बात खत्म
[4:20]होती है जर बहुत मुफस्सल और बहुत ही दक बहस ली यहां
[4:25]सिर्फ इशारा कर रहा हूं कि अंबिया के अहदा में से एक
[4:30]हद यह भी है कि ला वत करना तकिया करना तालीम किताबो
[4:35]हिकमत लेकिन यह वह दरमियानी रास्ते हैं असली रास्ता क्या है वह
[4:40]यह है किनर जो खुद खुदा ने अपने लिए भी कहा है
[4:42]आयतल कुरसी में खुदा ने क्या कहा है कि अल्ला आमन मानर
[4:49]अल्लाह मोमिनीन का वली है करता क्या है कि मोमिनीन को निकालता
[4:57]है जलमा से दाखिल करता है नूर में और खुदा ने कुरसी
[5:00]में ता गूत और शैतान उनका और उनके मानने वालों का तरीका
[5:07]भी बयान किया है कि इसी अगला हिस्सा क्या है न कफर
[5:11]जिन्होंने कुफर किया लिया ता उनका वली अल्लाह नहीं है उनका अल्लाह
[5:21]सरपरस्त नहीं है बल्कि उनका सरपरस्त कौन है ताग ताग क्या करता
[5:27]है मनर ता क्या करता नूर में से निका जमत में दाखिल
[5:31]करता है बरक्स यानी हिदायत से निकाल के जलालत और गुमराही के
[5:37]तरफ लेकर जाता है ताग परवरदिगार ने साफ बयान किया है कि
[5:39]अल्लाह वली है मोमिनीन का और अल्लाह का काम क्या है कि
[5:44]वह जुमात से निकालता नूर में दाखिल करता है अब जुल्मत क्या
[5:48]है नूर क्या है कैसे निकलते हैं य अपनी जगह पूरी बहस
[5:50]है लेकिन ता गूत क्या करता बरक्स करता व नूर में से
[5:55]निकाल के दाखिल कर देता जुमात में ले जाता है तो यह
[5:59]य यह जो तरीका और यह जो मसला है यह जुल मात
[6:01]से निकलना और नूर में दाखिल होना यह एक मुहिम मसला है
[6:03]जिस पर कुरान ने बहस की बाकायदा गुमराही से निकलना हिदायत की
[6:10]तरफ आना और जाहिर है करता खुदा है असल में खुदा करता
[6:13]है लेकिन वहां आयतल कुरसी में खुदा ने अपनी तरफ निस्बत दी
[6:18]है लेकिन यहां जनाबे मूसा को हुकम दे रहा है कि मूसा
[6:22]तुम्हारी जिम्मेदारी क्या है नर कि तुम हमारे नुमाइंदे हो तुम हमारी
[6:25]जानिब से हो तुम्हारी जिम्मेदारी क्या है मूसा कि अपनी कौम को
[6:31]निकालो जुल्मत से और दाखिल करो नूर में जबकि इसी सूरे में
[6:38]सूर इब्राहीम अगर आप देखें तो पहली आयत इस इस सूर की
[6:40]क्या कह रही है व यह कह रही है कि हबीब हमने
[6:43]आपकी तरफ जिक्र को नाजिल किया यानी कुरान हमने आपकी तरफ जिक्र
[6:49]को नाजिल किया क्यों लेखना मनर पैगंबर सल्लल्लाह अ वाले हमने तो
[6:55]कुरान को नाजिल किया है यानी क्यों क्या कहना चाहता है कि
[7:01]किताब और मलिम किताब दोनों की जिम्मेदारी क्या है दोनों की जिम्मेदारी
[7:05]है जो फेले इलाही है जो असली अल्लाह का काम है के
[7:09]जुल्मत से निकालना नूर में दाखिल करना इन दोनों की जिम्मेदारी किताब
[7:13]और मलिम किताब मिलकर पूरा करते हैं केर हबीब तुम्हारी जिम्मेदारी यह
[7:21]है कि हमने तुम पर कुरान को नाजिल किया कि क्या करो
[7:23]कि तुम तमाम इंसानियत को निकालो जुल्मत से दाखिल करो नूर में
[7:30]यह पैगंबर की जिम्मेदारी है कुरान बयान कर रहा है कि तुम्हारी
[7:35]जिम्मेदारी क्या नूर अच्छा यहां में और जनाबे मूसा में एक बारीक
[7:40]सा फर्क है जनाबे मूसा को कहा है अन का जनाबे मूसा
[7:46]सला सलाम के सिलसिले से लफ क्या कुरान का अन का मूसा
[7:52]तुम्हारी जिम्मेदारी यह है कि तुम अपनी कौम को जुल्मत से निकाल
[7:58]के नूर में दाखिल करो पैगंबर के लिए नहीं कह रहा कुरान
[8:00]पैगंबर के लिए कह रहा है ले खजा अनास ऐ हबीब तुम्हारी
[8:06]जिम्मेदारी यह है कि सारी इंसानियत को किससे जुल्मत से निकालो और
[8:10]नूर में दाखिल करो सिर्फ यह दो लफ्ज अपनी कौम और सारी
[8:17]इंसानियत यह पैगंबर सल्लल्लाहु अल वाले और जनाबे मूसा की रिसालत और
[8:21]उनकी विलायत के दायरे को बता रही है कि जनाबे मूसा का
[8:27]दायरा विलायत चूंकि सिर्फ अपनी कौम तक है तो उनकी जिम्मेदारी भी
[8:29]ये है कि अपनी कौम को निकाले पैगंबर की जिम्मेदारी अपनी कौम
[8:33]नहीं है बल्कि पूरी इंसानियत है तो जितनी इंसानियत है कि उतने
[8:39]ही दायरे विलायत होगा उतने ही दायरे क्योंकि काम जुल्मत से निकालना
[8:42]नूर में दाखिल करना है और काम काम है फेल फेले इलाही
[8:47]है अब इसी आयत में इस मुकदमे के बाद देखिए यह काम
[8:51]है अब जनाब मूसा ने क्या करना जिम्मेदारी क्या है जनाब मूसा
[8:54]की जिम्मेदारी है कि जुल्मत से निकाले नूर में दाखिल करें कुरान
[8:59]ने अगला लफ्ज़ क्या कहा जनाबे जो आज किया हमारा मज कैसे
[9:02]करू या परवरदिगार कैसे करूं मूसा अगर पूछे सलाम उल्ला अगर पूछे
[9:10]कैसे होगा ये तो अगला लज क्या है पहला ल य मसा
[9:13]मसा तुम्हारी जिम्मेदारी हमने भेजा लना हमने तुम्हे भेजा इसलिए कि तुम
[9:21]अपनी कौम को जुमात से निकालो और नूर में दाखिल करो अगला
[9:26]लफ क्या र इस पर तवज्जो करनी है वकर अपनी कौम को
[9:30]याद दिलाओ यह भी अमर है यह भी हुक्म है यह भी
[9:34]ऑर्डर है मूसा वकर अपनी कौम के लोगों को याद दिलाओ किस
[9:40]चीज की अया मिला बकर बयाला मूसा तुम अपने लोगों को अया
[9:51]में इलाही की याद दिलाओ इसका क्या मतलब हुआ व जो जिम्मेदारी
[9:54]है वो क्या है जलमा से निकालना नूर में दाखिल करना यह
[10:00]होगा कैसे जनाबे मूसा के जरिए से यह काम होना कैसे है
[10:02]तो खुद परवरदिगार बयान कर रहा है कि जनाबे मूसा को कि
[10:06]तुम्हें करना कैसे कि तुम अपनी कौम को अगर चाहते हो कि
[10:10]हमारा हुक्म है कि उनको जुल्मत से निकालो नूर में दाखिल करो
[10:13]तो इसके लिए करना क्या पड़ेगा ऐ मूसा तुम्हें अया इलाही की
[10:17]याद दिलानी पड़ेगी अब देख रहे हैं यम उल्लाह का जो यम
[10:22]उल्ला का कमाल क्या है अल्लाह की किताब की जिम्मेदारी जुल्मत से
[10:27]निकालना नूर में दाखिल करना पैगंबरों की जिम्मेदारी जुल्मा से निकालना नूर
[10:33]में दाखिल करना इसका मतलब क्या है यम उल्लाह की जिम्मेदारी क्या
[10:38]है यम उल्ला का कमाल क्या है यम उल्ला के अंदर जो
[10:45]खुदा ने कुवत रखी है वो क्या है कि यम उल्ला वो
[10:48]दिन होता है कि जो क्या करता है कि जो जुल्मत से
[10:49]निकालता है नूर में दाखिल करता है अब यहां से बात शुरू
[10:56]होगी कि फिर यम उल्लाह किसे कहते हैं हर दिन अल्लाह का
[11:00]है कौन सा दिन अल्लाह का नहीं है हर दिन यम उल्ला
[11:04]है लेकिन वह कौन सा यम उल्ला है जिसको खुदा कह रहा
[11:06]है हर रोज की याद दिलाने की जिम्मेदारी कि दे रहा है
[11:10]खुदा जनाबे मूसा को नहीं कुछ खास दिन है जिनकी याद दिलाने
[11:12]के लिए जनाबे मूसा की जिम्मेदारी है कि व याद दिलाओ तो
[11:17]अगर यम उल्ला को आप देखें क्योंकि देखि अगर पूरी यम पर
[11:21]ही बात आए तो अच्छी खासी बात है जुम्मे को दिनों का
[11:23]सरदार हफ्ते का हफ्ते के दिनों का सरदार करार दिया गया है
[11:28]दिनों के ऐतबार से माहे मुबारक रमजान को महीनों का सरदार करार
[11:31]दिया गया है यह अपनी जगह इन दिनों में बरकात है याने
[11:36]जो रात आम रात में और शबे कद्र में फर्क है कि
[11:41]नहीं आम रात में और शबे नीम शाबान में फर्क है कि
[11:45]नहीं है वो फर्क कहां से ईजाद होता है भाई घड़ी के
[11:49]ऐतबार से तो वही वक्त है अगर आप साइंटिफिक देखें तो वही
[11:56]सारे रिएक्शन है रात है दिन है यह सारा सब सब वही
[11:57]वही है तो यह क्या वजह है कि एक रात जो है
[12:02]वह हजार महीनों से बेहतर हो जाए उसमें क्या खासियत पैदा हो
[12:07]गई है तो जाहिर है यह खुद एक पूरी बहस है कि
[12:11]परवरदिगार जो यम उल्लाह कहता है जारर यौम से मुराद अगर दिन
[12:13]और रात को इकट्ठा करें तब वो यम बनता है अरबी के
[12:16]ऐतबार से लफ्ज के ऐतबार से वरना रात के लिए लैल मौजूद
[12:21]है दिन के लिए नहारलागुन यम उल्ला कैसे बनता है यम उल्ला
[12:35]के लिए रिवायत के तबार से दो तीन मसाद है जिसमें हमारा
[12:37]मौजू क्या है यम उल्ला से रिवायत कहती है जब इमाम तशरीफ
[12:43]लाएंगे वह यम यम उल्ला है इमाम के जुहूर का दिन अया
[12:50]में इलाही में से एक है य इधर से यानी आखिरी सिरे
[12:51]पर अगर आप आते हैं तो यमला आखरी क्या है वो जब
[12:56]हजरत तशरीफ लाएंगे अब तमाम हजरत के आने से पहले तवज्जो फरमाइए
[13:02]कि हजरत के आने से पहले इसका मतलब क्या होगा अगर हजरत
[13:04]के आने का दिन यम उल्ला है तो हजरत के आने से
[13:08]पहले भी कुछ यम उल्ला होने चाहिए जिनका ताल्लुक होगा हजरत के
[13:16]जुहूर से जिनका ताल्लुक होगा हजरत के जुहूर से जो यम उल्ला
[13:18]है सबसे अजीम यम उल्ला है कि जिस दिन हजरत तशरीफ लाएंगे
[13:22]अब अगर आप एक एक मो गिनाए तो इतना वक्त ना मेरे
[13:27]पास है ना आपके पास है यो किसे कहते हैं क्यासे बनता
[13:32]है अल्लामा तबा तबाई इसको तहलील करते हैं रिवायत की रोशनी में
[13:34]एक दिन जो है व यम उल्ला में कैसे तब्दील होता वो
[13:39]यमला जिसकी याद दिलाने की जिम्मेदारी है किनकी अंबिया की य पहले
[13:45]इस ब्रैकेट को खोले और बंद करें क्या आप बताइए जो जिम्मेदारी
[13:48]मूसा अल सलातो सलाम की है वह पैगंबर की नहीं होगी आयाम
[13:53]इलाही की याद दिलाना हमारे नबी की जिम्मेदारी होगी कि नहीं होगी
[13:59]क्यों कैसे दलील क्या है इसकी बजायर तो नजर नहीं आ रहा
[14:04]बजहर तो जनाबे मूसा को हुकम दे रहा है खुदा के मूसा
[14:08]तुम अपने कौम को यायाम इलाही की याद दिलाओ तो बस अब
[14:10]पैगंबर की जिम्मेदारी कैसे बनेगी अगर यह आयत और यह हुकम फकत
[14:17]जनाबे मूसा से मख सूस हो तो इसका कुरान में होने का
[14:22]फायदा क्या है यह कुरान में क्यों है कि वो हुकम जो
[14:24]जनाबे मूसा से मखू था और नस्क हो गया है मसलन और
[14:28]आगे नहीं चलने वा दूसरी बात जो करामत है इसके अंदर अया
[14:34]में इलाही की याद दिलाने में जो फलसफा छुपा हुआ है वो
[14:40]वही फलसफा है जो सारे नबियों का फलसफा है यानी अया में
[14:42]इलाही की याद दिलाने से होता क्या है कि जो नबी का
[14:46]काम है वो होता है वो क्या काम है कि जुल्मत से
[14:49]निकलते हैं नूर में दाखिल होते हैं तो यह काम जनाबे मूसा
[14:50]से तो मख सूस नहीं है ये जनाबे पैगंबर तक भी आएगा
[14:54]पर इसका मतलब है दो बातों के साथ यह साबित होता है
[14:59]कि पैगंबर की की जिम्मेदारी भी क्या बनती है कि पैगंबर की
[15:01]जिम्मेदारी है कि अया इलाही की याद दिलाएं इस बात को अगर
[15:09]हम समझ लें और यह बात अगर पहुंच जाए कि अया में
[15:16]इलाही की याद दिलाना और अया में इलाही की याद मनाना पैगंबरों
[15:19]की जिम्मेदारी है और इसका कमाल यह है कि जब अया इलाही
[15:25]मनाए जाते हैं तो जुल मात से निकलते हैं नूर में दाखिल
[15:31]होते हैं तो तमाम वो आयात इलाही और तमाम व आयाम आजा
[15:32]जो हम मनाते हैं यह उसकी मोहकम तरीन दलील है औलिया इलाही
[15:38]की जो हम याद मनाते हैं उसकी दलील है कि औलिया इलाही
[15:42]की याद से क्या होता है कि जुल्मत से निकलते हैं नूर
[15:43]में दाखिल होते हैं आयाम अजाए शोहदा आयाम अजाए अहले बैत जितनी
[15:51]भी मनाते हैं खुसूस खुसूस खुसूस किसी भी यह जौकी बात है
[15:59]किसी भी आप याद के साथ लफ्ज अया इस्तेमाल करते किसी भी
[16:03]कभी मुहर्रम के साथ आपने आयाम हुसैनिया सुना है नहीं सुना किसी
[16:11]के साथ य लज इस्तेमाल नहीं हुआ है और यह इत्तफाक नहीं
[16:17]है कुरानी लज है असा ने उलमा ने इसको जोड़ा है किसी
[16:22]भी याद के साथ आयाम नहीं होता सिवाय फतिम के अया फतिम
[16:28]यानी अया इलाही क्यों अब जाहिर है उसमें अगर जाएंगे तोर बहुत
[16:33]बड़ी बहस है लेकिन यम यम उल्ला पहले यह देखेंगे यम यम
[16:37]उल्ला कैसे बनता है इसको बिल्कुल मुख्तसर करके अगर बयान करूं तो
[16:41]अल्लामा तबा तबाई फरमाते हैं कि हर वह दिन रिवायत की रोशनी
[16:45]में कि जिसमें रहमत खास से परवरदिगार और अजाबे खास से परवरदिगार
[16:53]नाजिल हुआ हो ना फकत रहमत ना फकत अजब इस फार्मूले के
[16:59]तबार से हम तबी करते चले जाएंगे दिनों को और वाकत को
[17:06]तहलील करते चले जाएंगे किसी भी वाक की तहलील में समझना होगा
[17:08]कि नहीं होगा कि रहमत का हिस्सा कौन सा है अजाब का
[17:13]हिस्सा कौन सा है और फिर रहमत खास से परवरदिगार और रहमत
[17:15]अजबे खास से परवरदिगार को देखना होगा बिल्कुल अगर इसको रिड्यूस करें
[17:22]और एक लज में कहे हमें नहीं मालूम है कुरान ने अया
[17:25]में इलाही को किस दिन को यम उल्ला कहा है कुरान ने
[17:30]लफ बयान किया बकिया तफसीर मासूमीन ने बयान की है कुरान ने
[17:36]लेकिन फकत कुरान ने अब बताइए जनाबे आदम से जब से यह
[17:38]दिन का सिलसिला शुरू हुआ है पै दर पै जनाबे आदम के
[17:42]जमाने में भी यम उल्ला मौजूद है जनाबे इब्राहिम के जमाने में
[17:46]भी यम उल्ला मौजूद है जनाबे ईसा जनाबे मसब के जमाने में
[17:49]ज जब अजाब आता है जब रहमत खास आती है हर जगह
[17:54]हत्ता खत्म मरतबक खत्म मरतबक की पूरी जिंदगी देख लीजिए बहुत सारे
[17:57]मवा ऐसे हैं जहां रहमत खास से परवरदिगार और अजाबे खास से
[18:03]परवरदिगार आपको मिल जाएगा लेकिन पूरी जिम्मेदारी से और कुरान की जिम्मेदारी
[18:06]से कह रहा हूं परवरदिगार ने जनाबे आदम से लेकर खात्मे के
[18:12]अलावा किसी दिन को भी अगर अल यम से ताबीर किया हो
[18:18]कहा है किसी दिन को अल यम वो कौन सा दिन है
[18:23]जाहिर है आपको पता है कि अल यम कौन सा दिन है
[18:27]अल यम ये जो गजीर के दिन को खुदा ने यम कहा
[18:31]इसलिए कहा कि तमाम अया में इलाही का सरताज है ये अल
[18:35]यम क्योंकि इसके गिर्द घूमेगा अब सारा का सारा सिलसिला इस अलि
[18:41]यम के गिर्द और इसमें दोनों चीजें मौजूद है जो मैंने अल्लामा
[18:47]का नकल कौल किया कि अल्लामा ने फरमाया कि रहमत खास से
[18:50]परवरदिगार का नाजिल होना और अजाबे खास से परवरदिगार का नाजिल होना
[18:53]अजाबे खास से परवरदिगार तो आपको याद होगा हारिस बिन नोमान फेरी
[18:59]तो याद है कि कैसा अजाब नाजिल हुआ था उसके ऊपर और
[19:02]रहमत खास तो वाज इससे बड़ी रहमत क्या होगी के रहमत आलमीन
[19:08]अपने नुमाइंदे का हाथ बुलंद करके कहेंगे मन मौलाली मौला इससे बड़ी
[19:13]रहमत क्या होगी पूरी बशत को जमानत किया है पूरे बशत की
[19:18]तस्मीन की है मैं शायद य पहले कह चुका हूं मकाम रहबरी
[19:23]का जुमला है व कहते गीर ना शियों से मख सूस है
[19:29]ना अहले सुन्नत से मूस है ब ब मोजम फरमाते हैं गदी
[19:31]बशरतपुर [प्रशंसा] कितनी बड़ी रहमत है अकमल तोलक दनक मती मैंने नेमत
[20:07]नाजिल नहीं की है मैंने नेमत को तमाम किया है ललाना खुदा
[20:12]कह रहा है कि मैं तुम्हारे इस्लाम से राजी हो गया इससे
[20:17]बड़ा कौन सा दिन हो सकता ला यह रहमत का मसला दूसरी
[20:19]जानिब क्या कहा खुदा ने अलम यार आज तक कुफर को उम्मीद
[20:27]थी आज तक कुफ्र इस उम्मीद में जी रहा था कि पैगंबर
[20:32]कुछ साल के बाद दुनिया से चले जाएंगे फिर हम जो चाहेंगे
[20:38]वह करेंगे पैगंबर ने अपने रब के हुकम से लान विलायत करके
[20:41]इनको मायूस कर दिया यह क्या व अजब खास से परवरदिगार है
[20:49]अलियो अमलक दनक रहमत खास से परवरदिगार और अलियो कफर यह क्या
[20:55]है अजाब खास परवरदिगार अब आप बताइए अब अब इसके बाद जो
[21:01]कुछ हुआ जाहिर है आपको हम मसाब के मरहले में नहीं हूं
[21:03]लेकिन जो कुछ हुआ इतने एहतमाम के साथ और इतने सब पैगंबर
[21:09]की पूरी मेहनतों को क्या किया उसके बाद अब यह जो अल
[21:16]यम था यह क्या आ गया यह मायूस हुए मायूस हुए इस
[21:20]तबार से मायूस हुए हैं कि इस लफ्ज को अगर यूं कहा
[21:24]जाए कि मायूस हो गया है कुफर के हमारा काम नहीं हो
[21:28]सकता लेकिन हम हक के राह में खड़े रहेंगे रुकावट बनकर हाथ
[21:31]पैर नहीं छोड़ेंगे रे जो कुछ भी हुआ आपके सामने जो कुछ
[21:36]भी हुआ आपके सामने इसलिए हुआ मायूस हो गए और उन्होंने जो
[21:39]कुछ भी किया लेकिन अब आप बताइए एक लाख के मजमे में
[21:43]बयान शुदा पैगाम एक लाख से ज्यादा के मजमे में जो बयान
[21:49]बयान हुआ है उसका क्या हाल हुआ कुछ ही दिनों में क्या
[21:55]हाल हुआ भाई 18 जलज में और पैगंबर की के दिन में
[22:01]कितने दिन है 28 सफर माने या 12 रबील अव्वल माने कितने
[22:07]दिन है इसके दरमियान में क्या हुआ उस पैगाम का यानी दिन
[22:11]को रात में तब्दील कर दिया रोशनी को तारीख में तब्दील कर
[22:17]दिया अब बताइए अब अगर यहां इस बड़े दिन के बाद तारीख
[22:24]जो फैलाई जा रही है अब इस तारीख को एक ऐसा नूर
[22:29]र देना है कि ये तारीख के अंदर से भी वो अलम
[22:33]छलके उस तारीख में भी वह अयम नजर आता रहे उस तारीख
[22:40]में वोह अल यम अपना नूर बरसाता रहे इस काम को करने
[22:45]वाली जात को कहते हैं फातिमा जहरा इस भयानक तरीन तारीख के
[22:52]अंदर भी एक जात उठी उसने कहा तुम मायूसी के बावजूद बशरी
[22:59]अत को नुकसान पहुंचाना चाहते हो मैं नहीं होने दूंगी यह काम
[23:04]मैं नहीं होने दूंगी अब वो जाहिर जब जनाबे जहरा अल सलातो
[23:10]सलाम मैदान में आई तो आपने क्या किया जनाबे पैगंबर ने मन
[23:16]कुंतो मौला कह के जैसे बशरी अत का मुस्तकबिल महफूज किया था
[23:19]अब इन्होंने जो तारीख फैलाई थी जनाबे सैयदा ने कहा के जो
[23:25]भी पाक तीनत होगा जो भी पाकीजा तीनत रखता होगा जिसकी फितरत
[23:28]महफूज होगी अगर हिदायत चाहेगा मैं उसके लिए शम हिदायत जला रही
[23:35]हूं आपको पता है ना जाहर य य यह मसाब से हट
[23:40]के इस जाविया से जरा सोचे इंसान गौर करे आपकी पूरा कयाम
[23:44]अपनी जगह है एक दो बातें मुझे कयाम के सिलसिले से कहनी
[23:49]है लेकिन इसको सुनिए आया यह जो वसीयत फरमा रही है मसाइल
[23:52]अपनी जगह है य जो वसीयत फरमा रही है कि मुझे गुस्ल
[23:58]दिया जाए रात में मुझे नूत किया जाए रात में मुझे दफन
[24:04]किया जाए रात में यह सब कहा नहीं कहा यह रात का
[24:04]फलसफा क्या है एक तो यह लैल वही लैल है यानी अली
[24:14]उन वली उल्लाह से अगर इंसानियत गाफिल हो जाए तो दिन नहीं
[24:17]है दिन नहीं है अगर अली लीला से इंसानियत गाफिल हो जाए
[24:24]कामल रात है यानी बीवी फरमा रही है कि जो तुमने भुलाया
[24:30]है अली ला इसका इसका मिस्दा क्या है गोया कि हम हम
[24:35]रात में जिंदगी गुजार रहे हैं य एक मरहला दूसरा मरहला क्या
[24:37]है दूसरा मरहला यह है कि बीबी लैल कह के कह रही
[24:42]है कि मैं चूंकि सिरला हूं सिरला है फातिमा मैं सिरला हूं
[24:45]और आपने बेशुमार वाकत सुने होंगे आपने बेशुमार इसकी दलीले आपके पास
[24:53]भी होंगी क्या कोई एक दफा जनाबे जहरा के मुसीबत और वाक
[24:57]की तरफ मुतजेंस एक दफा फकत हमारी जिम्मेदारी भी यही है कि
[25:01]ऐसा आदमी जो जनाबे फातिमा के दस्तरखान पर ना हो ऐसा इंसान
[25:06]जिसको पता ना हो कि अली वली उल्ला की हकीकत क्या है
[25:08]सिर्फ उसको एक दफा मुत वज्जे कर द कि रसूल की बेटी
[25:14]के साथ क्या हुआ हो नहीं सकता अगर उसके अंदर यह चीज
[25:17]बेदार हो जाए तो हो नहीं सकता कि जनाबे जहरा की मदद
[25:22]से अल्लाह की इनायत से ये इंसान हिदायत ना पाए ये क्यों
[25:27]है ये इसलिए है कि अगर अगर यह बिलेल ना हो तो
[25:30]यह तज सुस इजाद नहीं होगा फिर दुश्मन अपने तबार से जुल्म
[25:38]कर रहा है दुश्मन अपने तबार से अपना काम मुकम्मल काम करना
[25:41]चाह रहा है जुल्म के तबार से लेकिन उसी जुल्म के मैदान
[25:45]में जनाबे जहरा वह दलीले कायम करती जा रही है कि जो
[25:51]भी हिदायत का प्यासा होगा मैं उसकी प्यास बुझाऊ यानी इस तरीके
[25:54]से देखने की जरूरत है कि पूरा निजाम हिदायत में जनाबे जहरा
[25:59]ने क्या किया अब के बाद जो मसला है वो क्या है
[26:01]एक सवाल यह है कि जनाबे जहरा अल सलातो सलाम अमीर की
[26:05]मौजूदगी में कयाम क्यों कर रही है मौला कायनात की मौजूदगी में
[26:13]क्यों कयाम कर रही है तो आप बताइए यह फार्मूला है वो
[26:14]फार्मूला क्या है जरूरी नहीं है जनाबे अमीर क्या है मत बू
[26:20]जिनका इतबा किया जाए और जनाबे जहरा क्या है उस वक्त ताबे
[26:26]ताबे अमीर है ना और यह भी खूबसूरत बात है गौर करें
[26:28]आदमी और वाक अहले बैत की मफत के दरी खोले जनाबे जहरा
[26:32]और अमीर उल मोमिनीन हम कुफ हैं मानवी ऐतबार से हका के
[26:41]ऐतबार से खिलकर से दरजा के ऐतबार से सरे मुंह फर्क नहीं
[26:44]है सर मुंह फर्क नहीं है लेकिन जहां परवरदिगार ने इंसान कामिल
[26:52]की सूरत में व उनवान इमाम अमीरुल मोमिनीन को पेश किया है
[26:56]अगर फकत इसी दर्जे का का कोई इतबा करने वाला पेश ना
[27:02]करे तो इंसानियत हिदायत के लिए गुमराह हो जाए यानी इमाम भी
[27:07]अपने कमाल पे चाहिए और इमाम के पीछे चलने वाला भी अपने
[27:10]कमाल प चाहिए यानी जनाबे जहरा क्या बता रही है मैं अपनी
[27:15]तमाम उन सिफात में अली के साथ होते हुए भी इस वक्त
[27:20]चूंकि अली इमाम है मैं अली की मुती हूं मैं मुति अली
[27:24]हूं क्यों अली इस वक्त अमीर है अली इस वक्त इमाम है
[27:28]यह एक बात दूसरा मसला क्या दूसरा मसला यह है कि जरूरी
[27:30]नहीं है ताबे कौन है जो तबा करने वाला है इसी केस
[27:35]में क्योंकि इससे एक फायदा उठाना है यह ताबे कौन है जिसने
[27:39]इतबा करना है और वह मत बू कौन है जिसका इतबा होना
[27:40]है यानी अमीर मोमिनीन मत बू है जिनका इतबा होना है जनाब
[27:46]जहरा क्या ताबे है जरूरी नहीं है कि ताबे और मत बू
[27:49]की एक ही जिम्मेदारी हो क्योंकि हिकमत क्या है हिकमत यह है
[27:56]कि ता कयाम कयामत अलीन वली उल्ला को ले जाना ता कयामत
[27:59]वो रास्ता खोलना कि फिर उस जुहूर सुब जो यम उल्ला है
[28:05]वहां तक सारे इस सिलसिले को लेकर जाना इस सिलसिले को जनाबे
[28:08]जहरा अपनी जिम्मेदारी अदा करेंगी मौला कायनात अपनी जिम्मेदारी अदा करेंगे मौला
[28:12]कायनात अगर उस वक्त तलवार उठाए तो बचेगा इस्लाम पैगंबर ने आखिर
[28:19]वसीयत क्यों की अमीर मोमिनीन को कि सब्र करना इसलिए कि कि
[28:21]वह माहौल ही नहीं है तलवार उठाने का उस वक्त अगर तलवार
[28:26]उठाए तो नौ मौलूद इस्लाम वही खत्म हो जाए लेकिन अब इसका
[28:31]मतलब यह भी नहीं है कि विलायत का कोई दिफाई लेना चाहिए
[28:44]आज इस मुकदमे से फायदा क्या लेना चाहिए इसका मतलब यह है
[28:49]कि हो सकता है हमें सोचना चाहिए और है भी ऐसा ही
[28:52]हमें यह सोचना चाहिए हमारे इमाम की जिम्मेदारी क्या है इस वक्त
[28:56]जुहूर या गैब अब अभी अभी गै बत अल्लाह की जानिब से
[29:02]इमाम अल सलातो सलाम की जिम्मेदारी क्या है गैब तो अगर इमाम
[29:07]की जिम्मेदारी गैब है तो जरूरी नहीं है कि मामू की जिम्मेदारी
[29:12]भी सुकू हो जनाबे जहरा की सीरत हमें बता रही है कि
[29:14]इमाम अगर साक हो तो फिर मामू की जिम्मेदारी है कि उस
[29:19]इमाम के सुकू को खत्म करने के लिए यह मामू कयाम करे
[29:23]यह क्यों कह रहा हूं य इसलिए कह रहा हूं कि आजकल
[29:26]जो फैलाया जा रहा है ना बहुत सार शुभत में से शुब
[29:29]ये फैला रहे हैं कि जब इमाम आएंगे तब कयाम करेंगे अभी
[29:33]सिर्फ दुआ करो दुआ तो करो ही दुआ का कौन मुनकर है
[29:36]दुआ तो करनी करनी है लेकिन क्या ख्याल है खाली दुआ से
[29:41]मसला हल होने वाला है सिर्फ दुआ करें जुहूर के सिलसिले से
[29:45]सिर्फ दुआ करें तो एक सवाल खाली अपने उन दोस्तों की खिदमत
[29:50]में रख रहा हूं कि यह बताइए कि तमाम वोह आयात जो
[29:55]जिहाद की आयात है और जो अमर मारूफ मुनकर की आयात है
[29:57]कुरान की की आयात और रिवायत है जिहाद और अमर मारूफ न
[30:02]मुनकर यह मुतलू नही मुनकर यह क्या गबतला हो गया है एक
[30:13]बात दूसरे आपने सबने तो सुन रखा है ना कि क्या सुफियान
[30:19]खुरूज करेगा यह तो दायर बातिल का परचम है सुफियान खुरूज करेगा
[30:22]रिवायत में मौजूद है सुफियान के साथ कौन है मशहूर खुरासानी खुरूज
[30:29]करेगा उसके मुकाबले पर सुफियान प तो ये जो खुरासानी का जो
[30:36]हक का लश्कर है इसका जो खुरूज है यह सुकू है या
[30:43]कयाम है यह खुरूज खुरासानी जो सुफियान के मुकाबले पर होगा यह
[30:47]खुरूज है याकूत है वाज रिवायत के तबार से परचम हक को
[30:53]लेकर खुरासानी उठेगा तो यह जो उठेगा जिसको रिवायत कह रही है
[30:56]तो आप हमसे कैसे कह रहे हैं कि अभी सुकू करो इसका
[31:00]मतलब है कि फिर बात समझ नहीं पा रहे हैं आप इमाम
[31:03]के आज के जमाने में शुबह को बाकायदा सोशल मीडिया पे अच्छा
[31:07]खासा आ चुका है ये मसला कि इमाम के जुहूर से पहले
[31:11]कुछ नहीं करना इमाम के जुहूर से पहले सिर्फ सुकू इख्तियार करना
[31:13]मिसाले भी लाते हैं उसकी अपनी तौर पर लेकिन हमारी जिम्मेदारी बनती
[31:16]है कि हम जब तक इमाम अल सलातो वसलाम तशरीफ नहीं ला
[31:21]रहे जब भी और जब तशरीफ लाएंगे तब भी इंशा अल्लाह हमें
[31:28]कयाम करना है अब फतिम आखरी बात कि फतिम अगर आप देखें
[31:31]तो गुजर्ता चार छ सालों में कितनी तब्दीली आई है फातम में
[31:35]फातम के नकाद में कितनी तब्दीली आई है देख रहे हैं आप
[31:41]और हम अपनी आंख से अब पहली बात तो यह कि हमारा
[31:45]कोई इसमें खास दखल नहीं है ये अल्लाह का मंसूबा है अरबन
[31:48]की रौनक फातम की रौनक यह खुदा का मंसूबा है क्यों क्योंकि
[31:55]अब मामला बिल्कुल किनारे पर आखिर की तरफ जा रहा है यह
[32:01]एक मसला दूसरा मसला इन्हीं चार पांच सालों में इस्लाम के परचम
[32:05]को जो तश्य ने उठाया हुआ है शयत ने उठाया हुआ है
[32:11]इस्लाम के परचम को और सबको जमा कर रही है शयत जाहिर
[32:13]शयत के अंदर तासुक तो है नहीं जो भी हक की की
[32:17]हिमायत करे व आ जाए परचम इस्लाम के नीचे यही रविश और
[32:20]तरीका भी नजर आ रहा है इन्हीं चार पांच सालों में आप
[32:26]बताइए परचम इस्लाम ने पूरे आलम कुफ्र को जिज की कि नहीं
[32:29]किया दूसरे नंबर पर यही परचम इस्लाम पूरी दुनिया में फैल रहा
[32:35]है कि नहीं फैल रहा और यह परचम इस्लाम किसके पास है
[32:39]इसको किस तना जुर में देखेंगे इस नाजर में देखेंगे के एक
[32:42]बुजुर्ग का जुमला उनका कहना यह है के अब तक जनाबे जहरा
[32:49]मैदान में नहीं थी वह कहते हैं जन फातम का मतलब यह
[32:54]है कि जनाबे जहरा खुद मैदान में तशरीफ ला चुकी है और
[32:58]जाहिर है कयादत भी किसके हाथ में होगी फिर तमाम मामू मीन
[33:04]की कयादत कौन करेगा वही पहला कयाम करने वाली वही विलायत के
[33:08]सिलसिले से जिसने सबसे पहले कयाम किया अब वह मैदान में मौजूद
[33:13]तमाम मामू मीन की तमाम खादिम की तमाम नौकरों की कयादत कर
[33:18]रही है तो फिर कामयाबी नजर नहीं आएगी आपको जितनी कामयाबी इस
[33:22]वक्त नजर आ रही है बैनल अवामी जितनी कामयाब है प दर
[33:27]प कामयाबी यह अलग बात है कि कामयाब को कामयाबी देखने के
[33:30]लिए आपको तासु की ऐनक उतार नहीं पड़ेगी वरना आप उसी कामयाबी
[33:37]में खामी देख रहे होंगे अगर आप तासु की नक लगा ले
[33:38]जहालत की नक लगा ले गफलत की नक लगा ले तो कभी
[33:43]आपको सही तस्वीर नजर नहीं आएगी छोटी छोटी एक दो मिसाले दू
[33:48]आपको जो आज के जमाने की बात है आप अभी बिल्कुल लेटेस्ट
[33:51]इसी हफ्ते की जो बात है नेतनयाहू के खिलाफ वारंट जारी होना
[33:56]हालांकि धो वाज धोखा है बेवकूफ बनाने की कोशिश करते हैं लाक
[34:04]खुद बेवकूफ बनते हैं नेतनया के खिलाफ जो वारंट जारी हुए बजायर
[34:08]तौर पर मीडिया या प्रिंट मीडिया या सोशल मीडिया किसी स्टैंड पर
[34:13]ही तो कहा जा सकता है ना बाजार जाएगी इसीलिए कह रहा
[34:19]हूं यह नेतनया को डिस ओन करना कामयाबी है नाकामी अपने आदमी
[34:24]को डिसन करना कामयाबी होती है नाकामी होती है व वो वैशी
[34:30]वो जानवर वो दहशत गर्द जिसने इतना खून पिया है इतना काम
[34:33]दुश्मन के लिए किया उसको डिसन करें तो यह पता चल रहा
[34:38]है ना कि आप आप नाकाम हो रहे हैं यह इसी हफ्ते
[34:42]की जो बात है या ये सीस फायर का मसला जो है
[34:44]हिजबुल्लाह के साथ सीज फायर का जो मसला है सीज फायर करने
[34:48]वाला नाकाम होता है जो कहे के सीज फायर करो किसने किया
[34:52]है सीज फायर इसराइल ने सीज फायर किया बुल्ला ने सीज फायर
[34:55]किया है क्यों किया है सीज फायर आप तो क कि हम
[34:59]यूं कर देंगे व कर देंगे व कर देंगे क्यों किया है
[35:03]आपने सीज फायर हिजबुल्ला तो नहीं कह रही कि सीज फायर करो
[35:05]हिजबुल्ला तो वही है जो कहती है हर कदम आगे बढ़ो अब
[35:09]भी अब एक इसमें यहां एक शुबा सोशल मीडिया पर आया वो
[35:14]क्या किया है कि अब हम मास को इतना कुछ करने के
[35:18]बाद खुद सीज फायर कर लिया अपने आप को महफूज कर लिया
[35:22]एक शुबा इजाद कर रहे हैं ईजाद करने वाले के सीज फायर
[35:24]करके हिजबुल्लाह ने हम मास के साथ माज अल्लाह धोखा किया है
[35:29]अब आपको इस मसले में कौन जवाब देगा इस मसले में खुद
[35:31]हमास का मौक देखि ना वो क्या कह रही है हमास का
[35:35]मौक या हमा माज की कयादत का मौक यह है कि यह
[35:38]बेहतरीन काम है जो हिजबुल्ला ने किया है और कामला दुश्मन के
[35:43]नुकसान में है यह माज का मौक है और यह जो आपका
[35:46]जो धोखा फैला करने वालों का मौक है इसका क्या मतलब अभी
[35:50]य जो दाइश का सिलसिला शुरू किया यह कल परसों शुरू किया
[35:53]है लोग समझ रहे हैं कि फिर अभी कल एक साहब से
[35:56]बात हो रही थ समझ रहे थे बस अब ह जो है
[35:57]ना वो हड़प कर लिया है उन्होंने और अब आ रहे हैं
[36:01]वो जो है दमिश को अल्लाह अकबर आप बताइए जब पहले शाम
[36:08]का महास था तब तो हम जीरो से 100 पर गए थे
[36:12]गए थे नहीं गए थे हम पहले जब बो दाइश उन्होंने लच
[36:16]की थी हम जीरो से 100 तक ले जा चुके हैं तो
[36:19]अब तो हम 100 से आगे जाएंगे हमने फत करना है इस
[36:25]मैदान को कर चुके हैं हमारी जो कयादत है वो खिताबत नहीं
[36:28]करती अगर उसने कहा है किसली फिल कुस क्या अन करीब हम
[36:36]नमाज पढ़ेंगे कुस में तो पढ़ेंगे ये ये यह हो रहा है
[36:41]नजर आ रहा है आप फिर कहेगे नहीं हम पीछे जा रहे
[36:45]हैं नहीं आप पीछे आप पीछे जा रहे होंगे हक आगे जा
[36:48]रहा है छोटी छोटी छोटी छोटी जितनी भी क्योंकि इसी इसी मोड़
[36:52]पर इसी से धोखा दिया जाएगा आज के महास पर अगर आप
[36:57]और मैं नजर नहीं आएंगे तो कभी कहीं कामयाब नहीं होंगे हमारी
[37:00]जिम्मेदारी बनती है जिस तरीके से जाहिर जिस तरीके से हम मास
[37:04]का मसला हमारे लिए अहम है जिस तरीके से हिजबुल्लाह का मसला
[37:06]हमारे लिए अहम है जिस तरीके से हमारे लिए दाइश का मसला
[37:10]हमारे लिए अहम है सारे मसला है अहम है उससे ज्यादा हमारे
[37:16]दाखिली मसाइल हमारे लिए अहम है किसी भी तरीके से पारा च
[37:17]अनार का मसला हमारे लिए कमजोर नहीं है धोखा देते नहीं देते
[37:22]यहां पे आके कि पारा नार के लिए तो आप बोलते नहीं
[37:25]है हम मास के लिए और उसके लिए बोलते कहने वाले कहते
[37:26]नहीं कहते आपसे से सुना नहीं आपने सोशल मीडिया पे कि हमास
[37:31]के तो आप बोल लीजिए पहले मरहले पे तो हम तो हमास
[37:34]के लिए भी बोल रहे हैं लुबनान के लिए भी बोल रहे
[37:35]हैं सबके लिए तो आप बोल लीजिए पारा च अनार के लिए
[37:39]खुद नहीं बोलेंगे दूसरा जवाब इसका यही है कि आप बताइए तो
[37:44]फिर पारा च अनार के लिए बोल कौन रहा है अगर हम
[37:47]नहीं बोल रहे तो कौन बोल रहा है परा चनर के लिए
[37:50]खाली धोखा देते हैं आम आवाम को धोखा देते हैं धोखा में
[37:55]लाते हैं ताकि जाहिर है आप असली कैनवस से हट जाए और
[37:58]आपकी जो असली जिम्मेदारी है आप उ अदा ना कर पाए क्योंकि
[38:00]दुश्मन दाखिली धोखे के जरिए होता है बकाने के जरिए से होता
[38:05]है धोखा देता फिर इंसान को बहका के कहीं और लेकर जाता
[38:09]है तो आज के जमाने में फतिम बस मैंने तमाम किया फतिम
[38:12]ताजी जो मैंने उनवान दिया था कि फतिम ताजल जुहूर हुज्जत की
[38:19]उम्मीद है अल कुस के आजाद होने का मतलब क्या है दूसरा
[38:25]दूसरी आजादी किस तरफ है फिर अलक आजाद होगा तो दूसरा हद
[38:34]काबा है अलक इंशाल्लाह आजाद होगा तो दूसरा क्या आजाद होना है
[38:37]फिर आजाद होना नहीं होना काबा कैद है कि नहीं है काबे
[38:44]में इस्लाम है अल कुस आजाद होगा तो काबा आजाद होगा और
[38:45]अगर अलस आजाद ना कर सके तो इमाम नी अर फरमाते थे
[38:54]कि अलक का रास्ता कर्बला से गुजरता है कर्बला से हमें अलक
[38:57]जाना है अलक से हमें काबे की तरफ जाना है क्यों इसलिए
[39:02]कि जब काबा आजाद होगा तब तो आने वाला आके काबे की
[39:06]दीवार से टेक लगा केर कहेगा कि अना बला अब अगर कोई
[39:13]अलक को इमाम के जुहूर से हट के देखे तो उसको कुछ
[39:19]समझ में आएगा वह अगर यह सारी जो जंग है इसको अगर
[39:20]इमाम के जहूर से बाहर से देखे कुछ भी समझ में नहीं
[39:24]आएगा लेकिन अगर इस तरह से देखे कि यह परचम है जो
[39:29]कर्बला से चला है कुस तक फिर कुस से जाएगा काबे तक
[39:32]खुद बखुदा को समझ में आ रही है कैसा एतजाज कर रहे
[39:50]हैं गैर मुसलमान अमेरिका में ब्रितानिया में कितना एतजाज किया है किया
[39:55]है कि नहीं किया वहां के जवानों ने मुसलमान भी नहीं है
[40:01]अक्सिया उनकी ईसाई है इसीलिए इसीलिए इस इस माहौल को देख के
[40:04]हमारे एक दोस्त कह रहे थे खूब कह रहे थे आप महसूद
[40:07]होंगे उन्होंने कहा ये जो गैर मुसलमान खुसूस एक ईसाइयत का इतना
[40:10]बड़ा हिस्सा जो कयाम कर रहा है नौजवानों की सूरत में यह
[40:15]खुद नजर आ रहा है कि अब समझ में आता है कि
[40:18]अल्लाह ने जनाबे ईसा को क्यों बचा के रखा है ईसा के
[40:24]लोग बेदार हो रहे हैं जनाब ईसा अ सलातो सलाम का लश्कर
[40:29]बेदार हो रहा है कि नहीं हो रहा यह आके कहां मिलेगा
[40:35]फिर जाके दूसरे आप बताइए इस जमाने के अंदर इस वक्त सोशल
[40:37]मीडिया या इसके अलावा जहां जहां आप लोग जाते हैं ऑफिसेज दे
[40:41]आम क्या बात है कि अगर इस्लाम को बचा सकता है तो
[40:45]कौन अमेरिका को टफ टाइम दे सकता है अमेरिका को बर्बाद कर
[40:51]सकता है कौन हर एक जबान पर यह है कि नहीं है
[40:55]कि सिर्फ शिया ही है जो ये काम कर सकते हैं तो
[40:58]यह तो जनाब जहरा का लुफ है और उनकी कामयाबी है हर
[41:00]कामयाबी के पीछे जनाबे जहरा है यानी आज समझ में आता है
[41:06]कि वो जो तन्हा खड़ी हुई थी वो उस वक्त भी कामयाब
[41:09]थी आज भी कामयाब है ना तन्हा थी आज तन्हा नहीं है
[41:12]अल्हम्दुलिल्लाह आज पुश पनाई पर हमारी मौजूद है कयादत पर हमारी मौजूद
[41:18]है लेकर जा रही है मामले को आगे महसूस करे इंसान क्योंकि
[41:21]जितने मुकाम के शोहदा है जितने मुकाम के बड़े सितारे हैं या
[41:28]आज जो मौजूदा कयादत है इनका सबसे बड़ा जो वसीला है वो
[41:31]जनाबे जहरा है सुन रखा है ना आपने फातम जब आता है
[41:36]तो रहबर से किसी ने कहा कि तीन-तीन घंटे आप आके मजलिस
[41:38]में बैठते हैं जनाब जहरा की आ फरमाते हैं मुमल कत का
[41:45]एक साल का रिजक लेने आता हूं इस फतिम में और हकीकत
[41:49]है यह जितने महाज चल रहे हैं जहां जहां जो कुछ हो
[41:53]रहा है उसके पीछे जनाबे जहरा की मदद है तो कौन कामयाब
[41:57]जनाब जहरा या मुकाबिल कौन कामयाब हो गया वही कामयाब होना जिसने
[42:05]कामयाब होना है बनवाने मामून जनाब जहरा को देखें बनवाने ताबे जनाब
[42:11]जहरा को देखे ताकि हम अपने लिए नमूना अमल करार दे जनाब
[42:14]जहरा को यह फातम उम्मीद जुहूर है इसने सबको जोड़ना है इने
[42:23]सबको इकट्ठा करना है कितना काम हुआ है ना तफर बाजी में
[42:25]फिरका परस्ती में कितना काम हुआ है पूरी दुनिया के अंदर लेकिन
[42:30]आज एक पेज पर कर दिया नहीं कर दिया जिहाद ने सबको
[42:34]अहले सुन्नत के बड़े-बड़े उलमा कहते हुए नजर आ रहे हैं कि
[42:41]दाखिली और जुज खलाफा को एक तरफ करो अगर फत हासिल करनी
[42:46]है तो कहने वाले ने कहा नहीं कितने बड़े आदमी ने कराची
[42:48]के कितने बड़े जमात के व जो है अमीर दामाद है क्या
[42:52]है व उन्होंने आके कहा नहीं क कि मेरा इमाम खा मनाई
[42:56]है क्यों कह रहे हैं य बात इसीलिए कह रहे कि जो
[43:00]मैदान में होगा वही तो माना जाएगा पूरा आलम अले सुन्नत अपने
[43:07]मदारिस पर अपने सिस्टम पर अपनी हुकूम तों पर पूरा आलम अले
[43:10]सुन्नत तबरा कर रहा है कि नहीं कर रहा के मैदान में
[43:15]सिर्फ शिया है मैदान में सिर्फ शिया किसके शिया है फातिमा के
[43:20]शिया है उन्हीं की कुवत है जिसने हमें कयाम दिया हुआ है
[43:22]उन्ही की कुवत है जिसकी वजह से आगे बढ़ रहे हैं लेकिन
[43:26]हमें अपने इलाको और अपने तबार से जरा और मजीद तवज्जो की
[43:32]जरूरत है खतरा बहुत ज्यादा है हमें अपने तबार से लगता ऐसा
[43:39]खुदा ना करे खुदा ना करे हमारा खिता बहुत अजीब सूरत में
[43:41]है इस व तमाम मुकाम जारी है चारों तरफ मुकाम है चारों
[43:46]तरफ जो है ना कयाम है चारों तरफ काम क्या हाल है
[43:51]कितने से लोग है य यमन के होसी नाक में दम किया
[43:54]हुआ नहीं किया हुआ दुश्मन के पियों ने यमन में नाक में
[43:59]दम किया कि नहीं किया वहां बेहरेन में कयाम है वहां जो
[44:07]है ना चले जाए तो फिलिस्तीन तो सुपर है फिर उसके बाद
[44:09]लना आ जितना टरी है सब कयाम की हालत में हम अपनी
[44:13]दाखिली खलाफा की वजह से मुश्किल का शिकार है हमें अपने दिलों
[44:19]को बड़ा करना पड़ेगा हमें अपनी मफत को ज्यादा करना पड़ेगा हमें
[44:22]बहुत सारी चीजें भुलाकर इकट्ठा होना पड़ेगा छोटी सा से इलाकाई सतह
[44:30]से मुल्क की सता तक क्योंकि खतरा हमें य दरपेश है कि
[44:32]खुदा ना करे हम जुहूर में माइनस कर दिए जाए जो जो
[44:38]खामोश होगा जो समझ नहीं पा रहा होगा जो वो रह जाएगा
[44:43]पीछे क्योंकि जुहूर का परचम तो अब आगे बहुत आगे बढ़ चुका
[44:46]है हमें सोचने की जरूरत है कि अपनी जिम्मेदारी हम अपनी अदा
[44:48]कर पा रहे हैं कि नहीं कर पा रहे और कैसे करेंगे
[44:52]फिर उसको अदा उससे मिले बैठे अहल इस पर बात करें और
[44:53]इसको आगे बढ़ाए खुसूस फतिम का रिजक क्या है फातम का रिजक
[44:59]यही है कि अब जब आपको मजलिस मयस्सर हो जब आंसू निकले
[45:04]जब गिरिया हो बीवी से तव्स करें यही कि बीबी तेरे बेटे
[45:07]का जुहूर करीब है हमें हमारी जिम्मेदारी समझने की तौफीक नसीब हो
[45:13]जाए उस पर फिर अमल करने की तौफीक नसीब हो जाए कल
[45:16]जिस तरीके से आशूर में शबे आशूर क्या कह रही थी माएं
[45:21]क्या उन्हें परेशानी थी कल ऐसा ना हो कि जनाब जहरा के
[45:24]सामने शर्मिंदगी हो हमारे लिए भी तो ऐसा ही है कि खुदा
[45:29]ना करे कि हमारी आंख बंद हो और हम जनाबे जहरा के
[45:32]सामने शर्मिंदा हो कि इतने बेहतरीन मौके के इतने बेहतरीन हालात के
[45:37]होते हुए तुमने वह काम क्यों नहीं किया जो तुम कर सकते
[45:41]थे जो तुम्हारे हिस्से का काम था तुम क्यों आगे नहीं ले
[45:42]सक ले जा सके उस काम को क्यों हिमायत नहीं कर पाए
[45:45]उस तरीके की जिस तरह कर सकते थे इसके लिए तस्सल जरूरी
[45:49]है बड़े-बड़े शोहदा हमें बताते हैं कि जनाब जहरा तस्सल करो हज
[45:52]कासिम का जुमला है कि हमें याद नहीं किसी भी महाज पर
[45:56]हम कभी भी फसे हो और हमने जनाबे जहरा से तवस्सूल किया
[46:01]हो बीवी ने हमारी मदद ना की हो तो बीवी मख सूस
[46:05]तो नहीं है आज कासिम से जनाबे जहरा तो हम सबकी मां
[46:08]है बनवाने औलाद जनाबे जहरा से तलब करें बीवी की खिदमत में
[46:14]बाकायदा बैठ के तवस्सूल करें कि बीबी हम मदद करना चाहते हैं
[46:17]जनाबे साहिब जमान की हम पर लुत्फ करें हम पर रहम करें
[46:23]हमें इत्तेहाद की तौफीक दे हमें मारफ की तौफीक मिले हमें मव
[46:24]दत की तात की तौफीक मिले ताकि हम वो काम कर सके
[46:29]जो हमारे हिस्से का है और इन सारी चीजों में जनाबे जहरा
[46:34]सलाम उल्ला अलहा से करीब होने के लिए सबसे जो मुजरब तरीन
[46:37]तेज तरीन चीज क्या है आपके हमारे आंख से निकलने वाले आंसू
[46:42]यह तो पता है ना जितनी कदर जनाबे जहरा करती है हमारे
[46:48]आंसुओं की उतना तो कोई भी नहीं करता बचपन से जनाबे जहरा
[46:53]का रुमाल ही तो है कि जिसकी तरफ हमारी तवज्जो है बीवी
[46:56]के रुमाल के सिलसिले से तो हम जी रहे हैं उसी के
[47:01]तवस्सूल में है उनको वसीला बनाएंगे बीबी मैं आपके हुसैन को रोने
[47:20]वाला हूं जनाबे जहरा से तस्सल करें कि बीबी मैंने जनाबे अब्बास
[47:24]पर आंसू बहाए हैं आपके रूमाल में मेरे आंसू मौजू है बस
[47:29]यह मेरी मदद कीजिए कि मैं कयामत में शर्मिंदा ना हूं आपके
[47:32]सामने बस कुछ भी नहीं है आप आमादा है बस एक या
[47:38]दो जुमले कहूं पहले भी यहां कह चुका हूं फातम में और
[47:41]मुहर्रम में क्या फर्क है मालूम है मोहर्रम में रूमाल सैयदा लाती
[47:50]है लेके आती है देखती है कि मेरे हुसैन को कौन रो
[47:52]रहा है लेकिन फतिम में जनाबे जहरा रूमान नहीं लाती फातम में
[47:58]साहिब जमान रूमाल लाते हैं मौला साहिब जमान रूमाल लेके आए हैं
[48:05]हमारे पास देख रहे हैं कि कौन मेरी जद्दा को रो रहा
[48:10]है कौन मेरे जद्दा के जख्मी रुखसार को रो रहा है कौन
[48:16]मेरी जद्दा के जख्मी बाजू को रो रहा है अल्लाह अकबर या
[48:24]साहिब जमान बस एक दो मंजिल सुन लीजिए आप उस हाल में
[48:28]आ चुके हैं कि जनाबे जहरा से जुड़ चुके हैं आप और
[48:33]आप और हम सबसे ज्यादा मुश्किल क्या है यह तय करना कि
[48:36]फातम में आया सैयदा ज्यादा मजलूम है या अली इन दोनों में
[48:43]मजलूम कौन है नहीं मालूम दोनों में कौन मजलूम है लेकिन इतना
[48:48]जरूर पता है कि जब मौला कायनात से किसी ने पूछा ना
[48:50]कि मौला मर्द के लिए सबसे ज्यादा सख्त वक्त कौन सा होता
[48:55]है अली अल सलातो सलाम फरमाते हैं मर्द के लिए सबसे ज्यादा
[49:00]सख्त वक्त वो होता है कि जब उसकी नाममूरा जाए अल्लाह हू
[49:06]अकबर जनाबे सैयदा को मौला कायनात के सामने मारा गया है अल्लाह
[49:14]अकबर घर में दुश्मन दाखिल हुआ अली को घसीटते हुए ले जा
[49:17]रहे थे सैयदा ने अली का दामन पकड़ा दुश्मन कहता है सैयदा
[49:23]के सैयदा अली का दामन छोड़ो बीवी दामन नहीं छोड़ती है इसने
[49:27]अपने गुलाम से कहा सैयदा का हाथ अली के दामन से छुड़ाओ
[49:32]उसने तलवार का [प्रशंसा] नियामकालु [प्रशंसा] और सुनिए मुझे इजाजत दीजिए अली
[49:55]ने जहरा को अली के सामने जहरा को मारा गया कहने वाले
[49:59]ने कहा जब सैयदा अली को नहीं छोड़ रही थी ना कहता
[50:05]है कि मैंने जहरा को वो तमाचा मारा के जहरा जमीन पर
[50:12]गिरी जहरा का गोश वारा जमी प गिर गया अली को ले
[50:19]गए मौला के तलवार रख के कहते हैं अली बायत करो वरना
[50:25]हम सर जुदा कर देंगे जहरा ने खुद को वाला मस्जिद में
[50:31]पहुंचाया कहा अली को छोड़ो वरना मैं सर के बाल परेशान करूंगी
[50:34]अरे हाकिम ने अली को छोड़ा जहरा अपने इमामे वक्त को तलवार
[50:42]के नीचे से बचा के ले आई मैं कहूंगा बीबी आप अपने
[50:45]इमाम वक्त को तलवार के नीचे से बचा के ले आई लेकिन
[50:51]क्या करें उसका जो तिल्ला जैनबिया से देखती रह गई उसका इमाम
[51:00]खंजर से कर दिया गया अला नला जालिमीन सयान आसुओ को कबूल
[51:20]फरमा इमाम के जहूर में ताजल फरमा इमाम के रकाब में जिहाद
[51:27]और शहादत नसीब फरमा इमाम के तमाम दुश्मनों को बिलखु सूस अमरका
[51:31]इसराइल को नी नाबूत फरमा तमाम मुकामी मुजाहिद बसला लाबी हम मास
[51:38]तमाम मुजाहिदीन की मदद फरमा मकाम रहबरी का साया सर पर तवाम
[51:46]फरमा पाकिस्तान को जुल्म से निजात इनायत फरमा पनार के मोमिनीन की
[51:49]मदद फरमा रना तकल म यारान अपने मरहन कोम शोहदा को याद
[51:57]फरमाते हुए रला मनक अल फातिहा
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