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Israr e Mah e Shaban | H.I. Syed Zaigham Ali Rizvi
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Record date: 26 feb 2023
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:23]अल्हम्दुलिल्लाह [संगीत] अल्हम्दुलिल्लाह [संगीत] तो रूट और सलाम मोहम्मद रफी के जिसने
[1:21]हमें और आपको पुरानी करें आलम का दुख है सर्वाधिक ए आलम
[1:41]की टोपी है यह अय्याम अगर्चेम के एहतवान से अगर तक किया
[2:32]जाए तो मखालू पर खुदा है परवरदिगार आलम की हर वह परवरदिगार
[2:45]है उसने बता और हजरत कहते हैं आप कहते हैं इब्राहिम में
[3:52]खास ये हम दे रहा केवल अनाथ करिश्मा को यह वाक्य [संगीत]
[4:59]अल्लाह उनका वाली है कौन जो इनाम ले हैं और जिनको खुदा
[5:08]ने निकाल लिया और कहां ले गया नूर की तरफ ले गया
[5:34][संगीत] जिनके दाहोद बोलियां हैं यह क्या कर रहे हैं फिर दूर
[5:53]से निकालकर उलमात की तरफ ले जाते हैं तो अल्लाह रबल इज्जत
[5:57]नर्स की तरफ हिदायत कर रहा जुल्म से निकालकर नूर की तरफ
[6:03]ले जा रहा तो खुदा मौसम बिल्कुल शबाब है की सबक के
[6:09]तहत यह कम हो रहा तो एक सबक का तारीफ इसी सुरा
[6:15]की इस आयत में करवा दिया की हमने मौसी को भेजो भैया
[6:21]ना गलत सलाह मूसा भी आई ना हमने मौसम को अपनी निशानियां
[6:25]देकर बीच दिया ताकि अपने पाओ को जलमाद से निकाल कर नूर
[6:32]की तरफ ले जाएंगे परवरदिगार ए आलम में हिदायत हो जाएगी [संगीत]
[7:04]नतीजा वही पर ए पाया की हमने भेजो है रसगुल्ला को बइयानात
[7:10]के साथ किताब के साथ निजाम के साथ किस लिए ताकि लायकों
[7:17]बन्नायुर हो जाए हिदायत का के अटल के साथ कायम कर सके
[7:24]लेकिन लोग तैयार करो डीगरे आलम की चाहत है तो इस एतबार
[7:40]से अगर देखा जाए तो प्रवृत्ति का भेजना के बाद उनकी इलम
[7:45]बयान की के जब इसलिए निकाल लेंगे और क्या दिलाएंगे इन्हें मतलब
[7:54]अल्लाह के दिन ही नहीं याद दिलाएंगे अल्लाह के दिन से क्या
[8:00]मुराद है अल्लाह के तो तमाम दिन है अभी बयान किया तमाम
[8:04]तमाम मखलोक आपका खालिफ कौन अल्लाह है तो हर दिन का खालिक
[8:06]कौन है परवरदिगार है तो जहां परवरदिगार हर दिन का जो हर
[8:11]दिन खुदा का दिन हो अगर वो कहे की इन्हें अल्लाह के
[8:14]दिन याद करें तो इसका मतलब यही की कुछ खास बात की
[8:18]तरफ इशारा हो रहा है की जहां साड़ी अल्लाह की आयाम हैं
[8:23]उन अय्याम में अगर खास एक जगह पर हाथ रख के कहा
[8:28]जा रहा हूं की इन्हें वो वो दिन याद दिलाई हैं तो
[8:31]मुफसीर ही नहीं यहां पर तफसील की है की यहां पहिया से
[8:34]बारात बनी इजरायल पर की गई मदीना कहा गया की तुम उन्हें
[8:43]याद करो की अल्लाह ने जो तुम पर नहीं उसको याद करो
[8:51]जो हमने तुम्हें दी हैं तो कोई नेकमत को याद करके शुक्र
[8:58]है जिसने वो अनुमति है उसका शुक्र अदा किया जा ना करना
[9:01]ये ने खुद एक नेमत है और जब जब किसी नेमत को
[9:07]याद किया जाए तो यकीनन उसने मत के जारी से नेमत देने
[9:12]वाले तब की रसाई हो जाति है उसकी हो जाति है तो
[9:16]ये मकसद कर ए पाया की इनको वो दिन याद इसका मतलब
[9:21]क्या हुआ की जी दिन भी कोई नेमत मिल रही है वो
[9:24]दिन हर वो दिन जी दिन हम और आप टपक को रोड
[9:28]टाकुर करें और हमारे और आपका दर्ज बुलंद हो जाए खुदा से
[9:30]करीब हो जैन वो दिन आम दिन नहीं है या महुआ है
[9:34]की आज अल्लाह का दिन है आज खुदा का दिन तो बिल्कुल
[9:38]इस तरीके से यही निस्बत है तमाम के तमाम मखमलों का नाइट
[9:54]बराबर है इसलिए की सबका हालात परिवार है लेकिन इसका मतलब यह
[10:02]नहीं है की तमाम मखालू बंद बराबर हैं क्यों इसी के खालिक
[10:12]के मुकाबला पर बराबर है ईसरदा से की हम तमाम की तमाम
[10:17]मखालों का मखलूक हैं जैसे की वो सामने बर्फ है अगर उसे
[10:19]दर्द को देखें और फिर अपने आप पर नजर करें तो ये
[10:23]तरफ और आप बराबर हैं किस माना में वो खालिद जो इसको
[10:27]रिस्क दे रहा है वही मुझे भी दे रहा है हम दोनों
[10:32]उसकी परगाह में फकीर है तो कायनात में जहां बफेलो का मौजूद
[10:39]है वह तमाम लोग आप उसकी बारगाह में फकीर है इस मौजे
[10:41]में से बराबर है लेकिन इसका मतलब ये हर किस हर किस
[10:46]नहीं है की डार्क और आप बराबर है वो पत्थर को हासिल
[10:58]नहीं है अगर से मतलब दोनों हासिल नहीं है वो किसी भी
[11:09]मीफ्लो को हासिल नहीं है क्यों ये अशरफ फिल्म के तमाम इंसान
[11:25]कैसे बराबर हो सकते हैं यकीनन इंसानों में परवरदिगार ए आलम ने
[11:29]अंबियाल मुस्लाम को उसे फरमाया है ₹134 नदी और उम्मती क्या बराबर
[11:42]हो सकते हैं नहीं हो सकते तो कोई अंबिया इंसानों में यकीनन
[11:46]इंसान है लेकिन इन इंसानों से अफजल है तो अंबिया तमाम बराबर
[11:52]हो गए इनके मुकाबला में तिल कर रासउल्लाह दी है तो तमाम
[12:11]अंबिया बराबर नहीं है अंबिया अंबिया में फर्क है फजीलत है कोई
[12:15]फजीलत है कोई फजीलत रखना है लेकिन इन जैसी फजीलत नहीं रखना
[12:21]अच्छा तो वह जो अब्बा फजीलत हो गए हैं वह तमाम के
[12:26]तमाम दज में आके बराबर हो गए [संगीत] सिलसिला कहां से चला
[13:03]और कहां जाकर टूट गया वो जो तकलीफ है कायनात है वो
[13:08]तो अफजल अंबिया हैं वो तो सबसे अफजल है अब मुझे बताइए
[13:11]की इसका मतलब फजीलठो के उनवान से हमने देखा की तमाम मीफ्लो
[13:18]का आपस में फजीलत रख दी है ये मस्जिद अगर चाहे माटी
[13:21]लकड़ी शिक्षा पत्थर से मिलकर बनी है बराबर में किसी मन का
[13:29]घर होगा वो भी किसी चीज से मिलकर बना है लेकिन वो
[13:33]घर घर है यह कौन है खुदा है तो कोई निस्बत से
[13:38]भी बात बहुत आगे चली जाति है अगर घर को निस्बत खुदा
[13:42]से दे दो तो साहिरण तो वही लकड़ी और पत्थर है लेकिन
[13:44]निष्पद देखो कहां से कहां चली गई है यह खान है खुदा
[13:48]है वो किसी मन का घर इसके अलग हो रहा तो जब
[13:54]तक बात नहीं किया जाएगा नमाज नहीं हो शक्ति है इसका सोपी
[13:59]यह है की मस्जिद ए रही है मस्जिद के अंदर अगर मस्जिद
[14:06]का कोई हिस्सा नाजिश हो गया है जब तक पाक ना कीजिएगा
[14:08]नमाज जायज नहीं आएगा कोई मसाला नहीं उतनी जगह मिल जाए जहां
[14:18]नमाज पड़ी जा सके वहां नमाज पढ़ लेंगे बाद में साफ कर
[14:22]लेंगे बाद में बात कर लेंगे लेकिन उसे घर में और इस
[14:26]घर में फर्क है तो बस बिल्कुल इस तरीके से अब अगर
[14:31]मैं अय्याम की बात कर रहा हूं जहां मैं मीना की बात
[14:32]कर रहा हूं उन मीना में अगर रसूलल्लाह किसी महीने पर हाथ
[14:39]रखकर यह का दे की ये मेरा महीना है वह जो अफ्स
[14:45]मत लो कायनात है अगर किसी महीने पर हाथ रखकर कहानी के
[14:53]ये मेरा महीना है तो उसे महीने की फजीलत के लिए हमें
[14:58]किसी और रिवायत की जरूर नहीं है की अगर खाता [संगीत] हैं
[15:16]इसी को जन के लिए हमने शाबान में वह राज क्या है
[15:28]जिसकी वजह से शाबान शाबान है शाबान कर रहा था उनका नाम
[15:36]जिसे हम इस कहे और शाबान को मौसम्मा कहे तो इस मौसम
[15:45]में जो इसमें सबर है वो शाबान शाबान क्यों है आज फक्त
[15:48]हम इसके ऊपर दिक्कत करेंगे यकीनन अगर अय्याम का मुबारक होयम का
[15:59]ना होश होना ये खुद ही मौजो है की कौन सा दिन
[16:04]ना होश है और कौन सा दिन मुबारक है मैं बहुत मोहतर्ड
[16:09]और एहतियात से गुफ्तगू कर रहा हूं इसी तरीके से अगर किसी
[16:32]यो की बरकत की बात कर रहे हैं तो असलन दिन तो
[16:37]खुदा का देना है लेकिन उसमें ऐसा क्या हुआ है की मस्जिद
[16:39]दुरून अल नूर हो गया है यह देखने वाली बात है अगर
[16:47]तवज्जो करें हमने उनके ऊपर बहुत तेज और तुम आंधी चलाई बहुत
[17:07]तेज हवा चला दी हमने उनके ऊपर जो खुदा को ना पसंदीदा
[17:21]थे तो वो कामना पसंदीदा हो अगर इंसान को मूर्ख को अंजाम
[17:25]दे के जो खुदा को ना पसंदीदा है तुम्हारे लिए उसे दिन
[17:37]से पत्थर कोई दिन नहीं है जी दिन तुमने खुद को नाराज
[17:41]किया है और उसे दिन से बेहतर कोई दिन नहीं है जी
[17:45]दिन खुदा को खुश किया है इसीलिए मेरा मौला कहता है की
[17:51]मन के लिए तो हर दिन ईद का दिन है जी दिन
[17:54]उसने परवरदिगार की कोई मसीयत नहीं है अब इस जुमले को पलट
[18:02]दीजिए तो हर शख्स के लिए वह दिन है जी दिन उसने
[18:07]खुदा की मसीयत की है तवज्जो है तो इस एतबार से खुदा
[18:13]की मसीयत कर रहे हैं ना उसे खुदा की किताब कर रहे
[18:15]हैं निक है मैं भारत है तो बिल्कुल इस अंदाज से अगर
[18:20]मैं कहूं लल्लू फिलहाल दूसरी तरफ नजर आई यहां पर की बात
[18:46]आई और यहां पर खास ये जो मिला के हम उनको बहुत
[18:52]शहीद अजब में मुकाला करेगी क्यों इस कम की वजह से जो
[18:58]ये कर रहे हैं इसका मतलब ये है की अगर आम ने
[19:03]नाहोस कम किया है इसकी वजह से ये दिन नस कार का
[19:07]रहा अगर ये किताब में गुजराती तो हम इसको मुबारक कर देते
[19:14]हैं अब यहां देखना ये है की खुद शाबान की तकनीक शाबान
[19:19]के अंदर ऐसी कौन सी खुसूसियत है की जिसके अंदर परवरदिगार है
[19:25]आलम इस महीने को खास कर दे रहा और रसूल अल्लाह इसको
[19:32]अपना महीना का रहे हैं इसीलिए शाबान को हम शबनम करें उसकी
[19:41]तरफ जरा नजर फॉर्मेट हैं और फॉर्मेट हैं रज्जब का शराफ और
[19:57]फजीलत बाकी मीना पर ऐसी है जैसे दूसरे कमल पर कराने मस्जिद
[20:03]की फजीलत गजब की फजीलत बाकी मीना पर ऐसी है जैसे दूसरे
[20:08]कलाओं पर कल्ले खुदा की फजीलत है फिर फॉर्मेट हैं की शाबान
[20:18]की फजीलत ऐसी है जैसी तमाम अंबिया पर मेरी फजीलत जहां तमाम
[20:25]अंबिया पर जहां मेरी फजीलत है शाबान की फजीलत बिल्कुल सरदार से
[20:32]है और दूसरे मीना पर रमजान की फजीलत ऐसी है जैसे तमाम
[20:35]कायनात पर अल्लाह की फजीलत है तारा रमजान कोई संडास से अल्लाह
[20:42]का महीना कहा और शाबान को अपना महीना का रहे हैं नतीजा
[20:45]क्या निकाला कुछ तो शाबान में ऐसा है जो रसूल अल्लाह की
[20:52]बेशक रज्जब पे हुई है लेकिन शाबान में देखना होगा कुछ ऐसा
[20:57]हो रहा है की रसूल अल्लाह को वो महीना ही महबूब हो
[21:02]गया है [संगीत] अल्लाह हम्मा [संगीत] करते हैं मैंने 20 मिनट तो
[21:15]टीमेट में ले ली है शाबान को दशक अर्थशास्त्र [संगीत] फैलना और
[21:33]आम होना एक चीज होती है [संगीत] जी वजह से वह नाम
[22:20]तुमने उसे मुसलमान को दिया है वह वजह इस इटाला में झलकती
[22:26]हुई नजर आएगी वरना ऐसा मुमकिन नहीं है की जब लोहत में
[22:28]माना कुछ और किया जा रहा और इस्लामी बिल्कुल अलग माना लिया
[22:32]जा रहा हो वो नाम का माना कहानी ना कहानी झलकता हुआ
[22:34]नजर जरूर आएगा मसाला मैंने ताशाब से लिया गया लब्ज शाबान का
[22:41]माना क्या किया फैलना और क्या किया कहां सफर अलग हो जाना
[22:45]अलग का मतलब भी तो होता है ना की यहां था यहां
[22:48]से अलग हो गया वहां चला गया तो दूसरे मानव में फेल
[22:50]गया ना यहां से वहां चला गया है इधर से जूता हुआ
[22:53]है तो वहां गया है ना यहां से जाएगा तो वहां पर
[22:58]पहुंचेगी ना तो बिल्कुल उसे माना कोहाट कामना था अब ये लोहावट
[23:01]का माना लेकर इला में आते हैं तो फिर शाबान को शाबान
[23:06]क्यों कहा इसलिए की इस मा में खैर काजर फेल जाता है
[23:18]इसलिए इस महा को शाबान का रहे हैं शाबान में छुपेंगे पांच
[23:27]पुरुष पांच की तरफ नजर है वह गलत मौजूद है तो कुछ
[23:42]फल सफाई हो गई ये तीन ये पांच पुरुष क्या बयान कर
[23:51]रहे हैं शाबान सिंह यानी की गाया शराब की तरफ इशारा कर
[23:59]रहा हैं से शराब और बुलंदी की तरफ इशारा करता हुआ नजर
[24:09]ए रहा है की जहां पर शान शराफ है जहां पे और
[24:10]आज है अब आगे क्या बच्चा जिसको नेकी कहा था जो फेल
[24:23]रही थी और इसी के अंदर अलिफ उल्फत का माना देता है
[24:32]और आखिर का नूर नूर की जान हिदायत करता है शाबान शरीफ
[24:39]उल्फत नून नून की तरफ इशारा करता हुआ शाबान कंप्लीट पैकेज है
[24:48]जो अल्टीमेटली नूर की तरफ ले जाता है तुम्हारी हिदायत कर देता
[24:52]है इसलिए रसूल अल्लाह ने कहा अरे ये तो बिल्कुल वही कम
[24:57]कर रहा है जो अंबिया को उसे पर रस हालात करने का
[25:02]कम ही यही था की हरी जो हो मेरा नूर ताकि ले
[25:07]जाए ये जुलामा से निकालकर नूर की तरफ ये मेरा महीना है
[25:09]कम वही कर रहा है तुरंत पढ़िए महात्मा जो है मोहब्बत सांप
[25:31]से जिसको कहते हैं एक जगह हो जाए इस वजह से शाबान
[25:53]को शाबान का शाबान का मतलब वही सांप से लिया गया है
[26:04]और श्राप का मतलब पहाड़ में बना हुआ रास्ता हर जगह से
[26:09]नहीं चला जाता अक्सर जहां मरतबातेरा चढ़ाई जा रहा हो तो वहां
[26:15]एक खर बख़ूड एक रास्ता सा बन जाता है और उसे रास्ते
[26:17]पे चलते चलते आप पहाड़ पर पहुंच जाते हैं तो इस रास्ते
[26:22]को शाबान खाने की क्या वजह पहाड़ पर चलना और इस जमीन
[26:35]पर चलने में एक चीज जो है वो पहाड़ पर चलने को
[26:41]मुमताज कर देती है और वो क्या है वो ये है की
[26:45]जब हम पहाड़ पर चढ़ रहे होते हैं उसे रास्ते पर हर
[26:47]उठाता हुआ कम हमें बुलंदी पर ले जा रहा होता है वो
[26:56]हर उठाता हुआ कम है बुलंदी पर लेकर जा रहा होता है
[27:02]शाबान वो महीना है अगर मुताबिजे होकर हर सांस जो खींच रहे
[27:08]हो ये हर सांस तुम्हें बुलंदी की तरफ लेकर जा रही है
[27:11]यह दूसरा माना यहां पर मैंने आपका शाबान का किया दूसरी तरफ
[27:22]दूसरी तरफ का माना अगर करना ले लिया जाए तो इस अनुमान
[27:30]से हम लेंगे के इस महीने में यकीनन जहां बहुत सारे शहर
[27:33]जमा हो जाते हैं वहीं इंसान जो है वो बुरी चीजों से
[27:37]दूर हो जाता है तो ये दूर हो जाना मामला भी इसके
[27:42]अंदर ए गया ये भी शाबान के अंदर छुपा होगा एक राज
[27:45]हमें नजर आया [संगीत] कहां जो इस मा में रोज रखना है
[27:53]तो जो अमल भी करें रोज तो फक्र रसूल अल्लाह ने एक
[27:55]आहिल रिवायत में बयान कर दिया ना तो करना जो अच्छा अमल
[28:00]किया जा रहा है तो गाया वो शौक दर्शन दर्शन फालना फूलना
[28:07]लगता है इस वजह से भी महीने को शाबान का दिया यानी
[28:11]शार्प को भी कहते हैं तो शाबान मतलब शार्क दर्शन के जैसे
[28:22]शार्प एक और सांप निकाल आए और एक और सांप निकाल आया
[28:24]शुरू हो जाता है जब उसमें शाकें निकालना शुरू हो जाति हैं
[28:31]तो कोई शाबान शाह दर्शन बढ़ाने वाली गैरों बरकत को आप और
[28:38]मेरे लिए करता है [संगीत] ये तमाम माना आपके सामने रख दिए
[28:54]अब वो आखिरी मनी बयान कर रहा हूं जिसके पीछे एक बहुत
[28:56]बड़ी रिवायत है तकरीबन 2.5 से 3 शकों की जिसका खुलासा कर
[29:02]सकूंगा पुरी रिवायत नहीं पढ़ सकूंगा लेकिन वो अल जहां तक मुझे
[29:05]पूछे इस तले बिल की जो 33 है उसे तकी के नतीजा
[29:09]में ये जो अभी रिवायत कर रहा हूं ये असलम नतीजा कार
[29:15]पाती है वाक्य यत्न शाबान को शाबान खाने के लिए वो कौन
[29:20]से दो शहन हैं जिनके लिए पर्वत दिखा रहे हैं आलम का
[29:27]भेजो हुआ इस महीने को शाबान और शाबान के बाद अपने आप
[29:30]से मंसूर कर रहा है तो नतीजा समझ लीजिए मैंने तर्जुमा किया
[29:47]है अब सांप दर्शन करके समझिएगा यानी जब हम किसी चीज को
[29:52]समझते हैं मतलब कोई बच्चा केमिस्ट्री पढ़ना चाहता है तो हम कहते
[29:59]हैं केमिस्ट्री की एक ब्रांच है ऑर्गेनिक केमिस्ट्री और एक ब्रांच इन
[30:03]ऑर्गेनिक केमिस्ट्री तो ऑर्गेनिक केमिस्ट्री क्या है कहा यह फिजिक्स की केमिस्ट्री
[30:09]की वह ब्रांच है समझना के लिए आपने केमिस्ट्री की भी दो
[30:13]शादी केमिस्ट्री है वो वाली केमिस्ट्री हो इसको भी आपने साफ करके
[30:21]समझे समझ में ए रही है बात बिल्कुल इस तरीके से शाबान
[30:27]को भी हम शाबान का रहे हैं गाया कोई क्लासिफिकेशन होने जा
[30:32]रही है कुछ ब्रांचिंग होने जा रही है कौन किस ब्रांच का
[30:36]है कौन किस ब्रांच का है शाबान में फैसला हो जाएगा यह
[30:43]बड़ी खतरनाक बात है और कौन सा वो फैसला होने जा रहा
[30:47]है शाबान के अंदर कौन सी शक है जो यहां ए चुकी
[30:54]है मेरी निगाहें उसे देख नहीं रही है लेकिन रसूलल्लाह ने फरमाया
[30:58]पहले का चंद होता है शाबान का महीना तुम पर भारी धोता
[31:07]है परवरदिगार आलम जन्नत के दरवाजा को तुम पर खुला चुका है
[31:11]और जानते हैं जन्नत में एक तरफ है जिसका ओरिजिनल [संगीत] कहां
[31:30]है शजर तो जन्नत में है परवरदिगार का लुत्फ कर्म है की
[31:38]उसकी शाखाएं चलकर दिल्ली तक ए गई है आपके घरों में ए
[31:43]गई हैं आपके घर के दरवाजे पर कौन सी शाह मौजूद है
[31:49]ट्यूबा की साफ मौजूद है अपना रसूल अल्लाह फॉर्मेट हैं हदीस टॉकीज
[31:53]कर रहा हूं उसकी मुक्तसर कर रहा हूं समरी कर रहा हूं
[31:57]इस महीने में किया गया कोई भी खैर का अमल अगर तुमने
[32:03]अंजाम दिया तो बस ऐसा ही है की खुदा तौबा की साप
[32:09]को हुकुम दे रहा है की इस बंदे मन से लिपट जो
[32:13]तो यहां निक कम किया वहां तौबा की शौक से लिपट गया
[32:19]और तुम बाकी सब का मतलब यह है की साफ तो यहां
[32:24]है लेकिन इसकी जड़ जो है वो जन्नत में है तो यह
[32:29]लेकर कहां जाना है अगर किसी ने अपने हमसे को खुश किया
[32:36]उसके लिए यह बेन से तस्कीन कार पाया तो परवरदिगार फिर तू
[32:44]पैसे रहेगा इसकी शेख से रहेगा की इस मन से लिपट जो
[32:48]दो या एक शख्स नहीं दो श्राप नहीं तुम नेकियां बढ़ते रहो
[32:55]वो शेख है बढ़ता रहेगा और आप जानते हैं ना जितनी शाकें
[33:03]उतनी ही मजबूती तो गाया जितनी नेकियां करें उतनी ही मजबूती है
[33:07]ये तो एक शेख हो गई शाबान में वो दूसरी शर्ट कौन
[33:12]सी ए रही है वह खतरनाक शार्क है अगर जो वो भी
[33:15]यहां ए चुकी है बहुत ताबाज घबरा तो नहीं रहे हैं ना
[33:17]परेशान तो स्केरी तो नहीं है की भैया हमें तो नजर नहीं
[33:22]ए रही है ये कौन सी है तो एक श्राप तो कौन
[33:26]सी आप दो बाकी दूसरी शर्ट पे करीब नहीं है क्योंकि खुदा
[33:31]आते रहे हैं ना अगर जन्नत से निकालकर सांप यहां ए गई
[33:38]है उनकी शजर की शर्ट है जब उन की शेख क्या कर
[34:04]रही है की किसी ने अगर यहां पर बुराई की तो हर
[34:09]बुराई के नतीजा में जख्मो की शाह से अपने गहरी में ले
[34:13]लगी और इस अंदाज से जब जपों की शौक इसे अपने लपेटे
[34:17]में ले लगी तो जानते हैं ना की जब ओम का ओरिजन
[34:23]क्या है जहन्नम कहां लेकर जाएगा इधर जहन्नम तक ले जान का
[34:28]यहां से जन्नत का रास्ता इस कादर आसन हो गया है की
[34:33]किसी ट्रांसपोर्टेशन के प्रॉब्लम में फंसे की तुम्हें जरूर नहीं है शहाब
[34:37]खुद आई हुई है और यहां से तुमने जन्नत का सफर ते
[34:42]कर लेना है लेकिन जरा ख्याल रखना इसी के बराबर में सबको
[34:50]उनकी शादी है इधर झूठ बोला उधर से तुमने इसका मतलब ये
[35:02]हुआ नतीजा क्या निकाला नतीजा के निकाला जो अपना कम कर रही
[35:13]है एक शर्ट वो है जो जन्नत से जिसका ओरिजिनल है एक
[35:19]शर्ट वो है की जिसका अल जो है वो जहन्नुम में है
[35:25]ये दोनों शेख है मकाउद को अपनी लपेट में यूं लेती जा
[35:27]रही है की जन्नती अलग हो रहे हैं दो जख्मी अलग हो
[35:34]रहे हैं गाया क्लासिफिकेशन हो रही है शार्प दर्शन तो शाबान में
[35:39]वो जो जुल्मत से निकालकर नूर की तरफ जा रहे इन्हें कौन
[35:46]सी शाकें हैं जो जकड़ रही हैं तू बाकी सखे हैं और
[35:52]वो जो जलमार्ड में चले जा रहे हैं धसते चले जा रहे
[35:58]हैं वो जख्म की शक है की जो इन तक ए चुकी
[36:01]है अजीज और ये कहां लेकर जाएगी यह जहन्नुम में लेकर चली
[36:03]जाएगी बस ऐसी सोच यह परवरदिगार ए आलम ने इस माहे का
[36:09]ये शाबान में ऐसी बरकते राखी हैं निस्बतों के एतबार से की
[36:16]तुम अपने जहां को खुदा से जुड़ा करना चाहे भी तो नहीं
[36:21]कर सकोगे वो इस अंदाज से बहुत तबज्जो रहे तमाम अंबिया की
[36:25]मेहनतों को महसूस किया है रसूल अल्लाह की रिसालत है रसूल अल्लाह
[36:30]फातिमा नबी की है रसूल अल्लाह तमाम अंबिया के इस अंदाज से
[36:38]वारिस का रहे इस अंदाज से जारी एतबार से की तमाम अंबिया
[36:44]ने तौहीन का पैगाम दिया है तमाम अंबिया ने एक दिन दिया
[36:47]है रसूल अल्लाह खातिम है तमाम अंबिया की मेहनतों को नापाक महफूज
[36:55]कर रहे हैं रहती दुनिया तक के लिए वह कमाने दे रहे
[37:00]हैं जो कभी खत्म नहीं होंगे जो शरीयत अल्लाह जी शरीयत को
[37:09]दे रहे हैं वह मातृत नहीं होगी कायम रहने वाली शरीयत होगी
[37:12]यह रसूल अल्लाह की नबूवत का हादसा है यह नबूवत की खुसी
[37:18]आई है तो बस एतबार से अगर रसूलल्लाह महफूज कर रहे हैं
[37:26]तमाम अंबिया की मेहनतों को अब मुझे बदनाम की रिसालत को महसूस
[37:32]कौन कर रहा है की अगर जो दिन की चादर ओड कर
[37:41]देता कोई कब तक फ्री कर्बला में हक्का हक बातें का बातें
[37:46]हो गई कर्बला गोयल रसूलल्लाह की रिसालत करती हुई नजर आएगी आज
[37:55]अभी बहुत मोहताज गुफ्तगू कर रहा हूं हम बहुत ही अल्फाज को
[38:01]चुनाव करके बहुत साड़ी बातें कर लेते हैं की 16 ने क्या
[38:06]किया फैला ने क्या किया कौन किस इमाम को किसने शाहिद कर
[38:13]दिया बहुत से कातिल जो है वो चुप जाते हैं मतलब अली
[38:15]को किसने शाहिद कर दिया इतने मुलजिम खान जी ने मार दिया
[38:19]समझ में ए रही है सामने थी कातिल कौन समझ में ए
[38:36]रहा है आगे चल रही है बात होते-होते बात कर्बला तक ए
[38:42]गई कर्बला में आने के बाद अब कोई किसी कातिल के पीछे
[38:46]कोई कातिल चुप नहीं सकेगा दुनिया जानती है की यह कम किसने
[38:53]किया है क्यों किया है टक्कर तुझ कंसल इबाद हो रहा है
[38:55]नच करके फेक दिया अली की बेटी ने यजीडियत के चेहरे से
[39:02]निकाह को लॉक का फेक दिया बस अजीज अब अगर ये इस
[39:07]तरीके से इन अपराध के हाथों यह कम होना कार पाया है
[39:13]तो अब शाबान की निस्बतें इन जातो मुकद्दस के निस्बत से देखिए
[39:17]की समाज का चंद नामदार होता है और आवोशाय इस्मत में जैनब
[39:23]को भारत जलवा अफरोज हो रही है शाबान शप दर्शन अगर है
[39:29]तो पहले ही शाबान को कौन ए रहा है जैनब इत्यादि ए
[39:34]रही है और जब तीसरी शरब में कौन ए गया तीसरी शाबान
[39:36]में वही तीसरी इमाम ए गए कौन मौला हुसैन अब्बास ए रहे
[39:46]तरतीब 15वीं शाबान को कौन ए रहा धरती समझ में ए रही
[40:01]है समझिए काश जहां मेरी रू खड़ी है वहां पर पहुंचती है
[40:04]उधर देखिए इधर खड़ी है बीबी जाए ना उधर खड़े हैं अब्दुल
[40:09]फजल अब्बास दरमियां में रख रहे हैं सैयद शाहदा को गाया साईदश
[40:13]होता की तहरी को एक तरफ से जैनब महफूज कर रही तो
[40:19]दूसरी तरफ से अब्दुल फजल कर्बला के मैदान में देखना हो अब्दुल
[40:27]फजल अब्बास नजर ए रहे हैं लेकिन अगर कर्बला के मैदान में
[40:30]ही सब कुछ खत्म हो जाता अगर जैनब एक कोबरा को एक
[40:36]तरफ करके कर्बला को देखा जाता कुछ पता नहीं चला जंगल में
[40:40]क्या हो गया है कर्बला से निकाल के कूफा कूफा से निकाल
[40:48]के शाम और शाम से निकालकर आम कर कौन है [संगीत] चाचा
[41:09]को कौन ए रहा अब्दुल फजल ए रहे और यह जो तहरीख
[41:14]है चलती हुई बात समझ में यानी की कर्बला को आम कर
[41:17]रही हैं कर्बला को आम करते हुए नजर ए रहे हैं इन
[41:22]दोनों हस्तियां और आपके इमामे जमा के दरमियां में किसको रखा है
[41:25]अली आईबीएम हुसैन को रखकर अली गिव एन हाउसिंग को क्यों रखा
[41:31]देखिए प्रदीप क्या बता रही है यानी उन्होंने इस कर्बला की तहरी
[41:34]को इस कर्बला की तहरी को गिरिया के जारी से जिंदगी देने
[41:41]के बाद यानी गिरिया की तहरी को इस कर्बला की तहरीर में
[41:45]मिलने के बाद कहां जाकर इसे मिलाया 61 हिजरी से ये तहरीक
[41:53]चलती चलतींहूर इमामे जमा तक ए जाए यानी इमामे जुबान कौन बस
[41:59]कर्बला के मुंतके है ये हजरत कौन ये कर्बला को बर्प करने
[42:01]वाले हैं यह कर्बला का इंतकाल लेने वाला है दोनों हस्तियां को
[42:07]शाबान ए मुअज्जम के अंदर ही कर दिया की निस्बतें है जो
[42:13]मिल गई हैं और यकीनन ये जो तहरीर है कर्बला की जहां
[42:19]पर वह मेंबर मदीना के मेंबर पर खुत्बा देना और है मस्जिद
[42:24]के मेंबर पर खुत्बा देना और है और सी के मेंबर पर
[42:28]खुत्बा देना और है वो कुछ और नहीं का रहा का रहा
[42:38]है अल्हम्दुलिल्लाह उसे किताब की की जिसने हम हैं हम हैं उसकी
[42:48]अल्हम्दुलिल्लाह जी हम थे उसे परवरदिगार की जिसने अपने बंदे पर किताब
[42:57]को उतारा और उसमें उसके लिए किसी कई को ना रखा गया
[43:07]है मकव रसूलल्लाह यानी जहां रसूलल्लाह की रिसालत महफूज हो रही है
[43:17]जहां खुदा का कलाम महफूज हो रहा है जहां रसूलल्लाह की मेहनत
[43:20]महफूज हो रही है किसके जारी से हुसैन के जारी से इसीलिए
[43:26]कहा हुसैन निस्बतों का महीना है इन निस्बतों पर नजर करने के
[43:46]बाद इंसान अपने उसे मकाम पर पहुंच सकता है जहां परवरदिगार ए
[43:53]आलम इसे देखना चाहता है बस अजीज में इसीलिए इस माहे मुबारक
[43:57]के शाबान में खास अमल जो बयान किया गया वो ये बयान
[44:03]किया गया की रसूल अल्लाह ने दुआ फरमाने वाले मामला पर कुछ
[44:11]और करनी थी लेकिन नर्मदा हमें रज्जब और शाबान में बरकतें इनायत
[44:27]फार्मा और हमें रमजान तक पहुंच दें इसका मतलब ये हुआ की
[44:33]शाबान और रज्जब का कम क्या है इसमें हमारे और आपके सामने
[44:39]हाल खास बरकते हनी है जिन बरकतों के सपा हम रमजान तक
[44:42]पहुंच सकते हैं रमजान तक पहुंचकर क्या करना है रमजान में आने
[44:48]वाली है वो एक शब्द जिसके लिए अल्लाह ने आपको और हमें
[44:51]तैयार किया है वो सब कौन सी व है वो सब है
[44:55]जो कई शक है वो सब है की जो की हजार मीना
[45:01]से बेहतर शब्द है यह नहीं का रहे की तराजू के एक
[45:06]पल्ली में तुम हजार महीने रख दो जिसमें शब कादर ना हो
[45:12]और तराजू के दूसरे पल्ली में तुम शब कादर को रख दो
[45:18]तो यह पल्ली बराबर हो जाएंगे नहीं जब का दिया के खैरूम
[45:21]मीन अल्पेश शाह तो इसका मतलब ही यही है की ये शब्द
[45:26]इन हजार महीने से भी बेहतर है तुम हजार महीने एक तरफ
[45:32]रखो दूसरी तरफ महीना नहीं फक्त एक रात रख दो जिसे लैलातुल
[45:35]कादर का है ये इन सबसे बेहतर हो जाति है क्यों वजह
[45:40]क्या है वजह ये है की हजार महीने जिसमें शब कादर नहीं
[45:45]है अगर तुम हजार महीने जिंदा र कर परवरदिगार ए आलम की
[45:49]बंदगी कर रहे हो और उसे बंदगी करते-करते खुदा का कर्क ले
[45:55]रहे हो यकीन जानो हजार महीने में जितनी बंदगी करके पूर्व लिया
[45:59]जा सकता है हम तुम्हें फक्त एक रात ऐसी दे रहे हैं
[46:04]अगर इस एक रात को पहचान लिया उतना सफर तुम इसे एक
[46:09]रात में अंजाम दे सकते हो इसीलिए कई रूमिनल पेशहर कार का
[46:15]रही ले सफर को करने के लिए तुम्हारे पास सिर्फ का होना
[46:18]बहुत जरूरी है इसलिए बहुत जरूरी है यह क्या जुमला मैंने का
[46:28]दिया और बच्चे तो बिल्कुल परेशान हो जाएंगे सर पर मजरूफ में
[46:30]मुताबिखत बहुत जरूरी है हैं इसको कैसे समझे समझना के लिए बड़ी
[46:35]आसन बात है क्या नाम है आपका बेटा राजा राजा अगर आपको
[46:44]चाय पीनी हो तो चाय लेने से पहले सबसे पहले क्या लेंगे
[46:47]हाथ में कप लेंगे प्लेट तो नहीं लेंगे क्यों चाय कप में
[46:56]ए शक्ति है अच्छा और अगर इस के बराबर में बिरयानी भी
[47:01]मिल रही हो वो भी देनी हो तो वह कप में ले
[47:04]लेंगे जैसा मजलूरू है सिर्फ उससे मुताबिखत रखना हुआ होना चाहिए तो
[47:29]मुझे बताओ शाबान और रमजान में तैयारी हो रही है किसकी कहा
[47:37]वह सब आने वाली है सभ्यताड़ मशरूफ क्या है तो बताओ ज़र्फ़
[47:40]तैयार है या नहीं है और उसे मुताबिखत रखना हुआ होना चाहिए
[47:49]अगर मजलिस नहीं होगा तो जरूर नहीं ऐसा लगेगा वो कई रूम
[47:52]में अल्फी शहर है वो इस कादर बुलंद है वो इस कादर
[47:57]नूरानी शब्द है की अगर सिर्फ नूरानी होगा तो उसकी नूरानियत को
[48:03]जाप कर सकोगे तो मजलिस तो बाद में मिलेगा पहले सिर्फ तुम
[48:07]वादा करो रज्जब और शाबान में हो रहा है इसलिए रज्जब बी
[48:13]बोन का महीना है शाबान पानी देने का महीना है और रमजान
[48:20]फसल काटने का महीना है बॉय गया है उसको हम पानी दे
[48:29]रहे हैं ताकि हम रमजान में इसकी फसल का सकें अजीज की
[48:34]जो पानी दे रहे हैं ना ये जो बी बॉय है ना
[48:34]अगर चाहे रज्जब तो गुर्जर गया है लेकिन बहरहाल परवरदिगार की शान
[48:39]ए करीबी है भैया के आखिरी आखिरी वक्त में भी अगर कुछ
[48:43]बी दाल दिया जाए उसकी ईशा ने गरीबी है की वो यकीनन
[48:44]इसमें से फसल युगा देगा हम तो यही कर सकते हैं परवरदीगेयर
[48:50]आलम डेन को सकता करने वाला है तो बस इस एतबार से
[48:55]हम और आप इस महीने में यकीनन जब पानी दे रहे होते
[48:57]हैं तो जानते हैं ना जमीन को आमादा करने के लिए फर्टिलाइजर
[49:01]फर्टिलाइजर डालना पड़ता है खाद डालनी पड़ती है कौन सी खाद है
[49:07]जो डालोगे ताकि फसल बहुत अच्छी निकले बहुत जरूरी है इसीलिए आज
[49:19]से यह भतीजा बना लो की इस महीने में हर दिन में
[49:25]कमस कम 70 मर्तबा अस्त फिरूंगा इस्तिफार करता हूं परवरदिगार ए आलम
[49:36]की बारगाह में और उससे तौबा का तलबगार हूं दूसरा कम ये
[49:39]करना है की सदका देना है क्योंकि सदका जो इस महीने में
[49:44]दिया जाता है खास रसूल अल्लाह ने फरमाया जी मुकाम पे फार्मा
[49:46]रहे थे वहां पर ओहद का पहाड़ सामने ही था कहा इस
[49:50]महीने में अगर तुम एक दिरहम सदका देते हो तो खुदा की
[49:55]परवरिश ऐसे करता है जैसे तुम ऊंट की परवरिश करते हो जैसे
[49:58]ऊंट का बच्चा होता है तुम उसकी फरवरिश करके उसे वोट बना
[50:04]देते हो खुदा उसे एक दिरहम की परवरिश करके उसे ओहद पहाड़
[50:10]के बराबर कर दे तो मैं जब वापस लौटेगा तो अत पहाड़
[50:13]के बराबर करके इस महीने में बहुत ही अफजल अमल है ये
[50:21]भी रमजान शाबान के अंदर छुपा हुआ वो एक राज है तो
[50:24]पकड़ के रखिए जो टुक की छाप है आज मैंने वो राज
[50:29]बी है शाबान के अंदर मौजूद वह कौन सी व है जिसको
[50:35]थम के रखना है वो सजदे ट्यूबा की शान है और वो
[50:40]कौन सी शार्क है जिससे दूर हो जाता है वो जख्म की
[50:45]शप है बस शाबान में फक्त ये दो कम कर लो नतीजा
[50:47]जन्नत की सूरत में बरामद हो जाएगा दूर पर मोहम्मद वाले मोहम्मद
[50:52]पर आखरी जुमला आखिरी जुमला तमाम तस्वीर [संगीत] [संगीत] इस खास महीने
[51:53]के अंदर यह तस्वीर करना ना भूलना और मैं कहूंगा खास जब
[51:58]किसी मिलोगे में जा रहे हो तो तब तो इस तस्वीर को
[52:02]जरूर पढ़ लेना [संगीत] [संगीत] देखकर गिटार बड़ा ग रहा है तो
[53:21]मुझे बताओ मंटबत के अंदर बचत हुआ गिटार नहीं ग रहा यह
[53:24]साजिश है आज वो गिटार की आवाज सुना सुना कर तुम्हें आदि
[53:29]कर रहा है बच्चे की बच्चे की समाज को आदि कर रहा
[53:33]है आज ये बच्चा मां कवच में जब गिटार और वायलिन सुनेगा
[53:36]कल जब जहरें मस्जिद में मेहराब में रखा हुआ होगा इसे बड़ा
[53:43]नहीं लगेगा फिर उसके बाद वो तमाम के तमाम पराफा इसी जगह
[53:47]पर हुआ करेंगे खुदा ना खस्ता उसे वक्त क्या करेंगे अल्लाह को
[53:55][संगीत] पता चला है [संगीत] अब वो जो लक्स है वो बड़ा
[54:44]खतरनाक है ना वह जमीन पर अपने पैरों पर करके करने लगे
[55:01]और उछलना लगे कुछ ऐसा ग रहा है क्या ऐसा ग रहा
[55:08]है मौला [संगीत] का जो ऑप्शन किस पदार्थ है यह अमल के
[55:57]जिसके करने में दुनिया में मशक्कत है और आखिरत में आजाद यानी
[56:09]की इस अमल का नतीजा दुनिया में मशक्कत है या जी इलाके
[56:30]में उनका नाम लिया जाए वेल की खुशबू इनके किरदार से छलक
[56:36]रही हो पसंद करेंगे तो आज हमारी इन शाबान के दरमियां में
[56:46]जो महफिल हैं उसके अंदर ऐसी ऐसी सफात पैदा हनी चाहिए की
[56:52]जब के मामले में तकिया जिसको पसंद फरमाया और वहां आने के
[56:55]लिए यकीनन आए तो महसूस होकर बहुत अच्छी जगह पर मैं आया
[56:59]हूं मुझे खुशी हो रही है लेकिन ऐसी जगह अगर ए जाएगी
[57:02]ये क्या कर रहे हो यह तबला सारंगी मेरे यहां क्या कर
[57:07]रहा है मेरा नाम ले रहे हो और जिस्ट के साथ तो
[57:08]मेरा नाम ले रहे हो यानी किसी नजाजत को उठाकर तुम कुरान
[57:12]की आयतें नजाकत से लिख रहे हो किस कादर दोहरे अजब के
[57:18]मुस्ताहिर बन जाओगे अल्लाह हूं अकबर अभी मेरा [संगीत] शाबान में बैठे
[57:37]हुए हैं और खुद मौला की आज विलादत है तो उन्हें का
[57:41]तस्कर अगर हम तमाम का तस्कर नहीं किया है शहजादा अली अकबर
[57:48]का तस्कर भी नहीं किया है आज हम जहां पहुंचे हुए हैं
[57:50]आज पांच शाबान है आज हुसैन अली हसन की विलादत की तारीफ
[57:56]है और यकीनन इसके बाद और भी बहुत सी मुनासिब है जिसमें
[58:03]शहजाद अली अकबर है लेकिन ये सब के सब जुड़े हुए हैं
[58:05]इमामे वक्त से ये सब के सब साथी हैं सिपाही हैं किसके
[58:10]इमाम के सिपाही हैं जो इन्होंने इसलिए का रहे थे ना की
[58:15]तुम कैसा पाते हो मौत को हम आधा जोड़ना पढ़ते हैं पूरा
[58:17]नहीं पढ़ने हैं तो कहते हैं की मैं मौत को अप्रैल मिनरल
[58:22]अल क्यों पता हो अगर आपके साथ ए रही है यानी इमामे
[58:28]जमा से जुड़कर अगर मौत ए रही है शहर से ज्यादा सीढ़ियां
[58:30]हैं ये वह बच्चा भी जानता है ये वो अली अकबर भी
[58:35]जानते हैं की अलासन अलग क्या हम हम पर नहीं है भला
[58:39]क्यों नहीं कहां पे कोई फर्क नहीं पड़ता की हम मौत पर
[58:41]जा पढ़ें या मौत हम पर आप पढ़े तो ये तमाम की
[58:45]तमाम शख्सियत ये कर्बला की खूबसूरतियां हैं ये कर्बला की मैं रही
[58:51]तुम्हीं को हिल जमीला हमने कर्बला में शिवाय हुसैन जमाल के कुछ
[58:55]ना देखा इस बच्चे कासिम के इस जुमले को देखें मौत की
[59:01]इससे अच्छी डेफिनेशन हमने कर्बला में अच्छी है कर्बला से हटकर नहीं
[59:05]अच्छी मैं आई तुम्हें यूं मिलन जमीला शहजादे की इश्तकामत देखते हैं
[59:08]अली अकबर की तो कहते हैं की हम मौत पर जा पढ़ेंगे
[59:12]मौत हम पर आप पढ़े इस जुमले की लताड़ को महसूस करें
[59:17]इसके अंदर की न्यूरेनियम का महसूस करें की जुमला क्यों इसलिए की
[59:23]आपके साथ हैं इमामे ज़मानेंट है सलाम के साथ है तो कोई
[59:25]तमाम शख्सियत भी अपने इमामे जमा के साथ मकसद के साथी होने
[59:33]का रिस्क बांट रही हैं इसी महीने में तुम्हें तुम्हारे इमामे जमा
[59:36]की विलादत भी नजर ए रही है किस हद तक हमें और
[59:40]आपको ये रोशनी लेकर इमामे जमा से मिल जाना चाहिए अल्लाह हूं
[59:46]अकबर यकीनन तो बस अजीजों इस महीने में ये तमाम ए तमाम
[59:49]बरकतें सिमट कर ए चुकी हैं परवरदिगा हरियाणा ने इंतजाम कर दिया
[59:54]है इन हस्तियां से तबस्सूल करें परिवार दिखा रहे हैं आलम से
[59:57]दुआ है की अहीन मेहता हरि नलिम अस्सलाम जी तरह से हमें
[60:02]देखना चाहते हैं हमें इसी अंदाज का कार दे परवरदिगार तो जब
[60:08]मोहम्मद रहने बैठे मोहम्मद आहे सलातो अस्सलाम का हमें आज खास इमाम
[60:12]सज्जाद अली सलाम की बिलालदत है हमें सिरतें सज्जाद या पर चलने
[60:16]की तौफीक इनायत फरमाया तो जब आपका मोहम्मद और अलीबते मोहम्मद अली
[60:23]सलातो अस्सलाम हमारे इमामे जमा बिल्कुल वैसा ही है जैसे हम चाहते
[60:26]हैं हमें ऐसा बना दे जैसा इमामे जमा अली सलाम हमें देखना
[60:33]चाहते हैं दिल को उनकी जरूर के जारी से शैडो खुशनुड फरमाए
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