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15 Shaban Ki Manviat Ko Kese Baqi Rakha Jaye |H.I. Kazim Abbas
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24/03/17
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Lectures
Record date: 25 Feb 2024 - شب 15 کی معنویات کو کیسے باقی رکھا جائے AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]अ बिल्ला मन शैतान रम बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल हमदुलिल्ला हना माना
[0:37]दिया लला अन हदान अल्लाह ल कद जा र सुलो रबना बिल
[0:49]हक अ सलातो सलाम अला रसूल मुसद अल मुस्तफा अमजद अल महमूद
[0:59]अहमद अल मोहम्मद सलातो सलाम अला असद लाल लिब लिब अला कुले
[1:20]लिब अली इने अबी ता सला सलाम अला स मासम मलूर बत
[1:37]रसूल फातिमा जहरा सयद साल आलमीन सला सलाम हसन मुत हुसन मलम
[1:53]ले बबरी मासल मलूमी मुत जनल मुबीन ला समा बतला फजन रूही
[2:12]रवाल आलमीन राबे मकदम फिदा नलाला अजमान अम्मा बादला ताला किताब करीम
[2:27]बिस्मिल्ला रहमान याना आमन ला य जाकम फना वय क फरन कु
[2:43]स कु लकम ल्लाल [संगीत] फ सला म कम सामने मोहतरम अजने
[3:00]गराम कदर सबसे पहले मैं आप सबकी खिदमत में विलादत बासा आदत
[3:04]मुंजी आलम बकी अत अल्लाह हजरत इमाम जमान अललाह ताला फरज शरीफ
[3:11]की तबक और तहनियत पेश करता हूं और अपनी और आप सबकी
[3:18]जानिब से खुद हजरत की खिदमत में इस ईद की मुबारकबाद को
[3:24]पेश करते हैं चंद एक मतलब अर्ज करूंगा इब्तिदा तौर पर सिर्फ
[3:28]तजक के लिए कि जो शब हमें दरपेश है यह खुदा का
[3:36]लुत्फ है कि उसने इन तमाम शब और अया को कि जिसमें
[3:42]रिवायत के मुताबिक नफ हात रहमानिया खुदा की रहमत की बाद नसीम
[3:52]जिनमें चलती है गचे कोई मकान और कोई जमान खुदा से खाली
[4:02]नहीं है लेकिन हम इंसानों की आसाय के लिए अल्लाह तबारक व
[4:12]ताला ने बाज मकामा और बाज मकाना बाज जवानों को अपनी जानिब
[4:19]निस्बत दी यह हम जैसे इब्तिदा तौर पर खुदा के तकब की
[4:28]मनाजिल को तय करने वाले अफराद के लिए गोया एक तरबियती मरहला
[4:35]है परवरदिगार आलम चकि हमारा खालिक है लिहाजा हमारी तबीयत और हमारे
[4:46]मिजाज और हमारी फितरत से सबसे ज्यादा वाकिफ भी परवरदिगार किसी भी
[4:54]चीज के लिए जब कोई हुक्म लगाया जाता है उससे मुतालिक कुछ
[5:00]एह कामात को जारी किया जाता है तो हमेशा वह एह कामात
[5:09]उस शय से मुनासिब रखने वाले होने चाहिए मसलन अगर आप इब्तिदा
[5:13]साइंस को भी तसव्वुर करें और फिजिक्स में आप किसी ठोस चीज
[5:20]से मुतालिक अगर बात करना चाहते हैं तो जो प्रॉपर्टीज आप बयान
[5:24]करेंगे उससे मुतालिक जो हह कामात आप लोगों तक पहुंचाएंगे के वो
[5:33]उसकी उस कैफियत से मुताबिक रखने चाहिए जब आप मसला पानी के
[5:37]ऊपर अगर आप बात कर रहे हैं तो जो भी हुक्म आप
[5:41]पानी से मुतालिक बयान कर रहे होंगे वह अह कामात पानी की
[5:47]कैफियात के साथ मुताबिक रखने चाहिए अगर यह मुताबिक नहीं रखेंगे तो
[5:54]नतीजा कभी भी कामयाबी और हिदायत की सूरत में जुहूर नहीं करता
[6:01]हम जब इंसान की बात करते हैं तो इंसानों के अंदर जो
[6:08]इंसान की तबीयत और उसकी फितरत है जब तक निजाम जब तक
[6:15]एकामा इंसान की इस तबीयत और मिजाज से मुताबिक नहीं रखते होंगे
[6:19]इंसान को हिदायत और कमाल की तरफ नहीं ले जा सकते ये
[6:24]बुनियादी मसला है तबीयत इंसान से हम मांगी होनी चाहिए इन तमाम
[6:29]अह कामात की उस पूरे निजाम अब अगर हम इंसान के बारे
[6:35]में यह तसर पैदा करें कि इंसान ही इंसान के लिए कोई
[6:40]ऐसा निजाम कोई ऐसा सिस्टम डिजाइन करे और उसके लिए अ कामात
[6:43]को जारी करें तो हजारों साल गुजरने के बाद और हजारों की
[6:50]तादाद में तजुर्बे करने के बावजूद भी आज इंसान जहां खड़ा है
[6:53]जो निजाम इंसान ने पेश किए उसकी जो सूरत हाल है वो
[6:58]मेरे और आपके सामने मौजूद है डेमोक्रेसी के नाम पर लिबरलिज्म के
[7:05]नाम पर सेकुलरिज्म के नाम पर कैपिटल जम के नाम पर सोशलिज्म
[7:08]के नाम पर जितने तजुर्बा आपने किया आज उसका नतीजा गज और
[7:16]फलस्तीन में जो हो रहा है वह सारे के सारे इंसान के
[7:22]बनाए हुए निजाम के झूठ और उनकी नाकामियों का पोल खोल चुका
[7:25]है इंसानी हुकूक के अल जाहिर सबसे बड़े अलम बद दार कि
[7:32]जी हम इंसान के हुकूक की रियायत करने वाले हैं गज्जा में
[7:35]उनके इस झूठ का सारे का सारा पोल खुलकर सामने आ गया
[7:42]सारी दुनिया को आप सेकुलरिज्म का दर्स देने वाले और उनको सेकुलरिज्म
[7:49]के बारे में इतनी शिद्दत के साथ उसकी हिमायत करने वाले खुद
[7:56]अपने मुल्क में अपने लोगों के दरमियान लिबरलिज्म के दावेदार आप बनते
[8:02]हैं लेकिन आपके मनाफ और आपकी जो जोर गई है आपकी जो
[8:10]दुनिया भर में जुल्म है उनके मुकाबले पर कोई तनक करता है
[8:13]तो आप उसको उठा के बाहर फेंक देते हैं यह सब यह
[8:19]बता रहा है कि आपने अगर हम यह मान ले कि आपने
[8:24]इन निजाम के जरिए से इंसानों के लिए कोई अच्छाई सोची भी
[8:29]थी तब भी यह निजाम नाकाम लेकिन जो चीज सामने आई है
[8:34]वह क्या है कि आपने सिर्फ नारे लगाकर लोगों का इस्ते साल
[8:39]किया गचे इस इस्ते साल में वह लोग भी बराबर के शरीक
[8:47]हैं जिन्होंने तूल तारीख में दीन का नाम लेकर लोगों का इस्ते
[8:53]साल किया दीन के नाम से लोगों का इस्ते साल करने वालों
[8:56]ने दीन मुखालिफ को यहां तक पहुंचने में सबसे ज्यादा मदद की
[9:04]लिहाजा हमारी जो बहस इमामत के ऊपर हम आज भी उतनी शिद्दत
[9:11]के साथ खड़े हुए हैं उसकी वजह यह है कि निजाम हिदायत
[9:19]कमाले इंसानी में इमामत वह पहली और बुनियादी तरीन ईंट है कि
[9:23]अगर यह ईंट सीधी हो जाए तो इमारत सीधी खड़ी हो जाएग
[9:27]लेकिन जिस किसी ने भी गीर में इस ईट को टेढ़ा कर
[9:33]दिया अबता सुरैया मीर अव दीवार कज अब जितनी मर्जी आप दीवार
[9:35]को बुलंद कर दें उसने टेढ़ा ही खड़ा होना होता है और
[9:41]जितनी बुलंद तेरी दीवार जाती है बुलंदी की तरफ उतनी ही जल्दी
[9:45]उसके गिरने के इमकान लिहाजा हमने इन हेजम निजाम का अपनी आंखों
[9:51]से देखा और उसके नतीजे में यानी जितना भी इस तबके को
[9:58]कि जो खुदा मुखालिफ और दन मु तबका था इसको जितना भी
[10:03]मौका मिला है इंसानों का इस्ते साल करने के लिए इन नामों
[10:06]से लिबरलिज्म और सेकुलरिज्म और कैपिटल जम और सोशलिज्म उसकी असल वजह
[10:12]कौन है वोह लोग हैं कि जिन्होंने इब्तिदा तौर पर दीन का
[10:15]इस्ते साल दीन के जरिए से लोगों का इस्ते साल किया लिहाजा
[10:20]अब इसी दौरान में अंबिया को भेजने का मकसद परवरदिगार की जानिब
[10:24]हर तरह के इस्ते साल चाहे वो दीनी इस्ते साल हो चाहे
[10:30]गैर दीनी इते साल पस अंबिया का जो मुकाबला तूल तारीख में
[10:34]रहा है वह किन से रहा है हर तरह के इते साल
[10:38]और आज गज्ज और फिलिस्तीन के ही मामले ने इस चीज को
[10:44]भी बहुत वाज कर दिया और हम सबके लिए इस बात को
[10:48]रोशन कर दिया है कि दीन में वाहिद निजाम इमामत और विलायत
[10:51]का ऐसा है कि जो लोगों का इस्ते साल करने के लिए
[10:55]नहीं बल्कि इस्ते साली कुव तों के मुकाबिल खड़े होने पर आया
[11:00]है अब वो चाहे कुवत दीन मुखालिफ कुवत हो या अला जाहिर
[11:02]अपने ऊपर दीन का स्टीकर लगाकर दीन के नाम पर लोगों का
[11:07]इस्ते साल करने वाले हो लेकिन यह हकीकी तौर पर लोगों को
[11:11]तबाही की तरफ ले जाने वाले हैं वाहिद निजाम निजाम विलायत है
[11:13]कि जो हर तरह के इस्ते साल के मुकाबले पर खड़ा और
[11:18]यकीनन इस वत जो हम जिस शब के मुंतज हैं अल्लाह तबारक
[11:24]ताला ने यह लुफ किया यह नफात रहमानिया यह जो अया है
[11:30]यह जो मकामा है इन सबको अल्लाह तबारक ताला ने हमारी तबीयत
[11:36]यह है कि हम दीन ऐने फितरत और तबीयत इंसान से हंगी
[11:41]रखने वाला लिहाज इन तमाम निजाम की नाकामी की असल वजह अगर
[11:46]बुनियादी तौर पर आप तलाश करेंगे तो वो क्या है खुद इंसान
[11:52]से नावा केफियत जब आप जानते ही नहीं है इंसान को और
[11:54]ये मैं सिर्फ इदा नहीं कर रहा हूं ये कोई तकरीर या
[11:57]खिताबी जुमला नहीं है आप इस वक्त भी जाकर चाहे वो मेडिकल
[12:03]साइंस यानी साइंस से रिलेटेड महक कीन हो चाहे वो ह्यूमन साइंसेस
[12:06]से रिलेटेड महक कीन हो इस वक्त जब इंसान पर आकर गुफ्तगू
[12:11]करते हैं तो एक जुमला सबके जवानों पर है कि इस वक्त
[12:17]भी दुनिया में सबसे ज्यादा ना शना करता यानी जिस चीज को
[12:19]आज तक नहीं समझा जा सका वो वजूद इंसान का है तो
[12:23]आपका ये तरा यह बता रहा है कि आपको भी इंसान जब
[12:27]समझ में नहीं आया इंसान तो उसके लिए आप निजाम बना भी
[12:32]नहीं सकते लिहाज परवरदिगार आलम ने दीन के नाम से जो निजाम
[12:35]बनाया लिहाजा याद रखिएगा मासूम की जरूरत अगर हमें यह बात समझ
[12:43]में आ जाए खुद बखुदा कि जब अल्लाह ने निजाम भेजा है
[12:49]तो इस निजाम को दीन के नाम पर इस्ते साल करने वालों
[12:51]से भी बचाने के लिए कोई ऐसा होना चाहिए कि जिसके अंदर
[12:56]किसी भी जगह पर अपनी जात दरमियान में ना है जहां आप
[13:00]जात आपका कोई अपना मनफात दरमियान में आई आपके कोई जाती मनाफ
[13:05]दरमियान में आए वहीं से स साल शुरू हो जाता अब इस
[13:10]इस्ते साल से बचाने वाला खुद वो होना चाहिए कि जिसकी जात
[13:15]कभी भी उसके लिए इंपॉर्टेंट ना हो और जो अपनी जात के
[13:17]लिए कुछ ना करे और उसके ऊपर हमें इत्मीनान हो सिवाय मासूम
[13:20]के कोई हो ही नहीं सकता जो अपनी जात के लिए ना
[13:29]करे लिहाज अल्लाह तबारक ताला ने अब जब य हमें जानते हुए
[13:31]बनाया तो व जानता है कि मैंने इंसान को जिस तरीके से
[13:37]खल्क किया है इसकी रूह को जिस मादे के अंदर मैंने कैद
[13:42]किया है उस जुल्मत से निकाल कर इसको नूर तक लाना अल्लाह
[13:47]वलील आमन य ममा अल्लाह वली है मोमिनीन का करता क्या है
[13:54]उन्ह जुमात से निकाल कर लाता है नूर में कौन सी जुमात
[13:59]है इनम जो इब्तिदा तरीन जुल्मत है इब्तिदा तरीन तारीख है वह
[14:06]खुद हमारे अपने वजूद के अंदर है वो वजूद की तारीख क्या
[14:08]है कि हम अपने मादे और अपने हिस और बदन के तारीख
[14:17]के अंदर गर्क होते हैं अपनी रूह की नूरानिया की तरफ मुतजेंस
[14:21]तय करना है अब जब तक हम इस तारीख में पड़े रहेंगे
[14:27]यानी हम यह समझेंगे कि सब कुछ बस यह खमसा है सबका
[14:31]सारे का सारा जायका जबान से ताल्लुक रखता है सारी की सारी
[14:37]खुशबू नाक से ताल्लुक रखती है सारी की सारी खुश मंजर चीजें
[14:39]आंखों से ताल्लुक रखती है सारी अच्छी आवाज कान से ताल्लुक यह
[14:44]क्या है यह मादे में गिरफ्तारी लेकिन जो जरा सा इस नूरानिया
[14:53]से बाहर निकलता है उसे जबान के बगैर इल्म की चाशनी महसूस
[14:56]होना शुरू हो जाती है उसे नाक के बगैर मफत की खुशबू
[15:01]महसूस होना शुरू हो जाती है उसे कान के बगैर इल्मी आवाजों
[15:09]की लहन और उसकी कैफियात महसूस होना शुरू हो जाती फिर वह
[15:13]अपनी अकल की आंखों से वह मंजर देख रहा होता है जो
[15:17]बदन की आंख दिखाने के काबिल यह बहस है कुछ लोग जिनके
[15:26]कमस कम कुलूब के अंदर इतनी नूरानी होती है इल्मी गुफ्तगू उनको
[15:31]अच्छी लगती है अब जो अपने मादे की जुल्मत से बाहर नहीं
[15:37]निकला उसको कभी समझ में ही नहीं आएगा कि इसको इल्मी गुफ्तगू
[15:43]में मजा क्या आता है आपने देखा होगा आम तौर पर हत्ता
[15:47]बच्चों के अंदर भी यह चीज पाई जाती है कुछ बच्चे होते
[15:49]हैं जिनको इब्तिदा से पढ़ने का शौक होता है बुकिश होते हैं
[15:55]उनको इस तरह की चीजें अच्छी लगती है अब वो जो बाकी
[16:01]बच्चे खेल कूदने वाले व हम कहते हैं यार तुम बहुत बोरिंग
[16:02]हो तुम क्या बातें करते रहते हो असल मजा तो खेल में
[16:07]वो कहता है भाई असल मजा तो किताबों में है अब ये
[16:10]एक दूसरे की जबान नहीं समझ पा रहे होते क्यों जिसने उस
[16:12]नूरानिया को पा लिया है वो जुल्मत के मामलात को नहीं समझ
[16:17]सकता और जो अभी तक जुल्मत में पड़ा हुआ है वो नूर
[16:22]के मामलात को समझ नहीं सकता जायका तो उसको भी उतना ही
[16:28]आना है जितना तुम्हें आ रहा है लेकिन वो जो इल्म से
[16:30]जायका ले रहा है जब तक तुम्हारे अपने अंदर की नूरानिया नहीं
[16:36]है तब तक तुम्हें वो जायका महसूस नहीं होगा अब ये जो
[16:43]जुल्मत से निकालकर नूर की तरफ ले जाने वाला सफर है इसमें
[16:45]खुदा जानता है कि मैंने हर एक को तबीयत ऐसा नहीं खल्क
[16:50]किया एक बड़ी तादाद है लोगों की कि जिनको मसला इल्मी गुफ्तगू
[16:53]अच्छी नहीं लगती जिनको ये मता नहीं समझ में आते क्या उनके
[16:58]लिए कोई रास्ता हर एक के लिए रास्ता लिहाज इब्तिदा तरीन चीजें
[17:03]अल्लाह तबारक ताला ने मुझ जैसे जुल मात में घिरे हुए लोगों
[17:06]के लिए रास्ता क्या निकाला कहा भाई पूरे साल नहीं साल में
[17:13]कुछ दिन तो मुझे दे दो साल में कुछ रातें तो मुझे
[17:20]दे दो इन रातों में इन दिनों में मैं अपनी रहमत की
[17:23]वो बादे नसीम चलाऊंगा कि अगर तुम बेदार होगे वाह तो कुछ
[17:32]ना कुछ तुम्हें उससे जरूर मिलेगा मौसम बहुत अच्छा हो रहा है
[17:40]बारिश हो रही है बाहर मत देखो अभी नहीं हो रहा और
[17:43]आप सो रहे हो तो जितना अच्छा मौसम हो जितनी अच्छी हवा
[17:49]चल रही हो जितने अच्छे मनाजिर हो आपको कुछ नहीं मिलेगा क्यों
[17:54]आप सो रहे उस तमाम कैफियत से आशना होने के लिए बेदारी
[18:08]याद रखिएगा यह कुछ शब जिनम वो खुदा जो कुरान में कह
[18:15]र मैंने रात खल्क की है ताकि तुम तस्कन ताकि तुम उसम
[18:21]सुकून पाओ खुदा से ज्यादा हमें सुकून देने वाली जात उसने उसकी
[18:28]मोहब्बत का सबसे बड़ा इजहार है आप जितने मर्जी थके हुए हो
[18:36]जितनी आपके साथ मुश्किलात यानी सिर्फ जिस्मानी तबार से नहीं जहनी तबार
[18:40]से भी कितने ही मसाइल है सुकून की किस लेवल पर लेकर
[18:52]जाती है आपको आपको कितनी ही टेंशन क्यों ना हो कितनी ही
[18:55]परेशानी क्यों ना हो आदमी उस वक्त तक परेशान रह जब तक
[19:03]सोना जाए य खुदा की कुदरत है य उसकी मोहब्बत का इजहार
[19:04]है बदतर हालात में भी चाहे वह जिस्मानी तबार से हो चाहे
[19:11]वह जहनी तबार से हो सदमा हो टेंशन हो बिलख इंसान को
[19:17]नींद आ जाती और यह कुछ देर की नींद उसके अंदर ऐसे
[19:19]एनर्जी लेवल को बूस्ट करता है कि आप सोच नहीं सकते तजुर्बा
[19:24]आप सबने किया हो अब आप सोचे कि कोई तो जात ऐसी
[19:29]है जिसने नींद को आपके वजूद के साथ ऐसा जोड़ा हुआ है
[19:31]कि कहीं ना कहीं सोने के बाद वह चाहता है कि मेरा
[19:36]बंदा बद चाहे अभी वो मुश्किल हल हो या ना हो आपकी
[19:39]लेकिन वो कुछ देर की नींद जो आपको फ्रेश कर देगी कौन
[19:43]चाहता है यह खुदा चाहता है जो इस कदर आपका ख्याल रखने
[19:49]वाला खुदा है अब वही आपको किसी शब में आकर कह रहा
[19:54]है जागो बेदार रहो आज की शब की बेदारी में कुछ है
[19:57]अब हम इस बेदारी से मुराद क्या लिए हुए हैं हम इस
[20:01]बेदारी से मुराद दिए हुए हैं कि मैं अगर सिर्फ जागता रहूंगा
[20:04]तो मुझे कुछ मिल जाएगा ना बाबा आंख की बेदारी इशारा है
[20:10]दिल की बेदारी के लिए कल्ब अगर बेदार होगा तो देखेगा रूह
[20:16]बेदार होगी तो देखेगी आंख की बेदारी को उसने सिर्फ क्या बनाया
[20:22]है इशारा करार दिया है असल में वो जो बेदारी चाहता है
[20:27]किसकी बेदारी चाहता है रूह की बेदारी कल्ब की बेदारी दिल बेदार
[20:30]होगा तो आज की शब की बरकात को तक कर सकता हम
[20:37]आज की शब क्या कर रहे हैं मुझे नहीं मालूम यह सुन्नत
[20:43]कहां से हमारे दरमियान में आई है यह रिवाज हमारे अंदर कहां
[20:47]से आए लेकिन हम बजाए अपने बच्चों को आज की शब यह
[20:50]समझाने के फिर उसके ऊपर लु बाला लुत देखें आप अल्लाह कि
[20:56]वो तमाम शबे वो तमाम आयाम वो तमाम मकामा कि जिसमें उसने
[21:05]मुझ जैसे गुनाहगारों के लिए अपनी रहमत के आसार को शदीद किया
[21:10]है कि मैं वहां जाकर अल्लाह से अपनी कनेक्टिविटी को मजबूत कर
[21:14]सकता हूं राबे को मजबूत कर सकता हूं कुर्बत के उस एहसास
[21:19]को अपने अंदर शदीद कर सकता हूं फिर उसने वो सारे के
[21:23]सारे मकामा वो सारे के सारे मकान वो सारे के सारे जमान
[21:26]जोड़ दिए हैं अहले बैत अर के साथ शबे कद्र का तसव्वुर
[21:33]पहले से पहले आया है क्योंकि रमजान उल मुबारक का हुकम पहले
[21:38]पैगंबर के दौर में आ गया पैगंबर के ही दौर में शबे
[21:41]कद्र आयत भी नाजिल हो गई पैगंबर ने जो भी एह कामात
[21:46]उसके हवाले से बयान करने थे कर दिए अब उनमें से किसी
[21:49]एक शब को अल्लाह तबारक ताला हजरत अमीर के साथ अगर जोड़
[21:53]रहा है ये वाकत किसी और दिनों में भी हो सकते थे
[21:57]लेकिन खुदा क्या चाहता है कि तुम्हारी शब है कद्र किसी भी
[22:03]बहाने से हजरत अमीर से इसी तरह से आज की शब पहले
[22:07]से मौजूद है इसके बारे में रिवायत पहले से मौजूद है लेकिन
[22:10]अल्लाह तबारक ताला हम और आप पर एक लुफ क्या कर रहा
[22:14]है कि आज की शब को हमारे और आपके इमाम की विलादत
[22:19]के साथ जोड़कर हमारे और आपके लिए उसकी तासीर को दो बराबर
[22:21]कर अब अल्लाह मेरे और आपके लिए इतना इंतजाम करे और मैं
[22:27]अपने बच्चे के हाथ में लवी चीजें पकड़ा करर लगवी चीजें पकड़ा
[22:34]करर उसकी तरबियत में भी और पूरे माहौल को तबा और बर्बाद
[22:38]करने पर तुला शिया अहले बैत की नजर में क्या है शियाना
[22:43]हमारे शिया य फरना फरना हमारे शिया खुश होते हैं हमारी खुशी
[22:50]के लिए में नहीं होते फी फरना नहीं है हमारी खुशी में
[23:00]खुश अगर हो तो फिर हमारे खुश होने का हर अंदाज ठीक
[23:02]है भाई आज मौला पैदा हुए मैंने खुश होना है उनकी खुशी
[23:07]में खुश होना है तो मैं जैसे मर्जी खुश हूं ये नहीं
[23:12]कहा क लि फरना खुश होते हैं हमारे लिए हमारे लिए से
[23:17]क्या मुराद है यानी खुशी भी अगर मनाएंगे हमें खुश करने के
[23:21]लिए मनाएंगे परस शिया अहले बैत की खुशी में खुश नहीं होता
[23:26]अहले बैत की खुशी के लिए खुश होता है अब जब लिए
[23:32]खुश होने का माना क्या है कि जब मैंने खुश होना ही
[23:34]अहले बैत के लिए है तो फिर मेरे खुश होने का तरीका
[23:38]वो होना चाहिए जो अहले बैत को खुश करे अगर मेरे खुश
[23:44]होने का तरीका अहले बैत को अजियत पहुंचाने का बायस है तो
[23:50]क्या मैं वाकई अहले बैत के लिए खुशी मना रहा हूं मैंने
[23:55]एक जगह मिसाल दी थी कोई बेचारा शुगर का पेशेंट हो और
[24:00]शुगर भी उसकी एक्सट्रीम लेवल पर पहुंची भी हो और आप उसकी
[24:03]विलादत का जश्न मनाने के लिए मिठाइयां लेकर पहुंच जाए और क
[24:11]जी मैं आपकी विलादत की खुशी मनाने के लिए आया हूं और
[24:17]आपके लिए यह मिठाइयों का भरा डब्बा लेकर आया तोव क्या कहेगा
[24:19]वो कहेगा तुम्हारा डब्बा यह बता रहा है मुंह तुम्हारा जो मर्जी
[24:24]बता रहा हूं शक्ल और अल्फाज तुम्हारे जो मर्जी कह रहे हो
[24:26]लेकिन ये जो तुम डब्बा लेकर आए हो यह बता यह रहा
[24:31]है कि तुम्हें मेरे पैदा होने की खुशी नहीं है बल्कि तुम्हें
[24:35]दुख इस बात का है कि मैं पैदा हो क्यों गया और
[24:36]दुनिया से जा क्यों नहीं रहा कि तुम मिठाई मेरे लिए इसलिए
[24:42]लाए हो ताकि मैं खाऊं और जल्दी मरू जाऊं मिठाई का तो
[24:45]यही मतलब है ना शुगर पेशेंट के लिए मिठाई ले जाने का
[24:52]माना क्या है क्या आप उसके लिए मीठा जहर लेकर जा रहे
[24:57]हैं अगर आप उससे वाक उसको खुश करना चाहते हैं और आपको
[24:59]उसी के लिए खुशी है आप उसके लिए वो शय लेकर जाएं
[25:03]कि जो उसकी तबीयत और मिजाज को बेहतर बनाए उसके अंदर कोई
[25:09]बेहतरी लेकर आएगा मसलन आप किसी को तोहफे में जाकर कोई ऐसी
[25:11]चीज लेकर जाए कि भाई आप खाए आपकी इंशाल्लाह शुगर ठीक हो
[25:16]जाए वो क्या कहेगा वो कहेगा हां यह है इसको वाक मेरी
[25:20]खुशी ये मेरे लिए खुश अपने लिए नहीं हो रहा हम हमारा
[25:22]खुशी का अंदाज मजरत के साथ ज्यादातर कौन सा है हम अपने
[25:28]लिए खुश हो रहे होते अहले बैत के लिए खुश अहले बैत
[25:32]को जिन चीजों से नफरत है उनमें से कुछ चीजें क्या है
[25:33]लव लवित नहीं पसंद करते अले बैत लहब जानबूझकर अंजाम देना गुनाह
[25:45]है और अहले बैत को गुनाह से नफरत अब ये जो हमने
[25:47]अपने बच्चों के हाथ में इबादत और बरात और अहले बैत से
[25:52]अपने आप को जोड़ने की शब में अपने बच्चों को हमने पटाखे
[25:57]खरीद के दे दिए कि जाओ बेटे फोड़ो कौन सा शरी फायदा
[26:04]है इसके अंदर अकली कोई फायदा है आप अकल कोई एक चीज
[26:07]हत्ता इंटरटेनमेंट के नाम पर मुझे साबित कर दें कि यह पटाखे
[26:12]फोड़ने से कोई इंटरटेनमेंट हासिल होती हो और उसका कोई जिस्मानी कोई
[26:17]मादी फायदा अकली फायदा जिस चीज का कोई फायदा ना हो उसे
[26:22]अंजाम देना लहफ कहलाता है और हराम अब मां बाप जो अपने
[26:31]बच्चों को यह जो पैसा आप दे रहे हैं इस लहब के
[26:34]लिए उस पैसा देने में शकाल आप बाइ बन रहे हैं अपने
[26:41]बच्चों से उस गुनाह को अंजाम दिलवाने में समझाए अपने बच्चों को
[26:45]समझाए अपने जवानों को कि यह जो तुम काम कर रहे हो
[26:50]यह अहले बैत अहार को खुश नहीं उनको अजियत देने का बायस
[26:53]बन रहा है कोई एक फायदा शरी के बारे में 100 फीस
[26:58]जानता हूं कि नहीं है कोई मादी फायदा इसका कोई अकली एक
[27:04]फायदा आप मुझे बता दें अगर नहीं है तो क्या कर रहे
[27:08]हैं और फिर वो पूरी रात हमारे बच्चे देखिए किसी हिमाकत को
[27:17]अंजाम देकर खुश होना उसका फायदा नहीं कहलाता हमारी तरबियत का नतीजा
[27:25]है कि हमारे बच्चे लोगों को अजियत करके जो चंद एक आब
[27:28]दन और जादीन इस शब में इबादत करना भी चाहते हैं हम
[27:32]क्या कर रहे हैं उनकी इबाद तों को भी हमने बर्बाद किया
[27:36]अब अपने बच्चे की तरबियत के अंदर जो बिगाड़ हम और आप
[27:41]पैदा कर रहे हैं क्या यह बिगाड़ आगे चलकर इसको इमाम का
[27:46]सिपाही बनाने में मदद देगा क्या चीज आएगी जो इसके काम आएगी
[27:50]लिहाजा आज का जो उनवान है बुनियादी तौर पर मैंने मुकदम इस
[27:54]बात को इसलिए बयान किया कि पहले मुतजेंस कि इस शब की
[28:00]मानवीय को हासिल करना कैसे है मानवी यात कुर्ब के तमाम मराब
[28:10]इन अनवार को हासिल करने के लिए इब्तिदा तरीन शय बेदारी है
[28:14]तवज्जो है अब यह कम से कम बेदारी इब्तिदा तौर पर आपकी
[28:20]बदन की बेदारी से ही इब्तिदा करेगी यानी वह बिल्कुल ही जुल
[28:29]मात और और गुमराही के अता जिसे कहना चाहिए गहराइयों में पड़ा
[28:35]हुआ है कि जो आज की शब हत्ता बदनी तौर पर भी
[28:40]जिस्मी तबार से भी जागने के लिए आमादा इबादत करने के लिए
[28:47]आमादा एक दुनिया है और शायद सो जाने वाला आज की शब
[28:56]में उतने नुकसान में ना हो जितने ने नुकसान में आज की
[29:02]शब में लहया और लग विया अंजाम देने वाले हैं समझे इस
[29:08]बात को खुदा के लिए अपने बच्चों को अपने अयाल को अपने
[29:13]अतरा में लोगों को समझाएं बाबा इबादत नहीं करना चाहते हो तो
[29:17]बेहतर है सो जाओ यह सोना तुम्हारा इन लवित और लगया में
[29:24]पढ़ने से फिर भी बेहतर है सो जाओ मेहरबानी करो अपने ऊपर
[29:26]भी और दीन के ऊपर भी जागकर अपने आप को लहया और
[29:33]लवित में रखना क्या मुह दिखाएंगे अपने जमाने के इमाम को आज
[29:40]की विलादत में तोहफा क्या दे रहे हैं अजियत दूसरी जानिब व
[29:44]सिलसिला शुरू हुआ हुआ है कि जिन्होंने मद अहले बैत के नाम
[29:47]पर मसकी और गिना की एक दुकान हराम की एक दुकान खुली
[29:57]यह तो तोहफा दे रहे हैं आप ये खिदमत है मुझे वो
[30:02]बच्चियां समझ में नहीं आती कि जो हराम है हराम है खातून
[30:08]का तरन्नुम में लहन में कुछ भी पढ़ना वो गिना की बहस
[30:13]ही नहीं है और आप अपने वीडियोस डालकर सब कुछ करके बाबा
[30:19]खुदा के लिए समझो इस बात को यहां बहस हिजाब नहीं है
[30:23]यहां बहस आवाज [संगीत] है इमाम के नाम पर इमाम का नाम
[30:30]लेकर हराम काम करके इमाम की कौन सी खिदमत कर रहे हो
[30:33]यह कौन सी खिदमत दन है मुसलसल आइमा को अजियत देकर इमाम
[30:43]सातव इमाम जिन्होंने अपनी सारी जिंदगी कैद में गुजारी है इमाम से
[30:45]भी जब पूछा गया इमाम ने कहा वो जिदान मुझे सबसे ज्यादा
[30:49]सख्त लगा जिसकी खिड़की से गना और मसकी की आवाज आती य
[30:56]मेरी बच्चियां खुदा वाक तुम्हारे अगर दीन की तड़प है खुदा तुम्हें
[31:02]तौफीक दे और खिदमत के इतने मकामा है अपनी एनर्जी को सही
[31:05]डायरेक्शन में हल [संगीत] करो अहले बैत अथर का नाम लेकर इसमें
[31:13]कोई बहस ही नहीं है यहां पर कोई दूसरी राय नहीं है
[31:17]जिस किसी ने आपको यह समझाया कि आप यह कर रहे हो
[31:21]यह इबादत [प्रशंसा] है वाज तौर पर दन से ना बलद है
[31:26]इसी तरह से हमारे बच्चे बाबा तुम्ह अल्लाह ने अच्छी आवाज दे
[31:31]दी है तो खिदमत को वहां तक रखो जहां तक वो इमाम
[31:34]की खिदमत का बायस बने हमने अपने आप को खुश नहीं करना
[31:41]अहले बैत अहार को खुश करना बेदारी अब अगर हम कम से
[31:46]कम इतने बेदार हैं यह बेदारी है कि अगर आपको यह समझ
[31:48]में आता है कि आपका सोना आपको ल ल से बचा सकता
[31:52]है यह भी बेदारी है कल्ब की बेदारी है कुछ और नहीं
[32:00]सते इबादत नहीं कर सकते कोई और मसला है आपके साथ व
[32:01]आपका और खुदा का मसला हमारा नहीं है लेकिन अगर आपको लगता
[32:06]है कि मेरे सोने से मैं कम से कम लहया और लवित
[32:11]से बच सकता हूं सो जाओ इंशाल्लाह वो सोना भी इबादत इस
[32:12]नियत के साथ सोना कि मैं अपने आप को कम से कम
[32:16]आज की शब में लहया और लवित से बचा लूंगा वो सोना
[32:21]भी बेहतर है लेकिन उससे बेहतर यह है कि इंसान की बेदारी
[32:28]इस लेवल तक पहुंचे आज की शब बलाख खुदा कुछ देने वाला
[32:30]है आज की शब कुछ ना कुछ तो है मैं नहीं उसकी
[32:36]हकीकत और मफत को उस तरीके से दर्क कर सकता लेकिन कुछ
[32:42]तो शुरू करू इदा तो कहीं से करू अब नहीं है यह
[32:43]नहीं मांगा गया हमसे कि आज की शब होते ही सुबह तक
[32:47]हम मुसल्ले पर बैठे यह जरूरी नहीं है अल्लाह ताला हमारी ताकत
[32:52]और वसत से ज्यादा हमें तकलीफ नहीं देता जितनी तौफीक हो ज्यादा
[32:56]अंजाम देने से अच्छा अंजाम देने की कोशिश करें अमल की कसरत
[33:05]से ज्यादा क्वालिटी को बेहतर बनाने की कोशिश करें आज की शब
[33:13]में खुसूस दुआए कुमेल का तस्करा ताकीद के साथ है अब यह
[33:16]दुआए कुमेल के साथ फला नमाज फला नमाज अगर आपको लगता है
[33:22]कि यह सारा बर्डन अभी आप नहीं उठा सकते कम अ कम
[33:26]दुआए कुमेल को एक मर्तबा पढ़े और साथ साथ तर्जुमा भी पढ़े
[33:28]और सिर्फ तर्जुमा नहीं पढ़े थोड़ी-थोड़ी देर रुक कर मुझसे अगर मशवरा
[33:35]मांगेंगे तो मैं कहूंगा कि पूरी रात में सिर्फ दुआए कुमेल पढ़े
[33:37]सिर्फ दुआए कुमेल से क्या मुराद है मेरी यहां प कि पूरी
[33:41]रात दुआए कुमेल पढ़ते रहे नहीं यह नहीं करें दुआए कुमेल पढ़े
[33:47]कुछ जुमले पढ़े उनका तर्जुमा पढ़े और उस तर्जुमे को फिर जो
[33:52]भी आप कर रहे हैं काम करते रहे कोई और काम भी
[33:53]कर रहे करते रहे लेकिन उन जुमलो के ऊपर गौर करें खुदा
[33:57]क्या कह रहा है अल्लाहु फरन बती परवरदिगार मेरे वह गुनाह माफ
[34:13]कर दे जो मेरी असत को खत्म कर दे अल्लाहु फर नेम
[34:21]परवरदिगार मेरे व गुनाह माफ कर दे जो मुश्किलात को नाजिल करते
[34:29]य एक जुमला आज की शब में अगर समझ में आ जाए
[34:33]तो हमें अपनी मुश्किलात की वजह भी समझ में आ जाएगी मैं
[34:35]क्यों मुश्किलात में हूं इसलिए कि मैं वो गुनाह अंजाम दे रहा
[34:40]हूं जो खुदा की जानिब से निक मतो को सखियों को नाजिल
[34:42]करता [संगीत] है [संगीत] अल्ला बला परवरदिगार मेरे वो गुनाह माफ कर
[34:54]दे जो बलाओ को नाजिल करता फ ना उम्मीद हो जाता हूं
[35:03]मौलाना साहब उम्मीद बाकी अल्ला रजा परवरदिगार मेरे व गुनाह माफ कर
[35:09]दे जो उम्मीद [संगीत] को य जुमले एक दफा इसका तर्जुमा पढ़कर
[35:17]उसको दोहराते रहे अपने जहन में बनाते रहे बात और समझने की
[35:24]कोशिश करें हजरत अमीर आपको रास्ता दिखा कर चले गए इससे ज्यादा
[35:27]और क्या आपको को समझा सकता है बलाओ का इलाज निकम तों
[35:32]का इलाज जिल तों का इलाज ना उम्मीदी का इलाज सब कुछ
[35:38]तो बता दिया और क्या चाहिए एक फराज पढ़े एक हिस्सा पढ़े
[35:45]उसका तर्जुमा पढ़े उसको दो दोहराए दो यहां तक के आपकी आंख
[35:52]से पढ़ा हुआ आपकी जबान से पढ़ा हुआ आपके कान से सुना
[35:58]हुआ आपके कल्ब की तरफ सफर करना हर वो जुमला जो आपके
[36:05]कल्ब में वारिद होगा उसकी तासीर आपके वजूद में आंख से आंसू
[36:09]की सूरत में बाहर निकल हर जुमले की तासीर कल्ब में निदा
[36:18]मत और खिजा की सूरत में जहूर करेगी लिहाजा इमाम जनल आबदीन
[36:21]अल सलातो सलामह हजरत इरशाद फरमाते य आ अहले बैत ने रास्ता
[36:35]दिखाया इन कानन तबानी मन नादन परवरदिगार अगर अपने गुनाहों पर नादम
[36:47]हो जाना अपने गुनाहों पर खजल हो जाना अपने गुनाहों पर शर्मसार
[36:54]हो जाना यह तौबा है तो परवरदिगार में नादमीदुम इब्तिदा तरीन तौबा
[37:05]का रास्ता इमाम बता रहे हैं पहला स्टेप क्या है कहां से
[37:11]शुरू करूं इब्तिदा तरीन चीज उस गुनाह की शर्म और खिजा को
[37:15]अपने अंदर दर्क करना है सोच तो सही अहले बैत का शिया
[37:24]होकर इमाम हुसैन हजरत अमीर अहले बैत अहार जनाबे सैयदा इन सबको
[37:29]जानने वाला मानने वाला होकर जब मैं यह हरकत कर रहा हूं
[37:35]मेरा यह गुनाह कयामत के दिन मगर जनाबे सैयदा का सर झुका
[37:38]दे अगर मेरे गुनाह मेरे जमाने के इमाम को शर्मसार कर दे
[37:44]अगर मेरा गुनाह की वजह से इमाम हुसैन शर्मसार हो जाए है
[37:52]बर्दाश्त नहीं है तो अजीज मन रास्ता क्या है अभी भी शर्मसार
[37:54]हो जाओ अभी भी उस खिजा को महसूस कर लो तुम्हारी खिजा
[38:01]तुम्हारे अंदर अफसोस इस अफसोस का असर क्या है खुद दमल बता
[38:08]र या सरी मला सबसे तेज तरीन राजी हो जाने वाले माफ
[38:15]कर दे उसको जिसके पास सिवाय दुआ के और कोई चीज है
[38:19][संगीत] ही यह नदा मत यह खजल यह शर्म अगर इसने जरा
[38:27]साहब के कल्ब को ट्रिगर किया मैंने अर्ज किया नूरानिया और मानवीय
[38:32]का फिजिकल असर आंख से आंसू बनकर और तासीर क्या है किस
[38:40]कदर सरी और रजा है यहां आंख से आंसू निकलता नहीं है
[38:47]वहां परवरदिगार अपनी रहमत के दरवाजों को खोल तो शाबान मजम महीना
[38:52]ही खुदा की मगफिरत का महीना है फिर हमने और आपने सोचा
[38:58]जितना नुकसान हो गया हो गया अब अपने आप को तैयार करें
[39:04]आज की शब से तैयार करें अपने आप को फिर माहे मुबारक
[39:06]रमजान के लिए यह होशियारी यह तवज्जो अफसोस का मुकाम है ना
[39:15]हमारे लिए बुजुर्गा इस मरहले से गुजर चुके होंगे यकीनन नौजवान लाइन
[39:21]में खड़े हुए होंगे किसी को बता दो कि भाई तुम्हारी शादी
[39:26]फला तारीख को [संगीत] होनी है जैसे ही शादी की तारीख तय
[39:35]होती है उसी दिन से सारी प्लानिंग शुरू हो जाती है मैं
[39:41]शादी पर कपड़े कौन से पहनूंगी मैं शादी पर जूते कौन से
[39:44]पहनूंगी पर फला कैसे करूंगा गौर कीजिएगा अगर किसी की शादी तय
[39:50]हो जाए और वो कोई प्लानिंग ही ना करे तो आप एक
[39:58]दफा तो पूछेंगे कहेंगे भाई तू राजी भी है या नहीं इस
[40:02]शादी से हां मैं राजी हूं ई कैसा राजी है अगर राजी
[40:06]है तो कोई खुशी तेरे अंदर से नजर नहीं आ रही जिनको
[40:08]शादी करने की खुशी होती है वो भाग भाग करन करते हैं
[40:13]ना कुछ भाई ये इफेक्ट जब हमें रिक्वायर्ड है तो अल्लाह को
[40:19]भी रिक्वायर्ड है अगर तुम्हें वाक खुदा की जियाफत का तुम्हें माह
[40:23]मुबारक रमजान का तुम्हें अल्लाह की तरफ जाने का कोई शौक है
[40:25]कुछ तो हरकत करके दिखाओ यह हरकत कैसे करनी है यह हरकत
[40:33]ऐसे करनी आज माहे मुबारक शाबान की इस तारीख से व शब
[40:37]के जिसमें अल्लाह ताला माफ करने का माना उसका वादा कितना है
[40:42]इला तुम एक मर्तबा तकवा इयार करने की कोशिश करो मैं तुम्हारे
[40:51]सारे गुनाह मा जो क फर स तुम्हारे सारे के सारे यह
[40:53]कुफर सत अजीब माना है आमतौर पर हम रलक जनक स एक
[41:01]ही माना करते हैं तुम्हारे गुना बख दूंगा तुम्हारे गुना बख दूंगा
[41:07]दोनों का माना एक नहीं है कुफ्र बुनियादी तौर पर इंकार को
[41:13]कहते हैं काफिर व होता है जो जरूरियत दीन में से किसी
[41:17]शय का इंकार कर दे कुफर से कहते म उसूल दन में
[41:23]से किसी एक का भी इंकार करेगा काफिर कहलाएगा जरूरी जात दन
[41:27]कोई क मैं नहीं मानता नमाज नहीं है असल जितना मर्जी तौहीद
[41:31]का कलमा पढ़ ले खारिज से काफिर है असल काफिर होने की
[41:39]डेफिनेशन क्या है जो दीन की जरूरियत और मुसलमा दीन का इंकार
[41:44]करे बाकायदा बस कफरा का असर इसलिए कुफर नेमत से मुराद क्या
[41:49]होता है कुफर से मुराद य होता है कि गोया आपने नेमत
[41:53]के होने का इंकार कर दिया आप कह रहे मेरे नजदीक ये
[41:58]नेमत ही नहीं है अब खुदा क्या कह रहा है य फ
[42:03]अन स अल्लाह गोया तुम्हारे गुनाहों का तुम्हारी बुराइयों का इंकार कर
[42:10]देगा तक फीर कर देगा तुम क नहीं कि मेरे बंदे ने
[42:15]गुनाह [संगीत] ही कब करेगा जब तुम तकवा की तरफ आने तकवा
[42:20]क्या है बुनियाद क्या है अपने आप को गुनाहों से दूर रख
[42:27]यह बेसलाइन गुना नहीं अंजाम और आज की शब तौबा की शब
[42:34]है और मैं इब्तिदा गुनाहों से करू लवित लवित में पढ़कर पटाखे
[42:40]बजाकर धमाके करके यह सारे के सारे काम क्या है लया लया
[42:46]हराम नतीजा क्या [संगीत] निकलेगा लिहाजा एक मर्तबा जब बेदारी पैदा हो
[42:56]गई हमारे अंदर लाइट नहीं जलनी मफत फरफान कुर्ब की मनाजिल इसका
[43:09]कोई तर्जुमा यह नहीं है कि आपका पूरा को माहौल बदल जाएगा
[43:15]यह हिस करने वाली चीज है हिस के लिए बेदारी ज मानवी
[43:22]को हिस करने के लिए आपको किसी ने मैंने मिसाल दी कि
[43:28]बाहर म बहुत अच्छा था आप सो रहे आप कभी भी मुस्तफिज
[43:35]नहीं हो सकते लेकिन अगर आपको उठा दिया और आपने बा झाक
[43:39]के देखा दोबारा सो गए तो य देख लेना इतनी देर की
[43:43]बेदारी य किसी काम आएगी यह भी काम नहीं जो काम आने
[43:49]वाली बेदारी है व क्या है अब जब आपको पता लग गया
[43:53]कि मौसम अच्छा है बाहर हवा अच्छी चल रही है बारिश हो
[43:59]रही है अपने आप को उठाकर उस तक पहुंचाना बेदार बाकी रहना
[44:02]आप बेदार होते हैं तो आपकी हिस्से बेदार होती है सोते हुए
[44:10]आपके कान फौत तो नहीं हो जाते ना आंखें फौत तो नहीं
[44:14]हो जाती नाक मर तो नहीं जाती लेकिन अगर दिमाग सो रहा
[44:22]हो तो नाक सांस लेने के बावजूद खुशबू सू कान बंद तो
[44:29]नहीं हो जाते नींद का मतलब तो यह नहीं कि आपके कान
[44:32]में आक किसी ने कोई चीज डाल द आपको कोई आवाज सुनाई
[44:36]नहीं देगी नहीं दिमाग सो जाए तो कान होने के बावजूद भी
[44:40]सुनता तब अगर किसी का कल्ब सो रहा हो तो रहमत के
[44:47]होते हुए भी उसे रहमत दिखाई मानविथ को बाकी रखने के लिए
[44:54]बुनियादी तौर पर उस बेदारी को बाकी रखना जरूरी अब यह बेदारी
[45:01]इब्तिदा तौर पर जब आपको नींद आ रही होती है आपकी आंखें
[45:06]बंद हो रही होती है आप अपने आप को झटके देकर बार-बार
[45:08]हिला जुला करर अपने आप को बेदार रखते यह बेदारी बुनियादी तौर
[45:16]पर जहां चाहिए आज आपने जो भी किया जितना आप खुलूस और
[45:18]इसमें कोई शक ना करें शैतान को कहीं पर भी अपने दिल
[45:21]में आने ना दे आपने अगर इंशाल्लाह खुलूस नियत के साथ आज
[45:25]की शब में तौबा की खुदा का वादा है वो जरूर कबूल
[45:27]करता है अपने बंदों से ये बाता है उसका शैतान का काम
[45:31]है कि वो आपके अंदर वसवसे डाले और फिर ये वसवसे डालकर
[45:38]वो दोबारा आपको उस तरफ ले जाने की कोशिश करेगा अब यह
[45:39]बेदारी आपने यहां तक रखनी है मैंने आज की शब इबादत कर
[45:44]ली बस अब कोशिश करूं जितना अपने आपको को गुनाहों से खुद
[45:50]गुनाहों के मुकाबले पर आपकी अटेंशन आपके अपने अंदर उस बेदारी की
[45:57]कैफियत को बाकी अब अपने आप को जगाने के लिए आमतौर पर
[46:05]क्या होता है कहते हैं ऐसी नाजुक चीज हाथ में पकड़ लो
[46:06]कि अगर ये गिरी तो बड़ा नुकसान हो जाएगा ऐसे ही है
[46:10]ना अब उस चीज को हाथ में पकड़ के कि मुझे नींद
[46:13]का झटका ना लगे आप अपने आप को बेदार रखेंगे कि मुझे
[46:18]झटका नहीं लगना चाहिए भाई यही बेदारी हमने आज की शब के
[46:21]बाद गुनाहों की निस्बत रखनी है आप समझ ले अगर आज की
[46:25]शब आपको इबादत का और तौबा का मौका मिल गया आपके अंदर
[46:30]वो नूरानिया पैदा हो गई अब इस नूरानिया को बाकी रखेंगे तो
[46:34]तासीर आपके ऊपर आहिस्ता आहिस्ता खुद बखुदा हों से नफरत पैदा होना
[46:49]शुरू हो देखिए जो आदमी खुदान खस्ता सिगरेट दोशी जैसी बला में
[46:58]मुतला हो जाए उसको उसके धुए बू बदबू जायका कड़वाहट वो सब
[47:02]चीजों का आदी हो जाता है लेकिन यही शख्स अगर हिम्मत करे
[47:10]और कुछ अरसे के लिए छोड़ दे एक वक्त ऐसा आता है
[47:12]कि इसी सिगरेट पीने वाले को हत्ता धुआ जो लोग सिगरेट नहीं
[47:23]पीते अगर कोई सिगरेट पीने वाला शख्स अपने हाथ उनके नाक के
[47:26]नजदीक लेकर आए तो उनको इतनी शदीद बदबू आती है कि फिर
[47:29]वो कोई सिगरेट पीने वाला उनसे बात करे और उससे सिगरेट के
[47:34]भप के आ रहे हो तो बर्दाश्त हो कहता मैं दूर हो
[47:36]के बात करो उसे अगर खुदान कस्ता खुद मुब्तला हो तो उसकी
[47:46]कसा फत को महसूस नहीं करेगा अब अगर कसा फत को उसकी
[47:50]गंदगी को उसकी बू को महसूस करना है तो पहले कुछ अरसे
[47:55]तो अपने आप को दूर रखना पड़ेगा ना अब अब ये सिर्फ
[48:00]दूर रखना अपने आप को उससे जबरन जिस तरह से भी हो
[48:04]बचा कर रखना बिलखिरिया लेकर आता है ऑटोमेटिक कि पीना तो बहुत
[48:07]दूर की बात है आपको धुआ भी अतरा में कोई पी रहा
[48:12]होगा आपको फौरन बू आएगी आपको बुरा लगेगा एगजैक्टली गुनाहों की निस्बत
[48:16]इंसानी तबीयत ये है जितना आप अपने आप गुनाहों से दूर रखेंगे
[48:22]हर कदम के ऊपर आपके अंदर वो कैफियत पैदा हो रही होगी
[48:24]और एक वक्त आता है यकीन रखिए कि एक वक्त आता है
[48:27]कि आपको उस गुनाह से उतनी ही शदीद नफरत ये नफरत ब
[48:32]गुनाह पैदा हो जाना ही वो नूरानिया है कि जिसको तकवा कहते
[48:40]हैं लिहाजा आज की शब में जब हम मुंजी आलम इमाम जमान
[48:42]अजल अल्ला ताला फरज शरीफ हजरत की विलादत के जश्न के मरहले
[48:50]पर भी हैं तो खुद अब हजरत से भी रतबात पैदा करने
[48:55]का एक रास्ता क्या है अगर आप विलादत पर खुश हो इमाम
[48:59]की तो कोई हि दिया इमाम को देने की जरूरत है या
[49:03]हम सिर्फ वो चाहने वाले हैं जो बस लेने वाले हैं देने
[49:08]वाले नहीं है कुछ चाहने वाले ऐसे होते हैं ना जब तक
[49:12]उनको मिल रहा होता है चाहने वाले होते मिलना बंद हो जाए
[49:15]तो चाहत भी खत्म हो जाती है अब इन लोगों की पहली
[49:21]पहचान यह होती है कि यह हमेशा लेते ही रहते देते नहीं
[49:25]है जो साथ दे भी रहा हो ना उसका देना यह बता
[49:29]रहा होता है कि इसको सिर्फ लेने से मोहब्बत नहीं श से
[49:34]मोहब्बत शख्स की मोहब्बत का इजर कब होता है जब आप खुद
[49:40]से कुछ इमाम को किसी चीज की जरूरत नहीं मगर किस चीज
[49:42]की जरूरत है जिस मकसद के लिए अल्लाह ने इमाम को भेजा
[49:48]कायनात का मकसद क्या है ल जिला हमने नहीं खलक किया जिन
[49:56]को मगर अपनी बात इमाम को अल्लाह ने किस लिए भेजा है
[49:58]इसी हद को हासिल करने के लिए जब अल्लाह ने जिन्नो इंस
[50:05]को खल्क किया है इबादत के लिए तो इमाम को किस लिए
[50:12]भेजा है इन्हीं जिनो इंस को आबिद बनाने में बस इमाम के
[50:15]आने का असल हद क्या है दुनिया में ताकि मुझ जैसे गुनाहगारों
[50:21]को अब्द बनने के मरहले तक पहुंचा सके यह हद है इमाम
[50:23]के आने का इमाम के लिए सबसे ज्यादा खुशी कब होगी जब
[50:28]मैं उनके हद में कहीं उनका मददगार बनूं यह मदद मैंने कैसे
[50:31]करनी है जितना मैं इमाम की मोहब्बत के जरिए से अपने अंदर
[50:37]अब्दत की कैफियत पैदा करने की कोशिश करूंगा उतना मैं इमाम का
[50:39]मददगार होता चला जाऊंगा पस आज की शब में सबसे बेहतरीन तोहफा
[50:45]इमाम को बब्द बनने का भी जो पहला मरहला वो क्या होता
[50:50]है आप काम का ना हो लेकिन नाफरमान नहीं होना चाहिए काम
[50:54]का हो या ना हो लेकिन नाफरमान नहीं होना चाहिए पर ये
[51:01]तर्क नाफरमानी अब्दत की पहली मंजिल है पस अगर आज की शब
[51:02]में मैं इमाम से कोई वादा करके अपने अंदर से मासि अत
[51:07]और गुनाह की कोई एक कैफियत भी खत्म कर रहा हूं मेरे
[51:11]नजदीक इमाम के लिए इससे ज्यादा बेहतर कोई और तोहफा लिहाजा अगर
[51:15]आप आज की शब इमाम को कोई तोहफा देना चाहते हैं अपने
[51:19]आप को लहब यात और लगया से बचाते हुए इबाद तों की
[51:23]तौफीक हासिल करते हुए एक किसी एक गुनाह का मौला मैं कल
[51:26]से गीबत अच्छा अब इसका माना भी यहां पे एक छोटा सा
[51:29]डिफाइन कर दो कि अगर फिर भी हो गई तो नहीं इमाम
[51:32]जानते हैं तुम सिर्फ वादे पे पक्का रहने की वो पता है
[51:35]उनको कि तुमसे एक दिन में नहीं छूटेगी एक महीने में नहीं
[51:39]छूटेगी लेकिन इस वादे को बरकरार रखो क मना नहीं छोडूंगा आपके
[51:42]खातिर और हर दफा जब गलती हो इस्तग फार करो हर दफा
[51:47]गलती हो इस्तग फार करो अगर ज्यादा कसरत से हो रही है
[51:51]तो फिर इस्तग फार बढ़ा दो कुछ अर्से बाद नतीजा खुद बखुदा
[51:57]और जिस दिन आपने छोड़ दी उस दिन आपने अपना तोहफा इमाम
[52:02]तक पहुंचा दि लिहाजा दुआ करते हैं परवरदिगार के हुजूर में के
[52:08]परवरदिगार बह जहरा बहा परवरदिगार दुनिया इस वक्त सारे दीन दुश्मन और
[52:17]इस्लाम दुश्मन कुतों के मजलि के नरग में है जुल्म जोर से
[52:24]भर चुकी है परवरदिगार मुंजी आलम मयत अल्लाह हुज्जत कुबरा इलाहिया इमाम
[52:29]जमान के जुहूर में ताजल के जरिए से इस दुनिया से जुल्म
[52:35]सितम का खात्मा फरमा जालिमों का खात्मा फरमा मुनाफिक को नीस नाबूत
[52:39]फरमा तमाम मोमिनीन को अपने हिज आमान में रख उनकी परेशानियों को
[52:42]दूर फरमा मुश्किलात को आसान फरमा बिल खुसूस जो मोमिनीन जहां जहां
[52:49]दुनिया में बातिल से बरसरे पकार है बारे इलाहा उन सबको नुसरत
[52:54]और कामयाबी इनायत फरमा ईरान में इराक में शाम में लब में
[53:00]कश्मीर में बेहरेन में नाइजेरिया में और बिल खुसूस गज और फिलस्तीन
[53:08]के मुसलमानों को नुसरत और कामयाबी इनायत फरमा दीन दुश्मन अहले बैत
[53:10]दुश्मन कुतों को नीज तो नाबूत फरमा बीमारों को सेहत कामिल आजल
[53:18]इनायत फरमा हम सबको इमाम के आवान अनसार में शुमार होने की
[53:21]तौफीक इनायत फरमा और बार लाहा आज के तमाम सिलसिले का जो
[53:26]भी अजर सवाब है उसे हाजरी के मरह मीन को ई साल
[53:28]फरमा और साथ-साथ इन मरह मीन जुबैदा जुबैर जुबैदा बिनते हसन अली
[53:42]दोस्त मोहम्मद इने करम अली फजल अब्बास इब्ने मोमिन अली और मौलाना
[53:50]सैयद रजा शाह मौलाना सैयद मेहदी शाह और मौलाना सलमान हामिद इन
[53:55]तमाम मरहन को इसका सवाब इल फरमा और बारे इलाहा इन तमाम
[54:03]मरहन की मगफिरत फरमा सबको जवारे सयद शोहदा में जगह इनायत फरमा
[54:08]रबना तकल मनाया अरहम रान अपने तमाम मरहन शोहदा मिल्लत इस्लामिया बिल
[54:16]खुसूस शोहदा गज फिलस्तीन और बिला कस मरहूम जुबैदा बिनते हसन अली
[54:21]दोस्त मोहम्मद ने करम अली फजल अब्बास इब्ने मोमिन अली और मौलाना
[54:27]सैद रजा शाह मौलाना सद महदी शाह मौलाना सलमान हादी की अरवाह
[54:30]को ई साल फरमा दीजिए बिस्मिल्लाह
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