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[Seminar] Parent Guidance | H.I Syed Zaigham-ur-Rizvi
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24/07/29
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Record date: 2011 - Parent Guidance Seminar
#tips #parenting #communication #childrens
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2011 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
For more details visit:
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Transcript
[0:21]बिल्ला समी अलीम मन शतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल हमदुलिल्ला ही
[0:42]वकफा व सलामन अला बादन स्तफा लान अलाल अया अम्मा बाद काला
[0:59]रसूलल्लाह अले वाला लाते व सना इन्नाले कुल्ले शजर समरत व समर
[1:11]तोल कलब अल लद बुजुर्गा [संगीत] मोहतरम और बरादर ने अजीज आज
[1:32]के इस सेमिनार का मौजू दौरे हाजिर में वालदैन की जिम्मेदारियां [संगीत]
[1:52]है आपने [संगीत] अभी डॉक्टर साब [संगीत] से इस दौर की मुश्किलात
[2:06]की तरफ रुहाना को मुलाहिजा [संगीत] फरमाया यह हदीस जिससे मैं गुफ्तगू
[2:25]का आगाज कर रहा हूं इसमें सरव कायनात ये इरशाद फरमाते हैं
[2:39]केनाल कुले शजर समरत बेशक हर दरख्त के लिए कोई ना कोई
[2:52]फल होता है व समर तोल कल्बे अल और दिल का फल
[3:07]समर कल्ब औलाद [संगीत] है गुफ्तगू के बहुत से रुख हो सकते
[3:17]हैं कि जिन पर गुफ्तगू की जाए लेकिन मैं अपने वक्त के
[3:26][संगीत] अंदर इस्लाम एक ऐसा दीन है कि जिसने तमाम मसाइल [संगीत]
[3:43]को ब सूरत वाज और तफसील बयान फरमाया है हमारी कमी यह
[3:55]है कि हम किसी एक रुख पर निगाह डालते हैं और बहुत
[4:02]से रुख हमारी निगाहों से झल रह जाते हैं इस्लाम एक जामे
[4:13]दीन है और तमाम तर इंसानी जरूरियत को अपने दामन में रखता
[4:18]है लिहाजा जरूरी है कि हम एक जामे नजर इस्लाम पर डाले
[4:26]और कोई ऐसी मुश्किल नहीं है कि जिसका का हल इस्लाम ने
[4:33]बयान ना किया हो या हमारे पास ना हो हम दीन इस्लाम
[4:44]को रखते हुए और मजहब तश्य से वाबस्ता होकर तमाम मुश्किलात का
[4:51]हल रखते हैं और किसी तबार से भी हम दुनिया के सामने
[5:00]एहसास कमतरी का शिकार नहीं है हां अगर हम अपनी [संगीत] तालीमाबाद
[5:30]के मां-बाप का हक औलाद पर बहुत ज्यादा है और कुराने मजीद
[5:38]ने भी मुख्तलिफ आयातो रवा मुख्तलिफ आयात में बयान फरमाया है और
[5:42]रवाया में भी इसकी निशानदेही की गई है कि वालदैन का कितना
[5:48]हक है औलाद पर और कोई इसमें शक शुबह की गुंजाइश नहीं
[5:58]है लेकिन इस रुख को हमारे सामने ज्यादा बयान किया गया है
[6:01]और हमने इस रुख को ज्यादा सुना है फला तमा कुराने मजीद
[6:08]ने बिल्कुल वाज तौर से कहा खबरदार उनकी बात पर उफ भी
[6:16]ना कहना और उलमा ने कहा कि अगर लफ्ज उफ से छोटा
[6:18]कोई लज होता तो शायद कुरान उससे भी मना कर देता अल
[6:28]जनतो तता अदा मिल हाथ जन्नत मां के पांव के नीचे है
[6:37]रिजला मन रजल वालिद अल्लाह की रजा वालिद की रिजा में है
[6:45]और अल्लाह की नाराजगी वालिद की नाराजगी में है ऐसी अदीस और
[6:56]ऐसी आयात हमने सुनी है और है बयान किया गया है लेकिन
[6:58]यह तस्वीर का एक रख [संगीत] है तस्वीर का दूसरा रुख भी
[7:08]है के औलाद का हक है वालदैन [संगीत] पर यह बच्चे जो
[7:16]हमारे घर में पल रहे हैं क्या हमने यह महसूस किया है
[7:21]कि इनका हक भी हमारे ऊपर है और अगर किसी ने महसूस
[7:27]किया भी है तो व समझता है कि बस इनकी गजा का
[7:32]एहतमाम कर दिया जाए और इनके पहनने का एहतमाम कर दिया जाए
[7:34]और बहुत से बहुत किसी स्कूल में दाखिला करा दिया जाए और
[7:38]बस इतना हक समझ के लोग अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं कि
[7:45]हम सुबक दोष हो गए लेकिन इस्लाम ने किस जगह से हक
[7:52]को शुरू किया है मैं आपके सामने दो एक बातें जल्दी जल्दी
[7:56]अर्ज करके हदीस से और आगे बढ़ना चाहता खुद सरव कायनात अलीला
[8:05]तत वल करम प्रशाद फरमाते मिन हल वल देला वाद सला [संगीत]
[8:22]सा बेटे के हक में से जो उसके वालिद पर है यह
[8:28]तीन चीजें हैं या औलाद का हक जो अपने वालिद या वालदैन
[8:33]पर है उनमें से यह तीन बातें हैं जिसको पैगंबर नकल फरमाते
[8:41]हैं क्या यना महु नामा महु सबसे पहला हक यह है कि
[8:50]अपनी औलाद का बेहतरीन नाम रखे आप महसूस कर रहे हैं कि
[8:55]इस्लाम वो दन जो औलाद को बा और मां के सामने उफ
[9:02]करने से मना कर रहा है वही दीन इस बात का तकाजा
[9:08]करता है कि यह तुम्हारी औलाद का तुम पर हक है कि
[9:12]उसका अच्छा नाम रखो अभ अच्छा नाम किसे कहते हैं एक दूसरा
[9:17]बाब यहां से खुल जाएगा मैं उसको उस पर वारिद नहीं होना
[9:24]चाहता ल किताब और उसे किताब की तालीम दे किताब से मुलाद
[9:32]कुराने मजीद ल और उसकी तजवीज करे जब वहद बलू से आगे
[9:39]निकल जाए और इस तरह की और भी अदीस है अदब लाद
[9:49]कुला सला से सान अपनी औलाद का अदब करो अदब सिखाओ इन
[9:54]तीन ससल तों पर ब नबी कुम वहुले बही वराल कुरान नबी
[10:04]की मोहब्बत पर मो अदब करो बच्चों को अहले बैत की मोहब्बत
[10:12]पर महतब करो और तिलावत कुरान अपने बच्चों को सिखाओ या जैसा
[10:16]कि जनाब मौला कायनात ने इरशाद फरमाया हलवा ना अदबा ल कुरान
[10:36]औलाद का हक बाप पर यह है कि उसका बेहतरीन नाम रखे
[10:42]और उसको बेहतरीन अदब सिखाए और उसको कुरान की तालीम दे इस
[10:47]जगह से दन गुफ्तगू को शुरू कर रहा है अब आप खुद
[10:56]सोचे इस जगह पर कि वो इस्लाम और वो दीन कि जो
[11:01]औलाद का हक समझता है बाप पर और मां पर नाम रखने
[11:06]की हद तक वह अदब तालीम तरबियत में किस हद तक हक
[11:10]जानता होगा तस्बी की गई कि तुम्हारी औलाद तुम्हारे बच्चे उस दरख्त
[11:20]की मानिंद है कि जो अभी जमीन से निकला हो इसको जिस
[11:24]तरफ मोड़ दिया जाए उस तरफ मुड़ जाता है और अगर यह
[11:31]बड़े हो जाए बड़ा हो जाए यह दरख नावर हो जाए अब
[11:36]उसको मोड़ा नहीं जा सकता लिहाजा उस वक्त तुम्हारी जिम्मेदारी है कि
[11:40]जब यह निहाल की सूरत में हो कि जिधर चाहे इसे मोड़
[11:45]लो अजीजो यह बात वाक काबिले गौर है बहुत ही अच्छा उनवान
[11:52]है सेमिनार का कि हम इस बात पर गौर करें परवरदिगार आलम
[11:59]ने ने हमको औलाद की शक्ल में जो नेमत अता की है
[12:04]और यह हमारे सामने जो नेमतें मौजूद है औलाद की शक्ल में
[12:10]हमें यह नहीं समझना चाहिए कि यह हमारी मिल्कियत है या यह
[12:12]हमारे घर के अंदर नहीं यह परवरदिगार की अमानत हैं हमारी आगोश
[12:19]में परवरदिगार ने इन अमानतोंबझने [संगीत] दन चाहता है और वैसी तरबियत
[12:35]करके इन औलाद को इन नस्ल को समाज के हवाले करें दीन
[12:43]के हवाले करें दुनिया के हवाले करें कि जैसी उस वक्त दीन
[12:47]की जरूरत हो ऐसा नहीं है कि यह हमारे इख्तियार में है
[12:50]और जो जी चाहे हमने हमारे हमारा बेटा है हमारी बेटी है
[12:55]नहीं बात हमारे और हमारी की नहीं है बात यह है कि
[13:01]यह परवरदिगार की अमानत है मालिक ने हमको इसका अमीन बनाया है
[13:04]और हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस की कैसी तरबियत कर रहे
[13:09]हैं और इस जगह पर जब इंसान ऐसी नजर रखता है तो
[13:17]फिर एक एक चीज पर उसकी नजर होती है बच्चा किस तरीके
[13:23]से पढ़ रहा है बच्चे की रफ्तार कैसी हो रही है बच्चे
[13:29]का अंदाज कैसा हो रहा है है कहीं कोई चीज इसकी इधर
[13:31]उधर तो नहीं हो रही यह किसकी जिम्मेदारी है मां-बाप की जिम्मेदारी
[13:37]है वालदैन की जिम्मेदारी है स्कूल में जाने के बाद टीचर्स की
[13:42]जिम्मेदारी है मैं उससे इंकार नहीं कर रहा लेकिन वह किसी मकसद
[13:46]के तहत यह काम कर रहे हैं उनको वह दिलचस्पी पैदा नहीं
[13:49]हो सकती जो मां-बाप को दिलचस्पी पैदा होगी अपनी औलाद से लिहाजा
[13:55]सबसे पहली जिम्मेदारी खुद मां बाप की आती है कि अपने बच्चे
[13:58]पर हर तबार नजर रखें और यहां तक के ना फकत यह
[14:05]कि बाज जगहों पर बच्चों का ख्याल रखा जाए बल्कि उल्टी तरबियत
[14:08]की जाती है अगर आप पूछे जो अहल है उनसे तो मेरी
[14:14]नजर में जो मुझे अब तक लगा सबसे सख्त चीज जो मुझे
[14:19]अब तक नजर आई है वो बच्चे की तरबियत है सबसे सख्त
[14:23]मसला जो मेरी नजर में अब तक गुजरा है वो बच्चे की
[14:28]तरबियत है क्यों इसलिए कि बच्चा हमारी जबान से कम चीजें अज
[14:37]करता है हमारे किरदार से ज्यादा चीजें अज करता है आप घर
[14:40]में बैठे हैं किसी ने दक्कल बाब किया जा कह दो नहीं
[14:47]है पापा इस एक हरकत ने बच्चे को झूठ सिखा दिया अब
[14:50]इसके बाद जितनी चाहे रवायत पढ़े जितनी चाहे आयतें बयान करें खुद
[14:57]हमने अपनी एक गलत रविश के जरिए से बच्चे को झूठ बोलना
[15:02]सिखा दिया एक मर्तबा मां-बाप के दरमियान कोई चप कलिस हुई और
[15:07]आपस में निजा पैदा हुआ उस छोटे मामूली छो मुख्तसर से बच्चे
[15:12]ने लड़ना झगड़ना सीख लिया किससे सीखा मां-बाप के जरिए से आप
[15:19]महसूस कर रहे हैं कितना सख्त मसला है तरबियत के बच्चे के
[15:24]लिए अब उससे लाक कहते रहिए कि बच्चा बेटा इस तरीके से
[15:29]बात करनी चाहिए ये अंदाज उसे क्या मालूम अजब सी मुनाफिक का
[15:31]शिकार होता है बच्चा अपने घर के अंदर कि जब बाहर आकर
[15:36]के कहीं तकरीर सुनता है किसी के वाज में नसीहत में जाता
[15:41]है या खुद मां-बाप के जरिए से कहते तो यह हैं यह
[15:42]लोग कि ऐसे बोलो ऐसे अदब करो इस तरीके से लेकिन जब
[15:47]खुद आते हैं मैदान में तो उनका उनकी रविश दूसरी होती है
[15:51]और अजब सी मुनाफिक का शिकार होता है बच्चा और इसी जगह
[15:54]से कौल और अमल में तजत को सीख लेता है ये सारी
[15:59]चीज कैसे ट्रांसफर हो रही है मां-बाप की गलत रविश के जरिए
[16:05]से हमारे उस्ताद ने बहुत अच्छा जुमला कहा कि बाज बच्चे वो
[16:08]हैं कि अगर उनके मां-बाप ना हो तो अच्छी तरबियत पा जाएंगे
[16:13]क्योंकि कभी-कभी मां-बाप गलत अंदाज से तरबियत करते हैं उन्होंने मिसाल दी
[16:20]कि मैं बाजार से गमला खरीद के लाया और उसको अपने घर
[16:22]में रखा कमरे के अंदर व पानी दिया खूब बहुत ज्यादा सारा
[16:25]ख्याल उसका रखा वो सूख गया खराब हो गया जाके उसे छत
[16:32]पर फेंक है कुछ दिन के बाद फिर हरा हो गया क्या
[16:36]हुआ कहा उसको जिस चीज की जरूरत थी हम वो नहीं दे
[16:40]रहे थे उसको जरूरत थी धूप की उसको जरूरत थी आजाद फिजा
[16:44]की हम उसके अंदर पानी डाल रहे थे बार-बार तो जिस चूंकि
[16:50]हम उससे वाकिफ नहीं थे लिहाजा हम अपने तबार से उसकी तरबियत
[16:53]कर रहे थे लेकिन कानह उसे खराब कर रहे थे और जब
[16:58]उसको जाक डाल दिया तो फिर हरा हो गया वो क्योंकि उसके
[17:02]जिस चीज की जरूरत थी वो मिल गई इसी तरीके से हम
[17:08]अपनी औलाद के सिलसिले में यह महसूस करें कि इसको जरूरत किस
[17:14]चीज की है और यह कौन बताएगा कि किस चीज की जरूरत
[17:16]है जिसने इस बच्चे को पैदा किया है वो जो नबाज फितरत
[17:23]है वो जिनके हाथ में नबज कायनात है उन्होंने बयान किया है
[17:28]कि किस तर अपने बच्चे की तरबियत करो इसीलिए कहा गया कि
[17:36]शादी और इज दिवाज उस वक्त कामयाब होता है जब यह दोनों
[17:39]दुनिया से जाए तो अपने से बेहतर नस्ल छोड़ के जाए अ
[17:44]महसूस करना किस हद तक इस्लाम जोर दे रहा है बयान किया
[17:50]गया कि अपने बच्चों की तरबियत अपनी तरीके से ना करो बल्कि
[17:56]अपने बच्चों को इस तरीके से वादा करो कि वह समाज में
[18:02]50 साल के बाद उन्हें काम करना है तुम अभी की नस्ल
[18:07]हो तुम्हें इस वक्त हम और आप अभी की नस्ल है हमें
[18:11]इस वक्त जमाने को देखना है इस वक्त काम करना है लेकिन
[18:12]हमारी गोद में जो बच्चा परवान चढ़ रहा है यह 50 साल
[18:17]के बाद जमाने के सामने पेश होगा तो उस वक्त हालात क्या
[18:21]होंगे उस तबार से बच्चे की तरबियत करनी चाहिए उस तबार से
[18:27]हमको बच्चे को पालना चाहिए ये तरबियत और जिम्मेदारी के तबार से
[18:37]मैं दो चार जुमले कहना चाहता था आपके सामने जब दौरे हाजिर
[18:41]में हमने मौजू रखा दौरे हाजिर में वालदैन की जिम्मेदारियां तो उसके
[18:45]मानी यह है कि हम हम बनवाने बाप और एक खातून बनवाने
[18:51]मां दौरे हाजिर को पहचानती हो तवज्जो कीजिएगा और हमको यह मालूम
[18:58]हो कि दौरे हाजिर में क्या हो रहा है और उसका जवाब
[19:02]हमें बच्चे को कैसे देना है देखिए बाज जगहों पर इतनी आसा
[19:14]नियां बच्चे को दी जाती हैं कि वह आसाया उसके लिए मुजर
[19:18]हो जाती है जो मुंह पर आया फट से हाजिर है सारी
[19:21]चीजें फराह कर दी बच्चे के लिए और कभी यह ना देखा
[19:28]कि बच्चे ने इन हमारी फराह करदा चीजों से इस्तफा कैसे किया
[19:33]हमें मोबाइल चाहिए हाजिर है हमें गाड़ी चाहिए हाजिर है हमें इंटरनेट
[19:42]चाहिए हाजिर है हमें ये जो भी कहता चला गया हम देते
[19:44]चले गए लेकिन हमने पलट के यह नहीं देखा कि यह इससे
[19:50]इस्तफा कैसे कर रहा है आप खुद बताएं कि क्या एक बच्चा
[19:55]जिसको अभी ड्राइविंग नहीं आती आप उसके हाथ में मोटरसाइकिल पकड़ा देंगे
[19:59]कहा नहीं कभी नहीं खतरा है बच्चे के लिए पहले उसको ड्राइविंग
[20:07]सिखाएंगे या सिखवा जाएंगे और जब मुतमइन हो जाएंगे कि इसे चलाना
[20:11]आ गया तब गाड़ी देंगे उसके हाथ में ऐसा ना हो क
[20:17]एक्सीडेंट कर बैठे ऐसा ना हो क खतरा हो जाए कि हुजूर
[20:22]यह खतरा किस हद तक हो सकता है इसके जिस्म के हद
[20:27]तक खतरा है अगर यह एक्सीडेंट में डेंट कर दिया खुदा ना
[20:30]करता इसने पैर टूट जाएगा हाथ टूट जाएगा बहुत से बहुत मर
[20:35]जाएगा और तो कुछ नहीं होगा इससे ज्यादा इसकी दुनिया तक के
[20:37]खतरे की हमने सोच ली लेकिन यह आला जो बना में मोबाइल
[20:42]या बना में इंटरनेट या बना में न जाने क्याक मुसीबतें आप
[20:47]नेट पर जाके देखें एक खराब कारी की दुनिया मौजूद है बहुत
[20:51]अच्छा रिलेशन पैदा कर रहे हैं फ के जरिए से बेटी ने
[20:56]या बेटे ने फ बनाई बाप ने कहा क्या कहना अब तो
[21:00]दुनिया से तुम्हारा राबता हो गया कभी हमने बनवाने बाप ये महसूस
[21:04]किया कि ये कर क्या रहा है इसके [संगीत] ऊपर जब तक
[21:09]हम मुतमइन नहीं हो गए कि हमारे बच्चे को इंटरनेट से सही
[21:15]इस्तफा करना आ गया हमने उसके हाथ में नेट दिया कैसे ये
[21:19]बिल्कुल इस तरीके से है कि जैसे हमने अपने उस बच्चे को
[21:25]जिसको ड्राइविंग नहीं आती थी उसके हाथ में मोटरसाइकिल थमा के सड़क
[21:27]पर बेज दिया वहां समझ में आया कि एक्सीडेंट होगा तो यह
[21:31]मर सकता है यहां समझ में नहीं आया कि अगर एक्सीडेंट होगा
[21:36]तो उसकी फिक्र मर सकती है इसकी रूह मुर्दा हो सकती है
[21:44]इसकी आखिरत तबाह हो सकती है नहीं यहां पर हम मॉडर्न होने
[21:46]की है इसके नाम पर सब कुछ करने के लिए आमादा है
[21:50]क्यों इस बच्चे को खराब कौन कर रहा है क मां-बाप ये
[21:56]किसकी जिम्मेदारी है इसे कौन देखेगा उस्ताद ने इंटरनेट बच्चों के लिए
[22:08]जिद की उन्होंने खरीदा खुद बता बयान किया क्लास में आकर के
[22:10]खरीदा और खरीदने के बाद कंप्यूटर को कहां रखा हॉल में कि
[22:18]जहां सबकी नजर पड़ रही हो सिर्फ एक इस तरीके से कितना
[22:28]मॉनिटर का रुख भी मसल दीवार की तरफ वहां से निकाल के
[22:34]हॉल में रखा गया लाक के देना है इस तरीके से बेटे
[22:39]ने कहा कि क्या आपको हम पर एतमाद नहीं है कहा नहीं
[22:41]हमको तुम पर तो एतमाद है लेकिन तुम्हारे सामने जो बैठा है
[22:47]उधर उस पर एतमाद नहीं है महसूस कर रहे हैं आप यह
[22:51]कौन करेगा यह मां बाप की जिम्मेदारी है तो पहले दौरे हाजिर
[22:58]को पहचाने इस वक्त किस तरीके से पर हमला किया जा रहा
[23:01]है मेरे अजीजो इस्लाम और इस्लाम में खुसूस तश्य इस वक्त दुनिया
[23:08]के लिए मोरि यलगार करार पा चुकी है जमाने में किसी भी
[23:14]दौर में आप देखें तीन तरीके से व ज्यादा ना हो जाए
[23:19]मेरा तीन हमले किए जाते हैं तवज्जो कीजिएगा और इशारा किया भी
[23:25]गया है तीन हमले होते हैं और तीन तरह की जंग होती
[23:31]है जो इन तीन जंगो से कामयाब हो जाता है वह कामयाब
[23:32]हो जाता है पहली जंग होती है जिसको असल की जंग कहा
[23:37]जाता है और म मालिक ने लड़ी है पहली जंग में इसी
[23:42]जगह तोड़ते हैं लाक के असले की जंग में दुनिया ने असलहे
[23:47]की जंग में हमें देख लिया कि जितना हमारा खून बहाया जाता
[23:54]रहा हम और आगे बढ़ते चले गए हमसे ज्यादा असलहे किसी कौम
[24:02]पर इस्तेमाल ही नहीं किए गए आप उठा के तारीख देखें दीवारों
[24:05]में हम चुने गए गारा हमारे खून से बनाया गया सुबह से
[24:10]शाम तक हमें कत्ल किया सब कुछ हमारे साथ किया गया लेकिन
[24:12]आज भी कायनात में हर जगह शयत मौजूद है तो यह तजुर्बा
[24:16]करके देख लिया गया कि इनको इससे तबाह नहीं किया जा सकता
[24:21]ईरान की जंग में आप देखें 8 साल तक पूरी दुनिया लड़ती
[24:22]रही ईरान से कुछ नहीं कर सके जिस वक्त ईरान और इराक
[24:28]की जंग खत्म हुई है तो ईरान के पास 11 मुल्क के
[24:33]कैदी मौजूद थे इसके माने ये कम से कम 11 मुल्की फौज
[24:36]तो लड़ी रही थी इराक की तरफ से एक बालि जमीन ईरान
[24:41]की नहीं ले सके और बैनल मिलर और इंटरनेशनल लेवल पर इराक
[24:45]जारे करार पाया ईरान मजरूह करार पाया तो उन्होंने जंग करके देख
[24:52]लिया कि हम इनसे गर्म जंग में नहीं जीत पाए और यही
[24:58]वजह है कि आज तक दोबारा हिम्मत नहीं की गई ईरान को
[25:02]छेड़ने की असल की जंग में उसके बाद जंग शुरू हुई इते
[25:10]सादी और एकल वर इ सादी पाबंदियां लगाई जाती रही हर तबार
[25:14]से और यह मुल्क का नाम ले रहा जंग का मद मुलक
[25:18]करार पाता है ना कम के लिए इसी तरीके से र य
[25:23]मौजू नहीं और तफसील से वारिद होता इस पर साल से बार
[25:29]हर मर्तबा कोई ना कोई नई पाबंदी कोई ना कोई नया तरीका
[25:34]लेकिन उसके बाद भी उन्होने देख लिया कि इस पर भी हम
[25:35]नाकाम हो गए और दुनिया सोच नहीं पा रही कि वह मुल्क
[25:40]जिसकी आबादी 30 मिलियन और 35 मिलियन हो तो व 20 पर
[25:47]गेहूं खरीद रहा है बाहर से और जब उसकी आबादी 70 मिलियन
[25:51]है तो गेहूं बेच रहा है यह कैसे हुआ और इतनी इक्त
[25:57]सादी पाबंदियों के बावजूद तो उन्होने यह भी देख लिया कि इस
[26:03]जंग में भी हम इन पर काबू नहीं पा सकते तयो को
[26:06]तोड़ने के लिए क्या कुछ नहीं किया गया तारीख में फको की
[26:12]नौबत आई है इतना इकोनॉमिकल वार इस तरीके से हो चुकी थी
[26:15]एक जमाने में के एक सालिम कपड़ा बचा था सैदा नियों के
[26:20]पास जिसको पहन के एक के बाद एक नमाज पढ़ती थी यह
[26:25]सब दुनिया ने करके देख लिया हमारे खिलाफ और इस जंग में
[26:31]भी लोग कामयाब नहीं हो सके हमारे मुकाबले में अब हमारा जमाना
[26:36]इस वक यह करंट मीडिया प्रिंट मीडिया कौन कन से मीडिया इस
[26:39]वक्त यह बात चल रही है यह आखरी जंग का जमाना है
[26:45]और इस जंग में अगर हम कामयाब हो गए तो फिर उसके
[26:50]बाद अल क फर है वो कौन सी जंग है जो तीसरी
[26:55]जंग कहलाती है वो जंग है कल्चर और सकाफत की जंग इस
[26:59]वक्त ईरान दूसरे मलिक इस जंग को लड़ रहे हैं और हम
[27:06]और आप भी अपने घर में बैठ के इसी जंग को लड़
[27:10]रहे हैं जो सकाफत की जंग है आपने सुना तफसील से और
[27:15]कल्चर की जंग है इसका दफा हम कैसे कर सकते हैं देखिए
[27:18]अगर किसी बच्चे से कहना है कि य गजा हराम है इसे
[27:22]ना खाओ तो जरूरी है कि उसके मुकाबले में उसे हलाल गजा
[27:28]दी जाए क्योंकि जब बच्चा भूखा है उसको भूख लगी है और
[27:32]आप कह रहे ये हराम है इसे ना खाओ तो फिर बिलख
[27:36]क्या खाए उसका इंतजाम हमारी जिम्मेदारी बनवाने बाप एक मां की जिम्मेदारी
[27:41]बनवाने मां तो इसके मुकाबले में अल्टरनेट उसे कुछ देना चाहिए तो
[27:48]अगर हम सकाफत की जंग लड़ रहे हैं कल्चरल की जंग लड़
[27:50]रहे हैं और यह कह रहे हैं कि ये कल्चर खराब है
[27:53]यह सकाफत अच्छी नहीं है तो उसके मुकाबले में हमें कोई सकाफत
[27:58]उसे देना चाहिए क्योंकि बच्चा एसास कमतरी का शिकार नहीं है उसको
[28:05]अभी इतनी तवज्जो नहीं है कि क्या चीज है हम एसास कमतरी
[28:10]का शिकार तो नहीं है ऐसा तो नहीं है कि मुश्किल हमारे
[28:15]साथ पैदा हो रही है वालदैन के साथ कि अगर उसको हम
[28:19]एक चीज से रोक रहे हैं तो दूसरी चीज अल्टरनेट क्या दे
[28:24]उसे कौन सी सकाफत है कि जो इस वक्त गरब की सकाफत
[28:28]के सामने खड़ी हो सके का सिर्फ हमारा इस्लामिक और खुसूस अहले
[28:36]बैत की सकाफत है कि जो रोक सकती है इस दुनिया की
[28:38]तमाम बुरी सकाफत से और इसीलिए सरकार ने फरमाया अलाला अपनी औलाद
[28:49]का अदब करो इन तीन सतो पर सबसे पहली चीज नबी की
[28:56]मोहब्बत पैदा करो बच्चों के अंदर े अहले बैत और अहले बैत
[29:03]नबूवत की मोहब्बत पैदा करो रा कुरान और कुरान की तिलावत और
[29:07]कुरान की के पढ़ने की तरफ रबत दिलाओ बच्चों को आप सच
[29:13]बताए कि बनवाने बाप या बनवाने मां हमने कितना वक्त अपनी औलाद
[29:18]को इस चीज की तरबियत पर दिया है एक दिन अगर हमारा
[29:26]बच्चा स्कूल ना जाए मसलन तो जमीन आसमान गुलाबे एक करने पर
[29:29]आमादा हो जाते हैं इतना पैसा हम खर्च कर रहे हैं इतना
[29:33]अच्छा स्कूल है वो अच्छा कैसा है वो आप जानते हैं मुझे
[29:37]उस पर इस वक्त बहस नहीं करना मैं तो एक कुल्ली बात
[29:38]कहना चाह रहा हूं लेकिन यही बच्चा मसलन अगर नमाज नहीं पढ़ता
[29:45]तो हमारी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा यही बच्चा मसलन
[29:50]अगर रोजा नहीं रखता तो हमें कोई परेशानी नहीं है यही हमारी
[29:56]बच्ची मसलन अगर खुदा ना करता बे हिजाब है तो हमें कोई
[29:59]परेशानी नहीं है तोय सकाफत को तो हम खुद बिगाड़ रहे हैं
[30:03]मुसीबत को तो घर में हम खुद ला रहे हैं और जब
[30:08]हमने इस तरीके से बच्चे की तरबियत की है तो अब फिर
[30:13]क्यों रोना है कि हमारी औलाद खराब हो रही है खराब हो
[30:18]नहीं रही है हमने खुद खराब किया है मैं अपने लिए अर्
[30:21]कर रहा हूं आप तो सब मुझसे बेहतर है लिजा अगर इस
[30:26]वक्त दुनिया की हमें नजर रखनी चाहिए बनवाने मां बाप यकीनन याद
[30:29]रखें इस चीज को कि अगर हमने कहीं पर कोताही की है
[30:36]औलाद की तरबियत में तो कब्र से लेकर के मचर तक जवाब
[30:40]दे है क्योंकि इससे बड़ी चीज इससे बड़ी नेमत परवरदिगार ने हमें
[30:46]दी ही [संगीत] नहीं ला आले मोहम्मद के बाद अगर कोई नेमत
[30:53]बनवाने नेमत परवरदिगार हमें अता कर रहा है तो औलाद है और
[30:59]इसमें कितनी हदीस मैं इस वक्त नहीं पढ़ना चाहता आपके सामने कि
[31:03]यही हमारी आक बत का जरिया बन जाती है औलाद यही वह
[31:08]चीज है कि जो मरने के बाद भी जिसका खैर जारी रहता
[31:12]है हमारे लिए समाज और मुशे की तामीर यही बच्चे करेंगे जो
[31:21]हमारी आगोश में है दन की बका के जिम्मेदार यही बनेंगे कल
[31:25]तबलीग दन के जिम्मेदार यही बनेंगे जो हम हमारी आगोश में है
[31:30]हमने किस तरीके से इनकी तरबियत की है क्या किया है इनके
[31:35]लिए कितना वक्त सर्फ किया कितना पैसा सर्फ किया कितना हमने इन्ह
[31:38]वक्त दिया क्या बनवाने बाप हमारी जिम्मेदारी नहीं बनती कि शाम को
[31:41]बैठ के देखे आज बच्चे ने स्कूल में पढ़ा क्या क्या हमारी
[31:47]जिम्मेदारी नहीं बनती कि हम चेक करें किसी उनवान से कि यह
[31:52]क्या हो रहा है रात में अगर मसलन एक बजे डेढ़ बजे
[31:53]बच्चा मैसेज कर रहा है तो कहां कर रहा है अगर मोबाइल
[31:58]इसका चल रहा है तो क्यों चल रहा है अगर रात में
[32:03]2:30 बजे 3:00 बजे मेरी बेटी मेरा बेटा इंटरनेट में बैठ के
[32:09]कहीं कुछ कर रहा है तो क्या कर रहा है आखिर कौन
[32:11]जिम्मेदार है इसका मां बाप जिम्मेदार है कुछ लोग तो इधर से
[32:20]इतनी आसा नियां देते हैं कि वो आसा नियां व राहतें वो
[32:25]आइश बच्चों को खराब करती हैं कुछ लोग उस तरफ से बरक्स
[32:27]इतनी सख्ती करते हैं कि वह सखिया बच्चों को बर्बाद कर देती
[32:32]है इस्लाम दोनों का मुखालिफ है ना इस तरीके से बे नकेल
[32:44]आसाया फरा हम की जाए लायली हो जाए औलाद और ना उस
[32:49]तरफ से इतनी सख्ती की जाए औलाद पर कि वह मुखालिफत पर
[32:53]आमादा हो जाए पैगंबर इशाद फरमाते हैं सला [संगीत] अम औलाद कोम
[33:11]न आदाब अपनी औलाद की इज्जत करो अपनी औलाद का एहतराम करो
[33:21]और उनके अदब को बेहतर बनाओ ऐसा नहीं है कि सिर्फ ला
[33:29]जिम्मेदारी है कि मां बाप की इज्जत करें नहीं बाज पर मां
[33:33]बाप की जिम्मेदारी है कि औलाद का एतराम करें इस उनवान से
[33:38]परवरदिगार की अमानत जनाब इमाम नीला मकामा अपने घर में बैठे हुए
[33:46]अपनी बीवी और अपने बच्चों के साथ खाना खाने खा रहे थे
[33:53]उनके बच्चे ने प्लेट ली या कोई चीज लेना चा मां ने
[34:01]उसके सामने से प्लेट खींच ली इमाम खुमैनी दस्तरखान से उठकर चले
[34:07]गए और जा के कमरे में बैठे अलग मां समझी कोई तबीयत
[34:14]खराब हो क्या हुआ आई क्या हुआ तुमने बच्चे की बेज्जती की
[34:23]मेरे सामने नजर को देख रहे हैं आप मैं बाप यह मां
[34:28]और कोई नहीं उसके अलावा तुमने उसकी बेज्जती मेरे सामने की यानी
[34:32]हक नहीं है कि हम औलाद की मसलन बेज्जती करें या मसलन
[34:40]उसकी शख्सियत को पामा करें तरबियत शख्सियत की पामा नहीं है अपने
[34:47]बच्चे को बेहतर बनाना है उसके लिए तमाम वसाय फराह करना पड़ेंगे
[34:53]जो इस्लाम ने कहे हैं लिहाजा मैं इससे ज्यादा और जहमत नहीं
[35:05]देना चाहता क्योंकि वक्त हमारा तकरीबन खत्म हो गया है और अब
[35:08]सवाल और जवाब का सेशन होगा कि हमारी जिम्मेदारी है बनवाने मां-बाप
[35:15]कि हम जितना मुमकिन है अपनी औलाद की तरबियत पर वक्त सर्फ
[35:27]करें मेरे अजीजो निहायत सख्त मसला है और जरा भी लापरवाही क्या
[35:32]कुछ कर सकती है इसका अंदाजा हम नहीं लगा सकते एक नस्ल
[35:35]खराब हो रही है [संगीत] पूरी लिहाजा इस पर तवज्जो दे क्या
[35:45]पढ़ रहा है कहां पढ़ रहा है कैसे है बातें बहुत रीज
[35:50]है मैं मिसाल में ज्यादा नहीं जाना चाहता अगर हमने अपनी बेटी
[35:53]को या बेटे को चीज नहीं दी है और उसके हाथ में
[35:56]देखा कि ये कलम तो तवज्जो नहीं हो जाए यह कलम आया
[36:01]कहां से जब मैंने इसे खरीद के नहीं दिया था तो यह
[36:03]कहां से आया पूछना चाहिए कि मेरी बेटी मैं तो नहीं लाया
[36:09]थी चीज कहां से आई महसूस करें मां बाप के हैसियत से
[36:14]मुमकिन है कि यह बातें बड़ी छोटी नजर आ रही है लेकिन
[36:18]यही छोटी छोटी बातें एक दिन जमा होकर के इतना बड़ा ब्लास्ट
[36:22]होता है कि फिर माश में मुंह दिखाने काबिल नहीं रह जाता
[36:25]इंसान अगर इही छोटी छोटी पर तवज्जो दे ली जाए तो बहुत
[36:30]से मसाइल हल हो जाते हैं कक आप जैसे अभी आप मैं
[36:35]बातो दोहराना नहीं चाहता आप सुन रहे थे किस तरीके से दुश्मन
[36:37]हमें फरेब देना चाहता है इ छोटी छोटी बातों से और इस्लाम
[36:42]ने इसीलिए वही पाबंदी लगाई है और छोटी छोटी बातों पर अब
[36:48]एक वाकया था मैंक कम बच्चे बैठे हुए मैं नकल नहीं करना
[36:50]चाहता किस तरीके से वना सुनाता आपके सामने किस तरीके से हमला
[36:56]किया जाता है आप देखिए बस मैं आखरी मिसाल दे बात को
[37:00]तमाम कर रहा हूं बनवाने मां बनवाने बाप के ऐ सियत से
[37:07]अगर हम देख रहे हैं घर में कोई खुदा न करता कोई
[37:10]गलत तरीका इस्तेमाल हो रहा है महरम ना महरम लात पैदा कर
[37:19]रहे हैं क्यक आप उठा कर के देखिए चचा जाद भाई बहन
[37:20]ना महरम है अगर ना महरम तो क्या मानी है मजाक के
[37:27]आपस में अगर ना बार में तो क्या मानी है मैसेज की
[37:32]आपस में जनाबे इमाम अल सलातो सलाम ने अबू बसीर जैसा [संगीत]
[37:39]सहाबी या अबू बसीर इकला अबू बसीर परवरदिगार से डरो क्या किया
[37:49]कोई खास चीज नहीं हमारी आपकी नजर में नाबी है अबू बसीर
[37:56]मुझ जैसे इंसान को ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए क्योंकि हम अहल
[38:01]नहीं है लेकिन सिर्फ नकल कर रहा हूं एक बच्ची को कुरान
[38:04]पढ़ाते थे अबू बसीर एक लड़की को एक दिन हल्का सा मजाक
[38:12]कर दिया दूसरे दिन इमाम कहते बरला वजर अल्लाह से डरो तुमने
[38:21]तुम्हें किसने हक दिया था उसे मजाक करने के लिए उस्ताद है
[38:24]नाबी है लेकिन इमाम की निगाह सखत है क्यों इस्लाम ने रोका
[38:33]है कि लात पैदा ना [संगीत] हो हम घर में अगर अपने
[38:39]बच्चे को ऐसी तरबियत कर दे कि महरम और ना महरम को
[38:43]अलग होना चाहिए तो कॉलेज में स्कूल में जहां होगा या खुद
[38:46]खड़ा होगा सामने क्या हम नहीं बैठ सकते उस कुर्सी पर जिसमें
[38:49]एक तरफ ना महरम बैठी है या बैठा है हमने घर में
[38:56]आदत डाली है तला महरम और ना महरम के लिए बनवा चचा
[38:59]जाद भाई बनम जाद बहन इस्लाम क्यों यहां पर रोक रहा है
[39:06]कोई खास बात नहीं है अगर दो नाने दो कल में गुफ्तगू
[39:08]कर ली लेकिन बात यहीं तक नहीं टिकेगी आप देखें अगर एक
[39:15]ढाल पगा ी हो नशे की तरफ तो जो समझदार ड्राइवर है
[39:20]वो शुरू से ब्रक लगाना शुरू करता है अगर गाड़ी ने स्पीड
[39:24]पकड़ ली ढाल पर और दरमियान में अचानक ब्रक लगाओगे तो पलट
[39:26]जाएगी रुक नहीं सकती लिहाजा बेहतर है वहीं से बर्क लगाओ इस
[39:32]पर ताकि कंट्रोलेबल उतरे ये गाड़ी इस्लाम क्यों मना करता है कि
[39:40]इस तरीके से ना करो दन मना कर रहा है क्योंकि अगर
[39:41]ये स्पीड पकड़ गई गाड़ी तो फिर नहीं रोक सकते इसे फिर
[39:47]पलट जाएगी फिर एक्सीडेंट होगा फिर जान जाएगी फिर मुश्किलात पैदा होंगी
[39:53]लिजा वहीं से रोक लो क्योंकि इनको तो पता नहीं है बच्चों
[39:55]को इन्हें क्या मालूम क्या मुश्किलात आने वाली इन्ह अंदाजा नहीं है
[40:00]इसका ये तो जज्बात में जा रहे हैं तुम तो मां बाप
[40:05]हो तुम्हें देखना चाहिए मैं अपने लिए अ कर रहा हूं तुमने
[40:06]तो दुनिया देखी तु मालूम होना चाहिए कि इस जरा सी गुफ्तगू
[40:11]का नतीजा क्या निकल सकता है मुमकिन है कि मैं जसारत कर
[40:20]रहा हूं दहन से बड़ा जुमला लेकिन बहरहाल खुद भी एक बाप
[40:26]की रते अपने लिए अर् कर रहे हैं आपके सामने तवज्जो होनी
[40:29]चाहिए परवरदिगार बह मोहम्मद वा आले मोहम्मद हम सबको बनवाने वालदैन अपनी
[40:39]जिम्मेदारियों की अदायगी की तौफीक मरहम फरमा
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