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Difa-e-Wilayat wa Imamat | H.I.Shabir ul hassan Tahiri
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Record date: 25 Jan 2021 - دفاع ولایت و امامت
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2021 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल झाल कि लाहौल विला कुव्वत इला बिल्ला वहेल धुंध है मैं
[0:22]आऊंगा बिरला है उस समय हल्दी में मैंने शैतान इलाही नेत्र अधीन
[0:27]है को विस्मिल्लाह रहमान शुभ एम है अलहम दो लिललाह अल्लाह यह
[0:41]दाना लिहाजा वह मां कुनाल इंशाह अल्लाह अल्लाह अल्लाह की ताकत आ
[0:48]जाओ आदत रुबीना आओगे इलाहाबाद कि अस्सलातो वस्सलाम व तत्व लेख राम
[0:58]कि अल्लाह रसूल स फ्लाइंग जट्ट तिलहन संघ लेबल घुस आए ना
[1:05]बिल्हा आओ समय महान उन जख्मों कि वाहनों लैला दिए बिना लागत
[1:16]हर दिन अलावा शराब पीना लाइफ इन अ कि व रहमतुल्लाह अलैह
[1:21]फैमिली जमीन अ पिछला वाला गाना तो गांव हिम्मतवाला आधा एवं वादा
[1:28]इलाज कि नदियों में जल में हम ऐलान उर्मिला ने इलाहाबाद में
[1:31]योग हर दिन है अब माध्य ने कहा खेल अल्लाह तबारक व
[1:40]ताला फेंकता बेलवा कम वह बिल्कुल आसान है को विस्मिल्लाह रहमान श्याम
[1:48]श्याम सुमन हौज जगह पीएम बाद माझा लुट में सफलता लो ना
[1:54]तू अपना अनुभव अपना धन व निशाना बने शकुन पोर्शन हवन पुत्र
[2:00]शुभम संभवतः इरफान अजहर लाना चला हल्का सा उदयवीर नक्सलवाद झाला आधी-आधी
[2:10]अजवानी गर्मियां शुरू हो में आ आज का यह दर्शाओ कि के
[2:19]जिसका मौजूद है दिखाए विलायत वह इमारत और सदा ओ मैं इसमें
[2:26]मैं कुछ पुजारी साथ कुछ मारुति जाता आपकी किस्मत में यूज करेंगे
[2:30]तो में बहुत ज्यादा तोलानी गुप्त को शायद ना कर सके कि
[2:37]अ कि हमारी तबीयत भी कुछ अच्छी नहीं और वक्त ज्यादा हो
[2:41]चुका है एक अजनबी सभ्यता सलामुल्लाह अलैहा के इस्लामाबाद कोण की पाकीजा
[2:48]जिंदगी को उनकी सीरत ए तैयबा को जब हम देखते हैं उसका
[2:53]जब घोटाला और मुशाहिदा करते हैं है तो दोस्तों सैयदना की अजमत
[2:58]और बदला तो रंग की शान और उनके मनमाफिक के साथ-साथ समय
[3:01]उनकी जिंदगी में मैं एक बहुत बड़ा पहलू जो उनकी जिंदगी क्या
[3:05]है वह मजूरों नीयत का है है और कि उनकी मजरों में
[3:16]याद उनके ए एस साथ कुछ अपराध का इस किस्म का रवैया
[3:18]ऐसी रवीश ऐसा सलूक है कि जिसका मैंने बहुत ज्यादा दर्द महसूस
[3:24]किया और उनके ऊपर को या के पैगंबर की नामी की आंख
[3:29]बंद होने के बाद रह जाते रसूल के बाद विशाल इस समय
[3:35]तक जनाबे सैयदना की जिंदगी के यहां है ढाई महीने 3 महीने
[3:43]बहुत ज्यादा शक्ति के साथ गृह के साथ उसी वक्त और मजलूम
[3:45]यह के साथ उतरे हैं है लेकिन इस मजदूर हित के पीछे
[3:50]के जनावे सभ्यता के कुछ के सदा आबाद हैं कि ऐसा नहीं
[3:57]है कि कोई शख्स चाहे कितना ही बड़ा आप भेजो जाहिदा और
[4:01]मत अपीलों पर अधिकार क्यों न हो है तो हुकूमत ने खूब
[4:05]हां तो उस पर गिर नहीं करती ना एक शख्स अगर सिर्फ
[4:10]नमाज पढ़ता है रोजा रखता है हज करता है तस्वीर पड़ता है
[4:12]और आम की तिलावत करता है मैंने जाति अपने लिए ने कमाल
[4:17]जितने मर्जी से करता रहे इससे किसी हुकूमत का क्या नुकसान है
[4:20]कि कोई भी हुकूमत है उस पर क्यों जरूर करेगी है तो
[4:26]इसका मतलब है कि जनाब सैयद सलामुल्लाह अलैहा के कुछ इस दामाद
[4:31]ऐसे थे कि उस वक्त की हुकूमत वो कौन इतना हम आपको
[4:36]पसंद नहीं करती थी थी है लिहाजा उसकी वजह से अ कि
[4:40]उस दौर के जो लोग हैं यह जो साहिबे इख़्तियार अपराध हैं
[4:44]उनकी वजह से जनाब से ज्यादा को का रस पाचन अ कि
[4:50]खुलासा यह क्वेश्चन आपसे ज़्यादा सलामुल्लाह अलैहा का कि वह जनाब सैयद
[4:56]अगर अपनी मुबारक जिंदगी को अपने पास कि जब तक यह तो
[4:59]सिर्फ शब्द जिम्मेदारी प्रांतों के सदस्यों रातों के सौदे तुम्हें मना जातिवाद
[5:05]वक्त तस्वीर तिलावत तहलील कि इस हद तक अगर जनाब सैयद शाह
[5:11]मैं अपनी जिंदगी को रखनी तो शायद कोई उन्हें कुछ ना कहता
[5:17]हूं है लेकिन जनाब सैयद सलामुल्लाह अलैहा ने अपनी इलाही जिम्मदारी के
[5:22]तहत अपने शरीर की जिम्मेदारी के तहत वह दामाद किए है कि
[5:28]जो करना जरूरी थे है और वह थे में विलायती इलाही या
[5:36]सीमावर्ती इलाके साफ उसके लिए जनाब सैयद के दामाद कि अगर जनाब
[5:42]विषय था मौजूद रहती तो शायद इतनी मजरों ना होते हैं लेकिन
[5:46]जनाब सैयद घनश्याम किया और जनाब सैयद आपने जो काम किया उस
[5:53]पर जाम की वजह से वह ज्यादा हूं कि मजबूत हुई और
[5:54]वह ज्यादा मसालों का शिकार है है लेकिन वह बस आप के
[6:01]बावजूद भी जनाब सैयद दिखाओ पीछे नहीं हटेगी बल्कि उनका पयाम रहा
[6:04]और वह कल में हक बलम करती नहीं तो यहां तक के
[6:10]वह उन मामलों में भी गई है ए साइलेंट बाजार जाना भी
[6:17]सदा है जो के समर्थक उभरा रखती हैं और मासूम हैं आलम
[6:19]है और कर्म पर गिरामी की गद्दी मुबारक है मस्जिद-ए-नबी से जब
[6:25]नंबर कहते हैं किस किसी साथ उनके लिए सबसे बेहतर चाय क्या
[6:28]है तो जनाब सैयद ही की तरफ से यह जवाब आया कि
[6:32]मेरे बाबा से जाकर कहा जाए कि किसी भी खाते में के
[6:37]लिए सबसे बेहतर चाहिए है कि इतना कोई नाम है हम उसे
[6:41]देखें और न वह किसी नामहरम को देखकर हाथ आपके एक नाबीना
[6:44]साहब के साथ कमबैक नाम है जब तकलीफ हैं और इजाजत के
[6:49]बाद खाना है शहद मिलाकर होना चाहते हैं तो सैयद जफर माध्यम
[6:54]से बाबा मुझे थोड़ा सी इजाजत दीजिए चादर से करूंगा मेरे साथ
[6:57]हिसाब ही ना पीना है तो फरमाया कि बादल मैं तो ना
[7:02]बिना नहीं आता की योनि के जनाब सैयद है जो इस कदर
[7:06]रहे जाप और परदे की रियायत करने वाली है बल्कि सुबह कयामत
[7:09]तक की ख्वातीन कि के लिए परदे की पर्दादारी की एक सीरत
[7:13]काम करना जिनकी जिंदगी का हिस्सा है और जैसी औरतों पर हम
[7:17]करेंगे कि आने वाले सवाल ही नहीं पैदा करना है कि जब
[7:21]तक परदे की रियायत करती है पर लगी पाबंदी करती हैं वह
[7:23]बिल्कुल दरबार बैंड क्यों जहां लोग थे जहां एक मजमा था जनाब
[7:30]शहजादा सलामुल्लाहे अलैहा के लिए कितना तल्ख और मुश्किल होगा उस दरबार
[7:34]में जाना लेकिन जनाब सैयद सलार लोहा दरबार में पहुंचती है ईमान
[7:40]में पहुंचती हैं और भरे दरबार के अंदर उधर रसूल होत बा
[7:43]इरशाद फरमाते हैं वह भी हालत में के समय पहले ही मजबूत
[7:48]का शिकार हो चुके हैं और अपने जख्मों के साथ वहां जाती
[7:51]हैं और वह यह कोई मामूली चीज अब कि कुछ चीजें हैं
[7:58]कि जिनके बारे में कहा जाता है कि आम तौर पर अपराध
[8:03]के चरणों में यह त्रासद पैदा होते हैं हैं कि अगर जनाब
[8:07]सैयद आका वह एक बाप के जो पैगंबर गिरा में उनको हवा
[8:13]करके गए या पारंपरिक ग्रामीण जीवन को मिला उक्त महिला ही से
[8:18]बधाइयां उपस्थित थे कि वह बाप फर्ज करें कि है तो अधिकतर
[8:25]थे लेकिन में 1 मोंठ बात कर रहा हूं कि किसी ने
[8:26]अग्रसर किया किसी ने हथिया लिया तो जनाब सैयद तो खातून जन्नत
[8:34]हैं और जनरल चुन की जागीर है और वह मासूम आए आलम
[8:39]है उनका जो है तो तवा उनकी पारी पारसाई उनकी वापिस गया
[8:42]खेलों और उनकी किस्मत वह व्यक्ति साथ यह बात कहां मुताबिक उक्त
[8:48]रखती है कि वह मामले दुनिया के ख़ातिर क्रिया करें या माले
[8:51]दुनिया को मांगने के लिए इतने बेताब और व्यापार हो जाएं बाउल
[8:58]निभाओगे पद्धति के मामले दुनियां है और वह माले दुनिया के लिए
[9:00]इतनी बेचैन हो बेकरार हो यह तो हम जैसे अपराध है जो
[9:06]न की कमज़ोरियां रखते हैं और वह दुनियां हमारे जिलों में है
[9:11]और हम दुनिया में धमाल मचा इन चीजों के लिए इतने परेशान
[9:13]और बेकार होते हैं वह तो जनाब सैयद है है और वह
[9:17]तो मासूम हैं आलम है उनके साथ इस चीज का क्या जोड़
[9:22]बनता है कि वह इस मामले दुनिया के लिए और दुनिया की
[9:27]कुछ खास आशीर्वाद के लिए याद दुनिया भी प्रॉपर्टी के लिए वह
[9:30]इतना रोयेगी धोयेगी और वह दरबार तक से भी जाएंगे है दरअसल
[9:37]कि जनाबे सकीना सिला मिला है आप यह तमाम कार्यकर्ता मौजूद थे
[9:42]कि वह एक दामाद इसलिए थे कि बाबा फतेह किया मामले दुनिया
[9:49]से ज्यादा के लिए कोई मानों निरखता लेकिन अगर सब करने वालों
[9:54]के चेहरे को बेनकाब करना सैयदना की जिम्मदारी में शामिल हो चुका
[10:00]था कि आप कोई अगर जालिम जरूर करें या काशिफ इसी के
[10:02]हकों कसम करें तो उस पर खामोशी अख्तियार करना जालिमों के जुल्म
[10:08]में शरीक होने के बराबर हो जाता है फिर तो इस तरह
[10:09]ये एक तरह से सिलेक्ट बनती चली जाएगी कि दुनिया में बड़े
[10:15]लोग और ताकतवर लोगों का हक कसम करते रहें जुल्म करते रहें
[10:20]और मशरूम इन व्यवहार घोषित याद करें बल्कि वह दलील बना लेंगे
[10:22]मासूम हैं आलम ने जब हम शुगर कर ली थी हैं तो
[10:26]इस तरह क्या होगा कि सुबह मृतक का शरीर में एक मुजरिम
[10:30]बढ़ता रहेगा राशि मीन के हौंसले बुलंद होते रहेंगे और उनके धर्म
[10:33]का रास्ता रुकेगा नहीं लिहाजा सुबह कयामत तक मजलूमीन को जरुरत और
[10:39]इससे कमर का दर्द देने के लिए और धार्मिक और कैफीन के
[10:41]मुताबिक त्याग करने का हौसला देने की खातिर जनाब सैयद कासिम बुलाया
[10:47]है न कि वह दुनियां की वजह से ना इस वजह से
[10:52]करने वाले दुनिया से कोई रख बात थी या मामले दुनिया से
[10:53]उन्हें कोई मोहब्बत थी और स्माल कि मोहब्बत में वह इस वजह
[10:57]से भी नहीं चूके वह नमूने अमल है उच्चतर खुदा फैमिली अतुल
[11:01]को बना है वह ने सुबह कयामत तक आने वाले इंसान ऑप्शन
[11:03]ए आलम मिश्रण को 1 सिरप प्रणाम करनी थी और उस सूरत
[11:08]में उन्होंने जालिमों के जुल्म पर्दा से भिन्न के प्रश्न पर हां
[11:12]हो न रहने की सीरत खराब करने थी ताकि इस तरह दाल
[11:16]मिल के लिए उनके अश्वगंधा और बुजुर्ग ना करते चलें रहेगी परंतु
[11:20]टाइम तरीके से का दूसरा पहलू यह है कि जनाबे सकीना सलामुल
[11:24]है आप भाग्य फतेह किया मामले दुनिया के ख़ातिर यह सब कुछ
[11:30]नहीं कर रही थी बल्कि इस तरीके से जो घाव से भिन्न
[11:34]है यह दरबार में जाकर हमसे हक मांग कर अपने गवाह पेश
[11:35]कर को अनुबंधित किया है पेश करके अपने दलाल देकर दरअसल को
[11:41]यह साबित करना चाहती थी कि जो लोग जो कैरियर रसूल के
[11:47]इस हमको घोषित कर सकते हैं तो वह जनाब अभी गुड मॉर्निंग
[11:49]की हकूमत को क्यों नहीं कर सकते हैं है क्योंकि लोगों ने
[11:55]यह बातें कहनी थी आगे चलकर यह कैसे मुमकिन है कि सुकमा
[12:00]किया इस प्रकार यह जिम्मेदारी अली का आपको और कोई कसूर कर
[12:03]ले तो शायद आपने वादा किया कि जो सैयद आकर हमको कसम
[12:08]कर सकते हैं दरअसल धोया के सैयद यह सब कुछ एकतरफा ही
[12:14]विलायत में कर रही है मामले दुनिया की मोहब्बत में नहीं कर
[12:16]रही थी बल्कि इस तरह के दामाद से वह विलायती इलाही या
[12:22]का दावा कर रही थी कि वह इमामत यह का का विवाह
[12:28]कर रही थी और दरअसल विलायती लाया और इमारतें लाइए कर चुका
[12:32]से भिन्न है उन्हें बेनकाब कर रही थी और जनाब सिंह यादव
[12:39]जिला मु यालय हरकत दामाद और उनके पुत्र बाद इस तरह रहनुमाई
[12:41]करते हैं कि उनके फिर और जनाब सैयद सलार है आपका उन
[12:51]अपराध से नाराज़ रहना मैं यहां तक के उन्होंने अपनी जिंदगी के
[12:56]आखिरी है या मैं कि यह वसीयत पर माइट के जनावे अमरुद
[13:03]मुनि ने मामला बता रही सरकारी अलैहेसलाम शुभेंदु को यो यो हनी
[13:14]सैयदना ने बहुत सारी वसीयत हैं जो मौलिक पुस्तक लेखन को कि
[13:19]उन वसीयतों में से मसलन यह वसीयत के मुझे कुशल देना यार
[13:22]ली है और मुझे कफ़न होता है ना और रात के अंधेरे
[13:26]में मेरा जनाजा उठाना और मेरी अगर का निशान मिटा देना और
[13:32]लोगों को और फलां-फलां लोगों को खास तौर पर मेरी अगर कम
[13:34]मालूम नहीं होना चाहिए और जिनसे मैं दुनिया में नाराज रही हूं
[13:40]या जिन्होंने मुझे राजा या दुखाया है पुणे इतला ना हो और
[13:42]वह मेरे जनाजे में ना आए थे और जनाब सैयद अता करीम
[13:49]हलवा इस मासूम हैं आलम कि यह वसीयत है कि बोलो मेरे
[13:55]जनाजे में ना और जनाब सैयद का यह नहीं जिंदगी की आखिरी
[13:57]सांस तक उनसे अपनी सख्त नाराजगी को जाहिर कर रहे हैं वसीयत
[14:03]की सूरत में कि वसीयत न करती तो शायद कोई सोचता के
[14:09]हो सकता है कि शायद उन्हें माफ कर दिया है [संगीत] कि
[14:12]सैयदना ने मुमकिन है हैं तो उन्हें बख्श दिया बिहार रहा सैयद
[14:17]आप यह वसीयत इसीलिए के स्वभाव तक हर फर्द को मालूम हो
[14:23]कि अधिकतर ए रसूल को इन्होंने दुनिया से नाराज करके भेजा है
[14:28]मैं तुझे दफ्तर रसूख के साथ यह सलूक कर सकते हैं वह
[14:31]दामाद ने ससुर के साथ ऐसा सलूक क्यों नहीं कर सकते हैं
[14:36]यह वसीयत भी देखा है विलायत वृद्धि तो फिर जनाब सैयद सलामुल्लाह
[14:41]अलैहा आपके पास अपराध कहा ना वह अपराध के जिन्होंने जनाब सैयद
[14:44]आपको तकलीफ पहुंचाई या जनाब सैयद आकर दिल दुखाया है कि उन
[14:49]अपराधों का बिल आखिर प्रश्न होना दिन होना क्योंकि उनके मजा लिंग
[14:54]की वजह से और मुसलसल सैलरी अब अतुल कि आपका सब करना
[14:56]और अद्योगति उनके घर को मधुमेह का शिकार करना इसकी वजह से
[15:03]जब अपराध कौन महसूस किया कि इनकी मासूमियत कब लोग महसूस करने
[15:09]लगते हैं और हम लोगों को हमारे मजहब की वजह से हम
[15:10]सिर्फ नफरत पैदा होना शुरू हो गई है तो उन्होंने एक जिस
[15:15]तरह से आसनों की चालें होती है सियासी चालें तो उन्होंने जरूरी
[15:18]समझा कर और जनाब सैयद आपको हर आदमी किया जाता है इस
[15:23]तरह लोगों की हमदर्दी हासिल की जाएं और लोगों पर यह वादा
[15:28]किया था कि हम तो अधिकतर रुक के साथ हमदर्दी रखते हैं
[15:31]और हमें तो देखेंगे की नाराजगी पसंद नहीं है बल्कि जब हमें
[15:33]पता चला कि हमसे नाराज है तो हम तो माफी मांगने के
[15:36]लिए उनके पास पहुंच गए जिस तरह दुनिया के शैतानों का एक
[15:40]तरीका होता है है ताकि हम लाश की राय हमारे हक में
[15:46]हो जाए और हमें लोग अच्छा समझे हमें जालिम ना समझे थे
[15:49]है तो और जनाब सैयद ने उनसे मिलने से इंकार किया कि
[15:56]इनसे राशि होने से इंकार किया इन्हें माफ करने से इंकार किया
[15:59]और फिर इन्होंने जब को देखा कि हमारे प्रमाद को मुसरत किए
[16:05]जा रहा है तो जनाबे मीर मोमिन मौला अली अलैहिस्सलाम को सिफारिश
[16:09]बनाया कि आप जनाब सैयद हमें वक्त नहीं दे रही आप जनाब
[16:16]सैयद इसे हमें दामले करने के व हमें अपनी बार गांव में
[16:18]हाजरी का शरफ रखे हैं ताकि हम अपने जवान सेवन से इंतजार
[16:22]और माफी तलब कर सकती है और जनाब कहां मिलेगा श्याम ने
[16:29]इनके कहने पर घर में गए और जनाब सैयद आसिफ कहा कि
[16:32]यह लोग पहले भी इस तरह के प्रथम आदि आपके पास भेजते
[16:35]रहे हैं थे और अब भी हैं जनाब सैयद ने कहा कि
[16:40]मैं इसे कभी भी शादी नहीं हो सकती बल्कि मैं इस शिकायत
[16:42]करूंगी अपने बाबा के पास जाकर अ है अलबत्ता जनाब सिंह यादव
[16:47]फरमाती है कि अगर इन्होंने आपको बीच में यह लेकर आए हैं
[16:49]और आपकी जबान से होने कहलाया है तो यह घर आपका है
[16:55]मैं भी आपकी आपको हक हासिल है कि आप अपने घर में
[17:00]दाखिल होने की इजाजत दे सकते हैं है तो यह लोग आए
[17:07]थे और जनाब सिंह यादव की हत्या आज लुट कि इन्होंने सलाम
[17:11]किया जनाब शहजादा ने उनके सलाम का जवाब नहीं दिया था है
[17:14]हालांकि सलाम का जवाब देना आम तौर पर बाजी होता है कोई
[17:19]मुसलमान अगर सलाम करे तो उसका जवाब देना वाजिब होता है ध्यान
[17:24]देना भी सैयदना ने इनको जवाब नहीं दिया उसके बाद जनाब शहजादा
[17:26]ने अपना रुख अनवर है वह दीवार की तरफ कर लिया इनकी
[17:31]तरफ नहीं देखा जैसे इदारे नाराजगी के मौके पर किया जाता है
[17:34]कि निषद तरी नाराज़गी ज़ाहिर की है है इन्होंने कहा ने जिस
[17:39]भी तरीके के लिए उपवास से के डॉक्टर रसूल आपको हमसे जो
[17:45]भी कोई तकलीफ पहुंची हो तो आप हमें हम आपसे माफी मांगने
[17:47]के लिए आप हमसे राजी हो गए और जनाब सैयद ने फ़रमाया
[17:53]के अच्छा मैं अपने बाबा की एक हदीस है उसे तुम्हारे सामने
[17:56]बयान करती हो और तुम मुझे यह बताना कि तुमने मेरे बाबा
[18:01]से यदि सुनी थी या नहीं सकती थी मैं तेरा शेयर फरमाती
[18:06]है कि मेरे बाबा ने फरमाया था कि फातिमा मेरा टुकड़ा है
[18:11]और जिसने फातिमा को नसीहत दी उसने मुझे इजाजत दी जिसने फातिमा
[18:13]को नाराज किया से बजे नाराज की ओर जिसने मुझे नाराज है
[18:18]उसने अल्लाह को नाराज किया अल्लाह आप को बदनाम किया है है
[18:21]तो क्या तुम दोनों ने मेरे बाबा से भी अधिक सुनिधि कि
[18:26]तुम लोगों ने कहा कि हमने सुनी थी कि है क्योंकि हमने
[18:31]सुनी थी मासूम ने फ़रमाया के कि अब तुम भी गवाह रहना
[18:37]और हाथ उठा कर कहा के अल्लाह तू गवाह रहना है कि
[18:40]मैं इस दुनिया से इन से नाराज जा रही हूं मैं इस
[18:45]दुनिया से अलग ना प्यार है कि मैं तुमसे नाराज नहीं हूं
[18:50]मैं मेरा तुमने बहुत दिल दुखाया है कि ऑल इंडियंस के साथ
[18:53]इनको वापिस कर दिया अ और जनाब सैयद सलामुल्लाह अलैहा का इन
[18:59]अपराध से नाराजगी जाहिर अनेक साधा आदमी एक सोच सकता है कि
[19:05]माफ करना तो बहुत अच्छी बात है और अगर कोई हमारा ज्वाइन
[19:09]करता है यह हमारा कोई मुजरिम बन जाता है यह किसी ने
[19:11]हमारा दिल दुखाया या किसी ने अमित तकलीफ पहुंचाई है और वह
[19:16]हम से माफी मांगे तो माफ कर देना माफ करने में तो
[19:22]बुजुर्ग है माफ करने में तो अजमत है माफ करना तो इस
[19:23]जाहिर करता है कि यहां वसा आते फल भी है दिल बड़ा
[19:27]है कुशादा कल भी अलग रफी बुजुर्ग की ओर अजमत जाहिर होती
[19:32]है माफ कर देने अच्छा तो जनाब सैयद अब्दुल करीम है लंबित
[19:35]हैं और मासूम हैं आलम है और शायद यह कौन है ने
[19:40]उनसे ज्यादा खुदरा बाजार और रहमों करम की उम्मीद किसी और व्याख्या
[19:46]की जा सकती है वह सैयद है और सैयदना ने उन्हें माफ
[19:48]कुछ नहीं किया तो क्यों नहीं किया कि हर गेंद ऐसा नहीं
[19:55]है कि इस तरह के इट यो यो हनी अब बारी देना
[20:00]है यह सिर्फ बात की जो कैसी बात होती है और इत्तेफाक
[20:06]की वजह से वह मजबूर होते हैं माफ करने पर सैयदना के
[20:07]साथ ऐसी कोई कैफियत नहीं चीज सैयद एम मासूम हैं आलम ए
[20:11]सईंया दाने वाह नहीं किया सिर्फ दिखाए विलायक की खातिर ऊ में
[20:16]दिखाई इमामत के साथ है कि यहां पर इस किस्म के मुजरिम
[20:23]इन को माफ करना इसका मतलब क्या है कि उनके वापिस दामाद
[20:26]पर मुहर सब करना है कि अब वह बच्चे गए उन्होंने जो
[20:32]विलायती लाठियां को घोषित किया या वरियर खुदा को नाराज किया वह
[20:38]जन्म दिया उनका कोई जरूर ना रहा अगर बैतूल माफी माफ करें
[20:40]तो फिर अली भी माफ करें अगर बैतूल वाली माफ करें तो
[20:46]फिर रसूलल्लाह के माफ करें रसूल अल्लाह माफ करें तो फिर खुदा
[20:49]भी माफ करें यह सब माफ करें तो इसका मतलब है कि
[20:53]खुदा खुद अपने दिन की इमारत की मिशनरी के लिए राजी हो
[20:57]गया जबकि ऐसा मुमकिन नहीं है है अब मैं मुक्तसर खुला चेतन
[21:03]गुप्ता को कर रहा हूं जनाब सैयद इकराम उल हक यह सारे
[21:06]इस्लामाबाद के जो digipay विलायत ए मोहम्मद के खातिर तक यह वह
[21:11]चीज है थी कि जिसकी वजह से जनाब सैयद आफ मजदूरों की
[21:16]मौत का शिकार हुए हर पर मस्यौदा लिमाए क्योंकि वह अगर सिर्फ
[21:19]तस्वीर पड़ रही होती और पर पड़ रही थी और नमक जाएं
[21:22]और दही कर रही होती पर सिर्फ ऐसे ने कमाल कर रही
[21:26]होती हैं जिनका फायदा सिर्फ उनकी अपनी जात को है तो फिर
[21:28]तो कोई भी और जो अ कोई जरूर ना करता लेकिन वह
[21:32]इस्लाहे मुआशरा और फलों है वह अक्षरा के लिए त्याग कर रही
[21:38]थी और दी ने खोला आप उसकी सही शक्ल में महसूस करने
[21:39]के बाद से सुबह कयामत तक दिन खुद अपनी सही सूरत में
[21:44]महफूज हो और विलायत और हिमावत विलायत सिलाई वाले मोहम्मद LIC भी
[21:50]ए ए और जनाब सैयद याकूब अली अतुल कोबरा कहा जाता है
[21:53]और अल्लाह की गोलियां में मॉल आने के दर्शन हम अधिक है
[21:57]मौला इमाम हुसैन व दी है इमाम हुसैन व दी है वह
[22:00]में अभी से लेकर इमाम महदी अलैहिस्सलाम तक यह सब इसे अब
[22:03]अपने मुकाम पर बनी है मगर जनाब सैयद वरीय कुरकुरा कहा गया
[22:09]है है यानि अनियन से लेकर महानदी तक 12 इमामों की विलायत
[22:17]की बुनियाद को मजबूत और पुस्तक्कम और महसूस करने वाली जांच को
[22:22]सैयदा कहते हैं ई वास कि जिन्होंने तमाम मासूम निर्दोष लोगों की
[22:30]भलाई परिणामत यानि वह इस दामाद फरमाए कि अगर सैयद आरिफ मोहम्मद
[22:36]ना होते तो जमाने पर है मासूम एवं उस नाम की मिलाते
[22:38]मोहम्मद का जाहिर बाहर होना और मैं फूल होना मुश्किल हो जाता
[22:44]इसलिए जनाब सैयद वर्ली अतुल को बराकात कि दीपिका यह विलायत के
[22:47]साथ अब थोड़ा सा इस तरफ आते हैं कि विलायत का यह
[22:52]दफा इस कदर जरूरी समझे जनाब सैयद नहीं क्यों है दरअसल और
[22:59]विलायत को आप यूं समझिए केवल आर्थिक निशान है परवरदिगार ए आलम
[23:08]ने को अपने अधीन ए हक की तबीयत के लिए तरबूज के
[23:10]लिए तस्वीर के लिए तहफ़्फ़ुज़ के लिए दो इदारे साइन की है
[23:15]कि एक तारे का नाम है नबूवत और दूसरे इदारे का नाम
[23:22]है विलायत यह दोनों इलाही विदारे नववधू इलाही द्वारा है और विलायत
[23:27]भी इलाही अदालत नबुव्वत का जो इधर है इस इबारत का इशारे
[23:34]की अदालत करने वाले मोदी सिर को इलाही लो खत्म हुए दिन
[23:41]न भी कहा जाता है जो इदारा ये नबूवत का मंदिर होता
[23:43]है इबादत करने वाला होता है वह न भी कहना था है
[23:47]और इदारा यह विलायत की इबादत करने वाला इदारा ए विलायत का
[23:54]जो मोदी होता है अल्लाह की तरफ से वह ध्वनि गहरा नाता
[23:59]है कि वह इमाम के लगता है क्योंकि यह सारे इलाहाबाद में
[24:03]हूं है तो इनके जो मोदी रहे हैं वह इंतिख़ाबी नहीं होते
[24:07]इंतिसाब होते हैं है जबकि दारी अल्लाह के हैं तो इन इलाकों
[24:11]के जोश भरा है जो मंदिर है उनका तक रौजा करेगा अगर
[24:18]इलाही इदारों को लोग अपने हाथों में ले लेंगे है तो यह
[24:24]हम इधर हो जाएंगे इलाइची दाल दें नहीं रहेंगे कि जब हमारे
[24:28]हाथों में चले जाएंगे और उनकी बाद और हम आपके तक अरुण
[24:32]कि वे लोगों के पास चली जाएगी तो जिन लोगों का इंतिख़ाब
[24:35]हम हमने किया है वह अल्लाह की मर्जी से ज्यादा अवाम की
[24:40]मंजिलों को देखकर इदारे को चलाएंगे ताकि इदारे कि मोदी शरीयत और
[24:46]हां कमी है तो उनके पास रहे क्योंकि यह हाथों मिली अत
[24:48]उनकी निगाह के मुताबिक उन्हें अल्लाह ने नहीं दी बल्कि लोगों ने
[24:53]दी है तो वह खुशियों दिया खुदा से ज्यादा खुश रहो दिया
[24:56]हम आपको क्वेश्चन अगर अपने तो अचूक यह ही याद आ रहे
[25:01]हैं जब इसी दायरे का मंदिर खुदा की तरफ से होगा और
[25:05]उसके परेशान नजर सिर्फ खुदा की मर्जी होगी तो वह हम आपको
[25:07]सही सिराते मुस्तकीम पर रखेगा और सीधे रास्ते पर लेकर चलेगा अब
[25:15]यह जनाब सैयद सलामुल्लाह अलैहा के जो इस दामाद थे है वह
[25:18]इसलिए थे के विलायत हिम्मत इलाहाबाद आ रहा है तो इसकी धारण
[25:23]करने वाला जो मोदी की है वह इंतहा भी नहीं इंतिसाब होगा
[25:28]जिस प्रकार और पहले ही खुदवा कर चुका है कि प्रधानमंत्री आलम
[25:31]अपने नबी कि जब से शरीर में जिस वर्दी की विलायत का
[25:37]इलाज करवा चुका है अब बाबा न अब बंद हो जाने के
[25:38]बाद बाद वे विलायत वस्तु है और सुबह कयामत तक के निशानों
[25:44]को दिन के सिलसिले में अब विलायत अहमद की तरफ भेजो करना
[25:48]है अब यह महापर्व में बहुत दिन बताएंगे भी दिन समझाएंगे भी
[25:52]और दिन बचाएंगे भी लिहाजा ऑनलाइन मेंबर हक और ऑयल या इलाही
[25:59]की विलायत तो इमामत की तरफ पूरी कायनात को मुतवज्जेह करने के
[26:02]लिए और यह वादे करने के लिए चयन अपराध क्षमा में हुकूमत
[26:07]अपने हाथ में ले लिए जो हमने कुर्सियों इकतिदार और लश्कर लश्कर
[26:10]और हुकूमत अपने हाथ में ले लिया लेकिन यह खुदा के मुकर्रर
[26:15]करता नहीं है इनका ट्यून अल्लाह की तरफ से नहीं है बल्कि
[26:17]अल्लाह के कर मुकर्रर कर दिया नमः लगाएंगे हैं वह हैं कि
[26:23]पैगंबर के बाद जनाब सैयद अस्सलामु अला है अपने खुद बात और
[26:28]इस वारदात में जिनकी तरफ जिनके नामों को तो वादे कर रही
[26:31]है लिहाजा यह तमाम तरह के दामाद जनाब सैयद असलम उलाहने जो
[26:35]कि ये वह विलायत हिम्मत के दिशा में किए और यह सिलाई
[26:39]निजाम है कि विधायक है यह खिलाड़ी ने कहा मैं तो कृपया
[26:43]बताएं और इस इलाही ने दाम रात के 12 साल बड़ा है
[26:50]जो अलार्म उधर किए हैं यस अलार्म्स लेकर हम है महदी अलैहिस्सलाम
[26:54]तक यह ब्रह्म है 12 के12 मासूम है हर गलत है और
[26:59]खाता से पाप हैं और इनका तक और उनका ज्ञान और इनका
[27:05]इंतिसाब अल्लाह की तरफ से है यह वाणी नहीं इलाही हैं अब
[27:07]सुबह मत लगाने वाले अपराध इन गोलियों इलाही की तरफ माय माय
[27:13]तरह की तरफ अगर अपना रोजू रखेंगे और इनको अगर दिन कम
[27:15]असर और मरजा मानेंगे तो सही मशहूर अब से वह कि प्रजा
[27:24]होते रहेंगे और उनकी अपनी प्यास बुझती रहेगी सही मतलब से दृष्ट
[27:30]मशरफ बजाय इलाही मशरक है वहां से उनकी अपनी प्यास बुझी हुई
[27:33]और हिदायत की प्यास उनकी बुझेगी ज्यादा अपराध अगर इस मशरक को
[27:40]छोड़ देंगे कि जो इला ही मशहूर है इलाही मजूदर है और
[27:42]ख़ुदा वंदे आलम की तरफ से मर जाए खाते हैं जो उन्हें
[27:46]अगर अपराध छोड़ देंगे और लोग बहुत अगर किसी ज्यादा कमेटी बनाए
[27:51]सूर्य बना है मजमा लगा लें और लोग बहुत अगर अपने हम
[27:52]अपने सरवरा अधीन के लिए जुटना शुरू कर देंगे तो अपराध खाता
[27:58]पर चले जाएंगे गुमराह हो जाएंगे राशिद्दीन और सिराते मुस्तकीम से हट
[28:02]जाएंगे इस तरह थी करते इस मिला देते इला को बचाने के
[28:07]लिए और वरीय भारतीय खुदा की तरफ वास ए और रोशनी फ्रॉम
[28:13]करने के लिए यह बहुत हैं और यह यौवन आता है मासूम
[28:18]हैं आलम ने एक दामाद किए मासूम हैं आलम ने खय्याम फ़रमाया
[28:21]और उनके उस अ प्रौढ़ इस्तेमाल मत और व्यायाम की वजह से
[28:26]उन्हें मजनुओं शहादत नसीब हुई और शहादत तो खैर इस घर के
[28:32]लिए स्वागत है यह ऐसे ही नहीं है वह जैसे नहीं है
[28:36]कि अधिकतर मसूद को यह बात सोचते हैं और सवाल टाइम बरतें
[28:38]के भाई-बहनों रसूल अल्लाह की बेटी थी और एक हाथों से किसी
[28:43]की क्या दुश्मनी हो सकती है और भला एक हाथों किसी को
[28:47]क्या खतरा हो सकती है किसी के लिए और भला एक हाथों
[28:51]का कोई जो हक कसम करेगा तो कि मैं लाहौर में था
[28:55]तो मुझसे एक सवाल किया गया तो यह भी कहा जाता है
[29:00]कि वह तुरंत खजूर है थी और चंद्र खजूरों के लिए इतना
[29:02]बड़ा इल्जाम अपराध को लेने की क्या जरूरत थी वो हैं तो
[29:07]मैंने कहा कि भागे पदक कितना बड़ा था कितना वशिष्ठ तथा उसकी
[29:12]कितनी ज्यादा इनकम थी कि कि यह तो यहीं से बाध्य हो
[29:18]जाता है कि हुकूमत ने कभी भी चंद खजूरों के लिए नहीं
[29:20]जाया करते हैं अगर हुकूमत यह कहती है कैसे बैतुलमाल का हिस्सा
[29:26]होना चाहिए या मुस्लिम इन पर इस्तमाल खर्च होना चाहिए हुकूमत का
[29:29]अपनी ट्रेवल में लेना और हुकुम शेखर आजाद को रोकती मशहूर इसके
[29:34]लिए उसे मुंह में न समझना ही बता रहा है कि वह
[29:39]आप कितना बड़ा था इसी से ही पता चल रहा है वरना
[29:43]तारीख की अपडेट्स भी मौजूद ने 48 जब है अब भी मौजूद
[29:44]है कि वह कितना था और वह एक लंबी तारीफ है जनाब
[29:49]सैयद लाल सलाम लाल यादव का कि ने इसको जो मतलब यदि
[29:56]नहीं चाहिए धरमलाल हां अगर यह दामाद न करती तो ना को
[30:01]उनके रोने पर एतराज करता ना अपने घर से बाहर जाकर बेथ
[30:02]अलार्म में रोना पड़ता ना उन्हें दरबार में जाकर खोतवा देना पड़ता
[30:08]यह सब कुछ हमने इसलिए करना पड़ा कि उन्होंने अली अलैहिस्सलाम के
[30:10]हाथ में आवाज बुलंद की है मैं वह एक्विला तो इमामत को
[30:16]बाध्य किया और जो जाल में और का शिप इन थे उनके
[30:20]चेहरों से नकाब हटाया इससे यह शिमला की तारीख को पढ़कर और
[30:22]उनके दामाद का मसाला और हो जाएगा करने के बाद भी अगर
[30:27]कोई बुमराह होता है तो वह अपनी गुमराह इकरा खुद जिम्मेदार है
[30:30]वर्जन आप इसे ज्यादा सलामुल्लाह अलैहा के एक दामाद में बिल्कुल वाले
[30:35]तौर पर मौजूद है और उन्होंने की सारी मजलूम यह कबूल की
[30:38]है विलायत हिला ही आकर दिखा के लिए विलायत अरे मोहम्मद के
[30:45]दिखा के लिए अस्सलाम वालेकुम वरहमतुल्लाही व बराकातहू तो दो झाल
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