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Wilayat Aur Us Ki Zimmedarian | H.I. Ghulam Abbas Raisi
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محاضرات
Record date: 18 Feb 2024 - ولایت اور اس کی ذمہ داریاں AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]बिल्ला मिन शतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन बार लाला
[0:29]मुली तम नबी सदना मौलाना अल कासम मोहम्मद री मासला ररा [संगीत]
[1:03]माहे रजब और माहे शाबान दोनों अम अहार और पैगंबर खुदा की
[1:15]मुनासिब से महफिले मीलाद और महफिले जश्न और वफात आमा से भरपूर
[1:36]आबाद और नूरानी और रहमते खुदा के नुजूल के दो महीने हैं
[1:45]इसी मुनासिब से बरादर ने विलायत की जिम्मेदारियां के हवाले से गुफ्तगू
[1:59]करने के लिए कहा विलायत का माना बाखिया होना सरपरस्त होना किसी
[2:12]पर इख्तियार रखना इसको विलायत कहते हैं इख्तियार रखता है हुकूमत कर
[2:21]सकता है उसके इख्तियार किसी और के हाथ में हो तो उसको
[2:25]वली कहते हैं तियारा तियारा रखने को विलायत कहते हैं इसीलिए बाप
[2:36]को भी वली कहते हैं क्योंकि खास हालात में बच्चों के बलूग
[2:43]तक इख्तियार के हामिया तो पैगंबर के लिए खुदा के लिए विलायत
[2:54]है पैगंबर खुदा के लिए विलायत है इमाम के लिए विलायत है
[2:57]सबके ऊपर आलम के ऊपर विलायत खुदा पैगंबर इमाम के लिए इनमा
[3:10]वली कोलाह रसूल लजीना आमन लजीन यम सला जका रा सिर्फ और
[3:18]सिर्फ तुम्हारा वली अल्लाह है और रसूल खुदा है और वह हस्ती
[3:25]है जिसने ईमान लाया और नमाज करता है और हालत रुकू में
[3:37]जकात देते हैं तो यह विलायत इसी तरह से यानी इस आलम
[3:52]में कुल आलम पर इन तीन हस्तियों की विलायत खुदा पैगंबर इमाम
[4:01]यानी आलम में हुकूमत करने का हक रखते हैं तसरफती हैं और
[4:10]साहिब तियार है अरबी जबान में इसीलिए हाकिम को वाली कहते हैं
[4:22]हुकूमत करने वाले को वाली कहते हैं साहब तियार को भी वली
[4:28]मौला कहते हैं लफ्ज इमाम दूसरा लफ्ज है जो वली के नजदीक
[4:34]माना है इमाम यानी वह जात जिसकी पैरवी करना है रहबर को
[4:43]इमाम कहते हैं रहबर को इमाम कहते हैं वह जात जिसकी पैरवी
[4:50]करनी है उसको इमाम कहते हैं व शय जिसकी पैरवी करनी है
[4:57]उसको भी इमाम कहते हैं मसलन कुरान [संगीत] में इरशाद होता है
[5:05]किताब मूसा व मन कब किताब मूसा इमाम रहमा कुरान से पहले
[5:14]हजरत मूसा की किताब थी जो लोगों के लिए इमाम यह किताब
[5:19]इमाम थी लोगों के लिए और रहमत इसी तरह से कुरान में
[5:26]रास्ते को भी इमाम का हजरत मूसा अपने साथी के साथ हजरत
[5:32]जजर से मिलने के लिए जा रहे थे तो वहां पर हुमा
[5:39]इमाम मुबीन यह दोनों एक वाज रास्ते तक पहुंच गए शहरा तक
[5:47]उसको इमाम कहने की व य कि आदमी मंजिल तक पहुंचने के
[5:53]वाहिद रहनुमा वही रास्ता होता है रास्ता को पकड़ के जाएगा शहरा
[5:56]को शहरा को पकड़ के जाएगा जहां ये शहरा जाता है वहां
[6:03]मुसाफिर जाएगा तो मंजिल तक पहुंचता है तो खुसूस कदीम जमाने में
[6:07]शहरा की क्या है पैरवी करते या उसी के पीछे पीछे चलने
[6:14]से मंजिल तक पहुंच जाता था तो कुरान में इमाम इमाम हक
[6:24]भी कहा है इमाम बातिल को भी कहा रहबर इमाम है चाहे
[6:26]हक हो चाहे बातिल हो अरबी जबान के लिहाज से मसलन क्या
[6:34]है व जालना मत यना हमने कुछ लोगों को इमाम बनाया है
[6:40]लोगों को जहन्नम की तरफ दावत देते इमाम बनाया है और लोगों
[6:48]को जहन्नम की तरफ दावत देते लोगों की रहबरी करते हैं जहन्नम
[6:54]की तरफ दूसरी में होता नाना हमने इन हस्तियों को इमाम बनाया
[7:04]यह हिदायत करते हैं हमारे अमर के मुताबिक ल सबर हमने इनको
[7:13]इमाम बनाया जब यह लोग साबिर निकले व कान आया नायन हमारी
[7:17]आयात पर यकीन रखने वाले थे तो यह लोग हुक्म खुदा के
[7:22]मुताबिक हिदायत करने वाले इमाम है हर कौम के लिए हर गुरुह
[7:29]के लिए इमाम है जिसकी न कदम पर चलते हैं जिसकी कयादत
[7:35]में चलते हैं वही इमाम बनता है यना माम याद करो उस
[7:42]दिन को जिस दिन हम हर गुरुह को उनके अपने अपने इमाम
[7:50]के साथ बुलाएंगे किसकी पैरवी करते थे उसी के साथ क्योंकि हम
[7:53]जब किसी की जब पैरवी करते हैं उसके फिक्र भी उसी के
[7:59]मुताबिक होता अमल भी उसी के मुताबिक होता है तो उसी के
[8:04]मुताबिक महसूर हो जाएगा और अर्ज किया यह इमाम का माना भी
[8:12]वली के माना के तकरीबन जैसा है इमाम जिसकी पैरवी करते हैं
[8:16]जो रहबर है तो अमलन क्या है जो सरपरस्त होता है वही
[8:21]रहबर होता है वली का माना सरपरस्त साहिबे इख्तियार जिसको तसरफती हासिल
[8:31]है और इमाम के लिए भी यही मकाम हासिल है इमाम के
[8:36]नक्श कदम पर चलना है इमाम की पैरवी करना है जिसके लिए
[8:42]विलायत हासिल है उसी के लिए इमामत हासिल है इसलिए जहां जहां
[8:47]विलायत है वहां वहां इमामत अब देखिए विलायत सियासी विलायत होती है
[8:55]यानी सियासी मैदान में जिसकी इता करनी है जो साहिब तियार है
[9:07]मन कुंतो मौला फलियन मौला अली को वली बनाया मौला बनाया गदर
[9:12]के दिन और कम से कम सियासी मौला के वसी माना है
[9:19]लेकिन कम से कम क्या है अली को हमने वली बनाया और
[9:25]सियासी मैदान में उसी की पैरवी करना है इसलिए जिन लोगों ने
[9:27]गदर को इंकार किया उन्होंने सियासी लिहाज से अली के हक का
[9:34]इंकार किया कहा कि अली को हुकूमत करने का हक नहीं है
[9:39]तो विलायत सियासी या सियासी उमू में वही साहिब तियार है हुकूमत
[9:45]करने का कानून चलाने का अदालत कायम करने का और मुश की
[9:56]तरबियत करने का हर हवाले से साहब तियार जो इख्तियार हुकूमत के
[10:00]पास होते हैं व वली के पास होता है वली साहिबे तियारा
[10:07]है सियासी मसाइल में हुकूमत मसाइल में तो यह और वली सरपरस्त
[10:17]हुआ सियासी सरपरस्त दूसरा वली दीनी लिहाज से भी सरपरस्त है यानी
[10:23]क्या सियासत के अलावा मारफ दीनी में श में अकाद में इम
[10:33]दीन में सरपरस्त साहब तियार वही है यानी हम अपने दीन को
[10:43]वली से लेते हैं वली ने एक बात की किसी और ने
[10:47]वली की बात के खिलाफ बात की तो किसकी बात चलेगी वली
[10:49]की बात चलेगी वली साहब तियार है दीन में इनमा वली कुमला
[11:03]रस अल्ला ती रसूल अमरी मनक वली साब जिसकी तात करना है
[11:07]अल्लाह है रसूल है और उलील अमर है तो यह इल्मी लिहाज
[11:17]से वली है यानी इल्मी लिहाज से दीन के मारफ उसी से
[11:26]लेना है अगर किसी ने उनके खिलाफ बात की दीन में उसको
[11:27]नहीं मानना है दन का तियार उसी के हाथ में है क्या
[11:34]फरमाया फरमाया इनी तार कुन फ कुन किताब अलाह ती अ बती
[11:43]मैं तुम्हारे दरमियान दो कीमती चीजें छोड़े जा रहा हूं एक किताब
[11:52]खुदा दूसरा मेरे त मेरे अ बत है मातमस तुम मा जब
[11:57]तक इन दोनों के दामन से मतमस रहोगे ल फिर आप गुमराह
[12:01]नहीं होंगे उनसे आगे भी ना बढ़ो फला उनसे आगे भी मत
[12:08]बढ़ो उनसे पीछे भी ना रहो उनके साथ साथ चलना है तो
[12:12]यह हता यदा और यह दोनों एक दूसरे से जुदा नहीं होंगे
[12:18]यहां तक के हता यरी माता ये दोनों एक दूसरे से जुदा
[12:30]नहीं होंगे ता कयामत के दिन जब हज कौसर तक पहुंच जाएंगे
[12:34]तो पैगंबर अपने बाद कुरान और इत को सर चश्म फैज करार
[12:42]दिया सर चश्मा करार दिया आखिरत में भी इन दोनों सर चश्मे
[12:48]से जिसने फायदा उठाया वह हज कौसर तक पहुंच जाएगा हज कौसर
[12:52]में उस यानी ये रूहानी क्या है रूहानी रहमत है रहा रूहानी
[13:01]पानी है रूहानी आब हयात है कुरान इत आखिर में यह कुरान
[13:10]इत हज कौसर पर पैगंबर के पास पहुंच जाएगा मुजस्सम होकर हौज
[13:14]कौसर की शक्ल में जाहिर होगा तो अर्ज कर तो विलायत साब
[13:22]तियार है सियासी उमर में साहब तियार वली है मजहबी उमर में
[13:30]साहब तियार वली है सियासी उमर में क्या है वली ही को
[13:32]हुकूमत करने का हक है या जिसको वली इजाजत देता है वली
[13:38]की तरफ से नायब है नुमाइंदा है एक अहम बुनियादी चीज है
[13:47]हमारे मुसलमानों ने अमर को हर जालिम हुक्मरान करार दिया तो इसी
[13:51]ऐसे जालिम हुक्मरानों के दामन में गिर गए ऐसे जालिम हुक्मरानों के
[13:56]दामन में गिरने से बच तो गए सजा देने से जेल से
[14:05]जिंदा से लेकिन पूरा मुशरा उन्हीं की तरह गुमराही की तरफ चला
[14:09]गया पूरी उम्मत काफिरों से भी बदतर हालत उम्मत की हो गई
[14:16]और वली का तीसरा माना विलायत तकनी है यानी आलम में तसरफती
[14:25]जैसा मैं अपने हाथ को हिला सकता हूं ऊपर नीचे कर सकता
[14:32]मुझे विलायत है अपने हाथ पर यानी मेरे तियार में है इसी
[14:37]तरह से वली के पास आलम तकन में आलम खारिज में इतने
[14:43]तियारा है इतनी ताकतें हैं इतनी विलायत है कि वह तसरफती सुलेमान
[14:54]का और इसम आजम का एक हर्फ जानता था उस उसने तखत
[15:00]बिल्कीस को यमन से उठाकर लाया शाम तक कनान तक व शाम
[15:09]के हिसा है फिलिस्तीन है देखिए कुन फय कून यानी जो इराद
[15:19]जो विलायत है विलायत खुदा से सर चश्मा लिया है इसीलिए इरादा
[15:26]करने से हासिल होता है तो तो विलायत तकनी में एक मसला
[15:32]यह है कि व इरादा कर हो जाता है हमारी विलायत अपने
[15:34]हाथ पाव तक है वो भी एक दिन शायद सलब हो जा
[15:39]फलिश गिर जाए यह विलायत नहीं रहती है हा जी बाज औकात
[15:44]बूढ़े हो जाते हैं हाथ पाव पूरा तियार में नहीं होता है
[15:50]लेकिन जो वली उल्ला है उसको क्या है आलम पर इख्तियार हासिल
[15:58]है खुदा की तरफ से नुमाइंदा है कुछ लोगों बात बहुत गिरान
[16:01]गुजरती है जबक फरिश्तो के लिए कायल है य लोग फरिश्ते क्या
[16:07]है आलम की तदबीर करते हैं वल मुद बराती अमर आलम की
[16:12]तदबीर करने वाला कौन है फरिश्ते हैं और फरिश्ते के मकाम हजरत
[16:22]आदम से कमतर है मला साजन सबके फरिश्ते सबने हजरत आदम के
[16:26]लिए क्या किया सजद किया सारे फ को हुकम हुआ खुदा की
[16:31]तरफ से कि आदम के लिए सजदा करे सबने सजदा किया यहां
[16:36]से पता चलता है आदम की अजमत फरिश्तों से बाला तर है
[16:41]आदम यानी मकाम इंसानियत नुमाइंदे इंसानियत और अहार का मकाम रिवायत में
[16:52]कसरत के साथ मौजूद है के हजरत आदम से भी उनका मकाम
[16:55]बाला तर है ठीक है हजरत आदम नबी है लेकिन माम है
[17:02]या रहबर आलम खलकत है इस हवाले से यह तीन विलायत यानी
[17:08]इख्तियार रखना साब तियार होना तसरफती लिहाज साहब तियार है और दीनी
[17:19]लिहाज से मारफ दीन उसूल दन फर दन के लिहाज से साब
[17:26]तियार है विलायत तकनी के लिहाज से साहब इख्तियार है उ तकन
[17:31]में दो नुक्ते एक ये है कि उनके [संगीत] तसरफती खुसूस हमारे
[17:39]दिलों पर शैतान अगर मैं बेदीन आदमी हूं शैतान के वसवसे मेरे
[17:44]दिल पर असर करता है अगर पाकीजा आदमी हूं तो इमाम के
[17:51]इमाम के तसरफती है ना असर करने के लिए यानी पाकीजा आदमी
[18:00]पर अच्छी बातें असर करती है नापाक आदमी पर बुरी बातें असर
[18:06]करती है इसी तरह से इंसानों के दरमियान जो पाक है जिन्होंने
[18:10]अपने दिल को पाक रखा है अल कलब कलब मोमिन अश रहमान
[18:16]मोमिन के दिल खुदा का अर्श या खुदा ही की हुक्मरान है
[18:22]दिल पर तो खुदा के नुमाइंदे इमाम है तो जिसके दिल में
[18:25]ईमान है उस पर इमाम असर करता है शैतान के असर करने
[18:31]पर कोई तराज नहीं शैतान हमारे दिलों में वसवसे डाल सकता है
[18:36]तजन कर सकता है तस्ल कर सकता है कुरान में है बदसूरत
[18:38]चीजों को खूबसूरत बुरी चीजों को अच्छी शक्ल में पेश करता है
[18:45]गुमराह करता है इमाम के लिए कहे तो फिर कुछ लोगों को
[18:50]तकलीफ होती है जब खुदा शैतान को यह ताकत देता उसके मुकाबिल
[18:52]में इमाम को ताकत देता है था कि हलित रखने वालों की
[19:00]हिदायत करें तो यह विलायत तकनी एक ये है आलम में तस
[19:02]कर सकता है दूसरा यह कि दिल हलित रखने वालों की दिल
[19:06]पर असर अंदाज हो सकता है तीसरा यह है कि व विलायत
[19:11]ही नहीं है लेकिन विलायत के करीब है यानी उनके अहले बैत
[19:15]से तवल करना उनको वसीला करार देना आप द त वसल में
[19:22]क्या पढ़ते उनको वसीला करर देते हैं या खुदा के दरगाह में
[19:25]आपके पैगाम आपके दुआ आपके आवाज पहुचने के लिए उनको वसीला करार
[19:35]देते हैं विलायत के चौथा माना भी है मोहब्बत के माना में
[19:43]तवला तबरा तवला वही विलायत से मोहब्बत के माना में लाय पहले
[19:47]वाले तीन माना उसूल दन में से है यानी क्या इमाम का
[19:53]माना और विलायत का माना एक ही है इमाम या आपके सियासी
[19:57]रहबर इमाम या आपका इल्मी रहबर दीन के मारफ को इमाम से
[20:05]लेना है और इमाम क्या है इमाम के तीसरा माना आप किरदार
[20:13]का राह पर इमाम के तीसरा माना क्या है इमाम किरदार का
[20:19]रा पेश नमाज को इमाम जमात क्यों कहते हैं दो रकात नमाज
[20:26]में उसके नक्श कदम पर चलते हैं तो किरदार का रह पर
[20:28]इमाम का चौथा माना कुल्ले कायनात का राह पर है जो वही
[20:33]विलायत तकनी का हम माना है तो विलायत तीन माना में इमामत
[20:40]और विलायत का माना एक ही होता है सिर्फ एक माना में
[20:42]फर्क विलायत के एक माना क्या हुआ मोहब्बत है व फर दिन
[20:48]में है विलायत जब मोहब्बत के माना में आता है फर दीन
[20:53]में है आप दसवा क्या है तवला है ना फर दन में
[20:59]है और इसी तरह से इमामत का माना उसव हसना में वही
[21:08]आपके पास अल्फाज के मानी बयान करता हूं शिया अकाद के हवाले
[21:12]से य अल्फाज के मानी बयान कर रहा हूं इस बात के
[21:17]लिए अलग काम चाहिए ना तो इमामत में माना क्या है उस
[21:24]इमामत का माना उसव हसना यानी इमाम है रहबर उस हसना है
[21:31]इस माना में विलायत इस्तेमाल नहीं होता इमामत ही इस्तेमाल होता है
[21:35]मोहब्बत के माना में विलायत इस्तेमाल होता है इमामत इस्तेमाल नहीं होता
[21:39]है लेकिन बाकी तीन माना में विलायत और इमामत का माना एक
[21:45]ही है इमाम रहबर सियासी है या हुकूमत करने का हक इमाम
[21:52]को है इमाम रहबर इल्मी है यानी पूरे दन के उसूल फरू
[21:55]सब किससे लेना है तमाम मारफ दन उसूल फर भी कुरान की
[22:01]तफसीर सब हदीस सब किससे लेना इमाम से लेना और विलायत तकनी
[22:10]इमामत तकनी व भी इमाम के पास यह नुक्ता है इमाम इमाम
[22:19]बनने के लिए आयत में इरशाद होता है व जालना हमने उनको
[22:28]इमाम बनाया और वो हमार हुकम से हिदायत करते इमाम हिदायत करते
[22:32]सस इमाम किसको कहते रहबर को कहते हमारे हुकम से हिदायत इमाम
[22:41]का काम हिदायत करना है कमाला की तरफ अजमत की तरफ मेराज
[22:44]की तरफ ले जाना दुनिया में भी इंसान को इंसान कामिल बनाना
[22:49]है इंसान को खुदा से मिलाना है खुदाई सिफात इंसान के अंदर
[23:00]पैदा करना है इंसान जब खुदा से मरबूपल्ली हका भी खुदा ही
[23:32]के जरिए कश्फ होता है ताकतवर भी खुदा ही के जरिए होता
[23:38]है हमेशा रहना खुदा ही के जरि इंसान हमेशा रहता है जिंदगी
[23:42]अबदीमंडी के लिए विलायत सियासी है वली के लिए विलायत सियासी हासिल
[24:04]है न हुकूमत करने का हक सिर्फ वलीय खुदा को है हुकूमत
[24:11]करने का हक सिर्फ वलीय खुदा को है तो वली खुदा ना
[24:18]हो तो देखिए आम के जमाने में जब जाहिर थे उनके मुकाबिल
[24:24]में हुकूमत करने वाले ससब थे उनको हुकूमत नाजायज हुकूमत थी अगर
[24:31]च नाजायज होने का हलावा इंसानों के नुकसान में भी था एक
[24:38]ऑपरेशन करने वाले माहिर डॉक्टर को निकालकर एक कसाई को लाकर ऑपरेशन
[24:42]थेटर में रखे तो क्या हो जाएगा सबकी जान चली जाएगी नुकसान
[24:48]बेमार को है इसीलिए इंसान इमामत ना हो इमाम को य मुकाम
[24:58]ना दिया जाए एक नालायक दिया जाए तो जाहिर व इंसानों को
[25:05]मकसद खलकत की तरफ नहीं ले जा सकता इंसानों के अंदर फजीलत
[25:07]पैदा नहीं कर सकता इंसानों के अंदर कमाला पैदा नहीं कर सकता
[25:14]इंसानों के अंदर अखलाक पैदा नहीं कर सकता है ला के मारूफ
[25:20]आप जानते हैं अली हुक्मरानों पर तराज करके फरमाते हैं कि फलान
[25:29]फलान फलान इदार पर आ ग जब जानते हैं कि इस इस्लामी
[25:31]हुकूमत का इस्लामी निजाम की चक्की मेरे बगैर नहीं चल सकती मुझसे
[25:39]इल्म के समंदर मैं वह पहाड़ हूं जिससे इल्म के समंदर नीचे
[25:47]सरार होते जिस तरह से पहाड़ों से दरिया सरार हो जाते हैं
[25:50]और इतना बुलंद पहाड़ हो इल्म अजमत कमाला का कि कोई परिंदा
[25:56]उड़कर उस तक नहीं पहुंच सकता लेकिन क्या करें मैंने सबर किया
[26:02]इस तरह से सबर किया दीन की हिफाजत के लिए उम्मत को
[26:09]बचाने के लिए सबर के इस तरह से सबर किया कि गोया
[26:10]मेरी गले में हड्डी फसी हुई हो आंखों में खस खाशा फसा
[26:17]हुआ हो आंख ना बंद कर सकता है ना खोल सकता है
[26:22]हड्डी ग गले में फंसी हुई तो क्या होती है आदमी नहीं
[26:28]निकल सकता है ना निकाल सकता है ना निगल सकता है यह
[26:35]मेरी हालत इन्हीं लोगों के साथ चला था कि इस्लाम को खतरा
[26:40]पेश ना आ जाए तो अर्ज किया कि यह गुजर्ता तारीख है
[26:44]गुज हका को जानते हैं इमाम की मफत हासिल करना पहली बात
[26:49]यह है कि इमाम की मारफ हासिल करना है एक फिर इमाम
[26:53]पर ईमान लाना है दो फिर इमाम से मोहब्बत करना है [संगीत]
[26:59]फिर इमाम के नक्श कदम पर चलना है चार यही करना है
[27:06]इमाम पहला मरहला इमाम की मारफ सिर्फ नाम जानना मारफ नहीं है
[27:12]सही मारफ हासिल करना अपनी हद तक अपनी तवानी के हद तक
[27:18]मारफ के बाद मानना ईमान लाना और ईमान लाने के बाद क्या
[27:28]करना है तात करना उनकी तामा पर अमल करना उनसे मोहब्बत करना
[27:37]मोहब्बत ना हो तो नहीं होता किसी से मोहब्बत ना करें ना
[27:40]उसको मान सकते ना उसकी तात कर सकते मोहब्बत बहुत जरूरी है
[27:47]और फिर उसके नक्श कदम पर चलना मोहब्बत ना हो तो इमाम
[27:52]के नक्श कदम पर नहीं चल सकते इसलिए इमामत में जो मोहब्बत
[27:55]है वो तही है इमामत तक पहुंचने के लिए आप मोहब्बत करेंगे
[28:00]तो इमामत तक पहुंच सकते हैं इमाम की हुकूमत को मान सकते
[28:09]हैं इमाम से अपना दीन अपनी तालीमाबाद पर चल सकते हैं सब
[28:17]कुछ मोहब्बत हो तो हो सकता है इमामत तक पहुंच सकते हैं
[28:19]इसलिए इमामत अगरचे फरदीन में है लेकिन इंतहा बुनियादी चीज है इसीलिए
[28:26]कुरान ने अजर रिसालत करर मुदत जल कुरबा को तो यह हमारी
[28:35]जिम्मेदारी है मफत इमाम जितने हो सके इमाम की मफत हमारी मजलिस
[28:38]अजादारी यह सब इसीलिए मफत इमाम हासिल करें मफत इमाम के बाद
[28:45]मोहब्बत इमाम अजादारी की वजह से मोहब्बत बढ़ जाती किसी महबूब के
[28:52]जितने याद करेंगे उतना ही मोहब्बत बढ़ती जाएगी एक गलत आदमी हो
[28:58]उसको जना ज्यादा पहचानेंगे उतना ही नफरत करेंगे पाकीजा हस्ती की जितनी
[29:05]मफत होगी जितनी याद करेंगे उतना ही उसकी मोहब्बत बढ़ती चली जाएगी
[29:11]तो मोहब्बत और तात क्योंकि उनकी तात हमारे दुनिया और आखिरत के
[29:18]नजात का जरिया है और उनके नक्श कदम पर च तात से
[29:25]बाला तर हैसी नक्श कदम पर चलना क्योंकि तात में वाबा आता
[29:31]है वाज बात और महर मात में मान बात मानने को तात
[29:37]कहते में उनके सारे किरदार को अपनाना उनके सारे किरदार को अपनाना
[29:40]ी में आता है उसवा मानना और फिर उनके लिए नासुर मददगार
[29:50]पैदा करना अपने जात तक महदूद नहीं रखना इमाम के लिए नासिर
[30:00]मददगार पैदा सस इमाम खुद बहुत से काम करते अस यह आलम
[30:03]बाकी नहीं रह सकता था इमाम के बगैर खदा हो जमीन बाकी
[30:14]नहीं र सकती लेकिन उसके बाद इमाम खुदा के तमाम फजत के
[30:18]हकदार अले जमीन होता है इमामत की वजह से प भी तो
[30:24]इमाम थे अया भी तो इमाम थे इसी की वजह से लेकिन
[30:31]जो फिलहाल जिसके बारे में गुफ्तगू करना है वो ये है कि
[30:35]इमाम की सियासी विलायत को विलायत सियासी को मानना है यानी इमाम
[30:43]को ही हक देते हैं हुकूमत करने का क्यों दुनिया में इतनी
[30:51]बुराइयां किस वजह से आप गौर करें पूरी तारीख बशरी में बुराइयों
[30:54]का असल चश्मा हुक्मरान है हुक्मरान बुरे होते हैं अपने जैसे बुरे
[30:59]लोगों को अपने पास बुलाते हैं बुरे लोग अपने मसाइल हल करने
[31:05]के लिए अपने माशी मशत के मसाइल अपने सियासी मसाइल अपने शहवत
[31:12]के मसाइल हल करने के लिए आग लगाते दुनिया को पाकीजा लोगों
[31:14]को नाबूत करते हैं मुश में बुरा कामों की हसला अफजाई होती
[31:20]है अच्छे कामों की हसला शिकनी होती है पूरी तारीख बशरी में
[31:23]सर्फ मुसलमानों के बात नहीं है तमाम बुराइयों का असल च सर
[31:31]चश्मा नापाक हुक्मरान है आप देख रहे हैं अगर इंसान को इंसान
[31:34]बनाना चाहते इंसान कामिल बनाना चाहते हैं बंदे खुदा बनाना चाहते हैं
[31:42]जब तक हुक्मरान सही ना हो तो नहीं बना सकते पगम फरमाते
[31:45]अनास मुल लोग अपने हाकिम के दन पर होते हैं अपने बाप
[31:54]से ज्यादा हाकिम के शबी हुआ करते हैं आप खुद तारीख बशत
[32:00]को तो पता चलेगा यह सार खामिया कहां से है अगर हुक्मरान
[32:02]सही हो तो मुल्क में खामिया पैदा होती है नहीं होती है
[32:07]आलम इस्लाम की बदकिस्मती क्या है गुलामी क्या है क्यों हमारे हुक्मरान
[32:13]सब के सब गुलाम है य गुत क्या है क्योंकि हमारा हुक्मरान
[32:16]सब के सब चोरी करते हैं फित फसाद क्यों हुक्मरान फित फसाद
[32:24]के पुश बनाही करते और पूरी दुनिया की यही दास्तान है इसीलिए
[32:31]खुदा ने देख इमाम खुदा से राबता रखते हैं खुदा से राबता
[32:36]में खुदा की खु शूी जिस चीज में उसी को इमाम अंजाम
[32:41]देते हैं वली उल्ला अंजाम देता है खुदा की खु शूी चाहात
[32:47]में है दुश्मन को मारने में है उसी को अंजाम देते हैं
[32:49]इमाम की खुदी अपनी शहादत में है उसी को अपनाते हैं खुदा
[32:55]की खु शूद किस चीज में है कुरान में फरमाते लाला कुछ
[33:05]मर्द ऐसे हैं रिजाल कुछ अजम म ऐसे लातु उनको लह में
[33:14]नहीं डालता उनको सरगम नहीं करता है उनको फ फिल नहीं करता
[33:17]है ना तिजारत ना खरीद फरोश अला याददा काम सारे काम करेंगे
[33:28]सारे काम करेंगे दुनियावी काम करेंगे लेकिन खुदा मदद नजर है इमाम
[33:35]के मदद नजर खुदा है इसलिए जर्र बराबर मर्जी खुदा से हटकर
[33:39]कोई काम नहीं करेगा मर्जी खुदा से हटकर कोई काम नहीं करेगा
[33:45]अली 500 दरख्त को पानी देते थे हर रात हर दरख्त के
[33:51]पास दो रकात यानी आप मुस्ताहब रकाते चलते हुए कर सकते हैं
[33:58]ना चलते हुए पढ़ सकते हैं तो 500 दरख को पानी देते
[34:00]थे दो रकात पढ़ते हुए याद खुदा भी है या खुदा का
[34:05]माना स नमाज भी नहीं है जब काम करता है खुदा म
[34:09]नजर होता है खुदा चाहता है इसलिए करता इसलिए खुदा की चाहत
[34:15]के खिलाफ भी कोई एकदाम नहीं करता है लाला तो अगर हुक्मरान
[34:24]सही हो इंसानी मुश सही हो सकता है एक अहम वज आप
[34:30]कह सकते 60 70 फीसद इंसानों की इसी दुनिया में सही होने
[34:33]के आखरत की बात नहीं कर इस दुनिया में सही होने की
[34:38]वजह सहादत की वजह हुक्मरान है अगर हुक्मरान सही है इंसान सही
[34:42]हुक्मरान बुरे तो इंसान लेकिन इंसान क्या है पैदायशी र पर हैवान
[34:49]है उसके हैवानियत बढ़ती चली जाती है बल्कि हैवान से भी पस्तर
[34:55]हो जाता है सबीला ईमान ना हो तो जानवर से भी पस
[35:00]हो जाता है तो इंसानी माश भी जानवर से पस्तर होता है
[35:03]हमारे यूरोप वाले हुकूक इंसानियत हुकूक हैवान के नारा बुलंद करते हैं
[35:10]लेकिन आप इंसानों के साथ किस तरह से पेश आते आप देख
[35:12]रहे हैं उनकी सही तस्वीर सामने आई फिलिस्तीन के मसले से बाज
[35:17]कात अपने आप को नहीं छुपा सकते हदीस में बात मुनाफिक अपने
[35:23]आप को नहीं छुपा सकते मनता न जना मुनाफिक को बात आप
[35:36]पहचानते हैं जबान की सकत के जबान चलती खुद बुद आदमी कंट्रोल
[35:39]नहीं कर पाता है चेहरे के रंग से चेहरे के तरा सेही
[35:44]पहचान सकते तो आप देख फिलिस्तीन के मसले में पहचान लिया यूरोप
[35:49]वाले कितनी इंसानियत उन है अमेरिका वालो में कितनी इंसानियत है फिन
[35:53]को नाबू करने के लिए जीतने के लिए नहीं जीतने के लिए
[35:59]ताकत जीत रहे लेकिन नाबूत करने के लिए इमदाद कर रहे हैं
[36:03]तो वाक इंसानियत की सहादत इसी में है कि हुक्मरान सही हो
[36:09]और हुक्मरान कैसे सही होता है अगर खुदा दिल में ना हो
[36:15]नहीं हो सकता कुरान खुद कहता है जो काफिर होते हैं व
[36:19]जानवर से भी पस्तर हो जाते हैं इसलिए दन ने और जो
[36:27]दूसरे मुसलमान भी इदार पर आने के बाद आहिस्ता आहिस्ता जानवरी की
[36:31]तरफ जाते हैं दर की तरफ जाते हैं इसीलिए दन ने कहा
[36:39]क्या हुकूमत करने का अंबिया को है और को है जब व
[36:44]हुकूमत करेंगे पाक तरीन हुकूमत करेंगे मला अमीर मोमिनीन की पा साल
[36:52]की हुकूमत की तारीख को देखे मौला खास तरीके से अगर हुकूमत
[36:58]करते आप दुनिया वालों की सियासत को अपनाते तो आप अमीर शाम
[37:02]को शिकस्त दे सकते थे आपकी हुकूमत बच सकती थी लेकिन फिर
[37:07]अली की हुकूमत नहीं थी अली की हुकूमत नहीं थी व पाकीजा
[37:10]हुकूमत अली चाहते थे पाकीजा हुकूमत की तस्वीर पेश करें इस्लामी पाकीजा
[37:17]हुकूमत किस तरह से होती है तो एक अहम मसला यह है
[37:23]हुकूमत करने का हक खुदा ने किसको दिया है पैगंबर और इमाम
[37:28]को पैगंबर भी हुकूमत करेंगे किस हवाले से इमाम होने के नाते
[37:31]पैगंबर नबी भी है और इमाम भी है इमाम होने के नाते
[37:36]से इमाम यानी रहबर रहबर होने के नाते से हुकूमत करते हैं
[37:41]वली होने के नाते से इला रस वली होने के नाते से
[37:48]हुकूमत करते यह हुकूमत अगर इमाम हुकूमत करे तो मकसद हुकूमत हासिल
[37:56]इसलिए खुदा ने य जिम्मेदारी अम को दी है ताकि इंसानों की
[38:05]सही तरबियत कर सके और उनकी दुनिया भी जन्नत के नमूना पेश
[38:08]करे और इंसान जन्नती इंसान बन जाए इसी दुनिया में जन्नती एक
[38:14]पाकीजा इंसान बन जाए इमाम हसन फरमाते दुनिया में अपनी रूह के
[38:18]साथ रहो इसी दुनिया में जब आप रह रहे हैं जिस्म के
[38:23]साथ दुनिया में रहो रूह के साथ आखिरत में रहो यानी इसी
[38:28]दुनिया में भी आपको र आखिरत रू पाकीजा रूला रू अगर जिस्मानी
[38:33]लहा से इसी दुनिया में आप रह रहे हैं अब यह अब
[38:39]की हुकूमत को देखिए दन क्या चाहता है चाहता है इमाम की
[38:46]हुकूमत लेकिन इमाम पद में आप जानते हैं इंसानों ने 12 इमाम
[38:50]एकज अंबिया होते हुए सबको तन्हा कर दिया साथ नहीं दिया यानी
[39:00]इमाम हाजिर थे उसके बावजूद पर्दे गोया पर्दा गैब में थे उनसे
[39:05]कोई फायदा नहीं उठाते थे तो आखिरी इमाम जिसकी खबर सारे अदियानूठू
[39:27]इमाम पद गैब में गए हैं तो हुकूमत की जरूरत नहीं है
[39:32]नापाक हुकूमत का नुकसान नहीं है इस्लाम नाफिटी है हमारे गै बत
[39:48]के दौरान हमारे नाइब है उनकी हुकूमत करनी चाहिए उनको हुकूमत कबूल
[39:52]करना चाहिए लोगों की जिम्मेदारी है उस नायब को हुकूमत कबूल करे
[39:56]उस नायब की जिम्मेदारी हुकूमत इस्लामी बनाने के लिए कोशिश करें यह
[40:03]जिम्मेदारी है और हमारे जमाने में खुश किस्मती से ईरान में कामयाबी
[40:09]हुई और इराक भी अक्स शया मुल्क है वहां पर भी हो
[40:15]सकता एक दिन कामयाबी हो जाए और बहन में भी अक्त शया
[40:20]मुल्क है वहां पर भी हो सकता कामयाबी हो जाए अजरबैजान में
[40:23]भी अ कम से कम अकसय तो अपने नजरिए के मुताबिक हुकूमत
[40:28]बना सकती है इमाम को अगर मानते हैं तो नायब इमाम को
[40:34]भी मानो हम इमाम को मानते हैं लेकिन नाइब को नहीं मानते
[40:37]यस इमाम को नहीं मानते इसका मतलब यह है इमाम को वहां
[40:42]तक मानेंगे जहां तक हमारे नुकसान ना हो अगर हमारे सियासी मफत
[40:49]के लिए नुकसान हो तो इमाम को नहीं मानेंगे यह तो आप
[40:55]सही अगर हम वाक वली खुदा को मानते हैं तो वली की
[40:57]विलायत को मानना है चाहे वह हाजिर हो चाहे गायब हो गीबत
[41:03]के दौरान वली ने किसको अपना जानशीन बनाया है मुहि दीन को
[41:08]को जाम शराय मुहि को खुद जब हाजिर थे मौला कफा में
[41:16]थे मिसर में मालिक अतर को बनाया था बसरा में इ अब्बास
[41:18]को बनाया था मुख्तलिफ शहरों में मुख्तलिफ लोगों को तो उनकी तात
[41:26]लोगों पर वाजिब थी और असर गमत में इमाम ने फुकाहा को
[41:28]जिनम न द शर्त हैं जिस फकी में व न द शर्ते
[41:33]हो उनको नाइब बनाया सस फुकाहा की जिम्मेदारी यह है कि हुकूमत
[41:39]इस्लामी बनाने की पूरी कोशिश करें उम्मत की जिम्मेदारी यह है कि
[41:43]हुकूमत बनाने के लिए उनकी मदद करें हम कहते इमाम की हुकूमत
[41:49]के मुंतज है लेकिन जो कर सकते हैं नहीं करते हैं फिर
[41:52]बात बहुत करना ये तो इतना य अरब लोग अमूमन फिलिस्तीन के
[41:58]मसले हमेशा यह करते रहे हैं मुतालबा करते अवाम मुत से आलमी
[42:02]अदालत से सलामती कौंसिल से शर्क से गरब से यह करो फिन
[42:07]के लिए वो करो वो करो लेकिन खुद जो कर सकते हैं
[42:12]करने के लिए तैयार नहीं है खुद जो कर सकते हैं वह
[42:16]नहीं करते हैं दूसरों से मुतालबा करते वजह क्या यह धोखा देना
[42:19]बेवकूफ बनाना है देखो हमें फिलिस्तीन का एहसास है इसीलिए हमने इतना
[42:23]मुताल किया सररा कान्फ्रेंस बुलाया मुताल किया आम लोग धोखे में आते
[42:30]इसी इ शोर शराब से सोचते ये लोग भी काम कर रहे
[42:34]हैं लेकिन जो खुद कर सकते नहीं करते हैं अगर जो खुद
[42:40]कर सकते करते तो यह मसाइल अभी तुर्किया इसराइल के तेल बेल
[42:45]सब वहां से जाता है तुर्किया से अजरबैजान सेर तुर्क तुर्क से
[42:48]वहा तिजारत तुर्किया से जाता है सबसे ज्यादा शोर मचाने वाला एक
[42:51]तुर्की फिलिस्तीन हक में जो कर सकते व नहीं करता है दूसरा
[42:58]आलम हालत तो तुर्किया से कहीं बदतर है तुर्किया के हुक्मरान इस्लामी
[43:03]गुरुह से ताल्लुक रखता है उसकी हालत हो दूसरे लोग तो पहले
[43:08]ही से मुनाफिक से तालुक रखते थे यह मसले य हमारा मसला
[43:13]भी ऐसा ना हो हम इमाम को मानते इमाम के हुकूमत को
[43:18]मानते इमाम की हुकूमत करने वालो से लड़ते तो फिर इमाम ने
[43:20]जिस नायब की निशानदेही की है उसकी क्यों मदद नहीं करते उसकी
[43:24]हुकूमत की क्यों मदद नहीं करते तो हमारी जिम्मेदारी अभी क्या है
[43:34]इमाम की हुकूमत उस जमाने में इमाम को महरूम किया जालिम की
[43:37]लेकिन अभी क्या है इमाम के नायब की हुकूमत केलिए हमें ब
[43:45]चरक हिस्सा लेना है अगर लेलिया अब देखो ईरान के इंकलाब की
[43:47]वजह से ला के फलित की वजह से लोग इमाम जमाने की
[43:52]तरफ मुत हुए दुनिया भी मुत हो गई काफी हद तक अमेरिका
[43:56]से कई गुरुह गए तकी करने के लिए इमाम जमाना क्या है
[44:03]कैसा है नजरिया क्या है सामरा में जो सरदा है वहां पर
[44:06]तक गए दुनिया को मुत किया इमामत की तरफ य नुक्ता दूसरा
[44:13]अपने इमाम वली है इमाम है किसम इम में या अपना इम
[44:20]सिर्फ इमाम से लेना है यह हमार जि मदारी है अपने उसूल
[44:26]दन फन तफसीर सब कुछ इमाम से लेना है तो इमाम जब
[44:32]थे बदकिस्मती से बहुत कम लोगों ने इमाम से लिया जब मौला
[44:38]ने फरमाया मुझसे पूछो मेरे जाने से पहले तो कुछ लोगों ने
[44:40]क्या पूछा मेरे सर के बाल कितने हैं लेकिन के उलूम के
[44:50]सर चश्मे अली अल सलाम को जो मौका मिला हका बयान करने
[44:57]का आपके नज बला है रर है उसूल काफी में है मुख्तलिफ
[44:59]पर मौला के फरमाइश है उनसे इस्तफा करना है लेकिन इमाम से
[45:08]इसमें तो कोई शद लिहा से हमारे क्लियर है हम इमाम की
[45:13]हुकूमत को मानते हैं उसके मुकाबिल में किसी को नहीं मानते इमाम
[45:16]जिसको हुकूमत देते उसी को हुकूमत को मानते हैं लेकिन अमलन इमाम
[45:22]पद गैब में है और जिसको इमाम ने हुकूमत दिया है उसको
[45:30]नहीं मान मुश्किल है मकाम अमल में और इसी तरह से इमाम
[45:33]से अपना पूरा दन लेना है लेकिन असत में इमाम ने दन
[45:39]लेने में मराज को निशान की इनके बाद मानो मराजी की निशानदेही
[45:48]की है ना मन कान मन में से जो फकी अपने आप
[45:53]को गुनाहों से बचाता है मुखालिफ के मुखालिफ हैला खुदा की तात
[46:01]करता है इमाम की तात करता है को चाहिए उसकी तकली करे
[46:08]इमी लिहाज से मरजा के या इमाम के नाइब इमाम ने इमाम
[46:13]के मुत बादल तो नहीं हो सकते लेन कम से कम का
[46:14]मसला है रोटी दो तीन रोटी खाने वाला है एक लक मिल
[46:19]जाए लक भी ना खाए तो मर जाएगा ना एक लक मिल
[46:23]जाए तो उसी को भी तो खाना है तो इमाम के नाइ
[46:27]इमाम ने जिस नायब की निशानदेही की है तकलीद करने के लिए
[46:32]तैयार नहीं है
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