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Azmat Syyeda Wa Seerat Syyeda | H.I Shabeer-ul-Hasan Tahiri
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23/07/01
Record date: 15 Jan 2023 - عظمت سیدہ و سیرت سیدہ AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:14][संगीत] [संगीत] सलातो अस्सलाम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अम्मा का अर्थ फक्कड़ अल्लाह
[1:24]हु अकबर [संगीत] [संगीत] [संगीत] पुरी जिंदगी आपको [संगीत] [संगीत] बयान करने
[3:00]में और उनकी सीरत को बयान करने में जहां हमारे लिए दर्ज
[3:05]है एक बरकत का मतलब जरा थोड़ा सा इस पर मुबारक हो
[3:13]बहन से भी बीवी के जो नाम है अस्मा और अस्मा में
[3:17]से बीवी का एक नाम है मुबारक का मुबारक का मतलब यही
[3:23]बनता है की वो भी के जो बरकतों का मरकज है और
[3:28]जो भी बरकतें देने वाली भी है लिहाजा अगर जिंदगी को और
[3:33]बरकत बना रहा है और हम चाहते हैं की हमारी जिंदगी में
[3:36]barkaten शामिल हो जाएं तो ज्यादा से ज्यादा जनाबे सैयदा के नजदीक
[3:43]होने की जरूरत है सिर्फ अल्लाह अल्लाह हम जब स्वामी दुनिया और
[4:14]मेल दुनिया में कम से कम पेटा नहीं करते ज्यादा से ज्यादा
[4:19]की तरह रखते हैं तो बरकतों में उसूल में क्यों कम से
[4:22]कम पर ikhtila करते हैं और जहां पे सैयद असलम मिलती हैं
[4:27]वो हर एक बार मुझसे बरकतें हैं दुनिया से भी और भी
[4:29]एतबार से भी जनाबे सैयद असलम अल्लाह [संगीत] पब्लिक का सुनने का
[5:08]अंदाज़ और तरीका तार कुछ और है और हमें भी उसी तरह
[5:14]से मुझे पढ़ने की आदत है उन्हें अभी तो ऊपर लेक्चर देने
[5:15]की आदत खत्म हो गई है बिल्कुल लेकिन यहां भारत अपने आप
[5:21]को बदलना पड़ता है बिल्कुल तब्दील करके और वह तो 10 की
[5:27]तरह ही देना होता है तो भागलपुर कोशिश करूंगा किसी एक फर्क
[6:26]की फजीलत है पैगंबर ए गिरामी के जितने भी इरशाद हैं एक-एक
[6:31]फर्ज की के लिए जो पैगंबर ने इरशाद अदा फरमाए सबसे ज्यादा
[6:36]आदि से जन्म के सैयद के लिए हो लेकिन जनाब रशीद के
[6:48]लिए सबसे ज्यादा ब्राह्मण हदीस शहर फरमाए उनकी फजीलत में उनकी अजमत
[6:52]में उनके वहां मर्तबा के नाम से हज़रत नहीं मखनी में जनाबे
[7:00]से किताब लिखी है तो उसको तो हसन में दर्शन किया कुरान
[7:06]की रोशनी में पहला हिस्सा और दूसरा हिस्सा है और उसकी ताकत
[7:41]भी ज्यादा है तो उन्होंने khulasatan हंट हम मेहमान आपको लिया और
[7:46]हम हम अहद इस पुलिया और उसके ऊपर फिर उन्होंने हदीस की
[7:52]जो तश्री की है तफसीर की है तो उसकी दाब की तरफ
[7:57]भी वजूद करना चाहिए एक मुसलमान सही उल हकीदा मुसलमान कराने मस्जिद
[8:01]की आयात को और टशन भारी गिरामी की हार्दिक को देखने के
[8:08]बाद जाना भी सैयद असलम यहां के लिए हम वैसे ही कहते
[8:14]हैं की उनकी अजमत में यह आयत है उनकी फजीलत में यह
[8:19]ए जाते हैं उनकी फजीलत में ये हदीस है वर्ण हकीकत में
[8:21]अगर देखा जाए हान बिल्कुल फजीलत हस्ती नहीं है यह फजल का
[8:31]कब है जनाबे सैयदा सलामुन ए गया जो है ये अजमतों का
[8:36]कब्बा है कायनात में जितनी भी फजीलत और अजमतों का आप तसव्वुर
[8:41]कर सकते हैं या जितनी भी ajmaten आपके जहां में ए सकती
[8:46]हैं वो तमाम तरह आजमाते और लेते हैं जनाबे सैयद अस्सलाम अलैकुम
[8:49]वजूद आधार का तवाफ कर दिया उन तमाम तरफ वैलो बना तो
[8:56]कौर भसीन का मरकज जो है वो जनाबे सैयद असलम रहा है
[9:01]अली के घर को हलवाई के घराने को अल्लाह ने इस तरीके
[9:03]से फैलाया आता किए हैं की इस घर को fidaahil का बर्तन
[9:08]बनाया है पहले तमाम तरह जमा कर दिया है और उसके बाद
[9:13]फिर किसी के लिए मोहब्बत को अपने दिल में दाखिल करता है
[9:25]इनका हो जाता है बनता हुआ ittabaruk होगा इसी घर के दी
[9:36]हुई एक है जो इनका होता है जिसके दिल में यह 14
[9:43]रहते हैं वही bafavilo तब अजमत होता है इनके बहुत ज्यादा फरदार
[9:45]बयान करने का जो हमें हुकुम दिया गया है उसकी भी एक
[9:50]लठ है और संभव है और मैंने वैसे तो आ मोहम्मद वाले
[9:52]मोहम्मद सलाम की fajai बजाने से भी हम बयान करते हैं बाहर
[9:56]फिल्म में भी बयान करते हैं खुद कुरान में जितने भी बयान
[10:00]किए हैं अगर मोहम्मद वाले मोहम्मद को बयान करना इसका आलम इंसानियत
[10:06]के लिए कोई फायदा ना होता और उनके faidayat के बयान में
[10:09]लोगों के लिए अगर कोई हिदायत का समान ना होता इनमें लोगों
[10:18]के लिए हिदायत का कोई नंबर भी उनके प्रकार करते की आप
[10:26]लोग भी बयान करते हैं हमें हुकुम दिया गया है तो मोहब्बत
[10:33]वालों मोहम्मद करना है उसका फलसफा कभी को कम अहमियत नहीं देनी
[10:41]शैतान का एक बड़ा धोखा यह भी होता है की वो जब
[10:45]किसी इंसान को बड़ा नवाबी पर इसका गुजर बना देता है तो
[10:47]फिर उसके दिल में यह डालता है की सब कुछ इबादत है
[10:51]सब कुछ तस्वीर है और तिलावत है पर नेक और सारे अमल
[10:55]है और ये लोग बेवकूफ हैं जो मोहम्मद वालों मोहम्मद ने इस्लाम
[10:57]से इतनी hakirat रखकर फजीलत रखते हैं और महज खाली कर कोई
[11:03]माना नहीं रखती है और तुम बस इबादत में लगे रहो यह
[11:09]भी शैतान का धोखा अगर कभी भी ऐसा ख्याल आए तो फौरन
[11:13]उनके बयान करने का मकसद भी यही मकसद यही है उनकी मोहब्बत
[11:21]है रखते हैं मोहम्मद का आज़म मोहम्मद के मुसलमान के साथ जो
[11:35]हमारा जज्बातों ताल्लुक है उसको कायम रखने के लिए हमेशा सजा इनको
[11:37]बयान करनाल को सुनना जरूरी है ताकि ये इश्क कभी मांग ना
[11:44]पड़े यह जो अतिशेष है यह कभी ठंडी ना हो यह जो
[11:49]उनके साथ हकीकत और कल भी वापस कभी है ये कभी सर्द
[11:53]ना पढ़ो ये अल्लाह पसंद ही नहीं करता और ना ये दिन
[11:58]की मसलेहट पे है अगर इस तरह हो गया की हमारे को
[11:59]लोग शर्त हो जाए ठंडे हो जाए और मोहब्बत वाले मोहम्मद सलाम
[12:04]किया हकीकत में खत्म हो जाए हमारे दिलों से लेकिन नमाज हमारे
[12:07]दामाद नहीं है मैंने नरूला इस्तेमाल किया करना आपके सामने रखूं तो
[12:15]मोहब्बत वालों मोहम्मद नहीं होते स्नान की शान और अज़मत को बयान
[12:28]करने के लिए जो नदी लोग हैं उनमें से एक करीना आया
[12:29]है आयत आया मदत है और इसको हज़रत इब्राहिम ने भी लिया
[12:35]कीजिए हंटर इनायत जनादेश आपकी अजमत को बयान करती है और याद
[12:43]क्या खुला सूरज किया जाए उल्लाह सुरन कुमारी [संगीत] तो जब कोरवा
[13:00]की bavardhak रसूलुल्लाह की उजरत है तो क्या हो गई हज़रत musahate
[13:05]हैं यह wajibuddin हज़रत मुसाहब नहीं होती सद्दाम मुस्तफा होता है तो
[13:17]क्या पता चला अपने रसूल अल्लाह की उजरत बनाकर इस वजह को
[13:28]वाजिब तरह दिया है की जिस वाजिब को अदा किए बगैर कोई
[13:35]नहीं हो सकता है अगर कोई रसूलुल्लाह वह है मोहब्बत वाले मोहम्मद
[14:00]ने मुसलाम की मोहब्बत और मारकंडे bavatar जनाबे सैयद उखाड़ किया गया
[14:05]कुर्बान शिव भी बहुत मिस कर अप्रैल मोद का सिका है यही
[14:09]वो एक खातून के जो सबसे ज्यादा रसूल उल्लाह के करीब है
[14:10]उसकी मगध मांगी है कुल मतदाता फिर कुर्बान तो कोरबा में जनाबे
[14:20]सैयदा है और उनकी मोहब्बत मांगी गई है इसलिए उनकी उनसे मोहब्बत
[14:26]करना फिर उनके बाबा से उनके शहर से उनकी आल से मोहब्बत
[14:28]करना अजीब है बताने पर अगर आप कभी तवज्जो फरमाए के आयतें
[14:34]या फिर नागरिक कुरूबाणा बताए ना कीजिए मगध मांगी है उनमें बरकत
[14:37]अल्लाह ने जनाबे सैयद को खराब नहीं है और उसे करवाने का
[14:50]अंदाज़ के रसूल अल्लाह के घर के शहर में आया था की
[15:01]अजमत में दी है उन हम करीना याद में से कई पैगंबर
[15:07]के घर के शहर में आए हैं घर में ए रही है
[15:11]आयत ना किसी और आयत के लिए नहीं किया लेकिन जब आयतें
[15:15]टिकर में आना था तो रसूलुल्लाह ने अपने घर के अंदर एक
[15:20]चादर का घर बनवाया है और चादर के घर में फिर ये
[15:21]पांचो जमा हो गए और जब ये पांचो से चादर के अंदर
[15:24]जमा हो गए हैं तो फिर आयते तो फिर ना दिल हुई|
[15:28]चादर के नीचे जमा थी इनके बारे में अल्लाह से पूछ लिया
[15:33]आप पढ़ते हैं ना जिसे किताब स्वागत है और रिसालत की कहानी
[16:03]है और फ़ातिमा पे बैठे हैं यह होम फ़ातिमा तो कहा अल्लाह
[16:09]ये भी तो का सकता था की इस चादर के नीचे मेरा
[16:12]मुस्तफा है मुस्तफा की बेटी है मुस्तफा का दामाद है उसके नमाज
[16:17]है ये नहीं कहा का आरोप कहां से करवा कहां हो फ़ातिमा
[16:19]तो हुआ होगा बाबा लोहावट टिकर के तारों का जरिया जनाबे वायुर
[16:27]को हरा दिया जनाबे सैयद ए कर दिया बाकी सब के निस्बत
[16:29]बयान किए इस चादर के नीचे सैयद है फ़ातिमा है फ़ातिमा के
[16:35]बाबा है फ़ातिमा कुशवाहा कई फसल होगा एक तो जनाबे सैयदा की
[16:43]margaliyat उसके बाद जनाबे syadaro और फिर जनाबे सही है ना के
[16:46]रिश्ते बताएं ताकि रसगुल्ला के रिश्तेदारों के लिए आई थी ये आयतें
[16:56]जनाबे सहारा के रिश्तेदारों के सर्वाधि मोहब्बत [प्रशंसा] जनाबे सैयदा की अजमत
[17:12]को बयान करता है सूर्य बाहर जाना मुबारक [संगीत] तो वो कुकर
[17:44]और कुछ यकीन के जनक पहले दिन से ही ये पसंद ही
[17:48]नहीं था की कदम पर उनके बटन का इनकार करवा लोगों से
[17:51]और अल्लाह की तौहीद manvaen या पैगंबर स्पिन की ताकत को आगे
[17:54]बढ़ाएं तो उन्होंने इस दावत के रास्ते में डालना शुरू किया और
[17:59]लोगों के जहानो को भी परांदा करने के लिए मुंतशिर करने के
[18:02]लिए लोगों को इस्लाम से और दिन की दवा से दूर करने
[18:06]के लिए नित्य नए प्रो कबड्डी कर दे हर चाल चलते की
[18:12]लोग हर का भागो से इस्लाम न मसाला खासतौर पर अबुल है
[18:16]अबू जल [संगीत] हर तरह की रुकावट पैदा की जाए किसी इंसान
[18:32]का जो मिशन को आगे बढ़ाने वाली होती है उसकी औलाद तो
[18:40]अगर उसके बेटे हो और उसके औलाद हो तो यह एक अलामत
[18:43]होती है की इसके मरने के बाद भी इसका ये मिशन का
[18:48]है रहेगा इसका नीलम क्योंकि इसके वारिस मौजूद है और अगर औलाद
[18:52]एन हो तो यह इस बात की तुम्हें ठीक है तीन की
[18:57]है तो रसगुल्ला के दोनों बेटे हज़रत और हज़रत जाना तो खदीजा
[19:15]के वतन से मक्के में यह सुर मक्के में नारीर हुआ है
[19:19]सूरा कौसर जो है ये मक्की सूरा मुक्तसर तरीन और जेम करीम
[19:25]सूरा कौसर हज़रत अब्दुल्ला अलैहिस्सलाम को भी इंतकाल हुआ तो कूफा की
[19:29]ने बहुत जश्न मनाया और खुशी मनाई और एक दूसरे को khushkhabriyan
[19:32]देना शुरू की की मुबारक हो तुम्हें क्या आज रात में जो
[19:38]है वो मोहम्मद अख्तर होगा मकसूद नस्ल हो गए अब तक उसे
[19:43]कहते हैं की जो मखदूम नस्ल हो जिसकी नस्ल में आगे ना
[19:45]बढ़ाना हो तो काबे मोहम्मद उत्तर हो गए अब इनका पीछे कोई
[19:50]इनका बेटा तो है नहीं की जो इनकी जगह को ले सके
[19:53]और इनके मिशन को आगे बढ़ा सके वो दो बच्चे द बचेगा
[19:58]नहीं उनका इंतकाल हो गया अब इसके ये दिन की जितनी बातें
[20:02]कर रहा है तो इसकी जिंदगी तक है और इसके जाने के
[20:03]बाद ये सब कुछ मिट जाएगा यानी जब ये दुनिया से चला
[20:08]जाएगा फायदा बात ना पटक दे गुरु हो जबकि मार जाएगा तो
[20:13]इसका जिक्र ही मिट जाएगा इसका नाम लेने वाला भी कोई नहीं
[20:15]होगा ताबिश कहती है की अब्दुल्ला ये छोटे बेटे रसूलुल्लाह के छोटे-छोटे
[20:22]के इंतकाल के बाद अबू लेह पे खुशी के साथ को pharmash
[20:27]लेकिन कहने के लिए गया और उन्होंने कहने का मुबारक हो मुबारक
[20:30]हो तुम्हें की मोहम्मद अब्दुल उसके बाद अब जहां रिकॉर्डिंग तो उसने
[20:36]भी दौड़ लगाई और उसने भी असर पढ़ो आज फिर वही पे
[20:40]जब ये खबर मिली तो वो भी दौड़ता हुआ कूफा के बजाने
[20:44]में पहुंचा और झूम लगा और खुशी मनाने लगा तो मोहम्मद उत्तर
[20:46]हो गए द अब पीछे इनका कोई बेटा बेटा है नहीं बस
[20:50]इनके मरने की दर मरेंगे उनका नाम मिट जाएगा इनका दिन खत्म
[20:52]हो जाएगा एक तरफ रब है मातम है किसी सहाबी औलाद का
[20:58]बेटा दुनिया से चला जाए उसका कल कितना माजून और मोह होगा
[21:03]रसूलुल्लाह पहले ही गम है ऊपर से ये दुश्मन है जो दुश्मन
[21:05]बना रहे हैं तो नहीं ऊपर जो राज्य पहाड़ टूटे तो उसके
[21:13]बाद अल्लाह ने रसूलुल्लाह की तसल्ली के लिए सूरा कौसर बना देती
[21:17]है रोशनी में इस बात को लिखा है की यहां कौसर का
[21:39]मिश्रा जनाबे सैयदा फ़ातिमा गहरा सलाम होता है या नहीं कौशल का
[21:52]मिश्रा जनाब सदा है तो बस आप अपने रब के लिए नमाज़
[22:05]पढ़िए और कुर्बानी कीजिए यानी कौसर कोई मामूली नेमत नहीं है ये
[22:08]बहुत बड़ी नेमत है अब आप इसकी शुक्रिया में नमाज़ भी पढ़िए
[22:13]और कुर्बानी भी कीजिए कुरान कहता है की रबर को हटाने का
[22:28]आप अब तक नहीं है आपका जो दुश्मन है ना हमने उसको
[22:36]अब तक बना दिया सबसे पहली बात तो ये है की अल्लाह
[22:39]ने जब यह कहा की हमने आपके दुश्मनों को आप तक बना
[22:41]दिया तो दुश्मनों में sarfars से अबुल है और भी बड़ी तादाद
[22:52]में यह गुफा तमीज से जाकर आप पूछे की यह जो मैंने
[22:57]नाम ली है और इन तरह मुश्किल क्या उनके auladen नहीं थी
[23:05]की उनके बेटे नहीं द बेटे द क्या उनके सब बेटों को
[23:13]मौत दे दी ऐसा भी नहीं है की अपने उनके बेटों से
[23:19]उनके औलाद आके नहीं बधाई ऐसा भी नहीं है ठीक है यह
[23:23]इन दुश्मनों के बेटे द अल्लाह चाहता तो हम सबको मौत दे
[23:29]देता और कहता की जिंदगी और मौत तो हमारे हाथ में है
[23:31]अभी आपका जो इस्तीफा कर रहे द उनसे हमने बदला ले लिया
[23:36]हमने उनके बेटों को मौत दे दी है और आगे उनकी नस्ल
[23:42]पढ़ेंगे तो उनके बेटे भी रहे फिर बेटों के बेटे भी रहे
[23:44]नस्ल भी आते रहे उनको उत्तर बना दिया बेटे होते तो क्या
[24:00]करते मकसद क्या है ना रहे रसूलुल्लाह के बाद और इस दिन
[24:11]को मिटाना चाहते द और उन्हें अपने पेटों पर राज था की
[24:13]हमारी जो नस्ल आगे बढ़ेगी मैंने कुछ ना janbuj करने के मंत्र
[24:28][संगीत] यदि उनकी औलाद में से की जिन्हें पुराने में जितने अवतार
[24:39]अदा दिया है दिन को लूटना चाहते द और यदि भी यही
[24:45]कम करना चाहता था और उसने अपने त्या सारी कोशिश की भी
[24:49]उसे वक्त से लेकर आज तक दिन आगे बडूंगा दिन फैल रहा
[24:55]लोग हल्का बवासीर इस्लाम है क्या दिन बेटा नहीं मिलता तो अब
[25:02]तक का यही मतलब है की इनकी औलाद रहेगी मगर उनका होना
[25:04]और ना होना बराबर हो जाएगा ठीक है ना यह अपने मिशन
[25:10]में कभी कामयाब नहीं हो सकेगी यह है और कौसर किसे कहा
[25:15]सैयद को कहा कौसर क्या मतलब है यानी हमने आपको एक ऐसा
[25:20]वजूद अदा कर दिया है जिसमें से हम आपको जरूरत कसीदा करें
[25:22]करेंगे और रात करेंगे जनाबे सैयदा में से कितनी औलाद पैगंबर क्या
[25:29]पढ़िए आज दुनिया में किसी भी एक फर्क इतनी औलाद नहीं है
[25:32]जितनी रसूलुल्लाह की हज़रत ए आदम अलैहिस्सलाम से लेकर अब तक जितने
[25:35]भी इंसान दुनिया में आए किसी एक इंसान की नस्ल इतनी नहीं
[25:41]है दुनिया में की जितनी नस्ल नस्ल रसूल मौजूद है औलाद है
[25:44]दुनिया की हरकत मिश्रा और आज तक का सैयद घराने का एक
[25:51]दिन का जो बच्चा है वह भी इस कौशल में ए जाता
[25:55]है चले जाएंगे आपकी औलाद को उसमें उससे आपकी नस्ल आगे बढ़ेगी
[26:21]पर दूसरा परफॉर्मेंस जो है वो है खैरियत auladen कसीर और सारी
[26:25]कसीर तो रसूलुल्लाह को अल्लाह खैरे कासिम भी दे रहा और औलादे
[26:28]कसीर भी दे रहा और ये सारे कसीनो ये औरतें कसीर देने
[26:31]के लिए अल्लाह ने रोड बनाया है जनाबे सैयद को यही रसूल
[26:37]अल्लाह तक अल्लाह का खैरे कसीर में पहुंचेगी और अल्लाह की औलादे
[26:39]कसीर भी पहुंचेगी अल्लाह की तरफ से auladen तस्वीर भी अल्लाह अपने
[26:44]हबीब को लेकर और खड़े खातिर भी देगा और उसका जरिए और
[26:46]उसका नुक्ता और उसका सबक जो है वो जाने salamiyat कितनी है
[26:57]alkausar में क्योंकि इसका विस्थापन जहां पे सैयदा जितनी अजमत और फजीलत
[27:03]हम failayenge तो वो पुरी एक कायनात बन जाएगी लेकिन उसे सबको
[27:07]अल्लाह ने अवसर में समेत दिया तमाम तरह जिस तरह अल्लाह अल्लाह
[27:19]सैकड़ो और हजारों की ताकत में रहमान रहीम करीम मोहसिन मेहरबान आप
[27:26]बहुत मजदूर राजला मेट रहो रशीद लतीफ बहुत ज्यादा उसके parvardiga नहीं
[27:31]ए रहा है तो ये हकीम का माना नहीं देता जब हम
[27:38]हकीम कहे तो यह रहीम के माना नहीं देता ठीक है जब
[27:40]हम उसे आदिल कहते हैं [संगीत] उसके आदिल होने का उसके कादिर
[28:00]होने का उसके रहमान और उसके रहीम होने का उसके करीब होने
[28:05]का तमाम इसी बात की जितने भी हैं उनका लक्ष्य करता है
[28:14]सरकारी वाहनों को मोहब्बत कहा है तो मोहम्मद में भी वही कैफियत
[28:20]पाई जाती है की जितने भी layate हम नाम हो सकते हैं
[28:25]और वो उन सबका ihata करता है इसमें मोहब्बत इसी तरह अल्लाह
[28:28]ने जनाबे सैयदा के बहुत सारे नाम रखे मसाला अल्लाह ही में
[28:33]जनाबे सैयद kufatima भी कहा जहरा भी कहा बटोर भी कहा रेडियो
[28:35]भी कहा मार गया भी कहा सैयद भी कहा सैयद भी क्या
[28:39]आता हेरा भी कहा बदरा khairunnisak से देखा तुमको बना ये सारे
[28:43]जो नाम है ये अल्लाह ने जनाबे सैयद एबिन हैं मगर अल
[28:48]कौसर ये वो नाम है की जो ihata करता है इन तमाम
[28:52]नाम का जब हम जनाबे सैयद कौसर कहेंगे तो इसमें फ़ातिमा भी
[28:57]शामिल है जरा भी शामिल है बाटुल भी शामिल है रज़िया भी
[28:59]शामिल है मर्जिया भी शामिल है सैयद तैयब आता है रशीद कोबरा
[29:04]में शामिल है और अलका सर कौशल बर्बाद नहीं के सिर्फ को
[29:07]बयान करने के लिए ये नर्स कौसर का अरबी में इस्तेमाल होता
[29:11]है यानी ये फ़ातिमा है तो फ़ातिमा होने में भी कसरत रखती
[29:15]है है यह सहारा है तो जरा होने में भी कसरत रखती
[29:16]है यह बाटुल है तो बाटुल होने में भी कसरत रखती है
[29:20]यह तैयबा है तो टहरत में भी कसरत रखती है सही सदा
[29:25]है syedat में भी कसरत रखती है इससे देखा है सदाकत नबी
[29:28]है व्लाइट और कोबरा विलायत में भी कसरत करती है मासूम है
[29:31]आलम स्मृति होती है यानी हर जहां से ये कसरत ही कसरत
[29:37]रखती ही अपने fidaahil में भी intihai कसरत रखती है अपने मानते
[29:39]हुए भी इन्तेहाई कसरत भी है अपने कमला में भी इन्तेहाई कसरत
[29:44]रखती है हर एतबार से ये बीवी अपने अंदर kasraton को समेटे
[29:50]हुए और फिर उसे बीवी को मुबारक का कहा गया है इन
[29:51]kasraton की मरकज अगर बरकतें हासिल करनी है तो इससे tabassur करो
[29:57]इससे मोहब्बत करो इससे मोहब्बत करो जिससे अकीदत रखो इससे लगाओ रखो
[30:00]इसके नाम पर पैसा खर्च करो बीवी के नाम की बहुत ज्यादा
[30:05]मजा नहीं से महफिल करवाना मैं लोगों को जो लोग बोलते हैं
[30:08]ना की हम बेरोजगार बताता हूं पढ़ने के लिए कुछ नहीं बताता
[30:14]की फल आया [संगीत] हर घर में सैयदा के मजलिस होनी चाहिए
[30:28]वैसे भी fatmiya जो अभी गुजर चुके हैं और यहां पर fatmiya
[30:30]ayyami अशुभ से कम नहीं है और हमें हुकुम भी है उनको
[30:34]अशुद्ध की तरह मनाया सड़कों पर जरूर होने चाहिए या अशुभ की
[30:46]तरह के फिर इसकी barkaten देखें आपको कितनी हासिल होती अगर आप
[30:49]जनाब ये सैयद सदा सदा यहां पर अपना मल खर्च करते हैं
[30:53]तो आपके पास कभी मल की कमी नहीं आएगी अपना कल अपना
[30:54]इन खर्च करते हैं तो आपका एवं बेहतर हिसाब पद जाएगा अपनी
[30:59]दावा नहीं है सर करते हैं तो आपकी सेहत को बताता बनाई
[31:03]मैं भी बनाएगा तो आप सर्च कर सकते हैं जो आपके लिए
[31:04]मुमकिन है खर्च कीजिए फिर देखिए सैयद की तरफ से कितनी बरकतें
[31:11]मिलती हैं और कितनी मिलती है जिस तरह के किसी ने उनसे
[31:19]पूछा भी है फिर भी किसी आदमी की डरे का इनाम नहीं
[31:29]है तो इतनी बड़ी टैक्टर से कैसे तकरार हुए और फिर ईरान
[31:34]किसी का कर्जदार भी नहीं है और इनन के लोगों की जिंदगी
[31:38]गुजर रही है हमसे अच्छी गुजर रही है तो उन्होंने यही कहा
[31:43]उन्होंने कहा की हम यहां पर ले लेते हैं [संगीत] तो सैयद
[31:59]के साथ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम [संगीत] अजमत में ही उनकी सीरत कितनी
[32:15]ज्यादा है और अब आप देखें की बीवी अपने आप को पवन
[32:19]कितना करती है और जिनकी सीरत पर चलने का हमें हुकुम दिया
[32:35]गया है अल्लाह ने हमारे लिए कामिल तरीन नमूना कर दिया उनके
[32:40]जिंदगी की हर पहलू में हमारे लिए मुकम्मल रहनुमाई मौजूद है रोशनी
[32:43]मौजूद है अगर हम बोल रहे रोशनी यहां से नहीं करेंगे तो
[32:48]हम अंधेरे में चले जाएंगे तो अंधेरे में जो रास्ता तय करता
[32:52]है वो मंजिल पर नहीं पहुंचा करता मंदिर पर वो पहुंचने हैं
[32:56]जो रोशनी में रास्ते को तय किया करते हैं तो यह जो
[32:59]14 मासूमों अल्लाह ने हमारे लिए रखे हैं और उनकी पाकीजा सीरत
[33:03]उनकी जो सीरत है वो हमारे लिए राष्ट्रीय पर रोशन करती है
[33:06]उसे रोशनी में हम सफर करेंगे तो हम मंदिर तक पहुंच जाएंगे
[33:11]हम जन्नत तक पहुंच जाएंगे लेकिन अगर हम उनकी सीरत से कट
[33:13]जाएंगे यानी उनके किरदार से उनकी पाकीज़ा सीरत से उनके paigamat से
[33:22]उनके कर लेंगे अंधेरे में चलने वाला कभी इधर ठोकर खाता कभी
[33:26]उधर ठोकर खाता कभी गिरता कभी चोट लगती है परेशानियों उठाता है
[33:31]अपनी मंजिल मकसूद तक नहीं पहुंचता अस्सलाम वालेकुम सीरत को जब बयान
[33:36]है तो बहुत ज्यादा ख्वातीन को उनकी सीरत से मैसेज दिए जाते
[33:40]हैं और देने भी चाहिए लेकिन इतना जहां में रखें की ये
[33:43]जो मासूम हो जाते हैं ये किसी एक सेल्फ के लिए नहीं
[33:44]होती चाहे मर्द हो या औरत हो वो पुरी उम्मत के लिए
[33:49]होती है यानी अंबिया सारे मर्द हैं और आत्मा सारे मर्द हैं
[33:52]तो इसका मतलब ये नहीं है जो उनकी जो सीरत है या
[33:54]उनके श्रद्धा हैं वो सिर्फ मर्दों के लिए औरतों के लिए नहीं
[33:58]है मर्दों औरतों सबके लिए इस तरह जनादेश सही है ना की
[34:00]वीडियो औरतों के लिए भी है और मर्दों के लिए सपने फॉलो
[34:06]करना है उनको अलबत्ता जो औरतों की महसूस nismani जिंदगी है उसमें
[34:12]ख्वातीन को खास तौर पर जनाबे सैयदा की तरफ झुकना है और
[34:16]हवा तीन की उसे मैक्सस nismani जिंदगी के लिए उनके लिए जो
[34:21]कामिल तरीन नमूना अल्लाह की तरफ से है वो सिद्दीक है कोबरा
[34:24]मासूम है आलम जाना वे सैयदा fatimaza अस्सलाम अलैकुम क़यामत तक पैदा
[34:44]होने वाली बेटियों को चाहिए की वह सबसे पहले पहले का बेटी
[34:50]के एतबार से उनका जो किरदार है उसका मुतारा करें और अपने
[34:52]आप को अपने मैन बाप के लिए वैसी ही बेटी बनाएं जैसी
[34:57]सैयद अपने मां-बाप के लिए बेटी थी उन kanijanejara में अगर अपने
[35:00]आप को शुमार करना है तो फिरों की सीरत पर भी चलना
[35:04]होगा इसी तरह बीवी का इस दिवाली जिंदगी की बातें उनके हैसियत
[35:08]बीवी उनका क्या किरदार था जनाबे sahiyasalamu अलैका तो चाहिए वो तमाम
[35:16]ख्वातीन की जो इस दवा करती है उन्हें चाहिए पहले बता रहा
[35:21]है इस बात से पहले इस बात के बाद शादी के बाद
[35:25]की जो जिंदगी है उसको गुजरने का के लिए जनाबे सैयद की
[35:29]सीरत का पहले ही सब बताना हो जाए और फिर उन्हें को
[35:30]बताना नहीं करना है नौजवानों को भी janabiyan की सिम का मुताना
[35:35]करना चाहिए यानी अगर हम यह कहते हैं तो मर्दों को भी
[35:39]गुलाम आने वाली होना चाहिए हान यह भी जरूरी है बातों का
[35:44]क्या होता है की हम सिर्फ खवाते इनको तो मैसेज देते हैं
[35:45]और बड़ी सस्ती से मैसेज देते हैं लेकिन मर्द समझते हैं की
[35:50]अब सारी जिम्मेदारी औरतों की है की वो kanijane से हरा बन
[35:54]जाए कोई पता नहीं खत्म हो गए नहीं मर्द वो तो कभी
[35:56]बनेंगे की हम गुलाम बनेंगे हम गोला में यानी बनेंगे और वो
[36:03]किके ज्यादा बनेगी तो फिर हमारी जिंदगी में कामयाबी आएगी फिर हमारी
[36:05]जिंदगी में कमरानी आएगी फिर हम रूहानी मानवी इल्मी फिक्री हर लिहाज
[36:10]से दुनिया की और khurabi lihajj सिद्ध नहीं करेंगे फिर हमारे लिए
[36:14]रास्ते मुकम्मल तौर पर रोशन होंगे इसी तरीके [संगीत] बनने के बाद
[36:23]उन्होंने अपने बच्चों के किस तरह raviyad की है हालांकि उनके बच्चे
[36:26]मासूम है लेकिन आप जरा देखिए की हसनेन करें मस्जिद जाते हैं
[36:33]खुद भेजती हैं बचपन है उनका एक जमा नवाज़ का वक्त हो
[36:38]गया है जाओ नाना के पीछे जाकर नमाज पढ़ो यानी मैन को
[36:40]बता रही है हालांकि उनके बच्चे द लेकिन वह हमें समझा रही
[36:45]है की एक मैन की दिल मदारी होती है की वह बचपन
[36:50]में अपने बच्चे को मुसल्ले का मस्जिद का अजीब है मस्जिद का
[36:53]रास्ता दिखा इसी तरीके से जब हंसना नहीं करीबन का बचपन है
[36:57]हंसना नहीं करीबन मस्जिद से वापस आते हैं तो जनाबे सैयद अस्सलाम
[37:01]अलेह बस यह नहीं की मेरा बच्चा नमाज पढ़ के ए गया
[37:03]नहीं रोजाना सुनती के मेरे लाल हसन आज आपके नाना ने मस्जिद
[37:10]में क्या खुद दिया है जरा मुझे वो खुद पसंद सुनाऊंगा भी
[37:13]वो खुत्बा जो आपके नाना ने मस्जिद में दिया ये माओ की
[37:18]तरबियत हो रही है की मैन ने अपने बच्चों की किस तरह
[37:23]करियत करनी है की बच्चे को अगर भेजा है तो वापस आने
[37:27]के बाद उससे पूछिए भी सही एक तो यह की जो कुछ
[37:28]सुना है वह बच्चे को याद हो जाएगा बच्चे को हिप्स हो
[37:33]जाएगा फिर बच्चे से वह चीज सुनने के बाद जब बच्चे की
[37:38]हौसला अफजाई की जाएगी तो बच्चे का और शोक बढ़ जाएगा ये
[37:39]तरीका होता है और जनाबे सैयद अपने बच्चों से ये चीज सुनने
[37:44]के बाद कभी दांत और तहसील के जरिए से उनकी हौसला अफजाई
[37:46]farmati हैं कभी एन देकर उनके हालांकि उन्हें जरूरत ना थी हसनेन
[37:52]करेगा उनको मगर माओ को ये तरीका सिखाया जा रहा था उनको
[37:56]यह सीरत फरहान की जा रही थी की बच्चों का आप आदि
[37:57]से किस ना देखे ना जब आप हादसे के साथ पुरी तरह
[38:01]से पढ़ लें तो ये 5 अपराध का जो मजमा चादर के
[38:04]नीचे जमा हुआ है ये आय किस तरीके से बैटरी किस तरीके
[38:09]से सलाम किस तरीके से किया जवाब किस तरीके से ये पुरी
[38:11]एक तहजीब है खानदान की क्या तहजीब होनी चाहिए यह हादसे ए
[38:17]रही है मैन को बच्चे के साथ कैसे खिताब करना चाहिए कैसे
[38:22]बात करनी चाहिए बच्चे को मैन से कैसे मुक्ती होना चाहिए इसी
[38:29]तरीके से औलाद के साथ औलाद को मुकम्मल कारी मोहम्मद ने हमें
[38:32]दे दिए सिर्फ इस एक हड्डी से किसान के अंदर ही मुकम्मल
[38:36]ना होना चाहिए मुकम्मल मुकम्मल अखलाक कहां रखा और मैन बाप के
[38:44]लिए जरूरी होता है की वो अपने बच्चों से इजहार मोहब्बत करें
[38:47]बहुत सारे मैन बाप भी अपने बच्चे से मोहब्बत करते हैं कोई
[38:53]भी जा रहे औलाद चीज ही ऐसी है की कोई भी मां-बाप
[38:54]हो तो जानवर भी करते हैं जानवर भी अपने बच्चों से मोहब्बत
[38:57]करते हैं बल्कि ना बताती भी करते हैं कोई भी दुनिया की
[39:01]चीज ऐसी नहीं है जो अपने औलाद से मोहब्बत ना करती हो
[39:03]लेकिन मैन बाप बच्चों से मोहब्बत करते हैं उसे मोहब्बत को ज़ाहिर
[39:09]नहीं करते वह समझते हैं की प्रसाद जो हम बहुत ज्यादा अलार्म
[39:12]मोहब्बत करेंगे तो बच्चा बिगड़ जाएगा जबकि हमें इस्लाम की जो तालीम
[39:18]है वो ये है की बच्चे आपके दिल में आपके बच्चे के
[39:19]लिए जो मोहब्बत है उसे आप जाहिर भी कहते हैं उसे आप
[39:25]शो कर अगर अपने बच्चे को चाहते हैं की मेरा बच्चा है
[39:30]उससे मरकज मोहब्बत ना तो उनके साथ इजहार मोहब्बत करें इस तरह
[39:33]बच्चे भी अपने बहन के साथ इशारे मोहब्बत का और बेहतरीन तहजीब
[39:38]के साथ उनके साथ तक बंद करें पर देखा इस तरह के
[39:46]पर्दे के हवाले से दक्षिण की ना रह जाए की रसूल अल्लाह
[39:51]ने जब चाहा की मैं सैयदा कितना ए सकता हूं की बाबा
[39:56]आप ही का घर है आपको मुझसे ज्यादा तो रहने की क्या
[40:00]जरूरत है मेरे साथ एक साथ भी है तो फरमाने लगे की
[40:09]बाबा मेरे पास एक ही चादर है और उसे चादर से अगर
[40:16]सर छुपा रहा हूं तो फिर पांव नहीं छुपाते अगर पांव छुपा
[40:20]रहा तो सर नीचे छुपता दो चादर है इस वक्त नहीं है
[40:25]मेरे पास इनकार नहीं है रसूल अल्लाह [संगीत] मैं अपने जब अपनी
[40:40]जान में आते हैं तो उसके बाद बिस्मिल्लाह तशरीफ़ लिया यह पैगाम
[40:45]है की इस हद तक रिहायत करनी है आपकी जब रसूलुल्लाह की
[40:48]बेटी है जाप का इस हद तक जबकि वो मासूम है इसका
[40:51]मतलब क्या है की कानी जाने जा रहा है पवन भी करती
[41:02]है और कहीं देर धारा कहे की नहीं आज तो शादी और
[41:04]शादी में कौन पैदा करता है शादी ही में तो पर्दा करना
[41:09]होता है शादी ही में तो सब जमा है किसी भी दिल
[41:16]से मैं makhalut हो जाना शरण हरम है चाहे वो शादी हो
[41:20]या शादी इस्लामी तहज़ीब की अगर हम पाबंदी करेंगे यही siraten सैयदा
[41:27]कर रहा था तो हम यहां भी कामयाब हैं और वहां भी
[41:32]कम अगर हम इस चीज की पाबंदी नहीं करेंगे तो बरकतें हैं
[41:33]मैं कहां से असल में हमारी जिंदगी बरकतों से कैसे मेहराब हो
[41:37]जाते हैं इसीलिए बरकतों से हमारी जिंदगी खाली होती है की हम
[41:42]आगे मोहब्बत की सीरत को फॉलो नहीं करते शादी के अंदर अगर
[41:46]शैतान को दावत दी जाएगी ऐसे कम किए जाएं हरम कम किए
[41:50]जाएं शादी की तकरीबन में जिनसे शैतान वहां आएगा तो फिर वहां
[41:52]बरकत कैसे आएगी शादी की तकरीबन या कोई भी तकरीर हो उसे
[41:57]तकरीर में वो कम होने चाहिए की मासूम हस्तियां वहां तशरीफ़ ला
[41:59]अगर मासूम मस्ती है वहां तशरीफ़ laengi तो फिर बरकत होगी अगर
[42:05]कम ऐसे होंगे तो शैतान वहां आए तो फिर बरकत कहां से
[42:09]होगी आधार कम चाहते हैं की उसका दिल भी देखो लगा घड़ी
[42:13]वक्त सा हर चीज देखो तो क्या उसी तकरीर में जो कुछ
[42:18]करना है वह डेट नहीं होना चाहिए वह अच्छा नहीं होना चाहिए
[42:21]तारीफ तय करते वक्त हम कहते हैं शादी की तारीख में को
[42:25]जिस दिन शादी हो रही है उसने bekamal नहीं होना चाहिए सदर
[42:32]का हो खैरात हो कुरान की तिलावत तिलावत खानी हो हिजाब के
[42:39]लिए आयत हो तब तो बरकत आएगी जिस तरह के अच्छे घरों
[42:45]की तकरीबन ऐसे ही होती है यही जनाब सही हो रहा है
[42:49]की सिख धर्म से टकला करती है
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