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Imam Hassan Askari Ki Rawish Tableegh | Dr Jawwad Haider Hashmi
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محاضرات
Record date: 13 Oct 2024 - امام حسن عسکری کی روش تبلیغ AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:17]बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन सु सला सलाला ला बशीर नर
[0:27]अराज मुनीर सना मौलाना अल कासम मोहम्मद वाला नहरीन मासूमीन मजमीन कलला
[0:47]फ किताब मजीद बिस्मिल्ला रहमान रहीम यरी दनला ला मुन ल करल
[0:57]काफिर पर मोहम्मद वा मोहम्मद सवात [संगीत] अ हजरत इमाम हसन आस्करी
[1:11]अल सलातो वसलाम की विलादत बा सहादत के आयाम है सबसे पहले
[1:18]तो आप अले सलाम की विलादत बा सलाम के हवाले से चंद
[1:33]नु कात पेश करूंगा अच्छा यह तो आप सब जानते हैं कि
[1:36]इमाम अल सलाम की विलादत बा करर दी है और बाज दीगर
[2:05]मुखन के मुताबिक इमाम अल सलाम की विलादत बा सहादत की तारीख
[2:07]10 रबी सानी है ठीक है और साल के हवाले से भी
[2:13]यह है कि बाज ने 231 हिजरी को इमाम की विलादत का
[2:19]साल करार दिया है 231 हिजरी और बाज दीगर मुखन ने 232
[2:26]हिजरी को इमाम अल सलाम की विलादत की तारीख करार दी है
[2:32]यह आपकी विलादत के हवाले से बहरहाल दो तरह की रिवायत हमें
[2:39]मिलती हैं अच्छा जहां तक आपकी शहादत का ताल्लुक है इस हवाले
[2:43]से तकरीबन ज्यादातर मुखन और उलमा का इत्तेफाक है क्या आपकी शहादत
[2:53]8 रबीउल अव्वल को हुई और सन 260 हिजरी था 260 हिजरी
[2:55]8 रबील अव्वल को यही वजह है कि हमारे यहां मुहर्रम उल
[3:01]हराम में जो आयाम अजा का आगाज होता है तो यह पूरा
[3:06]मुहर्रम उल हराम और इसी तरह सफर का पूरा महीना और रबील
[3:07]अव्वल की आठ तारीख तक यानी इमाम हसन अकरी अल सलाम की
[3:13]शहादत की तारीख तक हम आयाम अजा मनाते हैं और उसके बाद
[3:18]क्योंकि न रबीउल अव्वल इसी हिसाब से जाहिर है फिर हजरत इमाम
[3:21]जमाना अलला ताला फरज शरीफ की इमामत का पहला दिन बनता है
[3:26]तो फिर उस दिन को हम इमामत का आगाज करार देती और
[3:31]फिर जश्न के उनवान से आम इसको मनाते हैं तो यह तारीख
[3:32]है तो इस बुनियाद पर अगर आप देखें तो आप हैरान होंगे
[3:39]के इमाम अले सलाम को काफी मुख्तसर जिंदगी मिली ठीक है यानी
[3:46]28 साल सिर्फ 28 साल या 29 साल यह इमाम की उम्र
[3:48]मुबारक है और 28 साल कोई ज्यादा उम्र नहीं बिल्कुल न नौजवान
[3:54]के आलम में इमाम अले सलाम जाम शहादत नोश फरमा जाते हैं
[3:57]अच्छा इससे पहले अगर आप देखें आपके वालिद माजिद हजरत इमाम अली
[4:03]नकी अल सलाम वह भी बिल्कुल न जवानी के आलम में शहीद
[4:08]हो गए आपके दादा हजरत इमाम मोहम्मद तकी अल सलाम को भी
[4:11]अगर आप देखें तो बिल्कुल जवानी में इमाम अल सलाम की भी
[4:16]शहादत हो गई है तो यानी इससे आपको अंदाजा हो जाएगा कि
[4:23]उस जमाने में इन आइमा के जमाने में मुसलमानों के हालात किस
[4:26]तरह के थे सियासी हालात कैसे थे इन इमाम के ऊपर हालत
[4:31]जवानी में आने वाली जो मुसीबतें हैं उससे इंसान को अंदाजा हो
[4:34]जाता है कि किस तरह की मुश्किलात का इन इमाम को सामना
[4:40]करना पड़ा ठीक है कि खुलफा ए बनी अब्बास का दौर है
[4:41]बनी अब्बास के हुक्मरान अपनी हुकूमत बचाने के लिए अपने इक्दर्म ताहिरी
[4:49]अलम सलाम की जिंदगी छीन रहे थे न जवानी के आलम में
[4:54]इनकी जिंदगी छीन रहे हैं कभी 25 साल की उम्र में कभी
[4:58]42 साल की उम्र में कभी 28 साल की उम्र में इन
[5:01]आइमा तारीन अलम सलाम को बाकायदा जहर देकर जो है वह क्या
[5:07]है व शहीद किया जाता है लेकिन इसके बावजूद आप देखें कि
[5:10]यह आइम तारीन अलम सलाम हादी के उनवान से इंसानी मुशे के
[5:17]अंदर जिंदगी बसर फरमाते रहे और इमामत के फराइज अंजाम देते रहे
[5:21]जब 254 हिजरी में आपके वालिद माजिद की शहादत हुई हजरत इमाम
[5:26]अली नकी अल सलातो वसलाम की तो उस वक्त आपकी इमामत का
[5:32]आगाज होता ठीक है तो 254 से लेकर 260 हिजरी तक 6
[5:35]साल का अरसा बनता है तो यह 6 साल का जमाना इमाम
[5:36]अल सलाम की इमामत का दौर है जब इमाम उम्मत की रहनुमाई
[5:41]फरमा रहे हैं मोमिनीन कराम की रहनुमाई फरमा रहे हैं और हर
[5:46]तरफ से रहनुमाई फरमाते हैं हालात अगरचे निहायत सख्त है हालात मुश्किलात
[5:50]पर मब है वह इस लिहाज से कि खुद आपके वालिद माजिद
[5:55]को आप जो मदीने मुनव्वरा में थे वहां से जबरदस्ती बुलाया गया
[5:58]इराक क्योंकि आप यहां पर नहीं रहना चाहते थे इस सरजमीन इराक
[6:04]के अंदर नहीं आप अपने जद्द अमजद के शहर यानी मदीने मुनव्वरा
[6:06]में जो मदीनत रसूल है वहां पर जिंदगी बसर फरमाना चाहते थे
[6:12]लेकिन जबरदस्ती वहां से लाया जाता है और फिर इस शहर के
[6:15]अंदर जो सामरा है सामरा शहर के अंदर रखा जाता है कि
[6:21]जो हकीकत में फौजी छावनी है ठीक है मुकम्मल एक फौजी छावनी
[6:27]है बनी अब्बास के लश्कर का उर्दू गह है इस शहर के
[6:29]अंदर इमाम अल सलाम को फौजियों की निगरानी में रखा जाता है
[6:35]हुक्मरानों की निगरानी में रखा जाता है उनके कारों की निगरानी में
[6:38]रखा जाता है ताकि इमाम अल सलाम लोगों को हाकिम के खिलाफ
[6:45]बगावत करने की दावत ना दे हुकूमत के खिलाफ इंकलाब की दावत
[6:47]ना दें इस खौफ से वह वहां से इमाम अल सलाम को
[6:51]यहां पर ला रहे हैं जिस तरह आपके जद्दे अमजद हजरत इमाम
[6:56]रजा अल सलाम को मामून रशीद ने यही किया ना इमाम अल
[7:01]सलाम मदीने मुन में थे मामून को जब हुकूमत मिली तो वह
[7:02]खुद तूस में थे खुरासान में थे मर्व में तो वहां पर
[7:06]इमाम अल सलाम को जबरदस्ती लाते हैं और जबरदस्ती लाने के बाद
[7:11]बहरहाल लोगों की आंखों में धूल झुकने के लिए उसने अपनी जानशीन
[7:13]इमाम अल सलाम के सुपुर्द करने का ऐलान कर दिया कि इमाम
[7:18]को हम वली अहद बना रहे हैं इमाम को इज्जत और तौकीर
[7:22]की खातिर हमने यहां पर बुलाया है जबकि जानने वाले सारे जानते
[7:25]थे आगाह थे कि इमाम को उनके नजरों से दूर होने की
[7:29]वजह से इमाम से उनको यह खौफ था कि कहीं लोग इमाम
[7:34]के इर्दगिर्द जमा ना हो जाए लोगों का जम में गफीर इमाम
[7:36]अल सलाम के करीब ना आ जाए कि जिसको वह अपनी हुकूमत
[7:41]के लिए अपने इक्दर्म हादी अल सलाम के दौर में उस वक्त
[7:49]जो हाकिम थे मुस्तान बिल्लाह वह इमाम अल सलाम को मदीने मुनव्वरा
[7:51]से जबरदस्ती यहां पर लाते हैं और फिर इमाम अकरी अल सलाम
[7:56]को भी यहां पर आना पड़ता है और फिर सिर्फ यहां पर
[8:01]आए नहीं यहां आने के बाद तकरीबन कई मर्तबा जिंदा में डाला
[8:03]गया इमाम अकरी अल सलाम कई मर्तबा जिंदा गए अपने वालिद माजिद
[8:09]के साथ भी आप जिंदा गए जेल में गिरफ्तार रहे कई महीनों
[8:13]तक के लिए फिर उसके बाद बहरहाल अल्लाह रब्बुल इज्जत की मस्लत
[8:16]यह थी कि आपको आजादी मिली लेकिन उसके बाद जब मोत आए
[8:21]जब मुस्तान आए तो उसके बाद उन्होंने भी इमाम अले सलाम को
[8:26]क्या है जिंदा में डाला और कई मवा के पर जिंदा में
[8:28]अलग-अलग तारीखें हमें मिलती है ठीक है मुख्तलिफ मवा के पर जेल
[8:33]में बंद कर रहे हैं जिंदा में डाल रहे लेकिन बहरहाल कोई
[8:35]ना कोई ऐसी मस्लत इलाही पेश आ जाती है कि वह इमाम
[8:39]को आजाद करने पर मजबूर हो जाते हैं और इमाम अल सलाम
[8:44]आखरी मर्तबा जब इमाम अल सलाम को गिरफ्तार किया था ना कि
[8:49]व इमाम की शहादत से एक साल पहले का साल था इमाम
[8:50]को फिर गिरफ्तार किया लेकिन उनका मकसद तो यह है ना कि
[8:54]लोगों को इमाम से दूर रखें लेकिन जिंदाल में भी जब इमाम
[8:58]जाते थे तो इमाम की इबादत की वजह से इमाम के अल्लाह
[9:00]रब्बुल इज्जत की इबादत और बंदगी की वजह से जिंदा बान है
[9:04]वह इमाम से मुतासिर हो जाते थे और जिसकी वजह से खुद
[9:11]वहां पर मौजूद बाकी लोग जो है वह इमाम की मोहब्बत में
[9:14]गिरफ्तार हो जाते जिस खतरे के पेशे नजर बजहर इमाम अल सलाम
[9:20]को उन्होंने फिर आजाद कर दिया और आजाद करने के बाद क्या
[9:25]मुकम्मल तौर पर आजादी दे दी नहीं आजादी नहीं दी बल्कि अपनी
[9:27]जेर निगरानी रखा रिवायत को अगर आप देख ने तो यह रिवायत
[9:33]आपको मिलती है कि इमाम अकरी अल सलाम जो सामरा में है
[9:39]ठीक है सामरा में है हफ्ते में दो दिन जी हफ्ते में
[9:42]दो दिन बरोज पीर और बरोज जुमरा इमाम अल सलाम के ऊपर
[9:47]वहां हाकिम ने लाजिम करार दिया था कि वह उनके पास आकर
[9:53]हाजरी दे दे अच्छा यह क्यों कर रहे हैं ताकि वह मुतमइन
[9:55]रहे कि इमाम इस शहर से बाहर नहीं निकले इसी शहर के
[10:00]अंदर मौजूद है उनके खतरा यह होता था कि इमाम वापस मदीना
[10:04]ना चले जाए इमाम किसी और शहर की जानिब ना चले जाए
[10:06]जहां आपके चाहने वाले मौजूद हो तो इसके लिए उन्होंने जानने का
[10:12]जरिया यह करार दे दिया कि इमाम को हफ्ते में दो दिन
[10:17]मजबूर किया कि वह आकर हाकिम के सामने अपनी हाजरी दे दे
[10:19]और लोगों के सामने यह जाहिर कराते थे कि हम इमाम की
[10:23]इज्जत के लिए कर रहे हैं इमाम की तौकीर के लिए कर
[10:26]रहे हैं हम यह चाहते हैं कि इमाम अल सलाम की खैर
[10:29]खैरियत मालूम करें दरयाफ्त करें इमाम को अगर किसी चीज तो इन
[10:33]चीजों से हम आगाह रहना चाहते हैं लेकिन य हकीकत में ऐसी
[10:35]पाबंदी थी ऐसी सियासी और आस्करी पाबंदी थी जिसकी वजह से बहुत
[10:42]सारे जो आपके चाहने वाले हैं वह आपसे मिल नहीं पाते थे
[10:45]लोगों की इमाम अले सलाम के साथ मुलाकात के पर पाबंदी थी
[10:50]जो आपके वकला थे जो आपके जानशीन थे वह मुख्तलिफ हेलो से
[10:58]मुख्तलिफ बहानू से इमाम के साथ मुलाकात करते थे सर आज आपके
[11:01]चाहने वाले आपके दोस्त अहबाब आपके हमसाय पड़ोसी रिश्तेदार आपसे आजादी के
[11:05]साथ मुलाकात कर सकते हैं आप उनसे मुलाकात कर सकते हैं यह
[11:10]कैफियत नहीं थी बड़ी सख्ती थी अगर कोई इमाम से मुलाकात करता
[11:13]तो उसको गिरफ्तार किया जाता और उसे पूछा जाता कि किस मकसद
[11:18]की खातिर इमाम से तुमने तुमने मुलाकात की एक रिवायत हमें मिलती
[11:21]है कि इमाम अल सलाम को हाकिम के साथ किसी और इलाके
[11:25]की जानिब जाना पड़ रहा है तो इमाम अपने एक चाहने वाले
[11:30]वकील के जरिए अपने चाहने वालों को यह पैगाम भेजते हैं कि
[11:33]देखें खबरदार मेरे रास्ते में अगर कोई आ जाए तो मेरी जानिब
[11:38]इशारा ना करना ठीक मुझसे हाथ मिलाने की कोशिश ना करना मेरे
[11:41]करीब होने की कोशिश ना करना अगर ऐसा करोगे तो तुम्हारी जान
[11:47]खतरे में पड़ जाएगी यानी इमाम उनकी जानों के तहफ्फुज की खातिर
[11:51]उनको आगाह फरमा रहे हैं उनको आगाह फरमा रहे हैं कि देखें
[11:57]अगर इमाम के करीब अगर हो जाओगे तो हुकम उरान के ताब
[12:02]का सामना करना पड़ेगा तो यह शराय है यह हालात है अब
[12:04]इन हालात के हवाले से आप अगर देखें तो आज तो अल्हम्दुलिल्लाह
[12:09]माहौल ऐसा है ना कि अहले बैत अर अल सलाम के जितने
[12:14]भी अफराद है आम तारीन अ सलाम है पूरे उम्मत इस्लामिया के
[12:16]अंदर ज्यादातर अफराद आपको ऐसे मिलेंगे कि जो इन हस्तियों का एहतराम
[12:19]करते हैं आम लोग भी और बजहर हुक्मरान भी जब इन हस्तियों
[12:26]का नाम आता है अमीर मोमिनीन अल सलाम से लेकर इमाम जमाना
[12:33]जला ताला फ शरीफ तक और खासतौर पर इमाम अकरी अ सलाम
[12:35]तक अला सह इन हस्तियों के ऊपर दुरूद भेजते हैं इन हस्तियों
[12:40]को अगर उस माना में इमाम ना माने जिस माना में हम
[12:46]इमाम मानते हैं तब भी कम से कम अहले बैत के घराने
[12:51]से ताल्लुक होने की बुनियाद पर एहतराम करते हैं उनका नाम एहतराम
[12:54]से लेते हैं यह आज सूरत हाल इस तरह है लेकिन आलम
[12:59]इस्लाम को मालूम होना चाहिए इस दौर के मुसलमानों को मालूम होना
[13:06]चाहिए ये आज सूरते हाल इस तरह है लेकिन खुद इन अम
[13:08]अहले बैत के अया में इनके जमाने में सूरते हाल बिल्कुल मुख्तलिफ
[13:14]थी कोई इन अम्म ताहिरी अलम सलाम के करीब नहीं जा सकता
[13:18]था हुक्मरान जिनको तारीख के अंदर खलीफा का उनवान दिया गया यह
[13:25]मुस्त कौन है यह मुस्तान कौन है यह मोत बिल्लाह कौन है
[13:27]यह मुत वकिल कौन है यह हारून रशीद कौन है यह मामून
[13:31]रशीद कौन यह मंसूर दवाने यह सब वो है कि जिनको खलीफा
[13:36]का टाइटल मिला हुआ है आज उनका भी नाम एहतराम से लिया
[13:41]जाता है लेकिन यह वो हाक माने जोर हैं यह वो जालिम
[13:43]हुक्मरान है कि जो अहले बैत अथर अलम सलाम के ऊपर जुल्म
[13:47]करते थे जिन्होंने अहले बैत अथर अलम सलाम की इज्जत और तौकीर
[13:52]नहीं की जिन्होंने अहले बैत अहार अलम सलाम से लोगों को रोकने
[13:54]की कोशिश की तारीख के अंदर अहले बैत अहार अल सलाम के
[13:58]ऊपर यह तारीख दौर गुजरा है इन हस्तियों का अगर कोई नाम
[14:02]लेता इन हस्तियों के साथ उल्फत और मोहब्बत का अगर कोई दावा
[14:04]करता तो उस मौके पर लोग हुक्मरानों के ताब का शिकार बनते
[14:10]उस जमाने में जो जिन जिन जो लोग खलीफा के उनवान से
[14:12]जाने उनके ताब का शिकार बनते यह तारीख के अंदर अले बैत
[14:17]अ सलाम का वह हस्तिया कि जिनकी मदत को जिनकी मोहब्बत को
[14:23]अल्लाह रब्बुल इजत ने वाजिब करार दिया था उनके साथ यह सुलूक
[14:25]किया जाता थाला हबीब आप फरमा दीजिए कि मैं कोई अजर रिसालत
[14:31]तुमसे तलब नहीं करता मगर यह कि मेरे जबल कुर्बा से मोहब्बत
[14:36]कर ले जब जबल कुर्बा के बारे में आपसे पूछा गया आपने
[14:40]फरमाया कि मेरे जो बच्चे हैं इमाम हसन इमाम हुसैन हजरत अली
[14:43]हजरत फातिमा जहरा सलामुला अलहा और उनके औला ये ये पैगंबर अकरम
[14:47]सल्ला सलम नाम लेकर बयान फरमा रहे हैं कि ये हस्ती हैं
[14:49]कि जो लायक तकरी है लायक मदत है और उनके बाद आने
[14:54]वाले आइम तारीन अलसलाम लेकिन हस्तियों के साथ यह सुलूक रवा रखा
[15:00]गया तो अहले बैत अथ अ सलाम इन सख्त हालात में जहां
[15:02]पर सियासी तौर पर शदीद तरीन पाबंदी है जहां पर आस्करी तौर
[15:08]पर अमा अल सलाम के सामने पहरे बिठा दिए गए हैं उन
[15:12]अया में उन हालात में सख्त और मुश्किल हालात में यह अमा
[15:14]तारीन अ सलाम दीन की हिफाजत फरमा रहे दीन को बचाकर इस्लाम
[15:20]नाबे मोहम्मदी को बचाकर आने वाले लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर
[15:23]रहे हैं उस मौके पर जब इमाम अल सलाम जिंदा से एक
[15:27]मौके पर आजाद हुए तो यह जो कलाम में मैंने जो आयत
[15:33]करीमा आपके सामने तिलावत की ना उसी की तिलावत फरमाई यला यह
[15:36]चाहते हैं अल्लाह ताला के नूर को अपनी फूको से बुझा दे
[15:43]अपने मुंह की फूको से वह बुझा दे सूर सफ की आयत
[15:48]नंबर आ है ला मुन कार लाक अल्लाह ताला अपने नूर को
[15:51]मुकम्मल करने वाला है चाहे काफिरों को नागवार ही क्यों ना गुजरे
[15:57]काफिरों को नागवार भी गुजरे अल्लाह रब्बुल इत इरादा क्या है इस
[16:01]नूर को कामिल करेगा यानी इमाम अल सलाम यह इरशाद फरमा रहे
[16:06]तुम चाहे हमें जिंदा में डाल दो अल्लाह रब्बुल इज्जत हमारे जिक्र
[16:10]को हमारी मोहब्बत को हमारी मव दत को आम करके रहेगा और
[16:16]अल्लाह ताला जब आम करेगा तो काफिरों के ऊपर नागवार ही क्यों
[16:18]ना गुजरे आइम ताहिरी अल सलाम से नफरत करने वाले और उनसे
[16:23]बज रखने वालों के ऊपर नागवार ही क्यों ना गुजरे अल्लाह ताला
[16:28]का इरादा गालिब आएगा और आज आप देख ले कि अहमद इरादा
[16:29]गालिब आया यह तारीन अ मुसलाम है जो दीन की हिफाजत कर
[16:34]रहे हैं जब उस जमाने में लोग दीन के हवाले से दीन
[16:40]की गलत तबलीग करने की कोश या दीन के ऊपर इस्लाम के
[16:44]ऊपर कोई आवाज अगर उठी इस्लाम के खिलाफ अगर कोई आवाज उठी
[16:47]दिफाई अहले बैत अल सलाम उठ रहे हैं याकूब किंदीबॉक्स वो एक
[17:00]किताब लिखने की कोशिश कर रहे थे कुरान करीम की के तजा
[17:04]दत के उनवान से अपने ख्याल में उसने कुरान करीम की आयात
[17:10]करीमा में से कई आयात करीमा को ढूंढा और यह साबित करने
[17:12]की कोशिश की यह आयात करीमा आपस में तजत रखती हैं आयात
[17:17]करीमा का आपस में टकराव है वहां पर कुछ और कहा दूसरी
[17:22]जगह कुछ और कहा ठीक है इस तरह उसने अपने ख्याल में
[17:24]बहरहाल तजा दत पर मुश्त समि एक किताब लिखी और लोगों को
[17:29]यह आगाह करने कि वो कोशिश कर रहा था कि देखें कुरान
[17:33]करीम के अंदर ताजाद मौजूद है यहां पर कुछ कहा था दूसरी
[17:35]जगह अल्लाह ताला ने कुछ और फरमा दिया तो और इस किताब
[17:39]को उन्होंने लिखा था लेकिन अभी जाहिर नहीं किया था ठीक है
[17:44]वह लिख रहे थे लेकिन जाहिर अभी करने की नौबत नहीं आए
[17:46]इमाम अल सलाम इमाम हसन अकरी अ सलाम एक दिन अपने बाज
[17:50]साथियों को कि जो याकूब बन इक के साथ उठते बैठते थे
[17:55]उनसे फरमाया तुम्हें क्या हो गया है तुम्हें क्या हो गया है
[17:58]कि तुम याकूब इ इ को मना नहीं करते रसूला किस चीज
[18:01]से मना नहीं करते क्या किया है याकूब इनेक ने याकूब इक
[18:07]तो बड़े आलिम है याकूब बहुत बड़े फलसफे है यह कई किताबों
[18:09]के मुसन्निफ है साहिबे फिक्र है साहिब फहम है इमाम ने फरमा
[18:15]याकूब बिन इक एक ऐसी किताब लिख रहे के उसके ख्याल में
[18:17]कुरान करीम की आयात करीमा के अंदर तजा पाया जाता है वह
[18:22]कुरान करीम के खिलाफ किताब लिख रहे हैं तुम उनको मना क्यों
[18:25]नहीं करते फिर इमाम अल सलाम ने कहाय अप उन्होंने कहा कि
[18:30]हम उससे कैसे बात कर सकते हैं वो तो बहुत बड़े आलिम
[18:34]है वो तो बहुत बड़े फलसफे है उनका इल्म हमसे ज्यादा उनकी
[18:36]फिक्र हमसे ज्यादा उनकी सोच हमसे ज्यादा हम कैसे मना इमाम ने
[18:41]सिखाया इमाम ने तरीका सिखाया देखें तुम उनके पास चले जाओ और
[18:49]उनसे एक सवाल करो सवाल यह करो कि देखें ए याकूब ने
[18:55]इबन मक कंदी ये अपने कि जो कुछ कुरान करीम की आयात
[18:57]करीमा के हवाले से जो माना और मफू तुम लेते हो ठीक
[19:02]है तुम क्या इस बात को मानते हो कि वह माना और
[19:07]मफ हूम अल्लाह रब्बुल इज्जत ने उसका इरादा ना किया हो हो
[19:12]सकता है कि फिल वाक उसका माना और मफू कुछ और हो
[19:17]यानी जो तुमने समझा है वह ना हो कुछ और हो क्या
[19:18]इसका तेमाल तुम देते हो उसने कहा इसका तेमाल तो देता हूं
[19:23]हो सकता है मैं जो माना ले रहा हूं मैं जो माना
[19:27]समझ रहा हूं कुरान करीम की आयत करीमा से वो जो मैंने
[19:32]समझा है वह शायद ना हो कुछ और हो उस मौके पर
[19:35]इमाम अल सलाम ने फरमाया उससे यह कहना जब व इस चीज
[19:37]का इकरार करे कि यकीनन इकरार करेगा जब इकरार कर ले तो
[19:41]यह कहना तो तुम कुरान करीम की आयात करीमा के मानी और
[19:45]मफा के अंदर तजा तलाश करने की कोशिश किस बुनियाद पर कर
[19:48]सकते हो जबक जो कुछ तुमने समझा है हो सकता है वो
[19:53]उस मतलब और मफू के मुखालिफ हो कि जो अल्लाह रब्बुल इज्जत
[19:58]का इरादा है यह जाकर उसको बता दो और फिर व आए
[20:03]आने के बाद इने इक कंदी के सामने जब यह मतलब बयान
[20:07]किया के इने क आप जो कुछ लिख रहे हैं कुराने करीम
[20:10]की आयात करीमा के तजत के हवाले से क्या यह तमाल आप
[20:15]देते हैं कि कुरान करीम की आयत करीमा का माना और मफू
[20:19]वह ना हो कि जो आपने इरादा किया है उसने कहा यह
[20:23]हो सकता है तो बस अगर ऐसा है तो कुरान करीम की
[20:28]आयत करीमा का माना और मूम जो आपने समझा है और जिसकी
[20:33]वजह से आप इसको फलान आयत करीमा के मुखालिफ करार देकर तजा
[20:35]के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हो सकता है
[20:39]कि अल्लाह रब्बुल इजत का इरादा वो ना हो व फौरन हैरान
[20:44]हो गया रत के साथ उसने पूछा कि यह सवाल तुम्हारे जहन
[20:50]में आया कैसे ठीक है वह बिल्कुल उसने कहा कि सवाल तुम्हारे
[20:52]जहन में आए कहा कि मैंने सोचा मेरे जहन में आहा यह
[20:56]सवाल तुम्हारा नहीं हो सकता तुम बताओ कि तुम्हारा यह सवाल तुम्हारे
[20:59]जहन में आया कहां से फिर उन्होंने कहा कि यह मेरे इमाम
[21:04]हजरत इमाम हसन अकरी अल सलाम ने यह बात मेरे जहन में
[21:06]डाल दी थी जब इमाम अल सलाम के इस में रामी आया
[21:17]तो उन्होंने तरा किया कि हां यह यकीन अहले बैत के घराने
[21:20]के अफराद हो सकते हैं कि जो इस तरह हमारी कम इल्मी
[21:25]को और हमारी क्या है हमारे इश्ते बाह को जो है हमारे
[21:30]सामने बयान कर सके फिर रिवायत के अंदर है कि इसके बाद
[21:32]इब्ने इक कंदी जो कुरान करीम के तजा पर मुश्त मिल किताब
[21:38]लिखने की कोशिश कर रहा था अपनी उस किताब को जाया कर
[21:42]लिया और इस इरादे से वह मुंसिफ हो गया यानी एक इहरा
[21:44]उम्मत इस्लामी के अंदर पैदा होने वाला था कुराने करीम के हवाले
[21:51]से शुकू शुभत लोगों के जनों के अंदर डालने की कोशिश की
[21:53]जा रही थी इमाम अल सलाम ने उसका रास्ता रोका खलीफा रोक
[21:58]लेता ना खलीफा का नुमाइंदा रोक लेता ना लेकिन नहीं उनके अंदर
[22:02]वो इल्म नहीं था वो इल्मी स्तात उनके अंदर नहीं थी कि
[22:06]वो उसके मुकाबले में कोई सवाल कर सके या उनके सामने इश्का
[22:11]कर सके तराज कर सके लेकिन यह इमाम है कि जो वारिस
[22:13]दीन है जो वारिस शरीयत है इस शरीयत को बचाना कुरान करीम
[22:18]की हिफाजत करना ये इमाम का इमाम ने बचाया हर दौर में
[22:23]आम तारी अ सलाम इस तरह के इहरा फी अकाद का मुकाबला
[22:25]करते आए हैं क्यों क्योंकि कुरान पैगंबर अकरम स मशहूर हदीस की
[22:31]बुनियाद पर आप कुरान करीम के साथ साथ है यह स य
[22:35]हादी है इस उम्मत को जलालत से बचाने के लिए इनी तार
[22:40]किता बला मातमाल आपने फरमाया कि मैं तुम्हारे दरमियान दो गरा कद
[22:52]चीजें छोड़े जा रहा हूं एक कुरान और दूसरे मेरे अले बत
[22:56]इन दोनों के दरमियान जुदाई नहीं होगी यह दोनों एक दूसरे के
[22:59]साथ-साथ है हमेशा एक दूसरे के साथ रहेंगे यहां तक कि होज
[23:06]कौसर पर मुझसे मुलाकात कर ले तो कुरान के साथ पैगंबर अकरम
[23:09]ने अहले बैत को छोड़ने का इरादा फरमाया अहले बैत को छोड़ने
[23:14]का ऐलान फरमाया क्या अगर उम्मत अगर जलालत से अगर बचना चाहे
[23:16]गुमराही से बचना चाहे तो कुरान का दामन थाम ले और अहले
[23:21]बैत का दामन थाम ले अमीर मोमिनीन के जमाने में अमीर मोमिनीन
[23:24]का इमाम मुज्तबा के जमाने में इमाम मुज्तबा इमाम हुसैन सलाम के
[23:30]जमाने में इमाम हुसैन बाकी अमा के जमाने में वो और इमाम
[23:32]आस्करी अल सलाम के जमाने में इमाम अकरी अल सलाम और इमाम
[23:37]के बाद आज के दौर में जो इमाम महदी अल सलातो सलाम
[23:42]है आपका दामन अगर हम थामेंगे तो इस हदीस के ऊपर अमल
[23:45]होगा अब मैं आपके सामने अपनी गुफ्तगू को आगे बढ़ाते हुए इमाम
[23:52]अल सलाम के दो अकवाले पेश करूंगा और उन्हीं के ऊपर इंशाल्लाह
[23:57]हम अपनी गुफ्तगू को ताम तक ले जाएंगे देखें इमाम अल सलाम
[24:00]इंतिहा एक खूबसूरत एक हदीस इरशाद फरमाते हैं ठीक है हम में
[24:07]बहुत सारे अफराद ऐसे हैं कि जो इमाम से मोहब्बत करते हैं
[24:09]इमाम से मोहब्बत का दावा करते हैं ठीक है लेकिन इमाम को
[24:17]मुफ तरज उता नहीं समझते यानी इमाम अल सलाम की इता को
[24:25]और इतबा को लाजमी नहीं समझते जिसकी वजह से इमाम का फरमान
[24:28]जो होता है हम उसके परर अमल नहीं करते सुस्ती करते हैं
[24:32]कोताही करते हैं और फिर भी समझते हैं कि हम इमाम अ
[24:34]सलाम के क्या शिया है इमाम के पैरोकार है देखि इमाम क्या
[24:39]फरमाते हैं इमाम से पूछा गया अपना रसूला मल फर शिया और
[24:47]मोहिब के दरमियान क्या फर्क है य दोनों एक जैसे हैं जो
[24:52]आपके शिया है और जो आपके मोहिब है यह दोनों एक है
[24:56]या दोनों अलग अलग है इमाम फरमाते दोनों अलग है दोनों अलग
[25:00]है ला शीना लजीना यतना आना हमारे शिया वो हैं जो हमारे
[25:11]आसार की इतबा करते हैं हमारे फरामीर की इतबा करते हैं हमारी
[25:14]तालिमा की पैरवी करते हैं वह हमारे शिया है यना फ जमी
[25:23]अवाम ना नवाही ना और हमारे तमाम अवाम नवाही में हमारी तात
[25:29]करते हैं कौन जो हमारे शिया है जो हमारे शिया है वह
[25:35]हमारी इता करते हैं अमरो नहीं अमर किसे कहते हैं किसी चीज
[25:38]के करने का हुकम नहीं किसे कहते हैं किसी चीज को ना
[25:42]करने का हुकम यानी इसका मतलब है कि आ तारीन अ सलाम
[25:46]ने हमको हुक्म दिया ना यह काम कर ले और यह कहा
[25:50]कि यह काम ना करें जो अवाम नवाही आ तारी इमाम फरमाते
[25:54]हैं जो हमारे अवाम नवाही की तात करते वो शिया है जो
[25:58]हमारी तालीमाबाद व हमारे शिया है इसका मतलब क्या है न नालाना
[26:07]बहुत अहम नुक्ता है लेकिन जो अल्लाह ताला ने फर्ज करार दे
[26:13]दिया है जिन तालीमाबाद उनकी मुखालिफत करने वाले बहुत सारे लोग हमारे
[26:20]शियो में से नहीं है इमाम का फरमान यानी अगर अमल नहीं
[26:26]करते अगर तात नहीं करते मानने का दावा है इमाम को मानने
[26:30]का दावा है हम इमाम को मानते हैं हम लेकिन अमल नहीं
[26:35]करते इता नहीं करते इमाम फरमाते हैं हमारे शिया नहीं है हम
[26:38]कह रहे हैं कि शिया है इमाम फरमाते हैं हमारे शिया नहीं
[26:43]वह ज्यादा ज्यादा मोहिब है हमसे मोहब्बत का दावा कर और व
[26:46]मोहब्बत भी क्या है सच्ची नहीं है यह इंतिहा अहम कि अगर
[26:51]हम इमाम अकरी अल सलाम के मुती है इमाम के मानने वाले
[26:56]हैं अ अहले बैत के माने अले बैत की तात कर लेता
[27:00]त के मामले में कोताही नहीं कर सकते हम हमारे अमल में
[27:04]अगर कोताही आएगी इमाम ने फरमाया सच बोलना है हम सच ना
[27:09]बोले इमाम ने फरमाया झूठ से परहेज कर हम झूठ बोले इमाम
[27:11]ने कहा नमाज पढ़े हम नमाज में सुस्ती कर इमाम कहे कि
[27:15]रोजा रख ले हम रोजे में सुस्ती कर ले इमाम कहे कि
[27:19]अपने वालदैन के साथ एहसान करें हम एहसान ना करें इमाम कहे
[27:21]कि लोगों के लोगों से अच्छे अंदाज में मिले हुस्ने खुक के
[27:27]साथ मिले हम बद अखलाकी के साथ पेश आ जाए इमाम अल्लाह
[27:32]ताला हमें अपनी इता की तरफ बुलाए हम इता ना कर फिर
[27:33]हम ग कि इमाम के शिया नहीं है इमाम के शिया नहीं
[27:37]है क्यों इमाम खुद फरमा रहे व मयाना वो हमारे शियों में
[27:42]से नहीं है क्योंकि जो शिया होते हैं वो इमाम की इतबा
[27:44]करते हैं वह पैरवी करते हैं देख तारीख के अंदर अगर आप
[27:49]देखें ना पहली सदी में एक फिरका बना खवारिज के मुकाबले में
[27:57]बना गचे खवारिज ने क्या कहा था खारिज हों ने कहा था
[28:02]कि जो आदमी गुनाह अंजाम दे दे ना गुनाह कबीरा अंजाम दे
[28:05]वो दायरे इस्लाम से निकल जाता है ठीक है तो एक सख्त
[28:09]उनका एक नजरिया था गलत इहरा फी नजरिया सबको काफिर कहना शुरू
[28:16]कर दिया तो इनके मुकाबले में एक और गुरुह आया जो बाद
[28:18]में मुर्जा कहलाए उन्होंने क्या कहा उन्होने कहा कि अमल की कोई
[28:22]अहमियत नहीं है उन्होंने इफरात किया था इन्होंने तफरी कर लि ठीक
[28:27]है उसने कहा किई अमल की इतनी अत अगर एक अमल में
[28:31]भी अगर कोताही हो जाए इंसान दायरा इस्लाम से निकल जाता है
[28:36]झूठ बोलले काफिर है आप गीबत कर ले काफिर है दोबारा कलमा
[28:38]पढ़ ले दोबारा मुसलमान हो जाए दोबारा दायरे इस्लाम में दाख जाहिर
[28:43]है यह एक गलत नजरिया था इहरा फी नजरिया था इंतिहा पसंदा
[28:46]नजरिया था तो उनको काउंटर करने के लिए एक और कुछ लोग
[28:51]आए लेकिन वह दूसरी जानिब क्या तफरी का शिकार हो गए उन्होंने
[28:53]कहा कि अमल का ईमान के साथ कोई ताल्लुक नहीं तो ये
[28:58]मुर्जा है कि जिन्होंने ये कि मुजिया के से ताने बरात का
[29:03]इजहार किया यह मुजिया का अकीदा है कि वह अमल करें ना
[29:06]करें हम मौला के चाहने वाले हैं हम तो शिया है नहीं
[29:09]है आप इमाम फरमा रहे कि आप शिया नहीं है अगर अमल
[29:13]ना करें अगर तात ना करें कुरान करीम की आयत करीमा को
[29:14]अगर आप देखे हुजूर अकरम सला अल्लाह ताला ने जहां जहां पर
[29:19]अल्लाह ने अपनी इता का हुकम दिया है रसूल अकरम की इता
[29:24]का भी हुकम दिया हुआ है अला रसूल इनको बेजा ही इसीलिए
[29:26]कि व लोग इता करें इनकी अरसल रसूला हमने किसी रसूल को
[29:34]नहीं भेजा मगर यह कि उसकी इजाजत से इता की जाए तात
[29:40]तात करेंगे तो फिर मकसद बसत सामने आ जाएगा फायदा सामने आएगा
[29:44]इसी तरह तारी जानशीन रसूल की तात करेंगे तो उसको मानने का
[29:48]फायदा सामने आ जाएगा अगर हम तात में कोताही करें तो मुह
[29:53]से तो कह रहे जबान से तो कह रहे जबान से कह
[29:56]भी दिया ला इलाह तो क्या हासिल दिल निगा मुसलमान नहीं तो
[29:59]कुछ भी नहीं सिर्फ जबान से कहना य काफी दिलो निगाह मुसलमान
[30:04]होना चा अमल से पाबंदी करना लाजमी य एक हदीस दूसरी हदीस
[30:11]काफी मशहूर हदीस है यह भी इमाम ही का फरमान है इमाम
[30:12]हसन अकरी सलाम कामा मन कान मनन मुलावा मलावा इमाम फरमाते हैं
[30:29]11 इमाम इरशाद फरमा रहे हैं फुकाहा में से जो फुकाहा में
[30:34]से जिन फुकाहा के अंदर यह क्वालिटी होगी यह सिफात होंगी वह
[30:41]क्या है एक य है कि सा अपने नफ्स को बचाने वाले
[30:43]गुनाहों से बचाने वाले हो ठीक है गुनाह अंजाम ना दे गुनाहों
[30:49]से अपने आप को आलोदा ना करें फकी है फकी गुनाह से
[30:54]अपने आपको को आलूदा दन के मुहाफिज हो दन की हिफाजत करने
[30:57]वाले हो मुखालिफ अला हवा अपनी हिशा नफ सानी की मुखालफत करने
[31:03]वाले हो हिशा नसानी का तकाजा यह है कि थोड़े से फायदे
[31:09]के लिए झूठ बोले ना बोले मामूली माल हासिल करने के लिए
[31:11]किसी की चापलूसी ना करें यह सिफात अगर इनके अंदर फवाम आवाम
[31:19]के ऊपर फर्ज है कि व ऐसे फका के तकलीद कर ले
[31:24]इमाम गवे इमाम का जमाना है ग बत का जमाना बिल्कुल कर
[31:29]करब आ रहा है इमाम अलम य इरशाद फरमा रहे हैं कि
[31:33]देखें मेरे बाद मेरे फर्जंद इमामत का फरीजा अंजाम देंगे गीबत के
[31:37]हवाले से तो तारी सलाम की इससे पहले भी रिवायत मज हुजूर
[31:43]अकरम सलाम की रिवायत मौजूद है कि आखरी वली जब आएंगे तो
[31:45]उनको अल्लाह ताला अपने से गीबत अता फरमाए लोगों से इस तरह
[31:51]नहीं मिल सक 260 हिजरी में इमाम अल सलाम की शहादत जब
[31:56]हो गई तो उसके बाद इमाम जमाना की इमामत का आगाज हो
[31:58]गया ग बत सुगरा का जहां पर सारे लोग इमाम से डायरेक्ट
[32:02]मुलाकात नहीं कर सकते सिर्फ नवाब के जरिए उनके जो नाइब खास
[32:08]है उनके जरिए से मुलाकात हो सकती है 200 329 हिजरी तक
[32:10]यह सिलसिला जारी रहा फिर उसके बाद से आज तक गीबत कुबरा
[32:14]का जमाना है इमाम लोगों को गबतला के जमाने के लिए आगाह
[32:16]आमादा फरमा रहे ये देखि जब तुम्हारी मुलाकात डायरेक्ट इमाम से ना
[32:21]हो सके फिर क्या करना है फिर जो फुकाहा हमारी तालीमाबाद कर
[32:28]ले ठीक है हमारे आसार को तुम्हारे सामने खोलकर बयान कर ले
[32:34]लेकिन उनके अंदर यह सिफात भी हो यह तकवा के उस मंजिल
[32:38]के ऊपर फाइज हो कि ना तो हिशा नफ सानी के पीछे
[32:39]भागते हैं ना तो अप ना तो अपनी हिशा को अहमियत देते
[32:44]हैं बल्कि मौला की तात करते हैं और तमाम मामलात में वह
[32:49]दीन की हिफाजत करने वाले तो लोगों के ऊपर फर्ज है कि
[32:51]व उनकी तकलीद कर ले ऐसे फुकाहा की तकलीद करले आज हमारे
[32:56]ऊपर लाजिम है कि हम अपने अमली अकाम के अंदर इमाम याज
[33:00]दम के इस फरमान की रोशनी में अपने फकी की तकलीद कर
[33:02]ले आज जो फुकाहा कराम है क्योंकि उससे दीन की हिफाजत होगी
[33:08]इससे दीन सर बुलंद होगा इससे इस्लाम सर बुलंद होगा आज आपके
[33:15]सामने मराज इजाम है आज आपके सामने आयतुल्लाह सिस्तानी है आज आपके
[33:18]सामने रहबर मजम आयतुल्लाह खाना है ये वो फुकाहा है कि जिनकी
[33:21]इता को इमाम अल सलाम ने अपनी हदीस मुबारका के अंदर वाजिब
[33:26]करार दिया और अगर हम इनकी इता करेंगे तमाम चीजों में तो
[33:29]दुनिया के अंदर सुर्ख रो होंगे और आखिरत के अंदर और दुश्मन
[33:34]के मुकाबलों से महफूज रहेंगे आज आप देख लीजिए के कुफर इस
[33:40]वक्त फलस्तीन के अंदर गज्जा के अंदर लब के अंदर जो है
[33:42]व हमलावर है एक साल से ज्यादा का अरसा गुजर गया दुश्मन
[33:47]हमलावर है लेकिन मैदान के अंदर निकलकर जिहाद करने वाले कौन है
[33:50]वह है कि जो आइम तारीन अल सलाम की इतबा करने वाले
[33:54]फुकाहा हैं और फुकाहा के जो पैरोकार हैं वो इस वक्त मैदान
[33:58]अमल के अंदर मौजूद है बाकी सारी दुनिया क्या है जालिमों का
[34:01]साथ दे रही है यह जालिमों का साथ दे रहे या इस
[34:06]जुल्म अजीम के मुकाबले में खामोश बैठे हुए हैं लेकिन हजरत बीबी
[34:09]जहरा सलाम उल्ला अलहा का एक फरमान है खुतबा फद्य अंदर आपने
[34:14]इरशाद फरमाया अल्लाह ताला ने जिहाद को वाजिब करार दिया इसलिए क्योंकि
[34:17]यह मुसलमानों की इज्जत का बायस है अगर आप जिहाद करेंगे आप
[34:23]सर बुलंद होंगे आपकी इज्जत में इजाफा होगा आज हिज्बुल्लाह की इज्जत
[34:27]में इजाफा है हिज्बुल्लाह सर से बुलंद करके लोगों के सामने उम्मते
[34:31]इस्लामिया के सामने जो वो कह सकती है कि हम मुसलमानों का
[34:42]दिफाई ईरान सर बुलंद लेकिन बाकी अरब मलिक बाकी मुसलमान खुद उनके
[34:48]आवाम उनके ऊपर लान तान कर रहे हैं क्यों क्योंकि वो अपने
[34:51]मुसलमान भाइयों को यहां पर मरते हुए देख रहे हैं लेकिन इसराइल
[34:55]के खिलाफ एक आवाज उठाने के लिए वो तैयार नहीं है इसराइल
[35:00]के खिलाफ एक जिहाद का कलमा बुलंद करने के लिए वह आमादा
[35:02]नहीं है इस वक्त अगर आप अमली मैदान के अंदर देखें पूरे
[35:07]इस खते के अंदर पूरे इस रीजन के अंदर इसराइल लन के
[35:10]मुकाबले में ससि इसराइल के मुकाबले में जो इस वक्त मुजा हमत
[35:15]कर रहे हैं जो मुकाम कर रहे हैं जो जिहाद कर रहे
[35:20]हैं वह विलायत के पैरोकार है और विलायत से वाबस्ता लोग हैं
[35:22]आप देख लीजिए पूरे इन अया उनका साथ कौन दे रहा है
[35:27]हमस अग तो हमास के पीछे कौन है इस्लामी जमूरा उनको असला
[35:31]वही दे रहे हैं उनको मोटिवेट वही कर रहे हैं हिजबुल्लाह हिजबुल्लाह
[35:35]के साथ कौन है इस्लामी जम्हूरिया वो वहां पर इसी तरह अंसार
[35:39]उल्ला यमा नगर है ह शाबी लेकिन बाकी वह है कि जो
[35:45]उनके कुफ्र इस वक्त बातिल पर होने के बावजूद मुद है कल
[35:49]ही की रिपोर्ट है कल ही की वाइस ऑफ अमेरिका ने यह
[35:51]रिपोर्ट शाय की इस एक साल के दौरान इस गुज एक साल
[35:55]के दौरान जब गजा और फलस्तीन के खिलाफ इसराइल लाईन जो है
[36:00]वो बमबारी कर र है और जुल्म सितम कर रहा है 19
[36:05]अरब डॉलर वाइस ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट 19 अरब डॉलर अमेरिका ने
[36:07]इसराइल की फौजी मदद की है इस एक साल के दौरान यानी
[36:12]500 लोग शहीद हो गए वहां पर 500 लोग मारे गए इनको
[36:16]मारने के लिए बम कौन दे रहा है इनको मारने के लिए
[36:20]हथियार कौन दे रहा है माली मदद कौन फराम कर रहा है
[36:21]अमेरिका और बाकी कुवत ये और दूसरी जानिब मुसलमान ममालाकंडम जोब फलस्तीन
[36:28]की मदद करने के लिए मैदान में र देने के लिए आमादा
[36:32]नहीं यह अरब ममालाकंडम जूद है 700 गाड़ियां है दुनिया के मुख्तलिफ
[36:52]मु मालिक के अंदर उनके सैकड़ों महल हैं बड़े-बड़े उनके जजीरे हैं
[36:57]लेकिन फलस्तीन की मदद करने के लिए इनके पास दो टके पैसे
[37:02]नहीं यानी हक पर तो इमाम इमाम का यह फरमान याद रख
[37:08]मरजय फका का साथ अगर आप देंगे तो व दन के मुहाफिज
[37:13]होंग दन के मुहाफिज है दन के ऊपर जब वक्त आया इसी
[37:18]सीरिया के अंदर जब दाइश ने मकामा मुकद्दसा को जब खतरे में
[37:20]डाला कौन मैदान में आया रहबर मुजम मैदान में आया आयतुल्लाह सिस्तानी
[37:25]मैदान में आ इन्होंने जिहाद का फतवा दिया जिसके बास दा का
[37:27]खा हो गया वरना कर्बला तक पहुंच गए थे दिम के अंदर
[37:32]वह पहुंच गए थे हजरत बीबी सकीना सलाम अहा के रोजे के
[37:37]ऊपर हमला किया और रोजे को गिराया मिसमा किया सामरा के अंदर
[37:42]इमाम हसन मुस्त सलातो सलाम और इमाम अली नकी अ सलाम के
[37:47]रोजे को दो मर्तबा मिसमा किया किसने बचाया किसने इनका दिफाई ने
[37:53]दिफाई ने आयतुल्लाह नाई ने तो इमाम अल सलाम के इस फरमान
[38:00]की अहमियत आजकल के हालात को देखने के बाद बहुत रोशन होकर
[38:06]सामने आ जाती है इमाम ने जो फरमाया था कि फुकाहा में
[38:08]से जो अपनी ख्वाहिश नफ सानी के ऊपर कंट्रोल करने वाले हो
[38:14]दीन के मुहाफिज हो मौला की इता करने वाले हो ख्वाहिश नफ
[38:19]सानी के ऊपर कंट्रोल करने वाले हो लोगों के ऊपर लाजिम है
[38:20]कि वह उनकी तकलीद कर लें जब उनकी तकलीद करेंगे आपका दीन
[38:25]भी महफूज़ रहेगा आप शरीयत के ऊपर सही तरह अमल भी कर
[38:28]पाए आएंगे और कल कयामत के दिन भी अल्लाह रब्बुल इज्जत की
[38:30]बारगाह में इंशा अल्लाह सुर्खरू होंगे दुआ है कि परवरदिगार बहक मोहम्मद
[38:35]और आले मोहम्मद हमें अम अहले बैत अल सलातो सलाम के फरामीर
[38:38]आप उनकी सीरत को समझने की तौफीक अता फरमा और उनके नक्श
[38:42]कदम पर चलने की तौफीक अता फरमा हमें अम तारीन अल सलाम
[38:44]के फरामीर के ऊपर अमल करने की तौफीक अता फरमा इमाम आस्करी
[38:48]अल सलाम के फरमान के ऊपर अमल करते हुए मर्जियत और फुकाहा
[38:52]की तकलीद करते हुए उनके इतबा करने की तौफीक अता फरमा खर
[38:56]दवाना हमदुलिल्ला रब्बिल आलमीन मी अल्ला
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