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Saas vs Bahu jhagde 👰 | Online Call with Maulana | Family Conflicts & Islamic Solutions
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25/09/15
In
Lectures
Are you struggling with mother-in-law vs daughter-in-law issues? Ghar main chhoti chhoti baaton par misunderstandings start ho jati hain aur phir relationships weak hone lagti hain. In this exclusive online call with an Islamic family scholar, we discuss: ✅ What are the rights & boundaries of a Bahu in Saas ka ghar? ✅ Saas aur Bahu ke darmiyan izzat aur mohabbat kaise maintain ki jaye? ✅ Duties of a daughter-in-law vs responsibilities of a mother-in-law. ✅ Islamic + practical solutions for avoiding family conflicts. 👉 Watch till the end for powerful tips & real solutions that can bring peace in your gharana. 💬 Aap bhi apna experience comment section mein share karein – maybe your story can guide others!
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Transcript
[0:00]बिल्ला शैतजीम बिस्मिल्लाह रहमा रहीम नाजरीन अस्सलाम वालेकुम एक बार फिर हम
[0:06]आपकी खिदमत में नाजरीन हाजिर हुए हैं सिविल मीडिया पर यूथ वाइब
[0:08]प्रोग्राम लेकर और आज का जो हमारा टॉपिक है बहुत ही इंटरेस्टिंग
[0:13]भी है बहुत ही अहम भी है क्योंकि ये मसला है हर
[0:17]घर का और वो है सास बहू ननंद ये कॉन्फ्लिक्ट जो चलता
[0:19]है तो इस सिलसिले में हमारा समाज मुलविस है और बहुत सी
[0:25]मुश्किलात इससे घरेलू पैदा होती है झगड़े होते हैं माहौल खराब होता
[0:27]है और इस सिलसिले में बात करने के लिए हमारे साथ आज
[0:32]मौजूद हैं दार सलाम तंजानिया से इस फैमिली इशू के एक्सपर्ट अली
[0:38]जनाब मौलाना सैयद अली अजीम शिराजी साहब साहब सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह बरकातहू
[0:41]वालेकुम अस्सलाम रहमतुल्लाह बरकातहू सबसे पहले तो आपको और नाजरीन को इस
[0:50]माहे रबील अव्वल जो चल रहा है और इसमें जो दो मासूम
[0:52]की विलादत है मौलाना मौला रसूल खुदा सल्ला वसल्लम और इमाम सादिक
[0:59]सलातो सलाम उसकी की मुबारकबाद हम पेश करते हैं और फिर इसके
[1:01]बाद से हम अपने प्रोग्राम का आगाज करते हैं। मौलाना साहब पहला
[1:07]सवाल मैं आपकी खिदमत में जो बहुत ही हसास है वो ये
[1:11]है के ये जो सास बहू नंद का जो क्फ्लिक्ट है और
[1:12]हर घर तकरीबन हमारे मुशरे का इसमें इ्तला है। तो आखिर इसकी
[1:18]जड़ क्या है?
[1:20]क्यों?
[1:21]ये बहू और सास का झगड़ा होता है। बहू और ननंद के
[1:22]दरमियान जो है वो ये झगड़े होते हैं। इसकी जड़े कहां पर
[1:27]है?
[1:26]जी बिस्मिल्लाह रहमानहीम। अल्लाह सला मोहम्मद मोहम्मद मैं भी तमाम नाजरीन को
[1:36]और उम्मत मुस्लिमा को जो है मुबारकबाद पेश करता हूं इन दो
[1:38]विलादतों के हवाले से जहां तक आपके सवाल का ताल्लुक है तो
[1:45]एक कुलिया हम पहले क्लियर कर लेते हैं कि बहुत सारे घर
[1:47]ऐसे भी है जहां पर सास बहू खुशी के साथ रहते हैं
[1:52]और अच्छी जिंदगी गुजार रहे हैं लेकिन अक्सर घरों में कुछ ना
[1:54]कुछ प्रॉब्लम्स है और जहां तक इस बात का ताल्लुक केस की
[1:59]असल वजह क्या है?
[2:01]रूट कॉज क्या है?
[2:00]तो बहुत सारे स्टडीज के बाद जो चीज सामने आई है उसमें
[2:05]चंद चीजें कॉमन है और चंद चीजें जो है ना वो केस
[2:10]पर डिपेंड करता है। यानी उस फैमिली के सिचुएशन पर डिपेंड करता
[2:12]है। तो जो चीजें कॉमन है देखने में जो चीजें ज्यादा आई
[2:16]है उनमें एक मसला जो है ना वो कंट्रोल का इशू है।
[2:20]कि कंट्रोल किसके पास रहेगा?
[2:21]कौन रूल करेगा?
[2:23]किन के प्रिंसिपल्स चलेंगे घर में?
[2:26]एक मसला तो कंट्रोल का है और दूसरा मसला जो है ना
[2:32]वो बढ़त का है कि कौन बढ़ है कौन अफजल है किसकी
[2:34]बात मानी जाएगी तो एक तो की दो ये इशज़ हो गए
[2:39]फिर एक इशू आता है अखलाकी हवाले से जो हम देखते हैं
[2:43]वो एक अना का मसला आ जाता है क्योंकि हमारी तरबियत नहीं
[2:47]हुई होती तो हम अना का मसला बनाते बना लेते हैं या
[2:49]हसद हो जाता है एक दूसरे से हसद करने लगते हैं तो
[2:54]नतीजा फिर यही निकलता है कि इंसान जो है ना वो फिर
[2:57]लड़ाई झगड़े की तरफ जाता है। और आखरी चीज जो बहुत कॉमन
[2:59]होती है वो तवकात होती है। जब बेजा तवकात होती है एक
[3:04]दूसरे से तो ऑटोमेटिकली झगड़े होना शुरू हो जाते हैं। फसाद होना
[3:08]शुरू हो जाता है। प्रॉब्लम शुरू हो जाती है। तो अगर हम
[3:10]चीजों को बिल्कुल इन पांच बातों को अगर समेट ले तो अगर
[3:14]हम अपनी किरदार साजी कर लेंगे अपनी तरबियत किए हुए होंगे, तरबियत
[3:17]याफ्ता होंगे तो ये मसाइल या तो नहीं होंगे। अगर होंगे भी
[3:22]तो बहुत मामूली हद तक होंगे और सॉल्व हो जाएंगे। लेकिन अगर
[3:24]हमने अपनी खुद साजी नहीं की होगी, किरदार साजी नहीं की होगी,
[3:28]तरबियत नहीं हुई होगी हमारी तो फिर यही चीजें जो है ना
[3:30]जो हमारी अखलाकी बीमारियां है, बुराइया वही सबब बनेगी इस झगड़ों का
[3:39]जो आपस में खवातीन के दरमियान होती है अक्सर। जी यार मौलाना
[3:44]साहब अभी आपने आखिर में जो एक बात कही तवकात वाली यानी
[3:50]एक यानी जैसे के तवकको होती है इंतजार होता है कि ये
[3:57]तवकात एक तरफ या दो तरफ आसान आ तौर से देखने को
[3:58]मिलता है कि कहा जाता है मेरी बहू बहुत अच्छी है मेरी
[4:02]बहू बहुत मेरा ख्याल हमारा ख्याल रखती है घर का ख्याल रखती
[4:06]है तो ये तवकात जो आप कह रहे हैं एक मसला जो
[4:10]होता है जो रूट बता रूट कॉज बनती है झगड़े की तवकात
[4:11]वो किस तरफ से होती है एक तरफ से या दोनों तरफ
[4:16]से हर केस का अपना अपना है कहीं पे आपको ये मिलेगा
[4:19]के बहू की तवकात ज्यादा है कहीं पे आपको मिलेगा सास की
[4:24]तवकात ज्यादा है कहीं पे आपको मिलेगा दोनों की एक दूसरे से
[4:29]गलत तवकात है तो हर एक केस का ना अलग-अलग है तो
[4:31]हम शादी से पहले तो सब लड़कियां अच्छी लग रही होती है
[4:35]माएं शादी करके इसलिए लाती है क्योंकि उनको लड़की पसंद होती है
[4:42]वो ढूंढकर चुनकर लाती है। उसके बाद जब जिंदगी शुरू होती है
[4:45]उसके बाद फिर टेंशन शुरू हो जाती है। फिर वही बहू जो
[4:48]है बुरी लगने लगती है। उसी के बुराइयां निकालनी शुरू हो जाती
[4:51]है। तो ये आप देखेंगे तो दोनों फैक्टर्स में शामिल है। यानी
[4:57]इसमें बहू जो है उसकी भी तवकात सही नहीं होती उस फैमिली
[4:59]से रियलिस्टिक नहीं होती या सास की नहीं होती या दोनों की
[5:04]एक दूसरे से नहीं होती तो ऑटोमेटिकली प्रॉब्लम बन जाती है। या
[5:07]अगर सास और बहू में कोई इतना ज्यादा ना भी हो टेंशन
[5:11]तो एनवायरमेंट जो होता है ना घर का एनवायरमेंट सोसाइटी का एनवायरमेंट
[5:14]वो टेंशन पैदा कर देता है। यानी ऐसा माहौल भी हमने देखा
[5:19]है और आप भी देख रहे हैं। हम सब जानते हैं कि
[5:22]अगर सास बहू की थोड़ी बहुत अच्छी चल भी रही है तो
[5:26]लोग उसको जो है ना वो इतना इन्फ्लुएंस करते हैं कि अच्छी
[5:28]बड़ी जिंदगी भी खराब कर देते हैं। तो जो तवकात है अगर
[5:33]जितनी भी तवकात आपकी रियलिस्टिक होंगी उतने ही कम झगड़े होंगे उतने
[5:37]ही आप प्रिपयर्ड होंगे आप तैयार होंगे लेकिन अगर आपकी तवकात ही
[5:44]गलत होंगी अनरियलिस्टिक होंगी या आप एक खाम ख्याल की जिंदगी में
[5:47]होंगे तो ये प्रॉब्लम तो होंगी आज की सोसाइटी में सासू को
[5:51]जो अपनी बहुओं से प्रॉब्लम हो रही है वो इस जनरेशन को
[5:52]समझ ही नहीं पा रही कि नई जनरेशन की जो अब बच्चियां
[5:56]शादी हो के आ रही है उनका उनका ज़हन किस टाइप का
[6:01]है उनके आदा उनके जो अदब है उनका जो हैबिट्स है वो
[6:06]किस तरह के वो उनका लाइफ स्टाइल कितना अब सास अपने तरीके
[6:08]से उसको देख रही होती है कि मैंने ऐसी जिंदगी गुजारी है
[6:12]मैंने 20 साल 30 साल इस तरह जिंदगी गुजारी है तो अब
[6:16]बहू को भी वैसे ही उसी से स्टार्ट लेना है तो ऑटोमेटिकली
[6:17]वो बनेगी नहीं आज की जनरेशन बिल्कुल डिफरेंट है पहली जनरेशन से
[6:24]और उसका ब्रॉट अप उसके वैल्यूस उसका सिस्टम अलग है आप देख
[6:27]रहे हैं कितनी तेजी से दुनिया में चेंजेस आ रही है तो
[6:31]ये इन चीजों में बहुत तब्दीली आ चुकी है। मैं यह नहीं
[6:32]कह रहा कि सारी बहुएं या सारी सासे हमने बहुत अच्छी फैमिली
[6:37]भी देखी और है हर जगह होती है। लेकिन जो नॉर्मल देखने
[6:39]में आ रहा है ना हम उसकी बात कर रहे हैं। जो
[6:40]जनरली चीजें आ रही है देखने में तो यहां पे दोनों को
[6:44]अपनी एक्सपेक्टेशन चेक करनी पड़ेगी। तो और दोनों को सही करनी पड़ेगी।
[6:47]तो सिर्फ मामला सही हो जाएगा। इसमें कोई नहीं कोई रॉकेट साइंस
[6:52]नहीं है ये जो ठीक नहीं हो सकती हो। इंटेंशन होना चाहिए
[6:54]करने का। ठीक करने का इरादा होना चाहिए। हिम्मत होनी चाहिए और
[7:00]इंसान को जिसे कहते हैं कि लगा रहना चाहिए उस काम के
[7:02]लिए तो हो जाता है। ठीक हो जाते हैं। हालात बेहतर हो
[7:05]जाते हैं। क्योंकि हम सब इंसान है ना कोई इंसान भी परफेक्ट
[7:10]नहीं है। हम दुनिया में आई परफेक्शन के लिए तो हम एक
[7:12]दूसरे की मदद करते हैं। एक दूसरे का ख्याल रखते हैं। उससे
[7:16]ठीक हो जाते हैं। मिसाल के तौर पर जो अगर इस्लाम को
[7:21]हम अपना दीन समझते हैं और उसके मुताबिक हम अमल करते हैं
[7:26]तो हमें तो पता है कि हमारे अंबिया ने हमें क्या सिखाया
[7:28]हमारे आईमालाम ने हमें क्या सिखाया है अंबिया हुशरा तो जब हमारा
[7:35]जो है हुस् अखलाक हमारा सही नहीं होगा तो फिर हम जिंदगी
[7:41]कैसे गुजारेंगे या कुरान की जो निसा की आयत है मारूफ तो
[7:43]हमें अच्छे सुलक के साथ जिंदगी करेंगे तो जिंदगी अच्छी हो जाएगी।
[7:48]जब सुलक ही अच्छा नहीं होगा तो जिंदगी कैसे अच्छी नहीं होगी।
[7:50]सुलक इसलिए नहीं अच्छा होता क्योंकि हमारी आदत अच्छी नहीं होती। हमारे
[7:53]इंटेंशन गलत होती है तो ऑटोमेटिकली प्रॉब्लम होती है। जी यहां पर
[7:59]एक बात अभी आपने दीन की और अंबिया सलाम की बात यहां
[8:04]पे छीड़ी आपने क्या कहते हैं उसने मुशरत का भी तरा किया
[8:10]कि सोसाइटी में अच्छे अखलाक के साथ हम और बेहतरीन बिहेवियर के
[8:12]साथ जो है वो हम जिंदगी गुजारे। एक सवाल यहां पर दीनी
[8:16]पॉइंट ऑफ व्यू से हम करना चाहते हैं। दीन में इस्लाम में
[8:20]दो सवाल यहां पर है एक्चुअली एक तो दीन इस्लाम इस बहु
[8:25]ननंद क्या ऐसा कुछ सिस्टम है दीन में इस्लाम में कुछ रखा
[8:32]है इस्लाम ने हुकूक वगैरह और दूसरी बात यहां पर जो है
[8:34]वो जब ये सवाल इसका जवाब जो है क्लियर होगा तो मैं
[8:38]दूसरा एक इंपॉर्टेंट सवाल जो है आपसे करूंगा एक बहू जो दूसरे
[8:42]घर से आ रही है एक दूसरे खानदान में एक दूसरे एनवायरमेंट
[8:45]से आ रही है। एक नए एनवायरमेंट तो उससे मुतालिक मेरा एक
[8:51]सवाल होगा। पहले ये वाला इस्लामिक इसका क्या मतलब जो है वो
[8:54]इस्लामी तनाजुर में अगर देखा जाए तो क्या कोई ऐसा हुकुम है
[8:59]सास खास सास से मुतालिक खास बहू से मुतालिक खास जो है
[9:04]वो ननंद से मुतालिक क्योंकि हर एक की एक प्राइवेसी होती है
[9:07]और जिसको दीन में हरीम कहा जाता है तो और बहुत ज्यादा
[9:11]जो है बहुए खास तौर से वो प्राइवेसी प्राइवेसी करती है इसको
[9:14]जरा सा आप क्लियर कर प्लीज जी देख दीन जो है ना
[9:20]वो एक इंडिविजुअल के लिए भी है और एक सोसाइटी के लिए
[9:23]भी है। तो किसी एक जगह महदूद नहीं है दीन क्योंकि दीन
[9:25]कामिल है। परफेक्ट दीन है। तो वो आपको इंडिविजुअल राइट्स भी बताता
[9:30]है। सोशल राइट्स भी बताता है। तो अगर आप एक फ में
[9:31]जिंदगी गुजार रहे हैं तो हर एक के अपने हुकूक है। बस
[9:35]हमें उन हुक की रियायत करनी है। अगर हम उन हुक की
[9:40]रियायत करेंगे तो आपकी जिंदगी अच्छी गुजरेगी। तो अगर बेवाने शोहर एक
[9:43]शख्स जो है एक शौहर है और उसकी बीवी है तो उन
[9:47]दोनों के अपने हुकक है अगर हुकत की जाएगी तो ये सही
[9:51]हो जाएगी इसी तरह शौहर की जो वालदा है उसके अपने हुकक
[9:55]है वो उसको अदा करने जो बहू है उसको अपने हुकक अदा
[9:57]करने तो ये जब हम हुक को जानेंगे और अखलाक को जानेंगे
[10:01]तो हम जिंदगी गुजार पाएंगे क्योंकि हुकूक जो है वो इंसान को
[10:04]सिक्योरिटी देते हैं प्रोटेक्शन देते हैं उसको उसको सेफ करते हैं उसको
[10:10]बैलेंस करते हैं इसलिए इसलिए दीन ने हुकुम दिया ना इन्लाह याद
[10:13]एहसान वो इसीलिए है कि हम अद करे एहसान करे अद ज
[10:19]करेंगे जब हुक रयत करेंगे तो हर एक के हुकक है डिफाइंड
[10:25]है दीन में और उसके हुदूद भी मुशकस है कि किस हद
[10:26]तक वो कर सकते है किस हद तक नहीं कर सकते और
[10:29]अखलाक आके उसको कितने आगे तक ले जाता है तो अगर इंसान
[10:34]दीनी तालीम हासिल करेगा और उन उसूलों के साथ और उन हुदूद
[10:39]को रियायत करेगा तो किसी को प्रॉब्लम नहीं होगी चाहे वो चौर
[10:42]हो, बीवी हो, सास हो, नंद हो, कोई भी हो जो अखलाकी
[10:46]उसूल है क्योंकि इंसान है ना हम लोग और इंसान अखलाक की
[10:49]बुनियाद पे जीता है। हुकूक तो सिर्फ सिक्योरिटी के लिए आते हैं।
[10:54]बैलेंस करने के लिए आते हैं। सोसाइटी की फाउंडेशन स्ट्रांग करने के
[10:56]लिए आते हैं। हुकूक इसलिए होते हैं कि किसी को नुकसान ना
[10:58]पहुंचे। सब अपने अपने एरिया में रहे। सब अपने अपने जोन में
[11:03]रहे और एक दूसरे के जोन पे जो है ना क्रॉस नहीं
[11:07]करें। एक दूसरे के बाउंड्री को क्रॉस ना करें ताकि स्मूथली सिस्टम
[11:09]चलता रहे। फिर अखलाक आकर उसको बेहतरीन बना देता है आपकी जिंदगी
[11:14]को और उसमें चाशनी ले आता है। उसमें गर्मी ले आता है।
[11:17]प्यार मोहब्बत और ये सब कुछ ले आता है। तो अगर इंसान
[11:20]जानेगा और उसप अमल करेगा तो ये प्रॉब्लम तो होगी नहीं ना।
[11:22]अल्लाह ताला ने तो डिजाइन किया सिस्टम वो इसीलिए किया है। और
[11:26]अल्लाह ताला ने घर बनाया ही इसीलिए कि इंसान बाकमाल बने और
[11:28]एक दूसरे के साथ रहे। खुशी के साथ जिंदगी गुजारे। उनकी एक
[11:33]दूसरे के लिए काउंसलिंग हो। वो एक दूसरे के मददगार हो। अब
[11:39]ये जो कुरान की आयत है लबास लबास तो ये औरत को
[11:41]तो अल्लाह ताला ने एक लिबास के उनवान से देखा है ना
[11:44]तो ये अगर औरत एक लिबास के उनवान से आ रही है
[11:49]तो वो तो प्रोटेक्ट करती है वो तो इंसान के को उसकी
[11:53]शर्म को छुपाती है शर्मगाह को छुपाती है प्रोटेक्ट करती है उसको
[11:56]इज्जत देती है उसको बाकार बनाती है तो औरतों का काम तो
[11:59]ये होता है एक दूसरे को कवर करना एक दूसरे को प्रोटेक्ट
[12:01]करना ना कि एक दूसरे से लड़ना एक दूसरे से झगड़ा करना
[12:05]तो ये ये दीन के ये फंडामेंटल्स है। तो हर एक के
[12:08]अपने अपने हुकक है। उसकी अपनी रियायत है। वो करना है। अगर
[12:11]कोई प्राइवेसी चाहता है तो वो उसका हक है। अगर कोई लड़की
[12:15]प्राइवेसी चाहती है तो उसका हक है। तो वो ज उसको अपना
[12:16]हक पता होगा तो वो प्राइवेसी को जान पाएगी। अगर सास को
[12:21]भी अपना हक पता होगा। अपने लिमिट्स पता होंगे तो वो अपने
[12:24]लिमिट में रहेंगी। बहू अपने लिमिट में रहेगी। दोनों खुश रहेंगे। लेकिन
[12:27]अगर दोनों अपने लिमिट्स में ही नहीं रहेंगे तो प्रॉब्लम होगी। आपकी
[12:30]बातों से यह जो नतीजा मैं निकाल सकता हूं के दकत एक
[12:35]रूट कॉज रूट जो है रूट कॉज जो है वो उसकी झगड़ों
[12:39]की वो एक ये हो सकती है कि लोग अपनी लिमिट क्रॉस
[12:43]कर जाते हैं और जो प्राइवेसी है यानी जो हरीम है वो
[12:45]जो अपनी अपनीप जो है वो लिमिटेशंस है अपने जो हुदूद है
[12:49]उनको जो है वो तोड़ने की कोशिश करते हैं जिसकी वजह से
[12:53]ये प्रॉब्लम्स आती है मियां बीवी के एक अपने जो है वो
[12:56]हुकूक है राइट्स हैं एक दूसरे के लिए भाई का बहन की
[13:00]निस्बत और भाई और एक बेटे का मां की निस्बत ये सारी
[13:05]चीजें होती है। यहां पर एक सवाल जब एक लड़की शादी करके
[13:07]आती है तो कहा जाता है कि सास ससुर की खिदमत करे
[13:11]और घर वालों की जिम्मेदारी उठाए। पूरा घर जो है वो उठाए।
[13:16]हमको देखने को मिलता है हमारे मुशरे में कि वो एक लड़की
[13:18]जो आई है नई बहू अभी आई है। वो पूरे घर के
[13:20]लिए खाना भी बना रही है। सफाई का भी इंतजाम कर रही
[13:24]है। और साथ-साथ सोसाइटी में भी घर और खानदान को मेंटेन किए
[13:29]हुए अगर खुसन अगर कोई बड़ी बहू है तो उसको बार-बार ही
[13:30]कहा जाता है कि तुम तो बड़ी बहू हो। तुम तो बड़ी
[13:33]हो। तुम्हें इन तमाम चीजों का ख्याल रखना चाहिए। सास अपने जमाने
[13:37]की बातें बताती है कि हम तो ये करते थे। हम तो
[13:39]वो करते थे। तो ये सारा उसमें सबसे अहम जो चीज होती
[13:43]है वो ये होती है कि खिदमत के ये खिदमत जो है
[13:47]जो पढ़ी लिखी खवातीन होती है कहती है देखो हमारे पर सास
[13:50]ससुर की खिदमत वाजिब नहीं है। हम तो नहीं करेंगे क्योंकि शन
[13:53]हमारे ऊपर कोई ऐसा वजू और फर्ज हमारे ऊपर नहीं है। इसको
[13:58]कैसे हल करेंगे?
[13:58]और यह कहां से यह चीज आई है?
[14:01]सास ससुर की खिदमत करना, घर की जिम्मेदारी, पूरे घर की जॉइंट
[14:03]फैमिली में पूरे घर की जिम्मेदारी संभालना। यह सारी चीजें कहां से
[14:07]आई?
[14:08]अगर हम इस पे जरा सा रोशनी डाल दे और इसको कैसे
[14:10]हल करेंगे हम?
[14:11]अच्छा आपने बहुत सारे सवाल एक साथ कर दिए। ठीक है। हम
[14:16]कोशिश करते हैं इसको एक और कम करता हूं। दो चीजें हैं।
[14:19]जी जी। एक तो सासुर की खिदमत वाला पॉइंट है और दूसरा
[14:23]जो है वो ये कि लड़की के ऊपर सारी जिम्मेदारियां आ जाती
[14:28]है घर की। ठीक है?
[14:28]तवकात वाली बात जो थी उसी के साथ साथ तो इसको इस्लामिक
[14:32]पॉइंट ऑफ व्यू से हम कैसे हल करने की कोशिश करेंगे खिदमत
[14:36]को?
[14:35]क्योंकि खिदमत फर्ज नहीं है। वाजिब नहीं है। सही है। सही है।
[14:38]ठीक है। इसको कैसे हम हल करेंगे?
[14:40]सही है। देखिए खिदमत का जो कांसेप्ट है ना एक तो पहली
[14:44]बात ये कि हम अकेले तो रह नहीं रहे सोसाइटी में। हमारे
[14:50]सोसाइटी में मुख्तलिफ तरह के अदियान मौजूद है। मुख्तलिफ तरह के माइंडसेट्स
[14:54]मौजूद है। मुख्तलिफ तरह की आइडियोलॉजीस मौजूद है। लोग अलग-अलग अकीदों के
[14:59]साथ एक्सपीरियसेस के साथ और प्रैक्टिससेस के साथ रह रहे हैं। अलग-अलग
[15:02]कल्चर के लोग रह रहे हैं। तो उनके अपने वैल्यूस अब उनके
[15:07]अपना इन्फ्लुएंस हमारे कल्चर पे भी हो जाता है। आजकल सोशल मीडिया
[15:09]का भी दौर है। तो इंटरनेशनलली आप चीजें देख रहे होते हैं,
[15:14]सुन रहे होते हैं। ट्रेंड्स सेट हो जाते हैं। नॉर्म्स बन जाते
[15:16]हैं। कल्चर बन जाता है, वैल्यूस बन जाते हैं। नए नहीं और
[15:20]वह हमारे रिलजन के अंदर इनफ्लुएंस कर रहे होते हैं और फिर
[15:24]हम उसको आइडियल बनाकर उसको फॉलो करने लगते हैं। यानी हम अपने
[15:27]नए गोल्स बनाते हैं, नए आइडियल्स बनाते हैं और अपने जिनको हम
[15:31]रोल मॉडल बनाते हैं उनको उनकी तरह की जिंदगी गुजारना चाह रहे
[15:33]होते हैं। तो और हमारे कल्चर में जो चीजें पहले से इन्फ्लुएंस
[15:37]हो चुकी है उनमें ये है कि कोई लड़की आएगी खिदमत करेगी।
[15:39]ये एक माइंडसेट है। वो आके एडजस्ट करेगी इस घर में। उसको
[15:44]एडजस्ट करना होगा। तो सवाल यहां यह पैदा होता है कि उसी
[15:46]को क्यों करना एडजस्ट करना होगा?
[15:49]यह तो सबको एडजस्ट करना होगा ना। बात हो रही है अद
[15:51]इंसाफ की। दीना में आके कहता है आप अद इंसाफ करें। आप
[15:55]बराबरी की बात करें। तो ये तो कहीं भी दीन ने नहीं
[15:58]कहा कि जो औरत घर में आएगी वही एडजस्ट करेगी। नहीं घर
[16:02]के हर फर्द को एडजस्ट करना है। क्योंकि वो किसी की इज्जत
[16:04]है। किसी के लिए वो बासखार है। उसकी अपनी शख्सियत है। एक
[16:09]अहमियत है। तो जिस घर में भी वो लड़की आएगी उसकोेंस मिलनी
[16:11]चाहिए। उसको अहमियत मिलनी चाहिए। उसका ख्याल रखना चाहिए और सबको एडजस्ट
[16:15]करना है क्योंकि ये घर तो सबका है। सब शेयर कर रहे
[16:18]हैं। सब मिलके काम करेंगे। और अगर उससे एक्सपेक्टेशन है कि वो
[16:24]कुर्बानी दे तो उससे बड़े कुर्बानी देने वाले लोग घर में और
[16:26]मौजूद होने चाहिए ताकि जो जो सास है, ससुर है, घर में
[16:29]बड़े लोग हैं वो रोल मॉडल बनेंगे ना। कुर्बानी के तो ये
[16:33]जो लड़की शादी हो के आई है ये उनको अपना रोल मॉडल
[16:34]बनाएगी कि हां भाई यहां सब लोग कुर्बानी देते हैं मैं भी
[16:39]दूंगी। सब लोग इशार करते हैं मैं भी करूंगी। इस तरह होता
[16:41]है। यह तो हमारे गलत माइंड सेट है। पहले से जो दूसरे
[16:44]कल्चर से आगे के बस बहू आई है तो काम करने के
[16:48]लिए। इस्लाम का कासेप्ट ही नहीं है। काम करने के लिए तो
[16:52]मासिया लेकर आई जाती है। नौकरानी रखी जाती है काम करने के
[16:54]लिए। अगर वो करती है खुद से तो इट्स वेल एंड गुड।
[16:57]फबेहा खुशी से कर रही है तो बहुत अच्छी बात है। यानी
[17:01]जो काम इंसान खुद खुद खुद से और खुशी से करता है
[17:05]वो इस्लाम कबूल करता है। उसको इस्लाम पसंद करता है ना कि
[17:07]जो प्रेशर डाल के और जोर जबरदस्ती करके ये इस्लाम का कांसेप्ट
[17:11]ही नहीं है। इस्लाम कहता है आप घर का माहौल इतना मोहब्बत
[17:12]इतना रिस्पेक्ट वाला बनाए कि वो लड़की खुद से कहे कि मुझे
[17:17]घर का काम मैं खुद करूंगी क्योंकि वो खुश हो। जब इंसान
[17:18]खुश होता है तो वो और काम करता है। आप घर का
[17:21]माहौल अच्छा बनाए। वो खुद ब खुद खुशी से करेगी। वो चाहेगी
[17:24]मैं खाना बनाऊं। मेरी अमियां भी खुश हो। मेरी सास भी खुश
[17:29]हो जाए। सब लोग घर के खुश हो खुशीखशी करेगी। यानी औरत
[17:31]को अल्लाह ताला ने जो मकाम दिया है वो एक शहजादी का
[17:35]मकाम दिया है। यानी उसकी इज्जत उसकी अहमियत एक शहजादी की तरह
[17:38]है। तो जो वो काम खुशी से करेगी वही उसमें ही बरकत
[17:42]होगी। उसमें ही खैर होगा। उसमें ही सब कुछ होगा। क्योंकि इमाम
[17:46]अली ने इस तरह समझाया ना कि मर्द को कि अगर तुम
[17:48]चाहते हो कि तुम बादशाह कहलाओ तो तुम अपनी बीवी को एक
[17:53]रानी की तरह ट्रीट करो। लेकिन अगर तुम अपने को गुलाम करवाना
[17:57]चाहते हो तो तुम एक नौकरानी की तरह ट्रीट करोगे उसको। तो
[17:59]ये डिपेंड करता है मर्द की साइकोलॉजी के ऊपर कि वो औरत
[18:04]को किस तरह ट्रीट करता है। अगर वो औरत को मासी की
[18:07]तरह ट्रीट करेगा तो वो खुद उसका मियां होगा जैसे मासी का
[18:09]मिया। अगर वो खुद शहजादा है तो वो शहजादी की तरह रखेगा
[18:13]बीवी को। ये माइंडसेट इस्लाम का है। इज्जत है ना इस्लाम की।
[18:15]इस्लाम ने इंसान को इज्जत अदा की है। इनका तो मयार जो
[18:22]है वो तकवा है। उसकी बुनियाद पर इंसान की इज्जत है। और
[18:26]उसका एतराम है। हमारे यहां तो माशरे में इज्जत और एतराम का
[18:28]कोई तसवुर ही नहीं रखा जाता। और ये माइंड सेट ही गलत
[18:32]होता है कि हम अगर कोई शादी करके ला रहे हैं तो
[18:35]उससे सारा काम करवाएंगे। ये तो कांसेप्ट इस्लामिक है नहीं। इस्लाम तो
[18:38]कहता है उसको इज्जत दे, एतराम दे। उसको अच्छे से रखें ताकि
[18:41]वो खुशी से जो काम करती है वो करे और वो अगर
[18:42]नहीं कर सकती तो वो नहीं करेगी। ये तो श वाली बात
[18:46]जो आपने यहां पर कही है तो ये वाकई अगर देखा जाए
[18:50]कि एक खातून के ऊपर एक तरह का शायद ये जुल्म शुमार
[18:54]हो के ससुराल वाले भी कहते हैं कि तुमको एडजस्ट करना पड़ेगा
[18:57]और जब कोई मसाइल पेश आते हैं तो जो लड़की के मायके
[19:03]वाले होते हैं खुसूसन मां जो है वो कहती है बेटा एडजस्ट
[19:08]करो वहां पर रहने की कोशिश करो जबकि आपने बहुत अच्छी बात
[19:09]कही यहां पर के एडजस्ट जो है वो एडजस्टमेंट जो है वो
[19:13]दो तरफ होगा एक मर्तबा आपके घर का माहौल है जिसे इस
[19:19]लड़की को समझना है। दूसरे आपको अपना अपना सुलक अपने ताल्लुकात अपना
[19:23]बिहेवियर उस लड़की के मुताबिक भी रखना है कि जिस घर से
[19:28]वो होके आई है। हो सकता है कि एक लड़की जो इकलौती
[19:29]है अकेली है अपने घर की नाजो नखरे में पली हुई है
[19:33]और वो एक बड़ी फैमिली में आ रही है। तो जाहिर सी
[19:37]बात है ये दो तरफ़ा मामला होगा। जब तक ये दो तरफ
[19:41]मामला नहीं होगा तब तक ये क्या कहते हैं रिश्ता खुशी के
[19:45]साथ आगे नहीं बढ़ेगा। एक बात और जो आपकी बात से हम
[19:47]कंक्लूजन मतलब ले सकते हैं वो खुशी वाली बात का वो ये
[19:52]है कि ठीक है। बाज लड़कियां कहती है कि हमारे ऊपर वाजिब
[19:56]नहीं है। अपने सास ससुर की खिदमत करना। फर्ज नहीं है हमारे
[19:58]ऊपर दीन में। हमारे ऊपर खाना बनाना वाजिब नहीं है। हमारे ऊपर
[20:04]जो है सफाई करना वाजिब नहीं है। मुझे ऐसा लगता है कि
[20:06]शायद आप मेरी जो है वो ताद करेंगे के दकत ये चीज
[20:11]जो है साससुर की खिदमत घर वालों की खिदमत घर में खाना
[20:13]बनाना ये चीज शायद मियां और बीवी के रिश्ते के ऊपर डिपेंड
[20:19]करती है कि इन दोनों के दरमियान ताल्लुकात कैसे हैं। इनके दरमियान
[20:22]के जो है वो आपसी रिश्ता इनका जो है वो कैसा है।
[20:27]अगर इनके दरमियान मोहब्बत है तो अखलाकर इनसे मुतालिक हर चीज से
[20:30]मोहब्बत होगी। मिसाल के तौर पे अगर एक शौहर को एक मर्द
[20:35]को अपनी बीवी से मोहब्बत है तो उससे मुतालिक हर चीज से
[20:40]उसको मोहब्बत होगी। वो उसकी रिस्पेक्ट करेगा। उसका एतराम करेगा और उसकी
[20:43]खुशी के लिए काम करेगा। बीवी को एक चीज पसंद है। बीवी
[20:48]की मोहब्बत की वजह से वो उस पसंदीदा चीज उसके लिए लाकर
[20:50]देगा। उसके वालदैन का एतराम करेगा। यानी तना ये नहीं है कि
[20:55]लड़की लड़के के वालदन का एतराम करे या उनके घर वालों का
[20:57]एतराम करे। वाइसवरसा भी है। मतलब इधर से भी मामला है के
[21:01]लड़के लड़का भी जो है वो अपने ससुराल वालों का एतराम करे
[21:04]क्योंकि उसको इसलिए नहीं के ससुराल वालों की का एतराम वाजिब है।
[21:09]नहीं बीवी से मोहब्बत है। अब इस तरह से दूसरी तरफ से
[21:11]अगर इस औरत को अपने शौहर से मोहब्बत है। इनके आपसी ताल्लुकात
[21:16]अच्छे और खुशगवार हैं। तो अब अखलाकी फर्ज ये बनता है कि
[21:19]वालदैन की मोहब्बत बेटे से जुड़ी हुई है और सासससुर से जुड़ी
[21:25]हुई है। लिहाजा उनसे मुतालिक उनसे मनसूब वो तमाम शख्सियात वो तमाम
[21:29]चीजें वो तमाम काम उसको बीवी खुशीखुशी अंजाम देगी और ये अखलाकी
[21:36]फरीजा श फरीजा शायद ना हो लेकिन ये अखलाकी फरीजा फिर जरूर
[21:39]हो जाएगा कि अखलाकन अपने शौहर की खुशी के लिए उधर से
[21:44]शौहर जो है अपनी बीवी की खुशी के लिए ये एतराम और
[21:48]ये जो खिदमत है उसको अंजाम दे। जी बिल्कुल आपने सही बात
[21:51]कही है। इसको मैं एक और एंगल से भी इसको इबोरेट कर
[21:56]देता हूं। जहां पे ये बात फंडामेंटल बात यही है कि अगर
[22:00]मियां बीवी के दरमियान अच्छी अंडरस्टैंडिंग और मोहब्बत और रिस्पेक्ट का पहलू
[22:04]आएगा तो ऑटोमेटिकली माहौल अच्छा बनेगा और दोनों जो है वो एक
[22:07]दूसरे के वालदन की रिस्पेक्ट करेंगे। यहां तक तो ये बात बिल्कुल
[22:11]सही है। लेकिन प्रैक्टिकल सिनेरियो में क्या होता है के अब जो
[22:15]सास है या ससुर है या नंदे हैं वो दूसरा पार्ट होते
[22:19]हैं। अगर वो लोग सही बिहेवियर ना रखें तो मियां बीवी के
[22:22]रिश्ते में आहिस्ता आहिस्ता जो है दरार पड़ने शुरू हो जाती है।
[22:28]क्योंकि वो लोग इनफ्लुएंस कर रहे होते हैं। इन दोनों के रिश्तों
[22:30]को मजबूत करने के बजाय कमजोर कर रहे होते हैं। क्योंकि वो
[22:34]ये समझ रहे होते हैं वो ये समझ रहे होते हैं कि
[22:38]हमारा बेटा या हमारा भाई हमसे छीन रहा है और वो जोरू
[22:39]का गुलाम बन रहा है और हमें टाइम नहीं देता। हमें हमारी
[22:43]केयर नहीं करता। तो ऑटोमेटिकली वो हसद और वो गलत तवकत और
[22:48]वो तमाम चीजें जो है वो मिलकर वो इनके रिश्तों को कमजोर
[22:50]कर देती है और ये प्रॉब्लम आनी शुरू हो जाती है। लेकिन
[22:53]अगर से हुक से आशना ना होना तरबियत ना होना तमाम चीजों
[22:58]की जड़े जो है वो यहां पर है। बिल्कुल ऐसे से आशना
[23:02]नहीं है। तरबियत नहीं है। समझ नहीं रहा है कि जो रिश्ते
[23:06]होते हैं वो किस तरीके से आगे बढ़ते हैं। जी सही कह
[23:08]रहे हैं आप। अच्छा देखिए एक तो ये एस्पेक्ट हो गया ना
[23:10]जिसप हमने बात करी। एक और एस्पेक्ट ये है कि हम अभी
[23:13]जितनी भी बात कर रहे हैं ना हम इस इस ज़हन में
[23:17]रख के कर रहे हैं कि लड़की घर में है। आज के
[23:20]दौर में आप देख लड़कियां जॉब कर रही हैं। प्रोफेशनली लड़कियां काम
[23:24]कर रही है। करियर ओरिएंटेड हो चुकी है। लड़के भी जॉब कर
[23:28]रहे हैं। लड़कियां लड़के तो पहले भी करते थे लेकिन अब लड़कियां
[23:29]भी जॉब करने लग गई है। तो अब इनके लाइफ डायनामिक्स बिल्कुल
[23:34]चेंज हो गए हैं। अब वो अब आप एक्सपेक्ट करें कि वो
[23:35]लड़की जो है वो जॉब भी करे फिर घर में आके खाना
[23:38]भी बनाए और सफाई भी करे। तो यह एक खुद अगर मर्द
[23:42]करना शुरू हो जाए ना तो एक एक दो चार दिन में
[23:45]उसके हाथ पैर फूल जाएंगे कि वो घर ऑफिस से आए थके
[23:48]और फिर खाना बनाना शुरू हो जाए फिर घर की सफाई में
[23:49]भी वो हाथ बटाए तो ऐसा नहीं होता इस्लाम आके आपको बताता
[23:53]है कि भाई ये मिलजुलकर अगर कोई चीज करनी है तो फिर
[23:55]उसमें सब शेयर करें सब मिलजुल के करें तो उसमें खैर बरकत
[23:59]मोहब्बत होती है ना तो इंसान है उसको अगर कोई इंसान थका
[24:03]हुआ आ रहा है और वो अपने लिए अगर उसने फिर कोई
[24:05]कुक रखा हुआ है तो ठीक है आप कुक रख ले अब
[24:06]बा दफा आप कुक अफोर्ड कर सकते हैं आप कुक नहीं रखते।
[24:10]आप कहते हैं नहीं सा बहू ही बनाएगी या कोई और बनाएगा।
[24:15]तो आप लोगों को प्रैक्टिकली देखना होता है कि भाई हम किस
[24:17]दौर में रह रहे हैं। इसके डायनामिक्स क्या है और इस इस
[24:21]वक्त बच्चों की हेल्थ किस तरह की है?
[24:24]उनके पास कितना फ्री टाइम है?
[24:27]उनके पास कितना टाइम है वो एक दूसरे को दे। जब मियां
[24:28]बीवी खुद ये जॉब कर रहे होंगे और और फिर बीवी आके
[24:31]घर में खाना भी बनाएगी। 10 और काम भी करेगी। तो वो
[24:35]मियां को कब टाइम देगी?
[24:34]बच्चों को कब टाइम देगी?
[24:37]फिर इमोशनल चैलेंजेस आने शुरू हो जाएंगे। फिर दूसरे इंटिमेसी के चैलेंजेस
[24:40]आने शुरू हो जाएंगे। फिर 10 और प्रॉब्लम शुरू हो जाएगी। तो
[24:43]हमें ना बैलेंस करना पड़ता है बहुत सारी चीजों को। ये इमाम
[24:47]अली ने कहा ना कि दुनिया जो है ना वो बैलेंस पर
[24:51]कायम है। तो हमें भी जिंदगी को मुख्तलिफ उमूर को बैलेंस करना
[24:54]होता है। लेकिन हमारा जो प्रॉब्लम है ना वो सारा झगड़ा जो
[24:58]है किचन से शुरू होता है। और वो किचन से ही सारे
[24:59]फड्डे लेकर हम बाहर आते हैं और अपनी जिंदगी को खराब कर
[25:03]रहे होते हैं। जो सास बहू के अक्सर झगड़े होते हैं वो
[25:06]किचन की वजह से शुरू होते हैं। मैं नहीं कह रहा सारे
[25:08]झगड़े लेकिन बुनियादी झगड़े इसी बात पे होते हैं। खाना नहीं बनाती
[25:12]या खाना बनाती तो अच्छा नहीं बनाती। उसने मेरे किचन को सही
[25:14]से नहीं रखा। मैंने बहुत अच्छे से रखा हुआ था। ये सारी
[25:18]बातें अगर आपके इशज़ किचन को लेके है तो आप किचन सेपरेट
[25:19]कर ले। आप अपने किचन को अपनी तरफ से चलाए। वो अपने
[25:23]किचन को अपनी तरफ से चलाए। आप सुकून से रहें। रहकर झगड़े
[25:26]करने से बेहतर है कि आप दूर रहकर इज्जत से मिले और
[25:31]एतराम से रहें। बजाय इसके कि आप साथ भी रहे। कूड़े भी
[25:35]झगड़ा भी करें। डिप्रेशन, टेंशन, ए्जायटी और फिर मर्द जो है वो
[25:38]बेजार हो जाए दोनों से और फिर वो बाहर निकल जाए। वो
[25:41]बाहर अलग मसाइल वो उसको झेलता है। खैर ये टॉपिक अभी नहीं
[25:43]है। लेकिन मैं सिर्फ इशारा करना चाह रहा हूं कि ये झगड़ों
[25:46]की वजह से मर्द जो है वो बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं
[25:50]और फिर वो अपनी जिंदगी से बेदार हो के नई जिंदगी आबाद
[25:52]करना शुरू कर देते हैं। जहां पे एक्स्ट्रा मैरिट अफेयर्स आना शुरू
[25:55]हो जाते हैं और दूसरी चीजें होनी शुरू हो जाती है। फिर
[25:57]घर में देर से आते हैं। आते हैं सो जाते हैं सुबह
[26:00]उठ के भी चले जाते हैं। फिर इनकी लाइफ खराब हो जाती
[26:06]है। जी यहां पे एक और चीज शायद आप इसको इसकी ताद
[26:08]करेंगे के कन्वर्सेशन जो होता है वो उसकी कमी होती है अब
[26:14]कुछ मसाइल ऐसे होते हैं कि जहां पर उधर से ताना किसी
[26:18]ने दिया इधर से किसी ने ताना दिया कोई नाफाकी हो गई
[26:22]कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग हो गई और उसके उसके ऊपर हम बात नहीं करते
[26:25]हैं गुफ्तगू नहीं करते हैं जब बात नहीं करते गुफ्तगू नहीं करते
[26:28]तो उसकी वजह से भी बहुत सी शायद प्रॉब्लम्स जो है वो
[26:32]घर में क्रिएट होती बहुत ज्यादा क्योंकि देखिए ना हर चीज की
[26:35]जो बुनियाद है ना एक जो असल बुनियाद है वो कम्युनिकेशन है
[26:39]ना हम कम्युनिकेट करते हैं चाहे हम फिजिकली करते हो या वर्बली
[26:43]करते हो या किसी भी तरह से करते हो अगर कम्युनिकेशन ही
[26:46]रुक जाएगी तो ऑटोमेटिकली सब चीजें फिर ठीक पड़ जाएगी सारे रिश्ते
[26:49]कमजोर होने शुरू हो जाएंगे क्योंकि बात जो मोहब्बत होती है वो
[26:54]कम्युनिकेशन के जरिए होती है ना जब अच्छी कम्युनिकेशन होती है दिल
[26:56]को भाती है तो इंसान को अच्छा लगता है उससे बात करना
[26:59]इंसान इंसान से बात ही नहीं करना चाहता जो बदतमीजी से बात
[27:03]करता हो या कम बात करता हो या जवाब ना देता हो
[27:06]तो कैसे रिलेशनशिप कैसे बिल्ड होगी?
[27:08]एक एफिनिटी अफेक्शन बॉन्डिंग कैसे डेवलप होगी?
[27:09]जब कम्युनिकेशन ही नहीं होगी और जब भी कम्युनिकेशन हो उसमें अगर
[27:13]लड़ाई झगड़ा हो रहा हो या शिकायतें हो रही हो तो फिर
[27:14]वो जगह इंसान रहना नहीं चाहेगा उसका मिजाज ही नहीं है। मर्द
[27:18]का मिजाज ही नहीं है। कोई ऐसे माहौल में रहे। किसी भी
[27:20]इंसान का मिजाज नहीं है। कि ऐसे माहौल में रहे कि जहां
[27:22]पे हमेशा नेगेटिविटी, क्रिटिसिज्म, कंप्लेन, कॉन्फ्लिक्ट ऐसी चीजें होंगी तो कौन रहेगा
[27:26]उस घर में?
[27:28]कहीं कोई भी नहीं रह पाएगा। तो इस बात को लोग समझ
[27:32]नहीं रहे होते और जहां पर भी मियां बीवी ये देखे कि
[27:33]उनकी कम्युनिकेशन कम होनी शुरू हो गई है तो ये एक अलार्म
[27:37]है। ये एक अलार्म है कि अगर ये कम्युनिकेशन कम होती चली
[27:40]गई तो ऑटोमेटिकली मोहब्बत कम होनी शुरू हो जाएगी। तवज्जो कम होनी
[27:43]शुरू हो जाएगी। फिर उनके दिलों में एक दूसरे के लिए अट्रैक्शन
[27:46]नहीं होगी। और फिर ये फिर आहिस्ताआहिस्ता इनके ये कहीं और किसी
[27:50]और ट्रैक पे खुदा ना खास्ता चले जाएंगे। तो हमेशा अपने कम्युनिकेशन
[27:53]को जारी रखें, सारी रखें, क्लियर रखें, सिंपल रखें और दिल की
[28:00]बात कहें एक दूसरे से। मौका देख, महल देखें, उसके हिसाब से
[28:03]बात करें। तो ये रिश्ते मजबूत होंगे और अच्छी तरह डेवप होंगे।
[28:07]कम्युनिकेशन इसलिए ना करें कि आप एक दूसरे को एक दूसरे पर
[28:12]बढ़त ही दिखाना चाहते हो। या अपने आप को साबित करना चाहते
[28:15]हो कि मैं सामने वाले को कन्वस कर सकता हूं। मैं सामने
[28:17]वाले को बता सकता हूं। मैं आपसे ज्यादा जानता हूं या जानती
[28:20]हूं या मैं आपसे बेहतर हूं या मैं आपसे बेहतर हूं। ये
[28:21]करने की जरूरत नहीं है। जो नबी अकरम सल्लल् की जात है
[28:27]वो वो ये हमें बताती है कि आप पोलाइट थे। आप हंबल
[28:30]थे। आप काइंड थे। तभी तो लोग आपसे मोहब्बत करते थे। चाहे
[28:33]वो कोई भी हो। तो इसीलिए मियां बीवी के दरमियान जो है
[28:37]ना वो जो रंजिशें आजकल बढ़ रही है, मुश्किलात आजकल बढ़ रही
[28:41]है, टेंशन बढ़ रही है, उसकी वजह ये कि बदकलामी हो रही
[28:43]है, बदतमीजी हो रही है, झगड़े कर रहे हैं। और जिसे कहते
[28:47]हैं कि एक दूसरे की डिसिस्पेक्ट कर रहे हैं। जिसके नतीजे में
[28:50]फिर ये सास से भी इसी तरह होता है। सास को भी
[28:53]जवाब दे रहे हैं। अगर आपको कोई चीज नहीं समझ में आ
[28:56]रही तो आप उस वक्त खामोश हो जाए। लेकिन आप भी पलट
[28:58]कर जवाब देती है। फिर वो कहती है ये तो गर्ल की
[29:01]बच्ची है। मुझे जवाब दे रही है। फिर वो और इस तरह
[29:02]टेंशन बढ़ती है घर में। ये एक चीज और यहां पे एक
[29:08]चीज और यहां पर है वो छोटी छोटी बातें जो बड़ी बन
[29:13]जाती है वो शायद हमारे जर्फ और हमारा जो यानी क्या कहते
[29:16]हैं वसते सदर होता है यानी जिसमें कहते हैं कि हमारा बड़ा
[29:21]दिल हम जो है नहीं रखते हैं वहां पर और वो ये
[29:25]कि छोटी-छोटी बातों को हम दरगुजर नहीं करते हैं। हम ज़हरन एक
[29:28]बहुत बड़ी बात जो सास बहू वाले रिश्ते में देखने को मिलती
[29:32]है कि वो छोटी सी कोई बात हो गई है तो उसको
[29:35]सास ने उसको एक बड़ा इशू बना लिया है या बहू ने
[29:37]उसको एक बड़ा इशू बना के उसको मुंतकिल कर दिया है अपने
[29:42]मायके की तरफ जी ये आपने बात बहुतसी कही है जी बहुत
[29:45]असासी बात आपने कही है यहां पे के हम दरगुजर नहीं कर
[29:50]पाते हमारी जरफियत जो है ना वो कैपेसिटी हमारी बहुत कम हो
[29:54]गई है एक बात तो ये बिल्कुल आपने बिल्कुल अच्छी कही है
[29:56]के हमें ये देखना पड़ेगा कि हम कितना बर्दाश्त का मादा रखते
[30:00]हैं अपने अंदर। कितनी कुत रखते हैं। कितनी वसत रखते हैं अपने
[30:02]अंदर कि हम जज कर सके चीजों को अब्सॉर्ब कर सके ना
[30:07]कि हम रिएक्ट करें। फौरन रिएक्शन दे और फिर उसके उसके असरात
[30:10]भी मनफी आए जिंदगी में क्योंकि दो चीजें होती है। एक दफा
[30:15]रिएक्ट करना होता है और एक दफा रिस्पोंड करना होता है। तो
[30:19]जो लोग रिएक्ट करते हैं फौरन वो हमेशा नेगेटिव फिर वो पशेमान
[30:22]होते हैं। लेकिन जो लोग रिसोंड करते हैं सोच समझ के जवाब
[30:26]देते हैं। प्लान करके जवाब देते हैं वो ज्यादातर कामयाब होते हैं।
[30:30]लेकिन यहां पे ये बात भी बहुत जरूरी है कि जो लोग
[30:34]जर्फ कम रखते हैं ना वो ज्यादातर परेशान ही रहते हैं। और
[30:36]इंसान को अल्लाह ताला से दुआ मांगनी चाहिए कि इंसान जो है
[30:41]ना अपनी जफियत को बढ़ाए। खुदा उसकी मदद करे कि उसकी बढ़े
[30:43]क्योंकि आजकल चैलेंजेस बहुत ज्यादा है। परेशानी बहुत ज्यादा है लोगों को।
[30:46]देख अब इकोनमिकल क्राइसिस पूरी दुनिया में है। फिर ये वॉर के
[30:52]टेंशन अलग है। जॉब के जो है वो स्केसिटी हो चुकी है।
[30:56]हर तरह के परेशानियां है जिंदगी में। प्लस हम अपनी घर के
[30:59]अंदर भी अगर परेशानी रखेंगे तो फिर हम किधर जाएंगे?
[31:02]तो चाहे वो सास हो या बहू हो या बेटा हो या
[31:05]ससुर हो कोई भी हो यह सबको मिलकर सोचना चाहिए कि हम
[31:09]लोग जो हमारा एनवायरमेंट है ना इस वक्त बहुत खतरनाक हुआ हुआ
[31:13]है कम से कम घर में तो हम सुकून से रहे एक
[31:16]दूसरे को सुकून से रहने दे ताकि हम अच्छी जिंदगी गुजार सके
[31:17]जिसके लिए हम लोग आए फिर हम बच्चों को क्या परवरिश करेंगे
[31:21]आप मुझे बताएं आप ऐसे घर में कैसे बच्चे की परवरिश कर
[31:23]सकते हैं जहां पोलशन हो ज पर हर लड़ाई झगड़ा होता हो
[31:27]बच्चे के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाए वहां पे तो कैसे
[31:30]करेंगे हम बच्चे की आज हमारी सोसाइट का सबसे बड़ा मसला यही
[31:32]है। बच्चे जो नंबर वन कंप्लेन करते हैं वो यही करते हैं
[31:37]कि मां बाप की तवज्जो हमारी तरफ है ही नहीं। मां बाप
[31:39]आपस में ही लड़ रहे हैं। बिल्कुल खुद आपस में लड़े गए।
[31:43]ये बच्चे उनको अपना रोल मॉडल ही नहीं मानते। आप सोचें कितनी
[31:45]अफसोस की बात है कि खुदा आलम ने मां-बाप को रोल मॉडल
[31:48]बनाया पहला और वो बच्चे अपने मां-बाप को रोल मॉडल ही नहीं
[31:50]मानते। अब उनको आइडियालाइज नहीं करते हो। तो फिर कहां जाएगा ये
[31:55]माशरा?
[31:56]10 साल बाद 20 साल बाद ये जो नस्ल ऊपर आएगी ये
[31:59]किधर जाएगी?
[31:58]इन सबसे बढ़ के आखरी बात मैं कहना चाहता हूं कि वक्त
[32:02]ज्यादा हो गया है। हम इसको कंक्लूड करेंगे अपनी पूरी बात को।
[32:07]अजीम भाई एक जो सबसे अहम बात है ये कि ये रिश्ते
[32:09]अच्छे होंगे तो माशरा अच्छा होगा और इमाम जमाना जल्लाह ताला शरीफ
[32:19]के ज़हूर के लिए एक अच्छा माशरा दरकार है। और अगर हमारी
[32:21]सोसाइटी अच्छी नहीं होगी और सोसाइटी की जो बुनियाद है वो घर
[32:28]होते हैं, खानदान होते हैं। तो अगर हम आपस में झगड़ रहे
[32:30]हैं। आपस में अपने घर का एनवायरमेंट खराब किए हुए हैं। झगड़ा
[32:36]कर रहे हैं। सास बहू ननंद ससुर दामाद ये सारी चीजें चल
[32:41]रही है। तो इसका जो इफेक्ट है वो पड़ रहा है जोहूर
[32:43]के ऊपर। इसको इस पॉइंट ऑफ व्यू से अगर हम देखें के
[32:46]इसका इफेक्ट जूर के ऊपर पड़ रहा है और मौला ने अल्लाह
[32:52]ने भी फरमाया है और रसूल ने भी फरमाया है मौला उसूल
[32:57]है ये के जो ज़हूर है इमाम का वो एक तरफ तो
[33:01]अल्लाह की मसलहत और अल्लाह के इल्म के ऊपर मुनासिर है दूसरी
[33:03]तरफ से वो हमारे ऊपर भी मुनसिर है के हमारा भी किरदार
[33:07]ज़हूर में है कि हम जितनी जल्दी तैयार हो जाएंगे ज़हूर के
[33:10]लिए उतनी जल्दी मौला का ज़हूर हो जाएगा मौला के में ताखर
[33:17]वो हमारा घरेलू इलाफात है। हो सकता है। एक एक जो उसका
[33:24]है यही है जी जी बहुत अच्छी बात आपने कही है क्योंकि
[33:26]सोसाइटी जो वजूद में आती है वो घरों से आती है ना
[33:31]मुख्तलिफ घर में के अफराद जमा होते हैं तो सोसाइटी बनती है
[33:36]और इमाम जब इंशा्लाह जरूर फरमाएंगे तो क्या करेंगे वो वो सबसे
[33:38]पहले अदल को कायम करेंगे ना तमाम अंबिया जो आए उन्होंने अद
[33:43]का पैगाम दिया उनका एक बड़ा पैगाम जो था वो सोसाइटी में
[33:45]अद लेकर आना था क्योंकि जुल्म होता था सोसाइटी में नबी अकरम
[33:49]सल्लम जब आए तो उन्होंने शर्क के मुकाबले में तौहीद को लेकर
[33:52]आए। तौहीद लोगों को तौहीद की तरफ तौहीद जिंदगी बनाई और फिर
[33:57]अद की दावत दी और यही इमाम अली के दौर में यही
[34:03]तमाम अंबिया के सलाम के दौर में सबने अद के लिए काम
[34:04]किया अल के कयाम के लिए और इमाम का जब जहूर होगा
[34:07]तो वो अद कायम करेंगे तो सवाल ये है कि हम कहा
[34:10]जाएंगे फिर ये फ जो अपने घर में अद नहीं कर सकती
[34:14]ये एहसान नहीं कर सकते एक दूसरे पर ये हमारी फ जाएगी
[34:18]किधर क्या इमाम के आानसान में हमारा शुमार होगा काम ही नहीं
[34:20]आ सकते इमाम के बिल्कुल इमाम नहीं आएंगे नहीं आ सकते ना
[34:25]इमाम कहेंगे कि भाई अब तुमने अपने घर में अल नहीं किया
[34:27]तुमने अपने बीवी बच्चों के साथ अल नहीं किया तो तुम मेरे
[34:30]टीम में कहां से आ रहे हो मैं तो अल कर तो
[34:32]सबसे पहले तो हमारी शामत आ जाएगी क्या आप अल कर नहीं
[34:36]रहे आप हमारी टीम में नहीं आ सकते बल्कि आप जुल्म कर
[34:40]रहे तो अब आप जाए उस तरफ तो हमें तो इसीलिए देखिए
[34:43]हर जुम्मे के खुदबे में इंसान को दावत दी जाती है हर
[34:46]एक को हर प्रोग्राम में दावत दी जाती है तकवा की तकवा
[34:50]है ही नावा यानी आप अद करते हैं तभी तो आप मुकी
[34:54]बनते अगर आप अद ही नहीं करेंगे तो मुकी कैसे बनेंगे और
[34:57]दीन भी आपको अद इंसाफ की दावत देता है ताु की दावत
[35:02]देता है तो ये हमें तो बहुत बेसिक फंडामेंटल चीज है अगर
[35:07]यही हम घर में नहीं कर पाएंगे यानी तालीम तरबियत की कमी
[35:11]है दीन के शूर की कमी है और प्रैक्टिकल रोल मॉडल्स की
[35:15]कमी है हमें रोल मॉडल्स देने हमें मुरब्बी देने हैं लोगों ताकि
[35:18]लोग देखे कि हां ये लोग भी तो है अच्छी जिंदगी गुजार
[35:22]रहे हैं। हमारी सोसाइटी का एक और मसला ये भी है कि
[35:26]हम अच्छे लोगों को हाईलाइट ही नहीं कर पाते कि जिसको देख
[35:27]के हमारी नई नस्ल जो है ना उनको अपना रोल मॉडल बनाए
[35:32]ना हमने अपने आईमा को इस तरह पेश किया है ना हमने
[35:37]अपने जो खवातीन हमारे बैत सलाम की ना हमें उनको इस तरह
[35:39]से रोल मॉडल बना के पेश किया है हमने कोशिश जितनी भी
[35:42]की है वो कम है बहुत ज्यादा हमें कोशिश करने की जरूरत
[35:46]है ताकि हम उनकी पर्सनालिटी को समझे और हमारी खवातीन उनके किरदार
[35:50]को अडॉप करें मजलिस जिसमें हम सुनते भी है रोते भी है
[35:55]लेकिन बाहर निकल के अमल ही नहीं करते सारी बातें तो हो
[35:58]जाती है मजालिस में और इबादत में हर जगह लेकिन अमल के
[36:04]मैदान में हम बहुत-ब शुक्रिया साहब बहुत अच्छी गुफ्तगू चल रही है
[36:08]लेकिन वक्त हमारा जो है वो कम है तो इसलिए हमको अपने
[36:12]गुफ्तगू को समेटना पड़ेगा और इजाजत हम लेंगे अपने जो नाजरीन है
[36:15]उनसे बस एक यही आखरी नुक्ता जो था के हमारे घर का
[36:20]इलाफ हमारे लड़ाई झगड़े आपस के बहू टेंशन ये जबरदस्ती की का
[36:25]जो है वो अना और ईगो का इस्तेमाल करना हो सकता है
[36:27]कि हमारे इमाम की नाराजगी का सबब बने और उनके जोर में
[36:31]ताखिर का सबब बने ये सोचने का मकाम है अपने घर का
[36:36]एनवायरमेंट अच्छा रखें मौला को राजी करें और हम अपने मौला के
[36:38]जोहूर में किरदार अदा कर सकते हैं वो किरदार अपने इलाफात लड़ाई
[36:44]झगड़े और छोटी छोटी बातों को दरगजर करके अदा कर सकते हैं
[36:47]बहुत शुक्रिया मौलाना साहब इंशा्लाह नाजरीन को हमारा प्रोग्राम पसंद आया होगा
[36:51]एक नए किसी और टॉपिक के साथ फैमिली इश को लेके आपकी
[36:55]खिदमत में हम हाजिर होंगे। तब तक के लिए खुदा हाफ [संगीत]
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