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Maad K Asrat Part 02 | Brother Mubashir Zaidi
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Record date: 03 April 2011 - معاد کے اثرات حصہ دوم
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2011 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:04]हाउस मिलना है ये मैंने शाहिद ऑन योर अज़ीम बिस्मिल्लाह रहमान रहीम
[0:10]अल्हम्दुलिल्लाह [संगीत] [संगीत] [संगीत] हेलो सैयां मोहब्बत [संगीत] उसके इंसानी जिंदगी पर
[1:54]असरत के हवाले से आज हमारी दूसरी और आपने गुफ्तगू है इससे
[1:57]पहले जिस हफ्ते आपके दो पहले आपकी खिदमत में सिलसिले की पहली
[2:05]गुफ्तगू थी और उसके कुछ नकाब द जो आपके सामने बयान किए
[2:10]द मायावती इंसान का हिस्सा हैरी जिंदगी के बाद इस दुनिया की
[2:16]जिंदगी के बाद खुदा और आलम के जहां नहीं दिया अपनी हकीकत
[2:18]के जाने पलटना अगर ये नज़र ये इंसान के जहां में हो
[2:24]तो इस नज़रिया के ईमान के इंसानी जिंदगी भर क्या असरत होते
[2:28]इसके हवाले से रजिस्टर गुफ्तगू में अपने आप के सामने चंद्रकांत बयान
[2:35]किए द यानी इंसान की तबीयत के लिए बहुत हम आमिल है
[2:37]अगर इंसान के जहां में हाथ का जिक्र हो और उसके दिल
[2:42]में मात पर ईमान मेरे क़यामत आणि है और क़यामत के अंदर
[2:48]इंसान का हिसाब किताब होना तबीयत के लिए बहुत हम चीज थी
[2:54]तबीयत के बाद खुद इंसान को मायूसी से निकलने में आग पर
[2:56]ईमान हम गिरता रहता है यह हत्या इंसान अपने छोटे से भी
[3:01]अमल को फिर अगर माता मल्होत्र तो उसको behaisiyat नहीं समझेगा क्योंकि
[3:05]उसे छोटा सा भी अमल जो है वो क़यामत के दिन apantija
[3:10]देगा और इसी तरह अगर मंदिर से देखा जाए तो manafiya तो
[3:12]इंसान उसे छोटे से भी मनफी अमल को करते हुए घबराएगी की
[3:18]बैरन क़यामत के दिन मुझे इसका हिसाब किताब देना है जैसे की
[3:22]चंद उखाड़ के जो बुद्धिस्ट गुफ्तगू में आपके सामने बयान किए द
[3:25]आज उसी सिलसिले को आगे बढ़ते हैं और आपके इंसानी जिंदगी भर
[3:32]जो असरत ईमान की अगर इंसान का जहां महक काबुल करें और
[3:38]उसके बाद काबुल करने के बाद उसका दिल उसे पर ईमान लिया
[3:40]है तो इंसान की जिंदगी में क्या बेहतरीन महंत यानी इंसान का
[3:54]लैंड यानी पलटना सूरा आराम की आयत है jahiran 29 में आयत
[3:59]है और उसमें आलम ने इरशाद फरमाया की तमाम बड़ा अकुम तो
[4:03]जिस तरफ खुदा बंदे आलम ने तुम को सल्फ किया है तुम्हारी
[4:10]इब्तिदा की बढ़ा हम भी जुमला पढ़ते हैं इमाम अली सलाम ने
[4:15]हमें जुमला से khayakikat खुदा की इंसानों से मोहब्बत की जानिब विचार
[4:20]है दुआ जुमले में वो ये है या मैन जिसने मेरी khilfat
[4:30]का आगाज किया बड़ा कहते हैं एडम से किसी चीज को वजूद
[4:34]मिलाया जाए यानी जो जिस पहले ना हो कहीं उसका कोई वजूद
[4:39]ना हो कहीं एक्जिस्ट ना करती हो चीज उसके बाद आदम से
[4:45]उसको मौजूद दिया जाए उसके अजब को तरतीब दिया जाए ये पता
[4:47]है अरबी के अंदर मौला अली ने किया रे खुदा से कहा
[4:51]यमन badkhati है वो खुदा जिसने मेरी khilkat का आगाज किया यानी
[4:57]ऐसा नहीं था की मैं मुख्तलिफ अजीज की सूरत में कहीं मौजूद
[4:59]था तूने मुझे असेंबल कर दिया ऐसा नहीं था यानी मैं कुछ
[5:04]भी नहीं था तब हम बता कल की है वो खुदा की
[5:09]जिसने मुझे आवाज़ किया कुछ भी नहीं था कहीं भी नहीं था
[5:11]कोई taskira नहीं था मेरा मेरे कोई आजा नहीं द की जो
[5:15]तूने उठा के जोड़ दिए नहीं हर चीज की दिला तो नहीं
[5:19]की यह बताएंगे मोहब्बत की जानिब दा लिल है बयान की है
[5:24]आयात सूरा अरब क्या है इसके अंदर की kamadakum जिसने तुम्हें बड़ा
[5:27]किया है लेकिन तुम कुछ भी नहीं द तुम्हें इस दुनिया में
[5:32]लाया गया है tauuun तो मैं एकदम paltaye रह जाओगे दादा जब
[5:34]paltaye जाओगे तो इस बात पे एतराज ना करो की जब हम
[5:39]मार जाएंगे तुम्हारी हड्डियों का क्या होगा जब हम मार जाएंगे तो
[5:43]हमें कौन paltayega जिस खुदा ने तुम्हारी इतर की है यानी जब
[5:46]तुम कुछ नहीं द खुदा इस आयत के अंदर और इस जैसी
[5:51]बेशुमार आए द जिसमें इंसानी जहां को मोटा बच्चे कर रहा है
[5:56]वो क्या है की जब लोगों ने एतराज की हम आज का
[5:56]ताकि जो आगे नबी ने बात की के इंसानों ने पलटना भी
[6:01]है क़यामत भी आणि है हम तो देखते हैं की इंसान मार
[6:04]जाता है मरने के बाद गर्ल्स साद जाते हैं इसकी हड्डियां खत्म
[6:06]हो जाती हैं हाथ में मिल जाता है यह इंसान कैसे ज़िंदा
[6:11]होगा की तुम जब ये बयान करते हो गर्ल्स साद जाएंगे खाद
[6:19]में मिल जाएंगे तो कैसे उठा जाएंगे तो वह क्यों नहीं याद
[6:24]करता है की जब तुम कुछ नहीं द तो हमें तुम्हें वो
[6:28]जो दी आया किसी चीज को आदम से वजूद देना एडम से
[6:34]वजूद देना कोई चीज मौजूद हो बिखर गई हो उसका जो बहुत
[6:38]आसान है तुम्हारा एतराज दूसरी तरफ है यानी तुम का रहे हो
[6:43]की जब हम बिखर जाएंगे हमारे अक्सर खाद में भी करेगा तो
[6:47]डाल जिसने तुम्हें एडम से वो जो दिया वही का रहा है
[6:50]मैं तुम्हें पढ़ता हूं बस अगर तुम्हें एतराज करना तो अपनी khild
[6:54]पे ए रहा है उसको कोई एतराज नहीं कर सकते पता नहीं
[6:56]कहां बताया तुम जिसने तुम्हारी इब्तिदा हमने की है आगाज हमने की
[7:00]है हमें पता है की किस तरह तुम्हें हमने बनाया है क्या
[7:02]करेंगे ताऊ तुम्हें paltaenge तुम वापस यानी हमारे इस दुनिया के बाद
[7:08]सिलसिला बाकी रहेगा मैन हम इस बात की तरफ यकीन की तरफ
[7:10]लेके जाती है हाथ की बेस की हम फना होने वाले एक
[7:15]हदीस में भी मिलता है की खोली तुम वफा के लिए बाकी
[7:22]रहने के लिए खलफ किए गए हो तुम fanaay के लिए इंसान
[7:26]के बारे में बयान है बोले तुम लिल बाबा के लिए नहीं
[7:32]तो हमेशा रहोगे ये दुनिया बहुत तेज है इस दुनिया से दूसरी
[7:39]दुनिया तक जाना है इसीलिए हमारी यहां इमल अहमद की बेस को
[7:44]बहुत अहमियत थी मैंने पिछले गुफ्तगू में अर्ज किया था की जब
[7:48]आप अंबिया की talimaat का मुशायरा farmaengi उनका mutaliya फरमाएंगे आपको नज़र
[7:53]आएगा की तौहीद की बहस के साथ-साथ जो चीज है वो क्या
[7:56]है महक तौहीद का जिक्र उसके साथ तौहीद का जिक्र उसके साथ
[7:59]मौत और क़यामत और उसके लिए पलटना हमने मैं अर्ज किया था
[8:04]की जुमा इन्ना लीला अल्लाह की जानिब से यानी तौहीद का बयान
[8:09]है वो खुदा है इस कायनात का मलिक खुदा है इस कायनात
[8:10]का खाली खुदाई ने इस पुरी कायनात में हम सब उसकी तरफ
[8:14]से पहले राज्यों की तरफ paltaye जाएंगे उसी की तरफ चले जाएंगे
[8:21]हम वापस ज्यादा जब खुदा की तरफ से आए हो खुदा की
[8:26]तरफ जाएंगे तो फिर मौत से क्या घबरा इसीलिए अस्सलाम के मकतब
[8:28]में मौत को किस तरह से ताबीर किया गया ये दुनिया के
[8:32]किसी मकतब में नहीं मिलेगा आपको हमारे यहां मौत से खौफ होता
[8:35]है इंसानों को सलाम ने सिखाया की नहीं मौत से इंसान को
[8:40]खौफ नहीं होना चाहिए बल्कि अपने आमाल से खौफ होना चाहिए अपने
[8:46]आमाल इंसान को डरना चाहिए मौत कैसी है मौत के बारे में
[8:48]चल revayaten आपके सामने बयान करूं ताकि मौत से जो खौफ है
[8:52]हमें आज से जो हमें खौफ आता है इस मौत के खौफ
[8:55]से हमें निजात मिले अच्छा इमाम हुसैन अलैहिस सलाम ने कर्बला में
[9:08]देखो सामने दुश्मन का लश्कर है दुश्मन का लश्कर मजा एजाज़ है
[9:13]आमादा है उसके पास सारी चीज mayhesar हैं हमारे पास पनीर तादाद
[9:16]में लाश कर रहे हैं ये सारी उसके बाद इमाम ने फरमाया
[9:20]की अमल मऊ मौत क्या है बिल्ला पैन तेरा शिव एक पुल
[9:26]के मौत क्या है dhantera पोल है इन्होंने मौत एक पुल की
[9:29]माने क्या होगा फुल एक जगह से दूसरी जगह इंसान को गाड़ी
[9:35]का बोले गाड़ी को muntakil करता है इसीलिए हमारी यहां मौत के
[9:39]लिए क्लब के समान होता है इंतकाल का इंतकाल हो गया इंतकाल
[9:44]यानी muntakil हो गई कोई चीज इमेज यहां से उठा के इस
[9:48]फिल्म के बजाए उसे पिलर के पास रख दी जाए क्या कहेंगे
[9:49]इस मैच को हम टेल कर दिया गया यानी इसकी जगह चेंज
[9:53]हो गई लेकिन इसकी वजूद बाकी है इसीलिए हमारे यहां मौत के
[9:58]लिए कहा जाता है इंतकाल हो गया की उसकी जगह चेंज हो
[10:01]गई इस इंसान की जगह चेंज होगा यदि दो इंसान इस दुनिया
[10:03]में आयरन नजर नहीं आएगा लेकिन फना नहीं हुआ खत्म नहीं हुआ
[10:08]इसीलिए मामू सी चाहता हूं मेरे साथ मौत क्या है पक्का देख
[10:14]तुम इस दुनिया में मौत के जरिए क्या करोगे अपने इस पानी
[10:19]जिस्म से निजात पाओगे बाकी दुनिया की तरफ सफर करते जाओगे क्या
[10:24]करो सब्र करो उनके ऊपर सब्र करो हौसले से कम लो प्याज
[10:30]की शिद्दत है जंग की गर्मी है सब कुछ है लेकिन मौत
[10:34]तुम्हें खत्म नहीं करेगी या इसी तरह इमाम है रसूल अकरम इरशाद
[10:42]फरमाया मोमिन का यानी मौत के बारे में गुफ्तगू है इस दुनिया
[10:51]से जाना बिल्कुल [संगीत] मदार में तंग utaarik जगह पे होता है
[11:05]पेशाब उसके ऊपर ए रहा होता है अपनी हड्डियों को अपने हाथ
[11:10]पांव को ताजगी से अपने हाथ पांव को आजादी से चला भी
[11:15]नहीं पता एकदम मैं हूं तब शायद अब बाहर आता है तो
[11:21]यह बच्चा जब बाहर आता है शिकोहाबाद से क्या होता है वीडियो
[11:26]अज़ीज़ दुनिया में कायनात में कदम रखता है जब तक इस दुनिया
[11:28]नहीं आएगा क्या करेगा इस दुनिया की मतों को इस्तेमाल नहीं कर
[11:33]पाएगा इस दुनिया की मतों को देख नहीं पाएगा मसाला खुदा बंदे
[11:35]आलम ने इसको आंखें दी हैं मगर शिकवे मदार में इसकी आंखें
[11:40]कम नहीं करती खुदा बंदे आलम ने इसको समाज दी लेकिन ये
[11:45]samahat के इस्तेमाल के लिए इसको कहां ना जरूरी है दुनिया में
[11:47]इसकी समझ कम नहीं करेगी शिखा में मदार के अंदर उन्होंने कहां
[11:55]अपना अमली मज़ार पैदा कर पाएगी जब दुनिया में आएगा बस इस
[12:00]बच्चे की सलाह कर लेते हैं जब तक इस दुनिया में नहीं
[12:03]इस बच्चे की salaiyaten अमली बन नहीं पाएंगे रसूल अल्लाह ने रिश्ते
[12:13]जाना मरना इस दुनिया से जाना ऐसा ही है मदार से दुनिया
[12:18]में आना गाया हमारी और आपकी भी कुछ salahiyaten हैं जो इस
[12:22]दुनिया में महदूद हैं खुदा बांदा आलम ने एक मोमिन के अंदर
[12:26]salahiyate राखी ये जब तक क़यामत नहीं आएगी जब तक आज का
[12:31]मराठा नहीं होगा इंसान की वो सलाहियत है आशिकाना नहीं होंगी मोमिन
[12:34]की सलाहियत क्या है पता नहीं क्या है मोमिन तू इस दर्जे
[12:39]पर फ़ैज़ है की मैं खुदा तुझ को अपने जैसा बनाता हूं
[12:43]यानी मैं इरादा करता हूं चीज का क्या होता है वही इसे
[12:46]अमरोहा और उसका इरादा होता है उसका अमर होता है क्या होता
[12:50]है क्या हमने जन्नत में मोमिन की शान के बारे में ये
[12:56]नहीं सुना की मोमिन इरादा करेगा और चीज हाजिर हो जाएगी इसका
[13:00]मतलब है की सलाहियत मोमिन में मौजूद है इस salaiyat के इजहार
[13:03]कहां hogayamat में यानी जब इस दुनिया के बाद इंसान जाएगा बज
[13:09]इंसान ऐसे होंगे की इस दुनिया में भी इस सलाहियत का इजहार
[13:11]करने के काबिल होंगे बाद ऐसे अपराध होंगे मारो पाजी तब तबाही
[13:17]जो अल्लामा मोहम्मद हुसैन तब आता भाई के उस्ताद द परंपरा के
[13:21]इस दौर के जो है वो सबसे बड़ा इंसान गुजरे तो आपने
[13:33]सुना था भाई साहब ये अल्लामा तब तबाही बयान करते हैं की
[13:49]मैं एक मर्तबा अपने उस्ताद के साथ जब मैं जवान था और
[13:51]अपने उस्ताद के साथ मस्जिद ए कूफा में मैं दर हासिल किया
[13:56]करता था एक मर्तबा हम मस्जिद कूफा की पुष्ट पे बैठे हुए
[14:00]द उस्ताद यानी faazi ढाबा दो भाई जो इरफ़ान के बहुत बड़े
[14:03]उस्ताद द कहते हैं ये दर्द दे रहे द तो मैंने इतने
[14:07]में देखा के पीछे से एक सांप ए रहा है मोहम्मद से
[14:11]तब आता भाई जो खुद बहुत बड़े गूंज रहे हैं इनकी वाक्य
[14:15]किताबों में सर हैं पढ़ सकते हैं आप लोग कहते हैं की
[14:20]मैं सांप को देख के थोड़ा सा टेक जरा सांप ए रहा
[14:23]है भाई दोस्तों के भी और फलसफे के भी इन्होंने देखा साहब
[14:27]की जानिब और सांप को इशारा किया और कहा [संगीत] अपनी जगह
[14:39]पे ठहर गया [संगीत] वो कहते हैं हम लोग चले गए लेकिन
[14:52]मेरे जहां में ये चीज कड़कती रही क्योंकि उसे जमाने में शागिर
[14:55]द ताजा-ताजा ये पहुंचे द नजब और वहां पे उन्होंने shagirdeep तैयार
[14:58]की थी इतने ज्यादा अबाजी की इरफ़ान और दर्ज से वापस नहीं
[15:05]द कहते हैं मैं हैरान हुआ क्या हुआ ये मेरे उस्ताद ने
[15:10]क्या कम किया ये shockddabaji का कोई मरहला था या हकीकत में
[15:13]मेरे उस्ताद के बाद इतनी बड़ी ताकत है की उसे दिन मैं
[15:22]इसी shashapanch का शिकार था मुझसे हुआ नहीं रात गुजर गई अगले
[15:27]दिन मैं सुबह ही सुबह उसी जगह वापस पहुंचा की जहां बैठे
[15:29]हुए दर्ज पढ़ रहे द तो मैंने सोचा की अगर तो shobatebaji
[15:33]थी या उसकी कोई सिम थी तो फिर तो यकीन नहीं होगा
[15:38]की आप वहां पे वो चीज पड़ी भी नहीं होगी लेकिन अगर
[15:42]हकीकत में ऐसा हुआ है तो वहां उसकी याद होनी चाहिए कहते
[15:44]मैं सुबह-सुबह वहां पहुंचा मैंने जाके देखा की वो सांप वही पड़ा
[15:50]हुआ था मार चुका था पहले बहुत हैरान हुआ की उस्ताद के
[15:53]पास इतनी ताकत के बारे में उसने कहा मार जाओ और चीज
[16:00]मार गई कहते जब मेरा दोबारा वक्त आया भाई आए और आने
[16:05]के बाद उन्होंने पहला सवाल ये किया की हम पर यकीन ए
[16:09]गया या नहीं आया जब हमें पहचान गए हो या नहीं पहचाने
[16:13]क्यों क्योंकि इन्होंने की तरबियत कर दी थी इसलिए अपने पहचान करवाई
[16:17]तो इस दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जिनको इख्तियार दिया है
[16:22]की जो बहुत सारी चीजों को कुदरत रखते हैं किसी मखलूक को
[16:24]मौत देना इसी की जिंदगी ले लेना किसका तैयार है लेकिन अगर
[16:29]कोई इंसान अपना है बिल्कुल हर नहीं है की खुदा बांदा आलम
[16:34]अपने इख्तियार उसके हवाले कर दे ये इंसान इंसान [संगीत] गया के
[16:41]बहुत सी सलाहियत इंसान की ऐसी है जो इस दुनिया में आशिकाना
[16:46]नहीं हो पाएंगे यार इंसान की ज्यादा मत क़यामत के अंदर ये
[16:47]salahiyatein ऑस्कर होंगे रसूलुल्लाह की जिस तरह एक आता है मोमिन मौत
[16:54]के जरिए फटा दिया malajam देते हैं यानी इस दुनिया से इस
[16:57]महदूद दुनिया से वीडियो और इस दुनिया मौत का ही तो सब
[17:03]वो ठीक बदबूदार जगह से मसम बच्चा शिकार में मदार में खून
[17:11]में टर रहा होता है अगर आप बच्चे को शोर दें और
[17:13]उससे पूछेंगे तो आपने ऐड डालो और उसके बाद बाहर की दुनिया
[17:17]को देखो की तुम्हें वहां जाना है बच्चा वहां भर के लिए
[17:19]भी रुकने पे तैयार नहीं होगा [संगीत] क्यों तैयार होगा इस बात
[17:27]पे लेकिन उसे शहर नहीं है हमारी कैफियत भी शायद उसे बच्चे
[17:29]की मान्य दी हमेशा इतनी ज्यादा unsk क्यों रखते हैं मौत से
[17:46]इतनी ज्यादा मनोज क्यों हैं क्या वजह है उसका यही बयान किया
[17:48]जवाब में कहा की इसलिए की मैंने इस दुनिया में खुदा बंदे
[17:54]आलम से सिवाय छाई के कुछ दिखाई नहीं जबकि ये दुनिया हुआ
[17:56]है की जिसके बारे में खुदा ने क्या कहा की इस दुनिया
[18:01]की जिंदगी खेलों को है अल्लाह है लेकिन इस्लाम करोगे कुछ नहीं
[18:08]किया सिवाय अच्छा है की कुछ नहीं किया तो जिस दुनिया को
[18:12]उसने कहा है की असल हयात वो है तो उसे वीडियो में
[18:13]खुदा क्यों मे रूम करेगा इतनी चीज मौजूद है की इंसान का
[18:20]दिल खींचना है यहां रहने के लिए तो फिर इस दुनिया को
[18:21]तो खुदा ने कहा ही नहीं है याद आखिरत को कहा भाई
[18:25]ना मत डराला है [संगीत] तो बस जब इस दुनिया में इतना
[18:31]खुदा ने कर्म किया तो मैं aafrat में क्यों मायूस से इसलिए
[18:38]मैं जिंदगी में मौत महात्मा करते हैं यस इतना आईएमए [संगीत] में
[18:51]बाप मौत [संगीत] वो ही नींद आती है जो तुम हर रात
[19:03]को लेती हो जो इंसान को हर रात आती है मौत में
[19:11]और नींद में मौत की मौत नींद की मुद्दा होती है नींद
[19:18]थोड़े और वक्त के लिए 4 घंटे 5 घंटे 8 घंटे के
[19:23]लिए होती है मौत की मौत नींद मौत की बहन है या
[19:29]मतलब भाई है नींद और मौत एक ही काबिले से फरमाया की
[19:33]मौत कब मरहला तुम रोज तय कर रहे हो रोजाना जो तुम
[19:38]सो रहे हो भैया मौत की बात ही में चले गए तो
[19:40]मैं तो यकीन नहीं की तुम बुलवाना हो जाएगा तो ये तभी
[19:52]मुद्दत के लिए हो जाएगी नींद बस इसका जवाब कुछ भी नहीं
[19:54]होगा बहुत क्या है vimanjilate शरबत bardafi हुई धूप के दिन में
[20:13]ठंडा गिलास पानी अगर किसी को दे दिया जाए तो उसे ठंडे
[20:17]गिलास से इंसान को किस कदर नजर में ऐसा आती है शरीर
[20:21]गर्मी के अंदर उसको ठंडा पानी दिया जाए तो वो ठंडा पानी
[20:22]पी के कैसा सुकून आया महसूस करता है मौत मेरे लिए की
[20:27]शनि ताप्ती हुई धूप को शनि सूरज निकल रहा हो वाहित fahiyo
[20:38]शुगर होगा रसूल अल्लाह कहते हैं मेरे नजदीक मौत की अहमियत ये
[20:43]है मौत गवारा पानी की तरह इंसान इस दुनिया के अंदर गुनाहों
[20:46]की शिद्दत में खड़ा हुआ है इस गुनाहों इस दुनिया के अंदर
[20:51]इंसान खुदा की nafarmaniyon की शिद्दत में घिरा हुआ है इस नाफरमानी
[20:54]की कैपियट से खुदा ने की mansias से निजात का रास्ता क्या
[21:02]है जब मौत आएगी तो क्या होगा मैं वापस चला जाऊंगा बस
[21:04]मौत की ईमान अली मुस्सलाम की निगाह में ये अहमियत है [संगीत]
[21:11]यानी मौत से फाफड़ा रखो किस चीज से सफा रखो आवाज़ किया
[21:25]हुआ है कोई भी शख्स जो अमल रखता हो वो आवाज़ जगह
[21:28]से बर्बाद जगह जाने पर तैयार नहीं होगा तुमने इस दुनिया के
[21:33]घर को आबाद कर रखा है आखिर बर्बाद है तो मैं पता
[21:36]है की तुम्हारे लिए वहां कुछ नहीं है खुद जानते हो इसलिए
[21:37]डरते हो ओ की तरह होंगे की अगर मौत का एक वक्त
[21:45]मुहर्रम ना होता तो खुदा से मुलाकात के शौक में इनकी रूहें
[21:50]इनके जिस्मों से निकल चुकी है चुने दुनिया बात है तुम्हारा दिल
[21:55]लगता है आफत बर्बाद है इसलिए तुम्हारा दिल आफत नहीं खींचना बस
[21:59]हमें क्या कहा था की तैयारी करो इसीलिए रिवायत में आदि इसमें
[22:06]मशहूर हदीस जिसको हम और आप बचपन से सुनते पढ़ते चले हैं
[22:11]हमारी कोर्स की किताब में विधि इस्लामियत की सिलेबस में दुनिया mazraatula
[22:16]क्या है आखिरत की खेती खेती का क्या दिन आता है जब
[22:28]फसल कट्टी है अखरत में इंसान क्या करेगा अपनी फसल कटेगा अब
[22:35]ये आगा [संगीत] तारीफ है इस्लाम में या तारीफ में इन तारीफ
[22:44]इंसानियत में उनका बाप क्या है की वो गुलाम द एक शख्स
[22:50]के उनका जो मलिक था उनके मलिक ने उससे कहा की दयालु
[22:55]मैन मैं ये चाहता हूं की तुम इस मुर्दाबाद तिल की फसल
[22:57]लगाओ दिल की फसल लगाओगे तो हमें अच्छा खास फायदा होगा जहां
[23:02]पे लुकमान अपने आमाल के जरिए अपने hakimana कामों के जरिए से
[23:08]चीजों की जानिब तवज्जो दिलवा देते द की फसल लगा दूंगा और
[23:13]उसके बाद मौका तिल के बाद लगा दी [संगीत] खेत में आया
[23:23]फसल के पास आया अब जब उसने आके देखा उसने देखा की
[23:28]यहां तो जो की फसल खड़ी है उसने जनाब लुकमान से कहा
[23:31]की लुकमान तुमने जो की फसल क्यों लगाई कहां मैंने इसलिए जॉब
[23:38]के फसल लगाई की हम जॉकी फसल लगा देते हैं लेकिन काटेंगे
[23:43]तिल जोर लगाया हुआ है लोकमान्य का मलिक मैंने ये चीज आपसे
[23:57]तो सीखी है [संगीत] मैंने आपसे ये सिखाया [संगीत] की लैटिनो का
[24:08]मल खा जाते हैं उसके बाद कहते हैं की मैं जन्नत हूं
[24:11]अगर आप इतने तमाम बुराइयों के बावजूद आपकी हरि हो सकती है
[24:17]तो मैंने सोचा की जॉब की फसल में तिल की फसल बन
[24:22]सकती यानी अपने हाकिमान है गोदाम से समझा दिया पैसा होगा नहीं
[24:24][संगीत] दूसरे का हक कर लेंगे घरवालों के साथ बाद एक लाख
[24:31]ही कर जाएं सब कुछ कर जाएं उसके बाद बोले नहीं मैं
[24:34]जन्नती हूं मैं जन्नत में जाऊंगा अगर आपकी इसका मतलब ऐसा नहीं
[24:42]होगा की खेती है यानी जो यहां लगाओगे वो काटोगे यहां पर
[24:48]dikhlaafi के बीच बॉय आखिरी में देख लेट के बीच काटेंगे यहां
[24:53]हुस्न हक ला उसने अखलाक के मुताबिक का बी boyenge फसल लगाएंगे
[25:02]आखिरत में खुदा ने आलम उन लोगों के साथ मशहूर करेगा जिन्होंने
[25:04]यतीम की परवरिश की होगी कौन हज़रत करने वाला कौन है आलम
[25:11]या जीत का यतीम हमने तुमको यकीन पाया और हमने पहना दी
[25:15]किसकी पनाह दी खुदा ने इस मोहम्मद को काबू तालिब की बात
[25:18]जो बोओगे वो काटोगे बस आज के ऊपर अगर इस तरह इंसान
[25:23]के यकीन ए जाए की मैं जो करूंगा वो पाऊंगा तो फिर
[25:29]के हमारे तमाम अगर हम कुछ ना करें पता तो इसी एक
[25:33]हदीस को अपने लिए दस्तूर बना लें इन बना लेंगे जिसको हमने
[25:39]बचपन में पढ़ा सिलेबस में पढ़ा इम्तिहान दिया लेकिन इस पे अमल
[25:44]नहीं कर पाए अगर इसी हदीस को अपने का भी हमारे लिए
[25:47]गिरामी बड़ी-बड़ी गुफ्तगू बड़ी बड़ी तकरीरें कम नहीं आती छोटे से जुमले
[25:54]होते हैं जो इंसान पसंद कर देते हैं वसूली अकरम की खिदमत
[25:56]में एक सेहरा का रहने वाला एक अरब आया जिसको हम बदबू
[26:00]कहते हैं मगर उसे जमाने में बदबू जो शहर से बाहर आकर
[26:06]के ऐतबार से उसको कहते हैं आए और आने के बाद बहुत
[26:12]मुझे जो पैसों होता है यानी करीब इसकी ता लब जुमला काफी
[26:20]है लेकिन किसके लिए जो समझने में तैयार हो उसके लिए आने
[26:24]के बाद कहने लगा की मुझको में ले जाओ इसको कुरान की
[26:34]तालीम दो इसको कुरान की आयतें सिखाओ वो सहाबी उसे उसके बाद
[26:45]जब पहुंचे इस आयत के अंदर जरूरत इन करियर जिस किसी ने
[26:52]ज़रा बराबर दी की होगी जरूरत बराबर नहीं की क्योंकि उसको देखेगा
[27:00]उसे पाएगा हमें यह अमल मिस्कल असर रतन शहर बराबर बुराई की
[27:03]होगी सर किया होगा फसाद किया होगा उसको पाएगा उसे देखेगा जब
[27:08]यह साबिर रसूल जिस सुर को सीखते हुए इस आयत पर पहुंचे
[27:12]उसे अरब शख्स ने बंधु ने जो सेहरा गया था बजाय ज्यादा
[27:17]पढ़ा लिखा भी नहीं था करके कहा रुको ये जो तुमने भी
[27:23]आयत पढ़ी मतलब पड़ा ये वही है यानी खुदा की जानिब से
[27:26]आया पैगाम इस साबिर रसूल ने कहा मैंने अब तक तुम्हें जो
[27:29]कुछ भी सिखाया वो वो था की जो वही थी मोहम्मद मुस्तफा
[27:33]भी पैगाम नाजिल हुआ ये आया नाजिल हुई है कहा ये वही
[27:37]का पैगाम आयनिक खुदा बांदा आलम ने पैगाम दिया है ये कहां
[27:39]पता नहीं दी है यह सराय शेफ बैट्स जिसको हम कहें की
[27:48]गवार जल अनपढ़ इस चश ने इस सहाबी से का बस मुझे
[27:49]मस्जिद कुछ नहीं सीखना मैंने अपना दश ले लिया की कहा और
[27:56]उठाके चला गया रसूल अल्लाह की खिदमत में आए रसूल अल्लाह ने
[28:00]पूछा भाई कैसा रहा सहाबी रसूल ने रसूल अल्लाह से अल्लाह के
[28:05]रसूल ये आने वाला शख्स बहुत कम हिम्मत था हौसला नहीं था
[28:08]इसके अंदर कुछ सीखने का रस लेने का क्यों क्यों नहीं सीखने
[28:13]का वास्ता था कहा मैंने इसको सिर्फ खानी चाहिए उसमें जब मैं
[28:16]इस आयत के ऊपर पहुंचा वो मैं यहां अमल मेस्कल जरूरत इन
[28:20]खैरियत रहा हूं मैं या अमल मिस्कल शर्तें shariyara मैंने जब ये
[28:26]सुनाई उसने मुझसे इसी तरह पूछा उसके बाद उठ के चला गया
[28:28]जुमला suniyega वसूल अकरम ने कहा की राजा ए पप्पी हान तुम
[28:34]जिसको का रहे हो की कम हौसला था बे हौसला था कम
[28:38]हिम्मत था कभी हिम्मत नहीं था इसी एक आयत से पक्की ही
[28:43]बन के लौट रहे हैं इस एक आयत ने इसको फकीर बना
[28:50]दिया अभी इंसान ऐसा लगता है मुद्दत लगता है तब जाकर पप्पी
[28:53]बनता है यानी takbur की सलाह यह तो उसके अंदर आती है
[28:57]सोच समझ दिन की मार्फत रसूल अल्लाह का रहे हैं इस एक
[29:01]आयत ने इसको फकीर बना दिया राजा ए fatihant किसके जुबान से
[29:04]रसूल अल्लाह की जबान मदर दिल लेके आया था अब जब उसने
[29:13]सुना की खुदा बंदे आलम की जिसने ये पैगाम नाजिल किया उसने
[29:16]ये वादा किया है जो बराबर अच्छाई करेगा वो देखेगा उसे पाएगा
[29:21]जरूर बराबर बुराई करेगा उसे देखिएगा पाएगा यहां नहीं इस दुनिया में
[29:24]मेरा कोई अमल जया होने वाला नहीं है मेरे लिए काफी चला
[29:27]गया रसूल अल्लाह ने कहा फोकट राजा बस मान के बारे में
[29:34]जरा सा यकीन यानी एक आयत के बराबर का यकीन इंसान को
[29:38]फकीर बना देता है ये मा आज का इंसानी जिंदगी पर असर
[29:45]है मात की याद का इंसानी जिंदगी भर असर एक आया टी
[29:55]का ये महादेव करती है हमारी जिंदगियां को mutabikil करते द बस
[30:08]आज आपके सामने जो गुफ्तगू बयान की इसको और मुख्तसर कर डन
[30:13]और उनकी कमी के पीछे नजर महाड इंसानी जिंदगी पर ऐसे एस्टर
[30:18]डालती है हाथ का एक tukraman की एक आयत के ऊपर यकीन
[30:20]इंसान को फकीर बना देता है यानी इंसान फिर मार्फत की मैन
[30:28]जिलें तो मार्फत की मार्फत के नूर में सफर तय करता है
[30:34]रसूल अल्लाह ने कहा की ये शख्स एक जुमले से 40 से
[30:37]निकल आया ये अरब आने वाला बदबू जिसको तुम बद्दू का रहे
[30:41]हो गवार का रहे हो मसान पद गए हो नहीं अब ये
[30:45]गवार मौत के ऊपर यकीन ना आने की बात का इल्म क्या
[30:49]करता है इमाम अली सलाम ने इरशाद फरमाया सबसे ज्यादा घाटी में
[30:55]है वह शख्स इंसानों में कौन manorajat दुनिया जो दुनिया पर राजी
[31:02]हो जाए किस चीज के बदले अपनी आखिरत के बदले duniyabi राजी
[31:08]हो जाए ये सबसे ज्यादा घाटे वाले हैं इंसान यानी हमारे साथ
[31:11]अंधे इमाम हुसैन शाहिद करना मामूली बना नहीं होते रह के बाद
[31:21]ली एक तरफ एवं हुसैन का अजीम होने एकदम किस चीज का
[31:26]फैसला किया रे की गंदम का जो नसीम ना हो उतना खसरे
[31:32]में वह इंसान सबसे ज्यादा दुनिया के बदले आखिरत को भेजते हैं
[31:39]अपनी दुनिया के बदले अपनी अखरत को अपने हाथ से छोड़ दे
[31:46]लाजमी हिस्सा ना बनाना इमाम अली कहते हैं इंसान घाटे में रहेगा
[31:50]जो आगरा की यानी तवज्जो बहन दोनों आपकी sahmaton को फिर तमाम
[32:01]करूंगा मैन की भैंस क्या करती है इमाम साथ में इरशाद फरमाया
[32:11]jikrul मौत मौत का जिक्र मा आज का जिक्र क्या करता है
[32:18]पहला गम यूं ही तो शाहबाद shahvaton को मिटा देते हैं की
[32:22]इंसानी जिंदगी में जो बहुत बड़ी शहादत में रुकावट है वो इंसान
[32:29]की हद से बड़ी है मसाई और मुश्किलात का शिकार है वो
[32:38]ये एक इंसान की शाहाबाद बड़ी है स्वत सिर्फ एक पास मानो
[32:42]में नहीं है ख्वाहिशात बजत अब आपको भेजा ख्वाहिशात हर चीज को
[32:47]अपने लिए पसंद करना शायद zikrul मौत की याद मौत का जिक्र
[33:09]मात की याद क्या करेगी यूमी तो शाहबाद शाहाबाद को मिटा देगी
[33:12]सहवाग को फना कर देगी जब शहबाज पाना हो जाएंगी इंसान का
[33:18]रास्ता तो बहुत सही हो जाएगा इंसान के रास्ते की जाने खुद
[33:20]बी खुद पदम बढ़ाने लगेगी इंसान जिंदगी भी हो डालेगा शाहबाद को
[33:29]कंट्रोल करें कंट्रोल में ना ये की इंसान शाहाबाद भी कंट्रोल में
[33:36]चला जाएगा कितने खाएगा इंसानी जिंदगी को तबाह करने वाली चीज शाहाबाद
[33:47]इन शाहबाद को इंसान कंट्रोल कर लेगा किस-किस जरिए मौत के खौफ
[33:53]मौत के जिक्र और मात की याद कैसे रही है दूसरा क्या
[33:58]कम करेगी मौत भैया गफलत की जड़ों को उखाड़ देगी सबसे बुनियादी
[34:05]तरीन mazamon तारी इंसानों के लिए वो गफलत है खुदा ने सूरा
[34:13]अरब में राफेल इंसानों को haiwano से पस्त करती है इस बस्ती
[34:17]से निकलने के लिए क्या कम करेगी मौत मौत हमें इस बस्ती
[34:21]से निकलेगा भाई जब इंसान मैन को याद करेगा की सोचेगा की
[34:30]मुझे इस दुनिया के बाद जिंदा रहना है मुझे मार के अपने
[34:34]तमाम आमाल का हिसाब किताब देना है तो पढ़े कोई गफलत के
[34:38]पर्दे है जाएंगे कहां पर इंसान कौन है जिसको कुरान में खुदा
[34:41]ने आलम haiwano से पेस्ट बराबर देते हैं सूरा अरब की आयतें
[34:47]69 आयत ने बयान किया के हमने इन इंसानों और जिन्होंने की
[34:50]अक्सरियत को जहन्नुम के लिए बनाया है यानी अक्सर इंसान और जानवरों
[34:53]जींद कहां जाएंगे जहन्नुम में क्यों जाएंगे यह पहले भी हम कर
[35:00]चुका हूं मैं आपके सामने इसलिए [संगीत] उन्होंने बेहद इनके पास जो
[35:12]है वो आंखें थी इन्होंने आंखों से देखने का कम नहीं लिया
[35:15]भला हूं azanulla यस मैं इनके पास कम द इन्होंने कानों से
[35:20]नहीं अब जब दिल से ईमान नहीं ले दिल के अंदर पाई
[35:24]तो दाखिल नहीं किया जब अपनी आंखों से देखने का कम दिया
[35:30]अपने कानों से सिखा कल [संगीत] हम अगर नहीं हवाई की तरह
[35:40]नहीं है बाल हो मजल है वैन से ज्यादा मस्त है यानी
[35:44]अगर किसी ना ले अगर कोई इंसान अपनी आंखों से वॉशरूम में
[35:48]होने वाली मुश्किलात को देखते हुए भी उन मुश्किलात के हाल के
[35:53]लिए कोशिश ना करें मास्टरी में मौजूद के buraton को देखने के
[35:56]बावजूद यह प्रथा चल ना करें अंबिया की talimaat का पैगाम सुनने
[36:01]के बावजूद अमल ना करें तो खुदा क्या कहता है बलम असल
[36:07]हवन अब जब इंसान हवन क्या हुआ खुदा ने कहा olaay kaumul
[36:10]गांव से लोग अगर इंसान हमेशा [संगीत] नामो लोग अभी सो रहे
[36:43]हैं इस अम्मा को इंटरव्यू जब मरेंगे तो बेडर होंगे मरने के
[36:48]बाद हो जाएगा जब हाथ बंद जाएंगे कफन के अंदर फिर होश
[36:53]आएगा जब जबान से या अल्लाह कहने की ताकत छीन ली जाएगी
[36:58]फिर अफसोस करेंगे की दुनिया में मुनाजात क्यों नहीं की जब हाथों
[37:01]से किसी यतीम की परवरिश करने की सलाह छीन ली जाएगी फिर
[37:05]अफसोस करेंगे की किसी पर्व यकीन सर पे दस्तक शरबत क्यों नहीं
[37:09]रखा था इंसान गफलत में मौत बेडर करेगी उसे बेदारी का कोई
[37:14]फायदा नहीं होगा इसीलिए [संगीत] मसानिया तो पे ए जाओगे अगर काफी
[37:27]लोग हवन से पस्त हो गाफिल नहीं हो तो इंसान [संगीत] क्या
[37:30]करेगा महाड की याद क्या करेगी इंसान की इंसानियत को बेकार करेगी
[37:35]तीसरा असर मौत की याद क्या करेगी [संगीत] इंसान को यकीन दिलाएगा
[37:48]मसाला खुदा बंदे आलम ने एक नौजवान से एक इंसान से वादा
[37:51]किया की देखो ना मैं हरम की जानिब निगाह मत डालो शहर
[37:56]आमीन निगम मत डालो नापाक निगम मत डालो किसी ना मैं रब
[38:00]के ऊपर अगर तुम इस निगाह से बचते हो खुदा वंदना क़यामत
[38:05]में तुम्हें अपना वादा करें अगर आज का खौफ होगा महाड की
[38:11]याद होगी इंसान को मौत का यकीन होगा की हान क़यामत आने
[38:13]और खुदा nandalam जज देगा इंसान क्या करेगा अपनी नापाक निगाह को
[38:18]रोकेगा [संगीत] खुदा के वादे पर इंसान का यकीन आएगा कल को
[38:22]धरस मिलेगी के हान खुदा ने मुझसे वादा किया है ये वादा
[38:27]पूरा करेगा क्योंकि मान है क्योंकि क़यामत है ऐसा नहीं है की
[38:32]मैं फना हो जाऊंगा खुदा के वादों के बारे में इंसान बता
[38:41]करती है याद है अगर किसी इंसान को खुदा के वादों पर
[38:42]यकीन ए जाए तो इंसान की जिंदगी बन गई आलम ने कुरान
[38:47]ए करीम के अंदर जहां आखिरत का जिक्र किया और शैतान और
[38:52]उसकी शैतानों का जिक्र किया वहां एक चीज बयान की वही बयान
[38:54]की की जब क़यामत आएगी तो इंसान शैतान को mulamad कर रहा
[38:57]होगा बुरा भला का रहा होगा अब जब इंसान शैतान को बुरा
[39:04]भला का रहा होगा तो शैतान पलट के जवाब देगा कहेगा फल
[39:06]तुल मुनि मुझको मलामत नहीं करो शैतान क्या आएगा किसके जवाब में
[39:13]जिसने शैतान के कहने पे अमल किया हो शैतान क्या है पलट
[39:17]लो मुनि मुझको बुलाया मत नहीं करो मुझे बुरा भला नहीं कहो
[39:20]क्या करूं अपने आप को बुरा भला करो अपनी मलामत करो अपने
[39:25]आप को जो का रहे हो यह सब तुम खुद द आगे
[39:29]बयान किया शैतान क्या कहेगा क्यों क्योंकि मैंने वक्त तुम्हें वास वास
[39:33]दिया था मेरे बसपा से पैमाना तुम नहीं किया था मैंने तुम्हें
[39:38]वादा दिया मैं कहां से इसको मिलना चाह रहा हूं की इंसान
[39:43]भी यकीन होगा तो खुदा के बाद हमें भरोसा करें नहीं किया
[39:49]उसके बाद तुमसे एक वादा खुदा ने किया एक वादा मैंने किया
[39:54]खुदा का वादा सच्चा था मेरा वादा झूठा था तुमने खुदा के
[39:57]सच्चे वाले को छोड़कर मेरे झूठे वाद अमल किया मतलब मैं तुम्हें
[40:01]झूठा वादा किया की तुम अभी ये गुनाह कर जाओ तौबा का
[40:05]मौका मिल जाएगा तुम्हारी मौत ए गई तुम्हें तौबा की तौफीक नहीं
[40:07]मिलेगी मजा आता है इस कम में देख लो कोई अर्ज नहीं
[40:13]है तुमने मेरे कहने पे अमल किया खुदा ने तुमसे वादा किया
[40:18]था इसके बदले आज जोड़ दूंगा मैं नहीं हूं तुम खुद को
[40:25]सुलावाड़ क्यों इसलिए कुरान की आयतें बयान कर रहा हूं तर्जुमा बयान
[40:31]कर रहा हूं इसलिए मेरा तुम पर कोई जोर नहीं चलता था
[40:35]मेरा तुम पे कोई जोर नहीं चलता था मेरा तुम्हारे को और
[40:41]एक मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ के कभी तुम्हें मजबूर नहीं किया ना
[40:46]मेरा शैतान क्या कहता है पर यकीन नहीं रखते द क्यों नहीं
[40:58]रखते द चुने तुमको याद नहीं करते द समझते द मैं आपके
[41:05]बारे में जानते द मैन को मानते नहीं द बिल्कुल उसी तरह
[41:10]जैसे एक चोर इस बात को जानता है की रिस्क देने वाला
[41:14]खुदा है फिर भी चोरी करता है जानता है की खुद मानता
[41:17]नहीं है [संगीत] जो मात की गुफ्तगू करते हैं मेरी तरह लेकिन
[41:22]आज के बारे में यकीन नहीं रखते अगर इंसान मैन इंसान खुदा
[41:30]के वादे पर मजबूत हो जाएगा उसका दिल खुदा के बड़ों पर
[41:34]यकीन ही हो जाएगा डीजे में क्या होगा शैतान के झूठे वादों
[41:37]से बचेगा ये इंसान जेस्टा का रास्ता यहां से खुद बहुत फरम
[41:41]हो जाएगा व्हाइट बहन कर रहा हूं वही यू नो इंसान की
[41:51]तबीयत को इंसान की मिजाज को याद क्या करेगी rafiyat बना देंगे
[42:01]यानी सखावत पाल भी इंसान से दूर हो जाएगी हमारी यहां अक्सर
[42:04]मसाइल अजी तो शाखावत है कल की वजह से बहरीन का इतना
[42:08]बड़ा मामला इस वक्त चल रहा है दुनिया के अंदर मजरत के
[42:12]साथ हत्या हमारी namajon में बहरीन के मोमिनो के लिए दुआ तक
[42:17]शामिल नहीं हो का रही है अभी हम jiddiyat के साथ अपने
[42:22]महरूम मैं है बहरीन में फंसे हुए भाइयों के लिए दुआ नहीं
[42:25]कर का रहे आप खुदा आंसू निकलने चाहिए बहरीन के महरूम के
[42:29]लिए मजदूर के लिए दुआ करते वक्त आंसू आने चाहिए यानी हमें
[42:34]ये तसव्वुर करना चाहिए की इस मस्जिद के चारों तरफ दुश्मन खड़ा
[42:36]है हम गिर गए कैसे दुआ करेंगे वैसे मस्जिद के चार दो
[42:42]दुश्मन बाहर खड़ा हुआ उसने से लेस खड़ा हो हमें पता होगा
[42:43]बाहर निकलेंगे हमारे जाएंगे कैसे दुआ करेंगे मद्रास बहन के लिए इतना
[42:50]नहीं हो रहा हमसे क्यों हमारे दिल थोड़ा सा हम अपनी जिंदगी
[42:55]में मजबूर हो गए क्यों इस बात की वजह से की हम
[42:58]मात की आज तक तमाम मोमिन पुरी दुनिया में जहां कहीं भी
[43:06]एक जिस्म की मैन है जिस्म के किसी एक हिस्से में दर्द
[43:11]होता है पूरा जिस्म बिल्ला रहा हूं इतना तड़प रहा है और
[43:16]नींद रोजाना की दुआ में मुझे अफसोस हुआ हम नहीं कर पाए
[43:21]दुआ बहरे की मोमिनो के लिए क्यों नहीं हो रही इसलिए हमारी
[43:26]दिल शायद सो गए हम उनके शिद्दत को महसूस नहीं कर का
[43:27]रहे हम follstiniyon के लिए तड़प नहीं का रहे हैं क्योंकि अल्हम्दुलिल्लाह
[43:32]हम महफूज हम polystin की उसे मैन के उसे दर्द को महसूस
[43:35]ही नहीं कर का रहे हैं जिसकी गोद में उसका 6 महीने
[43:38]का बच्चा इसराइल के बमों से टूटे-टुकड़े हो गए हिंदी में सूज
[43:43]कर का रहा हूं क्यों नहीं महसूस कर का रहे दिल हमारे
[43:47]थोड़ा सा हो गए बहुत निकल गई है जब आएगी तो आईजीआई
[43:52]अगर हमने अपने आईना का अमल किया होता तो अभी हमारी हालत
[43:58]बहुत बेहतर होती मौत का खौफ यम्मा दिया क्या करेंगे हमारे दिल
[44:02]को नरम करेगी खुद हमारे लिए खुद पूरे अलामे इस्लाम के लिए
[44:06]हमारे इमाम तो वो द की जो रात की तारीख में निकाला
[44:10]करते द अपने कंधों पे बोरी लेकर निकलते द और उसके बाद
[44:17]mahroomon के मोहल्ले में जाते द किसी से पूछते नहीं द किसी
[44:20]और मोमिनो मुसलमान कौन हो जो गरीब नजर आता है उसके सराहना
[44:25]में रोटी रखते हुए चले जाते द यानी इंसानियत के खातिर कम
[44:27]करते द मैंने यहां पहले भी बयान किया था की जब baniasat
[44:32]इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को दफनाने के लिए और इमामे सज्जाद अली सलाम
[44:34]अजाजी इमाम से पहुंचे तो baniasat के लोगों ने सवाल किया एक
[44:43]रसूल ये जो आपके बाबा इमाम हुसैन के कंधों पर निशान है
[44:49]जख्म के निशान हैं लेकिन ये हमें महसूस हो रहा है की
[44:54]ये जख्म ना तीर का है नन्हे का है ना तलवार का
[44:59]है पत्थर का है लेकिन ये जख्म है ये किस चीज का
[45:00]ज़ख्म है इमामे सज्जाद ने शायद फरमाया की ये जख्म उन बोरी
[45:05]के जो मेरे बाबा रात की तरीके में लेकर निकाला अगर आबन
[45:09]के मोहल्ले में ये बोरियां लेके जाते द और गरीबों के सहारे
[45:13]रोटी और जो कुछ भी ajanaach थी वो tapsim किया करते द
[45:16]हमारे आएं मऊ के जो इंसानियत की खिदमत बहरीन के मोमिनो को
[45:21]याद नहीं कर का रहे shakawat है कल हमारे दिल को नरम
[45:34]बनाएगी हम इंसानियत के दर्द को महसूस कर पाएंगे हम इंसानियत के
[45:39]दर्द के एहसास होगा अब जब इंसानियत के दर्द को महसूस कर
[45:43]पाएं उसे वक्त हमारी जवानों पर अच्छा लगेगा इलाही आज जिन वाली
[45:47]एक अल्फाज अगर ये इंसान के दिल को नरम बनाएगी मैं फार्मा
[45:55]रहे हैं उसके बाद क्या कम होगा अगला कम पांचवा मलम मौत
[45:59]की याद किया करेगी वायु का आलम में हवा khwahishathe नवसारी की
[46:06]निशानियां को खत्म कर देगी तोड़ देगी इंसान जो अपनी नफ़सानी ख्वाहिश
[46:10]याद का आशीर बन जाता है मौत की याद और महाद की
[46:15]याद इंसान को khwahishten नवसारी से निकल कर क्या करेगी खुदा अदालत
[46:18]गीता [संगीत] आलम ना कुरान में बयान किया है अब मुझे आयत
[46:29]का ईटादा सही से याद नहीं ए रहा या अफरैद है उसको
[46:37]देखा है या देखते हो की जिसने अपनी ख्वाहिशों से नफ़सानी को
[46:43]अपना महबूब बनाया माबूद इंसानियत तक पहुंच जाता है की अपनी ख्वाहिश
[46:50]यादें नफ़सानी को माबूद बना लेता है माबूद और अब यानी अब
[46:58]दुखता अबे वो महेश तस्लीम हो अपने महबूब के आगे अगर बज
[47:03]इंसान ऐसे होते हैं जो अपने ख्वाहिश है नफ़सानी को माबूद बना
[47:05]लेते हैं जो ख्वाहिश कहती है उसमें मौत की याद बहुत जिगर
[47:13]इंसान की इन khwahisht के parchammon को तोड़ देगा इमाम आया मैं
[47:20]की अगर इंसान मौत की याद करेगा तो उसका इंसानी जिंदगी में
[47:26]क्या असर पड़ेगा वायरल इंसान से हिल्स की आपको खामोश कर देगा
[47:34]यानी इंसान ख्वाहिशात की आग को ठंडा करने में कामयाब हो जाएगा
[47:39]और हम दुनिया और दुनिया को उसका नाम है हमारे हदीस में
[47:46]बयान किया की दुनिया [संगीत] [संगीत] तमाम बस्तियों की बुनियाद किया है
[48:01]अगर मैन की याद होगी तो क्या दुनिया हकीम हो जाएगी दुनिया
[48:13]पर दुनिया की मोहब्बत को क्या कहा गया हमारी रिवायत में राहु
[48:19]kulkha दिया दिन मोहब्बत दुनिया हर बुराई हर खजाना है सर है
[48:26]क्या है बात किया क्या कर रही है दुनिया को खत्म कर
[48:28]रही है चूंकि दुनिया को आखिर बना रही है इंसान को ये
[48:31]अहसास दिला रही है मात की याद देखो खुदा बंदे आलम की
[48:36]जिसने इस पुरी कायनात किया वो खुदा का रहे हैं की ये
[48:37]दुनिया रहने के काबिल नहीं है वो खुदा का रहा है की
[48:42]इस पुरी कायनात को देखकर तुम मुतासिर हो रहे हो लेकिन मैं
[48:44]तुमसे का रहा हूं ये दुनिया खेलो कूद की जगह से ज्यादा
[48:51]नहीं है एक अमल इंसान खेलकूद में कितना टाइम लगता है जरा
[48:54]मेहंदी लगता हूं ऐसा इस दो ikhtiya आर की जानिब आखिरत का
[49:02]सबर इख्तियार करो की मैंने असल जिंदगी कहां राखी है बस अगर
[49:05]बहुत ही याद हो गया जीजू ये तमाम चीज जो मैंने आपके
[49:08]सामने छह नो का दिमाग साधक के हदीस से बयान किए इनको
[49:14]मैं pariswar द्वारा बयान कर दूंगा जवानों के लिए अगर मैं आज
[49:17]इस्लाम की तरफ ए जाएंगे मैन हो जाएगी मतलब ममता फिर फरमाएंगे
[49:31]इस बात की याद मौत किया क्या करेगी शाहाबाद शाहबाद को क्या
[49:49]होगा इंसान अपनी इंसानियत की असल मंजिल की जान है ए जाएगा
[50:03]कलम से निजात आता करेगी इंसान को नरम दिल बनाएगी आयुक्त सिरों
[50:11]अलमल हवा ख्वाहिश आड़े नफ़सानी के पूछो को तोड़ देगी इंसान को
[50:15]khawajate नफ़सानी के दायरे से बाहर निकल कर khudangeeta की दायरे में
[50:21]ले आएगी और उसके बाद छठी चीज इंसान की आरजू को आरजू
[50:24]की जो आग है hazraton की जो आग है इसको खत्म करके
[50:28]जो हम दुनिया को इंसान के सामने हकीम बना देंगे जब ये
[50:33]इंसान इस दुनिया को हकीर समझेगा तो फिर क्या होगा ये इंसान
[50:37]इस दुनिया की जाने तवज्जो नहीं करेगा कल इंसान अपनी उसे मंज
[50:43]इल में कौन थी सब कुछ सिमी क्या बनिए आदम ए आदम
[50:47]की औलाद मैंने ये पुरी कायनात जो कुछ भी इस कायनात के
[50:53]अंदर खड़क तो samavate वाला ऐड आसमानों और जमीनों को इसलिए आज
[50:57]लेकर टूथ मत को समझ में आएगा इस इंसान को एहसास होगा
[51:10]की मैं खुदा बंदे आलम के अस्मा का जलवा हूं अब पता
[51:15]बंद एलन के अस्मा का मजहर हूं ना खुदा बंदे आलम के
[51:19]लिए हूं खुदा आलम ने क्या गलत मैंने तुझको इस दुनिया से
[51:21]अपने लिए मैं खुदा वंदना ये इंसान अपने रास्ते को khudon को
[51:30]चलना शुरू करेगा नतीजे में इंसान की इस्लाम होगी एक इंसान की
[51:34]इस्लाम muashrif आईला करेगी मुशर्रफ वही हड़प है की अपने आखिरी होजत
[51:41]को पर्दा रहमत में रखा हुआ है की जब इंसान अपनी सांप
[51:50]ले इज्जत को हमारी तरफ ध्यान भेजेगा हमें और आपकी तौफीक इन
[51:55][संगीत] या पकड़ सके और आप को भी आबाद कर सके आलम
[52:04]से हमारी इंतजार है की दुनिया में जहां कहीं वे महरूम मशरूम
[52:11]सितम डिवाइडर लोग हैं मकसूद बहरीन में की जहां असली दुश्मन की
[52:15]जहां विलायत अली दुश्मन है हमला किए हैं इसको ये मत samjhiega
[52:22]की ये मुल्कों की जंग है नहीं मुल्कों का मामला नहीं है
[52:24]ये इस वक्त ताकीद का मसाला है यकीन कर लीजिए इस बात
[52:28]पे की दुश्मन दुश्मन [संगीत] ए ईमान इस वक्त जमा हो चुका
[52:36]है काफिर के सूरत में हो या बाद अकीदा लोगों की सूरत
[52:38]में दुनिया ने इकट्ठा ahatkar लिया है अहलेबैत के बांधने वालों के
[52:45]खिलाफ लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह हमेशा की तरह होंगे लेकिन पैदा imtihaanaat का आवाज़
[52:50]हो चुका है धारण के अंदर मोमिनो मुश्किलात देख रहे हैं की
[52:56]इंशाल्लाह ज़मीन बनेगा की हम और आप भी इन मोमिनो को याद
[53:01]रखेंगे और इन महीना के इस गले में जो मदद से कम
[53:05]मदद दुआ है कम से कम मदद दो कितने दुआ में याद
[53:12]रखेंगे बहरीन में होने वाले जुल्म ने खुदाया उन लोगों को जालिमो
[53:21]के सर से निजता था अंदाज़ में पाया तक मिल तक पहुंचना
[53:33]बताया जहां-जहां इस्लामी बेदारी की तैयारी के parvanchal चुकी हैं hudayat दुश्मनों
[53:38]के शरद से और साधुओं से tahharikon को महसूस फार्मा बताया तुझे
[53:41]तेरी रहमत का वास्ता अपनी आखिरी हुज्जत के जरूर में ताजी फरमाए
[53:45]मौला के नुसरत के लिए जमीन पैरहम करने वालों में से फाड़
[53:51]देंगे [संगीत] खुदाया जो स्वदेशी पाकिस्तान के खिलाफ चल रही है इन
[54:04]साजिशें से पाकिस्तान को महफूज फरमाए बताया तुझे ने रहमत की आवाज़
[54:09]तक तमाम आवाज़ है उन सबकी जान और मल इज्जत होगी हिफाजत
[54:15]फार्मा ताहित रहने की और आगे बढ़ाने की तौफीक [संगीत] इनायत नबी
[54:23]सल्लू अलैहि वसल्लम तस्लीम [संगीत] अल्लाह [संगीत] सलमान [संगीत] ओम [संगीत] [संगीत]
[55:29]ओम [संगीत] शांति [संगीत] ज़मीन ऑन
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