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Bani Abbas ki Makariya | H.I. Kazim Abbas Naqvi
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24/07/29
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AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2021 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल का अवसर मिला है शर्मिला दिल्ली में अक्षय पुण्यों में वृद्धि
[0:18]ई एम उस मिला शहर वाहन नियमों राशि तमाम अलहम दो लिललाह
[0:29]अल्लाह अच्छी तरह दाणा सेओ रा दाणा सेओ रा दाणा ओ लाल
[0:33]नाश्ता दिया ला अनहद आणून अल्लाह लक्ष्य जुअल ओरम प्रणाम बिल हक
[0:49]अस्सलातु वस्सलाम महिला रसूल मुहम्मद अल मुस्तफा फल अमजद अली महमूद दिल
[0:58]अहमद अभिलाख रस्में मोहम्मद कि वह सलातो अस्सलाम मौलाना असद उल्लाह फिलहाल
[1:13]राहुल बाल धो लीजिए अपने अबीर पाल अस्सलातु वस्सलाम मौलाना सैयद तेल
[1:29]मासूम अतुल मामलों में छुपा हरा तेल भूल विरात्रा सूद फातिमा जहरा
[1:36]ए सईंया दत्त ने साइलेंट अमीर अस्सलातु वस्सलाम मंगल अल हसन अल
[1:45]मुतावा आप पहुंचे अनिल मालूम बहते हुए कई जपा फ्री सलमान सोमी
[1:57]नल मामलों मीनल ममता जब चैनल मोहकमदीन ला सैया मां व प्रख्यात
[2:01]लाइफ इलेक्शन रोहित वाह लाल मीणा ने 94 मदन महल यिद आप
[2:13]5वा ना तो अल्लाह अलावा छह महीने अम्मा बाद अल्लाह ताला सी
[2:22]किताब यह क्रीम बिस्मिलाहिर्रहमाननिर्राहीम यूरिक चूना व्यक्ति फिर कुन्नूर अल्लाह बर्फ वाहेम
[2:30]वल्लाह होमों रही वाला होकर हल्का फैन वल्लभ जी अर्सलान रसूलुहू विरुद्ध
[2:39]आ व दीन-ए-इलाही पहले युद्ध भेरावल अधीन कुल ही भला हो करहल
[2:49]मशहूर खून सलवार पड़ेगा तमाड़ व झाल कि मुझे ने क्राइम शामिल
[2:59]मुख्तर अहमद जाने की राह में कादर आज का जो हमारा मौजूद
[3:04]है वह बनी अब्बास के हवाले से कि कुछ मसाले पैन चालाकी
[3:09]समझ में वापसी करूंगा सुरेश शख्सियत है परवरदिगार इशांत शर्मा आता है
[3:14]कि यह को फिर और यह मुशरिकीन यह दिन दुश्मन खूब बातें
[3:20]यूरीन दून यह इन्होंने इरादा किया यह कि राधा करते हैं कि
[3:23]किस बात का लेयो थे उन्हें रवा कि अल्लाह के हुज़ूर को
[3:29]बुझा दें बेवफा हे हम अपनी आंखों से कि वल्लाहो मोती मोनू
[3:35]रही थी और हाल यह है कि अल्लाह अपने नूर को खत्म
[3:41]करने वाला है अपने नूर को कॉल करने वाला है बदलाव कर
[3:45]हल का फिरौन इन काफिरों को कितना ही बुरा क्यों ना लगे
[3:49]तो मैं अपने नूर को कॉल करने के लिए इन तमाम तक
[3:51]पहुंचाने के लिए उबल नदी अल्लाह बहुत है अर्सलान रसूलुहू बिलों दादी
[3:58]ने लहार तहसील अयोध्या के राजकुमार लोधी ने खुले ही उसने एक
[4:03]साल की उसने भेजिए रसूल से हेदायत और दिन हक के साथ
[4:11]ताकि वह इस दिन हफ्तों डिगर तमाम दिनों पर अलदीन खुले ही
[4:15]तमाम अभियान पर तमाम प्रकार के ऊपर तमाम का तेवर फिर के
[4:22]ऊपर युद्ध के राहु इसको इजहार कर सके इसको गालिब कर सके
[4:28]इसको लोकप्रियता कर सके वह करहल मिश्री कोण चाहे मुशरिको कितना भी
[4:31]बुरा क्यों लग रहा है है तूने तारीख में वॉल्यूम को फिर
[4:42]मुशरिकीन और फिर उनके बाद से मुनाफे इन की शक्ल में इन्हें
[4:49]अफ़राद ने पूरी कोशिश की कि किसी तरह से इस्लाम और इस
[4:52]निशान को इस दुनिया से मिटा दें लेकिन जब अल्लाह ने राधा
[4:59]कर दिया है तो ना कुछ पार्टनर मुशरिकीन ऑफ ना ही बना
[5:04]फैशन इनके यह बस की बात नहीं है कि वह अल्लाह के
[5:06]इस लुक को बुझा सकें अ के पास अपनी तमाम तर्क कोशिश
[5:14]के बावजूद भी तूने तारीख में जहां इन्होंने अधीन को इस्लाम को
[5:19]शरीयत को मिटाने की कोशिश है कि वहीं पर अल्लाह तबारक व
[5:26]ताला के नुमाइंदों ने अपनी पूरी कोशिश कर दीन को बाक़ी रखने
[5:28]की सफाई की ओर जिसका नतीजा आज अल हमदुलिल्ला 14 साल के
[5:35]बाद हम यह देख रहे हैं कि अल्लाह के नुमाइंदों से मुताल्लिक
[5:39]जो दीन है वह रोज़ बरोज़ तरक्की कर रहा है रोज-रोज मुझे
[5:44]कम हो रहा है रोज़-ब-रोज़ उसके अंदर कुंवर तो ताकत बढ़ती चली
[5:49]जा रही है है लेकिन यह तीन अ बहुत सारे मसाले भय
[5:52]बहुत सारे अपराध के एग्जाम में यह बात होगी कि एक बड़ा
[5:58]मतलब जो अक्सर हमारे शहरों में बाकी रह जाता है वह यह
[6:03]के इतना लंबा टाइम क्यों लगा मैं सनम हमें कि इस्लाम आई
[6:09]महल बेहतरीन सलातो सलाम जैसी शख्सियतें अगर इंसान गौर करें तो खुद
[6:13]पैग़ंबरे अकरम सल्लल्लाहू अलैही वा आलेही वसल्लम अल्लाह मसाला मदन मोहन है
[6:21]और आपके बाल आपकी पहले वे थे अतह आर में सलमान सोमी
[6:26]अली सलातो सलाम यह 14 मासूमीन हमारा का भी है आया तो
[6:32]रिवायात इस पर नजर है कि खुदा के बाद सबसे ज्यादा अपने
[6:35]हंसते यहां यही है कायनात में अल्लाह तबारक व ताला के बाद
[6:40]पैग़ंबरे अकरम सल्लल्लाहू अलैही वा आलेही व सल्लम के साथ और आपके
[6:43]बात फिर आप पहले बेहतर हथियार जो है मासूमीन जो है जो
[6:48]यह 14वां शामिल है सलातो सलाम यह कहना था कि सबसे अफजल
[6:53]तरीब सबसे ज्यादा इस बार फैसला सबसे ज्यादा बांकावत सबसे ज्यादा बार
[6:59]शराफत जो हस्तियां हैं वहीं है कि अब इतनी अहम इतनी का
[7:05]आल्हा अफजल हस्तियों के होने के बावजूद हम यह देखते हैं के
[7:11]इनका जो निजाम है जो यह लाना चाहते थे अभी 14 साल
[7:17]गुजरने के बावजूद भी बनेगा उस तरीके से नहीं रहेगी हुआ उसने
[7:21]इस तरीके से पिछड़े तैयार नहीं कि जिस तरह से करनी चाहिए
[7:26]थी वजह क्या है वजह बड़ी बात ऐसी है पौराणिक क्रीम परवरदिगार
[7:30]इरशाद फ़रमाता है कि अल्लाह तबारक व ताला जून अधिक करता है
[7:40]उन नेअमतों को उस वक्त तक परवरदिगार नहीं बदलता जब तक के
[7:43]खुद लोग उनको बदलने वाले ना हो मसलन सूर्य मुबारक है फाइल
[7:51]में परवरदिगार शर्मा तहत झाले का जेवण अल्लाह अलम यह कुमकुम भाग्य
[7:55]ने अमित अनंता महिमा इलाकों में नहाता योग्य मां बहनों से हिम
[8:01]कि अल्लाह तबारक व ताला जो ने अमृत किसी कौम को आता
[8:07]कर देता है अल्लाह बदलता उसे कोई नीमतल्ला ने दे दी फॉर्म
[8:12]को तो अल्लाह ताला उसने मत को वापस नहीं लेगा उसने बाद
[8:14]में तैयार पैदा नहीं करेगा कब तक पहुंचता योग्य रूप मां के
[8:19]आंसुओं से हम जब तक यह तो उसने अमित को तैयार ना
[8:24]दें कि ना चाहे कि हमसे यह मत वापस मिल जाए उसे
[8:29]तब तक अल्लाह उनसे सहमत को वापस नहीं लेता दूसरे में काम
[8:31]पर फरमाया इन्नल्लाहा यह रूम आ बे कमेंट हद तक होगा यह
[8:36]रूम आवेदनों से हम अल्लाह तबारक व ताला किसी भी कौम की
[8:40]हालत को दुरुस्त कि नहीं बदलता जब तक वह टॉम क्रूज अपनी
[8:42]हालत को बदलना मैं अच्छा है इस नेमत को परवरदिगार कब उठाता
[8:49]है जब हम कॉम उस नेमत की बेकद्री करना शुरू कर दिया
[8:51]है कि अगर कॉम इज्जत समान्य तौर पर एक बड़े पैमाने पर
[9:00]किसी ने मत की बेकद्री करें तो परवरदिगार उस कौम से सहमत
[9:06]को उठा लेता नतीजा क्या निकलता है नतीजा उसकी जगह पर बाद
[9:08]औकात जब तक कुछ कम में या उसके पंप के एक बड़े
[9:13]हिस्से में 212 उसी नेअमत की कद्र नहीं वापिस आ थी और
[9:18]वह इसको परवरदिगार के लिए साबित नहीं कर देते तब तक परवरदिगार
[9:21]उसने मत को दोबारा उनके लिए जारी नहीं करता कि इस दुनिया
[9:27]का जो निज़ाम अल्लाह तबारक व ताला ने बनाया है विमान हो
[9:33]बाकी जितने भी इस तरह से बनाते हैं इन सबके लिए जब
[9:39]तक पर लोग हम अल्लाह तबारक व ताला के सामने अपने ईमान
[9:41]को अपने अमल साले को इन तमाम चीजों को अपने खुलूस को
[9:47]आम लेंथ साबित नहीं करेंगे तब तक उसकी कोई हैसियत नहीं है
[9:50]कि मैं हजार बर्ताव ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मद रसूलल्लाह पढ़ता रहा हूं
[9:57]लेकिन अमल के मैदान में ना मैं ला इलाहा इल्लल्लाह को साबित
[10:00]कर सकूं मोहम्मद रसूलल्लाह को साबित कर सकुन आलू उबला को तो
[10:03]फिर मेरे हजार हां मर्तबा पढ़े जाने से रोजाना मेरे इस पड़ने
[10:09]का कोई फायदा नहीं तब तक हम हेलन मैं इसको साबित लाकर
[10:13]दूं मैं इसी तरह से में जितना इस लाश का दावेदार हूं
[10:15]मैं जितना विमान का दावेदार हूं जब तक को प्रैक्टिकल यह साबित
[10:21]नहीं होगा वह विमान मेरे किसी काम नहीं आएगा ना नकली एक्टिव
[10:23]पहले अल्लाह ताला उसे खुद भी नहीं करेगा कि तमाम के ताण
[10:30]तमाम के तमाम हमारे आकार के तमाम के तमाम जितने भी हमारे
[10:36]बीच हैं वह जब तक प्रैक्टिकली साबित नहीं होंगे उनकी कोई हैसियत
[10:41]नहीं है कि जो भी साबित करना वह क्या करना है आनंद
[10:43]स्थापित करना है इसी तरह से अगर हम यह चाहते हैं कि
[10:48]हमारे अंदर को तैयार पैदा हो तो अल्लाह ताला ने फरमाया कि
[10:53]आती है कि नहीं जवान सिधवानी करो तैयार पैदा करना चाहते हो
[10:56]अपने अंदर तब्दीली लाना चाहते हो अपने आप को तब्दील करो मैं
[11:01]करूंगा तो मैं तब्दील अमेज़न साबित करो इसी तरह से मैं हजार
[11:04]हां मर्तबा अपनी जुबान से तो किसी नेमत का शुक्र अदा कर
[11:09]रहा हूं लेकिन आप मैंने उसने हिम्मत की ना कादरी कर रहा
[11:14]हूं अमल उसकी कुछ हराने में मत कर रहा हूं तो परवरदिगार
[11:16]ने Bigg Boss से उठा लेगा ई है जो ने अमर्त्य उष्मा
[11:22]और ने मत देखो बुरा ए इलाही या परवरदिगार में नबी अकरम
[11:25]सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम की उम्मत को इनायत कि वह
[11:32]नेमतें ओबरॉय इला है यह यौवन सलाम और आपके औलाद मासूमीन अस्सलातु
[11:38]वस्सलाम की विलायत थी अब जाकर मौका शक नहीं है कि मैं
[11:44]उसकी कुछ बात करूं कुछ तरीकों से साबित करूं लेकिन पौराणिक क्रीम
[11:47]का सिर्फ एक मत आम है यानि कि कुछ आयतें हैं और
[11:51]एक में काम है कि जो इसको मतलब को साबित करता है
[11:54]हम और आप जानते हैं हम सबको मालूम है कि रणबीर के
[11:59]लिए परवरदिगार एक जाने पर नंबर को कैसा शरमा रहा है या
[12:01]यह वसूल बल्ला घुमा उन दिलाई कम अब देख फाइलम तो फिलहाल
[12:06]हम चावल हफ्ता रिसालत वल्लाहो यहां से मटका मिलन नष्ट मेरे हबीब
[12:09]पहुंचा दीजिए उस चीज को जो आपके परवरदिगार की जानिब से पर
[12:15]नाज़िल हुई है अगर आपने यह नहीं पहुंचाए अगर आपने काम अंजाम
[12:18]नहीं दिया तो क्या झाल समावेश लगातार इस साल तक गया आपने
[12:22]रिसालत तक कोई काम पहुंचाया ही नहीं और अल्लाह ताला आपको लोगों
[12:28]से बचाने वाला है अब यह आयत यह बता रही है कि
[12:31]वह चीज को पैगंबर को पहचान पहुंचाने का हुक्म दिया जा रहा
[12:34]है वह इतनी इंपोर्टेंट है कि अगर पैगंबर ने यह नहीं पहुंचाया
[12:40]हमारा बल्लभ तृषा लता तो खोया आपने अल्लाह ताला के रिसालत को
[12:43]पहुंचाया और आप वहीं मैं आपके क्यों खुद हजरत की जो हैसियत
[12:49]वह क्या है खाते मुन्नभाई जीन हाथ मुरसलीन फस आपकी रिसालत के
[12:54]पीछे सारे हम व्यक्ति रिसालत का काम ठहरा हुआ है यानी सिर्फ
[12:59]और सिर्फ हजरत की अपनी रिसालत का मसला नहीं है बल्कि जनाबे
[13:02]आदम से लेकर जनाबाई शतक और खुद अदरक की रिसालत यानि आदम
[13:08]से लेकर खतम तक अपने जितनी भी रहते हैं वह सारी की
[13:13]सारी रिसालत किसी एक मुद्दे पर इस तरीके से जमा हो जाएंगे
[13:14]खुदा के हैं समापन लगतै रिसाला का तुमने रिसालत पहंचाई ही नहीं
[13:19]गई कि कि अब वह चीज यतीनन वह भीम के कोई बहुत
[13:28]ही शुरूआती या जिसे कहना चाहिए कि जूस कि यह काम नहीं
[13:30]हो सकते हैं अगर आपने यह लालाराम के बारे में भी बताया
[13:35]या आपने फर्ज करें कि किसी को देना हज के मसाइल नहीं
[13:38]बताए वह आपके पास आए तो जो हाजी नहीं होता उसके अलावा
[13:40]किसी को आते ही नहीं है एक बड़ी तादाद में इसलिए आप
[13:45]मुझसे पूछेंगे तो मुझे भी आप बहुत सारे मत हंस के नहीं
[13:49]आते हुए क्यों नहीं किया आज अच्छा मौजूदा तौर पर जो तब्दीली
[13:51]आ गई है वह तो और इस तरह की हो गई है
[13:53]कि जब बंदा हसबैंड जाए तो समझ में नहीं आता कि हज
[13:57]करना कैसे आप अगर मुझे हाथ के मसाइल नहीं आते तो किया
[14:02]हज के मसाइल लाना मुझे दिन तक खर्च कर देगा और कि
[14:04]हम सब जानते कि जो उबला बेिमसाल है उनका जाना काफी आपके
[14:09]लिए जरूरी नहीं है कि आपने फकीर तरह से अब हमने किताबे
[14:13]हर जगह पड़ी भी है तब तक हम इसे कहते हैं कि
[14:17]आप मौजूदा हालात है मेरी पता जो महज कैसे अंजाम दिया जाना
[14:21]है कि लोहा बाहर मकान के ऊपर यह वह कमात नहीं है
[14:23]कि जिनका वजन पूरी विशाल न के बराबर ओं इन तमाम चीजों
[14:26]को सामने रखते हुए वह चीज तो ठीक बा क्या थी वह
[14:30]चीज जो के शरीर के दिन पैगंबर ने पहुंचाई और पहुंचाने के
[14:34]बाद अब देखिए एक तरफ पूरी विशाल इसे डेली भी है दूसरी
[14:36]तरफ उसका बदन होता क्या-क्या रैलियों में पल तो मैं कुछ दिनों
[14:41]कम वक्त ममता अलैकुम यह मृत्यु बरौनी टू लखनऊ में इस्लामुद्दीन आफ
[14:43]था जब तुमने यह चीज पहुंचा दी है तो दिन मुकम्मल हो
[14:49]गया ने मतों को तमाम पहुंच गया और अल्लाह तबारक व ताला
[14:51]दीन-ए-इस्लाम से राज़ी हो गया यह सारी की सारी चीजें बता रही
[14:56]हैं कि वे लाये त्यूं आमिर अली सलातो अस्सलाम और फिर आपके
[14:58]औलाद से आए मेहता हरी नलिन मिश्रा तो सलाम की विलायत यह
[15:03]वह चीज थीम और यह ध्वनिमत से घबराए चाहिए थी कि जिस
[15:08]ने मत क्या हमने से नेमतें तमाम हो गई लेकिन जगह मैंने
[15:10]बहस करते हुए यह बात की थी कि तमाम कब होता है
[15:13]और इकबाल का होता है इस मौसम को है जब किसी भी
[15:16]चीज के अजजा इस जरूरी पूरे हो जाएं है कि वह अ
[15:20]जो किसी चीज को बनाने के लिए जरूरी है उसकी फसल को
[15:24]मशक्कत करने के लिए जरूरी है जब अजान पूरे हो जाते हैं
[15:29]वह कंप्लीट हो जाते हैं तो इतना मुश्किल हो जाता है एक
[15:32]माल क्या होता है कि जो चीज आपने बनाई थी वह चीज
[15:36]अपनी तरफ और आयत को अपने मकसद को हासिल करने लगे तो
[15:42]यह सूर्य का राज योग व सुलभ मकसद एक मार्क्स लाता है
[15:44]अल्लाह तआला फ़रमाता है कि मैंने नेमत को दीन को काम मिल
[15:49]किया दिन वहां मिल कमाने क्या हुआ दिन के काबिल कमाना युवकों
[15:51]व हासिल और वह डुबो जरूरी यहां पर बहस नहीं है यह
[15:57]अजहरूद्दीन के पूरे हो चुके थे आज जो चीज आ रही है
[16:00]अधीन के लिए वह भीम को कमाल की बंदे ने जिस मकसद
[16:04]के लिए दिन को भेजा गया था दिन को किसलिए भेजा कि
[16:07]आप किसी से लेकर सवाल करें किसी भी मुसलमान से सवाल करें
[16:10]यहूदी ईसाई जो भी दिनों पर अल्लाह की तरफ से दिन अलग
[16:14]की तरफ से पर नंबर पर ईमान रखने वाला है उससे सवाल
[16:18]करें कृपया लगता है यह दिन क्यों भेजा था यह पैगंबर अरे
[16:19]क्यों भेजा था क्या भीम सिर्फ इसलिए आया था कि वह में
[16:24]बता देगा देखो यह खुदा है एक जन्नत जहन्नम हैं अच्छे काम
[16:28]करो अपने आप को कहना भोजन में पहुंचाने की कोशिश करो दर
[16:30]से बचाने की कोशिश करो क्या सिर्फ यह तलाक देने के लिए
[16:34]आया था क्या अल्लाह ताला ने इतने हम भैया जिन्होंने इतनी जहमत
[16:37]उठाएंगे इतना ज्यादा खून वाले मुकाबला करना पड़ा अगर सिर्फ तलाश थी
[16:43]तो अपने ज़माने के जालिम को जनाब एब्राहिम को नंबर उससे कोई
[16:45]कौन से को सफल होना चाहिए था जहां पर मूसा से फिरौन
[16:50]को हांफने होना चाहिए चलाया ना आकर बता दिया कि अभी तक
[16:52]खुद्दार नहीं यह तमाम अंबिया की तारीफ है कि समझा रही है
[16:58]अपने ज़माने के जो ताकतवर तब का था वह लंबा के मुकाबले
[17:03]में क्यों आता था इससे भी एक के अधीन बुनियादी तौर पर
[17:05]इंसानों पर हुकूमत करने के लिए आया है के दिन का जो
[17:09]असल जाता है वो क्या है अधीन हमें और आपको यह समझाने
[17:13]के लिए आया है कि देखो तुम्हारे ऊपर हुकूमत का हक सिर्फ
[17:15]अल्लाह कुबूल है और अल्लाह के इलावा जो इंसान हो तुम हमने
[17:22]बाकी सारी कहना तुम्हारे लिए मुखर किए तुम जानवरों को जैसे बर्ड
[17:27]इस्तेमाल कर अपने फायदे में सिर्फ मत करो कि जैसे मतलब इस्तेमाल
[17:30]करते हो इन जानवरों से इन दुनिया की ने मतों से जीत
[17:35]सब हमने तुम्हारे इश्तिहार में देती हैं लेकिन तुमने अपना एट यार
[17:38]सिवाए अल्लाह के किसी को नहीं देना अगर इंसान सिवाए अल्लाह के
[17:44]अपना इश्तिहार किसी भी अपने जैसे शकु दे रहा है तो वह
[17:45]आसाराम उठा रहा है इंसानों को इंसानों के ऊपर हुकूमत का हक
[17:53]नहीं है सिर्फ भीम को हक है अब दिन जब हुकूमत करेगा
[17:57]तो अधीन द हर ऐरे-गैरे नत्थू खैरे के हाथ में आकर उसकी
[18:00]हुकूमत दी जा सकती है नहीं अधीन की हुकूमत दीन के वाली
[18:05]के हाथ होने चाहिए और राम के हाथों होने चाहिए वह अलार्म
[18:09]लिया नाभि खुद है या आप के बाद आपके वह मासूम जाने
[18:11]सीन है कि यह जो खुद विलायत से फटी का कांसेप्ट है
[18:15]बेसिकली लिए इमाम की है बच्चे ने एक ऐसा फैंस के जिसमें
[18:20]हम आपके पास मौजूद ना हो उस पेज में उस जगह को
[18:25]बाक़ी रखने के लिए नहीं सलमान की शिकायत में अधीन की हुकूमत
[18:27]किसके हाथ में होनी चाहिए असल के इसके हाथ में होनी चाहिए
[18:32]हुकूमत किमाम के साथ पर अगर एम पर देख है बाद में
[18:37]चले जाएं तो एम की रहमत में इसी हुकूमत दीन का इश्तिहार
[18:39]मोतियों के पास होना चाहिए अधीन की हुकूमत कैसे डॉक्टर के पास
[18:45]होना चाहिए दिन की हुकूमत यार इंजीनियरों के पास है कि उसके
[18:47]पास होना चाहिए अगर आप भीम की हुकूमत टाइम करना चाहते हैं
[18:52]अपने ऊपर तो धाम की हुकूमत से रिलेटेड जो स्थिति है वह
[18:54]अ के हाथ होना चाहिए जिसको दिन के बारे में मेल में
[18:58]बड़ा सिंपल सा मसाला है तो यह उसके पास कब तक रहेगा
[19:02]उसके पास उस वक्त तक रहेगा जब तक इस दिन का हटी
[19:06]वाली और बारिश हमने नहीं आता अब यह प्रोसेस क्यों यह हमें
[19:09]पेस्ट क्यों आया हालात है असल क्या है दिन के वक्त मत
[19:15]होने चाहिए नबी ई अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने अब मुझे हैरत
[19:17]होती है वह लोग जब मदीना है रियासतें मदीना की बात करते
[19:22]हैं वहां सच कहा ना क्या है रियासत का मानना है कि
[19:24]पैगंबर ने एक मामले का देख रहे हैं आप सबका का आदेश
[19:28]किया तस्वीर दिया अपने ग्राहकों को बेहतर पैगंबर के होते हुए किसी
[19:34]में जरूरत है कि इस रियासत का इश्तिहार को संभालें नहीं है
[19:37]किसी में सूर्य क्यों नहीं है जो रख इसलिए के पैगंबर अपनी
[19:43]जाति हकूमत बनाने नहीं हैं यह बात चाहत नहीं है अगर कोई
[19:46]भी शक्कर नंबर की हुकूमत को बादशाहत स्पीकर रहा है तो वह
[19:50]को समय दिन समझ में नहीं आया ना कि पैगंबर को अपनी
[19:55]साथी हुकूमत इसीलिए आप देख हम देखेंगे कि पैगंबर टमाटर खुद रखने
[19:58]के बावजूद भी बिल्कुल मआशरे की कमतरी सत्ता पर रह रहे हैं
[20:05]ताकि लोगों को यह बता सके कि हम बादशाह नहीं है हम
[20:10]दुनिया की उम्र करने नहीं आए हैं हम भीम की हुकूमत को
[20:12]तुम्हारे पर ऑफिस करने के लिए आए थे मैं अपनी हुकूमत ने
[20:17]मेरी जात की हुकूमत नहीं यह जो एक मिसकनसेप्शन बाद वक्त बाद
[20:20]लोग पैदा करने की कोशिश करते हैं कि पैगंबर के बाद कोई
[20:24]आपका जानशीन और खलीफा नहीं था इसलिए कि आपकी कोई जाति हुकूमत
[20:30]दी थी तो काफी खतरनाक ऐसे ही है पैगंबर की ठे लाफ
[20:31]अट यू पैगंबर के बाद जाने चीनी का जो कांसेप्ट है वह
[20:35]पैगंबर की जात से नहीं है अगर जांच से होता तो मसाला
[20:40]और सा लेकिन हुआ क्या बुनियादी तौर पर आप समझे यही जिस
[20:43]बात का आप इनकार कर रहे हैं समझे आप यहीं का नाम
[20:47]जिसका आप दे रहे हैं कि आपने कोई आपने पैगंबर के बाद
[20:53]भीम का खलीफा तलाश नहीं किया आपने पैगंबर के बाद रिसालत और
[20:57]नवयुवक खलीफा तलाश नहीं किया आपने शख्स से पैगंबर को हटाकर किंतु
[21:04]देर आखरी पैगंबर है उसको हटा कर उसकी जगह पर किसी बंदे
[21:08]को बैठाने की कोशिश की यह नहीं है दिन का कांसेप्ट दिन
[21:10]का कांसेप्ट क्या है पैगंबर रहे या ना रहे पैगंबर की हुकूमत
[21:16]बढ़ती रहेगी इसलिए कि दिन में हमारे ऊपर से हुकुम चलना है
[21:19]मुझे अल्लाह का हुक्म चलना या पैगंबर का चल रहा है बस
[21:23]पैगंबर का अपना वजूद रहे या ना रहे पैगंबर का हुकुम पैगंबर
[21:26]की हुकूमत और पैगंबर केस्ट यार हमारे ऊपर जारी रहेगा लें यहां
[21:32]दांत अगर पैगंबर दुनिया भी तौर पर चले जाते हैं नहीं मौजूद
[21:35]रहते तो आपके जाने के बाद यह तैयार उसके हाथ में आना
[21:40]चाहिए कि जो दीन की हुकूमत अपने हाथ में लेने का रिसालत
[21:45]का जश्न बन सके नुबूवत का जाना सी बन सके क्वेश्चन अभी
[21:47]का अब अब आपको यह बात समझ में नहीं आई और वह
[21:52]नेअमत पर खूब रायला ही या कि जो विलायत की शक्ल में
[21:57]पैगंबर ने पहुंचा भी दी आपने इसने मस्तक उभरा है लाया किना
[21:59]कादरी की उस ज़माने के लोगों ने नदिया क्या निकला था और
[22:03]अल्लाह तबारक व ताला से सहमत पहुंच उठा लिया आपने मत उठाया
[22:08]सलामत है अल्लाह ने मत को उठाता है तो फिर क्या होता
[22:13]है हमने क्या किया यह जो निजाम बनाया क्या जबरदस्त हमारे सर
[22:16]पर थोपा गया वह क्या देवता खिलाफत कर यह निजाम आना शरीफ
[22:22]में जो हुआ है उसका नतीजा क्या निकला वह उस मैं मत
[22:27]के इनकार का नतीजा हमारे ऊपर एक ऐसे खिलाफ का एक ऐसे
[22:29]ही जो आपका आना था कि जिस हिसाब को टूटने में 1260
[22:35]लगे 13 साल लग गए थे कि यह जो हमें और आपको
[22:40]1204 लगी क्यों लगे इसलिए क्या हमें 12 साल अभी भी अलबत्ता
[22:43]हमें तो अभी भी समझ में नहीं आ रहा लेकिन नाश ले
[22:48]मसाले को खत्म होने में कितना समय लग गया 13 साल लग
[22:53]गए जब तक पासवर्ड और के तकरीबन श्वेता में मराहिल में खुद
[22:58]अंग्रेजों ने आकर मसलन खिलाफत उस्मानिया को खत्म नहीं किया उस वक्त
[23:07]तक मुसलमानों को यह गतिविधि नहीं आता था कि यह इस्लाम का
[23:09]सिस्टम नहीं है कि आप खिलाफत के नाम पर कोई जालिम कुछ
[23:13]झावेर कोई आकर बैठ जाए उसको खलीफा मारना शुरु कर देते हैं
[23:19]यह कौन से इस्लाम है एक कप इस्लाम ने कौन सा इस्लाम
[23:23]ने साथ रूल दिया जिसमें कोई फसलों को फाड़ दिए और मुंह
[23:25]में लोगों पर हुकूमत कर सकता है कोई ऐसा सिस्टम इस्लाम हुए
[23:29]दो क्या बात है अल्लाह ताला का निशान है साहू का या
[23:34]भाग्य दीन-ए-इस्लाम इसलिए आया है कि बादशाह होकर फौजियों को लाकर मुसलमान
[23:37]और मोमिनों के ऊपर मुसल्लत कर देते हैं यह शाम का सियासी
[23:40]मैदान है जहां एक तारीख देखें बनो मैया के बादशाह बने अब
[23:46]बस के बाद इसे अपने नाम के साथ अली पर लगाकर दुनिया
[23:50]कि कल स्क्रीन का वर्णन जानती हैं क्यों हराम तरीका एमिनेम दिए
[23:56]हैं इन्हीं की तारीख को मैं भरा पड़ा है ए मूवी गुनाहे
[24:00]कबीरा इन में आप तलाश करके ऐसा यह दोनों लड़कियों जय भीम
[24:05]इसलिए आया है कि ऐसे फैसलों को फौजियों को मोमिनों के प्रमुख
[24:08]संत करें कि दिन का शशिराम यह है आप सिर्फ वही नहीं
[24:14]हत्या अम्मा के पैरोकारों को भी बहुत ही चीतल तादाद को ठीक
[24:18]है जिसको यह बात समझ में आ रही थी कि बाबा यह
[24:20]खिलाफत नहीं आई मैं कहत यह नहीं है I am महक यह
[24:25]है कि दिन हम पर हुकूमत करें और फिर दिन केवल यहां
[24:29]पर की हैसियत हमारी हुकूमत हमारे पर्व व हकूमत के जो आंवला
[24:32]पर हांथों से उन्हें जहां पर आकर एम्मा मगर कहते हैं मसलन
[24:38]विद्यालय कि हम आकर मुझसे कहा कि तुम अपने बाप को अपने
[24:40]मां को अपने बेटे को किसी को भी कत्ल कर दो तो
[24:43]फिर वहां पर दूसरा कोई जहन में शाहिबा नहीं आना चाहिए कि
[24:48]मैं अगर अपने जमाने के बाद दिशा की मुखालिफत करता हूं उसे
[24:53]मेरे अधीन पर कोई फर्क नहीं पहुंचेगा लेकिन एम ए मासूम की
[24:55]मुखालिफत कमाना यह के अधीन खतम फिर दिन में को तक और
[25:00]बाकी नहीं रह जाता है कोई दिन बाकी नहीं रह जाता आप
[25:06]ऐसी हुकूमत मुख्तार उतार होना ना यह एक सियासी पार्टी के तौर
[25:08]पर आ गए एक इलाके पर कब्जा कर लिया कुछ लोगों को
[25:12]जबरदस्ती अपने हकूमत के बारे में लिए यह नहीं है को मत
[25:16]हकूमत कौन सी तीन की हुकूमत है कि हमें भी समझने में
[25:20]टाइम लगा कब तक हमें भी समझ में नहीं आया जब तक
[25:24]कि खिलाफत उस्मानिया का अंग्रेजों ने खाते में नहीं कि आप जब
[25:26]कि खिलाफत उस्मानिया का खात्मा हुआ तो लोगों को समझ में हो
[25:32]यह तो दिन का सिस्टम नहीं था क्यों इसलिए कि अगर यह
[25:37]दिन का सिस्टम था तो इसका मतलब इस्लाम का सियासी दांव नाकाम
[25:41]हो गया था कि यह मानव और इसका अच्छा फिर 1922 से
[25:45]लेकर आज तक रिवर्स साल होने वाले हैं इस साल में तमाम
[25:49]आलमे इस्लाम ऐप साल में पता है कितने मुसलमान गुर्जरों के इन
[25:53]सब से पूछ तो आप ही के पास वह तरह के लिए
[25:57]हदीस है मां तवं यार ऐसे माध्यम आने ही मातमी तो चल
[25:58]जाए लिया जो मर गया और उसने अपने ज़माने के एल्बम को
[26:02]नहीं पहचाना वह चाहिए तो कि फिर की मौत मरा तो यह
[26:05]जब तक खिलाफत उस्मान या खत्म होने से लेकर आज आपका नाम
[26:07]कौन है मैं इस वक्त सवाल है जब आप यह बात नहीं
[26:13]समझाती है कि इसका मतलब की खिलाफत करने जाम दिन का नहीं
[26:17]था यह क्यों आया हमारे कुशल हुआ इसलिए कि हमने अपने ज़माने
[26:22]में विलायती कुरा ए इलाही या नेमतें कोबरा मलेशिया को कबूल नहीं
[26:27]किया हमने जब कबूल नहीं किया तो अलार्म उठा लिया आज उसमें
[26:34]मत रूठे हुए तकरीबन 14 साल हो गए हैं लेकिन अभी तक
[26:37]हमने अपने आपको उसके जरिए काबिल नहीं स्थापित किया इसलिए आज तक
[26:43]के नाम पर दूर नहीं हुआ जिस दिन हम इस विलायत के
[26:48]इस नेमत कोबरा मलेशिया की काबिलियत अल्लाह के सामने शो कर देंगे
[26:52]उसने लताला अपने बलों को अपने इमाम को जाहिर कर देगा कि
[26:56]अब मसाला क्या है मसला सिर्फ यह है कि जब वह है
[27:01]जब हमारे ऊपर आया तो कुछ अर्से तक तो वह खिलाफत की
[27:05]किसी ना किसी शक्ल में बहुत ही रहा लेकिन मलाइका हेमराज की
[27:11]शहादत के बाद वह काम मिलन मुलाकात में तब्दील हो गया अब
[27:13]यह हमने नहीं कि आप जानते हैं अतएव सुन्नत में मोदी साहब
[27:16]वगैरह और बहुत सारे उनके प्रॉब्लम है ज्यों-ज्यों हद तक किताबें लिख
[27:20]कर इस बात का तरफ किया कि वह खिलाफत नहीं थी वह
[27:25]बलों की अतिरिक्त चाहती थी और बादशाहत इस्लाम का निदान नहीं है
[27:28]हुआ है है यह मुख्यत के दिसंबर 12 2010 बनी जाना चाहते
[27:33]क्योंकि बन गई हमारी बहस नहीं है वनों में ज्ञान जब बात
[27:38]चाहत कि आप क्यों पॉकेट है जब जनाबे मीर अली सलातो सलाम
[27:43]कि दरवाजे पर लोग जमा हुए और आपको खलीफा बनाना चाहते थे
[27:46]हमने र क्योंकि इंकार क्यों किया यहां वह मार्च वह दर्ज है
[27:49]विलायत क्यों जो आपको कदीर में आपको नसीब हो गया क्या मामला
[27:54]कायनात उसे इनकार कर सकते हैं ए पर्सन इमकान नहीं हजरत के
[28:00]लिए उसको इंकार करने का वह जिम्मेदारी जो घाव में उनके कंधों
[28:03]पर डाली गई है उससे एक फॉलो थे लिंक आर्मी है तो
[28:08]फिर यह जो लोग दरवाजे पर आप इनको क्यों मना किया है
[28:12]हजरत अमीर उनको यह समझाना चाहते थे कि तुम जिस निजाम के
[28:16]तहत मुझे खलीफा बनाना चाहते हो यह सलाम का जवाब नहीं है
[28:19]हैं लेकिन जब लोग बिल्कुल पीछे पड़ गए और बात ऐसी चीजें
[28:23]हैं उनके ऊपर हो तो को काम किया ज्यादा मजबूरन हजरत आगे
[28:28]बढ़े हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को सलाम भी जो हरकत करे थे
[28:31]क्या थे बार-बार लोगों को पी समझाना चाहते थे मैं अपनी जांच
[28:35]के लिए नहीं जा रहा दिन की हुकूमत के लिए जाना हूं
[28:37]पैगंबर की सीरप को जारी करने के लिए अपने बाबा की सीरप
[28:41]को जारी करने के लिए ताकि लोगों को यह बता सकूं कि
[28:46]मैं नहीं दीन तुम पर हुकूमत करेगा मैं सिर्फ अव्वल यह दीन
[28:48]की हैसियत तो तुम्हारे पर हुकूमत करूंगा यह ट्रिक मिलने कल अ
[28:54]कांसेप्ट है यह कांसेप्ट है मतलब जब हम से पूछा जाता है
[28:56]इस्लाम का क्या नाम है इस्लाम डेमोक्रेसी को कबूल करता है या
[28:59]डिक्टेटरशिप को मैं इस्लाम डिक्टेटरशिप को कबूल करता है ना कि दिमाग
[29:05]कृषि को विश्राम करते नहीं यह दोनों ने श्याम को है जो
[29:10]इंसानों के बनाए हुए नेता मैम भीम के आता है सिर्फ अल्लाह
[29:12]करने शाम इंसानों पर हुकूमत सिर्फ दिन करेगा और फिर धाम की
[29:18]व्ब्ल्यू अलार्म रखो हुकूमत ऑटोमेटिकली इनके ऊपर आ जाएगी लिहाजा इंसानों पर
[29:22]हुकूमत का हाथ इसे तवा से सिलाई मासूम के किसी को आपसे
[29:28]जमीन के ऊपर हमारे ऊपर हुकूमत ग्राहक सेवा मासूम के किसी को
[29:31]हटेंगे ज्यादा आप क्या हुआ कि जब इमाम ने रद्द किया तो
[29:35]हम क्या समझाना चाहते थे मांगे समझाना चाहते तुम्हारा बनाया पहली बार
[29:39]नहीं हूं मैं मैं अल्लाह का बनाया हुआ ओ लैला मर हूं
[29:43]मैं दिन का बनाया हुआ उन्हें नंबर हूं अगर इस हैसियत से
[29:45]मुझे कबूल करते हुए निकलती है अत जिस हैसियत से तुम रसूल
[29:50]को कबूल कर रहे हो अगर कोई शख्स रसूल के सामने खड़ा
[29:54]होकर क्या दे दिमाग की बात नहीं मानता है तो इस्लाम शिकार
[29:56]हो जाएगा इस तरीके से अगर तो मुझे मेरे मामा सा लाल
[30:00]यादव देखिए आप सिर्फ तीन में जो अदरक को प्रॉब्लम सामने आ
[30:03]रही हूं क्यों आ रही है इसे के हार ए जॉब में
[30:05]काम बात समझ रहे हैं कि जिस की मुखालिफत की जा सकती
[30:09]है उसको क्या समझ रहे हैं कि इसको दिन बढ़ाया जा सकता
[30:13]है उसको क्या समझ रहे हैं हम से गलती हो गई अब
[30:14]इनसे भी गलती हो गई हम भी तो वह करेंगे यह तो
[30:17]ब करेंगे तुम्हारी हैसियत के अमीरुल मोमिनीन के सामने आ मैं तुम्हें
[30:22]अधीन पता नहीं है वहीं का बारिश है तुम्हें कुरान का पता
[30:28]नहीं है वह कुरान का बार इस है दौरान बोलने लगे तो
[30:30]अली के लिए में बोलता है तुम्हारी यह क्षेत्र कि तुम ऑनलाइन
[30:34]आपको समझाओगे हमारी क्या हैसियत है कि हमें मांगों को समझाएं हमारी
[30:37]कोई हैसियत नहीं है मैम के सामने उसी तरह जब हम करना
[30:42]जैसे रसूल के सामने सर हम कि यह है दिन की हुकूमत
[30:46]यह वह कमर तक जो इस्लाम लाना चाहता है आप नहीं समझ
[30:50]आ रहा ज्यादा जब आपको समझ में नहीं आया तो लाने क्या-क्या
[30:53]बदतरीन बादशाहों को हमारे ऊपर मुसल्लत कर दिया और उनको हम अपना
[31:00]दिन समक्ष यह समाप्त की तरह क्या है मासूम की हुकूमत कबूल
[31:02]नहीं करोगे तो बदतरीन ने खिलाए को अल्लाह ताला तुम्हारे ऊपर मुसल्ला
[31:06]करेगा और तुम उसका अपना दीन समस्याओं की पैरवी करोगे यादव मन्नू
[31:12]भैया क्या है यह जी के बारे में कौन नहीं जानता कि
[31:13]कितना फास्ट कर पा जैसा और फिर उसके बाद यदि जाता है
[31:18]तो मर बांध जैसा आफ वह आदमी के जिसको पैगंबर लो क्लिक
[31:22]करके मदीना खन निकालते हैं जो पैगंबर की लानत कम उस तहत
[31:27]है एक दिन वहीं आकर मुसलमानों का खलीफतपुर मुस्लिम बन जाए इससे
[31:30]ज्यादा सहज ही एक दिन की कोई और नहीं हो सकते थे
[31:35]से ज्यादा उसके बाद क्या हुआ बनो मैया लाभ है जो सबसे
[31:40]बड़ा जुर्म मन्नू भैया ने किया वह क्या था सबसे बड़ा जुर्म
[31:45]का कर्बला कर्बला के बाद वाकई हो रहा यह सारे के सारे
[31:47]इंतजाम बावजूद इनका असर था कि बिल्कुल कुछ अर्से के बाद इनकी
[31:53]हुकूमत जहीर और फिर क्या हुआ एक के बाद एक यह तस्वीर
[31:55]करें पेन नंबर के और अधीन के यानि खलीफा का नाम क्या
[32:02]है मरवाने ही मार ही मार्केटिंग बजे को कि उसकी हेमा तक
[32:08]के वजह से तारीख में यह वर्मा ने ही मार बाद में
[32:12]भगवान की औलाद में से है है जिसका मरवा निशानी कह सकते
[32:19]हैं पहला पैगंबर चलाना थी लांच किया हुआ दूसरा कौन जिसकी सीमा
[32:21]पर तो की वजह से पूरे मुसलमान है जहां ने आलम उसको
[32:26]क्या कहते हैं मरवाने है बाद है कि पिंकी इंद्र की हरकतों
[32:32]की वजह से लोगों में जो उनके खिलाफ कर्बला के बाद एक
[32:38]पूरा सिलसिला बगावतों का जारी हुआ था उन बगावतों का आपको आप
[32:42]जानते हैं क्यों बहुत सारे में का मार्ग पर आए मां ने
[32:48]दोबारा बहुत सारे इंकलाब बात और इन तरीकों की सरबराही ने कि
[32:51]उसकी वजह क्या थी क्योंकि पीछे अक्सर लोग थे के जिनको इमामत
[32:56]और विलायत समझ में नहीं आई थी कि है जो अहले बैत
[33:01]के कौन साहब दिलाना चाहते थे जो है बैठकर नहीं है वह
[33:04]यह कह है यह बात से हटाकर इसके तहत पहले मैं आपको
[33:09]बता दो तक पर बैठना है बात का हक नहीं है यह
[33:10]को मतदान चाहिए हां भाई अल्लाह आपको चाहिए ना खुदा रसूल को
[33:15]चाहिए ना दिन को चाहिए हैं और इनकी इस हिमाकत से फायदा
[33:24]किसने उठाया मनु आपस में सारी तेरी के बंधु मैहर के खिलाफ
[33:27]उनको फ्रंट करते रहे उनको सपोर्ट करते रहे क्या करके उस जमाने
[33:34]में अपने आप को अहले बैत के हाथ सरदार पहले बैक का
[33:37]साथी शाम साबित करके या जाहिर करके उन तमाम बनो मैया मुखालिफ
[33:44]तरीकों को बनो अब्बास सपोर्ट करते रहे और कोशिश करते रहे कि
[33:48]इस तरीके से अब यह शिव की जहालत यहां पर या बासी
[33:52]रोटी कहां पर नजर आ रही है कि वह इस चीज को
[33:57]डर ही नहीं कर पा रहे के बाबा खेलावत का माना या
[34:02]हुकूमत का माना वह नहीं है आप के जमाने का है मगर
[34:06]पीछे स्टेप रखे हुए हैं तो इसका माना गया है कि हम
[34:07]अभी तक डायरेक्शन अपनी सीधी नहीं कर पाया था याद दिला दो
[34:15]नतीजा क्या निकला नतीजा यह निकला कि जैसे ही वनवास गई वह
[34:20]बांस के बाद और बल्लू भैया गई बहु मैया के फौरन बाद
[34:23]दोनों बाजू की सारी तैयारी कर रहे थे उन्होंने इस तरफ के
[34:28]लीडिंग 23 अप्रैल को कत्ल किया कत्ल करने के बाद हुकूमत और
[34:33]तक तो उसी तरह सत्ता भी हो गए जैसे बंधु मैया का
[34:34]पेस्ट एक छोटा सा प्रोटेक्शन दूंगा आपको और फिर आपके सहमत हो
[34:40]तमाम कर लूंगा बंदर पास कौन है आप जानते हैं कि पैग़ंबरे
[34:44]अकरम सल्लल्लाहू अलैही वा आलेही व सल्लम के चाचा कि अब देश
[34:56]अपने जनाबे मुखतार एप और जनाब अब्बास जो कि पैगंबर के चाचा
[35:03]है यह पोलो उन्हें सिर नहीं है कि जो शुरू ही से
[35:05]ईमान लाए हो और जनाब अब्बास कि आखिर में इस्लाम लाने वाले
[35:13]लोगों से अ कि पैगंबर पर बिल्कुल शुरू से ईमान लाने वालों
[35:16]में जनाब अबूतालिब अली सलातो अस्सलाम और जनाब हमरा यौन अपराध है
[35:25]कि जो बहुत जल्द पैगंबर परिमाल है और आप ही अ एक
[35:27]चाचा अबू लहब जो कि आखिर तक पैगंबर पर हिमांशु नहीं लगता
[35:36]था और जनाब बारिश आखिर में लेकर आए इनके बेटे हैं दो
[35:39]मशहूर एक अब्दुल्ला और एक उपाय उल्लाह कि अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास पर
[35:47]हम मौला-ए-कायनात ने हमारे और आप किस जिला में बड़ी वर्किंग कि
[35:55]अ मैं इसको हजरत ने चुके आपका चाचा भाई था कि सिर्फ
[35:58]इस वजह से भी नहीं बल्कि आपसे कौन से मोहब्बत रखा था
[36:03]अलग जहर आपके साथ रहता था हजरत ने तब सिरप दौरान के
[36:08]हवाले से और मतालिब के हवाले से इसमें कुछ तालीम की अदालत
[36:10]ने बस को कि आज अगर आप तफसीर रिप्लाई में जाएं आप
[36:16]तफसीर रिप्लाई में अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास को निकाल नहीं सकते चाहे खुशियां
[36:21]मनाते हो जाए सुनने तफ़सीरे रिप्लाई में अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास को खारिज
[36:26]नहीं किया जा सकता दूसरा कौन है उबैदुल्लाह ख़ां है अब मैं
[36:32]बहुत मुक्तसर साहिब इंट्रोडक्शन दूंगा फ्रॉम अब्दुल्लाह कौन है इतना ज्यादा वे
[36:36]अमीर के साथ रहने वाला और आपके इतने आप सब अलग जहर
[36:43]उनसे मोहब्बत रखने वालों और इतना कुछ सिखने वाला अपनी फिल आपत्ति
[36:47]जाहिर या में हजरत ने जब इसको बसरा का बाद में गवर्नर
[36:53]लगाया तो बसरा का माशाल्लाह रात हमेशा तो बहुत ज्यादा है है
[36:58]और बसरा का जो बैतुलमाल है वह हमेशा से बहुत ज्यादा घृणा
[37:02]का बेहतर माहौल इसके हाथ में आया और इसमें पैसा देखा तो
[37:07]उसकी नीयत खराब होना शुरू हो है और आखिर एक वस्तु आया
[37:12]कि जब हजरत के एक सहाबी जनाबे अब अश्व दे दुदली के
[37:17]जिनको हजरत में बहुत सारे वॉल्यूम तालीम के लिए और फिर उन्हों
[37:20]ने आगे कुंकुम को मस्जिद तरक्की धीणे अब वह स्वत वैली ने
[37:26]जब उनकी हरकतें देखी तो हर कोई लेटर लिखा अब हजरत ने
[37:28]सिर्फ वह स्वत वैली के लेटर अपने आप जानते हैं कि आई
[37:32]मेल में रखते हैं लेकिन यह याद रखिएगा क्या मिल रखने का
[37:36]माना यह नहीं है कि आपने ऑयल की बिना पर लोगों को
[37:40]सजाएं दे लोगों को करें बल के मतलब क्या होता है विलोम
[37:42]रखते हैं लेकिन जब तक हम उस पर हम नहीं करेंगे तब
[37:48]तक मामू बजाय रोता है है तो जनाब आप अवश्य द्विवेदी ने
[37:55]अपना फसल यह समझते हुए मां को खत लिखा हमने इनको खत
[37:57]में लिखा हो कहां के तो अपना हिसाब-किताब तो मुझे अब जब
[38:01]हमने हिसाब-किताब मांगा तो बजाय इसके कि आप हिसाब-किताब देते उन्होंने खत
[38:05]में लिखा कि मेरे खिलाफ साजिश हो रही है लोग मुझसे जलते
[38:09]हैं फॉलो करते हुए मामले का भी दे को बात है तुम
[38:13]से हिसाब मांगा तो हिसाब से तो अगर तुम्हारा हिसाब सही है
[38:15]तो मैं किसी से डरने की जरूरत नहीं है तुम्हारा कोई हासिल
[38:20]हो जाए कुछ भी हो तो मैं यहां पर है कि जब
[38:22]इसे टालने की कोशिश की तो हजरत खत लिखा आ जाए तो
[38:26]फिर मगर तुम हिसाब-किताब नहीं दिया तो मैं फिर दूसरा कर लेता
[38:28]आऊंगा मैं है और जब हजरत का में दूसरा आकर हिसाब लूंगा
[38:32]तो यह समझ में आ गया कि हजरत बस रहेंगे अब मैं
[38:36]चला गया था अपने दादा रिश्तेदारों से मदद नहीं ले सकता था
[38:42]क्यों इसलिए क्या वह अक्षरा मिथुन राशि में उनमें से कोई भी
[38:45]जाकर इमाम को चला दे सकता है अपने ननिहाल है रिश्तेदारों से
[38:54]अपने मामलों से मदद ली और छह लाख फिर हम रातों रात
[38:56]अपने ननिहाल रिश्तेदारों के साथ लेकर मक्का फरार करके अ कौन-कौन है
[39:03]और अब तो लैपटॉप पास में प्रॉब्लम ना बस कौन है वह
[39:10]तुम्हें अपने पास है कि और हजरत ही के दौर में अमीर
[39:18]सामने माफिया ने मुसलमान बाद इलाकों पर अपने कारिंदों को भेजा उन्होंने
[39:23]जाकर शिया इलाकों में कत्लोगारत करने की ओर एक इलाका जिसकी कि
[39:29]एडमिशन उबैद उल्लाह ने बस हाथ में जूस पिलाकर पर हमला किया
[39:33]बहुत सारे लोगों को क़त्ल किया कि अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास के बच्चों
[39:39]को कत्ल किया और एक इसके छोटे बेटे को उसकी मां की
[39:42]गोद में कत्ल किया अ का हिस्सा नहीं और हादसे से वह
[39:48]खातून पागल हो गई हो कि इमाम हसन मुस्तफा दशरथो सलाम ने
[39:56]अमीर शाम से मुकाबले के लिए अब जानते हैं यह क्या होता
[39:58]था वहां पर इतना महाविद्या हज़रत इमाम हसन अली सलातो सलाम से
[40:06]भरा हुआ था कि आप जो भी लश्कर का फरमान था बनाकर
[40:07]भेजते यह बैतुलमाल को अपने अब्बा की जागीर समझते हुए रिश्वत देकर
[40:15]उसको खरीद लेते हैं और दूसरी जाने जो भी इमाम लगाते आखिर
[40:25]में इमाम ने किसको भेजा उलट ने अब्बास को क्या सोचकर यह
[40:27]इतने जख्म चुका है इनके हाथों कम से कम अपने बच्चों के
[40:34]कातिल अपनी फैमिली के कातिलों से यह सौदा नहीं करेगा लेकिन इमाम
[40:37]हसन मुरब्बा कि मशरूम हत्या सामने आती यहां पर सब गलत है
[40:42]273 पैसों की चमक ने अब को बेहतर लाइफ में है अब्बास
[40:48]को भी क्या किया मिलाकर अपने ही बच्चों के कातिलों से शुद्ध
[40:55]करती थी कि यह मामला सामने मुसलमान कि मशरूम यू मुंबा अब्बास
[40:59]का शजरा जनाब अब्बास के बाद जिन अपराधों से चला है उनका
[41:07]मोरल कैरक्टर आपके सामने सा जाता है कौन लोग यह जो पैसा
[41:09]देखकर कुछ दिन बेच देता है अरे यह क्या जॉब का कैरेक्टर
[41:17]आगे भी जो करेक्टर सामने तो यह था लिहाजा इन की बाद
[41:19]अलार्म थे जो औलादें आगे चलकर हराम के पैसों पर पली हो
[41:25]उनके अंदर जो जरा सिंपल जाएंगे तो यही होंगे अहले बैत को
[41:31]ज्यादा जिस वक्त दोनों समय अपने सदी जोश के दौर में दाखिल
[41:34]हुई है वह स्टॉर्म यह अपना नाम लेकर नहीं बल्कि हर रोज
[41:39]मिनाले मोहम्मद का नारा लगाकर यह शख्स नहीं करते थे कि आले
[41:41]मोहम्मद कौन है बल्कि क्या कहते थे आर रहमान में नाले मोहम्मद
[41:46]आले मोहम्मद में से किसी एक को भी राजी करने के लिए
[41:49]हम यह तेरी चला रहे हो हैं और वहां पर इन्होंने क्या
[41:54]किया कि पहले वे तलेसरा तो सलाम की बात औलादों को मशीन
[41:56]जनाबे इज्जत की औलाद जाना विनर सिद्ध किया की औलाद इनमें से
[42:02]बाहर अपराध को सपोर्ट करना शुरू किया और फिर अब क्या हुआ
[42:04]लाल बात है मिलाकर अहले बैत अलैहिमुस्सलाम तो सलाम के आई एम
[42:09]ए मासूम इन को छोड़कर जो अपराध हैं अ को उनका हक
[42:14]नहीं है हुकूमत हुकूमत असल में किसका हाथ है लिए बेहतर थार
[42:19]का बजे संजना बेइज्जत की जितनी भी कोशिश है जनाब इज्जत की
[42:22]कोशिशों का हद तक यहीं था कि मैं समझदार हूं उनका मकसद
[42:27]क्या था कि एक दफा बंधु मैया को बड़ी शिकस्त देकर और
[42:33]हकूमत दोबारा एम के हाथ में दीजिए और इमामत के फलसफे को
[42:36]लोगों तक पहुंचाया जाए लेकिन तारीख गवाह है कि जब अपने जमाने
[42:42]के हक की है आज़म ने उनको धोखा दिया और फिर वह
[42:46]एक बहुत ही छोटी सी फौज उनकी रह गई और फिर भी
[42:47]धरती के साथ सारे सहित किए गए तो उनका जो मकसद था
[42:51]और हफ्तों था वह कामयाब नहीं हो सका लेकिन लाभ पहले बेहतर
[42:56]है मसला तो शराब के खानदान के सारे अपराध ऐसे नहीं है
[42:59]ज्यादा इन्होंने चुनकर बाद ऐसे अपराधों को उठाया कि जिनको इन्होंने एक
[43:07]तरह का लीडरशिप देखकर एक तरह की इमामत और खिलाफत का लालच
[43:10]देकर अपने साथ मिला लिया है कि अब आई एम वहां पर
[43:14]क्या कर सकते थे इमाम ने मिश्रण दिमाग में जाफर सादिक अलैहिस्सलाम
[43:17]को सलाम ने हुआ है को नपुंसक व्यक्ति जो बेटे वगैरह थे
[43:27]उनको बाहर टॉप प्रेम ने फरमाया कि तुम्हें धोखा दे रहे हैं
[43:30]यह तो एक दिन कि जब उनका हाथ दफन का मकसद पूरा
[43:37]ध्यान कत्ल कर देंगे लेकिन उनको यकीन नहीं आता था कि यह
[43:40]हमारे इतने बेहतरीन सपोर्टर दिया हमारे लिए इतना सब कुछ करने वाले
[43:45]यह हमारे मुल्क कैसे हो सकते हैं है लेकिन इमाम की चश्मा
[43:50]प्रसिद्ध देख रही है मामला समझाया भी लेकिन इनकी समझ में नहीं
[43:53]आया ज्यादा क्या हुआ इमाम के मुकाबले पर इन्हीं की सपोर्ट से
[43:59]पूरा माहौल बनाकर तैयार किया और जब वह आज पूरा इस काबिल
[44:05]हो गया कि वह महज है वह बलों मैया के मुकाबले पर
[44:06]आकर तक पर कब्जा कर ले इनको कत्ल किया और फिर अबू
[44:11]जफर मंसूरी दबाने चाहिए पहला बातचीत खरीफ के अनुमान से आकर तत्व
[44:16]बैठ जाता है है अब आप और की जगह अगर बनूं अब्बास
[44:22]कभी भी पहले बेहतर मसला तो सलाम के साथ या दिन के
[44:23]साथ अगर मुख लेस होते तो अहले बैत हार के साथ वही
[44:28]सलूक रवाना रखे दोनों तारीख पर रखा है से ज्यादा बारिश माता
[44:33]मार्ग पर यह नजर आता है कि अहले बैत के मोहित वर्षों
[44:38]से हफ्ता जो सुलूक बंधु मैया के दौर में नहीं किया गया
[44:40]उससे ज्यादा बदतर सलूक न बनो पास के गांवों में चाहिए कि
[44:46]इतनी बड़ी तादाद में शिव को कत्ल किया गया और फिर आई
[44:50]एम को पैदल पर कत्ल किया गया कि इस जादा बद्तर हमें
[44:56]तारीख में अपराध नहीं मिलते मंसूरी दबाने ही नाश्ता नहीं करता था
[44:59]जब तक बड़ी तादात में शिव को पतले करवा देता हुआ है
[45:05]कि आप इन्होंने धोखा देने के बाद इन्होंने सारा कुछ करने के
[45:09]बाद सिर्फ यह नहीं कि आई मस्से धोखा किया है बनी अब्बास
[45:13]के आगे की हिस्ट्री वह बताती है कि इन्होंने असलम भीम को
[45:16]नुकसान पहुंचाने के लिए भीम के रिश्ते को कमज़ोर करने के लिए
[45:22]यह जो हार और मामून के बारे में झूठी कहानियां गढ़ी गई
[45:24]है कि बड़े इल्म दोस्त थे और यह करते थे वफ़ा करते
[45:29]रहे हम तो कि असलम एल्बम का इस खानदान से दूर-दूर तक
[45:32]कोई वास्ता नहीं है इल्म दोस्त है तो कोई एक लाइन जरा
[45:36]कोई एक नुस्खा लाएं हारून का बताएं हमें जरा के जी हां
[45:42]अरुण सांप के यह क्लेम आफ थे उन्होंने यह किताब लिखी चलाएं
[45:45]यह किताब छोड़ो तुम हारून का कोई एक ऐसा इल्मी हकीमाना बुलाकर
[45:51]तारीख में साबित कर दो कि हर उन्हें गाया पिघला हमसे जाहिलों
[45:55]का मामून का कोई एक जुमला कर तारीख में स्थापित करने एवं
[46:01]दोस्त कोई दोस्ती नहीं थी बल्कि शांति शांति जब यह बेहतर लेमन
[46:05]सलातो सलाम के एल्बम को देखते थे तेरे को ज्यादा अच्छी होती
[46:11]है है और आप यह महालय सलातो सलाम को अभिनव ने देखा
[46:12]कि हम इनको किसी भी तरह से इनके तक वार पर इस
[46:17]गाड़ी में दोष कैसे दे सकते हैं कि सियासी अतः बार से
[46:21]भी हम जो मर्जी कर लें इनकी सियासी बसीरत उसका मुकाबला नहीं
[46:25]कर सकता था कि इनको टू शलाका लेने दिया हुआ है उस
[46:32]हम तोड़ नहीं सकते तो और आखिरी हल्का सा दिमाग में आया
[46:35]कि भई यह जो इस वक्त यूरोप का इल्म है जिससे अभी
[46:40]मुसलमान बिल्कुल ना आएगा है वह फलसफा मनाते और भाग्य फिल्म में
[46:44]फल अज्ञात वगैरह-वगैरह रियासी वगैरह इस सबको तर्ज़ुमा कराया जाए ताकि फिल्मी
[46:50]दुनिया में कोई चीज एक ऐसी हमारे हाथ लग जाए कि जो
[46:55]पहले बैक को लाजवाब कर सकता है से ज्यादा जिसको कहा जा
[47:00]सकता है कि लोग कहते जी-मेल की ट्रांसमिशन की एक बड़ी तहरीर
[47:04]चलाई गई वह फिल्म की ट्रांसमिशन की सबसे बड़ी फिल्म दुश्मन ठहरी
[47:12]थी अ है याद रखिएगा फिल्मी दुनिया में अगर पैसे की इंवॉल्वमेंट
[47:16]हो जाए तो फिर ऑयल में काम सामने नहीं आता मैं इसको
[47:22]अपने शहर में बातें करने की याद रखें मुझे 12 पढ़े-लिखे भ्रष्ट
[47:29]प्रोफेसर साहब या मौजूद है यह याद रखिएगा कि एल्बम और दौलत
[47:31]यह तो थी तभी जमा नहीं हो सकते अगर आपको इल्म हासिल
[47:35]करना है तो दौलत को भूल जाएं तो कि दौलत नहीं है
[47:40]फिर आपके लिए यह नहीं हो सकता कि आप यह है कि
[47:44]इन भी मिले हमें गलत नहीं हो सकता चमक ज्यादा अहले बैत
[47:46]ने भी कभी द्वारा थी खट्टी की क्यों नहीं की इससे पहले
[47:49]जानते हैं फिल्म रहेगा तो दौलत नहीं कर सकती जो एल्बम दौलत
[47:55]इकट्ठा करने के लिए स्माल ऑयल नहीं है से ज्यादा एनपी दुनिया
[48:00]के इंसेंटिव फिल्मी दुनिया के अंदर जो तरह रोका तो होते हैं
[48:02]वह इल्मी होने चाहिए मसलन जब हम किसी किताब का तर्जुमा करना
[48:08]चाहते हैं तो उसका जो मोहरे के व इल्मी मोहर रखना चाहिए
[48:13]अब इनकी मोहरे क्या होता है ईद मुबारक होता है कि मैं
[48:16]सलमान फलसफे का कोई आलिम फलसफा यह मंत्र पढ़ने के बाद जरूरत
[48:23]महसूस करेंगी वहीं फ़लसफ़ी के जो प्रकार है इन को तल जुड़ा
[48:25]होना जरूरी हो अब वह उस के अकार को तक जमा करने
[48:29]के लिए क्या करेगा कि वह जापान भी सीखेगा जिस जवान उसने
[48:35]काम की है है ताकि उसके अकार को सही से समझ सके
[48:41]और जब वह उसकी उस जवान को इस हद तक सीख लेगा
[48:41]अपनी तौर पर क्या करेगा उसके काम को तर्जुमा करेगा अपनी जबान
[48:47]में ताकि कोई गलत ही कोई स्टेट बाकी दरमियां में ना रहे
[48:52]आप इसके मुकाबले पर कि मैं अगर आपके यहां पर आज बसरा
[48:57]ने ऐलान कर दो मैं तो बिजी मसलन इमाम ख़ुमैनी रुझान लगता
[48:59]है कि फलां किताब है जो कोई भी मसलन है वह तर्जुमा
[49:05]करेगा तो मैं उसको एक लाख रुपये दूंगा या 2 लाख रुपए
[49:09]दूंगा यह ₹1000000 दूंगा यह किताब के वजन के बराबर थोड़ा दूंगा
[49:11]आज अगर मैं यह ऐलान कर दूं आप सारे शुरू करेंगे तो
[49:16]जमा करने की खातिर क्यों भाई किताब के वजन के बराबर सोना
[49:18]मिलेगा यह जो किताब के वजन के बराबर सोना मिलने पर तरीकों
[49:24]में होंगे यह सारे के सारे हेयर ऑइल मित्तल के में होगा
[49:29]और इन में सॉफ्ट सब गलत क्यों की गुंजाइश बाकी रहेगी क्योंकि
[49:31]यहां पर हदफ एल्बम नहीं है यहां पर यादव सोना है से
[49:36]ज्यादा हारून अब उनके बारे में यही काम करवाए गए उसका नतीजा
[49:42]क्या निकला लालची लोगों ने खुद कर वोट आंसर जो मैं करना
[49:44]शुरू किया वह बजाय इसके कि वह उनको सही से समझ में
[49:49]आते हैं वहीं उनकी समझ में नहीं है जिसका नतीजा क्या हुआ
[49:55]इस्लामी दुनिया में इलाहाबाद और को प्रसिद्ध के साथ पहले लगा या
[49:57]नहीं जो टीम को शिकस्त देने के लिए उन्होंने महाला शुरू किया
[50:02]तब अपने ही गले का बवाल हो गया इसीलिए आप गौर करें
[50:06]कि इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम तो सलाम का दौर अपनी जगह पर
[50:10]है के साथ में इमाम का दौर जून उजरा है लेकिन आठवें
[50:19]यह मांग की जिंदगी भरी में मंत्रों से आठवें मान अभिमान के
[50:24]इतने जो कसरत से मना धीरे मिलता है इसी वजह क्या थी
[50:29]जो वह बाल जो अपनी गर्दन में डाल लिया था वह कुछ
[50:29]संभल नहीं रहा है से ज्यादा मामू न्य कि हमारे था बाद
[50:37]में मामले में मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम को सलाम इन दो आई एम
[50:39]अक्षर यह से उन तमाम व बालों को कंट्रोल करने की कोशिश
[50:44]की है कि डोंट अपने हाथों से गले में आ गए थे
[50:48]और जिससे दिन को नुकसान पहुंचा था यह याद रखिएगा कि तूने
[50:50]तारीख में हमारे पास यह चीज साबित हैं कि जहां कहीं पर
[50:55]भी अधीन खतरे में पड़ा जो तीन के हाथी बारिश से वह
[50:59]आकर जो है वह दिन को बचाने के लिए ज्यादा उस ढाई
[51:03]सौ साल में आए मैंने कवर कम यह दाम कर दिया था
[51:06]कि दिन का भी खतरे में न पड़े और अपने प्रत्येक है
[51:08]बट में रहकर भी इमाम ने हमेशा जो कोशिश रखी अपनी वही
[51:11]रखी के दिन खत्म ना हो पर दिन बाद ही रहेगा लेकिन
[51:16]यह क्या अब आप कर दोबारा हटी वारिस अधीन हट यह प्रॉब्लम
[51:20]हमारे पर हुकूमत करें उसके लिए जरूरी है कि हम दोबारा हकुमत
[51:26]इस्लामिया का पयाम और हम और आप चाहे जैसे बाद औकात हम
[51:31]बॉयज सियासी पार्टियों से मुश्किल हो जाते हैं कि हमारे हक दिलाएंगे
[51:33]अगर इतने सालों में भी कुछ समझ में नहीं आया तो फिर
[51:39]आपका हक नहीं है कि वह में मासूमों पर हुकूमत करें अ
[51:40]आज रात भर याद रखेगा किसी भी पार्टी से के लिए अपने
[51:44]काम किया हो कभी भी किसी भी पार्टी को आपने आप अगर
[51:47]आप दोबारा किसी पार्टी को अपने लिए ने ज्यादा समझ रहे हैं
[51:49]आपका खत इन के सबसे जुदा है और कोई नहीं है सब
[51:55]को अपनाकर देखिए अब यह समझ में नहीं आ रहा तो फिर
[51:59]हाथ नहीं आपका और हमारा कि हमारे परिवार में आंसू भर करें
[52:01]ज्यादा आप हमारी हरकत हमारी की तरफ होनी चाहिए कोई नहीं कोई
[52:07]पार्टी नहीं चाहिए हमें हमें कोई मुद्रा नहीं चाहिए हम सिर्फ यह
[52:10]चाहते हैं पाकिस्तान बना किसलिए था ताकि दिन की हुकूमत इस पर
[52:15]जा रही हो और अब हमारी यह जो नजर है और आप
[52:18]जो हमारी हरकतें जो इसी तरफ होनी चाहिए कि अगर हमने इस
[52:20]हरकत के जरिए सिर्फ खुदा के हुजूर में यह बात साबित कर
[52:24]दी कि हम आमादा है अधीन की हुकूमत को अपने ऊपर जारी
[52:28]करने के लिए तो इंशाल्लाह इंशाल्लाह हमारा भी हिसाब-किताब उन अपराधों में
[52:33]हो सकता है कि जैम आम के अनुसार कहलाएंगे इंशाल्लाह की दुआ
[52:38]करते हैं परवरदिगार के हुजूर में बारे इलाहाबाद साहब के मोहम्मद वाले
[52:41]मोहम्मद रहमत शर्त वसल्लम हमें दिन समझने और उस पर अमल करने
[52:47]की तौफीक हिदायत वर्मा हां यह दशहरा अभी हम अपने यह बनी
[52:50]हुआ था दिन के हर ट्यूब बारिश और ओले अमेझान शहादत को
[52:53]सलाम के मशहूर अभिनेता विल प्रभाव बहरा बारला हफ्ते जरा अभी हम
[53:00]पहले हम अपनी यहां पर हमने इन्हें जालिमो क अपनी ग़लतियों से
[53:03]अपने पर गुफा लगती है परवरदिगार और आज उनकी वजह से दुनियां
[53:08]में जो ज़ुल्म का बाजार गर्म है बेहाल इलाहाबाद हफ्ते यह रा
[53:11]बाह भाई बाह बाह बनिया मजलूमों के हटी की हामी यह मुसलमान
[53:14]अक्षरा को चला कि जब उन्हें दिल पर बाप और दुनिया से
[53:18]जून कि इस प्रसाद को नाबूत वर्मा खत्म वर्मा तमाम आलम राज
[53:25]एग्जाम की हिफाजत फरमा जहां-जहां में नींबू तिल से भर सारे बेकार
[53:28]है बहराइच में यमन में इराक में शाम में सऊदी अरब में
[53:33]लोकनाथ में नाइजीरिया में उन सबको नक्षत्रों कामयाबी का सफर में अंपायर
[53:36]यह बिल्कुल इस पर ऋषि कैमरों कश्मीर के अनुसार कामयाबी यह वर्मा
[53:40]MP3 दुश्मन ताकतों और बिल्खुसुस अमरीका और इसराइल और उसके गुणों के
[53:47]बारे इलाहा नीड्स टो नो अबाउट चर्म आफ व तमाम अलम राज
[53:49]एग्जाम की हिफाजत फरमा जितने हमारे बेगुनाह सीरम तो जल्द से जल्द
[53:56]रहा यह लाइक शर्मा बिल्कुल शायद सिचुएशन जनाब अशोक भाई मजाक और
[53:59]उनके लिए कुछ जल्द से जल्द ही विनायक शर्मा हम सबको एक
[54:04]मुसलमान शराब को सलाम के आदेशानुसार में शुमार होने की तौफीक अदा
[54:08]फरमा फेयरर बनाता कंबल में नाप इंद्रकांत सिमिलरली इन बरामती गया और
[54:16]हमर राशि मीन है
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