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Insani Zindagi Main Dua Ka Kirdar | H.I Zair Abbas
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22/04/03
Record date: 03 April 2022 - انسانی زندگی میں دعا کا کردار AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/groups/almehdies 🎥 www.youtube.com/almehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:00]झाल मैं इसमें लुट झाल धुंध तो आप सवा तो बस वाला
[0:26]मोहल्ला व परिश्रम दलित किया तेल बालों को हरियाणा लाभकारी हर पखवाड़े
[0:37]ए बलमा इन थे डॉक यह नॉमिनल महाराज सोंग ई लव सीन
[0:44]जहां पति जटिल धुंध लुट बना डाल धमारा घाट झाला के नेतृत्व
[0:57]में दिल न जीत पाओ कुंठित और अ जी वह इधर सहकार
[1:04]गांधी पर हिंदी खरीदता कि 15 साल का एक आदमी अपनी फाइन
[1:12]ही खरीद जयपुर दावत दशरेनद्र गिरा दाणा स्वातंत्र्य भावना है झाल के
[1:25]लाभ की धार्मिक एक घोल आधी तो ठीक नहीं कर पाई है
[1:32]यह मतलब फिर जिंदगी नसीम कर पाई कि हम अपनी जिंदगी में
[1:40]एक पल तरफ मात्रा मसान की हरकतों को तर कर सकते हैं
[1:45]कि अगर मैं महेंद्र मस्तान की बरकतों का इधर आ इंसान को
[1:53]हो जाए को सुनें कि इन बरगु सूद की जो खुशी है
[2:02]उसी को तरह कॉल नहीं कर पाया हैं मसलन पास रहेगा याद
[2:09]मिलता है यह कि अगर इंसान को पता चल जाए रे माहे
[2:14]रमजान के अंदर इंसान को क्या कुछ मिलता है के प्रमुख हाफ़िज़
[2:22]करेगा कैश सारा साल मेहर अवतार है को फिर से हाई पावर
[2:29]पर बन जाता है इसी वजह से इसको सिल यह तो शुभ
[2:33]मुहूर्त के नाम से याद किया जाता है यानी तमाम महीनों का
[2:36]सरदार है कि मेरा जो कि मोदी नहीं है मैं हक मुकदमे
[2:43]के तौर पर मतलब ध्यान करके अपने मौजूदा ऊपर आता हूं है
[2:50]कि जैसा कि आपने देखा है इंसान अपनी जिंदगी में मुख्तलिफ हालात
[2:58]रखता है भी कभी इंसान जो है बहुत भोजन सी तबीयत रखता
[3:01]है उसमें बिना किसी की बात सुनने का दिल करता है ना
[3:07]बात करने का दिल करता है कि इंसान है वह इस बात
[3:14]का एहसास करता है कि मेरे अंदर एक ऐसी कैफियत है कि
[3:18]मैं दूसरे की बात को सही तरीके से सुनना चाहता हूं और
[3:26]बोलना चाहता हूं कि इंसान की हर्षाली कैफियत होती है कि अगर
[3:38]हम कि इन महीनों के अंदर देखें मैं तो खुद इस जमाने
[3:46]के अंदर ऐसी आखिरी व्यक्ति मौजूद है कि इस महीने में इंसान
[3:50]में ऐसी सलाह स्थिति आ जाती है कि अगर वह कुछ समझना
[3:57]चाहते तो जो मतलब प्रॉब्लम से हटकर कुछ दिनों में समझे का
[4:04]यह निशान में वह चंद मिनटों में समा जाता है कि अगर
[4:08]वह कोई बरकत हासिल करना चाहता है तो जहां पर उसको मेहनत
[4:13]की जरूरत थी बाकी महीनों में ज्यादा वहां पर अगर एक सेकेंड
[4:20]के अंदर सब्सक्राइब करें उसको में मिल जाती है क्यों मारा बाजार
[4:28]के अंदर आप देखेंगे तो सिलसिला तो कभी मुलायम से चला आ
[4:36]रहा है के दर्शकों का इंकार किया जाता है कि आप देखें
[4:41]पूरे पाकिस्तान को कि अगर पूरी दुनिया में आप देखें मांग रहा
[4:48]बलिदान के अंदर यह सी रही है और लंबा कि बुजुर्गों की
[4:50]में पानी आने मस्जिद Jio जितने भी आधा पका जो है वह
[4:57]मध्य नजर रखें दलितों का इनकार करने के लिए सीरप चली क्यों
[5:03]कभी इसके ऊपर की ओर करें क्योंकि सीरियसली है उसकी वजह यह
[5:06]है कि माहे रमज़ान के अंदर पौधा इसके निशान के ज़प को
[5:12]इतना बसी कर देता है कि महरे मोहम्मद हाल मोहम्मद को आसानी
[5:20]से हासिल करना शुरू कर देता है में 110 गांव पहले से
[5:25]है तो सही लेकिन समझने की सलाहियत हनुमान ज्यादा आ जाती है
[5:28]क्योंकि इंसान के अंदर बहुत सारी चीजें आप एहसास करते हैं वह
[5:35]हम सामने देखिए आप आप रोज से होंगे इंसान पहले से यह
[5:41]सहूलियत बनाकर आया हुआ है कि यह पौधा का महीना है कि
[5:45]आप देखें कि इस महीने के अंदर इंसान की जो तत्व जो
[5:50]है वह बाकी महीनों के लिए इस वक्त खुदा की तरफ ज्यादा
[5:55]होती है और इसी वजह से [संगीत] कि वह इंसान के जो
[6:01]बाकी महीने में सुस्ती कर जाता है लेकिन माहे रमज़ान में देखते
[6:04]हैं कि उस उसी नहीं करता निवास पर टाइम पर हाजिर हो
[6:09]रहा है तिलावत में अपनी हाजिरी लगा रहा है और वहां पर
[6:14]तिलावत कर रहा है दर्स अगर हो रहा है तो 10:00 वह
[6:19]सुन रहा है लेकिन यही इंसान अगर महीने माहे रमजान से हटकर
[6:21]देखा जाए तो यह कहता हूं यह दर्शाता है कि मेरे पास
[6:26]तो वक्त नहीं है मैं मजबूर हूं ज्यादा दिमाग को ज्यादा Facebook
[6:29]रैप दी जाती है और ना दर्द को बिल्कुल घी ऐड जगह
[6:35]नहीं होती है उसमें तो यह था कि फिर तो उसे इस
[6:40]यात्रा करने की जरूरत है यह जो फुर्सत नसीब होती है माहे
[6:41]रमज़ान के अंदर में दर्द की शक्ल में हो जाएं तिलावत की
[6:46]शक्ल में हो जाएं तब सिर की शक्ल में हो जाने इन
[6:50]नुस्खों से इंसान वाकरण सही माना में सफलता करें फिर शाला पुराने
[6:57]वक्त किसी और अगर आप जो है माहे रमज़ान की क्या फस
[6:59]लूप है उसके अंदर क्या गुस्सा है कि जो इंसान इसके अंदर
[7:04]जो बरकतें किस तरीके से ज्यादा से ज्यादा पड़ सकता है कि
[7:11]उस मक़ाम पर खर्च होगा कि कि जिस ऊपर आज आपके साथ
[7:17]गुफ्तगू करने का इरादा है वह है तो आप अ और दुरूह
[7:22]मोहिता महमूद हम समझते हैं और इसी वजह से आप देखें चुप
[7:32]इसको बहुत सा लेते हैं मैं इसी तरह जो भी ली होती
[7:34]आज दोपहर का माप मूलन जो कंसेप्ट हमारे अंदर बन चुका है
[7:41]वह क्या है कि जब इंसान पर कोई मुश्किल पेश न आए
[7:50]थे कि खुदा की बारगाह में जाकर दुआ कर दें कि पध
[7:52]मेरी यह मुश्किल भर तरफ वर्मा करो कि इससे ज्यादा मेरा हाल
[7:58]में जो आग का कंसेप्ट नहीं पाया जाता है कि बच्चा वह
[8:02]बड़ा हो बड़ा वो पढ़ा लिखा हो जो भी हो दोहा के
[8:06]बारे में अगर उससे पूछा जाए है कि दाणा यानि क्या दो
[8:15]आंख्यों जरूरी है अब तो जवाब यही मिलेगा के मुलान है दाणा
[8:18]इसलिए करार दी है का के अगर आपको मुश्किल आ पेश पाएं
[8:24]तो मेरी बार गांव में आकर मुझे पुकारो मां कि इस कंसेप्ट
[8:30]कि यह जो धागा बना हुआ है इसने इंसान की जिंदगी में
[8:35]जो का हसीन तो आने रखनी थी वह खत्म हो गई है
[8:39]है क्योंकि जब कि समुद्री यह है कि मैंने खुदा की बारगाह
[8:45]में 28 तक करनी है कि जब मुश्किलात हो तो जिसको मुश्किल
[8:51]नहीं होगी क्या वह दुआ करेगा कि आप अपनी जिंदगियों के अंदर
[8:58]भी अगर देखने उदार है अगर कोई मुश्किल आपकी जिंदगी ने नदी
[9:00]हो क्या दुआ करने का दिल करता है है इंसान सोचता है
[9:06]अपने अंदर के द्वारा क्या करूं जब मेरे पास सब कुछ मौजूद
[9:11]है तो आप करने की क्या जरूरत है हां जब कभी मुश्किल
[9:13]पेश आएगी तो मैं दुआ कर दूंगा लेकिन जब आप ब्राउन अब
[9:20]हम मैं हरीश की तरफ रुख करते हैं तो बुखार का हु
[9:23]उसी तरीके से दिया जा रहा है जिस तरीके से निर्माण का
[9:29]हुक्म दिया जा रहा है है यानी दो आंखों के बाद अब
[9:36]के उनवान से पेश किया जा रहा है ना आगे इस प्रकार
[9:43]पकड़ मुश्किलात को पर तरफ करने का एक जरिया है की दुआ
[9:47]थिस लैंड कि अगर आपको आगे की तरफ़ रुजू करें तो आपको
[9:50]अनुसार तेल आयात जो है तो आंखें बारे में मिलेंगी हैं मसलन
[9:56]एक सूर्यकात फिर की आयत नंबर 60 की तरफ को म्यूट करें
[10:01]अगर तो किस तरीके से परेशान हो रहा है व का लाभ
[10:05]काम गुरु नियर सचिव लक्ष्यों को मैं तुम्हारे परवरदिगार ने कहा है
[10:13]घर के उपर कुनी मुझे पुकारों अस्तर जब लोगों ने कि मैं
[10:19]जवाब दूंगा मैं थे पैनल अधीन अभी तक ब्रूना अनलाइक बांधती थी
[10:24]हैं और जिन लोगों ने मेरी कृपा तक आज के मुकाबले में
[10:30]स्थित बार दिखाया यानि मेरी इबादत को छोड़ दिया दिल्ली के बाद
[10:36]अब तक हमारे यहां पर पास चुके पहले जो आपकी बात हो
[10:38]रही है जिसने यह बात छोड़ दी इससे एक बार दिखाया इस
[10:44]दुख के बादल के मुकाबले ने स्वयं तो खोलून जहन नमः के
[10:50]दाग पिंपल यह लोग जहन्नम में हमेशा के लिए रहेंगे अ है
[10:54]अब देखिए यहां पर दो आखिरी रूप दिया जा रहा है और
[11:00]कोई कैद नहीं लगी हुई है कि आपने खुदा को पुकारना है
[11:06]कब है बल्कि मतलब तौर पर कहा जा रहा है यहां पर
[11:09]को दोगुनी हस्तक्षेप अलार्म मुझे पुकारो मैं तुम्हारी बातों को कबूल कर
[11:14]लूंगा जवाब दूंगा मैं तुम्हारा हूं मैं इसी तरीके से अगर आप
[11:23]दूसरी आयत की तरफ़ रूजू करें सुरखपुर काम की आयत नंबर 727
[11:26]है मैं परेशान हो रहा है कि साधो विलेन श्वेतलाना जी पूजा-पाठ
[11:37]यह अ बेगम और अपील आग हां हुकुम कह दीजिए और अगर
[11:41]तुम्हारी तो आए ना होती है तो कि मेरा परवरदिगार तुम्हारी परवाह
[11:52]ही नहीं करता है और अगर खुदा को तुम्हारी परवाह है जिसकी
[11:57]वजह से है तुम्हारी दुआओं की वजह से मैं और फिर दोहा
[12:05]है आज के जो पौधा और मतलब के दरमियान रात देकर सबब
[12:08]बनी हुई है कि कितना साथ लहजा है आपने देखा पूरा को
[12:13]परवाह नहीं है पुल कह दो मां या अ बेगम रवि मिश्रा
[12:19]तुम्हारी कोई परवाह नहीं करता लॉक तो आंखों में अगर तुम्हारी बेवफाई
[12:24]ना होती है हैंड्स फ्री को आयत में जाकर साथ दोबारा हो
[12:31]रहा है के सूरए बक़रा की आयत नंबर वन 286 हेलो हाउ
[12:36]टू लर्न श्वेता नंदा जी वह थोड़ा सा लगता है बुद्धि कुंठित
[12:42]खरीदना है है कि जब मेरे बंदे और मेरे बारे में पूछें
[12:49]कुछ तो कहो मैं गरीब हूं पहनी करी थी कि पूंजी बोदव
[12:58]तक दाणी इरादा मन में है को और पुख्ता करने वालों की
[13:04]पुकार कब मैं जवाब देता हूं कि तेजाब मुझे पुकारा जाए तो
[13:12]मैं कि उनकी उस पुकार का जवाब देता हूं एक पाल यस
[13:17]ताजी मूली वन गुडमैन उबी लाखों वर्षों पहले भी चाहिए कि वह
[13:24]मेरी दावत पर लब्बैक कहें पल यह सब्जी पूरी उन्हें और पर
[13:30]ईमान रखते हैं दुनिया का त्यौहार लोग हिदायत खा जाते हैं और
[13:37]हिदायत के दरमियान राब्ता बन रहा है है कि मुझे पुकारा हो
[13:46]कि मैं तुम्हारी इस प्रकार का जवाब दूंगा और यह पुकारना क्यों
[13:55]है मुमकिन है कि यह आयत पा जायेंगे 12 हाइक इबादत के
[14:01]कंसेप्ट के साथ अगर समझें तो फिर समझ में आएगा कि इस
[14:08]दुआ कतर क्या-क्या राज पोशीदा है और इंसान अगर उन राज्यों से
[14:11]आगे होना शुरू हो जाएगा तो इंसान कभी खुदा से दूर होने
[14:18]की सोच भी नहीं रखेगा अ को पकड़ने महमूद क्लियर करने की
[14:25]जरूरत है कि तो आना है क्या कि दोहा यह नहर में
[14:32]बिठा लें कि मानने का नाम नहीं है कि हमने 21 अंक
[14:38]बनाया होगा तो आदि मांगना तो आप मानना नहीं है है तो
[14:45]आप पुकारना है कि खुदा को पुकारना है कि अब खुदा की
[14:51]बारगाह में जब जाकर आप खुद आपको पुकार एंगे तो क्या करें
[14:56]पुकारकर आई एम अलैहिमुस्सलाम नुस्खा सलीका सिखाया है कोई ऐसा महीना कोई
[15:01]ऐसा दिन कोई ऐसी मुनासिब अगर खाली नहीं है कि जिसके अंदर
[15:05]मासूमियत ने हमें दोहा काली नदी को कि अगर आप इन दवाओं
[15:15]के उत्तर देखें है तो यहां पर हमें फकत मांगना नजर नहीं
[15:18]आता कि हमें इन दवाओं के अंदर तो हुई नजर आती है
[15:24]आदमी नजर आता है बुरी नजर आती है इमामत नजर आती है
[15:31]कयामत की नजर आती है कि आप अगर तो आपको इस नगर
[15:38]से मुकाबला करना शुरू करें तो आपको यह तमाम रेणु कि इन
[15:42]दोनों के अंदर नजर आएंगे कि एक इस दर्द के अंदर उन
[15:47]सारी बातों को कवर करना बहुत ज्यादा मुश्किल है मैं अक्षरा करके
[15:50]गुजर रहा हूं तेजस्विता को तवज्जो आ जाए कि द्वारा कितनी अहमियत
[15:56]का हाल मौज़ू है और फिर इन दोनों के अंदर सवाल जो
[16:01]किस तरीके से करनी है बस एक बार अंदर रखेंगे तो यह
[16:03]कुछ करना नहीं है मेरी जुमलों पर दिक्कत करनी है मेरी गहरा
[16:11]की दुआ मांगना नहीं है तो आवत मांगना नहीं है कि अगर
[16:19]आप यह बनाएंगे कि में फकत फकत मांगना होता है और सुधार
[16:21]का काम जो है उस मांगने का जवाब देना है यानी वह
[16:26]देते हुए दो उसका नुकसान क्या होता है यह मूलन आप अपनी
[16:31]जिंदगी में देखते हैं कि अगर दो आंख भूलना हो रही हो
[16:33]तो फिर शिकवे कि जापान खुल जाती है को देखा होगा आपने
[16:39]लड़कियों में मुश्किल आई कि दोहा कि बहुत सारी दो आदमी बहुत
[16:46]सारे दिन जो है तो आंखों को जो है वह किया लेकिन
[16:47]देखा कि मुश्किल हल नहीं हो रही तो शिकवे की जवान खुल
[16:52]जाती है कि फिर क्या करें इसको आएगा तो आप भूल ही
[16:56]नहीं हो रही है बोल बंदे तो यहां तक विश्वास करना शुरू
[16:58]हो जाते हैं फिर इन तो आंख करने का फायदा क्या है
[17:02]खुदा ने तो आ करने का कहा ही क्यों है जब उसने
[17:06]कबूल नहीं कर दीजिए कि उसका जवाब यह है कि आप पहले
[17:13]दो आंख कंसेप्ट को समझे तो सही के दुआ है क्या लाइक
[17:17]और गुप्ता जिसकी तरफ तो बच्चों दिलाना चाहूंगा तो आखिर हकीकत बार
[17:22]देर हो जाएगी वो बोली है कि कि अगर इंसान अपने आप
[17:29]अंदर थोड़ी सी चिल्ली दिक्कत करना शुरू करना शुरू करें और अपने
[17:34]आप का मुकाबला करना शुरू करें जिस तरह इंसान किताब पढ़ता है
[17:42]जिस तरीके से इंसान स्कैन आपको देखा है अपने कैंप के माहौल
[17:44]को देखता है इस तरीके से इंसान को अपने अंदर झांकना और
[17:50]अपना मुकाबला करना भी जरूरी है कि इंसान है क्या है में
[17:55]आया इंसान के पास जो यह देखने की हिम्मत है क्या उसकी
[18:03]अपनी हैं कि नहीं आ कि यह जो अहिंसा कि जिन युवकों
[18:08]की मदद से हलाल रेस कमा रहा है क्या यह बता देता
[18:13]मालिक वह खुद तय नहीं है कि आप जिन ने मतों में
[18:20]वह भला हुआ है जो नेमतें उसके पास हैं या यह नेमतें
[18:23]उसकी अपनी हैं कि नहीं यो यो हनी अगर एक चीज को
[18:29]गिनना शुरू कर दे है तो वह इस नतीजे पर पहुंच जाता
[18:34]है कि मैं खुद कुछ भी नहीं है कि मैं कि अगर
[18:38]मैं इसको सादा सम्मान में बयान करूं तो हम यह बयान कर
[18:45]सकते हैं कि नुकसान खुदा के मुकाबले में भतीर् से भी बदतर
[18:51]है ए पत्थर से मुराद यह है कि बुरा यह नीचे ला
[18:53]मर्तबा है उसका अ पिछला है यहां पर मैं इसको खोला नहीं
[19:02]जा रहा वक्त वह लग जाएगा पकड़ी निषाद आता वीरों के साथ
[19:04]ही मैं आपसे गुस्सा हूं करना चाह रहा हूं कि आप जब
[19:10]इंसान को यह साथ कि हो जाए है कि मैं कुछ नहीं
[19:15]हूं जो कुछ है वह तेरी इज्जत है यह कैफ गैस है
[19:19]कि जो कि इंसान को फिर पुकारने पर मजबूर करती है और
[19:21]जब वह पुकारता है खुदा को उसको कहते हैं दांत है उसको
[19:28]कहते हैं तो आप कि अब यह इंसान जब खुदा की बारगाह
[19:36]में खुदा को पुकारेगा का या तो फिर खुदा की सनाह जो
[19:38]है उससे अपनी बुक का आवास करेगा आ को बुलाया है तू
[19:48]करी है मैं उसको कभी है तू अभी है तो रहमान है
[19:54]तो रखी है तो व क्रूर है अब यह वाले जुमले अदा
[19:58]करेगा क्यों उसके अंदर से निकल रहे होंगे कि जब वह एहसास
[20:03]कर लिया उसने कि मैं कुछ नहीं हूं खुदा के मुकाबले में
[20:06]कि आपके जो अंदर से पुकार उठ रही है इस पुस्तक को
[20:11]आग कहते हैं कि अब इस हालत से अंदर कि अब इस
[20:19]मालिक के अंदर अगर इंसान खोला को पुकारते-पुकारते अगर अपनी मुश्किलात अपने
[20:26]रख लेता है तो खुदा को इतना पसंद है यह काम कि
[20:30]उसकी गुहार कुएं कबूल कर लेता है कि उसकी हार्दिक को पर
[20:35]तरफ कर देता है 15 दिन के अंदर रखें तो आहार जत्थों
[20:43]की बरतरफी का नाम नहीं है पक कि अगर हाथ जितनी बर
[20:46]तरफ ना हूं तो फिर तो आंख के फायदा दोहा खुदा के
[20:51]मुकाबले में अपने आपको फकीर समझ आना जो है वह बा होता
[20:57]है अपने आप को पहचानना के मैं खुदा के मुकाबले में कुछ
[20:59]नहीं हूं कि अगर यह सांस लेकर मुसल्ला इबादत पर खड़े होंगे
[21:06]तो उस वक्त निर्माण की कैफियत भी आपको दे साफ करके देखें
[21:13]और जब सजदे में सर रखकर इसे साथ या रहमान या रख्या
[21:19]व कुओं यह वाले जुमले जब अदा करेंगे तो फिर जुबान से
[21:22]कूदा खोज अब बुखार रहे होंगे फिर अपनी फौज तैयार नहीं होंगे
[21:29]फिर खुदा की अजमत याद होगी खुदा की नफरत याद होगी खुदा
[21:35]की जब बारी यह तो कहार यह याद होगी खुदा की रहमान
[21:36]दूर रखना लिए इंसान के दिन में होगी है तो अब आकर
[21:43]जब यह दोहा यह है तो अब यह इंसान जब यह साथ
[21:48]पांच वक्त नमाज के अंदर अपने अंदर लेकर आ रहा है तो
[21:54]आप अपनी जिंदगी में इसका किरदार देखें है कि यह इंसान फिर
[21:59]धोखा देगा किसी को कि क्या यह इंसान कभी झूठ बोलेगा कि
[22:03]क्या यह इंसान किसी को प्रेम देगा क्या यह इंसान बुना की
[22:10]तरफ जाएगा को क्यों क्योंकि यह पांच वक्त खुदा की कसम खुदा
[22:14]की बारगाह में व्यवहार हो रहा है और एहसास किया है खुदाया
[22:18]आमिर कुछ भी नहीं हो कि यह पास बहुत जरूरी है कि
[22:25]अगर यह साथ हमारे अंदर ना आया ना की प्रतिमा दत्त जो
[22:32]मिक्स करते हैं मैं उसको ढूंढ की फसल नहीं करने वाला का
[22:36]पालन के पास पैदा करना है को लाया मैं कुछ नहीं कि
[22:41]उन्हें गैस सबसे ज्यादा आ को जिम्मेदार व्यक्ति अंतर होता है वह
[22:49]दो बार सुनिए तो आम इंसान कर रहा है हाथों को उठा
[22:53]रहा हुं कि जब हाथों को इंसाफ उठाता है तो कुत्तों को
[22:58]दान भी ग्रह आता है कि फिर हूं कि यहां खाली जब
[23:07]बारगाहे इलाही में पूछते हैं तो इंसान में वह एहसास कूदा जाता
[23:13]है है कि मैं कुछ नहीं हूं है तो जब यह सांस
[23:19]उसके अंदर पैदा होगा है तो फिर यहां पर तो हेल्प को
[23:24]खुदा की तरफ मत नजर आएगी कि यहां पर दावत पिम्स में
[23:30]आपको बयां किया खतम किया शुएब अयुक्तियुक्त शायद तो कामयाब हो जाओगे
[23:36]आसपास जाओ रुष मिल जाए उन लोगों को कि कैसे उस तरीके
[23:43]से मिलते हैं कि 15 दिन के अंदर जिस चीज को आपने
[23:48]हाथ नजर रखना है वह यह है और यह चीज पर इंसान
[23:49]के अंदर जो है वह प्ले चीजें इजाजत करेंगे इंसान को रूहानी
[23:55]सुकून मिलना शुरू हो जाएगा तो है अब देखिए तमाम प्रशासनिक सुकून
[24:03]के पीछे हैं सकून जाती है कि अगर पैसा कमा रहे हैं
[24:08]उससे पूछ कर देख क्यों पैसा कमा रहे हो यह कहते हैं
[24:12]सुकून चाहिए कि अगर किसी माओवादी नेतृत्व के पीछे भाग रहा है
[24:17]तो इसलिए कहते हैं सुकून चाहिए है लेकिन आपने देख लिया कि
[24:24]मार्किंग ने मतों के पीछे जितना मर्जी है भाग लें अ ए
[24:27]गिफ्ट टेंपरिंग सुकून तो आता कर सकते हैं लेकिन इंसान को ह
[24:33]की सकून नहीं दे सकता लेकिन जब इंसान के अंदर ख्याल पैदा
[24:37]हो जाएंगे बुलाया मैं कुछ नहीं हूं जो कुछ है वह तुम
[24:43]है है और तो आपकी कैसी है जब पैदा हो जाएगी तो
[24:45]उस वक्त भती की सुकून नसीब होगा यह बेहतर कर सकता है
[24:51]जिसमें एक साथ पैदा होगा कहने से लिए पैदा नहीं होगा एक
[24:56]छात्र कि इंसान तभी जब मुसलमान इस बात पर बैठा हूं फिर
[25:01]तो आ गई है जब हाथ उठाए तो 1 मर्तबा जरा इन
[25:03]बातों की तरफ़ तवज्जो करके देखिए का यह देखिए इस तरीके से
[25:09]जिंदगी में सुकून तस्वीर होता है तो फिर अगर जब आपने यह
[25:13]को समझ लिया यह साथ कर लिया है कि लैला ही है
[25:19]सब कुछ उसी ने करना है सब कुछ तो अगर पूरा आपका
[25:24]इन कहां से रहा हो तो फिर नाराज किस बात का है
[25:27]कि फिल्म परेशानी इस बात की फिर इस तरह अब किस बात
[25:32]का है और इसी वजह से आप देखिए जो कॉर्ड याद आते
[25:36]हैं कि मुश्किलात के अंदर भी मुस्तरी नहीं होते हैं मैं क्यों
[25:43]रुके रुके उनके अंदर यह कैन डिपॉजिट होती है कि यह एहसास
[25:50]होता है कि मैं कुछ नहीं हूं है एक तो बहुत जरूरी
[25:58]है इंसानी जिंदगी के अंदर तो यह है जैसा कि तबीयत तबीयत
[26:04]के लिए बहुत सारे एक्जाम आफ करते हैं दुरुस्त रखते हैं सा
[26:08]कोर्स करवाते हैं और साथ जो है वह अच्छी तरीके से तक
[26:13]बच्चों को जब से खाते हैं लेकिन जब दूल्हा तरीका इंसान से
[26:16]चाहे तो आदि से ज्यादा ख्याल लुट ले रखा है कल सुबह
[26:23]तबीयत का मतलब यह है कि इंसान जो है अपने हक की
[26:29]तरफ सही तरीके से मुस्तकीम रास्ते से पहुंचने की कोशिश करें और
[26:36]हक हासिल करने की कोशिश करेंगे तो चित्त इस सफर के अंतर
[26:40]हमारे पास जिस बात का एहसास होना जरूरी है वह यह है
[26:47]फिर पूजा के मुकाबले में मैं कुछ नहीं हो जब यह जानते
[26:49]हैं में आ जाएगी तो फिर मिल जाए ताकि शुगर का या
[26:54]ना मिले तो शिकवे की जवान नहीं खोलेगा इसको तबीयत कैसे हैं
[27:00]कि वास्तव में जब चाहेगा अखलाख से बोलेगा क्योंकि इंसान पादप पहली
[27:06]बार रोक तब करता है जब उस तरह होता है जब परेशान
[27:11]होता है लेकिन जब इत्मीनान के साथ उनकी मुलाकात होगा तो बहुत
[27:13]सारे बदलाव के हिसाब से लिए खत्म हो जाएंगे है और यह
[27:20]कि तुम हैरान में कितने देना है दुर्गंध है और तो आप
[27:25]भी कौन सी न मांगने वाली है है बल्कि दाणा जिसकी अंतर
[27:30]यह सास-बहू के बुलाया तेरी बार गांव में आया हूं कुछ नहीं
[27:33]जो कुछ है वह तू है कि उनके तमाम चीजें जो है
[27:39]वह मिलना शुरू हो जाएंगे अ कि मैं चंद्र उबले आप की
[27:45]खिदमत में जो है वह बयां करता हूं तो आओ कि किस
[27:51]तरीके से आई एम अलैहेमुस्सलाम ने हमें दो बार करने का सलीका
[27:54]सिखाया उन्हें बाद अपने गंतव्य स्थान पर रख खत्म हो गया है
[28:00]थे सेम टाइम अब कितना टाइम लगता है एक संवाद ब्राह्मण प्
[28:12]अजय को झालर कि मुझे ज्यादा सावधानियां अभी सावन का महीना खत्म
[28:25]हुआ है अच्छा होता की थी कि उन्हें ज्यादा सावधानियां को पढ़ा
[28:29]जाए माहे शाबान के अंदर हैं उस तरीके से उसका आभास हो
[28:38]रहा है कि अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद महाजन हर वर्ष महत्त्व इला
[28:44]दा रुख कि वर्तमान शेदरा ना बैंक को कृपया मेरे दो आंखों
[28:55]को सुनना कि जब मैं तुझे पुकार ओ खुदा या मेरी पुकार
[28:58]को सुनना कि जब मैं तुझे पुकारा है है आगे चलते बहुत
[29:08]खूबसूरत होते हैं कि इलाही इन हम तनी पवन धीर व को
[29:15]बुलाया अगर तूने मुझे महरूम कर दिया तो फिर कौन है जो
[29:19]मुद्दा है कि अब मुझे एक साथ तो आपको बयान किया का
[29:22]कि यह पैदा अगर हो जाए तो फिर इन दोनों के हित
[29:28]में जब आएंगे फिर देखेंगे क्या मार्फत नसीब होंगे या तो ही
[29:33]की मार्फत नसीब होगी क्या इमामत की मार्फत नसीब होगी क्या महाराज
[29:36]की मार्ग भक्तिभाव यह वह मार्फत है कि जो बात बरसों से
[29:41]हासिल हो सकती है और ना किसी के बयान करने से हासिल
[29:45]होती है यह मार्फत कारक हासिल होगी कब कि जब इंसान में
[29:48]वह मैं कुछ नहीं हूं का अहसास जब पैदा हो जाएगा तो
[29:53]यह सिखाया जा रहे यहां पर कि इलाही इन हराम धुंध समंदर
[29:59]दिया जो सऊदी अगर खोज मेहरून कर दिया तो फिर कौन है
[30:04]इस दुनिया में जो मुझे देख कर दे और अधिक एक किसी
[30:08]चौपले में प्रताप निकल करना शुरू करें इंसान मांगनो खेत मालिक उसके
[30:11]लाभ की वजह से तो गलत रास्तों पर चल पड़ता है तो
[30:15]यही जुमला उसकी हिदायत कर रहा है फिर थोड़ा के इलावा को
[30:20]ने सुध लेने वाला नहीं है अगर खुदा ने इम्तहान देने की
[30:26]खातिर ढेर कर दिया है कि कुछ चलते के लिए तुझे मार
[30:32]दी रिश्तों नहीं मिलना तुरंत ही मिलना कि गलत रास्ते में जाने
[30:37]की जरूरत ही नहीं है पकड़ फिल्म कहां है खोला में पास
[30:41]हो जा तुझे जो चाहिए खुदा अदा करेगा में इलायची इन हम
[30:46]तनी पवन धीर व बनी है थे वन फादर तनी हो मंगल
[30:53]नदी कमजोरी बुलाया अगर तूने रुसवा कर दिया तो फिर मेरी मदद
[30:56]करने वाला कौन है कि हम वाटर के अंदर इधर चाहते हैं
[31:03]है और इस बिद्दत को हासिल करने के लिए पर मुख्तलिफ इस्तेमाल
[31:10]करते हैं कि मैं मामूली बात कर रहा हूं आप देखें बाद
[31:14]वह इंसान अपनी इज्जत महाशय में बनाने के लिए जो नहीं है
[31:18]वह बनने की कोशिश करता है कि अगर मन ही नहीं है
[31:23]नहीं बनने की कोशिश करेगा यह व्यापारी करेगा तो जाहिर करेगा पहला
[31:26]अगर अच्छा नहीं है लेकिन बाहर जाकर अपने आप लोगों को अच्छा
[31:32]करेगा इसलिए ताकि मुकाबले में इज्जत मिले अगर मदद करने का जज्बा
[31:35]नहीं है उसके अंदर लेकिन अपनी इज्जत बनाने के लिए दूसरों की
[31:39]मदद करने की कोशिश करेगा कि यह इंसान कर रहा होता है
[31:46]वहां शामिल तक लेने के लिए लेकिन इमाम यहां पर तालीम दे
[31:48]रहे हैं इजाजत ले ली है तो वह इस वक्त खुदा ने
[31:53]दे रही है खुदा के अलावा किसी की ताकत नहीं है कुछ
[32:00]करते रहेंगे है वहीं हल तनी पवन दुग्गल हरिओम सोनी अगर तूने
[32:04]मुझे रुसवा कर दिया तो फिर तेरे अलावा कौन है कि तुम
[32:11]मेरी मदद करेगा इसका मतलब है यहां तक यह सुविधा देने वाला
[32:13]है मैं अकेला ही आह दुबई का में नगर पालिका व पुलिस
[32:21]अधीक्षक मुलायम अपना मानता हूं तेरी कसम से तेरी नाराजगी से अ
[32:27]अब आगे कि एक जुमला बहुत खूबसूरत दिए आई माइक खरीद सकते
[32:34]हैं किसी आप इंसान की बरसात नहीं है कि वह स्टेशन पर
[32:40]क्लिक करें ए पप्पु सूरत चोला यानी इंसान वापस इसको बार-बार घर
[32:43]पड़े तो छोड़ कैफियत कि जब इंसान में होती है वह अपने
[32:48]चुप लड़ने के इंसान खुद अप करें मेरे कहने से कुछ नहीं
[32:50]होगा अगले जुमलों को खोल के करिश्मे के साथ तरफ करके देखिएगा
[32:54]कभी सलाइवा दत्त पर है कि इलाही इन खून तो गधेरा मुस्कान
[33:02]हे लेफ्ट थे पुलिस ने तेरी रहमत के काबिल नहीं हो कि
[33:10]पुराने अगर मैं तेरी रहमत के काबिल नहीं हूं फंदा पहलू अंत
[33:17]समय जब आए थे लेकिन धो लें तो जब है है तो
[33:25]यह कर्म कर सकता है मेरे को मैं अपनी जो फाइल है
[33:32]उस फसल के जरिए तो मुझे कुछ रहमत के काबिल बनना सकता
[33:37]है कि किस तरीके से धो लें सिखाए जा रहे हैं आप
[33:39]झूले पड़ रहा होगा में बैठकर सलाह पर बैठकर शाही मस्जिद चाय
[33:46]चाय दुकान हो जाए कहीं पर हो सफल हो इन झगड़ों को
[33:52]जब देखा होगा तो आप वह उस वक्त जब एहसास पैदा हो
[33:54]आपके अंदर तो जरा सोचिए का या ऐसी हालत के अंदर इंसान
[34:02]कभी खुद से दूर हो सकता है कभी परेशान रह सकता है
[34:10]कभी शिकवा के समान खुल सकती है कि इला ही इनकम तो
[34:15]गए रख उसका है लेकिन मेरा समस्त 1 का पालन अंतरिम डालेंगे
[34:19]अब एक बाउल लें स्वागत है अ 2012 आया है बहुत मारू
[34:27]माहे रमज़ान के अंदर बड़ी ताकत है शहरी के अंदर इसको पढ़ा
[34:30]जाए कि वह तो आए अब हम सा सम्मलित हैं का दिमाग
[34:39]आपने आपको पारूल है इसका यदि महातिर जनकपुर लेंगे फिर इसमें जाएंगे
[34:47]तो आए अब हम शुमाली बहुत-बहुत कमाल की दुहाई लंबी टुकड़ों में
[34:51]पढ़ सकते हैं उसको यह जरूरी नहीं है कि टाइम पर सारी
[35:00]पढ़ लें अगर हिम्मत है और तबीयत साल देती है हालत साथ
[35:02]देती है तो पूरी पढ़े बिना कपड़ों में बांधकर बढ़े हैं है
[35:09]तो भी का लेकिन दर्द कैसे दिया जा रहा है इस तो
[35:14]आपकी बिल्कुल कितने दाम है और यह जो मिले जो है वह
[35:18]इंसान को इस बार पर कि महबूब करते हैं है कि हम
[35:27]अहलेबैत के सदरपुर ना छोड़ दो है कि दो आए सबसे बड़ा
[35:32]सुबूत है इस बात का पहले बेबी के अलावा अगर किसी से
[35:39]इल्म हासिल करेंगे तो कुछ नहीं होगा अगर लेना है तो एडिफिकेशन
[35:43]देता तो हित्य मार्फत यह 12 जून जो पड़ने लगा हूं ये
[35:48]दुनिया की किताबें छानकर देखने दूसरे मकान दें फिर कि आपको यह
[35:55]मार्ग पत्तों ही नहीं मिलेगी कि जो आर्म अलैहेमुस्सलाम हमें दोहों की
[35:59]शक्ल में हटा कर रहे हैं में बहुत मजा लेने दो आगे
[36:05]सुन रे में यह कार्य पूरा माह-ए-रमजान अगर यहां पैक कर दो
[36:08]आंखें ऊपर दोस्तों कि जाए तब भी इस मौजूद का हक अदा
[36:13]नहीं हो सकता वह सारी चीजें जो मैं छोड़कर आगे निकल रहा
[36:17]हूं ताकि में बहुत ज्यादा से ज्यादा करें कि मैं का आरोप
[36:26]तय को बुलाया मैंने तुझे तेरे घर के पहचाना है अ कि
[36:31]अंतत ललिता नींद आ गई थी कि तू है कि जिसने अपने
[36:39]ऊपर मेरी रहनुमाई की में बदलाव खन ई लाइक उर अपनी तरफ
[36:50]बुलाया मैं वन लव लंका अगर तू ना होता कुछ लम्हे अग्रिम
[36:54]अंततः तुम मुझे पता ही नहीं चलता कि तू क्या है कि
[37:02]अगर तू अपनी पहचान नगर वाता कि अगर तू अपनी तरफ रहनुमाई
[37:11]न करता कि पुलिस प्रशासन अपनी फसलों के चाहे जितने भी ज्यादा
[37:15]पर वाले हिस्से करवाता रहे हैं का पौधा को पहचान नहीं सकता
[37:23]अच्छा आया इसका जरा खोलते हैं कि किस इंसान के अंदर यह
[37:30]ताकत है कि जो खुदा को खुदा के जरिए पहचाने न कि
[37:35]हम इंसान पोकर देखें है तो यह बच्चा जम्मू तमिल एरर होता
[37:40]है कि तू क्या है को सबसे पहले जब वह काम होता
[37:49]है तो मखलूकात को देखता है खाली खोजे ली कि महसूद ने
[37:54]अपने निकट चीजों को देखेगा तो है ज जैसे स्पर्श उम्र को
[38:01]लाभ होगा अ तो फिर वह इस मसलों के घर के खालिक
[38:05]तक पहुंचने की कोशिश करेगा कि वह कहेगा कि यह दुनिया बड़ी
[38:12]अजीबो-गरीब बनी है बढ़ाना समय उसके अंदर इंसान को इतना बड़ा कमाल
[38:16]बनाया है सुरक्षा को किस तरह से रखा है इन सारी चीजों
[38:22]को देखने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे का इसका दामाद
[38:24]का कोई बनाने वाला है कि खालिद है खुदा अलग लुक देगा
[38:32]बस अगर हम आम इंसान को मध्य नजर रखें तो वह तो
[38:34]मस्जिदों से हार्दिक तक पहुंच रहा है लेकिन इमाम यहां पर मारे
[38:40]हैं कि मैंने तुझे तेरे जरिए पहचाना है ना मसलों के जरिए
[38:46]अ है तो यह अ जो तो भी के माता कर रहे
[38:51]हैं यह किसी आम व शहर के कि फार्म नहीं है है
[38:56]कि मैंने तुझे तेरे घर के पैसा नहीं कि मांस सूख नहीं
[39:00]कर सकता है और पासवर्ड ही पतला सकता है कि खुदा को
[39:05]खुदा के जरिए कैसे पहचाना जाता है कि अगर इस एक जुमले
[39:12]को खोला जाए तो कुत्तों ही कि म्हारे पथ के जो समंदर
[39:15]पूछते हैं वह इसको खोलने के बाद ही पता चलेगा कि क्या
[39:20]कुछ है मैं भगत इशारा करुंगी ना वह बच्चे था उस चूल्हे
[39:25]की तरफ लेकिन जो सुनेंगे इस बात को मुमकिन उसने पहले देखा
[39:31]तो और इस मतलब को समझने वाले हो कि जब खुदा कुछ
[39:37]साबित करने के अलावा ऑयल लेकर किए जाते हैं एक जगदीश गुप्ता
[39:45]खरीद फ़लसफ़ा ने बयान की है उसको कहते हैं और हां ने
[39:51]सिद्ध टीम थे पुर्गे बुरहानुद्दीन जो है वह चार पांच साल पहले
[39:59]ग्लास अगर आपने जो है वह बयान की है लेकिन यही मार्ग
[40:05]पथ के जो मूल नक्षत्र आने अपने फल सस्ते में एक दलील
[40:11]के तौर पर बयान थी और वह आवाज मजबूत खरीदनी है और
[40:17]आपको इक्वल है इसलिए कुछ चेंज नहीं कर पा रहा है हम
[40:19]देखते हैं कि 14 साल पहले इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम ने अब हालात
[40:27]हैं अजय को अपने शिष्यों को धो आखिरी शक्ल में यह दलील
[40:35]सिखा दी कि कृतिका आ रहा था तो मैंने तुझे तेरे लिए
[40:40]पहचाना वह जो और हाथ बयान किया जाता है वहां भी खुदा
[40:45]से खुदा तक पहुंचा जाता है और किमाम इसके अंदर यही दलील
[40:50]निकल कर रहे हैं इसके अलावा अगर पहचानना है तो उसके अंदर
[40:53]बेहतरीन जो मार्ग पर है वह खुदा से खुदा तक की है
[40:58]नकरात्मक लुक्स दिखा लिख सकती हो कि यह आपको किसने सिखाया जा
[41:07]रहा है मार्फत कि माहे रमजान की शहरी की दवा दो आए
[41:12]अब हम शुभेच्छुक कि भगत व जो की जरूरत है है इसलिए
[41:18]से इस सोच से इस प्रकार से इस एहसास से इन दवाओं
[41:24]की तिलावत की जरूरत है है अरबी नहीं आती तो कटवा सामने
[41:31]रखकर इंसान तरह सोचना शुरू करें कि किमाम इस गुफा के अंदर
[41:34]हमें क्या मार्ग फतेह था कर रहे हैं कि हम क्यों में
[41:41]दिक्कत नहीं करते क्योंकि कंसेप्ट यह बना है दो आर्यन मांगना और
[41:44]मांगना भी अपनी हार जाते हैं है तो यह यह समझते हैं
[41:50]कि आई माने तो दो आए हमें तालीम पर माय उनके अंदर
[41:55]मिश्री का सिखाया है कि आपने मांगना कैसे है है तो जब
[41:59]यह कंसेप्ट गुर्दों में तब्बू तरह कोर तो आपको नहीं होता आ
[42:02]कि फिल्म फिल्म बता दें कि रोशनी में अगर आप दोहा की
[42:07]कोई किताब खोल लें तो फिर देखें फिर तो आम करने का
[42:13]लांच किया है को मार यह कैसे नसीब होती है खुद आकर
[42:18]खुदा से और यह जो हम कहते हैं कि फाइन फॉर अलैहेमुस्सलाम
[42:20]जो है वह हार ज़माने में हर इंसान की हिदायत करते हैं
[42:27]हिदायत का सबसे बड़ा ज़रिया तो इस वक्त हमारे पास मौजूद है
[42:33]कि हादसों से बुलंद मर्तबा है दाखवा कि यह कोई भी मतलब
[42:40]है फिर इसको मैंने किसी अपने कलेक्शन में खोला हुआ है नेक्स्ट
[42:44]के ऊपर तैयार है है लेकिन अभी मदद जितना आप सुनने के
[42:54]दौरान के बाद अगर हिदायत का पितृ बुलंद स्त्री हम इक्छीत तुम्हें
[42:57]कोई मंबा मौजूद है तो वह तो आए हैं यहां से हम
[43:04]पर पहुंची उसके बाद जाता है हदीसों की दूसरी किताब यादें कि
[43:10]अगर आप चाहते हैं कि अपनी मार्ग पत्तों को बुलंद करें तो
[43:16]दो को के मार्फत हासिल करने वाली समझकर मुताला करना शुरू करेंगे
[43:22]कि कैसी कैसी मार्ग बातें इंसान को आता होती हैं किस तरीके
[43:30]से फिर जवान खोलें आपके गांव में खुदा को पुकारने का तरीका
[43:33]यह जो आए सिखाती हैं है कि अगर आपने खुदा की बारगाह
[43:40]में ऐड कर रहा है वह याद करना है उसको पुकारना है
[43:43]तो वह पुकारने का तरीका कैसा होना चाहिए दुआएं दिखाएंगे आपको कि
[43:48]अगर तवज्जो करने की जरूरत है अलार्मस सल्ले अला मोहम्मदीन वा आले
[43:52]मुहम्मद हमारी इसलिए के बाद अब आपको तो शर्मा व मुहम्मद रमजान
[44:02]की हरकतों से सही माना में स्थित करने की तौफीक अता फरमा
[44:08]मुहम्मद मुहम्मद इस मां की बरकत से की वजह से हमारे गुनाहों
[44:18]को माफ़ फ़रमा मुहम्मद वाले मुहम्मद अपने आप को पुकारने की सलाह
[44:24]अता फरमा परवरदिगार हमारे अंदर यह अहसास पैदा कर कि हम तेरे
[44:30]मुकाबले में कुछ भी नहीं है परवरदिगार हमें दो आह की मात्रा
[44:33]में करने की तौफीक अता फरमा मुहम्मद व आले मुहम्मद हमारे कबीरा
[44:43]गुनाह माफ फरमा परवरदिगार इस प्रकार के वास्ते अलैहे वसल्लम की ख़िदमत
[44:48]के साथ कि हमारे आखरी इमामे ज़माना आज अल्लाह ताआला पर जरूर
[44:52]शरीर के जहूर में राजीव वर्मा और हमें उनके आवान अनुसार ने
[45:00]करार दे और सल्लल्लाहू अला मुहम्मद व आले मुहम्मद स
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