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Maqsad-e-Hayaat Insani | H.I. Shahid Raza Kashfi
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Record date: 04 April 2021 - مقصد حیات زندگی
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2021 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
Madsad-e-Hayaat Insani by H.I.Shahid raza kashifi
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Transcript
[0:00]झाल झाल अल्लाह सुभान अल्लाह तबारक व ताला अ कि यह किताब
[0:19]हिल मजबूत 115 इलहामी बहु हक है को विस्मिल्लाह रॉ मंदिर घुसूरीधाम
[0:27]का बल्ला हुआ एक राजा को मिंटू तूने महारथी कोम लाता आलम
[0:35]उन्हें सह की बजाय ललक में समा वल्लभ सारा थे वर्ल्ड आफ
[0:42]अल्लाह में लाखों तस्कर ऑन में मौजूद गुफ्तगू का मकसद यह आते
[0:51]ने इंसान और इंसान ई ई 12 साल पास में जो अलार्म
[0:59]दिया आलम ने मुझे और आपको और हल्क नहीं किया को भुगतान
[1:08]नहीं किया है मगर एक खास का मकसद की खातिर ऊ कि
[1:17]फेशियल पास में कि मेरा और आपका मौजूद इस दुनिया में के
[1:24]बगैर यादव के और बगैर मकसद के नहीं आ है और इस
[1:30]मकसद को पुराने मस्जिद में ख़ुदा वंदे आलम ने कि मुतालिफ़ आयात
[1:37]के जरिए से डिलीवर किया है और बयान किया है है जिसमें
[1:45]सबसे ज्यादा मारू आयत सूरह जारी याद की आयत नंबर फीचर है
[1:54]है कि हम तकरीबन सब के सब अब इस आयत के हाफिज
[1:59]भी हैं वह मां हलक तो जिन्ना कि वाले इंसान आधे लाले
[2:07]साबुद्दीन अ कि मैंने जिनों और इंसानों को गलत नहीं किया है
[2:11]मगर अपनी बंदगी के लिए अपनी परस्तिश के लिए कि इस आयत
[2:23]का जाहिर तो यही बतला रहा है है कि हम और आप
[2:28]और अल्लाह की इबादत के लिए हल किए गए हैं कि यह
[2:36]आदत के माना क्या है है और इसकी हकीकत क्या है तो
[2:44]यही नमाज यही रोजा है यही सत्य है सत्य ही अम्र बिल
[2:52]मारूफ़ अनिल मुनकर इस दौरान और हदीस के जरिए से कि तारूफ
[3:00]करवाया गया इन कामों का कि एक नाम के जरिए से है
[3:05]और वह इबादत है कि का जानते हो नमाज ए क्या चीज
[3:13]है कर नमाज इबादत है कि रोजा हज जकात वगैरह वगैरह सब
[3:21]कैसा व्यस्त हैं है लेकिन अ जानेमन कि इन आवाजों को पढ़कर
[3:31]और अंजाम देकर कि इन रोटियों को रखकर की जानकारी चंद दिनों
[3:35]के बाद माहे मुबारक हो रमजान शुरू होना चाहता है हवाई जहाज
[3:42]अगर किसी पर वाजिब हो जाए हज को अंजाम देकर जकात अदा
[3:47]करना अगर किसी पर वाजिब हो जाए जकात अदा करके में आया
[3:52]बात है नहीं कि जवाहिरी आमाल अंजाम देकर मैं एक इंसान कि
[4:01]आबिद हो जाता है इबादत गुजार उसे अकाउंट किया जाता है या
[4:08]नहीं आ कि अगर ऐसा हो है तो फिर हम मैं अक्सर
[4:18]इंसानों को इन हमलों को अंजाम देते हुए जब देखते हैं कि
[4:24]तुम सबको अमाउंट करना चाहेंगे कि यह सब के साथ विवाद गुजार
[4:33]हैं है लेकिन जैसे ही मस्जिद से बाहर निकले नहीं आ जाओ
[4:37]नमाज से बुलंद हुए नहीं और दूसरे काम अंजाम देना शुरू किए
[4:45]नहीं मैं नमाज अपनी जगह पर है और हमारी और आपकी एक्टिविटी
[4:49]दूसरे मकाम पर हैं और आसान सावन में तो यही नमाज यही
[4:58]रोजा तो यही हाथ जोड़ जकात है जिसकी जाहिर सी सूरत है
[5:02]कि जाहिरी चेहरे हैं इनके कि वह ज़ाहिरी चेहरे सिर्फ मस्जिद की
[5:11]हद तक और अपने मुकाम की हद तक आ है लेकिन जब
[5:15]आप अपनी जिंदगी में आते हैं को उठाकर बैठक को अंजाम देते
[5:20]हैं सोते हैं और जाते हैं और खाते और पीते हैं कि
[5:23]वहां हमें अगर यह नवाजना दिखाई दे तो कि यह रोजगार दिखाई
[5:31]ना दे कि यह जो दिखाई ना दे है तो ऐसी सूरत
[5:36]में कि इस है या इस किस्म के कामों को कि जो
[5:44]नमाज और रोजा वह अ जो जकात है और फिर भी जो
[5:47]है इबादत तसव्वुर किया जाएगा या नहीं आ और आसान अल्पांश में
[5:53]मुक्तसर से नशे से मैं नमाज कहते किसको है कि रोजा किसे
[6:03]कहा जाता है मुखालिफ इबादतों की जो नाम हम जानते हैं कि
[6:08]वह क्या है और आसान अल्फाज में इसका जवाब यह सारी बातें
[6:14]कुछ भी नहीं और अगर है है तो अमल का नाम है
[6:22]16 मां में जाफर सादिक अलैहिस्सलाम तो अस्सलाम यह बहुत ही प्यारा
[6:33]फरमान इस हवाले से किसी ने सवाल किया या रसूलल्लाह है f4
[6:40]ज़्यादा रसूल को कैसे मालूम हो कि हमारी नमाज़ कबूल हुई है
[6:45]या नहीं आ कुछ नहीं यार क्या है और कसोटी क्या है
[6:50]किस तरह से पहचाने कि हमारी नमाज़ कबूल हुई या नहीं 9th
[6:57]माला ने बाती अतिसार के साथ मुक्तसर मगर जार में जवाब दिया
[7:04]कि एक कसोटी को पेश किया है कि मैं यार को पेश
[7:08]किया था वो कागज़ जानना चाहते हो कि तुम्हारी नमाज़ कबूल हुई
[7:13]या नहीं तो मुलाहजा करो नमाज को अंजाम देने के बाद अब
[7:17]में कितने फिशर तुमने कमाल अंजाम दिए और कितने फिशर तुमने ब्रेंबल
[7:24]अंजाम दिए कि जितने फिशर तुमने अच्छे काम अंजाम दिए उतने फिशर
[7:31]तुम्हारी नमाज़ कबूल हुई है है और जितने फीसद जो है तुमने
[7:39]गुना अंजाम दिए हैं कि उसने फिशर तुम्हारी नमाज कबुल नही हुई
[7:43]है तो बस इस फरमान से मालूम होता है कि क्या हमारी
[7:50]नमाजों का ताल्लुक हमारे अमल से है कि क्या कर हमारी नमाज
[7:58]है कि हमें मुतहर्रिक करें हमें एक्टिव करें मुतालिफ़ नेक कामों को
[8:02]अंजाम देने के लिए हाथ से है तो जो नमाज हमने पड़ी
[8:07]है वह नमाज होगी कि है लेकिन अगर हमें एक्टिव ना करें
[8:13]अपने काम को अंजाम देने के लिए हाथ से आगे ना बढ़ाए
[8:15]तो फिर वह नमाज नमाज नहीं है का यही आलम रोज डे
[8:22]कब है कि रोजा किसे कहते हैं सेट करो जहां वह नहीं
[8:30]के खाली तुम भूखे रहो को खाली तुम प्यार से रहो कि
[8:38]रोजा भूख और प्यास का नाम नहीं है कि रोजा इंसान को
[8:45]खुदा की तरफ आगे बढ़ने का और बढ़ाने का नाम है में
[8:51]कितना तुम खुदा की खातिर काम अंजाम देते हो कि जितने फीचर
[8:59]तुमने खुदा के खातिर काम अंजाम दिए हैं और गुनाहों से रुके
[9:05]हो उतने फीसद तुम्हारा रोजा कबूल है मैं इसी तरीके से अकाउंट
[9:12]करते चले जाइए कि हज जकात होम्स अमर बलमा दारू नहीं ऑन
[9:16]कर दो कि हमारे ही दरमियान बहुत सारे अपराध होते हैं जो
[9:22]नीतियों की तिब्बत बुलाते हैं है और हमें और आपको कहते हुए
[9:29]सुनाई भी देते हैं यह काम करो यह ना करो यह करो
[9:33]यह ना करो कि यह काम बज़ाहिर इबादत महसूस होता है मैं
[9:38]इंडिया में बिल मारूफ़ है नहीं अलंकार है का पुरवा के दिन
[9:47]में कि उसूले दिन के बाद जो शुरुआती दिन अकाउंट होते हैं
[9:50]नमाज और रोजा वह अ जो जकात उसी की फेहरिस्त में आगे
[9:56]बढ़कर अम्र बिल मारूफ़ व नही अनिल मुंकर है एक शुरुआत एक
[9:58]दिन में से एक पर है की बजाय फिर इबादत महसूस होता
[10:09]है लेकिन अगर खुद कहने वाला अमल न करें हैं तो इस
[10:13]कहने से उसको कुछ मिलेगा नहीं आ कि यदि इसे यह मल
[10:18]उसका इबादत अकाउंट नहीं होगा आ मैं इसे दूसरे अल्फाज में कहते
[10:24]क्या हैं मैं इसे दूसरे अल्फाज में कहते हैं कि एक इंसान
[10:28]के जिसे और सुनिए मैं एक इंसान के जिसे खुदा ने को
[10:37]हल किया है कि उसे बुजुर्ग बता किया कि यह पूरा जिसमें
[10:46]उसे दिया कि यह कहना था कि कि मुतालिक ने मतदाताओं की
[10:53]मैं इन्हें मतों के मुकाबले पर अगर इंसान शुक्रिया अदा करें तो
[11:01]ऐसे इंसान को कहा जाता है इंसान है वाकई है लेकिन अगर
[11:09]इंसान है ना अपने वजूद की निष्पक्ष जो खुदा का ता करदा
[11:12]को एक गिफ्ट है इसी तरीके से आप तरफ में बहुत सारी
[11:17]नेमतें मुझे और आपको जो मिली भी हैं हुआ है को नेमतें
[11:23]अकाउंट होती है अगर हम हक के नेमत को आधा ना करें
[11:29]जब तक यह नाश होकर होगी कि खुदा यह कहता है कि
[11:35]इन तमाम नेमतों का शुक्रिया और थैंक्स चाहता हूं मैं कि कितना
[11:39]तुम में कोई शुक्रगुजार है वही इंसान है कि मौलाना आपने यह
[11:45]कहां से कहा कि आप सब के सब सवाल करें हमसे है
[11:52]इसका जवाब यही शर्मा माई कलाम में जो हमने आयत पढ़ी है
[11:57]अब इसका वक्त है कि मैं आपको इसके बारे में बात करूं
[12:01]के सूरए नहल आयत नंबर 786 कि बहुत ही प्यारी आयत यहां
[12:09]पर इस सवाल का जवाब हो कि अल्लाह हो अकबर आज आपको
[12:17]मिंटू तूने महाकुंभ लाता है मोनाश यार आप जानते हो मैं अल्लाह
[12:22]कौन हूं अल्लाह कह रहा है है जिसने तुम्हें मैं तुम्हारी मां
[12:29]के श्रम से बुद्ध ताकि या आ है लेकिन जब तुम्हें बुद्ध
[12:36]ताकि यह तुम्हारी मां के श्रम से मैं तो तुम्हारी कैफियत क्या
[12:41]थी लाता आलम नशा यह कि तुम जाहिर लिखे थे कि इंसान
[12:47]दुनिया में आता है आलम होकर नहीं आता है और जाहिल होकर
[12:52]आता है अल्लाह कह रहा है है लेकिन तुम्हें दुनिया में तो
[12:59]हमने जो है बगैर रेलवे के भेजा है है लेकिन खबरदार और
[13:04]खबरदार और खबरदार मैं दुनिया से जब मैं तुम्हें वापस बुला लूंगा
[13:09]ना और जाहिल होकर मत आना अब इस वॉल्यूम बंद कर वापस
[13:15]आना था कि यह कहां कहां खुदा है को फौरन बाद कहां
[13:21]है की वजह ललक को मौसम आया यह वाला आप सारा वाला
[13:26]आफ वेदा अ मैं तुम्हें जाहिल तो हल किया है है लेकिन
[13:34]सात सात तुम्हारे इस जिस्म के अंदर 303 वसीले करार दिए हैं
[13:39]कि पशु गेम 13 वशी लेकर और दिए हैं मैं तुम्हारे आलिम
[13:46]होने के कि एक कान कि दूसरे तुम्हारी आंख और तीसरे तुम्हारे
[13:54]दिलो-दिमाग में हुआ है 13 ज़रिए करार दिए हैं पॉइंट तीनों जजों
[13:59]के जरिए से में भरपूर काम लेना कि कानूनों से खूब सुनो
[14:09]है और तवज्जों से सुनाओ जो आ आंखों से खूब देखो और
[14:16]तब बच्चों से देखो के दिलो-दिमाग से इन सुनिधि चीजों को है
[14:23]और इन देखी भी जाए चीजों को 9th जिया करो कि सब्जियां
[14:31]पहली करो एनालाइज करो तो है और जब तुम्हें ऐसा काम करोगे
[14:38]तो मैं तुम्हें जानते हो क्या शुमार करूंगा और क्या अकाउंट करूंगा
[14:43]तुम आलम हो जाओगे ऐ है लेकिन चले आगे थोड़ा सा सा
[14:48]कुछ नहीं कहा आलिम हो जाओगे लाल लकुम कष्ट करूं अ कि
[14:54]तुम जब इन कानूनों को इन आंखों को उन दिलो दिमाग को
[15:00]जब यूज करोगे ना वो तो तुम शुक्रगुजार बंदे हो जाओगे और
[15:07]आसान अल्फ़ाज़ में ठीक है जानेमन यह कान है सुनने के लिए
[15:11]कि बहुत सारी बातें मैंने और आपने सुनी नहीं होती हैं है
[15:16]लेकिन जब सुनते हैं है जो चीज सुनी भी नहीं होती और
[15:22]जब सुनते हैं यह तो मालूम हो जाते हैं कि बहुत सारी
[15:28]चीजें बहुत सारे मंजर हमने देखे नहीं होती हैं में बहुत सारे
[15:33]लोगों की निस्बत हम वापिस नहीं होते हैं है लेकिन जैसे ही
[15:38]नजारा करते हैं जैसे ही देखते हैं 200 रन जो क्या हमारे
[15:43]जैन के अंदर उनकी तस्वीर आती है कि यह तस्वीर एल्बम है
[15:49]है लेकिन याद रखे हैं जानेमन होता है इस आयत में यह
[15:54]कहना चाह रहा है हर मंजर को मत देखो कि हर कान
[16:03]पड़ी आवाज को मत सुनो कि वह आवाज सुनो के जो तुम्हें
[16:07]गिफ्ट दे कि वह मंजर देखोगे तो तुम्हें जो है फायदा दे
[16:14]कि जब ऐसा करोगे ना तो सिर्फ तुम आलिम नहीं होगे के
[16:20]बल के तुम शुक्रगुजार बंदे हो जाओगे है और यहीं से जो
[16:27]यह मैं और आप नतीजा ले सकते हैं है और व नतीजा
[16:33]यह है क्या अल्लाह हमें अपना शुक्रगुजार बंदा देखना चाहता है अ
[16:38]है यानी उसे ऐसा इंसान पसंद है है कि जो इंसान है
[16:44]वहीं हो और इंसान है वाकई की डेफिनेशन और तारीफ अल्लाह के
[16:46]नजदीक शुक्रगुजार है शुक्रगुजार बंद है मैं बोला ऐसा करें जो शुक्रगुजार
[16:56]नहीं होता है ना अ 9th अंडरस्टुड ऐसा यह मालूम हो रहा
[17:03]है है कि जो कान को तो यूज करता है है मगर
[17:06]भरपूर यूज नहीं करता है जो देखता है है लेकिन भरपूर अंदाज
[17:14]में देखता नहीं है मैं जो सोचता है लेकिन भरपूर अंदाज में
[17:17]प्रॉपरली सोचता नहीं है कि ऐसा इंसान के जो काम को सही
[17:26]इस्तेमाल ना करें आंखों को सही इस्तेमाल ना करें दिलो दिमाग को
[17:29]सही इस्तेमाल ना करें ऐसा इंसान इस आयत के जरिए से मालूम
[17:34]हो रहा है कि वह नाशुक्रा है है और अल्लाह ने नौकरी
[17:39]के लिए मुझे और आपको हल्क नहीं किया कि शुक्रगुजारी के लिए
[17:45]हल किया है महाराणा यह सारी बातें कहां से कर रहे हैं
[17:51]आप कि यह आयत हमने एड्रेस दिया आपको सुरेंद्र अहलावत नंबर कि
[17:55]यह शुक्रगुजार इंसान की निष्पक्ष जो है बयान है अल्लाह का शुक्र
[18:00]है लेकिन अगर कोई इंसान ने अशोक रहा हो तो खुदा के
[18:07]नजदीक उसका उनवान क्या है कि मैं और आपको यह कहते हैं
[18:13]ना शुक्रा है लेकिन आया अल्लाह की उसे नाशुक्रा के रहता है
[18:16]कि अल्लाह उसे क्या कहता है कि किन नामों से पुकारा जाता
[18:27]है कि सूरे आरा आयत नंबर 179 में बहुत वजह से सुनी
[18:36]है अब इस आयत करीमा हुए दो अल्लाह ने हैं जो नौकरी
[18:41]करता है कि उसका तारों करवाया है हैं और बहुत ही जो
[18:49]है को फंसा हां तो बलाघात के साथ इस मतलब को बयान
[18:52]की है पिछला वाला गाना जरा ना बहुत तो जरूर सुनिएगा आ
[18:56]कि भला काजल और नाले जहन नमक 80 रंग मिनल जीने वाले
[19:04]गेम्स ने कहा जानते हो या चीज इंसानों कि हमने अक्सर जिनों
[19:10]और इंसानों को किसलिए किसके लिए खेल किया है उनका मकसद निखिल
[19:14]खत क्या है आप कब आ रहे हो हम तो नहीं जानते
[19:19]तो खुद बतला हैं तो ख़ुदा वंदे आलम क्या कह रहा है
[19:23]पालक जरा आना ले जहां नमक कसीरन मिलल जीने वाले इन हमने
[19:30]अक्सर जिनों और इंसानों को जहन्नुम के ईंधन के लिए हल किया
[19:35]है को हिला देने वाला मतलब है कि साहिब तब सीरियल मेरी
[19:45]जान जरा ना कि जो मेन करते हैं जरा नायरा लगना का
[19:50]हमने खेल खेल किया है अफसर जिनों और इंसानों को अक्सर से
[19:56]कम नहीं मैं अक्सर जिन और इंसानों किसके लिए का जहन्नुम की
[20:01]आग भड़केगी नहीं मगर ऐसे इंसानों के जरिए का कब्जा रहेगा कि
[20:09]इंसान और जहन्नम का ईंधन हैं यह कैसे हो सकता है ऑन
[20:15]कर सुनो और को हौसले से सुनाओ है अब मैं तुम्हें तारों
[20:20]करवा रहा हूं यह निशान कैसे इंसान है कि लहू-लुहान हूं कि
[20:27]उन्हें हमने दिलो-दिमाग दिए हैं ए लाइफ कानून आप यह अ कि
[20:35]वह सोचते नहीं कि वह समझते नहीं वह तवज्जो नहीं करते हैं
[20:40]के दिलो-दिमाग है है मगर सोचते नहीं मगर दिल ओ दिमाग और
[20:45]सोचे नहीं इंसान यह कैसे हो सकता है का दूसरा फेज में
[20:54]दिलो-दिमाग है सोचने और समझने का काम भी लेते हैं मगर अल्लाह
[21:00]जिस तरह से चाहता है सोचना वैसा नहीं सोचते हैं और अल्लाह
[21:05]जिस तरह से फिर करना चाहता है कि तुम इस तरह से
[21:09]फिर करो और तवज्जों से काम लो नहीं आ कि नेकी की
[21:16]निस्बत सोचो तो कि किसी के बारे में भलाई के बारे में
[21:18]सोचो तो है लेकिन तुम बजाय भलाई के बुराई के अनुमान से
[21:28]सोचते हो कि ने की के मुकाबले पर बदी के हवाले से
[21:32]सोचते हो कि किसी के निस्बत फायदे के मुकाबले पर नुकसान का
[21:40]सोचते हो क्यों किसी को को खुश करने के मुकाबले पर नारा
[21:48]हाथी का सोचते हो कि खबर जिला ऐसा इंसान कैसा है डेयरी
[21:56]ने कहा मैं का सफर करो और सुनो ओ को लहू महाआयोजन
[22:00]कि वह इंसान के जो जहन्नम का ईंधन हैं मेरे नजदीक वह
[22:05]ऐसा इंसान है कि जिन्हें आंखें हैं लाइव शो रूम अब यह
[22:10]कि वह देखते नहीं के बारे इलाहा आंख और देखे ना यह
[22:18]कैसे हो सकता है आप कहां हो सकता है कब और कैसे
[22:22]कि क्या वह देखता है हां मगर मैं जहां जाता हूं वहां
[22:29]नहीं देखता आ कि मैं जिस चीज के लिए स्वस्थ रहता हूं
[22:32]वहां मत देख तो वहां देखता है इस बुराई से रोकता है
[22:40]कि बुरे मंजर को मत देख कि वह देखता है कि हर
[22:48]उस मंजर को देख है कि जो मेरा पसंदीदा मंजर है है
[22:54]लेकिन वह नहीं देखता कि महिला ऐसा इंसान कैसा है तेरी निगाह
[22:59]में कभी सब्र करो और सुनो आगे आ को लहू महाजन कि
[23:08]वह इंसान के जिसे हमने जहन्नुम का ईंधन करार दिया है वह
[23:13]ऐसा इंसान है कि जो साहिब के कान है खान रखता है
[23:19]लायस मानव यह मैं वह सुनता ही नहीं के बारे यह कौन
[23:24]हो और सुनिए ना यह कैसे मुमकिन है है भाग्य मुमकिन है
[23:30]कि जिस चीज को सुनने के लिए हमने कहा है वह नहीं
[23:34]सुनता में इन कामों को मैंने दिया है खास चीजों को सुनने
[23:41]के लिए है और खास चीजों से जो है बंद करने के
[23:47]लिए अ है लेकिन जिस चीज से रोकता है वह सुनता है
[23:52]कि इस चीज के लिए कहा है आप के भाई उसकी इज्जत
[23:58]सुनो को नहीं सुनता है कि कबीर सुनो आप जानते हो ऐसा
[24:07]इंसान कौन है मेरी निगाह में यह इंसान नहीं चेहरा इंसान का
[24:13]है हो तो लाइक का कला नाम कि यह हैवान हैवान कि
[24:18]अल्लाह कह रहा है इस इंसान को हैवान यो यो हनी चौपाया
[24:24]अ यह क्यों कहा चौपाया है इसको कि जब के खुदा ने
[24:32]जो सूरए नहल कि हमने जो सनम है कलाम में पड़ी और
[24:36]थोड़ी सी जो है तीसरी आपके खत्म आज की कि खुदा कहता
[24:40]है हमने इस इंसान को मां के बदन से भुगतान नहीं किया
[24:45]मगर तीन वषों के साथ इसलिए जाहिल का अ की समाधि बशारत
[24:51]दी दिलो-दिमाग दिए मैं इन्हें जो है वह काम शुरू है कहलाता
[24:58]है और आखिर बंदा हो जाता है आलम मंदा हो जाता है
[25:03]है यानी दूसरे अल्पांश में जो इन तीनों चीजों को प्रॉपर यूज
[25:10]करें वह शातिर है है और इस आयत करीमा में कहा है
[25:15]जो नशरा बंधा है ना कि वहां को यूज नहीं करता सही
[25:23]वह कान को यूज नहीं करता सही दिलो-दिमाग से जो है जो
[25:25]सोचने की चीज है वह सोचता नहीं आ कि वह हैवान है
[25:31]मेरे नजदीक और उसके बाद का बल हो मजाल बल्कि उससे भी
[25:37]बदतर हुआ है मैं क्यों बदतर कहा है इसलिए करो महेश्वर कौन-कौन
[25:44]से सुनिएगा है रोज महर यह है वहीं खुदा के सामने हाजिर
[25:49]होगा जो चौपाया है हां हां ठीक है वन कब्जा रहेगा एक
[25:57]बात करना चाहता हूं तुझसे कि अ क्या चाहता है क्या नाम
[26:00]कि का ऐसे इंसान को मुझसे क्यों ताबीर किया जो तूने मुझे
[26:09]कल किया नहीं मगर जिस मकसद के लिए वह सारे मकसद पूरे
[26:13]कर रहा हूं और सारे मकसद पूरे किए हैं मैंने इस कि
[26:17]कहीं चूचरा नहीं किया कि यह इंसान जिस मकसद के लिए तूने
[26:23]कल किया एक सर्राफ बराबर तेरे रास्ते में हरकत नहीं की उसने
[26:31]अ जो तूने क्यों जो है मुझसे उसको ताबीर किया मैं तो
[26:36]अच्छा हूं से ए और उसके बाद जो है क्या कहता है
[26:39]की वैल्यू मार्बल अ हुआ है वन से भी बदतर है पास
[26:46]हैवान गया साइट पर अ है ऐसे इंसानों को खुदा ने किया
[26:52]था फिर किया मलाई को होम लगाओ सैलून मुझे कल शाम को
[26:56]जब जो है खात्मा दिया और खत्म किया ख़ुदा वंदे आलम ने
[27:00]हो चुका है ऐसा इंसान जानते हो कैसा है और क्यों ऐसा
[27:09]हुआ आज का यह आपने गफलत के हाथों असीर है और यह
[27:12]काफी है तो बस मकसद देहाती इंसानी कि होशियारी होशियारी और होशियारी
[27:26]है का राशिफल ना होना है को सबसे तेज इंसान कब करता
[27:32]है उस क्यों करता है यह बात आइए सुनते जाइए कि मैं
[27:39]और आप 12 चीजों के हाथों असीर होते हैं अक्षर अ कि
[27:44]मलाइका इनायत अली इब्ने अबी तालिब अली सलातो अस्सलाम [संगीत] कि मफतलाल
[27:54]जार में देखें दुआओं में से 12 है बिना में दुआएं सभा
[27:58]अ मैं नमाज शुभ के बाद ताकि बातें नमाज शुभ में एक
[28:04]दवा का नाम है दुआ पढ़ी जाती दवाई सभी पर जो अमीरुल
[28:08]मोमिनीन से बन चुका है के बीचोबीच द्वारा के माला ने जो
[28:14]12 चीजों से अल्लाह से पनाह मांगी है अ 12 चीजों से
[28:20]स के बारे इलाहा मुझे उन दो चीजों के हाथों तन्हा मत
[28:24]छोड़ना अ कि वह चीजें कौन सी के जो इंसान को रुसवा
[28:26]करती है कि एक शैतान और दूसरे हवा व शैतानी ई हुआ
[28:37]है का नक्शा दहशत है 12 चीजों के हाथों इंसान अगर तन्हा
[28:43]हो जाए ना ओ वो तो बेचारा है की हलाकत के अलावा
[28:51]कोई नतीजा नहीं उसका आ ओ माय मुबारक रम जाना चाहता है
[28:58]है रोजाना मुख्तलिफ दुआएं पड़ जाती हैं कि लंबी चौड़ी छोटी मुक्तसर
[29:06]हैं उन तमाम देशों में को अगर जमा करें ना एक दुआ
[29:10]जो है बहुत ज्यादा जो है Mi तारीख से मिलती है लेकिन
[29:14]कम तवज्जो करते हैं और आप है और वह दुर्भाग्य है इलाही
[29:20]कि लाख तक की नहीं ऐलान अवशोषित तरफ कतई ना बदला के
[29:28]बारे इलाहा कि मेरी तुझसे कि आज जाना दरखास्त है है तो
[29:38]हरगिज़ हर गेज मुझे मैं अपने नक्श के हाथों पलक झपकने की
[29:47]हद से भी कमतर तन्हा मत छोड़ना अ मैं तेरी तवज्जो अगर
[29:54]हट गई मुझसे 9th मे रुसवा हो जाऊंगा इलाही लाख तक कि
[29:58]लिए अलार्म अब सितारा फतेह ना बदला है की तरफ फतेह इन
[30:08]पलक झपकना और पलक झपकाना है तो उससे भी कमतर से के
[30:14]लिए तन्हा मत छोड़ना को वरमाला ने दवाई सभा में कि इस
[30:20]चीज से कि जो नुकसान ही शांत है उससे पनाह मांगी है
[30:25]की हवस कि अ सीईए इंसान को और बाकी नहीं रहने देती
[30:36]हूं कि आजाद बाकी नहीं रहने देती हूं कि हर इंसान व
[30:41]है और आजाद इंसान व है कि जो अपनी हवास के हाथों
[30:45]असीर ना हो कि यह भी मगर आजादी हुई आज के इंसान
[30:53]जो चाहे जी में आए वह अंजाम दे ये कैसे मुमकिन है
[31:00]अब यहीं पर यह सवाल अगर कर डालें हैं हम आपसे और
[31:08]आप हमसे है और वह सवाल यह है कि आप आजाद हैं
[31:12]और आप भी हमसे कहें यह सवाल करें कि मौलाना आजाद हैं
[31:19]अ कि हम हमारा दोनों का जवाब होगा कि इसमें क्या शक
[31:22]है क्या हम आजाद है कि वह आजादी की निशानी क्या हमारे
[31:31]मौजूद में अ कि कोई रोक-टोक नहीं को खाते हैं अख्तियार के
[31:38]साथ पीते हथियार के साथ कलाम करते हैं इससे आर के साथ
[31:43]नहीं कलाम करना इस हार के साथ सोते हैं उठते हैं जाते
[31:45]हैं सब कुछ हथियार के साथ है और यह तैयार के साथ
[31:49]काम अंजाम देता है और रोक टोक ना हो तो उसे क्या
[31:53]कहा जाता है हमारी अदब याद में आजाद कि मामला क्या फरमाते
[31:58]हैं यह भी कोई आजादी हुई थी कि यह भी कोई आजादी
[32:07]है और हो रही है अ कुछ कागजात व है माला बतलाइए
[32:12]आजाद किसे कहते हैं कुछ कागजात व है कि जब उसके दिल
[32:19]में आए कि फलां काम को अंजाम देना है वह अपने आप
[32:25]पर जो है कंट्रोल करें और अंजाम न दे वो काबिले गौर
[32:30]है है और पते की बात है तो इसका मतलब है हमारे
[32:38]नजदीक जो डेफिनेशन है और रियायत क्यों और आजादी की या अक्षर
[32:40]मसाले फैबलेट डिग्री कि मलाइका इंच की तारीफ से घ को खाइए
[32:50]भी कोई आ जाती हुई है कि आजादी यह नहीं आ जाती
[32:57]तुम्हारे हवस की जो हाई शांत हैं नवसानी हमेशा तो उस पर
[32:59]कंट्रोल करो यह आजादी कि तेरी सांसे रसूले इस्लाम का वह किस्सा
[33:06]याद होगा आज रात को 12:00 आदर 12 मेंबरों से जो है
[33:11]ड्रा कराने एलोवेरा जैल सुनाते रहते हैं और हम सुनते हैं है
[33:14]और एथलेटिक यह वाख्या अ है कि रसूले ख़ुदा का गुर्जर हुआ
[33:19]किसी जगह से कि चंद जवानों को देखा कि क्या पर्स में
[33:27]कंपटीशन कर रहे हैं किस चीज का वजन उठाने के हवाले से
[33:32]आप अभी क्या कर रहे हो यह तैयार रसूल अल्लाह हम जो
[33:37]अपने आप को आजमाना चाह रहे हैं कौन बहादुर है और सुझाए
[33:43]ज्यादा हिम्मतवाला है और ताकतवर में कई वजन उठाते हैं जो उठा
[33:49]लेता है वह सजा है और बहादुर ताकतवर है अब रसूल को
[33:53]थाना देखा कि तंदूर गर्म है और रोटी लगा देनी चाहिए इस
[33:59]वक्त ठंडे जो है तंदूरी रोटी लगती है कभी नहीं का मौका
[34:02]था कि रसूले इस्लाम ने कह दिया और क्या कहा के कई
[34:08]जवानों क्या चाहते हो मैं तुम्हें बतला दूं कि तुम्हारे दरमियान शुजा
[34:15]इंसान और ताकतवर इंसान कौन है और कमजोर इंसान कौन है है
[34:19]और बुजदिल कौन है को कायल 16 इससे बढ़कर क्या होगा मां
[34:25]काजोल नर्स की ख्वाइश बात पर कंट्रोल कर ले वह सजा है
[34:32]में मौजूद नुकसान नहीं खाए साथ पर कंट्रोल ना कर पाए वह
[34:38]कमजोर है है हनी दूसरा पास में फिजिकली तौर पर बॉडी वाइज
[34:41]जिस्मानी लिहाज से चाहे तुम कितने ही पावरफुल क्यों ना हो लेकिन
[34:47]अगर नव पर कंट्रोल नहीं कर पाते तो बुजदिल हो और कमजोर
[34:52]हो है लेकिन अगर जो है फिजिकली लिए आज से बॉडी वाइज
[34:57]अगर तुम पतले और दुबले हो लेकिन उस पर कंट्रोल की निस्बत
[35:03]तुम जो है महारत रखते हो तुम सजा हो कि माहे मुबारक
[35:09]का मज़ा न जानेमन अ कि मुझे और आपको बहादुरी का दर्द
[35:14]देने के लिए आ रहा है है ना सिर्फ 10 देने के
[35:19]लिए आ रहा है अ है बल्कि जो है माहे मुबारक रमजान
[35:26]हमारा मालूम भी है और मुरब्बी भी अ की तालीम कमल भी
[35:31]अंजाम देता है यह मुबारक रमजान और तबीयत कमल भी अंजाम देता
[35:35]है एक 16 घंटे 17 घंटे भूख और प्यास के जरिए से
[35:40]तबीयत कमल है खाली पेट को खाली रखना काफी नहीं है कि
[35:48]इस कानून को इस आपको दिलो-दिमाग को भी खाली कर रखना है
[35:55]ऐसा क्यों कर हम जो अपने श्रम को भूखा रखते हैं का
[36:00]प्यासा रखते हैं अपने आपको का इन कानूनों को और आंखों को
[36:05]भी भूखा और प्यासा रखो कि वह कैसे कहार मंजर मत देखो
[36:12]कि हर काम बड़ी आवाज को मत सुनो ओ कि हर वह
[36:18]चीज की जो तुम्हारे शहर में आए उसे कबूल ना करो तो
[36:22]है बल्कि प्रॉपरली सोचो और उसके बाद स्ट्रिप लोग तो बस आखिरी
[36:31]कलाम के बाद सहमत दिया आपको जो अलार्म दिया आलम का पसंदीदा
[36:38]इंसान व है कि जो इबादत गुजार हो कि तिब्बत गुजार वह
[36:42]शक है कि जो शुक्र गुजार हो कि ने मतों के मुकाबले
[36:51]पर है और शुक्रगुजार व है कि जो अपने आ जाओ जवारे
[36:53]के जरिए से सही काम अंजाम दे का पौधा ऐसे इंसान की
[37:00]इज्जत तारीफ करता है सूर्य मोमिनून में फतेह मुबारक अल्लाह आसनों था
[37:05]लेकिन ई ई एक कप आपको बरकत है वह दत्त ने अपनी
[37:09]फीलिंग्स व तारीफ कर रहा है है कि जिसने ऐसा इंसान खेल
[37:15]किया है मैं तुझ से कान दिए आंखें भी दिलो-दिमाग दिए और
[37:21]सही तरीके से यूज करता हुआ में नजर आता है साला बात
[37:27]भेजो मोहम्मद वाले मोहम्मद अतहर कि आयोग अनुमंडल अ है या अली
[37:36]अयोध्या आंदोलन से दुआ करते हैं पर हमारे इसके लिए वारदात को
[37:41]कबूल फरमा कि हमारे इस साल यहां पर चलने की तौफीक अता
[37:43]फरमा हमारे गुनाहों की मकसद शर्मा जो परेशान हाल उनकी परेशानियों को
[37:50]दूर पर मां जब मकरूज उन्हें कर से सूख दोषी अता फरमा
[37:52]वाला जो बीमार है वह बीमार ए कर्बला के सके में सफाई
[37:57]व्यवस्था हत्याकांड में लता वर्मा बारे में यह जो मरहूमों चुके उनकी
[38:00]मकसद शर्मा 1234 मिलनक के दरजाट बुलंद शहर दाएं मिलत को शोहदाए
[38:08]कर्बला के साथ मशहूर परमा जजिया रात के मतानुसार ज्यादा शमशान प्रोफार्मा
[38:13]इमामे ज़माना के जुर्म में ताजी लता वर्मा हमें उनकी आवाज अनुसार
[38:20]में शामिल वर्मा व बना तप बल मैंने कौन तमिल हॉलीवुड झाल
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