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Muqam e Insan Aur Muqam e Insaniyat | H.I Shahid Raza Kashfi
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محاضرات
Record date: 26 Jan 2025 - مقام انسان اور مقام انسانیت AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2025 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:18]बिस्मिल्ला रहमान रहीम अल हमदुलिल्ला ह दना लिहाजा व लाला लक जा
[0:41]रस रबना बिल हक अस्सलातो वस्सलाम अला रसूल सकलेन महबूबे रब्बल मगर
[0:50]बने वल मशरक जदल हसन वल हुसैन अल कासिम मोहम्मद सह [संगीत]
[1:02]लालाला लाया यन अमा बाद फल्लाह सुभान तबारक ताला फ किताब मजीद
[1:17]ल फरका हमद वहु ल कालीन बिस्मिल्लाह रहमान रहीम ललक इंसाना फसने
[1:26]तम मज गुफ्तगू मकाम इंसान और मकाम इंसानियत कबल इसके आज की
[1:39]गुफ्तगू का आगाज बकायदा हो रोज शहादत इमाम मूस बने जाफर अले
[1:49]सलातो व् सलाम है आप तमाम अहले ईमान को की शहादत की
[1:50]निस्बत तसली अर्ज करते हैं और इसी बहाने से खुदा वंदे आलम
[1:58]से आरजू करते हैं कि बारेला तू भी मुंतज और हम भी
[2:03]मुंतज हमारे वक्त के इमाम में उनके जुहूर के लिहाज से ताजल
[2:09]फरमा और उनके आवान अनसार में शामिल होने की तौफीक अता फरमा
[2:16]अने मन आज के रोज के लिहाज से अगर सातवें इमाम की
[2:27]शख्सियत को लिहाज किया जाए तो मकतब तश्य का तोरा इमतियाज है
[2:36]कि इस मकतब ने दूसरे मकातिब फिक्र के मुकाबले पर जिन शख्सियत
[2:46]को पेश किया वह शख्सियत वाकई शख्सियत हैं दूसरे अल्फाज में आज
[2:55]की नशिमा है मकाम इंसान और मकाम इंसानियत मकतब तयो ने जिन
[3:02]शख्सियत को पेश किया वह वाकई इंसान है इंसान अपने जिस्म के
[3:14]लिहाज से इंसान नहीं अगर इंसान इंसान है तो अपनी रूह के
[3:21]लिहाज से इंसान है बसा औकात मैं और आप मुलाहिजा करते हैं
[3:31]इन्हीं इंसान यानी इ इंसानों को कि जिनकी शक्ल सूरत इंसानी है
[3:38]लेकिन उनकी रूहे हैवानी है मौला कायनात अली इने अबी तालिब अ
[3:46]सलातो सलाम गौर बार फरमान है नजल बलगा के दरमियान कि बसा
[4:00]औकात इंसान सूरत इंसान रखता है लेकिन उसका कल्ब हैवानी हुआ करता
[4:09]है और बाज दूसरे मकामा पर इसी नहज बलगा के दरमियान मौला
[4:14]के फरामीर मिलते हैं के कभी ऐसे इंसान को देखा है कि
[4:20]जो चलती फिरती लाश हो मगर मौला लाश भी चलती फिरती है
[4:29]कहा बिल्कुल कहा व कैसे कहा जिसका जमीर मुर्दा हो जिसका जमीर
[4:39]मुर्दा हो जाए अजीजो वह बजहर मुझे और आपको चलता फिरता तो
[4:42]नजर आता है कि जिसकी निस्बत में और आप यह कहते हैं
[4:46]अपनी दानिश में कि जो चलता है फिरता है सुनता है और
[4:53]देखता है यानी जिंदा है लेकिन मौला के नजदीक वह मुर्दा है
[4:58]और मुर्दा ऐसी लाश है कि जो चल रही है और फिर
[5:07]रही है इसलिए कि इसका अंदर खाली है मैं और आप बसा
[5:14]औकात अपने जाहिरी जिस्म को वेट करते हैं और वजन करके खुश
[5:20]होते हैं उस वक्त के जब हमारा वजन प्रॉपर हो और अच्छा
[5:22]हो मेडिकल के लिहाज से हेल्थ वाइज तो मैं और आप खुश
[5:32]होते हैं भाई खुश क्यों हो रहे हैं क वजह उसकी यह
[5:35]है कि हमारा वेट मुनासिब है और हेवी वेट है हम हमारी
[5:44]बॉडी को हमारे जिस्म को हमारे बदन को कोई खतरा लहक नहीं
[5:46]है इस हवाले से और अगर ज्यादा कहने पर आ गए तो
[5:54]कहा अभी हम जवान है कहा भाई क्यों कहा इसलिए कि वेट
[5:57]हमारा मुनासिब है लेकिन मौला के नजदीक और रसूल इस्लाम के नजदीक
[6:06]हैवी वेट हैवी वेट नहीं हुआ करता बहुत गौर से सुनिए गुफ्तगू
[6:13]इस मौजू के जैल में लंबी है मगर शॉर्ट में कुछ ना
[6:18]होने से कुछ बेहतर है रसूल के नजदीक और मौला के नजदीक
[6:26]हर हैवी वेट हैवी वेट नहीं होता है हतमान वह किस्सा जरूर
[6:35]सुना होगा आपने कि रसूल इस्लाम का गुजर हुआ चंद जवान एक
[6:39]मकाम पर यजा थे नजदीक गए और देखा कि एक दूसरे को
[6:45]आजमा रहे हैं एक भारी भरकम पत्थर को उठाने के लिहाज से
[6:52]क भाई क्या कर रहे हैं क या रसूल अल्लाह हम अपने
[6:58]आप को आजमा रहे हैं कि हमारे दरमियान हेवी वेट कौन है
[7:04]भारी भरकम कौन है तो क फिर क्या करते हैं आप का
[7:10]इस पत्थर को कि जो आप देख रहे हैं जिसने उठा लिया
[7:11]वह हेवी वेट है वह शुजा है और बहादुर है कहा तुम
[7:20]चाहोगे रसूल ने कहा कहा चाहोगे तुम जवानों कि मैं तुम्हारे दरमियान
[7:30]फैसला करूं कि तुम्हारे दरमियान हेवी वेट कौन है शुजा तरीन इंसान
[7:33]कौन है क इससे बेहतर क्या होगा कि रसूल हमारे दरमियान हो
[7:40]और जज रसूल हो और वह फैसला करें तो रसूल ने जब
[7:49]देखा कि इनके जहन तैयार हैं तो फौरन कहना शुरू किया क
[7:55]तुम्हारे दरमियान पहलवान वह है और हैवी वेट वह है कि जो
[8:01]अपने आप पर कंट्रोल करना जानता हो जो अपने नफ्स पर कंट्रोल
[8:10]करने का माहिर हो वह हैवी वेट है एक और मकाम से
[8:18]गुजर हो रहा था लोग जमा थे और ठट लगा रहे थे
[8:25]मुस्कुरा रहे थे एक शख्स को देखकर क भाई क्या हो रहा
[8:29]है लोगों ने कहा कि जो है या रसूल अल्लाह यह शख्स
[8:35]दीवाना है उसकी ऊट पटाक हरकत को देखकर हम हंस रहे हैं
[8:43]बे साख हंसी आती है रसूल ने फरमाया क यह दीवाना नहीं
[8:51]है दीवाने तुम हो यह दीवाना नहीं है यह पागल नहीं है
[8:58]पागल तुम हो यह मरीज है और बीमार इसका जहनी तवाजो आउट
[9:06]है बैलेंस के साथ नहीं है लिहाजा इसलिए इस किस्म की हरकतें
[9:14]कर रहा है तुम तो जहनी लिहाज से सही हो तुम इसकी
[9:22]हरकतें देखकर यह समझ रहे हो कि यह पागल है यह बीमार
[9:26]है पागल तुम हो सही सालिम जहन लेकर भी जो है इस
[9:35]किस्म की जो है हरकत से जो है बाज नहीं आते तो
[9:40]अन याद रखें कि बसा औकात मैं और आप यह बसा औकात
[9:46]कहना भी सही नहीं है हमारी शक्ल इंसानी है लेकिन देखना होगा
[9:56]कि हम अंदर कैसे हैं हमारा चेहरा अंदरूनी कैसा है माहे रजब
[10:03]माहे शाबान और फिर माहे रमजान 12 महीनों में से यह तीन
[10:09]महीने माइनस कर दिए जाए तो कुछ भी बाकी नहीं रहता है
[10:15]जबकि न महीने बाकी हैं आमतौर पर इन नौ महीनों में एक
[10:21]इंसान अपनी इंसानियत से इतना नीचे आ जाता है कि खुदा वंदे
[10:29]आलम ने एहतमाम किया है रजब के जरिए से शाबान के जरिए
[10:34]से और रमजान के जरिए से यह ऊपर आ जाए इसका वेट
[10:41]बढ़ जाए मानवी लिहाज से रूहानी लिहाज से अपने आप पर कंट्रोल
[10:46]करने के लिहाज से तो रजब का महीना शाबान का महीना और
[10:51]बिलखिरिया ऊपर करना है क बारेला मेरी सूरत तो इंसानी है तूने
[11:05]बड़ा खूबसूरत बनाया है आंखों को अपने मकाम पर रखा है कानों
[11:10]को अपने मकाम पर रखा है हर चीज को जो है प्रॉपर
[11:17]जगह दी है फिर कौन सी कमी है हमारे अंदर कहा तू
[11:22]खुद सोच जब तेरे सामने दुख भरा इंसान दर्द भरा इंसान जब
[11:29]त उसे देखता है या गुजरता है वह तुम्हारे सामने से तुम्हें
[11:35]कोई एहसास होता है या नहीं अगर एहसास होता है तो तुम
[11:47]इंसान हो अगर एहसास नहीं होता इग्नोर कर देते हो चश्म पोषी
[11:50]से काम लेते हो तुम इंसान नहीं चलती फिरती लाश हो इसी
[11:57]नजल बालागा के अंदर है क कभी जो है अपने आप से
[12:07]बाहर आओ अपने आप से बाहर आकर अपने आप को देखो जब
[12:09]अपने आप से बाहर आकर अपने आप को देखोगे तो तुम्हें मालूम
[12:15]होगा कि तुम इंसान हो या हैवान आजमाइश शर्त है लिहाजा ये
[12:24]आयात करीमा मैंने आगाज में जो पढ़ी है सरनामा कलाम में सूर
[12:27]तीन की चार नंबर की आ चार कसमें खाकर खुदा वंदे आलम
[12:32]ने इस मतलब को बयान किया है बहुत गौर से सुनिए लक
[12:40]लक इंसाना फसने तक तीन व जैतून तूर सनी वजल बलद अमीन
[12:52]चार कसम खाई उसके फौरन बाद इस मतलब को बयान किया है
[12:55]और मतलब क्या है मुझसे और आपसे मुतालिक लकल अजीज इंसान जानता
[13:07]है तेरा सांचा कैसा है मैंने तुझे जो बेहतरीन तस्वीर और कालि
[13:13]में ढाला है खूबसूरत मैंने जितने भी मौजूदा को खल्क किया है
[13:21]कोई भी मौजूद तेरी मानिंद नहीं तू बुलंद है और बुलंद है
[13:32]और बुलंद लकत लक इंसाना फसने [संगीत] तक तीन लफ्ज अजीजो बहुत
[13:39]सारी बातों को स्किप करके आसान अल्फाज में आप तक मुंत किल
[13:42]करना चाहूंगा एक है शख्स एक है इंसान एक है आदमी तीनों
[13:58]लफ को अगर मुलाहिजा करें तो बहुत ही खूबसूरत प्यारे और जबरदस्त
[14:08]माना के लिहाज से अगर देखा जाए बजहर हैवान के मुकाबले पर
[14:14]इंसान खूबसूरत है हैवान के मुकाबले पर आदमी खूबसूरत है हैवान के
[14:24]मुकाबले पर शख्स खूबसूरत है हैवान को शख्स नहीं कहा जाता है
[14:28]लेकिन तल थोड़ा आगे शख्स के पहलू में लफ्ज रख दिया जाए
[14:38]शख्सियत आदमी के मुकाबले पर यानी पहलू में आदमि त रख दिया
[14:44]जाए इंसान के पहलू में इंसानियत रख दी जाए नतीजा क्या निकलेगा
[14:56]बहुत ही सामने का शख्स मुर्दा हो जाता है शख्सियत सवाल ही
[15:04]पैदा नहीं होता वह मुर्दा हो जाए क्यों इसलिए कि शख्स यानी
[15:12]फला इब्ने फलान फला इब्ने फलान फलां साल में इस दुनिया से
[15:21]रुखसत हो गया कैसी शख्सियत का हामिश सियत बहुत ही उम्दा बहुत
[15:32]ही पुर कशिश और भारी भरकम मानवी और रूहानी लिहाज से बहुत
[15:37]ही म दब थे जनाब कहा वह मुर्दा है क ना वह
[15:45]खुद चले गए शख्सियत जिंदा है आदमी और आदमि त में भी
[15:58]यही फर्क है आदमी फुला इब्ने फुला है आद फला इब्ने फुला
[16:05]नहीं है जहां फला इब्ने फला आएगा वहां मुर्द कीी है वहा
[16:10]बका नहीं है वहा फना है लेकिन जब यह आदमी आदमि त
[16:15]में अपने आप को चेंज करता है बाकी बाकी और बाकी है
[16:22]इंसान और इंसानियत के दरमियान भी यही फर्क है इन फुला इब्ने
[16:33]फुला है लेकिन एक अरसे तक का जिंदा है वह इंसान का
[16:41]ना क क्या हुआ क इस दुनिया से रुखसत हो गए क
[16:49]इंसानियत का बाकी है कय इंसानियत क्या है क वो उसकी नेचर
[16:53]जो उसने अल्लाह की तौफीक से अपने अंदर से बाहर लेकर आए
[17:01]थे खुद अपने आप को भी अल्लाह अल्लाह की तौफीक से बनाया
[17:06]और संवारा और क्या खूब संवारा उस संवारने की बदौलत अपने अतरा
[17:14]में खुशबू ही खुशबू छोड़ते हुए गए ऐसी खुशबू कि सवाल ही
[17:23]पैदा नहीं होता कि अगर किसी की अंदर की नाक सही हो
[17:28]वो खुशबू का एहसास ना करे यह अंदर की नाक क्या है
[17:34]मैं और आप कचरे के ढेर के पास से गुजरते हैं हम
[17:41]अपनी मिसाल दिए देते आप हमारे साथ हैं कचरे के ढेर के
[17:49]पास से गुजरे फौरन आपने जो है रूमाल निकाला और मुंह पर
[17:54]और नाक पर देया हमने दरयाफ्त किया भाई यह क्या है कमन
[17:59]मौलाना आपको बदबू नहीं आ रही क कैसी बदबू कहां की बदबू
[18:06]क ये कचरे का ढेर हमें तो कोई बदबू नहीं आ रही
[18:11]तो आप क्या कहेंगे मौलाना लगता ऐसा है कि शायद बीमार है
[18:15]आप आपको नजला और जुकाम है आपकी नाक बंद है लिहाजा आपको
[18:25]यह बदबू का एहसास नहीं हो रहा अने मन यही सूरते हाल
[18:29]अंदर की नाक की रूहानी मुझ जैसे इंसान को एहसास नहीं होता
[18:37]गुनाह का हर गुनाह में बदबू है नहीं मालूम मुमकिन है शायद
[18:52]सुना हो आपने रिवायत के दरमियान चैप्टर है कैसे मालूम होता है
[18:57]मलायका को कि फला इंसान ने नेकी की है फला इंसान ने
[19:03]बदी की है या इसी इंसान ने नेकी की है इसी इंसान
[19:08]ने कुछ टाइम के बाद बदी की है क जब नेकी करता
[19:13]है इंसान तो खुशबू साते होती है उस खुशबू से एहसास करते
[19:20]हैं मलायका का इससे नेकी हुई है लेकिन जैसे ही जो है
[19:28]बदबू का एहसास होता है तो उस ब बबू से कि जो
[19:34]खास किस्म की बदबू है का इसने गुनाह अंजाम दिया है इंसान
[19:38]और इंसानियत के दरमियान यह फर्क है इंसान जिंदा भी होते हैं
[19:45]इंसान मुर्दा भी होते हैं वह इंसान जिंदा है कि जो इंसानियत
[19:51]की बुनियाद के ऊपर है लेकिन वह इंसान कि जो फला इब्ने
[19:57]फला की बुनियाद पर है और माइनस है इंसानियत वह मुर्दा है
[20:03]लकत खलक इंसाना फसने तकविम यह एक मतलब खद अपने आप पर
[20:13]कंट्रोल करना हो एक और मतलब इसी हवाले से अगरचे बहुत सारे
[20:15]मताफ है क्या आगाज में कहा हमने तफसील तलब मतलब है मकाम
[20:22]इंसान और मकाम इंसानियत हैवान को अजने मन मुलाज करें तो हैवान
[20:34]जब मुत वलित होता है तो जो सूरत भी और जो हकीकत
[20:41]उसकी होती है उस हकीकत पर आखिर तक बाकी रहता है बहुत
[20:42]गौर से सुनिए बड़ा लजीज है मतलब खुद इंसान को अपने आप
[20:49]को पहचानना इंसानियत के लिहाज से अगरचे खुदा वंदे आलम ने कुराने
[20:56]मजीद में 114 सूर के दरमियान मुस्तकीम डायरेक्टली और इनडायरेक्टली इस मतलब
[21:01]को बयान किया है इंशाल्लाह हवाला दूंगा मैं आपको आयात के जरिए
[21:05]से हैवान जब मुतले होता है जन्म लेता है तो जिस नाम
[21:13]का वह हैवान होता है मिसाल के तौर पर शेर चीता यह
[21:20]दरिंदे दूसरी तरफ आइए वह हैवान के जो दरिंदे नहीं है जो
[21:27]हमारे ही दरमियान रहते हैं लेकिन वह दरिंदे नहीं है परिंदों को
[21:34]अगर मुलाहिजा करें वह भी इसी तरीके से लेकिन ब महज इसके
[21:37]के जन्म लेते नहीं जब तक इस दुनिया से रुखसत नहीं होते
[21:44]मर नहीं जाते वही नेचर शेर की शेर ही शेर शेर वाली
[21:50]ही रहती है और अगर शेर की नेचर शेर वाली ना हो
[21:53]तो शेर कहा जाएगा उसे चीता चीता आखिर तक चीता रहेगा बकरी
[22:07]बकरी है आखिर तक जो है बकरी पन दिखाती रहेगी तो बकरी
[22:14]है मुख्तलिफ हैवान यही कबूतर जो रोजाना देखते हैं मैं और कबूतर
[22:20]पन दिखाता रहता है कबूतर है व चेंज ही नहीं होता है
[22:26]मगर यह इंसान जन्म लेता नहीं कोई गारंटी नहीं कि आखिर तक
[22:36]य इंसान रहे जाहिरी तौर पर यह इंसान है उसकी नेचर चेंज
[22:48]हो जाती है रिवायत के दरमियान चैप्टर है कि जब इंसान की
[22:55]नेचर चेंज होती है ना तो कभी शेर की शक्ल ढलता है
[23:01]अंदर कभी किसी दरिंदे की कभी किसी हैवान की कभी किसी हैवान
[23:05]की रिवायत के दरमियान चैप्टर है तज सुम आमाल कयामत के दिन
[23:17]यही अमल हमारे मुजस्सम होंगे जिस्म की शक्ल दी जाएगी और जिस्म
[23:24]की शक्ल कभी किसी हैवान की कभी किसी दरिंदे की कभी किसी
[23:36]जो है सांप और बिच्छू की क्यों ऐसा है क यह तो
[23:42]इंसान है ना सूरत में इंसान है हकीकत में हैवान है रा
[23:54]जनर मन जिव बारहा इस आयत को सुना मैंने और आपने सूर
[24:01]आरा आयत नंबर 179 वलक जरा जहन्नम कसीर मिनल जिव इंस हमने
[24:11]अक्सर जिन और इंसानों को जानते हो किसके लिए खल्क किया है
[24:19]जहन्नुम के लिए बरला जहन्नुम के लिए कहा जहन्नुम के लिए कहा
[24:23]किसे इंसान को कहा इंसान को क वो कैसा इंसान कि जिसे
[24:30]तूने खल्क करके कहा फ तबारक अल्लाह अस सनल लकीन सर मोमिनून
[24:35]में किसी की तारीफ नहीं की इंसान को खल्क करने के बाद
[24:43]इंसान की तारीफ की लेकिन अब इसे जहन्नुम का धन क वो
[24:50]कैसे लहु कुलब लाय दिल और दिमाग रखते हैं मगर सोचते और
[24:54]समझते नहीं दिल दिमाग हो सोचे और समझे नहीं मसखरा नहीं है
[25:05]य हम में से किसी इंसान का कलाम नहीं है यह अल्लाह
[25:09]का कलाम है सूर आरा आयत नंबर 179 लहु कुलब लायन बहा
[25:21]लहु आयन क इनकी आंखें हैं लायर यह देखते नहीं लहु आजन
[25:35]ला यसमान ब कय कान रखते हैं मगर सुनते नहीं कैसे हो
[25:38]सकता है आंखें और देखी नहीं कान हो और सुने नहीं कैसे
[25:49]हो सकता है उला का कलना राज उसका यह है कि आंखें
[25:58]रखते हुए कान रखते हुए दिलो दिमाग रखते हुए उनका अमल अंजाम
[26:02]नहीं देते हैं य रीजन क्या है कय चौपाई हैं यही रुकेंगे
[26:10]खुदा ने चौपाया कहा है किसे इंसान को जबकि यह दो पाया
[26:17]है दोपहर रखता है दो पैर रखता है सूरत इंसान की है
[26:28]ये चौपाया कैसे क मुलाहिजा करो खुद ही यहीं से डिफरेंस मालूम
[26:36]होगा इंसान और इंसानियत में का इंसान अपना कॉलर ऊंचा करते रहे
[26:44]कि मैं जो है इंसान इंसान और इंसान खुदा कहता है तू
[26:50]हैवान हैवान और हैवान है क वो कैसे क तू समझता है
[26:54]दो आंखें रखकर इंसान हो गया दो कान रखकर इंसान हो गया
[26:59]गया जाहिरी जो है इस सर के अंदर दिमाग मौजूद है इंसान
[27:05]हो गया ना क वो कैसे क तुझसे बेहतर तो जो है
[27:12]सर रखने के लिहाज से यह हैवान है बहुत गौर से सुनिए
[27:16]तेरा सर तो जो है छोटा है इस हैवान का सर बड़ा
[27:26]है तुम्हारे सर के अंदर दिमाग जो होगा इतना सा होगा इस
[27:33]सर के अंदर जो दिमाग होगा वह बड़ा होगा तो इफ्तेखार को
[27:43]इफ्तेखार अगर करना हो किसी को तुम में से तो किसको हक
[27:50]हासिल है उस बड़े सर वाले को बड़ा सर है आंखें भी
[27:52]बड़ी है कान भी बड़े हैं तुम इतने से कान पर अकते
[27:59]इतनी सी आंखों पर अड़ते हो वह बड़ा सर रखता है बड़ा
[28:09]दिमाग है बड़ी आंखें हैं बड़े कान है उला का कल नाम
[28:13]इंसान अजीज अपने आप को पहचाना नहीं तूने तू उस वक्त इंसान
[28:21]है कि जब साहिबे इंसानियत हो इन जाहिरी चीजों को देखकर अपना
[28:30]कॉलर ऊंचा मत कर बल हु अजल खुदा आगे जाता है का
[28:38]ऐसा इंसान हैवान से भी बदतर है बरला आप तो खुद ही
[28:45]बतला यह इंसान इस मंजिल पर क्यों कर और कैसे पहुंचता है
[28:48]इतना तनज जुल इतना जवाल इतनी गहरी खाई में क राज सुनना
[28:57]चाहोगे कहा क्यों नहीं उला कामल गाफिल [संगीत] यह लोग गफलत के
[29:08]शिकार हैं गाफिल है यह जिस मंजर को देखना चाहिए वह नहीं
[29:15]देखते हैं अपनी आंखों से लिहाजा यह मकाम इंसान जाहिरी सूरत के
[29:21]ऊपर बाकी है लेकिन मकाम इंसानियत से आरही है जिस चीज से
[29:30]रोका है कि वह मंजर ना देखें वह देखते हैं इसी तरीके
[29:35]से कैलकुलेट कीजिए इंसान को अगर मकाम चाहिए स्टेटस चाहिए तो हम
[29:44]अपनी दुनिया के अंदर जो है कैलकुलेशन जो करते हैं क भाई
[29:50]एजुकेशन अच्छी है बहुत गौर से सुनिए क भाई क्या किया है
[29:55]इन्होंने क इन्होने सीए किया हुआ है भाई क्या क्या किया हुआ
[29:58]है फला ने कहा पीएचडी है कहा भाई फलां क्या है कहा
[30:05]भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है आज की जबान में फला मल्टीनेशनल कंपनी के
[30:09]अंदर जो है ये काम करते हैं हाईएस्ट पोस्ट है इनके पास
[30:16]अच्छा भाई अगर यह पोस्ट इनके पास हैं और ये एजुकेशन इनके
[30:24]पास है तो क्या हो गए ये क ये इंसान इंसान अजीम
[30:29]अच्छा अब अगर किसी के पास नॉलेज ना हो एजुकेशन ना हो
[30:35]या कमतर एजुकेशन हो तुम्हारे नजदीक वह इंसान कैसा है क इंसान
[30:42]नहीं चले बहुत गौर से सुनिए याद रखिएगा लेकिन अगर एक इंसान
[30:48]बा अदब हो हसाना रखता हो जो भी जो है उनको देखता
[31:05]है या मुलाकात करता है वो शाद हो जाता है उनको देखकर
[31:09]क भाई कबल इसके कि जो है हम सलाम करें वह सलाम
[31:12]किए देते हैं जब भी हमें देखते हैं हालांकि हमसे बड़े हैं
[31:17]हम छोटे हैं वह हम अपनी जगह छोड़ देते हैं बुलंद हो
[31:22]जाते हैं अपने मकाम पर लेकिन अहले इल्म नहीं है नॉलेज नहीं
[31:27]है उनके पास एजुकेशन नहीं है उन के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं
[31:30]है डॉक्टर नहीं है वो ए टूजी मगर म अदब है लेकिन
[31:38]वह साहब मल्टीनेशनल कंपनी के बॉस हैं क दोनों में फर्क क्या
[31:45]है फर्क साफ जाहिर है एक जगह रोशनी है तो एक जगह
[31:53]अंधेरा हम आपसे ही सब सवाल किए देते हैं ना समझे हम
[31:58]दर् दे रहे ना समझा आप दर सुन रहे हमारा और आपका
[32:01]जो है दिल जो है किसकी तरफ झुकेगा किसकी तरफ माइल होगा
[32:08]बहुत आसान चलते फिरते अफराद से ही मालूम कर ले क कौन
[32:17]सा इंसान आपके नजदीक बेहतर है कौन सा इंसान आपके नजदीक जो
[32:27]है बुलंद है क भाई यह भी कोई सवाल है क वही
[32:30]इंसान बुलंद है और बेहतर कि जो मुस्कुरा कर जवाब देता है
[32:36]और अगर जवाब नहीं भी देता तो हमेशा जो है मुस्कुराहट उसके
[32:39]चेहरे पर रहती है उसकी मुस्कुराहट देखकर हमारा दिल शाद हो जाता
[32:43]है या अगर हम अफसुर्दा खातिर हो तो वह हमसे दो कलाम
[32:49]अदा करता है हम शाद हो जाते हैं लेकिन एक इंसान के
[32:54]जो एजुकेटेड है तालीम याफ्ता है हमारी दानिश में आज की दुनिया
[32:58]के अंदर लेकिन हमेशा अकड़ा रहता है और अगर अकड़ा नहीं भी
[33:03]रहता तो कभी भी जो है उसके चेहरे पर शादमानी या मुस्कुराहट
[33:10]नहीं होती लिहाज जो क्या है ऐसा इंसान हमें अच्छा नहीं लगता
[33:14]है कुरान ने अजीजो इन दो किस्म के अफराद को जुदा किया
[33:22]है हदीस ने भी जुदा किया है आमा तारीन के को अगर
[33:29]मुलाहिजा करें जुदा किया है ना आयात हो बहुत गौर से सुनिए
[33:35]ना अदीस हो इस हवाले से ना तहरीन के अवाल हो चलते
[33:42]हैं उस मकाम पर या उस मुल्क में कि जहां पर खुदा
[33:48]को माना नहीं जाता है जहां कलेमा गो नहीं है हम पाकिस्तान
[33:54]को कहते हैं अहले कलमा चलते हैं दूसरे कंट्री में उनसे दरयाफ्त
[34:00]करते हैं तुम्हारे नजदीक इंसान की इंसानियत के हवाले से निशानी क्या
[34:05]है कैसे पहचानते हो का अखलाक अखलाक और अखलाक सच बोलने वाला
[34:17]इंसान इंसान है सच बोलने वाला इंसान अपनी जिंदगी पूरी करके चला
[34:21]जाता है मगर उसकी सच्चाई की सूरत में वह बाकी है बसा
[34:30]औकात इंसान अपना कॉलर ऊंचा करता है इस बुनियाद के ऊपर कि
[34:34]वह एजुकेटेड है उसकी तालीम का कोई फायदा नहीं चले आगे थोड़ा
[34:46]सा इस्लाम के नजदीक खुदा रसूल और आइमा तहरीम के नजदीक हत्ता
[34:53]फिर दोबारा छोड़ दीजिए थोड़ी सी देर के लिए इस्लाम को इस्लाम
[34:59]के दायरे से बाहर आ जाइए जो वाकय सोच रखता है फिक्र
[35:07]रखता है मशर की लिहाज से इजतेमा लिहाज से इंसानी लिहाज से
[35:11]उसके नजदीक एक मेयार है कि इंसान किसे कहते हैं और इंसानियत
[35:15]क्या है क भाई क्या है क साहिबे इरादा इंसान इंसान है
[35:24]जो अपने ऊपर कंट्रोल करना जानता है वह इंसान है जो अपने
[35:33]ऊपर मुसल्लत नहीं हो सकता अब सुने गौर से उलमा अखलाक इस
[35:38]मकाम पर क्या कहते हैं जो शख्स यह कहे कि वह आजाद
[35:45]है और उससे पूछा जाए कि तुम्हारी आजादी की दलील क्या है
[35:52]निशानी क्या है क भाई इसमें भी कोई बड़ी बात है क
[35:53]हम जो चाहे काम अंजाम देना अंजाम देते हैं तो कहा पलट
[35:59]के उनसे कहो कि तुम असीर हो तुम आजाद नहीं हो क
[36:08]वो कैसे क कमाल तुम्हारा आजादी के लिहाज से उस वक्त होगा
[36:12]कि जब तुम्हारा जी चाहे किसी काम को अंजाम देना और अंजाम
[36:17]ना दो जब मेरा और आपका जी चाहे स्टेप लेने के हवाले
[36:24]से कदम उठाने के हवाले से किसी काम की निस्बत हम ना
[36:29]उठाए ला बताइए एक मर्तबा हमने जो है सोचा कि स्टेप लेना
[36:37]है स्टेप ले लिया एक मर्तबा हमने पूरा सोच लिया और स्टेप
[36:46]नहीं लिया हम गुलाम है या आजाद हम गुलाम है अपनी ही
[36:54]ख्वाहिश के गुलाम है नहजुल बला खत के दरमियान लेटर्स के दरमियान
[37:02]मौला कायनात के लिखे हुए एक खत खत नंबर 31 31 नंबर
[37:08]सिफे से वापसी पर जंगे सिफे से वापसी पर अपने बड़े शहजादे
[37:14]के नाम तहरीर किया है लंबा चौड़ा खत एड्रेस दिया है जरूर
[37:21]पढ़े जिंदगी में एक दफा जरूर पढ़े बीचोंबीच मौला ने क्या कहा
[37:27]अपने फर्जंद से बड़े शहजादे से बेटा हसन जी बाबा जान ला
[37:34]तकन अब दरक बेटा हसन हरगिज अपने आप को इजाजत मत देना
[37:42]दूसरों की गुलामी की निस्बत दूसरे गुलाम मत बनना क्यों बाबा क
[37:51]जाल कल्लारा बेटा हसन अल्लाह ने तुम्हें आजाद पैदा किया है य
[38:00]गैर से मुराद कौन है खुद इंसान का अपना आप भी का
[38:05]अपने आप की भी गुलाम मत बनो आजाद बनो तूल तारीख इंसानियत
[38:12]को अने मन अगर मुलाहिजा करें खास तौर पर अंबिया और औलिया
[38:21]कराम यह सब के सब आजाद थे यह सब के सब आजाद
[38:26]थे और ही से जो है इस्ते फादास और इंसानियत के बयान
[38:31]को मजबूत करने के लिए और मजीद और जनों में बैठाने के
[38:38]लिए मौला ने फरमाया क चाहते हो अली तुमसे जो है यह
[38:43]कहे और बतलाए तुम्हें और तुम्हारी रहनुमाई करें कि तुम्हारे दरमियान असीर
[38:48]कौन है और आजाद कौन कहा मौला इससे बेहतर क्या है का
[38:54]असीर वह है कि जो हरीश होता है जो लालची होता है
[39:02]हर चीज पर राल टपका है आजाद वह है कि जो काने
[39:10]रहता है कनात पसंद होता है और फिर मिसाल दी मौला ने
[39:14]का हरीश इंसान अगर सलाखों से बाहर भी हो जाहिरी सलाख जेल
[39:20]की तब भी असीर है वही अपने हिर्स के जिंद में असीर
[39:29]है बार नहीं आता है लेकिन काने इंसान कनात पसंद इंसान जो
[39:37]मिल गया शुक्र खुदा क व आजाद है चाहे सलाखों के पीछे
[39:42]क्यों ना हो बजायर मुझे और आपको लगता है जिंदा नहीं है
[39:48]यह लेकिन काने इंसान है क आजाद बस आखरी मतलब मौला के
[39:55]फरमान पर ही तमाम करते लेकिन य नहीं तीसरी मर्तबा अर् कर
[40:00]रहे लंबी गुफ्तगू है लेकिन कुछ ना होने से कुछ बेहतर ताकि
[40:05]मालूम हु हो हमें कि शख्स यानी फला इब्ने फलान शख्सियत यानी
[40:12]वाक बजहर वह हमारे और आपके दरमियान नहीं लेकिन बाकी है इंसान
[40:19]और इंसानियत भी ऐसे ही मौला फरमाते हैं अला गौर से सुनिए
[40:26]का इंसान और इंसानियत के दरमियान फरेंस अलान आया तुम्हारे दरमियान कोई
[40:37]आजाद शख्स है क मौला हम सब के सब आजाद है कोई
[40:42]पकड़ धकड़ नहीं कोई डर और खौफ नहीं अला मैं तीसरी मर्तबा
[40:49]तुमसे पूछ रहा हूं आया तुम्हारे दरमियान कोई आजाद है मौला कहना
[40:53]क्या चाह रहे हैं यदलो मजा लोमजा कहते हैं दांतों में फंसी
[41:07]हुई गजा को आजकल तो बहुत आसान है फास्ट फूड का दौर
[41:09]है पहले बूढ़ों के जो है दांतों में फंसती थी गजा अब
[41:15]जवानों के दांतों में भी फंसती है फास्ट फूड है ना जबकि
[41:20]यह फास्ट नहीं स्लो है मौला फरमाते हैं होर वो है कि
[41:29]जो लोगों के दांतों में फसी हुई गजा को फसा रहने दे
[41:30]उसे खिलाल करने की कोशिश ना करें यानी क्या कौन सी गजा
[41:41]कैसा खिलाल कैसा फसा रहना मौला यह पहलिया बुवा रहे हैं कहां
[41:46]सुनो तुमसे पहले तुम जैसे ही इंसान इस दुनिया में आए इस
[41:54]दुनिया की रौन कों को माल बाब को और जायदाद को कि
[42:03]जो दुनियावी जो है गजा है इसे चबाने की कोशिश की लेकिन
[42:06]इनसे चपक ना दी तुमसे ज्यादा पावरफुल थे यह लोग इनसे चपक
[42:12]ना दी लेकिन जबरदस्ती चबाने की कोशिश की इन्होंने इनके दांतों में
[42:15]जहां फसी और यह दुनिया से रुखसत हो गए अब तुम आए
[42:21]हो तुमने देखा कि जो है चमक और दमक इनके दांतों में
[42:26]नजर आ रही है तुम्हें भी माल अजीज है दौलत अजीज है
[42:35]आल औलाद अजीज है यह माल असबाब अजीज है तुमने क्या किया
[42:39]दांतों में खिलाल करने वाली टूथ स्प पिक जो है वह उठाई
[42:46]आपने अ मैं क्या कहू स्टिक उठाई आपने खिलाल करना शुरू किया
[42:51]चार मरहले हैं अजीज यहां पर अब नहीं मालूम कहा कहूं या
[43:02]ना कहू उस वक्त तक जो है जब तक यह बयान ना
[43:03]किया जाए समझ में नहीं आएगा कॉल मौला कहना क्या चाह रहे
[43:10]हैं हम जब खाना खाने बैठते हैं तो हमारे दातो में गजा
[43:21]फसती है हमने स्टिक उठाई तक उठाया और खिलाल करना शुरू किया
[43:25]अदब होते हैं आदाब है हमने रुमाल भी नहीं दिया हाथ भी
[43:32]नहीं दिया और आप सामने बैठे हुए हैं एक तरफ हम है
[43:33]मौलाना के दांतों में जो गजा फस गई अब व खिलाल करना
[43:39]शुरू किया सबके सामने लिल्ला बताइए कर हियत आएगी नहीं आएगी क
[43:47]मौलाना को इतना अदब नहीं है कि जरा चेहरा उधर कर दे
[43:52]या रुमाल दे दे हाथ दे दे ठीक दूसरा मरहला मौलाना ने
[43:59]फिर जो है हम आपकी मिसाल नहीं दे रहे अपनी मिसाल दे
[44:02]रहे हैं आप मुस्त स्ना है सब फिर दोबारा जो है गजा
[44:06]फसी और खिलाल करना शुरू किया अब क्या किया इन्होंने खिलाल करके
[44:13]जो गजा हाथ में आई उसे दूर नहीं फेंका उसे निकल गए
[44:23]सबके सामने लिला बताइए यह पहली करात से ज्यादा करात है या
[44:28]नहीं है अब आइए तीसरा मरहला मौलाना के दांतों में गजा नहीं
[44:35]फंसी है व जो सामने बैठा हुआ है इन्हें पता चल गया
[44:40]कि सामने वालों के दांतों में गजा फसी हुई है ूथ पीक
[44:44]उठाई उनके दांतों को खिलाल करना शुरू किया लिला बताइए व पहले
[44:50]दो स्टेज थे कहित के उससे कहीं ज्यादा शदीद है या नहीं
[44:57]है य चौथा मरहला अंडरस्टूड है खिलाल किया उनके दांतों में फसी
[45:03]हुई गजा को हाथ में लिया हम निकल गए कितनी करात है
[45:09]सुनने में इतनी करात है कुजा ब अमल मौला फरमाते हैं यह
[45:20]चौथा मरहला अलाय आया तुम्हारे दरमियान कोई आजाद है कि जो लोगों
[45:30]के दांतों में फंसी हुई गजा को जो दुनिया है उनके दांतों
[45:36]में फंसा रहने दे उसे खिलाल करक चबाने की कोशिश ना करें
[45:39]वह तुमसे ज्यादा पावरफुल थे उनसे चपक ना दी तुमसे कैसे चब
[45:45]गी इल सनस कुम समन लल जन्ना आओ मुझ अली से पूछो
[45:57]और जानो तुम नूस की वैल्यू क्या है अगर तुम्हारे नफू की
[46:04]वैल्यू तुम्हें मालूम हो जाए तुम इंसान हो और मकाम इंसानियत पर
[46:07]फाइज हो कमतर अ जन्नत अपने आप को फरोख्त मत करना मौला
[46:16]फरमा रहे ल स समन ल जना तुम्हारे नफू की वैल्यू जन्नत
[46:25]है फला त इलाहा हरगिज हरगिज अपने आप को फरोख्त मत करना
[46:33]जन्नत से कमतर कीमत पर पस जो जन्नत जिसकी वैल्यू है वह
[46:43]मकाम इंसान पर और इंसानियत पर फायज है लेकिन आखरी मतलब इस
[46:50]रिवायत से मालूम होता है कि मौला फरमा रहे हर शय की
[46:53]वैल्यू होती है कीमत होती है हमारे नफ्स की कीमत क्या है
[47:01]जन्नत जन्नत की भी तो कोई वैल्यू होगी अंडरस्टूड है यह जन्नत
[47:06]की वैल्यू क्या है जब हमारे नफ्स की कीमत जन्नत तो जन्नत
[47:11]की कीमत क्या है शेख सदू अल रहमा किताबे तौहीद में छोटी
[47:17]सी एक रिवायत को बयान करते हैं ला इलाहा इल्लल्लाह समन उल
[47:23]जन्ना का कलमा तैयबा जन्नत की कीमत है मौला के फरमान को
[47:33]कि तुम्हारे नफू की कीमत क्या है जन्नत और मकतब के सरपरस्त
[47:40]का बयान जो शेख सदू ने नकल किया जन्नत की वैल्यू क्या
[47:43]है कलमा तैयबा इन दोनों को प्लस करें जानते हैं नतीजा क्या
[47:52]निकलेगा कहा इंसान अजीज तेरे नफ्स की कीमत कलमा तैयबा है और
[47:55]यहीं से इंक्लूड करते हैं और जहम तों को तमाम करते हैं
[48:02]इंसान वह है कि जिसकी सुबह जिसकी दोपहर जिसकी शाम जिसके 24
[48:14]घंटे जो है उसकी जिंदगी से जस कलमे के अलावा और कोई
[48:17]चीज नजर ना आए जिस कदर कलमा ज्यादा नजर आएगा मकाम इंसानियत
[48:23]पर ज्यादा है जिस शय की वैल्यू ना हो उसे क्या करते
[48:33]हैं मैं और आप कचरे के ढेर पर डाल देते हैं भा
[48:34]क्यों डाला इसको आपने कहा इसकी कोई वैल्यू नहीं है कहा भाई
[48:42]यह चीज है कहा आपकी निगाह में चीज होगी हम अहले मारफ
[48:47]है इस चीज की निस्बत जानते हैं कि इसकी कोई वैल्यू नहीं
[48:52]है इंसान अगर अपने आप को इंसानियत में चेंज करे तो उसकी
[48:57]वैल्यू है वला हैवान से भी बदतर सलात भेजे मोहम्मद आह आइए
[49:09]खुदा आलम से दुआ करते हैं बला हमारी इस कलील इबादत को
[49:14]कबूल फरमा आमाल सालहा बजा लाने की तौफीक अता फरमा जो परेशान
[49:17]हाल है उनकी परेशानियों को दूर फरमा जो मकरूज है उन्हें कर्
[49:23]से सुबक दोशी अता फरमा बार इलाहा जो मरहूम हो चुके हैं
[49:25]उनकी मगफिरत फरमा शोहदा मिल्लत के दरजा बुलंद है बारेला शोहदा मिल्लत
[49:31]को शोहदा कर्बला के साथ महसूर फरमा जो हजज जियारा के मुत
[49:37]मन्नी उन हज जियारा से मुशर्रफ फरमा इमाम जमाना के जुहूर में
[49:40]तजल अता फरमा हमें उनके आवान अनुसार में शामिल फरमा रब्बना तकब्बल
[49:48]मिना इनक अंत समी अलीम
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