التالي
5 المشاهدات · 24/10/06
1 المشاهدات · 25/11/10
0 المشاهدات · 24/03/12
4 المشاهدات · 24/06/20
6 المشاهدات · 24/10/22
6 المشاهدات · 25/09/21
7 المشاهدات · 25/12/01
10 المشاهدات · 26/01/04
43 المشاهدات · 24/08/10
Namaz Ki Ahmiyat | H.I. Asghar Jawadi
0
0
27 المشاهدات·
24/07/29
في
آخر
Record date: 11 Jun 2023 - نماز کی اہمیت
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
For more details visit:
📡 www.almehdies.com
🖥 www.facebook.com/aLmehdies313
🎥 www.youtube.com/almehdies
🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
أظهر المزيد
Transcript
[0:12]हां उसे बिलही मिनिस्ट्री ऑन वसीम बिस्मिल्लाह रहमान अल्हम्दुलिल्लाह सुभान अल्लाह [संगीत]
[1:15]सुरेन कस्ता की आयत नंबर 45 में रब्बी करीम ने इरशाद फरमाया
[1:25]बहुत लोग मां वह है या इलैक निर्वतिकर ए मेरे हबीब जो
[1:28]किताब आप पर नाजिल की गई है जो वही आपकी तरफ भेजें
[1:33]भेजी गई है उसकी तिलावत करें और नमाज कायम करें इन एन
[1:43]सलाहकार इसलिए की नमाज इंसान को बेहयाई और बुराई से बचती है
[1:53]बाला हो और जो तुम जो कुछ बजा लेट हो उससे अल्लाह
[1:58]के साथ आ है और अल्लाह बेहतर तरीके से उसको जानता है
[2:03]क्योंकि आज हमारा मोजो पल्सर [संगीत] इस आयत में अल्लाह ने दो
[2:32]हुकुम दिए एक हुकुम अपने हबीब से कहा की कुरान की तिलावत
[2:35]करूं दूसरों को माया के अफीम सलाह नमाज कायम करो इस्लाम के
[2:42]लिए तमाम मुसलमान के लिए जरूर हैं लेकिन यह है की हुकुम
[2:50]सब मुसलमान के लिए है कुरान की तिलावत करें और उसके फौरन
[2:52]बाद इरशाद हुआ अतिमिस सलाहकार नमाज कायम करेंगे इसके बाद नमाज के
[3:00]दो फवाए बयान हुए इना सलाहकार तन्हा ही बलवान से बचती है
[3:10]बाला जी को माहे अकबर और यह नमाज अल्लाह का सबसे बड़ा
[3:19]जिक्र अब आप देखें की तिलावत किया पर यह नमाज से इस्लाम
[3:37]की इबादत में सबसे हम करीम इबादत इसलिए भी है की रिवायत
[3:41]के मुकाबला में नमाज को दिन का सुकून कार दिया गया और
[3:47]नमाज को मन की मिराज कहीं गई है इसलिए की इबादत की
[3:56]जो इमारत है इबादत की जो इमारत है ये इमारत कायम है
[4:00]नमाज के जारी क्योंकि नमाज ही ये स ने उसे बात उसे
[4:05]इमारत का अगर सुनो ना हो तो इमारत कहे नहीं र शक्ति
[4:10]देखिए मैं आपको एक छोटी सी मिसल डन हम जरा आयत के
[4:15]अगले हिस तक आने से पहले कुछ दम ही गुफ्तगू करें इस
[4:19]मुक्तसर वक्त में इस्लाम में बहुत साड़ी इबादत बहुत साड़ी तो नहीं
[4:26]है की कुछ महसूस के बाद आते हैं मिसल के तोर पर
[4:31]नमाज है रोजा है कहानी ना कहानी कोई तकलीफ है कहानी ना
[5:06]कहानी उसको कुछ इजाजत मिली है की भाई तुम यह नहीं करना
[5:12]चाहे तो कोई बात नहीं पसंद देखें रोज कितनी फजीलत रमजान के
[5:18]रोज की वो भी और वहां बंदे के लिए यह है की
[5:25]तुम बालिक हो आखिर हो सेहत इजाजत देती है रोज को अगर
[5:26]तुम बीमा हो सफर में होजनी को बाद में खाजा कर लेना
[5:32]और अल्लाह ना करें किसी को ऐसी बीमारी ए जाए की वो
[5:38]पूरे साल बीमारी चलती रहे तब तक जाके भी जरूर नहीं है
[5:40]अब तक की अगर इंसान बुढ़ापे में उसे उम्र में पहुंच जैन
[5:45]जहां रोजा उसकी ताकत से उसकी बर्दाश्त से बाहर है वहां इतना
[5:50]बड़ा इतनी बड़ी इबादत है इस्लाम में हाई इतनी बड़ी इबादत है
[5:58]की बाकी इबादत के मैं यार को परख जाता है की एक
[6:16]जियारत एक हाई के बराबर इतने उम्र के बराबर मेरे सामने बैठे
[6:26]हैं कभी हाई का हाई का आने वाले हैं और हाजी माशाल्लाह
[6:29]भी जा भी रहे हैं उसे तरफ देखें कितनी बड़ी बात है
[6:35]औलाद औलाद अपने मां-बाप के चेहरे को मोहब्बत की निगाह से देखें
[6:47]देखिए मां-बाप का मर्तबा बयान करते और परवरदिगार ने ये की इबादत
[6:51]है इस इबादत का सवाब कितना से आता है इसको समझने के
[6:57]लिए हाई की मिसल दिया है कहा अगर कोई शख्स अगर कोई
[7:05]बेटा बेटी अपने मां-बाप के चेहरे की तरफ देखें तो उसके लिए
[7:12]क्या होगा की यहां मां आप के खिदमत मां आप की इजाहट
[7:25]और मां-बाप को खुश रखना उनके चेहरे को देखना उनको खुशहाल करने
[7:31]का जो स्वभाव है उसे शबाब को जचने के लिए उसका मैं
[7:37]यार रखने के लिए हाई की निशानी है तो हाई कितनी बड़ी
[7:40]इबादत है मगर वाजेब है नहीं जो साहब इस्तितात है वो जाएगा
[7:48]यही मिसल है की पहले खर्च करो कुछ बैक जाता तो दे
[7:54]दो वरना नहीं यही मिसल है यही मिसल नहीं है तमाम इबादत
[8:01]में तमाम आका में कहानी ना कहानी छठ है मगर नमाज वो
[8:06]वाहित अमल है जिसमें छठ नहीं है कोई परेशानी है लेट के
[8:33]भी नमाज नहीं पढ़ सकते हो आंखों के इशारों से नमाज को
[8:37]रॉक लो इशारा करो जिक्र रुक पढ़ो जगह सजदा पढ़ो नमाज माफ
[8:42]नहीं है हर हाल में पढ़ना है मानसेवा इसके एक इंसान पर
[8:47]होश हो जाए वहां जाकर माफी है अच्छा आज नहीं पढ़ा है
[8:49]कल खाजा करके पढ़ो अच्छा भी नहीं किया है फिर भी माफ
[8:58]नहीं होगी करने से पहले वसीयत करके जो की मेरी तेरी नमाजे
[9:01]छुपी है ना वसीयत भी नहीं किया है बड़े अगर बड़ा बेटा
[9:05]मौजूद है तो नमाज वो इबादत है जिसकी छठ कहानी पर भी
[9:12]नहीं क्यों इसलिए की यह तीन का सुकून है कयामत के दिन
[9:48]सबसे पहले बंदे मन से जी चीज का हिसाब लिया जाएगा वो
[9:56]उसकी नमाज अब बोलो [संगीत] नमाज रात की गई और अगर नमाज
[10:21]काबुल ना हुई तो रुक डा अलेही आशायरॊ अमली ही उसके बाकी
[10:24]सारे अमाल तो आपने देखा की नमाज की मैदान में मेरे तमाम
[10:38]अमाल के ऊपर जो कुछ भी किया है की पैगंबर इस्लाम हजरत
[11:07]मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलेही वी अलेही वल्लम की जिनके बड़े में हादसे
[11:13]कूड़ीसी का ये जुमला है अगर मैं आपको गलत ना करता तो
[11:27]मैं कायनात को खलनायक ना करता है यानी इस कायनात के तकलीफ
[11:35]की वजह जाते पैगंबर इस्लाम है यानी मोहम्मद वाले मोहम्मद की मोहब्बत
[11:40]में परवरदिगार ने इस कायनात का यह निजाम इसको बनाया है अच्छा
[11:47]अब जब पैगंबर के लिए दुनिया बनाई गई है तो अल्लाह ने
[11:53]कितनी हल ने मेट इंसान के लिए राखी है मगर यह नहीं
[12:08]चाहूंगा की अल्लाह ने पैगंबर इस्लाम की मोहब्बत में किया मगर पैगंबर
[12:14]फॉर्मेट हैं की इस कायनात के सिर्फ तीन चीज मुझे पसंद है
[12:21]बस [संगीत] तीन चीजों में से पहले चीज का जिक्र जो पैगंबर
[12:26]इस्लाम ने फरमाया वो ये की मुझे पसंद है की मैं एक
[12:33]नमाज पढ़ूं और अगली नमाज का इंतजार करो अल्लाह ये मेरे पैगंबर
[12:39]इस्लाम इस दुनिया के नेमतों से चोट लेते हैं उनमें सबसे पहले
[12:43]ने मस्जिद से सबसे ज्यादा लज्जत हासिल है वो नमाज है इसके
[12:49]मानवी लज्जत है अलबत्ता वो जो हम खाने पीने की चीजों में
[12:55]जो लज्जत तलाश कर रहे हैं वो यहां नहीं मिलेगा एक मानेंगे
[12:58]लज्जत है यह लज्जत वहीं महसूस कर सकता है जो तवजों के
[13:02]साथ इनके सारे के साथ आज इसी के साथ खुदा के बारगाह
[13:06]में हाजिर हो जाता है ये इस को एहसास होता है कायनात
[13:09]की चीजों में से मुझे तीन चीज पसंद है या तो एक
[13:15]नमाज पढ़ो अगले नमाज का इंतजार करूं या यह है की इस
[13:20]दुनिया की खुशबू मुझे पसंद है जो भी खुशबू का तोहफा ले
[13:36]आएं वो रेड नहीं करते कहां मुझे पसंद है खुशबू और मुझे
[13:39]पसंद है हल निकाह है अब आई इसलिए अल्लाह का रही है
[13:50]अपने साथ फरमाया कमी सलाम नमाज कायम करो क्यों इन नसलत मुझे
[13:54]यही तक आना था ये कमेटी गुफ्तगू किया हमारी की नमाज का
[14:00]मकसद ही यही है की इंसान को गुना से खाता से खुदा
[14:06]की नाफरमानी से ये नमाज उसको बचती है लफ्ज़ इस्तेमाल के लिए
[14:15]थोड़ी डर के लिए हम रुकते हैं के अरबी में फुंसियां से
[14:21]क्या मुराद और मां कर सके मेरे दिल में आपके बड़े में
[14:42]जो मेरे स्वामी ने मोहर्रम के बड़े में कितनी मोहब्बत है सबके
[14:45]लिए बराबर मोहब्बत है किसी से किसी के लिए कम है किसी
[14:49]के लिए ज्यादा है या आपको मालूम नहीं मैं किसी के लिए
[14:53]नफरत रखना हूं आपको वही मालूम है मैं किसी से अदावत रखना
[14:58]हूं आपको नहीं मानता हूं मैं कहा यह पाशा मानकर क्या है
[15:02]मंकर यह है की वो गुना है जो जहीर है जिसका असर
[15:07]जहीर है कोई इंसान चोरी करता है कोई इंसान से ना करता
[15:11]है कोई इंसान शराब की तरफ जाता है कोई इंसान अल्लाह ना
[15:14]करें कत्ल की तरफ जाता है इल्जाम तशी की तरफ जाता है
[15:18]ये वो गुना है जिसे मंकर कहा गया है कुरान की जुबान
[15:23]में और इस आयत में जान मोहतरमा मैंने एक जगह एक तशरीफ़
[15:30]पड़ी ये जरा गौर तालाब बात है यही तक आपको बुराई जो
[15:36]अपने इम्तिहान को पहुंची यानी ऐसा बड़ा कम की जिससे बड़ा और
[15:45]बड़ा कोई कम ना हो क्या मगर एक दफा सिर्फ एहतराम नहीं
[16:11]बल्कि हमने उसके साथ बत्तखला की बदतमीजी की बदतमीजी से पेस है
[16:15]बतख लखी से पेस ए गए ये उससे बड़ा है मगर एक
[16:20]दफा ये शख्स यहां से उठ के चला जाता है यही शख्स
[16:24]अगर यहां से चला जाता है तो अब उसे की बुराई हमने
[16:29]यहां शुरू कर दी वो अप बयान करना शुरू कर दिया जो
[16:33]इस इंसान के अंदर थे वो एक बयान करना शुरू कर दिया
[16:39]जो अगर वह सुनने हैं तो वो पसंद ना करें की मेरी
[16:43]ये बात मशरे में बयान हो जाए जिसको आम जुबान में कैबत
[16:44]कहते हैं अब बताइए हमने उसके साथ तीन कम किया है एक
[16:49]तो उसका एहतराम नहीं किया दूसरे उसके साथ बाटला सके पेस आए
[16:51]तीसरा हमने उसके बाद की आप बताएंगे आप क्या कहेंगे हालांकि कुछ
[17:02]कम उसके सामने हुए कुछ कम उसके पीठ पीछे हुए कुरान ने
[17:07]कहा वो जो सामने तुमने कम किया था वो भी बड़ा था
[17:09]लेकिन उसकी बुराई कम थी वो जो उसके पीठ पीछे तुमने कम
[17:16]किया वो हिबाट है उसकी बुराई बहुत सी आता है उससे बड़ा
[17:22]कोई और फेल नहीं है क्यों इसलिए की कराने मस्जिद में कहा
[17:25]कराने मस्जिद में इरशाद हुआ की किसी मन की पीठ पीछे करीबत
[17:33]करना ऐसा है जैसे अपने मुर्दा भाई का गोष्ट खाना अल्लाह अकेले
[17:40]मैय्यता क्या तुम में से किसी को यह बात अच्छी लगेगी की
[17:49]वो अपने मुर्दा भाई का गोष्ट का ले मुमकिन नहीं है तुम
[17:53]नफरत करोगे कितना बड़ा फिर नमाज पढ़ने वाला इंसान इस तरह के
[18:18]बुराई से बैक जाता है ना सालत तन्हा अनिल पाशा जब इंसान
[18:22]बड़े गुना से बैक जाएगा छोटे गुनाहों से खुद बी खुद महसूस
[18:25]रहे हैं अच्छा कुछ लोगों ने इसकी वजह इस तरह भी की
[18:30]कहा की भाषा से मुराद पर वो कम है जिसको शरीयतें माना
[18:38]किया है गली देना किसी को इनाम का राशि किसी पर इल्जाम
[18:43]लगाना बेहूदा चीजें करना जो भी कम जिसने इस्लाम ने माना किया
[18:49]वो कहा की ये बादशाह है मां करके माशाल्लाह सांप का मजमा
[19:31]है हमारा मोजो है की नमाज इंसान को बुराई से गुना से
[19:34]बेहयाई से बचती है कैसे पैगंबर ने असप से सवाल किया की
[19:45]यह बता दीजिए की अगर लोकन बाबू दबिकुम नहारून कलियों में हमसफर
[20:05]एक सवाल किया अगर तुम में से किसी के घर के दरवाजे
[20:12]के सामने एक साफ हो साफा पानी की नहर गुर्जर रही है
[20:39][संगीत] गंदगी बाकी रहेगी नहीं इसलिए की सातों सफा पानी में वह
[20:53]पांच मर्तबा ना हर कितनी मर्तबा 5 मर्तबान ए रहा है तो
[20:57]इसका मतलब ये हो गया की उसके बदन में आपको मेल बाकी
[20:59]नहीं है पैगंबर ना ये मिसल देने के बाद इरशाद फरमाया की
[21:10]इन नसलत नवी या मसाले सलाम एक मसाले नवी ये जो नमाज
[21:17]है नमाज इस नहर की तरह है की जी तरह पांच वक्त
[21:25]नहर में नहाने से इंसान का बदन हर तरह की कसाफत से
[21:31]गंदगी से मां से पको साफ लेट है इसी तरह पांच वक्त
[21:33]नमाज पढ़ने वाला इंसान हर तरह के गुना और नाफरमानी से मसीयत
[21:40]से तो नमाज गुनाहों से इसलिए बचती है की यहां पर किसी
[22:06]के घर के दरवाजे के सामने यह नहीं कहा पानी हो सर
[22:15]अब मैं आपसे सवाल करता हूं वो जो घर के दरवाजे के
[22:19]सामने नहर में गुर्जर रही है नहर चल रही है अगर उसका
[22:26]पानी गदला हो वो पानी खुद आलोद हो वो पानी खुद ही
[22:30]गंदा हो पहले से हमारे पाकिस्तान में थोड़ा सा आप कराची से
[22:34]बाहर निकले ऐसे माहौल आपको मिल जाता है पानी भी चल रहा
[22:40]होता है नहर भी है घर के दरवाजे में नाली भी है
[22:42]मगर गांधी नाली है तो आप बताइए की अगर उसे गंदे पानी
[22:49]में उसे गधे पानी में उसे नजिस पानी में नहाने वाला इंसान
[22:52]पाक को साफ रहेगा नहीं रहेगा [संगीत] खुलूस के साथ पढ़ने वाली
[23:24]नमाज हो तवजों के साथ पढ़ने वाली नमाज हो उसकी खरात सही
[23:28]हो इसीलिए नमाज के सराय थी बहुत सारे शहनाई थी मिसल के
[23:32]तोर पर पहले शब्द क्या है मुसलमान देता हूं सर इतना बहुत
[23:34]ज्यादा है मैं मिसल देता हूं की शर्ट ये है की ये
[23:39]जो मेरे बदन पर लिबास है ये लिबास क्या हो रहा चाहिए
[23:42]और कश्मीर ना हो यानी कश्मीर ना हो का मतलब ये है
[23:50]की अल्लाह ना करें कहानी तनख्वाह और रिश्वत दोनों को एक-एक अकाउंट
[23:55]में रखा अकाउंट मेरा एक ही था उसमें तनख्वाह भी ए रही
[24:01]थी उसमें रब्बी जो रिश्वत लेना है वो भी असमीना हो कितनी
[24:40]बारिक भी नहीं है यह सब क्यों है यह इसलिए की अगर
[24:46]यह सारे सरे तो होंगे तो ये नमाज तुम्हें बुराई से बचाएं
[24:50]तो होंगे तो तुम्हारी नमाज खुदा की बारगाह में काबुल होगी यह
[24:56]नमाज उसे नहर की तरह साफ और शफाबे और इंसान के बदन
[25:03]से हर तरह की मेल और कसाफत को दूर करती है ना
[25:07]कितने नमाज ये ऐसे हैं कितने हंसी ऐसे हैं कितने सपेरे से
[25:12]हैं माशाल्लाह के मामला चल रहे होते हैं वजह यही है की
[25:28]नमाज जो पढ़ रहा है वो सर इतनी ही उसके अंदर जब
[25:36]शरारत होंगे जब नमाज इंसान को फायदा देती है अब मुझे खाती
[25:58]से याद ए गई चाटे इनाम इमामे जफर सादिक अली सलाम इरशाद
[26:02]फरमाया कुछ लोग बहुत ज्यादा नमाज़ पढ़ने वाले बहुत ज्यादा रोज रखना
[26:16]वाले हैं तहज्जुद गुर्जर तमाम फॉर्मेट हैं की इन लोगों की नमाजों
[26:23]की वजह से और उनके रोजों की वजह से ताज्जुब ना करना
[26:28]इसलिए की कुछ लोग नमाज आदत की वजह से पढ़ने हैं नमाज
[26:35]नहीं है उनकी एक आदत बन गई है तो मौला कैसे पता
[26:44]चले मैं यार मैं यार ये है की इन लोगों का इम्तहान
[26:50]लोग दो चीजों से सिर्फ उनका जुबान में सच्चाई है या नहीं
[27:04]है देखो यह अमानत के लिए अमीन है या नहीं है अगर
[27:06]इनकी जुबान में सदाकत है सच्चाई है तो इसका मतलब ये एक
[27:11]इसकी नमाज नमाज है अगर ये अमानत में खयानत नहीं कर रहा
[27:21]है अमानत को अमीन समझ के उसकी हिफाजत कर रहा और मलिक
[27:23]को दे रहा है तो समझ लो उसकी नमाज काबुल है यही
[27:30]वजह है की आज हम जी मुंहासरे में र रहे हैं ये
[27:37]हमारा मुआश्रय क्यों ऐसा है उसकी वजह यही है की हमारे यहां
[27:46]हमारा सियासत दान हमारा ताजिर हमारा मजदूर हमारा मुलाजिम हर आदमी माशाल्लाह
[27:52]नमाज है माशाल्लाह [संगीत] मगर उनके परेशानी पर पसीना नहीं है तो
[28:25]बहुत इत्मीनान से झूठ बोलकर चले जाते हैं और उसे इत्मीनान के
[28:31]साथ खजाना ल रहे होते हैं ऐसा हो चुका है यह क्यों
[28:45]है यह इसलिए मुताबिक नहीं है मेरे इबादत उन सराय के मुताबिक
[28:49]नहीं है जिन श्रयत के साथ मुझे नमाज पढ़नी चाहिए थी तो
[28:54]मौलाना ने कहा की इनको पहचानो सिर्फ कल कलाम अदा अल अमानत
[29:00]अगर उनकी जुबान में सच्चाई है तो इसका मतलब ये नमाजी है
[29:06]अगर अमानत में खयानत ना करने वाले हैं तो इसका मतलब ये
[29:08]है की इनकी नमाज तो उसने अपनी जगह सही है नमाज का
[29:17]पहले फायदा ये है की इंसान को गुना से मसीयत से खटाकरी
[29:24]से बचती है और इसी आयत में इरशाद नमाज अल्लाह का सबसे
[29:37]बड़ा जिक्र है और यही कमल है नमाज का नमाज इसलिए पढ़ो
[29:48]की ये नमाज मेरी जिक्र है यानी इंसान जब नमाज पढ़ना है
[29:54]तो इस नमाज के अंदर फलसफा नमाज के अंदर जो नमाज में
[29:57]हम जो कुछ पढ़ने हैं अगर उसके तर्जुमा की तरफ जैन उसके
[30:01]अंदर जो कुछ बयान और मसाले उनकी तरफ चले जैन तो वहां
[30:05]से हो जाता है की किस तरीके से ये जिक्रे खुदा बन
[30:10]जाता है किस तरह नमाज पढ़ने वाला इंसान जब नमाज शुरू करता
[30:13]है तो उसके उसे इंसान को अपनी इब्तदबियत भी वहां से मालूम
[30:17]हो जाति है और इन्हें अभी मालूम हो जाते तो आया कहां
[30:22]से हैं तो जाना कहां है ये नमाज बताती है जिसे कहते
[30:26]हैं महात्मा नहीं होती है की वो आया कहां से और जान
[30:41]तुमने कहां हिमालय से मैं बात करना छह रहा हूं वो ये
[30:53]करना छह रहा हूं देखिए कितना मुक्मिन है हमारे लोग कितने हर
[31:02]शख्स की तलाश दो चीजों की है वो ये है की सुकून
[31:07]और राहत आराम और सुकून इस इन दो चीजों की तलाश है
[31:20]और आप देखेंगे तो मशेयर को सब कुछ हासिल यही दो चीज
[31:24]हासिल है इलाज करें की मुझे आराम और सुकून राहत और सुकून
[31:36]शायद इख्तेदार में मिल जाएगा आज के सोसाइटी में सुकून किसी को
[32:23]हासिल नहीं है इत्मीनान नहीं हासिल है उसकी वजह यही है की
[32:30]आप डॉक्टर के पास चले जैन डॉक्टर रहेगा की अक्सर लोगों की
[32:33]बीमारी टेंशन की है खुद मेरी एक डॉक्टर से संसार पहले बात
[32:39]हुई है अल बताइए कोरोना जब यहां चल रहा था उसे वक्त
[32:41]उसे डॉक्टर ने मुझे कहा मौलाना साहब 80% लोग इस वक्त जो
[32:45]है ना टेंशन की वजह से बीमा है सुकून भी एक महीना
[32:57]कर दिया नमाज पढ़ोगे तो तुम्हें सुकून मिल जाएगा बस और अगर
[33:05]तुम नमाजी हो तो तुम्हें दुनिया की कोई टेंशन नहीं है तुम
[33:09]सुकून के साथ हो उनके बड़े में उनकी रिपोर्टर और उसके अंदर
[33:35]जो है ना वह आम लोगों को बिताया भी नहीं गया था
[33:39]खास वक्त ख्वातीन बच्चों को इसलिए की खतरा था ये जहाज उड़े
[33:41]भी जा सकता था यह जहाज किसी और की तरफ से और
[33:43]मूल की तरफ भेजो भी जा बहुत सारे मसल इसके अंदर उससे
[33:47]बीबीसी की रिपोर्ट है उसने रिपोर्ट में लिखा की जब ये जहाज
[33:53]में स्वर हुए उन्होंने दो रकत नमाज पढ़िए डर का नमाज पढ़ने
[33:57]के बाद उन्होंने कहा ये मेरा आराम का वक्त थोड़ी डर के
[34:00]लिए वो सो गए हम सब परेशान थे की पता नहीं यह
[34:06]जहाज ईरान में तेहरान में इसको लैंड करने की इजाजत मिलेगी नहीं
[34:09]मिलेगी हम पहुंचेंगे नहीं पहुंचेंगे वो शख्स इतना मुतमईन था की उसने
[34:13]डर के नमाज भी पड़ी और अपनी नींद की पुरी कर दी
[34:19]मीना को यही कहते हैं की तुम परेशान हो तो करो इस
[34:42]नुस्खे पर अमल करने के बजे हम सुकून की तलाश ऐसी चीजों
[34:48]में करते हैं जहां से सुकून हमें कभी मिलन ही नहीं लिहाजा
[34:55]नमाज के फवाहित में से अहमीं फायदा यह है की नमाज और
[35:02]आखरी बात करूं जो आखिरी बात है बस वो ये है की
[35:08]हम जब जिक्र की बात करते हैं तो हम समझते हैं जिक्र
[35:10]यानी सुभान अल्लाह [संगीत] फेफड़ा खराब हो जाएगा वो रहेगा की सिगरेट
[35:55]पीकर नशा करके मैं सुकून हासिल करूंगा हल की जिक्र का एक
[36:11]माफूम यह है की इंसान हल चीजों पर कानात करें हराम से
[36:16]अपने आप को बच्चा लेने मतलब जिकरुल्लाह ही अकबर ये अल्लाह का
[36:20]सबसे बड़ा जिक्र है मसाला जान मोहतरमा इन्हीं अल्फाज के साथ आज
[36:26]की गुफ्तगू को तमाम कर लेते हैं आई दुआ करते हैं की
[36:33]परवरदिगार खुदाया हमारी नमाजों को हमारे जमा इबादत को अपनी बारगाह में
[36:37]काबुल फरमाए परिवार हमारे नमाजों में हमारी इबादत में खुदाया अगर कोई
[36:42]कमी पेशी र गई है तुम उसे मां फार्मा कर मैदान में
[36:48]नमाज गुर्जरों के साथ हमें महसूस होने की तौफीक इनायत दुनिया में
[36:55]सलातो अस्सलाम की जियारत नसीब फरमाए
0 تعليقات
sort ترتيب حسب
- أعلى تعليقات
- أحدث تعليقات
التالي
5 المشاهدات · 24/10/06
1 المشاهدات · 25/11/10
0 المشاهدات · 24/03/12
4 المشاهدات · 24/06/20
6 المشاهدات · 24/10/22
6 المشاهدات · 25/09/21
7 المشاهدات · 25/12/01
10 المشاهدات · 26/01/04
43 المشاهدات · 24/08/10
