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Ehkam Namaz Part 01 | H.I. Asghar Ali Jawwadi
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محاضرات
Record date: 19 May 2024 - احکام نماز حصہ اول AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]बिल्ला मनता रम बिस्मिल्ला रहमान रहीम अल हमदुलिल्ला रब्बिल आलमीन लातो सलाम
[0:25]अलाया मुरसलीन ला मास अना बलारा अम बाद काला सुभान ताला फ
[0:52]कुरान मजीद बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अ सलाता दल शमसी इलाली कुरान फजर
[1:00]इरान फजरी काना मशहू सवात पढ़े मिलके मोहम्मद और आले मोहम्मद पर
[1:09]मतरम जैसे कि आपके इल्म में लान हुआ कि हमारा दर्स आज
[1:16]है अकाम नमाज के हवाले से अकाम नमाज चकि बहुत ज्यादा है
[1:25]व मुमकिन नहीं है कि एक दर्स में उसको मुकम्मल किया जाए
[1:29]लिहाजा मुमकिन अकाम नमाज जो है ना वह आइं भी चंद रूस
[1:36]पर मुश्त मिल हो तो सबसे पहले बतौर मुकदमा बतौर तबक मैं
[1:45]इस आयत का तर्जुमा आपकी ख में पेश करूं जिस आयत को
[1:54]मैंने सरनाम कलाम करार दिया शशाद रबत सलाता दुलो की शम से
[1:59]इला स लली कि नमाज पढ़ो सूरज डलने से लेकर रात होने
[2:09]तक इला सलेली रात की तारीख छाने तक पढ़ो व कुरान अल
[2:12]फजरी और सुबह के वक्त में नमाज पढ़ो तो कुरान में नमाज
[2:19]के यह तीन औकात बयान हुए जवाल सकले यानी रात कुरान फजर
[2:26]यानी फजर नमाज इबादत है जो परवरदिगार और इंसान के दरमियान में
[2:39]राबता है इसीलिए हदीस में यह जुमला मिलता है कि सलात मेराजुल
[2:44]मोमिन नमाज मोमिन की मेराज अस सलातो कुरबान कुली तकन एक रिवायत
[2:59]आपकी खमत में करता हूं नमाज की अहमियत के हवाले से और
[3:03]फिर हम अकाम की तरफ आते हैं जैसे कि कुराने मजीद की
[3:12]एक और आयत में फलसफे नमाज बयान हुआ है इ सलाता तनहा
[3:19]फशाल मुनकर कि नमाज का फलसफा यह है कि नमाज इंसान को
[3:23]बुराई और बेहयाई से बचाती है यह फलसफा नमाज है और इसके
[3:33]मुतालिक एक रिवायत सुन लीजिए यह रिवायत बयान करने वाला रावी है
[3:39]अबू उस्मान और इस रिवायत को बयान किया है कि हमारे एक
[3:46]अजीम किताब है तफसीर की और उसका नाम है तफसीर मजम उल
[3:52]बयान और तफसीर मजम बयान में इसी आयत के जल में रिवायत
[3:55]बयान करने वाला रावी का नाम है अबू उस्मान वह कहता है
[4:02]कि मैं जनाबे सलमान फारसी के साथ एक जगह मौजूद था और
[4:06]हम किसी दरख के नीचे बैठे हुए थे जनाबे सलमान फारसी ने
[4:12]दरख्त की टहनी को हिलाया और टहनी हिलाने के साथ ही बहुत
[4:16]सारे पत्ते उस टहनी से जड़ के जमीन पर गिरे रावी कहता
[4:26]है कि मैंने जनाबे सलमान से सलमान फारसी से यह सवाल कि
[4:31]किया कि आपने ऐसा क्यों किया जनाबे सलमान फारसी ने कहा कि
[4:39]अबू उस्मान ऐसा है कि मैं अल्लाह के रसूल के साथ किसी
[4:41]वक्त इसी तरह किसी दरख के नीचे बैठा हुआ था अल्लाह के
[4:47]रसूल ने टहनी को हिलाया और पत्ते जड़ के नीचे जमीन पर
[4:54]गिर गए मैं खामोश था अल्लाह के रसूल ने कहा सलमान तुमने
[4:56]मुझसे नहीं पूछा कि मैंने यह काम क्यों किया इसलिए कि रसूल
[5:02]का कोई भी काम हिकमत से खाली नहीं होता है जनाबे सलमान
[5:08]फारसी फरमाते हैं कि मैंने कहा या रसूल अल्लाह आप भी बेहतर
[5:14]जानते हैं आप बताइए कि आपने यह काम क्यों किया अल्लाह के
[5:17]रसूल ने इरशाद फरमाया सलमान जिस तरह यह टहनी हिलाने से इसके
[5:25]पत्ते जड़कर जमीन पर गिरे हैं इसी तरह अगर कोई मुसलमान वजू
[5:28]करे और पा वक्त की नमाज अदा करे तो उसके गुनाह ऐसे
[5:34]ही जड़ जाते हैं जिस तरह यह टहनी के पत्ते जड़ गए
[5:40]य नमाज की अहमियत है मगर सवाल यह है कि नमाज जो
[5:48]बेहयाई और बुराई से बचाती है वह वह नमाज है जिस नमाज
[5:56]को शराय के साथ पढ़ी जाए जिस नमाज को सही अकाम के
[6:00]के साथ बजा लाई जाए तो उस नमाज में यह असर पैदा
[6:08]होता है वना एक आदमी सुबह शाम नमाज पे लेकिन उसके अंदर
[6:10]अगर वह नमाज के शराय नहीं है नमाज के अकाम पर व
[6:14]अमल नहीं कर रहा है तो नमाज उसके लिए फायदा मंद नहीं
[6:18]है उसकी मिसाल ऐसी है कि अगर कोई बीमार आदमी डॉक्टर के
[6:20]पास जाता है डॉक्टर ने उसको दवा तजवीज किया मगर साथ में
[6:25]हिदायत भी दिया कि दवा कैसी खानी है कितने वक्त में खानी
[6:29]है कौन से वक्त खानी है एहतियात कि चीज से है परहेज
[6:30]किन चीजों से करनी है अगर उसने हिदायत पर अमल किया तो
[6:36]यह दवाई उसके लिए असर करेगी वह सेहत याबे बिल्कुल ऐसा ही
[6:38]यहां भी नमाज इंसान अकाम शराय के साथ अंजाम दे तो यह
[6:44]नमाज वह है जो मुसर भी है और खुदा की बारगाह में
[6:48]कबूल भी है और यही नमाज है जो इंसान को बुराई और
[6:53]बेहयाई से बचाती है यह मुकदमा था अब आते हैं अकामे नमाज
[6:56]की तरफ तो अकामे नमाज में सब पहला जो नमाज का हुक्म
[7:02]है वह है औकात नमाज हम आज यहां से शुरू कर रहे
[7:06]अगरचे इससे पहले मुकदमा नमाज है जिसमें वजू है जिसमें इंसान का
[7:15]लिबास है इंसान का मकान है यह सब मुकदमा नमाज अभी इस
[7:18]वक्त जो आज का हमारा दर्स होगा वह औकात नमाज से हम
[7:24]इंशाल्लाह शुरू करेंगे मुकदमा नमाज पर गुफ्तगू नहीं होगी वो इंशाल्लाह फिर
[7:31]कभी औकात नमाज में सबसे पहले यह है कि नमाज का वक्त
[7:35]तो अभी चकि आप नमाज जोहर और असर पढ़कर फारिग हो गए
[7:40]हैं अल्हम्दुलिल्लाह तो मैं यहीं से शुरू करता हूं नमाज जोहर और
[7:45]असर के तीन वक्त है एक वक्त का नाम है वक्त मुख्तसर
[7:57]अच्छा अब य जहन में रखें कि जो वक्त [संगीत] मुख्तसर जोहर
[8:06]के साथ मकसूस है वहां असर किसी सूरत में नहीं पढ़ी जा
[8:12]सकती है और दूसरा व वक्त है जो नमाज असर के साथ
[8:16]मकसूस है किसी सूरत में वहां नमाज जोहर नहीं पढ़ी जा सकती
[8:19]है मिसाल के तौर पर अव्वल जवाल में अव्वल जवाल अब जवाल
[8:24]कैसे होगा वो इंशाल्लाह आगे चलकर हम बयान करेंगे अव्वल जवाल का
[8:27]जो पहला वक्त है जिसमें चार रकात नमाज शराय के साथ पढ़ी
[8:32]जाए यह वह वक्त है जो जोहर के साथ मख सूस है
[8:37]यहां असर नहीं हो सकती किसी सूरत में नहीं हो सकती इसी
[8:39]तरीके से अगर किसी शख्स ने जोहर और असर की नमाज नहीं
[8:43]पढ़ी है यहां तक कि अजान मगरिब नजदीक है और अब अजान
[8:49]मगरिब में इतना वक्त बचा है कि एक आदमी सिर्फ चार रकत
[8:54]नमाज अदा कर सकता है सिर्फ और सिर्फ चार रकात नमाज अदा
[8:55]कर सकता है बस इसके अलावा वक्त नहीं है तो यह वक्त
[9:00]मख सूस है असर का अब यह आदमी अगरचे जोहर उसने नहीं
[9:05]पढ़ी है मगर फिर भी जोहर छोड़ देगा और वह इस आखरी
[9:09]वक्त में असर की नमाज पढ़ेगा यह दो जो मख सूस वक्त
[9:14]है इसके दरमियान में जो वक्त है वक्त मुश्तक है इस वक्त
[9:16]मुश्तक का मतलब यह है कि तरतीब के साथ किसी वक्त भी
[9:21]जोहर को भी पढ़ सकता है जोहर और असर को साथ अंजाम
[9:27]दे सकता है मगर इस वक्त मुश्तरका में एक एक और वक्त
[9:29]है उसको कहते हैं वक्त फजीलत बात समझ में आ रही है
[9:35]मैंने कहा एक वक्त है मुक्तस एक वक्त मुश्तरका है और इसी
[9:42]वक्त मुश्तरका के अंदर एक वक्त है वक्त फजीलत वो वक्त फजीलत
[9:45]यह है कि इस मुश्तरका वक्त में वह मुश्तरका वक्त कहां से
[9:50]कहां तक है हम अभी जोहर और असर की बात कर रहे
[9:51]हैं जवाल से लेके अजान मगरिब में चार रकात नमाज पढ़ने का
[9:57]वक्त जो रह जाता है इसके दरमियान में जितना वक्त है यह
[10:03]वक्त मुश्तक है इस वक्त मुश्तक में एक वक्त ऐसा आता है
[10:05]जिसको वक्त फजीलत जोहर कहा जाता है और एक वक्त व है
[10:12]जिसको फजीलत असर कहा जाता है अच्छा अगर आपकी तवज्जो हात मेरे
[10:20]साथ है तो मैं वक्ते फजीलत समझा रहा हूं अच्छा वक्त फजीलत
[10:24]में ऐसे भी समझा सकता हूं कि फर्ज मिसाल अगर आज अभी
[10:29]और और इस वक्त 1235 या 1240 पर अजान जोहर होती है
[10:37]यानी अव्वल वक्त नमाज जोहर का शुरू हो जाता है जवाल शरी
[10:43]है तो कितने घंटे और कितने मिनट के बाद जोहर की फजीलत
[10:45]खत्म होगी असर की फजीलत शुरू हो जाएगी य बता सकता हूं
[10:50]मगर ये आपके लिए थोड़ा सा मुश्किल होगा वो इसलिए मुश्किल होगा
[10:53]ये मौसम तब्दील होता रहता है लिज मैं जो शरी मेयार है
[10:58]वो समझाने की कोशिश कर रहा हूं आपकी तजत है मेरे साथ
[11:02]एक सवात पढ़ मिलके मोहम्मद देखिए जो वक्त फजीलत है इस वक्त
[11:17]फजीलत को पहचानने के लिए शरीयत ने एक मेयार दिया है एक
[11:19]मीजान एक तरीका बताया है आपके लिए व तरीका यह है कि
[11:26]फर्ज मिसाल हमारे पास एक सा फीट की डिंडी है कोई भी
[11:31]सात फीट की जिसको अरबी में शास कहते हैं कोई डिंडी आप
[11:38]लेले लकड़ी ले ले सात फीट की और वह जमीन पर हमर
[11:42]जमीन पर सीधा खड़ा कर दे उसको सीधी खड़ी कर दे उस
[11:43]ढंडी को उस लकड़ी को अब क्या होगा मशरिक से सुबह जब
[11:51]सूरज तुलू हो रहा होगा उसका साया कहां होगा मगरिब की तरफ
[11:54]होगा उस लकड़ी का साया मगरिब की तरफ होगा मैं समझाने की
[12:00]पूरी कोशिश करूंगा कि बात समझ में आ जाए लकड़ी आपने हमार
[12:05]जमीन पर खड़ी कर दी है सूरज तुलू होगा उसका साया होगा
[12:10]मगरिब की तरफ जैसे जैसे सूरज चढ़ेगा वैसे-वैसे उसका साया कम होता
[12:14]जाएगा यहां तक कि 12 साढ़े जो जवाल का वक्त है वहां
[12:19]पर या तो उसका साया बिल्कुल खत्म हो जाएगा या उसका साया
[12:21]मशरिक की तरफ नमूद होगा जहां साया खत्म हुआ या जहां साया
[12:28]मशरिक की तरफ नमूद हुआ यह अवल यह फजीलत जोहर का वक्त
[12:34]यहां पर शुरू हो गया अब यह फजीलत जोहर का व कहां
[12:40]तक रहेगा यह जो सा फीट की लकड़ी आपने खड़ी की है
[12:41]इसके दो फीट साया आगे बढ़ जाए कहां किस तरफ बढ़ जाए
[12:46]मशरिक की तरफ सा फीट की लकड़ी है यह मिसाल दे रहा
[12:50]हूं आप लकड़ी 6 फीट की भी खड़ी कर सकते हैं आप
[12:53]10 फीट की आप सा इंच की भी खड़ी कर सकते मगर
[12:58]मेरी मिसाल समझी सा फट की लकड़ी है साया जैसे मशरिक तफ
[13:00]नमूद हुआ अव्वल फजीलत जोहर का वक्त शुरू हुआ जाके यह साया
[13:09]दो फीट आगे बढ़ने तक फजीलत जोहर है और जैसे ही दो
[13:15]फीट साया बढ़ गया दो फीट पूरा हो गया यहां से फजीलत
[13:16]असर का वक्त शुरू हो जाता है यह बात समझ में आ
[13:21]गई अब तीसरी बात की तरफ मैं आ रहा हूं वो ये
[13:24]है कि आया ये जो वक्त मुश्तक है जैसे अभी जो मैंने
[13:30]मिसाल दिया यह अभी आप तजुर्बा कर सकते हैं आप किसी वक्त
[13:32]भी अपने घर में मकान में कहीं पर जाकर आप तजुर्बा कर
[13:35]ले और इसी में वक्त नोट कर ले और कितने य दो
[13:39]फीट साया बढ़ने तक कितना टाइम इसम आ जाता है एक घ
[13:43]दो घटे ढ़ घंटा कितना टाइम बढ़ जाता है ठीक है अब
[13:45]सवाल यह है कि यह जो इस वक्त आप नमाज पढ़ रहे
[13:48]हैं आपने तो जोहर और असर एक साथ पढ़ लिया और तमाम
[13:53]मसाजिद में ऐसा ही होता है हता कि घर में नमाज पढ़ते
[13:58]वहां भी हम जोहर और असर एक साथ पढ़ते हैं त कि
[13:59]मगरिब और इशा को भी एक साथ पढ़ लेते हैं तो अने
[14:07]मोहतरम फजीलत यही है कि जोहर को अपने फजीलत के वक्त में
[14:14]पढ़ा जाए नमाज असर को अपनी फजीलत के वक्त में पढ़ा जाए
[14:16]ताकीद यही है फजीलत यही है मगर शरीयत ने हमें और आपको
[14:23]इजाजत दी है कि इस वक्त मुश्तरका में दोनों नमाज आप एक
[14:30]साथ पढ़ सकते हो लिहाजा उस इजाजत के तहत हम क्या कर
[14:32]लेते हैं अवले जोहर में हम जोहर की नमाज पढ़ लेते हैं
[14:37]उसके फौरन बाद हम असर की नमाज पढ़ लेते हैं यहां असर
[14:42]अदा हो जाती है लेकिन यह है कि उसका फजीलत का वक्त
[14:45]नहीं मिलता है यह बात अपनी जगह यही मसाल मगरिब और इशा
[14:51]का अब अगर यह बात आपकी समझ में आ गई है तो
[14:56]क्योंकि आप देखते हैं बाकी मुसलमान यह जोहर और असर मगरिब और
[15:02]इशा अलग लग पढ़ लेते हैं और हम शिया मुसलमान जोहर और
[15:04]असर और मगरिब और इशा को एक साथ पढ़ इस मुश्तरका वक्त
[15:09]में आया एक साथ नमाज पढ़ने के लिए हमारे पास कोई दलील
[15:13]है सवाल तो है अपनी जगह बाकी सारे मुसलमान जोहर को अलग
[15:18]पढ़ते हैं असर को अलहदा पढ़ लेते हैं मगरिब को अलग पढ़ते
[15:22]हैं इशा को अलहदा पढ़ लेते हैं हम शिया मुसलमान जोहर और
[15:25]असर को एक साथ मगरिब और इशा को एक साथ पढ़ लेते
[15:29]हैं मुश्तक समझकर आया इसकी कोई दलील हमारे पास है मैं चाह
[15:35]रहा हूं कि अकाम नमाज के दरमियान में यह दलील मुक्तसर चंद
[15:38]मिनट लगेंगे आपके लिए मैं बयान करूं फिर आगे आप आमादा है
[15:43]सवात पढ़ मिलके मोहम्मद आले मोहम्मद पर मेरे नौजवान दोस्तों की मालूमात
[15:52]के लिए है वरना ये जितने बुजुर्ग अरात यहां बैठे मेरे सामने
[15:55]इन सबको मालूम है ये आपकी मालूमात के लिए है कि अगर
[15:59]हम नमाज को वक्त मुश्तक में पढ़ते हैं तो हमारे पास कोई
[16:02]शरी दलील है भी या नहीं है तो उमन अकाम शरिया पर
[16:07]दो तरह से दलील दी जाती है या तो कुरान या हदीस
[16:11]से तो सबसे पहले हम कुरान से दलील तलाश करते हैं जिस
[16:16]आयत को मैंने सरनाम कलाम करार दिया यह सर बनी इसराइल की
[16:22]आयत है और सर बनी इसराइल की इस आयत में नमाज के
[16:27]तीन वक्त बयान हुए अ सला शम नमाज पढ़ो सूरज डलते वक्त
[16:36]जवाल आ गया इला रात के अंधेरा छाने तक रात की नमाज
[16:45]आ गई व कुरान फजरी और सुबह के सुबह के वक्त में
[16:46]यह फजर की तो कुरान में जो नमाज के लिए मुश्तरका औकात
[16:53]है वो तीन बयान हुए जवाल सक लल रात का अंधेरा कुरान
[16:59]फजर नमाज फजर का वक्त बात समझ में आ रही है अब
[17:03]इस आयत में तफसीर है तशरीफ जाने का वक्त अभी नहीं एक
[17:07]और आयत भी है सूर हद की आयत भी है मगर उसकी
[17:11]तरफ भी नहीं जाऊंगा बस मैंने आपको बताया कुरान की ये आयत
[17:16]है सूर बनी इसराइल की आयत है यहां कुरान के मुश्तरका तीन
[17:19]औकात बयान हुए हैं आइए हदीस की तरफ चलते हैं कि हदीस
[17:26]क्या कहती है आयतुल्लाह मकारम शिराजी ने यं तो तफसीर नमूना में
[17:33]भी यह बयान मौजूद है इसके अलावा उनकी छोटी सी किताब है
[17:38]उसके अंदर भी उन्होंने यह लिखा है कि जो तलाफी मसाइल है
[17:41]उस पर उन्होंने गुफ्तगू की है उस किताब का नाम है शिया
[17:45]जवाब देते हैं उर्दू में तर्जुमा मौजूद है उसके अंदर बहुत सारे
[17:48]मसाइल है उनमें से एक मसला यह है इसको कहा जाता जमा
[17:56]बन सलात अरबी में क्या कहते हैं जमा बन सला दो नमाज
[18:01]को जमा करके एक साथ पढ़ना इस जमा बन सलात पर उन्होंने
[18:06]बयान किया उस किताब च में लिखा है कि मुसलमानों की मुस्तक
[18:15]किताबों के अंदर सही और मुस्तक किताबों के अंदर जब मैं सही
[18:18]और मुस्त कहता हूं उसमें सही मुस्लिम भी है सही बुखारी भी
[18:23]है और सही किताबें भी है इसी तरीके से हमारे यहां जो
[18:24]अदीस की कुतुब अरवा है वो भी मुराद है सही और मुस्त
[18:30]किताबों में अहा दीस की किताबों में 30 के करीब अहा दीस
[18:37]हैं जो नमाज को जमा करके पढ़ने की इजाजत देती है कितनी
[18:44]30 के करीब हवाला के साथ उन्होंने बयान किया है मैं उनमें
[18:47]से दो हदीस आपकी खिदमत में बयान करता हूं अच्छा उन्होंने एक
[18:53]दूसरी बात कही उन्होंने कहा कि इन अहा दीस को बयान करने
[18:55]वाले जो रावी है वो भी पाए के रा कोई मामूली लोग
[19:01]नहीं मसलन उसमें इब्ने अब्बास बहुत बड़ा नाम [संगीत] है जनाबे अयूब
[19:11]अंसारी अबू अयूब अंसारी बड़ा नाम है जाबिर बन अब्दुल्ला अंसारी बहुत
[19:21]बड़ा नाम है अब्दुल्ला इब्ने उमर कहा ये जो जितने पाए के
[19:24]असब हैं उन्होंने इन अहा दीस को नकल किया जो जमा बन
[19:28]सलाते के अहा दीस है दो हदीस पहली हदीस रावी बयान करता
[19:36]है कि सल्ला रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वाही वसल्लम अजहरा अहरा ल असरा
[19:47]जमन फ मदीन बिला न ला सफर अबू जुबैर रावी का नाम
[20:00]है वो कहता है कि मैंने देखा कि अल्लाह के रसूल ने
[20:07]मदीने में जोहर और असर की नमाज को एक साथ अदा किया
[20:09]जबकि अल्लाह के रसूल सफर की हालत में भी नहीं थे और
[20:15]किसी किस्म का खौफ भी नहीं था यहां खौफ से मुराद जलजला
[20:21]आंधी तूफान जिहाद इस तरह की बातें होती हैं ऐसे हालत में
[20:23]खौफ कहा जाता है कि जहां नमाज को जमा करके पढ़ी जाती
[20:28]है ना खौफ है ना सफर जमा करके दूसरी कौन बयान कर
[20:34]रहा है इने अब्बास जनाब ने अब्बास बयान करते हैं कि जमा
[20:37]रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलही वाली वसल्लम अजहरा ल असरा ल मगरिब ल इशा
[20:50]फिल मदीन बिला न ला सफर अल्लाह के रसूल ने मदीने में
[21:00]जोहर और असर को इसी तरीके से मगरिब और इशा को जमा
[21:02]करके अदा किया यानी एक साथ पढ़ लिया इकट्ठा अदा कर दिया
[21:07]ये नमाज बिला खौफ ला जरर जबक को खौफ भी नहीं था
[21:12]और बला ला सफर अल्लाह के रसूल सफर की हालत में अच्छा
[21:17]अब यह जो अबू जुबैर है यह सवाल करता है क्या तुमने
[21:23]नहीं पूछा अल्लाह के रसूल से सवाल नहीं किया अल्लाह के रसूल
[21:28]से कि या रसूल अल्लाह आपने नमाज एक साथ क अदा की
[21:30]रावी कता मैंने सवाल किया था इने अब्बास का जवाब है कि
[21:38]अल्लाह के रसूल ने नमाज को जमा करके इसलिए पढ़ा कि अल्ला
[21:44]ताक मेरी उम्मत में से किसी एक के लिए कोई जहमत ना
[21:50][संगीत] हो तर्जुमा आपने सुना अब यह जो आखरी जुमला मैंने कहा
[21:58]इसकी वजाहत कु उस लमहे के बाद देखिए 30 अदीस में से
[22:05]दो हदीस हमने आपकी खिदमत में बयान किया कि जिसमें यह साबित
[22:08]है कि अल्लाह के रसूल ने बगैर किसी जरूरत के नमाज जोहर
[22:12]और असर को मगरिब और इशा को एक साथ पढ़ लिया हज
[22:16]जो की सबसे अजीम तरीन इबादत है मुसलमानों की और अल्हम्दुलिल्लाह अब
[22:26]हाजी इस वक्त मक्का पहुंचना शुरू हो गए दुआ करें परवरदिगार हम
[22:34]सबको हज बैतुल्लाह की खाने खुदा के रोज रसूल बकी की जियारत
[22:38]नसीब फरमाए इंशाल्लाह आप में से बहुत सारों को हज की सहादत
[22:44]नसीब हुई होगी और जिनको नहीं हुई मैंने इंशाल्लाह कहा आइंदा हम
[22:49]सबको इंशाल्लाह य सात नसीब हो जाए और बारबार नसीब हो जाए
[22:52]अरफ के मैदान में हाजी जाते हैं तमाम हाजी उसका कोई भी
[23:00]फ कोई भी फिरका हो वो जोहर और असर को एक साथ
[23:01]पढ़ता है हालांकि वहां हाजियों का कोई और काम नहीं है सिवाय
[23:10]इबादत के ऐसी तरीके से जब अरफ से ये हाजी रवाना हो
[23:12]जाते हैं मशर हराम की तरफ और मशर में पहुंचते हैं तो
[23:17]हुकम यही है कि मशर उल हराम में आके मगरिब और इशा
[23:22]को एक साथ अदा करो और तमाम हाजी हर फिरके का हाजी
[23:29]मशर में आता है मगरिब और इशा की नमाज को एक साथ
[23:33]आपने बस आखरी बात क्योंकि मैंने अकाम बयान करने हैं आपको रोका
[23:40]था दरमियान में आखरी बात मैंने दलील दिया कुरान से मैंने दलील
[23:45]दिया हदीस से अब आइए यह डॉक्टर तेजाने आप में से अक्सर
[23:56]उसके नाम से आगा है का रहने वाला है बहुत ब बड़ा
[24:01]पढ़ा लिखा एक दानिश्वर इंसान है जो तहकीक करने के बाद वो
[24:04]मजहब शिया उसने इख्तियार किया है उसकी बहुत सारी किताबें हैं तफसी
[24:10]त में तफसील आप सबको मालूम है मैं मजीद तफसील बयान नहीं
[24:14]कर सकता डॉक्टर तेजाने कहता है कि जब मैं सफर इराक पर
[24:17]था ये सबसे पहले इराक गया था और वहां जाके मुख्तलिफ उलमा
[24:22]सेने मुलाकातें की है उनमें से वो कहता है कि मेरी मुलाकात
[24:24]शहीद बाकर सद्र से हुई तो मैंने उनसे यही सवाल आपने यह
[24:30]जो अभी जोहर और असर की नमाज एक साथ पढ़ी है उसकी
[24:36]कोई वजह उसकी कोई दलील तो वह लिखते हैं कि शहीद बाक
[24:46]सदर ने मुझसे कहा कि यह जो नमाज हम इकट्ठी पढ़ते हैं
[24:48]जोहर और असर को जमा करके मगरिब और इशा को सिर्फ और
[24:53]सिर्फ यह है कि मुसलमानों की आसानी के लिए अल्ला ही कि
[25:00]मेरी उम्मत में से किसी एक के लिए कोई जहमत ना हो
[25:05]फजीलत अपनी जगह है मगर यह है कि इंसान आमतौर पर कामकाज
[25:13]कारोबार मुलाजमत कोई स्कूल में है कोई कॉलेज में है कोई कारोबार
[25:16]में है कोई मुलाजमत में है कोई सफर में है उसके लिए
[25:20]मुश्किल है कि बाजे औकात कि पांच वक्त नमाज के लिए तैयारी
[25:23]करें और मस्जिद में चला जाए कहीं वजू का मसला है कहीं
[25:27]लिबास का मसला आ सकता है कहीं वक्त का मसला स सकता
[25:31]है इसलिए उसके लिए आसानी यह है कि वो एक वक्त में
[25:32]मगरिब और इशा पढ़े इकट्ठी करके नमाज और दूसरे वक्त में जोहर
[25:39]और असर पने यह सिर्फ और सिर्फ उसकी आसानी के लिए है
[25:44]मैंने आपका बड़ा वक्त लिया मैं समझता हूं कि जो बयान करना
[25:46]चाह रहा था किसी हद तक मैं समझाने में कामयाब हुआ अगर
[25:51]मैं कामयाब हो गया हूं तो आप बुलान आवाज से दरूद पढ़
[25:58]लीजिए [प्रशंसा] आइए मैंने आपका बड़ा वक्त लिया अब हम आते हैं
[26:05]अकाम नमाज बत जल्दी जल्दी आगे बढ मैं समझता हूं कि मैंने
[26:10]नमाज जोहर और अस वक्त बयान कर दिया अब एक दो मसले
[26:15]यहां समझ लीजिए पहला मसला यह है कि अगर कोई शख्स नमाज
[26:18]असर को पहले पढ़े जोहर को बाद में पड़े उसकी नमाज सही
[26:26]है या बातिल है आप क्या कहते या तीन सूरत पहली सूरत
[26:33]यह है कि अगर उसने जानबूझ के यह काम किया है कि
[26:37]असर को पहले पढ़ा जोहर को बाद में नमाज उसकी बा और
[26:41]अब गलती से उसने यह काम किया है यहां दो सरत बनती
[26:46]है पहली सूरत यह है कि व यह समझा कि मैं नमाज
[26:51]जोहर पढ़ चुका हूं उसने असर की नियत किया दरमियान नमाज में
[26:57]उसको याद आया कि मैंने अभी तक जोहर नहीं पड़ी है दरमियान
[27:02]नमाज किसी भी रकात में पहली दूसरी तीसरी चौथी कहीं भी उसे
[27:07]याद आए मैंने अभी तक जोहर की नमाज नहीं पढ़ी है और
[27:09]मैंने नमाज असर की नियत की है इस इंसान के लिए हुकम
[27:13]यह है कि फौरन अपनी नियत को तब्दील करें यानी वो यह
[27:18]नियत कर ले कि अब तक जो कुछ पढ़ चुका हूं अब
[27:22]जो कुछ पढ़ूंगा यह जोहर की नमाज होगी और जोहर की नियत
[27:26]से पढ़ रहा हूं लिहाजा नियत जोहर की तरफ तब्दील करें मुकम्मल
[27:30]करें उसकी नमाज सही दूसरी सरत उसको याद ही नहीं आया यहां
[27:34]तक कि उसने असर की नमाज मुकम्मल की मुकम्मल कर लिया उसके
[27:41]बाद उसे याद आ मैंने अभी तक जोहर की नमाज पढ़ी ही
[27:45]नहीं य उसकी असर की नमाज सही है दोबारा तकरार करने की
[27:47]जरूरत नहीं है जोहर की नमाज पढ़े बस और घर चला जाए
[27:53]यही मसला नमाज मगरिब और इशा का भी है कि अगर जानबूझकर
[28:00]इशा की नमाज पहले पढ़ता है नमाज बातिल है गलती से पढ़
[28:07]लिया इशा की नमाज पहले मगरिब की नमाज बाद में तो इधर
[28:12]अगर तो इशा की नमाज में उसे दरमियान में याद आया कि
[28:15]मैंने अभी तक मगरिब की नमाज नहीं पढ़ी है तो क्या करेगा
[28:20]अपनी नियत को बदल देगा मगरिब की तरफ मगर यहां एक चीज
[28:26]का ख्याल रखना है वो यह है कि वो अभी य चौथी
[28:30]रकात के रुक में दाखिल ना हुआ हो इशा के चौथे रकात
[28:31]के रुकू में दाखिल ना हुआ हो तो मगरिब की तरफ अपनी
[28:36]नियत को तब्दील कर सकता है और अगर छोटी रकात के रुकू
[28:40]में जा चुका है अब नमाज इशा भी बातिल मगरिब बातिल दोबारा
[28:44]से वो क्या करेगा लेकिन अगर यहां नमाज इशा मुकम्मल करने के
[28:51]बाद उसे याद आए कि मैंने नमाज मगरिब नहीं पढ़ी थी फिर
[28:57]इशा सही है मगरिब की नमाज वो बाद में पढ़ सकता है
[29:03]सलवा पढ़े मिलके मोहम्मद और आले मोहम्मद पर अच्छा य एक और
[29:12]छोटा सा मसला बयान करूं और मैं आगे बढूं फर्ज करें कि
[29:15]एक आदमी ने जोहर की नमाज पढ़ी और फिर गलती से जानबूझ
[29:22]करनी गलती से दोबारा जोहर की नमाज की नियत कर लिया उसने
[29:25]ये ख्याल कि मैंने शायद जोहर की नमाज नहीं पढ़ी है दोबारा
[29:29]उसने जोहर की नमाज की नियत कर अभी नमाज के दरमियान में
[29:34]कभी भी उसको याद आया पहली रकात में दूसरी रकात में रुकू
[29:39]में सजदे में याद कि मैं जोहर की नमाज दोबारा पढ़ रहा
[29:41]हूं तो क्या यह अपने जोहर की नियत को असर में बदल
[29:48]सकता है या नहीं जवाब नहीं इधर इजाजत नहीं है जोहर से
[29:56]असर की तरफ नियत तबदील करने की इजाजत नहीं है मगरिब से
[30:02]इशा की तरफ नियत तब्दील करने की इजाजत नहीं है हां असर
[30:08]से जोहर की तरफ नियत उदल हो सकती है इशा से मगरिब
[30:09]की तरफ नियत उदल हो सकती है यह बात समझ में आ
[30:13]गई तो मैं जल्दी जल्दी आगे बढ़ता हूं मोहतरम मगरिब और इशा
[30:20]का वक्त जो है वह है कि अजान मगरिब से लेके आधी
[30:29]रात तक मगरिब और इशा का वक्त मुश्तक है नमाज मगरिब नमाज
[30:35]इशा का जो मुश्तक वक्त है वो है अजान मगरिब से लेकर
[30:42]आधी रात तक अच्छा मैं अभी आधी रात का मतलब समझाता हूं
[30:45]उ लोग समझते हैं आधी रात मलब 12 बजे नहीं ऐसा नहीं
[30:51]आधी रात का मेयार यह है कि यह रात कितने घंटे की
[30:57]है 10 घंटे की रात है 12 घंटे की रात है 14
[31:01]घंटे की रात है या 9 घंटे की रात मुमकिन है कोई
[31:05]रात 12 घंटे की हो सकती है मुमकिन है कोई रात 10
[31:10]घंटे की हो सकती है मुमकिन है कोई रात उससे भी कम
[31:15]की हो कोई 9 घंटे की ठ घंटे की रात हो आजकल
[31:19]रात कितने घंटे की मुझे अंदाजा नहीं है आप हिसाब कर लीजिए
[31:22]तो जितने घंटे की रात है उन घंटों को दो हिस्सों में
[31:27]तकसीम कर दें ये आधी रात कहलाती है अगर फर्ज मिसाल 12
[31:32]घंटे की रात है तो अजान मगरिब से 6 घंटे गुजर गए
[31:37]आधी रात हो गई नमाज मगरिब और इशा का वक्त खत्म हो
[31:39]गया यह बात समझ में आ गई अब मैं आगे पढ़ता हूं
[31:45]आधी रात हो गई अब एक श नमाज पढ़ना चाहता है नमाज
[31:48]मगरिब और इशा का वह क्या करेगा आधी रात हो गई है
[31:53]उसने अभी तक मगरिब और इशा की नमाज नहीं पढ़ी है अब
[31:57]वो पढ़ना चाहता है अब देखना यह है कि इसने आधी रात
[32:02]तक नमाज क्यों नहीं पढ़ी है यह फलसफा बड़ा जरूरी है यह
[32:07]वजह समझना बहुत जरूरी है अगर तो इसने यह नमाज इसलिए नहीं
[32:16]पढ़ी है आधी रात तक कोई उजर था उसके लिए इसलिए नमाज
[32:22]नहीं पढ़ी उजर क्या है एक आदमी सफर बस में सफर कर
[32:27]रहा है बस रुकी ही नहीं आधी रात हो गई ट्रेन में
[32:30]सफर कर रहा था गाड़ी रुकी ही नहीं आधी रात हो गई
[32:34]एक आदमी बीमार है हॉस्पिटल में है वहां नमाज पढ़ने का उसके
[32:38]लिए कोई मौका नहीं है आधी रात को घर पहुंचता है या
[32:41]इसी तरीके से कोई खातून आधी रात के बाद वो अपने आयाम
[32:47]से पाक हो जाती है और कोई भी मिसाल आप ले सकते
[32:51]हैं ये मैंने उजर की एक दो मिसाले लि आप कोई भी
[32:52]उजर ले ले किसी भी उजर की वजह से किसी शख्स ने
[32:57]आधी रात तक नमाज नहीं पढ़ी है अब आधी रात के बाद
[33:02]नमाज पढ़ना चाहता है इस शख्स के लिए अजान सुबह तक नमाज
[33:06]पढ़ने का वक्त है यानी अदा की नियत से नमाज पढ़े इसकी
[33:08]नमाज कजा ही नहीं होती है अजने फजर तक अदा का वक्त
[33:14]है इस शख्स के लिए अजान फजर तक जब भी पढ़ेगा यह
[33:20]अदा की नियत से पढ़ेगा साहिबे उजर इंसान और वो जिसने या
[33:25]इसी साहिब में एक और मिसाल भी दे सकता हूं ये मिसाल
[33:29]आपके लिए बहुत आसान है हम सबके लिए फायदा मंद है वय
[33:30]एक आदमी सो गया और आधी रात को उसकी आंख खुल गई
[33:34]यह भी उजर में शामिल है बाज लोग समझते हैं कि सोना
[33:39]शायद आदमी काम काज करके आया थक गया सो गया भाई आधी
[33:44]रात को आख खुल गई इसके लिए अजान फजर तक वक्त है
[33:48]कि वो अदा की नियत से पढ़ेगा मगर वो इंसान जिसने जानबूझ
[33:51]के नमाज पढ़ सकता था आधी रात तक नमाज नहीं पढ़ी मगरिब
[33:58]और इशा की तो रात में इसकी नमाज तो कजा है मगर
[34:05]अब अगर यह नमाज पढ़ेगा अजान फजर तक तो यह ना कजा
[34:06]की नियत करेगा ना अदा की नियत करेगा सिर्फ कुरबत इल्ला की
[34:13]नियत से अपनी नमाज मगरिब और इशा को अदा कर देगा ये
[34:18]कौन शख्स है जो आधी रात से पहले नमाज पढ़ सकता था
[34:24]मगर अपनी सुस्ती काहिली की वजह से उसे नमाज नहीं पढ़ी है
[34:30]तो अब आधी रात के बाद वो नियत अदा की नियत भी
[34:31]नहीं करेगा कजा की नियत भी नहीं करेगा कुरबत ला की नियत
[34:37]से नमाज पढ़ेगा सवात पढ़े मिलके मोहम्मद लेह
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