التالي
3 المشاهدات · 25/06/09
1 المشاهدات · 25/07/08
1 المشاهدات · 25/11/13
Ehkam Namaz Part 02 | H.I Asghar Ali Jawwadi
0
0
8 المشاهدات·
24/10/22
في
محاضرات
Record date: 20 Oct 2024 - احکام نماز AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
أظهر المزيد
Transcript
[0:19]ब मोहम्मद ल मोहम्मद बलं सवात [संगीत] बला बमला रमान रहीम अलला
[0:37]र आलमीन सलातो सलाम अला अर ला अम्मा बाद जैसा कि लान
[0:56]हुआ है उसके मुताबिक हमने नमाज के अकाम पे गुफ्तगू करनी है
[1:02]और मुझे याद है कि इससे पहले जो हमारा दर्स हुआ था
[1:08]उसमें हमने औकात नमाज से शुरू किया था और आज जहां से
[1:15]हम शुरू करना चाह रहे हैं वह है अजान और इकामत ये
[1:20]नमाज का हिस्सा तो नहीं है अजान इकामत मगर अजान और इकामत
[1:27]की फजीलत और अजान और इकामत के कुछ जरूरी मसाइल आज हम
[1:35]इंशाल्लाह बयान करेंगे और अगर हमारे पास वक्त में गुंजाइश बाकी रही
[1:38]तो फिर इंशाल्लाह हम नमाज के फेरि में दाखिल हो जाएंगे नी
[1:46]वाजिब नमाज और उसके बाद मुस्ताहब और नफल नमाज की तादाद भी
[1:49]बयान करेंगे अगर आपकी तवज्जो हात मेरे साथ हो तो इंशाल्लाह यह
[1:55]मसाइल आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ़ेंगे सलवाद पढ़े एक दफा फिर ब सवा
[1:59][प्रशंसा] देखि फ में शरीयत में दन में अजान की इतनी ज्यादा
[2:13]ताकीद है और इतनी ज्यादा फजीलत है कि छठे इमाम इमाम जाफर
[2:22]सादिक अ सलातो सलाम का इरशाद है मासूम फरमाते हैं कि अल
[2:30]मन सब जन्ना व बिलाल छठ इमाम ने इरशाद फरमाया जो सबसे
[2:38]पहले जन्नत में दाखिल होगा वह हजरत बिलाल हशी होगा यह जब
[2:49]रावी ने सुना तो उसने सवाल किया मौला लिमा वो क्या खुसूसियत
[2:58]और क्या उनकी इबादत थी जिस की वजह से बिलाल सबसे पहले
[3:05]जन्नत में दाखिल होगा तो इमाम ने जो उसकी वजह बयान की
[3:08]है फरमाया अब हुआ अल मन आजना वह पहला शख्स है जिसने
[3:15]गुलदस्ते अजान पर खड़े होकर अजान दिया तो यह अजान की इतनी
[3:23]फजीलत है अलबता यह है कि वह मोजिन पैगंबर इस्लाम है और
[3:26]पहला मोजिन है वो अपनी जगह अभी मजिन के जो फाइल है
[3:32]वो भी लेकिन अजान की कितनी फजीलत है और मजिन का कितना
[3:37]बड़ा मकाम है इसके लिए एक रिवायत और समझे आप खतम मर्तबा
[3:46]हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वाही वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि जिस
[3:54]वक्त मोजिन अजान दे रहा है दे रहा होता है और जिस
[4:02]वक्त वो इकामत कह रहा होता है उस वक्त वो उस कैफियत
[4:07]में होता है उस हालत में होता है उसका वो दर्जा और
[4:09]मकाम होता है कि राहे खुदा में अगर कोई मुजाहिद जिहाद कर
[4:16]रहा हो और जख्मों की वजह से उसका खून से उसका बदन
[4:19]गलता हो जाए लहू लहान हो जाए यानी राहे खुदा में जिहाद
[4:25]करते वक्त अगर जख्मों से जिस शख्स का खून लह लहान होता
[4:32]है उसका जो मकाम मर्तबा और दर्जा और सवाब है वह सवाब
[4:34]उसको उस वक्त मिलता है जब मोजिन अजान दे रहा होता है
[4:40]और इकामत प रहा होता है सुन किनी फलत अमीर मोमिनीन हजरत
[4:48]अली इब्ने अबी तालिब अ सलातो सलाम ने पैगंबर इस्लाम की जुबाने
[4:56]मुबारक से यह जुमला सुनने के बाद सवाल किया या रसूल अल्लाह
[5:00]तो फिर ऐसा होगा कि इस अजान की फजीलत हासिल करने के
[5:08]लिए आपके उम्मत के लोग एक दूसरे पर तलवार उठाएंगे जब इतनी
[5:14]फजीलत है तो हर आदमी चाहेगा कि मैं अजान दूं दूसरा चाहेगा
[5:20]कि यह फजीलत मैं हासिल करूं उनके दरमियान में झगड़ा होगा ना
[5:24]नजा होगा इख्तिलाफ होगा अल्लाह के रसूल ने यह फजीलत बयान करने
[5:29]के बाद अमीरुल मोमिनीन के सवाल पर जो जुमला कहा है वो
[5:36]हम और आपके लिए एक बड़ा पैगाम है हमारे लिए मेरे लिए
[5:39]भी आपके लिए भी अल्लाह के रसूल ने इरशाद फरमाया यह सवाब
[5:45]अपनी जगह मगर मेरी उम्मत के लोग इस काम के लिए जिनका
[5:52]इंतखाब करेंगे वो उम रसीदा लोग होंगे अली तुम मुतमइन हो जाओ
[5:59]इनमें निजा नहीं होगा तशरीफ में कर रहा हूं यली तुम मुतमइन
[6:03]हो जाओ इनके दरमियान में निजा नहीं होगा इनमें झगड़ा नहीं होगा
[6:06]इसलिए कि उम्मत के अफराद मेरी उम्मत के लोग इस काम के
[6:12]लिए इस फजीलत के लिए जिन अफराद का इंतखाब करेंगे वह उम
[6:17]रसीदा लोग होंगे व जफ लोग होंगे वह बूढ़े लोग होंगे क्या
[6:19]मतलब हो गया व जो जवान है वह इस सवाब से महरूम
[6:23]होगा य रिवायत अल्फाज है से बयान नहीं कर रहा और इस
[6:29]रिवायत को सुने और आप माश में निकाह डाले हमारे मसाजिद में
[6:37]घरों में जहां कहीं अजान दी जाती है मुअज्जिन का इंतखाब इन
[6:41]लोगों का किया जाता है मजिन के तौर पर जिन लोगों का
[6:46]इंतखाब किया जाता है जो चबूतरे अजान पर आते हैं आपको जवान
[6:53]और नौजवान कम मिलेंगे उमर रसीदा अफराद ज्यादा मिलेंगे हालांकि यह सवाब
[6:58]तो पैगंबर की हदीस के मुताबिक जवानों कोसल करना चाहिए समझ रही
[7:05]अजान का इतना बड़ा मकाम है और यह जो रिवायत मैंने अभी
[7:11]बयान की है यह हमारी हदीस की मोत तरीन चार किताबों में
[7:17]से किताब है उसका नाम है किताब का नाम है मला यजर
[7:19]फकी बाबे अजान इकामत उसके अंदर यह रिवायत मज अच्छा य अन
[7:27]की फजीलत थी अब आते हैं कि शरीयत में कहां-कहां अजान देना
[7:31]मुस्ताहब है सिर्फ तीन मरीद जहां अजान पढ़ने की ताकीद भी है
[7:42]और इस्ते हबाब भी है उनमें से पहला मरीद है वाजिब नमाज
[7:45]के लिए और वाजिब नमाज जब मैं कहूं तो नमाज यूमिया है
[7:53]इसके अंदर नमाज यूमिया जो वाजिब नमाज हैं उसके लिए अजान पढ़ने
[7:56]की अजान कहने की बहुत ज्यादा ताकीद है इसका मतलब यह हुआ
[8:03]कि जितनी मुस्ताहब नमाज हैं उनके लिए अजान भी नहीं है इकामत
[8:06]भी नहीं है आप नमाज बश कबर पढ़ रहे हो आप नमाज
[8:11]जाफर तैयार पढ़ रहे हो आप जोहर के नाफला पढ़ रहे हो
[8:15]असर के नाफला पढ़ रहे हो मगरिब के नाफला फजर के नाफला
[8:19]इन नवाफिल यमय के लिए और बाकी मुस्ताहब नमाज के लिए ना
[8:24]अजान मुस्ताहब है ना इकामा मुस्त सिर्फ और सिर्फ वाजिब नमाज जो
[8:28]यमय नमाज है उनके लिए अजान दे अन कहना मुब भी है
[8:34]और बहुत ज्यादा ताकीद भी है यह पहला मद है दूसरा म
[8:39]वो बच्चा जो दुनिया में आया है यानी जिसकी पैदाइश हुई है
[8:42]पैदाइश के वक्त उस बच्चे के दाए कान में अजान और उसके
[8:47]बाए कान में इकामत कहना यह मुस्ताहब ख पैगंबर इस्लाम सल्लल्लाहु अल
[8:55]सलम की रिवायत है फना अजान दे दो उसके दाए कान में
[9:09]और इकामत कहो उसके बाए कान में उसका फलसफा पग ने बयान
[9:15]किया व यह है कि यह अजान और इकामत जो उसके दाए
[9:21]और बाए कान में कही जाएगी इसकी वजह से वह शर शैतान
[9:25]से महफूज रहेगा अच्छा आमतौर पर तो होता है कि जो हमने
[9:30]देखा है कि जैसे बच्चे की विलादत होती है घर में हॉस्पिटल
[9:35]में तो कोशिश की जाती है कि तलाश किया जाए जा के
[9:40]अजान और इकामत कहे मगर यहां पर शरीयत में कक इसका सवाब
[9:42]ज्यादा है इस मकाम की फजीलत है इसलिए गुंजाइश भी रखी वो
[9:48]यह है कि अगर पैदाइश के फौरन बाद अजान और इकामत कहने
[9:53]की फुर्सत ना मिले तो आप इस बच्चे के दाएं कान में
[9:58]अजान और बाएं कान में इकामत उस वक्त तक सकते जब तक
[10:03]उसकी नाफ कट के नहीं गिरती नाफ गिरने में कुछ दिन लगते
[10:05]हैं नाफ गिरने तक मौका है शरीयत ने यह वक्त दिया है
[10:11]कि उसके कान में अजान और इकामत कही जाए और बस तीसरा
[10:16]और आखरी मरहला जहां अजान देने की फजीलत है सवाब है इते
[10:19]बाब साबित है व यह है कि इंसान अपनी बीमारियों की दूरी
[10:30]के लिए सेहत याबी के के लिए और साहिबे औलाद होने के
[10:35]लिए अजान की ताकीद फिर आठवे इमाम इमाम रजा अल सला सलाम
[10:40]की खमत में एक शख्स आया इस रावी का नाम है हुम
[10:51]बिन इब्राहिम हुम बिन इब्राहीम कहता है मैंने इमाम की इमाम को
[10:54]सलाम किया इमाम की खिदमत में हाजिर हुआ और मैंने इमाम से
[10:59]ये शिकायत की कि मौला मेरे घर में बीमारियां बहुत है बीमारी
[11:01]नहीं जा रही है और मैं साहिबे औलाद होना चाहता हूं औलाद
[11:06]नहीं है इमाम ने जो उसे नुस्खा दिया कहा हु शम तुम
[11:13]अपने घर में बुलंद आवाज के साथ अजान दे दो ु शम
[11:16]कहता है मैं घर गया इमाम के इस फरमान पर मैंने अमल
[11:22]किया घर में बुलंद आवाज के साथ अजान देना शुरू कर दिया
[11:28]इस अजान की बरकत से मेरे घर से बीमारियां दूर हुई और
[11:31]मैं साहिबे औलाद सवात पढ़ मिलके मोहम्मद और आले मोहम्मद [संगीत] [प्रशंसा]
[11:40]पर ये तीन मरद मुझे मिले हैं भाई जहां अजान देना मुस्ताहब
[11:46]भी है और ताकीद भी है इसके अलावा अजान शरीयत में इस्ते
[11:53]बाब रखे मुझे कोई और मौद नहीं मिला मगर अब एक सवाल
[11:56]है कि आप तौर पर आपने भी सुना देखा व यह है
[12:02]कि जब चांद ग्रहण और सूरज ग्रहण हो तो कुछ लोग अजने
[12:08]देते हैं हमारे य अजान है या नहीं है चांद ग्रहण और
[12:12]सूरज ग्रहण के वक्त अजान देना मुस्ताहब होना कहीं फ जाफरी में
[12:15]साबित नहीं है हत्ता कि खुद आयतुल्लाह सिस्तानी ने लिखा है कि
[12:22]चांद गरहन और सूरज गहन के वक्त अजान देना शरीयत में साबित
[12:27]ही नहीं कोई रिवायत नहीं इसके लिहाजा चांद ग्रहण और सूरज ग्रहण
[12:34]वक्त जो नमाज है जो नमाज आयात है वो है अपनी जगह
[12:36]अजान नहीं है अगर यह बात यहां तक वाज हो चुकी है
[12:42]तो मैं जरा सा आगे बढ़ता हूं और इसी हवाले से एक
[12:48]दो छोटे मसले में आपकी खिदमत में बयान करता वो यह है
[12:52]कि अजान इकामत की फजीलत की तरफ तो मैं बाद में जाऊंगा
[12:54]पहले दो मसले एक मसला ये है कि जब मैं कहता हूं
[12:58]कि वाजिब नमाज के लिए अजान देना मुस्ताहब है बहुत ज्यादा ताकीद
[13:03]है तो अक्सर मोमिनीन हमसे यह सवाल करते हैं कि भाई देखें
[13:06]बात यह है कि हम जो है ना अपनी कजा ए उमरी
[13:10]पढ़ रहे होते हैं अपनी कजा नमाज पढ़ रहे हैं और चूंकि
[13:13]कजा नमाज में हमारी कोशिश होती है कि हम ज्यादा से ज्यादा
[13:18]अपनी कजा नमाज अदा करें अगर हम अजान क्योंकि हम जब अजान
[13:23]और इकामत का सवाब बयान करते हैं तो मोमिनीन के दिल में
[13:25]तमन्ना होती है कि अजन इकामत का सवाब भी हासिल हो जाए
[13:29]अब वो कहते हैं कि हम अजान और इकामत वहां कहे या
[13:34]बगैर अजान और इकामत के अपनी कजा नमाज पढ़ सकते हैं तो
[13:36]मसला तो वाजे है कि अदा नमाज हो या कजा नमाज हो
[13:41]अजान और इकामत कहना तो मुस्ताहब है अगर कोई सवाब लेना चाहे
[13:46]तो फर्क नहीं पड़ता है कि वो कजा नमाज पढ़ रहा है
[13:49]या अदा नमाज पढ़ रहा है उस सवाब के लिए उसको अजान
[13:50]इकामत कहना चाहिए मगर अग कोई शख्स चाहता है कि मैं ज्यादा
[13:55]से जदा अपनी कजा नमाज अदा कर दूं तो वो अजान छोड़
[14:01]दें इकामत छोड़ दें अपनी वाजिब नमाज अदा कर द यह मसला
[14:03]जो अक्सर पूछा जाता है इस हवाले से आपकी खिदमत में मैंने
[14:08]बयान कर दिया आइए अजान और इकामत के हवाले से एक मसला
[14:17]बयान कर द व यह है कि यह जो मैंने मोजिन की
[14:21]इतनी ज्यादा फजीलत बयान की रिवायत की रोशनी जो गुफ्तगू के आगाज
[14:29]में हमने सुना कि रिवायत की रो शनी में मजिन का इतना
[14:31]बड़ा मकाम है वो राहे खुदा में शहीद होने वाले का दर्जा
[14:38]रखता मगर हर मजिन के लिए दरजा नहीं है उसन के लिए
[14:46]शराय भी है जो हमारे यहां उन शराय का ख्याल नहीं रखा
[14:53]जाता है मेरी बात रिकॉर्ड हो रही है इसलिए कहा मजिन के
[14:57]लिए पहला शर्त ये है कि वो आदिल हो इन शर्त से
[15:04]मुराद य तो अजन दे सकता है मगर यहां भी मजिन के
[15:10]लिए ताकीद य कि इस्तबा य कि मुस्ताहब यह है कि वो
[15:15]आदिल हो आप समझते हैं नमाज पढ़ाने वाले के लिए अदालत श
[15:17]है इसी तरह अजान देने वाले के लिए उसके अंदर अदालत होनी
[15:23]चाहिए दूसरी शर्त ये है कि वो वक्त शनास हो अब तो
[15:29]हमारे लिए आसानी है घड़ी है हमारे पास मोबाइल है टेलीविजन पर
[15:32]रेडियो पर वक्त बताया जाता है लेकिन यह जरूरी नहीं है कि
[15:38]ये वसाय हर वक्त आपके पास हो को ऐसा मरहला भी आ
[15:42]सकता है यह जाहिरी चीजें आपके पास ना हो आपको पता चलना
[15:45]चाहिए कि शरी जोहर का वक्त जो सूरज को देख के कैसे
[15:50]जोहर का वक्त पहचाना जाता है मगरिब का वक्त पहचानने का तरीका
[15:55]क्या है फजर का वक्त पहचानने का तरीका क्या है वक्त शनास
[15:58]हो जो शरीयत ने जवाल का वक्त मगरिब का इसी तरीके से
[16:04]फजर का जो वक्त बयान किया है वो उसे मालूम हो व
[16:10]तरीको से आता हो वक्त शनास होना चाहिए अच्छा अजन के कुछ
[16:13]और मजिन के लिए कुछ और मुस्त बात भी है व इंशाल्लाह
[16:16]बाद में बयान करेंगे मगर पहले आइए इसमें से पहला मसला यह
[16:23]है कि मैं चाह रहा हूं कि जो जरूरी मसाइल है मैं
[16:28]समझता वो बयान करू ताकि एक वक्त में ज्यादा से ज्यादा मसाइल
[16:30]बयान हो जाए अ फर्ज मिसाल आमतौर पर हमारी मसाजिद में घरों
[16:34]में हम जो नमाज अदा करते हैं जोहर और असर एक साथ
[16:38]हम पढ़ते हैं तो जो जोहर के लिए अजान दी गई है
[16:39]वह असर के लिए काफी है या असर के लिए अजान अलाद
[16:43]से दी जाए तो अगर जोहर और असर के दरमियान में फासला
[16:50]कम है तो एक ही अजान काफी है इकामत तकरार हो अजान
[16:55]एक लेकिन अगर फासला ज्यादा है अब फासला ज्यादा होने का मतलब
[16:59]यह है कि वो जोहर पढ़ रहा है फजीलत जोहर में और
[17:03]असर की नमाज अदा करर वो फजीलत असर में तो यहां फासला
[17:08]है अब सवाल हुआ कि ये जो जोहर के बाद हम तस्बी
[17:12]अरबा पढ़ते हैं या दूसरी ताकी बात या बीच में नवाफिल कुछ
[17:14]नमाज पढ़ते हैं तो क्या इसकी वजह से फासला शुमार होगा और
[17:19]असर के लिए अजान दोबारा देनी पड़ेगी कहा नहीं ताकी बात फासला
[17:23]में नहीं आती अगर आप ताकी बात कर रहे हैं तो ताकी
[17:28]बात के फौरन बाद यानी जोर के बाद ताकी बात उसके फन
[17:32]में असर पड़ रहे य मुश्तरका वक्त है एक अजन आपके लिए
[17:38]काफी है इसी तरीके से यह मस्जिद में अभी नमा जमात खत्म
[17:41]हुई जमात खत्म होने के बाद एक आदमी आया और यहां फरा
[17:47]नमाज पढ़ना चाहता है तो उस रादा नमाज पढ़ने वाले के लिए
[17:50]ताकीद यह है कि तुम अजान नहीं कहो यह जो जमात के
[17:55]लिए अजन कही गई थ यही काफी है उसके लिए उसके लिए
[18:00]मुस्ताहब नहीं है ताकीद नहीं है कि यह जो सवाब है इसी
[18:04]सवाब में वो शरीक है वो अपनी इकामत और उसके बाद जो
[18:08]है ना व अपनी नमाज शुरू करे मगर यहां चंद शराय य
[18:14]मसला आपके लिए आसान भी है आपने अजान नहीं भी दिया है
[18:19]मगर फिर भी अजान का सवाब आपको मिल रहा है मगर चंद
[18:24]शराय के साथ पहली शर्त यह है कि यह नमाज खत्म हुई
[18:30]है और नमाजी अभी तक मौजूद है सारे नमाजी होना शर्त नहीं
[18:32]है एक भी नमाजी है मस्जिद में मौजूद है वो नमाज नहीं
[18:36]पढ़ रहा है वो ताकी बात में मौजूद है यहां तब तक
[18:41]आप बाहर से आए हैं और आपके लिए अजान अजान साक है
[18:45]यानी अजान नहीं भी देंगे तो अजान का सवाब आपको मिल जाएगा
[18:51]यह पहली शर्त है इसके अलावा चंद शर्त और है उनमें से
[18:53]जो अहम शर्त वो दो शर्त बयान करता हूं जो हमारे यहां
[18:58]आमतौर पर रा मिसाल के तौर पर यह जो अजान का सवाब
[19:03]उस शख्स को आने वाले को जब मिलेगा जब जमात और बाद
[19:07]में फुरा पढ़ने वाले शख्स की नमाज पढ़ने की जगह एक है
[19:10]यानी वो इस मस्जिद में जमात हुई है आने वाला इसी मस्जिद
[19:15]ही में नमाज पढ़ना चाहता है अगर वह बाहर सहम में नमाज
[19:19]पढ़ रहा है या इमाम बारगाह में पढ़ रहा है या मस्जिद
[19:23]की छत में पढ़ना चाहता है अजान साक नहीं है उसको अजान
[19:29]देनी पड़ेगी सवाब लेने शर्त यह है किय जमात और उसके बाद
[19:37]रादा नमाज पढ़ने वाले की जगह एक शर्त यह है कि जमात
[19:39]और इसकी नमाज का वक्त मुश्तरका हो यहां जोहर की नमाज पढ़ी
[19:45]गई है जोहर असर की व भी जोर और अस की नमाज
[19:51]पढ़ रहा हो ठीक है तो अजन उसे साक है वक्त मुश्तक
[19:53]हो द अभी इसमें एक छोटा सा मसला समझ ले कि अब
[20:03]मैं अजान के जुमले दोहराना नहीं चाह रहा हूं इसलिए कि माशाल्ला
[20:08]अला अजन के जुमले तो आप सबको याद है मैं इकामत के
[20:12]जुमले दोहराना चाह रहा हूं मसाइल बयान करना चाह रहा हूं मिसाल
[20:16]के तौर पर इस मस्जिद में जमात हो रही है एक श
[20:21]ने अजान दे दिया आपने सुना दूसरे ने इकामत पढ़ ली आपने
[20:25]सुन लिया आपके लिए काफी है हां यह मुस्ताहब है कि जिस
[20:26]वक्त अजान दी जा रही है वो आहिस्ता से आप जुमलो को
[20:32]अजान के जुमलो को दोहराए अपनी जुबान पर जारी कर यही इकामत
[20:39]के लिए मगर यह मसला मस्जिद से बाहर घर में नमाज पढ़
[20:46]मिया बीवी नमाज पढ़ बाप बेटा नमाज पढ़ मां बेटी नमाज पढ़
[20:48]रही एक जगह दो मोमिन नमाज पढ़ रहे एक मोमिन ने अजान
[20:53]दे दिया दूसरे ने अजान नहीं कही मगर जिस मोमिन ने अजान
[20:57]दिया है दूसरे मोमिन ने उसकी अजान सुनी भी है और उस
[20:59]अजान सुनने के फौरन बाद वो नमाज पढ़ना भी चाहता है तब
[21:04]भी यहां उस दूसरे मोमिन के लिए पहले मोमिन की अजान काफी
[21:09]है बशर्ते के तवज्जो से सुनी हो और उसका नमाज पढ़ने का
[21:13]इरादा भी हो मगर एक हसास मसला है इसको जहन में रखें
[21:17]जब मैंने बात घर की की तो यहां मर्द जो अजान देगा
[21:25]दूसरे मर्द के लिए और दूसरी खातून के लिए काफी है इस
[21:27]मर्द की अजन अगर वो सुन ले तो दूसरा मर्द दूसरी खातून
[21:34]सवाब में शरीक होगी ल इनकी वो अजान ना भी कहे मगर
[21:39]खातून ने अजान दिया है मर्द ने सुना है तो यहां मर्द
[21:45]के लिए खातून की अजान काफी नहीं है बल्कि की वो अजान
[21:53]कहने वाली खातून उसकी मां है उसकी बेटी है उसकी बीवी है
[21:59]मेहरम है अभी ना महरम मसला य आता नहीं है महरम ही
[22:01]किसी खातून ने अजान कही है और उसी के महरम किसी मर्द
[22:05]ने अजान सुनी मैंने कहा घर में अक्सर एक कमरा होता जहां
[22:09]पर घर के अफराद मिलके नमाज पढ़ लेते हैं तो वहां पर
[22:11]खातून की अजान मर्द के लिए काफी नहीं है मर्द को सवाब
[22:17]लेने के लिए अपनी अजान दोबारा देनी पड़ेगी हां एक खातून ने
[22:23]अजान दिया दूसरी खवातीन ने सुन लिया यहां काफी है ये सवाब
[22:27]उनको दूसरी खवातीन को मिल जाए पर कर सकती है ब मोहम्मद
[22:34]वाले मोहम्मद [संगीत] सलेवा अब मुस्ताहब बात आजान क्या अजान कहते वक्त
[22:50]मजिन के लिए क्या क्या चीजें मुस्ताहब है पहली चीज जो मुस्ताहब
[22:57]है कि वो रू किबला हो सीधा खड़ा हो हालत वजू में
[23:02]तहर अपने दोनों हाथों को अपने कानों तक बुलंद रख उठा के
[23:10]रख अजान के जुमलो के दरमियान में फासला देना चाहिए जबक इकामत
[23:20]के जुमलो के दरमियान में ज्यादा फासला ना बल्कि फासला ही इसी
[23:25]तरीके से अजान कहते वक्त इंसान का बदन हालत सुकून में होना
[23:32]चाहिए जिस तरह नमाज पढ़ते वक्त इंसान को हिल जुल करने की
[23:34]इजाजत नहीं है इस तरह अजान देते वक्त इंसान का बदन सुकून
[23:42]की हालत में हो जब अजान मुकम्मल हो जाए तो फिर अ
[23:48]इसके लिए मुस्ताहब है कि व दुआ पढ़े अजन के बाद पढ़ने
[23:52]की दुआ है और कोई पढ़ सकता लेकिन ये अजान खत्म होने
[24:00]के बाद उसे एक कदम आगे बढ़ जाए एक कदम आगे बढ़
[24:07]के दुआ पढ़े या अगर खड़े होकर अजान दे रहा तो नीचे
[24:11]बैठ के दुआ पढ़े या अगर वो बैठकर अजान दे रहा तो
[24:15]सजदे में जाए या खड़े भी अजान दे रहा है तो या
[24:18]बैठे या सजदे में चला जाए यानी दुआ पढ़ते वक्त अपनी पोजीशन
[24:20]को तब्दील करे एक कदम आगे जाए खड़ा है तो जमीन पर
[24:25]बैठ जाए जमीन पर बैठा तो सजदे में चला जाए और फिर
[24:29]दुआ पढ़े उसके बाद उस इकामत का सिलसिला शुरू हो जाए अब
[24:32]इस अजन के हवाले से अगर किसी को कोई मसला है या
[24:36]कोई मसला कोई सवाल है जहन में तो व बात में आप
[24:40]सवाल कर सकते हैं मैं अभी जल्दी जल्दी आगे बढ़ना चाहता हूं
[24:44]अब मैं आ रहा अमत के बाद नमाज की तादाद में ज
[24:49]आज का हमारा मज है न की तादाद और फिर मुस्ताहब नमाज
[24:56]की कुछ फस्त आपके लिए बयान करेंगे वाब नमाज फ जा फरिया
[24:58]के मुताबिक वाजिब नमाज है जो आमतौर पर आप सबको मालूम है
[25:11]मगर फिर भी मैं ब तब बयान करता हूं कि मसाल के
[25:16]तौर पर रोजाना की नमाज है नमाज आयात है नमाज मयत है
[25:18]खाने काबा के वाजिब तवाब के बाद जो दोर नमाज पढ़नी है
[25:24]यह वाजिब है अगर मुस्ताहब तवाब के बाद भी पढ़नी होती मरक
[25:26]तवाब मुस्ताहब है तो नमाज भी मुस्ताहब हो जाती है जो वाजिब
[25:32]तवाब होगा उसके बाद दो रकात नमाज वाजिब हो जाती है इसी
[25:38]तरीके से जो बाप के कजा नमाज पड़े बेटे पर वाजिब हो
[25:39]जाती है अलबत्ता हमारे यहां आमतौर पर ख्याल ये होता है कि
[25:44]बाप ने जो भी नमाज नहीं पड़ी बड़े बेटे पर वाजिब हो
[25:48]जाएंगे ऐसा नहीं है यह मतलब एक तफसील मसला है इंशाल्लाह फुर्सत
[25:50]में कभी बयान करेंगे वो कौन सी बात की नमाज हैं जो
[25:55]बड़े बेटे पर पढ़ना वाजिब है या इसके अलावा वो नमाज जो
[25:57]इंसान कभी नजर के जरिए कसम के जरिए अपने ऊपर वाजिब करता
[26:04]है मिसाल न मा मेरा फला काम हो जाए तो मैं दो
[26:10]रकत नमाज पढ़ूंगा यह नमाज चक उसने नजर किया है और नजर
[26:12]की वजह से उस पर वाजिब हो जाती है अब आते हैं
[26:15]मुस्त मुस्त नमाज की कुछ तफसील बयान करू इसलिए की नौजवान दोस्त
[26:21]बैठे हैं और छोटी उम्र के बच्चे भी है अगर बुजुर्गा जो
[26:27]मेरे सामने है आप सबको मालूम है लेकिन मैं कोशिश करूंगा कि
[26:31]मुस्ताहब नमाज क्योंकि हमारे यहां नवाफिल नमाज की बहुत ज्यादा ताकीद है
[26:35]तो इन नवाफिल में से कुछ नाफला नमाज का तस्करा हो जाए
[26:40]सबसे पहले जो नाफला नमाज हमारे यहां ताकीद है जिन ना फिल
[26:47]नमाज की वो है नमाज यिया के नवाफिल यानी एक दिन में
[26:54]जो हम वाजिब नमाज पढ़ते हैं उन नमाज के साथ कुछ नाफ
[27:02]और मुस्ताहब नमाज भी है उनकी बहुत ज्यादा ताकीद है यानी यह
[27:07]समझ लीजिए कि कुल एक दिन में 17 रकात नमाज वाजिब है
[27:13]तो उस 17 का डबल कर दे तो 34 रकात नाफला नमाज
[27:19]इंसान के लिए मुस्ताहब है कि वो दिन के अंदर 34 रकात
[27:21]नाफला नमाज अदा कर तो 17 रकात और 34 रकात 17 वाजिब
[27:27]34 मुस्त इनको मिलाएंगे तो 51 रकात नमाज है जो मोमिन के
[27:33]लिए एक दिन और रात में अदा करने की ताकीद है और
[27:37]यह हदीस आपने बारहा सुनी होगी 11वें इमाम इमाम हसन अकरी अल
[27:43]सलातो सलाम की तरफ से यह रिवायत है मौला फरमाते हैं कि
[27:50]मोमिन की पांच निशानियां है मोमिन की पांच अलाम उनमें से जो
[27:56]पहली निशानी इमाम ने बयान की है वो सला रकात नमाज यही
[28:07]की 34 रकात वाजिब 34 रकात मुस्ताहब और 51 रकात वाजिब य
[28:14]मिला के 51 रकात नमाज का मोमिन की जो निशानी है उम
[28:16]से पहली निशानी कि दिन और रात में र नमाज अदा कर
[28:21]य पहली निशानी मौला ने फरमाया दूसरी निशानी जियार हुसन सलाम महद
[28:33]अरबन के मौके पर इमाम हुसैन अ सला सलाम की जियारत को
[28:40]जाना यह मोमिन की निशानियां में से निशानी है जो 11 मासूम
[28:43]ने बयान की फरमाया दाए हाथ में अंगूठी पहन दाए हाथ में
[28:56]अंगूठी पहनना यह मोमिन की निशानी अलबता अंगूठियों में भी फर्क है
[29:05]आप कौन सा नगीना पहन ले जो सबसे ज्यादा सवाब है वह
[29:08]अकी का अकीक के बारे में यह रिवायत है कि अगर किसी
[29:13]मोमिन के हाथ में अकीक की अंगूठी हो तो एक रकात नमाज
[29:18]का सवाब 70 रकात के बराबर मिलता है और यह भी मैंने
[29:25]रिवायत के अल्फाज पढ़े हैं कि अगर किसी मोमिन के हाथ की
[29:29]अंगूठी हो तो उसकी दुआ मुस्तजाब होती है दुआ रद नहीं इसलिए
[29:37]इमाम ने कहा के मोमिन की जो तीसरी निशानी है व यह
[29:42]है कि यन उसके सीधे हाथ में अंगूठी और मासूम ने इशाद
[29:49]फरमाया न यानी मोमिन की जो चौथी निशानी है व है खाके
[29:59]कर्बला पर सजदा करना खा के शिफा पर सजदा करना और आखरी
[30:07]निशानी है ल जर बिस्मिल्लाह हम कोई भी नमाज पढ़ते हैं उसमें
[30:13]सर अलहम और दूसरा जो भी हम सर पढ़ते हैं उससे पहले
[30:18]जो बिस्मिल्ला हम पढ़ेंगे उस बिस्मिल्लाह को बुलंद आवाज के साथ पढ़
[30:20]जाए जैसे जोर पढ़ रहे होते हैं अगर आपको अ सरा आहिस्ता
[30:25]पढ़ना है मगर हुकम यह है कि बिस्मिल्लाह आवाज के साथ पढ
[30:31]मगरिब और इशा और इसी तरीके से फजर में तो वैसे ही
[30:37]व सरा और पढ़ना है तो बिमला भी बर इसी तरह नाफला
[30:38]नमाज में आपको तियार है यह अल्हम और सरा आप बुलंद आवाज
[30:43]के साथ पढ़े आहिस्ता पढ़े आपके लिए इयार है हता कि इन
[30:48]नाफला नमाज में यह भी आपको इजाजत है कि अगर आप चाहे
[30:56]तो आप सिर्फ सर अलहम प उसके बाद सर कुल अल्ला अद
[31:01]या दूसरा सूरा ना पढ़े य भी इजाजत इसी तरह नाफला नमाज
[31:07]में यह भी इजाजत है कि अगर आप खड़े होकर नहीं पढ़
[31:13]सकते हैं तो बैठ के पढ़ेंगे य तो वाजिब नमाज के लिए
[31:15]नाफला नमाज के लिए यह सहूलियत है नाफला नमाज में कि अगर
[31:20]आप खड़े होकर पढ़ सकते हैं फिर भी अपने आराम सुकून के
[31:25]लिए नीचे बैठ के पढ़ना चाहे तो आपको बराबर सवाब मिलेगा आपको
[31:27]इजाजत है बैठ के पढ़ हत्ता की नाफला नमाज सवारी में भी
[31:33]पढ़ी जा सकती है आप गाड़ी में जा रहे मोटरसाइकिल में जा
[31:38]रहे घोड़े में सवार है सफर कर रहे हैं आप दो रकत
[31:42]नमाज नाफला की नियत करें और पढ़ते चले जाए य क्या होगा
[31:46]अगर आप किबला रुख है तो बहुत अच्छा है अगर आपकी सवारी
[31:51]का रुख कबले की तरफ नहीं है कोई बात नहीं आपकी नमाज
[31:55]हो जाएगी अब तो मोटरसाइकिल चला रहा हूं मैं तो गाड़ी चला
[32:00]रहा हूं मैं सजदा कैसे करू रुकू कैसे करू तो क नमाज
[32:04]पढ़े मैं सजदा कर सकता हं र कर सकता हूं मुझे तो
[32:09]सामने रोड देखना है तो शरीयत ने बड़ी आसानी हम उस पर
[32:19]अमल कर अ जा दोर नमाज नाला की नियत अल्ला अकबर सर
[32:21]पढ़ लिया पढ़ लिया अब जिक रुक है आप सर से इशारा
[32:27]करें जिक्र रुकू पढ़े जिक्र सजदा है अगर आप सजदे में जा
[32:33]सकते हैं तब तो ठीक है नहीं जा सकते कोई बात नहीं
[32:34]आप सर का इशारा करें और जिक्र सजदा पढ़े आप पढे सलाम
[32:43]पढ़ कितनी आसानी है हम परेशान हो जाते हैं कि सफर नहीं
[32:48]कट रहा है आप नमाज पढ़ते चले अल्ला सफर भी कटेगा सवाब
[32:58]भी मिलता रहे ला नमाज में मैंने कहा कि यह जो रोजाना
[33:01]जो वाजिब नमाज हम पढ़ते हैं इनके नवाफिल अब इनके नवाफिल की
[33:07]तादाद बहुत तेजी के साथ में बयान करके आगे बढ़ रहा हूं
[33:12]वो यह है कि जोहर से पहले आठ रकात नमाज नाफ जोहर
[33:13]है जो जोहर से पहले पढ़नी है इसी तरह असर से पहले
[33:18]आठ रकात नमाज नाफला है दो दो रकात करके पढ़ी जाएंगी चार
[33:23]नमाज इसी तरीके से नमाज मगरिब के बाद चार रकात नाले मगरिब
[33:25]है इशा के बाद नीचे दो रकात नाफला है मगर वो एक
[33:30]रकात शुमार होती है इसी तरीके से फजर से पहले यानी वाजिब
[33:35]से पहले दो रकात ना फिले फजर है यूं आप इसकी गिनती
[33:42]करेंगे तो 34 रकात नमाज बन जाती है इन नमाज के अलावा
[33:44]जो चकि 51 की तादाद पूरी करनी है तो इन नमाज के
[33:49]साथ जो यिया नमाज उसके साथ नमाज शब जो कि 11 रकात
[33:53]है इसकी बड़ी ताकीद है ये नमाज शब भी आप मिलाएंगे तो
[33:57]34 की तादाद पूरी हो जाएगी नाल य मैंने क उसे 34
[34:03]की तादाद पूरी नहीं हो नमाज शब की जो फजीलत है उसको
[34:08]पढ़ने का जो तरीका है वह खुद अलग एक पूरे दर्स का
[34:09]मोहताज है कि उसमें तफसील से बयान करना मगर मैं आपको य
[34:14]बता दूं कि यह नमाज शब जो हमारे लिए मुस्ताहब है यही
[34:20]नमाज शब अंबिया और मासूमीन अ सलाम पर वाजिब फर्ज की हैसियत
[34:28]से पढ़ते हमारे लिए मुस्ताहब है ये 11 रकत नमाज तो इसका
[34:34]जो वक्त है वो आधी रात से लेके अजान फजर तक है
[34:36]मगर मेरे नौजवान दो जो सामने बैठे हुए हैं वो कहेंगे कि
[34:40]आधी रात को तो हम जाग ही नहीं सकते हैं आपके लिए
[34:44]सहूल यह है कि नमाज इशा के बाद भी सोने से पहले
[34:48]आप नमाज शब पढ़कर सो सकते हैं क्योंकि इसका सवाब इतना ज्यादा
[34:51]है आप कहीं इसके सवाब से महरूम ना हो जाएं इसलिए शरीयत
[34:56]ने इजाजत दी है कि अगर आप रात को नहीं जाग सकते
[34:58]जागना आपके लिए मुश्किल है आधी रात के बाद तो आप सोने
[35:02]से पहले नमाज इशा के बाद सोने से पहले किसी वक्त भी
[35:06]इस नमाज को अदा करें और आप सो जाए ये इजाजत है
[35:10]आपके लिए 11 रक नमाज शब की जो मुख्तसर वजाहत है वो
[35:16]यह है कि आपको आठ रकात नमाज नमाज शब के उनवान से
[35:20]पढ़नी है दो दो रकात करके पढ़ेंगे नमाज फजर की और उसके
[35:25]बाद दो रकत नमाज आप पढ़ेंगे नमाज शिफा के नाम से दो
[35:29]रत न पला इस नमाज शफा में कुनत नहीं बल्कि ताकीद है
[35:34]कि पहली रकात में भी सर के बाद कुला पढ़ जाए और
[35:37]इसी तरीके से दूसरी रत में भी अ के बादला नहीं पना
[35:42]और आखिर में जो एक रकत नमाज पढ़नी है वह नमाज वितर
[35:47]है नमाज वितर का मुसर तरीका में आपको बता दू बहुत आसान
[35:52]है व एक र नमाज वितर की नियत कररी अपनी जगह मगर
[35:56]य मुख्तसर तरीका आपको बता रहा हूं कि नमाज वितर में अर
[36:01]मोम हमसे पूछते हैं कि नमाज वितर कैसे पढ़े तो आप नियत
[36:03]कर ले मैं एक रका नमाज वितर पढ़ता हूं बला आपने सरा
[36:07]पढ़ सर अहम पढ़ लिया कोई और सर पढ़ ले यहां सर
[36:11]तकरार भी कर सकते दो सरे तीन सर भी पढ़ सकते आप
[36:14]एक सरा पढ़ फौरन कुन के लिए हाथ उठा कम से कम
[36:19]70 मर्तबा अस्त फरला र ज्यादा जितना पढ़ना चाहे आप कम से
[36:27]कम 00 अगर आप 300 भी नहीं पढ़ सकते इससे कम तादाद
[36:35]प 70 मत प 100 मत प जितनी तादाद में आप पढ़
[36:38]सकते हैं अ लेकिन ताकीद य है कि 300 की तादाद पूरी
[36:45]करें अ और सात मत पढ़ना है हाल मकाम मनार अल्लाह इस
[36:53]मकाम पर खड़े होके झसे जहन्नम की आग से पनाह मांगता हूं
[36:59]और आखिर में 40 मोमिनीन के नाम ये 40 मोमिनीन जिंदा मुर्दा
[37:07]दोस्त अहबाब रिश्तेदार पड़ोसी जो भी आपको याद है सबके आप नाम
[37:11]ले सकते हैं कि यह 40 मोमिनीन के लिए हकीकत में दुआ
[37:15]है उनकी मगफिरत के लिए उनकी बख्श के लिए और उसके बाद
[37:19]जो भी आपकी हाजा है इसी कुनूत की हालत में तलब करें
[37:21]या आप यहां नहीं करना चाहते नमाज मुकम्मल करें अपनी हाजत तलब
[37:26]करें क्योंकि ये नमाज के लिए ताकीद है अजान जोहर के नजदीक
[37:32]पढ़ी जाए मगर य मसला आप में बयान करू अगर कोई श
[37:33]यह आखरी दो नमाज नमाज शिफा और नमाज वितर अजान से पहले
[37:39]नहीं पढ़ सका तो उसे इजाजत है कि अजान फजर के बाद
[37:43]भी यह दो रकात पढ़ सकता है कौन सी दो रकात नमाज
[37:48]शिफा और एक रकात नमाज वितर य अजने फजर के बाद भी
[37:55]इसकी पढ़ने की इजाजत है बकी आठ रत आप फजर से पहले
[37:57]पढ़ हां एक मसला यह जहन में रखें वय कि इंसान जब
[38:03]हालत सफर में होता है तो वहां उसकी चार रकात नमाज कसर
[38:08]होती है और उसको दो रकत नमाज पढ़नी होती तो हालत सफर
[38:15]में यह जो जोहर और असर के नाफला है यह इंसान के
[38:20]लिए माफ है सा जोहर और असर का नाफला नहीं जोहर से
[38:25]पहले जो आठ रकात नाफला है असर से पहले आठ रकात नाला
[38:26]है ये उसके लिए पढ़ना नहीं है अलबत्ता अगर इशा के बाद
[38:31]जो दो रकात नमाज नीचे बैठ के पढ़नी अगर भी वो पढ़ना
[38:36]चाहे तो वहां पर भी शरीयत में उसका मुस्ताहब होना साबित नहीं
[38:39]है हालत सफर में मगर सवाब की नियत से रजा की नियत
[38:44]से वो चाहे तो यह दो रकत नमाज अदा कर सकता है
[38:48]आज का दर्स हम यहीं पर खत्म करते हैं और इंशाल्लाह नमाज
[38:54]के मजीद मसाइल इंशाल्लाह आइंदा नमाज की नियत से हम शुरू करेंगे
[38:57]और वही से आगे बढ़ेंगे लाला मुहम्मद [संगीत]
0 تعليقات
sort ترتيب حسب
- أعلى تعليقات
- أحدث تعليقات
التالي
3 المشاهدات · 25/06/09
1 المشاهدات · 25/07/08
1 المشاهدات · 25/11/13
