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Muqaddas Rishta Aur Andaz-e-Guftugu | H.I Sajjad Dehelvi
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Record date: 09 Jan 2022 - مقدس رشتہ اور انداز گفتگو
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल अब मैं नाच्यौ राजिम को विस्मिल्लाह वह मान राहीम कि वह
[0:21]भी ही नुकसान कि व सल्लल्लाहू अला मोहम्मदीन वा आले बाहरी नक्सलवाद
[0:26]बढ़े मोहम्मद वाले दादा जी [संगीत] कि वह जेल पर आज हम
[0:41]अजवाइन अहमदाबाद पकड़ काला imam-e-zamaan अलैहिस सलाम बिस्मिलाहिर्रहमाननिर्राहीम अलग मसला है कुल
[0:49]या फिर से दिन उम्र मोरल मुस्लिमीन सलवार पर मोहम्मद रा दाणा
[0:55]ओ कर दो कि अजमल पर अजवाइन इमाम हसन अलैहिस्सलाम की दुआ
[1:06]को शर्मा बनाया गया का अनुमान जो बच्चों के लिए जवानों के
[1:13]लिए रखा गया कि वह मुकद्दस रिश्ते कि मुकद्दस रिश्ते और हमारा
[1:21]अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तगू के हालात को देखते हुए हालात किया बल्कि हर ज़माने में
[1:32]मुकद्दस रिश्ते रहे हैं है और हर ज़माने में है अंदाज़-ए गुफ्तगू
[1:38]को अहमियत दी गई है कि मछलियां पहले इमाम की जो दुआ
[1:46]के अल्लाह मसले कुल्य फंसे दिन उम्र मोरल मुस्लिमीन के पालने वाले
[1:53]इस लार फार्मा दे कुलफा सदन का जितना भी फंसा हमने पाया
[1:59]जाता है जितना भी फंसा कूटकर हमारे अंदर भरा हुआ है लेकिन
[2:06]मैं और आप अपने फसाद को फसाद मानने को तैयार नहीं है
[2:15]यह हमारी अंदर गलतियां मौजूद हैं लेकिन अब हम अपनी गलतियों के
[2:21]इतने आदी हो चुके हैं कि आप उनको गलत मानने के लिए
[2:25]तैयार नहीं है कि फसाद हमारी जात में है लेकिन वह फसाद
[2:31]क्योंकि आदत बन चुका है लिहाजा फाल अब वह फसाद महसूस नहीं
[2:42]होता है है जिसके तहत हमारे जितने भी मौका 10 रिश्ते हैं
[2:47]कि उन मुकद्दस रिश्तो में भी यह मसला मौजूद है कि अ
[2:54]जिनको ताकत देश का यह जिनको ऐतराम करना है उनको भी नहीं
[3:01]मालूम के आगे हमें किस तरीके से जिंदगी बसर करना है या
[3:08]किस तरीके से मुझे और आपको एक दूसरे को मुखातिब करना है
[3:11]मुझे मेरे और आपके यहां जब मैं और आप अपने होश संभाला
[3:21]है तो होश संभालते ही कि जिन अल्फाजों का इंतखाब करना चाहिए
[3:30]था अपने मां-बाप के लिए कि यहां से तो जिंदगी शुरू होती
[3:38]है है लेकिन मेरे और आपके पास ऑन अल्फाज को इंतखाब नहीं
[3:41]किया गया है मेरा आपके पास वालदैन को पुकारने के लिए जनरल
[3:51]पास का इंतखाब किया गया आनन-फानन में है अम्मी और अब्बा आ
[3:57]आ जाओ मम्मी के पास चले जाओ जवाब बाबू ला रहे हैं
[4:02]बाकी गोदी में चले जाओ सही है ऐसे यह बच्चों हमने हैं
[4:08]लंबे पापा है पापा के पास चले जाओ जाओ पापा बुला रहे
[4:11]हैं तुम्हें चाहिए अब हमने और आपने जैसे मैं खुद भी मैंने
[4:17]खुद भी शामिल हूं हमारे हमने जो बचपन में जो लव सीखा
[4:22]वह बप्पा का सुना दो कि अब उस जमाने में लंबे पापा
[4:26]जो होगा वो यकीनन उस जमाने का मोटर अंतरीन लव होगा लिहाजा
[4:29]इंतखाब करने वालों ने भी इस चीज का तकिया यह कोई ऐसा
[4:34]लाभ इस्तेमाल किया जाए जो और खानदान में को इस्तमाल ना कर
[4:39]दूं जैसे मेरे और आपके पास वक्त ऐसा यह सिलसिला कि ऐसा
[4:42]कोई नाम मौलाना साहब तजवीज़ करें जो किसी का ना हो भाई
[4:46]किसी का ना हो इसका मतलब है कि बेहतरीन नाम इबलीस है
[4:50]इबलीस कोई नहीं रखता में कुछ ऐसा नाम बताइए जो कोई भी
[5:00]ना रखें लेकिन कुरान में भी हो तो शैतान कि डेफिनेशन बहुत
[5:04]अच्छा है इसको ले लीजिए और कितना मुकद्दस माह में लव दक्षता
[5:08]नारियल अब जेविश के अगर कुरान में हो तो बगैर हुजूर हाथ
[5:13]लगाना भी हैं क्यों हराम है या नहीं है कि यह नाम
[5:19]है कि अब इस से बढ़कर और क्या उधर उपलब्ध होगा अ
[5:23]कि क्या कुरान कुरान ए मजीद का हाफ है लेकिन कि इंतखाब
[5:30]नहीं हो सकता है उसको मैं और आप इंतखाब नहीं कर सकते
[5:37]हैं कि अ मेरे और आप यहां इस वर्जन अभी-अभी लव जैब
[5:38]यह घर बेटा पैदा हुआ है तो उसका नाम अली रखा किया
[5:42]है बेटी पैदा हुई है तो उसका नाम इलियाना रख दिया गया
[5:47]है अली से मुतालिब मैं अली से मैच होना चाहिए उसको अलबेली
[5:50]आना है यह हमारे पास या नहीं है यस का यह मामला
[5:55]बनता है या कोई भी माना नहीं बनता है लेकिन बहद हमें
[5:59]मैचिंग का शौक है है तो जब के इस्लाम में जब हम
[6:06]तमाम चीजों को देखते हैं आमतौर पर जब इंतखाब किया जाता है
[6:13]फाश का वालदैन के लिए भी तो मादरे गिरामी हैं 90 माधुरी
[6:18]गिरामी वह इस्तेमाल होता है यह बाप के लिए अगर कोई लंबे
[6:23]इस्तमाल हो रहा है तो बाबा जान बाबा के साथ खाली बाबा
[6:31]नहीं बाबा के साथ लव जे जा धन का इंतकाल हो रहा
[6:37]है बाबा जान की तरह इस बार भी यह बच्चा अपने बाप
[6:44]को पुकारे अपने बाप को आवाज देकर तलब से बाबा जान से
[6:46]मुंह इंतखाब करें ताकि जिंदगी के किसी भी मोड़ पर कि जब
[6:55]इस बच्चों को गुस्सा आए उस तो आएगा ऐड है तो जब
[7:01]यह लव से गुस्से में अगर बाबा की तरफ मुखातिब होगा अब
[7:05]हमारे यह क्या है अब ऐसे अब ऐसे अब को आने दो
[7:09]देखो मैं अब्बा का क्या करता हूं आज अब का इलाज मेरे
[7:12]पास है कि अगर इस तरह का कोई लफ्ज़ औलाद इस्तेमाल कर
[7:19]रही है बाप के सिलसिले में है तो इसका मतलब है कि
[7:24]इसको बोलते बहुत भी एहसास एहसास नहीं हो रहा है क्योंकि अब
[7:29]है ना अब भगवान है तो देखो मैं आज अपना कि कैसे
[7:33]खबर लेता हूं अब बने पूरे घर का माहौल बिगाड़ कर रखा
[7:35]हुआ है माशाअल्लाह हुआ है हुआ है जब शरीर का निचला माजा
[7:43]तक यह सारे अल्फाज की अल्फाज की खेल हो रहे हैं लेकिन
[7:45]जब वह क्या बाबा जान हो अजय देवगन भी थोड़ी देर के
[7:54]लिए एहसास करेगा कि बाबा जान लव से बाबा जान कह रहा
[7:55]है वह इस तरफ करें पापा जान को आने तो आज मैं
[7:58]दिमाग दुरुस्त करूंगा इनके नहीं कि यह लव जो खुद ब खुद
[8:07]इसको इनकी सारी पैदा कर रहा है उसकी तबीयत में है को
[8:11]लंबे बाबा जान कि जिस भी बाखली बाबा भी मुनासिब नहीं है
[8:16]बाबा के शादी जान का होना जरूरी आ रहा है है ताकि
[8:22]जिस पर यह लव से अल्फ़ाज़ उसकी जबान पर आएंगे तो अल्लाह
[8:27]महालय यह इसके दिल में इश्क इसके दिल में मेरी बात समझ
[8:33]आ रही है बड़ों की मैं बड़ों से पूछ रहा हूं जनाब
[8:37]यानी अ कि बच्चे तो सारे समझ रहे हैं माशाल्लाह से बच्चों
[8:39]को सारण निगम समझता है क्योंकि बच्चे जो है [संगीत] अल्लाहूम्मा सल्ले
[8:46]अला मुहम्मद वाले मोहम्मद सल्ले आधारित मोहम्मद वाले हैं है कि बच्चे
[8:54]ही वसीला इस वर्ष यह सब तमाम जितने भी दुरुस्त हैं जितने
[8:58]भी नष्ट होती है यहां पर हफ्तावार जितनी भी नशे से है
[9:00]इसमें यादव बच्चे हैं ल यह बच्चे व शीला बन गए इस
[9:07]वक्त बड़ों के लिए अ है ना आगे बढ़े वसीला बने बच्चों
[9:13]के लिए अभी सारे बच्चे जो है यह वसीला बन रहे हैं
[9:14]बड़ों के लिए तो मुमकिन है कि बच्चे जो हैं निशाने पर
[9:19]हो या बच्चे मुखातिब होंगे लेकिन निशाना आप लोग बन जाएं बड़ों
[9:24]की तरफ बात चली जाए तो से ज्यादा जो दिन अल्फास का
[9:30]इंतखाब किया जा रहा है बात और यह मुकद्दस रिश्ते दादा कि
[9:38]अगर दादा जान नानी नानी जान लव यू जान को का इस्तेमाल
[9:42]कर लिया जाए इसमें तो आगे किमाम में लात और अच्छे हो
[9:47]जाते हैं चचा जान हैं अब हमने अब हमें दिल्ली के जनाबे
[9:56]आली दिल्ली की को दबाना है उसमें हमें नहीं मालूम कि दिल्ली
[9:59]की डिमांड की थी यह किसने व्यक्त की थी मीणा क्योंकि कभी
[10:04]देखा नहीं कि हमें नहीं मालूम कि दिल्ली का क्या अदर है
[10:06]क्या है शर्म है हमें नहीं मालूम है इस तरह का दही
[10:09]यहां पर हमने अपने बच्चों को चाचा के पास चले जाओ कि
[10:14]जब यह लंबे चाचा हमने दूसरों के लिए इस्तेमाल किया अपने मेहमानों
[10:19]के लिए या ऊंचा हैं इनको जाकर सलाम करो नाराज हो गए
[10:21]यह क्या आपने बोला चाचा चाचा चाचा जान कि चचा जान सिखाइए
[10:30]ने आप हमने जॉब यह चाचा जान है बाकी जितने ऊंचा है
[10:35]कि बाकी जितने आएंगे सारे चाचा हैड यह जब भी आएंगे उनको
[10:41]पहचान लो अच्छी तरह की शक्ल को अब देखिए अब पता है
[10:47]बच्चन फैमिली दरवाजे पर जाने के बाद चाचा है कि चाचा जाना
[10:50]है यह सब देख रही अल्फाज शहद इंसान को कहां से कहां
[10:56]तक ले जाते हैं उनकी मोहब्बतें में कितना जनाबे अली सारी मोहब्बत
[11:01]तो में और इजाफा हो जाता है चर्च ध्यान दो में लगे
[11:07]चीज नगर चला जाता है उसको आगे सेलम से और मस्जिद तो
[11:11]उसमें ताकत डाल दी जाती है और अल्फ़ाज़ में तो आगे का
[11:16]निशान और मजबूत हो जाता है यह मुकद्दस रिश्ते जो है यह
[11:19]सारे मुकद्दस रिश्ते हैं चाचा का उधर इस त्यौहार का मुख्य यह
[11:28]रिश्ता है नाना-नानी मामू जान मुझसे कितना प्यार है ए लव से
[11:33]मामू अ खाली मामू बोल लिए और एक दवा है नहीं मामू
[11:37]जान आए हैं लेकिन दोनों में बड़ा फर्क आ रहा है कि
[11:41]ऐसे शरीके हयात के लिए शहर के लिए और भाई के लिए
[11:50]बड़े भाई के लिए मैं अपनी औलाद के लिए है अबे क्या
[11:56]हदीसे किसा फाल कि हदीसे किसा मैं समझता हूं कि यदि से
[11:59]किसी की जान एक है हमने और आपने कभी तवज्जो ही नहीं
[12:03]की है इनके अल्फास पर यदि से किसानों में कितना अखलाक सिखाया
[12:10]गया है हल्दी से कि जब स्त्री अंदर से खोखला है अगर
[12:12]कोई सा मुझे यहां भी इस धरती से हिसाब-किताब अगर उठा कर
[12:17]दें मुझे तो दो तीन अल्फाज में उसमें से आपको निकाल कर
[12:20]दूं कि आपको अंदाजा हो जाएगा जाना है हदीसे किसा क्या-क्या चीज
[12:26]क्या-क्या अल्फाज़ उसके अंदर इस्तेमाल किए गए हैं या अदब और एहतराम
[12:29]की मंजिल वहां पर बयान की गई है कि यह किस तरीके
[12:35]से बचत यह पूरा एक अख़लाक़ी पहलू चल रहा है इसके अंदर
[12:38]लेकिन हमने कभी और अपने हमने और आपने कभी इसमें तलाश इसे
[12:44]9 यह से नहीं किया हमने हदीसे किसा को जब भी इंतखाब
[12:48]किया अपनी मुसीबत के लिए किया कि हम पर कोई मुसीबत बढ़
[12:53]गई यह हमें हदीसे किसा पढ़नी चाहिए हमारा कोई काम नहीं हो
[12:55]पा रहा है हमें हदीसे किसा पढ़ लेनी चाहिए हमारा कोई खुशी
[12:59]का मौका है पर हमें हदीसे किसा पढ़ लेनी चाहिए पहाड़ तोड़
[13:04]रहे हैं लेकिन उसके महारानी की जाने मुतवज्जा मजा नहीं हुए हैं
[13:07]अगर जरा सा भी अतिशयोक्ति महारानी की जानी मुतवज्जा हो जाते हैं
[13:14]और आप यकीन मानिए कहीं से कहीं निजाम बहुत जाता अगला का
[13:17]दायरा होता हमारा बहुत ज्यादा बुलंद हो जाता बहुत ज्यादा हम आगे
[13:23]तक पर बढ़ते चले जाते हैं उसके अंदर अ कि यदि शीघ्र
[13:27]पहल आदर्श किया है कि जन्म दरवाजे पर दस्तक हुई है अस्सलाम
[13:32]लेकिन का हो गया है और इस हमले के बाद बात जनाबे
[13:33]अली जितना भी निशान आपका चलता रहता है उस अलार्म लेकर चले
[13:38]जाइए देखे जाने कितने प्यारे अल्फाज़ इसके अंदर चल रहे होते हैं
[13:40]यह सारी हदीस को नकल किया गया कहते हैं कि आने वाला
[13:45]आया और उसने के सलाम किया आया मुकद्दस रिश्ते को सलाम है
[13:49]या नहीं है तो बच्चों आज अपने घर जाना है तो घर
[13:56]जाते हैं यह नहीं कहना है कि यह खाने में पका है
[13:57]तो क्या तुम जैसे जाओगे खाने का वक्त हो गया कि न
[14:01]और आज कि जब घर पहुंचोगे तो रोजाना की निस्बत तो में
[14:05]देर हो जाएगी आज घर पहुंचने में दोगे तुम जोर से आए
[14:09]और के बाद यकीनन घरों में खाना होता है घर में जाते
[14:10]ही सहेली पता चला आपने चप्पल एक तरह होता है यहां पर
[14:15]बहुत भूख लगी है खाना खाना क्या पका है क्या पक्का खाने
[14:20]नहीं मैं आज घर में दाखिल होते ही सबसे पहला जो काम
[14:22]करना है वह सलाम करना है को सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह है कि
[14:31]अ जाकर मां को लिपट जाना है लिपटना है आज मां को
[14:33]निपटने का दिन है कि आज बाबा को निपटने का देने लिपट
[14:41]जाओ जाकर बहन को जा कर लिपट जाओ भाई यह भाई को
[14:42]जा कर लिपट जाओ घर में दादी मौजूद है दादा मौजूद लिपट
[14:47]जाओ कुछ देर के लिए मत छोड़ो इनको को को सलाम करने
[14:52]के बाद इनके पास बहुत बैठ जाओ कोई बात नहीं खाना है
[14:57]मनी की कोई तस्कर ही नहीं है क्या पका है कि आज
[15:00]यहां से जाओगे तो एक घर वाले पूछेंगे क्या हुआ भाई कहां
[15:04]से आ रहे हो खैर तो है आज बड़ी मोहब्बत है बड़े
[15:07]बड़ों से भी यही गुजारिश है कि जब घर जाएं तो शरीक-ए-हयात
[15:13]को जाकर जरा गर्मजोशी से सलाम करें हैं फोन करके तो देखिए
[15:20]होता क्या है ना शर्माएं है कि यह मुकद्दर से रिश्ते हैं
[15:28]जब बीवी मुकद्दस रिश्ता का अरे भाई इससे बढ़कर मुकद्दस रिश्ता रिकॉर्ड
[15:33]होगा कि जिसने जमाने की हराम कारी से बचा लिया है अ
[15:37]यह ना होती यह योजना होती इंसान हराम में मुब्तिला होता है
[15:43]ना होता आज जिनके पास नहीं यह पूछ और वह किन हालात
[15:46]से गुजर रहे हैं जिन्हें बदनसीब है वह वापस दहन जो अच्छे
[15:51]से आला से आला की तलाश में फिर रहे हैं आल्हा आल्हा
[15:56]आएगा तो रिश्ता करेंगे वसल्लम जबकि छोटे विमान त्यौहार महिमामय जाफ़रे सादिक़
[16:03]अलैहिस्सलाम कि कल या अल्लाह कि वह जेल पर आ जाऊंगा रिमाइंड
[16:13]वाला तो यह शांत वर्मा रहेगी बेहतरीन बापू है जो जिसके घर
[16:17]में बेटी का पहला रिश्ता आए पहले रिश्ते की दुनियां तक वहां
[16:23]पर इस गाड़ियों को की मां पर यह नहीं है कि यह
[16:27]कितना कमाता है अखबार पर इस गाड़ी को देखा गया फाइल आपने
[16:30]देखा है कि जितने भी पढ़े लिखे खानदानों में शादियां की गई
[16:34]अभी वह तलाक लेकर घर बैठे हैं बैठे हैं बैठे हैं यह
[16:39]लड़की भी तलाक लेकर बैठ गई यह लड़के ने भी तलाक देने
[16:44]को ही आप यह जाना का नहीं भाई बहुत ज्यादा हाई फाई
[16:45]थे इनका दिमाग इतना ज्यादा था कि हमारे साथ हमारा इनके साथ
[16:50]गुजारा नहीं उनका हमारे साथ गुजारा नहीं लेकिन यही अगर मंजिल आतंकवाद
[16:53]पर इस गाड़ी में ले ली जाती हैं दोनों खानदान एक दूसरे
[16:59]के लिए पर इस गाड़ी का 22 बन जाएं यह मुकद्दस रिश्ते
[17:06]हैं लेकिन जिस उधर रिश्ते की बुनियाद दुनियां हो दुनियादारी ओं मुकद्दस
[17:11]रिश्ते और दुनियादारी तो फिर वह उधर इसने मुकद्दस नहीं रहते आज
[17:20]हम उनको मुकद्दस समझदार है लेकिन उदास नहीं रहते हैं मेरे पहली
[17:26]बुनियां जो और यह जनाबे अली वालदैन के लिए यही आ रही
[17:29]है जितना जल्द हो सके [संगीत] यह अपने चारदीवारी में चले जाएं
[17:36]जितना जल्द हो सके ही अपने चारदीवारी में चले जाएं बाकी यह
[17:42]दोनों तरफ से दोनों खानों की जानिब से शहर की तलकीन है
[17:46]में ना मां बेटे की जिंदगी में मुदाख़िलत करें ना मां बेटी
[17:52]की जिंदगी में मुदाख़िलत करें तो कि अगर यह दोनों घरों के
[17:59]बाल पहले एक दूसरे के औलादों के मामलात में मुदाख़िलत करते हैं
[18:01]ऐसे घर बर्बाद हो जाया करते हैं हो रहे नए मेयर और
[18:06]आप यह जितना सारा निशान और सारा हो रहा है मियां बीवी
[18:10]अगर आपस में कुछ और रहा है उनको खुश रहने दीजिए वह
[18:14]जैसे भी गुजारा कर रहे हैं अगर शहर घर के कामों में
[18:16]हाथ बटा यह मुकद्दस रिश्ता है अगर चोर घर के कामों में
[18:23]हाथ बंटा रहा है तो इसको यह कहने की जरूरत नहीं है
[18:27]जोरू का गुलाम है कि यह जिस लफ्ज़ का आपने तक आप
[18:33]किया है जोरू का गुलाम या अपने तथा किया या नहीं किया
[18:38]आपने तथा किया था कि यह तो साहब बीवी के गुलाम होकर
[18:43]रह गए साथ मैं कल किया था बच्चों को मिलने के लिए
[18:45]देखा वह सब कपड़े फैला रहे थे अलगनी पर था यह मर्दानगी
[18:50]है जी हां यही मर्दानगी है यकीन मानिए है मालिक घर के
[18:56]कामों में जनाब सैयद आख्या हाथ बटाया करते हैं कितनी दफा यहां
[19:02]पर हमें आपके सामने बनकर चुका हूं कि मलाइका इन जब रसूले
[19:07]इस्लाम गए हैं घर में जनाब जरा को मिलने के लिए तो
[19:08]अमीरुल मोमिनीन उन्होंने दाल बनते हुए देखा है दाल में से चावल
[19:16]में से कम कर निकालने करके अलग रख रहे हैं तो है
[19:20]तो रसूलल्लाह को यह चाहिए वरना यह अगर जनावे अमीरुल मोमिनीन के
[19:26]वाले होते हैं और यह घर में जाकर कहते हैं कि आमिर
[19:27]मौली तुम यह क्या काम है तुम्हारा काम नहीं है अली जैसा
[19:33]हाथ में शिल्पकार हो उस हाथ में दाल बिना कुछ दुर्लभ या
[19:39]कार्यालय जनाब जल प्रकार वाले हाथों में दाल चावल को बिना जार
[19:45]कभी सोचा इस तरीके से हमने नहीं सोचा है लिया था वह
[19:51]उधर सृष्टा मुकद्दस नहीं रहा है हम तवज्जो नहीं दे सकते हैं
[19:56]मुकद्दस रिश्ते की जाने यह सारा निशान कहां से चल रहा था
[20:02]यह जनाबे आली जनाब जरा के दरवाजे पर दस्तक को योजना पर
[20:06]आपने दरवाजे पर पहुंची हो जाने के बाद जब देखा कि कौन
[20:08]आया मेरे दरवाजे पर ताकि मेरे बाबा मेरे दरवाजे पर मौजूद थे
[20:13]बाबा जान अपने दरवाजे पर आ रहे हैं बेटी गई तो दरवाजा
[20:18]अस्सलाम अलैकुम हो रहा है हुआ था कि उन्होंने सलाम किया है
[20:25]यह सलाम कर रहे जनाबे अली का यह कहां से जनाबे अली
[20:29]आते हैं काला समय तो बातें मत अन्ना काला काला या भी
[20:31]रसूल लाइफ ई बाजल यह काला अस्सलामो अलाइका या फतेह मतों बाप
[20:39]ने बेटी को सलाम किया है है और आप चाचा रहे हैं
[20:46]कि बेटी मुझे सलाम करें जब मैं घर किया था बेटी को
[20:50]मिलने के लिए आप बताओ दामाद हमारा यह आराम कहां से करेंगे
[20:52]बेटी तक न तो सलाम नहीं किया है कि हम गए थे
[20:58]बेटी को मिलने के लिए बेचैन हमको सलाम ने आपको बेटी को
[21:03]सलाम करना है माफ कीजिएगा है मैं आपके लिए मुकद्दस रिश्ता बाप
[21:09]बंद कर जाना है या बेटी का मुकद्दस रिश्ता है आपके लिए
[21:12]आप बेटी के सामने खड़े होंगे या बेटी आपके इस राह में
[21:17]खड़ी होगी आपने इस क्योंकि मैंने और आपने निजाम को उल्टा ले
[21:21]लिया है हमारे नहीं बेटी हमारे अब्बा गए यह खड़े हो रहे
[21:26]हैं और रसूल खड़े होकर बता रहे हैं यह बेटी का क्या
[21:28]मकान है क्या औरत भाग्य मुकद्दस रिश्ता है आइए अब आप का
[21:33]मुकद्दर इस तरह की बेटी का मुकद्दस रिश्ता है अगर दोनों मुकद्दस
[21:36]रिश्ते के नहीं दोनों में वजन किसका जाता है दोनों को तराजू
[21:42]में रखे रहे वजन किस कदर बाप का मकान ज्यादा के बेटी
[21:46]का जाता है कि आप बेटी का दादा है हुआ था कि
[21:50]इतना ज्यादा का बेटी का इतना ज्यादा के बेटी आ गई है
[21:53]तो बाप यात्रा में खड़े हो गए हैं इस अलावा पड़े मोहम्मद
[21:55]वाले मुहम्मद [संगीत] कि वह जेल पर अजमेर हैं अब बताइए क्या
[22:08]मैंने और आपने हदीसे किसा क्या यह वाली बात सीखी कि हदीसे
[22:12]किसा पढ़ तो रहे हैं लेकिन अमल अमल कहां से करें मुतवज्जेह
[22:17]ही नहीं है कि रसूल अल्लाह नजर न नियुक्त जनाब जरा थी
[22:20]हैं अब रसूलल्लाह जनाब जरा को इतनी अहमियत दे रहे हैं इसलिए
[22:25]दे रहे हैं ताकि हर बाप अपनी बेटी को अहमियत देते हैं
[22:29]कि हर बाप अपनी बेटी को हम यदि हर बार अपनी बेटी
[22:34]को इज्जत दे है जो रसूल की सीरत है वह हमारी सीरत
[22:40]होनी चाहिए जो रसूल की पैरवी हम करेंगे पैरोकार करें अली का
[22:44]तर्ज़ जिंदगी हां जी आज मैं आपके सपा से सुनना चाहता हूं
[22:50]यह लव जरा सा के अलीगंज चंद्र की मुलाकत की मौत है
[22:57]बहुत स्वागत में कहा था कि सूरज चुम्मा डुबा है जब जुम्मे
[22:59]के दिन खुद बनाते रहो इमाम-ए-जुमा आर्थर बेहतर रहेगा सूरह मुनाफेकून का
[23:04]उर्दू तर्जुमा पढ़कर सुनाए थे और मजे में को सूरह मुनाफेकून का
[23:12]उर्दू में तर्जुमा करके सुनाए के साथ अभी हम यह वाला सूरा
[23:14]पढ़ने जा रहे हैं जरा यह सुन तो लो तस्करा क्या और
[23:18]है इस मुए दी है मैं जब मैं मुनाफिकून सुनेंगे तो उर्दू
[23:21]तर्जुमा उसका सुनेंगे मुमकिन है कि मुझ जैसा आदमी भी मैं भी
[23:28]गरीबों में मुफ्त देकर अपना मूह छुपा कर बैठ जाऊंगा आ है
[23:31]कि जो खोज में पढ़ने के लिए जा रहा हूं जो मे
[23:34]के दहन इसमें से अक्सर चीज है खुद मेरे ऊपर मैं इन
[23:39]पर मुकम्मल उतरता हूं इस मुलाकात में से कोई एक एक ऐसी
[23:45]चीज नहीं है जो मेरे अंदर कम हो हैं जो अपनी इज़्ज़त
[23:50]में मुनाफिकात रखता हूं जो अपने ऊपर अपने नववर्ष के साथ मुनाफिकात
[23:54]रखता हूं वह आगे दूसरों के साथ या निगम लेकर चलेगा का
[23:58]यहां पर यह जरूरी था कि यदि से किसानों झपट लिया जाए
[24:02]तो आप जरा सा देख लेते हैं या रसूलल्लाह घर में दहशत
[24:07]फैलाने के बाद जनाब जरा पर इन्होंने सलाम किया अस्सलाम वालेकुम यह
[24:11]बातें तो बहुत तो अलैही वसल्लम मुकाबला इन्हीं अदाओं की वजह से
[24:16]यहां पर सलाम जब आप आपस में सलाम जवाब हो रहा है
[24:17]यहां मैं और आप क्या कर रहे हैं उधर इस टो की
[24:20]तरफ और बेटी तुम खैरियत से हो चला हूं अलार्म कुछ नहीं
[24:24]घर में जाकर कोई अब सलाम नहीं कर रहा है मेरी और
[24:28]आपकी आदत या और बाय-बाय ऐसे इशारा और सब ठीक है ना
[24:33]मामला सही चल रहा है आपने ऐसे भी हाथ उठाइए कह बस
[24:39]यह मेरा और हम वो आश्चर्य थी सलाम किया है कि अगर
[24:41]इस तरीके का इशारा करके सलाम कर लिया तो मां की जगह
[24:45]सलाम तीन नहीं है सलामती के लिए इसी लव का इंतखाब किया
[24:48]जाएगा अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व कि यहां पर सलामती हो आप और
[24:58]रहमत हूं आप पर बरकतें होने का वालेकुम अस्सलाम व रहमतुल्लाह आप
[25:02]पर भी सलाम तीनों आप पर भी रहमतें हो जब दोनों तरफ
[25:08]से दुआ का तबादला होगा तो आने वाले औकात में बरकत होंगी
[25:12]और जितनी देर में हमारा यहां पर बैठे रहेंगे वह सारी की
[25:18]सारी रहमतें बरकतें मुझे और आपको मिलते रहेंगे तो पता चला कि
[25:24]मुकद्दस वरिष्ठों के लिए मुकद्दस सल्फास का होना भी जरूरी हो जाता
[25:31]है है उधर एसडीओ को मिलते बस ज्यादा मिलने के लिए जा
[25:34]रहे हैं उनसे मुलाकात करने के लिए जा रहे हैं जो वाष्र्णेय
[25:38]गर्मजोशी होनी चाहिए और मैं और आप इस व क्योंकि इतनी ज्यादा
[25:40]आर्टिफिशल लाइक में जिंदगी बसर कर रहे हैं बनावट ज़िंदगी बसर कर
[25:48]रहे हैं कि अब हम वह आपस में एक दूसरे को मोहब्बत
[25:53]और इजहार-ए-मोहब्बत नहीं कर पा रहे हैं मैं इधर से मोहब्बत नहीं
[25:57]कर पा रहे हैं जिस तरीके से एक बाप अपने बेटे को
[26:02]गले लगाना चाहिए यह बेटा अपने बाप को गर्मजोशी से गले लगा
[26:06]ले और छोड़ना ही ना यह पता चलता है यह सारे मोहब्बत
[26:11]है लहरा यह हल्का सा हाथ मिला के घोल का साइबर गले
[26:13]मिलकर गैरों के साथ गले मिल रहे हैं प्रॉब्लम सबसे यहां पर
[26:19]ऐसे यह निशान है तो पता चला कि जितना बनावट खाना खाओगे
[26:25]ना और सुनाओ एक बर्गर है ना बर्गर यह तो यह कोई
[26:30]अच्छा लगेगा है पिज्जा पिज्जा खाने के बाद आप चाहते हैं कि
[26:39]अंदर से जनाबे आली मोहब्बतों की लहरें उठती हैं जो पिज़्ज़ा खाने
[26:42]के बाद यह बर्गर खाने के बाद जनाबे अली व अंदर का
[26:46]निशान ऐसे नीचे देगा जैसे उन्होंने चाहा है कई अंदर का निदान
[26:49]कब मिलेगा जब वह मां के हाथों से गूंथा हुआ आटा है
[26:56]कि इसके लिए मोहब्बत में इसके अंदर जो गूंदना जा रहा है
[27:02]यह आटा नहीं होता जा रहा है यह मोहब्बतों को गूंदना जा
[27:06]रहा है समझे बात को कि जब मोहब्बतों को ढूंढा जा रहा
[27:12]था वह भी मोहब्बतें संदेश देंगे जब मां ने इस मुकद्दस रिश्ते
[27:15]को कायम रखने के लिए बाबू होकर आ कि सिगरेट खुदा अपनी
[27:22]समय पर जारी करते हुए हमदुलिल्ला कहते हुए सुभान अल्लाह कहते हैं
[27:26]वह सुबह नवा ही बड़ा हमदुलिल्ला ही व ला इलाहा इल्लल्लाहु अकबर
[27:31]यह तस्वीर जारी रहा है मेरी मां मेरी बेटी मैं आपसे मुखातिब
[27:36]बोलना ख़ुदारा आपकी जिम्मेदारी हम से ज्यादा है आपने एक जो गोंद
[27:44]कर हमें खिला दिया में क्या मालूम कि यह बाबूजी था कि
[27:50]बेबी था अ कि अगर बाबू है तो इसका असर पूरी औलाद
[27:54]में शरायत कर जाएगा अगर बाजू है यह सैयद कर जाएगा और
[28:00]अगर बावजूद नहीं है गृह बातें करते हुए गूंदना जा रहा है
[28:06]आटा गूंद रही थी लेकिन साथ बात भी हो रही थी बेटी
[28:10]से बात हो रही थी देखो और तुम्हारी चाची आई थी देखो
[28:14]आज क्या करके चली गई रे मार साढ़े चार अ कि यह
[28:18]तुम्हारी खाती थी आज घर में देखो यह पहुंचे उठाकर ले गई
[28:22]पुष्टि शक तो नहीं है देव नाटक उन रहा है कि ऐसा
[28:27]है या नहीं है प्रैक्टिकल लाइफ में जाकर देखिए है कि यह
[28:31]सारे कामों को अंजाम दिया जा रहा हांडी में अगर चलाया जा
[28:34]रहा है हां यह मैं हूं मसाज जो थी ना बस को
[28:39]जला दिया करते थी खाना और देखो आज हम भी तो पका
[28:43]रहे हैं इतना घी भर दिया करती थी हां जी बनाए साधना
[28:49]बड़ी बहू का नाम में भी बना है साधना पुरानी मिसाल एक
[28:55]इंजन आ गया हमने बड़ों से सुना था कि बनाए साधना क्या
[28:58]मतलब कि का सारा कमाल घी का है सारे गाय के घी
[29:03]के हैं बड़ी बहू का ऐसे ही नाम हो रहा है डालडा
[29:07]का कमाल है देसी घी का कमाल है बहू का कोई भी
[29:16]इस मुए दमाल नहीं है तो पता चला कि यह कितना है
[29:18]यह सिर्फ इतना था यह जिसने घर की चारदीवारी को रहमतों से
[29:25]निकाल कर उसमे तारीख नहीं करेंगे बहू ने इतना अच्छा बनाया इसकी
[29:29]मोहब्बत हैं इसका फॉलो से मेरी बेटी सलामत रहना वफा सुभान अल्लाह
[29:35]या अल्लाह ने तुम्हारे हाथों में कितनी मोहब्बत है तुमने खाना बेटी
[29:39]जो कि खिलाती हो न जाए कहीं अलग होता है बोलिए दो
[29:43]लफ्ज़ बोले थे कि अगर दो लफ्ज़ आपने अपनी बहू के लिए
[29:49]कह दिए अ बहु को बहु नहीं कह रहे हैं बेटी कहकर
[29:51]बुलाते करें मेरी बेटी कि अ जब बेटी आ गई है घर
[29:57]के अंदर उसे बहु बना लिया है बेटी को बहू की तरह
[30:01]से करें ना मामले को बस जाता मुताबिक रचना किया ग्रुप आयोग
[30:04]ने अपना काम करो चली जाओ हमारे घर के मामले में मुलाकात
[30:08]ना करो फोन हमारी चारदीवारी में हमारी बेटी यह हमारी बेटी के
[30:11]दामाद चलेंगे क्या हाल है जनाब वही है गर्दन हिला आने वाला
[30:20]है मैं अभी तो गर्दन में सरिया गया है घृणा अगले चैन
[30:25]न निकले चैन अभी क्या करें जब हमने तो यह काम नहीं
[30:33]बेटी आएगी तो फैसला होगा अब आप बहुत बड़े टीचर बेटी नहीं
[30:38]रही है बेटी आप उस घर की बेटी है एक गई है
[30:42]और एक हमारे घर में आ गई है जो हमारे घर में
[30:44]आई है उसी के मकाम पर आई है कि यह उसी जाने
[30:50]वाली के मुकाम पर आई अब यह न कहें कि वह आएगी
[30:54]तो निशान चलेगा आप यह कहना यह आ गई यह जो यह
[30:59]कहेगी वह होगा बेटी अपने घर की बातें यहां करना किया करो
[31:02]बेटी तुम्हारा घर व है तो मैं वह कैसे लेकर चलना है
[31:07]कैसे उन्हें संभालना है यह तुम्हारी जिम्मेदारी है हमारे घर के मामलात
[31:12]में तुम्हारा मुलाकात नहीं होगी अगर ऐसे एक हिस्सा कुचल गया है
[31:14]क्या बेहतरीन जनावे यह रसूल अल्लाह की जिंदगी है और जनाब जरा
[31:21]की शादी हो चुकी है वह शादीशुदा है लेंगे सीधी तरीन माल
[31:26]बेटी के घर रखवाया है ज्यादा यानि कहां थी मीणा आप भाई
[31:33]रसूल ने अपने घर होनी चाहिए कि हां वह वो बेटी मेरी
[31:37]जो चादर यह मानी आपके पास जरा लेकर तो आइए मुझे कुछ
[31:42]ठंड का एहसास राह हो रहा है वह जनाबे अली गई ज्यादा
[31:44]यानि लेकर आएं मिलाने के बाद रसूले इस्लाम को पहनाई पे खूब
[31:49]जनाब सैयद यह सारी रिवाइज को नकल पर मारेंगे कहते हैं जैसे
[31:54]मैंने अपने बाबा जान को रसूले इस्लाम को चाैधरी हमारी पहनाई है
[31:59]उनका चेहरा चौदहवीं के चांद की तरह से दशा हो गया था
[32:08]कि वह जेल पर आ जाऊंगा आज महिंद्र अलफा झाल किस तरीके
[32:14]से तैयार किया जा रहा है तथा किया जा रहा है चौदहवीं
[32:21]का चांद अपने बाबा के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं यह मेरे
[32:23]बाबा के आने से अब मेरे बाबा के चेहरे पर कितनी है
[32:27]वह बताना चाह रही हैं वह बताना यह आ रही हैं आने
[32:30]वाले उनको बताना चाहेंगे कि जब तुम्हारा बाप तुम्हारे घर के अंदर
[32:36]आए तुम्हारा चेहरा अपने बाप को जब देखो इसी तरह इसे निकाल
[32:41]से देखो है कि तुम्हारे बाप का चेहरा घटिया है तुम्हारे बाप
[32:45]का चेहरा रोशन है यह लाल हो अब कहां से आ गए
[32:52]इस वक्त अब बजे वह घर में आते हैं वह यह अब
[32:59]कोई मना किया अब इस बनाया करें तो कि यह नहीं है
[33:01]मेरा प्यार का सारा निगम को इसी बेगम बन गया है कि
[33:06]अगर इस तरीके का बन गया है मत कीजिएगा आगे चलकर मेरे
[33:09]और आपके लिए परेशानी आ जाएगी के लिए कुछ ढेर गुर्जरी कुछ
[33:13]देर गुजरी दरवाजे पर दोबारा से दख़ील बापू जैसे मैंने जाकर दरवाजा
[33:19]खोला है जनाब सैयद फरमाती है मेरी निगाह बच्चे पर पड़ी है
[33:22]बच्चे ने बाहर से क्योंकि बाहर से बच्चा आ रहा है ना
[33:27]हंस है मिस्टर बार है इन्होंने आते ही अपने मादरे गिरामी को
[33:29]देखा और देखते ही इन्हों ने मां को सलाम किया है माधुरी
[33:35]गिरामी आप पर मेरा सलाम और यहां से इन्होंने में मां ने
[33:41]उनको का है मेरे नूर-ए-नजर ऐ मेरे दिल के टुकड़े यह मां
[33:45]के लिए क्या हो रहा है कि जब बच्चा बाहर से आ
[33:49]रहा है तो तुम्हें गर्म जोशी से आ गए कहां थे इतनी
[33:52]देर तक को रिमूव मस्जिद में बैठा हुआ ताल में दीवारों के
[33:57]क्लास हो रही थी ना माप अरे उनकी तो क्लास हर हफ्ते
[34:01]ही होते तो क्या तुम्हारा अपने वही रहोगे क्या हो गया है
[34:06]तुमको कामचोर पता भी तक घर में इतना काम करना है यह
[34:10]बाहर से गए थे यहां से दर्शन कर गए थे अम्मा को
[34:16]जाकर सलाम करूंगा वह झूठ है पढ़ लें अ कि मामला क्या
[34:19]हुआ क्या कैसे मामला उलट किया यहां तो तबीयत हो रही है
[34:25]वहां तबीयत वह तबीयत नहीं हो रही है है या इनको तो
[34:29]लाकर बिठाने का इस्तमाल में एक पता लगा कि उनकी मांग को
[34:32]भी बुला लेते हो गया है बैठी हुई है कि अगर यह
[34:42]तमाम यो यो हनी जैसा बच्चों की पैरंट टीचर मीटिंग होती है
[34:46]और उसमें जनावे उनके वाहन को बुला लिया जाता है यह जितने
[34:50]बच्चे यहां पर मौजूद हैं अगर मैं उनसे पूछ लूंगा भी किस-किस
[34:52]की अफवाहें जरा सा हाथ उठा लें ब्लेंड कर लें किस-किस की
[34:57]मां या बहन यहां पर मौजूद हैं अपनी अपनी मौजूदगी का इत्र
[35:00]ऑफ करें कलाम तो पहुंचे दोनों तरफ से मोहब्बत चाहिए दोनों तरफ
[35:09]का निजाम चलता है मोहब्बत और पर निगम चलता है अ यह
[35:11]आए और आने के बाद घर में आए इन्होंने माधुरी गिरामी को
[35:14]सलाम किया और सलाम करने के बाद क्या कह रहे थे इमाम
[35:18]हसन ने पुष्पा ऐसे कांग्रेस जैसे आप घर में जाती सूख रहे
[35:24]होंगे ना क्या पक्का है आलू को डुबाना है दो चावल बने
[35:27]हैं क्या बना है खुशबु किस चीज़ की आ रही है हम
[35:31]तो खानों के हुं तलाश कर रहे हैं ना वह कैसे वादन
[35:35]की खुशबू को तलाश करो तो मैं तुम्हारे लिए मौजूद यह मेरी
[35:41]मां के खुशबू मुझे कहीं से नहीं मिल सकती हैं मैं अभी
[35:44]जिनकी माय जिंदा है खुदा की कसम खुश नसीब है वह अभी
[35:50]वक्त है मां की खुशबू को लिखो क्यों नहीं ले सकी मां
[35:57]के उनको तो याद रखना कि एक मां ऐसी है कि जिसके
[36:02]पास बेटे ने जाने से मना कर दिया खड़ा हुआ था दूर
[36:03]खड़ा हुआ था बाप कहना था कि बेटा तुम्हारी मां कौन दफन
[36:08]करने के लिए लेकर जा रहे हैं आजाओ आजाओ वह करीब आ
[36:12]जाओ जान अपनी मां को खुदा हाफिज कर लो उम्मे कुलसुम अपनी
[36:17]मां से आकर आखिरी दबा मिल लो हंसाने मुस्तफा आखरी मर्तबा कर
[36:20]मिल लीजिए लेकिन हुसैन दूर खड़े हुए थे नहीं मैं नहीं आऊंगा
[36:25]मां हमेशा मुझे बुला लिया करती थी मां है न मां मुझे
[36:30]आवाज दीजिए मां बुलाएं तो मैं लूंगा आपके पास अल्लाह हू अकबर
[36:35]बंदे कफन टूट गए खुल गए बंदे कफन हाथों को फैला दिया
[36:41]है ऐ मेरे लख्ते जिगर हुसैन अहमद ने मादर में कहने वाले
[36:48]के मां ने प्यासा हूं मां बेटियां सांवल मां मुझे प्यास लग
[36:52]रही है अल्लाह तआला आता है सदा बुलंद करने वाले हुसैन मेरे
[36:59]गले से आकर लग जा हुसैन मां के गले से आकर लग
[37:06]गए हैं नजाने वक्त कैसा होगा जब अली ने हुसैन को मां
[37:10]से छुपा कि अल्लाह अल्लाह इस तरीके से यकीनन हुसैन को तसल्ली
[37:16]दी जा रही होगी कि हुसैन को फांसी दी जा रही होगी
[37:21]बेटा अपनी मां गिरामी से अलग हो जाओ अब बदलाव का वक्त
[37:27]करीब आ गया है लेकिन अल्लाह अल्लाह एक बेटी है जो जमीन
[37:30]पर मौजूद है यहां तसल्ली नहीं कर रहा है बल्कि मुंह पर
[37:37]तमाचे मार-मार कर दो कर दो थे इना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि
[37:56]राजिऊन थे रीजन बेवजह ईंधन व तस्लीमा ने अमृत फल वास्तव मोहम्मद
[38:08]अली मोहम्मद शाहिद बलवा का वास्ता राधेश्याम चाट मसाला अली जरदारी को
[38:15]अपने बारे में आ में पलने वाले आज की सारी को तू
[38:21]कि हमारी शपथ का जरिया करार पर मां हमारे बच्चों और बड़ों
[38:23]की तबीयत का सहारा करार वर्मा पलवल इतनी शुरू की तमाम बातों
[38:29]पर खुद मुझे अपनी जिंदगी में तमाम अल्फास पर अमल करने की
[38:32]तौफीक हिदायत वर्मा बोल वाले यहां तक मुहम्मद व आले मोहम्मद का
[38:38]हम सब की हालतों को बिल्कुल हमारे बच्चों के मुस्तकबिल को बेहतरीन
[38:42]मुस्तक़बिल में तब्दील वर्मा इनके कस्टमरों को बेहतरीन किस्मत में तब्दील वर्मा
[38:47]पर लाइन केवल दे इनके रिश्ते हलाल में मदद फार्मा इन बच्चों
[38:54]और बच्चियों को तमाशा तो समाधियों अराजी से माप उस फरमान जमाने
[38:57]की हराम कार्यों से महफ़ूज़ फ़रमा मौला इमामुज्जमान अलैहिस्सलाम का जरूर वर्मा
[39:03]और हम कितना सिराने खास में शामिल प्रमाण इन जवानों ने इन
[39:10]तमाम पुरुष का इस्तमाल किया है कि तौफीक आते ने के लिए
[39:12]और की बरकत तो में इजाफे के लिए एक मर्तबा बुलंदशर झाला
[39:18]बात झाल
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