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Haq-e-Bandagi Kesy Ada ho?? | H.I. Sajjad Mehedvi
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محاضرات
Record date: 15 Dec 2024 - حق بندی گیسے ادا ہو AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]बिस्मिल्ला रहमान रहीम न सला मुहम्मद रली सदरी र अमरी नी अल
[0:33]हमदुलिल्ला लदी हदा नाहा व मा कुना दिया लला अन दनला ल
[0:44]कद जा रस रना बल सु सलातो सलाम यतो ल इकराम अला
[0:52]सदना हबीब लालना व शफी मुबीन अल कासम मोहम्मद [संगीत] री मासन
[1:10]मन अनला र [संगीत] हीराला हकी फ किताब करीम बिल्ला मनता रजी
[1:28]बिस्मिल्ला रहमान रहीम इ मसल सवात पढ़े मोहम्मद मोहम्मद परने [संगीत] गरा
[1:47]हमारा आज का जो मौजू है वह है हम अपनी जिम्मेदारी को
[1:55]कैसे पूरा कर सकते हैं अपनी जिम्मेदारी को पूरा करना तो इस
[2:02]बारे में पहले तो हमें समझना चाहिए कि लफ्ज जिम्मेदारी है क्या
[2:07]देखि अरबी जबान में अगर हम इसको लेंगे तो हमारे लिए इसको
[2:09]समझना आसान हो जाएगा अरबी जबान में जिम्मेदारी के लिए जो ल
[2:14]इस्तेमाल होता है वह है मसूल मसूल मसूल का मतलब होता है
[2:20]जिससे सवाल किया जाए एक होता है साइल साइल यानी सवाल करने
[2:25]वाला मसूल जिससे सवाल किया जाए जैसे हम कहते उर्दू में आबिद
[2:28]यानी इबादत करने वाला माबूद जिसकी इबादत की जाए साइल सवाल करने
[2:35]वाला मसूल जिसे सवाल किया जाए तो अरबी जबान में जिसको हम
[2:38]उर्दू में जिम्मेदार कहते हैं अरबी में उसको मसूल कहते हैं जिम्मेदारी
[2:46]मसलिया क्या मतलब हुआ जब मतलब यह जिम्मेदार यानी मसूल यानी उससे
[2:49]सवाल किया जाएगा जो इंसान जिम्मेदार होता है ना उससे सवाल होता
[2:56]है आसान अल्फाज में क्या हुआ जिम्मेदार वह है जिसे सवाल होगा
[2:59]मसल फर्ज कर लीजिए यहां पर किसी ने किसी काम के लिए
[3:05]जिम्मेदारी संभाली अब अगर वह काम है होगा या नहीं होगा दोनों
[3:08]सरतो में सवाल उससे होगा कि भाई फला काम की जिम्मेदारी आपने
[3:14]ली थी यह काम हुआ या नहीं हुआ जिम्मेदार यानी जो मसूल
[3:17]होता है जिससे सवाल होता है जिससे सवाल किया जाएगा किसी भी
[3:23]काम के बारे में जैसे मैंने आपकी खिदमत में अर्ज किया के
[3:25]कुरान मजीद की आयत आपकी पेश की इनको रोको इनको रोको कयामत
[3:31]के दिन कुछ लोग जा रहे होंगे उनको रोको खुदा की तरफ
[3:37]से इरशाद हो रहा है इ इनसे सवाल किया जाएगा इनसे सवाल
[3:39]किया जाएगा अच्छा तो कयामत के दिन सवालात होंगे बिल्कुल होंगे क्या
[3:45]सवाल किया जाएगा एक रिवायत के अंदर यह तो सूर साफा की
[3:50]आयत नंबर 24 है रिवायत में हमें बताया गया कि क्या सवाल
[3:53]किया जाएगा जो अहम चीज है वो क्या है काला रसूलल्लाह हुजूर
[3:59]पाक फरमाते सला वसल्लम कदमा य मल कयामत हता यल अन अनर
[4:08]चार चीजों के बारे में वहां पर कयामत के दिन चार चीज
[4:13]के बारे में सवाल होगा वह क्या है अनही सबसे पहले पूछा
[4:19]जाएगा कि तुम्हारी उम्र उम्र के बारे में सवाल होगा कहां खर्च
[4:22]की किन चीजों में लगाई तुम उम्र एक अल्लाह की तरफ से
[4:28]अमानत दी गई थी तुम जिम्मेदार हो मसूल हो यानी जिंदगी तुम्हें
[4:32]किसी मकसद से दी गई थी बताओ उसका तुमने क्या किया अनमना
[4:38]क फनी की कहां फना की कहां खराब की कहां लगाई खराब
[4:44]क ना क कहां लगाई अच्छे काम में लगाई या बुरे काम
[4:50]में लगाई कहते हैं कि इसकी मिसाल यूं दी जाती है के
[4:55]फर्ज कर एक इंसान जो है वो आटा बेच रहा चावल बेच
[5:00]रहा हो बेच रहा है अगर सारा माल उसका आज नहीं बिका
[5:06]बाकी कल बेच देगा वो लेकिन एक चीज होती है बर्फ जो
[5:11]बर्फ बेचने वाला होता है ना अगर आज उसका माल नहीं बिका
[5:17]फिर कल उसके पास कुछ नहीं होगा वो बर्फ जो है वो
[5:22]पानी बनके खत्म हो जाती है फिर उसके पास बचता नहीं कल
[5:24]कुछ बेच सके यानी उसको अगर आज उसका माल नहीं बिका तो
[5:28]उसके हाथ से सब कुछ निकल गया उम्र का मामला भी यही
[5:33]है जिंदगी का मामला भी यही है जिंदगी दी गई है यह
[5:36]जो एक एक लम्हा मेरा इस वक्त खर्च हो रहा है और
[5:38]आइंदा खर्च होगा पीछे खर्च हो चुका अभी हमारे हाथ में आने
[5:43]वाला हम यह नहीं कह सकते कि इतना टाइम हमने अगर बिता
[5:49]दिया खर्च कर दिया चला दिया लगा दिया तो कोई बात नहीं
[5:51]हम आज वाला काम कर कर लेंगे जो आज का दिन निकल
[5:54]गया वह हमारा हाथ से निकल गया तो पहला सवाल किसके बारे
[5:59]में है जिंदगी के बारे में जो तुम उम्र दी गई थी
[6:00]जो तुम्हें वक्त दिया गया था इस दुनिया में कहां खर्च किया
[6:04]उसको दूसरा सवाल न शबाब उसकी जवानी के बारे में पूछा जाएगा
[6:11]अच्छा उम्र तो उम्र तो जवानी भी आ गई ना आपकी उम्र
[6:15]के पूछ जाए जवानी भी आ गई जवानी के बारे में अलग
[6:19]सवाल है जवानी की जो ताकत दी थी जिंदगी तो अपनी जगह
[6:21]पर है लेकिन जवानी में इंसान के पास ताकत होती है तवाना
[6:25]होती है पहाड़ तोड़ के लाने का भी उसके अंदर जजबा होता
[6:30]है उने कहा पहाड़ में से जो है वो नहर निकालो उसको
[6:32]भी तोड़ने खड़ा हो जाएगा जजबा होगा तो इतना उसके अंदर तवाना
[6:36]होती है पोटेंशियल अंदर बहुत होता है ताकत बहुत होती है सवाल
[6:39]किया जाएगा व जो ताकत दी थी तमाना दी थी कहां खर्च
[6:44]की इस इस वक्त हमारा उम्र का बहुत सारा हिस्सा जो है
[6:54]वह इस मोबाइल के अंदर खर्च हो जाता है अा खर्च हो
[7:00]जाता है ये जाया हो जाता है नहीं किसी का जाया किसी
[7:03]का जाया नहीं होता ज्यादातर का जो है वो मोबाइल के अंदर
[7:07]वक्त जाया हो जाता ले कुछ लोग इसका सही इस्ते [संगीत] फादास
[7:20]सही इस्तेमाल हो गया जवानी का भी यही है जवानी दी है
[7:26]जवानी को बिलख गुजरना है कहां इसको तुमने लगाया इस जवानी को
[7:30]किन कामों में लगाया काम में लगाने के लिए बहुत है दीनी
[7:33]काम भी है गैर दनी काम भी है पढ़ाई भी है खेल
[7:37]भी है जिंदगी के दूसरे मामलात भी है सब है लेकिन सही
[7:43]जगह लगाए तो यभ सवाल होगा सवाल होगा क्या मतलब है हम
[7:45]इसके जिम्मेदार है अर्ज किया के जिम्मेदार के लिए अरबी में ल
[7:51]होता है मसूल यहां पर कुरान की क्या आयत है किफ उनको
[7:55]रोको इ मसल इनसे सवाल हो गया ये मसूल है मसूल यानी
[7:58]जिम्मेदार है बस कोई जवान यह नहीं कह सकता कि मैं मैंने
[8:05]यह जिम्मेदारी नहीं ली है कोई ये कह सकता है कि जिम्मेदारी
[8:07]लेते हैं ना मतलब फर्ज कर ले कि अगर कोई कमेटी है
[8:11]मस्जिद की तो उसमें कोई जिम्मेदारी लेता उसको जिम्मेदारी दी जाती है
[8:15]वो लेता है कि ठीक है माइक की जिम्मेदारी मेरी तबक की
[8:17]जिम्मेदारी मेरी मौलाना का इंतजाम करने का जिम्मेदारी मेरी उसे पूछा जाएगा
[8:22]हमने तो कोई जिम्मेदारी ली नहीं है अल्लाह ने हमसे कहा था
[8:26]कि तुम्हें हम जिम्मेदारी दे रहे हैं जवानी दे रहे हैं उम्र
[8:29]दे रहे हैं पूछा था नहीं पूछा था तो हमने तो कोई
[8:34]जिम्मेदारी नहीं ली है अब क्या क्या करें या जिम्मेदार नहीं है
[8:38]हम नहीं जिम्मेदार तो है हमारा हाल वह है जैसे बच्चा होता
[8:45]है ना बच्चा अगर यह कहे एक सवाल है आयतुल मकारम शिराजी
[8:48]ने अपनी किसी किताब में लिखा है कहा कि मुझसे किसी ने
[8:52]सवाल किया कि मुझे अल्लाह ने दुनिया में क्यों भेजा मुझसे तो
[8:55]नहीं पूछा था मुझसे तो नहीं पूछा था वो पूछता तो मना
[9:00]कर देता जबरदस्ती भेज दिया है तो मैं क्या करूं मैं जो
[9:06]दिल चाहे करूंगा तो उन्होने कहा कि मैंने उससे कहा जवाब यह
[9:09]दिया उन्होंने किताब में जो लिखा है कि मैंने उ क जैसे
[9:12]हमें बता रहे थे समझा रहे थे कि जैसे स्कूल होता है
[9:16]ना स्कूल बच्चों को जब स्कूल भेजा जाता है तो उस बच्चे
[9:18]का दिल नहीं चाह रहा है स्कूल भेजने का ना उसने आपसे
[9:22]कहा है भेजो लेकिन आप उसे भेजते हैं क्यों इसलिए कि आपको
[9:24]मालूम है कि बच्चे को स्कूल भेजना उसकी आइंदा जिंदगी के लिए
[9:30]बेहतर है अब वो चाहे कितने ही वालदैन से क मुझे आप
[9:34]क्यों भेज रहे हैं अगर इम्तिहान में अच्छे नंबर ना तो पूछते
[9:38]बेटा क्यों नंबर अच्छे नहीं आए मेहनत कर लेते थोड़ी सी चलो
[9:40]आइंदा अगले साल मेहनत करना आप क्या आप मुझसे क्यों पूछ रहे
[9:43]आपने मुझे जस्ती भेजा मैं तो नहीं चाह रहा था स्कूल भेजना
[9:45]जाना आपने मुझे भेजा तो आप कहेंगे नहीं भेजना हमने आपको भेजा
[9:51]है आपसे पूछेंगे भी नहीं इसलिए कि अभी आप इसकी अहमियत को
[9:55]नहीं समझ रहे कि स्कूल की अहमियत क्या है आपको लगता है
[9:57]कि यहां पर आके मेरे ऊपर जिम्मेदारी लग जाती यह करो वो
[10:01]नहीं करो होमवर्क दिया जाता है तो इसलिए आपको बुरा लगता है
[10:03]लेकिन हमें मालूम है कि आपके लिए यह जो जिम्मेदारी आपको दी
[10:08]जाती है स्कूल में यह जोय अच्छा है आपके लिए लि आप
[10:09]जिम्मेदार है आपसे पूछा नहीं ले आप जिम्मेदार है हम अगर दुनिया
[10:14]में है तो यह हमारी अब जिम्मेदारी बन गई आ गए हैं
[10:19]तोब उम्र मिली है इसका भी सवाल होगा जवानी मिली है इसका
[10:21]भी सवाल होगा चार चीज तीसरी चीज क्या है तीसरा वाल क्या
[10:27]होगा माल के बारे में माल मनना माल सवाल क्या होगा कहां
[10:37]से हासिल किया व फी मान कहा खर्च किया दोनों बातें पूछी
[10:39]जा कहां से हासिल किया यह बताओ कहां पर खर्च किया यह
[10:44]बताओ सवाल किया जाएगा मसूल है जिम्मेदारी हमारी कहां से खर्च किया
[10:49]कहां से कहां पर कहां से हासिल किया कहां पर खर्च किया
[10:55]पैसा इंसान की एक नागजी जरूरत है दुनिया में जिंदगी तो कुछ
[11:00]हासिल करना है उसी जिंदगी का पहिया चलेगा लेकिन कहां से हासिल
[11:06]करना है यह अहम नुक्ता है कहां खर्च करना है यह अहम
[11:09]नुक्ता है खाना तो खाना है लेकिन हलाल खाना या हराम खाना
[11:17]यह अहम मसला है यह अहम मसला है लिहाजा पैसा कमाना भी
[11:20]है जिी का एक लाजमी नागजी हिस्सा है और खर्च भी करना
[11:26]है लेकिन सवाल य कि कहां से कमाना है कहां पर खर्च
[11:31]करना है चौथा वन हुना अलल बैत यह अहम तरीन सवाल है
[11:38]क्या आपसे सवाल होगा हम अहले बैत की मोहब्बत के बारे में
[11:41]दिल में रखी थी या नहीं रखी थी हुब्ब अहले बैत के
[11:46]जो तकाज थे उन पर अपनी तवाना के मुताबिक अमल किया था
[11:52]या नहीं किया था वह सारी बातें अपनी जगह पर और मोहब्बत
[11:54]अहले बैत भी अपनी जगह पर सवात पढ़े मोहम्मद और आले मोहम्मद
[11:59]पर सुभानल्ला सहद अच्छा अच्छा ये सिर्फ क्या य सिर्फ चार ही
[12:08]चीजें हैं यह चार अहम तरीन चीजें हैं उम्र जवानी माल और
[12:15]मोहब्बते अहले बैत आगे और भी इसके बारे में कुछ तजक आएंगे
[12:22]इंशाल्लाह अब यहां पर देखिए के क्या सिर्फ यही नहीं है मौला
[12:25]का एक फरमान आपकी खिदमत में पेश करता हूं इमाम फरमाते हैं
[12:31]बाद व बलाद अल्लाह से डरो यानी अल्लाह का अल्लाह को मद्देनजर
[12:37]रखो अल्लाह के सामने रखो फ बाद उसके बंदों में यानी उसके
[12:41]बंदों के साथ कोई मामला करना हो लेनदेन करना हो बातचीत करनी
[12:44]हो रवैया रखना हो सुलूक करना हो तुम्ह क्या करना चाहिए इला
[12:50]अल्लाह से डरना चाहिए अल्लाह को मदद नजर रखना चाहिए उसके बंदों
[12:53]में और उसके शहरों में बिला देही अब आपकी समझ में तो
[12:58]आ रहा होगा कि शहरों में तो बंदों में तो ख्याल रखना
[13:02]समझ में आता है यह बिलाद से क्या मुराद है यानी शहरों
[13:04]के अल्लाह के शहरों में के मामले में भी अल्लाह का ख्याल
[13:10]रखना पड़ेगा अल्ला से डरना पड़ेगा मौला फरमाते हैं मस तुम लोग
[13:13]मसूल हो फिर वही मसल का ल जिम्मेदार हो किस बारे में
[13:18]हता बका ल ब यह जो जमीन है तुम्हारे पैरों के नीचे
[13:24]इसके भी तुम जिम्मेदार हो और जो जानवर तुम्हारे पास है उसके
[13:28]भी तुम जिम्मेदार हो य चिड़ियां उड़ रही है यह जो परिंदे
[13:35]उड़ रहे हैं बाज लोगों का आपने देखा होगा कि उनके लिए
[13:39]खाने का कुछ इंतजाम करते हैं कुछ खाने का इंतजाम करते हैं
[13:42]यह क्या उनकी उन जानवरों की अपने अंदर जिम्मेदारी का एहसास करते
[13:48]हैं कि मेरा फर्ज बनता है मैं इसके लिए कुछ करूं अब
[13:51]कोई रोटी डाल देता है कोई क्या करता है कोई अच्छा करता
[13:54]है कोई बुरा भी करता है यानी अपने तौर पर जहन में
[13:59]अच्छा सोचते हैं लेकिन वो उसका तरीका सही नहीं होता तो यह
[14:01]जानवर जो है ना रसूल की अदीस बारे में के एक औरत
[14:06]ने अपनी घर पर बिल्ली रखी हुई थी बिल्ली को कैद को
[14:11]खाने दे कुछ नहीं देती थी बिल्ली की वजह से लोग जहन्नुम
[14:19]में जाएंगे यह मौजूद है य इसी किस्म के यानी आपने एक
[14:21]जानवर अपने घर में रखा हुआ है उसको खाना नहीं दे रहे
[14:28]उसकी आप जो जिम्मेदारी है उसको पूरा नहीं कर रहे आयला तबा
[14:34]तबाई के बारे में आतु तबाई कौन है साहिब अल मिजान अल
[14:41]मीजान जो तफ मीजान मीजान जो तफसीर है तफसीर अल मीजान उसके
[14:44]लिखने वाले का नाम है आयतुल्लाह मोहम्मद हुसैन तबा तबाई बहुत बड़ी
[14:49]शख्सियत है इरफानी शख्सियत फलसफे शख्सियत और कई इनके वाकत इनके भाई
[14:54]के कई वाकत मशहूर है मैं सिर्फ एक चीज इशारा कर दूं
[14:56]बस क्या इस बारे में उनके के बारे में है कि वो
[15:01]अपने घर वालों को कहते थे कि घर में आने वाले काकरोच
[15:08]को मारो नहीं कुछ ऐसा काम करो कि घर में काकरोच पैदा
[15:11]ना हो वो भी अल्लाह की मखलूक है जब अल्लाह की मखलूक
[15:17]है तो अगर तुम्हें तंग करते तो कोशिश करो पैदा ही ना
[15:20]हो और अगर पैदा हो जाए तो मारो नहीं उसके लिए कोई
[15:22]और रास्ता इख्तियार करो ये क्या है ये अल्लाह की मखलूक से
[15:28]मोहब्बत है मैं भी आपकी खिदमत में अर्ज कर रहा हूं बहुत
[15:31]से लोग क्या करते हैं घर में मिसाल की बात है बाज
[15:36]घरों में छिपकली से लोग बहुत डरते हैं कोशिश करें कि अगर
[15:41]छिपकली से आप डरते हैं तो छिपकली को मारे नहीं क्या करें
[15:45]यह मेरा मशवरा लिए ठीक है किसी हदीस रिवायत की बात नहीं
[15:47]कर रहा हूं मैं तजब की बात कर रहा हूं और अपने
[15:52]दिल की बात बता रहा हूं कोशिश करें के इन जानवरों को
[15:56]घर में या तो पैदा ना होने दे पैदा हो जाए तो
[16:00]इनसे इको कोशिश करें कि इनको जिंदा जो है व घर से
[16:04]निकाल दे बजा इसके के मारे तो यह भी अल्लाह की मखलूक
[16:13]है इस इस उनवान से के अल्लाह की मखलूक है हां मैं
[16:18]शरी मसला नहीं बयान करर याद रखिएगा शरी मसला है हमारे पास
[16:20]कि अगर कोई जानवर आपके लिए नुकसान दे हो आपके लिए तकलीफ
[16:25]आपके लिए अजियत हो तो आप उसको मार सकते हैं शरी मसला
[16:27]नहीं बयान कर रहा मैं एक अखलाकी नुक्ता बयान कर रहा हूं
[16:33]के बहरहाल अल्लाह की मखलूक है जिस तर हो सके उनसे तो
[16:37]हुजूर भी मौला भी फरमाते हैं कि तुमसे जमीनों के बारे में
[16:39]सवाल होगा जो तुम्हारे पैरों के नीचे है और तुमसे जानवरों के
[16:44]बारे में भी सवाल होगा कि जो तुम्हारे उसमें आते हैं जिसम
[16:47]जानवर समझ के उसको जानवर समझ के जुल्म करना यह खुद जवाब
[16:53]दही का बायस बनेगा मसूलिपटनम अब यहां पर मैं जिम्मेदारी के हवाले
[17:05]से एक नुक्ता अर्ज कर देखिए जिम्मेदारी जब हम कहते हैं ना
[17:08]जिम्मेदारी जिम्मेदारी हमेशा किसी की निस्बत होती है क्या मतलब फर्ज कर
[17:18]ले मैं समझाना चाहता हूं देखिए बच्चे वालदैन बीवी शहर मैं एक
[17:27]इंसान हूं मेरे मां-बाप है मेरी जिम्मेदारी मां-बाप की निस्बत क्या है
[17:32]मेरा अकेले के जिम्मेदार नहीं जिम्मेदारी किसी निस्बत से अच्छा मैं बच्चों
[17:39]का बाप भी हूं औलाद की निस्बत मेरी जिम्मेदारी के है जब
[17:44]भी हम जिम्मेदारी इस्तेमाल करेंगे तो दो तरफा गुफ्तगू होगी के इस
[17:48]आदमी की जिम्मेदारी इस निस्बत से क्या है मैं जॉब करता हूं
[17:55]मेरी जिम्मेदारी उस जॉब के लिहाज से क्या है मेरे पास कोई
[18:00]कारोबार है तो मेरे पास कोई खरीदार आता है मेरी जिम्मेदारी उसकी
[18:05]निस्बत तो ल जिम्मेदारी हमेशा अकेली नहीं होती हमेशा किसी की निस्बत
[18:13]होती है और आगे बढूं मैं अल्लाह का बंदा हूं तो अल्लाह
[18:17]की निस्बत मेरी जिम्मेदारी क्या है मैं अहले बैत से मोहब्बत करता
[18:23]हूं जिम्मेदारी मेरी जिम्मेदारी अहलेबैत की निस्बत क्या है तो जब भी
[18:29]हम मैं जो अपने मौजू के हवाले से अर्ज कर रहा हूं
[18:33]कि जिम्मेदारी अदा करना तो हर जिम्मेदारी को अलग-अलग देखना पड़ेगा के
[18:36]मां-बाप के तबार से मेरी जिम्मेदारी क्या है बच्चों के तबार से
[18:39]मेरी जिम्मेदारी क्या है भाई बहन के तबार से मेरी जिम्मेदारी क्या
[18:43]है अ अगर मैं जॉब करता हूं तो उसके लिहाज से क्या
[18:46]है मैं अल्लाह का बंदा हूं उसके लिहाज से मेरी क्या है
[18:47]मखलूक के साथ मेरा राबता है उनसे मेरी जिम्मेदारी की है पड़ोसियों
[18:51]से मुतालिक मेरी जिम्मेदारी क्या है मैं एक टीचर हूं तो शागिर्द
[18:54]से मुता मेरी जिम्मेदारी क्या है खुद शागिर्द की उस्ताद से जिम्मेदारी
[18:57]क्या है ये जिम्मे जारी ज तो ये तो एक आपने देखा
[19:02]कि बहुत बड़ा एक मौजू है कि जो जिस पर मुझे बात
[19:07]करनी है क्या मैं सब पे बात कर सकता हूं नहीं बात
[19:11]कर सकता ठीक है तो हम क्या करेंगे किसी एक नुक्ते प
[19:13]बात करें वो आपकी खिदमत में अर्ज करता हूं सबसे पहले आपकी
[19:16]खिदमत में ये अर्ज करूं के रसूल पाक हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्ला
[19:19]वसल्लम का एक रिवायत है सवात पढ़े मोहम्मद आले मोहम्मद पर सला
[19:26]महम्मद वा सुभानल्ला एक जुमला है चार पांच लाइनों पर मनी है
[19:35]कुकरा ये मशहूर है ये जुमला बहुत मशहूर है आगे के जुमले
[19:40]कम मशहूर जमला जदा कुक रा तुम सब के सब रा हो
[19:41]रा राई हो बताता हूं क्या है आसान अल्फाज में समझा आगे
[19:48]समझाता हूं चोपान यानी चरवाहा तुम सब के सब चरवाहे हो व
[19:54]कुक मसरत और तुम सब के सब अपने गल्ले के मसूल हो
[19:58]मसल समझ याद है जिम्मेदार हो तुमसे सवाल किया जाएगा अब यहां
[20:03]पे रा से क्या मुराद है वो बता दूं फिर आगे चलते
[20:06]हैं राह के माने दो चीजें हैं एक यही चरवाहा तुम सब
[20:09]चरवाहे हो और तुमसे गल्ले के बारे में पूछा जाएगा नंबर एक
[20:15]नंबर दो रा के दूसरे माने मुहाफिज तुम सब के सब मुहाफिज
[20:17]हो और तुमसे पूछा जाएगा कि जिस चीज के तुम मुहाफिज हो
[20:21]तुमने उसकी सही हिफाजत किया नहीं की लफ्ज़ रात दो जगह इस्तेमाल
[20:25]होता है चरवाहे के लिए भी और आम हालात में भी दूसरे
[20:31]लोग जो मुहाफिज हो अब रा का यह मसला होया कुलो रा
[20:35]तुम सब के सब या चरवाहे का तर्जुमा करें या मुहाफिज का
[20:39]तर्जुमा करें और तुम सबसे सवाल होगा किसके बारे में अगर चरवाहे
[20:42]का तर्जुमा तो गल्ला कही है और अगर मुहाफिज का तर्जुमा करेंगे
[20:47]तो फिर आगे क्या कहेंगे रयत से क्या मुराद है कि जो
[20:49]तुम्हारे मातहत आते हैं जिनकी तुम्हें हिफाजत करनी है उनकी तुम्हे तुमसे
[20:53]पूछा जाएगा अब एक एक करके चंद इमाम मौला चंद एक नाम
[20:59]फरमा चंद के नाम फरमा रहे फल इमाम रा इमाम भी राई
[21:03]है इमाम से मुराद है जो भी जमाने का इमाम है ठीक
[21:07]है जैसे हमारे इमाम जमाना फल इमाम हुक्मरान जो भी ठीक है
[21:14]या असल हुक्मरान मालूम है किर के वक्त इमाम है या जो
[21:17]भी हुक्मरान हो फल इमाम इमाम मुहाफिज होता है यह कह लीजिए
[21:22]या कह लीजिए कि वह चरवाहा होता है और उससे सवाल किया
[21:26]जाएगा कि तुमने अपनी रयत के बारे में अब जो चरवाहा है
[21:30]उसका काम क्या है अगर चरवाहा का तर्जुमा करें तो चरवाहे का
[21:33]काम क्या होता है चरवाहे का काम होता है कि वो गले
[21:37]के लिए खाने पीने का इंतजाम करें उसको भेड़िए से बचाए जानवर
[21:41]उसके ऊपर उसका हमला करे उससे बचाए यानी उसकी हिफाजत करें तो
[21:45]गले यानी चरवाहे का यह काम होता है उनको अच्छी तरह से
[21:50]उनका सेर करें उनका ख्याल रखें और अगर उसका तर्जुमा आप कहेंगे
[21:52]क्या रा कदर मुहाफिज करेंगे तो भी यही कि इमाम मुहाफिज है
[21:56]और उससे उस जो उसकी रि आया उसके बारे में पूछा जाएगा
[21:58]कि उसकी हिफाजत की नहीं की और व रजल फी अलेही और
[22:05]रजु एक मर्द का उसकी मसलिया जिम्मेदारी क्या है वह रा है
[22:09]किसका वह राई है किसका अपने घर वालों का व मस उससे
[22:14]भी उसी य के बारे में सवाल किया जाएगा वो जिम्मेदार है
[22:17]अ ये ना क एक आदमी अगर मर्द है तो उससे कोई
[22:20]सवाल नहीं होगा नहीं वो भी जिम्मेदार है अच्छा औरत है तो
[22:23]जिम्मेदार नहीं औरत भी जिम्मेदार है वल मरतो ब राहा तो औरत
[22:28]अगर है तो व औरत अपने शौहर के घर में जिम्मेदार है
[22:34]कि उसके घर की हिफाजत करे उसके बच्चों की हिफाजत करे जो
[22:36]एक मां का फरीजा है उसको सही तरह अंजाम दे वल खादिम
[22:40]फी माले सही और अगर खादिम है तो अपने मालिक के कामों
[22:45]का मालिक के अवाल का उन चीजों का ख्याल रखे उससे भी
[22:50]सवाल होगा व रजल फी माले अबी है और अगर घर वालों
[22:54]के हट से बाप के हिसाब से देखा जाए तो बाप के
[22:59]अवाल बच्चे की जिम्मे लगाए कि बेटा मिसाल की बात है तुम
[23:01]सुबह दुकान खोल लेना या शाम को तुम आके बैठ जाना मैं
[23:04]घर चला जाऊंगा तो यह क्या है अब उसकी माल की हिफाजत
[23:08]किसकी जिम्मेदारी है बेटे की और यह भी इससे भी सवाल किया
[23:10]जाएगा तो खुलासा क्या हुआ के हम सब इस हदीस के मुताबिक
[23:16]कुल्लो कुमरा तुम सब के सब जिम्मेदार हो चंद मिसाले दी इमाम
[23:19]ने हुजूर ने लेकिन हम सब के सब क्या है जिम्मेदार है
[23:24]अपनी अपनी जगह पर किसी ना किसी तबार से बच्चे हैं तो
[23:29]वालदैन की नि जिम्मेदार है वालदैन बच्चों की जि निस्बत जिम्मेदार है
[23:33]पड़ोसियों की निस्बत जिम्मेदार हैं अपने शागिर्द की निस्बत जिम्मेदार है अपने
[23:37]मालिक की निस्बत जिम्मेदार है हर तबार से हम ये नहीं कह
[23:39]सकते हम जिम्मेदार नहीं अल्लाह की निस्बत जिम्मेदार हैं तो हर चीज
[23:45]इस ऐतबार से जिम्मेदारी है लेकिन सवाल ये है कि क्या हम
[23:48]मैं इस वक्त जो दर्स देने बैठा हुआ हूं तो क्या हम
[23:50]हर एक की जिम्मेदारी प बात करें नहीं हर एक की जिम्मेदारी
[23:54]को अलग डिस्कस करना होगा वालदैन की जिम्मेदारी को अलग औलाद की
[23:56]जिम्मेदारी को अलग वगैरह वगैरह हम क्या करें कि हम किसकी बात
[24:03]करें इस वक्त मौजू है अगर हम इस एक नुक्ते को ले
[24:05]ले तो शायद बहुत सारे मसले हमारे हल हो जाए हम अगर
[24:09]खालिक की निस्बत हम अल्लाह की मखलूक की अगर इस जिम्मेदारी को
[24:16]समझ ले और इसको समझने के बाद इसको अदा करने की कोशिश
[24:19]करें तो बाकी सारी जिम्मेदारियां इसके अंदर आ जाएंगी इसको समझ ले
[24:28]अगर कैसे मैं आपकी खिदमत पेश करता हूं सवात पढ़े पर सबसे
[24:36]पहले इस बात को देख लीजिए कि अगर हमने इसको समझ लिया
[24:41]ना खालिक और मखलूक में मखलूक की जिम्मेदारी को खालिक की निस्बत
[24:44]अगर यह बात हमने अच्छी तरह समझ ली और इसको अदा करने
[24:47]पर आ गए कमर कस ली हमने कि नहीं अब यह काम
[24:50]करना है तो बाकी सारी खुद बुद कैसे हल हो जाएंगे देखि
[24:53]अल्लाह ताला हमारा खालिक कोई शक नहीं है अल्लाह ताला की निस्बत
[25:01]एक मखलूक की खालिक की निस्बत क्या जिम्मेदारी है हम एक मखलूक
[25:04]है तो हमारी खालिक की निस्बत क्या जिम्मेदारी बनती है खालिक की
[25:11]निस्बत हमारी जिम्मेदारी यह है कि जिसने हमें पैदा किया है हम
[25:15]मालूम तो करें वह कौन है इसको जरा डिफाइन करता हूं देखिए
[25:20]फर्ज कर लीजिए के हम यहां पर बैठे हुए हैं बाहर से
[25:31]कोई आए और कहे कि फला किसी एक जगह पर उन्होंने आपको
[25:33]खाने की दावत दी है कि मजलिस के बाद दर्स के बाद
[25:37]वहां आ जाए वहां खाना खाएंगे आप वहां पर गए आपको पता
[25:39]नहीं कौन है वहां गए और आपने देखा कि बड़ा अच्छा जो
[25:44]है व इंतजाम है बड़ी अच्छी आव भगत है बहुत कुछ उन्होंने
[25:46]आपकी जियाफत के लिए बड़ा अच्छा इंतजाम किया हुआ है अब आप
[25:53]जानते नहीं है आपने वहां पर खाना खाया बाहर निकलते वक्त जिन
[25:59]ने आपसे कहा था अने क यार किसका घर है बताओ तो
[26:04]सही क्यों क्या काम है शुक्रिया अदा कर दे यार इतना अच्छा
[26:05]उन्होंने इंतजाम किया उ तुम्हारे शुक्रिया की जरूरत नहीं है तो आप
[26:12]क्या कहेंगे कि उसको जरूरत नहीं है मुझे बाहर निकल के अफसोस
[26:14]होगा कि यार कम से कम उनका शुक्रिया तो अदा कर देता
[26:19]यह मेरी जरूरत है उसकी जरूरत नहीं है उसने इस मकसद से
[26:25]नहीं बुलाया है मैं उसके बगैर अपने आप को क्या समझूंगा मुस्तर
[26:29]समझूंगा मुस्तर महसूस करूंगा यार ये क्या बात है इतना कुछ खाया
[26:35]पिया और आगे से उने शुक्रिया भी अदा नहीं किया तो अगर
[26:37]एक इंसान हमें एक वक्त खाना खिलाए तो हम अपना फर्ज समझते
[26:43]हैं कि उसका उसको पहचान के उसका शुक्रिया अदा करें तो जिस
[26:50]खालिक ने हमारे लिए इतनी जियाफत का इंतजाम किया हो जिसने गर्मी
[26:53]सर्दी का इंतजाम किया हो जिसने खाने के लिए तरह-तरह की चीजों
[26:59]का इंतजाम किया हो जिसने तरह-तरह के फल फ्रूट का इंतजाम किया
[27:02]हो जिन्होंने हम बच्चों के लिए वालदैन का इंतजाम किया हो जिन
[27:08]लोगों जिस खालिक ने इस मखलूक के लिए बेहतरीन हाद हों का
[27:11]इंतजाम किया हो जिसने हमारे बदन के अंदर तरा तरह की सहूल
[27:15]रखी हुई है यह सब इंतजाम किया हो क्या हमारा फर्ज नहीं
[27:20]बनता कि हम उस खालिक के बारे में मालूमात तो करें कि
[27:22]वह कौन है क्या है कैसा है ताकि उसका शुक्र अदा कर
[27:30]सके इसके बगैर चारा नहीं है हम अपने अंदर गिल्टी फील करेंगे
[27:33]कि यार हम जिस खालिक की इतनी नेमतों से इस्तफा कर रहे
[27:38]हैं उसके बारे में हम जानते नहीं है अपने समझे की हमारी
[27:40]जिम्मेदारी है कि हम इसको समझे सीखे के वह कौन है जिसने
[27:46]यह सब हमें दिया है अच्छा जब दिया है तो हम यह
[27:51]भी पूछेंगे क्यों दिया है क्या खास मकसद है उसने जो यह
[27:54]खिलाया है पिलाया है सारी सहूल रखी किस लिए रखी है कोई
[27:58]खास मकसद है हम कहेंगे हां खास मकसद है तो आप क
[28:02]या ये तो बहुत बुरी बात है एक आदमी खाना खाने के
[28:03]लिए बुलाए और उसका कोई खास मकसद हो तो आप कहेंगे यार
[28:07]ठीक है खाना खाने की ला शुक्रिया भी अदा कर देते हैं
[28:11]लेकिन इसके तो अपने मकास थे इसके तो अपने मकास थे तो
[28:13]आपने देखि कि जो उसने खिदमत की उसकी वैल्यू कम हो गई
[28:19]उसके अपने मकास थे खुदा ने जो नेमत दी है हम उनका
[28:23]शुक्र भी अदा करते हैं अल्लाह का लेकिन क्या ये वैल्यू को
[28:26]कम करने का सबब बनेगा जब अल्लाह ने कहा कि मैंने तुम
[28:34]इतनी नेमत दी तुम मेरा शुक्र अदा करो मैंने नेमत तुम मेरी
[28:36]इबादत करो तो ये तो मकसद के तहत दिया था तो क्या
[28:42]वैल्यू कम हो गई नेमत देने की अगर कोई खाने के लिए
[28:47]बुलाते कोई मकसद हो तो हम कहेंगे यार अच्छा खाना था शुक्रिया
[28:49]भी आपका लेकिन मकसद था तो वैल्यू कम हो गई यहां पर
[28:55]क्या खुदा के बारे में कह वैल्यू कम हो गई जवाब ये
[29:01]है अगर इसमें खुद उसका कोई फायदा हो तो वैल्यू कम होगी
[29:04]लेकिन अगर जो वह हमसे चाहता है अगर उसका फायदा हमें ही
[29:11]मिल रहा हो तो वैल्यू कम नहीं होगी बल्कि वैल्यू बढ़ जाएगी
[29:18]रसूल पाक ने क्या फरमाया रसूल कह दो कि मैं तुमसे अपने
[29:20]कुर्बा की मव दत चाहता हूं अजरे रिसालत मव दत कुर्बा की
[29:28]सूरत में तुमसे मांग रहा हूं लेकिन अगर यह अजर अपने फायदे
[29:31]के लिए होता तो मुमकिन है क्या आप कहते कि भा आपने
[29:34]तो फायदा ले लिया अजर की सूरत में लेकिन कुरान ही यह
[29:38]कह रहा है कि रसूल तुमसे जो भी अजर तलब करता है
[29:43]उसका फायदा उसको नहीं है उसका फायदा खुद तुम लोगों को है
[29:45]तो जब तुम लोगों को फायदा है तो जहां पर अजरे रिसालत
[29:49]तलब किया यह भी यानी वह जो खिदमत की वो भी तुम्हारा
[29:54]फायदा है उसका भी शुक्रिया अदा करना चाहिए और जो अजर वो
[29:57]तलब कर रहा है उसका फायदा भी उस उसको नहीं मिल रहा
[29:58]हमें ही मिल रहा है तो हमें इसका भी शुक्रिया अदा करना
[30:02]चाहिए कि ऐ रसूल अच्छा हुआ कि आपने हमसे अजरे रिसालत तलब
[30:08]किया कि इसका फायदा भी खुद हमें ही है अगर मदत कुर्बा
[30:10]दिल में पैदा हो जाए तो इसका फायदा अहले बैत को नहीं
[30:15]होना है इसका फायदा खुद उनके मानने वालों को ही होना है
[30:19]दुनिया में भी होना है आखिरत में भी होना है सवात पढ़
[30:22]लीजिएगा मुहम्मद आले महम्मद अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद अच्छा अल्लाह की मखलूक
[30:32]की अल्लाह से क्या जिम्मेदारी है सबसे पहले खालिक की मारफ हासिल
[30:37]करे सबसे पहले मारफ अच्छा खालिक की मारफ क्या है बस हम
[30:42]यह मफत है कि अल्लाह है वो एक है वह हमारा खालिक
[30:52]है बस इतना काफी है यानी हम उससे आगे भी जाएंगे मसलन
[30:59]हम क्या कहेंगे हम कहेंगे कि अल्लाह ताला खालिक भी है राजिक
[31:07]भी है अल्लाह ताला काहिर भी है अल्लाह ताला सख्ती भी कर
[31:16]सकता है नरमी भी कर सकता है वह हमें देख रहा है
[31:23]हमारा हिसाब भी लेने वाला है जब हम इंसान यह कह देता
[31:29]है कि अल्लाह देख रहा है तो फिर कि मतलब क्या है
[31:32]पता है इसका मतलब यह है कि अगर मैंने अल्लाह को यह
[31:35]मान लिया कि अल्लाह मुझे देख रहा है तो इसका मतलब यह
[31:36]है कि जिसके हाथ में पूरी दुनिया की ताकत है हर किस्म
[31:42]की ताकत है और उसने मुझे कुछ चीजें जिम्मेदारियां दी कि तुम्हें
[31:46]यह काम करने हैं अगर मैंने इसको अंजाम नहीं दिया तो अल्लाह
[31:49]ताला मुझे पूछेगा और मेरे पास जवाब नहीं होगा तो सजा भी
[31:55]मिल सकती है मैं अल्लाह का जवाब नहीं दे सकूंगा जब ये
[31:59]मारफ का यह नुक्ता हमारे पास आ जाए क्या कि हम अल्लाह
[32:01]के आगे जवाब दे हैं जो जिम्मेदारियां उसने रखी है अगर हमने
[32:08]उसको अंजाम नहीं दिया तो अल्लाह हमसे पूछेगा यह मारफ यह वाली
[32:13]मारफ क्या करेगी यह वाली मारफ तुमसे कहेगी के जब तुम इस
[32:16]मारफ तक पहुंच गए कि अल्लाह ताला तुम्हारा हिसाब लेगा और वो
[32:24]ताकतवर है वो सख्ती भी कर सकता है काहिर भी है रहमान
[32:28]भी है रहीम भी काहिर भी है जब यह तुमने मारफ हासिल
[32:31]कर ली अब उधर से मां-बाप की निस्बत तुम्हारी जिम्मेदारी है अगर
[32:36]तुमने उस पर अमल नहीं किया तो अल्लाह पूछेगा औलाद की निस्बत
[32:41]तुम्हारी जिम्मेदारी है अगर तुमने उस पर अमल नहीं किया तो अल्लाह
[32:44]पूछेगा तो अल्लाह सिर्फ नमाज रोजे का तो नहीं पूछेगा वो तो
[32:47]हुकूक नास का भी पूछेगा हुकूक उल्लाह का भी पूछेगा हुकूक नास
[32:49]का भी पूछेगा पड़ोसी की निस्बत तुम्हारी जिम्मेदारी थी अदा की या
[32:52]नहीं की तुम टीचर हो बच्चों को पढ़ाया या आराम से रेस्ट
[32:59]रूम के अंदर बैठे रहे मिसाल की बात है या अगर कारोबार
[33:04]कर रहे हो तो खरीदार को सही माल दिया या नहीं दिया
[33:08]उसकी जिम उस निस्बत जो तुम्ह जिम्मेदारी अदा किया या नहीं किया
[33:11]तो जब हमने अल्लाह ताला की निस्बत सही मफत हासिल कर ली
[33:16]उसका नतीजा यह निकलेगा के हमारी जितनी भी जिम्मेदारियां है वह सही
[33:20]तौर पर पूरी होने का चांस पैदा हो गया क्यों इसलिए कि
[33:25]जब आपने अल्लाह की को अल्लाह के सामने अपने आप को जिम्मेदार
[33:27]सम और उस मारफ को हासिल करके उस पर अमल करना शुरू
[33:31]किया सारे काम ठीक होना शुरू हो जाएंगे और अगर अल्लाह की
[33:37]मारफ में कमी रह गई जहनी तौर पर या प्रैक्टिकली बाज लोग
[33:40]जहनी तौर पर मारफ हासिल करते हैं प्रैक्टिकली नहीं करते बहुत से
[33:45]लोग हैं कि जो अल्लाह को मानते हैं अच्छी तरह मानते हैं
[33:47]समझते हैं लेकिन अमली तौर पर जो है वो पीछे रह जाते
[33:51]हैं हां अगर जहनी तौर पर हो प्रैक्टिकली हो फिर यह मामला
[33:55]फैले और हर निस्बत जो आपकी जिम्मेदारी बनती है व पूरी होगी
[33:58]बस हमें किस पर जाना चाहिए यह समझना चाहिए कि अल्लाह की
[34:03]निस्बत हमारी जिम्मेदारी क्या है चंद कमात पेश करने सवात पढ़ लीजिएगा
[34:11]मोहद छठे इमाम का कल आपकी खिदमत में कर अल्लाह ताला की
[34:16]मफत के हवाले से या या इक इक अपने साबी से कहते
[34:24]हैं फला अल्लाह ताला से खौफ रखो आगे कात गोया कि तुम
[34:29]उसको देख रहे हो फलम तहु और अगर तुम उसको नहीं देख
[34:33]रहे फरा वो तो तुम्ह देख रहा है गोया कि यह समझ
[34:40]मुझे देख रहा है देखिए गिरामी इंसान बाज औकात गुनाह करता है
[34:49]कोई ऐसा काम करता है जो ना मुनासिब हो ठीक है अच्छा
[34:54]किससे छुपाता है देखने वालों से छुपाता है किसी को पता ना
[35:00]चल जाए कि मैं फलां मेरे मोबाइल के अंदर क्या कुछ है
[35:04]मिसाल की बात है मैंने क्या कुछ देखा है मैं नहीं चाहता
[35:11]लोग देखें अच्छा तो इंसान देखने वाले शख्स से अपने हरकतों को
[35:18]छुपाता है उधर से उसको यह भी इल्म है कि अल्लाह भी
[35:22]तो देख रहा है तो अल्लाह से और अल्लाह से भी अपने
[35:28]काम को छुपा नहीं सकता छ मान में फरमाया तुम अल्लाह के
[35:34]सामने ऐसे रहो कि गोया तुम उसको देख रहे हो और अगर
[35:39]तुम उसको नहीं देख व तो तुम्हें देख रहा है अब इमाम
[35:40]क्या फरमाते हैं न कुंता तरा लायरा अगर तुम यह समझते अल्ला
[35:48]तुम्ह नहीं देख रहा फकत कफर था तो तुमने कुफर किया अगर
[35:53]तुम यह समझ अला को तुम अल्ला तुमको नहीं देर है दूसरा
[35:56]जुमला क्या है फि फिर फरमाते हैं न कुलम लेकिन अगर तुम
[36:01]यह समझते हो कि अल्लाह तुम्ह देख रहा है हम ऐसे ही
[36:05]है ना हम समझते अल्लाह हमें यकीन है कि अल्ला हमें देख
[36:07]रहा है फिर इमाम फरमाते हैं सु अब तुम मखलूक से तो
[36:14]अपने गुनाहों को छुपाते हो लेकिन तुम्हारा अकीदा है कि अल्लाह तुम्हें
[36:19]देख रहा है और तुम अपने गुनाहों को अल्लाह से नहीं छुपा
[36:25]सकते तो तुम मखलूक को इतना ताकतवर समझते हो कि मैं मखलूक
[36:30]से अपने गुनाहों को छुपाऊं कहीं ऐसा ना हो कि व मुझे
[36:33]सजा दे जबकि अल्लाह तुम्हें देख रहा है फिर भी तुम गुनाह
[36:35]कर रहे हो इसका मतलब यह कि तुमने तो अल्लाह को बहुत
[36:39]हल्का समझा है या तुम्हे मालूम है कि वह देख रहा है
[36:42]लेकिन वह तो कुछ नहीं करेगा व क्या करेगा तो अगर तुम्हारा
[36:49]यह अकीदा है कि अल्लाह तुम्हें देख रहा है तो फिर तुम्हें
[36:51]अपनी खलत में भी अल्लाह के गुनाहों से बचना चाहिए जिस तरह
[36:56]से तुम आम लोगों से अपने गुनाहो को छुपाते हो अल्लाह से
[36:59]तो गुना छुपा ही नहीं सकते लिहाजा गुनाहों को छोड़ दो नहीं
[37:05]छोड़ोगे तो इसका मतलब य कि तुम अल्लाह के मामले में सही
[37:07]सोच की हाम नहीं सवात पढ़ लीजिएगा मोहम्मद मोहम्मद [संगीत] पर अ
[37:17]जाहिर है कि वक्त कम ही होता है हमारे पास अल्लाह ताला
[37:22]से एक तो मफत यानी अल्लाह ता हमारी पहली जिम्मेदारी क्या है
[37:30]अल्लाह की मारफ सही मारफ हासिल करो नंबर दो अच्छा सही मफत
[37:31]हासिल करने के लिए पहले एक हदीस पेश कर दो फिर आगे
[37:38]चलता हूं सैद शोहदा इमाम हुसैन अल सलाम का एक फरमान है
[37:41]के अल्लाह की मारफ हासिल करो फिर उसकी इबादत करो तो रावी
[37:48]ने पूछा कि मौला यह बताइए कि अल्लाह की मारफ का मतलब
[37:53]क्या है कैसे अल्लाह की मारफ अल्लाह की मारफ का मतलब क्या
[37:55]है सैद शोहदा ने एक जुमला फरमाया अजीब गरीब जुमला है मैंने
[38:00]अर्ज किया ना कि हमारी जिम्मेदारी क्या बनती है अल्लाह की मफत
[38:02]हासिल करें सद शोहदा ने कहा कि अल्लाह की मफत हासिल करो
[38:08]उसकी इबादत करो उसकी मासि से बचो किसी ने पूछा कि मारफ
[38:13]खुदा का मतलब क्या है सद शोहदा ने फरमाया अपने जमाने के
[38:17]इमाम की मारफ हासिल करना अपने जमाने के इमाम जिसकी तात तुम
[38:24]पर वाजिब है उसकी मारफ हासिल करना यह अल्लाह की मफत है
[38:28]अब इस पर सोचना चाहिए नहीं सोचना चाहिए जुमला कैसा जुमला है
[38:32]उसने पूछा मैं अल्लाह की मफत कैसे हासिल करू क्या है अल्लाह
[38:38]की मारफ इमाम ने फरमाया वक्त के इमाम की मारफ वक्त के
[38:44]इमाम की अल्लाह की मफत है य वक्त के इमाम की मारफ
[38:45]वह है कि जो तुम्हें अल्लाह तक पहुंचाने वाला है यह तुम्ह
[38:51]अल्लाह का रास्ता दिखाएगा मुस्त खुदाया त मुझे सिरात मुस्तकीम पर चला
[38:57]हर आदमी कह रहा सिरात मुस्तकीम मेरे पास है बहुत सारे रास्ते
[39:01]हर कोई कह रहा है सही सिरात मुस्तकीम कौन सा होगा कि
[39:03]जहां पर वक्त का इमाम खड़ा हुआ होगा यह जो रास्ता है
[39:08]यह सिरात मुस्त अगर वक्त के इमाम को अपना इमाम तस्लीम कर
[39:12]लिया वक्त के इमाम के कहने पर चले तो वह तुम्हें कहां
[39:14]ले जाएगा सही तौर पर खुदा के रास्ते पर चलाएगा लेकिन अगर
[39:21]वक्त के इमाम के ढूंढने में पहचानने में गलती कर गए या
[39:24]पहचान लिया लेकिन उसके कहने पर नहीं चले तो इसका मतलब यह
[39:30]है कि इंसान मुमकिन है कि गुमराही का शिकार हो जाए फिर
[39:35]वो अहले बैत की कम है कि मोहब्बत की वजह से व
[39:38]शफात करें वह बात का मरहला है लेकिन यहां पर हमसे कमजोरी
[39:40]हो गई हम स्लिप हो गए कि अल्लाह की मार इमाम की
[39:46]मारफ तो है लेकिन जो काम बताया उसको हम अंजाम नहीं दे
[39:50]सके सवात पढ़े मोहम्मद और आले मोहम्मद पर सल्ले अला महम्मद मोहम्मद
[39:58]अब वक्त तेजी से गुजरता चला जा रहा है और मैं जो
[40:04]है बस एक नुक्ता बयान कर दूं उसके बाद जो है वो
[40:08]ताम की तरफ देखिए अने गिरामी सबसे अहम बात यह है कि
[40:14]हमने अल्लाह की मफत हासिल की अगला मरहला क्या है कि फिर
[40:16]सिर्फ मफत हासिल नहीं करनी फिर जो ए काम है उस पर
[40:19]अमल करना है जो उसने हुकम दिए जो भी हुकम दिए उस
[40:25]पर अमल करना यह हमारा काम है ठीक मारफ हासिल करना और
[40:31]उसकी दिए हुए अकामा पर अमल करना लेकिन अमल करने के बाद
[40:33]अमल कैसे करना है सही तौर पर अमल करना है अल्लाह ने
[40:37]हमसे कहा नमाज पढ़ो हम नमाज पढ़े लेकिन सही पढ़े या जैसे
[40:42]तैसे पढ़ ले बच्चे क्या कहेंगे कि जैसे तैसे पढ़ने फायदा हुआ
[40:45]तो इसके म में तीन चीजें होती है तीन पॉइंट आपकी खिदमत
[40:51]में पेश करूं एक होती है जो भी आप काम अंजाम दे
[40:52]उसमें एक शर्त सेहत होती है सही कब होगा वो काम एक
[40:59]पॉइंट पॉइंट नंबर टू उस काम वह काम कबूल होगा या नहीं
[41:06]होगा तो कबूलियत की शर्त क्या है एक है सही होने की
[41:08]शर्त एक है कबूल होने की शर्त तीसरा मरहला क्या है शर्त
[41:12]कमाल एक चीज होती है सही भी होती है कबूल भी है
[41:17]लेकिन कमाल नहीं पाया जाता तो कमाल कब पैदा होगा इन तीनों
[41:19]को मुख्तसर मुख्तसर बयान करूंगा और अपनी गुफ्तगू को यही रोक दूंगा
[41:25]अ गरा देखिए शर्त सहत किसे कहते हैं एक आदमी नमाज पढ़े
[41:31]वजू नाना करे नमाज सही है नमाज सही नहीं है इसे कहते
[41:35]शर्ते सेहत यानी आपकी नमाज ही सही नहीं है नमाज किस तरफ
[41:40]होनी चाहिए किबला ख होनी चाहिए अगर उस तरफ मुह करके नमाज
[41:48]पढ़ ले तो सही नहीं है इसे क्या कहेंगे कि आपका अमल
[41:50]ही गलत है आपका अमल ही बातिल है आपका अमल ही सही
[41:54]नहीं है ये शर्त सेहत है लेकिन जरूरी नहीं कि हर चीज
[41:58]जो सही हो हो वह काबिले कबूल भी हो मिसाल की बात
[42:01]है पानी है पानी का जग है आपको पानी पीना है इसमें
[42:07]पानी ही है कुछ और नहीं है लेकिन उससे मक्खी गिर गई
[42:11]यह पानी कबूल है आपको क्या यह पानी के अलावा कुछ और
[42:17]है नहीं पानी है लेकिन आपके लिए काबिल कबूल नहीं है तो
[42:23]एक चीज होती है शर्ते सेहत एक होती शर्ते कबूलियत शर्त कबूलियत
[42:29]क्या है कि उसके अंदर कोई खराब चीज उसके अंदर ना गिर
[42:35]जाए कि वो गिर जाए पानी गिर गया तो है तो पानी
[42:36]गलत नहीं बोल रहे आप लेकिन पानी काबिले कबूल नहीं है पिया
[42:42]नहीं जाएगा यह शर्ते कबूलियत तो जिस तरह से इबादत के अंदर
[42:48]एक शर्ते अ सेहत होती है शर्ते कबूलियत भी होती है शर्ते
[42:50]कबूलियत क्या है नमाज के लिए शर्ते सेहत वजू शर्ते कबूलियत क्या
[42:55]है इस नमाज के अंदर अगर मोहब्बत अहले बैत शामिल नहीं है
[42:57]विलायत अले बैत शामिल नहीं तो कबूल नहीं है यह कौन सी
[43:02]नमाज बगर विलायत के तुम पढ़ रहे हो लिहाजा विलायत इसके एक
[43:08]ही शर्त है कबूलियत है नमाज सही है नमाज ही है वजू
[43:12]भी है सब कुछ है लेकिन अहले बैत से मोहब्बत दिल में
[43:14]नहीं है यह दो पॉइंट हो गए तीसरा पॉइंट क्या शर्ते कमाल
[43:20]शर्ते कमाल क्या और ऊपर ले जाती है शर्ते सेहत शर्ते कबूल
[43:26]अब उस नमाज के अंदर बेहतरीन खुजू ु भी शामिल हो जाए
[43:29]अहले बैत से मोहब्बत भी शामिल हो जाए अव्वल वक्त भी शामिल
[43:34]हो जाए जमात की नमाज भी शामिल हो जाए तोब देखें दर्जा
[43:40]ब दर्जा क्या कमाल बढ़ रहा है नमाज भी सही है काबिले
[43:42]कबूल भी है लेकिन चकि अव्वल वक्त नहीं पढ़ी है तो इसका
[43:48]कमाल कम है जमात से नहीं पढ़ी तो कमाल कम है जमात
[43:54]हासिल कर ली उसका कमाल बढ़ गया अव्वल वक्त पढ़ लिया कमाल
[43:56]और बढ़ गया यही अव्वल वक्त और जमात आपको कहां नसीब हो
[44:04]गई कर्बला में हरम इमाम में गए सैद शोहदा में आपने कहा
[44:08]मैं फजर की नमाज अव्वल वक्त में अजान के बाद जमात से
[44:12]वही पढ़ूंगा अब ये क्या कमाल बढ़ता जा रहा है ठीक है
[44:18]ना तो शर्ते सेहत भी है शर्ते कबूलियत भी है शर्ते कमाल
[44:23]भी है हमारा बस समेट ल बात को कि जो कुछ आपकी
[44:24]खिदमत में अर्ज किया क्या हुआ कि इंसान जिम्मेदारियां जो है उसके
[44:33]बहुत से पहलू हैं हम हर पहलू पर अलग-अलग बहस करें यह
[44:36]नहीं हो सकता यानी अलग उसके लिए प्रोग्राम होना चाहिए जिसके लिए
[44:40]हर एक के लिए अलग-अलग हम अगर कुल्ली तौर पर बात करें
[44:43]तो हमें क्या बात करनी चाहिए भाई खालिक का मखलूक से जो
[44:46]रिश्ता है उसमें जो जिम्मेदारी पैदा होती है उसको देखें मखलूक की
[44:49]क्या जिम्मेदारी है खालिक सबसे पहले अर्ज किया अगर यह मसला हल
[44:54]हो गया तो सारे मसले इससे हल हो सकते हैं पहला पॉइंट
[44:58]क्या हुआ कि हम मारफ हासिल करें दूसरा यह है कि जो
[45:00]कुछ उसने कहा है उस पर अमल करें और उसको जैसा कहे
[45:06]अंजाम दे उसमें तीन पॉइंट हो गए कि जब हम किसी अल्लाह
[45:10]के किसी कहे हुए काम को अमल करें तो उसमें शर्ते सेहत
[45:12]का भी ख्याल रखें शराय कबूलियत का भी ख्याल रखें और शराय
[45:17]कमाल का भी ख्याल रखें सवात पढ़े मोहम्मद आले महम्मद पर स
[45:27]आलम से दुआ करते हैं कि जो कुछ यहां पर बयान हुआ
[45:32]जिम्मेदारी के हवाले से हमें उन सब बातों को समझने और बोलने
[45:38]और सुनने वाला सबको उस पर बेहतरीन तरीके से अमल करने की
[45:40]तौफीक अता फरमा परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद और आल मोहम्मद का जो
[45:47]तेरे दन की खिदमत में मसरूफ है मजा का महफिल का दुरुस
[45:49]का इनका करते हैं एहतमाम करते हैं शिरकत करते हैं जिस तबार
[45:53]से भी हो परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद आले मोहम्मद का उनके इस
[45:56]खिदमत को अपनी बारगाह में कबूल फरमा परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद आल
[46:02]मोहम्मद का यह बच्चे जो इन प्रोग्राम में शिरकत करते जा खासतौर
[46:04]पर बच्चे जो जिक्र अहले बैत भी करते हैं और अभी माशाल्लाह
[46:09]बहुत ही अच्छे तरीके से बच्चे ने पढ़ा और खासतौर पर इसके
[46:11]लिए और तमाम लोग जो इसमें शिरकत करते हैं खासतौर पर बच्चे
[46:16]जो शिरकत करते हैं परवरदिगार आलम सबकी तौफीक में बीश अस बीश
[46:18]इजाफा फरमा परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद आल मोहम्मद का दुनिया भर में
[46:25]जहां कहीं मजलूम है जालिम को जुल्म का शिकार है खास तौर
[46:27]पर गज्जा में खास तौर पर फलस्तीन खास तौर पर लुबनान जहां-जहां
[46:32]कहीं भी हो यमन हो बेहरेन हो इराक हो जहां कहीं भी
[46:35]मुसलमान मजलूम का शिकार है शिया मजलूम का शिकार है हमारा अपना
[46:39]परा चना र हो तुझे वास्ता मोहम्मद और आले मोहम्मद का सब
[46:41]मजलूम को जालिमों के चुंगल से निजात अता फरमा परवरदिगार तुझे वास्ता
[46:47]मोहम्मद और आले मोहम्मद का जो लोग जालिमों के खिलाफ बरसरे पकार
[46:51]हैं उन सबकी नुसरत हिमायत फरमा इमाम जमाना के जुहूर में ताजल
[46:56]फरमा हमें उनके आवान अनसार शामिल होने की तौफीक अता फरमा रना
[47:01]तकल मना समम रहमत रान
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