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Baad Az Rasool Islami Taleemat M Inheraaf Se Jinab-e-Syeda Ka Mubarza - 01 | H.I.Shahid Raza Kashfi
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24/07/29
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Record date: 27 Dec2020 - بعد از پیغمبر، اسلامی تعلیمات میں انحراف سے جناب سیدہ کا مبارزہ
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2020 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by almehdi educational society, Karachi for our youth.
🌷جناب سیدہ نے 18 سال کی چھوی سی عمر میں کیا تین اہم کام انجام دئیے؟
🌷جناب سیدہ نے تربیت کس سے حاصل کی؟
🌷 نہج البلاغہ کے کتنے حصہ ہیں؟
🌷إنك لعلى خلق عظيم کس سورہ میں ہے؟
🌷 میاں اور بیوی کو ایک دوسرے کے لئے کیسا ہونا چاہئیے؟
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Transcript
[0:00]झाल झाल का अवसर मिला है निश्चय जन्म बिस्मिलाहिर्रहमाननिर्राहीम है है अल्हम्दुलिल्लाह
[0:29]लिहल दाना है लिहाज़ा बालमुकुंद नाले नष्ट कर दिया लहूलुहान हरदान अल्लाह
[0:38]लगा जहां त्रिशूल व बीना बिल हक अस्सलातो वस्सलाम वाला रसूल सकलैन
[0:47]कि महबूब भैरव बेल मुरब्बा इनेबल मशरख यौन हंसने वाला हुसैन अल
[0:55]कासिमी मोहम्मद है [संगीत] यह वाला न तुला ही चला द यह
[1:05]मिलाना है लाख या में योगदान और अम्मा बाद आखिरी अल्लाह सुभान
[1:11]अल्लाह तबारक व ताला अ मैं किताब यह मशीन स्विफ्ट निलामी दूध
[1:21]अ और बहू लहक बिस्मिलाहिर्राह्मणिर्राहीम है पल्लवी नजाकत दारू पीना में लगा
[1:28]दिया ना मुझसे बोला ना मैं कि इन अल्लाह व मालमों सैनी
[1:34]सलाह कैसे मोहम्मद वालों को को नष्ट कर मौज़ू गुस्सा शांत हुआ
[1:48]कि अय्यामे फटीमिया कि उन्हें बस से के जनावे सैयदा का किरदार
[1:57]कि रसूले खुदा की रहमत और वफात के बाद कि खुशी तौर
[2:05]पर कि वह इन्हें अराफ़ात है और वह गज्वी है और गुमराही
[2:17]है कि जो दिखाई दी उस ज़माने के मोहरे को कि अब
[2:25]चाहे वह गुमराह ही है और मैं इन्हें राहत और रास्ते से
[2:34]हट जाना हक के कि किसी भी उन्माद से हो को लेकर
[2:42]उन तमाम नवीन को एग्जाम किया जाए तो एक ही उनवान बनता
[2:51]है कि वह हक से दूर होना हैं और अगर हक से
[2:57]दूर होने की निस्बत जानना चाहे और आसान करने के लिए है
[3:02]तो अल्लाह ने जो रास्ता ए रसूल की जिंदगी के जरिए से
[3:08]से पहले इस्लाम को को बयान किया हेलो व्युअर्स रास्ते पर चलकर
[3:17]हर इंसान इस दुनिया की शहादत है और उस दुनिया की शायद
[3:22]को पा सकता है कि यह खाली अल्फाज नहीं है के बल
[3:30]के हक का कलाम भी है की सूरह अहज़ाब की इस आयत
[3:37]नंबर 21 की सूरह अहज़ाब आयत नंबर तो एक लिखित कॉर्नर लखनऊ
[3:42]फिर रसूलल्लाह ए कि उस वतन फसाना हैं लेमन का नायक जिला
[3:50]बलिया ह्यूमर लखेरा बजाकर अल्लाह कसीरा कि बहुत ही प्यारी अंदाज में
[3:56]ख़ुदा वंदे आलम ने ने अपने हबीब की जिंदगी को कि हम
[4:02]इंसानों के लिए रोल मॉडल करार दिया है यो यो हनी वह
[4:07]रास्ता के जिस पर चलते हुए इंसान भी निजात कि इस दुनिया
[4:14]के हवाले से और उस दुनिया के हवाले से पा सकता है
[4:18]यहां पर हक का कलाम एक बर हक होता है का हक
[4:26]हमेशा सदाकत से शुरू करता है के सदाकत से हटकर कुछ भी
[4:36]नहीं है और अल्लाह से बढ़कर कौन सा अधिक होगा मैं जो
[4:40]कुछ भी वह कहता है कि वह पत्थर की लकीर है मैं
[4:45]आशा करता हूं यह इस्लाम को जानेमन बोला है जब करें हैं
[4:50]और वह भी स्पेशली तौर पर खुशी तौर पर रसूले खुदा की
[4:55]हयाते तय्यबा के बाद अ है जो दौड़ाया कि वह अजीबोगरीब दौर
[5:04]था अ हैं और अगर कहा जाए तो वीजा नहीं होगा आ
[5:06]यह के कि रसूले इस्लाम ने जब जो पहली वहीं का नुजूल
[5:15]हुआ नहीं कि उस व कुल्लू ला इलाहा इलल्लाह तू फॉलो कहा
[5:23]नहीं कि उस दौर को अगर मैं और आप मुलाहजा करें है
[5:27]तो मोक्ष अरे की निस्बत जुल्मों सितम में हद दर्जे का था
[5:34]घर के उस जुल्मों सितम को कि खुदा ने उसके हबीब ने
[5:42]कि जाहिलियत के दौर से ताबीर की है है जबकि हम सब
[5:48]जानते हैं है कि वह दौर के जमाने में रसूले इस्लाम तो
[5:54]सिर्फ लाए लोगों को अरेस्ट कबीला दूसरे कबीले उनके धर्म में डाल
[6:02]दे नाल इश्क वाले सर्च कर रहे हैं आपके साथ में हैं
[6:05]आप पढ़े-लिखे उपलब्धि थे है और क्या खूब पढ़े लिखे अपराध है
[6:13]है अरबी लिटरेचर पर मास्टर होते थे यहां पर कमान था उनको
[6:21]और कृष्ण की दिशा की ओर दलील को खाने काबा की चारों
[6:30]दीवारों पर मुख़्तलिफ़ क़िस्म के कसीदे और अशआर है अरबी की टीचर
[6:34]के साथ कि अब यह निशानी है जाहिर तौर पर जिससे हमारे
[6:39]वषरे के अंदर वह कौन से सुनिएगा कि जो ग्रुप शुरू हो
[6:44]रही है इससे लेना है नतीजा अपने मासूम है क्यों क्या हुआ
[6:50]ऐसा तो नहीं है कि हम यह जो गुप्तगू करने यहां बैठे
[6:52]हैं और सुनने जो बैठे हैं है कि रसूखदार के जमाने के
[7:00]बाद जनाब सैयद आ का मुक्तसर साहिब जमाना आया उस जमाने की
[7:02]हत्या हम गुड्डू करें और सुन लें और उसके बाद तमाम क्षेत्र
[7:08]में है या नहीं है बल्कि उच्च माध्य को हम और आप
[7:16]मुलाहिजा करें अपने जमाने की निस्बत कि कजरारी कोरियोग्राफी रात को मलाई
[7:24]जो करें कि कितने मैं और आप जो हैं वाकई ऐसा तो
[7:26]नहीं कि शराबी शराबी सैयदना के दौर में जो रसूले खुदा की
[7:31]वफात के बाद कंजर अभी आई मैं इन्हें राफी बताई जो आज
[7:37]है या नहीं हैं और अगर है है तो फिर जनाब सैयद
[7:43]आने कौन सा रोल पेश किया कौन-कौन सा किरदार पेश किया उस
[7:51]जमाने के अपराध की निस्बत दूं कि आज भी 14 साल के
[7:52]बाद वही किरदार वहीं रोल हमारे लिए उचित है कि दूसरे अल्फाज
[8:01]में अगर उस जमाने के लोगों ने रसूले खुदा की सुन्नत को
[8:07]जाहिर तौर पर फरामोश कर दिया रसूले खुदा की रहमत के बाद
[8:09]का स्वाद भी हम और आप मुलाहजा कर सकते हैं है कि
[8:14]उस सुन्नत को मैं और आप फॉलो कर रहे हैं या नहीं
[8:21]आ हैं और अगर नहीं कर रहे तो उस जमाने को ताबीर
[8:23]किया गया कुरआन से कि वह जाहिलियत का दौर है है तो
[8:31]फिर आज जो है ऐसा ही देर दिखाई देगा अगर वह तमाम
[8:37]चीज़ें हैं है तो इसमें से एक चीज आप अगर से हटकर
[8:40]चलते हैं अब हकीकत की बुनियाद पर देखते हैं है कि जो
[8:47]थोड़ी देर पहले और सुबह है कि जवाहिरी पढ़े-लिखे अपराध थे उस
[8:51]जमाने में है लेकिन उसके बावजूद अल्लाह ने उसके हबीब ने उस
[8:58]दौर को ताबीर किया जाहिलियत के दौर से अब सवाल यह है
[9:05]के पास अल्लाह के नजदीक और रसूल के नजदीक कि फिल्म किसे
[9:12]कहते हैं हुआ है कि जाहिलियत की तारीफ या जहालत की तारीख
[9:17]क्या है कि मेरे और आपके जहन में यही है कि जो
[9:21]पढ़ना लिखना जानता है जाहिर तौर पर अलिफ बे से व्हाट्सएप है
[9:27]स्कूल गया है मकतब गया है कॉलेज और यूनिवर्सिटी को क्रॉस किया
[9:34]है और वहां से पास आउट हुआ है कम कहते हैं पढ़े
[9:35]लिखे हैं एजुकेटेड हैं तो उस जमाने में भी थे है लेकिन
[9:44]उस ज़माने मैं बावजूद इसके के पढ़े-लिखे होने के और जाहिल को
[9:52]तैयार रखिए का यह जानेमन यह बहुत ही प्यारा और उम्दा खूबसूरत
[10:02]में यार पेश किया है रसूल ने भी है और मलाई कैनात
[10:05]ने भी और तमाम आई मैं अतहर ने भी ई है और
[10:10]खुद जनाब सैयद आज के दिन की याद मनाने हम यहां बैठे
[10:13]हुए हैं उन्होंने भी ए नेचुरल आपको लाभ उठाकर मलाई ऐड करें
[10:19]फ्लेम अत्याचार के दरमियान कि जो तीसरा हिस्सा है कि न्यूज बालाघाट
[10:24]तीन हिस्सों पर अवनी है 235 की तिथि जा सकते हैं उसके
[10:29]के जिससे यदि नहीं किए हैं है कि पहला पॉइंट जो है
[10:34]खुदा पर मबनी है दूसरा पाठ जो है दूसरा हिस्सा खुद तू
[10:40]तो लेटेस्ट पर और तीसरा हिस्सा जो है कि लीमा से हिसार
[10:42]छोटे-छोटे जो है वह हकीमाना जो है कलाम ने ने कहा कि
[10:47]माना कलाम के दरमियान मलाई जब करें मुझे और आपको मेरे यार
[10:51]मिलता हुआ नजर आता है को तैयार ली है मामला और बतलाइए
[10:58]आलम आप की निगाह में कौन है और जाहिल कौन है यह
[11:05]बहुत ही प्यारे अंदाज में मुक्तसर मगर जाम अंदाज में जवाब दिया
[11:11]है कि अगर यही समझ में आ जाए तो आज की गश्त
[11:12]करती है इस मौजूद के हवाले से अ हैं और अपने ज़माने
[11:16]को मैं और आप देख सकते हैं हुआ है कि क्या हमारा
[11:21]दौर कैसा दौर है और हम इस दौड़ से किस तरह से
[11:27]गुजर रहे हैं जाहिलियत का दौर है बहुत इमारत के साथ या
[11:33]यह माना दौर है कहते तो हम सब अपने आप को यही
[11:36]है कि हम डॉक्टर हैं हम इंजीनियर हैं हम फलां अहम फल
[11:38]एवं फल आएं यानि और ऑल एजुकेटेड है है लेकिन बात है
[11:44]ने जो कट है हम या नहीं मौलाना फरमाते हैं की माला
[11:49]कहते लायो ओरल जाहिलों इला मोहरे तनाओ बुखार रहता वो बहुत ही
[11:59]खूबसूरत है को हमेशा याद रखने वाला मतलब कि इसको जो अ
[12:02]मैं और आप फैमिली तौर पर जो अपना सकते हैं पर अपनाना
[12:07]चाहिए कि हम उससे दरियाफ़्त किया है मौला फरमाते हैं ए क
[12:14]जाहिल कौन है और आलम कौन का सुनो आप अ ए लाइव
[12:19]ओरल जाहिलो इलम उभरे तनाव बुखार रहता ए क जाहिल वह नहीं
[12:27]वह गौर से सुनिएगा बहुत लतीफ और मजेदार और मीठा मतलब है
[12:31]और जाहिल वह नहीं है कि के जिसके जिसे अलिफ बे नहीं
[12:38]आता लिखना और पढ़ना है और जाहिल वह नहीं कि जिसने स्कूल
[12:43]नहीं देखा है जिसने कॉलेज नहीं देखा जिसने में यूनिवर्सिटी नहीं देखी
[12:50]ना और जाहिल व है कि जो जाहिर तौर पर पढ़ा लिखा
[12:53]है मगर जब काम को अंजाम देता है इस टेप लेता है
[12:59]हैं तो उसके अंदर तवाज़ुन बाकी नहीं होता कि जिस काम को
[13:06]जो है वह शुरू करता है या हद से ज्यादा बढ़ा देता
[13:09]है यह ज्यादा घटा देता है अ बैलेंस में नहीं रखता है
[13:15]मिसाल के तौर पर अ में गुफ्तगू कि जब कलाम का मौका
[13:23]आता है तो ज्यादा रवि करता है इतने अल्फाज या इतने जो
[13:28]मामला हत्या इतने सेंटेंस इस्तमाल करने की जरूरत नहीं है और अगर
[13:31]जरूरत है तो मौजूद के तहत है है लेकिन जनाब आगे बढ़
[13:39]जाते हैं हैं या फिर इतना कलाम करते हैं कि क्या उससे
[13:43]ज्यादा कलाम की जरूरत है लेकिन जो है मामूली सा कलाम अदा
[13:48]करके के जिसके जाल साथ मोहम्मद नहीं होता है और दूसरी मिसाल
[13:53]हम अपनी जिंदगी की विशाल ने को 14 साल पहले नहीं बल्कि
[14:01]जनाबे आदम से लेकर अब तक ता कयामत हरकतें एक जैसी हम
[14:06]सब कि यदि हमारे यह जो एक्टिविटीज हैं वह सब एक जैसी
[14:10]हैं कि नींद करने के हवाले से है सोना है नीम करना
[14:17]से ज्यादा रवि करता है इंसान या कम रवि करता है है
[14:22]कि आप बहुत ज्यादा सो जाता है कि मामलों में के क्या
[14:28]होता है उसके बाद हैं या बिल्कुल नहीं जनाब सोते नहीं कि
[14:31]उसका रिजल्ट भी जो नेगेटिव है और मालिक क्या फरमाते हैं ही
[14:38]कारगर खाना खाओ तो हद से ज्यादा नहीं आ कि खाना खाओ
[14:45]तो हाथ से कम नहीं आ के लिबास पहन ओं और तो
[14:54]और जो है इसलिए मांस को ओवर मत करो दरमियाना रखो तुम्हारे
[14:59]मआशरे के जो है नुक्ता भी को कह ऐसा ना हो कि
[15:06]उंगलियां उठें ओवर कर दे कि इंसान समझता है कि शायद जो
[15:11]काम में बहुत अच्छा लग रहा हूं है लेकिन वह व होने
[15:15]की बजाय लो हो जाता है ओके जाता है के लोगों की
[15:21]उंगलियां उठती हैं हैं या बिल्कुल खुदा न खास्ता लिबास ना पहने
[15:24]नींबू और है ना तब भी लोगों की उंगलियां उठती हैं वो
[15:31]मासूम ने मौला ने हमारे किचन के हम चाहने वाले हैं कुछ
[15:37]नहीं यार दिया है ए क तवाज़ुन हम है इल्म का अ
[15:43]हुआ है अ बैलेंस नाम है नॉलेज का अ कि वह कॉलेज
[15:51]और वह ऑयल यह Vaseline है में अब पाइए थोड़ा सा जनाब
[15:58]सैयद आपके जो है जमाने को देखते हैं और फिर अपने जमाने
[16:00]को टेली करते हो उसके साथ तो फिर कोई जुड़े दोहराएंगे हम
[16:07]कि जाहिलियत का दौर है या आलय माना दौर अ कि इस
[16:11]पैमाने पर जो पैमाना मौला ने पेश किया है में चलावे सैयद
[16:17]आपके दौर को देखते हुए स्पेशली तौर पर जो मौजूद हमारा रसूले
[16:23]खुदा की रहमत के बाद 9th रसूले ख़ुदा का जो जमाना रहा
[16:29]और वह भी स्पेशली तौर पर 13 इस साल का दौर के
[16:33]अनुसार लिए कुरान का दौर है हैं बैलेंस दिखाई दिया अलबत्ता आउट
[16:40]होता हुआ नजर आया मगर रसूले खुदा की जिंदगी जाहिर तौर पर
[16:43]बातें नहीं तौर पर लोगों ने मुलाहिजा किया अब बैलेंस को चाहते
[16:49]हुए और न चाहते हुए बरकरार रखने की कोशिश की गई थी
[16:53]है लेकिन जैसे ही रसूले खुदा इस दुनिया से रुखसत हुए नहीं
[16:58]है और जनाबे सैयदना की जिंदगी जाहिर तौर पर मार के की
[17:04]है और जेहाद की शुरू हुई नहीं है और तारीख ने मुझे
[17:12]और आपको बयान किया में दबंग का धमाल का फैसला खुद आपको
[17:17]गुजरे हुए चैन दिन नहीं गुजरे थे चंद साल नहीं में चल
[17:23]महीने नहीं कि कुछ दिनों के अंदर कि चेंजिंग आई और उस
[17:29]चेंजिंग को जो अ किस तरह से जनावे सही अदांजा हाईलाइट किया
[17:33]है है और वह जो है किस तरह से आविष्कार हुआ जलावे
[17:37]सैयदना के गिरिया जारी हुई एक और मौला-ए-कायनात के साथ बैठकर उन
[17:45]तमाम चीजों को शहीद किया है कि जो बाबा के जमाने में
[17:51]जो है दीन की निस्बत अल्लाह की निस्वार्थ और हाथ के नेटवर्क
[17:53]तमाम चीजें का शिकार थी और जैसे ही कहते हैं कि हमारे
[17:59]बाबा गए नहीं और वह बिल्डिंग पूरी हक की नीचे आ रही
[18:02]है में चलावे सैयदना ने वह सारे डॉन दाउद से जो है
[18:08]इस मतलब कुछ हुआ शिकार किया है यह मतलब हुआ है है
[18:14]कि जो आयत हमने आपके सामने पड़ी है सूर-ए-अनकबूत आयत नंबर 69
[18:21]है वल्लरी नजारा हद यू पीना लर्न अध्ययन होम्स बुलाना है कि
[18:27]इन अल्लाह माशा ग्रीन डे में मौजूद के तहत हमने आयत का
[18:36]इंतखाब किया है कि जनाब सैयद वंश किस तरह से फाइट किया
[18:38]है किस तरह से फेस किया है इन तमाम उम्र को किसको
[18:44]कहा जाए इन हेर आफ वज्र आईजी और रास्ते से और हक
[18:49]के रास्ते से दूर हो जाना है याद रखिएगा जानेमन चैनल के
[18:54]हवाले से बताते चलें हैं है कि जो उनका लव जब हमारे
[18:59]और आपके जहन में आता है यह हमारे और आपके कानों से
[19:00]टकराता है तो इसमें और आप जो है फौरन उसकी मीनिंग क्या
[19:04]करते हैं ने असलहे के साथ लड़ना तो जंग जाल जॉब याद
[19:14]रखिएगा को जन्म देगी समिति हैं और मुमताज़ आब फाइट फेस टू
[19:22]फेस होना कि वह कम हो ना हां सिर स्लो है के
[19:25]साथ नहीं है है बल्कि एक और भी उसकी सूरत है है
[19:29]और वह सूरत है किरदार से जंग लड़ रहा हूं कि अखलाख
[19:35]से जंग लड़ना है है और याद रखिएगा जानेमन सब जानते हैं
[19:42]और आपसे रिमाइंडर है असली है कि जंग जंग नहीं है कि
[19:44]अगर कोई जाहिर तौर पर उस पर फतह हो जाए उस मैदान
[19:48]में तो उसे पाते नहीं कहा जाता है अ कि फतेहजंग हुआ
[19:54]करता है कि जो अपने अखलाख से दूसरे को मात कर दे
[19:58]तो है इसीलिए जो रसूले इस्लाम की निस्बत ख़ुदा वंदे आलम ने
[20:04]सूर्य कलम के अंदर की आयत नंबर चार जैसे हम पढेंगे हमें
[20:09]यकीन है कि आप में अक्सर उसके ऑफिस भी इन नकल आंखों
[20:12]लोकनाट्य दिन अ ने कहा मेरे हबीब आप फॉलो के अधीन की
[20:18]मंजिल है परफारमेंस हैं और खाली शाहिद को रखें और रसूले खुदा
[20:25]की जिंदगी को देखें तो कि अगर रसूले खुदा ने 40 साल
[20:30]के बाद रात्रि है वहीं को लेकर वहीं को पहुंचाया तो वहीं
[20:35]को नहीं पहुंचाया बल्कि अपने अखलाख की बुनियाद पर इस्लाम का लोहा
[20:42]मनवाया है है कि एक कन्फर्म है कि यादव जनाब सैयद आपको
[20:48]वह दिन याद आ रहे हैं रसूले खुदा की रहमत के बाद
[20:54]बाबा की हालत के बाद तरह सूर्य उदय के अंदाज को जब
[20:55]देखा बीवी ने अपने घर में रहकर शादी से पहले अ कि
[21:02]जब शादी हुई तो अमीरूल मोमिनीन कि हयाते तय्यबा को देखा अ
[21:08]है और शादी के दौरान जब बाद में को चलता गुजरात अपने
[21:13]बच्चों की सूरत में उन्हें तमाम मुतालिक को देखा एक नशे से
[21:19]हमारी वरना जो है बहुत कुछ कहा जा सकता है लेकिन जो
[21:21]इसी एक नशीद के लिए हाथ से मैं और आप थोड़ा सा
[21:24]उन्मत्ता लिप को भी जानने की कोशिश करें तो मैं कितना भी
[21:29]सैयदना ने अगर मुबारक किया है कब्ज रवि का जाहिलियत का कि
[21:36]जो दोबारा पलट कर आई थी कि वह बैलेंस और तवाज़ुन आउट
[21:38]हो चुका था जनाब सैयद आपने किस तरह से फाइट किया है
[21:44]किस तरह से फेस किया का जवाब इसका बहुत ही सामने का
[21:49]है और आसान मगर अमित ओं है और वह है अखलाख लाहौर
[21:57]अखलाक किरदार किरदार और किरदार की जंग इस दिव्य तक बात आ
[22:02]गई जानेमन तो खुदा इस आयत करीमा में क्या कहते है कि
[22:06]वल्लरी ना जहां दुखी ना हो ए क जिन लोगों ने जिहाद
[22:14]किया और कोशिश की यानि जंग की कि हमारी निस्बत है कि
[22:21]हमें पाने के लिए अ ए लन हल्दी या ना हम्म शोभा
[22:30]लाना है है तो हम ऐसे आप रात को अपने एक रास्ते
[22:34]की निस्बत नहीं दो रास्ते की निस्बत नहीं तीन रास्ते की रिश्वत
[22:39]नहीं आ है अरबी ज़बान में कम-अज़-कम जमा तीन पर मबनी है
[22:43]कि मैंने तीन एक चीज टीम तादात्म्य हो तो उसे कार्य यह
[22:49]धमाका सीखा है फुल और है 200 बोला न सभी बिल सिंह
[22:55]भुल्लर है और सुलाना पिलर है का ऐसा चस्का जो हमारे रास्ते
[23:01]में जात करता है ना एक नहीं दो नहीं तीन तीन और
[23:03]तीन से ज्यादा रास्तों की निशानदेही करते हैं और जनाब सैयद से
[23:10]बढ़कर जिहाद करने वाला कौन होगा अ से ज्यादा जो है जात
[23:16]किया तो कैसे किया अब सुने अ एक बाप के घर पर
[23:23]रहकर इधर के घर पर रहकर वह मतलब सीखा कि जिस तरह
[23:27]से जंग करनी चाहिए वह जंग शुरू की है और घोषित तौर
[23:31]पर अपने शहर के घर पर आकर अ कि आज के मर्दो
[23:38]की निस्बत भी आज की ख्वातीन की निस्बत भी उस बैलेंस को
[23:45]बयान किया कि जो बैलेंस एल्बम की निशानी है और जिसके पास
[23:48]भी हममें से वह बैलेंस होगा वह आलिम है और अगर हमारे
[23:54]मुअशरे मे यह बैलेंस दिखाई दे तो वह अक्षरा कि चाहे लिया
[23:58]तो आलावा शर्म नहीं आई लव माय नमः शिवाय अगर बैलेंस दिखाई
[24:05]दे तो तो आइए शुरू करते हैं मुकद्दमा के तौर पर जनाब
[24:07]सैयद है कि जिंदगी को अपने वालिद ग्रामीण के घर के अंदर
[24:17]अ कि मुलाहजा करें चंद साल की है वह जिसको मैं और
[24:19]आप अपने बच्चों की जरूरत कहते हैं यह तो बच्चे हैं से
[24:24]पहले क्या खबर है है लेकिन जनाब सैयद आप इसी जो 10
[24:32]साल की है लेकिन सब कुछ है जानती हैं कि वह मार
[24:36]खा जब मालूम है मुझे और आपको कि जब पहली वह्ई नाजिल
[24:40]हुई और रसूले खुदा ने अपनी जॉब को शुरू किया अपने काम
[24:45]को शुरू किया तब लिख के काम को है तो तकलीफ के
[24:49]लिए जाते कूला इलाहा इलल्लाह तो फ्लेवर कहते नहीं ए पत्थर से
[24:55]जो है आपको लहूलुहान किया जाता आ और जब वापस आते पलट
[25:02]कर आ रही नन्ही सी बच्ची अपने बाबा को लहूलुहान हालत में
[25:07]देखती हो की मरहम-पट्टी करना शुरू करती ड्रेसिंग करती 9th रसूले इस्लाम
[25:14]को अपनी वालिदा ग्रामीण याद आती है का दिमाग तो नहीं थी
[25:23]ना ने क्या कहा और मारूफ कलाम है रसूले इस्लाम का जनाब
[25:26]सैयद की निष्पक्ष के जो हम पहले मेंबर से सुनते हैं जाकर
[25:32]आने वाले व्यक्ति सुनते सब कैसे आप जब फातिमा तो उन्हें अभी
[25:35]हा हा है एहसास आती रसूले इस्लाम ने यह कली माता नहीं
[25:42]किए थे है बल्कि इस बच्ची के किरदार को देखा है रूहानियत
[25:47]और पर है और उसे आविष्कार किया है रसूले इस्लाम ने मामा
[25:52]यंत्र को अनिल हवा इन हुआ इलावा यह की जड़ जवान है
[25:57]और निशान है यह है कि फातिमा अपने बाप की मां है
[26:04]और अपने बाप की मां के बाप कौन है इस समय मुरसलीन
[26:09]है लेकिन जो योजना पर शहद और कारोली है लेकिन यह थोड़ा
[26:14]सा आगे यहीं से मैं और आप जो है बैलेंस को ले
[26:19]सकते हैं कि अपने बच्चों की निस्बत अगर तबीयत करना मकसूद है
[26:21]कि है जो तो फिर यही तवाज़ुन जो अपने बच्चों को जो
[26:27]कि हम सिखाए और जो है वह तालीम दे और तबीयत है
[26:31]मैं तुम्हें अपने मां-बाप के साथ किस तरह से रहना है मां-बाप
[26:37]खुशी तौर पर अगर बूढ़े हो है तो किस तरह से बर्ताव
[26:45]होना चाहिए उनके साथ उस भाषण को अगर देखें इन हेर फिफ्थ
[26:51]हद से ज्यादा कि मां-बाप का स्त्राव नहीं था कि चोटों को
[26:55]बड़ों का विश्राम नहीं था कि बड़ों ने अपना किरदार ऐसा पेश
[27:01]किया नेगेटिव की छोटी भी जो तबीयत यात्रा ना हो सके तो
[27:03]है लेकिन जनाब सैयद ने अपने किरदार के जरिए से मुझे और
[27:08]आपको आज भी इस किरदार के जरिए से राहनुमाई करना चाहा है
[27:15]कारगर हमारे मानने वाले हमारे चाहने वाले हो तो अपने मां-बाप का
[27:19]ऐहतराम करो और उसे जो इज्जत 21 मतलब बहुत कुछ कहा जा
[27:24]सकता है आइए जनाब ए जो शायद आपको शहर की जिंदगी की
[27:26]निस्बत वह इन्हें राहत के जो उस जमाने के अंदर नजर आती
[27:32]है कि एक औरत कानेदार औरत अपने शौहर की निस्बत किस तरह
[27:39]से बिहेवियर रखती थी अ है अलबत्ता इस बात को नहीं रोकूंगा
[27:47]फरामोश मत कीजिएगा यह जंग है जनाब सैयद का कि अ कि
[27:49]उनका द्रव्यों के मुकाबले पर आज के जो दूर नहीं हो सकती
[27:54]मगर इस साइट के जरिए से से और अस्सलाम घर उठाती हरगिज़
[28:01]हरगिज़ वह काम अंजाम न पता कि जो अपने किरदार और अमल
[28:06]के जरिए अंजाम दिया गया 84 के घर पर तय की जाती
[28:11]हैं मैं तो बोला ऐसा करें और मैं और आप सब जानते
[28:13]हैं फिर दोबारा उस करेंगे लेकिन याद रखिएगा कि आई माता क्रीम
[28:19]के औकात को या इवेंट्स को जो मनाते हैं शहादत और विलादत
[28:24]के जरा बीच सैयदना की शहादत और विलादत के जो आइए हम
[28:26]हम मनाते हैं यह मनाना बढ़ाएं मनाना ना हो है लेकिन अफसोस
[28:33]के साथ कहना पड़ता है कि यह बहुत सारी बातें हादीस इन
[28:37]दिनों के अंदर इन औकात के अंदर हम जो सुनते हैं हमारे
[28:39]जैन के अंदर मौजूद हैं है लेकिन हम अपने लेकर हैं आप
[28:46]बस दुआएं हैं है उसका असर हमारे उत्पाद दिखाई नहीं देता है
[28:52]हो तो यह याद रखिएगा रसूले इस्लाम का वह फरमान है कि
[28:58]जिम में और आप बार हां दरबारा सिंह चौराहा सोपी नया में
[29:04]जनाब सैयद की निस्बत सैयद तो मिसाइल आलमीन अ तो बिल्कुल पहलू
[29:10]को पहलुओं एक और भी फरमान है ऐसा ही थोड़ा से डिफरेंस
[29:15]के साथ सैयद तो निशान है अश्लील जनना ह कर दो तो
[29:20]कभी मैंने और आपने कॉल किया है कि रसूल ने ने अपनी
[29:26]इस बेटी की निस्बत यह कलाम पिता राणा अंजाम दिया है है
[29:33]या उलूहियत के साथ अंजाम दिया है मानवियत के साथ कि कमाना
[29:39]कहना क्या चाहते हैं क बहुत सामने की बात है ए रसूल
[29:44]यह कलाम अपनी बेटी की निस्बत पिता राणा अंदाज में नहीं कहा
[29:49]है कि बेटी है और आपने जो तारीफ कर डाली थी के
[29:53]बल के जवान महेश्वर वह मानवीय तो रूहानियत है बाद 10 तालीम
[30:00]व तरबियत के है कि जब बच्चा जयपुर ऑन हो चढ़ता है
[30:03]तालीम व तरबियत के साथ तो इसके रिजल्ट कब मैं और आप
[30:09]इंतजार करते हैं तो कभी खुदा ना खास्ता नेगेटिव देखते हैं और
[30:12]कभी डर पॉजिटिव अ कि रसूल ने अपनी बेटी का जो है
[30:20]बेहतरीन किरदार देखा फौरन कहा सैयद तो निषेध लेकिन उस वक्त के
[30:23]लिए नहीं आज भी है कि वह क्या है दूसरा लहसून फरमाते
[30:29]हैं यह मेरी बेटी सरदार है सरदार और रहता है तुम सब
[30:31]कि अब रसूले खुदा की जिंदगी के बाद शहर की जिंदगी के
[30:38]अंदर देखेंगे कि रचावे सैयदना ने किस तरह से फल और फलाहार
[30:44]खजूर बीजों का मुकाबला की है के मानक घर में तशरीफ लाते
[30:53]नहीं है मगर सुकून का अहसास करते हैं कि मेरी और आपकी
[30:57]जिंदगी बीत मलाई सरकारें अपनी जिंदगी को थोड़ा सा आसान करते इस
[30:59]मतलब को कि हम कहना चाह रहे हैं मैं सुबह से शाम
[31:04]तक जैम मैं और आप थके थके घर आते हैं ए पप्पु
[31:09]मुमकिन है कि भाषाओं का जो कि हमारी हालत और सिचुएशन बिल्कुल
[31:14]ठीक होती है कंडीशन बस उक्त विचार आ जो इंसान बाहर जो
[31:16]परेशानियां होती हैं घर लेकर आता है है क्योंकि परेशानी में मुब्तिला
[31:24]होता है ज्यादा जो है घर पर भी आकर जैसे चैन की
[31:25]नींद नहीं मिलती है है लेकिन अगर घर की हाथों ने खाना
[31:32]भी मुनासिब और माकूल सुकून फ्रॉम करने वाली तो बाहर का जो
[31:40]मुश्किलात हैं बाहर की जो परेशानी है वह घर पर आकर जो
[31:43]है दूर हो जाएगी है मौला की भी कैफियत कभी-कभार ऐसी हुआ
[31:48]करती थी सुबह से शाम तक बाहर होते जब घर तस्वीर फल
[31:54]आते तारीख में कोर्ट किया है कि हमारी स्पीड कम करती है
[32:01]इसको 9th मौला घर पर आते नहीं घर से बाहर परेशान लेकिन
[32:04]जैसे ही जो है मौला फरमाते में घर पर आता नहीं सैयदना
[32:10]ने घर के माहौल को ऐसा किया हुआ है यह ली अपनी
[32:15]तमाम मुश्किलात को फरामोश कर देता है कि यह रोल मॉडल कि
[32:21]यह सैयद आगा सैयद होना कि आज हम अपने स्वास्थ्य केंद्र देखें
[32:28]का बैलेंस है है या बैलेंस नहीं है इस बार की परेशानी
[32:38]तो परेशानी होती है बौद्ध महासभा के साथ हैं का मौसम घर
[32:44]पर तस्वीर लाते नहीं परेशानी दो चंदन हो जाती है अच्छा वो
[32:50]कैसे होती है जब तक संसार हक ना समझे हम तकरीर कर
[32:54]रहे ना समझा प्रकार की सुनना पशुओं को इफैक्ट्स ओं कि मातरम
[32:59]मुमताज और सुबह से शाम तक के मौसम तशरीफ़ लाएं तो डिमांड
[33:04]पर डिमांड अ मैं अपनी परेशानी का इजहार कर दिया और मस्जिद
[33:11]कर दो कि अक्षय ने है कि यह चीज भी मुझे और
[33:20]आपको मिलती है तारीख में जनाब सैयद 10 है और 1 मर्तबा
[33:24]तस्वीर अप्लाई मौला के पास गुफ्तगू यहां पर गुफ्तगू के दौरान का
[33:30]हेली ई कि मुझे अल्लाह से शर्म आती है तो क्या अगर
[33:39]आपसे मैं किसी चीज की डिमांड करूं और वह आपके पास देने
[33:42]के लिए ना हो है आप यकीन कर जानेमन जब भी जो
[33:52]जितनी मर्तबा कि जब मैं सोचता हूं इसे टिप्स कहती है तो
[33:55]जाती है एक समय था कि सोच पर हैं अच्छा यह किरदार
[34:00]एक ऐसा किरदार है क्या चाहिए जवाब इसका मुबारक जा है और
[34:11]फाइट करना है कि उन गलत रसूमात का कि जो इंटरनल हमारे
[34:15]घर के अंदर मौजूद हैं आज केक औरत को कैसा होना चाहिए
[34:24]अब आइए एक काली औरत के लिए यहां पर यह मिजाज पेश
[34:25]नहीं किया है जनाब सैयद अपने किरदार पुष्टि की है है बल्कि
[34:31]हम मर्दों के लिए ब्रा अनुमान है वह कैसे कि एक औरत
[34:37]जनाब सैयद अपने इस किरदार से जाहिर तौर पर पेश कर रहे
[34:42]हैं कि और कैसा होना चाहिए कि आपने जो विशाल को तकलीफ
[34:45]ना दे दे है यानी आप अपने शहर के मिजाज से वाकिफ
[34:52]हो उसकी दर फीचर्स से वापस हो तो थे उसके उठने बैठने
[34:56]से वापस हो हल करो से कोई तकलीफ लायक ना हो औरत
[35:01]के किरदार से औरत की हक़ीक़त से के मरीजों के लिए क्या
[35:06]है कि बिल मुकाबिल मर्द को भी चाहिए कि किस कोई एसिड
[35:11]डिमांड न करें अपने हाथों ने खाना से अ है जिससे वह
[35:17]दबाना कर सकती हो कि यह मतलब अ या थोड़ा सा आगे
[35:23]जाएं तो कि हम और आप मर्द हैं आपस में किसी ऐसी
[35:25]चीज को तत्कालीन ना करें किसी से है कि जो ना दे
[35:31]सके अब कि रिवायत के दरमियान में जो रिवायात है आज तक
[35:39]किसी से ऐसा सवाल मत करो कि वह जवाब देने के लिए
[35:43]आज से शर्मिंदा हो जाए अब कि चीज तो दूर की बात
[35:46]है पैसा तो दूर की बात है मैं किसी से ऐसा सवाल
[35:52]ना करो कि यह सवाल का जवाब न जानता हो और वह
[35:58]शर्मिंदा हो जाए रुसवा हो जाए यह मतलब में बहुत सारे मसाले
[36:04]में अ में चलावे सैयदना की जिंदगी को मैं और मुझे अपने
[36:08]आप में साक्षर जो उन तमाम बातों को जानते हैं कि जो
[36:12]मैं पहले मारपीट करते रहते हैं जाकर आने वाला बैग पेश करते
[36:17]रहते मुखतलिब दस्ताने मुख्य अतिथि छायावाद मुखालिफीन अकबाल हैं जिसमें से एक
[36:23]मतलब यह है कि रसूले खुदा मदीना छोड़ते नहीं मगर जो यह
[36:28]आ शरीर व है जिसे वह टच करते हैं खुदा हाफिज जी
[36:34]के लिए वहां पर सैयदना कथा है लेकिन जब वापस आते तो
[36:39]पहला घर चला विषय का ठीक मैं इसी तरह से 1 मर्तबा
[36:45]सफर के दौरान हो गए खुदा हाफिज किया वापिस आए हस्बे मामूल
[36:48]जनाब सैयद आपके घर हम सब जानते हैं 93 सैयदना के घर
[36:53]जा पहुंचे हैं जब क्योंकि निकले थे रुखसत हो कर तो ना
[36:58]परदे लगे हुए थे ना कोई आ रहा है इस टीम ने
[37:02]कोई डिवाइस अयोध्या वापस पलटे हैं तो परदे लगे हुए हाथों में
[37:06]कंगन भी है 9th 16 quora के मिजाज को पहचानती थी जनाब
[37:09]सैयद अब कि जब वापस आई हैं जब वापिस आए रसूले इस्लाम
[37:16]रसूले खुदा थोड़े से जो है चेहरे पर जो है अजीब सा
[37:24]अंदाज था को सलाम दुआ हुई उसके बाद मस्जिद में चले गए
[37:27]अब का निशान सिन्हा उत्तर प्रदेश उतारें पहचान गई थी यह कंगन
[37:34]उतारे तरह इस्लाम में कुर्बान हो हुआ है कि कबीर चीज याद
[37:41]गर्ल्स देती है में चलावे सैयदना ने इस किरदार के जरिए से
[37:44]किस तरह से रोल प्ले किया इन्हें राहत के मुकाबले पर क्यों
[37:50]हम इन छोटी-छोटी बातों को प्रमुख कर जाते हैं कि कोई बहुत
[37:55]बड़ा फ़लसफ़ा नहीं है को बहुत बड़ी सियासत नहीं है है मगर
[38:00]है ने सियासत है अ है मगर ये ने सियासत है है
[38:06]और वह सियासत कैसी है कि रसूले इस्लाम के मिजाज को देखा
[38:12]तो रसूले इस्लाम ने जो अपने जो है इस चेहरे के अंदाज
[38:14]से बतलाया है बेटी सैयदा इस्लाम का आलम देखो कैसा मुसलमानों की
[38:23]कैफियत देखो कैसी अब सोनिया और से अ थे उस गांव में
[38:27]एक अजनबी सैयद आखिर इस किस्म के रोल को प्ले कर रही
[38:32]थी रसूले इस्लाम का दौर भी गया दो किस्म के तब तक
[38:34]नजर आते हैं जो आज भी है में एकत्व का हावी है
[38:42]दूसरा तब का मतलब है में एक तांबे का वह के जो
[38:48]काले है और ही वह सरमायादार अ हां मुझे मालूम है अंडरस्टुड
[38:57]है पुकारा नादार हैंड टो माउथ जनाब सैयद आने कि इस रोल
[39:01]को भी प्ले किया है और मोबारसा किया जंग की अपने किरदार
[39:07]के जरिए अपने अमल के जरिए से वह क्या की शादी हुई
[39:10]नहीं हम सब जानते हैं एक नया जोड़ा तैयार हुआ मैं अभी
[39:16]से वेतन किया नहीं था है वहीं जो है नया जोड़ा दुल्हन
[39:23]का की राहे ख़ुदा में दे दिया अ है जबकि उस जमाने
[39:27]में सरमायादार तरीन अपराध मौजूद थे था और किचन वाले गरीबों को
[39:32]और गरीब करना चाहा ना देखकर उ कि आज भी देखें कि
[39:38]मैं और आप जनाब सैयद है कि इस किरदार से क्या ले
[39:42]सकते हैं और फाइट कर सकते हैं कि अगर अल्लाह का दिया
[39:47]हमारे पास है और अगर हमारे पड़ोस में हमारे जीवों में खुदा
[39:51]ना खास्ता अगर कोई ऐसा शख्स है जो नादार हो जो जरूरतमंद
[39:55]है वही और हम उसकी निस्बत जो कुछ कर सकते हैं के
[40:00]दामों में दे रमेश शहाणे अ लिए हमें चाहिए कि जो क्या
[40:05]उसकी मदद करें मुद्रित करें कि यह मतलब अब आइए जनाब सैयद
[40:11]ने अपने बच्चों के जरिए से किस तरह से रोल प्ले किया
[40:13]इस इन्हें राहत का अ में चार बच्चे जो हैं चना पर
[40:24]सैयदना के अच्छा-अच्छा कितनी सिंह साल में जो जनाब सैयद है इस
[40:27]दुनिया से रुखसत वह सब जानते हैं 18 साल कि अगर यह
[40:33]पूंछा जाए एक दूसरे से 18 साल का सिम नो साल कोई
[40:38]है यह अनुसार है या नहीं है कब अच्छा होता है अपितु
[40:43]ओं है और खासतौर पर जब जो है बच्चियों की शादियों के
[40:45]लिए जो ये कहा जाता है कि भई बच्चे की शादी नहीं
[40:49]करना आपको कभी तो 18 साल की यह बच्ची है खेलने-कूदने के
[40:57]दिन है है लेकिन जनाब सैयद ने 18 साल में की शादी
[41:00]कि बच्चे अ और बच्चों की तबीयत दो बच्चे हसन अहमद सलाम
[41:08]की सूरत में और दो बच्चियां जनाब विजयनगरम में कुलसूम की सूरत
[41:14]में है की मां इश्वरी के हवाले किया है को खाली उस
[41:18]वक्त के मशविरे के नहीं ता कयामत आने वाले मोचरे इंसानी वष्रा
[41:25]उनके हवाले किया हैंडओवर किया है है लेकिन ताज्जुब होता है जर्मन
[41:29]अब हम यह कहते हैं आप की बच्चियों के नेटवर्क के 18
[41:33]साल है बच्ची है अभी यहां यह तमाम कामों को अंजाम देने
[41:40]के बाद अल्लाह की रानी है है और ऐड ने इंसानियत का
[41:45]मेल खुद पर अपने बच्चों को भी निशाने का हमला करार दिया
[41:48]आप जानते कभी गौर किया है मैंने और आप यह कैसे हुआ
[41:52]मौजूदा है है या नहीं है बल्कि आस्तीन ऊपर करना है कमर
[42:00]बस्ता होना है दो कामों को अंजाम दिया है कि एक तालीम
[42:04]और दूसरे तबीयत है है और यह इंसान खाली जो है नहीं
[42:10]कर सकता मगर जब तक खुद जो है किसी से तालीम नली
[42:14]हो और जब तक जो है किसी से तबीयत ना पाई हो
[42:15]जनाब सैयदना ने अपने मां-बाप के घर पर तालीम को पाया है
[42:25]तबीयत को है जो सीखा अपने बाप को देखकर सीखा था है
[42:29]कि जो रसगुल्ले आजम है जो तबीयत पाई अपनी वालिदा ग्रामीणों को
[42:35]देखकर है ऐसे ही जो रसूले इस्लाम ने नहीं कह दिया फातिमा
[42:42]तो उन्हें अभी हां है और जब वह परदे उतार कर दिए
[42:47]गए तो जो रसगुल्ले सामने क्या कहा फौरन फायदा हां बुआ का
[42:51]फातिमा का बाप फातिमा पर कुर्बान हो जाए तो कि अ जानेमन
[42:59]इन सब चीजों को समझते हैं यह सवाल आपकी तरफ से हम
[43:04]खुद करते हैं हम आपसे सवाल करते हैं और हम और आप
[43:07]मिलकर जो अल्लाह से और अलग रसूल से सवाल करते हैं यह
[43:09]क्यों कर होता है ऐसा आ में बहुत आसान दूसरा सवाल अब
[43:15]हम आज के ज़माने में यह मुर्खता लिप इन्हें राफी चीजें जो
[43:18]देख रहे हैं कि तवाज़ुन नहीं है बैलेंस आउट है तो इसे
[43:24]बैलेंस देने के लिए क्या करना होगा का अपने आप से शुरू
[43:29]करो तो हैं जो अपने आपको तैयार कर लेता है वह दूसरों
[43:32]को तैयार करना उसके लिए आसान हो जाता है मैं जब अंदर
[43:36]से खाली हूं तो दूसरे को कैसे भरूंगा कि यादव जो है
[43:43]सोनिया जानेमन बहुत कम मतलब बहुत ज्यादा है दो चीजें जो यह
[43:49]मेरे और आपके लिए वसीला इन तमाम चीजों को पाने के लिए
[43:54]अ कि एक विमान और दूसरे हमारे इस वाले हैं और सुरेंद्र
[44:00]हल आयत नंबंर 07 को ख़ुदा क्या कहता है मैं नाम मेला
[44:10]साल यह निंजा करीना कुनसा अ कि जो भी तुमने से ने
[44:16]कमल अंजाम दे चाहे वह मर्द हो या औरत वह मोमिन इस
[44:21]पर गुस्साए विमान हो बाल कहना क्या चाहता है कई मांग की
[44:27]बुनियाद पर जो भी ने कमाल अंजाम देगा उसे इस दुनिया में
[44:31]भी और आखिरत में भी ज्यादा दूंगा मैं अब ज्यादा क्या है
[44:37]व लॉयन हुआ आयतन तैयवा अ का काम ऐसे इंसान को या
[44:46]ऐसी खातून को पाक को तैयार वह सफेद जिंदगी करेंगे अ के
[44:51]साए में तब्दील मिर्जा ने इस मुकाम पर कहते हैं कि यह
[44:55]पाव को तैयब जिंदगी जो है आखिरत मैंने यहीं पर है है
[44:59]और अगर उसकी नींद आपको जानना चाहें बतौर हातम तो जनाब सैयद
[45:04]है कि जो जिंदगी है कि वह कैसे कि 18 साल की
[45:13]जिंदगी है है लेकिन काम कैसा किया है हो ता कयामत आने
[45:19]वाले इंसानों की रिश्वत का काम अंजाम करके चली गई थी कि
[45:22]हमारे दरमियान अगर हमसे कोई पूछेगा मैं आपसे पूछूं यार हमसे पूछें
[45:27]है कि आपके आवाज याद में जो है किसने दिया था धूम्रपाई
[45:31]का फल आने का कितनी है इस हर साल हम क्या करेंगे
[45:37]आपसे का माशाल्लाह बार अगर जिंदगी पाइए यानी सौंठ साल हमारी दानिश
[45:43]में बरकत है को वर्कर 18 साल हो तो की जरूरत करेंगे
[45:53]हम कहने की कुछ को चढ़ा विषय था कि ऐज कितनी है
[45:57]तो इसका मतलब नाउ श्वेतलाना उसे बिल्ला नकली कि फिर ना पार्षद
[46:03]बरकत वाली जिंदगी नहीं थी क्या जनाब सैयद ताकि ओ 13 याद
[46:07]रखिएगा मे यार क्या है बाह बरकत जिंदगी का और बीबर का
[46:13]जिंदगी का मैं हमेशा के लिए याद रखें अ मैं एक इंसान
[46:17]अगर 18 साल की एवज में 50 साल और साल का काम
[46:22]कर जाए बाबर का जिंदगी उसकी ई है और एक इंसान अगर
[46:27]जोश साल मिले डेढ़ साल मिले 2 साल मिले लेकिन जो कि
[46:31]12 साल का भी काम करके ना जाए तो कि यह तो
[46:37]जनाब सैयद है ना अ है अल्लामा मजलिसी की निस्बत जानते हैं
[46:44]फस रात एक खाली किताब जबकि कई किताबें लेकिन उस जमाने में
[46:47]के जब लखनपुर थाना मोबाइल का ना यह सिस्टम थे है को
[46:52]खाली एक किताब हरिद्वार 120 चार वॉल्यूम उनके जल्द हैं उसकी ई
[46:58]तो उस जमाने में तहरीर कि उन्होंने कि जब यह सारे वसाइल
[47:04]नहीं थे एज कितनी 270 से भी कमर का हिस्सा था उनका
[47:11]अनुबंध की पेशकश 70 80 साल है है 27 साल में अगर
[47:15]में किताबों को जमा किया जाएगा जो तहरीर किए तो 304 साल
[47:17]लगेंगे तब ज्यादा क्लिक करेंगे इसको कि यह तो मैंने ऐसी कह
[47:25]दिया आपको लेकिन अगर कैलकुलेशन दही को तो इससे ज्यादा और क्या
[47:30]चाहिए है अल्लामा मजलिसी जो के मासूम नहीं मालूम नहीं न भी
[47:35]नहीं रसूल नहीं आ तो कमेंट्स में काम किया है ज्यादा आ
[47:39]कि यह किसकी निशानी है का यह बरखत की निशानी है में
[47:45]एक घर हो छोटा सा फोन पर एक घर हो घर व
[47:51]हवेली टाइप और बढ़ा बेंगलुरु हमारे पास है लेकिन एक कमरा या
[47:56]दो कमरा या डेढ़ कमरा अगर हमारे पास हो और अगर मैं
[48:01]और आप अल्लाह के काम इस घर के जरिए से अंजाम दें
[48:06]अल्लाह का काम क्या अपने ही बच्चों की तबीयत का इस्तमाल करें
[48:08]भरपूर अंदाज में अ कि उस हवेली के मुकाबले पर कहीं ज्यादा
[48:13]बेहतर बल्क यही जो है सब कुछ है उस हवेली में के
[48:17]जहां पर जो है बच्चों की तबीयत जो पॉजिटिव नेगेटिव हो रही
[48:24]है कि वह घर बाबा हरकत नहीं के जहां पर जो है
[48:25]वाले दिन का विश्राम ना हो लेकिन एक कमरे का घर है
[48:30]मगर वाले दिन भी और खुद भी है कि बच्चों की तबीयत
[48:34]भी हो रही है वाले दिन की ने गद्दारी भी हो रही
[48:39]है में चलावे सैयदना ने अपने वालिद के सच मत करके यह
[48:41]काम भी अंजाम दिया यह रोल प्ले किया है शहर के निस्बत
[48:47]हक केशव जी अदा किया बच्चों के लिए स्वत जाए परवरिश के
[48:50]काम को तबीयत के काम को अंजाम देकर वह रोल प्ले किया
[48:54]है कि इसको मैं और आप जो कि सुनने के लिए यहां
[48:58]बैठे हुए हैं यानि क्या मुबारक जा मुबारक जहां मुबारक झाल्याचा इसी
[49:02]लिए जैसे फुला वंदे आलम ने इस आयत करीमा को जो हम
[49:06]के जरिए से इसको मिटटी आज की कुछ तू को खुदा ने
[49:10]क्या कहा वल्लरी इन आज यह दूं फीना वर्क और से सुनिएगा
[49:16]आ ए लर्नर दी अन्ना होमशॉप बोला ना हम एक से ज्यादा
[49:17]रास्तों को बतलाएंगे अब खुदा जो क्या है ऐसे इंसानों का नाम
[49:22]भी ले रहा है कजान तो ऐसे इंसान को क्या कहा जाता
[49:28]है मुझे अल्लाह के नजदीक इन्नल्लाहा व मालमों सैनी ओं कि का
[49:31]ऐसे इंसान ने को कार्य मोहसीन है मोहसिन को खाली मौजूद नहीं
[49:39]बल्कि जो क्या है इनके इन काम के जरिए से मैं अपने
[49:44]वजूद को इस पर कुर्बान करता हूं कौन कह रहा है अल्लाह
[49:48]हम वाला ना कुछ ज्यादा रवि तो नहीं कर रहे हैं अपन
[49:50]ही होता क्या कहता है इन्नल्लाहा लंबा अल्लाह से नींद अल्लाह अपनी
[49:57]जात को इनके साथ कर देता है मर यतिन के साथ होती
[49:59]है और जिसके साथ अल्लाह हो वह पानी नहीं होता वह बात
[50:05]ही रहता है और जरा भी सभ्यता का नाम मगर आज बाकी
[50:10]है तो राज उसका अल्लाह की हम राहत है सलामत बजे मोहम्मद
[50:16]सलमान प्रणाम है कर दो में हुआ था [संगीत] कि यह सर
[50:29]अब कि आखिर में दुआ कर लेते हैं उसके बाद जो प्रोग्राम
[50:31]आप लोगों का है जहां से यह सजा यह दुआ करते हैं
[50:36]मारेला हमारी अश्लील इबादत को कबूल फरमा आंवले साल यहां पर चलने
[50:40]की तौफीक अता फरमा हमारे गुनाहों की माफी रजत शर्मा जो परेशान
[50:46]हाल उनकी परेशानियों को दूर वर्मा जो मुद्दा बनाकर से सूख दोषी
[50:49]अता फरमा जब बीमार है वह बीमार ए कर्बला के सके में
[50:55]सफाई व्यवस्था है दुकान में लता वर्मा बारेला हक जो मरहूमों चुके
[50:59]हैं उनकी मकसद सर्वा बार इलाहाबाद शहर दाएं मिलनक के दरजाट बुलंद
[51:03]हैं सौंफ दाएं मिलनक को शोहदाए कर्बला के साथ माशूर फार्मा जैसी
[51:09]आदत के मुताबिक मैंने उन्हें जरा से मुशर्रफ पर मामा मामी समाना
[51:12]के जुर्म में ताजी लता वर्मा हमें उनके अलावा अनुसार में शामिल
[51:18]वर्मा व बना तप बल मिन्नत असम यह रैली इन झालावार वैसे
[51:20]मोहम्मद वाले में तरफ
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