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Shifaat Ka Sahi Or Galat Nazarya | H.I. Shahid Raza Kashifi
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Record date: 19 Jun 2022 - شفاعت کا صحیح اور غلط نظریہ
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल कि इस मिला आशीर्वाद महेंद्र वाशिम है अल्हम्दुलिल्लाह बिलरियागंज जाना है
[0:19]कि यह जुड़वां कुनाल नाते दिया लहूलुहान हजार नल्लाह में लगा जहां
[0:29]पुरुषों रबीना फिर हक कि अस्सलातो वस्सलाम मोहनलाल और रसूल स कॉलिंग
[0:35]कि पशु भैरव दिल में ख्याल इन्हें मलमास रखा इंच दिल हंसने
[0:40]वालों साइना बिल काशी में मोहम्मद लौट मर्सिलेस हम नेतृत्व वाली मोहम्मद
[0:52]प्लान अत उल्ला इलाज आई दिलाना इलावा ख्याल मीडियम विदीन ए और
[0:58]अम्मा बाद पाल अल्लाह सफेद नरोत्तम भार्गव तथा लिखी किताब हिल मस्जिद
[1:06]वर्ल्ड फॉर फाइनल खमीर बहु हाफ टी कि इस मिला है वह
[1:12]नजर रखेगी मंडल अध्यक्ष रविंद्र गिल व भेजने में कि पुराने बिजी
[1:19]क़ुरआने हकीम है कराने मजबूत पुराने हिदायत है और फिर आयत है
[1:27]तमाम इंसानों के लिए कि उस मतलब की निस्बत है कि जो
[1:39]कमाल इंसानी है और आसान अल्पांश में कि पुराने बजिद कि इंसान
[1:46]को बुलंद करने के लिए नाज़िल किया गया कि जब इंसान इस
[1:53]दुनिया में आया खुद ख़ुदा वंदे आलम कि इस मतलब को यह
[1:59]वाले पॉइंट से लेकर आते रहते दौरान तक मुतालिफ़ अंदाज में इंसान
[2:07]की निस्बत कि इस अंदाज में शुरू करता हुआ में दिखाई देता
[2:12]है कि खुले पहले इंसानों सारी फा फा आज के इंसान को
[2:18]ख़ुदा वंदे आलम ने कमजोर खड़ा किया है है या सूरए नहल
[2:26]के अंदर कि उसकी हालत के हवाले से के जब क्षेत्रों में
[2:29]मादर से बाहर आया हैं तो ख़ुदा वंदे आलम ने और यह
[2:37]कहकर इंसान की निस्बत कि इसकी कंडीशन को ताबीर किया कि अल्लाह
[2:41]हू अकबर राजा किम विंदू ने महाकुंभ लाता है मोनाश या अ
[2:49]कि कब वह अल्लाह के जिसने तुम्हें मैं तुम्हारी मां के बदन
[2:56]से जन्म दिया आप जानते हो तुम्हारी कैफियत क्या थी इलाका नमूना
[3:01]तैयार है अब तुम कुछ भी तो नहीं जानते थे और जाहिल
[3:08]के अ की वजह ललक को मुसलमा पल्लव सारा वाला फिदा लाल
[3:14]जख्म शोरूम और जाहिल आए है मगर ख़ुदा वंदे आलम का इरादा
[3:21]यह नहीं कि जाहिल वापस पल टो ऊ के बल के आलिम
[3:27]होकर वापस पलटना अ है और वह एवं क्यों कर यह इंसान
[3:36]है जाहिल को हासिल कर सकता है और अपने आप को आलम
[3:38]करार दे सकता है तो कला संग्रहालय में हवाले से भी इसी
[3:42]आयत करीमा में कि जिस रहने वालों की आयत नंबर 786 है
[3:46]का काम नहीं तीन सोर्स तुम्हें दिए तीन वसीले तुम्हें आता कि
[3:53]हैं आ जाए आलू को मौसम आया मैं तुम्हें कॉर्नर था कि
[3:56]यह सुनने के लिए अ यह वाला आप सारा तो मैं आंखें
[4:03]आता कि देखने के लिए थे वर्ल्ड आफ इज द सोचने और
[4:07]समझने के लिए तुम्हें दिलो दिमाग दिए हैं को जानते हो कि
[4:14]अगर खूब सुनोगे कांस्य को खूब देखोगे आंखों के जरिए से यहां
[4:20]पर खूब सोचोगे सुनने और देखने के बाद जो चीज सुनी है
[4:25]और जो चीज देखी है उसका तक जिया खूब करोगे तो जानते
[4:31]हो तुम्हारी शक्ल कि सूरत में सामने आएगी लाल लगाम शुरू में
[4:34]कि शायद के तुम शाकिर बंदे हो जाओ यह कपड़ा मंत्रालय ने
[4:43]इस आयत करीमा में कि आलिम होने को शातिर से ताबीर किया
[4:51]है कि इंसान सुनता है इल्म हासिल करता है कि इंसान देखता
[4:55]है इल्म हासिल करता है को सुनने और देखने के बाद जब
[5:00]सोचता है और तजिया करता है तो आलिम होना चाहिए खुदा के
[5:02]नजदीक आलिम यानि शाकिर अ के पश्चात रख यह जानेमन मौजूद गुफ़्तगू
[5:09]हमारा शपथ का है लेकिन अलबत्ता शपथ का खुद मौजू की तफ़सील
[5:16]तालाब है है लेकिन फोकस करना मकसूद ने इस वक्त अशर्फी नशि्चित
[5:22]में कि एक उम्दा मतलब को के जो कराने में जीत में
[5:25]शपथ के हवाले से रिलेट है यहां पर वह मतलब कि शफत
[5:33]की मुसीबत और सिर्फ बातें मन की और आसान अल्फ़ाज़ में पॉजिटिव
[5:41]शपथ है यानी ख़ुदा वंदे आलम जो है किस किस्म की हिफाजत
[5:45]की निस्बत को गुप्त को करता हुआ नजर आता है कि जो
[5:48]वाहन होगी है और कौन सी ऐसी शख्सियत है इसके मुकाबले पर
[5:57]तो फिर इसकी निष्पक्ष को दावेदार है में इजाजत नहीं देता नेगेटिव
[6:05]शपथ कि को शपथ के जाल में में एक जेल इमो गुफ्तगु
[6:11]है लेकिन उम्दा गुप्त को है वो हिरण कि इस मौजूद को
[6:19]जो करार दिया गया है मैं इस मशीन के लिए कि इतिहास
[6:25]मतलब को मद्देनजर रखते हुए है और वह खास मतलब ने पहले
[6:31]दिन बॉक्स और सुनिएगा से पहले सदियों पहले मकतब अहले इस्लाम पहले
[6:37]शरीयत अहले किताब यानि किताबें खुदा क़ुरआने मजीद कि मूसा अलैहिस्सलाम की
[6:46]निस्बत अतिथि दे रखे हैं हैं जिसमें से एक अति झाल वह
[6:53]यह है कि ख़ुदा वंदे आलम रोज महर ए रसूल को है
[7:00]और टॉर्च बंद गाने खास को कि यह मौका पर हम करेगा
[7:05]बहुत गौर से सुनिएगा कि के गुनाहगारों की निस्बत जो है इस
[7:09]सिफारिश के अमल को अंजाम दे खुदा की बार गांव है कि
[7:17]जब उनकी सिफारिश होगी है तो गुनहगारों के गुना के बावजूद इसके
[7:25]के गुना है उसके मुकाबले पर जो यह सजा होनी चाहिए पनिश
[7:30]होनी चाहिए है और नतीजा जहन्नुम होना चाहिए है लेकिन ख़ुदा वंदे
[7:37]आलम जो है रसूल को और बंधवाने खास को मौक़ा फ़राहम करेगा
[7:41]इन गुनाहगारों की निस्बत इस हमले को अंजाम दिया जाए कि जिसको
[7:48]आसान उर्दू जबान में सिफारिश का विरोध किया जाता है कि इसको
[7:51]आर अभी जवान में शरीर सवाल में दीनी जवान में शपथ शतावरी
[7:58]किया जाता है है अलबत्ता शपथ के साथ-साथ पहलू व पहलू जो
[8:02]मौजूद है वह तवस्सूल का और बताओ कांत सर्फर तवस्सूल को एक
[8:10]दूसरे के मुकाम पर इस्तेमाल करते हुए मैं और आप मुलाहिजा करते
[8:16]हैं मुखालिफ़ मौकों पर अ इन दोनों को अगर जो है यज्ञ
[8:21]किया जाए एक जनरल माना देने के लिए तो दोनों के मां
[8:25]ने एक हैं और सफेद कमल अंजाम देने वाला शख्स स्पीड यश
[8:31]या फिर कि वह जब जॉन सिफारिश करता है तो वह वास्तव
[8:37]बनता है के गुनाहगारों और जो है अल्लाह के घर में आग
[8:42]है और ख़ुदा वंदे आलम जो है इस वास्ते को कबूल करता
[8:48]है है कि जब कबूल करता है तो इसे कहा जाता है
[8:49]सफेद या व शीला है लिहाजा जो याद रखिएगा जानेमन पुरानी मस्जिद
[8:57]में मुखालिफ मौकों के बना से बच्चे ख़ुदा वंदे आलम ने जो
[9:02]इशांत का 10 करार किया है है लेकिन मौजूद कुछ तू को
[9:07]मद्देनजर रखते हुए आयात दूं कि शाम कि मुझे और आपका नजर
[9:12]आती हैं की कुछ आयात व है कि जो बाकायदा शरीफन को
[9:19]साफ सुथरे अंदाज में और सफेद की निस्बत जो है ए पॉजिटिव
[9:25]अंदाज मुझे और आपको डिलीवर करती हुई नजर आती हैं है जहां
[9:31]Vaseline शपात है है जबकि इसके मुकाबले पर जयपुर छाया तैसी हैं
[9:35]है जिनको अगर खाली तन्हा पढ़ा जाए बगैर से लाखों सभा के
[9:41]है तो मुझे और आपको जो का अंदाजा ही होगा कि नहीं
[9:45]भाई जी और सफेद जो है कोई चीज नहीं और ख़ुदा वंदे
[9:47]आलम सराहत के साथ बोल बहुत ही वाले अंदाज में तो मना
[9:52]कर रहा है पश्चात नहीं होगी यदि वह दिन कि व होगा
[9:58]अभी आपके सामने आया आपको मैं बयान करूंगा एड्रेस के साथ ताकि
[10:04]हमें और आपको अंदाजा हो खाली ना जाएं और अगर जो एड्रेस
[10:06]जहन में रहे तो घर जाकर जो कि 1 मर्तबा क़ुरआने मजीद
[10:10]को खोलकर जैसे मुताला करें क्या अहम तरीन मौजूद के जिसकी निस्बत
[10:13]जो है मैं और आप दम भरते हैं कि चपा चपा चपा
[10:20]चपा जाते रसूल रोज महशर हत्या एमवाई तहरीन शपथ जो है बंधवाने
[10:29]खास चौंधा 16 यह साले हीन और वह अपराध के जो वाकई
[10:31]एंड सिद्धि रत्न है सदाव्रत की मंजिल पर है वह सफेद कमल
[10:37]को अंजाम देंगे लेकिन क्यों कर और कैसे हो में आया अंजाम
[10:43]देंगी भी या नहीं खाली हवा में है गुरु है यह सारे
[10:48]सवाल आज जो है वह सामने आते हैं वह भरकर लेकिन क़ुरआने
[10:52]मजीद को अगर सही माना में गौर से सुनी है क्या आ
[10:54]जो पूरे शॉक को सभा के साथ मुलाहजा किया जाए इस आई
[10:59]इनकी इस किस्म की आयात को तो हमें वापिस एंकर फटी मिलेगी
[11:04]कि यह शपथ बरहक है कि यह मतलब लेकिन जो कि है
[11:12]इसके साथ 120 को जो है सामने रखना होगा आ कि वह
[11:15]क़ुरआने मजीद की निशाना के हवाले से तफ़्सीर के हवाले से और
[11:19]तस्करी के हवाले से और आसान अल्पांश में अ कि पूरे क़ुरआने
[11:25]मजीद का जानवर देखा है साढे छह सालों समथिंग आयात हैं पूरा
[11:28]क़ुरआने मजीद को अगर ज्योति हम शुमार करना शुरू करें आयत को
[11:34]एक के बाद दूसरी दूसरे के बाद तीसरी साढे छः हजार और
[11:40]कुछ याद हैं 114 सूक्तों के दरमियान है लेकिन इस दौरान की
[11:46]खुसूसियत यह है कि ख़ुदा वंदे आलम भी कैसा है रिवायात अथेंटिक
[11:50]मौजूद है मौत बेहतरीन रिवायात मौजूद हैं रसूले इस्लाम और MI ताहिर
[11:58]के हर बार फर्म इन मौजूद है लहसुन अदरक यहां भी हैं
[12:00]हमारे यहां भी है वह यह कि कुरान की बादशाह याद बास
[12:05]दूसरी आयत की तफ़सीर करती हैं है यानी दूसरे अल्फाज में अगर
[12:13]खाली जो है बाद आयात को देख लिया जाए और जो यह
[12:18]खास मौज़ूआत को जो क्या देखने के लिए एक तो यह कि
[12:21]नहीं है जब तक यह बात दूसरी आयात को टेली ना कर
[12:25]लिया जाए इन याद के साथ है लिहाजा जो है बास कुरान
[12:31]की आयात बास दूसरी आयात की इज्जत तस्दीक करती हुई नजर आती
[12:35]हैं के बाद आयात बात दूसरी आयात की निस्बत जो है तस्दीक
[12:39]की बजाएं इंकार करती हुई नजर आती हैं को खुलासा तमायांतं को
[12:45]किसी एक खास मौजूद को तलाश करने के लिए अगर हमने और
[12:51]आपने जो ऐनालाइज किया अप एंड डाउन किया प्लस माइनस किया उन
[12:54]तमाम वॉल्यूम को सामने रखते हुए के जो उल्लू में तब सीरीज
[13:02]हैं है तब जाकर इज इक्वल टू झुकें सामने आएगा किसी व्यक्ति
[13:04]मौजूद को तलाश करने के लिए अ है वरना थे होली कुरान
[13:09]ए मजीद को खोला बहुत मकसद के साथ किसी ख़ास मौकों की
[13:14]निष्पक्ष यह जानने के लिए हमें वह लफ्ज़ नजर आ गया उसकी
[13:16]जारी यार अभिलाष से जो है मीनिंग हमें महसूस हुई लागत में
[13:22]जाकर देख लिया डिक्शनरी वाइज अल्लाह अल्लाह अल्लाह ने कहा है और
[13:26]लाने नहीं कहा है तो हरगिज जो क्या है यह जो है
[13:32]method नहीं है यह तरीका कार नहीं है है बल्कि जो है
[13:35]जिस तरह से उल्लू में दुनिया की निस्बत दुनिया की यूनिवर्सिटीज के
[13:41]अंदर मसाले यह उलूम की निस्बत जब जो है तक जिया और
[13:46]पहली किया जाता है और तहरीक के मामले पर जो किसी मौजों
[13:48]को हाईलाइट किया जाता है तो उन तमाम की निस्बत भी जो
[13:53]है मुख्तलिफ जो है जवानों को देख लिया जाता है तब जाकर
[13:57]जो क्या है एक मोहक 11 रिसर्च अ जो है बाकायदा अपने
[14:00]रिसर्च के तहत जगह उसको नतीजा देता है कि जब दुनिया की
[14:03]यूनिवर्सिटी उल्लू में दुनिया भी की निस्बत इस कदर जो है बारीक
[14:10]भी नहीं के साथ किसी मौजों को सामने पेश करती है तो
[14:13]इंसानी उलूम के हवाले से के जो इलाही उलूम है खुदा युगलों
[14:19]में है क़ुरआने मजीद के निस्बत जो हम क्यों कर जो है
[14:25]आंखें बंद करें और खोलें और उसके बाद कहा यह हक है
[14:27]और यह बातिल यह दिन का हिस्सा है और यह दिन का
[14:31]हिस्सा नहीं किस तरह से मैं और आप जो कह सामने ला
[14:35]सकते हैं तमाम चीजों को तो याद रखिएगा जानेमन पुराने मैं जीत
[14:41]की बादशाह याद बात दूसरी आयात की पहली करती हैं आसान अल्फ़ाज़
[14:45]में जब तक एक मुफस्सिर एक तस्करी करने वाला किसी भी हो
[14:52]उनकी तलाश के लिए तमाम तरह आयात को यज्ञ करके देख नहीं
[14:54]लेता उस वक्त जगह नतीजा देना उसके लिए जायज नहीं है या
[15:00]अधीन जो है आसान नहीं है कुर्सी पर आ अबे बैठ गए
[15:05]नंबर पर आकर बैठ गए और जो है उसके बाद जो है
[15:09]बोलना शुरू किया कहना शुरू किया फतवा देना शुरू किए और उसके
[15:12]बाद कहा यह दीन है यह शरीयत हंसी याद रखिए का यह
[15:18]दिन के मौज़ूआत में से अकिदत इलाहाबाद से एक मौज़ू सफेद का
[15:21]मौजूद है रात को आप सबके सब सवाल करें यह मौजूद जो
[15:27]है वह खेलना अहम तरीन मौजूद है जवाब हां है है याद
[15:34]रखें जानेमन अधीन की जरूरी बात है यानी दिन के अंदर मुख्तलिफ
[15:39]यह काम है कि इसकी निष्पक्ष जो क्या है मुझे और आपको
[15:42]जरूरी है जरूरी है और जरूरी मस्त है उसकी निष्पादक इधर रखना
[15:52]अ हैं और अगर हमने अति ध्यान नहीं रखा हैं तो हमारे
[15:55]अधीन जो है मुस्तकबिल दिल है ए मेन जूमला मौज़ूआत में से
[16:02]एक मौज़ू सफेद कम ओवर कि किस अफेयर जो है जरूरी आते
[16:08]दिन में से है क्योंकि क़ुरआने मजीद से डायरेक्टर उसका ताल्लुक है
[16:12]कि हल्दी से मौत वर्थ एंटीक बाहरी छोर रिवायात और Mi तहरीम
[16:18]के हर बार फ्रॉम इन और दोनों मकतब फिर को अगर हम
[16:25]माल देखें अहले सुन्नत और पहले तस्वीर अ यह सब के सब
[16:27]एक जवान होकर यह कहते हैं हत्या जिनकी निर्भर जाहिर तौर पर
[16:34]मुझे और आपको थोड़ा सा ही अंदाज़ा है बल्कि ज्यादा कि यह
[16:36]फैसला मक्ता पर फिर जो है वह सफेद के हाथ में नहीं
[16:44]है कि वह भी वे मांगे दहल और उनका सरगना उनका सर
[16:46]द्वारा अपनी किताब के अंदर इस मतलब को बाकायदा क्लीयरली जो है
[16:53]बयान करता हुआ नजर आता है कि शपथ की निस्बत पहले दीन
[17:00]और इस्लाम पर लाज़िम है कि आप सीधा रखें अ है कि
[17:03]शपथ बारहठ है यहां पर याद रखिएगा जानेमन शफत वह मौजूद है
[17:10]कि जरूरी आते दिन में से पर्स मुक्तसर करते हुए बातों को
[17:17]डिटेल को और तम हित को इस मतलब कि जाने हम आएंगे
[17:21]कि वह तनय है की शपथ की निस्बत जो है आयात हमें
[17:26]मिलती है क़ुरआने मजीद में या क़ुरआने मजीद में नहीं मिलती है
[17:29]यह तो बहुत ही सामने की है कि यह आयत जो हमने
[17:33]सलवार कलाम में आपके सामने रखी यह आयतुल कुर्सी का हिस्सा है
[17:40]आयत नंबर 255 है 255 नंबर की आयत है यह मंडल अध्यक्ष
[17:43]पांव इन बहुमूल्य भेजने इसका ट्रांसलेशन हम बाद में करेंगे अगर चाहत
[17:50]में हुई अपने आपमें से अक्सर जोक्स के ट्रांसलेशन से वाकिफ होंगे
[17:55]लेकिन पहले उस मतलब को देख लेते हैं कि हमने अपनी जवानी
[17:57]जाए आपको सत में डिलीवर करना चाहा के दौरान की बादशाह याद
[18:03]बाद दूसरी आयत की तफ़सीर करती हैं जब तक जगह अब्बास को
[18:05]बांस के साथ मेला नाले इज इक्वल टू नतीजा ऑप्शन नहीं कर
[18:10]सकते हैं कि रसूले ख़ुदा का फरमान इन अल कुरान यस जो
[18:17]को बाज़ू बाजा अ कि क़ुरआने मजीद जानते हो क्या चीज है
[18:20]पैसा कलाम है कैसी गुफ्तगु है अल्लाह की यस जो को बाजू
[18:27]बाजा का इसका बाद जो है बस दूसरे की जो तस्दीक करता
[18:32]हुआ नजर आता है यानी इसका मतलब यह बात सामने की बात
[18:37]है क्या कर बास को देखा जाये बास करना देखा जाए तो
[18:41]तस्दीक क्यों नहीं की जा सकती है हैं और अगर तस्दीक कर
[18:45]दी गई तो तसरी है या नहीं बिद्दत है एक दीन भिखारिई
[18:50]है जब आपने कोई फैसला करना चाहा और यह कहा कि नहीं
[18:54]यही दिन है इसका मतलब ए खुदा का फरमान यही है जबकि
[18:57]वह राजा का फरमान नहीं है कि मलाइका इंच का फरमान है
[19:06]इसी हवाले से कि यंत्रों को बासु बास जी का पुराण का
[19:12]जो बास है बास दूसरे की निस्बत कलाम करता हुआ जो है
[19:17]दिखाई देता है कलाम करता है यानी बादशाह याद बास दूसरे आयात
[19:20]की निस्बत तस्करी कर दिए है और इसकी तक मेल जो अ
[19:27]रस मलाई कहना पर मारे जुमले की अपने व्यूस है तो आलिया
[19:30]बास है कि कुरान का बास बास दूसरे की निस्बत जो है
[19:36]गवाही देता है कि जब तक गंवा ही नहीं होगी किस तरह
[19:42]से तस्दीक करेंगे आप पश्चिम दो फरमान को अफवाह ने रसूलल्लाह वाले
[19:45]पौधों को अगर हम सामने रखें है और इसी तरीके से अहले
[19:50]सुन्नत ब्राउन के जो किताबों के अंदर अगर मलाई जब करें तो
[19:52]उनके जो रेवा याद की जो चीन है सिलसिला है जो है
[19:57]रिवायात है इस हवाले से वहां पर भी जो कि एडजेक्टिव्स यह
[20:01]नजर आता है अ तब वहां भी मसलक ए की हत्या जो
[20:07]क्या है वह आप रात के जूस बाहरी तौर पर बाहिर ऐसा
[20:11]महसूस होता है कि सफेद कोई चीज नहीं है अभी थोड़ी देर
[20:15]पहले अर्ज किया या तबस्सुम कोई चीज नहीं है जबकि उनके यहां
[20:17]यह चीज मौजूद आपको हवाला दूंगा मैं थोड़ी देर बाद में के
[20:21]पास यह मतलब के जब तक जगह हम कुरान कुरान की आयात
[20:25]को जो आपस में टेली नहीं कर लेते उस वक्त किसी मौजूद
[20:29]की तस्दीक मुमकिन नहीं है की शपथ के हवाले से पूरी उम्मते
[20:33]इस्लामियां प्रोग्राम मुलाहजा करना चाहे मैं तो पूरी हिम्मत है जो है
[20:42]इस्लामियां जो इस बात पर इत्तेफाक के राय रखती है कि के
[20:46]शपथग्रहण है कि इस हवाले से जो आयात सामने पेश करती हैं
[20:49]वह दिल्ली के अनुमान से पूर्व के अनुमान से मैं सूरज हा
[20:56]आयत नंबर 5 मैं सूरज हा आयत नंबर पांच और सूरह इस
[21:00]रायत नंबर-17 और जैसी आए तो आपके सामने पढ़ लूंगा तकरीबन नाम
[21:06]तब वह बीच हाफिज है इसकी संख्या या आपके सूरज वहां की
[21:11]आयत नंबर फाइव को अगर हम देखें वाला सा उपायुक्त का रब
[21:15]का पत्थर जा उ हेलो हेलो सुन्नत ब्राउन OLX तहसील दोनों वायर्स
[21:20]जवान होकर यहां यह कहते हैं कि ख़ुदा वंदे आलम जो अपने
[21:25]हबीब को आता करेगा और जिससे जो क्या है उसका हबीब राजी
[21:30]होगा व है शिफ़ाअत कमर हिला अ का सफेद का मकाम शपथ
[21:36]का गिफ्ट ख़ुदा वंदे आलम की तरफ से रसूले इस्लाम को नसीब
[21:41]होगा है और इसका हबीब राशि होगा मैं सुरेश रावत नंबर-17 अधिकार
[21:47]अरब का मक्का मन कि महमूदा इस वक्त सामने की और आयत
[21:58]है है कि थमा देता मौजूद के हवाले से जो है गुफ्तगु
[22:00]है पैदा हुए दो और उसके बाद ख़ुदा वंदे आलम जो कि
[22:04]अपने हबीब से यह कह रहा है कि नमाजे छप्पड़ों और नमाज़
[22:09]तहज्जुद का जो है एकदम करो कि नतीजे में ख़ुदा वंदे आलम
[22:15]तो मैं जो है मक्का में महमूद पर फाइट करेगा कि तमाम
[22:18]वॉल्यूम का जो है लेस उन्नत के भी OLX तहसील के बीच
[22:23]यह मकान में महमूद मां हुआ कौन सा मकान है यह कैसा
[22:29]मकाम है दुकान मकान में शपथ मुराद है कि यहां तक तो
[22:33]जो है सब के सब मत रखें इस बात के ऊपर अगरचे
[22:37]आगे का जो दूसरा स्टेप है उसके लिए हाथ से भी मुताबिक
[22:43]हैं लेकिन बाद जो लेमन की आरा और नजरिया जो है इस
[22:45]हवाले से जो है वह थोड़ा सा उसमें लटक है वरना अगर
[22:50]ओवरऑल बहुत गौर से सुनिए अगर तमाम आलम आपको एग्जाम करें इस
[22:56]मौजूद को जानने के लिए तो कोई भी मुख़ालिफ़त नजर नहीं आता
[23:01]है कि कोई भी तो मौजूद नजर नहीं आता शाहेब पहले सुन्नत
[23:04]के जितने भी फिरते हैं आपस में नजरिया आती ले हाथ से
[23:09]उनको भी बोला है जो करें सब के सब जवान होकर यह
[23:13]कहते हैं कई यह जमा है इत्तेफाक अरराय घुमतें इस्लामियां का के
[23:16]शपात तरह के अब और से सुनिएगा कि अमूमन सूर्य समर्थन डी
[23:26]ओ कि अहले सुन्नत का इमाम व राजस्थान आ कि उसका कहना
[23:29]क्या है कि सूर्य बक़रा की आयत नंबर फुट यह रिकॉर्ड से
[23:34]सुनिएगा आ मैं इसको बढ़ने से पहले जो कि एक जुमला रखिए
[23:36]देता हूं कि थोड़ी देर पहले अर्ज़ किया कि हमारी जो घुस
[23:41]चूका मौजूद भी है पॉजिटिव सिर्फ आम तौर नेगेटिव शपथ में सवाल
[23:46]आया जो है पॉजिटिव सफेद के लिए आया था आई है जवाब
[23:52]हां में है आया नेगेटिव शपथ के लिए जो है आइए जवाब
[23:57]हम है यह सूर्य बक़रा की आयत नंबर 438 जो है यह
[24:02]मन फीचर्स है सफेद के लिए लेडी सफेद एलईडी समृद्ध है कि
[24:04]इसका अगर जाहिर देख लिया जाए तो इंसान कहां भाई आसफ था
[24:09]सच सही न सिर्फ आज छुट्टी नहीं है मैं अकेला ही नहीं
[24:16]है कि शर्लिन है फोन कहां से कहा आप लोगों ने के
[24:22]शपथ बरहक है कई दलील आपके पास मलाई ऐड करें सूरह बकरा
[24:25]आयत नंबर फोर डिड ऊ कि थोड़ा सा दिया कर्तव्य जो आदि
[24:31]डोकयत के लिहाज से अरबी जगह है कलाम के लिए आज से
[24:33]अरबी ग्रामर के लिए से अल्वी अरबी ज़बान के लिए से तो
[24:37]समझ में आ जाएगा बाल आयोग को बालों में हुआ था में
[24:42]सफल तुम अब इसका साइज तर्जुमा किया जाए तो इससे पहले जो
[24:47]ही मैं यह जो है मैं यहां से पहले जो क्या है
[24:51]एक जुमला है उस जुमले के अंदर जगह नमस्कार लव इस्तेमाल हुआ
[24:55]है हां की जमीन वहां जा रही है आसान अल्फाज में का
[25:00]इस नव से किसी दूसरे नर्स की निस्बत यानी एक इंसान दूसरे
[25:06]इंसान की इज्जत जो अतिथि हो नहीं सकता शपथ के अमल को
[25:10]अंजाम मैं नहीं दे सकता यह मैंने समावर्तन का जिम्मा किया है
[25:14]40 तर्जुमा करें लव जिले से लायक बालों में महासभा और तुम
[25:20]शपथ को जो इस नव से कबूल नहीं किया जाएगा कि किसी
[25:23]दूसरे इंसान की सिफारिश किसी और के लिए जो क्या है कबूल
[25:27]नहीं होगी तो जनाब आप लोगों ने जो कि है यह कहा
[25:31]कि जो क्या ठंडा पीता है कि जाए चपा चपा चपा बाद
[25:35]बरहक है यह तो कहते कि नहीं है लेकिन सरकंडी क्या कहते
[25:38]हैं का अगर चेंज सुन्नत के हैं यह अगर चाहिए आयत शपथ
[25:45]के बरखिलाफ है लेकिन सूर्य अंबिया की आयत नंबर 28 वह कहती
[25:50]है कि नहीं कि एक आयत को दूसरी आय से जब तक
[25:56]फैली ना कर लो किसी भी मौजूद को जानने के लिए उसमें
[25:59]तक फैसला मत करो कि जनाब समरकंद साहब आप क्या कहना चाहते
[26:05]हैं का अगर जयसूर्य बक़रा की आयत नंबर फुट यह कह रही
[26:07]कि सफेद कबूल नहीं होगी किसी की लेकिन फिर जब सूर्य हम
[26:12]भैया को देखते हैं आयत नंबर-28 को वहां पर ख़ुदा वंदे आलम
[26:16]जो है कानून को बयान कर रहा है शपथ हर एक की
[26:20]कबूल नहीं है शपथ और उसकी कबूल है कि जिस की निस्बत
[26:26]अल्लाह रिचा दे दे और मर्जी दे दे तो है जिसकी निस्बत
[26:30]अल्लाह परमिशन दे ला यश पावना इला लेमन और तवा जो लोग
[26:36]किसी के भी जो है शपथ का हक नहीं रखते मगर उसकी
[26:42]के जिसकी निस्बत अल्लाह राज़ी हो बस समरकंद साथ जो इन दोनों
[26:49]आयात को जो सामने रखकर फैसला करते हैं कि शफत बरहट है
[26:52]और शेयर की है और उसके बाद अल्लामा मजलिसी के यह तो
[26:58]यह हमने जो आंवले सुन्नत ब्राउन के जो बरसता आलिमे दीन का
[27:01]जवाब कॉल बतलाया अल्लाह मजलिस और हमारे दूसरे जगह दो लामा का
[27:04]नजरिया क्या है जो राए के जो बड़े एवं हमारे रहे हैं
[27:08]कि जिनकी बुनियाद के ऊपर एनी जिन-जिन के दिन की तहकीकात की
[27:15]बुनियाद के ऊपर मकतब शैलो इस सूरत में हमें मजबूत दिखाई देता
[27:19]है के अलावा मछली सिंह और दूसरे ओवर में क्या कहते हैं
[27:22]कि खुद अपने मतलब की निस्बत नहीं कहते हैं कि हम तमाम
[27:26]मुखातिब फिर अलार्म अली का कॉल बिहारुल अनवार में मुसलमानों के दरमियान
[27:32]शपथ ले जाइए नहीं कहा शिव के धर्म या नहीं काम मकतब
[27:38]अहले बैत के धरने में यार है और जरूरी बातें दिन में
[27:43]से है इनकार वॉल्यूम को फिर के बराबर है बेदी नहीं के
[27:46]बराबर है 1016 घुमाते इस्लामी और दूसरी एवं मतों के लिए भी
[27:53]जो है जो शपथ का जरिया सुना गौर से अ तो क्या
[27:58]समझाना जरूरी है थोड़ा सा कट या रसूले आज हम जो है
[28:03]खाली उम्मते इस्लामिया की निस्बत जो है सफेद कमल अंजाम नहीं देंगे
[28:06]अब तक हम लोगों ने क्या काम करता है ए रसूल रोज
[28:12]मार्श भर पहले इस्लाम की निस्बत पर जो गुनाहगार होंगे उनकी निर्भय
[28:17]शपथ का मन जानते हैं भी ऐसे ही ना है जबकि नहीं
[28:24]आ कि यह दायरा वश है की रहमत इस्लामियां भी जो है
[28:30]रसूल की शपथ के दायरे में है को खंगाला ना थके हुए
[28:35]तो नहीं है मैं कल नहीं कि कब और कैसे अपने मैं
[28:43]यार है उसका कि मैं यार अहीर तो हित और अहित है
[28:46]कि चाहे आओ नव-वर्ष का इनकार कर एक इंसान और से सुनिएगा
[28:52]और बहुत ही जो है सोच के जो है समझ के जो
[28:55]क्या इज मतलब को सुनिएगा तब बच्चों के साथ है और तवज्जो
[28:59]नहीं रह गई तो मामला खराब हो जाएगा तो हाउ टो हित
[29:03]की निस्बत अगर बाल अपराध जो है कातिल है लेकिन जो है
[29:08]दावत की निस्बत आखिरी जो रसूल की निर्मलता कर इंकार करते हैं
[29:14]लेकिन इनकार का राज़ क्या है उनका व् कि इनकार कर राज
[29:17]उनके पास इन न होना है कि कोई आखरी नबी इसके समुद्र
[29:21]है कि इमामत के लिए कृपया कर कोई इनकार करता है और
[29:27]उन्हें मालूम नहीं है कि Vaseline जो है आइए माय तहरीर दी
[29:32]है रसूल के बाद है कि उनका नजरिया तो हित के लिए
[29:37]हास्यकर पहुंचता है के अलावा प्रसिद्ध है वही खाल एक है दही
[29:42]पूरी जाए चरखी चला रहा है तो रसूले इस्लाम ऐसे लोगों की
[29:48]निस्बत भी जो है सफेद के अमल को कयामत के दिन अंजाम
[29:50]देंगे अब कि कयामत का दिन बप्पा होगा है रोज महर बप्पा
[30:00]होगी और उसके बाद जो है जब शपथ का अमल शुरू होगा
[30:04]तो जन्नत का एक दरवाजा ऐसे अपराध के लिए होगा कि जो
[30:10]सिर्फ पहले तोहीद हैं अ मैं पूरे विश्वास से कह रहा हूं
[30:18]आपके सामने नहीं आया था उस करूंगा अब है कि जो पहले
[30:24]तोहीद है है लेकिन नर्वस से काफी लाख या रसूल की आई
[30:27]एम आई तारीख की इमामत से कातिल है और उनकी गफलत का
[30:31]मनीषा जो है उनके पास सिलना होना है कि अगर इल्म हो
[30:39]जाता तो यह सारे तस्लीम कम करते आखिरी नबी की उम्मत पर
[30:44]आ ए आई एम आई तारीख की मां मत को कबूल करते
[30:49]लेकिन अवशेष के उन्हें इल्जाम ना हो सका कि नतीजतन जो क्या
[30:52]या ख़ुदा वंदे आलम जो है वह जानता है ज्यादा खुदा कहेगा
[30:56]अपने हबीब से इनक्रीज बाद भी शपथ कमल अंजाम 250 याद रखिएगा
[31:00]जानेमन की शपथ के अमल को अगर मुलाहजा करना मकसूद हो कि
[31:09]यह मतलब कि थोड़ी देर बाद में इस के हवाले से रिवायत
[31:11]आप की अदालत में पेश करूंगा अब जो अलार्म मस्जिद या फिर
[31:17]बहुत धन्यवाद नंबर 8 में इस मतलब को बयान करते हैं क्या
[31:23]वर्तमान में हिम्मत इस्लामिया हत्या जो पहले तो हित अ कि उनकी
[31:26]सफेद कमल जो रसूले इस्लाम का अंजाम देंगे तो यह तक आती
[31:32]है इत्तेफाक अरराय हैं इस जमा है आरा सबकी एक ही है
[31:35]है लेकिन एक कंडीशन है तो कब कंडीशन क्या है कब कंडीशन
[31:43]जो है इसने परवरदिगार है जो मर्जी हो खुदा चलेगी आ तू
[31:48]किसी और की मर्जी नहीं आ के पास जो है जैसी कि
[31:53]निस्बत ख़ुदा वंदे आलम चाहेगा का या रसूल उसका उसकी निस्बत जो
[31:56]है इस शपथ के काम को अंजाम देगा अ और उसके बाद
[32:03]यह जरूरी है और जरूरी है इस मतलब को बयान करना कि
[32:06]दो थोड़ी देर पहले हमने अपने मुद्दों के दरमियान बयान कि यह
[32:10]था वह आप रात वह पैर का कि जिसकी इज्जत हमारे शहरों
[32:12]के तसव्वूर यह है कि यह फिर का जो है सफेद के
[32:17]बरखिलाफ है तब सूर्य के बरखिलाफ है फिर कई वहाबियत है कि
[32:24]उसका बानी मोहम्मद इब्न-अब्दुल-वहाब अ एक बर जस्ता क्लीयरली ईएस बहुत इस
[32:33]सांप अंदाज में अपनी किताब हक को लिए अत्यंत सफल नंबर 473
[32:38]फोर्सेज कि वहां पर जो कि इस बात को क्लीयरली कहता है
[32:43]है कि सफेद के हाथ में क्या कहता है कि हर मुसलमान
[32:46]पर शपात पर ईमान लाना वाजिब है है कि चपाती रसूल रोज
[32:57]माह सर यह दुरुस्त से और बरहक है और जरूरी आते दिन
[33:04]में से है अत याद रखें जो जानेमन शबाहट है जनरल नॉलेज
[33:07]के हवाले से सुनते जाइए पूरा क़ुरआने मजीद को आखरी क़ुरआने मजीद
[33:12]तक ने अव्वल कुरान से लेकर आखिर कौन है अगर जो जनरल
[33:14]नॉलेज के हवाले से जानना चाहे कितनी मर्तबा ख़ुदा वंदे आलम ने
[33:20]शपथ का तस्करा किया है चाहे पॉजिटिव चाहिए नेगेटिव चाफा आपका तस्करा
[33:24]कितने मुकाम पर किया है तो ठहरती टाइम जो है अमित इस
[33:29]मर्तबा जो है ख़ुदा वंदे आलम ने तकरार दर तकरार के साथ
[33:31]शपथ की अहमियत को बयान किया है है ताकि यह जरूरतें दिन
[33:38]किसी से जो है वह जल ना रहे कि इसकी बुनियाद के
[33:44]ऊपर बेदी नहीं का नतीजा सामने ना आए थे ए नेगेटिव जो
[33:50]है की शपथ के हवाले से आयत यह सुनते जाइए क्योंकि मौजूदा
[33:53]गुफ़्तगू है वह आयत के जो सलाह कलाम में हमने बहन की
[33:58]मंडल अध्यक्ष व वो बिलकुल जो कह 255 नंबर किया है थी
[34:04]वह यह 254 नंबर किया है है कि जिस की निस्बत जो
[34:09]है अब मैं और आप अगर देखें बज़ाहिर से आपको सब के
[34:14]बगैर मुकादम और मार्कर के बगैर यानि पहले कि आज जिसके हुआ
[34:16]है बाद में क्या शक्कर हुआ है नहीं निकाली यह क्या एक
[34:19]ही आए थे ब्रिटिश कालीन तर्जुमा तो ख़ुदा वंदे आलम क्या कहते
[34:23]है या वहां या में ला बायो ऑन पिएं है वाला खुल्ला
[34:31]सफा तमाम का दिन व होगा कि जिस दिन जो है कोई
[34:36]कारोबार कोई खरीद फरोक्त किसी का लेन-देन काम नहीं आएगा लॉक खुला
[34:43]ना किसी की दोस्ती काम आएगी आ यह वाला शिफा अ है
[34:49]ना किसी की शिक्षा पाठ्यक्रम आएगी ना सिफारिश काम आएगी किसी की
[34:54]इस आयत को खाली ले लें तो क्या नजर आ रहा है
[34:56]कि शब्द शब्द ही नहीं है कि खुदा के लिए अर्ली केरला
[35:03]छपारा अ की शपथ बार हक नहीं है लेकिन फौरन बाद बिना
[35:07]किसी फैसले के ख़ुदा वंदे आलम जो है इस मतलब को बयान
[35:12]कर रहा मन जल्दी यश पॉइंट बहुमूल्य भेजने कि जब इस 254
[35:21]नंबर की आयत 255 नंबर की आयत के साथ अटैच करेंगे प्लस
[35:24]करेंगे इज इक्वल टू नतीजा क्या निकलेगा शफत जो है हर एक
[35:30]कि हर सूरत में कबूल नहीं है हैं और अगर कबूल है
[35:35]तो अल्लाह की मर्जी से है है और अल्लाह किसकी इज्जत इजाजत
[35:41]देता है क़ुरआने मजीद की मौत वाली दूसरी आई है हवाले से
[35:44]मिंजो मिला मौज़ूआत में से एक मौजूद के जिसकी इज्जत खुदा बंगले
[35:50]में रहता है कि जो शख्स मावा सिद्ध होगा पहले तो ही
[35:55]दरोगा खुदा-परस्त होगा उसकी निस्बत में इजाजत दूंगा अपने हबीब को के
[36:00]वह सफेद कमल अंजाम दे दूसरा फेज में मुशरिक की शपथ कबूल
[36:07]नहीं होगी जो खुदा के साथ शरीक करार देता है रसूल उसकी
[36:09]शपात नहीं करेगा इसी तरीके से जो है वह क्लिप गुना है
[36:16]जिनकी निष्पक्ष या ख़ुदा वंदे आलम जो क्या है रसूल को रोकेगा
[36:18]उसकी हिफाजत नहीं होगी की बुलंद आवाज से इलाहाबाद भेजो मोहम्मद वाले
[36:25]हमेशा अ कि बहुत सारी बातों को स्किप करते हुए यहां पर
[36:33]मौजूद थी कुछ तो को ना ज्यादा थका हूं आपको न ज्यादा
[36:37]टाइम लो आपका क्योंकि जो आकाश में हमने कहा था तब सील
[36:40]क्लब गुफ्तगु है थे मंकी आयात के लिए आज से नेगेटिव आयात
[36:45]के लिहाज से मौजूदा 3 लेयर से टॉपिकल आयात के लिए आज
[36:49]अगर हम देखें तो हमें जो यह बाकायदा जो है बहाया जो
[36:55]है मुख्तलिफ मौज़ूआत को मुझे और आपको हाईलाइट करती हुई नजर आती
[36:58]है का दे तो यह अगर मौजूद है शपथ कबूल नहीं फलां
[37:02]मौजूद है तो शिफ़ाअत नहीं पलामू है तो जब बात नहीं जब
[37:06]आपने सुन लिया तब आप सबके सब हमसे जो है डिमांड करें
[37:12]और यह फलां फलां फलां क्या चीज है भाई तो आप सोने
[37:16]से जो अलार्म दिया आलम जो है काफिरों की निस्बत जाए खिताब
[37:19]करता बाद जो या में दिखाई देता है और सुनाई देता है
[37:23]कि का पहले को फिर की निस्बत शपथ का अमल अंजाम नहीं
[37:28]पाएगा नहीं पाएगा उर्दू जबान है मौजों को तू क्या है कि
[37:35]शपात मनफी और सफेद मुसीबत तो याद रखिएगा जय काफिरों की निस्बत
[37:39]जो शपथ की निस्बत नेगेटिविटी आई है मनफी अनुसार आया है वह
[37:45]शख्स जो है नेगेटिव है है नतीजतन क्या होगा पहले विमान की
[37:53]निस्बत छपा है वह बिल्कुल है मैं सुरेश मुदस्सिर आयत नंबर दो
[38:00]खोला मलयालम जो कि इसमें जो है काफिरों की निस्बत इनकार करता
[38:04]है शपथ के हवाले से आ को समाप्त अन्फाल हम शपथ 03
[38:13]व् में शपथ करने वालों की शपथ जो है का शिविरों को
[38:17]नष्ट नहीं देगी कि अब वह अपराध की जो शपथ का इंकार
[38:23]करते हैं वहीं जैसी आयात को लेते हैं है जबकि इनको चाहिए
[38:25]था कि सूर्य बक़रा की आयत सूरह झूमर की आयत मलिक दूसरी
[38:30]जो आयात है कि जहां पर जो है पॉजिटिव आई मौजूद है
[38:36]इन सबको आपस में टेली करें इस इक्वल टू करें और नतीजा
[38:38]शपथ का निकाल दें कि यह एक मौजूद है जो काफिरों की
[38:45]निस्बत है कि जो नेगेटिव है दूसरा मौजूद जो है बहुत परस्तों
[38:47]की बुत परस्ती आया शपथ काम अंजाम देगी के दूसरे पार्ट्स में
[38:55]आसान अल्फ़ाज़ में खुदा कहता है नहीं कि कब्र पर अगर बुत
[39:01]पूजा है पूजा करते हैं परस्तिश करते हैं यह समझ करके यह
[39:06]जो है हमारे लिए जो है ऐसा अमल अंजाम देंगे कि जहां
[39:08]पर कोई रूकावट आ गया आगे जाने के लिए यह जो है
[39:13]खाना लेकर जो है कायनात के सामने आएंगे बहुत और यह जो
[39:18]है बुध जो है तकल्लुम करना शुरू करेंगे का यह हमारे खालिक
[39:22]इन्होंने हमें वास्तविक करार दिया है यादव तू जो कहे उनके गुनाहों
[39:28]को जो क्या है माफ कर दे लिए But प्रश्नों का नजरिया
[39:31]यह था कि हैं तो ख़ुदा क्या कहता है सूर्य आना हिमायत
[39:36]नंबर 94 खुदा कहता है कि जो है मान रिमार्क ओं सोफा
[39:42]कम अब कहां गए तुम्हारे सभी बुत परस्त उसे कहेगा खुदा रोज
[39:49]माहिर है कि तुम जिन्हें मेरी ज़ात के साथ शरीफ करार दे
[39:53]रहे थे यह जानकर कि यह वसीला बनेंगे यह शपथ का काम
[39:59]अंजाम देंगे यह तवस्सूल का काम अंजाम देंगे ना हर गैस मानाराम
[40:03]आपको शपा एकदम अलग इंतजाम तो मन नऊ फिगर को मिश्रा का
[40:09]तुमने गुमान यह किया था कि मेरी जो के बादहुं लाशरीक है
[40:15]तुमने इन बातों को जो है मेरे साथ शरीफ करार देकर यह
[40:21]नजरिया अख्तियार किया कि यह शपथ के अमल को अंजाम देंगे कहां
[40:24]गए न कत्ता बहनों भूतों के दरमियान और तुम्हारे दरमियां जुदाई और
[40:30]जुदाई जुदाई हो गई है अगर तुम्हारे दरमियां जुदाई ना होती तो
[40:37]यह आज तुम्हारे लिए काम को अंजाम देते थे कि वह दलहन
[40:42]कम मां कुमकुम दसवां मून ओं कि यह बहुत प्रश्नों के ने
[40:48]शपथ ली वो बात दूसरी जो आयात हैं वह मूंगफली दूसरे मौज़ूआत
[40:50]कि लेकिन यह दो हम मौजूद थे जो मैंने अपने खेत में
[40:55]भैंस है बनी थी हवाले से लेकिन प्लस और पॉजिटिव हवाले से
[40:57]एक आयत और सुनते जाइए मगर एक एंगिल से अगर आप मेरे
[41:06]साथ मुस्लिम दवा से सलाह बाद भी जिम्मेदार है नंबर दो और
[41:12]इंशाल्लाह जल्दी आपकी जान छोड़ देंगी एक बुलंद आवाज से साल आवाज
[41:17]भेजें मोहम्मद वाला अवतार है कर दो कि सूर्य आप उनका अंदाज
[41:26]देखें सुरेश सजा के लायक नंबर 41 एंगिल से इसको देखें है
[41:33]तो पॉजिटिव है को चपत के हवाले से अ कि थोड़ा सा
[41:39]गर्ग और करें दूसरा अनिल दिखाई देगा करना इनेक्टिव है को देखें
[41:46]कुल मिला है अ शपथ जन्म दिया है आज का यह अब
[41:55]कह दो सफेद का काम सिर्फ इस क्षेत्र है और सिर्फ किसका
[42:02]है और अल्लाह का है में तीन दफा सिर्फ इसलिए कहा है
[42:07]ताकि दूसरे कट जाएं तो है इसलिए यार अभी ग्राम एंड ग्रामर
[42:14]के लिहाज से ड्रैमेटिकली आला हवाले से अगर देखा जाए तो यहां
[42:17]पर जो है लीला जो है शपथ से पहले हैं कि यह
[42:22]इन हिसार का फायदा दे रहा है यानी जूस इसके और कुछ
[42:27]भी नहीं है यह क्या चीज का शाप आप सिर्फ और सिर्फ
[42:31]खुद आपको जो आज एक देता है कि जमींदार कविता के साथ
[42:35]सफेद फूल की कुल अल्लाह के लिए है यह इसका मतलब है
[42:41]ना रसूल ना कोई दूसरा है ना ऐसा अ है लेकिन अगर
[42:47]एके हंगल और आ जाए इसका थोड़ा सा दबा जो इसीली पर
[42:51]है मस्जिद में ख़ुदा वंदे आलम बार-बार यह कहता है पूरे क़ुरआने
[42:53]मजीद में दो मर्तबा इस तरह से काट लिया है तब बरुन
[42:59]al-quran हमला फॉलो विंटर फलों हुआ था यह लोग जो है कुरान
[43:04]में गौर नहीं करते तदबीर से काम नहीं लेते या फिर उनके
[43:06]दिलों पर जॉन लॉक लगे हुए हैं मुकफ्फल है गौर करें दूसरा
[43:12]अनिल दिखाई देगा को खोल लीला है अ शपथ जमीन हुआ था
[43:18]कि का अव्वलन अभिजात इनिशियल स्टेज के ऊपर पावर जो सफेद का
[43:24]किसके पास है अल्लाह के पास है लेकिन जो है अगर यह
[43:29]इजाजत दे दे किसी को का यह पावर जो क्या है उस
[43:35]तरफ जहां मुस्तकिल होगा उसकी इजाजत से कि जिस तरह से सूरए
[43:38]बक़रा की आयत नंबर 255 के अंदर बयान हुआ और मूंगफली दूसरी
[43:43]आयात के अंदर भी है कि खुद आनंदपाल अभिशप्त के पॉवर को
[43:45]डिलीवर करेगा अपनी मख्लूक के दरमियान के जिसमें सारे अफेयर स्टॉप ऑफ
[43:52]दिलेश उसका अब है है कि जो मक्का में महमूद अब्बास से
[44:00]सलाह बजे मोहम्मद वाले मत करो आ अजय को कि मुझे बताया
[44:07]उक्त मस्जिद सिर्फ इशारतन आयात नहीं करूंगा मैं आपके सामने थर्ड टाइम
[44:11]अर्ज करूं आप की खिदमत में डीटेल तलब जो है पुस्तकों है
[44:15]मुझे बता यार पॉजिटिव आई को अगर हम देखें शपथ भी ली
[44:20]इस वक्त एड्रेस मैं आपको दिखा देता हूं सूरह बकरा आयत नंबर
[44:22]255 अभी और हुआ था उसके बाद सूरा युनुस आयत नंबर थ्री
[44:28]लें सूरह मरियम आयत नंबर 87 सूरह तौबह आयत नंबर 90 नंबर
[44:33]सुरेश सभा आयत नंबर 323 नंबर किफायती यह सारी की सारी आयात
[44:40]और इससे मुतालिक दूसरी जो आया आते हैं सफेद की निस्बत पॉजिटिविटी
[44:43]मुझे और आपको बतलाती है पॉजिटिव अंदाज बतलाती है कि हां शपथ
[44:49]बरहक है और दिन का हिस्सा है एक अच्छा आप आइए मोनू
[44:53]को थोड़ा सा जगह मामूली सा आगे लेकर जाते हैं उसके बाद
[44:59]ऐड कर देंगे वह यह कि इन आयात में अगर जो है
[45:00]देखा जाए कि जो पांच एड्रेस मैंने आपको दिए हैं मुझे बताया
[45:04]कि निस्बत ख़ुदा वंदे आलम किस-किस सन् की गुफ्तगू कर रहा है
[45:06]सिर्फ इशारतन हैंड्स मैं आपको बयान करूंगा इन आयात का जो लोग
[45:11]बल्ब मौजूद है वह यह है कि जब तक खुदा इजाजत ना
[45:14]दे दे इस ना आ जाए शपात नहीं होगी दूसरी चीज कल
[45:20]शाम फिरोज मास्टर चाहे रसूल की जात हो चाहे जो क्या है
[45:28]आइए मैं तारीख की जात हो चाहे 16 हां साले हीन हो
[45:32]शोहदा हो सिद्धि तीन हो सबके लिए एक ही कंडीशन एक ही
[45:38]शर्त है वह क्या है सदैव तक की बुनियाद पर शपथ के
[45:42]काम को अंजाम दे और दूसरी चीज तीसरी शर्त इनायत में जो
[45:50]नजर आता है वह यह है कि सबके-सब यह सफ़ेद करने वाले
[45:52]एक नजरिए के घायलों व नजरिया क्या है तो ही तो है
[45:57]इधर तो हित कि मुझे लिख नहीं आ तो चाची जो शर्त
[46:01]में नजर आती है ना याद के जरिए से शपथ कमल जब
[46:07]अंजाम देगा शफी ऐसा कला मतदान न करें कि जिसकी बुनियाद के
[46:10]ऊपर अल्लाह की नाराजगी सामने आए थे यो यो हनी झूठ कपल
[46:18]अंदर ना हो तो के गुनाहों में 58 हो को साफ और
[46:24]प्योर प्योरिटी उसका हिस्सा हो उसका दिल साफ हो है सिगरेट उसके
[46:30]अंदर मौजूद प्योरिटी उसके अंदर मौजूद हो तब जाकर ख़ुदा वंदे आलम
[46:36]जो क्या है उसकी इज्जत यह का यह शहीद अपनी मकाम से
[46:38]बुलंद हो यह अफराद जो तुझे देख रहा है इनकी निस्बत जो
[46:43]है शपथ के अमल को अंजाम दे एसिड एक अपने मकान से
[46:48]खड़े हो जाओ इनकी निर्भर यह शपथ के अमल को अंजाम दो
[46:50]एवं वाहिद खड़े हो जाओ अपने मुकाम से इनकी निस्बत जो है
[46:58]शपथ के अमल को अंजाम देकर मैं तुम्हें परमिशन दे रहा हूं
[47:02]इस बात से आयात दूसरी भी हैं कि जिनके नेटवर्क जो है
[47:07]सफ़ेद करने वालों का तस्कर आया है कि मलाइका भी जो है
[47:12]सफेद कमल को अंजाम देंगे फरिश्ते सूरए अंबिया आयत नंबर 2627 28
[47:17]है और ख़ुदा वंदे आलम जो है तमाम माई मां को अगर
[47:21]आप सबके सब सवाल करें टाइम बेहतरीन की शुरुआत कैसे साबित होगी
[47:27]इसके जरिए से पुराण के जरिए से तो याद रखिए का यह
[47:29]पुराने मस्जिद के अंदर मुख्तलिफ आयात में मुखालिफ खान सल्लू खास अल्फाज
[47:36]हैं आज के दिन की निस्बत जो क्या है से आपको सब
[47:38]को अगर देखें तो मुझे और आपको अंदाजा हो करके जो क्या
[47:42]है रसूल के जो खास नुमाइंदे हैं बिना में आई माता री
[47:47]नाले मुसलाम उनके लिए खास हिदायतें परवरदिगार है किस लफ्ज़ के जरिए
[47:51]से यह बाद दून उपक्रमों ऐसे बंदे के जिसकी निस्बत ख़ुदा वंदे
[48:00]आलम ऐहतराम का फाइल है इकराम का पायल उनकी इज्जत को जो
[48:02]या ख़ुदा वंदे आलम ने बाल किया हुआ है कि यह मतलब
[48:06]और वह वादा जो मैंने दिया था उसके बाद मतलब खोज में
[48:12]तमाम करूं आपकी इस वक्त यह शपथ के हवाले से बटन दबा
[48:18]से संवाद भेजो मोहम्मद वाले मोहम्मद पर है और हदीस का एक
[48:26]मजमूआ है कि जन्नत के दरवाजों में से एक दरवाजा उन लोगों
[48:29]के लिए हल्दी चाहिए है जो तमाम आदेश को यज्ञ करके हमने
[48:35]अपने अल्फाज में इसको तहरीर किया है और आपको मंत्र कल कर
[48:37]रहे हैं है जो पहले तो ही रहे हैं मगर मुसलमान नहीं
[48:42]में जन्नत के दरवाजों में से एक दरवाजा महज महज महल तो
[48:49]हित के लिए है जो मुसलमान नहीं है लेकिन खुदा परस्त है
[48:54]कि वह सदा नीयत का सीधा रखते हैं मैं जन्नत में दाखिल
[49:00]होने की ऐसे अपराध के लिए शर्त यह कि वर्षों पहले बहते
[49:05]रसूल की निष्पक्ष और से सुनिएगा आ कि चीन ना वह सदना
[49:08]रखते हो हैं और अगर उन्हें अंदाज़ा हो जाए यह नबी है
[49:13]आखरी नबी है खुदा की इज्जत है और यही मेहता क्रीम जो
[49:18]अल्लाह की इज्जत हैं तो वह सारे तस्लीम हम करेंगे यह दरवाजा
[49:23]उनके लिए को ख़ुदा वंदे आलम रोज महेश्वर जो क्या उनको रसूल
[49:26]को जबरन करेगा आ का या हबीबी तुम्हारी उम्र से नहीं है
[49:30]कि यह मशीन है यह दी है पहले इंजिल है यह हैरत
[49:35]और मेह है मगर यह खुदा परस्त है मैं इन्हें मालूम नहीं
[49:41]कि तुम जो कि आखिरी रसूल ज्यादा जो क्या है अब तुम्हें
[49:47]मैं जो है इजाजत देता हूं कि इनकी निष्पक्ष आपात के अमल
[49:52]को अंजाम 277 कि आखिर में जरूरी समझता हूं बस दो से
[49:58]तीन जुमले कि हम वक्त व्यक्तियों के कई एलियन यानि शिया हजरात
[50:05]बगैर से सुनिएगा है और हौंसले से सुनियेगा आ का महत्त्व तैयार
[50:11]रखने वाले अपराध का अक़ीदा रखते हैं आइए मैं तहरीन शपथ के
[50:17]अमल को अंजाम देंगे अब आप देख सवाल है को आपस में
[50:23]डिस्कस कर रहे हैं और कोई डिस्कशन नहीं आपस में है ना
[50:27]समझे हम ज कोई स्पीच करने ना समझे अब मैं इस पीस
[50:32]उन्हें आप संघ है लीला बताइए ना कि आई माता ही दिन
[50:38]अलैहिमुस्सलाम शपथ के मामले पर आकर बगैर किसी कंडीशन के बगैर किसी
[50:41]शर्त तो शराफ़त के शपथ के अमल को अंजाम देंगे है याद
[50:47]रखिएगा जानेमन है है जो हमने अभी थोड़ी देर पहले अपने गुरु
[50:50]के दौरान यह कहा कि जो इशारा हित में से एक शर्त
[50:53]यह है कि जो पहले तो ही होना शर्त है कि इमाम
[51:00]से बेहतर है लें तो ही कौन होगा एक अच्छा तो ही
[51:05]रहे क्या ला जब रावला तस्वीर है यानी शपथ के अमल को
[51:11]ख़ुदा वंदे आलम है तारीख को देखा रसूले खुदा के साथ लेकिन
[51:14]किस तरह से शपथ करेंगे आया ख़ुदा वंदे आलम श्याम बेहतरीन को
[51:22]बांट कर देगा अत मंहत मांग और हत मन कंपलसरी आपको जो
[51:24]सफेद करना है नहीं आ है या ख़ुदा वंदे आलम कहेगा कि
[51:34]मैंने जो है अपनी जैम अखिल ऐप को खोल कर दिया उनको
[51:36]बतला दिया और से सुनिएगा अ कि ने कमल यह है ब्राह्मण
[51:43]यह है अब जो यह सारी चीजें बतलाने के बाद मैं अपने
[51:50]मकान पर बैठ जाऊंगा पीछे हटकर अब तुम जानो या इंवाइट आइरीन
[51:52]है और यह तुम्हारे जो है पैरोकार जाने से ज्यादा जो है
[51:59]जिसकी निर्भर तुम चाहो शपथ के हमलों को अंजाम द और से
[52:05]सुनिएगा इसके बाद का जुमला सकता है अ कि चाहे वह गुनाहगार
[52:06]हो मुझे ना भी मांगता हूं तो मुझे जो है सफेद कमल
[52:11]को अंजाम दे सकते हो कि दुरुस्त हैं ए पर्सन है जो
[52:16]कैंसर नारियों में नतीजा करते हैं कंक्रीट करते हैं गुप्त को अखिलेश
[52:19]कांसेप्ट है कॉलेज कंसेप्ट है गलत कांसेप्ट है कि क्या बीमारी तारीन
[52:26]हर सूरत में जो शपथ केवल को अंजाम देंगे निकाल देता हूं
[52:31]आप किसी दुनिया के हवाले से और इसके बाद रेफर सहमत हो
[52:33]तब वहां से दुआ अ मैं अभी हम तमाम हुए बच्चों के
[52:37]है और रिजल्ट भी तकरीबन आउट हो चुके हैं मैं एक स्टूडेंट
[52:44]को पूरा साल जो है क्लास में जाता है वह जाने के
[52:48]बाद जो है आखिर ऐसा नुस्खा इंसान होता है नुकसान होता है
[52:53]उसका सालाना अ का प्रचार सामने आता है मैं 10 क्वेश्चन है
[52:57]है और 10 के 10 जो क्या है वह अंजाम नहीं देता
[53:01]है में आ है और उसके बाद जो रिजल्ट होता है तो
[53:05]मालूम अंडरस्टुड है क्या होगा जीरो बटा जीरो ऐसा हुआ था उसके
[53:12]बाद जो है बच्चे के जो प्रेसिडेंट जाते हैं दौड़ते हुए क्योंकि
[53:15]बच्चा रोता हुआ घर आया था अब यह बाल देनदार देवघर टीचर
[53:21]के पास क्लास टीचर के पास कहा यह क्या किया आपने ए
[53:25]क क्या हुआ कल जीरो बटा जीरो फिर या पासिंग मार्क्स जॉन
[53:31]नीचे दे दिए thirty-two नंबर दे दिया पति दे दिए पासिंग मार्क
[53:34]भी नहीं दिया तो को अच्छा देखते हैं दोबारा चेक करते हैं
[53:40]पर्चे को पर्चा लेकर आओ भाई अब पर चलाया गया तो वहां
[53:42]सिवाय जो है जीरो के और कुछ नहीं था यानी जाए एक
[53:47]सवाल का जवाब भी नहीं दिया था जनाब ने तो वोट क्लास
[53:51]टीचर को कहने का हक तो है ना क्या कहा जनाब आप
[53:55]आए अपने बच्चे की जाए सिफारिश करवाने के लिए और सफेद के
[53:58]लिए कि कुछ अगर तैयार किया होता तो हम भी आगे बढ़कर
[54:03]जो ये पासिंग मार्क तक ले जाते हुए उसे ए कि एक
[54:07]या दो नंबर कि अगर कमी होती है तो हम सफेद कर
[54:11]देते और आपका बच्चा आगे हो जाता है जानेमन एडिट यही आलम
[54:18]है वहां का दुनिया हमें समजातीय खरत को अ और हम जब
[54:22]दुनिया के अंदर जो क्या यह तमाम चीजों को देखते हैं तो
[54:25]क्यों जो है अपने शहंशाह को जो है दौड़ते नहीं अपनी डायरी
[54:30]बाद आज के जरिए से सपोर्ट नहीं लेते हैं ताकि आंखें रथ
[54:36]मुझे और आपको समझ में आ जाए सलामत बजे मोहम्मद सलमान उत्पात
[54:40]अजय को कि अयोध्या आंदोलन से दुआ करते हैं बारे में हमारी
[54:47]स्किन ली वारदात को कबूल फरमा हमारे गुनाहों की माफी दत्त शर्मा
[54:53]आमाले साल यहां पर चलने की तौफीक अता फरमा इमामे ज़माना किस
[54:55]ज़ुर्म लता जी लता वर्मा हमें उनकी आवाज अनुसार में शामिल वर्मा
[55:02]व बना सबल मिन्नत असमिया लिपि में झाल
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