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Shabha-e-Qadr | H.I Nusrat Bukhari
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محاضرات
Record date: 05 July 2015 - شبہائے قدر AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2015 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:18]ननर मनना सरीन र सदरी ली अमरी ली अमा बादला सुभाना ताला
[0:29]फ किताब हकी ल कुरान मजीद बिस्मिल्लाह रहमान रहीम इना जलना फील
[0:34]कद व मारा कमा ललल कद कदर मर न मलार मन कुले
[0:44]सलाम हता मतला फजर दरूद भेजे मोहम्मद सबसे पहले परवरदिगार की बारगाह
[0:57]में शुक्र गुजार है परवरदिगार माहे मुबारक के के इन आयाम में
[1:03]हमें तौफीक दी कि हम फिर से उसकी बंदगी और अबू दियत
[1:08]कर सकें इंसान एक ऐसी मखलूक है परवरदिगार ने उसे बनाया है
[1:11]ऐसा खल्क किया है कि उसकी बहुत सारी जरूरियत हैं और वह
[1:15]अपनी जरूरियत की तामील के लिए उसकी कोशिश के लिए जद्दोजहद करता
[1:18]है कोशिश करता है आपको आज पूरी दुनिया के अंदर जो इंसान
[1:22]नजर आ रहा है वह ऐसा ही है कि जो अपनी जरूरत
[1:25]के लिए कई-कई क्या-क्या मेहनत करता है कहां से क्या-क्या काम करता
[1:28]है और सब की सब सारी चीजें किस लिए वो अपनी जरूरियत
[1:32]को पूरी करना चाहता है और रिवायत की रोशनी में भी एक
[1:34]इंसान को रिस्क हलाल कमाने के लिए कोशिश और मेहनत करनी चाहिए
[1:39]लेकिन यहां एक जरूरत जो हम पूरी करते हैं वह ज्यादातर हमारी
[1:42]जरूरियत मादी हैं हमारी जाहिरी जरूरत है हमारे बदन की जरूरत है
[1:48]मिसाल के तौर पर हमें लिबास चाहिए तो हम एक ऐसी दुकान
[1:49]पर जाते हैं जहां से लिबास तैया हो सकता है लिबास अमादा
[1:53]हो सकता है खाना भूख लगी है इंसान किसी ऐसी जगह पर
[1:57]जाता है रेस्टोरेंट में जाता है जहां से इंसान खाना अपना तैया
[2:00]कर सकता है तो इंसान अपनी जरूरियत को पूरा करने के लिए
[2:04]जद्दोजहद और कोशिश करता है वहीं पर परवरदिगार ने इंसान को ऐसा
[2:07]खल्क किया है कि उसके बदन के साथ एक और चीज अटैच
[2:11]की है वह है रूह इंसान की उस रूह की भी जरूरियत
[2:15]हैं उस रूह को भी जरूरियत को इंसान को पूरा करना है
[2:19]अब उसके लिए उसे कहां जाना है क्या करना है और क्या
[2:20]चीज उसकी जरूरत को पूरा करती है वह जाहिर है क्योंकि रूह
[2:25]परवरदिगार की तरफ से है और उस रूह के लिए खुराक क्या
[2:29]है उस रूह के लिए गजा क्या है रूह का लिबास क्या
[2:32]है तो उसके लिए इंसान को रुजू करना पड़ता है उनसे कि
[2:34]जो इस इल्म को जानते हैं या जो अपनी रूहों को कमाल
[2:38]तक पहुंचा चुके हैं तो कुरान सबसे ज्यादा बेहतरीन एक ऐसी चीज
[2:43]है कि जो इंसान की हर जरूरियत को पूरा करता है क्योंकि
[2:44]खुद कुरान के अंदर परवरदिगार इशाद फरमाता है कि मैंने हर खुश्क
[2:49]और तर को कुरान के अंदर जो है वह बयान किया है
[2:50]अब इंसान की रूह की क्या जरूरत है इंसान की रूह को
[2:55]क्या चाहिए उसके लिए परवरदिगार ने इस माहे मुबारक को माहे तरबियत
[3:00]को हमारे दरमियान में र रखा है इंसान अपनी बदन की जरूरियत
[3:02]को तो हर वक्त पूरा करता है लेकिन शायद क्योंकि जिंदगी के
[3:08]अंदर इंसान गाफिल हो जाता है भूल जाता है अपनी जिंदगी में
[3:10]इतना मसरूफ हो जाता है कि वह भूल जाता है कि उसकी
[3:14]बदन के अलावा भी कोई और चीज की जरूरत है अब ऐसा
[3:17]नहीं है कि परवरदिगार माहे रमजान के अंदर हम कहते हैं कि
[3:19]परवरदिगार माहे रमजान में रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं और इतनी
[3:24]बरकत नाजिल होती हैं ऐसा कतन नहीं है कि परवरदिगार माए रमजान
[3:27]में तब्दील हो जाता है अगर खुदा रमजान में तब्दील हो जाए
[3:31]तो उसका मतलब है खुदा की जात में चेंज आ गया है
[3:35]तगुर जबकि खुदा की जात में तब्दीली नहीं है तो फिर क्यों
[3:37]इतनी ज्यादा रहमत और मगफिरत और बरकत हैं उसकी वजह यह है
[3:43]कि हम मुत वज्जा हो जाते हैं हम आम दिनों के अंदर
[3:48]मुतजेंस के अंदर ये खुद लुत्फे इलाही है कि वो हमें अपनी
[3:51]तरफ मुतजेंस रहो यानी अपने बदन की जरूरत को जाहिर थोड़ा कम
[4:02]करो तो तुम्हें खुद बखुदा चल जाएगी और यही लुत फैलाई कि
[4:06]परवरदिगार हमें इस महीने में जब बुला रहा है तो भूख और
[4:10]प्यास के साथ बुला रहा है ऐसा नहीं है अगर इंसान हो
[4:14]सकता है किसी जाहिरी दावत में जाए बोले किबला कम खाइए का
[4:16]जरा खाना कम है मेहमान ज्यादा हैं तो यहां तो नजर आता
[4:20]है कि खाना कम है लेकिन खुदा के यहां तो रिस्क और
[4:24]नेमतें कम नहीं है तो फिर खुदा ये कैसा मेजबान है कि
[4:28]भूख और प्यास से दावत कर रहा है तो यकीनन खुदा भूख
[4:29]और प से इसलिए दावत नहीं करता कि खुदा के यहां नेमतें
[4:33]कम है रिजक कम है नहीं खुदा हमें चाहता है कि हम
[4:38]दूसरी नेमतों की तरफ मुतजेंस माहे रमजान में मुख्तलिफ दस्तरखान बिछाए हुए
[4:48]हैं दिन में आपको भूख और प्यास के साथ शाम को आपको
[4:52]दुआओं के साथ दुआए इफ्त के साथ दुआए अबू हमजा उमाली के
[4:56]साथ दुआए सहर के साथ कुरान की तिलावत के साथ यानी इस
[4:58]तरह आपको दस्तरखान दे रहा है कि आप अपनी रूह को जो
[5:02]है वो तामील कर सकें रूह को अपनी गज दे सकें और
[5:06]जो शख्स अपनी इस रूह को बुलंद कर पाया इस महीने में
[5:11]वही शख्स कमाल तक पहुंचता है रूह की परवाज बहुत ज्यादा महिम
[5:14]है क्योंकि इंसान आम जिंदगी के अंदर गाफिल है भूल गया है
[5:20]अब इन्हीं आयाम के अंदर जहां परवरदिगार ने खुद माहे रमजान के
[5:22]रोजों को वाजिब किया इसकी शब और सहर को हमारे लिए पुर
[5:28]बरकत करार दिया 10 दिन रहमत के 10 दिन जो है वो
[5:31]मगफिरत के 10 दिन जहन्नुम से निजात के यानी और फिर उसके
[5:33]बाद आयाम है फिर उसके बाद सबसे ज्यादा मोहिम जो कि कल
[5:38]की शब यकीनन हमारे लिए होगी शबे कदर शबे कदर की जो
[5:43]ताक रातें हमारे साथ शामिल है क्यों परवरदिगार ने इन सारी चीजों
[5:46]को इस माह मुबारक में हमारे लिए खुदा चाहता है कि बहाने
[5:50]से अपने बंदे को अपने पास बुलाए खुदा के लिए कोई मुश्किल
[5:53]नहीं था कि एक दिन एक रात का तायन कर देता कि
[5:57]यह शबे कदर है ये नहीं कहा कहा कि शबे कदर जो
[6:01]है वो हमने माहे रमजान के अंदर करार दी है अब कौन
[6:04]सी रात शबे कदर है तो फिर जाहिर है हमें उसके लिए
[6:07]रिवायत का सहारा लेना पड़ता है मासूमीन से रुजू करें तो मासूमीन
[6:10]ने भी तीन जो ताक रातें हैं हमारी उनको जो है वह
[6:14]बयान किया उनके लिए वह भी मुश्किल नहीं था वह उसको भी
[6:18]एक रात को बयान करते लेकिन इंसान को बहाना दिया कि शायद
[6:20]इस बहाने से इंसान कुछ रातों में आकर परवरदिगार की इबादत करे
[6:25]कुछ बहाने से आकर बैठ जाए और मैं बयान पढ़ा था आयतुल्लाह
[6:28]खमना का कह रहे थे कि इंसान को चाहिए कि अपनी शबे
[6:32]कदर की रातों को गनीमत शुमार यानी उनके लम्हों को हत्ता जैसे
[6:38]ही शब शुरू हो गई है हम क्या इंतजार करते हैं य
[6:39]हो शब हो गई इफ्तारी हो गई मस्जिद में कब प्रोग्राम शुरू
[6:42]होगा जी 11:00 बजे शुरू होगा अब 11:00 बजे शायद हम समझते
[6:46]हैं 11 11:00 बजे शबे कदर हमारी शुरू है जबकि जैसे ही
[6:48]मगरिब हो गई शबे कदर शुरू हो गई है अब आपने जरूरी
[6:52]नहीं है कि आप सब म बहुत अच्छा है कि इंसान मस्जिद
[6:56]में आए और जमा होकर इबादत करे दुआ पढ़े लेकिन अपनी नी
[6:59]तवज्जो को उस लमहे से हर वक्त ऑन कर ले जैसे मिसाल
[7:04]के तौर पर अभी आप नमाज से उठक जाएंगे तो फौरन आप
[7:08]सबसे पहले क्या काम करेंगे अपने मोबाइल को साइलेंट से हटाएंगे ताकि
[7:11]आपको पता चल जाए कि आपको किसी ने कॉल करनी है तो
[7:15]आपको पता चल जाए क्यों क्योंकि आप चाहते हैं कि कोई चीज
[7:19]मुझसे मिस ना हो कोई अगर मुझे कॉल करे तो बिल्कुल ऐसे
[7:25]ही है हमें अपने आप को ऑन करना पड़ेगा हम लोग ऑफ
[7:26]हुए हुए हैं हम लोग साइलेंट हैं हमें नहीं पता कि परवरदिगार
[7:31]की रहमत किस तरह नाजिल हो रही हैं हमें खुद अपने सिग्नल्स
[7:33]को अच्छा करना पड़ेगा हम बिल्कुल इस डिवाइस की तरह है हम
[7:39]बिल्कुल मशीन जो है वो इंसान ने बनाई और इंसान जानता है
[7:42]किस तरह मशीन बनती है और उसने अपने ही तकाज को देखते
[7:43]हुए बनाई है और जवानों के लिए बेहतरीन होती है मिसाल कि
[7:47]जब एक चीज डिवाइस खराब हो गई है मोबाइल खराब हो गया
[7:49]तो इंसान कितना उसके पीछे आगे भागता है इसको सही करा ले
[7:53]क्योंकि मेरी मुझे कॉल रिसीव नहीं हो रही है स्क्रीन पर तस्वीर
[7:55]नहीं आ रही है मैसेज नहीं आ रहे हैं क्यों क्योंकि इंसान
[8:00]की जरूरत है इंसान का एक हिस्सा है वजूद का बिल्कुल इंसान
[8:06]का वजूद भी ऐसे ही है इंसान को बहुत सारी चीजें सुनाई
[8:08]नहीं देती आलम में इस आलम के अंदर परवरदिगार ने बहुत सारी
[8:14]चीजों को रखा है लेकिन मुझे सुनाई नहीं देता मुझे बहुत सारी
[8:17]चीजें इस दुनिया में दिखाई नहीं देती मुझे कब दिखाई देंगी क्या
[8:22]मैं इस दुनिया से जब चला जाऊंगा तो जब इस दुनिया से
[8:26]चला जाऊंगा तो उस वक्त तो मेरे पास सिवाय हसरत के और
[8:28]कुछ नहीं है तो बेहतर है कि मैं अपने आप को एक्टिवेट
[8:32]करूं अपने आप को ऑन करूं और ऑन कैसे करूंगा यही वह
[8:38]रातें हैं यही वह लमहा हैं यही वह आयाम है कि जब
[8:42]मैं अपने आप को ऑन कर सकता हूं अपने बदन के वायरस
[8:43]को खत्म कर सकता हूं कैसे खत्म करूंगा जियारत पढ़कर दुआ पढ़कर
[8:50]सब की दुआएं हैं दुआए अबू हमजा उमाली है कितनी बेहतरीन दुआ
[8:52]है अगर हम पूरी तो जाहिर है बहुत तुलानी है लगर थोड़ी-थोड़ी
[8:58]सी तो हम पढ़ सकते हैं और असल हद क्या है दुआ
[9:03]का दुआ का ह दफ परवरदिगार से इरत बात पैदा करना है
[9:05]राबता पैदा करना है ब रोजे की हालत है तो इंसान दक
[9:09]जो है वो रिवायत जो है वो बाज औकात नहीं पढ़ सकता
[9:12]बल फिर भी मैं किताब लेकर आया कि बाज औकात इंसान किताब
[9:13]का सहारा लेता हुआ रिवायत को पेश करे लेकिन रिवायत की रोशनी
[9:19]में गाफिल शख्स की दुआ कबूल नहीं होती है और यह शबे
[9:25]दुआ की शबे हैं इंसान गाफिल क्या है कि बस दुआ तो
[9:26]मांग रहा है लेकिन उसका जहन कहीं और है उसका वजूद तो
[9:30]मस्जिद के अंदर है उसका वजूद तो मुसल्ले पर है उसके हाथ
[9:34]तो उठे हुए हैं बारगाह में मगर उसका जहन कहीं और है
[9:38]जब उसका जहन कहीं और है वो गफिल है वो दुआ नहीं
[9:39]मा वो जो दुआ मांगेगा उसकी दुआ कबूल नहीं होनी है इसीलिए
[9:44]माहे रमजान हमें यह तौफीक देता है कि हम अपने पूरे के
[9:50]पूरे वजूद को उसकी तरफ जो है वह कर सके यानी माहे
[9:52]रमजान जो है वह अपने खोए हुए वजूद को पाता है बहार
[10:05]है माहे रमजान किस चीज की उंस बा कुरान कुरान के साथ
[10:07]की बाहर है बाहर किसको कहते हैं बाहर कहते हैं कि जब
[10:11]फूल खिलते हैं पुराने फूल झड़ पत्ते जो होते हैं वो झड़
[10:15]जाते हैं और दोबारा से रौनक आती है हरियाली आती है सब्जा
[10:18]आता है यानी दोबारा से जिंदगी आती है तब्दीली आती है रमजान
[10:24]तब्दीली का महीना है अगर हम इस महीने के अंदर तब्दील नहीं
[10:26]हो पाए मैं अपने आप को देखूं कि आज 16 सवा रोजा
[10:29]है मेरे अंदर कितनी तब्दीली आई मेरे और मेरे परवरदिगार के राब
[10:35]में गुफ्तगू में कलाम में कितनी तब्दीली आई और अगर तब्दीली नहीं
[10:38]आई है तो फिर मुझे बैठना चाहिए जैसे मैं बाज ओकात अपने
[10:43]सॉफ्टवेयर को दोबारा रीइंस्टॉल करता हूं कि हैंग हो गया है सिस्टम
[10:46]काम नहीं कर रहा उसी तरह मुझे अपने वजूद को भी रीइंस्टॉल
[10:51]करने की जरूरत है मुझे तफकॉर्न हूं बहुत नारे लगाता हूं बहुत
[11:00]बड़ा अदार हूं बहुत गिरिया करता हूं लेकिन मैं अपनी खलत में
[11:07]कैसा हूं इस माहे रमजान इंसान को खलत अता करता है कि
[11:13]उस लम्हे के अंदर सहर के अंदर तुम परवरदिगार से बातें करो
[11:15]और कब इंसान अपने रब से बातें करेगा इंसान तो अपनी जिंदगी
[11:21]में इतना मशगूल है कि वह अपने आप को भूल गया है
[11:24]और अपने रब को तो यकीनन इंसान भूल गया है अल्लाह एक
[11:26]है सब जानते हैं आप बच्चे से पूछे बच्चा ही बताएगा जी
[11:30]अल्लाह एक लेकिन अल्लाह को मैंने कभी दर्क किया अपने परवरदिगार को
[11:34]कभी मैंने अपनी जिंदगी में महसूस किया मैंने उसके वजूद से अपने
[11:40]वजूद को आशना किया लम्स किया मैंने अपने आप को उससे नहीं
[11:42]कि जबकि परवरदिगार क्या है कि मैं तुम्हारी शरक के भी ज्यादा
[11:49]करीब हूं तो मैं यह कुरबत को कब हासिल करूंगा और जिसकी
[11:51]पुश्ते पनाई के अंदर परवरदिगार का सहारा होता है तवक पर खुदा
[11:59]होता है वह जाहिर दुनिया में किसी का खौफ नहीं खाता आपके
[12:02]सामने जो औलिया खुदा हैं अल्लाह के बंदे हैं अंबिया मासूमीन क्यों
[12:09]नहीं घबराए पूरे पूरे लोग मुशरिक थे बुतों की पूजा करते थे
[12:12]हर नबी के जमाने में कोई ना कोई मुश्किलात थी मगर एक
[12:16]शख्स अल्लाह का नुमाइंदा था बिल्कुल नहीं घबराता था आपके सामने तमल
[12:20]मर्तबा हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु वसल्लम सल्ले अला मोहम्मद वा महम्मद यानी
[12:29]पूरा का पूरा मुशरा मुशरिक है जहालत का दौर है मगर एक
[12:35]शख्स ने आकर पूरे माशे को तब्दील कर लिया कितनी थ्रेट्स थी
[12:38]रसूल खुदा को यह कर देंगे मार देंगे इस तरह कर देंगे
[12:42]फिर उसके बाद लालच दी गई यह ले लो बादशाहत ले लो
[12:47]उसको ले लो उसको ले लो मगर नहीं क्योंकि खुदा की पुश्कित
[12:57]मासूमीन पर सीरत पर अमर करें तो अगर हम खुदा के लिए
[13:02]जिंदा हैं खुदा के लिए काम करें देखिए इंसान की खिलकर जो
[13:06]है वह कमाल तक पहुंचना है कौन सा कमाल कमाल क्या है
[13:12]कि इंसान अपने मकसद हयात को पहचाने मेरी मकसद क्या है मेरी
[13:15]जिंदगी का एक तो जाहिर हमारी जिंदगी मकसद है मैं मैं डॉक्टर
[13:20]हूं मैं इंजीनियर हूं मैं आलिम हूं मैं स्कॉलर हूं मैं बढ़ाई
[13:22]हूं जो भी इंसान का प्रोफेशन इंसान काम कर रहा है लेकिन
[13:26]यह तो उसका जाहिर जहां उसका वजूद चल रहा है सिस्टम के
[13:29]साथ मा के साथ लेकिन एक इंसान का जो वजूद जो परवरदिगार
[13:31]ने उसे दिया है जिसका हिसाब किताब होना है जिसका उसने जवाब
[13:36]देना है जिसके जरिए से वो रोज महशर बुजुर्ग बन सकता है
[13:41]अपने वजूद को बुजुर्ग कर सकता है वो क्या है वो इंसान
[13:43]की रूह है और जिसकी इंसान की रूह कमाल तक जाती है
[13:47]व दुनिया में भी कमाल तक पहुंचा हुआ है एक शहीद का
[13:51]वाकया शायद मैंने पहले भी आपकी खिदमत में अर्ज किया हो शहीद
[13:56]जो है वो 32 साल का शहीद है और न्यूक्लियर साइंटिस्ट है
[13:58]वो ईरान का सबसे आखिरी न्यूक्लियर साइंटिस्ट वही है जिसको शहीद किया
[14:01]गया है वो 32 साल का है जब उसके घर पर शहादत
[14:05]के बाद आयतुल्लाह खाम आई डबर इंकलाब जब जाते हैं तो उनके
[14:09]घर वालों को तसल्ली देने के लिए मुबारकबाद देने के लिए तो
[14:11]उनके घर वालों को कहते हैं कि आपके बेटे के अंदर दो
[14:15]खूबियां थी एक खूबी क्या थी कि वह अपने प्रोफेशन में यानी
[14:18]न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के अंदर बहुत हाई क्लास था उसके मुकाबले का कोई
[14:24]नहीं था और यही वजह है कि इसको शहीद किया गया दुश्मन
[14:25]घबरा गया कि जब ऐसे-ऐसे न्यूक्लियर साइंटिस्ट होंगे तो ईरान तो तरक्की
[14:30]कर जाएगा जम्हूर इस्लामी तरक्की कर जाएगा तो इसको मार दें बहरहाल
[14:34]उन्होंने उसको तेहरान के अंदर ही जो है वो शहीद कर दिया
[14:37]दूसरी चीज उसके अंदर क्या थी कहा कि दूसरी जो चीज खूबी
[14:39]इसके अंदर थी वह इसकी पहली खूबी के ऊपर हावी थी कंट्रोल
[14:44]थी वह क्या है कि यह खुदा का अब्द था यह बंदा
[14:48]था यह रात की तारीख में जो परवरदिगार की इबादत करता था
[14:51]उसने इसका दर्जे को बहुत ऊपर लेकर चला गया अब आप सोच
[14:56]कि 32 साल का जवान उसकी मैं हमारी अपनी उम्र 32 से
[15:01]कई आगे गुजर चुकी है 32 साल का जवान खुदा की बारगाह
[15:07]में क्या तज करता होगा व कैसी तज करता होगा और अगर
[15:08]वह तज करता था तो आयतुल्लाह खाम नाही को कैसे पता चल
[15:12]गया इस शब की तारीख में कोई जवान इबादत करता है तो
[15:16]मैंने पहले भी कई जगह अर्ज किया कि हम तो उसे रहबर
[15:20]ही नहीं मानते कि जिसको यह ना पता हो कि उसका जवान
[15:22]शब की तारीख में क्या करता है आयतुल्लाह हसन जादा आमली बहुत
[15:28]बड़े आलिम मुस्ताद फकी उलूम रियाजत उलूम नजूम और बहुत सारे उलूम
[15:32]पर जो है वो कंट्रोल्ड है वो अपनी किताब में लिखते हैं
[15:36]कि कश्फ जब किया इरफान के जो सैरो सफर होते हैं कि
[15:37]मैं जब भी आसमानों पर पहुंचा और जिस आसमान पर पहुंचा मैंने
[15:42]अपने आप से पहले आयतुल्लाह खाम नाही को पाया है यानी यह
[15:45]दर्जा है यह मकाम है उस आरिफ का सिर्फ इसलिए नहीं है
[15:50]कि वो सब सियासी तौर पर आप समझते हैं कि एक लीडर
[15:53]है रैपर है नहीं कमाल जो है वो शख्सियत के अंदर जहूर
[15:57]किए हुए है ये हम तो खैर चलो शिया हैं ये मानते
[15:58]हैं नॉन मुस्लिम या दूसरे फिरके के लोग जो भी उनकी शख्सियत
[16:04]को दूर से देखते हैं वह अपने ऊपर काबू नहीं कर पाते
[16:07]शख्सियत का ऐसा करिश्मा है क्या है सिर्फ और सिर्फ विलायत अली
[16:13]इब्ने अबी तालिब है कि जो सीनों के अंदर ऐसी डटी हुई
[16:18]है कि दुश्मन उससे खौफ खाता है दुश्मन मुझसे क्यों खौफ खाता
[16:21]है दुश्मन आपसे क्यों खौफ खाता है क्योंकि आप आले मोहम्मद सल्लल्लाहु
[16:24]वसल्लम की खब रखते हैं मोहब्बत रखते हैं अगर आप अपने दिलों
[16:31]से मोहब्बत निकाल दें खत्म आपको कोई कुछ नहीं कहेगा आपका कसूर
[16:33]यही है कि आप विलायत अली इब्ने अबी तालिब को मानते हैं
[16:37]आपका कसूर यह है कि आप बचपन से या अली या अली
[16:40]कहकर बड़े हुए हैं अगर आप ये सारी चीजें नहीं करते क्योंकि
[16:41]इमाम अली ही से तो मुश्किल है लोगों को आज से नहीं
[16:45]सद्र इस्लाम से मुश्किल है तो इंसान अपने आप को बुजुर्ग कैसे
[16:47]कर सकता है कि आयतुल्लाह खमना कहते हैं कि आपके बेटे के
[16:52]अंदर यह क्वालिटीज थी और क्या क्वालिटीज थी कि रोज महशर रोज
[16:55]महशर जुल्मत तारीख अंधेरा है रोशनी नहीं है वहां पर और लोग
[17:03]कई अरसे तक खड़े रहेंगे मुश्किलात के लाइन लगी रहेगी उस रोज
[17:06]जुल्मत के अंदर उस अंधेरे के अंदर कुछ लोग ऐसे होंगे कि
[17:11]जिनके बदन से नूर निकलेगा और नूर इतना होगा कि और भी
[17:16]लोग उसके नूर के अंदर जो है वह सफर जो है वह
[17:16]कयामत का तय करेंगे कहता आपका बेटा उनमें से एक है कि
[17:22]जिसके बदन से नूर निकलेगा अब सोचेंगे 32 साल की उम्र में
[17:27]उस जवान ने खुदा की क्या इबादत की है अपने आप को
[17:32]किस कमाल पर लेकर चला गया तो यह हम जवानों के लिए
[17:33]लोगों के लिए कि हम इस माहे मुबारक को गनीमत समझे गनीमत
[17:37]समझे इस लमद को गनीमत समझे कि आम दिनों के अंदर तो
[17:41]हम लोग खुद गाफिल है मैं खुद गाफिल हूं मेरी इतनी इबादत
[17:43]नहीं है लेकिन इस माहा के महीने के अंदर तो मेरी इबादत
[17:47]हैं मुझे दावत भी हैं दुआ है शबे दुआ है यह फलाना
[17:52]प्रोग्राम है दर्स है कुरान की तिलावत है मुख्तलिफ प्रोग्राम है तो
[17:55]मैं अपने आप को इन लम्हा को गनीमत समझू और उसमें से
[17:58]एक शबे कदर कदर कहते हैं अंदाजे को अल्लामा तबा तबाई तफसीर
[18:01]मिजान में लिखते हैं कि कदर के मायने अंदाजे के हैं अंदाज
[18:05]किस चीज की अंदाजा गीरी कि इंसान के जो एक साल तक
[18:10]के आने वाले वाक्यात होने वाले हैं चाहे उसका रिस्क है चाहे
[18:13]उसकी ट्रेवलिंग है चाहे उसकी मुसाफिर है चाहे उसका दुनिया से चले
[18:16]जाना है मौत है हयात है इन सबका जो है वो शबे
[18:19]कंदर शबे कदर के अंदर जो है वो पूरा अंदाजा जो है
[18:23]वो बयान किया जाता है अब इस जो इस शब के अंदर
[18:27]जहां ये सारी चीजें बयान की जाती हैं अब ये हमारे अपने
[18:31]ऊपर है कि जब हम इस शब को इबादत में गुजारेंगे तो
[18:33]परवरदिगार का इलाही जो कलम है वह हमारे फायदे के लिए रकम
[18:39]जो है वह लिखेगा अब यह हमारे अपने ऊपर है कि हम
[18:43]इन इबाद तों को इन शब को अपने लिए किस तरह कन्वर्ट
[18:47]कर सकते हैं मुख्तलिफ आमाल है आमाल तो आपके लिए आसान है
[18:49]फतल जिना के अंदर आप देख सकते हैं सरतो की तिलावत है
[18:53]दो रकात नमाज है कुरान के आमाल है और उसके अलावा सबसे
[18:56]ज्यादा शबे कदर के अंदर अगर आपका माहौल है अगर आप दोस्त
[19:00]जवाब तो वो थोड़ी सी इल्मी गुफ्तगू करें शबे कदर के अंदर
[19:04]इल्मी गुफ्तगू जरूर करें क्योंकि खुद इल्म एक रिस्क है और उस
[19:07]शब में जब आप इल्मी गुफ्तगू करेंगे तो रिस्क में इल्मी रिस्क
[19:09]में आपके इजाफा होगा और आप समझ लें कि एक कैमरा है
[19:13]जो आपको पूरी शबे कदर की रात को देख रहा है अब
[19:16]आपका उठना बैठना आपका चलना तो बाज ओकत हम होते हैं मस्जिद
[19:20]के अंदर क्योंकि हम भी जारर ऐ माशे के पले बड़े हैं
[19:22]तो जाय है मौलाना साहब जब तक नमाज पढ़ा रहे हैं कुरान
[19:25]पढ़ा रहे हैं सब बैठे हुए हैं जैसे ही चाय का वकफा
[19:28]आया कुछ खाया तो फिर हम ऐसे हो जाते हैं जैसे हम
[19:31]कोई और हैं वहां जाकर हम दुनिया कासी मजाक है एक दूसरे
[19:33]को टोंट करना सारी चीजें तो परहेज करें गुनाहों से परहेज करें
[19:39]गुनाह कौन से आप बोले खुदान खस्ता हमको गुनाह करते हैं नहीं
[19:41]मुशरा देखें ऐसा हो गया है क्योंकि हम माशे में आते जाते
[19:46]हमें एहसास होता है कि लोगों को एहसास नहीं हो रहा कि
[19:51]गुनाह हो रहा है गीबत इतनी आम हो गई है और कितना
[19:52]सख्त गुनाह है अशद मन जना रिवायत की रोशनी में कि इतना
[19:58]सख्त या जना से भी बदतर है गीबत लेकिन हम इतने आदी
[20:02]हो गए हैं मैंने देखा है इतने आदी हो गए हैं कि
[20:06]हम गीबत किए जाते हैं और स शबे कदर की रात जहां
[20:07]इबादत की रात है तनल मलायक तो रू मलायका नाजिल हो रहे
[20:13]हैं मैं जर मुफस्सल रिवायत नहीं पढ सकता क्योंकि रोजे की हालत
[20:18]के अंदर इंसान है वरना कि किस तरह मलायका नाजिल होते हैं
[20:20]और कहां कहां हरत जिब्राईल आते हैं क्या करते हैं मलायका नाजिल
[20:25]हो रहे हैं हमारी तकदीर लिखी जा रही है और हम खुदा
[20:27]नखवा स्ता उसमें किसी की गीबत कर तो यानी समझ ले कि
[20:31]हमने अपने आमाल को हमने अपनी सारी चीज को रेत के ऊपर
[20:35]डाल दिया है तबाह और बर्बाद कर दिया है कोई हीरा लिया
[20:37]और उसको पानी की घराई में फेंक दिया है अब आप ढूंढते
[20:41]रहे उसको परहेज करें यकीनन और एक दूसरे को टोके इसमें कोई
[20:46]शर्म नहीं है उस रोज महशर जो सख्ती और अजब झेलना पड़ेगा
[20:48]उससे ज्यादा बेहतर है कि आज हमसे कोई नाराज हो जाए बाद
[20:52]में मान जाएगा लेकिन आप रोके कि आप य बात कर रहे
[20:55]हैं दूसरे की मैं नहीं जानता मैं उस शख्स को जानता हूं
[20:57]लेकिन मैं उसकी ना आतो को नहीं जानता अगर वो मेरे ऊपर
[21:00]आया नहीं है तो आप इसको बयान ना करें तो माश में
[21:03]आम हो गया इसकी बुराई उसकी बुराई और फिर टीवी के प्रोग्राम
[21:07]और इंसान को हर वक्त उस पर गुफ्तगू करना और यह मसाइल
[21:09]सियासी और इन पर बाज ओकात उलमा के बारे में बयान करना
[21:14]उलमा के बहरहाल तो इंसान को चाहिए कि अपने आप को बचाए
[21:18]देखिए अगर मैं बुरा हूं मैं बुरा हूं और आप जानते हैं
[21:20]कि मैं बुरा हूं और कोई बुराई की है तो आप अपने
[21:23]वक्त को क्यों जाया कर रहे हैं मेरी बुराई को बयान करके
[21:27]आप अपने वक्त को गनीमत शुमार हैं आप आप इस्लाह के लिए
[21:29]काम करें आप माशरी की इस्लाह के लिए काम करें तो शबे
[21:33]कदर एक ऐसी रात है कि जिसका हर लम्हा काउंट होता है
[21:38]हर चीज काउंट होती है परवरदिगार कुरान में कहता है कि हमने
[21:41]इसी माहे मुबारक में इसी कदर के अंदर रात के अंदर कुरान
[21:47]को नाजिल किया है कुरान जैसी किताब कि जिसको जो है वो
[21:49]पहाड़ों ने और दूसरी चीजों ने अपने आप को अमानत लेने से
[21:55]इंकार कर दिया मगर कल्बे पयंबर पर जो है वह कुरान को
[22:00]नाजिल किया गया कुरान एक ऐसी किताब है कुरान जैसा कि बयान
[22:02]भी किया कुरान का कुछ भी और हमें कुरान की आयतों रिवाय
[22:06]तों से करीब राना चाहिए तो हमें इस रात को और ज्यादा
[22:10]मौका अगर हम इस रात को थोड़ा भी तिलावत करेंगे कुरान की
[22:12]तो इंशाल्लाह यह जो तिलावत है क्योंकि क्या है कि यह जो
[22:16]रात है रिवायत की रोशनी में भी और कुरान की आयत भी
[22:21]कहती है कि यह रात जो है वह हजार महीनों की शब
[22:21]से जो है वह बेहतर रात है यानी जो इस रात को
[22:25]इबादत करेगा वह कई हजार हजार महीनों की में जो इबादत करेगा
[22:30]उससे और जब इंसान इस रात में कुरान की तिलावत करेगा तो
[22:34]आप सोच और कदर की रात है आपके तकदीर लिखी जाए जब
[22:35]आप कुरान की तिलावत करेंगे तो आपके पूरे साल के लिए कुरान
[22:40]को लिखा जाएगा और एक और चीज जो बहुत ज्यादा जरूरी है
[22:44]इस शब में वह सदका देना है कि इंसान अक्सर भूल जाता
[22:49]है इस शब में इंसान नमाज तो पढ़ लेता है बाकी आमाल
[22:51]भी कर लेता है लेकिन सदका देना इंसान भूल जाता है तो
[22:55]अगर हम अपनी शब की शुरुआत ही सदके से करें कि देखिए
[22:59]ना हम तो परवरदिगार से मांग ही रहे हैं और मांगते ही
[23:01]रहेंगे सबको यह अता कर वो अता कर रहम कर परवरदिगार तो
[23:05]परवरदिगार भी तो कहता है कि तुम भी तो कुछ अता करो
[23:09]तुम भी तो कुछ दो मैं तुम पर रहम करूं तो तुम
[23:12]भी लोगों पर रहम करो यानी फिर मैं सब को देखूं कि
[23:13]अगर मैं किसी से नाराज हूं मैंने किसी का दिल दुखाया है
[23:17]तो मैं उससे माफी तलब करूं किसी से किसी ने मेरे मेरे
[23:21]हक में गलती की है तो मैं उसको माफ कर दूं मैं
[23:25]उसको रहम कर दूं यानी जब जिस चीज का तकाजा मैं अपने
[23:26]परवरदिगार से कर रहा हूं कि वो मुझे माफ कर दे वह
[23:30]मेरे गुनाहों पर पर्दे डाल दे तो मुझे भी ऐसा ही करना
[23:33]है लोगों के लिए अगर मैं वैसा नहीं कर रहा तो फिर
[23:37]मेरे वजूद में तब्दीली नहीं आ रही बस फिर मैं मांगे जा
[23:38]रहा हूं चीजें तो सदका देकर इस सब की शुरुआत जब आप
[23:43]सदका देते हैं रोज सदका देते हैं क्या रिवायत की रोशनी में
[23:47]ये कि जब इंसान सुबह सदका देता है तो शाम तक अमान
[23:48]में रहता है शाम को सदका देता है तो दूसरे दिन सुबह
[23:50]तक अमान में रहता है तो हम रोज हर रोज सदका देते
[23:53]हैं क्या है कि हमारा यह दिन जो है वो हमें मुसीबतों
[23:57]और बलाओ से बच सके इस तरह जो शबे कदर को सदका
[24:00]देता है वो पूरे साल की अपनी अमानत कर लेता है यानी
[24:01]जो एक रात को सदका देगा पूरे साल के लिए उसके लिए
[24:06]हिजो अमान जो है वो लिखा जाएगा और रिवायत में भी है
[24:12]अपने रिजक को सदका देकर इजाफा करो सदके को आप सदका देना
[24:15]ये नहीं है इंसान ये खुदा का अजीब निजाम है कि जो
[24:17]खुदा कहता है तुम्हें तंगी है ये है वो जो रिवायत की
[24:21]रोशनी उसका मफू यही है इंसान देकर अपने दरवाजों को खुलवाए तो
[24:26]शबे कदर जो है वो इतनी मुहिम है क्यों मुहिम है खुदा
[24:28]क्या चाहता है बात वही है घूम फिर कर बात वहीं आती
[24:33]है खुदा हमें अपना बंदा बनाना चाहता है खुदा हमें अपना मुती
[24:38]बनाना चाहता है कैसा मती क्योंकि देखि आज का जो जमाना है
[24:40]जर माशे में जो चीजें हो रही है वप से पोशीदा नहीं
[24:43]है छुपी हुई नहीं है मुल्क के हालात हैं अतरा के हालात
[24:47]हैं यमन के हालात हैं इराक के हालात हैं सारे हालात आपके
[24:49]सामने सीरिया के हालात हैं दुनिया किस तरफ बढ़ रही है दुश्मन
[24:54]किस तरह जो है वो अपना दायरा इस्लाम के गिर्द तंग किए
[24:55]चला जा रहा है तालिबान की सूरत में में दाइश की सूरत
[24:59]में तक फरियर की सूरत में किस तरह इस्लाम के अंदर ही
[25:03]रखकर इस्लाम के ऊपर एक हमला है कौन इनको फंड करता है
[25:05]कौन इनको तामील करता है ये सारी चीजें आपसे छुपी हुई नहीं
[25:09]है ऐसे दौर के अंदर जो पुर आशोक दौर है फित का
[25:13]दौर है इंसान तफ्तीश के अंदर इंसान कंफ्यूज है कि हक कहां
[25:16]है और मेरी क्या जिम्मेदारी है वहां पर सबसे ज्यादा इमाम जमाना
[25:22]से मुत्त सिल होने की जरूरत है और उस मुत्त सिल होने
[25:24]के लिए अपने अंदर खुसूसियत पैदा करनी पड़ेगी और वह कैसे इंसान
[25:30]पैदा करें भा आम दिनों के अंदर तो हमारे पास हम आप
[25:34]क्या किबला ऑफिस जाते हैं शाम आते हैं ट्रैफिक होता है फिर
[25:36]यहां मसाइल है यह मसाइल हैं अब हम क्या करें फिर घर
[25:40]है फिर बच्चे हैं फिर ये है स्टूडेंट से पूछे तो किबला
[25:44]नमा यूनिवर्सिटी जाते हैं फिर वापस आते हैं फिर ट्यूशन है तो
[25:47]फिर ये यानी हमारे पास एक बहाना है और बहाना जाहिर जो
[25:51]है वो हमारी जो है वो जाहिर सही भी है बल इंसान
[25:52]महाने भी करता है जो भी करता है तो अपने हालात को
[25:55]देख के ही करता है लेकिन उसमें कहता है हम क्या करें
[25:59]हम क्या कर सकते हैं मगर कम से कम इस माहे मुबारक
[26:03]के अंदर तो हमें मौका है कि हम बहुत कुछ कर सकते
[26:06]हैं और इस शबे कदर बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है इमाम जमाना से
[26:09]तव्स करने के लिए क्यों क्योंकि कुरान कहता है कि तनज मलाइका
[26:13]मलाइका नाजिल होते हैं किसके ऊपर रूह किसके किसके ऊपर मलायका नाजिल
[26:20]होते हैं मलायका मेरे ऊपर आपके ऊपर नाजिल होते हैं मलायका किसी
[26:23]मकाम पर नाजिल होते हैं नहीं मलायका हुज्जत खुदा पर नाजिल होते
[26:29]हैं यानी हुज्जत खुदा के वुजूद का यकीन और दलाल है यह
[26:32]शबे कदर कि हुज्जत खुदा इस दुनिया में है जिंदा है बस
[26:39]हम नहीं देख सकते गबतला है जिंदा तो यहां पर आपको अपने
[26:41]इस इमाम से मुत्त सिल होना पड़ेगा शबे कदर के अंदर और
[26:47]इमाम के जहूर के लिए अपने आप को आमादा करना सबसे ज्यादा
[26:52]मुहिम काम है और वह कैसे होगा कि जब तक मैं खालिस
[26:59]बंदा नहीं बन जाता देखि खालिस पन बहुत जरूरी है जिस तरह
[27:00]आप कुछ भी कर लें बहुत सारे कामों के अंदर अगर कोई
[27:04]दवाई खालिस या अगर कोई केमिकल खालिस नहीं है तो व असर
[27:08]नहीं करती है आप कुछ भी कर लें और बाज औकात खालिस
[27:09]चीले नायाब हो जाती हैं मिलती नहीं है बोले य मिलावट वाली
[27:13]चीज मिलती है खालिस नहीं मिलती तो इंसान कितनी जद्दोजहद करता है
[27:16]उस खालिस पन को ढूंढने के लिए सोना खालिस कैसे होता है
[27:21]एक लिक्विड है एक एसिड है उसके अंदर सोने को डालें तो
[27:24]खुद बखुदा उसके अतरा की चीजें जो है वो घुल जाती हैं
[27:25]और बाद में जो खालिस सोना है वो निकल आता है शबे
[27:30]कदर हम लोगों को खालिस करने के लिए है अपने आप को
[27:35]शबे कदर में उस तरह डाल दें जैसा हमारा रब चाहता है
[27:40]जब हम इस शबे कदर से निकलेंगे तो बिल्कुल खालिस निकलेंगे जैसा
[27:44]हमारा इमाम हमसे चाहता है खालिस कौन है मैं एक शहीद का
[27:50]वाकया पढ़ रहा था शहीद से क्योंकि र ये शोहदा जो हैं
[27:53]ये चले गए और यह जिस रास्ते पर गए हक का रास्ता
[27:55]है और इनकी ये बताती है कि हक पर थे वरना मैं
[28:01]जिंदा हूं आज अच्छी बातें कर रहा हूं कल पता नहीं मैं
[28:02]हक पर रहूंगा कि नहीं रहूंगा कोई दलील नहीं है कोई यकीन
[28:06]नहीं है जब तक मैं इस रास्ते पर मर नहीं जाता तब
[28:09]तक मैं हक पर नहीं हूं मैं इम्तिहान के टेरे पर खड़ा
[28:10]हूं ये शोहदा जो हैं व चले गए हैं और शोहदा हक
[28:14]के रास्ते पर हैं तो शहीद बरसी मशद का रहने वाला शहीद
[28:20]है वो उसका खालिस पन आप देखें कि शहीद है और कितना
[28:25]शहीद है कैसा शख्स है कि अपने जमाने के अंदर अपना जो
[28:27]उस की कंपनी यूनिट थी उसका हेड है बड़ी शख्सियत है जनरल
[28:32]है अब इसको गाड़ी दी जाती है कि भाई आप जनरल हैं
[28:37]आप गाड़ी और ड्राइवर आपको दिया है अब इसको इतना यह मुश्किल
[28:39]लगता है यह जो मुझे बैतुल माल से गाड़ी मिल गई है
[28:44]ड्राइवर मिल गया है इसका मैं हिसाब किताब कैसे दूंगा अभी बड़ी
[28:47]कोशिश में है कि किसी तरीके से ड्राइवर को हटवा दे कि
[28:51]खुद अब लाइसेंस नहीं है तो उस कहते जो जंग के इलाके
[28:54]हैं वहां पर तो शरण कोकाल नहीं है क्योंकि वहां पर कुछ
[28:57]और नहीं तो मैं गाड़ी चला लूंगा मगर उने कहा भाई आप
[28:58]शहर तो जाते हैं शहर जाने के लिए आपको ड्राइवर चाहिए अब
[29:01]ये शहर जाता है जाकर अपने एक दोस्त से कहता है कुछ
[29:05]करें मुझे लाइसेंस जो है वो बनवा के दे कहता क्यों आपको
[29:06]क्या जरूरत है आपके पास तो ड्राइवर है कहता है नहीं मैं
[29:11]बहुत ज्यादा परेशान हूं कि उस ड्राइवर का खराज जात उसकी सारी
[29:13]चीजें मेरी वजह से बा बैतुल माल से उस तक पहुंच रही
[29:18]हैं मैं रोज मैशर अपना जवाब ग नहीं हूं तो मैं इसका
[29:22]कैसे जवाब दूंगा यह खालिस पन यानी एक और इनके दोस्त है
[29:28]नकल करते हैं कि जब ये जंग पे थे सलाम वालेकुम जंग
[29:33]पे थे तो जंग पे थे तो कुछ बड़े-बड़े जो सरदार थे
[29:35]उनको वाशिंग मशीन जो है वो दी गई उस जमाने के अंदर
[29:39]कि घर वालों को दे तो कहते हैं वो अभी नहीं आए
[29:42]थे तो मुझे पता चला कि उनकी है तो मैंने कहा कि
[29:44]इससे पहले वो आए मुझे पता है इन्होंने नहीं लेनी है मैं
[29:45]खुद घर पहुंचा देता हूं घर पहुंचा दिया अब ये वापस आए
[29:50]इन्होंने वापस आकर उनसे गुस्सा किया कि आप कैसे मेरी बगैर इजाजत
[29:53]के कोई चीज कहता है मैंने नहीं दी है ऊपर से मुझे
[29:56]आर्डर आया था मैंने दे दी है कहते है आप ये सारी
[30:00]चीजें देकर हमें मुनर करना चाहते हैं हमें दुनिया की तरफ करना
[30:02]चाहते हैं हम जंग इन चीजों के लिए तो नहीं लड़ रहे
[30:05]हम तो जंग इस्लाम के लिए लड़ रहे हैं और इस्लाम के
[30:08]लिए हमें किसी चीज की जरूरत नहीं है और बहुत नाराज हो
[30:11]कहा कि जिस तरह आप आए थे उस तरह इसको वापस लेक
[30:12]चले जाए तो वो भी कह रहा मैं भी इतना ज्यादा डीट
[30:16]था कि मैंने कहा मैं भी इस दफा वापस नहीं लेकर जाऊंगा
[30:20]रख ही रहे और वो वाशिंग मशीन जब तक यह शहीद नहीं
[30:26]हो गया शहादत के बाद भी वो वाशिंग मशीन कॉटन के डब्बे
[30:28]में रखी रही घर वालों को हक नहीं था कि इस्तेमाल करें
[30:33]व खुद सैयद कहता है कि मैंने शहादत के बाद जाकर उस
[30:39]वाशिंग मशीन को हटाकर दूसरी वाशिंग मशीन घर वालों को दी है
[30:42]यह खालिस पन और इस खालिस पन का नतीजा आप देखें क्या
[30:46]है कि ये एक दिन जंग के हालत में एक जगह पर
[30:50]जो जंगी असला होता है उनको बंद कर रहे होते हैं और
[30:54]बहुत गर्मी की शिद्दत है तो देखता है कि एक बा हिजाब
[30:55]खातून चादर के अंदर उन डब्बो को अपने पांव से बंद कर
[31:00]रही यानी हमारी मदद कर रही हैं तो उसने देखा कि खवातीन
[31:05]होंगी जो जंग में आती हैं तो इसने मगर देखा कि जो
[31:07]बाकी फौजी हैं वह मुतजेंस तरफ था चादर के अंदर थी मैंने
[31:17]कहा उनको के बहुत शुक्रिया आप यह काम कर रही हैं बहुत
[31:18]अच्छा है मगर जंग में खवातीन को इजाजत नहीं है इस इस
[31:23]इलाके के अंदर जहां आप खड़ी हैं तो व खातून कहती हैं
[31:27]मगर तुम क्या मेरे भाई के लिए काम नहीं कर रहे तो
[31:32]कहते एकदम मुझे इमाम हुसैन याद आ गए व कहता है मैं
[31:33]अभी इसी हालत के अंदर अजीब था तो अचानक से उन्होंने कहा
[31:38]कि जो हमारी मदद करता है हम उसकी मदद के लिए खुद
[31:44]आते हैं यानी ऐसा शहीद था कि इसको अहले बैत नजर आते
[31:47]थे यानी अपने आप को खालिस कर दिया था हम अपनी जिंदगी
[31:53]में कब खालिस होंगे इमाम जमाना तक पहुंचना आसान नहीं है अमाम
[31:59]जमाना जिसके ऊपर मलायका नाजिल होते हो वह कौन है कि कायनात
[32:07]उसके चक्कर में बाकी है हुज्जत है खुदा की कायनात उसी के
[32:10]चक्कर में बाकी अगर वह ना हो तो दुनिया में कयामत परपा
[32:16]हो जाए यानी सब कुछ उसकी वजह से है अब उसको कैसे
[32:22]लोग चाहिए किस तरह के लोग चाहिए कभी हमने सोचा अपनी तरफ
[32:25]निगाह किया यह माहे रमजान यह शबे कदर असल में अपने आप
[32:33]को उस तक पहुंचाने के लिए देखिए सवाब तो हमें मिलना ही
[32:37]है हमें तो जन्नत का तो सर्टिफिकेट हमें मिला ही हुआ है
[32:40]किई जन्नत तो हमें मिल ही गई है जो अहले बैत की
[32:43]मोहब्बत को रखता है रिवाय तों की रोशनी में है जो वो
[32:46]जन्नम में नहीं जाएगा वह जन्नत में जाएगा मगर मसला यह है
[32:48]कि जन्नत तक जाने का जो रास्ता है उसको कौन तय करे
[32:52]और कई लोग हैं कि जो सिरात मुस्तकीम में चल रहे होंगे
[32:59]पिसल जाएंगे जन की तरफ भाई जब आपको कोई भी मुल्क या
[33:03]कोई भी आपको वीजा मिल जाए तो टिकट थोड़ी मिलता है रास्ते
[33:05]का सफर का पूरा चीज व तो आपको खुद तय करनी है
[33:10]बजक खुद तय करनी है सिरात मुस्तकीम खुद तय करना है अब
[33:16]उसके लिए मैंने अपने आप को आमादा किया है अपने आप को
[33:19]रेडी किया है देखें दुनिया में मुश्किलात हैं और रहेंगी दुनिया जो
[33:27]है दुनिया माध्य से है माद्दार में है मुश्किल आप मुश्किल को
[33:32]इस मादे से जुदा नहीं कर सकते जब तक आप इस मादी
[33:36]दुनिया में मुश्किलात हैं चाहे वह अलग-अलग तरह की हो हर शख्स
[33:38]ही अलग मुश्किल है कोई गरीब है कोई अमीर है तो उसको
[33:42]कोई और मुश्किल है कोई आलिम है तो उसको कोई और मुश्किल
[33:44]है तो जाहिल है कोई और मुश्किल है बच्चे को कोई और
[33:46]मुश्किल है बुजुर्ग को कोई और मुश्किल है खातून को हर किसी
[33:49]को कोई ना कोई मुश्किल है हमें इन मुश्किलों ही में अपने
[33:52]आप को परवान चढ़ाना है हमें इन्हीं मुश्किलों में अपने आप को
[33:58]कमा तक लेकर जाना है क्योंकि तारीख इस्लाम ने दिखाया है कि
[34:02]लोगों ने इन्हीं मुश्किलात में अपने आप को कमाल तक पहुंचाया है
[34:09]कर्बला इस चीज की सबसे बड़ी मिसाल है कि जितनी भी मुश्किलात
[34:12]हो जितना भी दायरा तंग कर दिया जाए जितना भी तुम्हारे ऊपर
[34:18]दुश्मन हावी हो जाए तुम इस मुश्किल के अंदर अपने आप को
[34:20]इतना कमाल पर ले जाओ कि कई साल गुजर जाएंगे पूरी तारीख
[34:27]में सिवाय तुम्हारे कर्बला के कुछ और नजर नहीं आएगा बेहतरीन मिसाल
[34:31]है हमारे दरमियान में कर्बला हम तो मुश्किलों में पले बढ़ने वाले
[34:36]लोग हैं हमें मुश्किलों से घबराना नहीं चाहिए हमें यह देखना चाहिए
[34:42]कि मैं कितना मजबूत हूं इस मुश्किल में इमाम हुसैन अल सलातो
[34:46]सलाम दरूद भेज मोहम्मद ले [संगीत] मोहम्मद मौला की जो जात है
[34:59]हस्ती है है हमारे लिए शकीन करें एक मैगनेट है कि हम
[35:04]अपने कल्बो को अपनी रूह को इमाम की तरफ खीच इमाम हमें
[35:10]खींचता है अरबन की मिसाल आपके सामने इस साल जो अरबन में
[35:15]मजमा था वो बेनजीर मजमा था यानी हर साल अरबन में बहुत
[35:17]रश होता है लेकिन इस साल कई गुना ज्यादा मजमा था क्या
[35:22]वजह है एक बहुत बड़े आरिफ थे और हमें तौफीक हुई शबे
[35:27]अरबन उनके साथ तो हमने उनसे कहा कि बहरहाल हम किसी से
[35:29]बात कर रहे हैं फोन प और इंटरनेट पे तो लोगों को
[35:33]बता रहे हैं कि कितने लोग हैं कितने ज्यादा लोग हैं जो
[35:37]कबन में जो है वो कर्बला की तरफ आए चले जा रहे
[35:42]हैं आए चले जा रहे हैं और पहुंच रहे हैं तो उन्होंने
[35:43]कहा कि यह मत कहो कि कितने लोग हैं उन्होंने कहा कि
[35:49]लोगों को यह बताओ कि यह कौन सी चीज है कि जिसने
[35:53]इन सारे लोगों को खींचा हुआ है कौन सी चीज है है
[35:58]आखिर इमाम हुसैन अल सलातो सलाम ने क्या किया शबे कदर है
[36:03]शबे कदर को गिरिया करें इमाम हुसैन के लिए इसलिए जियारत इमाम
[36:06]हुसैन पढ़ना जो है वह शबे कदर के आमाल में से है
[36:10]कि बगैर इमाम हुसैन के हम किसी कमाल पे नहीं पहुंच सकते
[36:16]आप देखें जियारत इमाम हुसैन हर वह रात जो कि इबादत की
[36:20]रात है 15 शाबान है इस तरह और बाकी जितनी रातें हैं
[36:22]रजब की रातें हैं शाबान की रात है दुआए आरफा हर वक्त
[36:27]में हर जगह में कोई और जियारत का जिक्र नहीं है सिर्फ
[36:33]जियारत इमाम हुसैन का जिक्र है आखिर क्या वजह है कि बगैर
[36:34]इमाम हुसैन के कोई बात पहुंच ही नहीं पाती है कोई कमाल
[36:39]पहुंच ही नहीं पाता है तमाम अंबिया तमाम अरवा किसी के लिए
[36:42]रिवायत नहीं है सिर्फ इमाम हुसैन अ सलाम के लिए रिवायत है
[36:48]कि शबे जुम्मा सबकी रूह कर्बला जाती हैं तो आखिर इमाम हुसैन
[36:55]ने क्या किया है ऐसा और अगर जो किया है उसको मैं
[36:57]मैंने कितना दर्क किया है बस आपकी खिदमत में आखिरी एक वाकया
[37:04]बयान करूं और आपसे जहमत रोजे की हालत भी है और आप
[37:08]बगैर लाइट के बैठे हुए हैं और यह भी बहरहाल सख्त अमर
[37:10]है इंसान अपनी जिंदगी में तजुर्बा से सीखता है और बाज ओकात
[37:17]इंसान की जिंदगी में मुख्तलिफ तजुर्बे होते हैं तो उसको मैं मार्च
[37:20]में मैं अरबन में भी कर्बला में गया जियारत की अरबन में
[37:24]इतना रश था कि मैं सही तरह सही तरह क्या मैं जरिए
[37:28]इमाम हुसैन अ सलाम तक पहुंच ही नहीं पाया पहुंच ही नहीं
[37:29]पाया इतना रश ता मैंने कोशिश की यानी घंटे लग जाते थे
[37:34]सिर्फ हरम में दाखिल होने के लिए और फिर उसके बाद फिर
[37:36]अंदर जो है व मैं कई दफा पहुंचने की कोशिश की जियारत
[37:40]के करीब गेट तक इतना रेला आया मुझे उसने दो दफा बाहर
[37:42]उठा के फेंक दिया दिल बड़ा टूटा कि बहरहाल हम लोग उधर
[37:46]आद दि हम लोग जब तक जरी को हाथ ना लगाए तो
[37:49]हम समझते हैं बहरहाल जियारत नहीं हुई ब हालांकि जियारत तो हो
[37:51]ही जाती है इंसान यहां से भी कर सकता है वहां लेकिन
[37:54]बहरहाल एक इंसान को होता है जरी को हाथ लगाए मैंने कहा
[37:59]मौला जियारत नहीं हो पाई है हाथ नहीं लग पाया है तो
[38:01]मैं जा तो रहा हूं लेकिन दोबारा जल्दी बुला लीजिएगा तो ऐसे
[38:06]ही हुआ मौला ने फिर दोबारा मार्च में थोड़े दिनों बाद बुला
[38:09]लिया जियारत पर चले गए अब जियारत पर गए तो हम क्या
[38:14]कहते हैं इमाम हुसैन से हमेशा मौला नौकरी अता करें किसकी अपने
[38:17]फर्जंद की अपने बेटे की जो अभी हमारे दरमियान है मुझे उसकी
[38:23]नौकरी चाहिए मुझे और कुछ नहीं चाहिए हमेशा यानी मैंने अपनी जिंदगी
[38:26]का यह फरीजा बना लिया कि जब भी इन जियारत मुकद्दसा पर
[38:31]जाता हूं मैं सबसे पहली दुआ यही मांगता हूं और यह इनसे
[38:36]जो मांगो यह कभी रद नहीं करते यह हमेशा देते हैं और
[38:38]जब इनसे आप बार-बार कहेंगे तो कैसे हो सकता है आप मुझसे
[38:42]कुछ कहे दो तीन दफा तो मैं शर्मिंदा हो जाऊंगा तो यह
[38:46]तो कायनात के करीम लोग हैं इनके दरों से तो कभी कोई
[38:48]खाली गया ही नहीं है तो ये कैसे हो सकता है कि
[38:52]इनके दर पर जाए तो मैं हमेशा की तरह कि मौला य
[38:55]मौला ने क्या किया कि मेरा इम्तिहान ले लिया इस मार्च के
[38:58]अंदर जब मैं जियारत पर गया तो मेरी फैमिली भी थी मेरा
[39:01]बच्चा भी था और मेरे जो साले थे वह भी पाकिस्तान से
[39:04]जियारत पर आए हु थे तो मेरा बेटा जो है वह साढ़े
[39:06]सा साभ ठ साल का हो गया तो वह अपने मामू के
[39:09]साथ कि भाई आप हर रोज रात को जाते हैं रात हरम
[39:13]में गुजारने मुझे भी लेकर जाए और जिद करक बड़ा अपने आप
[39:18]को तैयार करके टोपी ओपी पहन के और गले में जो है
[39:22]वह सब्स शॉल पहन के और जो है वो रेडी होकर जो
[39:26]है वो अपने मामू के साथ जियारत पर चला गया मैंने कहा
[39:27]उनको कि रात तुलानी हो जाएगी आप ज्यादा आप इसको छोड़ दीजिएगा
[39:32]हजरत अब्बास अल सला सलाम की जरत करके देर हो जाएगी ये
[39:34]सो जाएगा मगर नहीं वो बजद था मैं सो रहा था फजर
[39:38]का वक्त हुआ अचानक से दरवाजा होटल का खुला अजान होही होने
[39:43]वाली थी हो रही थी तो जो मेरे ब्रदर इन लॉ थे
[39:47]वो आए उनके हाथ में मेरे बेटे के जूते थे कहा कि
[39:51]बेटा आया मैंने कहा नहीं कह रहा पता नहीं कहां है कहते
[39:52]उसको मैंने हरम में हजरत इमाम हुसैन में बिठाया था और मैं
[39:57]वा वापस आया हूं एक घंटा हो गया मुझे वो नहीं मिल
[40:00]रहा पता नहीं कहां चला गया अच्छा वो क्योंकि कराची से आए
[40:02]थे तो इंसान घबरा भी ज्यादा जाता है क कराची के हालात
[40:05]इनसे ऐसे हैं तो मैंने कहा घबराने की जरूरत नहीं है हरम
[40:09]में होगा कहां जाना है उसने खैर खुलासा मैंने कहा कि चलो
[40:11]पहले परवरदिगार की इबादत तो कर लो बच्चा तो मिल ही जाएगा
[40:15]नमाज पढ़ी फौरन फिर मैं गया हजरत अब्बास के हरम से ढूंढता
[40:17]ढूंढता बहरहाल पहुंचे बैनल हरमैन खुद्दाम को हरम इमाम हुसैन में बोला
[40:22]उन्होंने कहा नहीं आप यहां खड़े हो यहां जाएं यहां देखें खुलासा
[40:25]हरम में ढूंढते रहे बच्चा नहीं मिला हरम के अतरा ढूंढते रहे
[40:29]बच्चा नहीं अच्छा बच्चा भी बच्चा नहीं है कि बोले कि बच्चा
[40:33]एक हो गया नहीं बच्चा ऐसा है कि एक तो उसको फारसी
[40:36]भी आती है अरबी भी थोड़ी बहुत समझ लेता था उर्दू भी
[40:38]उसको अच्छी आती है और वहां पर 70 पर लोग ईरानी थे
[40:42]उन दिनों में और उसको होटल भी पता था कि होटल कहां
[40:46]है तो यह बहुत ज्यादा तफ्तीश का बाइज था कि बच्चा कहां
[40:49]चला गया अब जरा ये मैं बयान कर रहा हूं आप उस
[40:50]कैफियत को नहीं समझ सकते लेकिन मैं तो बहरहाल कुछ आयतें रिवायत
[40:54]पढ़ी हुई तो थोड़ा मेरा दिल मुतमइन था लेकिन जो मेरे रिश्तेदार
[40:56]उनकी हालत गैर हो गई क्योंकि घंटे बढ़ते चले जा रहे थे
[41:01]बच्चा नहीं मिल रहा था कई दफा देखा बैनल हरमन देखा लोग
[41:05]सो रहे हैं ऐलान करवा लिए कुछ हर गेट पर चले गए
[41:06]खुद्दाम ने बोला नहीं कोई बच्चा नजर नहीं आया हमें कोई बच्चा
[41:11]अब पूरा कारवान जो है वह कारवान के सलार और जो लोग
[41:15]अरबी सब बच्चे को ढूंढने में लगे हुए हैं बच्चा नहीं मिल
[41:16]रहा मैं हरम इमाम हुसैन में जरी के पास गया मैंने कहा
[41:20]मौला यह तो मैं जानता हूं कि आप जानते हैं बच्चा कहां
[41:26]है मैं नहीं जानता आप जानते हैं और कहां जा सकता है
[41:32]बच्चा आपकी हुकूमत से बाहर आपके उससे बाहर बस है तो आप
[41:37]यकीन करें मैंने हरम की वो वो जगह गया कि जहां मैं
[41:38]इतने साल से जा रहा हूं मैं नहीं गया क्यों क्योंकि बच्चा
[41:41]को हो गया था कभी इधर कभी उधर कभी जेरे जमीन नया
[41:47]कॉरिडोर बनाया ऊपर ढूंढा पूरा बच्छा नहीं मिला अचानक से मैं जरी
[41:50]के द्वारा क्योंकि कई चक्कर लगाए बंदा पता भी लेकिन बार-बार जब
[41:54]परेशान होता है तो बंदा ढूंढ रहा होता है जब मैं दोबारा
[41:55]चक्कर लगा आया तो बिल्कुल जरी के जो मेन दरवाजा उसके सामने
[42:00]से गुजरा तो ऐसा लगा कि हवा का झोंका आया और उस
[42:05]झोंके ने यह बोला कि तुम्हारे बच्चे को खोए हुए कितनी देर
[42:08]हुई है कुछ घंटे कुछ घंटों में तुमने हरम का कोना कोना
[42:16]ढूंढ लिया कुछ घंटे हमारा बच्चा सा स साल से नहीं आया
[42:22]तुमने थोड़ी देर ढूंढा उसको तुमने एक घंटा ढूंढा अपनी जिंदगी के
[42:29]अंदर आप यकीन करें मैं गिर गया मैं टूट गया मैं जो
[42:36]इतना दावेदार अल अजल अल अजल या इमामे जमान मैं टूट गया
[42:40]मैंने हाथ जोड़े मला मौला मैं हार गया मैं कमजोर हूं मेरे
[42:48]दावे ठीक नहीं है यह एक पैगाम था जो मुझे इमाम ने
[42:54]दिया कि आसान नहीं है अगर ढूंढना चाहते हो तो तुम्हारी हर
[42:58]वक्त निगाह मुंतज रहे तुमने कभी कूफा में ढूंढा तुमने कभी हरम
[43:04]में इमाम अली में ढूंढा तुमने मेरे हरम में ढूंढा कभी उसको
[43:08]तो तुम फिर किसका इंतजार कर रहे हो जब तुम्हारी आंखों में
[43:13]चश्मे इंतजार ही नहीं अभी आपने मुझे बुलाया हो और नमाज हो
[43:17]चुकी हो और जैसे मौलाना साहब अगर थोड़ी देर में आए तो
[43:20]अब आपकी निगाहें क्या है दरवाजे पर है ना थोड़ी-थोड़ी देर बाद
[43:24]कब आएंगे कब आएंगे वक्त वदा घड़ी देखना शुरू हो गई इस्तरा
[43:26]पैदा हो गया बदन के अंदर यार 10 मिनट हो गए पाच
[43:29]मिनट हो गए मौलाना साहब नहीं आके दे रहे कहां रह गए
[43:33]हैं ट्रैफिक में फंस गए कहां रह गए कितना इस्तरा हो जाता
[43:38]है 1140 साल कुछ महीने कुछ घंटे और सेकंड की सुई बढ़ती
[43:44]चली जा रही है कितना मैं मुस्तरबत मैं इस्तरा हुआ हूं तो
[43:52]आए हम कोशिश करें शबे कदर में अपने वक्त के इमाम को
[43:55]ढूंढे मलायक नाजिल हो रहे हैं इमाम के बगैर शबे कदर मुकम्मल
[44:01]नहीं है तो परवरदिगार की बारगाह में दुआ करते हैं कि परवरदिगार
[44:05]इमाम जमाना के जहूर में ताजल अता फरमा हमें उनके नासों उनके
[44:11]मददगार में शुमार फरमा जो लोग परेशान हाल है उनकी परेशानियों को
[44:14]दूर फरमा जो लोग बे औलाद है औलाद सालेह अता फरमा जो
[44:19]लोग बेरोजगार हैं रिजक हलाल अता फरमा जो बरसरे रोजगार रिस्क में
[44:22]तरक्की और कुशा दगी अता फरमा बहुत सारे लोग मरीज हैं इस
[44:27]मौसम की वजह से भी गर्मी की वजह से भी बहुत से
[44:30]लोग आईसीयू के अंदर हैं और और भी बहुत सारे एक दोस्त
[44:33]हैं मेरे उनकी वालिदा जो हैं वह बहुत ज्यादा मुश्किल हालत के
[44:35]अंदर है और बहुत सारे लोगों ने सेहत के लिए दुआ के
[44:38]लिए कहा है परवरदिगार उन सबको और जो लोग यहां हाजरी है
[44:40]उनके भी सब जो भी लोग रिश्तेदार दोस्त अहबाब मरीज में परवरदिगार
[44:45]बीमार कर्बला के सदके शिफा कामला और आला अता फरमा परवरदिगार उम्मते
[44:51]मुस्लिमा जहां-जहां मुसलमान है फलस्तीन में अफगानिस्तान में इराक में यमन में
[44:56]सीरिया के अंदर खुद अफगानिस्तान पाकिस्तान जहां भी है परवरदिगार इन मुसलमानों
[45:02]की माल जान इज्जत आबरू की हिफाजत फरमा दुश्मना इस्लाम को नेस्त
[45:06]और नाबूत फरमा अमरका इसराइल को नेस्त नाबूत फरमा तक फरिया दाइश
[45:12]को नेस्त और नाबूत फरमा पाकिस्तान को इज्जत और इस्ते काम अता
[45:15]फरमा पाकिस्तान के दुश्मन चाहे व दाखिली हो चाहे व खारिज हो
[45:18]परवरदिगार इनको नेस्त और नाबूत फरमा हमारे हुक्मरानों को हिदायत अता फरमा
[45:24]इस माहे रमजान की बरकतों से रहमत बाहरान को हम पर नाजिल
[45:27]फरमा परवरदिगार इस मुश्किल इस ववा को मुश्किलात जो बीमारियां है परवरदिगार
[45:31]अपने लुत्फ और करम से इस माहे मुबारक में हमसे दूर फरमा
[45:36]परवरदिगार रहमतों के महीनों के अंदर हमें अपना सही अब्द और मुती
[45:42]बनने की तौफीक अता फरमा आने वाली शबे कदर में हमें शबे
[45:44]कदर को दर्क करने की तौफीक अता फरमा पर आखिर में एक
[45:49]दफा सूर फातिहा पढ़कर और सूर तौहीद पढ़कर तीन दफा तमाम मोमिनीन
[45:51]मोमिना और तमाम मरमन को और खासतौर पर अपने मरन को जो
[45:57]लोग यहां पर पिछले साल थे और अभी नहीं है इस मस्जिद
[46:01]के बानि हों में से तमाम शोहदा मिल्लत जफरिया शदा इलाम शदा
[46:03]इंकलाब और उस्ताद सिते जाफर की रू को पढ़कर ब बमला रमान
[46:37]रहीम अलाली हसन सवाली लीला या एजुकेशनल सोसाइटी बच्चों और बड़ों के
[46:54]लिए मनी नए तरबियती अंदाज के और तफरी मुका जिस राफा और
[47:03]दौरे बच्चों की तरबियत लाकी मेरात वाले मसाइल और उनका हल को
[47:07]अंदरूनी और खारी और इस तरह के मुख्तलिफ तर्ज और खूबसूरती के
[47:14]इसके अलावा फिकरी दर्स फौरन बा जरत मामी तैयार में पाबंदी के
[47:17]है ताकि नई न बल्कि फिकरी सतह को आज डडल कॉम
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