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Azadari Nusrat e imam Ka Paish Khyma | H.I Hadi Wilayati
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محاضرات
Record date: 30 jun 2024 - عزادری نصرت امام کا پیش یمہ AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:16]ला ह लावता इल्ला बिल्ला अली अजम बिल्ला मनता रम बिस्मिल्लाह रहमान
[0:28]रहीम अल हमदुलिल्ला रबल आमीन नद ननन फर वन सल्ली न सलिम
[0:42]अला हबीब न हील हाफ सही मुब लाते बशीर रहमत नजरे नमते
[0:58]सदना नबीना मौलाना अल कासम [प्रशंसा] [संगीत] मोहम्मद आ अनरी अजीन हुदा
[1:15]महद मासूमीन मुकन मलना अ बला र रा ला मतला अम्मा बाद
[1:38]फकत काल अल्लाह तबारक ताला बिल्ला मिन शतान रजी बिस्मिल्ला रहमान रहीम
[1:52]मोहम्मद रसूलल्लाह वीना माहुल कु सवात पढ़ मोहम्मद आले मोहम्मद परने गरा
[2:11]कद सबसे पहले तो मैं आप सबकी खिदमत में माजर हूं के
[2:16]कुछ तार के साथ आपकी खिदमत में हाजिर हो सका और उसकी
[2:22]वजह यकीनन आप जानते हैं कि कुछ ऐसे मामलात है कि जो
[2:28]आखिर वक्त पर पेश आ जाते हैं जिसके सबब मुझे घर से
[2:29]निकलने में कुछ ताखी हो गई और यहां पहुंचने में भी ताखी
[2:35]का शिकार हुआ आप सबसे मजरत खवा हूं कि आपको इंतजार करना
[2:39]पड़ा अजादारी नुसरत इमाम का पेश खैमाह कुछ अराइज मुकरा वक्त में
[2:49]पेश करने की कोशिश करूंगा और मुझे इस बात का अंदाजा है
[2:51]के गर्मी बहुत शदीद है और आप लोगों के लिए यहां बैठना
[2:56]एक मुश्किल और दुश्वार काम है लेकिन इस नियत के साथ कि
[3:02]परवरदिगार हम यहां बैठना हमारी गुफ्तगू करना और आपका गुफ्तगू सुनना अपनी
[3:06]इबादत करार दे एक दफा सवात पढ़िए मोहम्मद आले मोहम्मद [प्रशंसा] पर
[3:14]अजने गिरामी कद्र जिस आयत को सरनाम कलाम के तौर पर आपके
[3:21]सामने पेश किया मुकदमा तौर पर थोड़ा बहुत उस पर गुफ्तगू करके
[3:24]रोशनी डालकर आगे बढ़ना चाहता हूं और फिर इंशाल्लाह कोशिश य होगी
[3:29]कि मौजू से उस मुकदमे को मरबूपल्ली [संगीत] उनके साथ है व
[3:56]जो लोग उनके साथ है अार कु फार पर जो है व
[4:00]शदीद है रहमा ब आपस में एक दूसरे के साथ रहम दिल
[4:06]है मेहरबान है इस आयत को मैंने क्यों आपके सामने सरनामा कलाम
[4:08]के तौर पर पेश किया क्यों मैंने अपनी गुफ्तगू का आगाज इस
[4:14]आयत से किया उसकी वजह यह है कि एक कांसेप्ट के जो
[4:15]कुरान में रिवायत में जियारा में दुआओं में हमें मिलता है वह
[4:20]क्या है वह है मायत का कांसेप्ट मायत का कांसेप्ट क्या है
[4:26]मायत यानी हम रही यानी साथ हो जाना जब अरबी जबान के
[4:33]अंदर यह कहा जाना होता है कि दो चीजें एक दूसरे के
[4:39]साथ हैं तो कहा जाता है कि फला चीज मा फला चीज
[4:42]बहुत मशहूर मारूफ मिसाल मैं आपके सामने पेश करूं जो आपने बार
[4:46]सुनी है अली ली यानी जब दो चीजों के बारे में बताया
[4:50]जाना होता है कि यह दो चीजें कभी भी एक दूसरे से
[4:53]जुदा नहीं होंगी एक दूसरे के साथ हमेशा जुड़ी हुई है मायत
[4:59]में है एक दूसरे के साथ एक राबे में है इनके दरमियान
[5:03]एक कनेक्शन पाया जाता है तो लफ्ज मा का इस्तेमाल किया जाता
[5:07]है मायत इस मायत को कुरान मजीद ने इस मायत को रिवायत
[5:13]अहले बैत अ सलातो सलाम ने इस मायत को जियारत और दुआओं
[5:16]ने बयान किया है यानी अगर मैं आपके सामने यह इद्दा करूं
[5:21]तो मेरे पास इस इद्दा के लिए दलील है यानी अगर मैं
[5:25]आपके सामने एक जुमला कहूं तो ऐसा नहीं है कि मैं बे
[5:29]दलील यह जुमला कह रहा हूं बल्कि मेरे पास इस जुमले के
[5:32]लिए दलील मौजूद है और मैं दलाल उसके मुफस्सल आपके सामने पेश
[5:34]कर सकता हूं वो यह कि अगर आप कहे कि दीन का
[5:41]खुलासा क्या है अगर आप कहे कि दीन की समरी क्या है
[5:43]आजकल आपने देखा ना वन लाइनर बता दीजिए कि क्या होने जा
[5:49]रहा है हकीकत क्या है मुख्तसर वक्त में बताइए एक बहुत ही
[5:52]मुख्तसर क्लिप में बताइए वक्त नहीं है लोगों के पास एक घंटा
[5:58]डेढ़ घंटा तकरीर सुनने का अब वन लाइनर बताइए कि हुआ क्या
[6:00]एक हेडलाइन बताइए तो अगर दीन की हेडलाइन दीन की तमाम तर
[6:28]तालीमाबाद तरज नहीं करता ताई नहीं करता अकेले सफर की खुदा की
[6:33]जानिब क्योंकि परवरदिगार मुताल उस वाक को जो शैतान का वाकया है
[6:40]कुराने मजीद में तफसील के साथ बयान करता है मैं उस तरफ
[6:42]नहीं जाना चाहता कि जब उसको परवरदिगार मुताल ने कहा इक रजी
[6:49]तू दुत कारा हुआ है फ म इधर से चला जा निकल
[6:53]जा तू दुत कारा हुआ है मल है उसने पलट कर के
[6:58]कहा रा मु परवरदिगार कहीं और जाकर के नहीं बैठूंगा मैं तेरे
[7:02]सीधे रास्ते के किनारे पर बैठूंगा और यहां पर बैठ कर के
[7:08]लोगों को अगवा करने की कोशिश करूंगा यानी उसने यह नहीं कहा
[7:13]कि परवरदिगार मैं तेरी दुकान के मुकाबले में अपनी दुकान खोलूंगा उसने
[7:17]यह नहीं कहा परवरदिगार मैं तेरे रास्ते के मुकाबले में एक पैरेलल
[7:21]अपना रास्ता बनाऊंगा नहीं उसने कहा परवरदिगार मैं तेरे ही रास्ते के
[7:27]किनारे पर आकर के बैठूंगा और इसी रास्ते से तेरे ही बंदों
[7:29]को करके धोखे से अपनी तरफ लेकर के जाऊ इसीलिए इस्लाम ने
[7:36]कभी भी रिकमेंड नहीं किया कि तुम अकेले सफर करो खुदा की
[7:42]जानिब क्यों क्योंकि शैतान जैसे लोग इस रास्ते पर मौजूद है शैतानी
[7:46]ताकत कुवत इस रास्ते पर मौजूद है जो तुम्हें किसी भी वक्त
[7:49]तुम्हारी किसी भी ख्वाहिश के जरिए से गुमराह कर सकती हैं इसीलिए
[7:54]वली खुदा की हमराही में जाओ ताकि अगर तुम रास्ता कज करने
[7:57]लगो तो वो तुम्हारा रास्ता सीधा कर दे वह तुम्हें सिरात मुस्तकीम
[8:05]पर गामजीन सेप्ट को बयान किया है जिरात ने दुआओं ने रिवायत
[8:09]ने और कुरान उन आयात में से एक आयात य कि मोहम्मद
[8:14]रसूलल्लाह लन मा मोहम्मद अल्लाह के रसूल है और वह के जो
[8:17]रसूल अल्लाह के साथ है अशदा कु रमा ब मुख्तलिफ अंबिया की
[8:27]दास्तान में इस मायत के कांसेप्ट को मुख्तलिफ नामों से याद किया
[8:31]गया कहीं कहा गया है कि हवारी ने ईसा एक दफा कहा
[8:38]गया है कि हजरत मूसा ने कहा मनसार ला कौन है जो
[8:44]अल्लाह के रास्ते में मेरी मदद करे एक मकाम पर कहा हजरत
[8:49]ईसा के हवाय एक मकाम पर हजरत यूसुफ की जबानी कहा के
[8:51]अना मनी मैं और जो मेरी इतबा करेगा रसूल अल्लाह के मामले
[8:57]में कहा मोहम्मद रसूलल्लाह कभी माहू के जरिए से कभी इतबा के
[9:04]जरिए से कभी हवारी के जरिए से कभी अंसारी इलल्ला के जरिए
[9:07]से इस कांसेप्ट को बयान करने की कोशिश की गई इसीलिए आप
[9:11]देखें कि जब आप खड़े होते हैं जियारत सायरे शोहदा कर्बला पढ़ते
[9:15]हैं जियारत वारिसा पढ़ते हैं और जियारत वारिसा के उस आखिरी पैराग्राफ
[9:20]पर पहुंचते हैं कि जिसमें रिकमेंड किया गया है कहा गया है
[9:23]कि तुम तमाम तर अंसार हुसैनी और असब हुसैनी को मुश्तरका तौर
[9:29]पर एक सलाम दो आपने पहले हजरत सद शोहदा को सलाम कह
[9:31]दिया हजरत सरकारे वफा हजरत अब्बास की जात अकदर अली अकबर की
[9:37]जियारत पढ़ ली और अब उसके बाद कहा जाता है कि आप
[9:40]तमाम तर शोहदा ए कर्बला के लिए जियारत पढ़िए इसीलिए आप देखें
[9:45]कि वो जो जमीर है वो तब्दील हो जाती है अब तक
[9:49]जमीर चली आ रही थी अस्सलाम अलेका अस्सलाम अलेका अस्सलाम अलेका आखिरी
[9:52]पैराग्राफ में आकर के जमीर क्या हो जाती है अस्सलाम वालेकुम आप
[9:55]सब पर हमारी जानिब से सलाम हो वहां पर जो जियारत शुरू
[10:01]हो रही है व क्या है अस्सलाम वालेकुम या औलिया अल्ला अस्सलाम
[10:07]वालेकुम या अंसार दनला अस्सलाम अलेकुम या अंसार रसूला अस्सलाम वालेकुम या
[10:12]अंसार अमीर मोमिनीन अस्सलाम वालेकुम या अंसार फतिम जहरा यानी जो चीज
[10:22]असबे हुसैनी और अनसार हुसैनी को दूसरों से जुदा करती है व
[10:28]क्या है वो यह है कि इन्होंने नुसरत दीन खुदा के लिए
[10:30]और नुसरत वली खुदा के लिए हक को बातिल में उस रास्ते
[10:35]का इंतखाब किया है कि जो नुसरत वली खुदा का रास्ता यानी
[10:39]मैं आपसे कहूं कि आपको एक ऑब्जर्वर के तौर पर कर्बला के
[10:44]मैदान में बुलाया जाए सन 61 हिजरी में और आपको दावत दी
[10:48]जाए कि आप तशरीफ लाए सन 61 हिजरी में कर्बला के वाक
[10:53]को देखें तो मैं यह कहूंगा कि दोनों तरफ के लोगों में
[10:56]वो कौन सी खुसूसियत है कि जो इस तरफ वालों को उस
[11:02]तरफ वालों से जुदा करती है आपने कहा शायद नमाज पढ़ना लेकिन
[11:09]आप देखेंगे कि नहीं नमाज अगर यहां वाले पढ़ रहे हैं तो
[11:11]नमाज वहां वाले भी पढ़ रहे आपने कहा रोजा रखना तो शायद
[11:15]मुमकिन है आपको लश्कर यजीद में कोई ऐसा मिल जाए कि जिंदगी
[11:17]में कभी उसका कोई रोजा कजा ना हुआ आपने कहा कि हज
[11:22]करना आप जाकर के देखेंगे कि लश्कर यजीद में कितने ही ऐसे
[11:27]लोग थे जिन्होंने जिंदगी में कई कई दफा हज किए आप कह
[11:28]अल्लाह की में माल देना मुमकिन है वहां से कई लोग ऐसे
[11:33]मिल जाए जिन्होने अल्लाह की राह में माल दिया आपका हाफिज कुरान
[11:37]होना आप जाइए और देखिए के फेहरिस्त बयान कीया उलमा ने के
[11:39]लश्कर यजीद में कौन से वह लोग थे जो हाफिज कुरान थे
[11:43]इसका मतलब तमाम तर खुसूसियत अच्छा यहां पर मैं एक बात जिसको
[11:50]कहा जाता है ना कि एक अलार्म के तौर पर और एक
[11:55]कौशन के तौर पर यहां पर बयान कर दूं जब हम कहते
[11:58]हैं कि दोनों तरफ के लोग नमाज पढ़ रहे थे जब हम
[12:00]कहते हैं कि दोनों तरफ के लोग रोजा रख रहे थे जब
[12:02]हम कहते हैं दोनों तरफ के लोग हज कर रहे थे जब
[12:05]हम कहते हैं दोनों तरफ के लोग अल्लाह की राह में पैसा
[12:08]खर्च कर रहे थे जब हम कह रहे हैं दोनों तरफ हाफिज
[12:11]कुरान थे इसका मतलब यह नहीं है हम ये कह रहे हैं
[12:12]दोनों तरफ हाफिज कुरान थे इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों
[12:17]बराबर के हाफिज कुरान थे इसका मतलब यह नहीं कि दोनों की
[12:22]नमाज बराबर थी नहीं दोनों तरफ नमाज पढ़ने वाले थे लेकिन वो
[12:25]नमाज कि जो हुसैन के साथ पढ़ी जाए और वो नमाज कि
[12:29]जो यजीद के लश्कर में पढ़ी जाए उसमें जमीन था आसमान फर्क
[12:33]है दोनों तरफ नमाजी थे लेकिन दोनों की नमाज बराबर नहीं थी
[12:36]जिसकी नमाज उसको हुसैन तक पहुंचाए वह नमाज और है जिसकी नमाज
[12:41]यजद तक पहुंचाए उसकी नमाज और है वो चूंकि जाहिरी तौर पर
[12:44]रुकू और सजदा और कयाम और तशदूद चूंकि इमाम की जात है
[12:53]रूहे रोजा चूंकि वली खुदा की जात है रूहे इबादत चूंकि इमामत
[12:56]है इसलिए अगर कोई इबादत अंजाम दे रहा है और इमामत से
[13:00]गफलत किए हुए तो उसके अरकान को तो इबादत कहा जा सकता
[13:05]है लेकिन रूह इबादत से आशना नहीं है यानी अगर इस तरफ
[13:07]का कोई शख्स भी अव्वल वक्त में नमाज पढ़ रहा है और
[13:09]उस तरफ का कोई शख्स भी अव्वल वक्त में नमाज पढ़ रहा
[13:12]है तो आप यह नहीं कह सकते कि नमाज के मामले में
[13:16]दोनों बराबर हैं नहीं दोनों नमाज पढ़ रहे हैं लेकिन इसकी नमाज
[13:18]का मकाम कुछ और है उसकी पूरे उम्र की नमाज मिलकर के
[13:24]भी इसकी एक नमाज का मुकाबला नहीं कर सकती क्योंकि इसकी नमाज
[13:27]लश्कर हुसैनी में पढ़ी जा रही है इसकी नमाज वलीय खुदा की
[13:32]मायत में पढ़ी जा रही है इसकी नमाज वलीय खुदा की हमराही
[13:34]में पढ़ी जा रही है और दीन का खुलासा वलीय खुदा की
[13:38]हम रही है नमाज रोजा हज इंफाक हिज कुरान सब कुछ उस
[13:45]वक्त काबिले सताय है कि जब वली खुदा की मायत में अंजाम
[13:50]पा रहा हो अगर अल्लाह के वली की मायत में ना हो
[13:56]अल्लाह के वली की हमराही में ना हो अगर अल्लाह के वली
[14:01]के साथ रह कर के अल्लाह के बताए हुए इमाम और नुमाइंदे
[14:02]के साथ ना हो तो अरकान नमाज अरकान है लेकिन उसमें रूह
[14:09]बाकी नहीं अब आपको बुलाया जाए और कहा जाए कि आप देखें
[14:10]के दोनों तरफ लश्कर खड़े हुए हैं आप बताइए कि वो कौन
[14:17]सी खुसूसियत है कि जो हुसैनियो को हुसैनी बनाती है यजीद को
[14:24]यजीदी बनाती आपने बहुत सारी खुसूसियत पर तवज्जो है दोनों तरफ इंसान
[14:31]है दोनों तरफ मुसलमान है दोनों तरफ नमाज पढ़ने वाले हैं दोनों
[14:34]तरफ रोजा रखने वाले हैं दोनों तरफ हज करने वाले हैं दोनों
[14:39]तरफ इफाक करने वाले हैं दोनों तरफ हाफिज कुरान है फिर वह
[14:45]खुसूसियत कौन सी है इमतियाज खुसूसियत कौन सी है वह जो इन
[14:49]दोनों के दरमियान फर्क लेकर के आती है वह खुसूसियत कौन सी
[14:53]है तो आपको पता चलेगा कि वो वाहिद खुसूसियत हम रही वली
[15:00]खुदा है और इसको आप अगर बहुत ही वाज अंदाज में देखना
[15:03]चाहते हैं तो किस शख्सियत में आप देख सकते हैं हजरत र
[15:08]की शख्सियत किस तरह से कि वही शख्स शख्स नहीं बदला वही
[15:15]शख्स जो एक रात पहले तक वहां था वही कुछ कर रहा
[15:20]था नमाज पढ़ रहा होगा रोजा रख रहा होगा हज उसने जिंदगी
[15:22]में किए होंगे उसने भी जिंदगी में इंफाक किया होगा मुमकिन है
[15:26]कुरान के कुछ सूरे भी याद किए हो मुमकिन है अच्छाइयां भी
[15:29]लेकिन उन तमाम तर अच्छाइयों के बावजूद जब तक वहां था जीरो
[15:34]था बहुत ही आसान मिसाल के जरिए से मैं अपने बच्चों को
[15:40]यह बात समझा दूं बुजुर्ग आशना है उनके सामने मैं अपना सबक
[15:45]दोहराने के लिए हाजिर हुआ हूं यकीनन इलाह फरमाएंगे एक दफा सवात
[15:47]का सहारा दीजिए मोहम्मद और आले मोहम्मद [संगीत] पर मैं अपने बच्चों
[15:56]के लिए सिर्फ वाज करने के लिए आप एक सफे पर कितने
[16:03]ही जीरो क्यों ना लिख दीजिए आप दो जीरो चर जीरो पा
[16:08]जी 8 10 12 जीरो लिख दीजिए जी इस जीरो की कोई
[16:14]हैसियत है कोई वैल्यू है लेकिन अगर आप एक अदद एक का
[16:24]हिंद सा उठा कर के इस तमाम तर जीरो से पहले लगा
[16:29]दे कब क्या होगा यह अगर दो जीरो थे तो 100 बन
[16:37]जाएंगे अगर तीन जीरो थे तो हजार बन जाएंगे अगर चार थे
[16:39]तो 10000 पा थे तो एक लाख छ है तो 10 लाख
[16:43]सात है तो एक करोड़ जितने जीरो थे उन तमाम तर जीरो
[16:49]को अर्ज मिल जाएगी उन तमाम तर जीरो को एक अहमियत मिल
[16:54]जाएगी इससे पहले क्या थे बे अहमियत इमाम का और वली खुदा
[16:58]का ार भी हमारी इबाद तों में यही है अगर आपने इबाद
[17:04]तों को अंजाम दिया यह सारे जीरो है कि जो आप जमा
[17:09]कर रहे हैं लेकिन यह जीरो कब अर्ज पाएंगे कि जब इससे
[17:14]पहले इमामत का वन लग जाएगा जब इमामत का वन लग जाएगा
[17:20]तो इमामत का वन और नमाज मिलकर बन जाएगा 10 इमामत का
[17:21]वन और नमाज और रोजा मिलकर बन जाएगा 100 इमामत का वन
[17:26]और नमाज और रोजा और हज मिलकर बन जाएगा हज इमाम का
[17:30]वन और नमाज और रोजा और हज और इफाक मिलके बन जाएगा
[17:34]10000 यानी फिर आप जितनी नेकियां करते चले जाएंगे इस एक की
[17:37]वजह से उन तमाम तर इबाद तों को अहमियत हासिल होना शुरू
[17:43]हो जाएगी वकत हासिल होना शुरू हो जाएगी यह है इमामत इससे
[17:48]दोनों कांसेप्ट क्लियर हो जाएंगे बगैर इमामत के दो बातें क्लियर हो
[17:53]जाएगी यहां से बगैर इमामत के अगर इबादत अंजाम देते रहे तो
[17:58]भी सिफर रहेगा और और अगर इमामत पर आ जाए और सामने
[18:02]आगे कोई जीरो ना हो तब भी इंसान एक ही रहेगा लेकिन
[18:06]अगर इमामत के साथ इबाद तों को जोड़ता चला जाएगा तो एक
[18:08]10 हो जाएगा 10 100 हो जाएंगे 100 हजार हो जाएंगे हजार
[18:12]द हजार हो जाएंगे समझ में आ रही है इमामत की अहमियत
[18:15]क्या है और इबाद तों की अहमियत क्या है दोनों चीजें इससे
[18:17]वाज हो जाए यानी दो जो हमारे यहां पर एक्सट्रीम पाए जाते
[18:24]हैं उन दोनों एक्सट्रीम का राय हल इस रास्ते में है एक
[18:27]तबका वो है जो कहता है कि इबादत असल है इबाद तों
[18:31]की वजह से कयामत के दिन जो है वो परवरदिगार जजा और
[18:34]सजा देगा अगर नहीं भी है विलायत इमामत तब भी इबादत काम
[18:39]आएंगी तो उनके लिए क्या है कि यह सारे जीरो है जो
[18:40]आपने जमा किए हैं और इन तमाम तर जीरो के साथ चूंकि
[18:48]वन मौजूद नहीं है तो नतीजतन कयामत के दिन इसकी कोई अर्जिन
[18:50]नहीं है और दूसरी तरफ वो तबका जो यह कहता है कि
[18:54]सिर्फ इमामत काफी है सिर्फ विलायत काफी है और कोई नेक अमल
[18:58]अमल सालेह अंजाम देने की जरूरत नहीं है उनके लिए क्या है
[19:00]कि ये आपने सिर्फ वन अपने पास रखा हुआ है बाकी तमाम
[19:03]तर जी जीरो को आपने छोड़ दिया है लेकिन अगर आप इन
[19:06]तमाम तर जीरो को भी साथ मिला लेंगे तो क्या होगा इबादत
[19:08]इमामत के साथ जुड़ती चली जाएंगी और जितना जुड़ती चली जाएंगी उतना
[19:13]इस हिंद से की ताकत में और अहमियत में और वकत में
[19:16]इजाफा होता चला जाए इसको बहुत आसान अल्फाज में इमाम रजा अल
[19:21]सलातो सलाम ने बयान फरमाया एक दफा सवात पढ़िए मोहम्मद और आले
[19:26]मोहम्मद पर इमाम ने कहा कि मोहब्बत अले बैत और अल साले
[19:32]ना इसके बदले उसको छोड़ना ना इसके बदले उसको छोड़ वा अल्फाम
[19:40]ने बयान ना उसके सहारे अमल साले को छोड़ना ना अल साले
[19:44]के सहारे विलायत को बात हमारी कहां से चली थी मायत हम
[19:48]रही इमाम के साथ वजह क्या है अने गरा कद के कर्बला
[19:58]के वाके को आमा अले सलातो सलाम ने तूल तारीख में जिंदा
[20:06]रखने की कोशिश की अब एक अगर मैं सिर्फ आपके सामने एक
[20:09]रिव्यू पेश करू इमाम जन आबदीन से लेकर के और इमाम जमाना
[20:15]तक इमाम सज्जाद सवात पढ जरा मोहम्मद ल [संगीत] मोहम्मद दुनिया के
[20:28]किसी आम इंसान का बाप मर जाए इससे बढ़कर मिसाल देता हूं
[20:36]इमाम हसन इस दुनिया से चले गए इमाम हुसैन जिंदा है या
[20:43]नहीं 10 साल 40 हिजरी के अंदर अमीर मोमिनीन की शहादत हुई
[20:46]50 हिजरी के अंदर इमाम हसन मुस्तबादा तकरीबन 10 साल इमाम हसन
[20:57]की वफात और शहादत के बाद इमाम हुसैन जिंदा है क्या आपको
[21:05]इमाम हुसैन का इमाम हसन के लिए वह एहतमाम मिलता है जो
[21:06]इमाम सज्जाद का इमाम हुसैन के लिए तारीख फरमा यानी इमाम हसन
[21:15]रुखसत हुए क्या इमाम हसन किसी चीज में इमाम हुसैन से कम
[21:21]है नहीं सदा शबाब जना दोनों जन्नत के जवानों के सरदार है
[21:24]दोनों फातिमा जहरा की औलाद है दोनों अमीर मोमिनीन की औलाद है
[21:28]अकबर है इमाम हसन अल सलातो सलाम दोनों को रसूल अल्लाह ने
[21:34]कां पर बिठाया है दोनों को रसूल अल्लाह ने जबान उनके दहन
[21:38]में दी है दोनों के लिए रसूल अल्लाह ऊंट बने हैं दोनों
[21:41]के लिए जन्नत के लिबास आए हैं तमाम तर फाइल आप सुनते
[21:46]रहते हैं दोनों बराबर है लेकिन इमाम हसन की शहादत के बाद
[21:52]10 साल इमाम हुसैन जिंदा है लेकिन इमाम हसन की बर्सी के
[21:55]लिए इमाम हसन की अजादारी के लिए इमाम हसन पर गिरी करवाने
[22:00]के लिए और मसाब भी कम मसाब तो नहीं है आप जानते
[22:04]हैं किस तरह से आप सुनते हैं 28 सफर के मौके पर
[22:07]के जिगर के टुकड़े कट कट के तस्त में आ रहे हैं
[22:07]और उसके बाद फिर जनाज पर तीर का बरसाया जाना और उसके
[22:12]बाद फिर जन्नतुल बकी में दफन ना होने देना मजलूम कम तो
[22:17]नहीं है लेकिन सैयद सज्जाद का जो रवैया है जो इमाम जैनल
[22:19]आबिदीन का तरीके का है वह बहुत मुख्तलिफ है अब मैं यहां
[22:24]पर मंजिल मसाब पर नहीं हूं लेकिन मैं एक रिव्यू की खातिर
[22:26]आपके सामने पेश करना चाहता हूं ताकि हम मर्रम से पहले गौर
[22:31]करें कि हम मुहर्रम में जो कदम रख रहे हैं उसका मकसद
[22:36]और हद क्या है इमाम सैयद सज्जाद सामने पानी आता है वजू
[22:43]के लिए आंसू ब कोई शादी पर बुलाता है आंसू बहाते हैं
[22:46]बाजार में जाते हैं गोश्त देखते हैं किसी जानवर को जिबाह हुआ
[22:52]देखते हैं आंसू बहाते हैं गजा सामने लाई जाती है आंसू बहाते
[22:56]हैं यानी जिंदगी के अंदर गोया रच बस गया है अजा सयद
[23:02]शोहदा गम सद शदा वजह क्या है वजह क्या है वह सबब
[23:11]क्या है कि जिसकी वजह से माम सयद सज्जाद अपनी जिंदगी के
[23:13]अंदर 35 यर्स जिंदा रहे कर्बला के बाद 60 हिजरी 61 हिजरी
[23:20]के अंदर अगर इमाम हुसैन की शहादत हुई है तो 35 साल
[23:22]95 के अंदर जाकर के इमाम सद सज्जाद की शहादत 35 बरस
[23:27]तक किसी ने आकर के कहा कब तक रोएगा क्या जवाब दिया
[23:32]तूने इंसाफ नहीं किया याकूब का एक बेटा था बाकिया बाकी थे
[23:36]एक बेटा अपनी आंखों से ओझल हो गया था पता है जिंदा
[23:41]है लेकिन फिर भी आंसू बए मेरे 18 यूसुफ मुस्तकिल आप देखेंगे
[23:43]जब कोई आ रहा है शादी के लिए बुलाने आ रहे हैं
[23:47]मौला मेरे घर पे शादी है आप शिरकत करेंगे इमाम ने कहा
[23:50]अगर शादी से पहले हमारे जद का तस्करा करोगे हम अपने जद
[23:52]के तकरे पे आए दवी कहता है मैंने अपने घर पे मजलिस
[23:55]का एहतमाम किया शादी से पहले मौला तशरीफ लाए बा बाजारों में
[24:00]जा रहे हैं लोग अपने जानवरों पर पर्दा डाल रहे हैं पानी
[24:02]लाया जा रहा है गुलाम और कनीज कहते हैं इमाम के कि
[24:06]हम घबराते थे कि पानी कैसे लेकर के जाए वजू के लिए
[24:09]कि जब भी हम पानी लेकर के जाएंगे सैयद सज्जाद आंसू बहाए
[24:12]और आगे बढ़ मा बाकर के जमाने में आइए मा बाकर के
[24:17]जमाने में आप इमाम इस दुनिया से तशरीफ ले जा रहे हैं
[24:22]इस दुनिया से जा रहे हैं इमाम बाकर वसीयत कर रहे हैं
[24:27]इमाम सादिक को के बेटा मेरे माल में से एक सुल रिवायत
[24:29]के मुताबिक न थड माल मेरी जायदाद और मिल्कियत में से रिवायत
[24:35]में इलाफ है शायद अरकाम के अंदर जहां तक मुझे याद आ
[24:37]रहा है य सुस की बात है न थर्ड माल जो है
[24:40]वह मेरे अमवा में से उसको अलग कर देना और मिना के
[24:51]मैदान में यानी हज के बाद मिना के मैदान में हमारे जद
[24:54]सैयद शोहदा के लिए अजा बरपा करना एहतमाम यानी इमाम जाते हुए
[25:03]अपने माल में से एक माल को इतस दे कर के जा
[25:07]रहा है अजा सद शोहदा के लिए और कहां पर करना घर
[25:11]में नहीं मदीना में नहीं मिना के मैदान में जहां सारे हाजी
[25:16]जमा हो जाते हैं क्य हाजी आप जानते हैं कि मक्का में
[25:21]है तो बिखरे हुए हैं मदीना में है तो बिखरे हुए हैं
[25:24]अरफात में आए हैं तो वक्त नहीं है एक जोहर से लेकर
[25:29]के गुरूब आफताब तक वहां ठहरना है मुजदे तो एक फजर से
[25:33]लेकर तुलू आफताब तक ठहरना है लेकिन अब मिना में आ गए
[25:35]सब एक मैदान में है और तीन दिन ठहरना है यानी सब
[25:39]आपस में कनेक्ट हो जाएंगे मिना के मैदान में आकर के सब
[25:44]एक मैदान में इस मैदान में जहां सबने खमे लगाए हुए हैं
[25:46]वहां पर हमारे जद हुसैन इब्ने अली के लिए अजा का एहतमाम
[25:50]करना और आगे पढ़िए इमाम रजा फरमाते हैं कि मेरे वालिद इमाम
[25:58]काजिम अल सलातो सलाम सवात पढ़िए मोहम्मद और आले मोहम्मद परहा कि
[26:05]हम मोहर्रम का चांद देख कर के पता नहीं लगाते थे कि
[26:09]मुहर्रम शुरू हो गया है हम अपने बाबा के चेहरे को देखकर
[26:13]पता लगा लेते थे कि मुहर्रम शुरू हो गया लम यरान यह
[26:17]रिवायत का जुमला है इमाम र फरमाते हैं कि हमने कभी अपने
[26:23]बाबा को हसते हुए मुहर्रम के महीने में और कहा कि जैसे
[26:25]जैसे मुहर्रम का महीना गुजरता चाहता था और आशूरा दिन करीब आने
[26:31]लगते थे हमारे बाबा की गम की शिद्दत में इजाफा होता चला
[26:35]जाता इमाम रज के सीरत में आप आ कर के देखिए मशहूर
[26:40]मारूफ रिवायत रया शबी से इशाद फरमाई जो आप सुनते हैं पहली
[26:45]मुहर्रम को ी इ बा जब भी किसी भी चीज पर रोना
[26:53]आए हुसैन पर रोना जिस भी चीज पर रोना है तुम्हारा अपना
[26:55]कोई मर जाए रुखसत हो जाए मां मर जाए बाप मर जाए
[26:58]भाई दुनिया से चला दोस्त का इंतकाल हो जाए कुछ भी हो
[27:02]जाए आंसू बहाना चाहो आंसू बहाओ हुसैन के नाम पर यानी अब
[27:09]तवज्जो फरमाइए इस बात पर यह नहीं कहा यानी मैं अगर आपके
[27:14]सामने जरा एक तसरीना गम भूल जाओ और हुसैन के गम पर
[27:22]रो नहीं इन कुनत बाकी तुम्हारा दिल टूटा है मां के मरने
[27:29]की वजह से आंखों में हुसैन की वजह से नहीं आए आंखों
[27:30]में आंसू आए हैं मां की वफात की वजह से आंखों में
[27:34]आंसू आए हैं बाप के गुजर जाने की वजह से आंखों में
[27:37]आंसू आए हैं भाई के रुखसत हो जाने की वजह से लेकिन
[27:43]जैसे ही आंसू आए तो मां मत कहना जबान से या हुसैन
[27:44]कहना यानी इनक बाक तो ये नहीं कहा के मत रो नहीं
[27:51]अगर रोना चाहो तो अपने उस रोने को डाइवर्ट करो हुसैन इने
[27:59]अली की तरफ जैसे ही बुका बुलंद हो तो अब ये चूंकि
[28:04]दिल टूटा है मां की वजह से लेकिन बुका जब लबों पर
[28:06]आए तो बुका हुसैन के नाम पर आए मैं मुख्तसर करता हूं
[28:12]सारी चीजों को आप छोड़ दीजिए आज जाइए इमाम जमाना जब जुहूर
[28:20]फरमाए सारा आलम उनका इंतजार कर रहा होगा सारा आलम उनका इंतजार
[28:27]मुंतज होगा कि वो मसीहा वह सेवियर वह निजात दहि कब आएगा
[28:36]इमाम जमाना जब तशरीफ लाएंगे काबे की दीवार से पुश्कित फ जरा
[28:59]का फरजंद नहीं बल्क क्या कहेंगे अला आलम दुनिया वालो इ ज
[29:10]हुसैन कतना मेरे जद हुसैन है कि जिनको प्यासा मार दिया गया
[29:15]यानी आप देखिए कि अजीम नजत है जो शुरू हो रही है
[29:20]कर्बला के मैदान के बाद इमाम जमाना की सूरत में कायम आले
[29:26]मोहम्मद जिनका इंतजार किया गया इमाम साद फरमाते हैं अगर मैं उनको
[29:29]पा लेता तो मैं अपनी पूरी उम्र कायम आल मोहम्मद की खिदमत
[29:34]में गुजार देता कौन कह रहा है इमाम सादिक जो अपने मकाम
[29:39]पर इमामत की मंजिल पर फायज है वह कह रहे हैं कि
[29:41]य हमारा जब आखरी आएगा कायम आएगा और दुनिया को अदल इंसाफ
[29:45]से भर देगा दुनिया में परचम हक लहराएगा उनके जरिए से रन
[29:49]कुल्ले जो अल्लाह का हद और मकसद और गायत है वो मुकम्मल
[29:54]और पूरा हो जाएगा वो आ रहा है वो आने के बाद
[29:58]यह नहीं कह रहा मेरा आगे का प्लान क्या है मैं क्या
[30:01]करना चाहता हूं मैं कहां से शुरू करूंगा कयाम कहां से शुरू
[30:03]होगा दारुल हुकूमत क्या होगा नहीं पहला जुमला क्या है अलाल जनना
[30:08]मेरा जद हुसैन है जिसको प्यासा मार दिया गया अब सवाल य
[30:14]तमाम तर जो वाकत जो मैंने आपके सामने पेश किए एक रिव्यू
[30:20]आपके सामने पेश किया सवाल इस मकाम पर है कि वजह क्या
[30:21]है कि आमा इस वाक को एक अजीब अंदाज में गैर मामूली
[30:27]अंदाज में हाईलाइट कर ते हुए नजर आ रहे हैं वजह यह
[30:33]है अजने गिरामी कद्र के कर्बला के अंदर वह ताकत और वह
[30:40]कुवत मौजूद है कि वह लोग कि जो नमाज पढ़ रहे हैं
[30:45]लेकिन उनकी नमाज सिफर है वो लोग के जो रोजा रख रहे
[30:46]हैं लेकिन उनका रोजा सिफर है वो लोग के जो हज कर
[30:49]रहे हैं लेकिन उनका हज सिफर है वो लोग के जो इंफाक
[30:53]कर रहे हैं लेकिन उनका इंफाक सिफर है वो लोग के जो
[30:59]हाफिजी कुरान है लेकिन उनका कुरान सिफर है कर्बला के अंदर य
[31:02]ताकत मौजूद है कि कर्बला इनके तमाम तर सिफर से पहले एक
[31:08]बनकर इनके तमाम तर सिफर को वकत और अहमियत अता कर सकती
[31:11]है यह वह मायत इसीलिए आप देखिए के रोज आशूर है गम
[31:21]का दिन है किस तरह से रिवायत ने आशूरा के दिन को
[31:26]बयान किया पा बहना हो पैरो में चपले ना [संगीत] हो यानी
[31:35]वाक मौजू गुफ्तगू है के दन कितनी ताकीद करता है जाहिरी हुलिए
[31:44]की यानी अगर आप जाकर के देखिए जो किताबें लिखी गई है
[31:51]जाहिरी हुलिए से मुतालिक मिसाल के तौर पर अल्लामा मरहूम तबा तबाई
[31:57]ने सुनन नबी लिखी शायद तर्जुमा भी हुई है मैंने देखा था
[32:00]एक जमाने में उसका तर्जुमा मुझे याद नहीं किस नाम से तर्जुमा
[32:04]सुनन नबी जिसमें नबी कैसे जिंदगी गुजारते थे उनका लिबास कैसा था
[32:07]उनका रोजमर्रा का अंदाज कैसा था जिंदगी गुजारने का सारी रिवायत एक
[32:10]जगह जमा की है सुनन नबी के नाम से किताब लिखी थी
[32:13]उर्दू में तर्जुमा मैंने देखा जरूर है लेकिन मुझे याद नहीं है
[32:19]कि किस नाम से लिबान जामे तालीमाबाद है इस्लाम की इस्लाम कहता
[32:31]है लिबास पुराना हो फटा हुआ हो पेव लगा हुआ हो लेकिन
[32:35]गंदा ना हो इस्लाम कहता है कि गिरेबान तुम्हारा चाक ना हो
[32:41]अरे इस्लाम एक एक चीज के आदाब बयान करता है लेकिन यही
[32:46]दन आक के कहता है अगर आशूरा के दिन आ जाए रहना
[32:51]हो जाओ आस्तीन को चढ़ा लो गिरेबान को चाक कर लो बालों
[32:54]में कंगी ना करो अपने चेहरे को उस तरह से कि जिस
[33:00]तरह आम दिनों में धोते हो उसकी तजीन आराय का इंतजाम करते
[33:04]हो इस तरह से आराय का इंतजाम ना करो जीनत ना करो
[33:06]खुशबू ना लगाओ बाल बिखरे हुए हो तुम्हारे पा बहना हो आस्तीन
[33:12]चढ़ी हुई हो वजह क्या है बज गम का दिन है गम
[33:19]की शिद्दत का तुम्हारे आदा अवार से पता चलना चाहिए हत्ता व
[33:24]इस्लाम जो कहता है कलाम से पहले होना चाहिए सलाम कल कला
[33:33]जो सलाम के जवाब देने को वाजिब करार देता है सलाम करने
[33:39]को मुस्त ताकीदी करार देता है वह कहता है आशूरा के दिन
[33:42]सलाम नहीं करो क्या करला यहां तक तो बात समझ में आती
[33:52]है लेकिन दन यह कहता है इमाम य तालीम फरमा रहे हैं
[33:58]आशूरा का दिन है गम में हो मातम कर रहे हो एक
[34:03]दूसरे को पुरसा और ताजिया दे रहे हो पा बहना हो गिरेबान
[34:07]चाक है बाल बिखरे हुए आस्तीन चढ़ी हुई है लेकिन उसके बावजूद
[34:09]जब मिलो तो इस एक जुमले पर इफा ना करो आज मल्ला
[34:16]सलाम इस एक जुमले पर इफ नहीं करो बल्कि फौरन इसके बाद
[34:25]कहो वलना परवरदिगार तू हमें करार दे उस हजरत हुज्जत के साथ
[34:31]कि हम उस हुज्जत के साथ मिलकर के हुसैन इने अली के
[34:36]खून का इंतकाम ले सक जालना मा सार मा इमाम महदी हमें
[34:46]करार दे उन लोगों में से कि जो यानी आशूरा के दिन
[34:48]भी गम की शिद्दत के बावजूद नोहा और मातम के बावजूद गिरेबान
[34:55]चाक होने के बावजूद आस्तीन के चढ़े होने के बावजूद बालों के
[34:59]बिखरे होने के बावजूद भी तुम्हारा राबता अपने जमाने के इमाम से
[35:06]ना टूटे यानी ताजिया देने के बाद फौरन एक दूसरे को दुआ
[35:09]दो वही इस्लाम जो कह रहा है सलामती की दुआ मत दो
[35:13]एक दूसरे को अ सलाम वालेकुम क्या है सलामती की दुआ सलामती
[35:18]की दुआ मत दो लेकिन तजय के बाद फौरन दुआ दो कि
[35:23]खुदा मुझे भी और तुझे भी जमाने की हुज्जत के लश्कर में
[35:25]शामिल करें ताकि हम उसके साथ मिलके हुसैन के का इंतकाम ले
[35:30]यानी यह कनेक्शन जियारत आशूरा पढ़ रहे आशूरा का दिन है कर्बला
[35:39]में खड़े हुए हैं सामने हुसैन का रोजा है क्या गम की
[35:44]शिद्दत है क्या हुजन की कैफियत है लेकिन उसके बावजूद जियारत आशूरा
[35:48]पढ़ते पढ़ते एक मकाम पर पहुंचो मामा उस इमाम के साथ के
[36:00]जो जाहिर होगा जो हक के जरिए से फैसला करने वाला होगा
[36:03]उसके साथ परवरदिगार मुझे करार दे कि मैं हुसैन बन अली के
[36:06]खून का इंतकाम ले सक ना उसके साथ मुझे करार दे कि
[36:14]मैं उसके साथ इंतकाम ले सक हुसैन बन अलीम वजह क्या है
[36:20]आशूरा का दिन है हुसैन की शहादत का दिन है कर्बला में
[36:25]खड़े हुए हो जियारत आशूरा इमाम तालीम फरमा रहे हैं हुसैन का
[36:27]रोजा सामने ग म की शिद्दत है न की कैफियत है लेकिन
[36:33]उसके बावजूद भी जियारत आशूरा पढ़ते पढ़ते अपने आप को कनेक्ट करो
[36:36]अपने जमाने के इमाम की हुज्जत के साथ अपने जमाने के इमाम
[36:42]के साथ अपने जमाने की हुज्जत के साथ कनेक्ट करो अपने आप
[36:45]जोड़ो अपने आपको क्यों क्योंकि कर्बला के अंदर यह ताकत है कि
[36:52]कर्बला तुम्हें तुम्हारे इमाम के साथ खड़ा कर सकती है जिस तरह
[36:55]कर्बला को उसके जमाने के इमाम के साथ खड़ा कर सकती है
[37:01]इसी तरह कर्बला तुम्हें तुम्हारे इमाम के साथ खड़ा कर सकती है
[37:07]कर्बला के अंदर इतना कर कर्बला के अंदर यह कुवत है इस
[37:09]कुवत को इस पोटेंशियल को कि जिसके अंदर मौजूद था इस पोटेंशियल
[37:15]को इस्तेमाल करने की और उसको बुरु एकार लाने की और उसके
[37:18]जरिए से हर जमाने के लोगों को अपने जमाने के इमाम से
[37:24]जोड़े रखने की कोशिश की है आइमा अथर अल सलातो सलाम ने
[37:28]अदारी स शोहदा के जरिए यानी अजादारी का हद क्या है अजादारी
[37:35]का मकसद क्या है अजादारी का मकसद और अजादारी का हद सिर्फ
[37:41]और सिर्फ यह है के तुम्हें तुम्हारे जमाने के इमाम के लश्कर
[37:47]में लाकर के खड़ा कर दे फिर अगर थोड़ा बहुत गुनाहगार भी
[37:54]हो तो चलेगा जानबूझ कर के गुनाह करने की बात नहीं हो
[37:56]रही लेकिन अगर इंसान गलती से मासि कर बैठता है माफी मांगे
[38:00]अस्तगफार करे माफ हो जाए लेकिन अगर अपने मासूम भी हो अगर
[38:08]कोई खता भी नहीं की जिंदगी में और अपने जमाने के इमाम
[38:10]के लश्कर में नहीं खड़े हुए तुम्हारी जात पर क्रॉस है कर्बला
[38:16]की जानिब से लेकिन अगर अपने जमाने के इमाम के लश्कर में
[38:20]हो कोई गुनाह भी हो गया अगर कोई नमाज कजा भी हो
[38:25]गई है कजा कर लो तौबा कर लो अस्तगफार कर लो कज
[38:28]हो गया कजा कर लो तौबा कर लो अार कर लो हज
[38:32]आज तक नहीं किया मुस्ती अब चले जाओस अदा नहीं किया अब
[38:38]अदा कर दो हर चीज रिफंडेबल है हर गड़े को पुर किया
[38:39]जा सकता है मास के हर गड़े को पुर किया जा सकता
[38:44]है लेकिन अगर वली खुदा के साथ नहीं हो और सारे गड़े
[38:48]भरे हुए भी हैं तब भी कुछ भी नहीं कर्बला यानी मयत
[38:59]इमाम लदन मा इस मंजिल पर आ जाओ इमाम की मायत में
[39:02]आ जाओ इमाम के साथ उसकी इतबा करने वालों में आ जाओ
[39:08]आप देखते ना के जब सियासी हवाले से कह लीजिए के मुमकिन
[39:17]है कि कोई फला पार्टी का हो हो सकता है को फला
[39:19]पार्टी का हो लेकिन हर पार्टी के अंदर कुछ लोग ऐसे होते
[39:24]हैं जो बहुत जदा फल होते हैं एक्टिव होते हैं आगे आगे
[39:27]बढ़ चढ़ काम कर रहे होते हैं हर जलसे में जा रहे
[39:30]हर जुलूस में जा रहे हर रैली में जा रहे कुछ लोग
[39:33]ऐसे होते हैं जो जरा साइलेंट सपोर्टर होते हैं घर में बैठते
[39:35]हैं लेकिन सपोर्ट करते हैं कहीं दावत में बैठ गए तो सपोर्ट
[39:39]कर दिया कहीं खाने पर बैठ गए तो सपोर्ट कर दिया लेकिन
[39:40]इन दोनों के अमल में फर्क होता है लेकिन कहलाया क्या जाता
[39:44]है कि यह सब एक पार्टी के है कोई आगे बढ़ के
[39:49]बहुत शिद्दत से काम कर रहा है कोई साइलेंट सपोर्टर है लेकिन
[39:51]सब है उसी पार्टी के सब है उसी लीडर के मानने वाले
[39:56]कर्बला यानी क्या कर्बला यानी यह कि तुम अपने जमाने के इमाम
[40:02]के लश्कर में आ जाओ हां अब इसमें हर एक से तकाजा
[40:06]नहीं है कि हर एक सफे अव्वल में जाकर के खड़ा हो
[40:07]जाए नहीं हर बंदा अपनी सलाहियत के हिसाब से जो काम कर
[40:11]सकता है वो करे लेकिन तुम्हारा ओवरऑल जो तुम्हारी पार्टी होनी चाहिए
[40:14]वह इमाम जमाना की पार्टी हो अपने जमाने के इमाम के लश्कर
[40:19]में शामिल हो जाओ उसमें खड़े हो जाओ उस लश्कर की सियाही
[40:22]बन जाओ फिर उसके बाद अगर कोई कमी कोताही कास्टी कहीं रह
[40:26]जाती है को खला रह जाता है वो खुद पुर करने की
[40:31]कोशिश करो बकिया ब फजल खुदा हम तुम्हारी मदद करेंगे कि तुम
[40:36]उसको पुर कर सको लेकिन असल और बुनियादी नुक्ता क्या है बुनियादी
[40:39]और असल नुक्ता यह है कि नुसरत इमाम के लिए खुद भी
[40:44]तैयार हो जाओ और अपने घर वालों को अपने बच्चों को अपनी
[40:47]औलाद को अपने दोस्तों को आबाब को रिश्तेदारों को अकबा को तैयार
[40:51]करो यह है कर्बला यह है कर्बला अब आप इस सारे सिनेरियो
[40:56]के अंदर आ जाइए गुफ्तगू के नतीजे के ऊपर अजादारी सवाल है
[41:04]ना अदारी में क्या होना चाहिए क्या नहीं होना चाहिए हर वह
[41:11]काम के जो अजादारी में अजादारी करे और उनके लश्कर में शामिल
[41:23]करे वह मजाज है हर व मातम करो पूरी रात मातम करो
[41:30]लेकिन इस मातम में नुसरत इमाम जमाना का जजबा होना चाहिए मजलिस
[41:36]करो एक दिन की कई कई मजलिस करो लेकिन उसमें नुसरत इमाम
[41:42]जमाना का जजबा हो यानी हर मोहर्रम तुम्हें तुम्हारे जमाने के इमाम
[41:47]के लश्कर में तरकी दे दे अगर पिछली दफा तक एक आम
[41:51]सिपाही थे तो अब सरब बन जाओ यानी हर आने वाला मोहर्रम
[41:58]जमा के इमाम के लश्कर में तुम्हारी तरक्की का बायस बने यह
[42:05]है खुलासा अदारी यानी अजादारी के अंदर हमें जिस चीज की इस्लाह
[42:09]करने की जरूरत है वह क्या है वह यह नहीं है कि
[42:13]हम यह कहे कि यह करो और यह ना करो हम यह
[42:16]कहे कि अजादारी के अंदर जो अपने तई जिस तरह अजादारी करना
[42:20]चाहता है अजादारी करे हर जायज तरीके से जो भी तरीके जायज
[42:22]है जिससे मुतालिक मराजी का फतवा जायज है हर उस तरीके से
[42:27]अदारी करे लेकिन हर एक की जत एक होनी चाहिए कोई एक
[42:32]हाथ से मातम करता है कोई दो हाथ से मातम करता है
[42:36]कोई कांधे प मातम करता है कोई सीने प मातम करता है
[42:40]कोई सर प मातम करता है लेकिन इन तमा यह मातम मुख्तलिफ
[42:42]है लेकिन इसका हद वाहिद होना चाहिए कि यह सारे मातमी अपने
[42:47]जमाने के इमाम के लश्कर में कोई ताबूत उठाता है कोई ताजिया
[42:52]उठाता है कोई अलम उठाता है कोई जुल जना निकालता है कोई
[42:54]झूला निकालता है कोई शबी जो हर एक अपने तरीके से अजादारी
[43:00]करता है लेकिन इस सारी अजादारी का हद हद वाहिद होना चाहिए
[43:03]मकसद वाहिद होना चाहिए यानी जैसे आपने देखा है ना कराची के
[43:07]अंदर तो नहीं होता लेकिन बकिया सिंध के शहरों में आप जाइए
[43:10]हम मजलिस पढ़ने के लिए जाते हैं तो वहां पर क्या होता
[43:12]है कि जुलूस एक हमारे यहां क्या एक जगह से निकल के
[43:15]एक जगह खत्म होता है जुलूस हमारे यहां रिवाज कराची में इस
[43:18]तरह से वहां पर ये होता है कि बहुत सारे जुलूस निकलते
[43:19]हैं वो एक जगह आ कर के जमा होते है कोई अपने
[43:22]इलाके से आता है कोई अपने इलाके से आता है कोई अपने
[43:27]इलाके से आता है इंटीरियर वगैरह के अंदर सूरत इस तरह से
[43:31]तो यह भी बिल्कुल इसी तरह से अजादारी कोई अपने तरीके से
[43:33]कर रहा है किसी के अपने कबीले का अपना अंदाज है फलां
[43:36]इलाके के रहने वालों का अपना मातम का अंदाज है फलां इलाके
[43:38]के रहने वालों का अपना मरसिया पढ़ने का अंदाज है लखनऊ वालों
[43:42]का मर्सिया पढ़ने का अंदाज और है हैदराबाद हों का मर्जिया पढ़ने
[43:43]का अंदाज और है कहीं सलाम ख्वानी का अंदाज कुछ जुदा है
[43:47]कहीं मातम का अंदाज कोई जुदा है कोई किसी तरह ताबूत निकालता
[43:50]है कोई किसी तरह आलम निकालता है कोई किसी तरह शबी बरामद
[43:52]करता है लेकिन ये सारे रास्ते जिस नुक्ता वाहिद पर मिलने चाहिए
[43:59]वो क्या है वो ये कि हम कर्बला के जरिए से अपने
[44:00]जमाने के इमाम के आने की तैयारी कर रहे हैं ये डायरेक्शन
[44:06]अजादारी को मिलनी चाहिए अगर ये डायरेक्शन मिल जाए तो हर एक
[44:11]अपनी अपने अंदाज में अपने तरीके के मुताबिक अजादारी करते रहे कोई
[44:14]एक हुज्जत नहीं है हमारे नजदीक कि नहीं इसी तरह अदारी होनी
[44:16]चाहिए नहीं ईरान वाले अपने अंदाज से करते हैं इराक वाले अपने
[44:20]अंदाज से करते हैं अरब ममालाकंडम है अपनी रविश है साला साल
[44:29]का उनके बुजुर्गों का डाला हुआ तरीका है लेकिन ईरानी इराकी अरब
[44:35]पाकिस्तानी यूरोप का रहने वाला अमेरिका सब अजादारी करें अपने अपने अंदाज
[44:39]में लेकिन इस अजादारी का नुक्ता मुश्तरका क्या होना चाहिए हर एक
[44:43]अपने अपने अंदाज से अजादारी करके अपने इलाके के लोगों को लश्कर
[44:50]इमाम तक ले आए यह वह नुक्ता मुश्तक और नुक्ता वाहिद है
[44:53]कि जिस पर अजादारी को मुत होना चाहिए यानी वहदत दरहाल कसरत
[45:00]कसरा हैं अलग-अलग तरीके हैं लेकिन वहदत क्या है नुक्ता इश्तरा क्या
[45:05]है सारे के सारे रास्ते इस एक नुक्ते पर आकर के जमा
[45:12]हो जाए इस एक नुक्ते पर आकर के मुश्तरका तौर पर ये
[45:16]ऐलान करें कि हम सब अपने तरीकों के इख्तिलाफ के बावजूद भी
[45:19]इमाम जमाना के लश्कर में एक तो ये अजने गिरामी कदर आज
[45:27]की गुफ्तगू का खुलासा था मेरा वक्त भी मुकम्मल हो गया परवरदिगार
[45:29]मुताल से दुआ करते हैं कि परवरदिगार हमारा यहां पर गुफ्तगू करना
[45:32]आपका गुफ्तगू सुनना अपनी इबादत करार दे हम सबको सही माना में
[45:38]अजादारी सैयद शोहदा का नकाद करके इस अजादारी को इमाम जमाना के
[45:41]लश्कर से मुत सिल करने की तौफीक अता फरमा परवरदिगार तुझे वास्ता
[45:46]मोहम्मद और आले मोहम्मद का मोहब्बत अहले बैत अल सलातो सलाम अजादारी
[45:50]सैयद शोहदा अल सलातो सलाम इंतजार इमाम जमाना को हमारी आइंदा आने
[45:54]वाली नस्लों में कायम दयम फरमा परवरदिगार हमें कोई गम ना दे
[46:00]सिवाय गम हुसैन के परवरदिगार जो मोमिनीन दुआएं हाजत लिए आए हैं
[46:03]उनकी दुआओं को हाज तों को अपनी बारगाह में मुस्तजाब फरमा परवरदिगार
[46:08]इस्लाम और मुस्लिमीन को फत नुसरत अता फरमा फलस्तीन के मजलूम की
[46:12]मदद नुसरत फरमा जालिमीन मुस्तकबिल को नीज तो नाबूत फरमा मराज कराम
[46:15]लमाए इजाम मकाम मोजम रहबरी का साया दराज फरमा परवरदिगार तुझे वास्ता
[46:21]मोहम्मद और आले मोहम्मद का इमाम असरे व जमा के जुहूर में
[46:24]ताजल फरमा हम सबको हजरत के आवान अंसार में शुमार फरमा फरमा
[46:28]एक मर्तबा सूर मुबारका अलहम्द और तीन दफा सूर इखलास की तिलावत
[46:31]फरमा दीजिए साजिदा खातून बिनते मोहम्मद शरीफ सैयद अमीर हसन इब्ने सैयद
[46:36]काजिम हुसैन के इसले सवाब के लिए
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