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Muqam Wa Manzilat Fatima AhlySunnat Ki Motbar Kutoob Ki Roshni Main | H.I Shoaib Naqvi
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24/07/29
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Record date: 18 Dec 2022 - مقام منزلت فاطمہ اہلسنت کی معتبر کتب کی روشنی میں
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:33]अस्सलाम वालेकुम [संगीत] [संगीत] [संगीत] आज फिर आपके दरमियां हूं और यहां
[1:49]की munajbat से बहुत सारे मौजूद द एम को पसंद नहीं ए
[2:05]रहे द मॉडल इनके इन पर बहुत लेक्चर हो चुके हैं तो
[2:08]इस वक्त की जरूरत के तहत किया गया उसकी वजह ये है
[2:16]एन जाने क्यों एक ऐसी टंकी भी फसा टाइम कर दी गई
[2:26]है एक ऐसी दुश्मनी हकीकी से इनकार किया जा रहा है इस
[2:44]वक्त बदल जौहर का वक्त है माशाल्लाह यहां मस्जिद और इमामबाड़ा इमामिया
[2:50]के सहन में सूरज की रोशनी आपको दिख रही है यहां एक
[2:56]शख्स इसरार शुरू कर देंगे सूरज नहीं है और उसे पर दलाल
[3:01]देना शुरू यानी वह चीज जो अजहर में ना शम्स हैं सूरज
[3:06]से ज्यादा बाजे हैं उनका इनकार किया जा रहा है तो ऐसे
[3:12]वक्त में जरूरी है की हम अपने नौजवानों को अपने बच्चों को
[3:16]वक्त के मुताबिक हालत के मुताबिक आगाही दें और उनकी तालिम तो
[3:25]तबीयत के हवाले से उनके हालिया दौर में इस्तेमाल होने वाले या
[3:32]फायदेमंद होने वाले म्हारे से उन्हें anusaraaz करें इसीलिए हम यह तय
[3:37]किया के बजाय इसके के मजलिस ही अंदाज़ में फजैले जनाबे zaahara
[3:45]अस्सलाम अलैह को बयान फरमाया जाएगा| [संगीत] की जितनी भी किताबें सिरे
[4:11]नबी पर हैं जितनी भी किताबें हादी से नवाबी से उतार लेते
[4:19]हैं ये जितनी कुतुब tapasir कुरान से mutallik है या जितनी कुत्तों
[4:26]इस वक्त तारीफ से mutallik है कोई किताब ऐसी नहीं है जिसमें
[4:34]फजीलत ए फ़ातिमा तो सहारा साला नौजवानों के लिए बयान करूंगा तो
[4:48]बच्चों को यकीन ए जाएगा की मैं सही का रहा हूं [संगीत]
[4:58]एक जो उनकी फजीलत उनके fzile उनकी क्वालिटी उनकी स्पेशलिस्ट के बारे
[5:09]में बयान कर दी दूसरी वह चीज हैं जो उनकी तारीखी किरदार
[5:13]के हवाले से तारीफ ही सवाल-ए-हक के हवाले से की उन्होंने क्या
[5:18]किया और क्या नहीं किया वो चीज हैं हमारे लिए दोनों हम
[5:25]है लेकिन अहमियत इस शाह की ज्यादा है की कोई भी इस्लाम
[5:33]का मकतब ऐसा नहीं है जिसके अंदर कोई किताब लिखी जाए और
[5:36]उसके अंदर जनाबे सहारा सलाम की फजीलत ना बयान की जाए फजीलत
[5:42]या क्वालिटी से मुराद यह नहीं की यह का दिया जाए वो
[5:46]सच्ची थी बस नहीं लोगों पर फजीलत देना भी अहले सुन्नत की
[5:57]कुछ कुछ कहना अगर आप गौर करें उनकी वो कहते हैं की
[6:05]ये सही किताबें और इनके अंदर से बेहतर है जिगर का सही
[6:08]है बुखारी है सही है मुस्लिम है सैयद तिर्मीजी है सुनने में
[6:14]ए जाए इन किताबों के अंदर भी कोई किताब ऐसी नहीं है
[6:19]की जिसके अंदर जनाबे फ़ातिमा सलाम उल्लाह अलैह की फजीलत में हदीस
[6:22]ना कोई तौर पर दो तार पहले इससे मैं हदीस है जब
[6:30]हदीस की बात करें पहले हिस्से में वो हदीस है की जो
[6:34]हदीस पंजेतन के बारे में फसल बयान कर रही है मिसाल के
[6:40]तौर पर पैगंबर अकरा मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फार्मा रहे हैं
[6:46][संगीत] किस्म किस मौजूद पंजेतन बेहतरीन मखलूक मुस्तफा के सही है के
[7:14]अंदर बयान किया मोबाइल के बयान में की मोबाइल की खासियत वो
[7:25]है की जिसके बारे में जनाबे अबू बकर कहते हैं की काश
[7:34]ये फजीलत मुझे नसीब हो जाती ठीक है और मोबाइल सलातो अस्सलाम
[7:46]मामून के दरबार में मुनाजरा करते हुए इसको को किया और कब
[7:53]munajare के अंदर देखिए munajre के अंदर वो पॉइंट कोड होता है
[7:58]जो सबसे ज्यादा अहमियत कम है लोग और इमाम बयान कर रहे
[8:00]हैं अपनी सनत के तौर पे अपनी क्वालिटी के तौर पर मुबारक
[8:05]फिर उसके बाद के हवाले से पैगंबर अकरम की जवानी दूसरी आदिस
[8:15]देखी जाए जो उनकी फजीलत पर हैं जन्नत के मामले में दुनिया
[8:17]के मुताले के जन्नत पे सबसे पहले जो मेरे साथ mutallik होंगे
[8:23]वो फ़ातिमा होगी और उसके बच्चे होंगे तीसरी किस्म की रिवायत वो
[8:30]रिवायत द जिंदे रिवायत के अंदर फजीलत ए जाना सलाम उल्लाह गया
[8:34]बयान की गई है दूसरी ख्वातीन के ऊपर अब फ़ातिमा तो सही
[8:40]बुखारी सही है मुस्लिम इन दोनों किताबों में ये हदीस मौजूद है
[8:43]फ़ातिमा तो सैयद nisahab आलम इन की khbarin की सरदार की देखिए
[8:52]आपके सामने हो सकता है शायरों के बड़े कॉमन पॉइंट है जो
[8:57]बयान कर रहा हूं मैं लेकिन देखना ये है आज का बच्चा
[9:02]इन्हीं चीजों को देख रहा है की दिन किया जा रहा है
[9:03]इन्हीं का इनकार किया जा रहा है [प्रशंसा] उनके बारे में सवाल
[9:13]किया जा रहा है की यह कैसे हो सकता है की जनाबे
[9:18]मरियम से ज्यादा अब तक नहीं हो सकती अगर जनाबे मरियम से
[9:21]अब जल नहीं हो सकती हुजूर की ये हदीस को कहां लेकर
[9:23]जाएंगे जिसमें पैगंबर अकरम मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम [संगीत] [प्रशंसा] जो
[9:32]farmati हैं की फ़ातिमा मरियम पर ऐसे ही फजीलत रखती हैं की
[9:45]जिस तरह नबी अकरम बाकिया तमाम नबियों पे फजीलत रखते हैं दूसरी
[9:55]जन्नत के हवाले से तीसरी बखिया ख्वातीन के हवाले से और चौथी
[10:03]से सुनिए की जिसके अंदर मेंबर है कम ये फार्मा रहे द
[10:05]फ़ातिमा का कोई हम पल्ला नहीं है लाखों वैन लिफाफा फ़ातिमा का
[10:12]कोई काफी नहीं है इला अली सिर्फ अली है जो उसका कफूर
[10:17]है दूसरे मौके पे फरमाया के फ़ातिमा का कोई जॉज नहीं है
[10:23]सिवाय अली है पांचवी वो हदीस है की जिसके अंदर पैगंबर अकरम
[10:38]ने रोजी जन्नत के हवाले से रोज़ में शेर की हवाले से
[10:44]आदि इस बयान क्यों फरमाया की जब मेशर का दिन होगा और
[10:49]उसे दिन एक मुनादी सजा देगा की तुम सब अपनी आंखों को
[10:51]बंद कर लो अपने सारों को झुका लो क्या होने जा रहा
[10:58]है वो ए गई रोज़ में एक और हदीस पैगंबर की बीवी
[11:15]फ़ातिमा के हवाले से के रोज़ में और shifaat या तादाद ए
[11:21]shifaat जिन लोगों को वक्त आया जाएगा ना तो किसी नबी के
[11:25]पास ऐसा होगा ना किसी वाली के पास ऐसा होगा जैसा फ़ातिमा
[11:28]तो सहारा साला तीसरी रोग महफिल के हवाले से जो रिवायत द
[11:34]वो माना भी रहे नूर की रिवायत है मानबे मिंबर की जमा
[11:41]कुछ मेंबर होंगे जो नूर के मेंबर होंगे तो मैं एक मेंबर
[11:48]मैं जिस मेंबर पर हूं ऐसा मेंबर मुझसे पहले किसी वासी का
[11:53]ना हो किसी नबी का ना होगा और मैं वो खुदवा दूंगा
[11:55]जैसा खुदवा पहले किसी ने नहीं सुना होगा कपिल एक मेंबर उसके
[12:01]बाद मेरे वशिका होगा और मेरे वैसी मेंबर ऐसा होगा की जैसा
[12:04]मेंबर किसी वाशी का ना होगा फिर उसके बाद और मैं एक
[12:11]मेंबर मेरी बेटी जरा का होगा की जैसा मेंबर किसी आले रसूल
[12:17]का नहीं होगा किसी नबी की औलाद का ऐसा नंबर नहीं होगा
[12:20]जो फ़ातिमा और उसके बाद फिर फ़ातिमा खिताब farmaengi और ऐसा खिताब
[12:27]farmaengi की जैसा खिताब किसी ने नहीं सुना उसके बाद सबसे हम
[12:37]रिवायत जो सबसे कसरत से हैं वो रिवायत है जिनके अंदर बीवी
[12:45]की इंडिविजुअल फजीलत है infraadi खुसूसियत बयान की है और नाम के
[12:51]या अलका आपके जेल में बयान की मिसाल के तौर पे आप
[12:56]लोगों में जो बेटियों वाले हैं वो जानते हैं की बाप और
[12:59]बेटी का राब्ता दुनिया के तमाम रिश्तों से मुख्तलिफ होता है बेटी
[13:06]बाप के जितना करीब होती है इतना कोई और वाक्य औलादे में
[13:13]kabrin नहीं होता बहुत सारे राज बहुत सारे असरार हटा बाप बेटी
[13:20]को बता देता है ना वो बीवी को बताता है ना वो
[13:21]बहन को बता देना बाप होता है वैरा फिर कभी इंशाल्लाह अगर
[13:28]बेटी उन्होंने गुफ्तगू हुआ तुझपे बात करेंगे इस मौके पर जो ऐसे
[13:37]हंसास बाप है हंस sanswal दें है जो अपनी औलादे में बेटे
[13:44]और बेटी के फर्क को पहचानते हैं मिसाल के तौर पे पैमाने
[13:49]फरमाए जब तुम अपने घर में बाहर ही दो और अगर दो
[13:50]गिफ्ट लेके आए हो बेटे के लिए भी बेटी के लिए भी
[13:54]तो पहले बेटी को फिर बेटे सबसे पहले मिलना चाह रहे हो
[14:04]पहले बेटी से मिलो उसके बाद बैठ जाओ क्योंकि बहुत सास है
[14:07]वो सेंसेटिव है उसे चीज को फुल करती है उसे चीज को
[14:12]महसूस करती है बेटे को फर्क नहीं पड़ता इसके बाद सेकंड नंबर
[14:16]पे हक कर दिया जाए कोई मसाला नहीं ए गए बाबा देख
[14:19]यह काफी है हो सकता है की बच्चा जो है मशरूम को
[14:24]बाबा ने भी सलाम वालेकुम और वो ऐसा ही मशरूफ रहे ठीक
[14:28]है लेकिन बेटी को फर्क पड़ता है बैराज वो हादसे ईश्वर बेटी
[14:36]अपने बच्चों से बात करते हैं कभी-कभी मैन मोहब्बत से का दे
[14:42]की मेरे शहजादे ये कर प्यारे ये कर दो दुलारे ये कर
[14:48]दो इसी तरह बेटियों के लिए ज्यादा तौर पर आदेश में बयान
[14:52]किया की mukhtalik अल्फाज से होने पुकारे मेरे नूर ए नजर [संगीत]
[15:11]ठीक है बिल्कुल इसी तरह से कमल देखिए की आम जिंदगी में
[15:17]पैगंबर जब बात कर रहे हैं कभी सिद्दीका का के पुकार रहे
[15:23]हैं कभी हावड़ा इन सिया का के पुकार रहे हैं कभी सहारा
[15:28]का के पुकार रहे हैं कभी हदीस मर्जिया का के पुकार है
[15:31]कभी राजी का के कभी muhaddissa का के इस तरह बीवी के
[15:36]टाइटल पाते हैं लकब बनते चले जाते और इन तमाम अल्फा आपके
[15:44]साथ-साथ एक हदीस इमाम मासूम की पैगंबर की जो अहले सुन्नत की
[15:48]कुतुब में मौजूद है मिसाल के तौर पे ये किताब अहले सुन्नत
[15:53]की कुतुब में मौजूद है जिसके और यह इस लेक्चर के इंशाअल्लाह
[15:59]में नोच रेफरेंसेस इस लेक्चर के साथ एडिट के लिए दे दूंगा
[16:02]आई होप के इसके रेफरेंसेस आप देते रहे नीचे स्लाइड की सूरत
[16:10]में तो देखने की बात ये है की जितनी हदीस है इन
[16:12]हदीस में शायद ही कोई एक हदीस ऐसी हो की जिस हदीस
[16:18]को किसी और हदीस से कंपेयर किया जाता है pamberkram करें फ़ातिमा
[16:25]तुम मेरा हमारा फवाद सही है मुस्लिम सही है बुखारी की हदीस
[16:29]है alfaatema ताबीज हाथों में नहीं फ़ातिमा मेरे बदन का टुकड़ा फ़ातिमा
[16:35]मेरा नूर ए नजर हो अच्छा अली के लिए जब बात हुई
[16:56]तो वहां हदीस है या अली रहमों का लहमी दमोह का दामी
[16:58]nafson का naapsi लेकिन जब सेहरा बुलाया का मकाम आता है तो
[17:04]कहा फ़ातिमा तो मिर्ज़ा खासियत है मेरे बदन के हर एक पार्ट
[17:11]में पाई जाती haijam की किताबें हैं उनमें कुछ आदिस ऐसी मिलती
[17:18]है जो फ़ातिमा मेरे बाल की तरह है जिसने मेरे बाल को
[17:24]नुकसान पहुंचा गुजर जाए सबसे हम जो आदि इसके अंदर एक मकान
[17:33]बयान किया वो मुकाम ये है मैन और जिसने फ़ातिमा को अजनबी
[17:42]उसने मुझे और जिसने मुझे कमल यह है यह हदीस सही है
[17:50]मुस्लिम में बयान की गई मुख्तलिफ अंदाज़ से गया दिगर को टोक
[17:56]रहने दीजिए हज़रत ए आलू सी अपनी किताब रूल म्यान रूल म्हणी
[18:03]के अंदर जब सूर्य आले इमरान की एक आयत पे पहुंचने हुए
[18:05]तफसीर कर रहे हैं जनाबे मरियम के हवाले से तो कहते हैं
[18:09]मरियम अपने वक्त के औरतों की सरदार थी और फ़ातिमा हर वक्त
[18:16]उनके [संगीत] जो फजीलत ए फ़ातिमा तो सहारा सलाह हुई हैं उनमें
[18:32]से अक्सर की revayaten करने वाली उल मोमिनीन है कमल है मैं
[18:37]मिसाल के तौर पे आपके सामने बयान कर डन कुछ रास्ते में
[18:43]की वजह से मेरे नोट्स रह गए हैं जो मैं नहीं ला
[18:48]सका एक जरूरत पड़ी मोहम्मद वाले मोहम्मद [संगीत] दादी बयान करते हैं
[18:57]की शबे मेराज जब पैगंबर गए हैं jannaton की सैर के लिए
[19:03]तुम वहां जब पहुंचे तो जन्नत के दर पे लिखा हुआ देखा
[19:05]है ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मद रसूलुल्लाह वी अलीम अल्लाह हसन वालों हुसैन
[19:16]है और वो फ़ातिमा है जो खुदा की मुताबिक अल्लाह हु अकबर
[19:26]तारीख है बगदादी jaltambar एक सफर 250 आगे एक और महसर के
[19:33]हवाले से जो मैंने रिवायत बयान की सही बुखारी हो सही है
[19:38]मुस्लिम में ये रिवायत जिस तरह नकली हुई है की जो फरमाते
[19:40]हैं की किसी को सच्चा नहीं पाया सिवाय फ़ातिमा की और इसके
[19:48]वालिद के ये हदीस जनाबे आयशा बयान कर रही हैं जितनी फजीलत
[19:55]है मैंने फ़ातिमा की सुनी है किसी खातून के बारे में नहीं
[20:02]सुनी और उसके बाद फिर जनाबे aayeshahi farmati हैं की फ़ातिमा से
[20:06]फरमाया क्या तुम इस बात पर राजी नहीं हो की तुम जन्नत
[20:10]की औरतों की सरदार हो फ़ातिमा क्या तुम इस बात पे राजी
[20:16]नहीं हो की तुम जन्नत की औरतों की सरदार हो ये सुनकर
[20:18]जनाबे फ़ातिमा जा रहा खुश हो गई पर ये किताब सही है
[20:23]बुखारी के अंदर उसे दिन का अब्बा के अंदर मौजूद है और
[20:27]फरमाया जनाबे आयशा ने फ़ातिमा तुम कायनात की औरतों की सरदार तो
[20:33]यह वह हदीस हैं की जिनको देखकर यह चीज पता चलती है
[20:41]की जब भी कभी हकीकत को छुपाने की कोशिश की जाए कम
[20:50]से कम ये सोच लिया जाए की यह हकीकत कितनी बजे है
[20:52]तीसरा सबसे बड़ा हिस्सा रिवायत का जो सुनने अपने दौड़ murtazak अहमद
[20:59]इब्ने हम mustade अहमद सही है पर बयान होती है वो ये
[21:05]जब से आया tathhir का हुजूर हुआ मुसलमान के वक्त पैगंबर अकरम
[21:14]डरे zaahara बताते द और ये तकरीर की तिलावत किया करते अस्सलाम
[21:20]वालेकुम धरती से अगर उनको दोबारा देखा जाए वो दिस जो सिर्फ
[21:46]शान-ए-ज़हरा दुनिया में बयान कर रही हैं वो हदीस जो फजीलत से
[21:52]सहारा जिगर खवातीन पे बयान कर रही हैं वो हदीस जो जुमला
[21:54]पंजतन के फजल बयान कर रही हैं वो हदीस जो फर्दन फर्दन
[22:00]बीवी फ़ातिमा के alkabab के जेल में बयान फ़ातिमा के जेल में
[22:07]बयान खुदा ने फ़ातिमा तो फ़ातिमा बनाया इसलिए की वो उम्मत को
[22:15]ऐसे ही आपसे बचा ले जाएगी रोज़ मैसेज शफात के हवाले से
[22:20]हादसे और फिर उसके बाद पैगंबर की दो महसूस हदीस हैं जनाबे
[22:25]फ़ातिमा के हवाले से पहली हदीस ही फ़ातिमा जब भी तुम मेरे
[22:34]करीब होती हो मुझे जन्नत की महक आती है खाटू ने जन्नत
[22:38]बीवी का ilakab दुनिया में है जन्नत में जाने के बाद नहीं
[22:44]है और दूसरी हदीस इसी हवाले से जो बयान की गई वो
[22:51]ये के फ़ातिमा की आल में ही हाथियों का सिलसिला है हिदायत
[23:00]करने वालों की एक सिलसिला है जो फ़ातिमा की नस्ल में मौजूद
[23:09]है और अजीम तरीन हदीस आप लोगों के लिए मकसूद वक्त के
[23:14]लिए कोई इनकार नहीं कर सकता अल्लाह [संगीत] इसीलिए बीवी गायक लता
[24:06][संगीत] हदीस अपनी जाने अपने इमाम जफर अली सलाम से मकाम सैयद
[24:23]जो हमारी नजर में यह तमाम सैकड़ो हादसे हैं जो अहले सुन्नत
[24:30]की मौत पर कुतुब में हमारे यहां हमारे इमामे shadisht फरमाते हैं
[24:36]की हम अहले दुनिया पर जिस तरह हुज्जत हैं हमारी मैन फ़ातिमा
[24:40]इस तरह हम इमा पर यह आदि इसके बाद में अब अगर
[24:51]तारीखी सिम तुम्हें जाते हैं तो मुझे बताइए बाप बेटे के रास्ते
[24:53]की सुन्नत अगर फ़ातिमा ना हो तो कैसे पता चलेगा बेटी का
[24:58]बाप जो ताल्लुक अगर सहारा ना हो तो ये सुन्नत कैसे पता
[25:03]चलेगा जिस तरह peyambal ने महल का इंतजाम किया ये तमाम चीज
[25:13]फ़ातिमा ना हो तो कैसे दुनिया में भी बात कर रहा हूं
[25:17]और फिर उसके बाद अगर तारीख के अंदर फिडक का मामला है
[25:28]या ikhtilafaten खलीफा है रिसर्च फोन मौजूद है यकीन कीजिए किसी कम
[25:43]मूल की जरूरत नहीं खुद बैठकर किताबें लिखी है शुरू करिए ला
[25:50]के किसी अहले इल्म को दिखा दीजिए मुमकिन ही नहीं है की
[25:54]आप नतीजे तक ना पहुंचे मुमकिन नहीं है दोनों जाने से किताबें
[25:59]देखें दोनों जाने की शान की हदीस आए आप का दे उसे
[26:11]दुर्गा अब्बा भी जायद है आप का देंगे anabees है आपके mustfair
[26:14]है आप कहें सही है इनके अंदर आने वाली हदीस भी jaajeef
[26:20]हैं mustade अहमद अगर ये इतने का मजमा आपकी सही होबर किताबों
[26:32]में मौजूद है तो आपके गलतियों का क्या हिसाब होगा मेरे जुमला
[26:40]अहले सुन्नत भाई इस मामले को इस तरह से देखें की अगर
[26:47]सैयद सहारा का लकब सिद्दीका पैगंबर की जबान से साबित हो जाए
[26:50]उनकी किताबों में तो अब सहारा की बात कौन विधु ने मैन
[26:57]नहीं है के बारे में वो आदि से वह आदि जो जन्नत
[27:15]के बारे में कुछ तसव्वुर नहीं कर सकता मुकाम है और ऐसी
[27:19]बीवी एक सवाल मैं छोड़ के जा रहा हूं आप जवाब तलाश
[27:25]कीजिएगा मुझे बताइए देखिए किताबें देखिए इंटरनेट पर सर्च कीजिए और बताइए
[27:32]रसूल की बेटी का इंतकाल कैसे हुआ एक सवाल अगर शहादत थी
[27:41]तो कातिल कौन था दूसरा सवाल तीसरा सवाल अगर zyadati कातिल मौजूद
[27:50]था हुकूमत है वक्त ने उसे कातिल के खिलाफ क्या इकम किया
[27:53]सही आज यहां कोई बेगुनाह कत्ल हो जाए अब हुकूमत के खिलाफ
[27:59]जाकर मुशायरे शुरू कर देती है दुनिया खलील तो नहीं पकड़ा गया
[28:01]कहा हुकूमत से मुशायरा क्यों कर रहे हो कहा क्योंकि यहां के
[28:06]लिए क्योंकि इनके हाथ में सस्ता में इनको चाहिए की पकड़े और
[28:12]उसे अदा लगता है हम takhatai दर तक पहुंचने की बात थोड़ी
[28:15]कर रहे हैं क्या का रहे हैं अदालत तक पहुंचने की बात
[28:19]याद रखिएगा तीन सवाल अगर पैगंबर की बेटी थी तो कैसे इस
[28:25]दुनिया से गई अगर जैसे की अहले तश्री कहते हैं शहादत हुई
[28:31]है तो शहादत कैसे हुई और कातिल कौन है asbabi शहादत क्या
[28:37]है वक्त का खालिफ है वक्त का रख दे अमल assalamal क्या
[28:43]था उसे कत्ल करने वाले के खिलाफ उसे जुल्म करने वाले के
[28:47]खिलाफ जब के शाहिद किताबों में यह हदीस मौजूद है मुस्लिम का
[29:00]दीजिए जिसने मुझे राजी किया इस टाइटल के जेल में यह हदीस
[29:13]बयान भी है यही वजह है तो यही सदा एटीएफ है यह
[29:45]मोहम्मद वाले मोहम्मद से हो रहा नए साल का आगाज मोहब्बत तो
[29:53]इत्तेहाद और बेहतर तो आशिकी से हो रहा है नए साल का
[30:00]आगाज हम के लिए कर रहे हैं इत्तेहाद का मतलब जो मोटर
[30:15]चीज ऑथेंटिक चीज उनको एक्सेप्ट करना है अपनी गलतियों को एक्सेप्ट करना
[30:21]है और मुसलमान की तारीफें की जाए हर किसी का यह मतलब
[30:34]नहीं की ये भी अच्छे हैं वो भी अच्छे हैं फिर तो
[30:37]मुमकिन नहीं है आपको लग रहा है पैगंबर अकरम के सारी हादसे
[30:40]पॉलिटिकल थी की तुम भी अच्छे हो तुम भी अच्छे सेहरा भी
[30:45]अच्छी है और उसका दुश्मन भी अच्छा है आखिर में एक ऐसी
[30:54]आयत कुरान की जो 80% 80% हमारे मुसलमान के तमाम फिरको की
[31:00]मस्जिदों पर लिखी होती है [संगीत] आयत के बाद सलवार कहने की
[31:32]जरूरत नहीं होती खुद पति जाती है और ये वो आयत है
[31:39]जिसके लिए इमाम इरशाद रहम परमिट हैं की जिन पर दुरूद के
[31:45]बगैर नमाज़ मुकम्मल ना हो उन अहलेबैत का मुकाबला किस किया जा
[31:48]सकता है तमाम मैंने तश्री के फिर द नमाज जो पढ़ रहा
[31:58]है वह taslot पढ़ना है जो टशन पढ़ रहा है वो सलवट
[32:05]जरूर भेजा और इसी आयत का अगला हिस्सा ये है की और
[32:08]खुदा इसमें कहीं और खुदा और उसके फरिश्ते जरूर भेजते हैं salamatiyan
[32:15]भेजते हैं बरकतें बेचते हैं तारीफ करते हैं मजा करते हैं नात
[32:19]करते हैं ठीक है नबी नबी के ऊपर मेरे ऊपर दूर तुम
[32:30]गोरोडा ना भेजा करो ये भी unabhi और मोहदा में है खजूर
[32:34]तुम बुरी दा क्या होती है इनकंप्लीट नहीं भेजा करो मुझमें पर
[32:39]कहीं कंप्लीट क्या होती है कोई नमाज़ नहीं है जब तक के
[32:54]मोहम्मद वाले मोहम्मद पे दुरूद नबी दिया जाए अगर ऐसा है तो
[32:58]कभी मुमकिन नहीं है की इनके दुश्मनों के ऊपर भी किसी तरह
[33:04]की नरमी पर थी जाए यही इल्लल्लाह द आयत का नंबर भी
[33:06]नहीं बता रहा ताकि आप भी तो कुछ ढूंढे या ये ढूंढे
[33:12]यहां फायर इसका नेक्स्ट हाफ पार्ट पढ़िए इंशाल्लाह कादरी साहब याद रखिएगा
[33:17]एंडर्स इसी के नेक्स्ट हाफ पार्ट पे होगा की और खुद और
[33:23]फरिश्ते लानत ही करते हैं उन लोगों पर जो नबी को अजियत
[33:25]करते हैं और नबी की इख्तिलाफ रखते हैं इंशाल्लाह खुदा बंदे ताला
[33:35]हमें तौफीक दे की हक को हकीकत की भैरवी कर सके हर
[33:40]कोई से कम ले सके और इसी तरह हक के साथ इस
[33:44]दुनिया अखरत में मौजूद रहे fatamajara सलामुन अलैह के जो fzile बयान
[33:49]हुए मौला इनका वास्ता हमारी मैक्सस माओ पे रहें फार्मा हमारी अहले
[33:56]खाना पे रहम फार्मा हमारे जो बीमार है उन्हें shifayen कामिल आता
[34:01]फार्मा नए साल का आ नहीं होगा 100 इयर्स कंप्लीट हो रहे
[34:16]हैं हमें मिडिल में बाकी इस साल इन वकील को 100 ईयर
[34:20]कंप्लीट हो रहा है इस साल छह सवाल कुछ ऐसे करिएगा जो
[34:26]अब तक नहीं किया सिर्फ सैयद सहारा के लिए उनके फर्ज के
[34:32]लिए बीवी दुआ है आपकी बार का हमें तौफीक दे की हम
[34:37]आपकी बारगाह को आपके रोजे को तमीज कर सके हम आपकी बारगाह
[34:44]कर सकें आपकी बारगाह में दुआ है की आपके जितने भी जितने
[34:52]भी चाहने वाले हैं उनकी खिदमत कर सके
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