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Maad K Asrat Part 01 | Brother Mubashir Zaidi
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Record date: 20 Mar 2011 - معاد کے اثرات
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2011 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by almehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]ला ह ला कुवता इला बिल्लाह अलीम बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल हमदुलिल्ला
[0:10]रबल आलमीन बला हु फ म ल मान फव सला सलाम रस
[0:35]बशीर सराज मुनीर मौलाना मला जल हसन अलस मोहम्मद महम्मद रीनल मासन
[0:49]मजलू अना बला [संगीत] सलामी अमा बा ला तबार ताला फ म
[1:18]किताब बमला रहमान रहीम अतु अमा लना ना ज [संगीत] मुहम्मद अने
[1:37]गिरामी माद और उसके इंसानी जिंदगी पर असरात अकीदा माद और उसके
[1:47]इंसानी जिंदगी पर असरात के उनवान से मुख्तसर कुछ बातें आपकी खिदमत
[1:51]में इंशाल्लाह अर्ज करेंगे जिस आय करीमा को सरनामा कलाम करर दिया
[1:55]सूर मोमिनून की आयत 115 है जिसमें खुदा वंदे आलम ने इरशाद
[2:03]फरमाया क्या तुम यह गुमान करते हो अ हमने तुम्ह बगैर किसी
[2:10]मकसद के बिला किसी वजह के बेहूदा खलक किया है ना क्या
[2:16]तुम य गुमान करते हो कि तुम्ह हमारी जानिब पलट के नहीं
[2:21]आना यानी खुदा वंदे आलम ने इस आय करीमा के अंदर इरशाद
[2:23]फरमाया कि देखो अगर हमारी जानिब पलट कर ना आना होता तो
[2:30]तुम्हारी खलकत अब थी अगर इंसानों को खुदा वंदे आलम की जानिब
[2:33]पलटना ना होता अगर मा यानी कयामत ना होती तो खुदा आलम
[2:40]कह र पूरी खलकत अब थी अना क्या तुमने यह देखा या
[2:49]तुमने गुमान किया कि हमने तुम्ह अब लक किया नहीं हमने तुमने
[2:51]अब लक नहीं किया किस लिए लक किया इसलिए कि तुम खुदा
[2:56]वंदे आलम की जानिब पलटा जाओगे बस खद इस आयत के अंदर
[3:00]के जो सर मोमन की 11वी आयत है इसके अंदर खुदा वंदे
[3:05]आलम ने माद के बारे में माद की अहमियत माद यानी कयामत
[3:07]कयामत के बारे में हमें मुत किया य एक मशहूर आयत है
[3:13]जिसको हमारे य कहा जाता है कलम इजा जब हम किसी की
[3:17]मौत की खबर सुनते तो हम क्या करते हैं इना ला व
[3:22]इना इ राज ब साता हमारी जबान से निकलता है इन्नाला बेशक
[3:24]हम अल्लाह के लिए अल्लाह की जानिब से हैं ना और यकीनन
[3:30]हमें उसी की जानिब पलट कर जाना है बस कयामत या मौत
[3:36]या मात एक ऐसी चीज है कि जिसका हम और आप हर
[3:40]शब रोज जिक्र सुनते हैं या जिक्र करते हैं और इस आय
[3:42]करीमा के मुताबिक सर मोमिनून की 115 आयत है अगर माद ना
[3:48]हो तो यह खलकत अब हो जाएगी खुदा वंदे आलम एक तरफ
[3:52]कह रहा है कि माद है इसलिए कि खुदा वंदे आलम कोई
[3:56]चीज अब बस खल्क नहीं करता क्यों क्योंकि खुदा वंदे आलम हकीम
[4:00]है खुदा वंदे आलम अलीम है खुदा वंदे आलम कदीर है बेहूदा
[4:06]काम अब काम वो करता है कि जिसके इल्म में कोई कमी
[4:10]हो या कुदरत में खुदा वंदे आलम व है कि जिसके ना
[4:11]इल्म में कमी है ना कुदरत में कमी यानी उसका इल्म कामिल
[4:17]है इल्म मुतलुलुक किसी काम को शुरू करें बीच में छोड़ दें
[4:32]यह जो हमने काम शुरू करके बीच में छोड़ दिया यह अब
[4:35]हो गया क्यों क्योंकि हमारा इल्म नाकस था हम समझ रहे थे
[4:39]हम इस काम को फला तरीके से अंजाम देंगे जवाब मिलेगा बीच
[4:41]में पहुंचे देखा कि नहीं हमारा तरीका सही नहीं था छोड़ के
[4:46]दूसरे रास्ते की तरफ चले ग ये जो पूरी प्रैक्टिस हुई इस
[4:49]काम को बीच में लाकर छोड़ने तक ये अब हो गई बेहूदा
[4:53]हो गई क्यों क्योंकि हमारा इल्म काफी नहीं था हमने जिस चीज
[4:55]को पहले सही समझा था कुछ जमाना गुजरने के साथ साबित हुआ
[4:59]कि नहीं यह तरीका सही नहीं दूसरे रास्ते पर चलना चाहिए नतीजे
[5:02]में हमसे क्या काम हुआ अब काम हुआ लेकिन जिसका इल्म मुतलू
[5:07]का काम बस नहीं होता जिसकी कुदरत मुतलुलुक कर दिया क्यों क्योंकि
[5:27]हम सुबह उठे उठने के बाद अपनी जिंदगी की तद में लग
[5:32]जाए कुछ मेहनत कर ले माल दौलत कुछ हासिल हो जाए उसके
[5:34]बाद हमारे दिन भर का इंतजाम हो जाए खाना खा ले पी
[5:38]ले उसके बाद शादी करें नस्ल आगे बढ़े और जिंदगी खत्म हो
[5:43]जाए इसका कोई मकसद ना हो इन तमाम कामों का कोई मेहर
[5:44]ना हो तो ये काम अब है दलम ने कहा नहीं तुम्हें
[5:47]हमारी तरफ पलट के आना है लि अपनी खलकत को बेहूदा मत
[5:52]समझो अपनी खलकत को बातिल ना समझो खुदा वंदे आलम की बारगाह
[5:55]में कोई काम बातिल नहीं है बस खुदा आलम ने हमें खलक
[6:00]किया माद और उसकी याद हमारी जिंदगियों पर क्या असर डालती है
[6:05]खुद माद की अहमियत क्या है इसको कुरान करीम की आयत ने
[6:12]बयान किया कुराने करीम की यह आयत आपके सामने पढ़ता हूं इसमें
[6:16]खुदा वंद आलम ने इरशाद फरमाया वकना इब्राहीम व इक व याकूब
[6:22]ल जिक्र कीजिए किसकिस का इब्राहीम का उनके बेटे इक का और
[6:30]याकूब का य कौन लोग थे लसार साहिबान कुवत और साहिबान बसीरत
[6:36]थे साहिबान बसीरत थे इना अलना बतन जिक हमने इनको खालिस कर
[6:49]लिया था पूरे खुलूस के साथ किस चीज के लिए जिकर दार
[6:52]आखरत की याद के लिए खुदा ने कहा कि जिक्र कीजिए यानी
[6:59]रसूल अकरम को जाहिर हुक्म है जिक्र कीजिए याद कीजिए उनकी याद
[7:06]मनाइए किनकी इब्राहीम इक और याकूब की किस वजह से कि हमने
[7:09]उनको खालिस कर लिया था इना अलना हमने तवज्जो तलब नुक्ता य
[7:15]इना अलना हमने उनको खालिस कर लिया था खास चीज से व
[7:20]खास चीज क्या है दार आखरत की याद यानी हमने इब्राहीम इक
[7:26]और याकूब को आखिरत की याद से मखू कर लिया था इब्राहिम
[7:28]इक और आखरत को भुलाते नहीं गोया खुदा वंदे आलम ने यह
[7:34]इरशाद फरमाया आ मोसन कती ने इस आयत के जल में बयान
[7:39]किया तफसीर में की खुदा ने कहा नाना यानी हमने उन्ह हदियाना
[7:42]हमने इस लूस का तोहफा उनको दिया क्योंकि हमने क्या खुदा ने
[7:48]क्या कहा इना हमने खालिस किया अब हमने जब खालिस किया या
[7:53]हमने तोहफा दिया हमने उनको नेमत दी हमने उन्ह फजल दिया क्या
[7:57]है फजल ला याद आखरत बस अगर किसी के दिल में याद
[8:02]आखरत है वो यह बात समझ ले कि खुदा वंदे आलम ने
[8:04]उसको मुंत किया है खुदा वंदे आलम ने इस याद आखिरत के
[8:09]जरिए उसके ऊपर इनाम किया उसके ऊपर इकराम किया खुदा वंदे आलम
[8:14]की जानिब से हदियाना इसकी अहमियत ये है या इसी तरह हम
[8:19]और आप शब रोज में पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं उसमें
[8:21]एक जुमला आखिरत के लिए कहते हैं क्या कहते हैं मालिक यम
[8:28]दीन अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन रहमान रहीम मालिक यमन ये तकरार है बार-बार
[8:33]यानी खुदा कह रहा है पांच वक्त जब मेरे सामने आ रहे
[8:34]हो कम से कम पांच वक्त वना इससे ज्यादा इंसान खुदा के
[8:38]सामने नमाज के जरिए जाता है कम से कम पांच वक्त में
[8:43]जब आ रहे हो तो मालिक यदन कहो यानी खुदा को कयामत
[8:46]के दिन का मालिक समझो यह हम सब जानते हैं कि फकत
[8:52]जबान से समझना हमारे किसी दर्द की दवा नहीं है बिल्कुल उसी
[8:55]तरह के जैसे जबान से तिलावत कुरान करने वाले कर्बला में मौजूद
[9:00]थे थे मगर इमाम हुसैन के बच्चों पर पानी भी बंद किया
[9:02]उन्होंने जबान से तिलावत कुरान करने वाले कर्बला में मौजूद थे इमाम
[9:08]हुसैन अल सलाम की लाश को पामलू फकत जबान से किसी चीज
[9:12]का जिक्र फायदा नहीं पहुंचाएगा जब तक ये जबान का जिक्र कल्ब
[9:14]में दाखिल ना हो खुदा वंद आलम कह र है मालिक यम
[9:19]दीन कहो कम से कम पांच मर्तबा यानी क्या मतलब है यानी
[9:24]अपने कामों को खुदा के मेहर के गिर्द घुमाओ मालिक यम दीन
[9:27]कहो तो मायूस ना हो मालिक य मुद्दीन कहो तो इस बात
[9:32]पर यकीन रखो कि एक दिन हमारी ये मेहनत नतीजा लाएंगे एक
[9:36]दिन हमारी जहमत रंग दिखाएंगी ये जो हम हर सुबह नमाज फजर
[9:42]के वक्त सर्दी हो या गर्मी रात की तारीख को नहीं देखते
[9:43]सर्दी को नहीं देखते गर्मी को नहीं देखते अजान की आवाज सुनते
[9:47]हैं मस्जिद में आ जाते हैं हमारे घर वाले भी कहते हैं
[9:48]कि क्या हो गया घर में नमाज पढ पढ़ी जा सकती है
[9:52]इतनी सर्दी में क्यों बाहर जा रहे हैं हालात ऐसे हैं हम
[9:55]इनकी तमाम बातें बर्दाश्त करते हैं क्योंकि ये दिन एक दिन नतीजा
[9:58]लाएंगे ये चीजें कब लाएगी जब यदन आएगा जब खुदा वंदे आलम
[10:04]अहले महशर के सामने बयान करेगा दिखाएगा कि देखो मेरे खालिस बंदे
[10:07]मेरे मुखलिस बंदे कि जो अपनी रातों की नींद को मेरी खातिर
[10:13]हराम किया करते थे बस यह मालिक यमन खुदा कह रहा है
[10:14]कि दिन में कम से कम पांच बार कहो यह नमाज इसकी
[10:17]माद की याद की अहमियत है खुदा आलम हमसे यह चाहता है
[10:23]कि हम माद को याद रखें और मैंने अर्ज किया कि इस
[10:27]आयत के अंदर सूर सद की आयत थी इसमें खुदा आलम ने
[10:32]कहा कि हमने खालिस किया इब्राहीम इक और याकूब को आखिरत की
[10:35]याद से खुलूस अता किया उनको बस ये माद की याद की
[10:40]अहमियत है कि हम और आप माद को याद रखें माद या
[10:45]कयामत जिसको हम कहते हैं मात खुद पलटने से पलटना यानी इसका
[10:47]मतलब हम एक जगह से आए हैं और फिर हमें पलटना है
[10:51]अब जब हम कोई शख्स किसी जगह से सफर करता है उसको
[10:54]वापस उस जगह आना होता है तो उसको हम क्या कहते हैं
[10:56]मुसाफिर हमें रिवायत में य बयान किया कि तुम इस दुनिया में
[11:02]अपने आप को दामी नहीं समझो तुम इस दुनिया में मुसाफिर हो
[11:08]जब मुसाफिर हो तो मुसाफिर की तरह रहो मुसाफिर की तरह कैसे
[11:10]रहा जा सकता है मुसाफिर अपनी गाड़ी में ट्रेन में जिस चीज
[11:14]में भी सफर कर रहा हो रास्ते में बहुत खूबसूरत मनाजिर गुजरते
[11:17]हैं मुसाफिर इन मनाजिर को देखकर मजूज होता है दिल नहीं लगाता
[11:24]इनके साथ क्यों इसलिए कि इसको पता होता है कि यहां मैंने
[11:26]रहना नहीं है मैं इस जगह दिल वाब नहीं कर सकता अपना
[11:31]मैं दिल वाबस्ता करूंगा तो यह मंजर कुछ देर बाद मेरी आंखों
[11:36]से ओझल हो जाएगा फिर हसत रहेगी मेरे लिए लिज एक मुसाफिर
[11:37]कभी रास्ते से गुजरने वाली चीजों से दिल नहीं लगाता मजूज होता
[11:42]है जो इस्तेमाल के काबिल चीज होती है इस्तेमाल करता है इस्ते
[11:45]फाद के काबिल चीज होती है इस्तफा करता है लेकिन दिल नहीं
[11:49]लगाता बस रिवायत ने य बयान किया कि तुम इस दुनिया में
[11:51]मुसाफिर हो मा ये याद दिलाती है कि तुम मुसाफिर की तरह
[11:56]जिंदगी गुजारो जैसे मुसाफिर गुजर रहा है रास्ते की हजार चीज दे
[11:59]देख रहा है मुतासिर हो रहा है दिल नहीं लगा रहा उन
[12:03]चीजों को दाइ नहीं समझ रहा मात क्या करती है मात य
[12:06]काम करती है जब मात को हम याद रखेंगे क्या होगा हमारा
[12:11]दिल दुनियावी चीजों में उलझे नहीं मासूम से पूछा गया कि दुनियादारी
[12:14]क्या होती है आया दुनिया की नेमतों को इस्तेमाल ना करना यह
[12:17]दुनियादारी से दूरी है क नहीं खुदा वंदे आलम ने नेमत बनाई
[12:22]इंसान के लिए कुराने करीम की आयत है जो कुछ जमीन में
[12:28]तुम्हारे लिए मुसर किया गया तुम्हारे लिए तुम इंसानों के लिए जो
[12:34]कुछ आसमान और जमीन में तुम्हारे लिए मुसर किया गया है तुम्हारे
[12:36]लिए बिछाया गया है जमीन का फर्श तुम्हारे लिए बिछाया है इसके
[12:41]अंदर हजार नेमत खुदा ने तुम्हारे लिए मया की है इसके अंदर
[12:43]दरख तुम्हारे लिए हो गए इसकी नेमतों को तुम्हारे लिए बनाया अब
[12:47]जब तुम्हारे लिए बनाया तो क्या करो इस्तफा करो इनको इनसे बरतने
[12:51]का काम लो इनसे दिली वाबस्ता कीी पैदा ना करो पैसा हासिल
[12:56]करो पैसे से मोहब्बत ना करो अमा ने ये बयान किया कि
[13:01]दुनियादारी ये नहीं है कि इंसान इन चीजों से इस्तेमाल करना छोड़
[13:03]दे नहीं इन चीजों का इस्तेमाल मोमिन के लिए ही है कायनात
[13:08]मोमिन के लिए खल्क की गई है लेकिन मुसाफिर की तरह गुजरते
[13:10]हुए जिस तरह मुसाफिर रास्ते की हजार चीजों को देखता है मुतासिर
[13:15]होता है पसंद आती है उसको व चीज लेकिन दिल नहीं लगाता
[13:17]क्योंकि उसे पता होता है य से गुजरना है यह मेरी मिलकियत
[13:21]में नहीं आएगी चीज मैं हमेशा यहां नहीं रहूंगा बस आखिरत की
[13:24]जो याद है वो इस वजह से अहम है कि इंसान जब
[13:27]आखिरत को याद रखेगा तो नतीजे में क्या होगा दुनिया दार नहीं
[13:34]बनेगा दुनियादारी की तरफ माइल नहीं होगा जिस शख्स का दिल दुनिया
[13:37]से खाली होगा वो शख्स होगा कि जिसको आइमा अल सलाम की
[13:42]बारगाह में मकाम हासिल होगा इमाम हुसैन अल सलाम ने कर्बला में
[13:44]अपने कातिलों को मुखातिब करके क्या इरशाद फरमाया था कहा था कि
[13:49]तुम इसलिए मेरे कत्ल पर आमादा हो गए हो कि तुम्हारा दिल
[13:50]दुनियादारी की तरफ रागब है कि तुम्हारे दिलों में दुनिया की मोहब्बत
[13:57]ने घर कर लिया है इस दुनिया की मोहब्बत के नतीजे में
[13:59]तुम जानते हुए कि मैं नवासा रसूल हूं मेरे गले पर छोरी
[14:04]चलाने पर तैयार हो यह जानते हुए कि मेरे साथ आले रसूल
[14:08]है इनका पर्दा छीनने पर तैयार हो क्यों क्योंकि दुनियादारी ने तुम्हारे
[14:12]दिलों में घर कर लिया दुनियादारी इतनी मजूम शय इसीलिए खुदा ने
[14:15]मोमिनो के लिए शायद इसीलिए खुदा ने मोमिन के लिए फर्ज करार
[14:20]दिया कि आखिरत की याद हमेशा रखो और खुदा ने इसको तोहफा
[14:22]करार दिया अपनी जानिब से माद और उसकी याद और उसका जिक्र
[14:28]फकत इस्लाम से मख सूस नहीं है जो नबी भी आया उसकी
[14:33]बुनियादी तालीमाबाद आखरत हर नबी ने अपनी दावत की इब्तिदा की तौहीद
[14:38]से खुदा की याद खुदा और उसके बाद आखिरत का जिक्र किया
[14:43]यह माद करती क्या है मात की याद करती क्या हमारी जिंदगियों
[14:49]पर असर अंदाज कैसे हो सकती है इसका क्या फायदा है इसको
[14:52]इंशाल्लाह बयान करते हैं उससे पहले ये बयान करूं कि माद के
[14:56]मामले में दो तरह के लोग हैं यानी कयामत के बारे में
[14:57]दो तरह के लोग हैं पहला ग्र व है कि जो आखिरत
[15:01]का कयामत का पलटने का इंकार करता है जो मानता ही नहीं
[15:06]यम हिसाब को नहीं मानता ला साब एक गुरु व है कि
[15:14]जो रोज हिसाब को रोज जजा को मा को कयामत को मानता
[15:20]नहीं इंकार करता है अगर कोई आखरत का इंकार करे तो फिर
[15:22]क्या होता है सर मान की कुछ आयत इसके बारे में बयान
[15:28]कर रही है आया उसको देखा जो आखरत का इंकार करता है
[15:30]क्या होता है जब आखरत का इंकार करता है तो क्या करता
[15:36]है क्योंकि आखरत का इंकार करता है ज यतीम को धुत काटता
[15:42]है आखरत का इंकार करता है यतीम से बेनाई बरता है क्योंकि
[15:49]आखरत को नहीं मानता माश में होने वाले मुश्किलात की निस्बत अपने
[15:53]आप को जिम्मेदार नहीं समझता आखरत पर यकीन नहीं रखता इसलिए नहीं
[15:56]देखता कि जो यतीम हो गया इस परस्ती में मेरा भी हिस्सा
[16:01]है क्योंकि आखरत पर ईमान नहीं रखता हजारों होने वाले वाकत उनके
[16:06]नतीजे में होने वाले शोहदा उनके बच्चों से गफलत बरता है अपने
[16:11]आप को किसी चीज की निस्बत मसूल नहीं समझता क्यों यदन आखरत
[16:18]को नहीं मानता ला मिस्कीन चकि आखरत का इंकार कर दिया अब
[16:27]दुनियादारी को खाना खिलाता है ना किसी को तरकीब दिलाता है कि
[16:32]इसको खाना खिलाओ भूखे को पड़ा हुआ देखता है आंखें बंद करके
[16:36]गुजर जाता है क्यों आखिरत का इंकार करता है अपने पैसे को
[16:38]अपने लिए समझता है लिजा आखिरत का इंकार करने के नतीजे में
[16:44]क्या होता है इंसान अपनी बुनियादी इंसानी सिफात से हाथ धो बैठता
[16:48]है ये जो दो सिफात खुदा ने बयान की या दोल यतीम
[16:52]यतीम को धुत काता है यतीम वो कि जिसका सरपरस्त चला गया
[16:55]एक इंसान उस शख्स पर रहम खाता है कि जिसके बाप का
[16:57]साया उसके सर से उड़ जाए वो शख्स की जो आखरत का
[17:02]इंकार करता है इस बुनियादी इंसानी सिफत से महरूम हो जाता है
[17:05]एक गरीब को देखकर उसकी जानिब इंसान का दिल मायल होता है
[17:09]कि इसकी मदद करे आखिरत का इंकार करने वाला इस बुनियादी इंसानी
[17:12]सिफत से महरूम हो जाता है पस आखिरत को ना मानने का
[17:16]नुकसान यह होता है कि इंसान इस बुनियादी इंसानी सिफात से महरूम
[17:21]हो जाता है जब इंसान बुनियादी इंसानी सिफात से महरूम हो जाता
[17:25]है तो फिर क्या होता है इंसान हैवान से ज्यादा पस्त हो
[17:29]जाता है उसके बाद दूसरे लोग कौन से हैं यकीनन मेरा और
[17:34]आपका शुमार इस ग्रह में नहीं होता कि जिन्होंने आखिरत का इंकार
[17:39]किया हम और आप आखरत पर यकीन रखते हैं हमारे उसूल में
[17:41]उसूल दन जिसको हम कहते हैं माद या कयामत उसका लाजमी हिस्सा
[17:47]है जिसको हमें कहा गया अल समझो हम और आप इस गुरुह
[17:51]में नहीं है कि जो यम दीन का इंकार करते हो हम
[17:53]और आप उन लोगों में से नहीं है जो आखिरत का इंकार
[17:54]करते हैं हम और आप किस गुरुह में हो सकते हैं दूसरी
[17:57]आयत है सूर सद की आयत नंबर 26 इसमें खुदा ने इरशाद
[18:06]फरमाया ला वो लोग जो खुदा के रास्ते से भटक जाते हैं
[18:09]लहु अजब शदीद इनके लिए शदीद बदतर अजाब है क्यों बेमान सुय
[18:16]मल हिसाब क्योंकि इन लोगों ने आखिरत की याद को भुला दिया
[18:20]यहां तकब की बात नहीं है यह वो गुरुह नहीं है कि
[18:25]जिसने इंकार किया कयामत का य नहीं कहा कि नहीं कयामत कयामत
[18:29]नहीं आनी माद नहीं है इस दुनिया में इंसान आया जिंदगी गुजारे
[18:31]का मर जाएगा खत्म हो जाएगा फना हो जाएगा नहीं यह वो
[18:36]गुरुह है जो फना का काइल नहीं है यानी मैं और आप
[18:40]यानी मोमिनो का गिरोह वह है जो इस बात का काइल है
[18:42]कि मरने के बाद मशहूर होना है मरने के बाद मबस होना
[18:46]है मरने के बाद उठना है लेकिन दुनियावी जिंदगियों में इतना मशगूल
[18:49]हो गए कि नसू यमल हिसाब आखिरत को भूल गए आखिरत की
[18:56]याद पर पर्दा पड़ गया यानी काम करने से पहले यह नहीं
[19:01]सोचा कि इस काम का नतीजा आखिरत में क्या करेगा अपने भाई
[19:06]की जमीन पर कब्जा करने से पहले यह नहीं सोचा कि इस
[19:08]भाई की जमीन पर कब्जा कर रहा हूं इसका खुदा के सामने
[19:12]भी जवाब देना है अपने भाई को शरीफ पाया मिस्कीन पा आया
[19:17]देखा कि कुछ नहीं कहेगा जमीन हथिया ली अपने बच्चे पर बिला
[19:19]वज सख्ती करने से पहले यह नहीं सोचा कि बच्चा अमानत इलाही
[19:22]है कयामत के दिन इसकी तरबियत के बारे में खुदा मुझसे पूछेगा
[19:28]अपने बाप मां-बाप की बेहुरमति बे एहतराम करते वक्त ये नहीं सोचा
[19:32]कि इन मां-बाप का खुदा वंदे आलम ने हुकम दिया कि इनके
[19:36]सामने ऑफ भी मत करना अगर मैं ऑफ करूंगा या इससे बढ़
[19:40]के इनको झड़ कूादीकुथु दव आलम कह रहे ये लोग भी कि
[19:55]जो आखिरत की याद से गाफिल हो जाएंगे यानी यकीन रखेंगे आखिरत
[19:59]को अकीदत पर मानेंगे मगर उससे गाफिल होंगे आखिरत को [संगीत] [संगीत]
[20:27]अकीदेअरेस्ट इन रुकावट को बर्दाश्त नहीं करना इसलिए क्या करते हैं आखिरत
[20:33]को भुला देते हैं हां जब आएगी तो आएगी देखा जाएगा ब
[20:35]यह वह गुरुह है कि जिसको खुदा आलम ने कहा इसके लिए
[20:38]भी अजब शदीद है मैं और आप अजने गिरामी मोमिनीन किराम इस
[20:42]गुरुह में से हो सकते हैं कि जिन्होंने आखिरत को माना है
[20:45]अकीदा रखते हैं यकीन रखते हैं कि है हमारे अकाद का हिस्सा
[20:50]है लेकिन शायद भूल जाए हम वक्ती तौर प हमारी आंखों के
[20:52]सामने गफलत का पर्दा है खुदा ने कहा कि वह ग्रह भी
[20:57]काबिल मजम्मत है कि जो की याद को भुला देगा यमल हिसाब
[21:02]को भुला देगा अ हिसाब है इसमें होगा क्या हिसाब होगा हिसाब
[21:09]होगा तो किससे होगा और हिसाब किस चीज का होगा किससे होगा
[21:12]इसके बारे में खुदा ने इरशाद फरमाया सूर आरा की आयत नंबर
[21:18]छ फसना अर फना हतमान जरूर सवाल करेंगे पूछेंगे किससे अलज जिन
[21:28]लोगों की जानिब हमने अपना रसूल भेजा था यानी उम्मत से यानी
[21:35]कौम से लोगों से जिसके पास किसी पैगंबर ने आग पैगाम दिया
[21:38]किसी अल्लाह के वली ने आग पैगाम दिया उस कौम से पूछा
[21:43]जाएगा कि तुम्हें य पैगाम मिला था या नहीं मिला था तुम्हें
[21:47]यह हक की बात सुनाई दी गई थी या नहीं दी गई
[21:49]थी अब जब सुनाई दी गई थी तो इस पर अमल क्यों
[21:50]नहीं गया इसके बारे में खुदा पूछेगा फकत उम्मत से नहीं पूछेगा
[21:56]फला मुरसलीन जिन अंबिया के जरिए पैगाम भेजा था जो मुरसलीन भेजे
[22:02]थे उनसे भी पूछा जाएगा क्या आपने पैगाम सही दिया था या
[22:07]नहीं दिया था आपने पैगाम पूरा दिया था या नहीं दिया था
[22:08]पैगाम को सही अंदाज में पहुंचाया था या नहीं बस उम्मत से
[22:13]भी पूछा जाएगा और जो नबी होगा उससे भी पूछा जाएगा सवाल
[22:18]क्या किया जाएगा हिसाब किस चीज का होगा लान कुतु लून सर
[22:23]नहल की आयत नंबर 93 हम हतमान पूछेंगे किस चीज के बारे
[22:29]में एक दो चीजों के बारे में नहीं अम कुन तुम जो
[22:34]कुछ भी तुम लून करते थे जो कुछ भी करते यानी मैं
[22:35]इस वक्त जो कर रहा हूं इसका मुझसे सवाल होगा आप जो
[22:38]इस वक्त कर रहे हैं आपसे इसके बारे में सवाल होगा मैं
[22:42]यहां से उठ के जाऊंगा जो करूंगा सवाल होगा हर किसी से
[22:44]जो कुछ वो करता है द खुदा ने कहा अमा कु तुम
[22:47]जो कुछ तुम करते हो लून जो कुछ तुम करते हो अमल
[22:51]करते हो उसका सवाल होगा बस अगर मेरे जहन में आखिरत का
[22:57]यह तसव्वुर हो कि खुदा वंदे आलम से मेरे हर अमल के
[23:01]बारे में पूछेगा तो यकीनन यह मेरी इस्लाह के लिए काफी है
[23:04]बिल्कुल उसी तरह के जब मैं अगर नौजवान मसलन यहां बैठे हैं
[23:10]कि अगर टीवी देखते वक्त अगर घर में कोई ना हो तो
[23:12]इंसान किन चैनल्स को देख रहा होता है और अगर कोई मौजूद
[23:16]हो तो किन चैनल्स को देख रहा होता है यह तब्दीली क्यों
[23:20]आती है टीवी तो वही है चैनल्स तो वही है क्यों तब्दील
[23:22]हो रहे होते हैं किसी की मौजूदगी में चैनल्स और जब कोई
[23:26]मौजूद नहीं होता तो कौन से चैनल्स देखता है इंसान क्यों इसलिए
[23:31]कि किसी को शाहिद समझता है कि जो देखने वाला ये अगर
[23:33]मैं गलत चैनल मसाल गाना इसके सामने सुन रहा हूं कोई बेहूदा
[23:37]फिल्म इसके सामने देख रहा हूं तो मेरी गिरफ्त करेगा मेरी बेज्जती
[23:39]करेगा मेरी इज्जत खराब होगी अकेले में अपने आप को अकेला समझता
[23:44]है इमाम अली ने क्या इशाद फरमाया था इमाम ने इशाद फरमाया
[23:48]थाला फलावा अल्लाह की मासि अत से अपनी तन्हाई में डरो क्यों
[23:56]कोई देखे ना देखे अल्ला देख रहा है और फकत देख नहीं
[24:00]रहा वही हुकम भी करेगा वही फैसला भी करेगा वही गिफ्ट भी
[24:05]करेगा अगर मात क ये तसर हो के मैं जो कुछ कर
[24:09]रहा हूं उस परे गिरफ्त है तो अब मेरा अमल समल जाएगा
[24:10]अच्छा ये फकत उसमें नहीं है कि सख्ती के मामला में हो
[24:15]यह जजा के मामले में भी ऐसा ही है अब जब इंसान
[24:19]बाज औकात हम देखते हैं कि बाज लोग अच्छाई के कामों से
[24:20]मायूस हो जाते हैं भाई इस मुश में कुछ करने का फायदा
[24:24]नहीं है क्यों फायदा नहीं है कोई समझता नहीं है कोई सुनता
[24:29]नहीं है अच्छाई को लोग पसंद नहीं करते अगर इस आयत को
[24:31]अपना मेयार बनाया हो कि जिसमें खुदा ने कहा कि हम अ
[24:35]कुतुल जो कुछ तुम करते हो इसके बारे में पूछेंगे हिसाब करेंगे
[24:41]इंसान मायूस नहीं होगा कोई देखे ना देखे मेरे अमल को खुदा
[24:43]देख रहा है कोई समझे ना समझे खुदा समझ रहा है अब
[24:47]जब कोई देखने वाला देखने वाला ना समझने वाला ना समझ रहा
[24:51]है लेकिन कौन देख रहा है खुदा कौन समझ रहा है खुदा
[24:53]कल जजा कौन देगा खुदा ये जो दोस्त इस प्रोग्राम का एहतमाम
[24:57]करते हैं मायूस नहीं होते क्यों नहीं होते मायूस इसलिए कि इनके
[25:01]इस प्रोग्राम को यहां लोग पसंद करें ना करें खुदा वंदे आलम
[25:06]इनकी जजा देगा इ इस बात का यकीन है कि खुदा वंद
[25:06]आलम इस बारे में पूछेगा कि काम कर सकते थे क्यों नहीं
[25:10]किया जब कर सकते थे कर रहे हैं जजा खुदा देगा बहुत
[25:14]शिरीन है ये खयाल इमाम हुसैन अल सलाम य आमा अल सलाम
[25:20]की कुर्बानियां के आमा अल सलाम कोय अंदाजा नहीं था कि हमारी
[25:23]बातों का असर कितने लोगों पर होगा उसके बावजूद किसी इमाम ने
[25:25]मायूसी का इजहार नहीं किया क्यों क्योंकि जो देखने वाला है वह
[25:30]जजा देगा हमारे हर हर अमल को खुदा ने तुम्हारे हर अमल
[25:34]को देख रहा हूं हर अमल के बारे में हिसाब किताब करूंगा
[25:35]पस हमारी हर मेहनत खुदा के सामने मौजूद है जाया नहीं जाएगी
[25:40]इला खुदा एहसान करने वालों का अजर जाया नहीं करता अगर यह
[25:46]तसर मात का होगा हमारी जिंदगी बहुत खूबसूरत बन जाएगी हम किसी
[25:51]के साथ नेकी करते हुए सोचेंगे नहीं और ना नेकी करके जिताएंगे
[25:53]खुदा आलम ने कुरान करीम में एक और आयत में इरशाद फरमाया
[25:58]कि मोमिन लोगों के साथ भलाई करो तो उसको जिता कर जाया
[26:07]मत करो अपने सदके को अपनी नेकियों को दूसरों पर जिता कर
[26:10]जाया ना करो यानी ऐसा ना अगर तुमने किसी के अच्छाई की
[26:15]तो यह मत क तुम भूल गए मैंने तुम्हारे साथ अच्छाई की
[26:19]थी तुम हो गया तुम्ह तो मैंने परवान चढ़ाया म किसी यतीम
[26:20]की परवरिश की तो कल उसको ऐसे एहसान मत जता उसके ऊपर
[26:24]तुम हो गया तुमरी परवरिश मैंने की थी ना खुदा कहा अपनी
[26:29]नेकी को नहीं करो क्यों क्योंकि तुमने जिसकी खातिर की है कयामत
[26:32]पर छोड़ दो तुम्ह इसकी बेहतरीन जजा देगा बस अकीदा माद ये
[26:36]है कि हम खुदा वंदे आलम की बारगाह में इस चीज का
[26:37]यकीन रखें कि हम जो कर रहे हैं उसका हमें जवाब देना
[26:41]है अब वो अच्छा हो तो उसका जवाब खुदा लेगा और उसकी
[26:46]जजा देगा बुरा हुआ खदाव आलम उसका सवाल करेगा सजा देगा क्या
[26:50]अमल की सजा है और अमल पर जजा है नहीं खुदा वंद
[26:52]आलम ने कहा लिल्ला मा समावा व मा अल्लाह के लिए जो
[26:58]कुछ भी है आसमान जमीन में मा जो कुछ तुम्हारे नसों में
[27:03]तुम उसे आकार करो या उसको छुपाओ यहा कुला खुदा उस पर
[27:12]भी तुम्हारी ग्रफ करेगा तुमने अपने बरादर मोमिन के बारे में गुमाने
[27:16]बद किया अपने जहन में बुरा सोचा उसके बारे में खुदा इस
[27:18]बुरे सोचने के बारे में तुमसे ग्रफ करेगा तुम अपने किसी बरादर
[27:24]मोमिन की मदद नहीं कर सकते थे लेकिन तुमने अपने दिल में
[27:26]सोचा अपने न में सोचता काश कि मैं इस काबिल होता कि
[27:30]इसकी मदद करता खुदा इस ख्याल की बुनियाद पर खु तुम्हें जजा
[27:33]देगा खुदा तुम्हारे नफ्स में जो कुछ गुजर रहा है जिसको तुम
[27:38]आशका कर रहे हो आशका नहीं कर रहे हो खुदा देख रहा
[27:41]है ना फकत देख रहा है इन तमाम चीजों पे हिसाब किताब
[27:42]करेगा अच्छी चीज होगी जजा देगा बुरी चीज होगी सजा देगा बस
[27:47]ये बुनियादी आयतें जो माद के बारे में मेरी और आपकी जानिब
[27:49]तवज्जो करवा रही है मात की जिंदगी पे असरात क्या हैं चार
[27:54]या पांच नुका है जिनको आपके सामने बयान करूं कि अगर इंसान
[27:58]इन चीजों को अपनी जिंदगी का मेह बनाए जो आयत आपके सामने
[28:00]कोट की कुरान की तो हमारी आपकी जिंदगी बहुत अच्छी हो जाए
[28:04]मात का पहला असर जो इंसानी जिंदगी में पड़ता है व यह
[28:09]कि इंसान को खुदा वंदे आलम ने किस लिए खलक किया अपनी
[28:11]इबादत अपनी तात अच्छी तरबियत के लिए खदा ने अया का मकसद
[28:17]क्या करार दिया सर जुमा की आयत है बिमला रहमान रहीम रसता
[28:27]नबी वो है जो लोगों की तरबियत करता है लोगों का तजिया
[28:32]करता है लोगों को तहा देता है लेकिन अजने गिरामी एक उसूल
[28:37]है और वो यह कि ये तजक और तहा कबूल करने की
[28:38]सलाहियत इंसान के पास होती है फकत नबी अपने तौर पर किसी
[28:47]इंसान को तजक और तहा नहीं अता कर सकता अगर ऐसा होता
[28:53]तो फिर आप इस बात का जवाब यकीनन देखेंगे कि अगर नबी
[28:55]के होने से या नबी के साथ बैठने से हर इंसान पाक
[28:59]और मुनजा हो जाता तो फिर सूर मुनाफिकून का नजूल किसके लिए
[29:04]कुराने करीम की सर सूर मुनाफिकून मुनाफिक कौन है कि जो इस्लाम
[29:11]के दायरे के अंदर है मुनाफिक कौन है कि जो इस्लाम की
[29:13]बात करता है काफिर नहीं है सूर मुनाफिक खुदा ने नाजिल की
[29:18]कौन के जो दो दिली करता है दो रुख करता है दो
[29:22]चेहरे होते हैं यानी रसूलल्लाह के साथ बैठता है रसूलल्लाह की बातों
[29:25]को जबानी तौर पर जाहि र पर तस्लीम करता है में तस्लीम
[29:31]नहीं करता यह मुनाफिक है य सूर मुनाफिक नाजिल हुई इस बात
[29:33]की दलील है कि रसूल अल्लाह के साथ रहने वाला हर शख्स
[29:36]सहादत के रास्ते पर नहीं है रसूल अल्लाह के साथ बैठने वाला
[29:42]हर शख्स आखरत में कामयाब नहीं है क्यों क्योंकि इनके दिलों में
[29:46]इस तहर को कबूल करने की जरफ यत नहीं थी मात क्या
[29:50]करती है आखिरत की याद क्या करती है आखरत की याद इंसान
[29:56]को अंदर से तैयार करती है मैं और आप अगर मा के
[29:58]ऊपर यकीन रखेंगे मरने के बाद उठना और उठने के बाद जजा
[30:03]और सजा का काइल होना हमारे और आपके अंदर ये यकीन पैदा
[30:07]होगा तो फिर हम रसूल की बात भी सुनेंगे फिर हम उसके
[30:09]अकाम पर अमल भी करेंगे लेकिन हमारे अंदर अगर ये सिफत ना
[30:13]हो यानी हम अंदर से कबूल ना करें नतीजे में क्या होगा
[30:16]नबी की बात सुनके हम पर कोई असर नहीं होगा इसकी मिसाल
[30:19]मोहसिन करती साहब ने अपनी तफसीर में ऐसे दी कि जैसे खाली
[30:23]कुआ है आप खाली कुएं के अंदर बाल्टिया में बाल्टिया डालते चले
[30:26]जाए कुए को कोई फायदा पहुंचे कुए के अंदर पानी जोश खाना
[30:32]शुरू नहीं करेगा क्योंकि खाली है खुश्क है ऊपर से डाला हुआ
[30:35]पानी किसी काम में नहीं आएगा कुवा कौन कुए की तारीफ क्या
[30:39]है जो खुद जोश होता है जिसके अपने अंदर सलाहियत होती है
[30:41]वह पानी को उबाल है वह पानी को जाहिर करता है उससे
[30:45]लोग इस्तफा करते हैं माद की याद खुद जोश कुए की तरह
[30:50]है अंदर से इंसान तैयार होता है उसके बाद जब बाहर की
[30:55]तबलीग होती है उसका असर इंसान लेता है मात का पहला असर
[30:57]मात का हमारी जिंदगियों में पहला असर क्या है हम तरबियत के
[31:02]लिए तैयार हो जाते हैं हम तरबियत के लिए आमादा होते हैं
[31:04]हमारा दिल तरबियत के लिए नर्म होता है हम हमारा दिल अंबिया
[31:10]की [संगीत] [संगीत] तालीमाबाद मा के नुजूल के लिए एक काबिल जर्फ
[31:30]में तब्दील कर देती है यह पहली बुनियादी सिफत है उसके बाद
[31:36]माद की याद अगर हो तो क्या करती है मात की याद
[31:42]इंसान को उसकी इलाही और दीनी जिम्मेदारियों पर अमल करवाने के लिए
[31:46]जमानत का किरदार अदा करती है अगर माद ना हो वाक थोड़ी
[31:51]देर के लिए तसवर कीजिए माद ना हो मरना ना हो मरने
[31:55]के बाद उठना ना हो हिसाब किताब ना हो तो फिर कोई
[31:56]चोर चोरी से क्यों रुकेगा कोई धोखा देने वाला किसी को धोखा
[32:00]देने से क्यों बचेगा किसी का हक खा जाने वाला क्यों बचेगा
[32:06]ना महरम से इंसान क्यों निगाह बचाएगा जाहिरी लज्ज तों से इंसान
[32:12]क्यों अपनी आंखों को पोशीदा करेगा माद नहीं है कयामत नहीं है
[32:15]हिसाब किताब नहीं है कुछ नहीं है इसका मतलब है कि जाहिरी
[32:20]जिंदगी है बस लेकिन नहीं माद का जब नजरिया आता है खुदा
[32:22]वंद आलम ने जिसकी जानिब इशारा फरमाया तो फिर इंसान जिम्मेदारियों को
[32:27]अंजाम देता है माद ना तो इंसान सखत सर्दी के अंदर क्यों
[32:29]नमाज फजर के लिए उठे माद ना हो आखरत ना हो तो
[32:34]इंसान को क्या हुआ है कि वह सख्त गर्मियों में खुदा के
[32:38]हुकम की तामील के लिए रोज अंजाम दे माद ना हो तो
[32:42]इंसान क्यों खुश्क खाली पहाड़ों के दरमियान जाके हज अंजाम दे माद
[32:45]नहीं तो क्यों करे इंसान सारे काम माद ना हो तो इंसान
[32:49]क्यों अपने पैसे में दूसरे को शरीक करे यह माद है जो
[32:53]इंसान से तमाम काम करवा रही है आखरत है जिसकी याद इंसान
[32:58]से लाही जिम्मेदारियों को अंजाम दिलवा रही है इसकी जानिब सूर दहर
[33:01]की आयत नंबर 10 में इशारा हुआ कि जहां अले बैत सलाम
[33:05]ने आप सब जानते हैं कि वह नजर रखी तीन दिन की
[33:08]नजर हुई कि जिसमें जनाब हसनन की शिफा याबी के लिए नजर
[33:09]की गई शिफा मिली उसके बाद रोजा रखा पहले दिन यतीम आया
[33:15]असर दूसरे दिन असीर आया मिस्कीन आया अपना सारा कुछ उठा के
[33:19]दे दिया क्या इशाद फरमाया ला हमने तुम्ह ताम किया अल्लाह की
[33:27]खातिर किया या अगर खुदा ना होता तो फ बत खुद रोजे
[33:28]के बावजूद भूख क्यों बर्दाश्त करते क्यों अपने सामने की रोटी उठाकर
[33:34]यतीम को दे देते मा लेला हमने अल्लाह की खातिर किया आगे
[33:43]इशाद फरमाया इन हम खौफ रखते हैं कौन कह रहा बत इनायम
[33:47]बीरा हम डरते हैं उस रोज से कि जो आखरत का रोज
[33:50]है हम उसकी बुराई से उसके शर से डरते हैं यानी अगर
[33:55]हम मिस्कीन जब तुम दरवाजे पर आए और तुमने आने के बाद
[34:00]कहा कि मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है और मुझे खाने
[34:02]के लिए कुछ चाहिए हम अगर खुदा का खौफ ना रखते होते
[34:08]तो ें कुछ ना देते खुदा के खौफ ने हमें पाबंद किया
[34:09]कि हमने अपने खाने का सामने चीज अपने मुंह का नेवाला तुम्हारे
[34:16]सामने रख दिया खुदा के खौफ की वजह से बस ये खुदा
[34:20]का खौफ माद क्या करता है माद इंसान की खुदा वंद आलम
[34:22]की जानिब से अता करता जिम्मेदारियों पर अमल करवाने की जमानत फराम
[34:27]करता है मात की याद है आखरत की याद इंसान को इस
[34:31]बात पर अमल करवा देती है कि तुम भूखे रह जाओ अपने
[34:32]भाई के लिए सार कर जाओ यह मात की याद माद ना
[34:36]हो तो इंसान शायद किसी भी इलाही जिम्मेदारी पर अमल ना करे
[34:40]शायद चंद लोग हो मौला अली जैसे कि जिन्होने फरमाया कि खुदाया
[34:42]ना जहन्नुम की खौफ से ना जन्नत की लालच में इनमें से
[34:49]किसी चीज की खातिर तेरे सामने सजदा नहीं करता किसलिए सजदा करता
[34:53]हूं तुझको मैंने इबादत के लायक पाया है तो सजदा कर रहा
[34:59]हूं इमाम अली जैसे कितने इस दुनिया में एक भी नहीं लिजा
[35:03]यह माद हैय आखिरत है कि जिसकी याद अगर होगी तो इंसान
[35:06]अपनी इलाही जिम्मेदारियों पर अमल करेगा मा इलाही जिम्मेदारियों प अमल करने
[35:14]का अमल करने की जमानत फराम करती है तीसरा जो इंसानी जिंदगी
[35:16]पर असर पड़ेगा माद का और माद की याद का वो क्या
[35:22]है इंसान को कुवत मिलेगी इंसान को हिम्मत मिलेगी माद इंसान को
[35:25]हिम्मत देती है मसलन कुराने करीम की आयत सूर बकरा की आयत
[35:31]249 उन लोगों का जिक्र है कि जिनके सामने जब लश्कर आया
[35:33]जालूद का जनाब तालू के साथ थ लोग और जालूद का लश्कर
[35:38]आया तो उन्होने क्या कहा इनकी तादाद यकीनन कम थी इन्होंने क्या
[35:41]कहाना उन लोगों ने कहा किन लोगों ने य मुलाला जिनको यह
[35:48]गुमान था यकीन था कि वह खुदा से मुलाकात करने वाले यानी
[35:52]मात यानी कयामत का जिन्हो यकीन था उन लोगों ने क्या कहा
[35:59]कमन कली गत कसीरा कितनी बाज दफा कई मर्तबा ऐसा हुआ है
[36:06]कि कलील कौम कसीर कौम पर गलबा पा चुकी है क्योंकि खुदा
[36:08]से मुलाकात पर इनका गुमान है इनको मालूम है कि इन् खुदा
[36:12]से मिलना है यानी मरना है अब जब मरना है इनको पता
[36:15]है कि मौत आनी है चाहे इस मैदान जंग में मरे या
[36:19]ना मरे घर में चले जाए वहां भी मौत आनी है मौत
[36:21]आनी है खुदा के पास जाना है खुदा की बारगाह में जाना
[36:23]है अब जब जाना है तो शहामत से लड़ेंगे शुजात से लड़ेंगे
[36:27]अब परवाह नहीं करेंगे कि सामने एक है या हजार अब डट
[36:32]के लड़ेंगे जब मौत का यकीन था तो क्या हुआ खुदा ने
[36:35]कहा र साबिर तुम्हारे 20 सब्र करने वाले कितनों पर गलबा पा
[36:41]गए 200 के ऊपर यह किस चीज ने काम करवाया माद के
[36:45]यकीन यानी कयामत का यकीन इंसान को हिम्मत अता करता है मात
[36:50]का यकीन इंसान को कुवत अता करता है अभी हिजबुल्ला के नौजवानों
[36:52]के पास कौन सी टेक्नोलॉजी है किस टेक्नोलॉजी के ज जरि से
[36:59]इसराइल जैसी बजहर अजीम ताकत का मुकाबला कर रही है ला क्या
[37:01]टेक्नोलॉजी है उनके पास बहुत ज्यादा उनके पास टेक्नोलॉजी है वो रॉकेट
[37:05]है जो उन कंधों पर या गाड़ियों में उठा के चलते हैं
[37:08]तिशा या दूसरे रॉकेट है बस इसके अलावा क्या है उनके पास
[37:13]ना हेलीकॉप्टर है ना टैंक है ना जहाज है कुछ भी नहीं
[37:19]है मगर किस चीज ने उनको डटने पे मजबूर किया है कौन
[37:21]सी चीज है जिसकी वजह से उन्होंने हिम्मत अता की कौन सी
[37:25]चीज है जिसकी वजह से उन्होंने शुजात दिखाई उस शुजात के नज
[37:29]में 33 दिन के अंदर इसराइल जैसी ताकत को घुटने टेकने पर
[37:31]मजबूर किया ये नौजवान जो हिजबुल्लाह के नौजवान है जब इनसे पूछा
[37:37]गया तुम्हारी कुवत क्या है तुम्हारी ताकत क्या है तुम्हारा असला क्या
[37:40]है इन्होने क्या जवाब दिया कहा हमारी कुवत जियारत आशूरा है हमारा
[37:43]असला वो है जिसको इमाम अली ने दुआए कुमेल में इरशाद फरमाया
[37:49]क्या फरमाया है परवरदिगार उस पर रहम फरमा लायम दुआ उस पर
[37:52]रहम फरमा कि जिसके पास सिवाय दुआ के कुछ नहीं है लाल
[37:59]बुका जिसका वाहिद सिला तेरी बारगाह में गिरिया है यह गिरिया क्या
[38:03]है कयामत का खौफ यानी खुदा बंदा तूने हमें जिस मकसद के
[38:09]लिए खल्क किया है ऐसा ना हो कि कयामत में हम जब
[38:10]तेरे सामने आए तो हमने उस मकसद को अंजाम ना दे सके
[38:14]हो हमें इस चीज से निजा फमा नौजवान यह वो लोग जो
[38:18]अमल के मैदान में है घरों में बैठे हुए नौजवान नहीं है
[38:20]जिन्होने 33 दिन की जंग जीती पूछा लोगों ने क्या है तुम्हारे
[38:27]पास कलाका हमारा सिला बुका है हम रात की तारीख में खुदा
[38:30]से कहते हैं खुदाया तूने हमारे कंधों पर जिम्मेदारी डाल दी दुनिया
[38:36]देख रही है इस वक्त इस्लाम की जानिब मुतजेंस एक जिस्म वाहिद
[38:40]है जिसको तेरी राह में खर्च कर सकते हैं इस जिस्म वाहिद
[38:45]के साथ आते हैं जो असला हाथों में उठा के ला सकते
[38:46]हैं लाते हैं इसमें बरकत तू दे दे खुदाया हम से तो
[38:51]कयामत के दिन इस जिम्मेदारी के बारे में पूछेगा लिहाजा हम मैदान
[38:53]में आ गए हम इसराइल के खौफ से डर के नहीं भागे
[38:56]क्या किया मात की याद ने कयामत की याद ने क्या किया
[39:01]हिम्मत अता की जब ये हिम्मत अता की अब ये मात की
[39:05]याद है कयामत की याद है जो मैदान में खड़ा रखने पे
[39:06]साबित कदमी अदा करती है खुदा उसके नतीजे में इज्जत अता करता
[39:11]है मात की याद क्या करती है इंसान को कुवत अता करती
[39:18]है हिम्मत अता करती है चौथी चीज मात क्या करती है जब
[39:19]इंसान आखरत पर कयामत पर यकीन करता है तो क्या होता है
[39:24]हक को पहचानने के बाद उस पर साबित कदमी दिखाता है इसकी
[39:29]मिसाल हजरत मूसा के जमाने के वो जादूगर है वो जादूगर के
[39:31]जब हजरत मूसा ने आके ऐलान किया नबूवत का इजहार किया फिरौन
[39:36]के दरबार में फिरौन ने क्या कहा कहा कि तमाम जादूगरों को
[39:41]जमा कर लो और मूसा का मुकाबला करेंगे अब जब जमाम जादूगर
[39:43]जमा कर लिए गए और उसके बाद वो वाकया पेश आया के
[39:46]उन्होंने अपनी अपनी रस्सियां फेंकी वो सांप में तब्दील हुई हजरत मूसा
[39:49]ने इने इला से अपना आसा फेंका और वो अदह में तब्दील
[39:54]हुआ उनकी बनाई हुई तमाम सांपों को खा गया जब उन्हें इस
[39:59]बात का यकीन हो गया कि मूसा सच्चे हैं नबी है तो
[40:00]उन्होंने क्या किया ये वही जादूगर थे कि जब मैदान में आए
[40:05]थे तो इन्होने फिरौन से पूछा था कि फिरौन अगर हम गालिब
[40:08]आ गए तो हमें क्या इनाम देगा फिरौन ने कहा था तुम्हें
[40:10]कुरबत नसीब होगी मेरी तुम्हें मेरी नजदीकी नसीब होगी तुम मेरे मसाब
[40:17]खास बनोगे अब जब जनाबे मूसा का मोजा देखा और उसके बाद
[40:19]इस यकीन पर आ गए कि नहीं यह हक है क्या हुआ
[40:22]इन्होंने कहा हम ईमान लेकर आ रहे हैं कौन लोग जो अभी
[40:26]मूसा जो अभी फ की नजदीकी के थे फिरन की नजदीकी चाहते
[40:31]थे अब उन्होने जनाब मूसा पर ईमान ले आए हजरत मूसा का
[40:33]मोज देख के फिरन ने क्या कहा तुमने मेरी इजाजत के बगैर
[40:38]ईमान इख्तियार किया है मैं क्या करूंगा तुम्हारे हाथ और पांव को
[40:40]कटवा दूंगा यानी तुम्ह टुकड़े टुकड़े कर दूंगा यहां पर इन जादूगरों
[40:45]ने जो जादूगर नहीं रहे अब बा ईमान हो गए इन्होने क्या
[40:47]कहा फजी फैसला कर फ फैसला कर जो तुझे करना है अजीब
[40:59]चंद लम पहले फिरौन की हिमायत चाहते थे चंद लम पहले फिरौन
[41:03]की नजदीकी चाहते थे एक मूसा के मोज ने इनके दिल में
[41:09]ईमान बरपा किया इस ईमान के नतीजे में इनको खुदा पर यकीन
[41:15]आया खुदा और आखिरत पर यकीन आया इस आखरत की याद ने
[41:16]इनको कुवत अता की साबित कदमी अता की इन्होंने फिरन से कहा
[41:20]कि तू हमें कह रहा है कि टुकड़े टुकड़े कर दूंगा तोत
[41:24]कर दे जो तुझे करना है कर दे आगे जुमला है दुनिया
[41:28]तू फकत इसी दुनिया के लिए फैसला कर सकता है तो जो
[41:33]फैसला करेगा फकत इस दुनिया तक महदूद है तोत आखरत में तो
[41:38]कुछ नहीं कर सकता आखरत हमारी किसके हाथ में मूसा के रब
[41:43]के हाथ में तू जो फैसला करना चाहे कर वो लोग जो
[41:46]अभी कुर्बे फिरौन चाहते थे आखरत की याद ने इतना तब्दील कर
[41:50]दिया कि फिरन कह रहा है कि टुकड़े टुकड़े कर दूंगा कह
[41:54]कर दे परवा नहीं है क्यों क्योंकि तेरा फैसला फकत इस दुनिया
[41:56]तक रहेगा आखरत तो खुदा की है आखरत में तो तेरा कुछ
[42:02]नहीं चलता आखरत तो मूसा मूसा के खुदा के हाथ में हम
[42:06]आखिरत की जानिब मुंत किल हो रहे हैं हम खुदा की जानिब
[42:08]जा रहे हैं तेरी जानिब से की जाने वाली जहमत बिलार नतीजा
[42:13]दिखाएंगी हमें तू हमें जहमत में डालेगा खुदा इसका बदला देगा खुदा
[42:16]इसकी जजा देगा बस आखरत की याद क्या करती है इंसान को
[42:22]कुवत अता करती मात क्या करती है माद इंसान को हिम्मत अता
[42:25]करती है साबित कदमी अता कर क्यों क्योंकि इंसान के इस बात
[42:29]पर यकीन आ जाता है कि इस दुनिया की महदूद जिंदगी तक
[42:31]महदूद नहीं है इंसान यह दुनिया की महदूद जिंदगी बहरहाल चाहे इंसान
[42:37]मरे यानी शहादत के जरिए इस दुनिया से जाए या ना जाए
[42:42]अपने घर में भी रहेगा इंसान को मौत आएगी लि जब मौत
[42:43]आनी है इसके बाद इस दुनिया से इंसान ने जाना है तो
[42:46]क्यों ना वो काम करे जिसको खुदा वंदे आलम ने इरशाद फरमाया
[42:50]या इसी तरह एक और आयत सूर मुत फीन की आयत नंबर
[42:54]29 से 34 में इसमें भी उन लोगों का जिक्र है कि
[42:55]जिनको को आखरत की याद ने कुवत अता की हिम्मत अता की
[42:59]साबित कदमी अता की क्या है आयत र कान ममन वो लोग
[43:07]कि जो जुर्म करते हैं यानी मुजरिम है यानी कुफर करते हैं
[43:13]वह मोमिनो पर हसते हैं होता है या नहीं होता मोमिन पर
[43:16]हसते लोग नौजवानों पर हसते हैं नौजवान में दाढ़ी रख ली बूढ़े
[43:22]हो गए कोई नौजवान बच्ची पर्दा करती है लोग हसते हैं तुम्हें
[43:26]किसने कहा किने हर वक्त दुपट्टा लपेटे फिरो हंसते हैं मजाक उड़ाते
[43:30]हैं यह लोग मजाक उड़ाते हैं लेकिन इनके मुकाबले में इस मजाक
[43:35]के मुकाबले में कौन सी चीज है जो कुवत अता करती है
[43:38]आखरत कि इंसान यह सोचता है नौजवान य सोचता है कि यह
[43:43]मेरा मजाक उड़ा रहा है लेकिन मुझको यह हुकम खुदा वंदे आलम
[43:46]ने दिया एक नौजवान सोचता है मुझे दाढ़ी रखने का हुकम खुदा
[43:48]ने दिया मुझे तकलीद का हुकम खुदा ने दिया नौजवान बच्ची सोचती
[43:52]है मुझे पर्दे का हुकम खुदा ने दिया इस मजाक उड़ाने वाले
[43:56]के मजाक उड़ाने से मेरा को फर्क नहीं पड़ेगा अगर मैं इसके
[43:58]कहने पर पर्दा छोड़ दूंगी कल कयामत में खुदा मुझसे पूछेगा ज
[44:03]ताने बर्दाश्त करता है इंसान किस वजह से आखिरत की याद की
[44:06]वजह से आखिरत पर यकीन की वजह से फिर खदाव आलम ने
[44:10]इसी सर में आगे इशाद फरमाया कि जो मोमिन का मजाक उड़ाते
[44:15]हैं य मोमिन सब्र करेंगे तो नतीजा क्या होगा फ आमन मन
[44:18]कु एक दिन वो आएगा कि जब यह ईमान वाले इन काफिरों
[44:23]के ऊपर हंस रहे होंगे इन मजाक उड़ाने वालो के ऊपर ये
[44:27]लोग हंस रहे होंगे कि तुम कया दुनिया में हम पे हंसते
[44:29]थे देखो आज खुदा वंदे आलम ने हमारी इन जहमान का नतीजा
[44:35]क्या दिया मसलन एक पर्दा करने वाली बच्ची कि जिसने पर्दा इख्तियार
[44:39]किया खुदा वंदे आलम अगर उसको कल कयामत में बीबी फातिमा जहरा
[44:44]के साथ मशहूर कर दे तो उसका क्या बिगड़ा कितनी अजीम सहादत
[44:50]है जो उसको हासिल हुई इस दुनिया में मजाक उड़ाने वालों के
[44:53]मजाक से बचने की खातिर अगर ये पर्दा छोड़ दे तो इसका
[44:59]कितना बड़ा नुकसान है ल आखिरत पर ईमान आखिरत पर भरोसा आखिरत
[45:06]पर यकीन इंसान को साबित कदमी अदा करता है इंसान ना तोहम
[45:08]तों से डरता है फिर ना इंसान मजाक उड़ाने से डरता है
[45:14]ना धमकियों से डरता है अजने गिरामी यह कुरान की वो चंद
[45:16]आयत थी जिनको मैंने आपके सामने बयान किया तकरीबन चार नुका थे
[45:20]जो बयान करने की कोशिश की कि अगर माद की याद इंसान
[45:24]के दिल में आ जाए तो क्या होता है इंसान तरबियत के
[45:25]लिए आमादा होता है इंसान अंबिया की तालीमाबाद भी उसे कोई फायदा
[45:44]नहीं पहुंचा सकती जैसे मैंने मिसाल के तौर पर पेश किया आप
[45:46]सर मुनाफिकून किन लोगों के लिए जो रसूल के साथ बैठते हैं
[45:51]अगर इंसान अंदर से तैयार हो तो फिर उसको रसूल को देखने
[45:56]की भी जरूरत नहीं है अवेसे करने की मिसाल मौजूद है अभ
[45:57]सकनी ने रसूल अल्लाह को देखा नहीं है उसकी रसूल अल्लाह की
[46:02]जियारत नहीं की लेकिन दूर से रहने के बावजूद चूंकि अंदर से
[46:07]खुद जोश है उनका मामला आखिरत पर यकीन है अवेसे करनी उस
[46:10]मकाम पर पहुंचे कि जब मदीना आए रसूलल्लाह से मिले बगैर चले
[46:13]गए तो रसूल अल्लाह जब मदीना में आए तो उन्होंने आने के
[46:15]बाद क्या कहा यह कैसी खुशबू है जो आ रही है करन
[46:19]की खुशबू आ रही है यानी अभी सकनी रसूल अल्लाह की जियारत
[46:24]के बगैर उस मकाम पर पहुंचे क्यों क्योंकि अंदर से ईमान के
[46:27]लिए तैयार थे अंदर से ईमान जोश खा रहा था उस जोश
[46:32]की खुशबू है जो रसूल अल्ला सूखते हैं अभ सक नहीं हु
[46:36]बस ये ईमान क्या माद पर ईमान हमारे लिए क्या करेगा हमें
[46:38]तरबियत के लिए आमादा करेगा मात पर ईमान क्या करेगा हमें साबित
[46:44]कदमी अता करेगा मा पर ईमान क्या करेगा हमें तोहम तों के
[46:47]मुकाबले में खड़े रहने की कुवत अता करेगा हमें हिम्मत अता करेगा
[46:52]यह माद और उसके इंसानी जिंदगी पर पड़ने वाले असरात के बारे
[46:55]में मुख्तसर से गुफ्तगू थी जो मैंने आपके सामने पेश की है
[47:00]ये तमाम गुफ्तगू कुरानी आयात के जरिए कोशिश की आपके सामने बयान
[47:02]करूं बस माद वो चीज है कि जिसको खुदा वंदे आलम ने
[47:07]हमारे उसूल दन में लाजमी जुज करार दिया और कहा कि इस
[47:12]पर यकीन रखना हमारे और आपके ईमान का लाजमी जुज है माद
[47:15]यानी हम और आप एक दिन इस दुनिया से जाएंगे खुदा वंदे
[47:18]आलम की बारगाह में और खुदा वंदे आलम हमसे हिसाब किताब लेगा
[47:24]किस चीज के बारे में अमा कुतु ल जो कुछ तुम करते
[47:28]थे उसके बारे में खुदा हिसाब किताब करेगा जो कुछ छुपाते थे
[47:33]जो कुछ आश का करते थे जो तुम्हारे नफ्स में था चाहे
[47:35]उसको अमल में लेकर आए या ना लेकर आए खुदा वंदे आलम
[47:39]उसके बारे में सवाल करेगा अगर हमारे दिल में यकीन पुख्ता हो
[47:41]गया तो यकीन कीजिए ना हमसे किसी पर जुल्म होगा ना हम
[47:46]किसी पर ज्यादती करेंगे ना अपने किसी नेक काम को करने में
[47:50]कभी मायूस होंगे क्यों क्योंकि जुल्म करते वक्त इंसान के जहन में
[47:53]ख्याल आएगा कि मेरा हाथ अगर उठ गया तो खुदा वंदे आलम
[47:56]इस पूछने वाले हाथ के बारे में पूछेगा इसी तरह मायूस नहीं
[47:58]होंगे कि अगर कोई समझ रहा है हमारी जहद को तो कोई
[48:02]बात नहीं नहीं समझ रहा तब भी कोई मसला नहीं क्योंकि खुदा
[48:04]वंदे आलम हमको इसके बदले में बेहतरीन जजा अता करने वाला है
[48:09]खुदा वंदे आलम हमें और आपको उन लोगों में से करार दे
[48:14]कि जिनको खुदा ने कहा कि हमने उनके ऊपर खालिस तोहफा खालिस
[48:16]कर्म किया कि हमने उन्हें आखिरत की याद अता की यानी खुदा
[48:23]हमें हजरत इब्राहीम हजरत इक हजरत याकूब और अपने औलिया की तरह
[48:25]आखिरत की याद में रहने की तौफीक इनायत फरमाए खुदा वंदे आलम
[48:29]अपनी आखरी हुज्जत के जहूर में ताजल फरमाए दुनिया में होने वाली
[48:32]तब्दीलियां में और जो हमारी जिम्मेदारी बनती है उस जिम्मेदारी को अदा
[48:39]करने की तौफीक अता फरमाए खुदा वंद आलम बहर के मजलूम की
[48:43]मदद फरमाए यमन ल लीबिया मिस्र टिस जहां-जहां भी यह तहरीक बपाए
[48:50]खुदा यहां मौजूद इन तहरी कों को चलाने वालों की हिफाजत फरमाए
[48:53]तमाम मोमिनो मुसलमानों के इत्तेहाद को महफूज फरमाए खुदा आलम अपनी आखरी
[48:58]उत के जहूर में फरमाए ताजल फरमाए और हमें उनके असब में
[49:02]शामिल फ मोहम्मद मोहम्मद [संगीत] सला [संगीत] अल्ला हस सलवा [संगीत] वा
[49:39]पहा स फी कुले स लिया [संगीत] हसन [संगीत] अर [संगीत] तम
[50:22][संगीत] लो h
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