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Istaqbal e Mah e Ramzan | H.I. Shahid Raza Kashifi
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Record date: 19 Mar 2023
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
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Transcript
[0:12]बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह या यह लगी नाम अनु [संगीत] मुबारक का
[1:30]रमजान इस महीने की खुशबू बखूबी पहुंच रही है चंदन बाकी र
[1:49]गए हैं जब के रज्जब का महीना जैसे ही शुरू हुआ नहीं
[1:58]माहे मुबारक का रमजान की खुशबू पहुंचाना शुरू हो जाति है माहे
[2:15]मुबारक करता है की जिसकी निस्बत मुझे और आपको मिलने का शौक
[2:32]हो और मुलाकात करने का शौक हो शेयर के अंदर अपने अजीज
[2:40]की निस्बत या अपने दोस्तों को निस्बत अगर अंदाज़ हो जाए और
[2:51]पहले से ही इन्फॉर्म कर दिया पहुंचने वाले हैं चाहे उसका टाइम
[3:01]या उसका वक्त कितना ही जो है तुलसी क्यों ना हो लेकिन
[3:07]मुझे और आपको शिद्दत से जो है मिलने के हवाले से शौक
[3:14]पर शौक बढ़ता राहत है और जैसे ही वो दोस्त वो रफीक
[3:25]वो अजीज हमारी जब उनसे मुलाकात होती है तो मुलाकात करने वाला
[3:38]उसे अजीज से वही जानता है की उसकी शिद्दत शौक और किस
[3:43]बुलंदी व है वह ऐसा साथ दूसरे अल्फाज में वही मिलने वाला
[3:50]ही समझ सकता है और जानता है और अगर उससे दरियात भी
[3:56]किया जाए की जब यह बतलाइए क्या आपकी फीलींगस कैसी है आपके
[4:05]ऐसा साथ कैसे हैं उसका बयान मुमकिन नहीं बस जहां पर जो
[4:21]है बयान का निस्बत उसे मोहब्बत के निस्बत उसे आसन अल्फाज में
[4:33]कहते हैं इंतहाय इश्क यह हमारी दुनिया के अंदर गाना खुदा अपने
[4:48]रब की निस्बत अपने महबूब की निस्बत मुलाकात की निस्बत करते हैं
[4:57]है तो उसका आलम अजीब है इस्तक वाले माहे मुबारक रमजान बेहतरीन
[5:10]निशानी और दलील है और अलामत हाले दिल इस मकाम पर कहते
[5:19]हैं बहुत गौर से सुनिएगा पूरे साल रहते हैं इस एक महीने
[5:37]में खुसी तोर पर उनका गुमशुदा उससे मुलाकात की निस्बत उन्हें आरजू
[5:50]होती है और उम्मीद होती है लेकिन मुझमें जैसा इंसान अपने राधेश्याम
[6:10]करता है अल्लाह का इस इरादे को किसी और मकाम पर उसे
[6:24]करता है और उसे और मकाम को कहा जाता है खुदा की
[6:28]मर्जी के मुकाबला पर और वह खुदा की मर्जी के मुकाबला पर
[6:36]दो चीज एक नफ्स से मारा [संगीत] इंसानी और दूसरा शैतान इंसान
[6:54]इस दुनिया में होश संभलता है तो उसकी आंखें मैं और आप
[7:23]खाना खाता हैं भूख लगती है तब जिस पर अगर जो है
[7:33]कपड़ा जो है डालना चाहे उसे वक्त के जब जो है जिस
[7:37]पर कपड़ा ना हो रहने के लिए सैया चाहिए सैया ना हो
[7:53]दीवार ते रहते यहां तक इस दुनिया में क्या पाया और क्या
[8:35]खोया तो वो जाहिर की बुनियाद के ऊपर मुझे और आपको जवाब
[8:43]देगा का जब क्या अज करें कहिए कुछ कब है हमारे जो
[8:56]है कुछ ऐसा और पी और रेलवे लेकिन हम बेचारे उनका खाना
[9:13]देखें हमारा खाना देखें उनका लिबास देखें हमारा लिबास देखें अब क्या
[9:20]अज करें आपसे कहा और मस्जिद कहिए आप कामयाब हैं या नाकाम
[9:26]मौलाना आसन अल्फाज में एक ही नष्ट जो अल्लाह को छोड़ देता
[10:07]है उसका मैं यार मुझे और आपको याद है जैसे हम अर्श
[10:20]करेंगे बरेला जिसे तुम मिल गया उसके पास अगर कुछ भी ना
[10:39]हो सब कुछ उसके पास है और बरेला जिसके पास तू नहीं
[10:47]उसके पास अगर सब कुछ भी हो तो कुछ नहीं दुनिया और
[10:55]दुनिया के जो अपराध हैं माहे मुबारक का रमजान बेचारों को बेचारा
[11:17]करने का महीना है जो बेचारे हैं और खुदा ने यह तमाम
[11:30]किया है और वह खुदा की जाट कैसी जाट है सब जानते
[11:36]हैं मां की निस्बत औलाद और उसकी ममता और मोहब्बत चाहे कितनी
[11:48]भी उम्र पर पहुंच जाए औलाद अगर मां जिंदा है और औलाद
[11:53]की तकलीफ का एहसास हो हरदम उसकी ख्वाहिश होती है उससे उसकी
[12:10]तकलीफ को दूर करने के लिए उसे जाट कहां से दी उसने
[12:27]अपनी रहमत का आश्चर्य आशिर इस मां के कप के गोसे में
[12:33]कार दिया है और मां तड़पती है हम सबके सब जानते हैं
[12:45]तो जब उसका बांदा का जोशी कार दिया है वो इतना तड़पती
[13:03]है तो बांदा अगर जो है तकलीफ में हो तो खाली क्यों
[13:05]कर जो है उसकी निस्बत एहसास नहीं करेगा चाहे आप जो है
[13:42]कितना ही जो है दम क्यों ना दे दे ये मुझे और
[13:52]आपको अगर तकलीफ होती है तो हम फौरन किस पुकारते हैं मां
[13:56]चाहे दुनिया में हो या ना हो इस बंदे को अगर तकलीफ
[14:06]होती है ना चाहे कितना ही गुनहगार क्यों ना हो वह अल्लाह
[14:11]जरूर रहेगा खुद रसूल से जो है कहलवाया कब पूछो इसे किसे
[14:29]क्या पूछें कब पूछो इसे तुम्हें किसने खाल किया है किसने पैदा
[14:39]किया है बटन की है लेकिन हाल करने वाली जाट और माबूद
[14:57]वही है और खुद खुदा ने कहा कुरान ए माजिद में का
[15:05]जब तक यह मुश्किल में गिरफ्तार नहीं होते हैं असीर नहीं होते
[15:10]हैं परेशान नहीं होते हैं तो मेरा तसव्वर नहीं होता इनके पास
[15:16]कुरान में है लेकिन जैसे ही जो है मुश्किल में गिरफ्तार होते
[15:25]नहीं और उन्हें अंदाज़ होता है ये मुश्किल दूर होने वाली नहीं
[15:29]है व्यवस्था होते हैं दिल ही दिल में यह दिल रास्ता है
[15:40]खुदा तक ले जान का लेकिन शर्ट है और वह शर्ट क्या
[15:50]है की इंसान अगर दिल से खुदा की तरफ जाए तो शर्ट
[15:56]का नाम है बगैर शफाईयत के अच्छा किसी को जरूर नहीं है
[16:09]बतलाने की मुझे और आपको खुद एहसास होता है की हम खालिस
[16:16]भी हैं की नहीं किसी से दरियाव करने की जरूर नहीं है
[16:20]बतलाइए हम मुख्ले से की नहीं यह खुद एक मारे फैट का
[16:29]मकाम है कौन बतलाता है मुझे और आपको की हम खाली से
[16:31]या खालिस नहीं है कहां से पता चला है दूर जान की
[16:38]जरूर नहीं है का खुद तुम्हारी फितरत जो है वो खुदा है
[16:45]तुम्हारी नेचर जो है वो खुदा है तुम्हारी तबीयत जो है वो
[16:50]खुदा है सिर्फ तवज्जो की जरूर है 11 महीने जैसा इंसान लेकिन
[17:20]यह महीना जैसे आता है अपनी जाट की तरफ यकीन करें 11
[17:53]महीने में अंदाज कुछ और है इस 1 महीने में अंदाज कुछ
[17:58]और है जब यहां तक बात ए गई [संगीत] मुलाकात तो वह
[18:30]कहते हैं की जो है मौलाना माहे रमजान कैसे हैं तो उन्होंने
[18:40]क्या कहा होगा इस एक महीने में हर जगह पर खुदा दिखाई
[18:46]देता है 11 महीने हमें एक ही चीज एहसास नहीं होती यदि
[18:56]एहसास होता है की कोई जाट है की जो हमें देख रही
[19:05]है हमें सुन रही है और हमारा एहसास कर रही है तो
[19:12]हमने फौरन पलट कर उनसे पूछा क्या कहेंगे उसे जाट के बड़े
[19:17]में आप तो खामोश रहे हमने कहा की जो है इस जाट
[19:26]को खुदा कहा जाता है अच्छा क्या होगा माहे रमजान में क्या
[19:49]होता है ताकि दूसरे मीना में एहसास हो सके मुझे और आपको
[19:52]माहे मुबारक रमजान में आम दोनों में जो हम कोई कम अंजाम
[20:00]देते हैं की जो अंजाम नहीं देना चाहिए इस एक महीने में
[20:02]हम जो है थोड़ा मोहताज हो जाते हैं मैं क्यों होता है
[20:10]आप का नहीं माहे मुबारक माहे मुबारक का रमजान है तो क्या
[20:17]हो गया नहीं खुदा का महीना है आलम यही कहता अलैकुम सलाम
[20:26]12 साल को अगर देखा जाए खुदा कहता है मैंने 12 की
[20:47]बजाएं 11 नहीं है तेरा नहीं लेकिन इन 12 मीना के दरमियां
[20:59]खुदा ने एक ही महीने का नाम लिया है शेरों रमजान 12
[21:11]मीना में सिर्फ एक महीना नाम लिया है खुद खुदा ने यह
[21:18]नाम लेना दलील है किस चीज की निशानी है किस चीज की
[21:23]12 मीना के दरमियां इस एक महीने की अजमत की निशानी है
[21:31]माहे मुबारक का रमजानमत को अगर हम देखें 12 मीना के दरमियां
[21:38]तो यह महीना एक अजीम है लेकिन कोड़े जो है रमजान की
[21:44]अजमत क्या है ताकि बच्चों को भी समझ में आए बड़ों को
[21:52]भी समझ में आए हम सब आपस में जो शेर करें जो
[22:08]सामने वाला जो जवाब है जो सामने आता है फौरन वह यही
[22:14]है जबकि ऐसा नहीं है माहे मुबारक है रमजान की अजमत कुरान
[22:23]है इस एक महीने में तो फिर मौलाना फिर रोजी कहां गए
[23:15]अगर है तो इसी महीने के अंदर यह एक मतलब इस्तक वाले
[23:24]माहे मुबारक का रमजान के हिसाब से लेकिन थोड़ा सा इस्तकबाल को
[23:29]एहसास भी करें इस्तकबाल यानी वेलकम करना अब सवाल यह है गौर
[23:36]से सुनिएगा ज्यादा सहमत नहीं दूंगा मैं आपको कौन किसका इस्तकबाल करता
[23:45]है अल्लाह बंदो का इस्तकबाल करता है या बंदे अल्लाह का इस्तकबाल
[23:50]करते हैं कमल यही है अगर हम जान लेने खुद सुनो होगा
[24:04]बार-बार आपने आजकल तो सोशल मीडिया का जो है जमाना है हर
[24:08]एक के पास ए रहा होगा ये बिल्कुल ईटादाई क्लाइमेट है रसूल
[24:18]इस्लाम के रामायण शुरू होने वाला था 4 से 5 दिन बाकी
[24:21]र गए थे इमाम से नकल करते हैं हमें यहां रोकना नहीं
[24:35]है सिर्फ इशारा करना मकसूदे इस्तकबाल कौन किसका जो इस्तकबाल करता है
[24:40]यह आठवी इमाम जो है अपने आबाजत से बेला खैर जो है
[24:48]रिवायत पहुंचती अमीरुल मोमिनीन और अमीर मन रसूल इस्लाम से नकल करते
[24:56]हैं और रसूल इस्लाम क्या फॉर्मेट हैं कर दिन बाकी र गए
[25:00]हैं मेंबर पर तशरीफ़ ले गए और असूल इस्लाम ने कहा और
[25:06]से सुनिएगा इस्तकबाल के माना और फिर उसका कौन किसका इस्तकबाल करता
[25:14]है क्या तुम पेस कम नहीं हो अल्लाह का महीना पेस कम
[25:58]है कम और बहुत होशियारी के साथ और तवज्जो के साथ यो
[26:32]के साथ ए रहा है इसलिए की खुदा ने जो अपने महीने
[26:42]को अपनी नुमाइंदगी दी है तीन साथियों के साथ जो मेरे बंदों
[26:49]का इस्तकबाल करो उनकी मेजबानी करो इसलिए वह तीन दोस्त कौन से
[27:05]12 तक दूसरे रहमत और दीप में जैन खुदा ने तीन साथियों
[27:20]के साथ इस रमजान के महीने को भेजो जाए तीन साथियों को
[27:44]भी लेकर जाता है यह काबिले तवज्जो है या यही रहते हैं
[28:10]तो याद रखिएगा लेकिन यह तीन साथी बेचारे हैं किसके हाथों बेचारगी
[28:27]है माहे रमजान आता है तीन साथियों के साथ वह तीन साथी
[28:41]कौन है बरकत मैकफिरत और रहमत खुदा की जैब से जो है
[28:46]इन तीनों से यह कहा गया की माहे मुबारक का रमजान को
[28:54]छोड़ देना खुदा हाफिज कर देना तुम्हें वहीं रहना है बरकत मैं
[29:02]और आप अपनी जिंदगी को अगर मुलाहिजा करें तो हमेशा जिसने माहे
[29:16]रमजान गुजर हो बालिक होने के बाद से लेकर अब तक बरकाती
[29:25]ही बरकतें उसके बाद तो फिर जो है शिकवा और शिकायत नहीं
[29:30]होना चाहिए ना क्यों मुझमें जैसा इंसान जो है शिकवा और शिकायतकर्ता
[29:36]और कंप्लेन करता है बरकत के साथ रहमत और वो ऐसा शामियाना
[29:50]है की जिसके सर पर ए जाए वह कभी भी जो है
[29:54]बेचैन नहीं होगा ऑपरेशन नहीं होगा लेकिन मुलाइजा करें जो औलाद पैसा
[30:06]पी सब कुछ है मगर और मगर मगफिरत किसके साथ होती है
[30:23]खूब सब जानते हैं [संगीत] की मेरा दमन तो पाक के पाक
[30:47]है यह चीज हमने आपके सामने राखी हमने अपने सामने राखी अब
[30:55]बोला है अल्लाह हमें अपनी मां से भी ज्यादा नहीं बल्कि कुछ
[31:04]कोई लब्ज और कोई जुमला जो है हम का नहीं सकते अदा
[31:09]नहीं कर सकते इस कादर उसे मोहब्बत है लेकिन जब यह महीना
[31:17]आता नहीं तो खुदा क्या कहता है अच्छा एक मिसल दीजिए मुझे
[31:24]और आपको अगर कोई दावत पर बुलाए तो मेजबान कौन है हम
[31:30]हैं या वो को मौलाना अंडरस्टूड है जो दावत देगा वही मेजबान
[31:37]है खूब जब हम उसके घर जाएंगे सलाम वालेकुम साथियों के साथ
[31:47]रावण किया है ना रसूल इस्लाम उसके बाद क्या कहते हैं यह
[32:01]महीना कैसा महीना है और उसकी अजमत का अंदाज़ ये उसे वक्त
[32:25]किया जा सकता है और वेलकम करें यह एक निशानी दूसरे निशानी
[32:36]यह के जैसे ही हम अंदर दाखिल हुए नहीं दस्तरखान आमदार आमादा
[32:44]और आमद तीसरी निशानी है कभी मौलाना बता भी दीजिए कितने विषय
[32:58]का नहीं बता सकते हैं तो बताओ यहां पर अनगिनत है अच्छा
[33:23]एक मतलबी है बहुत साड़ी बटन को छोड़ रखना है हम मौलाना
[33:50]यह भी कोई सवाल है जब दावत दिए तो सब मुख्तार हैं
[33:55]काबिल बजाहिर तो ऐसा ही है लेकिन लीला बताइए एक सवाल है
[34:04]खाना कौन खाता है बड़ी आसानी के साथ और वह भी हर
[34:11]चीज को यहां काबिल और जो सेहतमंद होगा तब आना होगा वही
[34:20]तनावुल करने का हक रखना है क्यों इसलिए की जो बीमा होगा
[34:30]तारों ताजा खाने भी डॉक्टर माना करते हैं उसे है ना ऐसा
[34:41]खाने लगाएं गए हैं वह तो सारे ताज हो और सेहतमंद ऐसे
[34:55]खाने की जिसको खाकर बीमा नहीं हो सकता है और किस कहा
[35:41]जाता है जब बीमा होता है ना फिजिकल तोर पर जिस्मानी तोर
[35:47]पर डॉक्टर से माना करते हैं उसे क्या कहते हैं मशवरा क्या
[35:52]कहते हैं डॉक्टर अगर मैरिज अगर उससे का दे कहा डॉक्टर मैं
[35:54]खाऊंगा नहीं तो मा जाऊंगा कभी आप खाई मगर कौन सा खाना
[35:59]कहा कौन सा खाना कप है जी खाना खाइएगा जिस का बीमा
[36:08]इंसान उसके लिए परहेज क्या है ताज खाने भी इजाजत नहीं मिलती
[36:14]उसको लेकिन रू जब इंसान की बीमा हो तो उसके लिए खाना
[36:24]कौन सा तजवीज खुदा बंदे आलम करता है कपिल दस्तरखान पर मैंने
[36:30]खुद इनवाइट किया है लेकिन तुम्हें कहां से शुरू करना है तुम्हें
[36:49]लज्जत महसूस होगी अब तक का भाई नमाज पढ़ने हैं मगर मजा
[37:05]चाहते हैं जैसे ही वैसे ही वापस आते हैं लीलावती आपस में
[37:13]गुफ्तगू हो रही है जैसे गए थे वैसे ही वापस पलटे हैं
[37:23]डॉक्टर के पास अगर मैं जाऊं या आप जाइए और वैसे ही
[37:30]वापस पलट कर ए जैन तो लीला बताइए आप तो मस्तसना है
[37:34]आप वैसे वापस नहीं पलटेंगे मुझे कहा जाएगा बहुत साड़ी मीनिंग्स की
[38:15]लेकिन हमेशा हमेशा याद रखना के लिए एक मीनिंग यह है की
[38:20]माही मुबारक का रमजान को कहां से लिया गया है क्यों आए
[38:24]रमजान को रमजान कहा जाता है गर्मियों के बाद आमतौर पर बारिश
[38:29]होती है गर्मी जब टूट कर होती है तो बारिशें भी टूट
[38:37]कर बरसाती हैं क्यों वह बारिश है उसे गर्मी को ले जाति
[38:47]है रमजान की एक माना यह है शिद्दत से गर्मी और बहाली
[38:54]और उसके बाद सुकून कैसे कब बारिश कब बारिश को क्या कहा
[38:59]जाता है रमजान इसे एक महीने में सुकून है फिर गर्मी शुरू
[39:28]हो जाति है सावाल के महीने से लेकिन यह गर्मी बाहर की
[39:34]नहीं है यह अंदर की है उसे गर्मी का एहसास कैसे करें
[39:44]बेचैनी और अगर सुकून चाहिए माहे मुबारक नमाज का एक नाम और
[39:53]है माहे इस्लाम और पहलू वी पहलू एक और नाम है माहित
[40:03]तोर इस्लाम को इस्लाम क्यों कहते हैं सलाम टीका मजहबुद्दीन और मसलक
[40:12]माहे मुबारक का रमजान को माहे इस्लाम कहा जाता है माहे मुबारक
[40:38]रमजान में तो शैतान आजाद होता है की नहीं इंसान गुमराही का
[40:57]शिकार होता है लेकिन माहे मुबारक का रमजान ईद दिखाई देते हैं
[41:01]तो फिर यह शैतान को जो झगड़ना वाली रिवायत है वह कहां
[41:06]गई जबकि यह रिवायत याद रखें ऑथेंटिक है किस तरह से इसको
[41:17]हाल करें अगर वह जकड़ लिया गया है तो फिर इंसान को
[41:21]गुना नहीं करना चाहिए ना किसी भी इंसान को मैं और आप
[41:29]गुना करते हुए नहीं पाएंगे अगर वह जकड़ लिया गया है तो
[41:32]राज क्या है इसका दरमियां होता है है वह इसी मकाम पर
[41:54]होता है इस्तेमाल बेल अगर बांध हुआ है मौलाना आप इसके नजदीक
[42:01]मत जाएगा क्या होगा माना किया जब ने हमें लेकिन यह जब
[42:12]नहीं मैन गए वहां गए नहीं और वो मार का हो गया
[42:20]हमने तो कहा था आपसे कहा वो तो बांध हुआ है कहा
[42:25]आपने उसे टच क्यों किया अब नजदीक क्यों गए आपको लेकिन रियलिटी
[42:42]की बुनियाद के ऊपर हकीकत की बुनियाद के ऊपर है सही कम
[42:49]मौलाना कहना क्या छह रहे हैं क्या तुम शैतान के हाथों जो
[43:06]है बेचारे हो ना तो सही मैं उसे बंदे देता हूं बंदिया
[43:10]का खबरदार उससे नजदीक मत होना एक तो जवाब यह दिया हमने
[43:23]आपको की शैतान जकड़ लिया गया इंसान गुना क्यों करता है दूसरा
[43:26]जो जवाब है आजकल तो शायद बच्चों के पास वो चीज नहीं
[43:30]है मगर ये जो क्या उसको दिखाए जा सकता है बच्चों को
[43:35]भी पहले जो है हमारी आगे इस वक्त तकरीबन जो हमसे बड़े
[43:44]हैं वह बेहतर जानते होंगे हम भी खिलौने आते थे चाबी भरने
[43:50]वाले अब मेरी जरूर नहीं मुझे और आपको शैतान के बसपा सौर
[44:35]इशारों से जो है बचाना होगा खुदा ने अपना कम किया खुदा
[44:42]कहता है भूखे और प्यास रहो भारत हुआ होता है ना तो
[44:59]तुम्हें जो क्या है तो यानी जो है तुम्हारे वजूद में आई
[45:07]है बहुत ही उम्दा अपने दिल को मुर्दा कार मत दो उसे
[45:48]मारो मत कहे मौला किस तरह से हम मारेंगे अपने कप को
[45:52]किस तरह से मुर्दा करेंगे किसी भी फसल का तो उसे फिर
[46:14]जो है पानी देता है मुर्दा हो जाएगा लेकिन [संगीत] लेकिन शहरी
[46:57]में भी खूब बट्टा है नहीं इफ्तारी में कम मौलाना क्यों रॉक
[47:08]रहे हैं खूब है दूसरा खूब है और आप जो है इस
[47:27]महीने का इस्तकबाल करें [संगीत] मौलाना साहब की अगर तकरीर लंबी हो
[48:07]जाए तो हम गाना शुरू हो जाएगी ठीक है आप में से
[48:12]कोई ऊपर ए जो उनको भी नींद आएगी हम क्यों अपने आप
[48:15]को मुस्तफा ना करें मैं खुदा चाहता हूं तुम मुझमें जैसा हो
[48:38]कैसे मैं सता ही नहीं क्योंकि खुदा हूं तू जो है मखलूक
[48:54]है तुझे नींद आई है और नींद में तू कफील हो जाता
[49:00]है चाहता है जो क्या है एक मतलब को बयान किया मशहूर
[49:22]आए थे सूरा रहमान की हर दिन उसकी नई शान और नई
[49:29]आज है यानी क्या मैं और आप अगर सो जैन तो कोई
[49:38]कम कर सकते हैं कम मौलाना जो सोया हुआ होगा वह खोया
[49:45]हुआ होगा हिस्सा है लता को जूहू से ना तुम उसे नींद
[50:01]नहीं आई उसे उम्र नहीं आई तू नींद कम कर नतीजा ज्यादा
[50:28]जो है तेरी जाट को भी और तेरे जितने भी हैं उसको
[50:35]मिलेगा है तो हमेशा एक्टिव रहेगा यह माहे मुबारक रमजान को जो
[50:42]है अंदर से पाक करता है और दूसरा जो फायदा इसका जो
[50:47]बहुत है वह क्या है और आप जब यहां अपने शहर में
[50:53]देखते हैं खासतौर पर ट्रैफिक बस आखरी दो-तीन क्लाइमेट बातें बहुत ज्यादा
[51:02]है अब हमें अंदाज़ हो रहा है की टाइम बहुत ज्यादा चला
[51:04]गया है तो पुलिस वाले को देखते हैं तो गाड़ी जरा सा
[51:11]संभल के चलते हैं माहे मुबारक है रमजान हमें और आपको एक
[51:23]पुलिस में नता करता है अंदर का फिर किसी को देखने के
[51:31]हवाले से की फलन साहब हमें देख रहे हैं या नहीं देख
[51:36]रहे हैं ताकि हम मोहताज हो जैन तन्हाई में भी इंसान अगर
[51:40]होगा तो कोई मिस्टेक नहीं करेगा और कोई गलती नहीं करेगा आखिरी
[51:53]बात जबकि आखिरी नहीं है बहुत साड़ी हैं बातें यह जो खास
[51:59]तोर पर बैंक है बैंक दिसंबर में बैंड होता है ना बैंक
[52:06]कम क्लोजिंग का महीना कहलाता है क्लोजिंग क्यों इसलिए की जो है
[52:18]11 महीने दिसंबर से हटकर इस बैंक ने जितना भी बिजनेस किया
[52:23]है वह कैलकुलेट करता है हिसाब किताब करता है क्या खोया और
[52:29]क्या पाया माहे मुबारक का रमजान में आलिया खुदा जो है पूरे
[52:33]पिछले 11 महीने का हिसाब और किताब लेते हैं 11 महीने में
[52:39]क्या खोया और क्या पयसम करते हैं हम नुकसान नहीं करेंगे फायदा
[52:56]ही फायदा होगा आई खुदा और आलम से दुआ करते हैं बरेला
[53:03]हमारी इस खलील इबादत को काबुल फार्मा माहे मुबारक रमजान से बरेली
[53:11]खूब अच्छे अंदाज में मुस्तफिज होने की तौफीक आता फार्मा बैरल हमारे
[53:17]गुनाहों की मोखाफिरत फार्मा अमल सलेहा बजा लाने की तौफीक आता फार्मा
[53:20]जो परेशान हाल है उनकी परेशानियां को दूर फार्मा जो मकरोज है
[53:26]उन्हें कर्ज सबक दोषी आता फार्मा जहज्ज-ए-आज़म के उन्हें आवाज से मुशायरफ
[53:30]फार्मा इमाम ए जमाना के जरूर में ताजिम आता फार्मा हमें उनकी
[53:37]आवाज में शामिल फार्मा रब बना तबल में ना इना का दशमूल
[53:39]अलीम सलावत भेजें मोहम्मद
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