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Falsafa Mah-e-Ramdan | H.I. Baqar Mehedvi
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Record date: 27 March 2022 - فلسفہ ماہ رمضان
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल झाला व समय अलौली मनुष्य भोपाल धुंध थे जैस्मिन लॉर्ड हनुमान
[0:26]व्यक्ति है अलहम दो लिललाह नदी लॉग इन लोगों को मैं जगाता
[0:31]हूं और लुभावना व नो योर सी नामों अकुंठ लुट बुलेट ज्योति
[0:39]थपा मुत्तहिद हल्दी लुट-लुट हल्दी हिसाब से तुमने बोला ना [संगीत] लव
[1:01]यू कि तुम अस्सलाम वालेकुम अस्सलाम व साहित्य शोले के रहीम अल्पसंख्यक
[1:22]एवं श्री विजय महकमों को महका मदद से यह वाला आर्म होल
[1:40]है लहसुन धमाकों का अभियुक्त रिलैक्स फील धीमी हेमलता बंद झाले अहमदाबाद
[1:47]नार्मल अल्लाह हम महाभारत खांडव वन अधिग्रहण कानून है लखन ईमेल विस्मिल्लाह
[2:00]है लखन नुस्खे नींद गद्दी ना मंजू कुशवाह ने मुख्य हूं क्या
[2:12]लाइक थिस ओ मा शांतानंद मौसम के आपकी या हम अ कल
[2:28]क्या फ्री लम्हा चल रहे हो है और आपकी तबीयत तो मोहम्मद
[2:37]मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वाले सुनाओ कि मैं साबुन के आखिरी जुमे के
[2:45]पुतले में बयान फरमाते हैं कि के बाद अल्लाह अल्लाह के वंदों
[2:51]अलैकुम चाहा लिख कि अल्लाह का महीना तुम्हारी तरफ आ रहा कौन
[2:57]सा महीना पर्व विघ्न बरकतों का महीना महीना तुम्हारी तरफ से मैं
[3:10]जबर्दस्ती हमारे पास आए तो हमें भी उसके इस्तकबाल के लिए जाना
[3:19]चाहिए है इधर दूसरी बात नहीं मिलता है कि माहे रमजान के
[3:21]हवाले से के बाद आगमन लाखों मुझ शहरों में कि एक महीना
[3:27]तुम्हारे सड़क पर शायद वालों ने है कि माहे रमजान के साथ
[3:32]होगा हमारे शाहरुख खान की मैं सहमत हों क्रिमिनल बरकतों का महीना
[3:34]है व फुटकर मांग है लेकिन मेडिकल डॉक्टर्स का कहना है है
[3:40]कि जब कड़वी होती है और मैं थोड़ा पास कराची इस घड़ी
[3:46]में कि इंसान को चाहिए अपना खाना पीना बरकरार है कि पैसा
[3:51]लोकेशन धोकर प्याज के रस इसके चेतन को नुकसान पहुंचाए मैं यूं
[3:57]कह रहा है वह मरीज सूखे तब है लेकिन हमारे गिडवानी का
[4:00]भी है हैं जो हमारे बारे में बेहतर जानता है हमारे इलाज
[4:04]को जानता हमारी रूहानी इलाज प्रधानता है इस विषय पर मैं कि
[4:09]अफेयर्स जीके किसी बाप के बेटे की शादी आज रात है तू
[4:15]बाप पूर्व इन महीनों में कोशिशों में सहमत हूं मैं लगा तैयारी
[4:20]में लगा होता है या ज्यादा है वह बैठेगी कितनी मेहनत करेगा
[4:22]पूरे दिन कुछ पीना खाया कि नहीं पिएगा पहनते करता रहेगा तैयारियां
[4:28]कर देगा और जब यह माना है कि उनके पास ही रहेगा
[4:30]खुद कुछ नहीं खाएगा मेहमानों को खिलाएगा है अरे कोई कहती है
[4:37]कि आज दोनों दौड़ने वाले खाने अब तो कि नहीं आ ही
[4:39]खाने से मैं कुछ सोचता हूं कि ऐसा हो कि दूसरों के
[4:45]प्रति रायगढ़ कर मेहमानों को खिला कर उसे मुझे मिले तो उसे
[4:47]खुशी नसीब होगी कि उसकी भूख नहीं लगी प्यास नहीं लगी में
[4:53]कोई भूखा प्यासा छोड़ देंगे उस पर भूख लगी है प्यास लगी
[4:57]लेकिन क्यों उसको बड़ी खुशी नसीब हो रही उस बड़ी खुशी की
[5:02]खातिर वह भूख और प्यास को बर्दाश्त कर रहा है सहित प्रमुख
[5:06]स्थल को बिल्कुल इसी तरह बताना रास्ता अगर किसी देश के साथ
[5:09]कोई किसी उसके रिश्तेदार के दलालों चाहिए है उसको कितना दुख होगा
[5:15]किसी उसके बाद उनका इंतकाल भेजो कि मैं यहां पर तबादले कितना
[5:18]दूर इंसान हो कि कुछ तो क्या आलम ने चाहे वो कितनी
[5:21]गर्मियों के दिन में उस धूप उस युग के आलम में उस
[5:26]परेशानी और बम का आलम है उसको खाना पेश करने पानी दुश्मनों
[5:30]से दिल नहीं जाएगा खाने पानी का हां क्या सबूत नहीं भूख
[5:36]लगी उसको प्यास तो लगी प्यास लगी है उसको अभी देखो भूख
[5:40]और प्यास की तरह प्यार सिस्टम होता बच्चे नहीं कि अटेंशन ही
[5:45]नहीं है उसकी तरफ अ कि वह कम सदर उसकी पूरी व्यवस्था
[5:51]की तरफ मतलब नहीं मुझे भूख की तरह इस प्याज की तरफ
[5:53]त्यों-त्यों क्या वजह है कि उस है उसको प्याज पहले किए फिर
[5:59]भी वह बच्चे नहीं है उसको कट ब्लाउस की तरफ इस क्या
[6:02]बचा है को बिल्कुल उसी तरह वही इंसान जो जहन्नम से डरता
[6:07]अचानक यहां से डरता है कि उसकी पूरी तवज्जो जान उनकी आंख
[6:15]की तरफ से प्रॉब्लम मिलन न इबादत पड़ेगा ऐ कुछ लोग सब
[6:18]रखेगा अल्लाह की इबादत कोटेदार बचा लेगा हूं क्यों क्या उसको दो
[6:25]प्यास नहीं लगती है रमजान के महीने में को भूख-प्यास महसूस नहीं
[6:27]होने लग रही है वह अभ्यास महसूस हो रही है है लेकिन
[6:31]क्यों हो इस ग्रुप पर प्याज को बर्दाश्त करना है ऐसी क्या
[6:38]वजह है है कि यही वजह कि वह पौधा से डर रहा
[6:43]हूं को जहन्नम की आग से डर रहा है को जहन्नम के
[6:45]फॉर्म की वजह से हाथ से जहन्नम के डर की वजह से
[6:50]वह विशेष भूख और प्यास को बर्दाश्त करने के लिए तैयार हुकम
[6:52]बन्ना सा इस बात का गाना अल्लाह की इबादत करता है लोग
[7:00]रखना किसलिए जनम के डर से कि इंसान की रूस के जिस्म
[7:08]पर काले वाली है है कि रूस मुझे कल हाई कर रही
[7:12]है कि तुम्हें किस जहन्नम की आग अगर तुमने भूखा-प्यासा बर्दाश्त नहीं
[7:16]किया तो तुम्हें इस जन्नत यहां पर सहना पड़े कि जब यह
[7:19]खबर यह ऊपर प्रयास बरदास कर ले कर दो दिन भूख और
[7:23]प्यास को जहन्नम की आग ज्यादा उसके भारी नजर आ रही है
[7:28]और ज्यादा उसे दुखी होगा उससे तकलीफ बर्दाश्त करनी पड़ेगी किसी लगा
[7:35]है कि वह इंसान जो जन्नत के शौक में जन्नत की नेमतों
[7:38]से अहमद होने के लिए ने कहा मजा लेता रोजा रखना है
[7:43]ताकि खुदावंद अनुसार की वर्ड नेम जो खुदा बने मकानों से वादा
[7:48]दे रखा है वह चैनेल नसीब है कि बांटा लाइक जमुना क्या
[7:55]सोमवल्ली लगाना उचित शीघ्र और मैं उसका जवाब दूंगा नहीं ना कितनी
[8:01]चीज आप पर इतना ही हुआ था फिरोज शाह तुगलक रहे हो
[8:07]मेरे लिए यही काफी होता लेकिन उससे बाहर आकर सद्भावना और उसके
[8:10]बदले हमें इन कामों जब भी दे रहा है है उसी जन्नत
[8:15]के शौक में इंसाने मोहन एक कोशिश करता है कि बताया कि
[8:20]ताज करें यह भारत करें लॉजिक बजाना इस तरह की तक यह
[8:25]जन्नत और जहन्नम है कि जन्नत का शॉप जन्नत जन्नत का सौंफ
[8:30]है जो इंसान को रोजा रखने पर अल्लाह के दो हाथ पर
[8:32]मजबूर कर रहा है कि इंसान कि उस अपनी जरूरत को छोड़ा
[8:39]है खाने और पीने की तरह छोड़ है क्योंकि जब छोड़ना है
[8:41]बालों है सड़क के लिए अ है ताकि जहन्नम के अज़ाब से
[8:48]बच सकों जन्नत के सहमत हों से बहनों से फोन पर क्या
[8:52]बात पर यह इंसान के नाम है क्या इंसान के फायदे में
[8:56]हैं है कि हम अपने खाने और पीने को छोड़ दे डॉक्टर
[9:00]सके ताकि खाना-पीना तरफ़ पलटा रखना चाहिए चाहे रमजान हुए के रमजान
[9:02]आपने खाना पीना खाकर बैठे हैं नहीं रखेंगे तो आप जिसमें नुकसान
[9:10]हो तो है लेकिन क्या चुप दीन हमें कहना है कि के
[9:13]माहे रमजान माह में रोजा रखना है मैं क्यों माने दिन की
[9:18]बात हुई 9th दत्त उद्दीन हमारे ही नफा-नुकसान का बताना जो हमारे
[9:25]नशा नुकसान को कौन जानता है कौन बताएगा कि है कि हम
[9:31]अपने नफा-नुकसान तो जानते हैं कि किस काम में हमें फायदा मिलेगा
[9:35]किस काम में नुकसान में लेकर आ का नक्शा को जानने के
[9:38]लिए हमें इंसान को पहचानने की जरूरत है कि हम अपने आप
[9:40]पहचानते इंसान की अभी तक को जानते हैं इंसानियत यदि तो पहचानते
[9:47]हैं कि हम इंसान अपना को बेहतर जानता है यह इंसान बनाने
[9:53]वाला ज्यादा बेहतर जानता है हमारे पास कि इंसान अपने बारे में
[9:59]का जानता यह इंसान का हाजमा बेहतर जानते हो जाता है बता
[10:05]सकता है वह इस ने इंसान को बनाया है वह ज्यादा बेहतर
[10:06]हमारे नंबर नुकसान को जानता है कि हम कि वो डॉक्टर सुधीर
[10:12]है कि इस गर्मी के मौसम में तुम्हें पानी मिलाए नहीं किया
[10:17]हो तो मैं नुकसान होगा वह इंसान को से निशान किस जिस्म
[10:19]को देख रहा है इंसान कुछ जिस्म के अंदर तक महत्व ना
[10:23]रिकॉर्ड के अनुसार जगदीश स्वामी जी स्वामी हैं कि साल के अंत
[10:27]तक है क्या है कि हम इंसान कैसे ठीक है तो पहचानेंगे
[10:34]तो फिर उसके बाद उसकी रफ्तार का अंदाजा लगा सकेंगे कि वह
[10:38]जिसने इंसान को बनाया वहीं ही दरअसल हमारे ह नुकसान को जानता
[10:45]है तो हम नहीं जानते मैं बदला रहा है यह रास्ता है
[10:47]यह काम करोगे तुम है ही फायदा होगा माहे रमज़ान में रोज़े
[10:52]रखते तुम्हें ही फायदा होगा और ए गुड डॉक्टर से मना कर
[10:57]रहे इंसान को नहीं जानते इंसान को इंसानी जिस्म के अंदर तक
[11:00]महत्व हासिल कर रहे हैं या और मेडिकल की या बैटरी का
[11:04]लोकतंत्र की लड़ाई नहीं करना नहीं उनकी मेहनत हम की कोशिश जरूर
[11:10]की रहमत अपनी जगह पर बल्कि उन्होंने अपनी कोशिशों से अपनी सहमत
[11:14]हों से की मदद से पढ़ना किसी स्टेशन में खयाल रखना इंसानों
[11:18]का उनकी सहमति का बेहतर है कि उनकी इस व्यक्ति स्पेन करना
[11:26]है कि उनकी मेहनत अपनी जगह पर हमारा फर्ज शुक्रियादा करना कि
[11:31]सूरतेहाल लेकिन लेकिन कि मेडिकल ने मेडिकल डॉक्टर्स ने जो इंसान को
[11:36]पहचाना कौन सा कुछ इंसानी जिस्म की अब तक पहचान हैं आज
[11:41]के इंसान सिर्फ यह इंसानी जिस्म है है कि नहीं इंसान मत
[11:48]इस इंसानी जिस्म से हटकर कुछ और है इंसान कैसे नफरत यह
[11:52]क्या है वहीं बताएगा इसे इंसान का बनाया एक इंसान कर चुके
[11:57]हैं और इस निशान को बनाया है वही बता सकता है कि
[11:59]इंसान कैसा लगा करते हो है बल्कि यह दीन-ए-इस्लाम है जो मेडिकल
[12:07]के हाथ को पकड़कर इस मेडिकल को भी उजड़ वाला था इस
[12:09]मेडिकल को पी बुलंद तो बाला करवा रहा है वह कैसे ऐसे
[12:15]इंसान की असल हकीकत की पहचान करवा इंसान की दिक्कत है क्या
[12:21]चीज मेडिकल स्टूडेंट्स आफ थिस एक जानवर के तक है कि इंसानी
[12:24]जिस्म लगता है उसमें जानवर क्या तक नीचे गिर चुका इस मेडिकल
[12:30]कहां को पकड़कर उसको इंसानियत के बुलंद मुक़ाम आप और उस करवाना
[12:33]इंसान से इंसानी जिस्म यहां तक महत्व नहीं है कि इंसान की
[12:39]हकीकत इससे बात है इंसान है कि से जिस्मानी बदन रखने के
[12:45]साथ-साथ मटेरियल जिस्म रखने के साथ ए ग्रेड मानती माध्य से बालों
[12:49]ताल्लुक रखता है बल्कि बोलूंगी इंसान कैसा रहा है इधर हमने इस
[12:52]रूप की परवाह चला रहा है उसको की तबीयत करना है उस
[12:56]लुट मांस मना सिर्फ ले जाना है उस लुक्स को बटन दबाना
[13:00]करना यह इंसान कैसे आती है ए वर्मा एवं झाल हम यही
[13:07]समाचार है के प्रधान उपकार हमसे यही करना चाह रहा है कि
[13:10]हम इस इंसानियत के एवं आपको तय कर कि इंसान की पहचान
[13:17]है इंसानियत के एवं आपको सेट कर सके इंसान है कोणों से
[13:22]पा सके यह वह चीज जो प्रभाव दमदार हमें इस माहे रमजान
[13:23]में करवाना चाहता हूं कि वह कैसे इंसानियत क्यों रोज कैसे होगा
[13:30]जितना हम ज्यादा खुदावंद मुलाकात से करीब होते जाएंगे अ है उतना
[13:34]ही ज्यादा व्हाट्सएप इंसान तरह होता जाए तो तो क्या तुम बराबर-बराबर
[13:42]है है कि हम कोई भी तो इंसान को कैसे कि दोनों
[13:44]तरफ बिलकुल बराबर है है क्या कैसे के प्रचार प्रसार गुणांक सके
[13:49]ट्रंप और लेबल मौसम दोनों बराबर-बराबर दोनों निशान कभी नहीं करेंगे अब
[13:55]में काम कर रहे भरना है है बॉडी का आयोजन स्थानीय कहा
[14:02]कि तो इंसान बराबर-बराबर नहीं कि कोई भी तो एग्जाम बराबर है
[14:07]वुज़ू इंसानियत के बुलंद सामान पर उठकर चाय व मामा कुत्ते कर्ज
[14:15]है उतना ही यादव इंसानियत के बुलंद मुक़ाम आकर पांय है और
[14:19]इंसानियत का पुष्प करवाया जा रहा है इस मैडम साहब कि इंसानियत
[14:25]10 किया जा रहा है वह कैसे हो है कि वो शख्स
[14:30]जो जितना खुदावंद मुद्दा से परिचय होता जाएगा वह ज्यादा इतना ही
[14:34]ज्यादा इंसानियत के बलमा पर पास होता जाएगा यह वह मौका है
[14:39]यह वह वक्त है जब इंसान अपनी गर्मियों कर सकते हैं अपने
[14:44]आप को बुलंद तो भला कर सकता है इंसानों के व मकराना
[14:45]कर पाए तो सकते हैं वह मौका दिया जा रहा है कि
[14:49]तो पिक मैं यहां से जोड़ेंगे इस माहे माहे रमज़ान है कि
[14:53]हम अपने आप कट कर सके अपने अभी रुक इधर कर सकें
[14:58]अपना आप भला कर सके अब हां यार एक ही नसीब नहीं
[15:02]होता यह माहे रमजान काफी यहां पर आपको मिल रहा है कि
[15:04]टीम की वक्त पूरे साल में ही तो फिर भी नहीं मिलती
[15:09]फिर साथ हमने कमाल अंजाम देकर उसने कहा माह के मध्य में
[15:14]सफल होते हैं लेकिन माहे रमजान में कहां स्पेशलिटी है कि हां
[15:17]सुन लिया था कि माहे रमजान में हमें इंसानियत के डुब ज्यादा
[15:24]जल्दी आसानी से रुख करने का मौका मिला है हम इंसान सुविधा
[15:27]इसे पादप ना सके कि इंसान माहे रमजान में पौधारोपण कार्यक्रम मेहमान
[15:37]खजूर और कि इस माह रमजान में खुदा की दावत में हाजिर
[15:42]होना है और इंसान टांग दुनियावी दावा तो हाजिर होने में बहुत
[15:47]बड़ा फर्क पड़ता है ऊपर कि है कि इंसान जब दुनिया की
[15:51]दावत वहां से होता है कि तुम मेजबान शुरू से मेहमान की
[15:55]बजाय बहुत है सिर्फ एक ही कल डॉक्टर खाते मददगार होता है
[15:58]कि शुरू में आते हैं उसकी वजह करना शुरू कर देता है
[16:01]बीच में उसकी पत्ते काटकर डाल है है उसको भूख और प्यास
[16:06]नहीं देता लेकिन जब हम पैदा मुकेश रावत हाजिर हो रहे तो
[16:10]हमें तो हम किया जा रहा है कि भूख और प्यास कपल
[16:11]डांस करो कि हमें तो घाघरा घाघरा यह कौन सी दवा दूं
[16:17]यह कैसी बात हुई कुल देवता जी कैसी कही लाइक इट अ
[16:22]के प्रधान उधारी पर जाइए और अलार्म बंद हो कि अ सिलाई
[16:26]में दुनियां बजे भारत झाला ढाणी पर गिरा हुआ इंसान को रूहानी
[16:32]करके तेरा मंत्र कि इंसान को खुदाई से बात पता चल रहा
[16:41]है ई-मेल अकाउंट बदले जवाब देना तो पूरे साल में माहे रमजान
[16:44]में यह पापा है यह तो ऑफिस हमें नसीब हो रही है
[16:49]हम खुद अनुसार से खुदावंद मजाक इत्तेफाक को अपनाने की कोशिश करें
[16:53]आप मुझे एक बात बताओ ना बताओ किस से बात है कि
[16:56]बढ़िया है कि स्वाद अजमत की शपथ जूस की सिफत खराब है
[17:01]कि से बात है वह सिर्फ तो बताओ मुकेश के पास है
[17:05]खुदा ने अपनी सिफारिश में से हमें आता करना है कि यह
[17:09]मौका यह मेहमान गया यह वह दावत हमें रूहानी जहां में दी
[17:15]जा रही है है और इस माह रमजान में हम जितना ज्यादा
[17:17]खुदा मानवता से खड़ी हो जाए तो है उतना ही ज्यादा आ
[17:22]कि हम उस इंसानियत और उसे सकते हैं प्रधानमंत्री मुकेश और लता
[17:28]हरी हो सकते माहे रमज़ान के रोज़े के मौके पर शहर के
[17:30]मौके पर आपदा व धमाका से दुआ करते हैं कि खुदाई में
[17:33]तेरह रोजा रखना हूं अल्लाह हम अदरक-लहसुन तो बुलाया मैं तेरी नज़र
[17:39]रख रहा हूं के कुलपति लल्ला की नियत करते बताएं मैं तुझसे
[17:43]कभी बोलना चाहता हूं कि जब मैंने साड़ी के मौके पर लोगों
[17:47]से की नीयत के मौके पर मैंने सेट किया है दिया और
[17:48]अपने ललाट की खुदाई मैं तुझसे कभी होना चाहता हूं इफ्तार के
[17:53]मौके पर ड्राई स्टार क्योंकि पर मैंने हूं मैं काल की बारगाह
[17:55]में इसकी है वह बंदा अल्ला हू अल्ला कसम तो यह जो
[17:59]मैंने रोजा रखा विधायक तेरे नीरज अनुसार रखा था कि जब साड़ी
[18:03]के मौके पर तेरे लिए खुदा या फिर अवतार के मौके पर
[18:05]खुदाई तेरी लिए रोजाना ख्याति पूरे लम्हा जिस मुल्क में रोजे में
[18:11]हूं हर लम्हा मैं रोजा रख रहा हूं बनाया तेरे लिए रोता
[18:14]रहा हूं वो किसी और के लिए है है कि पूरे वक्त
[18:19]हमलों से के वर्क बारगाहे इलाही माहिर होते पुनासर पड़ी होना चाहते
[18:23]थे वैसा नहीं कि सहनी के वक्त थोड़े अवतार के वह संभाल
[18:26]पहले से करीब होने की दुआ कर दे नहीं हर लम्हा राम
[18:30]माहे रमजान के हर लम्हे में चाहे वह दिन में ढाल सके
[18:35]बात हो चाहे वह राजा के वक्त हर लमहे में खुदा ने
[18:36]मुझसे करीब होने की दुआ कर देंगे मैं तुझ से कभी बोला
[18:40]जाता हूं खुदा यह तेरा शुक्र कि तूने मुझे 34 भी तेरी
[18:45]इबादत अंजाम ने से ढूंढ कर सकूं फिर से खड़ी हो सके
[18:48]है और फील्ड मकाम कि इंसान इतना बुलंद भला हो जाता है
[18:55]मैं इस लायक और पाता कि प्रधानमंत्री मुद्रा डायरेक्टली इंसान का मुख्य
[19:02]फरार है कि बहुत ही अधिक मकान है है कि हम स्थापित
[19:07]हो इस लायक प्रधान कार्यालय में दो ओ माय रमजान की अस्मत
[19:15]लुटी रखने मैंने जैम आइटम जान किस्मत पुरानी मस्जिद में पुराण के
[19:18]अनुसार इस माह में हो रहा है क़ुरआने मजीद की आयत हम
[19:23]आपके लिए आप मुद्दा करार देकर प्रति हजार अपराध उदार चेहरा यह
[19:28]जीना मनु कि हमारा काम खत्म कर दे रहा है इतनी अस्मत
[19:32]वधावन मत वाले इंसान मोहम्मद उनको डेरा इस्माइल खान कि कैमलिन को
[19:39]तेज वालेकुम अस्सलाम रोज सितंबर फर्स्ट के रखे गए कि इंसान है
[19:44]मोमेंट्स आफ बढ़ना इस लायक बनने के अनुसार तो मुलाकात हो कि
[19:49]थोड़ा सा कहना है कि के रोजा रखना 65 बहुत मुश्किल है
[19:57]लेकिन यह रोजा रखना आसान हो जाता है तब जब इंसान है
[19:58]मॉम मैंने इस मिठास को चकले के प्रधान मुमताज यह नित्य मुस्लिम
[20:03]अपना मुंह तक करार दे रहा है एक मीठी चीज हम इस
[20:08]तरफ बढ़ रहे कि खुर्रम अधिकार हमें पुकारे कि हम अपना मुद्दा
[20:14]करार देते हैं कितना बंद मकान है कितनी अजमत है जो इंसान
[20:20]है मम्मी को बताना चाहता करना है का योग बनता है के
[20:23]हमलों से इधर इस मास्क को बार है इस माहे रमज़ान की
[20:27]फज़ीलत को त्याग करके इस मकाम हो पा रहे हैं है अरे
[20:30]फिर माहे रमजान में रोजा रखना है कि लाल उम्र तक तप
[20:36]करने के लिए के मुताबिक बड़े चाव से क्या होगा अ और
[20:41]मटर भी परेशान होने से यही होगा चोपड़ा ने मस्जिद महेश शर्मा
[20:46]जा रहा हू जहा तेरी है इन अखाड़ों में कुमार एंड अल्लाह
[20:49]हम सबको पता के नजदीक सबसे ज्यादा फेयरनेस क्रीम चौराहे पर खड़ा
[20:56]मदर हस थे तो सब समुद्री पर इस गुफा कि जो कितना
[21:01]अथवा यह सिलाई को डांस करेगा उतना ही बारगाहे इलाही में कयामत
[21:08]पाएगा उतना ही ज्यादा करीब होगा और जो साथ खड़े होकर यकीन
[21:10]आवक नाक तरसना पड़ेगा वहां की तरफ आ जाएगा उसकी आंख गुना
[21:16]साधुजन होंगे उसके काम कुणाचा दुगना उनके उसकी ज़बान * साबूदाना होगी
[21:19]उसके वह अपने हाथ और पैर को सुना से बचाए रखेगा आ
[21:22]अब क्यों चुप के उसका जब बाय हितेश त्यागी माहे रमजान में
[21:28]खुदावंद मुताबिक इस वर्ष की हुई दावत उसमें लब्बैक कहा था की
[21:33]प्रॉब्लम को फिक्स मोड ऑन का परिणाम है रमजान में इंसान को
[21:40]देवता से करीब हो रहा था बताऊंगी लास्ट पार्ट होता है है
[21:43]लेकिन खुदा तेरी खुदाई से करीब होने के लिए हमेशा से यह
[21:51]नुकसान हमें एक दम कि दे या किसी नेमत की लालच दे
[21:56]नहीं में एक ऐसा मौक़ा भी लाता है है कि जब इंसान
[21:59]है मॉम में इन पदों ने बताया स्नान कर रहा हूं कि
[22:03]वह कैसे हो कि 21 जुलाई 2017 की रिप्लाई जो मिलाकर से
[22:07]जुड़ना मॉडल बना लेगी ये दलाल पंचलाल करने हुआ था से नष्ट
[22:15]करना वह कैसे हो का नाश करने का मतलब तो इस तरह
[22:20]खटाखट बच्चा अपना आपको मां की गोद में गिरा देता है ताकि
[22:25]मां उसे गड्ढे उसे गलत कहां पर डू है को बिल्कुल इसी
[22:29]तरह अ कि हम भारतीय विधवा कर दो की दुआ करने के
[22:34]प्रधान उपप्रधान अनुसार स्नेहा गौतम बुद्ध को प्रकार ढाल तिहाड़ अब यह
[22:37]तैयार अब कह निकट बुधवार को भोपाल में है है लेकिन जब
[22:43]और पुलिस अधिकारी हो जाते तो और तथा करीब होने के बाद
[22:47]अब यही यहां के वर्क जरूरत नहीं रहती या रुकावट और विकराल
[22:50]है उसके लिए इस्तेमाल किया जाता जून हो जब खुदा दाग-धब्बे दूर
[22:54]होते तो युद्ध पर के उदय को पकाते लेकिन जब हम खुदा
[22:57]से खड़ी हो जाते हैं है तो फिर सकती दबे-दबे करके थोडा
[23:04]पका लेते हैं खुद आवाज दीजिए 22 मिन जुमला पाया जाता है
[23:11]कि एक ही सांस में रख यार रिपेयर करके खुदा को पका
[23:14]को में लपेट रफते रफते रफते यहां तक कि तुम्हारी सांस जब
[23:20]तक है तब तक पुकारते रहो और फिर जब हमारे साथ टूट
[23:28]जाए तो फिर बारी आती मनाजात अ तो फिर बारी आती कि
[23:32]हम पदावधि मुद्दा से महात्मा बुद्ध से कई सुलाया कि हमने तुझे
[23:38]भगवान है कि अब तेरी बारी अब हम से गुस्सा होकर तुम
[23:40]हमसे जुड़ना चाहते हैं को मजबूत करने की बारी आ थोड़ी वह
[23:46]शाहबान जिसमें हमें उन आजाद करने का मौका दिया ज्यादा बेहतरीन माना
[23:49]जाता मन आतिशबाजी मना चर्चा की गई डा है कि जब हमने
[23:55]रफते रफते रफते कह दिया खुदा को पा लिया कि अ खुदा
[24:00]कर पुकारने की बारी अब खुदा की शुरू करने की बारी कि
[24:05]तुम राज्यसभा ने मताधिकार सेंस करते बताया था में अंधेरा था और
[24:11]नमन हो चाहिए तब अपना पांचवां बाइक है को पहुंचता मुफ्त साइकिल
[24:18]चलाओ बिजली बनाओ कई प्रमुख लोग वाहन चालक राम और बताइए अब
[24:24]तू शुरू करते रहे साथ है अब मैं तेरी गुफ़्तगू सुनना चाहता
[24:30]हूं मैं तुमसे गुस्सा होकर मैं तेरी गुफ़्तगू सुनकर बेहोश हो जाऊं
[24:33]मत हो जाओ तेरा आसरा कुसुम सकूं और त्यौहार पर अमल प्रश्नोत्तरी
[24:38]बातों को सुनें कर दो कि अ जॉब नम कहां से शुरू
[24:46]करता है इंसान कि कैसे न काम पर पहुंचता है के प्रधान
[24:50]अवतार सिंह वर्ष का था कि खुदा यह मैंने सुना कर दिया
[24:55]मुझसे गलती हो गई मुझसे खत्म हो गया कि अगर तुम मुझे
[25:01]मेरी खता पर गिफ्ट करें कि मेरी खता पकड़ करें कि तुमने
[25:06]क्यों फतेह किया तो यह पता है मैं भी तुझे पकड़ लूंगा
[25:07]तेरी गिरफ्तार ऊपर कि खुदा है तूने क्यों माफ किया अल्लाह ही
[25:15]एंड अकाश स्थानीय जोड़ मी के हाथों के वृक्ष ए खुदा कर
[25:18]तू मेरी क्रिप्स करें कि तूने क्यों पता किया तो मैं भी
[25:22]चोरी प्रेस करूं थोड़ा है तूने क्यों माफ किया हेलो हेलो फीड
[25:27]एंड हंसता नीरज फुल मूवी ने कहा तो क्या मेघवाल कि खुदा
[25:32]अगर तु मरी पकड़ करें मैं कैमरे बंद थे तूने क्यों हटा
[25:39]किया तूने क्यों मना किया उत्तर प्रदेश मैं भिक्षु सर्च करूंगा खुद
[25:41]आए तुम्हें माफ क्यों नहीं किया मैंने कौन से मिलना चाहते हैं
[25:48]कि इंसान है मम्मी ने प्रधान को मां पर शेयर करें पदार्पण
[25:52]ग्रेट करेंगे थोड़ा यह तूने क्यों अपना किया लिए कितना अहम कड़ी
[25:58]है बताओ दास कि कितना असीम मौका है है कि हम पदावनत
[26:04]SSC का उपयोग कर सकते है तो कृपया मुझसे पूछना हो रहा
[26:11]है वो मुझसे गलतियां हो रही है मुझसे खता आए हो रही
[26:13]है कि खुदा का बंदा मासूम नहीं है कि मैं अपना आपदा
[26:19]से बचाने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन उसे कट आए हो
[26:23]जा रही हो और सुना यार तूने क्यों माफ है कि वह
[26:26]बंद है मॉम एंड इसको मना थे शाहबाग है पढ़ने की ट्रोफी
[26:30]नहीं पता मन उदास हूं पुश कर रहा है अपने गुनाहों की
[26:35]माफी मृत्यु करवा रहा हूं कि खुदा या हमसे गुना हो सकता
[26:41]है मैं तुम्हें माफ कर दिया था आज तो हमारे गांव से
[26:44]धर दबोचा कर दिया कर लो कि विमान सामान है माह-ए-रमजान यह
[26:51]3 महीने जज साहिबान रमजान मोमेंट पीलीभीत के बने होते हैं कि
[26:55]इंसान एवं अंधविश्वास बेहतरीन उपाय स्पीड महीनों में सद्भावना से करीब होने
[27:00]का है कि खुदा से बना जांच करने का आ कि पुरातत्व
[27:03]करने का चाहे वह मनोज आतिशबाजियां सात बांध कि शायद हफ्ता हो
[27:09]माहे मुबारक हो रमजान में का बेहतरीन मौका था है कि हम
[27:14]अपने आप पदार्थ से कितना बड़ी पर इतना तरीफ करते थे है
[27:18]कि हम खुदा से पदक की नफरत न करने पर पौधा के
[27:22]माफ न करने पर खुद आपको आंखों से कर सके अब की
[27:27]प्रॉब्लम बाद हम सबको मुबारक महीनों में में मैं अपने से करीब
[27:34]होने की तौफीक नाश करना है इस प्रकार की वार्ता में कहा
[27:40]कि प्रदेश में धमाल हमारे * शिविरों का दौरा कर माफ फरमा
[27:42]रहे हैं कि हमारे पास जाएंगे उक्त माफ करना है कि हमें
[27:47]इस अजीब महीनों की बरकत और से सहमत हों से नफरतों से
[27:52]बहनों ने की मुसाफिरों ने तौफीक ने जमीन कि हम है जमाना
[27:57]चला दौसा आलम राज शरीर के सुमिता जी शर्मा को ए परम
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[28:05]व्रत का फल मिलना इन संभावना है झाल
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