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Falsafa-e-Eid Aur Is Ki Aqsam | H.I. Brother Zaigham Abbas
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Record date: 01 May 2022 - فلسفہ عید اور اس کی اقسام
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल के बावजूद दृढ निश्चय जय हो मैं इसमें इलावा हां यार
[0:21]कर दो कि अगर हम दोनों ने बाहरी शेयर वसल्लम वसल्लम आप
[0:30]हुआ था कि अ अंधाधुंध हैं उनमें से एक बीमार पिछले हफ्ते
[0:44]पहले है है कुंठित कि अली इब्ने अबी सौल एंड ग्रुप ने
[0:51]मोहब्बत को मोहब्बत करो हुआ था नंबर के अधिग्रहण की राधे राधे
[1:07]जी कि टमाटर तारीफ देता हुं वाहा द मुलाकात शरीर के लिए
[1:13]के विरुद्ध और सलाम कि मोहम्मद फहद मोहम्मद अली सलातो अस्सलाम की
[1:21]समाधि मुद्दे सा पर है कि हम ठेके उस खुदा की जिसने
[1:32]हमें और आपको कि क़ुरआने करीम ई विल टेल थे अमीरुल मोमिनीन
[1:38]के अधीन लड़की आई एम अलैहेमुस्सलाम की विलायत से मस्से किया है
[1:46]आप अहमदाबाद कि होटलों को स्वपन मजुमदार ने ए टीम आफ चेहरे
[1:58]के दाग पिंपल धुंध कि इस मिलाओगे रखना धुंध एक पाठ 32
[2:09]वचन अधीन ध मैं सूरत अल्लाह जाती थी पहले नासा लहरा दूं
[2:16]प्रभाव वाली माता दी [संगीत] मैं ऑफिस जाने के राम अवतार कि
[2:31]आपके सामने के जिस्मों का ऐलान हुआ था कि अगर चेंज कि
[2:37]जब हमने पी एडवांस से इस अफीम और दूर है है कि
[2:45]फल सफेद झूठ है और उसकी ऑप्शन है थे पनिशर पहले ही
[2:55]के जैन ने अगर फूल गर्भ की जाए वो तो है ही
[3:03]नहीं कोई नाश्ते में दरकार नहीं है है और फिर हमने भी
[3:10]जप शाम की बहस की जाए कि परिसर में बंद संयुक्त बनाया
[3:17]जाए तो फिर भर्ती थर्मस कम एक नर्स रखती है है कि
[3:22]बात करते हैं कि एक मैसेज ने में समाया स्थल अथवा मुमकिन
[3:30]नहीं है है लेकिन है इधर रहते हैं है कि जब प्यास
[3:39]लगी मोड को पूरा दरिया तो नहीं पी सकते हैं हैं लेकिन
[3:43]जितनी प्यास है उतना दरिया पी सकते हैं और सुनाइए जिसमें सर
[3:52]यस है उसे दबा से मानी और वफ़ा हिम को अपने नवीन
[3:59]जस्ट करने की कोशिश करते हैं है परवरदिगार ए आलम ने मैं
[4:05]इस लायक रैली में कि इशांत शर्मा या मैं सिर्फ मस्ती मजाक
[4:13]पहले तीन हनीफा ने ए सब्जेक्ट योनि फिक्षित प्रदान करता है थे
[4:25]वाकिंग व झाला ए लिप इन्हें हनी फ्रॉम कि तुम हर बात
[4:33]से Avatar अपना चेहरा है के सिरसागंज के लिए को सीधा रखना
[4:41]है की व्याख्याता लिबी ने हनीफा ने आप अपना चेहरा इतिहात के
[4:53]लिए सीधा यानी परवरदिगार ए आलम के अक्रामक की तरफ मुतवज्जे रहो
[5:00]और फिर अगला टुकड़ा अपने मित्र अल्लाहिल नदी के पास रन नासा
[5:12]नहीं हुआ था में तेजी से वह वितरित है कि पितृत्व अल्लाह
[5:16]गिव में मौजूद है कि पितृत्व है यो यो हनी में चित्र
[5:24]ना हल्दी मेरे पीछे वह तू है यानी को भेजो कि सिद्धार्थ
[5:34]जिस फितरत तुम्हें पैदा किया गया है अल्लाह की इतिहास के लिए
[5:40]तुम सीधे खड़े रहो है और अल्लाह की पैदा की हुई फितरत
[5:47]जिस पर उसने लोगों को कर दिया यह कौन सी दिक्कत है
[5:53]मैं तुझ को कर दो कि इस अजय को कि पुलिस वाले
[6:06]बाबू कि अल्लाहुम्मा सल्ले अला लुट नई दिल्ली मोहम्मद वाले महत्वपूर्ण रा
[6:19]दाणा सेओ रा दाणा सेओ रा दाणा कि चंदेरिया व्हात्सप्प पर आ
[6:24]रही है इसको निकाल देने पड़े मोहम्मद वाले दो कि आलू हमारे
[6:32]सिले आलम मोहम्मद जॉगिंग मोहम्मद के हवाले बंद सुविधा की मंशा यह
[6:42]है कि हम के अजान से नहीं बल्कि समाज सुनने हैं मेरे
[6:45]परवरदिगार ए आलम ने इंसान को जानवरों से मुमताज किया है यह
[6:57]कहकर केहू एलर्जी अंश या उम्र व जुगाड़ में लगे हम अश्लील
[7:03]मां वल्लभ रॉयल फील द कली माता अश्व करूं कि के खुदा
[7:11]हो तो वह है जिसने तुम्हें अनुषा किया और तुम्हारे लिए करार
[7:17]दिया क्या करार दिया समाज को करार दिया बसारत को करार दिया
[7:23]और अब मैदा को करार दिया था कि समाज का ताल्लुक इससे
[7:30]है सुनने से है बशारत का ताल्लुक इससे है देखने से है
[7:37]स्वाद का ताल्लुक इससे है टपक कर और तदबीर से है यानी
[7:45]फिकर करने से है जिसको हम चेक करना है हम शनासाई तरह
[7:50]कुंवर ताकि कुल कि इन रशिया से स्वाद का ताल्लुक है अगर
[7:56]स्वाद में तरह कुमार और तब तक तखतपुर और ताजा फूल न
[8:05]हो तो फिर वह फौज स्वाद नहीं रहेगा कल बन जाएंगे कि
[8:12]अगर समाज में पूज्यते समाप्त न हो तो फिर वह समाज समा
[8:21]नहीं रहेगी अजुन बन जाएगी कि जब बशारत द बशारत में असर
[8:29]खत्म हो जाए है और उसमें जो शुरुआत है जो बिशारत को
[8:32]कूवत बॉक्स रही है जब खत्म हो जाए तो फिर बशारत बशारत
[8:40]नहीं रहेगी लाइन बन जाएगी है तो जब बशारत एंड बन जाए
[8:50]जब समाधान बन जाए जब स्वाद फल बन जाए तो सूरज मुबारक
[8:57]है यार आफ आयत का निशान 102 90 कि केवल अक्षरा आने
[9:08]वाले जहन्नम आकर सीरम मिनल जिन उज्जवल इन है और हमने ज़राअत
[9:14]किया बहुत से लोगों को खोज को जहन्नम के लिए यह जो
[9:19]कौन है यह जिन भी हैं और इन सभी हैं को जहन्नम
[9:24]के लिए दराज किया क्यों इसलिए तत्व जो रहे मैंने अभी मुकदमा
[9:30]कायम किया है है इसलिए केला सुकुन लाइफ इन बिहार कि उनके
[9:37]कुल्लू में टपक फिर तदब्बुर नहीं कर रहे हैं वाला होम यौन
[9:44]उनकी आंखें हैं अभी सुरेश मूल की तस्वीर नंबर किया है इसमें
[9:49]क्या कहा था कि हमने क्या दिया है बशारत दी है लेकिन
[9:54]सूरए आराफ़ में कह रहा है कि इनकी आंखें हैं है उधर
[9:56]मुल्क में कहा था कि हमने समाधि है है और यहां आ
[10:01]रहा में कह रहा है कि इनके कान है है उधर मुल्क
[10:05]में तेजी से नंबर की याद में कहा था कि हमने स्वाद
[10:09]दिया है और यहां आशिकी 179 कह रहा है कि इनके तो
[10:15]फॉलो हैं कि वह बात कहां गया वह बाहर कहां गया वह
[10:16]समाज कहां गई कहा कि इसलिए इनकी समाज खत्म हो गई और
[10:23]आसान बन गई कि वह उस समय से सुन नहीं रहे थे
[10:28]है जो बशारत हमने दी उस बशारत से देख नहीं रहे थे
[10:34]जो स्वाद हमने दिया उस पर आवाज से यस कहूं ना भी
[10:40]हार नहीं कर रहे थे तो जिस वक्त से व्यस्त हूं न
[10:47]हो जिस बसर से जिस बसर से बशारत छीन ली जाए तो
[10:55]वखत एंड बन जाएगी जिस आजान से अगर समाज को निकाल लो
[10:58]तो फिर वह समाज की मंजिल से गिरकर फट आसान रह जाएगा
[11:04]जिससे आप कौन कहेंगे तो अब किसी को अगर कान आंख और
[11:11]कल के साथ देखना चाहो तो क़ुरान कहता है कि वो मलाई
[11:17]का आकलन हमाम बल हम अ दल कि के अब तो यह
[11:22]जानवर है बल्कि उससे भी बदतर है इसलिए कि इंसान को जो
[11:29]शह दी थी वह बहुत बुलंद थी वह समानार्थी तुमने सुना नहीं
[11:36]तो फ़क़त कान बज गए जो जानवर के पास हैं कि अ
[11:38]वाले जानवर की सुनता है आवाज इंसान लहसुन का जो आंख इंसान
[11:44]को दी थी वह बशारत थी लेकिन क्योंकि तुमने बशारत से असर
[11:52]नहीं किया तो अब जो बच गई वह आंख बज गई जानवर
[11:53]के बाद में कि खाना दोनों के सामने आता है मैं अपनी
[11:59]रेजा को जानवर भी देखता है इंसान भी देखता है और इसी
[12:06]आग से देखता है तो पास अगर वक्त खाना ही नजर आ
[12:15]रहा हो नजर खाने पर रुक जाए है और जानवर की तरह
[12:21]जहां से मिले जैसा मिले जिसका मिले खा जाओ कि अगर इंसान
[12:27]भी ऐसा ही खाने लगे तो परवरदिगार यही कहेगा कि इसकी आंख
[12:34]जानवर की सियाग है बल्कि उससे भी बदतर अ है क्योंकि इंसान
[12:38]को जो हमने दी वह बशारत दी कि खाना तो देख रहा
[12:42]है लेकिन वह यह भी देख रहा है कि मेरे लिए जायज
[12:46]है या नाजायज है कहां से आया है किसने भेजा है क्या
[12:54]मेरे लिए इस्तेमाल जायज है या नहीं अगर चेयरपर्सन व हलाल है
[12:59]लेकिन क्या मेरे लिए भी हाल-चाल है कि नहीं इतनी गहरी नजर
[13:02]जानवर की नहीं है इंसान की है लेकिन अगर इंसान की यह
[13:06]नजर खत्म हो जाए तो इलाही का कहना था यह बात समझ
[13:11]में आ रही है बिल्कुल उसी तरीके से समाप्त अगर इंसान हिदायत
[13:18]को सुनना छोड़ दे कि जब इंसान को हिदायत की आवाज ना
[13:28]आए तो फिर जानवर को भी कांस्य आवाजें सुनाई देती हैं इंसान
[13:31]को भी कांस्य पक्का अत आवाज सुनाई दे रही हैं हिदायत सुनाई
[13:39]नहीं दे रही तो बस अब अगर कान फट आवाज ही सुन
[13:43]रहे हैं तो इनके कान में और जानवर के कान में फर्क
[13:45]क्या है को चुना चेवर झंडे लहराने कर्बला के मैदान में यही
[13:50]कहा तुम्हें क्यों मेरी बात समझ में आया और सुनाई दे कि
[13:57]तुम्हारे शिकम हराम से भरे हुए हैं आ गया अगर शिकम हराम
[14:03]से भर जाएं तो फिर इमामे ज़माना की आवाज नहीं आती है
[14:06]को बहुत तवज्जो सारी आवाज उठाएंगी पंखा छोड़ कर रहा है उसकी
[14:13]आवाज भी आ जाएगी नहीं आएगी तो वक्त किमाम की आवाज नहीं
[14:21]आएगी क्यों इसलिए के पक्षपात हैवानी हुकूमत की तरफ व आमादा हो
[14:25]इंसानियत व को तो बहुत पीछे छोड़ दिया है कि वह कल
[14:31]के जो मुतहर्रिक था जो आयशा मुक्त हर एक तरफा जो तुम्हें
[14:37]तुम्हारे रूस की तरफ ले जा रहा था इसको बहुत कहते हैं
[14:38]दाल और स्वाद में पड़ता है का स्वाद वह कल जो मृतिहरं
[14:48]रखो जो जोश मारता हुआ कल हो वह अनेक अस्सलाम या वाला
[14:50]दी वह या कुरथा योनी वक़्त हम रातों वर्क टू आदित्य हां
[15:00]बीवी ने क्या कहा कल भी हुआ थी वह जिसको देखकर दिल
[15:05]तड़प जाए तो इस पर देखकर दिल जोश मारने लगे तो यह
[15:11]दिल की कैसी है जब भी ने यहां व्रत बयान की तो
[15:11]और यह कर रहा था कि इंसान को अल्लाह ने जो कूवत
[15:16]दी है वह समाहित है वह बशारत है वह अ फिदा है
[15:23]और इन ने अहमद के जरिए से इंसान अपने कमाल का सफर
[15:30]तय करता है इसीलिए परवरदिगार ए आलम ने अगले ही आयत के
[15:38]टुकड़े में जहां आयत को खत्म किया वहां एक शिकवा किया कि
[15:41]के ताली लंबा तस्करों के शुक्र करने वाले कितने थोड़े हैं कि
[15:49]हमने जो उन्हें अनुमति है यह इन्हें कहां ले जाएगी लेकिन इन्होंने
[15:53]इस नेमत से शुरू है इस्तेफ़ादा किया अजीजों यह वह इंसान हकदार
[15:59]थी मीणा यह वह इंसान व्यस्त थी जो इंसान को जानवर से
[16:07]जुदा कर रही थी यह वह वितरित है जो परवरदिगार ए आलम
[16:14]ने इंसान को दी है जानवर को नहीं दी है इसी लिए
[16:21]इंसान जानवर से बहुत अफजल है मैं यह कहूंगा जानवर से जल
[16:25]है कहां जानवर और कहां इंसान कोई तांबूल ही नहीं है कि
[16:33]अगर इंसान फकत इंसान हो अभी उसके कमाल की बात नहीं कर
[16:41]रहा फकत इंसान अगर इंसान को तो इंसान के अलावा गोली भी
[16:46]मखलूक हो चाहे फरिश्ता हो चाहे वरिष्ठों का सरदार हो वह इंसान
[16:56]से ऊपर नहीं है इंसान के नीचे है कि अगर मुश्किल लग
[17:02]रही हो तो सवाल काम करूं यह बताओ तुम्हें अल्लाह ने फरिश्तों
[17:06]के लिए कल किया है यह फरिश्तों को तुम्हारे लिए कल किया
[17:12]है कि तुम फरिश्तों के काम कर रहे हो या फरिश्ते तुम्हारे
[17:18]काम कर रहे हैं है तो अहम कौन हुआ कि वह जो
[17:24]अपनी जॉब परफॉर्म कर रहे हैं तुम्हारे लिए कि वह जो परवरदिगार
[17:30]ने जिन्हें मामूर किया है तुम्हारे लिए यह जो बारिश बरसा रहे
[17:37]हैं यह जरूरतें मेह मी कि आई विल जो रिश्तों असीम कर
[17:40]रहे हैं उस रिस्क में परवरदिगार ए आलम ने किसके लिए रखा
[17:46]है तुम्हारे लिए है वो तो वो तो पांच रहे हैं जिसको
[17:51]तुम्हें दे रहे हैं उनकी ड्यूटी किस के लिए है तुम्हारे लिए
[17:54]अफजल खान हुआ गुड़िया तुम बहुत व जो रहे इंसान अगर इंसान
[18:03]है अगर इंसान इंसान है तो इन सबसे अलग यह ऐप इतर
[18:05]इस फितरत की वजह से तुम वजन याद रखना अभी बस इस
[18:09]बात को यहां पर रखता हूं आगे चलिए हैं अब यहां पर
[18:13]अब हम यह देखते हैं कि कि जो आज का मौसम है
[18:18]वह फल सफेद करार पाया है है और फिर ईद की एक
[18:23]शाम पर हमने बात करनी है है तो यह पहले तो इस
[18:28]लव से ईद को तसव्वुर करते हैं कि ईद का माना क्या
[18:35]है की रीत आदि में आवता त में लौटने के माना नहीं
[18:41]आ को वापस पलटने के माना में है है यानी के वापस
[18:47]पलट आना कि यह एक माना है है और इसका एक दूसरा
[18:54]वाला भी है है और वह माना है खुशी ने हैं तो
[18:57]एक माना अगर औरत से लिया गया तो यह पलटना होगा है
[19:02]और दूसरा माना क्या है खुशी और में अगर कहें कि आज
[19:08]तो ईद हो गई तो इसका मतलब क्या है कि आज तो
[19:11]बहुत खुशी का दिन है बहुत प्लेसिड है कि यह लव जहीर
[19:17]देखना यह है कि पुरानी सिला है है तो कुरान उस लव
[19:23]के बारे में क्या कहता है यह तो पुरानी मस्जिद में यह
[19:31]लव इस अंदाज से सूरे मुबारक करें मैदा और आयत का निशान
[19:38]114 और किशन दास से आया कि बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम एक कॉल आई सब
[19:46]नंबर यम कि अल्लाहुम्मा रब्बाना अंजलि नाम वित्त मिनट समारोह तक उन्मूलन
[19:56]अधीन है दूध लेना भूलना व फिर नाव आयतन मीठा इस वर्ष
[20:08]उतना वन तक खैर रजत सिंह कि हज़रत ईसा के अथाह ने
[20:16]हज़रत ईसा से सवाल किया कि क्या यह मुमकिन है तुम हमारे
[20:19]खुदा के लिए कि वह हमारे लिए पका-पकाया खाना उतार दे है
[20:26]तो हज़रत ईसा ने पहले दर्जे में तो उनको यह कहकर मना
[20:30]कर दिया टाल दिया कि नहीं ऐसे ही सवाल न करो कि
[20:32]अगर उसके बाद भी तुमने शक किया या ईमान लाए तो फिर
[20:41]आ जाएगा एक बार हल इन्होंने सित की और फिर हज़रत ईसा
[20:44]ने खुदा की बारगाह में दुआ की और कहा है परवरदिगार अल्लाहम्मा
[20:52]हमारे पालने वाले रब बना अल्लाहुम्मा र बना यहां जब मैं बहन
[20:58]करता चलूं अल्लाह हम और बांधों साथ बयान और है या तो
[21:02]अल्लाह मेघ दे दिया जाए ताकि फिर कोशिश कर रहा है तकरार
[21:07]की तरफ इशारा कर रहा है और रब्बा ना के अंदर एक
[21:08]दरख्वास्त पोशीदा है लिए रवाना हुए दे एक बहुत ही आज जाना
[21:18]और फकीराना अंदाज की दरखास्त पोशीदा है जैसे अक्सर लोग विरुद्ध में
[21:22]भी जब अधिकार में दुरुस्त पक रहे होते हैं तो फिर प्रॉपर
[21:25]सल्ले अला मोहम्मदीन वा आले मोहम्मद पड़ते हैं अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन
[21:33]वा आले मोहम्मद फैसल मोहम्मद अशरफ ने आज इस रथ में दरख्वास्त
[21:40]है वह दरखास के परवरदिगार तू भेज दे बस मोहम्मद मोहम्मद रहमत
[21:44]यह शास्त्र में इस माह में आता है तो यहां पर परवरदिगार
[21:49]ए आलम भी कह रहे हैं कह रहे हैं यह बहुत ही
[21:55]तड़प करोगे दुआ मांग रहे हैं यह हमारे परवरदिगार हम पर अपनी
[21:59]तरफ से माय माय दस्तरखान को कहते हैं है लेकिन दस्तरखान कौन
[22:08]सा दस्तरखान कि एक दस्तरखान जिसे आप सुथरा कहते हैं कि एक
[22:13]दस्तरखान जिसे आप अ दबा कहते हैं कि यह दोनों लफ्ज़ दस्तरखान
[22:21]के लिए अ का अध्ययन भी बड़ी नतीजा समान है क्या करूं
[22:23]लब से लब निकल रहा है और बात इधर सुधर जा रही
[22:29]है कि अ दरअसल में मिलकर बैठने को कहते हैं कि एक
[22:32]जगह जमा होने को अदब कहते अदरक बड़ों का अदब करो वह
[22:36]लव यू उधर से या है यानि उनके सामने झुक कर बैठ
[22:42]जाओ उनके सामने अदब से रूक जाओ तो वह दरअसल इन थे
[22:44]बैठने तो एक जगह बैठने को कहते हैं क्योंकि अरब बहुत मेहमाननवाज
[22:50]थे वह चाहते थे कि लोगों के मेहमान बने और मेहमान बनने
[22:54]का मतलब यह है कि मेरे साथ दस्तरखान पर बैठें और खाना
[22:58]तनाव करें तो दस्तरखान पर जमकर साथ बैठने तो अध्यापक कहते थे
[23:05]यहीं से दस्तरखान को मां दबा कहा गया है यह और लव
[23:08]हंसी बन गया इन्हें ऐसी जगह जहां सब हम के बैठे हैं
[23:13]तो वह खाने का दस्तरखान तो इस अंदाज से सूरए मायदा में
[23:16]उन्होंने परवरदिगार से मैदा मांगा था मैं तो दोनों में फर्क सुथरा
[23:24]और मैदा में फर्क क्या सुखराली दस्तरखान लेकिन मैदा भरा हुआ था
[23:28]आसफ खान तो उन्होंने वह भरा हुआ दस्तरखान मांगा कि जिस पर
[23:34]नियमित जुडी हुई हूं और पकी पकाई ने मत हूं यह ना
[23:38]हो कि जनाब प्याज लोग हो तो आलू वाला घोषाल लोग और
[23:40]हम पकाना शुरू करें बाद में इस झंझट से कि हमें नहीं
[23:45]चाहिए पका पकाया मिल जाए तो परवरदिगार ने उतार दिया था आसफ
[23:51]खान और जब दस्तरखान उतारा तो हर दिशा पहले ही कह चुके
[23:53]हैं कि अगर तू उसको ताकि देगा तो कि आसमान से 9th
[23:59]पूनम ढिल्लों आए दिन तो वह हमारे दिन हमारे लिए ईद का
[24:05]दिन होगा अब कि अब यहां ईद का मतलब क्या होगा खुशी
[24:09]का दिन है बिल्कुल इसी तरह का अंदाज सुबह मुबारक है मैदा
[24:14]ही के सूरए मुबारक है तरह के अंदर नजर आया आयत का
[24:22]निशान 59वीं की तौल हरी कौन है यह हजरत मूसा फ़िरऔनियों को
[24:27]कह रहे हैं कि आओ हम तुम्हें निशानियां दिखलाते हैं किस दिन
[24:34]वह दिन जो तुम्हारी जीनत का दिन है कि जिस दिन तुम
[24:38]खुशी मनाते हो तो उस दिन हमें तुम हम तुम्हें कुछ निशानियां
[24:42]देख लेंगे खोल मर्डर कम या मस्जिद स्वर्णा से दोहा हजरत मूसा
[24:54]ने वहां पर यह फरमाया कि हम तुम्हारा वादा नहीं तो हम
[24:59]से कह रहे हो कि हम दिखाएंगे जो तुम्हारी और जिस दिन
[25:06]तुम सब के सब एक जगह ताकि कोई शक ना रहे हैं
[25:11]अब लोग जमा हो और हम अपने मौजूदा बात उनको दिखाएं है
[25:16]लेकिन बात यहां भी वही है बहुत तवज्जो मैं सिर्फ इशारा कर
[25:18]रहा हूं उधर धरती सा ने क्या कहा कि अगर उसके बाद
[25:23]भी कुछ होटल आया तो आ जाएंगे इधर हंसते मुसाफा लोगों को
[25:30]जमा करके मौजूदा दिखा रहे हैं कि अगर इसके बाद भी बुलाया
[25:33]तो अजीब है के पास अजीब सा मैंने दो आया था आपके
[25:36]सामने रखी थी है तो यही खुशी का दिन और इसी ख़ुशी
[25:46]को मेरे मौला ने इस अंदाज से अपने कलाम में जगह दी
[25:50]के वकोला अली वाले हिस्से अलार्म फेरबदल याद इन नमः हुआ कि
[25:59]दैन लेमन कबल अल्लाह हु स्वभाव महुं व शिक्षक राख्यौ हु व
[26:05]कुल एडमिन लाइव व्यू प्रतिभा हुआ था ऑन कि क्या फरमाया है
[26:16]कि एक फिक्र मत 428 में में दोनों के बीच सिर्फ उसके
[26:23]लिए है अभी आ रही है ना परसों है और मंगल को
[26:29]गालिबन जैसा कि बयान किया जा रहा है तो नींद आने वाली
[26:35]है यकीनन खुशी तो बहुत से लोग मनाएंगे लेकिन जो मुक्त अपीलों
[26:39]का अमीर है जो इमाम उत्पीडन है वह यह फरमा रहे हैं
[26:47]कि ईद सिर्फ उसके लिए है जिसके रोगों को अल्लाह ने कुबूल
[26:55]किया हो है और जिसके तय काम को कद्र की निगाह से
[26:58]देखा हो है और मोमिन के लिए हर वह दिन रीत का
[27:07]दिन है जिस दिन उसने खुदा की कोई मासूमियत न की हो
[27:09]एक मुमेंट के लिए फैसले निर्भय है लेकिन मसला क्या है बहुत
[27:15]अब जो मैंने आपको तीन अंदाज के महीना जो के खुशी के
[27:21]अनुमान से थे बयान कर दिया तो इन तीनों अंदाज में आपको
[27:24]ईद कमाना क्या दिखा खुशी तो ईद के जनरल माना खुशी के
[27:32]करार पाएंगे ठीक हो गई बात आइए की अक्षम पर आ आज
[27:38]तो ईद की अक्साम में दो तरह की दे का करार पाएंगे
[27:45]अ का एक यही तो वह है कि जो कैसे ही अंदाज़
[27:51]की प्रसिद्ध है और एक वृद्ध व है कि जो स्थिति ही
[27:57]अंदाज़ कि अभी तो नहीं है लेकिन सिर्फ ही अंदाज़ की नहीं
[28:00]से कम भी नहीं है है अभी यह मामला समझ में नहीं
[28:07]आएगा समझेगा तो एक ही तो वह गई जो कि अंदाज की
[28:11]है वह कौन सी चीज है वह इस वहीं है कि जिसके
[28:15]लिए पैग़ंबरे अकरम सल्लल्लाहू अलैही वा आलेही व सल्लम ने [संगीत] कि
[28:24]इरशाद फरमाया कि इन उल्ला अब बदल अकरम दया महीने यह मैं
[28:32]कि के बेशक अल्लाह ने तुम्हारे लिए दो दिनों को दो दिनों
[28:41]से बदल दिया है और वह कौन से दो दिन है जो
[28:47]अल्लाह ने तुम्हारे लिए उन दो दिनों को दो दिनों से बदल
[28:50]दिया फरमाते हैं बेगम मुनरो जैसी वल मैहर जाने अल्प क्रॉसओवर दोहा
[29:00]है कि वह जो दो दिन है जो परवरदिगार ने तुम्हारे लिए
[29:06]दो दिनों से बदल दिए यानि रसूल अल्लाह को जो दो तोहफे
[29:14]मिले वह दो दिन जो के राज मे है उनकी जगह पर
[29:20]दो दिन मिले जिनमें से एक दिन 9:00 रोष का दिन था
[29:22]और एक दिन महरजान मसलन मेहरबान है लेकिन अरबी में चुके घास
[29:30]नहीं होता इसलिए महरजान लिखा गया यह पुराने वस्त्रों से चलाने वाला
[29:39]एक तहवार था जो कि मनाया जाता था जब रसूल अल्लाह की
[29:41]शरीयत ना फीस हुई तो रसूलल्लाह को उन दो दिनों के बदले
[29:47]दो दिन दिए गए जिसमें से एक कई उल फितर करार पाया
[29:51]और एक ही दूर रह कर पाया है तो फिर ही अंदाज
[30:00]से आलमे इस्लाम में अगर दो विधेयक करार पाई तो वहीं कई
[30:07]उन फिर और विद्या करार पाई अब यहां पर जब उल फितर
[30:09]सिर्फ ही अंदाज की ईद कर पाई तो यहां रीत का क्या
[30:16]मतलब हुआ कि अब यहां पर दूसरा मना लिया जाएगा यहां पर
[30:19]टंगा था मुझे अब तक तो खुशी मना ले रहे थे लेकिन
[30:23]अब जब हम पनीर को फितर से जोड़ रहे हैं बहुत तवज्जो
[30:28]रहे जब कई फीडर से जोड़ रही है तो अब क्या माना
[30:35]दे रही है तो अब एक और गहरा और बारीक माना दे
[30:40]रही है कि अब लौट चाहिए ईद को उस माना की तरफ
[30:41]लौटाइए जो के औरत से था जो पलटने के अनुमान से था
[30:48]है तो अब पलटना कहां पर पलटना तो यकीनन मृतका जी होगा
[30:55]किसी जगह का यह कहां पलट रहे हो यह मुताबिक दी है
[31:02]यानी इसको अपना माना देने के लिए किसी और सहारे की जरूरत
[31:04]है पलटने से बात वाले नहीं हो रही है जब तक वह
[31:10]जाना बयान की जाए के कहां पलट रहे हो तो आपको बयान
[31:14]किया गया वहीं दिल ये चित्र फोन कहां पलट रहे हो फिर
[31:20]पर पड़ रहे हो अब सवाल यह पैदा होता है कि इस
[31:25]पेड़ तत्पर पलटना यानि के क्या यानि परवरदिगार ए आलम ने जो
[31:29]तुम्हें शुरू किया था वह वितरक थी कि जिसके लिए मैंने आयत
[31:37]पढ़ी कैसे तरह पल्ला हिलाती पत्र अन्ना साल यह अल्लाह ने इंसानों
[31:43]को तो अपनी फ़ितरत पर पैदा किया यानी के क्या यानि कि
[31:52]फितरत अंदर से कुछ जानती हो या न जानती हो तो हित
[31:54]को पहचानती है कि यह बात क्यों नहीं कर रहे हो में
[31:59]इंसान चाहे दुनिया के किसी कोशिश में रहता हो चाहे उसका ताल्लुक
[32:06]किसी मजहब से हो चाहे वह किसी भी धर्म का मानने वाला
[32:12]हो अंदर से एक आवाज़ जरूर आ रही होगी कि कोई है
[32:15]और यही वजह है कि जब हम खंडहर रात देखते हैं 15
[32:20]साल पुराने खंडहर रात तीन हजार साल पुराने ठंड रात उन खंड
[32:26]रात में अगर कुछ हो ना हो एक चीज हमें जरूर नजर
[32:30]आती है और वह है इबादत गाह यह कौन है जो इंसान
[32:36]की फितरत को बता रहा है कि कोई है है जिसकी इबादत
[32:43]हो रही है कि वह मिश्री की ने मक्का के जिन्होंने 360
[32:46]बुद्धू बना रखे थे अगर मैं उस दौर में पहुंच जाऊं तो
[32:54]मैं उनसे एक सवाल करूंगा और वह यह कि यह बतलाओ कि
[33:00]360 की बात तो बाद में आएगी लेकिन ज़रा यह तो बतलाओ
[33:08]कि पहले बुध को पनाह लेने के बाद दूसरे बुध को बनाने
[33:11]की जरूरत क्यों पेश आई थी कि के अंदर से आवाज आई
[33:19]कि अभी भी कोई है कि यह नहीं है कोई है तुमने
[33:24]दूसरा कुछ बनाया आवाज बंद नहीं हुई कोई है तुमने तीसरा उत्पन्न
[33:32]आया चौथा बाद बनाया तुम बातों पर कुछ बनाते चले गए अंदर
[33:39]से आवाज आती ही चली गई कि कोई है कोई है यही
[33:47]बतलाना चाहा परवरदिगार ने है मेरे हबीब इनको कह दो कोई इनसे
[33:50]कहो हुआ था वह कि वह जो आवाज आ रही है कि
[34:01]कोई है कोई है वह कोई कोई और नहीं हुआ कुल हुआ
[34:06]अब वाह अब कैंसर कहो कि वह तो है वह कोई और
[34:14]नहीं अल्लाह है और कई नहीं है हद है कि के कुल
[34:18]वल्लाह हूं अहद कहने के बाद तुम्हें वह जवाब मिलेगा जो फितरत
[34:23]अंदर से चार रही कि यह है वह तो ही चना सी
[34:30]जो इंसान अंदर से जानता है और जब इंसान अंदर से जानता
[34:36]है कि कोई है कि जो उसका पालने वाला है जो उसको
[34:37]उसके पैदा होने से पहले जानता है तो यह उसके सामने इतना
[34:45]जरूरी हो गया कि गुना कर बैठा और गुना पर गुना करने
[34:52]लगा और परवरदिगार ने तुम्हें जिस्पा को पाकीजा फितरत पर रखा था
[34:55]तुमने उसको आलू का कर लिया 12 जून किए पहला जुर्म तुमने
[35:03]अपने अंदर को आलू था किया है दूसरा जुर्म तुमने उसके सामने
[35:07]जुर्म किया है जो तुम्हे तन्हाई में भी देख रहा था अगर
[35:11]तुम्हें समझ में नहीं आ रहा तो आओ रमजान में तुम पर
[35:18]रोजे फर्ज कि देते हैं और तुम्हें अमेज़न दिखलाते हैं कि सख्त
[35:22]सरगर्मी के अंदर जब प्यास लगी हो और तुम्हारे सामने ठंडा पानी
[35:30]रखा हुआ हो कमरे में कोई दूसरा ना हो और तुमसे तुम्हारे
[35:34]जहन में अगर शैतान यह वसा डाले कि कोई नहीं देख रहा
[35:42]पानी पी जाओ तो तुम शट अप कॉल दोगे कि तुम्हारी जुर्रत
[35:46]कैसे हुई मुझे कहने की के कोई नहीं देख रहा वह देख
[35:52]रहा है 30 दिन तुमने यह प्रैक्टिस की के वह देख रहा
[35:56]है वह देख रहा है तो बस इस दिन यह प्रैक्टिस कर
[36:00]ली तो बस जान लेना कि वह जो देख रहा है वह
[36:07]फकत रमजान में नहीं जिगर महीनों में भी देखता है दिगर महीनों
[36:14]में भी सुनता है तो इसका मतलब यह हुआ कि रोज है
[36:16]कि बरकतों से तुमने रोजा क्या रखा तुम अपनी उस फितरत पर
[36:24]आ गए जिस फितरत पर अल्लाह ने तो में रखा था तो
[36:29]हम थे जो फितरत से दूर निकल गए थे लेकिन माहे मुबारक
[36:32]जय श्याम की बरकत से तुम वापस अपनी फितरत पर लौट आए
[36:39]जब तुम वापस फितरत पर लौट आए यह कहलाया ईद-उल-फितर के चित्र
[36:47]पर लौटाना अब जब फितरत पर लौट आए हो तो ईद का
[36:54]दूसरा मखदूम जो उसी का है अब हक रखता है कि खुशी
[36:58]मनाओ कि तुम अपनी फितरत पर लौट आए हो ए ग्रुप अली
[37:00]मोहम्मद वाले मांगता हूं अजय को कि अब यहां पर दोनों दोनों
[37:10]मासूम नजर आ गए ना लौटना भी समझ में आ गया खुशी
[37:15]मनाना भी समझ में आ गया बस इसी तरह कैसे यह एक
[37:19]अंदाज का तुम्हारा तबीयत ई केम था जो एक महीने के लिए
[37:22]लगा था सिलसिला यूं ही चलता रहा चलता रहा सवाल आया और
[37:28]इस तरीके से जी का दाया और अब विकास की आखिरी तारीख
[37:35]से शुरू हो गई और जनाब दिल हजार गया रुको और तुम्हें
[37:41]एक और तबीयत कर डालें कि कहीं तुम्हारे अंदर कोई महत्व नहीं
[37:44]है जो जन्म ले चुकी है कि मैं और मैं आओ जरा
[37:51]तुम्हें ऐसे मैदान में ले आए कि जहां तुम सब कुछ कुर्बान
[37:58]करने के लिए आमादा हो जाओ यहां तक के अपनी मैं को
[38:00]भी प्रबंध कर दो कि वह जिसे बच्चे मैं में कहते हैं
[38:06]वह मे तो बाद में कुर्बान होगी आओ जरा मुजफ्फर में रुक
[38:14]कर आओ जरा अराफात में अपने आपको रुककर आफ आप पहचान लो
[38:22]अरपा पहचानने को कहते हैं जरा खुद को पहचान लो कि मैं
[38:25]कहां सही था कहां गलत था जहां गलत था अपनी बुराइयों को
[38:32]पहचानते रहो पहचानते रहो और पहचान पहचान कर एक-एक तो यही जज्बा
[38:36]करते रहो एक को पहचान पहचान कर उससे यही अलग करते रहो
[38:43]यह मैदान एयर फत में जब तुम निकल कर जाओगे पीछे मुड़कर
[38:49]देखोगे न जाने कितनी अंदर कि मैं में होंगी जो निकाल-निकालकर तुमने
[38:54]जब बाकी होंगी अब तुम इतने खाली इसको चुके हो मुजफ्फर में
[39:02]रुकने के बाद तमन्ना करोगे पर व आखिर इतनी पांचों पाकीजा जगह
[39:05]है मैं तमन्ना कर रहा हूं हर साल यहां पर आओ इस
[39:11]तमन्ना के साथ जब अगला दिन शुरू करोगे तो मैदाने मिलना होगा
[39:14]यहां मैदा ने में ना मैं अब मसलन क्या काम करोगे एक
[39:20]काम तो यही करोगे कि रमेश जमारात करोगे शैतान को कम कर
[39:27]मारोगे और शैतान को कम कर मार लेने के बाद दूसरा काम
[39:28]क्या करोगे कि अपने अंदर कि मेरे को तो हर आफत में
[39:34]जमा कर दिया था आओ जरा इसका अमली मुजाहरा करते हुए एक
[39:39]में को यहां दिबाकर डालो एक कुर्बानी यहां भी दे दो और
[39:41]उसके बाद यह अपना सर इस अंदाज से मूड डालो कि कल
[39:47]को अगर सर कटाना पड़े तो एक लम्हे के लिए भी झुकना
[39:52]नहीं तो अब इस दर्जे में अगर तुम आ चुके हो यह
[39:58]कुर्बानी का फ़लसफ़ा अगर समझ चुके हो तो यह भी तुम्हारे लिए
[40:00]खुशी का दिन शीघ्र रीत का दिन है जिसे आपने एक दो
[40:06]जहां का नाम दिया है अ तो यह आपके लिए हितकर दिन
[40:11]यह आप हिसार और कुर्बानी के लिए जमा हो गए यह आपने
[40:18]अपने अंदर के इंसान को ऐसी जगह लाकर खड़ा कर दिया है
[40:21]जहां पर अल्लाह के नबी हज़रत इब्राहीम अ़लैहिस्सलाम खड़े हुए थे यानी
[40:26]तुम्हारे अंदर जज्बा है ब्राहिमी पैदा हो गया है कि चाहे कुछ
[40:33]भी उनके सामने आ जाए उनके पैरों की ना लाइन नहीं बनेगा
[40:40]उनके पैरों की जंजीर नहीं बनेगा चाहे उनकी ऑल हो औलाद हो
[40:45]माल हो कुछ जो अपने औलाद को वाढव गया में छोड़ जाएंगे
[40:53]किसके लिए अल्लाह के हुक्म के लिए है और वह रुकने वाले
[40:56]किसके हुकुम पर रुक जाएंगे अल्लाह के हुक्म के आगे पलट कर
[41:03]यह नहीं कहेंगी जाए मोहतरमा के सिप्ला हमें किसकी आश्रय पर छोड़
[41:07]कर जा रहे हो अगर लिखना शुरू करें तो सारे मामला तो
[41:13]हजरत इब्राहिम के खिलाफ जाएंगे कि बीवी बच्चों को वहां छोड़ रहे
[41:16]हैं और खुद दूसरी वाली के पास जा रहे हैं है और
[41:20]जब वापस आ रहे हैं तो वह बच्चा जो अभी चल छोड़
[41:25]कर गए थे एडियां रगड़ रहा था और अब जरा बढ़ा हो
[41:28]गया है जवान हो गया है तो अब आए हैं तो क्या
[41:33]कर रहे हैं जी पकड़ने ले जा रहे हैं अल्लाह हू अकबर
[41:37]हजरत इब्राहिम का इम्तिहान है और यह हजरत इस्माइल खबर है उनका
[41:41]इम्तिहान है और पूरे है यह 10 दे रही है जब तुमने
[41:49]यह जो कर ली कि मैं खुदा के लिए हूं तो कुछ
[41:55]मेरा कैसे हो सकता है जब मैं खुद मेरा नहीं हूं तो
[41:59]कोई मेरी कैसे हो सकती है कि यह मोमेंट के लिए बहुत
[42:05]बड़ा सबूत है कि वह कोई चीज ऑन नहीं करता मिल्कियत का
[42:09]दावा नहीं करता बल्कि परवरदिगार ने अमानत दिए हैं तो अमानत को
[42:13]वैसे लौट आता है जैसे परवरदिगार ने दी थी यह मौजूद लेकर
[42:18]जो मैं आपके सामने बैठा हुआ हूं यह मौजूद मैंने नहीं बनाया
[42:24]है मेरे परवरदिगार ने मुझे यह मौजूद दिया है तो परवरदिगार ने
[42:27]जब मुझे यह मौजूद दिया है तो इसका ह क्या है कि
[42:33]जैसा दिया था परवरदिगार को वैसा ही वापस करूं आंख अगर बेगुनाह
[42:40]दी थी तो गुनहगार आंख वापस ना करूं जुबान अगर बेगुनाह दी
[42:42]थी तो फिर गुनहगार जवान वापस ना करूं साफ-सुथरी पार्ट को पाकीजा
[42:50]जवान वापस करो यह मौजूद का हक है अगर नदिया तो शुरू
[42:52]किया और जब शुरू किया तो पैगंबर बोल उठे रब बना असलम
[42:59]ना अनपुरणा व इलम तक फिर ना वह तरह नेशनल अन्नपुर्णा मिनल
[43:06]हाशिम परवरदिगार हम दुश्मन कि आप अपनी जान ऊपर और अगर तूने
[43:09]में नमक सा और हम पर रहना फरमाया तो हम सारा पाने
[43:14]वालों में से हो जाएंगे यह है वह जो रूल जो इंसान
[43:19]ने अपने नाप के साथ किया है क्यों अल्लाह ने ठीक बनाया
[43:21]था तुमने खराब कर दिया 800 यह तो इधर मैंने आपके सामने
[43:28]बयान की आइए है अब ईद कि वह किस में जो व्यक्ति
[43:35]फिर ही दें हैं यह लोग अपने काम है इसके अंदर रोजा
[43:39]रखना क्यों नहीं जाएगा हराम हराम नाजायज नहीं हराम है थे इसी
[43:48]बीच में रोजा नहीं कर सकते बकरीद के दिन रख सकते नहीं
[43:53]रख सकते हराम हराम ठीक हो गया देख ही रहना अच्छा वापस
[43:59]आइए अब जो दूसरे अंदाज की हैं वह कौन सी चीज है
[44:01]चीज है जिसे आप खुशी के अनुमान से जानते हैं और उन
[44:06]हिस्सों में जो शरीर पर इस चीज है वह कौन सी चीज
[44:10]है लेकिन एक मिनट एक बात भयंकर ना रह गई थी मैं
[44:13]एक चीज है कि उसको बयान करना जरूरी समझते है और वह
[44:19]यह कि अभी चीज का बयान मैंने किया तभी तो फिर किस
[44:25]के लिए तिथि थी कि उसके लिए अतिथि जिसके इबादात को अल्लाह
[44:30]ने इसके रोगियों को कुबूल किया हो और जिसकी इबादात को कद्र
[44:37]की निकासी दिखाओ है और मोमिन के लिए हरिबोधिनी का है जिस
[44:41]दिन वह कोई मानसिकता करें या हो गया 428 नंबर कल मैं
[44:46]हिकमत अगर कोई यह कहे कि मेरी तो यही नहीं है है
[44:52]अरे मेरी चाहिए अरे हमारी चाहिए तो इसका मतलब मॉल आने मुक्त
[44:59]अभियान के कौल के मुताबिक वह यह कहना चाह रहा है कि
[45:05]मेरे उरोजों को अल्लाह ने कबूल नहीं किया मेरी इबादात को अल्लाह
[45:07]ने कदर की निगाह से नहीं देखा और मैंने हर दिन अल्लाह
[45:11]की मां चाहती है तो यकीनन ऐसे शख्स को यह कहने का
[45:15]हक है कि मेरी चाहिए है लेकिन अगर किसी शक के रोगियों
[45:21]को खुदा ने कुबूल किया हो उसकी बाद आपको कद्र की निगाह
[45:23]से देखा वो इंशाल्लाह और उसने खुदा की कोई मासूमियत बिना की
[45:31]हो तो मौला यह पुस्तक ज्ञान के कॉल के मुताबित ऐसे ही
[45:33]शख्स के लिए ईद होगी मैं 1 मसला है और दूसरा मसला
[45:40]और दूसरा मसला जो के हमारे नादान दोस्त किया करते हैं कि
[45:48]के भला हो उस दिन हमिद कैसे बना सकते हैं उस दिन
[45:51]तो मौला अली का दसवां है है और मौला अली के दसवीं
[45:56]के दिन ईद का क्या कंसेप्ट है वहां पर बहुत बहुत अच्छे
[46:03]हो का पहला मतलब कि यह जिसे आप दसवां 20वां 230 वां
[46:11]यह जो कहते हैं कि शराब के अंदर तो ऐसा कोई लफ्ज़
[46:17]नहीं करता में शिफ्ट अंदर ना कोई दसवां है ना कोई भी
[46:22]समा है ना कोई तीसरा है का सौदा बयान थिक में मिलता
[46:34]है जिसका दौरान आंख कितने रोज है 3 दो-तीन रोज 100 लोग
[46:40]का मामला मिलता है और तीसरे रोशनी को बढ़ा दिया जाता है
[46:47]इस ऐतबार से कि जिसके घर में फटी हुई है तीसरे दिन
[46:49]वह जो पुरुष न दे सका है इससे बेहतर कि तुम अलग
[46:56]अलग आकर उसको प्रसादों क्या ही बेहतर है कि एक ही वक्त
[47:02]में जमा हो जाओ उसको भी ड्रेस होगी कि कितने लोग हैं
[47:04]मेरी मुसीबत ने मेरे साथ और उसको दिलासा दो उसको सर की
[47:09]तलकीन करो उसका दिल हल्का हो जाएगा इस ऐतबार से स्वयं का
[47:15]बयान मिलता है लेकिन स्वयं के बाद और कोई बयान नहीं मिलता
[47:17]यह बात तय हो गई अब आगे आइए लेकिन क्या करें दिल
[47:22]में है है और झुकें दिल में तो चुके आज दसवां दिन
[47:28]है तो हम यही नहीं बना सकते तो फिर सवाल बहुत तवज्जो
[47:31]कि अगर यही उसूल है कि दिल मग़मूम है और महमूद दिल
[47:38]के साथ की नींद नहीं मनाई जा सकती तो 28 जयकार किमाम
[47:44]में अली खन मोहम्मद एक तक़ी अलैहिस्सलाम की शहादत का दिन है
[47:48]और यह 28 दिशा की बात हो रही है और पहली जिला
[47:53]हज यानि के तकरीबन तीसरा दिन बन रहा है पहले तीसरे दिन
[47:59]ही यानी कि जो उनका स्वयं है उस स्वयं के दिन बीवी
[48:06]जहरा का अखंड है तो उस वक्त के दिन ढोल की थाप
[48:11]पर धमाल क्यों होता है जब के इमाम के स्वयं की तारीफ
[48:13]है कि आगे चलिए 28 सफर किस की शहादत का दिन एक
[48:20]शहादत दूसरा विशाल दोनों सा दहन इस आलम से उस आलम में
[48:28]गए 28 सफर को और ठीक 10 दिन के बाद जब 9
[48:33]तारीफ आ रही है तो इस नोट की शप को क्यों खुशियां
[48:37]मनाई जा रही हैं कि उस दिन रसूले ख़ुदा का दसवां है
[48:43]उस दिन इमाम में हंसने मजलूम का दसवां है तो क्यों उस
[48:46]दिन मिलाद मनाया गया और क्यों उस दिन ढोल की थाप पर
[48:52]दोबारा खुशी मनाई गई मैं अब तुम्हें दसवां नहीं आता या मैं
[48:55]अब तुम्हें 100 याद नहीं आया मैं कितनी तारीख है गिनवाऊं आइए
[49:03]तीन समाधियों साहनी जहां बीवी की शहादत है तो उसके तकरीबन 40
[49:06]दिन के बाद जब तेरा जगा रही है तो अब क्यों जगह-जगह
[49:13]मिठाइयां तक टीम हो रही हैं क्या बीवी का 40वां याद नहीं
[49:17]है तो मैंने पकड़ 34 तारीखे आपके सामने रखे हैं अभी 3
[49:24]रजत को एक माह में नकली की शहादत हुई है और उसके
[49:29]10 दिन के बाद और दूसरे ऐतबार से 20 दिन के बाद
[49:36]तुम तीन शाहबान को मौला हुसैन का जश्न मनाने खड़े हो जाओगे
[49:39]और वहां पर फिर वही और ना स्वागत ढोल बल्कि मौसी जी
[49:46]के ऊपर तुम बाकायदा नाच-गाना करोगे मैं उस दिन तुम्हें यह दसवां
[49:50]क्यों नहीं आता आएगा उस दिन तो मैं यह 20वां क्यों नहीं
[49:55]आ जाएगा इसका मतलब यह है कि तुम्हें आई एम से मोहब्बत
[50:00]नहीं है मसलन तुम्हें कितने से मोहब्बत है तुम यह देखते हो
[50:03]इतना कैसे ही ज्यादा होता है तुम यह देखते हो कि मुसलमानों
[50:09]को कैसे डिवाइड किया जाए कैसे कोई पहले टशन किसी पहले तस्वीर
[50:12]के साथ मिलकर एक जगह त्योहार मना रहा है कि तुम्हें गंवारा
[50:18]कैसे हैं तो तुम चाहते हुए ने अलग अलग कर दो और
[50:21]तुम यह कह कर उसने अलग कर दोगे कि हमारी तो यही
[50:25]नहीं है हम तो ही नहीं मनाएंगे का असल मतलब यह है
[50:28]है मगर नगर मोहब्बत होती तो इंतजाम को मैंने स्टार के साथ
[50:33]काम लिया है वरना सात तारीफ है और हैं और अगर इस
[50:38]ऐतबार से गिन लिया जाए तो फिर तुम कभी कोई खुशी नहीं
[50:40]बना सकोगे चाहे तुम अपने घर का कोई निकाल रखना चाहो या
[50:45]कोई शादी रखना चाहो वह भी किसी इमाम का या दसवां होगा
[50:51]या 40 वां होगा या कोई तीसरा होगा या कोई 20वां होगा
[50:53]तुम सांस नहीं ले सकोगे तुम्हारे पास इतनी तारीफ हैं इतनी तारीफ
[51:00]हैं तो इसका मतलब यह है कि अक्ल के नाखून लोग लेकिन
[51:05]मसला यह है यह बातें में जिनको बता रहा हूं वह है
[51:11]यह जो सोए हुए नहीं है सोए हुए बने हुए हैं कि
[51:12]के अगर कोई सोया हुआ हो तो उसको आहिस्ता से आवाज दो
[51:18]वह जाग जाएगा लेकिन अगर कोई सोया हुआ बना हुआ हो तो
[51:24]इसको लाइक आवाज से दोनों वह नहीं जागेगा इसलिए के वह जागने
[51:26]के मूड में नहीं है वो तो ए यारों के लिए और
[51:31]कालू सलाम सलाम कह कर आगे बढ़ जाओ और भरपूर अंदाज से
[51:37]यह इस तरह से मनाओ कि जैसे सैयद सज्जाद ने ईद मनाई
[51:42]जैसे अहले बैत अलैहिमुस्सलाम ने ईद मनाई और आपको और हमें एक
[51:45]दुआ तालीम दी कि जब तुम तीसरो से रख लेना तो पैक
[51:51]काम करना अल्लाह से सीधी तरफ करना ईद की नमाज में हाथ
[51:58]उठाकर पांच मर्तबा दूसरी रक्त में चार मर्तबा पांच और चार मिलाओ
[52:01]तो 9 बनता है नॉलेज और इसी रहा है जो कभी खत्म
[52:07]नहीं होता जो कभी भी खत्म नहीं होता ऐसा जारी सी रहा
[52:12]है पांच के यह नौका जैसे तुम नो का पहाड़ा कहते हो
[52:19]नौकर टेबल कहते हो नो को किसी भी अदब से जब दे
[52:19]दो नो अपनी हैसियत को खत्म नहीं करता 9 को एक से
[52:25]जब दोनो रहता है 9 को दो से जब 218 बन जा
[52:31]अच्छा है आर्ट और एक मिलकर फिर नो बन जाता है 9
[52:36]को तीन से जब 227 बनता है साथ और दो मिलकर फिर
[52:41]नो बन जाता है तुम किसी नंबर से तरफ 2 मिला लो
[52:46]वह नो ही रहता है जारी सी रहा है तुमने जारी सिरे
[52:51]के अध्यक्ष के ऐतबार से दुआ की जो कि सारा साल जारी
[52:54]रहेगी क्या कह कर अल्लाह उम्र अंतत वह अपनी पिक उल्लेख कई
[53:03]ऋण अथल तपिश मोहम्मदीन वा आले मुहम्मद और इस कि सईद से
[53:06]इस विधि से पहले तुमने परवरदिगार को जो वास्ता दिया वह क्या
[53:12]वास्ता दिया तुमने आई एम का वास्ता ना दिया तुमने रसूल अल्लाह
[53:15]का वास्ता ना दिया तुमने पुराण का वास्ता ना दिया तुमने कहा
[53:23]इस आलू का त्यौहार जल यह हम अलग जेल तहुं बिल मुस्लिम
[53:32]मेल्ट हो परवरदिगार मैं तुझे इस दिन का वास्ता देकर सवाल कर
[53:36]रहा हूं जिसे तूने मुसलमानों के लिए फ्रिगेट का तीन करार दिया
[53:45]है है अब जो कहे कि मेरे लिए यह ईद नहीं है
[53:46]तो इसका मतलब तुम्हारा मुस्लिमीन की फेहरिस्त से भी कोई ताल्लुक नहीं
[53:53]है क्योंकि अल्लाह ने मुसलमानों के लिए इस दिन को ईद का
[53:57]दिन करार दिया है अब इस ईद के दिन केतु फैल तुम
[54:02]खुदा से मांग रहे हो कि मेरे अंदर वह तमाम अच्छाइयां डाल
[54:07]दे जो तूने मोहम्मद और रैली बाय थे मोहम्मद में वदीयत वर्मा
[54:10]आई और मुझसे में से वह बुराइयां दूर कर दे जिन बुराइयों
[54:17]को मोहम्मद और रैली बेटे मोहम्मद से दूर रखा वहीं तो कर
[54:20]जनी मिन कुल्लि फिर इन फर्स्ट आकर एक्स्ट्रा मिल मोहम्मदीन वा आले
[54:26]मुहम्मद और में से बुराइयां दूर कर दे कि जो तूने मोहम्मद
[54:31]और पहले बेटे मोहम्मद में से दूर की है 800 यह वह
[54:35]ईद का दिन है जो मैंने आपके सामने बयान किया इसके बाद
[54:37]तीन चार यह और है जो कहर से ही हैं वहीं दें
[54:42]शुक्राने यहां पर मनाई जाएंगी जो के इन दिनों से कम भी
[54:48]नहीं है अगर वह इतना होती तो हमें यह बिना मिलती और
[54:54]उन हिस्सों में यकीनन एक ही तो वहीं गदीर की ईद है
[54:58]ईद अधीर है जहां परवरदिगार ए आलम ने ऐलान फ़रमाया कि अल्लाह
[55:01]महात्मन तो लक उन दिनों क्रमवत मम तो आलेकुम ने अनुमति अगर
[55:07]दिन ही मुकम्मल ना होता अगर नियमित ही तमाम ना होती तो
[55:09]तुम्हें कहां से ही उल फितर मिलती तो मैं कहां से ईद
[55:14]जहां मिलती है यकीनन अधीन के कमाल और दिन के तमाम के
[55:18]बाद तुम्हें यह मत मिली है तो चुके चुनरी बड़ी नेमत मिली
[55:20]है तो तूने क्या चाहिए इस नेमत के शुक्र में अब रोजा
[55:26]रखो और परवरदिगार से शुक्र अदा करो यह बयान करेगा यह रोजा
[55:32]रखना बयान करेगा यह वहीद नहीं है कि जो मुसलमानों के आलमे
[55:35]इस्लाम में यह तस्वीर होती है कि उसी बाद में रोजा रखना
[55:40]तो हराम है लेकिन इसी बीच में रोजा रखना तो मुझे याद
[55:41]करा पाएगा पर इससे अच्छा है यानि कि यह ईद खुशी के
[55:47]माना में आएगी और खुशी के बाद शुक्र किया जाता है यही
[55:52]मामला िदए मुबाहिला का है कि जहां इस्लाम की नसरानी अत के
[55:55]ऊपर फतेह का दिन है और मुसलमान शुक्र के तौर पर अपना
[56:02]रोजा रखकर अच्छे कपड़े पहनकर खुशबू लगाकर उस दिन को मनाते हैं
[56:05]कुर्वानी करते हैं अज़ीज़ों तो बस यह वह दिन थे कि जो
[56:12]परवरदिगार ए आलम ने हमें और आपको इनायत किए लेकिन अगर कोई
[56:17]ना शुक्र अपन करेगा तो हज़रत ईसा ने भी यही कहा था
[56:18]कि वह तो आ जाएगी लेकिन अगर छुट्टी आया तो मजा आएगा
[56:23]यहां हजरत मूसा ने भी जीनत के दिन में बुला लिया लेकिन
[56:29]उसके बाद दूध लाने वालों का आखिरी क्या हुई आ पाया लेकिन
[56:31]रसूल अल्लाह की उम्मत में वह अजीब तो नहीं आएंगे जो पिछली
[56:37]हिम्मत तो में आए थे लेकिन एक अंदाज किया जॉब तो आएंगे
[56:42]और वह कौन से अजीब है वह अजीब वह अजीब है है
[56:42]जिसे आप बद अमनी का अज़ाब कहेंगे यह आपस में झगड़े बहुत
[56:49]शुरू हो जाएंगे आपस में मुंढ एक दूसरे से गुत्थमगुत्था हो जाएंगे
[56:53]क्यों इसलिए के उन्होंने ईद के असलमु को दर्शक नहीं किया जो
[57:01]परवरदिगार ने दिया था अब आपस में उम्मत के जोश घर वाले
[57:07]लोग होंगे वह इन प्रमुख सेलेक्ट कर दिए जाएंगे क्यों इसलिए इन्होंने
[57:11]अपनी फ्राई इससे होता ही बनती थी बस नैक लोगों की फिर
[57:14]दुआएं भी क़ुबूल नहीं होंगी यह जो आज दुआएं कुबूल नहीं हो
[57:20]रही हैं कि स्वभाव इसलिए कि तुमने परवरदिगार के निजाम से पर्दा
[57:24]पोशी चश्म पोशी की है इसलिए परवरदिगार ए आलम भी तो मैं
[57:31]वह यूज बरकत नहीं दे रहा है जो आसमान से और ज़मीन
[57:35]से तुम्हारे लिए देने थे परवरदिगार ए आलम से दुआ है कि
[57:38]इन तस्वीरों के फलसफों को हमें अपने नवीन जस्ट करने की तौफीक
[57:44]अता फरमा मेरे परवरदिगार माहे मुबारक के श्याम से कम महत्वपूर्ण इस्तेफ़ादा
[57:48]किए जाने की तो फिर इनायत वर्मा परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद आलरेडी
[57:55]बेटे मोहम्मद अली सलातो अस्सलाम का भी नहीं मालूम कि इस दिनों
[58:04]में तूने हमें बख्शा है या नहीं बख्शा परवरदिगार अभी जो बाकी
[58:07]एक दिन रह गया है तुझे हजरत हुज्जत का वास्ता तुझे बीवी
[58:13]जहरा के हक का वास्ता परवरदिगार हमें इस रमजान में मेहरूम ना
[58:18]रखना हमें मरहूम फरमाना परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद और एलीवेट थे मोहम्मद
[58:26]अली सलातो अस्सलाम का सुविधाएं मिलाते जफरिया के दर्जा ली हैं मुतालिक
[58:32]वर्मा परवरदिगार अर्थ आपके तमाम बुद्धिस्ट ज्ञान को आनलाइन दिन में परवरदिगार
[58:36]जगह इनायत वर्मा परवरदिगार हमारी मां समान बिल्कुल वैसा ही है जैसे
[58:41]हम चाहते हैं हमें ऐसा बना दे जैसा हमारा इमामे ज़माना चाहता
[58:47]है वहां फिर दावन अनिल हमदुलिल्ला ही रब्बुल आलमीन परवरदिगार इमामे ज़माना
[58:51]कोई जुर्म नेता सुशील शर्मा हमें उनके आगमन और अनुसार मिक्सचर करार
[58:56]दे रहे बनाता कंबल में डाइनर कांता समीर अली अहमद शेख प्यार
[59:02]हमारा हिना आंख पध झाल
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