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Dosti K Adab Ayyma Ki Nigah Main | H.I Mujahid Hussain Damani
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في
محاضرات
Record date: 21 April 2024 - دوستی کے آداب ائمہ کی نگاہ مِں AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2024 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/aLmehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:17]मुसद अबील कासम मोहम्मद अल्लाहुम्मा सल्ले अला मोहम्मद वाले मोहम्मद सल्लल्लाह अलही
[0:30]वा अल मासूमीन अल मजलू मन अल मुंत जबील मुंत मया अजनाला
[0:46]ही अला सला मोहम्मद वाले मोहम्मद समा बकला नादा अल्लामा कुली वली
[1:01]हसन सवात कालेही वाला फ कु सा वली ना लीना हतास का
[1:17]तु महाला अल्ला सला मोहम्मद ले मोहम्मद ल बा रली सदरी वरली
[1:36]अमरी वात मसानी ली अम्मा बाद फला अली अबी लि सलातो सलाम
[1:44]अत नि अकल सवात पढ़े महम्मद ले मोहम्मद पर अल्लाहु सला मोहम्मद
[1:54]वाले मोहम्मद सामने करम अने मोहतरम आज की इस गुफ्तगू का उनवान
[2:00]आमा कराम अल सलाम की निगाह में दोस्ती की अहमियत इसके तरीके
[2:11]इसके मयारा और कैसा दोस्त इंसान को बनाना चाहिए और किन दोस्तों
[2:15]से बचना चाहिए इससे मुतालिक गुफ्तगू है एक मर्तबा सवात पढ़े मोहम्मद
[2:20]आले मोहम्मद पर अल्लाहु सल्ले अला मोहम्मद ले महम्मद इंसान फितरत ते
[2:30]हैं कि अगर आपने उन चीजों को देख लिया कि जो हराम
[2:35]है वो सारी चीजें आपके जहन में आ गई तो अब उसके
[2:39]अलावा जो भी चीज होगी वह हलाल होगी चाहे मुस्त हैब हो
[2:44]चाहे मकरूह हो चाहे मुबा मुस्ताहब में सवाब मिल जाएगा मकरूह में
[2:46]खुदा को नापसंद होगी मुबा के अंदर आपको सवाब मिले या ना
[2:51]मिले लेकिन अगर आपके जहन में हराम चीजें होगी तो अगर आप
[2:53]हराम से बच रहे हैं तो खुद बखुदा इमाम की हदीस है
[3:04]कि कुल्लो शन हलाल हता तालम अ हराम हर चीज जिसके बारे
[3:10]में भी तुम्हें शक हो कि यह हलाल है या नहीं है
[3:12]तो जब तक तुम्हें यकीन ना हो जाए कि वह हराम है
[3:15]तब तक वह हलाल हुआ करती है यानी ह हराम की फरस्त
[3:19]आपके पास आ जाए तो इसके अलावा जो चीजें हुआ करती हैं
[3:24]वह हलाल हुआ करती है मसलन नजासत के अंदर अगर आपको मालूम
[3:27]हो गया कि यही चीजें 10 नजस है तो उस उसके बाद
[3:30]अब आपको यह पूछने की जरूरत नहीं है कि आंख से निकलने
[3:34]वाला पानी भी नजिस है कि नहीं है कान से निकलने वाला
[3:36]पानी भी नजिस है कि नहीं है उल्टी नजस है कि नहीं
[3:39]है नाक से निकलने वाला पानी भी नजिस है कि नहीं है
[3:43]चूंकि वो 10 चीजें जो नजासत की फहस में आपको पता चल
[3:47]गई कि ये नजिस है इसके अलावा हर चीज पाक है बिल्कुल
[3:48]इसी तरीके से जब आपको यह पता चल जाए कि किन लोगों
[3:52]से दोस्ती करना हराम है तो इसके अलावा जो लोग हैं उनसे
[3:58]दोस्ती करना जायज है यह अलग बात है कि कु दोस्तों से
[4:03]दोस्ती करना मुस्त है कुछ से मुस्त नहीं है मकरू है कुछ
[4:04]के लिए मुबा है तो वह कौन से दो व कौन सी
[4:08]दोस्ती है जो हराम है तो इसके लिए हम खुद कुराने मजीद
[4:13]की तरफ रुजू करते हैं सूर मायदा आयत नंबर 51 बिस्मिल्ला रहमान
[4:16]रहीम या आमन लालिया ला मोमिनो याद रखो ईमान वालों से खुदा
[4:38]इरशाद फरमा रहा है मोमिनो याद रखो हरगिज यहूद और नसा को
[4:41]अपना दोस्त मत बनाओ क्योंकि यह दोनों यानी यहूद और नसा आपस
[4:47]में तो एक दूसरे के दोस्त हैं तुम्हारे दोस्त नहीं है हरगिज
[4:51]यहूद और नसा को अपना दोस्त ना बनाओ वयत मनक और तुम
[4:56]में से जो भी इनको अपना दोस्त बना तो समझ ले फ
[5:03]मन हम उसे उन्हीं में से शुमार करेंगे तो अब आप दुनिया
[5:10]में देख लीजिए व है वह मुल्क या है वह इंसान जो
[5:16]इन यहूद और नसा को अपना दोस्त समझ रहा है या दोस्त
[5:18]बनाने की कोशिश कर रहा है या चाहता है कि वह इनके
[5:23]दोस्त हो जाए या इन यह उसका दोस्त हो जाए तो व
[5:27]सूर मायदा की 5वी आयत का मिस्दा बनेगा जो उनके साथ दोस्ती
[5:33]करेगा वह उन्हीं के जैसा हो जाएगा चाहे वह इसराइल हो या
[5:36]अमेरिका हो अगर वह यहूद है और नसा है जैसे के है
[5:41]तो अब अगर इंसान उनसे दोस्ती की तरफ हाथ बढ़ा रहा है
[5:46]या उनकी दोस्ती को कबूल कर रहा है हर दो सूरत के
[5:49]अंदर फ मन जो भी उनसे दोस्ती कर रहा है वो उन्हीं
[5:53]के साथ शुमार होगा सवात पढ़े मोहम्मद और आले मोहम्मद पर सल्ले
[5:56]अला मोहम्मद व आले मोहम्मद तो यह तो स्ट्रेट फॉरवर्ड नस सरी
[6:04]के साथ परवरदिगार आलम ने बता दिया कि देखो यहूद और नसा
[6:12]तुम्हारे दोस्त नहीं हो सकते हां यहूद नसा के साथ बाज में
[6:14]दोस्त हैं और नसा यहूद के साथ तो हैं बाद बिन बाज
[6:18]यह इनमें से और वोह उनमें से हैं लेकिन तुम्हारी दोस्ती उनके
[6:25]साथ कभी भी सही नहीं होगी और जो उनसे दोस्ती करेगा वह
[6:27]उन्हीं में से शुमार होगा फिर सूर आल इमरान की 28 आयत
[6:32]में परवरदिगार आलम ने इरशाद फरमाया जहां यहूद और नसा का स्ट्रेट
[6:35]फॉरवर्ड जिक्र किया था अब थोड़ा सा माना को वसी कर दिया
[6:41]कहा या लायन कालिया मोमिनीन देखो मोमिनो याद रखना कि कभी भी
[6:51]काफिरों को अपना दोस्त ना समझना अगर टेंपरेरी कभी वह तुम्हारे दोस्त
[6:56]हो भी जाए तो याद रखना जब उनको मौका मिले तो वह
[7:02]तुमसे दुश्मनी अपनी जाहिर कर देंगे वय जालिका और जो इनको अपना
[7:10]दोस्त बनाएगा फ मला म अल्लाह को तो कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा
[7:15]इला देखो अगर तुम इन काफिरों को अपना दोस्त बनाओगे तो याद
[7:23]रखना अल्लाह को तो कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा लेकिन मोमिन को उनके
[7:27]ईमान को खुद नुकसान पहुंचेगा सिवाय एक सूरत के वहां यहूद और
[7:32]नसा के लिए तो स्ट्रेट फॉरवर्ड कह दिया परवरदिगार आलम ने कि
[7:35]ना यह तुम्हारे दोस्त हो सकते हैं ना तुम इनके दोस्त हो
[7:40]सकते हो लेकिन जब मामले को थोड़ा सा वसी किया यहूद और
[7:46]नसा से बढ़कर कुछ ऐसे अफराद है म ऐसे मजाबहराता है कि
[7:55]जिसके अंदर तुम मजबूर हो जाते हो कि तुम उनसे कुछ रवाब
[8:02]रखो तालुकात रखो वह कौन से हैं इला मनत के तुम इस
[8:07]हद दर्जे तक मजबूरी पर पहुंच जाओ कि तुम्हें तक इख्तियार करना
[8:11]पड़े तक की सूरत में तुम काफिर के साथ अगर रबत रखते
[8:16]हो तो यह जायज सूरत है लेकिन वह भी उसी वक्त तक
[8:23]महदूद रहेगी जब तक मजबूरी बाकी है जब तक तक का मोद
[8:27]बाकी है लान ला मसीर और देखो खुदा ने तो तुम्हें पहले
[8:33]से ही डरा दिया है अल्लाह ने तुम्हें तहजीब कर दी है
[8:37]अल्लाह ने बता दिया वाज और आशका तौर पर कि इन लोगों
[8:41]से तुम्हारे लिए दोस्ती करना जायज नहीं है और तुम तो पलटकर
[8:43]खुदा ही की जानिब आने वाले हो यह सूर आल इमरान की
[8:47]28 आयत और इसके बाद सूर बकरा की आयत नंबर 120 लन
[8:54]कयू लसारा हता मिलत मोमिनो याद रखो यहूद और नसा तुमसे कभी
[9:02]राजी हो ही नहीं सकते तुमसे कभी खुश हो ही नहीं सकते
[9:05]यहां तक के कि तुम उनकी मिल्लत में दाखिल हो जाओ या
[9:09]तो उनकी मिल्लत में दाखिल हो जाओ तुम भी यहूद और नसा
[9:13]हो जाओ ऐसा तो तुम नहीं कर सकते अगर करोगे तो जहन्नुम
[9:16]तुम्हारे लिए अबदीमंडी तमाम अफराद जो परवरदिगार आलम के दीन से मुनर
[9:34]हो चुके उनका ठिकाना अबद जहन्नुम है या तो तुम यहूद और
[9:39]नसा जबक व मालूम है कि उस वक्त तक तुमसे राजी नहीं
[9:43]होंगे जब तक तुम उनकी मिल्लत में दाखिल ना हो जाओ तो
[9:44]उनके जैसे हो जाओ तो अबद जहन्नुम तुम्हारा इंतजार कर है नहीं
[9:50]अगर तुम यह नहीं चाहते तो लात इन्ह क्यों अपना दोस्त बनाते
[9:59]हो तुम उन्हें अपना दोस्त ना बनाओ कुल लादा त जा और
[10:06]जब हमारा स्ट्रेट फॉरवर्ड न सरी के साथ तुम्हें बयान आ चुका
[10:12]है खुदा ने हिदायत दे दे दी है कि यह यहूद और
[10:17]न सारा तुम्हारे दोस्त नहीं हो सकते पस अगर अब कोई शख्स
[10:21]अपनी हवा हवेस की पैरवी करेगा अपनी ख्वाहिश की पैरवी करेगा बा
[10:27]जा इस चीज के बाद कि जब उस पर हुज्जत तमाम हो
[10:32]चुकी उसे इल्म हासिल हो चुका कि यहूद और नसा से दोस्ती
[10:34]करना जायज नहीं है अगर कोई ऐसा करेगा तो याद रखना कि
[10:39]उसका ठिकाना जहन्नुम है सवात पढ़े मोहम्मद व आले मोहम्मद स अला
[10:45]मोहम्मद वा आले मोहम्मद तो यह एक जुमले में अगर मैं आपको
[10:49]अर्ज करूं तो स्ट्रेट फॉरवर्ड जहन के अंदर यह जहन नशीन हो
[10:55]जाना चाहिए कि यहूद और नसा कभी भी मोमिनो के दोस्त नहीं
[11:00]हो सकते अगर कोई आपको इनका दोस्त नजर आ रहा है तो
[11:05]वह समझे आपका भी दुश्मन है क्योंकि तुम्हारे दोस्त का दोस्त तुम्हारा
[11:08]दुश्मन है और तुम्हारे दुश्मन का दोस्त तुम्हारा दुश्मन है सवात पढ़े
[11:13]मोहम्मद और आले मोहम्मद पर अल्लाहुम्मा स अला मोहम्मद वा आले मोहम्मद
[11:18]यह एक ऐसा मोद है कि जिसमें दोस्ती करना हराम है दूसरा
[11:24]वो मोहिद जिसमें दोस्ती करना हराम है वह यह कि इंसान को
[11:27]हराम में मुब्तला होने का खौफ हो मसल किसी मर्द का किसी
[11:31]ना महरम खातून से दोस्ती करना जबकि उसे मालूम है कि उसे
[11:39]हराम में उतला होने का खौफ है भटकने का खतरा है तो
[11:41]उस रास्ते मौला कायनात फरमाते हैं उस रास्ते की तरफ जाओ भी
[11:47]मत जहां तुम्हें भटकने का खतरा हो तो ना महरम से दोस्ती
[11:50]करना इंसान को अगर हराम में मुब्तला होने का खौफ हो तो
[11:55]हराम है यह वोह मवाद है कि जिस दो मवाद कि जिसके
[12:00]अंदर दोस्ती करना हराम है तीसरा वो मोद जिसमें दोस्ती करना हराम
[12:03]है वह यह कि इंसान को मालूम हो कि मैं जिससे दोस्ती
[12:08]कर रहा हूं वह मेरी आखिरत को बर्बाद कर देगा मेरी आक
[12:14]बत को बर्बाद कर देगा वह मुझे ऐसे रास्तों की तरफ गाजन
[12:19]करेगा जिससे यकीनन यकीनन मेरी आखिरत बर्बाद होनी है मसलन ऐसा शख्स
[12:26]कि जो शराब पीता है हदीस में है कि जो शख्स शराब
[12:33]पीता हो उसके साथ एक टेबल के ऊपर खाना खाना उसकी दावत
[12:39]को कबूल करना उसके घर पर जाना बल्कि उसको सलाम करना भी
[12:42]हराम है तो चे बरसत बे दोस्ती जहां इंसान को सलाम करना
[12:48]आराम है वहां चे बरसत दोस्ती दोस्ती की कहां बात आएगी इसी
[12:51]तरीके से दूसरा वो मोद कि ऐसा शख्स कि जो आपको पूरे
[12:57]साल के अंदर नमाज पढ़ता हुआ नजर ना आए तारिक सलात है
[13:02]उससे दोस्ती करना जायज नहीं है और तीसरा वह शख्स ऐसा शख्स
[13:08]के जो खुल्ले आम गुनाह कबीरा करता हो चाहे वह खुला खुले
[13:12]आम गुनाह कबीरा कत्ल हो शिर्क हो जिना हो इनमें से कोई
[13:16]भी गुनाह हो अगर वह खुले आम गुनाह करता है तो उससे
[13:21]दोस्ती करना जायज नहीं है सवात पढ़े मोहम्मद वा आले मोहम्मद सल्ले
[13:24]अला मोहम्मद वा आले मोहम्मद ये वो मवाद है कि जो आपके
[13:30]जहन में नशीन हो जाए मेरे जहन नशीन हो जाएं कि जिसमें
[13:32]दोस्ती करना हराम है अब इनके अलावा जितने भी अफराद हैं उनसे
[13:39]दोस्ती करना जायज तो है लेकिन बाज ऐसे अफराद हैं जिनसे दोस्ती
[13:42]करना खुदा को पसंद है जिसे हम कहते हैं मुस्त हैब तो
[13:47]वह कौन से ऐसे अफराद हैं कि जिनके साथ दोस्ती करना बेहतर
[13:53]है तो इसके बारे में जिस हदीस को मैंने सरनाम कलाम के
[13:55]तौर पर आपके सामने पेश किया वह मौला कायनात अमीर अली अबी
[14:02]तालिब अ सलातो सलाम की हदीस है सला मोहम्मद वाले मोहम्मद अवद
[14:07]दो निस्फ अकल देखि अरबी जबान के अंदर दोस्ती के लिए मुख्तलिफ
[14:14]अल्फाज है दोस्त को व दूद भी कहते हैं वह शख्स के
[14:20]जो दोस्त हो उसे कहते हैं व दूद दूसरा लफ्ज है वली
[14:21]वली उल्लाह यानी अल्लाह का दोस्त अभी जहां आयत आई जितनी भी
[14:27]उसके अंदर कहा कि यहूद न सारा को अपना औलिया ना बनाओ
[14:31]यानी वली ना बनाओ यानी दोस्त ना बनाओ तीसरा लफ्ज जो दोस्त
[14:33]के लिए इस्तेमाल होता है अरबी जबान में है खलील जैसे हजरत
[14:39]इब्राहिम अल सलाम का लकब है खलील उल्लाह अल्लाह का दोस्त इसी
[14:42]तरीके से एक और लफ्ज होता है अरबी जबान के अंदर दोस्ती
[14:47]के लिए रफीक इंसान अपने ऐसे शख्स के साथ जिसके साथ रफाकत
[14:51]रखता है दोस्ती रखता है उसे कहते हैं रफीक और एक लफ्ज
[14:55]है अरबी जबान के अंदर दोस्ती के लिए सदीक साद दाल ये
[15:01]काफ सिद्दीक कहते हैं बहुत ज्यादा सच्चे को सदीक कहते हैं दोस्त
[15:05]को तो मौला कायनात यहां पर जिस लफ्ज का इंतखाब कर रहे
[15:11]हैं वह ऐसे लफ्ज का इंतखाब कर रहे हैं कि जो इन
[15:15]तमाम अल्फाज में सबसे बेहतरीन लफ्ज है और ऐसा लफ्ज है कि
[15:21]जो परवरदिगार आलम के असमाए इलाही में से एक है और वह
[15:26]है वदू यानी दोस्त तो इमाम फरमा रहे अव दो बेहतरीन दोस्ती
[15:34]करना निस्फ उल अकल आधी अकल है यानी अगर अकल मंदी को
[15:42]आप 100% की एवरेज में रखें तो अकल मंदी के चीजों के
[15:45]अंदर अकल मंदी के मफा के अंदर मैयारा के अंदर वह चीज
[15:52]जो सबसे ज्यादा अकल को घेर है वो दोस्ती है क्यों इस
[15:58]दोस्ती के अलावा बाकी जो 50 फीसद है उसके अंदर अकल की
[16:01]दूसरी चीजें आ जाएंगी मसलन अल हया मिनल अकल हया अकल में
[16:06]से है इसी तरीके से इंसान का जिक्र करते रहना यह अकल
[16:11]में से है बहुत सारी चीजें उसूल काफी के अंदर एक पूरा
[16:13]बाब है बाबल अकल वल जहल उसके अंदर अकल की फेहरिस्त है
[16:19]कि कौन-कौन सी चीजें अकल मंदी में से हैं वह सब 50
[16:25]पर एक जगह पर और % दोस्ती एक जगह पर इंसान के
[16:30]तमाम कामों का दारो मदार उसकी अच्छी दोस्ती पर है जहां उसकी
[16:34]अच्छी सोहबत होगी खुद बखुदा हो जाता है सवात पढ़े मोहम्मद वा
[16:38]आले मोहम्मद पर सल्ले अला मोहम्मद वा आले मोहम्मद इमाम जवाद अल
[16:47]सलाम फरमाते हैं कि दोस्ती इंसान किसकी खातिर करे पैसे की खातिर
[16:53]नहीं माल की खातिर नहीं बैंक बैलेंस की खातिर नहीं जायदाद की
[16:55]खातिर नहीं अच्छी पार्टी के साथ मुंस होने की खातिर नहीं इज्जत
[17:00]शोहरत की खातिर नहीं मकाम की खातिर नहीं किस खातिर मन स्तफा
[17:08]अन फला फफा बतन फल जन्ना जो शख्स भी खालिस अल्लाह की
[17:15]तात करने के लिए किसी को अपना दोस्त बनाता है अल्लाह जन्नत
[17:18]में उसे घर अता कर दिया करता है सवात पढ़े मोहम्मद ले
[17:22]मोहम्मद सला मोहम्मद वाले मोहम्मद अब बाज अफराद यह कहते हैं जन्नत
[17:30]तो बाद में मिलेगी अभी तो यहां हम दुनिया में दोस्त बना
[17:33]ले नहीं ऐसा नहीं है जन्नत बाद में नहीं है इंस्टेंट जन्नत
[17:38]मिलने वाली है फौरन जन्नत मिलने वाली है नहीं मालूम इंसान को
[17:42]अभी यहां से निकलते वक्त किसकी आंख बंद होती है आंख बंद
[17:48]हुई मौला कायनात नहजुल बला में इरशाद फरमाते हैं मौत के आते
[17:51]ही या इंसान के लिए जन्नत है या दोजख है सवात पढ़े
[17:55]मोहम्मद वा आले मोहम्मद पर स अलाह मोहम्मद अगर अल्लाह के अलावा
[18:03]किसी और के लिए इंसान अपने आप को दोस्त अपनी दोस्ती बनाए
[18:06]तो कुरान के अंदर स्ट्रेट परवरदिगार आलम ने अपना उसूल बयान कर
[18:13]दिया [संगीत] अला बा इल मुकीन कयामत के दिन वह लोग जिन्होंने
[18:21]दुनिया में तो बहुत दोस्त दारी निभाई होगी दुनिया में तो एक
[18:26]दूसरे के बहुत पक्के पक्के दोस्त होंगे लेकिन अल्लाह की नहीं दुनिया
[18:31]की खातिर दोस्त होंगे कयामत के दिन यह सब एक दूसरे के
[18:34]दुश्मन होंगे एक दूसरे का गिरेबान पकड़ रहे होंगे सिवाय इल मुकीन
[18:41]उन लोगों के कि जिन्होंने अल्लाह की खातिर एक दूसरे को दोस्त
[18:45]बनाया होगा सवात पढ़े मोहम्मद ले मोहम्मद पर सला मोहम्मद वा आले
[18:53]मोहम्मद इमाम जवाद अ सलाम फरमाते हैं मुजा अशरा बयार बुरे दोस्तों
[19:01]की सोहबत में बैठना यह बायस बनता है कि इंसान अच्छे और
[19:04]बेहतर अफराद के मुकाबले में उनके बारे में बद गुमानी करे मुलाकाल
[19:13]अवाने नुशरत न कान कला अच्छे दोस्तों से मुलाकात अकल की हिफाजत
[19:18]अच्छे दोस्तों से मुलाकात अकल की हिफाजत और अकल में इजाफे का
[19:25]बायस है चाहे यह मुलाकात बहुत ही कम लमहे के लिए हो
[19:28]इंसान अकलमंद शख्स से अगर दोस्ती करता है ऐसे अफराद से दोस्ती
[19:34]करता है कि जो नेक दोस्त है अच्छे दोस्त हैं उनके साथ
[19:40]अगर थोड़ी देर भी बैठता है तो यह बेहतर है और यह
[19:41]उसकी अकल की हिफाजत और उसके बढ़ने का बाइज बनता है इमाम
[19:46]जवाद अल सलाम ही फरमा रहे हैं अल मव तो करब मुस्तफा
[19:51]द दोस्ती वो वाली रिश्तेदारी है जो इंसान खुद हासिल करता है
[19:54]एक रिश्तेदारी है इंसान को जो अपने मां-बाप की जानिब से मिली
[19:59]है अपने आबा जानिब से मिली है वह खुदा की तरफ से
[20:00]इलहाम करता है खुदा की तरफ से मिली हुई है खुदा ने
[20:05]ही उसको इसका उसके साथ रिश्तेदार बनाया लेकिन दोस्त एक ऐसा रिश्तेदार
[20:11]है कि जिसे इंसान ने खुद अपने लिए इंतखाब किया है हजरत
[20:15]लुकमान ने अपने अल सलाम ने अपने बेटे से फरमाया या बनया
[20:21]ल कलील लावा मेरे प्यारे बेटे तुम दोस्त बना लो लेकिन यह
[20:32]हजार भी कम है लेकिन एक भी दुश्मन नहीं बनाना क्योंकि एक
[20:35]दुश्मन इन सब पर भावी है यही हदीस मौला कायनात फरमाते हैं
[20:42]ल कसीर अल साब हजार दोस्तों का होना कोई बहुत ज्यादा नहीं
[20:51]है इना द वाहिला क एक दुश्मन का होना यह बहुत ज्यादा
[20:53]है इमाम जवाद सलाम फरमाते मन इंसान जब अपने दोस्त को बना
[21:05]ले तो दोस्ती को बढ़ाने का तरीका क्या है इमाम जवाद फरमाते
[21:07]हैं जब भी चाहे इंसान अपनी दोस्ती को बढ़ाए तो अपने दोस्त
[21:14]को मखी अंदाज में पोशीदा अंदाज में तनहाई में नसीहत करे सबके
[21:18]सामने नसीहत ना करे सबके सामने ना टोके क्योंकि जिसने भी अपने
[21:25]दोस्त को छुपकर नसीहत की जान उसने उसे जीनत बख्शी और जिसने
[21:31]लानिया नसीहत की उसने उसकी तहीन की छठे इमाम इमाम जाफर साद
[21:39]अ सला सलाम इशाद फरमाते सला मोहम्मद वाले मोहम्मद मन कावा सला
[21:48]फलम का स का तुम अपने अगर दोस्त को चेक करना चाहते
[21:51]हो तो ऐसे चेक करो कि अगर वह तीन दफा तुम पर
[21:55]गुस्से हुआ हो तुम पर बरहम हुआ हो फिर भी उसने तुम्ह
[21:59]बद गोई ना की हो तुम्हें बुरा ना कहो तीन दफा गुस्से
[22:04]होने के बाद भी तो समझो कि यह तुम्हारा सबसे बेहतरीन दोस्त
[22:05]है एक मर्तबा सलवाद पढ़े मोहम्मद वा आले मोहम्मद पर सल्ले अला
[22:13]मोहम्मद ले गुफ्तगू को मुख्तसर करते हुए सिर्फ पांच ऐसी खुसूसियत जो
[22:19]अच्छे दोस्त में होनी चाहिए एक इंसान का दीनदार होना इंसान ऐसे
[22:23]दोस्त का इंतखाब करें कि जो दीनदार है अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु
[22:28]अ वसल्लम इरशाद फरमाते हैं दीनदार के साथ दोस्ती करना दुनिया और
[22:31]आखिरत का शरफ है ऐसे दोस्त को इंसान दोस्त बनाए कि जिस
[22:37]दोस्त को देखने से इंसान को खुदा की याद आ जाए चूंकि
[22:41]बाज लोग ऐसे होते हैं कि जो खालिसा इरत बात रखते हैं
[22:42]परवरदिगार आलम के साथ और वह तैयार होते हैं अल्लाह से मुलाकात
[22:47]के लिए जब वह अल्लाह से मुलाकात के लिए तैयार होते हैं
[22:50]उनका शौक माशे में नजर आता है कि बस हम जल्द परवरदिगार
[22:55]आलम से मुलाकात करें ऐसे अफराद को दोस्त बनाने से य होता
[23:00]है जब भी उनसे मुलाकात होगी खुदा याद आ जाता है बा
[23:02]तकवा अफराद से दोस्ती करे इंसान मौला कायनात फरमाते हैं अवान अला
[23:09]कद तकवा जितना ज्यादा तकवा हो जिस शख्स में उसको सब उससे
[23:15]उसे उतना ही दोस्त बनाओ छठे इमाम फरमाते हैं दोस्ती के लायक
[23:18]पांच सिफात का मालिक शख्स है एक वह कि जो इसके इख्तियार
[23:25]में है वह सब कुछ आपके भी इख्तियार में दे दे दूसरा
[23:30]किसी बड़ी पोस्ट या मकाम पर पहुंचने के बाद उसका आपसे रवैया
[23:34]तब्दील ना हो तीसरा उसका जाहिर और बातिन आपके साथ यसा हो
[23:41]चौथा अपनी इज्जत को तुम्हारी इज्जत समझे और अपनी जिल्लत को तुम्हारी
[23:44]जिल्लत महसूस करें और पांचवा कि जब भी तुम उसके पास बैठो
[23:50]तो तुम्हारे इल्म में इजाफा हो चौथी चीज जो इंसान देखे दोस्त
[23:53]बनाते वक्त उसकी अकल मंदी और दानिश मंदी है क्योंकि मौला कायनात
[24:00]फरमाते हैं ना द दन दोस्त से दाना दुश्मन बेहतर है वफादारी
[24:03]और अहद की पाबंदी करने वाला हो इंसान अगर वफादार दोस्त को
[24:09]रखेगा आखिरत भी उसकी कामयाब है दुनिया भी उसकी कामयाब है छठे
[24:12]इमाम फरमाते हैं लोगों के ज्यादा नमाज और रोजों से धोखा मत
[24:18]खाओ बल्कि उनकी सच्चाई और अमानतदीने आजमाओ और सबसे अहम बात जो
[24:24]छठे इमाम फरमाते हैं लाला तला कभी भी अपने दोस्तों को अपने
[24:34]सारे राज ना बता दो कभी भी अपने दोस्तों को अपने सारे
[24:37]राज ना बता दो सिवाय उन राजों के कि जो अगर तुम्हारा
[24:42]दुश्मन जान ले तब भी तुम्हें कोई नुकसान ना पहुंचे क्योंकि यही
[24:45]दोस्त कभी भी तुम्हारा दुश्मन हो सकता है मैंने अर्ज किया यह
[24:52]सारी वो अहदीस है कि जो मोमिनीन को मोमिनीन से दोस्त बनाने
[24:58]के लिए हैं वरना यहूदी और नसा के साथ दोस्ती की बात
[25:00]नहीं हो रही है आज भी अगर आप दुनिया में देखते हैं
[25:04]तो आपको नजर आएगा कि इसराइल या अमेरिका के साथ मुसलमानों में
[25:07]ही ऐसे मुल्क हैं कि जो उनके साथ दोस्ती की या तो
[25:12]ख्वाहिश मंद है या यह क्या अगर उनसे दोस्ती ना भी नहीं
[25:17]भी कर रहे हैं तो फिर भी किसी ना किसी तरीके से
[25:21]चाहे खामोश रहकर ही उनकी मदद कर रहे हैं सिवाय एक ही
[25:22]मुल्क के जो आपको नजर आएगा वाज तौर पर कुरान की इन
[25:27]आयतों पर अमल करता हुआ और वो ईरान का मुल्क है कि
[25:31]जो पाक कयादत के होते हुए आयतुल्लाह खाम आई की सरपरस्ती के
[25:37]अंदर आज आपको नजर आता है इसराइल और अमेरिका को आंखें दिखाता
[25:39]हुआ और यह सब चीजें जो आज आपको हालात नजर आ रहे
[25:43]हैं ये इमाम जमाना के जहूर से पहले की निशानियां में से
[25:47]एक निशानी है क्या आपको कुरान मजीद में यह आयत भी नजर
[25:50]आएगी कि कुरान की वाजे आयत है साफ वाजे है कि कयामत
[25:55]से पहले हम दुनिया में बस्तियों को बर्बाद कर देंगे तो नाबूत
[25:59]कर देंगे और जब यह एटम बम बने हैं तो यह फटने
[26:02]के लिए बने हैं यह संभालने के लिए नहीं बने यह डिस्पोज
[26:06]होने के लिए नहीं बने तो यह सारे हालात इस चीज की
[26:10]तरफ लेकर जा रहे हैं कि इमाम जमाना का जुहूर नजदीक है
[26:12]हम सबको उनकी तैयारी करनी है और तैयारी के साथ-साथ अपनी जिंदगी
[26:18]के अंदर मजलूम का साथ देना है और जालिम के दुश्मन रहना
[26:25]है क मौला कायनात ने अपनी वसीयत में फरमाया था अपने बच्चों
[26:31]से जालिम खमन लिल मजलूम नन के जालिम के दुश्मन बने रहना
[26:35]और मजलूम के मददगार बने रहना परवरदिगार आलम से ये दुआ है
[26:39]परवरदिगार आलम हमें मोहम्मद और आले मोहम्मद की सीरत पर अमल पैरा
[26:45]होने की तौफीक इनायत फरमाए परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद और आले मोहम्मद
[26:49]का इमाम जमाना के जहूर में ताजल फरमा हमें उनके आवान अंसार
[26:52]में शामिल फरमा परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद और आले मोहम्मद का दुनिया
[26:58]में जहां कहीं भी मोमिनीन मजलूम है परवरदिगार उन्हें अपने जुल्म उनको
[27:02]जुल्म से निजात इनायत फरमा परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद और आले मोहम्मद
[27:06]का जो मोमिनीन असीर है उन्हें असीरी सेई इनायत फरमा जो मोमिनीन
[27:09]बीमार है उन्हें शिफा कामला राजिला इनायत फरमा परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद
[27:15]और आले मोहम्मद का अल्लाहुम्मा जालिमीन जालिमीन जालिमीन को जालिमीन से लड़ा
[27:20]दे परवरदिगार तुझे वास्ता मोहम्मद और आले मोहम्मद का हम सबके तमाम
[27:25]मरहन की मगफिरत फरमा इमाम जमाना के जहूर में ताजल फरमा हम
[27:28]उनके आवान अंसार में शामिल फरमा रब्बना तकल मिना इनका अंत समी
[27:35]अलीम
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