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Imam Hussain (a.s) Jeete ya Haare? | Power of Imam Hussain (a.s) | Youth Vibes
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24/07/28
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Lectures
#PowerofImamHussain #Ashura #Media_Sabeel #YouthVibe Imam Hussain (a.s) Jeete ya Haare? | Power of Imam Hussain (a.s) | Youth Vibes Want to Support us. Donate us now... Contact on WhatsApp +918928514110
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Transcript
[0:00]तो क्या इमाम हुसैन अल सलातो वसलाम जीत गए पूरी तरह से
[0:04]कामयाब हुए अगर तुम अशद अला इलाह इल्लल्लाह की गवाही देते हो
[0:09]यानी हुसैन कामयाब कैसे मुमकिन हो सकता है कि एक अकलमंद इंसान
[0:14]यह कहे कि इमाम हुसैन जीत गए हम शियों का तकाजा सवाल
[0:19]करने वालों से यही है कि हमसे सवाल किया जाए इससे पहले
[0:23]कि हमारे इकम के बारे में कोई फैसला किया जाए जब भी
[0:26]कोई गिरोह किसी जंग में या किसी मुकाबले में जीतता है तो
[0:31]वो उसके लिए खुशी मनाता है आप लोग जो है वो गमगीन
[0:37]लिबास पहन रहे हैं तो यह कैसे आप साबित करेंगे कर्बला के
[0:39]दो रुख है पहला रुख कामयाबी का है और दूसरा रुख मजलूम
[0:43][संगीत] का मौलाना साजिद अली साहब सलाम वालेकुम वालेकुम अ सलाम एक
[0:52]बार फिर आपका खैर मकदम इस प्रोग्राम में मौलाना साहब कर्बला के
[0:54]मैदान में इमाम हुसैन का खानदान आल दोस्त अहबाब सब शहीद कर
[1:00]दिए गए हत्ता खवातीन को असीर कर लिया गया बच्चों को जो
[1:05]है असीर कर लिया गया सब कुछ उजड़ गया तो फिर यह
[1:09]कैसे मुमकिन हो सकता है कि एक अकलमंद इंसान यह कहे कि
[1:11]इमाम हुसैन जीत गए बिस्मिल्लाह रहमान रहीम व सल्ला अला नबीना मुहम्मद
[1:15]तारीन कोई भी इंसान कोई भी मुनसिफ इंसान जो कर्बला के वाक
[1:22]को पढ़ेगा उसका मुताल करेगा वह इसी नतीजे तक पहुंचेगा कि इमाम
[1:25]हुसैन अल सलाम की जीत हुई और यजीद की हार हुई जरूरी
[1:29]है कि कर्बला के वा को टोटलिटी में देखना पड़ेगा कर्बला के
[1:34]वाकए को ब्रॉडर पर्सपेक्टिव से देखना पड़ेगा और यह देखना पड़ेगा कि
[1:38]जो वाकई में अफराद शामिल थे खुद वो इस वाकए को क्यों
[1:43]बरपा करना चाहते थे किसी भी जंग में किसी भी मुकाबले में
[1:45]जीत और हार का मेयार क्या है कैसे डिफाइन होगा कैसे मालूम
[1:49]होगा कि कौन जीता और कौन हारा यह हमें मालूम होना बहुत
[1:52]जरूरी है अगर हम देखें कि किसी एक फर्द की एक इंडिविजुअल
[1:56]की दूसरे इंडिविजुअल से जंग है किसी मसले में कोई लड़ाई है
[2:01]तो इसमें जो इंडिविजुअल भी गालिब आ जाए वो कामयाब हो गया
[2:04]लेकिन अगर जंग नजरिया की होगी अगर जंग आइडियो जीी की होगी
[2:09]अगर जंग अहदा की और अफक की होगी तो हर मुंसिफ इंसान
[2:14]यही जवाब देगा कि जिसके नजरिया कामयाब होए या बाकी रहे जिसके
[2:17]अहदा मुह कक हुए जो अपने हद तक पहुंचा जिसने अपने मोटिव
[2:24]को सक्सेसफुली अचीव किया वही शख्स कामयाब है तो हम जब कहते
[2:27]हैं कि इमाम हुसैन अलैहि सलाम कर्बला के मैदान में कामयाब हुए
[2:32]करब के वाकए में फतिया हुए तो यकीनी तौर पर हम इसी
[2:33]बात को मद्देनजर रख के कहते हैं कि इमाम हुसैन अल सलाम
[2:37]की जंग अहदा फ की जंग थी इमाम हुसैन अल सलाम की
[2:42]जंग आइडियो जीी की नजरिया की जंग थी और इमाम हुसैन की
[2:47]इस जंग में कामयाबी आइडियो कल कामयाबी थी जिसके शवा हैद और
[2:51]जिसकी दलीलें हमारे पास पूरी तरह से मौजूद यानी मौलाना साहब एक
[2:54]आईडियोलॉजी इमाम हुसैन की थी एक आईडियोलॉजी जो है वो यजद की
[3:00]थी क्या आइडियल जीी थी इमाम हुसैन की जिसको वह पहुंचाना चाहते
[3:02]थे जिसकी बिना पर आज शिया हजरात जो कहते हैं कि इमाम
[3:07]हुसैन अल सलाम जीत गए तो वो आईडियोलॉजी क्या थी इमाम हुसैन
[3:09]अल सलाम की देखिए कर्बला के वाकए में दो फरीक हैं दो
[3:15]पार्टीज हैं जो आपस में बड़ सरे बैकार हैं एक हिज वो
[3:21]है कि जिसका लीडर यजीद है और उसके कुछ स्पेसिफाइड मोटिव्स हैं
[3:24]कर्बला के वाक में और दूसरा हिज्ब और दूसरा ग्रोह वो है
[3:27]जिसके लीडर जिसके रबरा इमाम हुसैन अल सलाम और उनके भी इस
[3:33]वाकए में कुछ खास स्पेसिफिक अहदा है यजद के अहदा क्या हैं
[3:38]सबसे पहला हद जो यजद का इस जंग के सिलसिले में था
[3:42]वो यह था कि वो इमाम हुसैन अल सलाम से बैत लेना
[3:43]चाहता था सवाल होगा कि यजद क्यों इमाम हुसैन से बैत लेना
[3:48]चाहता था जबकि कई मुसलमानों ने उस जमाने में यजद की बैत
[3:52]की हुई थी तो उसे क्या जरूरत थी कि इमाम हुसैन अलैहि
[3:54]सलाम की बैत पर इसरार करें कि इमाम बैत कर ले तो
[3:59]इसका जवाब यह होगा कि वो खुद जानता था उनकी सबसे ज्यादा
[4:03]अहमियत और हैसियत है और अगर इमाम हुसैन अल सलाम उसकी बैत
[4:05]कर लेते तो वह इस तरह से अपने मकसद में कामयाब होता
[4:10]कि वह तमाम उम्मते मुस्लिमा पर इस बात को दलील के तौर
[4:15]पर कायम कर देता कि हां अगर हुसैन इब्ने अली अल सलाम
[4:17]ने बैत कर ली तो इसकी हुकूमत लेजिटीमेट है तो सबसे पहली
[4:22]बात हुकूमत की लेजिटिमेसी थी जवाजी हासिल करना इमाम हुसैन से बैत
[4:27]लेने के जरिए और दूसरी बात यह भी थी कि व इस
[4:31]बात को महसूस कर रहा था कि मेरे लिए जाती तौर पे
[4:34]जो मुसलमानों के दरमियान तसव्वुर है वो यह है कि मैं कोई
[4:36]बहुत दीनदार इंसान नहीं हूं और अगर इमाम हुसैन को अपने साथ
[4:41]कर लेता तो लोग कहते कि अगर हुसैन जैसी शख्सियत ने इसका
[4:45]साथ दिया यानी ये दीनदार आदमी होगा इसके बारे में जो बातें
[4:48]अफवाह के तौर पर फैली वो सब अफवा ही हैं वरना मुमकिन
[4:53]नहीं है कि हुसैन जैसी शख्सियत इसका साथ दें तीसरा हद यजद
[4:58]का यह था कि वो इमाम हुसैन अलैहि सलाम अहले बैत अल
[5:01]सलाम और खुद कुरान इस्लाम शरीयत इन सब का खात्मा चाहता था
[5:08]और वह दरबार में अपने जब अहले हरम हाजिर किए गए तो
[5:13]इस बात को शराब के नशे में कहता भीला बत हाशिम बिल
[5:14]मुल्क फला खबर उन जा वला वही नजल यह बनी हाशिम का
[5:20]मुल्क के लिए इक्दर्म था ना आसमान से कोई खबर आई ना
[5:26]कोई वही आई यानी ना कुरान की कोई हकीकत है ना शरीयत
[5:27]की कोई हकीकत है उसका सबसे बड़ा मकसद था और यह मकसद
[5:32]खुद यजद का नहीं था यह मकसद हमें यजद के आबा अजदाद
[5:36]में भी नजर आया कि इस्लाम की जो इब्तिदा जंगे जितनी भी
[5:38]पैगंबर अकरम के खिलाफ जंगे हुई हैं वो सब यजीद के ही
[5:43]बाप दादा की शुरू की हुई जंगे थी और उन्होंने पूरी कोशिश
[5:47]की हत इमकान कि इस्लाम का खात्मा किया जाए पैगंबर इस्लाम का
[5:50]खात्मा किया जाए ये सब वही सिलसिला है जो इस्लाम को मिटाने
[5:55]की कोशिशें कर रहा था तो यजद का एक अहम हद यह
[5:58]था कि इस्लाम का खात्मा हो और यह बात भी यजद की
[6:02]जबानी साबित है वोह कहता है ताशिया बद्र शहीद मेरे वो बुजुर्ग
[6:05]जो बद्र के मैदान में कत्ल हुए ऐ काश वो अभी देखते
[6:09]कि मैंने किस तरह से बद्र ओहद का इंतकाम ले लिया यानी
[6:11]कर्बला की जंग में वो कुफर जो बद्र ओहद की जंग में
[6:16]मारे गए थे उनका इंतकाम भी शामिल था अमीरुल मोमिनीन का इंतकाम
[6:20]जो खुद कर्बला के मैदान में जब इमाम हुसैन अल सलाम ने
[6:22]फौज अकिया से दरयाफ्त किया कि तुमने क्यों मुझसे जंग का इरादा
[6:28]किया क्या मैंने किसी हलाल को हराम क्या मैंने शरी में तब्दीली
[6:31]अंजाम दी तो उन्होंने कहा ब अबक आपके बाप की दुश्मनी ने
[6:36]हम सबको यहां तक लाने पर मजबूर किया कि हम आपको कत्ल
[6:39]करें और आपसे इंतकाम ले तो यह तमाम बातें हैं जिनसे यह
[6:43]बात पूरी तरह से वाज होती है कि यजद का मोटिफ क्या
[6:47]था इमाम हुसैन अल सलाम के खिलाफ जंग करने में यजीद के
[6:52]अपने अहदा क्या थे दूसरी तरफ इमाम हुसैन अल सलाम का मकसद
[6:54]क्या था इमाम ने वाज तौर पर हर कदम पे हर गाम
[6:58]पे इस बात को बयान किया कि अगर मैं म कर रहा
[7:01]हूं तो मेरा मकसद क्या है इनमा खरतला जदी मैं सिर्फ और
[7:07]सिर्फ इसलिए कयाम कर रहा हूं यजीद के खिलाफ यह तहरीक य
[7:10]रेवोल्यूशन इजाद कर रहा हूं क्योंकि मैं अपने जद की उम्मत में
[7:15]इस्लाह चाहता हूं तो पहला मकसद इमाम का इस्लाह था दूसरा मकसद
[7:17]यह था कि इमाम खुद उसी यजीद की हकीकत को वाज तौर
[7:22]पर तमाम मुसलमानों के सामने खोलकर बयान करना चाहते थे और इसीलिए
[7:28]दरबार वलीद में इमाम ने इस बात को रोशन भी किया कि
[7:30]यजद एक रजु फास है शार बुल खमर है नफ्स मोहतरम का
[7:35]कत्ल करने वाला है मांओं बहनों की इज्जत का ख्याल नहीं रखने
[7:40]वाला है और मिसली लायबा मिसला मुझ जैसा यजद जैसे की बैत
[7:43]नहीं कर सकता है यहां से इमाम हुसैन ने इस बात को
[7:47]वाज कर दिया कि एक तरफ इमाम हुसैन का मकसद अगर यह
[7:52]है कि उम्मत की इस्लाह हो यजीद का मकसद कबीला खानदान आबा
[7:54]अजदाद और नस्ल यह तमाम चीजें थी कि इनको बाकी रखना हुकूमत
[8:02]को बाकी रखना इक्दर्म के तमाम बयानात का मुताल करे तो उसके
[8:09]लिए वाज हो जाएगा कि इमाम इन्हीं बातों को कर्बला के मैदान
[8:11]तक पहुंचने से पहले हर मंजिल पर बयान करते हुए आगे बढ़
[8:16]रहे थे जितनी मंजिलें इमाम हुसैन अल सलाम ने कर्बला के रास्ते
[8:19]में ली हर जगह इमाम हुसैन अल सलाम ने अपने अहदा को
[8:23]वाज तौर पर बयान किया ठीक है मौलाना साहब आपने बयान किया
[8:25]कि जंग जो है वह दो तरह की होती है एक फिजिकल
[8:30]जंग है आमने-सामने दो लोग हैं और वोह जंग कर रहे हैं
[8:35]और एक आइडियो जीी की जंग होती है सोच की जंग होती
[8:40]है फिकरी जंग होती है तो क्या इमाम हुसैन अल सलातो वस्सलाम
[8:42]अपनी इस जंग में आईडियोलॉजी की जंग में अपनी फिकरी जंग में
[8:47]जीत गए क्या वह कामयाब हुए इस जंग में पूरी तरह से
[8:49]कामयाब हुए और हमारे पास उस कामयाबी की दलीलें हैं इसी वजह
[8:54]से हम कहते हैं कि इमाम हुसैन अल सलाम इस जंग में
[8:58]इस मारके में कामयाब है और उसकी दलील क्या है सबसे पहली
[9:00]बात इमाम के साथ जितने भी अफराद कर्बला के मैदान में मौजूद
[9:05]थे किसी ने भी उनमें से यजद की बैत नहीं की यह
[9:09]पहली दलील दूसरी दलील ये कि इमाम के साथ जो खवातीन आई
[9:11]थी जो बच्चियां आई थी इमाम के साथ दीगर जो अफराद आए
[9:15]थे जो कर्बला के मैदान में शहीद नहीं हुए बल्कि असीर करके
[9:19]ले जाए गए बहुत ही जिल्लत के साथ और सख्ती हों के
[9:21]साथ और मुसीबतों के साथ उनको कर्बला से कूफा और कफे से
[9:27]शाम का सफर तय करना पड़ा लेकिन कभी हमें किसी मकाम पर
[9:31]किसी झूठी से झूठी तारीख या रिवायत में यह बात नहीं मिली
[9:33]कि उनमें से किसी बच्ची ने भी यह कह दिया हो कि
[9:38]हम अब मजीद सूबतब बर्दाश्त नहीं कर सकते यजद की बैत कर
[9:43]ली जाए ताकि हमें इत्मीनान हासिल हो जाए मुसीबतों से रिहाई मिल
[9:46]जाए किसी भी अहले खाना ने किसी भी अहले हरम ने यजद
[9:50]की बैत नहीं की बहुत सारे हुक्का आए बनी उम के और
[9:55]बनी अब्बास के लेकिन तारीख गवाह है कि इमाम रजा अल सलाम
[9:57]के दौर में खिलाफत पेश तो की गई वली अहदी पेश तो
[10:01]की गई लेकिन कभी बैत का मुतालबा नहीं किया गया यानी इस
[10:05]तरह से एक मिसाल और नजीर कायम की गई इमाम हुसैन की
[10:07]जानिब से कि फिर कभी किसी भी हुकूमत ने इस खानदान से
[10:12]लेजिटिमेसी हासिल करना और इस खानदान को इस्तेमाल करके अपने सियासी मकास
[10:17]को चमकाने का रास्ता इख्तियार करने की हिम्मत और जुरत नहीं की
[10:23]एक बात ये दूसरी बात यह कि इमाम हुसैन अल सलाम का
[10:28]मकसद था कि यजद के खिलाफ एक बेदारी ईजाद की जाए और
[10:29]यजद की हकीकत को कयामत तक के लिए तमाम मुसलमानों और तमाम
[10:34]इंसानों के लिए रोशन किया जाए तो हम यह देखते हैं कि
[10:39]वह बेदारी खुद कर्बला के मैदान से ही ईजाद होना शुरू हुई
[10:41]और लोगों में शऊर आया वो लोग या कम से कम एक
[10:45]मिसाल के तौर पर जनाबे खर को अगर आप तसव्वुर करें तो
[10:48]यह वो है जो सबसे पहले इमाम हुसैन अल सलाम के खिलाफ
[10:52]आए हैं और एक दस्ता एक लश्कर लेकर आए हैं इमाम हुसैन
[10:56]के खिलाफ लेकिन इमाम हुसैन ने इस तरह से अपने अदाफैस से
[11:00]अपनी हकीकत को और यजीद की हकीकत को उनके सामने बयान किया
[11:05]कि शबे आशूर र जैसा शख्स भी इमाम हुसैन अल सलाम की
[11:10]फौज में शामिल होने पर मजबूर हो गया उसे यह मालूम हो
[11:12]गया कि यह जंग सिर्फ ग्रहों लश्कर की जंग नहीं है क्योंकि
[11:17]अगर वो यह सोच रहा होता कि यहां पे जंग गलबा हासिल
[11:21]करने के लिए है इक्दर्म हुसैन अल सलाम की फौज में अगर
[11:29]शामिल हो जाऊंगा तो मारा जाऊंगा अगर मारा जाऊंगा तो फिर कौन
[11:31]सा गलबा फिर कौन सा इकद फिर कैसी हुकूमत लेकिन इन तमाम
[11:35]बातों को कबूल करते हुए कि मौत हतम है शहादत तमी है
[11:40]वह इमाम हुसैन की फौज में शामिल होता है और खुद यह
[11:41]शामिल होना सबसे बड़ा तरा है इस बात का कि इमाम हुसैन
[11:45]अलसलाम कामयाब हुए इस बात को दुनिया के सामने पेश करने के
[11:50]लिए कि एक आइडियो जिकल जिंग थी और अपनी आइडियो जीी को
[11:52]इमाम हुसैन अलैहि सलाम ने सबसे पहले लश्करए यजद के लिए वाज
[11:56]कर दिया जिसके असरात जाहिर होने लगे खुद कर्बला के मैदान में
[11:59]इस जंग के खात्मे के बाद हमें मिलता है कि खातून मैदान
[12:04]में आती है और कहती या लरा रसूलल्लाह और एक खातून जो
[12:09]कि बजहर सिफे निस्वा से ताल्लुक रखती है वो यजद की फौज
[12:12]के खिलाफ इमाम हुसैन अल सलाम के कत्ल का इंतकाम लेने के
[12:16]लिए और इमाम हुसैन के हक में लड़ने के लिए सामने आ
[12:21]जाती है तो यही जब लश्कर और यही असीरों का काफिला जब
[12:23]कूफा पहुंचता है तो हम देखते हैं कि जनाबे जैनब के एक
[12:28]खुदबुदा जो अभी इमाम हुसैन अल सलाम के हामी नहीं थे जो
[12:33]यह समझ रहे थे कि एक बागी ग्रह है वो जनाबे जैनब
[12:38]के [संगीत] खुतबा वह बेदारी ईजाद होती है और उसके बाद खुद
[12:43]शाम में जो मुख्तलिफ अफराद जैसे जैसे यह जानते हैं कि यह
[12:47]वही अहले बैत हैं जिनके बारे में कुरान में आयात नाजिल हुई
[12:49]है वो शाम में बगावत करने लगते हैं और नतीजा यह होता
[12:54]है कि खुद यजीद को ना चाहते हुए इब्ने जद की मजम्मत
[12:59]करनी पड़ती कल्ला जाना खुदा बुरा करे इस इब्ने मरजाना का मजबूर
[13:02]हो गया जबकि पूरी तरह से वह इस वाकए में शामिल है
[13:07]अहले हरम को असीर करके लाया है उनको जलील और रुसवा करना
[13:12]चाहता है लेकिन बगावत को देखकर अब उसने फौरन अपना हरबा तब्दील
[13:14]किया कि नहीं मुझे कोई ऐसा स्टैंड लेना चाहिए जिस स्टैंड से
[13:19]ये वाज हो कि नहीं मैं इसमें शामिल नहीं हूं अगर यजीद
[13:20]कामयाब हुआ था अगर यजद को जीत हासिल हुई थी अगर फतिया
[13:25]हुआ था तो अपना स्टैंड क्यों तब्दील कर रहा है अपना मौक
[13:30]क्यों तब्दील कर रहा है यानी धीरे-धीरे हर मौके पर हर महाज
[13:32]पर इस बात का ऐलान होता गया इस बात को रोशन किया
[13:36]जाता रहा अहले हरम के जरिए से कि इमाम हुसैन को कामयाबी
[13:40]हुई है और खुद हमें मिलता है तारीख में कि उसके बाद
[13:42]एक के बाद एक जो उम्मत में बेदारी आई तव्वा बीन का
[13:46]इंतकाम तवाब का जो लश्कर आमादा हुआ जनाबे मुख्तार का जो कयाम
[13:52]था जनाबे जैद का कयाम जनाबे यया बिन जैद का कयाम वो
[13:54]जो वाक हुआ और जिसमें मजीद अलवियो ने और दीगर मुसलमानों ने
[14:01]मिलके कयाम किया यह सब उसी कर्बला के नताइएपीजीईटी खुदा की कसम
[14:33]तू हमारे जिक्र को मह नहीं कर सकता मिटा नहीं सकता और
[14:38]हमारी वही का खात्मा नहीं कर सकता क्यों जनाबे जैनब यह बातें
[14:40]कह रही क्योंकि जनाब जैनब को यह बात मालूम है कि यजद
[14:45]का मकसद जिक्र अहले बैत मिटाना है यजीद का मकसद कुरान और
[14:51]इस्लाम और शरीयत की पामा और उसे नाबूत करना लेकिन जनाबे जैनब
[14:53]चैलेंज कर रही हैं कि तू हरगिज अपने मकसद में कामयाब नहीं
[15:00]होगा कि अपनी तमाम कोशिशों को बरू एकार ले आ लेकिन तू
[15:02]अपने मकसद में कामयाब नहीं होगा यानी जनाबे जैनब इस बात को
[15:06]वाज कर रही है कि तेरा जो मकसद था तू उस मकसद
[15:10]में नाकाम हो रहा है और होगा और हमारा जो मकसद था
[15:13]हम उस मकसद में कामयाब है और जब इमाम सज्जाद अलैहि सलाम
[15:15]से किसी ने पूछा कि यह जो कर्बला का वाकया हुआ और
[15:20]यह जो जंग हुई इसके नतीजे में कौन गालिब आया कौन कामयाब
[15:23]हुआ किसे फत याबी हुई तो इमाम सज्जाद अल सलाम फरमाते हैं
[15:28]कि अगर तुम्हें ये देखना है कि कौन कामयाब हुआ तो इंतजार
[15:33]करो कि नमाज का वक्त हो जाए जब नमाज का वक्त हो
[15:34]तो अजान देना इकामत कहना खुद बखुदा अनला इलाह इल्लल्लाह की गवाही
[15:44]देते हो यानी हुसैन कामयाब है अगर तुम अशद अन्न मोहम्मद रसूलल्लाह
[15:46]की गवाही देते हो यानी मैं गवाही देता हूं कि मोहम्मद अल्लाह
[15:52]के रसूल हैं इस गवाही से हुसैन की कामयाबी का ऐलान हो
[15:53]रहा है मेरे बाबा की कामयाबी का कैसे मेरे बाबा की कामयाबी
[15:58]का ऐलान हो रहा है क्योंकि मेरे बाबा ने इन्हीं अकदर की
[16:00]इन्हीं उसूलों की हिफाजत के लिए कर्बला की जंग में शिरकत की
[16:06]और इस कयाम को वजूद दिया ठीक है इमाम हुसैन अल सलातो
[16:11]वसलाम अपनी इस आईडियोलॉजी की जंग में जीत गए और उन्होंने जो
[16:13]मकसद था अपना वह पहुंचाया और आपने इस बात को दलीलों के
[16:18]जरिए से साबित भी किया और हमारे लिए भी क्लियर हुआ और
[16:22]नाजरीन के लिए भी हमारे क्लियर हो गया होगा मौलाना साहब जब
[16:25]इमाम हुसैन अल सलाम जीत गए तो जब भी कोई गिरोह किसी
[16:32]जंग में या किसी मुकाबले में जीतता है तो वह उसके लिए
[16:39]खुशी मनाता है और उसको सेलिब्रेट करता है ना कि यह कि
[16:41]जीतने वाला गिरोह जो है वह गम मनाए आप लोग जो है
[16:46]वह गमगीन लिबास पहन रहे हैं तो यह कैसे आप साबित करेंगे
[16:52]यह आपका सवाल बहुत अच्छा है और हम शियों का तकाजा सवाल
[16:54]करने वालों से यही है कि हमसे सवाल किया जाए इससे पहले
[16:58]कि हमारे इकम के बाद में कोई फैसला किया जाए आप हमसे
[17:01]पूछे कि हम क्यों गम मनाते हैं आप हमसे पूछे कि हम
[17:03]क्यों आंसू बहाते हैं तो हम आपको ये जवाब देंगे हमारे पास
[17:07]ये जवाब है मौजूद और यही जवाब इसका अकली और कत जवाब
[17:12]है कि कर्बला के दो रुख है पहला रुख यह है कि
[17:16]कर्बला में इमाम हुसैन अलैहि सलाम को वाज कामयाबी हासिल हुई वाज
[17:18]जीत हुई इमाम हुसैन अल सलाम दूसरा रुख यह है कि कर्बला
[17:22]के मैदान में इमाम हुसैन अलैहि सलाम को और उनके साथियों को
[17:25]बेदर्दी से शहीद किया गया वो जुल्म ढाया गया जिस जुल्म की
[17:30]फिर कायनात में कोई नजीर नहीं मिलती है तो कर्बला के दो
[17:35]रुख हैं पहला रुख कामयाबी का है और दूसरा रुख मजलूम का
[17:37]अब आप आइए और देखिए कि शिया किस तरह से कर्बला की
[17:41]याद मनाते हैं हम हर बार जब भी कर्बला को याद करते
[17:45]हैं तो इन दोनों रुख को मद्देनजर रख के कर्बला को याद
[17:49]करते हैं एक रुख कामयाबी का है अगर आप हमारी मजलिस को
[17:50]देखें तो इस मजलिस में वो दोनों रुख हैं वो कामयाबी का
[17:55]रुख हम उसके बारे में बयान करते हैं कि किस तरह से
[17:59]इमाम हुसैन ने अपने अहदा में कामयाब हासिल की हमारी मजलिस अगर
[18:01]एक घंटे पर मोहीत होती हैं तो उसमें 50 मिनट इमाम हुसैन
[18:05]अल सलाम की कामयाबी बयान करते हैं हम यह बयान करते हैं
[18:06]किस तरह से इमाम हुसैन को अपने एक-एक हद में कामयाबी हासिल
[18:11]हुई और यह बयान करते हैं कि इमाम हुसैन अलैहि सलाम ने
[18:15]कर्बला में जो कयाम किया वो एक तहरीक थी एक मूवमेंट थी
[18:17]आज भी हम किस तरह से इमाम हुसैन के नक्श कदम प
[18:21]चल के उनकी सीरत की पैरवी करके उन्हीं कामयाब हों को हासिल
[18:26]कर सकते और दूसरा रुख जो मजलूम का रुख है उस रुख
[18:28]पर हमस बह आते हैं उस रुख पर हम सीना जनी करते
[18:32]हैं गिरिया करते हैं अजादारी करते हैं और यह अजादारी भी हमारी
[18:37]बे मकसद नहीं है इस अजादारी का भी हमारे यह मकसद है
[18:39]कि लोगों के जज्बात को एहसास को इमाम हुसैन अलैहि सलाम की
[18:45]मजलूम की तरफ लाया जाए और इसके जरिए उसी तहरीक को मजीद
[18:47]बेहतरी के साथ मजीद जोर और शोर के साथ आगे बढ़ाया जाए
[18:52]बहुत शुक्रिया मौलाना साहब आपने जो है व बहुत ही अच्छे अंदाज
[18:57]में और बहुत ही खुश उलब के साथ जो है वो इन
[19:00]बातों को बयान किया और सारे सवालात के आपने जवाब दिए जैसा
[19:02]कि आपने बयान किया कि दो तरह की जंग होती है एक
[19:06]फिजिकल जंग है मैदान में जंग होना यानी आमने-सामने जंग होना और
[19:11]एक आइडियल जीी की और फिकरी जंग होना तो क्या हम आज
[19:13]के दौर में हम लोग क्या इस आइडियो जीी की जंग में
[19:18]अपना कोई किरदार पेश कर सकते हैं क्या हमारा भी कोई किरदार
[19:22]इस जंग में हो सकता है आज के इस जमाने में बिल्कुल
[19:24]और इमाम हुसैन अलैहि सलाम के इस वाक कर्बला को अगर कोई
[19:31]इस निगाह से देखता है कि सन 61 हिजरी का 61 हिजरी
[19:35]का एक वाकया था और उसी जमाने तक महदूद था तो उसने
[19:37]कर्बला के वाकए को और इमाम हुसैन अल सलाम की इतनी बड़ी
[19:42]कुर्बानी को गोया बर्बाद कर दिया और वह समझ नहीं सका कि
[19:45]इमाम हुसैन का मकसद क्या था लेकिन अगर कोई शख्स इमाम हुसैन
[19:49]अलैहि सलाम के इस वाकए को वाक आइडियो जिकल अंदाज से देखता
[19:54]है आइडियो जिकल पर्सपेक्टिव से देखता है तो इमाम हुसैन ने हुसैनिया
[19:58]का एक नारा एक शियार इस दुनिया के हवाले किया है और
[20:03]यजदी के किरदार को भी दुनिया के लिए वाज किया और जब-जब
[20:05]कभी भी तारीख में ऐसा वाकया यानी जुल्म और बरबरी का तशदूद
[20:11]का वाकया दोबारा रहनुमा होगा तो हुसैनिया की जरूरत पड़ेगी उस आइडियो
[20:15]जीी की जरूरत पड़ी आज के दौर में अगर ऐसे मजलि दोबारा
[20:19]रोनु मा होते हुए हमें नजर आ रहे हैं तो इमाम हुसैन
[20:23]अलैहि सलाम की सीरत की पैरवी इंतिहा जरूरी है हुसैनिया का शिर
[20:26]इंतहा जरूरी और कयामत तक जब-जब ऐसे वाकत नमा होते रहेंगे तो
[20:32]इमाम हुसैन की यह पेश की हुई आइडियो जीी तमाम इंसानियत के
[20:35]लिए ना सिर्फ शियों और मुसलमानों के लिए बल्कि तमाम इंसानियत के
[20:38]लिए मिशल राह साबित होती रहेगी [संगीत]
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