التالي
2 المشاهدات · 24/02/13
13 المشاهدات · 13/02/25
9 المشاهدات · 24/07/28
11 المشاهدات · 25/06/11
7 المشاهدات · 17/02/15
7 المشاهدات · 17/04/29
Mola Ali A.S kay Zara e Amdani | H.I. Mujahid Hussain Damani
0
0
22 المشاهدات·
24/07/29
في
آخر
Record date: 05 feb 2023
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
For more details visit:
📡 www.almehdies.com
🖥 www.facebook.com/aLmehdies313
🎥 www.youtube.com/almehdies
🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
أظهر المزيد
Transcript
[0:12]बिस्मिल्ला [संगीत] हिम अल्हम्दुलिल्लाह [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] रब बेशरम कहु kahuli अम्मा
[2:45]बाद फकत कौल बक है वो अली सलाम तकाजा अली खिदमत फाका
[2:55]जेल फ़ातिमा खिदमत maduvab वाका जेल अली फूड falawat अल्लाह मोहम्मद वाले
[3:07]मोहम्मद हान हान सर आपके सामने पेश करते हैं यानी आप यह
[3:56]समझ में हुआ 20 साल के अविषेक से तकरीबन यह सिलसिला जारी
[3:59]है 19 साल 20 साल से यह सिलसिला जारी है तो आज
[4:05]भी हमारी गुफ्तगू इंशाअल्लाह tahkhate की होगी और एक रिसर्च होगी वह
[4:10]गुफ्तगू इस उनवान से मुतालिक है की हमने maulaaye कायनात अली सलातो
[4:18]अस्सलाम और बचपन से लेकर अब तक हम मौला के फजल से
[4:31]आशना होते रहते हैं और सुनते रहते हैं कुछ हिस्से ऐसे हैं
[4:42]जो पोशीदा हैं जिनके बारे में भी अचानक होनी चाहिए मदीने में
[5:14]ऐसी हुकूमत किस तरीके से कायम कर दी क्या आज तक उसे
[5:19]दिन के मानने वाले मौजूद है और उसे दिन पर अमल करने
[5:25]वाले मौजूद थी वह क्या ittasadi तरीके द ये सब हमसे पोशीदा
[5:32]है बिल्कुल इसी तरीके से उनकी जिंदगी का एक शोभा की हम
[5:38]यह तो सुनते हैं की maulaaye कायनात ने एक मर्तबा वसूला अकरम
[5:44]सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास जाकर सलामत पड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद वाले
[5:52]मोहम्मद आता है और जनाबे सैयदा के घर में आकर दरजी बनकर
[6:11]वह करता है बच्चों के लिए तो इस तरीके के वाक्य तो
[6:18]फजल हमने बेशुमार सुने इन बच्चों की आशनाई और उनकी याद ए
[6:22]गई के लिए चंद फजल का taskebabe taskeeba जिक्र करने में कोई
[6:25]हैव नहीं है मसाला हमने सुना है की वसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि
[6:29]वसल्लम ने फरमाया जिस-जिस का मामला उसे उसका कौन मौला अली मौला
[6:37]मैं इल्म का शहर हूं और उसके दरवाजे कौन है अली ये
[6:44]आना वी अली मिन नो इन वहीद मैं और अली एक ही
[6:45]नूर से हैं इसके अलावा सब के दरवाजे मस्जिद के अंदर जो
[6:52]खुलती द अल्लाह ने हुकुम दिया की वो बंद कर दिए जाएं
[6:57]सिर्फ किसका दरवाजा खुला रखा गया मेरे जैसी मौत उसे मिले तो
[7:12]वह तरसती में मैन ने मेरे बाद किसको होता है मेरे बाद
[7:18]कौन वासी है अली अली तालिब ही को वसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि
[7:30]वसल्लम ने मुख्तलिफ मकमत पर फाजिला डीहा मिलो लेवे फिर दुनिया वाला
[7:36]aakhwa कौन है अभी तालिब दुनिया आखिरत के अंदर रसूल के परचम
[7:42]को उठाने वाले हैं अशुद्ध को एन सलाह तीन सच्चे हैं दुनिया
[7:48]के अंदर मोमिन वाले यासीन मोमिनो वाले फिरों और उन सब में
[7:51]सबसे अफजल कौन है इमाम अली ने भी तालिब तो ऐसे फजल
[7:58]हमने कई मकमत पर कई जगह पर सुने हैं लेकिन एक मौजूद
[8:01]वह यह की यही मौला जो आपको इतने फजीलत के हान मिल
[8:08]दिखते हैं खुद उनके घर में महर्षि सूरत हाल क्या है उनका
[8:14]जहिया आमदनी क्या है है वह घर में किस तरीके से बच्चों
[8:20]की परवरिश कर रहे हैं जो हमसे पोशीदा हैं मौजूद है मौला
[8:25]अली अली सलाम के zavae आमदनी zavae कहते हैं बच्चों के लिए
[8:29]वो तारीफें आमदनी कहते हैं इनकम को की मौला की इनकम किस
[8:37]तरीके से हुआ करती थी मौला मास के लिए त्रिकोण को किन
[8:42]त्रिकोण को अपनाया करते द एक मर्तबा सलवट पड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद
[8:46]का मोहम्मद वाले मोहम्मद आपके सामने जिस हदीस को सर्वनाम आई कलम
[8:54]के तौर पर पेश किया वह मेरे आपके मौला मोहम्मद सल्ला वसल्लम
[9:03]मोहम्मद वाले मोहम्मद की जानिब से है फोकस अली फ़ातिमा विडमेट रसूल
[9:24]सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास ए गए पूछते हैं की हमारे कम
[9:29]क्या किया है आप हमारे कामों को बयान फरमाए तो अल्लाह के
[9:32]हबीब fahimaten हैं मौला अली से क्या आपके क्या कम है और
[9:38]जनाबे सैयदा से क्या कम है फरमाते हैं जनाबे सैयद से बिखर
[9:44]मातून अल्फा जनाबे सैयदा के कम वो है की जो घर के
[9:46]अंदर के हैं वो काजा अल अली खाल फूड और मौला ए
[9:51]कायनात के कम वो है की जो घर से बाहर हैं तारीफ
[9:55]ने mushaida किया की जनाबे सैयदा की अपने कामों के साथ-साथ मौला
[10:00]कायनात की मदद करते हुए भी नजर आती हैं और जो मौला
[10:04]कायनात के कम द उनके साथ साथ हैं मोहम्मद वाले मोहम्मद वाले
[10:20]मोहम्मद जनाबे सैयद और मलाई कायनात की शादी तकरीबन hijamat के दूसरे
[10:25]साल में अंजाम पाती है नजदीक नजदीक और उसके बाद उनकी जिम्मेदारी
[10:29]यहां के मलाई कायनात का sindhub 24 साल का विषय था 24
[10:34]साल के अभिषेक के अंदर 24 साल मुबारक के अंदर मलाई कायनात
[10:39]मशी जरूर याद को भी पूरा कर रहे हैं और ऐसी एक्टिविटी
[10:41]को भी अंजाम दे रहे हैं की जो इस्लाम की बुलंदी से
[10:47]बुलंदी और इस्लाम के हड़प को पूरा करने के लिए मुख्तलिफ एडवाल
[10:53]के अंदर अंजाम पाती हैं जहां की आप देखते हैं की जाएंगे
[10:55]बदर होती है जाएंगे बदल के अंदर मुसलमान की subehtehal ये थी
[11:03]की 313 मुसलमान उनकी हालत जब रसूल खुदा ने देखी तो रसूल
[11:07]खुदा उसे वक्त उन पर तवी हो जाती है उनकी हालत को
[11:14]देखकर हिड के साल के अंदर वो अल्लाह से यह दुआ करते
[11:16]हैं यहां पर लेकर आया हूं जाएंगे बदर के अंदर 313 की
[11:25]सूरत में इनके पास लिबाज तक नहीं है इन्हें लिबास दे दे
[11:31]यह मदीने से पैदल चल करवाए हैं इनके पास स्वभावी तक नहीं
[11:35]है इन्हें स्वभावी दे दें यह हालत थी उसे जमाने की उसे
[11:40]जमाने में मोलाई कायनात के सभी के से अपने घरवालों को संभालेंगे
[11:42]और किस तरीके से mahashiviyat को पूरा करेंगे देखें एक मर्तबा तो
[11:47]ये है की हम यह कहें की maulaaye कायनात अल्लाह से दुआ
[11:52]करें उनकी दुआ रद्द नहीं होती जा हो जाता है और मौजे
[11:53]के बाद खाना ए जाता है घर में और खाना वो तनाव
[11:57]और हिमालय लेते हैं एक ये भविष्य है लेकिन अहलेबैत ने इस
[12:02]भविष्य को इस्तेमाल इस कदर नहीं किया यह बताने के लिए की
[12:09]जैसे अल्लाह के हबीब जो खाता उन नबी इन है उनके लिए
[12:10]कोई वक्त दिखावे आलम ये विशाल फार्मा रहा है के पी वसूल
[12:16]इला है उसे वक्त उन हसन मानो तुम्हारे लिए वसूल अकरम की
[12:23]जिंदगी के अंदर नमूना अमल है तो तुम रसूल को देखो की
[12:25]वो किस तरीके से जिंदगी गुजर रहे हैं तुम भी जिंदगी गुजारो
[12:29]अगर वसूल अल्लाह से दुआ करें और जज्बा के लिए खाना ए
[12:34]जाए उनके लिए विश कहा जाए उनके लिए जन्नत की तक नव
[12:38]ए जाएं और आम मुसलमान यह सोचे की ये तो अल्लाह के
[12:40]हबीब के लिए आसानी है ये moujja हो जाता है तो उनकी
[12:43]जिंदगी में नमूना अमल कैसे होगा इसलिए अल्लाह के हबीब ने इस
[12:46]दुनिया के अंदर जिंदगी गुजरते हुए ऐसे नमूना अमल को छोड़ा के
[12:53]ताबीज ने गवाही दी के अल्लाह के हबीब इस कदर खेती बड़ी
[12:58]किया करते द इस कदर चा विवाह का कम करते हुए जानवरों
[13:05]को चराने के लिए ले जया करते द के उनके peshaniy मुबारक
[13:08]से पसीना टपकने लगता था और इस कदर जहमत क्या करते द
[13:13]की लोग यह कहते द की आप इस कदर जहमत ना करें
[13:17]हम आपकी तरफ से कर देते हैं तो अल्लाह के हबीब का
[13:23]यह विशाल होता था की कायनात के अंदर दिखावे आलम ने तमाम
[13:25]इंसानों के लिए यह जिम्मेदारी राखी है की वो अपने vajifon को
[13:32]अंजाम देने के लिए कार्य कम करें मोहम्मद वाले मोहम्मद साल मोहम्मद
[13:39]वाले मोहम्मद तो यही चीज हमें maulaaye कायनात की जिंदगी में भी
[13:47]नजर आती है मौला भी दुआ करते एक मोजा हो जाता वो
[13:49]उसका खाना उनके घर पर ए जाता लेकिन नहीं तारीफ ये कहती
[13:54]है की मौलाना इस कदर जहमत की एक मर्तबा अल्लाह के हबीब
[14:01]मदीने के नखलिस्तान की तरफ जाते हैं और ढूंढते हैं मौला कायनात
[14:04]को तो वो एक खेत में मौला कायनात को पाते हैं तो
[14:10]अपने हमारा एक सहाबी के साथ जब वहां पहुंचने हैं तो मौला
[14:12]कायनात को देखते हैं की उनके चेहरे पर खाक है उनका लिबास
[14:18]खाक आलू है तो एक मर्तबा फरमाते हैं अंत अब्बू तो आप
[14:24]की तुम आप ही तो आपके वालिद हैं तो आपके बाप हैं
[14:31]मट्टी के बाप हैं यानी खाक आपके ऊपर इस कदर है चुकी
[14:34]है की आप खा के बाप बन जाते हैं तो यहां तो
[14:39]मिट्टी है लेकिन तारीख ने कहा की जब अल्लाह के हबीब का
[14:45]रहे हैं अबू taurab तो रब जमीन को भी कहा जाता है
[14:50]इस पूरे जमीन के बाप अली जीवन भी तालिब कराए पाते हैं
[14:52]सलवट पड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद सोहेल मोहम्मद वाले मोहम्मद तो मौला तो
[15:03]इस कदर मेहनत करें की उनके पेशानी पर खाक जाम जाए लेकिन
[15:06]आज का शिया में जली किए गए की मैं कुछ कम नहीं
[15:14]करूंगा मैं मावली अली ने भी तालिब हूं मैं लाइव ने अभी
[15:16]तालिब का मलंग हूं मैं मौला का मलंग हूं मौला मुझे बगैर
[15:21]किसी कम के सब कुछ दे देंगे तो नहीं खुद मौला अपनी
[15:24]जिंदगी में कम करके दिखा रहे हैं की मैं तुम्हारे लिए नमूने
[15:29]अमल छोड़ के जा रहा हूं सलवट पड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद माशा
[15:35]अल्लाह मोहम्मद वाले मोहम्मद सैयद ने अल्लाह के हबीब से ये सुना
[15:43]की घर के अंदर के कामों की जिम्मेदारी जनाबे सैयद की है
[15:46]और घर के बाहर के कामों की जिम्मेदारी मौला की है तुम
[15:53]जनाबे सदा फ़ातिमा सलाम के बकौल फल या अल्लाह मोहम्मद रसूल जाना
[15:58]ही नहीं जा सकता पहचाना ही नहीं जा सकता की इस जुमले
[16:05]को सुनकर मुझे कितनी खुशी हुई जनाबे सैयदा घर के कामों को
[16:11]अपनी जिम्मेदारी समझते हुए खुश हो रही हैं और का रही हैं
[16:14]की फल जो लम्हों नहीं जाना जा सकता की मैन दखली मैंने
[16:19]सबर के मुझे कितनी खुशी हुई सिर्फ मेरा अल्लाह जानता है की
[16:22]मुझे कितनी खुशी हुई लेकिन आज की खातून यह कहे की मैं
[16:27]घर के कामों को करने के लिए घर की वजीफा जिम्मेदारियों को
[16:32]अंजाम देने के लिए राजी नहीं हूं मैं घर के कामों को
[16:34]अंजाम नहीं दूंगी तुझे सय्यद की सेवा से मुखालिफत कर रही है
[16:40]जनाबे सैयदा इस जुमले को सुनकर खुश हो गई है वह यह
[16:45]नहीं का रही की मैं शेन बसाने मौला कायनात के साथ चलते
[16:47]हुए घर से बाहर निकल कर कामों को अंजाम दूंगी नहीं जनाबे
[16:52]सैयदा घर के अंदर अपने कामों को अंजाम देकर अली ने भी
[16:59]तालिब की मदद कर रही हैं मौला इसके बावजूद मौला कायनात जनाबे
[17:06]सैयदा की मदद करते हैं और जनाबे सदा भी maulaaye कायनात की
[17:09]मदद करते हुए नजर आती हैं लेकिन इस पूरे अभिषेक के अंदर
[17:15]की जब इस्लाम की मुश्किलात का जमाना था मौला कायनात और वसूला
[17:20]अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए खास तौर पर सख्ती का जमाना
[17:23]था सलवट पड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद वाले इसलिए की जब हजरत वाक्य
[17:34]हुई मक्का से मदीना तो वसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे वक्त
[17:40]दिया किसका अंसार का भाई का दिया क्यों ताकि माली मदद कर
[17:50]सके मल दे सके mahajvi इनको जिनकी हालत ये थी की उनके
[17:55]पास ना लिबास था ना कोई स्वभावी थी लेकिन मौला कायनात को
[18:00]अल्लाह के हबीब ने किसका भाई कर दिया खुद नहीं अंसार का
[18:05]नहीं खुद अपना भाई कर दिया या अली अंत फिर दुनिया वाला
[18:11]है अली तुम मेरे भाई हो दुनिया में भी और आखिरत में
[18:14]भी सलामत पड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद वाले मोहम्मद के तो किस तरीके
[18:39]चल सकती है तारीख गवाह है की जो-जो हुआ और जो जो
[18:47]गिफ्ट्स और जो-जो चीजें tahae अल्लाह के हबीब को मिला करते द
[18:53]अल्लाह के हबीब अपने इस भाई की मदद किया करते द बिल्कुल
[18:57]इसी तरीके से जो tahae मौला अली को मिलते द सबसे के
[18:59]अंदर वो अल्लाह के हबीब के कम आया करते द क्योंकि सोर्सेस
[19:04]ऑफ इनकम कितने होते हैं सोर्सेस ऑफ इनकम पंच ही हुआ करते
[19:06]हैं या तो इंसान कहीं पर जॉब करता है सर्विस करता है
[19:12]या यह की तिजारत किया करता है या उसे हटाया मिलते हैं
[19:18]गिफ्ट्स के जरिए से इनकम को हासिल किया करता है या यह
[19:19]की कहीं पर मजदूरी करता है मेहनत मजदूरी का कम करता है
[19:23]खेती-बाड़ी का कम करता है और आखिरी चीज जो इनकम का सबब
[19:27]बनती है वो विरासत हुआ करती है की विरासत में किसी को
[19:29]मालूम दौलत मिलती है तो वो उसकी इनकम का 22 होती है
[19:33]मौला कायनात ने अपनी जिंदगी के अंदर इन पांचो त्रिकोण को नमूना
[19:39]अमल हमारे लिए करार दिया है आपकी निगाह में यकीनन यह चीज
[19:44]पोशीदा होगी जमाना था जब अल्लाह के हबीब के पास लोग आकर
[20:07]हडिया दिया करते द क्यों इसलिए के सादात पर आले रसूल के
[20:14]ऊपर कौन सी चीज हरम है कौन सा कौन सा बच्चा जवाब
[20:19]देगा सादात पर कौन सी चीज हवा में माली है तबाह उसे
[20:20]ज़कात सदाकत आले रसूल पर हरम है इसलिए पैगंबर को अगर मौजूद
[20:30]नहीं था फिर भी अली वसूल को सदका जकात नहीं दिया जा
[20:37]सकती हमारी नजर के अंदर शायद अलग-अलग चीज हो लेकिन ऐसी बात
[20:44]नहीं है कुरान की नज़र सदा वाजिब ज़कात को क्या कहते हैं
[20:49]दो ही आयतें हैं जो वाजिद ज़कात के लिए हैं दोनों सूबे
[20:51]तौबा की हैं खुद मिन amvale हैं सदाकत हम कहते हैं कुरान
[20:57]में ज़कात का जिक्र कुरान में जकात का जिक्र वाजिब ज़कात का
[21:02]जिक्र कराने मस्जिद में दो ही मकाम पर है और दोनों मकाम
[21:05]पर लैब्स सदका इस्तेमाल किया खुद इन amvale हिम सदका ए हबीब
[21:11]आप इन लोगों से सडक लें और फिर तकसीम करें किसके लिए
[21:14]दूसरी आयत में बयान फरमाया इन नमाज का तो लिल करवाए balmasakeen
[21:21]सदा के सिर्फ और सिर्फ किसके लिए है मासा की इनके लिए
[21:28]वहां मस्की का तो उसके बाद किया लिल्लाहे वाले वसूली वाले जल
[21:31]कोई बावली अकामा नहीं किया अल्लाह उसके वसूल और दिल किस चीज
[21:38]का जिक्र किया जहां सुबह अनफॉल की आयत के अंदर पर्वत दिखावे
[21:44]आलम इरशाद फरमाते हैं की वह आईएलएमयू अनाम गनीम तुम inshai इन
[21:52]ए मुसलमानों जान लो तुम्हें जो चीज भी मिलती है फलिला है
[21:57]खामोश हूं वाले वसूले वाले दिल को क्या अल्लाह के लिए उसका
[22:03]निकलेगा और वसूल के लिए वसूल है सलामत पढ़े मोहम्मद वाले मोहम्मद
[22:09]साल मोहम्मद वाले मोहम्मद कहते हैं की हम सोशल एक्टिविटीज को अंजाम
[22:25]दे रहे हैं तो यही हमारी जॉब है इसको जॉब समझ के
[22:31]अंजाम नहीं दिया इसको अपनी जिम्मेदारी समझकर जहाज जो किया वह इस
[22:36]तरीके से नहीं की मैं तो एक सोल्जर हूं तो मेरी इतनी
[22:41]बड़ी इनकम होनी चाहिए मैं तो फौज का एक सिपाही हूं तुम्हें
[22:43]भी इतनी बड़ी इनकम होनी चाहिए मेरी इतनी बड़ी इतनी ज्यादा सैलरी
[22:48]होनी चाहिए अली जितने भी तालिब की एक जरूरत सकलेन की इबादत
[22:52]से अफ़ज़ल कर पाती है febili इब्ने अभी तालिब इस अमल को
[22:57]जॉब के तौर पर और सैलरी के लिए अंजाम देते हुए नज़र
[22:59]नहीं आते बल्कि यह फरमाते हुए नज़र आते हैं की मैंने जो
[23:04]दवे खबर को खा रहा था वो अपनी ताकत से नहीं उखाड़
[23:09]था बल्कि खुदा की दी हुई ताकत से होना सलवार पढ़े मोहम्मद
[23:12]वाले मोहम्मद वाले मोहम्मद देते हुए फौज के सिपाही होते हुए इस
[23:28]तरीके से तुम अलग कायनात ने अपने मल का इजाफा नहीं किया
[23:29]मारो दौलत का इजाफा नहीं किया तो उसे जमाने के अंदर के
[23:35]सभी के से उनकी इनकम हुआ करती थी तब गवाह है के
[23:39]उसे जमाने के अंदर अल्लाह के हबीब के पास जंग खत्म हो
[23:42]जया करती थी तो माल्या गनीमत आया करता था गाने में जंगी
[23:46]आया करते द उन गाने में जंगी को खुद अल्लाह के हबीब
[23:49]तकसीम किया करते द और उसी में से maulaaye कायनात को भी
[23:55]उनका हिस्सा मिलाकर था हत्या कायनात की हदीस मौजूद है की जाएंगे
[24:02]बाद में जब गए द तो 313 के पास ना लिबास इस
[24:03]कदर मुहैया था 19वां भी लेकिन जब पलट कर वापस आते हैं
[24:08]तो मौला फरमाते हैं की मुझे जाएंगे बदर के मेल गनीमत के
[24:14]अंदर दो ऊंट मिले द आज का मोमेंट शायद यह सोच सकता
[24:18]है की यह मेल गनीमत की सूरत तो हमारे लिए नहीं है
[24:21]तो इंसान दुआ करें इमामे ज़माना के जौहर की के इमामे ज़माना
[24:26]जल्द 10 जल तस्वीर लाइन और उनके जाहू में ताजी हो ताकि
[24:29]हम उनके साथ जब दुश्मनों ने इस्लाम के साथ जंग करें तो
[24:34]उसे वक्त जो मारे गनीमत होगा वो हमें महसूस है भाई अगर
[24:40]इंसान की दिल है लेकिन अगर इंसान के दिल ये आरजू खालिस
[24:43]इमाम की नुसरत और मदत की है तो इंसान को पर्वत दिखाने
[24:48]आलम के नुमाइंदा ये बता कर गए हैं की जब कोई इंसान
[24:54]अपने वक्त के इमाम की nusimat का इबादत किया करता है आलम
[24:58]अगर वो शख्स मैं भी जाए तो मरने के बाद भी अगर
[25:04]इमाम के वक्त के अंदर वो हाजिर ए खिदमत नहीं हो सकता
[25:08]है तब भी इमाम के aavanon में शुमार होगा सलवट पड़े मोहम्मद
[25:11]वाले मोहम्मद वाले मोहम्मद तो 23 साल के अभिषेक के अंदर जहां
[25:23]जाएंगे बहुत ज्यादा हैं जहां जहाज की सुवटिया हाल है और सोशल
[25:26]एक्टिविटीज के अंदर तब मौला कायनात को अल्लाह के हबीब या अमन
[25:31]भेजते हैं की यमन जाएं और यमन जाकर वहां पर तबलीग करें
[25:33]मौला अपनी जिंदगी का एक अफसा वहां पर गुजरते हैं मक्के जाते
[25:38]हैं मशरीकी ने मक्का के साथ लाने बर्बाद करने के लिए ये
[25:41]सारी सोशल एक्टिविटीज को अंजाम दे रहे हैं और जनाबे अली इन
[25:47]एक्टिविटीज को अंजाम देने के बावजूद इसके जरिए से इनकम नहीं करते
[25:50]हैं बल्कि जो एक तरीका मैंने आपको 500 से इसमें से बताया
[25:56]वो है गिफ्ट्स का मलिक एनीमेशन में जंगी के जरिए से दूसरा
[25:59]तरीका जो मौला कायनात अपनी जिंदगी में अपनाते हैं वो सर्विस और
[26:04]जॉब का है आपने तारीफ में देखा होगा और सुना भी होगा
[26:08]मजा ले इसके अंदर की maulaaye कायनात ने फलन यहूदी के यहां
[26:11]कम किया फल यहूदी शख्स से कर्ज लिया और फिर किसी कम
[26:17]को अंजाम दिया ये सारे वो मावे हैं की जहां आप मौला
[26:21]ए कायनात को सर्विस करते हुए और जॉब करते हुए देखते हैं
[26:24]hatyarif में यह वाकिया मिलता है की एक मर्तबा अल्लाह के हबीब
[26:31]को maulaaye कायनात ने देखा की खत्म नबी ये इस कदर उनके
[26:37]चेहरे से भूख आया है की उनका सर झुका हुआ है तो
[26:38]maulaaye कायनात उसे वक्त एक सूतक की खाल को लेते हैं एक
[26:43]ऊंट की खाल को लेते हैं उसे मोड़ते हैं घूमते हैं और
[26:47]घूमने के बाद उसे बाल्टी की शकल दे देते हैं और उसके
[26:49]बाद बाहर निकलते हैं और बायो निकल कर देखते हैं की एक
[26:54]शख्स है की जो कुएं के पास खड़ा हुआ है और कुएं
[26:58]से चाहता है की पानी को निकले तो मौला उसके पास जाते
[27:02]हैं और कहते हैं की तुम्हारे पास कोई सैफ नहीं है कोई
[27:04]बाल्टी नहीं है कोई दिल भी नहीं है की जिससे तुम इस
[27:09]पानी को निकल सको तो अगर तुम मुझसे एग्रीमेंट करो की मैं
[27:15]तुम्हारे लिए पानी को निकलूं तो हर बाल्टी पानी निकलने के वास
[27:20]के अंदर मुझे एक खजूर दोगे एक khoema दोगे वो शख्स राजी
[27:23]हो जाता है मौला ए कायनात इस कदर मेहनत करते हैं देखिए
[27:27]जब अल्लाह के हबीब भूख के आलम के अंदर है तो खुद
[27:32]maulaaye कायनात भी उसे वक्त गुरु उसने है वो भूख के आलम
[27:34]में फिर भी इस कदर मेहनत करते हैं की वो इतने डोल
[27:38]पानी के निकलती हैं इतने दिल पानी के निकलती हैं इतने बाल्टिया
[27:41]निकलती हैं की उनके दोनों हाथों को खजूरों से भर दिया जाता
[27:48]है एक बाल्टी के आवाज में एक खजूर मिलनी थी maulaaye कायनात
[27:53]इतनी बाल्टिया निकलती हैं की इनके दोनों हाथ खजूरों से भर जाते
[27:56]हैं और उसे कदर मेहनत करते हैं की जब वो खजूरों को
[28:00]अल्लाह के हबीब के सामने पेश करते हैं अल्लाह के हबीब इन
[28:03]हाथों को देखकर के जो इस कदर मेहनत के बाद जख्मी हो
[28:08]चुके द इन हाथों का बोस लेते हैं और कहते हैं या
[28:14]अली आंतकी फिर दुनिया वाला मेरा ए अली बेशक तुम ही मेरे
[28:16]भाई हो दुनिया में भी और आखिरत में भी सलामत पड़े मोहम्मद
[28:23]वाले मोहम्मद सल्ले अल मोहम्मद वाले मैंने आपसे अर्ज किया की मौला
[28:28]और अल्लाह के हबीब हमें ये 10 दे रहे हैं की देखो
[28:33]सिर्फ अल्लाह के हबीब का नाम ले लेना सिर्फ अली अली का
[28:35]देना या अली का देना काफी नहीं है ये दुनिया रह तो
[28:41]सुकून की जगह नहीं है मोबाइल से कुछ सी है की जनाबे
[28:47]मूसा अल नबी ये अलैहि सलातो अस्सलाम से अल्लाह ने ये कहा
[28:50]की मैंने छह चीजों को छह चीजों में छुपा रखा है लेकिन
[28:55]लोग उसे कहीं और तलाश किया करते हैं वहां एक चीज की
[28:59]मैंने राहत और सुकून को जन्नत में छुपा रखा है लेकिन लोग
[29:06]उसे दुनिया में तलाश किया करते हैं सुकून को अपनाते हुए नजर
[29:13]नहीं आते लेकिन आज का शिया यह कहे की मैं तो मलंग
[29:17]हूं मैं मावली हूं मैं अली का मौला ही हूं मैं सिर्फ
[29:22]और सिर्फ अली अली करके जन्नत भी कम लूंगा और दुनिया भी
[29:24]कम लूंगा तो ऐसा नहीं है मौला ने कम करके दिखाया की
[29:29]देखो अली का शिया कम करने वाला होता है आखिरत की खातिर
[29:35]दुनिया में कर को सुखल को इख्तियार किया करता है और सिर्फ
[29:38]इसको नहीं इसके साथ साथ ibadatein भी करके दिखाए कुरान की तिलावत
[29:44]भी करके दिखाई कुरान को पढ़ते हुए भी उसे पर अमल पैदा
[29:49]होते हुए भी दिखाया और फिर ये जुमला भी मिलता है हदीस
[29:53]की किताबों में इन नमशी है तो अली jinkasi वतन तिलावत हम
[29:59]दिल कुरान देखिए इन नाम का लव्स कहां इस्तेमाल होता है इन
[30:04]नाम का अलग इस्तेमाल होता है सिर्फ और सिर्फ को बयान करने
[30:07]के लिए इन लॉ वेल अल्लाह का सिर्फ और सिर्फ इबादत ये
[30:17]है की तुम्हें पाको पाकीजा रखे इन नाम गुनाहों को मिला हूं
[30:21]वाहिद परवरदिगार फरमाता है सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा ilaho तुम्हारा महबूब एक
[30:26]अल्लाह है एक और आयत में इन नवाब अली याकुम अल्लाहू अकबर
[30:33]वसूल हु vallaji ना आमीन लाजी ना यकीन अस्सलाम व के उन
[30:39]सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा वाली अल्लाह है उसका रसूल है और वो
[30:45]मोमिनीन है की जो नमाज़ को कायम करते हैं और जकात देते
[30:47]हैं इस हाल में की वो हालत है वो कुएं होते हैं
[30:51]तो यहां भी maulaaye कायनात ने हालत है वह कू में जकात
[30:55]दी तो इन नाम का लब्ज इस्तेमाल हुआ सिर्फ और सिर्फ आज
[30:57]आप खुद मौला की जबानी सुने की अली कौन है फरमाते हैं
[31:16]की जो ने मजीद की कसरत से तिलावत किया करता है और
[31:23]तिलावत सिर्फ ये नहीं है की इंसान हरकत करते हुए कराने मजीद
[31:30]की तिलावत कर रहा है और वो इस आयत को पढ़ रहा
[31:35]है वह बिल वाले दही ने आ बिल वाले देने वाले दें
[31:36]के साथ नेकी है वो वाले दिन के साथ नेकी कबूतर नहीं
[31:40]पड़ा समझ नहीं रहा के पर्वत अधिकार क्या का रहा है और
[31:46]बगल वाले देने हैं साला का रहा है और इस हालत में
[31:49]उसके मां-बाप में से कोई उसको आवाज़ देते हैं बेटा मुजाहिद लिए
[31:53]इधर लिए तशरीफ़ लाइए इधर लिए और यह पढ़ता जा रहा है
[31:58]बाबिल वाले दिन ऐसा नवल दें के साथ नेकी के वो पढ़ते
[32:01]जा रहे हैं पढ़ते जा रहे हैं लेकिन अपने मां-बाप को लब्बैक
[32:03]नहीं का रहा तो ये तिलावत कुरान नहीं है कला यात्रालू ताला
[32:10]कहते हैं पीछे चलने को कदम बी कदम चलने को जहां-जहां मतलू
[32:18]का कदम चले उसके पीछे पीछे काली का कदम चले पीछे चलने
[32:21]वाले को ताली कहते हैं जो उसके पीछे चल रहे हैं उसे
[32:26]मतलू कहते हैं तो कुरान मतलू है जिसके पीछे चलना है और
[32:31]हम जो तिलावत करने वाले हैं हम ताली हैं हम समझेगी की
[32:34]खुदा का क्या हम है तो उसके पीछे चलेंगे सलवट पड़े मोहम्मद
[32:38]वाले मोहम्मद [संगीत] वाले मोहम्मद तो ये वो जमाना था की जब
[32:46]मौलाना सर्वेश और जॉब करके दिखाई तिजारत का जमाना वो जमाना था
[32:53]की जब वसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सलवट पड़े मोहम्मद वाले
[32:58]मोहम्मद वाले मोहम्मद सैयद को फिडक की जमीन से सर जमीन से
[33:12]नवाज था वैसे ही अल्लाह के हबीब ने मौला कायनात को भी
[33:15]चंद जमीनों से नवाज था इमाम फरमाते हैं के अल्लाह के बी
[33:21]मौला कायनात को चार जमीनों से नवाज वो जमीन कौन सी थी
[33:27]वह एकता थी लेकिन जमीनी होती है जो फही होती हैं बच्चों
[33:29]के लिए सवाल के आसानी के लिए इस नुक्ते को खास तौर
[33:34]पे याद रखें फही किसको कहते हैं एक मर्तबा ऐसी जमीन मिलती
[33:37]है जहां अल्लाह के हबीब ने गजवा लड़ी जंग लड़ी और उसे
[33:42]जंग को लड़ने के बाद एक जमीन उनके हाथ में आई वो
[33:47]तमाम मुसलमान का मल है लेकिन एक मर्तबा ऐसी जमीन इस्लाम के
[33:53]हाथ आती है की जिसमें कोई जंग नहीं हुई जैसे खबर की
[33:56]फतेह अपने ऑल में तकसीम करेंगे उसे मल को कहते हैं फही
[34:22]फही का मल इसी तरीके से एक तीसरा मल है जिसे कहते
[34:28]हैं अख्तर अख्तर ऐसी जमीन हुआ करती है की जब किसी इस्लामी
[34:35]हुकूमत को किसी जमीन की जरूरत हुआ करती है तो वो ऐसी
[34:36]जमीनों पर जहां पर कोई कामकाज नहीं होगा खेती-बाड़ी भी नहीं होगी
[34:42]बिल्कुल अनुवाद है अनुवाद जमीन है यानी मुर्दा जमीन है वो किसकी
[34:45]हुकूमत में किसका मल हुआ करती है इस्लामी हुकूमत में इस्लामी हुकूमत
[34:51]का मल हुआ करती है तो वह जमीन है अल्लाह के हबीब
[34:52]ने मोलाई कायनात को दे दी थी उन जमीनों में मौला कायनात
[34:57]ने खेती-बाड़ी की और उसके जरिए से जो मल आता था उसे
[35:02]मल को बताओ तिजारत ले जया करते द और भेजा करते द
[35:09]अपनी हुकूमत के जमाने में वो खुद खलीफा इसके अलावा तारीफ के
[35:19]अंदर आपको एक मर्तबा मजदूरी करने के लिए जाते हैं एक ऐसे
[35:29]शख्स के पास की जो बहुत ज्यादा मालदार था वहां मजदूरी करते
[35:36]हैं वह मजदूरी कौन सी होती है वह मजदूरी होती है की
[35:41]रुई के एक बड़े से गल को लेकर आना है मदीने के
[35:46]अंदर इसकी उज्जवल कायनात हासिल करते हैं सलवट पड़े मोहम्मद वाले मोहम्मद
[35:50]पर मोहम्मद वाले मोहम्मद दिखावे आलम से दुआ करते हैं इस बा
[36:04]बरकत दिन के वासिल से हम सबको मोहम्मद वाले मोहम्मद की सिमट
[36:07]पैदा होने की तौफीक इनायत मोहम्मद वाले मोहम्मद का जो जो मोमिनीन
[36:12]बीमार है उन्हें shifaye कहां मिला इनायत फरमाए उसका तुझे वास्ते मोहम्मद
[36:26]वाले मोहम्मद का जो byaulad है उन्हें साहिब औलाद फहीमा parvardiga तुझे
[36:31]वास्ते मोहम्मद वाले मोहम्मद का जो मोमिन जिस जिस मुश्किल में परेशान
[36:34]है गिव इफ्तार है परिवार डिगा उनकी मुश्किल रात को दूर फहीमा
[36:39]parvardiga तुझे आवाज़ से मोहम्मद वाले मोहम्मद का जो मोमिन जो हज़रत
[36:42]लेकर आए परवरदिगार उनकी हाजत वी वाइफ है मैन हम सबके तमाम
[36:47]गुनाहों को माफ कर दे हम सब के तमाम मैं भूमि की
[36:48]magfivat फार्मा हम सब को इमामे ज़माना के आवा में शामिल फार्मा
[36:56]ईमान के जाखू में रब बना तब्बल मीना इन नाका dassami ऑल
[37:01]अली
0 تعليقات
sort ترتيب حسب
- أعلى تعليقات
- أحدث تعليقات
التالي
2 المشاهدات · 24/02/13
13 المشاهدات · 13/02/25
9 المشاهدات · 24/07/28
11 المشاهدات · 25/06/11
7 المشاهدات · 17/02/15
7 المشاهدات · 17/04/29
