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Yahoodiyat Ki Tareekh | H.I. Rajab Ali Bangash
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23/12/02
في
محاضرات
Record date: 26 Nov 2023 - یہدیت کی تاریخ AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend. These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth. ❓ حضرت یعقوب کا لقب اسرائیل کیسے پڑا؟ ❓ قرآن کی حفاظت کی ذمہ داری کس نے لی ہے؟ ❓ حضرت موسی و عیسی کس نبی کی نسل میں سے تھے؟ ❓ یہودیوں کے سرداروں نے کیوں آخری نبی کی بات نہیں کی؟ ❓ امام خمینی نے کس کو لبان بھیجا جنھوں نے حزب اللی کی بنیاد رکھی؟ ‼️ جانئے اور بہت کچھ For more details visit: 📡 www.almehdies.com 🖥 www.facebook.com/aLmehdies313 🎥 www.youtube.com/almehdies 🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
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Transcript
[0:12]बमला रहमान रहीम मरी लाह इल्ला बसीर बा अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमी अल
[0:31]हमदुलिल्ला कमालो अल हमदुलिल्ला लजी जाना मल मतमस कीना लाय अलीना अबी
[0:45]तालिब सलातो व सलाम अलाद माद रसूल मु सद अल मुस्तफा अल
[0:56]अमजद हबीब ना व हबीब लाल अल्ल सुमिया फ समा अहमद फल
[1:10]कासम मोहम्मद अल्ला सला मोहम्मद वाला आले तय बीन रीनल मासन अल
[1:23]मुकन मुंतज बनल मुंत बनल मजमीन मया रहमतुल्ला व बरकात आला शया
[1:38]वताब लान तोला आला मुनक फजले मिनल आना इला कियाम यदन अम्मा
[1:54]बाद काल अल्लाह तबारक ताला फ महकम किताब हकी मजी बिस्मिल्ला रहमान
[2:09]रहीम नाला इस्लाम सलात मोहम्मद मोहम्मद पर अल्ला सला मोहम्मद ले माशाल्लाह
[2:25]ला हला ला कुवता इल्ला बिल्लाह अलीम आय मजीदा जिसकी तिलावत का
[2:38]मैंने शरफ हासिल किया परवरदिगार दो आलम कुरान मजीद फरका हमीद में
[2:46]अपनी लारा किताब में इरशाद फरमाते परवरदिगार आलम इन दीनाला इस्लाम खुदा
[2:55]का अगर पसंदीदा कोई दीन है तो वह इस्लाम है परवरदिगार आलम
[3:02]ने इस दीन को दुनिया में नाफसु तक पहुंचाने के लिए नबूवत
[3:16]का एक सिलसिला जारी किया और नबियों में 313 रसूल करार पाए
[3:26]और 313 में पांच उजम अंबिया करार पाए जोब जियारत सा में
[3:31]उनके नाम लेते हैं वह उलम अंबिया है अंबिया का काम अल्लाह
[3:40]के दीन को बंदों तक पहुंचाना था और इस्लाम को दुनिया में
[3:44]नाफिया का काम था अंबिया में जो उजम अंबिया थे आदम अल
[3:55]सलाम फिर नू अल सलाम फिर तीसरे नबी हजरत इब्राहीम अल सलाम
[4:05]इब्राहीम अल सलाम की दो जौजा थी एक बीवी सारा एक बीवी
[4:13]हाजरा बीवी हाजरा से एक ही बेटा जनाबे इस्माइल अल सलाम अल्लाह
[4:19]ने बाद में बीवी सारा को एक बेटा दिया जिसको जिसका नाम
[4:25]इसहाक रखा गया हजरत इक अ सलाम इसहाक अल सलाम की नसल
[4:32]में अल्लाह ने हजार अंबिया पैदा किए इसहाक का बेटा याकूब याकूब
[4:39]के 12 बेटों में यूसुफ अल सलाम को नबूवत मिली और यूसुफ
[4:48]के भाई यहूदा वही नस्ल आगे बढ़ी और मूसा अल सलाम के
[4:53]बाद यही अफराद थे जिन्होंने मूसा के लाए हुए दीन में तब्दीलियां
[5:01]की और अपने आप को यहूदी कहलाए यहूदा की नसल से इब्राहिम
[5:07]अल सलाम के बेटे इस्माइल में एक ही नबी इस्माइल की नसल
[5:14]में और आखरी नबी है इसके अलावा कोई नबी इस्माइल अलाम की
[5:17]नस्ल में नहीं आया इमामत का सिलसिला भी इस्माइल अल सलाम की
[5:24]नसल से जारी हुआ इसहाक अ सलाम जो इस्माइल के भाई थे
[5:27]लेकिन पदरी भाई थे मां उन बीबी सारा थी और इमाइल की
[5:34]मा बीबी हाजरा थी इसहाक अल सलाम को अल्लाह ने बेटा दिया
[5:38]सस और याकूब याकूब का लकब इसराइल बना इसर लैल से और
[5:47]तारीख में इसके जो इसराइल जो लकब बनाता याकूब अल सलाम का
[5:54]उसकी तीन वजत बयान की है के इसर लैल से बना इसर
[6:00]लैल अ खुदा का बनाया हुआ अ सरदार एक माना है इसर
[6:08]लल यानी खुदा का बंदा और एक माना इसर लैल सैर से
[6:14]लैल रात रात को सैर करने वाला तो याकूब अल सलाम का
[6:16]एक लकब इसराइल जो बना था इसरा लैल से यानी रात को
[6:21]सफर करने वाला सैर करने वाला और क्यों बना था कि जब
[6:26]इसहाक अल सलाम की जिंदगी में जो इक का बेटा था तो
[6:32]याकूब अल सलाम की मां देख रही थी कि ऐ याकूब के
[6:38]साथ कुछ अच्छा रवैया नहीं रखता ऐ बड़ा था याकूब छोटा था
[6:46]लिहाजा जिस दिन इक अ सलाम की रहल हुई तो याकूब अ
[6:50]सलाम की मां ने अपने बेटे याकूब को अपने भाई लाबा के
[6:52]पास भेजा आधी रात को घर से निकाला कहीं सुबह सुबह ऐ
[6:57]इसको कत्ल ना कर दे इस खौफ से और य याकूब अ
[7:02]सलाम अपने मामू आबान की तरफ गए और वहीं पर फिर उनकी
[7:08]बेटी से शादी की फिर उनके साथ एक कनीज भी फिर दूसरी
[7:11]वो पहली बेटी का इंतकाल हुआ फिर मामू की दूसरी बेटी से
[7:17]शादी की और हक महर 10 साल 10 साल बेड बकरिया चराना
[7:21]यह हक महर करार पाया और यूं 20 साल दो बेटियों का
[7:26]हक महर बनाता तो 20 साल मामूल आबान के पास है और
[7:28]यूं याकूब अल सलाम को अला ने उनकी दूसरी बेटी से एक
[7:33]बेटा दिया यूसुफ जिसको अल्लाह ने नबूवत से नवाजा याकूब अ सलाम
[7:39]की यह 12 बेटे और याकूब का य लकब इसराइल बना रात
[7:45]को सफर करने वाला और याकूब की नस्ल को बनी इसराइल कहा
[7:47]जाता है इसराइल की औलाद इसराइल याकूब अ सलाम का लका और
[7:54]याकूब अलाम की नस्ल में ईसा अ सलाम तक जितने भी अंबिया
[7:59]ये सब बनी इराल याकूब अल सलाम के नसर में से याकूब
[8:03]अल सलाम के भाई ऐ ऐस का बेटा रूम उस रूम के
[8:08]नाम से बरे रूम और ममल कत रूम जो गुजर्ता जमान में
[8:14]थी वो उसी ऐस के बेटे रूम के नाम से थी तो
[8:19]ये याकूब अल सलाम का बेटा यूसुफ अल सलाम नबी फिर याकूब
[8:27]के बेटों में नबूवत यूसुफ अल सलाम की रहल के बाद इनके
[8:30]बेटे लावी रिवायत में के बनयान उनकी नसल में यूसुफ अल सलाम
[8:37]की रेहलत के 400 साल बाद मूसा अले सलाम आए तो जब
[8:42]मूसा अले सलाम आए वह भी खुदा का दीन लेकर आए लेकिन
[8:44]नबी के जाने के बाद उम्मत ने क्या किया तौरा में तब्दीलिया
[8:50]कर दी कुछ आयत उसकी निकाल दी अपनी मर्जी की कुछ आयत
[8:56]उसम दाखिल कर दी यही मामला इंजील के साथ भी हुआ जबक
[8:58]कुरान के साथ नहीं हुआ क्यों इसलिए कि कुरान के लिए परवरदिगार
[9:04]खुद इरशाद फरमाता है हाफिज हमने जिक्र को नाजिल किया हम इसकी
[9:10]हिफाजत करने वाले कुरान की हिफाजत की परवरदिगार ने जिम्मेदारी ली इसलिए
[9:17]कुरान में कोई तब्दीली नहीं कर सका जबक तौरा इंजील में तब्दीलिया
[9:21]हुई हजरत मूसा सलाम के बाद अच्छा य जो तीन अयान आसमानी
[9:29]अयान एक इस्लाम है एक यहूद है ईसाइयत है तीन अदिया है
[9:37]यहूदी 71 फिरके ईसाई 72 फिरके और मुसलमान 73 फिरको में तकसीम
[9:46]हो गए एक का मुकद्दस दिन इतवार है एक का मुकद्दस दिन
[9:56]हफ्ता है और मुसलमानों का मुकद्दस दिन जुमा है बहरहाल मूसा अल
[10:02]सलाम के बाद जब उनकी उम्मती हों ने उनके दीन में तब्दीलियां
[10:08]की तौरा में तब्दीलिया की और यूं पैगंबर ने जब नबूवत का
[10:17]ऐलान किया तो बाकी अदियार मसक हो चुके थे अब वो अदियार
[10:20]नहीं रहते जैसा खुदा ने उसे उस दन को नाजिल किया था
[10:25]या मैं यूं कहू कि इस्लाम की बिगड़ी हुई सूरत मूसा अ
[10:32]सलाम इस्लाम को बहलाने लाए थे इस्लाम को बहलाया था लेकिन उस
[10:38]इस्लाम को जो मूसा अ सलाम पहला रहे थे उसकी शक्ल को
[10:40]बिगाड़ा गया ईसा अ सलाम दन इस्लाम की तबलीग करने के लिए
[10:46]आए थे लेकिन ईसा सलाम के बाद इस दन की शक्ल को
[10:50]बिगाड़ दिया गया बस [संगीत] मोहतरम यह तीन अदियार पैगंबर का जब
[11:01]दौर आया तो यहूद और नसा आपस में जमा [संगीत] हुए हालांकि
[11:10]ईसाई कहते कि हमारे ईसा को यहूदियों ने कत्ल किया है लेकिन
[11:18]यहां पर दोनों इकट्ठे हुए क्योंकि यहूदी कहते हैं कि मूसा आखरी
[11:24]नबी है तौरा आखरी किताब ईसाई कहते हैं ईसा आखरी नबी है
[11:27]इंजील आखरी किताब हम कहते हैं कि आखरी में पैगंबर रसल खुदा
[11:32]है और कुरान आखरी किताब तो ईसाई कहते हमारे ईसा को यहूदियों
[11:38]ने कत्ल किया इतनी आपस में रंजिश इतनी इलाफ लेकिन जब पैगंबर
[11:45]ने नबूवत का ऐलान किया यह दोनों आपस में मिल गए क
[11:49]देखो ईसा अगर तुम नबी कहते हो हम नहीं मानते लेकिन तुम्हारे
[11:55]बकल व अल्लाह के नबी है मूसा नबी है एक समझ में
[12:00]आने वाली बात है क्योंकि मूसा भी बीवी सारा की नस्ल में
[12:02]से हैं इसहाक की औलाद में से और ईसा भी बीवी सारा
[12:07]की औलाद हजरत इक अल सलाम की नसल में से लेकिन ये
[12:12]अब्दुल्लाह का बेटा जो नबूवत का ऐलान कर रहा है यह तो
[12:14]बीवी सारा की नस्ल में से नहीं है ये तो हमारी अम्मा
[12:18]बीवी सारा की कनीज हाजरा की नस्ल में से है बला कनीज
[12:24]की औलाद में नबूवत कहां से चली इस इख्तिलाफ को लेते हुए
[12:30]यहूद और न सारा इस्लाम के मुकाबले में इकट्ठे हो गए और
[12:33]उन्होने मिलकर इस्लाम का मुकाबला करना चाहा इस्लाम को फना करने की
[12:40]कोशिश की और यूं पैगंबर के दौर से यहूद नरा की इस्लाम
[12:42]के साथ एक दुश्मनी कायम हो गई और व दुश्मनी चलती आ
[12:48]रही है आज तक चली आ रही है त क कयामत लाफा
[12:54]चलते आ चले जाएंगे जिसको जहां मौका मिलता वो इस्लाम को नुकसान
[13:00]पहुंचाता है अगरचे हमारा दन इस्लाम इस चीज की इजाजत नहीं देता
[13:05]कि [संगीत] हम किसी ईसाई को बेगुनाह कत्ल कर दे हमारा दन
[13:10]इस चीज की इजाजत नहीं देता किसी य यहूदी को माली या
[13:16]जानी नुकसान पहुंचाए खामखा में इस्लाम इजाजत नहीं देता कि किसी ईसाई
[13:22]को खामखा नुकसान पहुंचाए अगर वो अपने दिन पर जिंदगी गुजारे तो
[13:27]ठीक है हम उसकी जान और माल के नुकसान पहुंचाना शर हमारे
[13:32]जायज नहीं है अलबत्ता अगर कोई गैर मुस्लिम इस्लाम के मुकाबले में
[13:41]आ खड़ा हो जाए तो फिर इस्लाम वहां पर दिफाई हमें इतहाद
[13:51]इफाक का दर्स देता है और यह अन 1400 साल से चले
[13:56]आ रहे 1445 हिजरी चल रहा पैगंबर ने जब मक्का से मदीना
[14:03]हिजरत की थी उसको 1445 साल हो गए यह अदियानूठू [संगीत] डेज
[14:29]सालों में जंगी भी हुई कतल गारत भी हुआ बहुत चीज हुई
[14:36]लेकिन आज आज जो आपको नजर आ रहा है फलस्तीन में यह
[14:45]भी उसी माजी की कड़ी का एक सिलसिला है माजी की एक
[14:50]कड़ी है यह भी माजी की उन नफरतों का एक सिलसिला है
[14:54]जो इस अंदाज से जाहिर हो गया पैगंबर के दौर में पैगंबर
[15:01]ने ईसाइयों के साथ भी मुकाबला किया था और यहूदियों के साथ
[15:07]ईसाइयों के साथ मुबा हला किया था जो कि पैगंबर जीत गए
[15:13]थे और यहूदियों के साथ जंगे खैबर लड़ी थी क्योंकि खैबर में
[15:20]यहूदी थे व खैबर बनाया क्यों था दर हकीकत यहूदियों का एक
[15:24]ग्रह अलग हुआ मूसा अल सलाम के बाद सबने कहा मूसा आखरी
[15:30]नबी है तौरा आखरी किताब है एक ग्रह अलग हुआ उलमा से
[15:32]पूछा कि हकीकत क्या है तो हकीकत उन्होंने बताई कि मूसा आखरी
[15:38]नबी नहीं है तौरा आखरी किताब नहीं है आखिरी नबी कोहे अबू
[15:43]कबीस पर नबूवत का ऐलान करेंगे कहा कोहे अबू कबीस कहां है
[15:46]कहा ये नहीं मालूम कहां है और वहीं से यहूदियों के इस
[15:51]ग्रह ने खाना बद शना जिंदगी शुरू कर दी खानाबदोश की तरह
[15:54]कभी एक हफ्ता कभी कभी कहीं कभी कहीं जिंदगी गुजारते रहे हफ्ता
[16:00]इधर गुजारा फिर सफर किया चंदन हफ्ता महीना वहां गुजारे फिर सफर
[16:06]किया और यूं इस नशाना जिंदगी में कई स साल गुजर गए
[16:13]और नसल द नसल उस बात को मुंत किल करते रहे कि
[16:18]हमारी य खानो बद शना जिंदगी क्यों है अपनी नस्लों को बताते
[16:20]थे कि हम आखरी नबी की तलाश में जिस तरह हमारे आजादी
[16:25]हम आने वाली नस्लों को बताते कि हम इस दुनिया में जब
[16:31]तक हम जिंदा है अजादारी करते रहेंगे क्यों करते रहेंगे उसके इल
[16:34]असबाब बताते हैं अपनी औलाद को और यं अजादारी का सिलसिला बुजुर्गा
[16:39]से जवानों जवानों से बच्चों में और यही बच्चे जवान हो के
[16:42]अपनी आइंदा आने वाली नस्लों में व अपनी नस्लों में यह बात
[16:47]मुंत किल करते रहते हैं और 1400 साल हो गए कि वह
[16:53]अजादारी जारी और सारी है बड़ी शान शौकत के साथ अल्हम्दुलिल्लाह यहूदी
[16:56]उसी बात को वो जो ग्रोह निकला था कि हम आखिरी नबी
[17:02]को ढूंढे ताकि आखरी नबी के हाथ पर बैत करें और निजात
[17:07]पा जाए क्योंकि आखरी नबी का जो उम्मत है वो निजात याफ्ता
[17:09]है और यूं यहूदियों का यह ग्रोह जो खाना बंदो शना जिंदगी
[17:17]गुजार रहा था इसमें सैकड़ों साल गुजर गए जो छोटा सा ग्रह
[17:20]था अब उसमें नस्ले पहनने लगी और एक बहुत बड़ा कबीला और
[17:26]कौम की तरह नमूद हुए लेकिन खाना बद शना जिंदगी गुजारते गुजारते
[17:30]पुराने जमाने में जब सफर होता था तो सुबह से सफर शुरू
[17:35]करते थे शाम को तहर जाते थे रात को सफर नहीं करते
[17:42]थे लिहाजा शाम के वकत ठहर के वहीं पर खैम जन होते
[17:43]थे और सुबह को फिर सफर करते थे या अगर चंद दिन
[17:47]गुजारने तो गुजार लेते थे महीने हफ्ते गुजारने तो गुजार नहीं तो
[17:54]आगे चलते थे इत्तेफाक से चलते चलते मूसा अल सलाम के बाद
[17:59]यह ग्रह जो शना जिंदगी गुजारते गुजारते इफाक से मक्का की सरजमीन
[18:03]की तरफ आया इनको पता नहीं था कोई अबू कबीस का है
[18:08]नसल उस बात को मुल करते रहे इफाक से आए मक्का की
[18:13]सरजमीन की तरफ अब जब यहां पर आए तो शाम का वक्त
[18:19]था ठहराव किया और कहा जरा पानी को तलाश किया जाए पानी
[18:25]को तलाश करने के लिए उन्होंने आसमान के ऊपर देखना श शुरू
[18:29]किया ताकि परिंदे नजर आए तो पता चले उस जानिब पानी है
[18:34]सहरा में पानी उने का यही तरीका होता है कि जब आसमान
[18:40]पर परिंदे जिस तरफ नजर आते इसका मतलब उस तरफ पानी है
[18:44]लिज जब इन्होने परिंदों को देखा उसी जानिब बढ़े तो जब वहां
[18:47]गए तो वहां क्या देखा कि खाना काबा के करीब पानी का
[18:53]चश्मा है आबे जमजम का पानी पिया बड़ा लतीफ बड़ा शीरी फरहद
[18:56]बख पानी था एक मर्तबा मालूमात की कहा हजरत इस्माइल अच्छा हमारे
[19:03]दादा इसहाक के भाई इस्माइल का चश्मा है कहा हां क इस
[19:09]जगह को क्या कहते हैं क इस जगह को तो मालूम नहीं
[19:10]क्या कहते हैं वही जो कबीला अबता उन्होंने कहा ये जो पहाड़
[19:14]नजर आ रहा है तुम्हें खाना काबा के सामने उसको कोहे अबू
[19:16]कबीस कहते हैं जैसे ही नाम सुना एक दूसरे को देखकर ंग
[19:21]रह गए कि वो कोहे अबू कबीस कि जिसको ढूंढने के लिए
[19:27]हमारे अब अजदाद ने सफर शुरू किया था हम उस तक पहुंच
[19:32]गए और दौड़ते हुए अपने काफले के पास वापस आए जब य
[19:34]आ अफराद वापस आए हाते हुए तो कबीले के सरदारों ने पूछा
[19:41]कि क्या बात है क्यों इस तरह हाते हुए आ रहे हो
[19:45]जो सफर हमारे अदार ने शुरू किया था को अब कबीस को
[19:46]ढूंढने के लिए हमने उसे पा लिया क्योंकि आवाजार ने कहा था
[19:52]कि को अब कबीस के पास आखरी नबी नबूवत का ऐलान करेंगे
[19:57]लि यह लोग आए और पूछा य किसी नबी ने नबूवत का
[20:00]लान तो नहीं किया कहा नहीं इब्राहिम और इस्माइल के बाद यहां
[20:03]कोई किसी नबी ने नबूवत का ऐलान नहीं किया कुछ अरसा रहे
[20:08]और उसके बाद उन्होंने कहा कि यहां नहीं रहते यहां से दूर
[20:15]किसी जगह पर ठहरते यहां आते जाते रहेंगे और मालूमात करते रहेंगे
[20:18]जब आखरी नबी आएंगे तो हम उनके हाथ पर बैत कर लेंगे
[20:26]लिहाज उन्होंने मक्का से 400 किलोमीटर या 400 मील दूर खैबर के
[20:30]मकाम का इंतखाब किया जो सरसब्ज इलाका था वहां पर पहनी की
[20:35]पानी की नहर थी तो उसका इंतखाब करने के बाद वहां रहने
[20:38]लगे रहते रहते आपस में गुफ शनी होती रहती थी तो एक
[20:48]मत बैठे और कहा देखो अगर आखरी नबी आए तो हमारे पास
[20:50]कोई ऐसा एहतमाम होना चाहिए कि हम आखरी नबी की हिफाजत कर
[20:54]सके तो कहा फिर क्या करें कहा देखो अगर आखरी नबी के
[20:58]जान को खतरा तो हमारे पास कोई उसकी सेफ्टी का कोई जरिया
[21:00]तो हो ना उसको बचाने का कोई तरीका तो हो तो कहा
[21:04]क्या करें तो कुछ अफराद ने मशवरा किया कहा देखो हमारे आबा
[21:10]अजदाद किले बनाया करते थे तो किलो में यह होता था कि
[21:13]बाहर से लश्कर आते थे तो किले के अंदर अफराद महफूज होते
[21:15]थे तो कहा क्या करें कहा किला बनाते हैं अगर आखरी नहीं
[21:20]ब आए उनकी जान को खतरा हो तो उसे किले में लेकर
[21:24]आ जाए लिजा किले की तामीर शुरू हुई और किला खैबर को
[21:26]तामीर किया गया बाद में दो तीन किले पीछे और भी बने
[21:31]थे लेकिन सबसे बड़ा किला किला खैबर था किला खैबर बन गया
[21:37]इसमें भी 50 साल 100 साल 1 स साल गुजर गए फिर
[21:42]आपस में मिल चत कर व गुफ शनी होती रहती थी बहस
[21:46]में बसा होता था फिर कहा कि भाई अगर आखरी नबी आ
[21:49]गए हमने किले में लेकर भी आ गए तो ऐसा ना हो
[21:50]कि खुद भी भूखे मरे नबी को भी भूखा प्यासा पार दे
[21:57]तो क्या मतलब कहा हमारे पास किले में ऐसा इंतजाम होना चाहिए
[22:00]कि अगर दुश्मन चारों तरफ से किले को साल दो साल तक
[22:05]के लिए घेरे में रख ले तो कम से कम हमारे पास
[22:09]इतना स्टॉक होना चाहिए इतना जखीरा होना चाहिए गल्ले का और पानी
[22:11]का कि हमें किले से बाहर निकलने की जरूरत ही ना हो
[22:16]लिहाजा बड़े-बड़े तालाब बनाए गए पानी के टैंक बनाए गए बड़े-बड़े जखीरे
[22:19]के हाल बनाए गए वहां पे गल्ले को रखा गया भूसे के
[22:26]साथ ताकि खराब ना हो फिर कुछ अरसा बाद जब यह भी
[22:32]हो गया फिर आपस में बैठे क देखो अगर आखरी नबी आए
[22:37]तो उसको दौलत की जरूरत होगी उसको लश्कर की जरूरत होगी क्योंकि
[22:40]अगर उसको दुश्मनों से जंग करना पड़े तो हमारे पास कुछ ऐसा
[22:49]जरिया होना चाहिए ताकि हम नबी का तैयार कर दिए किसने यहूदियों
[23:02]ने खैबर में किसलिए आखरी नबी के इंतजार के लिए जब मरहबा
[23:11]अंदर जैसे पहलवान तैयार हुए फिर उसके बाद आपस में यह भी
[23:13]काफी नहीं है आखरी नबी अगर आए और उसको दन को पैलाना
[23:18]चाहा उसको दौलत की जरूरत हुई तो हमारे पास इतनी दौलत होनी
[23:23]चाहिए कि हम आखरी नबी के कदमों में डाल दे और वो
[23:27]उसके जरिए वो दन पर खर्च करें औरन को पलाना शुरू करें
[23:30]तो कहा क्या करें कहा तिजारत और यं उन्होने तिजारत शुरू की
[23:38]और सोने की ईट जमा करना शुरू की कि जब पैगंबर आए
[23:43]तो य सोने की टे उसे दे देंगे ताकि इसके जरिए व
[23:45]दन पर खर्च करें रिवायत में भी है कि जब तक खैबर
[23:54]फत नहीं हुआ था फाका के नौबत थी जब खैबर फत हुआ
[23:56]मुसलमानों के घरों में सोना कुल्हाड़ी से काट काट कर तकसीम किया
[24:03]गया यह वही सोना था जो आखरी नबी के लिए रखा गया
[24:05]था बहरहाल हर तरीके से उन्होंने आखरी नबी के लिए तैयारी की
[24:12]लेकिन जब आखिरी नबी आए और जब वो आए उन्होंने देखा कि
[24:17]यह जिसने नबूवत का ऐलान मक्का में किया जरा जाकर देखें वाक
[24:20]वह नबी है या नहीं है तो खैबर के जो बड़े-बड़े सरदार
[24:27]वो आए पैगंबर को देखने के लिए तो ने देखा जो निशानिया
[24:29]उन्हे बुजुर्गा ने बताई थी वह सारी निशानिया पैगंबर में मौजूद है
[24:37]देखा वाक यही व नबी है जिसके हम मतसर थे आपस में
[24:39]कहने लगे कि है तो वही नबी तो कहा क्या करें अपनी
[24:44]कौम को क्या बताए कि यह वही नबी है और इसके हाथ
[24:49]पर कलमा पढ़ ले बत कर ले यह क्या करें तो उनमें
[24:53]से एक दो सरदारों ने कहा देखो बात यह है कि है
[24:58]तो वही नबी लेकिन अगर के हाथ पर हमने बैत किया ना
[25:00]तो अभी जो हमारे हाथों में सोने की अंगूठियां गले में सोने
[25:04]के हार है अभी जो हमारे कबीले में कौम में जो इज्जत
[25:06]एतराम है जो मकाम है ना यह सब तहस नहस हो जाएगा
[25:10]इसलिए कि फिर तो इस नबी की हु कमरानी होगी फिर तो
[25:13]सारी चीज इसके हाथ में चली जाएंगी तो फिर क्या करें चलते
[25:19]कौम को बताते कि यह व नबी नहीं है जिसका हम इंतजार
[25:22]कर रहे थे ये तो कोई और है और यूं इस के
[25:28]सरदारों ने इसके खैबर के यहूदियों के सरदारों ने अपनी कौम को
[25:33]इस तरीके से गुमराह किया वो सोना जो जमा किया था फिर
[25:42]आ सात हिजरी को खैबर फतह हुआ आठ हिजरी को मक्का फतह
[25:44]हुआ सात हिजरी को खैबर पैगंबर ने फतह किया और वो सोना
[25:50]मुसलमानों में तकसीम किया गया लेकिन वो जो कारोबार इतना कारोबार किया
[25:57]कि सोने की ईंट बड़े बड़े हाल सोने की हीटों से भरे
[26:05]हुए थे मुसलमानों में सोना कुलायोंज पैगंबर को तो मिल गया लेकिन
[26:12]यहां से एक नुक्ता कि यहूदी आज कारोबार के ऊपर काबिज नहीं
[26:15]है पैगंबर के दौर से यहूदी पूरी दुनिया के कारोबार पर काबिज
[26:22]रहे हैं हर दौर में यहूदी तिजारत पर काबिज रहे आज भी
[26:27]वही आलम है और याद रखिए यहूदी आप उन्हें बुरा भला कहर
[26:35]आप उसे काफिर कह रहे बुरा नहीं मानेंगे लेकिन जैसे माल दौलत
[26:40]को माली नुकसान आपने पहुंचाना चाहना इसको बर्दाश्त नहीं करते यहूदी माली
[26:46]नुकसान को बर्दाश्त नहीं करते बस जा मतरम यही यहूदी वही नसल
[26:56]चलते चलते दुनिया में बहती रही मुख्तलिफ जमानो में कभी यदी कहीं
[27:02]कभी कहीं कभी कहीं से मार खा जाते थे कभी कहीं से
[27:07]मार खा जाते थे हिटलर के दौर में हिटलर ने उनको तहस
[27:09]नहस कर दिया था कुछ अफराद को 10 पर यहूदियों को छोड़
[27:14]दिया था और वही यहूदी जिनको कोई एक्सेप्ट नहीं कर रहा था
[27:20]समंदर में कश्तियों में कभी एक मुलक कभी दूसरी मुक यूरोप वाले
[27:22]कबूल कर रहे थे ना अमेरिका वाले कबूल कर रहे थे ना
[27:27]ऑस्ट्रेलिया वाले ना बतानिया वाले कबूल कर रहे थे जब फलस्तीन की
[27:30]तरफ आए तो उन्होंने फलस्तीन वालों से भीख मांगी तो उन्होंने अजरा
[27:37]अजरा इंसानियत उन्हें मकाम दिया कि आ जाओ ठीक है एक अल्लाह
[27:40]का की मखलूक होने के नाते तुम भी यहां रह लो और
[27:45]यूं आज 70 75 साल हो गए कि यहूदी फलस्तीन में रहने
[27:50]लगे और फिर छोटा सा टुकड़ा फिर आहिस्ता आहिस्ता पहला पहला वो
[27:57]जमीन को कब्जा करते करते 70 75 या 80 फीसद फलस्तीन पर
[28:05]कब्जा कर लिया और यूं वह फलस्तीन ने जो उनके साथ अच्छाई
[28:07]की थी उसका फलस्तीन को बुरा बदला देने लगे यह वही यहूदी
[28:17]है आज इसराइल वह हजरत याकूब अ सलाम का लकब इस इसराइल
[28:27]वह अपने मुल्क का नाम रखा और इस तरीके से हमारे पाकिस्तान
[28:35]इसको एक्सेप्ट नहीं किया है आजम ने भी इसको एक्सेप्ट नहीं किया
[28:37]आज तक हमारी हुकूमत ने एक्सेप्ट नहीं [संगीत] किया अलबत्ता इसके खिलाफ
[28:43]कुछ करने की जुरत भी नहीं रखते किया भी नहीं है हालांकि
[28:47]होना यह चाहिए कि हमारे तोप का रुख इसराइल की तरफ हो
[28:51]सिर्फ जबानी कलाम नहीं है जिस तरह अमेरिका खुलकर कहता है कि
[28:58]हम इसराइल की जंग लड़ेंगे और खुलकर उनको असला फराम करता है
[29:02]इस्लामी मु मालिक को भी चाहिए कि इसराइल के खिलाफ ऐसे ही
[29:09]एकदाम उठाए अगर जंग नहीं कर सकते तो कम से कम उनकी
[29:12]मदद ना करें और बहुत से ऐसे इस्लामी मुल्क मसलन बहुत से
[29:18]अफराद तैयब अदन तुर्की के सदर को जनाब बड़ा इस्लामी एक नंबर
[29:26]का मुनाफिक एक नंबर का मुनाफिक इंसान हैय इसराइल को तेल य
[29:32]फराह करता है तिजारत इसकी चल रही है चीज य मया कर
[29:38]रहा है बजहर आवाम के मुजाहि की वजह से मजबूरन उसको एक
[29:43]बयान देना पड़ा ला पाकिस्तान ने इसराइल को एक्सेप्ट नहीं किया कबूल
[29:48]नहीं किया हमारे पासपोर्ट के ऊपर लिखा हुआ है आप हर मुल्क
[29:54]जा सकते हैं लेकिन इसराइल नहीं जा सकते तुर्की ने तो इसराइल
[29:56]को एक्सेप्ट किया उस पासपोर्ट पर वो इसराइल जा सकते हैं हम
[30:01]और आप नहीं जा सकते एक मुनाफिक मुल्क है एक मुनाफिक हाकिम
[30:07]है यही इसराइल आहिस्ता आहिस्ता पलते पलते फलस्तीन पर कब्जा किया अब
[30:14]जो कहते कि यह जंग फलस्तीन ने शुरू की फलस्तीन ने नहीं
[30:17]शुरू की [संगीत] फलस्तीनियन का है तो जो फती न के हिस्से
[30:27]की जमीन उसम भी इसराइल आके घुसने लगे तो उनको रोकने के
[30:33]लिए फलस्तीन ने मुजा हमत की अब उस मुजा हमत के बदले
[30:38]में इसराइल ने हमले शुरू कर दिए और कहते कि जनाब जंग
[30:43]की इदा फलस्तीन ने की हालाकि फलस्तीन ने जंग की इब्तिदा नहीं
[30:45]किए उन्होंने तो वो जो मजद उनके इलाके में उनसे रोकने के
[30:52]लिए जंग लड़े थे सलात भेजिए मोहम्मद वाले मोहम्मद पर सला महम्मद
[30:58]महद मोहतरम आज इसराइल के मुकाबले में जो मुकाबला कर रहे हैं
[31:12]हम मास कर रही है अलकासिम ब्रिगेड कर रही है और लब
[31:19]से हिजबुल्लाह इंकलाब इस्लामी आने के बाद सन 8182 में जब ईरान
[31:25]में इंकलाब इस्लामी आया 79 तो उस दौर में सिर्फ यह नहीं
[31:33]कि ईरान में बल्कि इमाम खुमैनी रिला ताला ने क्या किया उनकी
[31:38]बड़ी वसी सोच थी लबम जहां पर तश्य वन थर्ड बनती है
[31:47]वन थर्ड आबादी तयो की है तीसरा हिस्सा वहां पर जो तश्य
[31:50]बिल्कुल सिसकियां ले रहा था यानी बड़ी पस्त जिंदगी गुजार रहा था
[31:59]मुस्तफा डॉक्टर मुस्तफा चामरान उनको भेजा वहां के शियों को संभाला कुछ
[32:08]बातें जो मैं यहां मेंबर में नहीं कह सकता कि वहां के
[32:14]जो शिया कौम की बदहाली थी किस कदर बदहाल थे किस कदर
[32:20]मासरे में गिरे हुए समझे जाते थे उनको इकट्ठा किया उनको तालीम
[32:23]उनको रोजगार हर हवाले से काम किया और यहां तक के हिजबुल्ला
[32:29]की बुनियाद रखी फिर बाद में मुख्तलिफ कायन आते रहे आखरी अब्बास
[32:40]शहीद अब्बास मूसवी जिनको शहीद किया गया फिर अभी हसन नसरुल्लाह हत
[32:46]हसन सरसला यह हिजला के कायद है इनसे पहले अब्बास मुस थे
[32:54]तो ये आते रहे लेकिन हिजला की याद जो रखी है वह
[33:03]भी डॉक्टर मुस्तफा चमरा ने रखी सलात भज मोहम्मद और सिर्फ यहां
[33:10]पर हिजबुल्ला की बुनियाद नहीं रखी बल्कि हिजबुल्ला ने मजीद अपने पंजे
[33:19]गाड़ना शुरू कर दिए और फलस्तीन में आज अगर हम मास को
[33:24]यह ताकत कुवत मिली है तो भी हिजबुल्ला के जरिए से मिली
[33:27]और आज भी अगर फलस्तीन में देखा जाए तो फलस्तीन में कोई
[33:34]शिया आबादी नहीं है शिया फैमिलीज नहीं है लेकिन मदद कौन कर
[33:37]रहा है ला लना ममल कत रान खुलकर जब अमेरिका खुलकर इसराइल
[33:46]की मदद कर सकता है तो हम क्यों नहीं करें हमें तो
[33:53]दुख हो रहा है इस्लामी ममालाकंडम मालिक है किसी को जरूरत नहीं
[34:01]है कि ऐसा बयान दे के हम फलस्तीन की मदद करेंगे बल्कि
[34:04]उनके सामने हाथ जोड़ रहे हैं आप जंग रोक लीजिए ताकि हम
[34:10]उनके इमदादी सामान पहुंचा दे भीख मांग रहे हैं आंखों में आंखें
[34:14]डाल कर के बात करनी चाहिए वह आपके दरमियान है आप उनके
[34:21]दरमियान नहीं है बरती की इंतहा इतनी हो गई मुस्लिम म मालिक
[34:26]के ऊपर क्या वो आंखों में आखे डाल के बात नहीं कर
[34:29]सकते अमेरिका कहते खुलकर यह जंग हमारी है हम लड़ेंगे बाकायदा उनको
[34:34]असलहा भेजता है हमारे यहां ऐसी कोई सिलसिला नहीं है अगर है
[34:44]तो य हिजला मलान या ममल कत ईरान है जो खुलकर खुलकर
[34:46]फलस्तीन का साथ दे रहा है हालांकि फलस्तीन में शिया नहीं है
[34:53]अल्हम्दुलिल्लाह वह जो इसराइल का एक रो तक दबदबा था कि कोई
[34:59]मिसाइल आएगा इसराइल को हिट नहीं कर सकता एंटी मिसाइल सिस्टम है
[35:05]उनके पास एटमी ताकत ये सारी चीजें वो जो रोब दबदबा था
[35:13]खत्म हो गया अब देखिए उन्होंने फलस्तीन के ऊपर क्या किया डायरेक्ट
[35:18]बमबारी कर दी आवाम के ऊपर यह बमबारी करना क्या बता रहा
[35:24]है भाई बमबारी कब की जाती है जब आखिरी कोई ऑप्शन ना
[35:27]बचे इसका मतलब है आप में इतना रोब और दबदबा ही नहीं
[35:30]था आपसे कोई इतना डरा ही नहीं है आप और कुछ ही
[35:35]नहीं कर भी नहीं सके सिवाय इसके कि आप उन मजलूम पर
[35:40]बमबारी कर द हालांकि बमबारी आखरी ऑप्शन होता है उसके बावजूद उनके
[35:46]हौसले पस्त नहीं हुए क्यों इसलिए कि इन सन 42 43 या
[35:51]45 के सन से लेकर आज तक हमेशा फलस्तीन में घुस के
[35:53]आके मारा करते थे मुसल मजलूम मुसलमानों को व सिलसिला 70 साल
[36:02]से जारी था लिजा सब उसके लिए तैयार थे इसलिए किसी फलस्तीनी
[36:06]ने इनकी मुखालफत नहीं की है अलकासिम बिल ग्रेड की या हम
[36:15]मास की मुखालफत नहीं की कि इन्होंने जंग क्यों शुरू अल्हम्दुलिल्लाह उनको
[36:20]काफी नुकसान पहुंचाया इसराइल का य समझे कि इसराइल तकरीबन 40 50
[36:25]साल पीछे चला गया उनकी इकॉनमी उनकी जो रोब दबदबा था दुनिया
[36:34]में सब खत्म हो गया खाक हो गया ठीक है शहादत जरूर
[36:40]हुई घर मिसमा जरूर हुए लेकिन इसका जिम्मेदार हम मास नहीं है
[36:45]इसलिए कि फलस्तीन के अवाम हम मास के साथ मिले हुए हैं
[36:50]आज तक किसी फलस्तीनी ने हमस की मुखालफत नहीं की लेकिन इसराइल
[36:55]की मुखालफत कर रहे हैं हां यह जो फलस्तीन में तबाही और
[37:01]बर्बादी हो रही है अलबत्ता इसके जिम्मेदार तमाम इस्लामी ममा जरूर है
[37:06]इसलिए कि आप इसके लिए आवाज क्यों नहीं उठा रहे आवाम की
[37:12]बात नहीं करता आवाम ने तो आवाज उठाई है और यह आवाम
[37:17]का दबाव है कि हुक्मरानों को कुछ ना कुछ उनके खिलाफ कहना
[37:20]पड़ता है वरना हुकूमत खतरे में पड़ जाए जितने भी इलामी मलिक
[37:28]की हुकूमत आवाम के दबाव की वजह से उनको बयान देना पड़
[37:33]रहा है चाहे व मिस्र हो चाहे तुर्की हो चाहे दीगर मु
[37:36]मालिक हो चाहे हमारा मुल्क हो इन सबकी जिम्मेदारी इन इस्लामी मलिक
[37:43]पर पड़ रही है कि आपके होते हुए ऐसा क्यों हो रहा
[37:45]है आपके होते हुए इतने कत्ल क्यों हो गए जबकि वह आपके
[37:49]बीच में एक छोटा सा मुल्क है छोटी सी आबादी है चंद
[37:58]लाख की आबादी है जबकि चारों तरफ पूरे इस्लाम म मालिक है
[38:07]हमारी जिम्मेदारी हम क्या कर सकते अगर आप फलस्तीन जाना चाहेंगे मैं
[38:14]लिख के देता हूं आपको जाने नहीं दिया जाएगा आप नहीं जा
[38:18]सकते फलस्तीन आप अगर चाहे कि मैं वहां जाऊं और इसराइल से
[38:25]लडू स पदा नहीं होता आप य से पाकिस्तान से निकल जाए
[38:31]तो फिर क्या करें एक हल एक तो इसके खिलाफ आवाज बुलंद
[38:35]करना और इस सिलसिले को जारी रखना बारबार दूसरा व चीज जिनसे
[38:43]इसराइल को तकत मिलती है उन चीजों का बायकॉट कर दे ताकि
[38:51]माली नुकसान पहुंचे इसराइल को उसकी जितनी भी प्रोडक्ट है कोल् ड्रिंक्स
[38:55]है छोड़ दीजिए कुछ भी नहीं होगा और बल्कि बेहतर होगा क्योंकि
[38:59]कोल् सारी नुकसान दे आज से 30 साल पहले जरा अपने पाकिस्तान
[39:08]में या अपने कराची शहर में डायलिसिस के केसेस देख लीजिए और
[39:12]आज देख लीजिए डायलिसिस के कितने केसेस है छोटे छोटे बच्चे डायलिसिस
[39:18]का मुब्तला हो रहे हैं इन्हीं कोल ड्रिंक्स की वजह से इनकी
[39:21]जितनी भी प्रोडक्ट है उसका बकट करें उसको इस्तेमाल नहीं करें उसके
[39:25]मुकाबले में पाकिस्तानी प्रोडक्ट इस्तेमाल करें या कोई दूसरी इस्लामी मुल्क की
[39:31]जो भी प्रोडक्ट है उसे इस्तेमाल करें चाहे वह सर्फ हो चाहे
[39:34]साबुन हो चाहे खुशबू हो चाहे क्रीम हो चाहे कोल ड्रिंक हो
[39:40]चाहे कोई भी चीज हो कपड़ा हो स कोई भी चीजें हो
[39:43]इनकी प्रोडक्ट्स का बाइट काट करें फिलहाल हमारी शरी जिम्मेदारी एक ये
[39:47]है उनके खिलाफ अगर मुजहरा हो उस मुजरे में शिरकत करें उनके
[39:49]खिलाफ आवाज उठ आवाज उठाए चाहे वो फ के जरिए हो चाहे
[39:57]वो [संगीत] जब उनकी वो चीज इसका असर आया है अल्हम्दुलिल्लाह काफी
[40:30]इसका असर हुआ है अब हर चीज पर वो जनाब सेल लगा
[40:34]रहे हैं हर चीज के साथ एक चीज तोहफे में देने को
[40:37]तैयार हो रहे हैं कि कुछ भी हो हमारी प्रोडक्ट चलती रहे
[40:39]लेकिन इस वक्त बाकायदा सिस्तानी साहब का भी फतवा आ गया है
[40:44]कि इसराइल की प्रोडक्ट इस्तेमाल करना शरन जायज नहीं है हराम है
[40:50]सर्फ एरियल हो या दीगर उनकी जितनी भी है उनको इस्तेमाल करना
[40:56]जायज नहीं है हमारे लिए लिए इनकी कोल्डड ड्रिंक पीना हमारे लिए
[41:00]जायज नहीं है भराब है हमारे लिए इनकी जो खुशबू की चीजें
[41:06]हैं या दीगर खाने पीने की चीजें हैं फिलहाल हमारी जिम्मेदारी यह
[41:13]बनती है कि इनके खिलाफ आवाज उठाए और वो चीजें जिनसे इनको
[41:16]तकब मिलती है माली फायदा पहुंचता है उसका बायकॉट कर दे ताकि
[41:25]इनके माली फायदा ना पहुंचे और ये नुकसान में चले जाए और
[41:28]इस तरीके से जो क्योंकि यहां से जो फायदा मिलता है वो
[41:32]फायदा वहां पर ट्रांसफर हो जाता है और वो फलस्तीन के खिलाफ
[41:35]इस्तेमाल करते हैं यह हमारी शर हमारी कौमी हमारी अखलाकी और एक
[41:45]मजहबी जिम्मेदारी बनती है खुदा हम सबको दीन इस्लाम समझने और उस
[41:48]पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए खुदा बंदा फलस्तीन हिजला लमना
[41:55]मलिकत ईरान हम मास अलकासिम बगड जितनी भी व तंजीम जो इसराइल
[42:00]के खिलाफ ने बरामा खुदान को फत नुसरत गलब कुत अता फरमा
[42:06]मेरे मालिक इसराइल को निस्त नाबूत फरमा इसे जलील ख्वार फरमा खुदा
[42:13]उसको अपने मकास में नाकाम फरमा उसके शर से तमाम मुसलमानों को
[42:16]महफूज फरमा खुदा बंदा खुदा बंदा अपनी आखरी हुज्जत इमाम जमान के
[42:23]जुहूर में ताजल फरमा हम सबको उनके आवान अंसार में से शुमार
[42:29]फरमा जितने भी फलस्तीन में जख्मी है उनके सेहत याबी के लिए
[42:32]जो असर उनकी रिहाई के लिए और इसराइल की तबाई के लिए
[42:36]बारी दिगर सलावत
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