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UPSC CSE Result | How to Crack UPSC Exam? | Qualifiers Batch 2023-24 | UPSC Exam Shia Qualifires
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#UPSC #UPSCExam #Media_Sabeel #Musalman
UPSC CSE Result | How to Crack UPSC Exam? | Qualifiers Batch 2023-24 | UPSC Exam Shia Qualifires
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[0:00]अजु बिल्ला मि शैतान रम बिस्मिल्लाह रहमान रहीम नाजरीन सलाम अलेकुम सबील
[0:05]मीडिया पर एक नए प्रोग्राम के साथ हम आपकी खिदमत में हाजिर
[0:07]हुए हैं और आज का हमारा यह प्रोग्राम सबील मुरिया के दूसरे
[0:10]प्रोग्रामों से मुख्तलिफ है क्योंकि आज हमारे साथ जो मेहमान है वह
[0:16]उन्होंने वह काम किया है कि जो हमारे मुल्क के लिए फख्र
[0:18]का सबब है उनके खानदान के लिए कौम के लिए हमारी कौम
[0:23]के लिए हमारे मजहब के लिए बड़ी बात है और यह फक्र
[0:27]का मकाम है लायक तहसीन काम है जी हां हमारी मुराद है
[0:31]जनाब अदील मोहसिन साहब से जिन्होंने यूपीएससी के इस एग्जाम को क्रैक
[0:37]किया और 157 रैंक हासिल की और जनाब सायम रजा साहब के
[0:39]जिन्होंने इस एग्जाम को क्रैक किया और उन्होंने 188 रैंक हासिल की
[0:47]यकीनन यह हमारे लिए हमारे मुल्क के लिए हमारी कौम के लिए
[0:49]खुशी का मुकाम है और इस तरह के हमारे जवान हमारे लिए
[0:53]रोल मॉडल हो सकते हैं इस प्रोग्राम में हम इनसे जानेंगे कि
[0:56]इन्होंने क्या तरीका अपनाया क्या स्ट्रेटेजी अपनाई इस इतहा को तैयार करने
[1:00]के लिए किस तरीके से यह रोल मॉडल हो सकते हैं हमारे
[1:03]जवानों के लिए और बहुत सी बातें हम आज के इस प्रोग्राम
[1:08]में करेंगे इनसे लेकिन इससे पहले कि हम मेहमानों की खिदमत में
[1:11]चले आपको बताते चलें कि इस साल 2023 24 में यूपीएससी यानी
[1:17]यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के एग्जाम को 1016 कैंडिडेट्स ने क्रैक किया
[1:23]इसमें मुस्लिम जवान लड़कों और लड़कियों की तादाद 50 रही और इसमें
[1:26]एक मुस्लिम गर्ल नौशीन साहिबा ने टॉप 10 में अपनी जगह बनाई
[1:30]और नवे नंबर पर रही हम सभी मीडिया ग्रुप सभी क्वालीफायर्स को
[1:33]मुबारकबाद पेश करते हैं और उनकी कामयाबी तरक्की के लिए दुआ गो
[1:38]हैं ताकि वह मुल्क और मुल्क के आवाम की खिदमत में अपना
[1:39]किरदार अदा कर सकें इसी कड़ी की दो शख्सियत जनाब अदिल मोहसिन
[1:45]साहब रैंक 157 और सायम रजा साहब रैंक 188 आज हमारे साथ
[1:48]हैं जो हमारी कौम यानी शिया असना शरी कम्युनिटी को रिप्रेजेंट करते
[1:54]हैं आइए चलते हैं इनकी खिदमत में और गुफ्तगू करते हैं तो
[1:56]सबसे पहले हम चलते हैं जनाब सायम साहब की खिदमत में एक
[2:00]छोटा उनका जो है व मुख्तसर च जुमलो में तारुफ हो जाए
[2:05]फिर आदल साब की खम में चलेंगे उनका तारुफ और फिर जो
[2:06]गुफ्तगू का सिलसिला है वो शुरू होगा स सा बलाम वालेकुम जी
[2:16]अलाम वालेकुम आप लोग का बहुत बहुत शुक्रिया आप आपने अपने प्रोग्राम
[2:22]में बहुत इज्जत दी हमें उसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया मेरा नाम
[2:27]सायम रजा है मैं बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला हूं मेरे
[2:34]वालिद स्टेट बैंक में एंप्लॉई थे और अब तो रिटायर्ड है और
[2:40]मैंने अपनी जो एजुकेशन है प्राइमरी एजुकेशन यही मुजफ्फरपुर से ली है
[2:45]उसके बाद मैंने इंजीनियरिंग की थी बेंगलोर से बेंगलोर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
[2:50]से और वहीं इंजीनियरिंग कंप्लीट करने के बाद मैंने जॉब की एक
[2:55]कॉर्पोरेट कंपनी में लगभग चार साढ़े साल का मेरा कॉरपोरेट का एक्सपीरियंस
[2:58]था उसके बाद फिर मैंने वो जॉब छोड़ करके इस एग्जाम की
[3:04]प्रिपरेशन की लगभग तीन साल और फाइनली 2024 में यह एग्जाम में
[3:07]कामयाबी हासिल हुई अलुला माशाल्लाह जजाकल्लाह अब चलते हैं हम अदिल साहब
[3:17]की खिदमत में कि अदिल साहब का भी तारुफ हो जाए हमारे
[3:19]ऑडियंस के लिए मोमिनीन के लिए तो फिर आगे फिर हम चलते
[3:25]हैं अपनी गुफ्तगू की तरफ सा बिस्मिल्लाह बलाम वालेकुम सबसे पहले बहुत
[3:33]शुक्र गुजार आप का आप लोगों ने पॉडकास्ट पत कि दिया मेरा
[3:37]नाम सद मोहसिन है मैं भी मुजफरपुर जिलो का रहने वाला ह
[3:45]ज सा और मेरा मुजफरपुर के एक छोटे का रहने वाला और
[3:51]मेरे वालिद साहब का नाम सद मेहद रजा है उनका इंतकाम जब
[3:54]क्लास वो एक शायर भी थे और के बाद मैंने अपनी जो
[4:05]प्राइमरी एजुकेशन है मैंने जो अपनी प्राइमरी एजुकेशन है वो यही मुजफरपुर
[4:08]से हासिल करी दवी क्लास तक उसके बाद से मैं दिल्ली शिफ्ट
[4:12]हो गया था जामिया में जहा से मैंने लेवल 12 करा और
[4:14]उसके बाद से मैंने बीटेक मेकेनिकल इंजीनियरिंग में करा जामिया से और
[4:20]उसके बाद से फिर मैं सिविल ज की प्रिपरेशन में लग गया
[4:22]वो भी जामिया से हीने प्रिपरेशन करी फाइनली मुझे मेरे चौथे आटम
[4:30]चौथी कोशिश पर मुझे काम हासिल हुई और इस बार माशाला ख
[4:33]आपको तरकी नायत फरमाए और आपकी तौफ कात में इजाफा करे और
[4:38]यह जिम्मेदारी नई जिम्मेदारी जो अल्लाह ने आपके आप दोनों के का
[4:44]पर रखी है आपको तौफीक नायत करे के सही तरीके से और
[4:46]बतौर एसन उसे अंजाम दे सके जाफर साहब माशाल्लाह यह लायक तहसीन
[4:53]है हमारे यह जवान और खुदा फिर से इनके लिए दुआ करें
[4:58]खुदा जो है इनकी तौफ में इजाफा करे कामयाबी तरक्की खुद हमारा
[5:03]दीन भी इस बात की तरफ हमको जो है वह शौक दिलाता
[5:08]है तश्वी दिलाता है रवाया आयात जो है वह इस सिलसिले में
[5:13]बहुत सी मौजूद है अभी हम सवाल लेंगे कि किस तरीके से
[5:15]इन तरक्की की राहों को हम तय कर सकते हैं हमारे जवान
[5:19]किस तरीके से इस तरफ आ सकते हैं अगर इन दो लोगों
[5:24]से आपके कुछ सवालात हैं या गुफ्तगू में आप इसमें शरीक होना
[5:26]चाहते हैं तो आप शुरू करें ज्यादा बेहतर होगा बिस्मिल्लाह अजु बिल्लाह
[5:32]मिन शैतान रजी बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अ जैसा कि जॉन भाई आपने
[5:38]फरमाया कि यकीनन हमारा मकतब और जो हम जिस मजहब से ताल्लुक
[5:40]रखते हैं अ बिल यकीन और बिल कत हम कह सकते हैं
[5:45]कि शायद इस मजहब से ज्यादा किसी ने भी इल्म की अहमियत
[5:49]के ऊपर तवज्जो नहीं दिलाई है आप कुरान मजीद की आयतें देख
[5:51]ले या वह अहा दीस जो अम्मा मासूमीन अलैहिम सलाम से नकल
[5:57]हुई है तो उसमें मुता मकामा पर अम्मा अलसलाम ने इल्म हासिल
[6:03]करने और इल्म के बाला तरीन मर्तबा को हासिल करने की तशरीफ
[6:06]दिलाई है अपने शागिर्द को एक वह हदीस है कि जिसमें जिसको
[6:10]अक्सर जो है सबील मीडिया के प्रोग्राम में भी यूज किया जाता
[6:13]है और काफी रहबर मोअज्जम भी उसे काफी यूज करते हैं और
[6:18]वाक आज के उस आज के इस जमाने में काफी जो है
[6:22]उस हदीस को बर्ज स्ता तौर पर देखा महसूस किया जा सकता
[6:26]है कि जिसमें मौला कायनात अल सलाम फरमाते हैं कि अल इल्म
[6:28]सुल्तान कि बेशक इल्म कुदरत है ताकत है कि मन वजद साला
[6:34]कि जिसके पास ये इल्म हो जिसके पास ये कुदरत हो यह
[6:38]ताकत हो तो वो लोगों पर हावी हो जाता है वो लोगों
[6:41]की बात हो लेकिन जिसके पास यह कुदरत नहीं होती तो फिर
[6:44]लोग उसके ऊपर हावी हो जाते हैं लिहाज बेह यानी ये मकतब
[6:48]जो है वो इल्म का मकतब है और यकीनन ये अफराद जो
[6:53]हैं ये दो भाई जो हमारे हैं वाकया कौम के लिए फख्र
[6:54]की बात है कि अ किस तरीके से इन्होंने जो है वो
[6:59]कौम का नाम रोशन किया है मैं बस एक सवाल यह करना
[7:04]गुफ्तगू का आगाज करने के लिए बस यह क कहना चाहूंगा कि
[7:05]मैं पूछना चाह रहा था कि हमारे व्यूवर्स के लिए हमारे भाई
[7:13]अगर बता सके कि मसलन यूपीएससी क्या है और इसमें क्या जिम्मेदारियां
[7:17]होती हैं अग जो शख्स यूपीएससी क्रैक करता है मेरे खल से
[7:22]आप जो है व अगर अदिल साहब से या सायम साहब से
[7:27]किसी एक से जो है अच्छा कोई भी अदिल अदिल भाई से
[7:32]इनका नाम शुरू होता है तो अदिल भाई जो है आप बताइए
[7:40]जरूर यूपीएससी जो है व इस मुल्क की जो सबसे हास्ट पोजीशन
[7:47]होती है बेटिक पोजीशन होती है सिविल सर्विसेस में उसके लिए एगजाम
[7:51]कराती है जो तो यूपीएससी और भी एग्जाम कराती है बट जो
[7:56]एगजाम हमने दिया वो सिविल सर्विसेस का एजाम है और इसके थ्रू
[7:59]डिफरेंट सर्विसेस के लिए लोग सिलेक्ट होते हैं मोस्टली जो इसमें सर्विसेस
[8:04]होती है वो ग्रुप ब सर्विसेस होती है कुछ ग्रुप बेस सर्विसेस
[8:06]भी होती है बेसिकली जो हाईएस्ट पोजीशन ब्यूरोक्रेटिक पोजीशन होती है वो
[8:10]इसके थ्रू सिलेक्ट होते है इसमें आपके आईस का सिलेक्शन होता है
[8:16]जो इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेस है जो एडमिनिस्ट्रेशन को देखती है एडमिनिस्ट्रेशन में
[8:20]आपका शहर का एडमिनिस्ट्रेशन आ जाता है उसके बाद गगर मिस्ट्रीज के
[8:23]अंदर ए सेक्रेटरी काम करते हैं तो वो लोग आईस बनते जो
[8:28]आईस बनते वो येदा संभालते हैं उसके बाद इंडियन पुलिस सर्विसेस है
[8:30]जो पुलिस को हेड करते हैं डिफरेंट डिफरेंट लेवल पे चाहे वो
[8:35]एक शहर के लेवल प हो चाहे वो एक स्टेट के लेवल
[8:38]प हो वो लोग इंडियन पुलिस सर्विसेस के थ्रू जाते हैं उसके
[8:40]बाद इसमें आईआरएस इंडियन रेवेन्यू सर्विसेस इन लोगों का ये सर्विस वो
[8:44]सर्विस है कि जिसके थ्रू जो लोग सिलेक्ट होते हैं वो रेवेन्यू
[8:50]का काम देखते हैं कि माशी जो एडमिनिस्ट्रेशन है उसको उसे डील
[8:53]करते हैं कि जो सरकार का रेवेन्यू है उसको कैसे कलेक्ट करना
[8:57]है चाहे वो टैक्सेशन वगैरह से रिलेटेड और इसके अलावा और भी
[9:00]दीगर सर्विसेस इंडिय फॉरेन सर्विसेस है जो इंडियन एंबेसी वगैरह है उनमें
[9:04]जो इंडिया के जो एंबेसडर होते हैं इंडिया के कंसल जनरल होते
[9:09]हैं वो सारे लोग इंडियन फॉरेन सर्विसेस से बनते हैं और फॉरेन
[9:11]मिनिस्ट्री में उनका अलग अलग रोल होता है ऐसे कई सारी दीगर
[9:15]सर्विसेस इन कुल मिला के 21 सर्विसेस है और वो सर्विसेस इस
[9:16]एग्जाम के थ्रू सिलेक्ट होती है इस एग्जाम में बेसिकली तीन फेसेस
[9:21]होते हैं सबसे पहला प्रिलिम्स होता है फिर मेंस होता है फिर
[9:23]इंटरव्यू होता है तो यह पूरा प्रोसेस लगभग आपका साइकिल जो है
[9:29]वो एक साल की साइकिल होती है और इस साइकिल को जब
[9:33]क्रॉस कोई स्टूडेंट कर लेता है तो फाइनली व उस एगजाम में
[9:36]सिलेक्ट होता है माशाल्लाह जजाकल्लाह तो यह एक इजमा और मुख्तसर तारुफ
[9:42]जो है वह हो गया मैं अदिल भाई की खिदमत सायम भाई
[9:49]की खिदमत में चलता हूं सायम भाई अगर हम यहां पर देखें
[9:52]ओवरल के हमारी कौम के जो जवान है व जाहिर कम शिरकत
[9:58]करते हैं इस के एग्जाम में चाहे वो यूपीएससी हो चाहे वो
[10:05]नीट वगैरह का एग्जाम हो उसमें और एक आम जो तसव्वुर होता
[10:07]है जहन में कि यह बहुत सख्त है तो यह क्या कहते
[10:11]हैं इसका जवाब कैसे दें क्योंकि एक मायूसी सी पैदा होती है
[10:16]और इस वजह से हमारे जवान जाते नहीं है तो मैं मेरा
[10:17]सवाल यसे ये होगा कि किस चीज ने आपको इंस्पायर किया और
[10:21]किस तरीके से किस चीज की वजह से आपने तैयारी शुरू की
[10:26]और किस तरीके से आपने तैयारी की एक जरा हमको जो है
[10:30]इसका एक्सप्लेन करें जरा जी ये जो बहुत दुरुस्त फरमाया आपने कि
[10:34]हमारे यहां एक और यह मैंने मासरे में काफी एक आम यह
[10:41]एटीट्यूड देखा है कि लोग इस एग्जाम को बहुत ज्यादा देखते हैं
[10:48]इस नजरिए से कि शायद कोई ऐसी चीज है जो नामुमकिन जैसी
[10:52]है तो इसकी वजह यह है कि इसमें कंपटीशन ज्यादा है इसकी
[10:55]इसमें कोई दो राय नहीं है कंपटीशन बहुत ज्यादा है लेकिन यह
[11:00]एग्जाम बहुत ही स्ट्रेटेजी का एग्जाम है तो इस एग्जाम को इस
[11:03]एग्जाम में जो आप पढ़ाई करते हैं वो पढ़ाई सख्त नहीं है
[11:06]यानी यह आदिल भाई भी आपको बताएंगे कि जो चीजें आपको पढ़नी
[11:10]है वो बहुत ही सिंपल चीजें हैं छोटी-छोटी चीजें हैं यूपीएससी आपसे
[11:13]ये डिमांड नहीं करती आप किसी चीज पर एक्सपर्ट बन के आए
[11:17]वो बहुत जनरल चीजें पूछती है लेकिन उसकी डिमांड यह है कि
[11:19]आप बहुत सारी चीजें मैनेज करें वो बहुत वरायटी की चीजें पूछती
[11:23]है तो सिलेबस बहुत बड़ा हो जाता है आपको बहुत सारी अलग-अलग
[11:25]चीजें पढ़नी होती है और टाइम कम होता है और बहुत सारी
[11:30]चीजें याद रखनी होती है तो यह एग्जाम टफ नहीं है लेकिन
[11:33]आप कह सकते कि डिमांडिंग है यानी आपसे बहुत सारी चीजें डिमांड
[11:36]करता है ये एग्जाम तो इसकी एक इस इस वजह से होता
[11:41]क्या है कि बहुत सारे लोग जब अपने आसपास ऐसा एग्जांपल नहीं
[11:44]देखते हैं कि हमारे मोहल्ले से हमारे शहर से कोई हमारे जानने
[11:49]में निकला हो तो उनको लगता है कि यह शायद बहुत दूर
[11:54]की चीज है जैसे मुझे भी कई जमाने तक ऐसा लगता था
[11:55]कि यह तो बड़ी नामुमकिन सी चीज है फिर मेरे कुछ दोस्तों
[11:58]ने क्लियर किया तो उन्होने उन्होने मुझे बताया कि नहीं ये ऐसा
[12:01]कोई डिफिकल्ट एग्जाम नहीं है इसकी इसको इसकी तैयारी करने का एक
[12:07]तरीका है जिस तरह से हर एक प्रोफेशनल एग्जाम का तरीका होता
[12:09]है इसकी एक स्ट्रेटजी है इसका एक तरीका है इसकी कुछ किताबें
[12:13]उसको पढ़ के कोई भी आदमी मेहनत के जरिए ये एग्जाम क्लियर
[12:15]कर सकता है तो जब हम अपने सामने एग्जांपल देखते हैं तो
[12:19]दूसरों के लिए इंस्पिरेशन होता है तो जिस तरह से मेरे कुछ
[12:21]दोस्तों ने क्लियर किया उन्होंने मुझे हेल्प किया उसी तरह से हो
[12:25]सकता है मेरे क्लियर करने से किसी और को यह लगे कि
[12:27]अच्छा इन्होंने किया है तो मैं भी कर सकता हूं तो जब
[12:30]आप अपने आस पड़ोस में अपने समाज में अपने मुशे में देखते
[12:34]हैं इस तरह का एग्जांपल तो उससे इंस्पिरेशन पैदा होती है तो
[12:36]मेरे ख्याल से इस झिझक को दूर करने का यही तरीका है
[12:40]कि ज्यादा से ज्यादा लोग शिरकत करेंगे तो उसमें से अगर कुछ
[12:43]भी निकलेंगे तो उनको देख कर के और लोग इंस्पायर होंगे और
[12:46]फिर और लोग आगे आएंगे अच्छा दूसरी बात कि अगर पहले अटेंप्ट
[12:50]में नहीं आ पाए तो दूसरा अटेंप्ट बचता है तीसरा बचता है
[12:53]जरस में हमको चांस मिलते हैं तो मायूसी से बाहर जो है
[12:58]वो इंसान को निकलना चाहिए और मेहनत खुद अलाम हमारे जर भाई
[13:03]हमारे सलाम ने इस बात की तरफ भी जो है कुरान कह
[13:07]रहा है कि मायूसी नहीं करनी चाहिए हिम्मत बुलंद रखनी चाहिए इंसान
[13:10]की जो कद्र और अहमियत होती है व इसकी हिम्मत और उसके
[13:15]इरादे और उसके अजम से होती हैर य एक और सवाल है
[13:19]के और वो यह है मैं साम भाई से करूंगा यह सवाल
[13:22]के हम शिया कौम क्या ताल्लुक है इसका यूपीएससी से हम क्यों
[13:27]जाएं इस लाइन में जी देखिए सिविल सर्विसेस जो है उसका फलसफा
[13:34]यह है कि आप पब्लिक सर्विस में जा रहे हैं यानी आप
[13:39]खासतौर से जो एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस से जुड़ी हुई सर्विस है वह
[13:44]बहुत ज्यादा लोगों से जुड़ी हुई सर्विस है जिसमें आप लोगों के
[13:48]रोजमर्रा के मसाइल से डील करते हैं तो अगर आपके अंदर एक
[13:52]सेंस ऑफ जस्टिस है जो कि हमारे यहां आप देखें कि अदालत
[13:54]जो है हमारे उसूल दन में भी बताया जाता है तो तो
[13:58]अल जो है वो अगर आपके अंदर एक सेंस ऑफ जस्टिस है
[14:02]कि अदल का निजाम होना चाहिए लोगों के साथ इंसाफ होना चाहिए
[14:04]हर किसी की बात सुनी जानी चाहिए हर किसी की मुश्किल का
[14:08]हल निकालने की कोशिश होनी चाहिए तो अगर यह एहसास आपके अंदर
[14:13]है तो आपको सिविल सर्विसेस में आना चाहिए सिविल सर्विसेस में आकर
[14:17]के आप लोगों की छोटी-छोटी प्रॉब्लम्स का भी सलूशन करेंगे तो उनसे
[14:22]उनकी जिंदगी में बहुत चेंज आता है तो ऐसा नहीं है कि
[14:26]आप आक के पूरी दुनिया बदल देंगे लेकिन आप अगर किसी का
[14:30]कोई छोटा सामान गायब हो गया आप उसका वह सामान ही दिला
[14:31]देंगे किसी गरीब आदमी का तो उसके लिए बहुत बहुत खुशी की
[14:35]बात होगी तो आप लोगों की जिंदगी में छोटे-छोटे चीज चेंज कर
[14:41]सकते हैं और उसके लिए लेकिन आपके अंदर एक सेंस होना चाहिए
[14:42]कि हां दुनिया में अदल होना चाहिए किसी के साथ नाइंसाफी नहीं
[14:48]होनी चाहिए तो यह अगर आपके अंदर जज्बा है तो यह सिविल
[14:49]सर्विसेस के लिए बहुत जरूरी है और सिविल सर्विसेस का फलसफा ही
[14:54]यही है और इसका ऑब्जेक्टिव भी यही है जी मैं साम भा
[14:59]की जो बातें हैं उससे उसको कनेक्ट करते हुए मैं एक बात
[15:05]यह कहना चाहूं कि जैसे कि इन्होंने खुद फरमाया कि एक अद
[15:07]अदालत का वह जज्बा और इंसाफ की वह ख्वाहिश इंसान के अंदर
[15:12]होती है और हमारा मकतब वह मकतब है कि जो अदालत का
[15:16]मकतब इंसाफ का मकतब है और जैसे कि हम रिवाय तों में
[15:18]पढ़ते हैं कि इमाम जमाना जब आएंगे तो दुनिया को अदल इंसाफ
[15:22]से भर देंगे जिस तरह से वह जुल्म जौर से भरी होगी
[15:25]तो यह हर शिया के अंदर यह ख्वाहिश होनी चाहिए कि उसके
[15:28]अंदर वो अदा त पसंद हो इंसाफ पसंद हो और एक बहुत
[15:32]अच्छी बात जो इन्होंने कही है जन भाई वो यह कि इंसानियत
[15:37]की खिदमत इंसानियत की खिदमत लोगों की खिदमत करना चाहे छोटी उन्होंने
[15:40]कहा छोटी सी चीज ही क्यों किसी की वापस दिला दे उस
[15:45]छोटे इंसान की वो मामूली सी खुशी ही बहुत बड़ा असर रखती
[15:47]है इंपैक्ट करती है मैं एक रवायत देख रहा था तो रवायत
[15:52]बहुत अजीब है कि जिसमें मासूम फरमाते हैं कि अगर कोई किसी
[15:57]मोमिन की हाजत को पूरी करता है और वो हाजत जो है
[16:01]उसकी सलाह में और वो खुदा के लिए काम कर रहा है
[16:05]तो ये एक हाजत का पूरा करना ऐसा ही है जैसे कोई
[16:10]खुदा की हज साल इबादत करें और इस हज साल में पलक
[16:11]झपक तक भी खुदा की मासि ना हुई हो माशाला यानी एक
[16:16]छोटा सा काम अगर आप किसी इंसान की खैर ख्वाई के लिए
[16:19]कर रहे हैं खुदा के लिए कर रहे हैं तो इसका अजर
[16:23]परवरदिगार के नजदीक कितना है कि इंसान को हज साल की इबादत
[16:25]की वो वो हज साल की जिसमें पलक झपक नहीं तक भी
[16:29]इंसान मासि खुदा नहीं कर रहा है तो बहरहाल ये ये रिलीजस
[16:34]पॉइंट ऑफ व्यू से इन्होंने एक हदीस बयान की यहां पे और
[16:35]खिदमत खल्क की बात आपने की कि हम किसी को जस्टिस दिला
[16:39]सकते हैं हम किसी को इंसाफ दिला सकते हैं रवायत में आया
[16:43]है कि अल खलक अयाल उलाह बकुल के जो मखलूक खुदा है
[16:47]वह अल्लाह की आल है अल्लाह की किफा में है और जो
[16:49]शख्स अल्लाह की मखलूक का ख्याल रखता है परवरदिगार आलम उसका ख्याल
[16:54]रखता है और उसके तमाम हाजा को और उसके तमाम पूरा करता
[16:59]है मुश्किलात को दूर करता है ये बहुत अच्छा मतलब आपको जो
[17:01]मोटिव रहा है कि हम इस मकसद से इस लाइन में यानी
[17:06]यूपीएससी आपने क्रैक किया ठीक है बहुत से लोग हैं अच्छी रैंक
[17:08]लेकर आते हैं लेकिन वो मकसद उसके पीछे क्या होता है ये
[17:14]बहुत इंपॉर्टेंट होता है मैं चलूंगा अदिल भाई की खिदमत में अदिल
[17:17]भाई यकीनन सख्त है आपके लिए आप लोगों ने इस मरहले को
[17:21]गुजारा है आपने भी साम भाई ने भी और बहुत तैयारी की
[17:26]है इरादा आपका बहुत कवी था आपने टाइम मैनेजमेंट का इसमें आपने
[17:30]बहुत ख्याल रखा है हमारे जवानों को आप किस तरीके से बताएंगे
[17:36]किस तरीके से आसानी के साथ कि उनके लिए सख्त भी ना
[17:40]हो मुश्किल भी ना लगे उनको मायूसी भी ना हो किस तरीके
[17:44]से वो इस किस्म के एग्जाम को जो है वह क्रैक कर
[17:46]सकते हैं उसकी आमागी बगैर मायूसी के और बगैर जि कहते हैं
[17:50]दिल उ चाट हो जाता है लोगों का नहीं सख्त है पहले
[17:54]ही से जो है हौसला टूट जाता है उनका हौसला भी बरकरार
[17:56]रहे तो उसके लिए आप क्या राय दें और क्या तरीके बताएंगे
[18:01]हमारे जवानों को देखि मेरे नजरिए में सबसे इंपोर्टेंट यह है कि
[18:12]आप जब भी कभी इस तरह के इम्तिहान को अगर फेस कर
[18:17]रहे हैं तो इसमें अनसर्टेनटीज करेंगे या नहीं करेंगे तो उसमें खुद
[18:22]पर डाउट आता है शक शुभ आता है कि शायद हम इस
[18:26]लायक नहीं है या पता नहीं होगा या नहीं होगा मायूसी पहले
[18:29]ही आ जाती है इससे पहले कि आप एग्जाम में बैठे तो
[18:31]ऐसी सूरत में हमारे पास एक अच्छा जो तरीका है वह यह
[18:37]है कि अल्लाह पर भरोसा रखना कि उसकी जात पर भरोसा रखना
[18:41]कि जो भी होगा अगर बुरा ही हुआ जाहिरी तौर पर मसलन
[18:45]सिलेक्शन नहीं हुआ तो भी वो अच्छे के लिए ही होगा उसमें
[18:47]खुदा वंदे पाक की कोई उसके पीछे कोई वजह होगी जो हमारे
[18:51]हक में बेहतर होगी जिसके वजह से शायद सिलेक्शन नहीं हो पा
[18:55]ता है तो इस चीज पर भरोसा रखना वो कहीं ना कहीं
[18:56]आपको एक तसल्ली देता है कि ठीक है कोई बात नहीं हम
[19:00]ने कोशिश करी अगर हम कामयाब नहीं भी हुए तो कोई इसमें
[19:05]ऐसा बुरा नहीं है कुछ बेहतरी हो एक चीज ये है दूसरी
[19:06]चीज ये कि बाद इसके खुद पर भरोसा रखना कि अगर आप
[19:10]किसी मकसद से इस एग्जाम में आए तो खुद पे ये भरोसा
[19:14]रखना कि आपके अंदर ये कैपेबिलिटी है कि आप इसको अचीव कर
[19:19]सकते हैं और साथ-साथ ये कि आपके अंदर मेहनत करने की वो
[19:21]ताकत होनी चाहिए कि भाई जो ये एग्जाम डिमांड करता है अगर
[19:25]आपसे ये चाहता है एग्जाम कि आप आठ घंटे 10 घंटे पढ़े
[19:29]तो आप ठ घंटे 10 घंटे कंटिन्यू दे पाते हैं ये चीज
[19:31]आपके अंदर ये ये चीज आपके अंदर होनी चाहिए तो ये दो
[19:35]चीजें एक खुदा पर भरोसा एक खुद पर भरोसा ये बहुत ज्यादा
[19:37]इंपोर्टेंट है मेरे हिसाब से ये इस एग्जाम में कामयाब होने के
[19:43]लिए और तीसरी चीज इस तरह के एग्जाम में जो आप तैयारी
[19:48]करते हैं वो यह प्रोसेस खुद में काफी एक एनरिचिंग एक्सपीरियंस होता
[19:50]है अगर आप मसलन मैं ये सोचता था कई बार कि जब
[19:54]तीन अटेंप्ट हो गए और मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ तो मैं य
[19:57]सोचता था कि मैं मेरे पास दिखाने को क्या है तीन अटम
[19:58]बा तो मेरे पास ये था कि इस तीन इस तीन अटेंप्ट
[20:04]में मैंने बहुत कुछ सीखा बहुत कुछ जो मेरी जो अंडरस्टैंडिंग है
[20:11]जो मेरी इल्म है उसमें बहुत ज्यादा इजाफा हुआ पहले मैं बहुत
[20:14]कम चीज जानता था मैं बहुत ज्यादा चीज जानता हूं तो एट
[20:17]द एंड अगर मेरा शायद मुझे य होदा ना मिले लेकिन जो
[20:21]मैंने जिंदगी में सीखा है वो बहुत इंपोर्टेंट है तो आप इस
[20:23]जर्नी को खुद एक जर्नी को ही जो है वो आप एक
[20:28]लर्निंग एक्सपीरियंस जैसा ले सकते चाहे कोई सा भी एग्जाम हो नीट
[20:31]हो जेई मेंस हो जेई एडवांस हो चाहे आपका यूपीएससी हो वो
[20:33]जर्नी खुद में रिवडिंग होती है कई बार आपकी तो आप उसको
[20:36]इस नजरिए से भी देख सकते हैं जिससे आपको अगर खुदान खस्ता
[20:38]कामयाबी ना भी मिले तो भी आप मायूस नहीं हो अदिल भाई
[20:41]मैं यहीं पे एक सवाल और भी करना चाहता हूं कि एक
[20:46]थॉट पाया जाता है खासकर हमारी कम्युनिटी के अंदर कि हम मसलन
[20:48]हम शिया जो है मसलन क्यों इस तरह की य यूपीएससी के
[20:52]एग्जाम्स या नीट वगैरह के एग्जाम्स में जो है वो आए और
[20:58]शरीक हो इसको कंपीट करें मस क्या क्यों हम इस तरह के
[20:59]करें हम क्यों करें इसका इसको कैसे आप जवाब देते हैं यानी
[21:05]हमारी कौम का क्या ताल्लुक है इस हम क्यों आए इसमें आपका
[21:08]सवाल ये था कि शिया जो है वो इस एग्जाम को क्यों
[21:12]दे वो इस एग्जाम के लिए सूटेबल क्यों है तो मैं ये
[21:16]बता रहा था कि मैं समम भाई की बात से बिल्कुल इत्तफाक
[21:19]रखता हूं कि एक जो एक तो ये कि हमारा जो अदल
[21:23]और इंसाफ का जो तकाजा है वो हमारे अंदर हमारे दीन का
[21:29]बहुत अहम हिस्सा है तो जिस वजह से जो है वो एक
[21:30]शिया जिस भी पोजीशन पर रहेगा वो हमेशा ये कोशिश करेगा जो
[21:34]वाकई शिया है वाकई मुसलमान हैय कोशिश करेगा कि वो अपने उस
[21:40]पोजीशन में रहते हुए वो अदल और इंसाफ की जो है वो
[21:44]एक सिस्टम उसको एस्टेब्लिश करें वो कभी यह नहीं चाहेगा कि किसी
[21:47]के साथ गलत हो गरीबों का हमेशा भला चाहेगा और दूसरा यह
[21:51]कि हमारे पास एक बहुत बेहतर रोल मॉडल है एडमिनिस्ट्रेशन का और
[21:54]पोजीशन ऑफ पावर में रहते हुए किस तरीके से एक बहुत सादी
[21:57]जिंदगी जीते हुए लोगों की की जा सकती है उसका बहुत बेहतर
[22:00]जो हमारे पास रोल मॉडल है वो हजरत अली है जिन्होंने अपने
[22:07]दौरे खिलाफत में एक बहुत ही एफिशिएंट और बहुत ही एथिकल एडमिनिस्ट्रेशन
[22:11]चलाया तो उसमें मैं जिक्र कर रहा था एक नजल बला में
[22:17]हजरत अली का एक खद है जिसमें वह अपने गवर्नर को यह
[22:18]बताते हैं कि उसके रवैए में किस जो है उसका जचर है
[22:23]बहुत ही सिंपल सा भी जचर वो ऐसा ना हो कि जिससे
[22:26]किसी अमीर इंसान को यह तवको हो जाए कि उसकी अमीरी की
[22:31]वजह से से उसकी उसके मालदार होने की वजह से वो जो
[22:33]जो गवर्नर है जो एडमिनिस्ट्रेटिव पोस्ट पे है उससे किसी खास तरह
[22:39]की कोई एक्सपेक्टेशन रखे कि जस्ट बिकॉज मैं अमीर हूं तो मेरे
[22:41]लिए कोई फेवर कर देगा या फिर यह कि कोई गरीब इंसान
[22:44]उससे यह ना सोचे कि यह तो बहुत बड़े इंसान है मेरी
[22:48]पहुंच वहां तक नहीं है और यह मेरी मदद नहीं कर सकता
[22:49]है तो इवन बहुत छोटा सा आंख का भी जचर वो इस
[22:52]तरीके से ना देखे कि इस तरह का गुमान लोगों में पैदा
[22:55]हो तो इस इस हद तक जो है वो इस्लाम में औरस
[22:58]करके हजरत अली ने जो है वो एडमिनिस्ट्रेशन में इस तरह इस
[23:03]हद तक जो है वो चीजों प गौर करी है कि किस
[23:05]तरीके से अदल और इंसाफ कायम किया जा सके तो वो रोल
[23:06]मॉडल हमारे लिए बहुत इंपोर्टेंट है और मुझे लगता है कि यह
[23:11]रोल मॉडल से अगर हम सीखेंगे तो एक जो शिया है एक
[23:15]मुसलमान वो बहुत ही एक अच्छा एडमिनिस्ट्रेटर बन सकता है जी अच्छी
[23:19]बात ये जो बयान की के अगर एक शिया एडमिनिस्ट्रेशन में आता
[23:24]है तो चूंकि हमारा ताल्लुक उस मकतब अदल इंसाफ से है तो
[23:27]हम ज्यादा बेहतर जो तरीके से चूंकि हमारे पास एक रोल मॉडल
[23:32]मौजूद है हमारे पास व तालीमाबाद भी इसी की अकासी करता है
[23:43]कि जो कहता है कि कुतु खैर नास कुतु खैर खैर उमत
[23:45]नास कि तुम बेहतरीन उम्मत हो क्यों तुमको लोगों के लिए निकाला
[23:49]गया है तो यह भी इसी ज की वो जो जज्बा है
[23:53]खिदमत का वो जो जज्बा है उसमें बेहतर तरीके से यानी एक
[23:57]मुसलमान और खासकर इमाम अली का और इमाम जमाना का चाहने वाला
[24:00]उसको बेहतर तरीके से अप्लाई कर सकता है जी यहां पे एक
[24:05]बात और मैं अर्ज करूं आपकी खिदमत में स आपकी बात को
[24:10]मुकम्मल करते हुए और आदिल भाई और सायम भाई की बात को
[24:12]मुकम्मल करते हुए यहां पर के यह तो रोल मॉडल हमने बनाया
[24:18]मौला कानात को उनका एडमिनिस्ट्रेशन देखा हमने और अदल इंसाफ जस्टिस मखलूक
[24:23]खुदा की जो है वह खिदमत उससे बड़ी एक और बात नहीं
[24:28]उससे बड़ी ना कहे इसके साथ ही एक और बात है व
[24:31]यह इसकी तरफ हमारे महाराजा कराम खुसूस आला सिस्तानी अतुल्ला खाम भी
[24:35]जो है व हमारी तवज्जो दिलाते हैं कि मुल्क में आपका किरदार
[24:38]मुल्क में मुल्क की में मुल्क की खिदमत यानी मुल्क की तरक्की
[24:44]में हमारा किरदार यह होना चाहिए यह बहुत इंपोर्टेंट चीज है मैं
[24:48]कई मर्तबा खिदमत में हाजिर हुआ हूं आयतुल्लाह सिस्तानी के तो उन्होंने
[24:57]तकरीबन मोमिनीन को यह ताकीद किया है के के जब भी आप
[25:01]जाइए तो हमको हमारा पैगाम पहुंचाए मोमिनीन हिंदुस्तान तक कि एडमिनिस्ट्रेशन में
[25:06]आइए आप आइए वहां पर मुल्क को बनाने में मुल्क को तरक्की
[25:12]से हम किनार करने में अपना किरदार अदा कीजिए यह यानी तो
[25:14]एक तरीके से हम अगर इस लाइन में आते हैं इस तरह
[25:19]के एग्जाम्स को हम क्रैक करते हैं तो हमारा जो मोटिव होता
[25:24]है वो यानी शोहरत पावर या पैसा कमाना नहीं होता है वह
[25:27]खिदमत करना होता है और यह खिदमत का जो जज्बा है यह
[25:32]हमारा दीन हमारे रहनुमा और हमारे जो है वह आमा अल सलाम
[25:36]जो वाकई मानों में हमारे हादी और रहनुमा हमको देते हैं यहां
[25:40]पर मैं सायम भाई से एक सवाल करना चाहूंगा सा भाई एक
[25:44]आम फिजा बनी हुई है जनों में हमारे और इस यह चीज
[25:47]जो है व मायूसी की तरफ भी ले जाती है जाफर भाई
[25:51]आपने भी सुना होगा इसको अदिल भाई आपने भी सुना होगा के
[25:55]जिसमें कहा जाता है कि अगर हम मुसलमान जो है वो जाएंगे
[25:57]स्टेशन में या हम मुसलमान जो है वो गवर्नमेंट सर्विस में जाना
[26:03]चाहेंगे तो हमको तो लिया नहीं जाता है और हमको जो है
[26:05]वो निकाल मतलब यानी डिस्क्रिमिनेशन होता है ये वो इस तरह की
[26:10]बातें होती हैं इस ये चीज मायूसी लाती है और फिर इसकी
[26:13]वजह से बहुत से हमारे जवान जो है वो इस लाइन में
[26:14]नहीं आते इस सिलसिले में क्या कहेंगे आप सायम भाई जी जी
[26:20]देखिए सबसे पहले तो इस सिलसिले में दो एग्जांपल आपके सामने हैं
[26:24]कि अगर आप मेहनत करेंगे तो आपको कहीं कोई आपको नहीं रोक
[26:31]सकता है दूसरी बात कि अगर आप यूपीएससी के एग्जाम का पूरा
[26:36]उसका प्रोसीजर देखेंगे तो बहुत ही फेयर एग्जाम है बहुत ही फेयर
[26:40]प्रोसीजर है जिसमें कि कोई किसी तरह का डिस्क्रिमिनेशन का की गुंजाइश
[26:46]नहीं है और नहीं होती है आप देखेंगे तो हिंदुस्तान में आपको
[26:49]पता है कि कई सारी कौम और कई सारे मजहिर कई सारे
[26:54]जबान से ताल्लुक रखने वाले लोग रहते हैं और हर जगह से
[26:55]लोग आते हैं इस एग्जाम में और हर जगह से लोग सिलेक्ट
[26:58]हो रहे हैं तो अगर आप अपने अंदर पहले से एक एहसास
[27:03]कमतरी पैदा कर लेंगे कि हमारा तो नहीं होना है या हमारा
[27:06]किसी तरह का डिस्क्रिमिनेशन है तो आप पहले ही अपने आप को
[27:13]साइकोलॉजिकली डिफीट कर लेंगे दूसरी बात ये कि आप देखिए इसमें सबसे
[27:17]बड़ा जो चीज है वो है रिटन का पेपर जो आप लिखते
[27:20]हैं और उसमें आप जो लिखेंगे वही मार्क्स आपको मिलेगा वो सबसे
[27:26]ज्यादा वेटेज रखता है तो अगर लेटस से की जो चीज आपके
[27:32]हाथ में नहीं है जो चीज जिन चीजों को आप कंट्रोल नहीं
[27:37]कर सकते उनको अल्लाह के ऊपर छोड़ दीजिए आप आप अपनी तरफ
[27:38]से मेहनत कर सकते हैं आप अपना रिटर्न का पेपर बहुत अच्छा
[27:43]कर सकते हैं आप उसको अच्छा करके आइए तो अगर तो जिस
[27:47]चीज पर हमारा कंट्रोल नहीं उसके बारे में पहली बात कि मैं
[27:50]अगर बहुत ज्यादा उसका टेंशन लू तो उसका भी कोई फायदा नहीं
[27:54]है तो और दूसरी चीज कि अगर कोई इंसान यूपीएससी के एग्जाम
[27:57]के पूरे प्रोसेस से गुजरेगा तो उसको पता है कि यह इतना
[28:02]फेयर प्रोसीजर से बनाया हुआ एग्जाम है कि इसमें कोई इस तरह
[28:06]की गुंजाइश नहीं है तो मेरा ख्याल है कि इस तरह की
[28:07]चीजें जो है लोगों को नहीं सोचनी चाहिए और लोगों को ज्यादा
[28:12]से ज्यादा कोशिश करनी चाहिए कि और भी सिर्फ सिविल सर्विसेस ही
[28:15]नहीं और भी बहुत सारे एग्जाम में सारे एग्जाम में जिसका जो
[28:18]इंटरेस्ट है उस हिसाब से वो एग्जाम ट्राई करना चाहिए बिल्कुल बेशक
[28:21]बहुत बहुत ही अच्छी बात आपने कही यहां पर और यह चीज
[28:26]हमको मायूसी से निकालने वाली भी है एक बात तो यह कि
[28:30]ये सिस्टम जो बहुत फेयर है एक बात दूसरी बात ये कि
[28:34]आप क्रैक करना है आपको एग्जाम आपको यह अचीवमेंट हासिल करना है
[28:37]तो तरक्की आपको हासिल करनी है तो आपको मेहनत करनी पड़ेगी आप
[28:40]अपनी मेहनत कीजिए खुदा के ऊपर छोड़ दीजिए खुदा जो है वह
[28:44]बिगड़ी बनाने वाला है खुदा जो है वह आप आपको देखेगा आपने
[28:48]किस तरीके से मेहनत की है उसकी मस्लत है आप आएंगे ऊपर
[28:50]इंशाल्लाह और जाहिर सी बात है हमारी रवाया भी कहती है मौला
[28:56]कनात जाफर भाई फरमाते हैं कि मन जदा वजदा के जो कोशिश
[28:58]करता है वह अपनी मंजिल को पा लेता है न हा कुरान
[29:04]कह रहा है कि इंसान जो है वह जो कोशिश करता है
[29:08]व यकीनन जो है वो अपने मंजिल तक अपने मंजिल मकसूद तक
[29:13]पहुंच जाता है अब दो एक सवाल है जो आप दोनों से
[29:16]अलग अलग हम करना चाहेंगे के हमारे जवानों को आप यह बताए
[29:24]कि यह जो आपने तरक्की हासिल की जो कामयाबी आपने हासिल की
[29:27]और इस मकाम तक आप पहुंचे हैं तो आपने मुख्तसर बयान करें
[29:31]के जाहिर सी बात है कि आपने टाइम सेट किया होगा टाइम
[29:33]मैनेजमेंट का इसमें बड़ा किरदार है आपके मतलब एंबिशन का बड़ा किरदार
[29:41]आपका इरादा आपकी हिम्मत और तो किस तरीके से आपने इस तैयारी
[29:44]के लिए क्या प्रोग्राम आपने तैयार किया था क्या आपने जो है
[29:50]वह तरीका अपनाया था अदिल भाई पहले आप अगर बता द तो
[29:52]उसके बाद सा भाई की तरफ चले देखिए सबसे पहले तो यह
[29:57]कि मेरे साथ जो पहला अटम था उसम थोड़ा डायरेक्शन की कमी
[30:01]थी कोई मेरे कोई जान पहचान में कोई ऐसा नहीं था जिसने
[30:06]ये तैयारी करी हो तो मैंने खुद से ही जो इंटरनेट पर
[30:09]देख कर के जो समझ आए उस हिसाब से तैयारी स्टार्ट करी
[30:14]तो उस वक्त चकि मेरे पास इंफॉर्मेशन की कमी थ तो मुझे
[30:15]ये लगता था इसमें तीन स्टेजेस होते हैं प्रीलिम्स मेंस और इंटरव्यू
[30:20]तो मुझे उस वक्त ये लगता था कि प्रीलिम्स की जो तैयारी
[30:21]है वही मेंस में भी काम आएगी व इंटरव्यू में भी काम
[30:25]आएगी तो मैंने जी तोड़ करके जो है वो प्रिलिम्स के लिए
[30:27]तैयारी करी मेहनत करी और अल्लाह के शुक्र अल्लाह का शुक्र है
[30:32]कि वो प्रीलिम्स मेरा निकल गया था बट उसके बाद जो अगला
[30:35]स्टेज होता है मेंस का उसके लिए तीन महीने मिलते हैं लेकिन
[30:37]वो तीन महीने सफिशिएंट नहीं होते हैं पूरी तरीके से तैयारी करने
[30:42]के लिए तो जिसके वजह से मुझे जो है वो दिक्कत झेलनी
[30:44]पड़ी लेकिन पहली जो नाकामयाब मुझे हासिल हुई उसके बाद से मैंने
[30:50]उससे उसके बाद से मैंने जो है वो अपना स्ट्रेटेजी डेवलप करी
[30:53]कि किस तरीके से मैं इस एग्जाम को टारगेट कर सकता हूं
[30:57]तो फिर मुझे ये समझ आया कि जो इस एग्जाम में सबसे
[31:02]इंपोर्टेंट है वो है कि आपको जो यूपीएससी का नेचर एग्जाम का
[31:04]नेचर वो समझना है किस तरीके के क्वेश्चन वो पूछता है उसके
[31:08]लिए प्रीवियस यर क्वेश्चन का एनालिसिस करना उसके लिए जो सिलेबस है
[31:11]उसके पॉइंट्स को समझना उसके लिए आपको जो है वो जो राइटिंग
[31:18]प्रैक्टिस है वो करना और यह जो मेरी ओवरऑल स्ट्रेटजी थी वो
[31:20]यही थी कि सबसे पहले मैं जो नोट्स बनाऊ एक जिसको ये
[31:26]कहते हैं कि गागर में सागर डालने जैसा होता है कि एक
[31:29]एक किसी एक टॉपिक प जितनी चीजें मैं इकट्ठा कर सकता हूं
[31:32]उसको जितने शॉर्ट तरीके से कर सकता हूं उस तरीके से इकट्ठा
[31:35]करना और फिर उसको इंप्लीमेंट करना है लिख करके उसको कोशिश ये
[31:38]करना कि अपने आंसर्स में वो सारी चीजें मैं ले आऊ और
[31:42]हर बार ये कोशिश करना कि अगर एक चीज प मैंने आंसर
[31:46]लिखा और अगली बार वापस उस चीज प लिखा है तो मेरा
[31:49]अगला आंसर पिछले आंसर से बेहतर होना चाहिए तो ये कोशिश करते
[31:51]रहना एक बहुत इंपॉर्टेंट ये थी लेकिन ये चीज ये सारी चीजें
[31:55]जो है वो एक बार में नहीं हुई मुझे चार अटेंप्ट लगे
[31:59]और हर अटम में जो है वो कुछ ना कुछ नई चीजें
[32:00]करने की कोशिश करी मैंने तो जैसे मसलन ये वाली जो चीज
[32:05]मैं बता रहा हूं जिसम कोशिश करता था कि एक आंसर जो
[32:09]दूसरा आंसर लिखू अगर वही आंसर तो वो इंप्रूव करके लिखू ये
[32:10]चीज मैंने इस वाले अटम में करी जिसका मुझे बहुत फायदा दिखा
[32:14]और इसके साथ-साथ जो है वो मेरी रिवीजन की स्ट्रेटजी रहती थी
[32:19]कि किस तरीके से मैं कोई चीज मैंने आज पढ़ी है तो
[32:21]फिर हफ्ते के आखिर में उसे दोबारा देख रं फिर महीने के
[32:24]आखिर में उसे दोबारा देख तो वो एक स्ट्रेटजी जो रिवीजन की
[32:28]थी वो बहुत ही आरात रही मेरी तो ओवरऑल ये मेरी स्ट्रैटेजी
[32:32]थी जी जी साइम भाई यही सवाल आपसे भी है आपका कैसा
[32:38]रहा यह सफर इस यूपीएससी को क्रैक करने का जी मैंने 20221
[32:44]में अपनी जॉब छोड़ पहले मैंने पहला अटेंट जॉब के साथ-साथ देने
[32:51]का ट्राई किया था तो उसमें कुछ भी सक्सेस नहीं मिली तो
[32:53]मुझे उस टाइम रिलाइज हुआ कि शायद जॉब के साथ नहीं पढ़ाई
[32:57]हो पाएगी क्योंकि जितना डिमांड है इस एग्जाम में टाइम का तो
[33:00]फिर मैंने 21 में जॉब छोड़ कर के तैयारी शुरू की तो
[33:04]मेरा शुरू से एक बहुत ही प्लान अप्रोच थी तो मेरी मैं
[33:11]मतलब यूजुअली अपनी लाइफ में बहुत ही प्लानिंग से चलता हूं तो
[33:14]मैंने बहुत ही डिटेल प्लान बनाया था कि जिसमें कि अगर आप
[33:20]जैसे छ सात महीने का तो अगर मैं आज आप मुझसे पूछेंगे
[33:23]कि आप 20 अक्टूबर को क्या करेंगे तो वो भी मेरे प्लान
[33:24]में कहीं लिखा होगा हर दिन का मेरे पास एक टारगेट होता
[33:29]था तो उस तरह से एक बहुत स्ट्रेटेजी बनाई कि कौन-कौन किस
[33:31]दिन कौन सी किताब पढ़नी है उसमें क्या पढ़ना है उसमें नोट्स
[33:37]बनाने हैं आंसर प्रैक्टिस करनी है अ टेस्ट लगाने है जो भी
[33:39]है सारी चीज प्लान बनाई थी तो वो पहले पूरा एक शेड्यूल
[33:42]प्रिपेयर किया व दूसरी चीज आती है उस शेड्यूल प्रिपेयर करने के
[33:46]बाद उसको बहुत ही डिसिप्लिन से एग्जीक्यूट करना तो हर रोज का
[33:50]मेरा टारगेट फिक्स होता है तो मैं हर रोज अपना टारगेट रात
[33:52]को बैठ कर के देखूंगा मेरा कंप्लीट हुआ या नहीं अगर कंप्लीट
[33:55]हुआ तो मैं उसको ग्रीन कलर से कलर कर देता था नहीं
[34:00]हुआ तो रेड कलर से तो वो हर रोज देखने पर फिर
[34:02]फील आता था जैसे लगातार अगर ग्रीन हो रहा है तो मुझे
[34:04]फील आता था कि कुछ अचीवमेंट हो रहा है अगर वो दो
[34:07]तीन रेड आ गया तो खुद ही लगता था कि कहीं पीछे
[34:10]हो रहे हो तो फिर उसको कवर अप करना तो ये इसको
[34:15]डिसिप्लिन के साथ एग्जीक्यूशन बहुत इंपॉर्टेंट था तीसरी चीज जो मुझे लगता
[34:18]है कि जो एक मेरी शायद नेचुरल क्वालिटी थी लेकिन मुझे लगता
[34:22]है कि ये क्वालिटी डेवलप भी करनी चाहिए वो है थोड़ा सा
[34:24]क्यूरियस नेचर होना किसी चीज को लेकर या नई चीज को पढ़ने
[34:28]को लेकर के कि आप कोई भी नई चीज देखें तो उसके
[34:31]पीछे के के फलसफे को जानना इसमें क्या हिकमत है क्यों ऐसा
[34:33]किया गया तो इस इस यह थोड़ा सा इनक्विजिटिव नेचर जिसको बोलते
[34:39]हैं सवाल पूछना तो वो नेचर मुझे लगता है कि थोड़ा हेल्प
[34:41]किया मुझे क्योंकि मैं कोई भी चीज पढ़ता था तो मैं कोशिश
[34:45]करता था कि उसके तह तक पहुंचो तो कई बार जो है
[34:48]आप टॉपिक्स को डेप्थ तक पढ़ने में हेल्प होती है और फाइनली
[34:50]एक चीज जो मुझे लगता है कि बहुत इंपॉर्टेंट है जो मुझे
[34:54]धीरे-धीरे रिलाइज हुई वो है बहुत ही ईमानदारी के साथ अपना असेसमेंट
[34:56]करना जब मेरा पहली बार में 2022 वाला मेंस नहीं क्लियर हुआ
[35:02]था तो मुझे उसी टाइम पता था कि मेरे पेपर नहीं कंप्लीट
[35:04]हुए और तब मैंने यह रियलाइफ बैठ के प्रैक्टिस कर रहा था
[35:10]तो एग्जाम वाली फीलिंग या जिसको सिमुलेशन बोलते हैं वो नहीं हो
[35:14]पाया तो फिर मैंने उसको इंप्रूव करने के लिए टेस्ट सीरीज जवाइन
[35:19]की जिसमें सेंटर पर जाकर टेस्ट लिखता था तो उससे मेरे मार्क्स
[35:21]में लगभग 100 नंबर का इंप्रूवमेंट हुआ मेरे मेंस के पेपर में
[35:26]तो ये कंटीन्यूअसली अपने आप को बहुत ईमानदारी से एसेस कर गलती
[35:29]हो रही है और अगर आप अपने साथ ईमानदार नहीं है तो
[35:34]आपको कभी पता ही नहीं चलेगा कि आप कहां गलती कर रहे
[35:37]हो और वहीं से मायूसी शुरू होती है अगर आप बहुत ऑनेस्टली
[35:39]अपने आप को जानते हैं कि मेरी कहां गलती हो रही है
[35:42]तो आप मायूस नहीं होंगे क्योंकि आपको पता है कहां इंप्रूवमेंट करना
[35:45]है तो यही मेरी ओवरऑल स्ट्रेटेजी थी और आई थिंक कि यह
[35:50]तीन चार क्वालिटीज कोई भी इंसान डेवलप करेगा तो यह एग्जाम क्लियर
[35:54]कर सकता है बहुत बहुत जबरदस्त बहुत अच्छी बात यहां पर आपने
[35:58]बयान की सायम भाई मैं आपकी खमत में अर्ज करूं कि इसमें
[36:03]से पहली चीज आपने जो कही कि प्लानिंग कि आप हर चीज
[36:07]हर काम जो है आप भी और क्या कहते हैं अदिल भाई
[36:08]दोनों इन्होंने प्लानिंग की उसके लिए इस एग्जाम के लिए इस इसको
[36:14]यानी क्रैक करने के लिए प्लानिंग खुद अहले बैत अ सलाम मौला
[36:17]कनात खास तौर से अपनी आखिरी वसीयत में क कहते हैं कि
[36:21]उसी कुम बनज में अमर कुम अपने आपको को मुनम रखो और
[36:25]प्लानिंग के साथ काम करने के लिए अहले बैत अ सलाम की
[36:29]कुरान की रसूल खुदा सल्ला वसल्लम के अ और खुसूस मौला कायनात
[36:31]की बहुत ज्यादा ताकीद है इस बात के ऊपर दूसरी चीज जो
[36:35]आपने कहा सेल्फ असेसमेंट जो है व यहां पर यह भी हमारे
[36:39]दीन की ताकीद है दीन हमारा यह कहता है कि अहले बैत
[36:42]अ सलाम इमाम मूसा काजिम अल सलाम की हदीस है मुहास नफ्स
[36:46]की यहां तक है कि वो शख्स हम में से नहीं है
[36:49]जो अपना यानी सेल्फ असेसमेंट नहीं करता है मुहास बए नफ्स नहीं
[36:51]करता है अपने आप को चेक नहीं करता रहता है कि हमारे
[36:55]अंदर क्या कमियां है हमने कहां किस मकाम को हमने हासिल किया
[36:56]कहां तक पहुंच है बहरहाल यह बहुत अच्छी बातें जो हैं वह
[37:01]आपने बयान की हमारे जवानों के लिए इंशाल्लाह उनके लिए मुफीद साबित
[37:04]होगी और जो दीगर लोग जो है वह चाहते हैं जर भाई
[37:07]प् प्लानिंग के हवाले से जैसे कि सायम भाई ने कहा कि
[37:11]वो किस तरीके से उन्होंने एक पूरा प्लान डिटेल में उन्होंने अपना
[37:13]एक प्लान तैयार कर रखा था इमाम अली अल सलाम की बहुत
[37:17]छोटी सी हदीस है लेकिन वाक बहुत कारा आमद है आप फरमाते
[37:21]हैं कि अ तदबीर निस्फ मना यानी किसी भी काम को अंजाम
[37:23]तक पहुंचाने के लिए प्लानिंग यानी उसको आप 50 पर तक आपने
[37:27]कंप्लीट कर दिया है या यानी अगर आप प्लानिंग करते हैं तो
[37:31]गोया कि आपने 50 पर 50 पर तक उसको अंजाम दे दिया
[37:32]है अ तदबीर निस्फ उल मना ये बहुत इंपॉर्टेंट है हमारी कौम
[37:37]के लिए खुसूस आज के जमाने में जहां पर मुसलमान जो है
[37:42]वो यानी खुसूस शिया जो है अभी उस मकाम प नहीं है
[37:43]जो उनका मकाम कभी हुआ करता था आज के जमाने में हमारे
[37:47]लिए हमारे जवानों के लिए ये बहुत जरूरी है कि इन तमाम
[37:52]चीजों को अपनाएं और तरक्की के लिए कौम की तरक्की के लिए
[37:54]मुल्क की तरक्की के लिए ये चीज बहुत इंपॉर्टेंट है और अम
[37:58]सलाम को मानने का मतलब यही है कि हम उनकी बातों को
[38:03]माने उन्होंने जो सिफारिश की है उन्होंने जो हुक्म हमको दिया है
[38:05]जो ताकीद उन्होंने की है हम उसके ऊपर अमल करें प्लानिंग टाइम
[38:07]मैनेजमेंट अ मुसलसल काम करते रहना जद्दोजहद करते रहना थकना नहीं है
[38:16]हारना नहीं है हिम्मत जो है वो टूटने नहीं देना है हौसला
[38:18]बुलंद रखना है और ये इंपॉर्टेंट चीज वई प्लानिंग के साथ आगे
[38:23]बढ़ना है और तरक्की हासिल करनी है तो आखिरी पैगाम अगर आप
[38:26]दोनों जो है वो एक एक करके मैं हदल भा शुरू करूंगा
[38:30]कि हमारे जवानों के लिए कुछ देना चाहे और के आए लोग
[38:34]शिरकत करें हमारे जवान इस लाइन में आए जरूरत है मुल्क को
[38:36]बनाने में अपना किरदार अदा करने की तो अगर आखरी पैगाम देना
[38:42]चाहे तो आदिल भाई मैं आपसे गुजारिश करूंगा कि आप आप जो
[38:45]है बयान करें जर सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहूंगा कि
[38:51]एक जो हमारी गुफ्तगू का एक हिस्सा भी रहा कि एक मायूसी
[38:56]हमारे अंदर है कि शायद हमारे डिस्क्रिमिनेशन होता है या हम हम
[39:00]कोशिश भी करेंगे तब भी वहा नहीं पहुंच सकते हैं लेकिन ऐसा
[39:03]बिल्कुल भी नहीं है इस एग्जाम में तो बिल्कुल भी नहीं है
[39:06]कि जहां डिस्क्रिमिनेशन फेस कर उसका जीता जाता स मैं और सायम
[39:09]भाई और भी दीगर बहुत सारे सिलेक्शन हुए हैं तो वो ये
[39:13]दिखाता है कि जो डिस्क्रिमिनेशन का एक खौफ हमारे अंदर रहता है
[39:16]वैसा कुछ नहीं है दूसरी बात यह कि खुद पर भरोसा भी
[39:21]रखना बहुत इंपॉर्टेंट है बहुत सारे लोगों को एक एक डर बैठा
[39:24]होता है कि एग्जाम बहुत मुश्किल है शायद मेरे से नहीं हो
[39:26]पाएगा मैं जितनी भी कोशिश करल शायद मैं उस लायक नहीं हूं
[39:30]लेकिन अगर आप कोशिश कर ले अगर आप एक बार ठान ले
[39:34]कि मुझे ये चीज अचीव करनी है मुझे ये एग्जाम क्रैक करना
[39:36]है तो आप बिल्कुल कर सकते हैं ये एग्जाम क्रैक और फाइनली
[39:40]किसी भी कॉम्पिटेटिव एग्जाम में या किसी भी आप जिंदगी किसी भी
[39:44]मरहले में रहे हमेशा खुदा वंदे पाक प आप भरोसा रखे उस
[39:49]परे यकीन रखे कि अगर अगर आप किसी वजह से अगर आप
[39:52]कामयाब नहीं भी हो पा रहे तो जरूर उसमें खुदा वंदे आलम
[39:54]की कोई मसलेहट होगी और इसमें जो है वो आपकी बेहतरी होगी
[40:00]इसमें मैं एक जाते जाते एक अपने वालिदा के बारे में बताना
[40:02]चलू कि वो अक्सर वो यह दुआ करती थी जब पिछले अटम
[40:07]में की क्योंकि खफ बैठा होता है सिविल सर्विसेस को या पुलिस
[40:12]सर्विस को या एडमिनिस्ट्रेट सर्विस को लेकर के की इसमें मसलन करप्शन
[40:16]है या गलत रास्ते पर जाने के बहुत सारे इसमें खचा रहता
[40:21]है तो मेरी वालिदा य दुआ करती थी उन्होने मुझे बताया भी
[40:23]कि वो भी थोड़ा सा उन्ह ा रहता था कि कहीं गलत
[40:27]रास्ते प ना चला जाए तो ये दुआ करती थी कि या
[40:31]अल्लाह इसका सिलेक्शन अगर ये खद है अगर यह मुमकिन है कि
[40:35]ये गलत रास्ते पर चला जाएगा या इसके अंदर तकब्बल आ जाएगा
[40:37]या उसके अंदर करप्शन आ जाएगा तो याला इसका सिलेक्शन ना हो
[40:42]तो और जिसके बारे में ये भी उनसे कहता था कि शायद
[40:45]आपकी दुआ ऐसी थी जिस वजह से मुझे चार अटेंट लग गए
[40:46]लेकिन ये चीज कहीं ना कहीं वो ये सिखाती है कि आपको
[40:50]हमेशा अपना मकसद याद रखना है कि आपका मकसद इस इम्तिहान के
[40:54]जरिए ये नहीं है कि आप एक अपने आप को एक बड़ा
[40:54]इंसान समझने लगे या अपने आप को बहुत ही आप दुनियावी चीजों
[40:59]में लग जाए कि मुझे बहुत सारे पैसा इकट्ठा करना है या
[41:03]बहुत पावर इकट्ठा करनी है आपका मकसद ये होना चाहिए कि लोगों
[41:05]की मदद करना खिदमत खल्क करना तो वो मकसद हमेशा याद रखना
[41:11]बहुत जरूरी है आप किसी भी काम में जाए वो मकसद हमेशा
[41:13]याद रखें खुदा वंद करीम से ये दुआ करते रहे कि वो
[41:17]हमें सिरात मुस्तकीम प कायम रखे और गलत कामों से दूर रखे
[41:21]और कोई भी काम हो क्या आप जितने भी कीचड़ में हो
[41:22]आप आप उसम कीचड़ में रह कर के भी साफ रह सकते
[41:25]हैं तो आप बिल्कुल ये कोशिश करें जा दे रहे कि आप
[41:29]नेक रास्ते प चले नेकी करें बुराई से बचे बस यही मेरा
[41:32]पन जी बहुत ही अच्छा पैगाम था काफी इसमें हमारे जवानों को
[41:39]सीखने के लिए काफी पॉइंट्स थे साइम भाई अगर आप फाइनल कोई
[41:44]आप आज हमारे यूथ को कोई मैसेज देना चाहे कोई पैगाम देना
[41:47]चाहे तो वह क्या होगा जी मैं अदिल भाई ने जो एक
[41:53]बात बोली मैं वहां से पिक करूंगा कि एजुकेशन आज के दौर
[41:55]में एक तो तब्दीली ये आई है कि जवान जो है वो
[41:58]एजुकेशन को अहमियत दे रहे हैं यह बहुत अच्छा चेंज है लेकिन
[42:03]एजुकेशन जो है वह सिर्फ पैसा कमाने का या तरक्की करने का
[42:05]या कामयाबी हासिल करने का जरिया बन के नहीं रहना चाहिए एजुकेशन
[42:11]या तालीम जो है वह किरदार साजी का जरिया होना चाहिए कैरेक्टर
[42:14]बिल्डिंग होनी चाहिए वो बहुत इंपॉर्टेंट है अगर वो नहीं है तो
[42:19]फिर आप भले ही पैसा कमा लेंगे वो अगले जनरेशन में खत्म
[42:21]हो जाएगा लेकिन कैरेक्टर ऐसी चीज है जो जनरेशन दर जनरेशन पास
[42:26]ऑन होती है तो दूसरी चीज कि अपने अंदर डिसिप्लिन पैदा करें
[42:30]जो चीज आपको करनी है उसको सही टाइम पर फिगर आउट करें
[42:35]उसको लेकर फोकस्ड रहे और अपने काम को बहुत सिंसियर पसू करें
[42:39]डिसिप्लिन बहुत जरूरी है लाइफ में और तीसरी चीज जो अदिल भाई
[42:44]ने भी पॉइंट आउट की वो यह है कि हबल रहे हमेशा
[42:47]लाइफ में अगर आप तरकी भी कर रहे हैं तो हबल रहना
[42:50]बहुत जरूरी है तकब्बल था कोई हदीस थी या मुझे हवाला याद
[42:55]नहीं आ रहा लेकिन तकब्बल थी एक ये कि हक वाज हो
[42:57]जाए और आप अड़े रहे कि नहीं मानूंगा एक यह तकब्बल समझना
[43:03]तो इन दो चीजों से बचना चाहिए तो यह जो है आपका
[43:08]इंसान का अखलाक और किरदार इस से बेहतर होगा तो यह कुछ
[43:14]क्वालिटीज जो है मुझे लगता है अगर नौजवान अपने अंदर इनकल्केटिंग ने
[43:23]अपना वक्त दिया और मैं इतने दिनों से जो है आप लोगों
[43:28]से राते में था जिसे मुझे अंदाजा है जाफर भाई की बहुत
[43:29]मसरूफ है दोनों ब्रदर हमारे मैंने आपसे गुफ्तगू की ी सिलसिले में
[43:36]अपना कीमती वक्त आपने दिया हमारे लिए जवानों को आपने बहुत अच्छे
[43:40]नुका की तरफ आगाह किया उम्मीद है कि आपसे स्पायर होके और
[43:46]आपको को अपना आइडियल और नमूना बनाते हुए हमारे जवान और भी
[43:51]आगे बढ़े और मुल्क की खिदमत के लिए इस किस्म के जो
[43:54]और भी दीगर एग्जाम्स होते हैं उनमें शिरकत करें उनको करें और
[43:59]मुल्क का कौम का अपने घर का खानदान का नाम रोशन करें
[44:06]खुसूस अहले बैत अ सलाम की ताकीदा और उनके हुक्म पर अमल
[44:08]करें और इस बात को साबित करें कि व हकीकी अहले बैत
[44:12]अ सलाम के चाहने वाले हैं फिर से हम अल्लाह से दुआ
[44:17]करते हैं कि परवरदिगार आप दोनों की और दीगर जो हमारे मुसलमान
[44:20]भाई जो क्या कहते हैं जवान जिन्होंने इसको क्रैक किया है यूपीएससी
[44:24]एग्जाम को उन सबको तरक्की इनायत फरमाए तौफीक में इजाफा करें और
[44:30]अदल इंसाफ और जस्टिस को कायम करने की यह लोग कोशिश करें
[44:35]जाफर भाई अगर आपको आखरी पैगाम देना चाहते हैं मैं बस एक
[44:37]लास्ट बात चक तकरीबन सारी बात आपने बोल दी मुकम्मल बातें बस
[44:42]एक हदीस की जिसको हम काफी पढ़ते हैं के जिसमें मासूम फरमाते
[44:44]हैं कि कु लना जना वला तक अनाना कि हमारे लिए जीनत
[44:49]का सबब बनो और आज यकीनन आप दोनों ने यह काम आप
[44:53]दोनों ने साबित कर दिया कि आप किस तरीके से अहले बैत
[44:57]अल सलाम के के लिए अमा अल सलाम के लिए जीनत का
[45:02]सबब बने कि जिस लोग जब भी यह नाम सुनेंगे यह नाम
[45:03]देखेंगे और आपको देखेंगे तो उन्हें वह याद आएगा कि यह किस
[45:07]मकतब के और किस मजहब के मानने वाले हैं बहुत-बहुत शुक्रिया इंशाल्लाह
[45:11]मोमिनीन हम एक इसी किस्म के नए पॉडकास्ट के साथ आपके साथ
[45:18]आपकी खिदमत में हाजिर होंगे तब तक के लिए खुदा हाफिज सबील
[45:21]मीडिया कुरान और अहले बैत का रास्ता कामयाबी का रास्ता
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