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Syeda Zehra A.S. Eman aur Amal-e-Suleh K Aienay Main | H.I. Shahid Raza Kashfi
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Record date: 16 JAN 2022 - جناب زہرا ایمان اورعمل صالح کے آئینہ میں
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल की सलाह मांगी व फिल्म है अल्हम्दुलिल्लाह लिहल दाणा ओ कि
[0:22]यह जुड़वां कुनाल ने उत्तर दिया लहूलुहान हर दिन अल्लाह में लगा
[0:30]जहां पुरुषों व बिना बिल हक है कि अस्सलातो वस्सलाम वाला रसूल
[0:38]संकलन कि लखनऊ भैरव दिलवा अरे भाई नेवल मशरख संजय जला समय
[0:42]वह शाहीन अभिलाख राशि मे मोहम्मद इस्लाम फसल लहलहा उन्नत वाले अलार्म
[0:55]अतुल अहिलाद यह मिलाना है लाख या में योगदान मैं अहमदाबाद का
[0:58]अल्लाह सुभान अल्लाह तबारक व ताला फिदा बेहद मजबूत 115 ध्रुव व
[1:06]उल हक वह इसका कुल का एलियन बिस्मिलाहिर्रहमाननिर्राहीम मना मेला साल यह
[1:17]नुस्खा करीना कुनसा और बहू मौन उन कि फलनों या नवहा तंत्रज्ञ
[1:22]वाह यह वाला न जिया न हो महज रहूं व्यास ने मां
[1:27]कानू या मलून सलवार भेजो मोहम्मद वाले मोहम्मद स.अ.
[1:39]ए मईया मईया में फातिया कि जमादुल ऊला और जमा दे सोनिया
[1:47]है और इसके साथ-साथ आप अनकरीब में चलावे सैयदना की विलादत के
[1:57]हवाले से कि अ यह माना चाहते हैं कि यह झाला जब
[2:03]तक यह पाया के जनावे सभ्यता के हवाले से करे गुफ्तगू हो
[2:09]कि अगर 6 यह बहुत ही आज है यह बंदा और हम
[2:19]सब के सब के जलावे सभ्यता के हवाले से गुफ्तगू करने की
[2:23]निस्बत है है और उसका राज है और उसकी दलील है है
[2:29]और वह राज और दिल्ली लिए है है कि हर इमाम ने
[2:35]के बाद रसूले इस्लाम ने अपने-अपने तौर पर जनाब सैयद है कथारूप
[2:40]करवाया था है लेकिन तमाम तारूफ आपको और तारीख रात को है
[2:50]और हकीकत है सैयदना को जानने के हवाले से जमा किया जाए
[2:56]हैं तो एक फरमान और एक कॉल सब पर भारी है है
[3:06]और वह कॉल है कि जब किसी ने सवाल किया यहां पर
[3:13]धंधे रसूल से में कई अपना रसूल अल्लाह कि आपकी ज्यादा यानि
[3:22]कौन है कि उनकी तारीख क्या है ये तो बहुत ही खुश
[3:30]नजर अंदाज में वो मासूम ने जवाब दिया मगर जानें ने कहा
[3:34]तुमने हमारी ज्यादा की निस्बत सवाल किया है तो सुनो सिरोंज में
[3:43]नसरल्लाह कि काला के राज्यों में से एक राज हमारी ज्यादा है
[3:48]है और हम सब जानते हैं कि वह राज्य के जो फाश
[3:52]हो जाए अब कि गुर्जरों राज फाश हो जाए और आज नहीं
[3:57]रहता तो यकीनन जनावे सैयदना की निस्बत और साफ की हकीकत है
[4:08]और उन तमाम महाकाय को अगर जमा किया जाए तो हकीकत विवाह
[4:13]एग्जाम में और कामिल खुद खुदा ही जानता है है मगर रसूले
[4:20]इस्लाम के हर बार पर आर्मी और आप मान्यता ही नाले मुसलाम
[4:26]के हर बार फ्रॉम के जरिए से कादरी हमें अंदाजा होता है
[4:30]कि जनाब सैयद अ यानी कौन का दूसरा फेज में अ कि
[4:39]इंसान इंसान है कि चाहे वह मर्द की सूरत में हो चाहे
[4:47]वह औरत की सूरत में बहुत गौर से सुनिए काया को ख़ुदा
[4:50]वंदे आलम ने कि बिना में इंसान हल करने के साथ फतेह
[4:57]बाराकल्ला हो आसन लाख लेकिन कहकर इस इंसान की अजमत को दूसरे
[5:04]मौजूद के मुकाबले पर बयान किया है है लेकिन यही इंसान कि
[5:12]विमान थे और तनख्वाह की बुनियाद पर और हम लेस वाले की
[5:16]बुनियाद पर मुख्तलिफ लेबल्स को तय करता है मुतालिफ़ स्टेज को तय
[5:23]करता है है कि हर स्टेज और हर लेवल एक दर्जा रखता
[5:27]है एक मर्तबा रखता है वह मर्तबा और दरवाजा और स्टेज इलाही
[5:36]मर्तबा हुआ करता है मानवी मर्तबा हुआ करता है रुक भी मरहला
[5:45]और मर्तबा हुआ करता है अगर उस जैसे इंसान को देखने की
[5:53]कोशिश करें है तो निचली सतह से अगर शुरू करें तो जाए
[5:55]कमाल इंसानियत पर भी कुछ अपराध दिखाई देते हैं कि अगर मर्दो
[6:02]के दरमियान मुलाहजा करें तो रसूले आजम है और अमीरुल मोमिनीन जैसी
[6:10]शख्सियत दिखाई देती है हैं और अगर ख्वातीन को अगर मुलाहजा करें
[6:14]तो खुद रसूले इस्लाम ने फ़रमाया हज और आप हजरात यकीनन वासिफ
[6:20]होंगे आज के पांच हवा तीन ऐसी के जो सब पर भारी
[6:28]कमालात के लिहाज से में जन्नत के लिहाज से अगर मुलाहजा किया
[6:31]जाए तो जन्नत के दरमियान जन्नत में हवा दिन के दरमियान जो
[6:38]ख्वातीन टॉप आफ दिल्ली ईस्ट है वह भी यही पांच ख्वातीन है
[6:42]हैं उन पांच ख्वातीन में सारे खैरियत जनाब सैयद आ का नाम
[6:50]है हैं तो इस जहर से अगर हम मुलाहजा करें तो इंसान
[6:52]विमान के लिए हाथ से और एमएलए साले के लिए बिल के
[6:58]लिए हाथ से एक से एक बढ़कर दिखाई देते हैं है क्योंकि
[7:03]जो हमारी इसी दुनिया के अंदर मुतालिक हमारा हिल को तय करने
[7:07]के लिए आज से चाहे दुनिया भी मराहिल ओं मा धीमा राहिल
[7:10]हो तो वहां पर भी जो है हम यदि इस दुनिया के
[7:14]अंदर मुख़्तलिफ़ मुक़ामात के ऊपर मुख्तलिफ लेबल्स के लिए हाथ से मुख्तलिफ
[7:18]इंसान दिखाई देते हैं का यह शख्स बला का ध्यान रखता है
[7:24]इस शख्स की जो है वेकेशन जो है बहुत ही अच्छी है
[7:28]यह शख्स जो है सोचने के लिहाज से बहुत ही आल्हा पैमाने
[7:31]का है यह शख्स जो है जवाहिरी जिस्मानी लिहाज से बेहतरीन सलाहियत
[7:38]रखता है फल और फलाहार टू जेड बिल्कुल उसके मुकाबले पर जो
[7:43]है रूखी कैफियत का यही आलम है कि मैं और आप इस
[7:47]दुनिया के अंदर मार दी लें यहां से इंसानों के दरमियान तफरीह
[7:50]करते हैं कमलनाथ की इज्जत से खे है लेकिन जो है रोहानी
[7:56]जहर से भी जो है तफरी के हुआ करती है एक से
[8:01]एक बढ़कर एक दूसरे के मुकाबले पर मुमताज़ हुआ करता है लेकिन
[8:04]वह इम्तियाज कैफियत क्या है उसे क्या कहा जाता है आसान याद
[8:12]रखने के लिए उसे कहा जाता है मानवियत उसे कहा जाता है
[8:14]रूहानियत उसे कहा जाता है इरफानी अत उन सबको जमा किया जाए
[8:21]सैकड़ों सलूक कहा जाता है पहले इरफान इस लफ्ज़ को जो इस्तेमाल
[8:25]करते हैं शहरों सलूक यानी एक इंसान इस दुनिया में बावजूद इसके
[8:32]कि जिस्मानी तौर पर यह अपने आपको जो है वह पूरा पावरफुल
[8:35]पाता है लेकिन इस पॉवर को वह यूज जिस्म के लिए कम
[8:42]करता है रुक की परवरिश के लिए ज्यादा करता है है और
[8:49]इसीलिए रिवायात को अगर मलाई ऐड करें तो रूह की तरक्की कर
[8:55]राज उस वक्त मालूम होगा कि इंसान खुदा की था कर दिया
[8:57]यह जो नेमत है बिना में जिस्म उसको भरपूर अंदाज में यूज
[9:02]करें तो है ना और आप क्लास में जाते हैं पहली क्लास
[9:05]दूसरी क्लास तीसरी क्लास यहां तक के लिए मैट्रिक करते हैं इसके
[9:11]बाद इंटरमीडिएट है उसके बाद यूनिवर्सिटी का मोहल्ला यह जाहिरी जो है
[9:15]जो स्कूल कॉलेज और यूनिवर्सिटी इंसान को जो है सिर्फ जो है
[9:19]आगे धकेलने के हवाले से और कुछ करने के हवाले से उसको
[9:24]आमादा करने के लिए आवश्यक तुम्हें दुनिया भी लिहाज से कमाल पर
[9:27]पहुंच रहा है अल्लाह ने भी जो है यही काम किया है
[9:31]अल्लाह ने इस दुनिया में भेजने के साथ एहतिमाम किया 124000 पैगंबरों
[9:39]का मतलब ए रिसालत का मुक्त अभिनव भारत का और सात मकई
[9:42]मोहम्मद का इन तमाम को जो कि हमारे लिए हम आधा किया
[9:47]खुलासा कलाम अ और जनाब सैयद आण वह इंसान है कहां मिल
[9:55]हैं कि जो जिस्मानी ले हाथ से तो एक जाने लेकिन रूहानी
[9:59]और मां ने भी लय हासिल दूसरी जानिब में बहुत आसान करने
[10:05]कर देते हैं इसे याद रखने के लिए कि जिस्म को यूज
[10:10]किया है जनाब सैयद जैसे इंसान ने और घोषित तौर पर हमारी
[10:12]बुद्धि को जनाब सैयद है कि हवाले से जिस्म को यूज किया
[10:17]जनाब ए सईंया दाने और वह भी 18 साल तक आ मैं
[10:22]किसके लिए अपनी रूह की परवरिश के लिए है और 18 साल
[10:30]का सिम नो साल रूस आज पर पहुंची कि इस इंसान है
[10:37]काम मिल के जो औरत के लिबास में है वह सारे कमालात
[10:39]को तय कर गई कि जो ख़ुदावंदे आलम ने एक इंसान की
[10:43]अजमत के लिहाज से बयान की है इस बात की जिंदगी के
[10:50]अंदर मुलाहजा करें तो आज पर दिखाई देती हैं बेटी होने के
[10:56]हवाले से और अगर शहर की जिंदगी में मुलाहजा करें ज्यादा होने
[10:59]के लिए आज से तो यह कमाल पर दिखाई देती हैं और
[11:04]अगर जो है मां होने के हवाले से मुलाहिजा करें तो फिर
[11:10]जो है सैयदा मां हसन हुसैन अलैहिस सलाम की और जनाब ई
[11:13]जैनब अब और जनाब एवं मैं कुलसूम अलैहिमस्सलाम की निस्बत और पर
[11:20]दिखाई देती हैं इधर के मुकाबले पर अगर देखें तो ताज़ीन पिता
[11:23]अर्थ और पर दिखाई देती है गौर से सुनिए का कि यह
[11:29]आज ताजीम के लिहाज से बाप की निस्बत इस बेटी का बाप
[11:34]ने बाकायदा जवाब भी दिया और बाप ने जवाब क्या दिया फातिमा
[11:39]तो हम अभी हा हा है भाग्य ताजीम का अंदाज है यह
[11:46]वह बाप कौन है वह आप जो है कोई मामूली इंसान नहीं
[11:50]है ब्रह्मा यंत्र को अनिल हवा इन हुआ इलावा यह की मंजिल
[11:53]पर है उसने जो है फौरन जो इस ताजीम के मुकाबले पर
[11:59]जवाब दिया सैफ आतिमा तुम बेटी नहीं बल्कि अपने बाप की मां
[12:05]हो और साथ यह भी का नाम सुनते रहते हैं फातिमा तो
[12:08]अभिजात मुन्नी फातिमा जो है मेरा जिगर घोष है हम सारी बातें
[12:15]सुन चुके हैं और सुनते रहते हैं और साथ एक मौका यह
[12:17]भी आया कि तब कहा कि जब जो है रसूल ने जो
[12:21]है एक ख्वाहिश का इजहार किया बल्कि जो है जवानी नहीं एक
[12:27]इशारा था लेकिन जगह उसे इशारे का जवाब मुसीबत मिला जनावे सैयदना
[12:31]की तरफ से इधर आ किया जनाब सैयद आने रिसालत के इशारे
[12:39]को नुबूवत के इशारे को सैयद नूर सलीम के इशारे तो फौरन
[12:42]जो है वह इस रसूले आराम से जो यह सुना का ए
[12:47]फातिमा तुम्हारा बाप तुम पर फ़िदा हो जाए और यह औरत है
[12:54]औरत के लिबास में निशान है मगर इंसान निकाल मेले का मेले
[13:00]का मिल लॉक माशाल्लाह हमने लेकिन क्यों कर लेकिन क्योंकि जो है
[13:16]एक इंसान इस समय पर पहुंचना है कि मैं हुआ है गुफ़्तगू
[13:22]यह है है कि शराब शहद आपको अगर जो है आईने में
[13:24]देखना हो तो किस आईने में देखा जाए कि साफ दिखाई दें
[13:30]और यह सारी चीजें दिखाई दें उस आइने का नाम है डिमांड
[13:36]और हम लेस वाले हैं मैं इग्नोर वाले साले जो है ऐसा
[13:43]कहना है कि जिसमें जर्राह बराबर लहर नहीं आईने दो किस्म के
[13:48]होते हैं कि चाइना एक वृद्ध बाद वह बहुत ही साफ हो
[13:50]शफ़्फ़ाफ़ है जो भी हम मैसेज है अपनी सूरत को देखेगा वहीं
[13:55]आज है उसे साफ और क्लियर जो है बहुत ही शफ़्फ़ाफ़ अंदाज
[14:01]में चेहरा दिखलायेगा है लेकिन बसों का दाहिने ऐसे होते हैं कि
[14:04]इसमें लहर होती है या उसमें स्क्रैच पड़े होते हैं टुकड़े-टुकड़े होता
[14:10]है तो वहां पर जो है मुझे और आपको जो है एक
[14:15]तस्वीर हमारा अपना एक चेहरा दिखाई नहीं देगा बल्कि हजार चेहरे दिखाई
[14:19]देंगे लेकिन जनाब सैयद आपको अगर जो देखना मकसूद हो तो मीडिया
[14:27]ने कामिल और हम लेस वाले के आईने में देखें तो भरपूर
[14:29]अंदाज में विमान कूटकर नजर आएगा और हम लेस वाले उसके मुताबिक
[14:37]कट करता हुआ कूटकर दिखाई देगा विमान को और हमारे साले को
[14:40]प्लस करने के बाद इसे कल टू करें तो इंसान है मम्मी
[14:45]दिखाई देता है वह मोमिन के जो खुदा पसंद जाना है कि
[14:50]उस मोमिन को आगरा हम थोड़ा सा झटक करें तो वहां से
[14:55]जो है जलवा जाहिर होगा जनाबे सैयदा का हिना ऐसा साथी पुस्तकों
[15:00]व है ना जज्बाती मुद्दों को है बहुत ख़ुदा वंदे आलम कहता
[15:04]है कि जो असल नाम है कलाम में जो हमने आयत पढ़ी
[15:07]बहुत वजह से सुनिएगा सुरेंद्र हल आयत नंबर 98370 हल आयत नंबर
[15:13]90 आलम क्या कह रहा है फॉर्मूला बयान कर रहा है और
[15:19]हर इंसान की निस्बत यह जो है दावत देता व नजर आ
[15:23]रहा है कोई भी जो कि है उसमें मुस्तसना नहीं बल्कि सारे
[15:26]इंसान बराबर हैं कब अरे यह कहना क्या चाहता है कहां ऊंचाई
[15:32]पर जाना चाहते हो कमाल के जो है रास्ते को तय करना
[15:34]चाहते हो तो मैं तुम्हें फॉर्मूला बता देता हूं कवर फॉर्मूला क्या
[15:41]है मना मेला साल यह निंजा करीना कौन सा है कि यह
[15:48]शायद का पहला पाठ का जो शख्स भी चाहे वह मर्द की
[15:50]सूरत में हो चाहे वह औरत की सूरत में ने कमल अंजाम
[15:54]देने का यह दूसरा हिस्सा इस आयत का वह मोमिन कि वह
[16:00]साहिबे ईमान हो विमान की बुनियाद पर हमले साले अंजाम दे चाहे
[16:07]मर्द हो चाहे औरत बारला तू कहना क्या चाहता है फलनों त्यौथर
[16:12]तीसरा हिस्सा का जोश भी ईमान अमल साले के साथ जो है
[16:20]रखे और हमारे साले को विमान के साथ करार देते तो एक
[16:25]चीज जो है मैं उसे दूंगा वह सब पर भारी है क
[16:29]वो चीज क्या है बारे में यह का साफ और सुथरी जिंदगी
[16:32]दूंगा शफ़्फ़ाफ़ जिंदगी दूंगा तैयार पाकीजा जिंदगी दूंगा मैं कि फलनों ज्ञान
[16:40]लव हातन पहले वाला व्यक्ति फिर शरीर मुख्य विपक्षी दल करते हुए
[16:44]साहित्य विज्ञान शुरू करते हैं लेकिन बाद तहत एक व्यक्ति का अंदाज
[16:51]में जो क्या इस मतलब जैसे सामने लेकर आते हैं कई या
[16:55]तैयबा से मुराद क्या है और यह आते तैयबा इस दुनिया से
[17:01]मुताल्लिक है या उस दुनिया से मजा लेता है तो यह कहते
[17:06]हैं कि नहीं इसी दुनिया से मुतालिब रखें और इसी पैर आए
[17:09]के अंदर के जिस पर आएं इंसान है जिस मां-बाप से जो
[17:13]क्या है उसकी हरकत हुई है डुबो ख़ुदा वंदे आलम ने उसे
[17:20]ताकि है लेकिन विमान और हमारे साले उसके जाहिर को तोक बदलता
[17:22]नहीं है लेकिन उसके बाद इनको बदल देता है कि जब बातें
[17:27]बदलता है तो आप उस बात इन्हें बदलने से पहले बहुत गौर
[17:32]से सुनिएगा बात इन के बदलने से पहले जो क्या है इंसान
[17:37]जॉइन जारी आंखों से देखता था इन बाहरी कारणों से सुनता था
[17:39]लेकिन जो है जो चीज देखता था वह असर नहीं रखती थी
[17:46]अ है जो चीज सुनता था उसका कोई असर नहीं था अब
[17:47]क्योंकि उसका बातें चेंज हो गया विमान और हमारे साले की बुनियाद
[17:53]पर इस आंखों के जरिए से जो भी मंजर देखता है उसका
[17:59]नतीजा पाता है इन कानूनों के जरिए से जो सुनता है उसका
[18:01]नतीजा भी पाता है असीमानंद और हमारे साले का नतीजा यह है
[18:07]कि इस नतीजे को क्या कहते हैं का हां तैयवा है लेकिन
[18:11]हमारा और आपका कम सेट किया है इस दुनिया में निकलें बाहर
[18:15]एक दूसरे से धरियावद करें अच्छी और मुक्त महीने जिंदगी कौन सी
[18:18]है सवाल करें दूसरे से पुकार जिसके पास ज्यादा पैसा हो जिसका
[18:23]मकान बहुत ही आंवला और उनका हो महल जैसा मकान हो उसका
[18:29]उसके पास गाड़ी है बंगला है ए टू जेड तक यह सारी
[18:34]सहूलियतों फैसिलिटीज हों तब जाकर जो कि हैक इंसान जगह बनाने वाली
[18:38]जिंदगी का एहसास करता है आया वाकई दाउद है बहुत सारे अपराध
[18:43]हमारी इसी दुनिया के अंदर है जो सरमायादार हैं साहेब सहमत हैं
[18:49]मैं पहले सरवत नहीं थी बाद में जब्त हो गई शैलेंद्र याद
[18:55]करते उनसे जाकर ए एस शर्मा याद यार वाक्य जो है आपके
[18:59]शर्मा ने आपको इत्मीनान दिया है अगर वह अ हकीकत बताने पर
[19:06]आ जाए और जवाब देने पर आ जाएं तो यही कहेंगे कि
[19:11]जब तक हमारे पास यह सामान नहीं था यह आसानी से नहीं
[19:13]थी हम बहुत ही मुफ्त मई थे और चैन की नींद सोते
[19:20]थे है अब जब से जो क्या आस्था आस्था शर्मा या बढ़ता
[19:24]चला गया इस तरफ बढ़ता चला गया परेशानी दो चंदन हो गई
[19:29]ज्यादा हो गई इसका मतलब यह है कि जगह इत्मीनान कर रास
[19:36]पैसा नहीं है इतना क्रश लिबास नहीं है पित्त वर्णन का राज
[19:40]यह जो है चारदीवारी और छत और यह आलम मकान नहीं है
[19:44]जब जो सुकून नहीं मिलता है इसमें तो इसका मतलब है जिसमें
[19:50]लाइन किसी और जगह पर है सय्यदुश्शोहदा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम तो अस्सलाम
[19:58]ओ [संगीत] कर दो यार ऐसा हर बार फरमान मशहूर समारोह जैसे
[20:06]हम कहेंगे आप के अधीन काम करेंगे बारेला हाथ जिसे तू मिल
[20:11]गया उसके पास अगर कुछ भी ना हो सब कुछ उसके पास
[20:17]है एक बार अल्लाह जिसके पास जो है सब कुछ हो लेकिन
[20:20]तू नहीं कुछ भी नहीं है इसका मतलब यह है ना पैसा
[20:28]फालना लिबास ना मकान न सवारी न कुछ और और अगर है
[20:32]तो फिर जो आया वह खुदा की जात है कि खुदा खुद
[20:38]सूर्या दायित्व मठ में रहता है सुर राध आयत नंबर-28 28 नंबर
[20:45]कि शायद अल्लाह बेशक जिला है तत्व इंदल को लूप सभ ऑफिस
[20:48]है इस किस्म की है आपसे सिर्फ रिमाइंडर है मगर तंवर चाहिए
[20:54]कि खुदा क्या कह रहा है कागा हो जाओ किस जरूरी है
[21:00]आगरा होना कबूला किस चीज की निस्बत का मुझे अल्लाह की जात
[21:05]का जिक्र ही दलों को इतना आनंद देता है है ना पैसा
[21:09]ना पाई ना कोई और चीज है कि अगर के पैसा और
[21:15]पाई बुरा नहीं है रखना लेकिन कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारा
[21:19]पैसा जो तुमने मेहनत करके कमाया है तुम्हारे दिलों को अगवा कर
[21:27]ले तुम्हारी जो पिछड़ों को अगवा कर ले होता है चाहिए जब
[21:30]तक पैसा नहीं इंसान जो अपने आपको देखता रहता है क्या वाकई
[21:36]में अच्छा कर रहा हूं कि ब्रा दूसरों की भी सुनता है
[21:37]और अच्छी खुश्बू भी करता है लेकिन जैसे ही पैसा आया नहीं
[21:43]जाहिरी सुकून आया नहीं फौरन जो क्या है उसकी हालत चेंज होना
[21:49]शुरू होती है सूर्य अलग के अंदर ख़ुदा वंदे आलम यही कह
[21:54]रहा है आयत नंबर सिक्स ओर सेवेन के अंदर सूरए अलक़ कि
[21:57]जो सबसे पहला सुरा के पास स्थित दही आयल सबसे पहले कल्बे
[22:01]पैगंबर पर नाज़िल हुई यह खराब जिसमें रवि कल ही फलक के
[22:07]जरिए से 5 आयत पर दर पर लेकिन उसकी छटी नंबर की
[22:07]आयत और सातवें नंबर की आयत इसी मतलब को बहुत ही व
[22:12]हैं और सीरियल ईवन कर रहा है कम बाल आना अपनी जेब
[22:16]से बयान करने का नहीं मुझे भूख नहीं है कोई भी अपनी
[22:21]जेब से बयान करने का ख़ुदा क्या कहता है कल्ला इंदल इंसान
[22:24]आलिया पका अन राहु तक ना अ में बहुत हिसाब ज्यादा जरूरत
[22:31]नहीं है धूप में जाने की सिर्फ तर्जुमा काफी है कल लाइनर
[22:37]इंसान आलिया का हरगिज़ हरगिज़ खबर जिला कहना क्या चाहता है इन
[22:46]नल इंसान यात्रा यकीन करो यकीन करने जैसा है कब मिला था
[22:50]किस चीज की निस्बत का यह जो इंसान है ना यह तो
[22:54]यंगर है यह जेलों में यह सितमगर है यह बगावत करता है
[23:00]बांग्ला कब अन राहु तक ना जब वह अपने आपको मुस्तक नहीं
[23:07]जानता है उसकी जेब भरना शुरू हो जाती है तथा मुझे किसी
[23:09]की जरूरत नहीं है कि दूसरों को मेरी जरूरत है मुझे इनकी
[23:13]जरूरत नहीं खुदा ने जो है हमारे आने से पहले ही जो
[23:19]क्या है कल वे पैगंबर पर जो किया है यह याद होना
[23:24]चाहिए करके बतलाया काले निशान है अजीज तेरी नेचर यह है है
[23:28]लेकिन चाहता है इस मतलब को जो है इस नेचर पर कंट्रोल
[23:32]करना तो एक काम कर कब्जा रहेगा वह क्या है का नुकसान
[23:38]से बचना चाहता है खसारे से बचना चाहता है तो मैं तुझे
[23:40]राज बतलाए देता हूं वह लाश व्बा इन नल इंसान अलख यह
[23:46]सारे इंसान खसारे में है हिलरी ना मनवा मिल उस वाले हाथ
[23:51]में कई विमान और हम लेस वाले दो बातें और भी कही
[23:56]है बताओ आशा बेहद के वक्त वास विद सौरभ का जब तुम
[24:00]विमान को अपना लो और उसकी बुनियाद पर हम लेस वाले अंजाम
[24:05]दो ना अ करना मत आ ए क बारे में जाकर कैसे
[24:10]आती है कि तुम अपना कॉलर ऊंचा करो कि मैं ही मम्मी
[24:15]हूं मैं नमाज को जा रहा हूं मैं ही रोजा रखने वाला
[24:16]हूं यह जो और फल और फलाहार में ही ज्यादा तौर पर
[24:21]जाता हूं हर साल उम्र अंजाम देता हूं हवलदार कब बदल जाए
[24:26]इस अकड़ का तोड़ क्या है वह तवा उत्सव बिल हक क
[24:30]खाली अपने आपको मत देखो विमान के लिए हाथ से एमएलए साले
[24:35]के लिए आज से बल्कि वसीयत करो एक दूसरे को हक की
[24:39]का जो यह मान तुम्हें मिला है और उसका फायदा तुम देख
[24:41]रहे हो दूसरों को भी बतलाओ तवा तवा साउबर लाख कब अरे
[24:47]वाह इस रास्ते में अगर कोई मुश्किल आए तो फिर क्या करें
[24:51]वह वास विद सौरभ का इन चार चीजों को जमा कर लो
[24:58]तुम कभी भी हम सारे में मुब्तिला नहीं होगे तो कि यह
[25:01]मैं कह रहा हूं कि जिसने तुम्हें खेल किया है जनाब सैयद
[25:06]आपको अगर मलाई जो करें और जानेमन तो इन चारों बातों को
[25:10]जो क्या है बतौर हतम जो कि हम इनके वुजूद में देख
[25:12]सकते हैं उनकी जिंदगी के जरिए से चार बातें हैं लेकिन जो
[25:17]है इन चारों बातों को अगर जगह एक-एक करके जो है ध्यान
[25:23]करना शुरू करें यह नष्ट नाकाफी है लेकिन सिर्फ इतना बताते चलें
[25:26]कि अगर जनाब सैयद ना कोई विमान के आईने में देख ना
[25:30]हो और हम लेस वाले क्या इन्हें में देखना हो तो फिर
[25:32]उनकी जिंदगी के छोटे-छोटे जो दस्ताने हैं हिकायात है उनके जरिए से
[25:39]मुलाहजा करें कि उनकी हराकात कैसी थी उनकी शक्ल नाथ कैसी थी
[25:43]उनकी रात कैसी थी उनके दिन कैसा था कि तमाम बातों को
[25:48]जो क्या है समेटते हुए एक मतलब को आप यह बात महसूस
[25:53]करेंगे बुलंद आवाज स्पेशल आवाज भेजो मोहम्मद सालेह मोहम्मद कर दो कि
[26:00]वह मतलब यह है याद रखिएगा जानेमन इस इंसान की हकीकत तो
[26:06]अगर थोड़ा स Touch करें तो इंसान जो है अपनी हकीकत को
[26:10]जो कहे बयान करना शुरू करेगा का जानते हो मैं इंसान हूं
[26:15]को खत्म हो कर दो बातें हैं मेरे अंदर एक एहसास दूसरे
[26:22]एप्पल बहुत गौर से सुनिए का योजना विषय को अगर पहचान 9:00
[26:30]कमाल पर है कि यह मुकदमा है इस बात का का एक
[26:34]है एहसास दूसरे खेल तू कमाल ना कहना क्या चाह रहे हैं
[26:41]कई इंसान की डेफिनेशन यह है कि वह साहेब एहसास होता है
[26:43]इंसान की डेफिनेशन यह है वह साहिबे आयल यानि साहिबी सोच और
[26:50]फक्र होता है मैं कल नहीं समझ में आई कहां सुनने का
[26:53]इंसान है वाकई वही है कि जो अपने ऐसा साथ को और
[26:57]अपने जज्बात को अपनी अक्ल के जरिए से कंट्रोल करें किला बताइए
[27:03]कि अगर कोई इंसान हममें से काली जो है एहसास आती हो
[27:09]काली जज्बाती हो और अक्ल को यूज ना करें और है तो
[27:17]वह ठोकर खाएगा या आगे बढ़ेगा मेरे को मालूम है एहसासात का
[27:25]इंसान यानि एहसास नाम इंसान जज्बात नामी इंसान अक्षरों बिस्तर यह साथ
[27:32]और जज्बात इंसान को जो है डोंट देते हैं उसे जो रुसवा
[27:38]करते हैं उसे गुमराह करते हैं वह गिर पड़ता है लेकिन अगर
[27:41]अपने ऐसा साथ और जज्बात को कंट्रोल और कंट्रोल करें एहसास को
[27:47]यूज करता है जज्बात को भी यूज करता है लेकिन जहां कपिल
[27:49]के जरिए से कंट्रोल करता है तो वह बहुत कम बल्कि न
[27:53]होने के बराबर ठोकर खायेगा अगर इंसान जो कि कामयाब रहे पूरी
[28:01]तारीफ इंसानियत को देख जानेमन तो कामयाबी का राज इंसान के हवाले
[28:04]से वहां पर नजर आता है कि जब जगह है एहसास आप
[28:08]जो है अ कल के जरिए से कंट्रोल हो मिसाले देंगे हम
[28:12]शाला जनाब सैयद लाख वाले से बुलंद आवाज़ से सलाह बजे मोहम्मद
[28:15]वाले मात्र दो [प्रशंसा] है जबकि हकीकत इंसान मालूम हुई तो आइए
[28:23]जनाब सैयद है कि जाए दिल्ली इस पर चलते हैं या सैयद
[28:29]अब हां यार रहरा अ कि आप कौन हैं ने कहा मिनिषा
[28:37]ने कहा मिल है कि हर चीज की निशानी होती है आपके
[28:41]इंसान है कि आमिर होने की निशानी क्या है अ इंसान है
[28:46]कहां मिल होने की निशानी यह है कि हम भी इंसान होने
[28:51]के हवाले से वॉल से सुनिएगा साहेब एहसास है साहेब जज्बात हैं
[28:54]कि हम इंसान होने के हवाले से शायद बिल्कुल भी हैं लेकिन
[28:59]जब भी जो यह हमारी जिंदगी में जनाब सैयद कहती हैं कि
[29:05]एहसास साथ का महिला या जज्बात कमर हिला आया तो एहसासात और
[29:07]जज्बात के धारे में बह गए थे है बल्कि हमने उन्हें साथ
[29:15]को जज्बात को कंट्रोल करके इंसानी एहसास और जज्बात के आंच पर
[29:20]लेकर गए थे को तैयार सैयद हमें समझ में नहीं आई बात
[29:23]का आप सुनो जब आंख यह झाल और आखिरी सच कहें या
[29:30]पहला आज के हैं यह सच कह रसूले इस्लाम जब वापस आए
[29:37]हज करके 9th मदीने पहुंचने के बाद जो है जनाब सैयद इसे
[29:40]गुफ्तगु कि अ एक अगस्त को करने के बाद जो है घंटों
[29:47]के दौरान यह कहा था बेटी सैयद लहरावै फातिमा अ कि इस
[29:53]मर्तबा युरिन राजू हुए हर साल की तरह नजर होते हैं और
[29:56]हर साल जो है जिब्रिल जो है मुझ पर जो है पूरे
[30:00]क़ुरआने मजीद को 1 मर्तबा तिलावत करते थे और इस मर्तबा दो
[30:06]मर्तबा कुरान की तिलावत की है जी का बाबा जान इसका राज़
[30:13]क्या है हमें जो अंदाजा हो गया है कि अब यह हमारा
[30:15]थ्री साल है अब हमारी रुखसती का जमाना आन पहुंचा जैसे ही
[30:22]रसूल ने के जो बात है जनाब सैयद आपको खबर दी अपनी
[30:28]इस दुनिया से रुखसत होने की कि जहां पर सैयदा बेटी हैं
[30:31]यहीं पर ही रोकेंगे अपने आपको कोई शक नहीं जो साहिब-ए-औलाद है
[30:36]वह जानते हैं अच्छी तरीके से कि क्या कर किसी के जो
[30:42]है बेटी भी हो और बेटियां भी हो तो बेटियां जो है
[30:46]बाप की निष्पक्ष ज्यादा दिल दुखाती हैं की बेटी भी दुख आते
[30:52]हैं लेकिन इतना नहीं आ कि जितनी सफीक बेटियां होती हैं नरमदिल
[30:56]होती है नर्म घोषाल रखती है बाप की निस्बत बेटे नहीं रखते
[31:00]हैं जरा सी भी जो है कोई जो है वह विचलित हो
[31:05]जाएं बात की जिंदगी में कोई तकलीफ हो तो बेटियां जो है
[31:10]फौरन जो है उदास हो जाती हैं घबरा जाती हैं हैं और
[31:12]आगे बढ़कर जो कि हेल्प करने की कोशिश करती हैं जनाब सैयद
[31:16]या बेटी का उनवान है इंसान होने के हवाले से लेकिन यह
[31:23]बेटी हैं बात की और बाप ने खबर दी है अपने इस
[31:24]दुनिया से जाने की थी हैं तो इस बेटी के मान से
[31:31]साहिब एहसास है अपने बाप की निस्बत फौरन गिरिया करना शुरू किया
[31:38]है है जैसे ही क्रिया करना शुरू किया रसूले इस्लाम जो है
[31:42]देखने लगे खाए बैठी चिड़िया क्यों कर रही हो ए हवा आपने
[31:48]जाने की खबर दिए फौरन जो है रसूले इस्लाम ने खबर और
[31:56]दी कयास सैयदना तिरिया मत करो इस दुनिया से जो सबसे पहले
[31:59]मुझसे आकर मिलेगा वह तुम्हारी जात है हां बाबू तुम्हारी जात है
[32:08]तुम जो है सबसे पहले आकर मिलोगी जैसे ही यह खबर दी
[32:13]है जनाब सैयद खुश हो गई थी एक सवाल कि वह गिरिया
[32:19]क्या था और यह मुस्कराहट और तबस्सुम कैसा है है याद रखिएगा
[32:26]वह जो कह दिया था वह साथ और जज्बात कि जो इंसान
[32:30]की जात के अंदर मौजूद है ज्यादा जज्बाती हो गई ऐसा साथ
[32:36]लेकिन इन्हें साथ को कंट्रोल कैसे किया जैसी जनाबे रसूले इस्लाम ने
[32:40]खबर दी कि बेटी सदा तुम सबसे पहले आकर मिलोगी इसको जो
[32:45]यह कबूल किया यकीन की मंजिल पर आकर यादव ज़रिए को तब्दील
[32:51]किया तबस्सुम में अक्ल के जरिए से कंट्रोल किया है साथ-साथ को
[32:54]ऐसे मामले पर एक इंसान उसे कहा जाता है कि वाहन जो
[32:59]क्या यह इंसान इंसान हैं काम मिल है यह सैयदा है कि
[33:04]जो है कि इंसान है कारगिल की सूरत में है क्यों इसलिए
[33:08]खेल के जरिए से एहसासात को कंट्रोल किया सलाह बजे मोहम्मद वाले
[33:13]मोहम्मद कर दो हुआ है कि यह एक मिसाल कि अगर जनाब
[33:23]सैयद आपको देखना मकसूद है विमान और हमारे साले के आईने में
[33:26]तो इंसान एक काम मिल की सूरत दी जाए और फिर इंसान
[33:31]की डेफिनेशन बयान की जांच और कमाल की डेफिनेशन बहन की जाए
[33:36]और फिर मिसाल देकर जो है टेली किया जाए के बा खन
[33:37]जनाब सैयद जो है और यह स्थान पर है या नहीं और
[33:41]यह मसाले पर है यह एक मिसाल यह बेटी होने के हवाले
[33:48]से लेकिन अब आइए दूसरी जानिब कि जहां-जहां भी रही हैं कि
[33:53]आमिर खन मोमिन की निस्बत लेकिन जो है याद रखें और जानेमन
[33:58]मैं और आप सब जानते हैं हमारी अपनी इसी दुनिया के अंदर
[34:03]तो क्या अगर जो है शहर पर आंच आए एप्स चाहे जो
[34:06]घर के अंदर कितना ही बड़ा क्यों न हो बाहर से अगर
[34:11]कोई आफत आ जाए शहर के ऊपर तो जहां सबसे पहले निकलती
[34:16]लड़ने के लिए कि यह तबीयत में है इसकी दिखा करती है
[34:19]डिफेंस करती है और जनाब सैयद अब जाओ जाएं अमीरुल मोमेनिन के
[34:27]लिए सेहत और जब है जनाब है अमीरुल मोमिनीन को स्वास्थय हुए
[34:34]दो घर से जो है ले जाया जाने लगा तो फौरन जो
[34:39]है जज्बाती हो गई एहसास आती हुई क्या अली को कहां लेकर
[34:41]जा रहे हो जब सारा अली को कहां लेकर जा रहे हो
[34:46]यह जो एहसास है जैसे बात है इंसान की जात के अंदर
[34:51]मौजूद है जहां होने के हवाले से जब जो है यह सा
[34:55]साथ घुम भरना शुरू हुए जज्बात उबरना शुरू हुए अब यहां पर
[34:58]जो है शायद आपको जो कह ऑब्जेक्ट कमाल इंसानी पर देखना मकसूद
[35:03]है वह कब नजर आया जैसे जनाब सैयद आप बाहर आई और
[35:07]यह कहती हुई बाहर आई कि मैं जो है अपने बालों को
[35:08]परेशान करूंगी और वह बद्दुआ करूंगी के जनावे सलमान ने यह खबर
[35:17]दी मौला-ए-कायनात को कि जो है यह मसाला हो चुका है यह
[35:19]मोह मिला है हमलों में नींद जो है चलावे सलमान से कहा
[35:24]कहो जाकर जनाब सैयद इसे के अली ने यह कहा है क्या
[35:29]कर इस्लाम का दिखना चाहिए रसूल की रिसालत की बात चाहिए तो
[35:32]फिर जो कि आप वापिस पलट जाएं जनाब सैयद ने क्या किया
[35:38]उस वक्त जो है जज्बात को कंट्रोल किया अपनी अक्ल के जरिए
[35:41]से वहां कल क्या थी कब विलायत की फ़रमांबरदारी अ कि यह
[35:47]विलायत की फ़रमांबरदारी जो है अक्ल की निशानी है और उत्साह कल
[35:53]के जरिए से कंट्रोल किया आपने जज्बात को अपने एहसास साथ को
[35:56]यह दो मिसाले अब आइए जो क्या है बेटी होने के हवाले
[36:02]से सुन लिया जायजा होने के हवाले से सुन लिया तो आइए
[36:07]देखते हैं इंसानियत का इंसानियत का मिल जना वे सैयदना की सूरत
[36:10]में बौर जैन सामने कामिल इंसानियत और आंच पर दिखाई देती है
[36:16]वह क्या है बच्चे भी हैं आपके मां है आप बच्चों की
[36:18]निस्बत क्यों हम और आप एनालाइज नहीं करते हैं कि बच्चे हैं
[36:25]हसन है मौजूद है रसूले इस्लाम तस्वीर फल आते हैं घर पर
[36:31]और घर पर तस्वीर जब लाइक मर्तबा तो देखा कि जो है
[36:32]बच्चे जो हैं मौजूद इमाम हसन मौजूद हैं इमाम हुसैन मौजूद हैं
[36:39]जैसे जो है नाना को देखा इमामे हसन ने जो है वो
[36:46]कहना शुरू किया ना जान हमें प्यास लगी है दिन आना-जाना में
[36:49]प्यास लगी है वह फौरन जो है रसूले इस्लाम जो है सैनिक
[36:54]खाना बजे बकरियां बंधी हुई थी मीणा वहां गए एक हिस्सा लिया
[36:57]1000 लिया है कृपया लिया और जगह है दूध को जोड़ दो
[37:02]होना शुरू किया और फोरम जाए हसन को पिलाना शुरू करना चाहते
[37:05]थे कि इमामे हुसैन ने कहा ना जान हमें भी प्यास लगी
[37:11]है दो कि हमें भी प्यास लगी है तो कहा कि जो
[37:15]है अगर तुम्हें प्यास लगी है तो ठीक है पहले इस ने
[37:19]मांगा है लिया है इसे फैलाएंगे बाद में तुम्हें जनाब सैयद दूर
[37:22]से देख रही है फौरन नजदीक आती हैं और नजदीक आने के
[37:29]बाद कहती हैं बाबा जान कि इस छोटे हमारे बेटे ने हुसैन
[37:33]ने क्या कुसूर किया है आप उन्हें चलाए जा रहे हैं इसे
[37:35]क्योंकि पिलाते हैं अच्छा यह जो कहां शिकायत की इसका मतलब क्या
[37:43]हुआ अगर सोचे थोड़ा सा जब हमारे और आपके जो बच्चे होते
[37:46]हैं बड़े बच्चे होते हैं छोटे बच्चे होते हैं खुशी तौर पर
[37:51]मां को छोटे बच्चे से ज्यादा ओलोंद होती है कि यह सात
[37:56]है जज्बात है एक बड़े बच्चे की निस्बत भी तकलीफ होती है
[37:59]लेकिन छोटे बच्चों की निष्पक्ष ज्यादा और सबसे छोटा होता है उसे
[38:06]ज्यादा होती है ताण इसे क्यों नहीं पिला रहे हैं आप यह
[38:08]जज्बात और ऐसा साथ लेकिन रसूले इस्लाम का जवाब सुनकर खामोश हो
[38:15]गई वह असलम का जवाब किया था कि बेटी सैयद आण सबसे
[38:21]पहले जिसने मांगा था उसका हक पहले है कि हुसैन ने बाद
[38:26]में तलब किया है यह सुनकर खामोश हो गई क्यों खामोश हो
[38:32]गई का अक्ल ने इशारा किया का त्यौहार पर खामोशी का मकान
[38:34]है इसलिए कि वह तुम्हारे जज्बात थे और ऐसा साथ और यह
[38:39]जो रसूले इस्लाम फरमा रहे हैं यह कल का तकाजा है या
[38:40]जाखल के जरिए से ऐसा साथ को कंट्रोल करो तो कि चढ़ावे
[38:48]सैयदना ने आप अपने जो है ऐसा साथ को कंट्रोल किया इस
[38:51]तरह से यह तीन मिसाइलें मिसालें बहुत ज्यादा यूज तारीख के अंदर
[38:57]जो भरी हुई है मिसाइल है यह हमारे लिए का आईना है
[39:02]हमारे लिए एक नमूना है कि जिस को देखकर जगह मैं और
[39:03]आप जगह है अपने आप को कंट्रोल कर सकते हैं कि आज
[39:09]मैं कहां हमने के जलावे सैयदा जो है उनको अगर देखना मकसूद
[39:13]तो वह गौर से सुनिए गा तो ईमान और हम अगले साल
[39:19]एक आईने में देखें क्या यह आईना इतना साफ है कि हम
[39:23]अपने आप को भी देख सकते हैं या नहीं आ है कि
[39:26]हमने इशारा किया आईने दो किस्म के आईना कभी उस पर लहर
[39:30]होती है और कभी साफ हो सफेद हो और हम जब अपना
[39:36]चेहरा देखते हैं आईने में कभी कभार तो हमें जो क्या है
[39:40]एक से ज्यादा जैसे दिखाई देती हैं और कभी एक ही चेहरा
[39:42]दिखाई देता है कहा यह हमारा एक चेहरा है यह एक से
[39:49]ज्यादा तक यह आपका अपना अंदर है कि जो बतलाएगा कि आपका
[39:51]एक चेहरा है या आपके दो चेहरे हैं या दो से ज्यादा
[39:57]बस जानेमन मना मेला साल यह निंजा करीना कुनसा वह मोमिन फल
[40:04]अनोख्या नव हातम तैयबा और उसके बाद जो है बिना किसी फास्ट
[40:07]लेकर ख़ुदा वंदे आलम दूसरी चीज का बीज ऐलान कर रहा है
[40:12]कछुए विमान लेकर आएगा और हम लेस वाले अंजाम देगा हयाते तय्यबा
[40:15]तो दूंगा मैं लेकिन इस दुनिया के अंदर जो भी अमल उसने
[40:20]अंजाम दिया है उसकी जहां दो बराबर बल्कि उससे भी ज्यादा दूंगा
[40:26]वजन अजीम ने हमें ज रहा हूं व्यास ने मां का अनुज्ञा
[40:28]मलूनी सुपरलेटिव डिग्री इस्तेमाल किए ख़ुदा वंदे आलम ना रवि जापान में
[40:35]का एक आम ऑफिस जाऊं दोगे तो दो बराबर नहीं तीन बराबर
[40:38]नहीं कहीं ज्यादा दूंगा व्यास ने मां का नजारा लंबा मलून पर
[40:44]जनाब सैयद कौन जनाब सैयद आले जो क्या विमान की बुनियाद के
[40:47]ऊपर हम लेस वाले की इमारत को तांबीर करना शुरू किया तो
[40:52]किस तरह से शुरू किया रसूले इस्लाम की पैरवी की विलायत और
[40:54]नौवत और इस हालत को देखकर और अमीरूल मोमिनीन की जो है
[41:00]वह पैरवी की विलायत को देखकर और विलायत के साथ जो कि
[41:04]यह मांग की कि यहां तक के जो अपनी जान जो है
[41:09]इस विलायत के आगे जो क्या है फ़िदा करती है और हमें
[41:11]किसी भ्रम में ना रुलाए सिवाय का महल बैड के अय्यामे फटीमिया
[41:18]भी उतरे हैं उसकी महक अब तक मौजूद है दो रिवायत आपकी
[41:22]सचमुच करना चाहेंगे मुसाब होने के लिए कि एक रिवायत रसूले इस्लाम
[41:27]के रह लें इससे पहले कि और एक रिवायत जो कि रसूले
[41:33]इस्लाम के हित की बात की तरह हिलने से पहले चंद दिन
[41:34]पहले अल्लाह मेडिसिन फरमाते हैं दो से तीन दिन रह गए थे
[41:40]रैयत को चलाएं सैयदना की तरह न के जनावे रसूले इस्लाम के
[41:43]रहना जैसा होना चाहती थी 1 मर्तबा रसूले इस्लाम को देखा गया
[41:48]अल्लाह मजलिस फरमाते हैं रिवायत को नकल करते हैं 10,000 गिरिया करते
[41:52]हुए देखा गया थे जिन्होंने देखा उनमें से एक हफ्ता आगे बढ़ता
[41:56]है या रसूलल्लाह आ तिरिया का राज़ क्या है रसूले इस्लाम ने
[42:03]फ़रमाया शुरू किया गया चीज सवाल करने वाले जो कुछ हम देख
[42:09]रहे हैं तुम नहीं देख रहे जो कुछ हम जानते हैं तुम
[42:11]नहीं जानते या रसूलल्लाह आप यह देख रहे हैं कि हमें नजर
[42:16]नहीं आ रहा आप क्या एहसास कर रहे हैं कि जो हम
[42:20]एहसास नहीं कर पा रहे हैं हमारी आंखें बंद होगी नहीं और
[42:24]जनाब सैयद आज मेरी बेटी नेहरा के ऊपर जो है आप हाथों
[42:30]के पहाड़ पहाड़ टूटेंगे और जब मुसीबतों पर मुसीबतें आएंगी तो यह
[42:36]मेरी उम्मत के दरमियान जाएगी मदद तलब करने के लिए कि मेरी
[42:39]मदद करो लेकिन कोई भी मदद करने को तैयार नहीं होगा जब
[42:44]कोई मदद करने को तैयार नहीं होगा तो दोनों हाथों को जो
[42:46]है ऊपर करके जगह आए मुझे पुकारेगी यह अब बता दूं कि
[42:52]नहीं है वह बजाना मेरी मदद कीजिए इंजेक्शन के दरमियान मुझे अ
[42:59]मानव तन छोड़कर गए थे आपकी अमानत की पासदारी नहीं कर सके
[43:03]बस यह रिवायत जहां तमाम हुई रसूले इस्लाम की रहे रद्द हो
[43:09]चुकी रहमत के बाद चेकअप बासे को मी अलैहिर्रहमा अपनी किताब है
[43:12]तो लहसुन में ख़ुदा वंदे आलम हमें किसी हमने रुलाए शिवाय का
[43:18]महल खेत के बैतूल एहसान मेरे भाई अत को कोट करते हैं
[43:24]कि रसूले इस्लाम के रह अलग हो चुकी रवि कहता है कि
[43:27]मैंने 1 मर्तबा देखा बीवी पिज्जा को घर से बाहर निकल रही
[43:32]है किसी इजाफा का हाथ कहां में कई तरह की कैफियत कैसी
[43:39]थी का कमर खरीदा हाथों में फालूदा तारी रवि कहते है कि
[43:43]मैंने अंदर यह कि यहां टाइप फैजाबाद जरा यह तो बतलाओ यह
[43:49]सही वह कौन है कपिल जाने सुनते ही मुझे खामोश करवा दिया
[43:57]करो अक्षय खामोश हो जाए यह रसूल की बेटी सैयद जहरा है
[44:00]जैसे ही सखन हम सुना रानी कह जब मैंने सब्सक्राइब जरुर क्रिया
[44:09]थी पर यह कहना शुरू किया जाए एक सवाल का जवाब दे
[44:15]दो हाय रे जवानी में यह भी कह [प्रशंसा] दिया कि अगर
[44:21]जानना चाहते हो तो थोड़ा सब्र से काम लो बीवी को सैयद
[44:29]बाबा की मदद लेकर जा रही हूं जब मर्जी पड़ेगी तो लेना
[44:36]अब जब वहां पर गई है घृणा करना शुरू किया और मरसिया
[44:48]पढ़ना शुरू किया हवा ना जाने के भ्रम मुझ मुसीबतों हों और
[44:55]सूखे यह कि जो रोशनपुरा टूटते तारीख रातों में तब्दील हो जाते
[45:02]सुन अधेड लवणासुर बदलल यह मे सिर न लिए अलार्म दो मेरे
[45:18]कुछ सवालों में उलझी नाश्ता लगवाया मंत्र है अदरवाइज हमारे इस खलील
[45:25]इबादत को कबूल फरमा अ हुआ है कि अ दादा मालिश वाले
[45:32]हवा चलने की तौफीक अता फरमा अ कि हमारे गुनाहों की मगफिरत
[45:40]फरमा हम लेस वाले हवा चलने की तौफीक अता फरमा आम बात
[45:42]है यह जो मरहूम चुके हैं उनकी मक्का दत्त शर्मा व कि
[45:46]उस अर्जुन के साले सब के हवाले से भी कहा गया था
[45:50]पर यह उनके गुनाह ने कबीर और सभी रखो माफ फरमा उन्हें
[45:55]मोहम्मद वाले मोहम्मद के साथ मशहूर फरमा है 1234 है मिलने के
[46:00]दरजाट बुलंद हैं स्वाद है मिलनक को सौंप दी है कर्बला के
[46:02]साथ मशहूर हर माह बाद यह जो हत्या रात के मुताबिक अनियन
[46:08]हजारा से मुशर्रफ वर्मा इमामे ज़माना किस जुर्म में ताजी लता वर्मा
[46:12]हमें उनके अनुसार में शामिल पर माफ व बना तप बल मिला
[46:18]इंद्रकांत समीर अली अ
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