Up next
5 Views · 23/07/22
3 Views · 23/07/24
5 Views · 23/07/25
10 Views · 25/08/03
Seerat Imam Baqir| H.I. Rooh-ul-lah Rizvi
0
0
35 Views·
24/07/29
In
Lectures
Record date: 25 June 2023 - سیرت امام محمد باقر
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
For more details visit:
📡 www.almehdies.com
🖥 www.facebook.com/aLmehdies313
🎥 www.youtube.com/almehdies
🎥 www.shiatv.net/user/Al_Mahdi_Edu
Show more
Transcript
[0:15]बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन अल्जी ला ला लायल मुत सु
[0:39]सलातो सलाम आला अशरफिया मुरसलीन हबीब ना हबीब इला आलमीन अल कासम
[0:56]मोहम्मद अना र हीरा लायमा बकला इमाम जमाने ना रूही लमी राबे
[1:19]मकदम फिदा ला तबारक ताला फी किताब करीम बिल्ला मिन शैतान रजी
[1:28]बिस्मिल्ला र रहीम व जालना मयना बना ना रात काम सलाते ता
[1:45]जकात व कानना आबदीन दरूद भेजे मोहम्मद ले मोहम्मद पर खुदा आलम
[1:57]का शुक्र उसका एहसान उसने हमें यह तौफीक अता की कि हम
[2:03]मुख्तलिफ मुनासिब तों से मुख्तलिफ फुर्स तों से इस्तफा करते हुए अपने
[2:07]आप को अहले बैत अ सलातो सलाम की तालीमाबाद इमाम मोहम्मद बाकर
[2:22]अल सलातो वसलाम है आप तमाम मोमिनीन की खिदमत में और आपकी
[2:29]जानिब से हम सब की जानिब से इमाम जमान अला ताला फरज
[2:31]शरीफ की खिदमत में तसली और ताजि अत पेश करते हैं चंद
[2:37]राइज इमाम अल सलातो सलाम की जिंदगी के हवाले से अगर हम
[2:43]अपने उमू मन जो हमारा रवैया होता है हम अपनी जिंदगी के
[2:48]अंदर देख रहे होते हैं मुख्तलिफ आइमा अ सलातो सलाम का जिक्र
[2:50]आ रहा होता है उनकी सीरत को बयान किया जा रहा होता
[2:54]है जब हम उनकी इजतिमा उनकी सियासी सीरत को देखते हैं अगर
[3:00]हम गौर करें कि किन आइमा को जिक्र किया जाता है तो
[3:03]हम देखते हैं कि रसूल अल्लाह रसूल अल्लाह के बाद अमीर मोमिनीन
[3:06]अमीर मोमिनीन के बाद इमाम हसन और फिर इमाम हुसैन अल सलातो
[3:10]वस्सलाम पंजतन अल सलाम अ सलातो वस्सलाम की जिंदगी के बाद हमें
[3:17]इजतिमा और सियासी किरदार के हवाले से हमारे यहां अमूमन चीजें बयान
[3:21]नहीं हो पाती है अलबत्ता उसकी वजू हात भी है यानी ऐसा
[3:26]नहीं है कि सिर्फ हमारा कुसूर है नहीं तारीख के ऐसे मसाइल
[3:28]ऐसे हादसात ऐसे वाकत पेश आए कि जिसकी वजह से यह चीजें
[3:34]मनन हम तक नहीं पहुंच सकती थी यानी उनकी हो वियत ऐसी
[3:39]थी उनकी हकीकत ऐसी थी कि वह बिल्कुल उस तरह जिस तरह
[3:44]पहले आइमा की निस्बत हम तक बातें पहुंची बाकी बाद वाले आमा
[3:47]की निस्बत अब तक नहीं पहुंच सकती इंशाल्लाह अगर फुर्सत हुई बयान
[3:51]होगा एक वजह क्या थी कि इतना सख्त तरीन दौर कर्बला के
[3:56]बाद हमें नजर आता है कि आमा सलातो सलाम की जो स्टी
[4:01]थी जो तरीके का था उसके अंदर हमें तब्दीली वाज तौर पर
[4:06]नजर आती है गर ऐसा नहीं था कि हमेशा पहले से हमेशा
[4:08]तमाम आमा म अर मोमन की तमाम जिंदगी इमाम हसन सलाम इमाम
[4:14]हुसैन सलाम या रसूल अल्लाह के दौर से इमाम हुसैन के इस
[4:19]कयाम तक एक जैसे हालात थे नहीं खुद हम आमा की जिंदगी
[4:21]के अंदर देखे कि जहां हालात तब्दील होते हैं वहा आमा सलाम
[4:26]का काम करने का तरीके का भी बदल जाता है हद वही
[4:30]होता है इमाम का यानी बा दफा हमारे जहन में आता है
[4:32]हमारे शुभत इजाद किए जाते हैं के मिसाल के तौर पर आमा
[4:38]सला सलाम अगर हमें यानी मैं अपनी जिंदगी को देखूं तो मुझे
[4:43]अगर बहुत ज्यादा खौफ होता है मैं इस्माई काम नहीं करना चाहता
[4:46]मैं सियासी काम नहीं करना चाहता तो मैं फौरन जो है वह
[4:50]इमाम हसन सलाम की मिसाल देना शुरू कर देता हूं उसके बरक्स
[4:54]अगर मैं सब जगह मसलन एक ही रविश के ऊपर कारबन होना
[4:59]चाहता हूं मेरा मिजाज जैसा है कि नहीं बस कयाम होना चाहिए
[5:01]और ये तो मैं हमेशा इमाम हुसैन अ सलातो वसलाम की जिंदगी
[5:06]का सहारा ले रहा होता हूं लेकिन दरह कीक मैं खुद कंफ्यूज
[5:12]होता हूं और मैं अपने अमल को जस्टिफाई करने के लिए आइमा
[5:13]अल सलातो वसलाम का सहारा ले रहा होता हूं ना यह कि
[5:17]हम उनकी जिंदगी को सीखना चाहते हैं जबकि हम अगर अपने तकादा
[5:23]की जानिब आए जब हम अपने नजरिया की जानिब आए जो हमारे
[5:24]उसूल हैं उसूल दीन है हमारे उसके अंदर यह बात मुसल्लम है
[5:30]यह बात त है कि इन आमा सलातो सलाम के दरमियान किसी
[5:35]किस्म का कोई फर्क नहीं है कु नर वाहिद इन सबकी हकीकत
[5:43]एक है फर्क नहीं है मौला अलीला सलाम इमाम हसन सलाम इमाम
[5:46]हुसैन सला सलाम हो इमाम बाकर हो इमाम सादिक हो कोई भी
[5:50]हो हर इमाम उसकी जो जिम्मेदारी है व उसको अंजाम दे रहा
[5:57]है उस हद की जाब लोगों की हिदायत कर रहा है जिसके
[6:03]लिए अंबिया सलातो सलाम को मूस किया गया जिसके लिए इन आइमा
[6:05]सलातो सलाम को भेजा गया इनको इमाम करार दिया गया कि वह
[6:10]अल्लाह के अमर से हमारी हिदायत करें बस मसला कहां आ रहा
[6:17]है मसला द हकीकत जब हम अपना य उसूल यह जो हमारा
[6:21]उसूल अकाय है यह जो हमारा उसूल दन है यह जो हमारा
[6:22]नजरिया हमारा अकीदा है कि यह सब के सब एक हकीकत है
[6:26]इनके दरमियान किसी किस्म का फर्क नहीं है हम जब भी किसी
[6:30]इमाम की सीरत का मुताल करना चाहे तो हमारी जिम्मेदारी बनती है
[6:33]कि पहले हम अपने उसूल दन को समझे और उसके बाद फरू
[6:38]दन को उन उसूल दन के मुताबिक समझने की कोशिश करें क्योंकि
[6:44]उसूल क्या होते हैं उसूल बुनियाद होते हैं उसूल बेस होते हैं
[6:47]उसूल किसी भी इमारत की जो बुनियाद होती है जिस तरह उसूल
[6:52]दन के अंदर वैसी हैसियत रखते हैं अगर हम उसूल को नहीं
[6:58]समझेंगे तो हम फुआत के अंदर गड़बड़ कर जाएंगे सबसे पहले हमारे
[7:02]लिए यह चीज जानना जरूरी है कि हमारे उसूल हमारे अकाद हमारे
[7:08]लिए वाज होने चाहिए दलाल की बुनियाद के ऊपर दलील की बुनियाद
[7:12]के ऊपर कुरान हदीस के बुनियाद के ऊपर अकल की बुनियाद के
[7:17]ऊपर हमारे अकाद हमारे मोहकम होने चाहिए जब यह मोहकम होंगे मुस्तहकम
[7:19]होंगे तो अब हम फुआत की तरफ आगे बढ़ सकेंगे हम आ
[7:23]की सीरत की सही तहलील कर सकेंगे जब हम की जिंदगी के
[7:29]अंदर देखते हैं तो हमें अगर दिक्कत के साथ ना देखें तो
[7:32]हमें ऐसा लगता है कि म इमाम हुसैन अ सलातो सलाम की
[7:35]जिंदगी से पहले एक अलग दन है कयाम कर्बला के बाद आशूरा
[7:39]के बाद एक अलग दिन है यानी दन से मुराद इरादी जिंदगी
[7:44]नहीं बल्कि इमाई काम सियासी कामों के अंदर आमा का एक अलग
[7:46]रवैया है इमाम हुसैन के कयाम से पहले रोज आशूरा से पहले
[7:50]और रोज आशूरा के बाद तमाम आमा की एक स्टेज और व
[7:56]बिल्कुल उससे बरक्स है लेकिन अगर हम तहलील करें तो हमें नजर
[7:58]आता है नहीं ऐसा नहीं है खुद इब्तिदा आमा के अद्वार के
[8:04]अंदर यानी पंजतन पाक अल सलाम के अद्वार के अंदर हमें मुख्तलिफ
[8:06]हालात नजर आते हैं अमीर मोमिनीन की जिंदगी के अंदर हमें मुख्तलिफ
[8:13]हालात नजर आते हैं आप देखि शुरू के 25 साल अमीर मोमिनीन
[8:14]की जिंदगी के यानी रसूल अल्लाह की रेहलत के बाद से 25
[8:18]साल अमीर मोमिनीन के क्या तरीके का है काम करने का जब
[8:23]अमीर मोमिनीन की हुकूमत का दौर आता है तकरीबन चार साल कुछ
[8:26]महीने की हुकूमत है न महीने की हुकूमत है ये और उसके
[8:30]बाद फर इमाम हसन अ सलातो वसलाम की हुकूमत के चंद माह
[8:34]उसके बाद फिर इमाम हसन अल सलातो वसलाम की सुल से लेकर
[8:36]सैद शोहदा अ सलातो सलाम के कयाम यानी 28 रजब का वो
[8:41]सफर का आगाज यहां तक हमें अलग-अलग चीजें नजर आ रही है
[8:46]हद एक है मकसद एक है क्योंकि हालात बदल रहे हैं लिहाजा
[8:48]तरीके का बदल रहा है और यही तरीका यही रविश हमें बाकी
[8:54]आइमा के अद्वार में भी नजर आती है इंशाल्लाह चंद बातें इमाम
[9:00]बाकला सलाम की जिंदगी से मुतालिक इसके हवाले से आपको बयान आपके
[9:04]सामने बयान होंगी खुद अमीर मोमिनीन की जिंदगी की मैंने मिसाल दी
[9:10]कि एक ही इमाम की जिंदगी है एक ही इमामत इमाम की
[9:15]इमामत का दौर है 25 साल एक खास रवैया 25 साल में
[9:20]भी तीनों खुलाफा के अद्वार के अंदर एक अलग रवैया है यानी
[9:23]खलीफा अव्वल की हुकूमत है अमीर मोमिनीन का एक अलग रवैया खलीफा
[9:28]सवम की हुकूमत है अमीर मोमिनीन का एक अलग रवैया है क्यों
[9:31]क्योंकि हालात बदल रहे हैं हाकिम वक्त बदल रहा है उसके जो
[9:36]सियासी रविश है वो बदल रही है जब वो बदल रही है
[9:40]तो उसका असर मुसलमानों पर पड़ रहा है अब मुसलमानों की हिदायत
[9:42]के लिए अमीर मोमिनीन का वजीफा क्या बनता है कि वह उस
[9:46]रविश का सहारा ले जो इन मुसलमानों की उस दौर के अंदर
[9:51]हिदायत का सबब बन सके फिर अमीर मोमिनीन की हुकूमत आती है
[9:53]यह जो चार साल न महीने की हुकूमत है इसके अंदर इब्तिदा
[9:58]दो साल तीन जंगे तीन जंगे इब्तिदा दो सालों के अंदर जो
[10:01]हम सुनते अमीर मोमिनीन की पूरी जिंदगी तीन जंग में गुजर गई
[10:06]या हुकूमत की जिंदगी तीन जंग में गुजर गई नहीं इब्तिदा दो
[10:11]साल यानी दो साल न महीने अभी इमाम अ सला सलाम की
[10:12]जो हुकूमत है उसके अंदर जंगे नहीं है बाकायदा लेकिन उसके हालात
[10:16]भी बहुत पेचीदा है वहां पर अमीर मोमिनीन की स्टीर स बात
[10:18]है उस वक्त के उस हालात के मुताबिक है इमाम हसन सलाम
[10:23]के छ महीने हुकूमत है उसके बाद इमाम जंग का आगाज करते
[10:29]हैं लेकिन हालात बदल जाते हैं इम जंग को सुल के अंदर
[10:30]बदल देते हैं अब यह सुल 20 साल बाकी रहती है और
[10:34]फिर जब जमीना फराम होता है इन 20 सालों के अंदर इमाम
[10:39]हसन और इमाम हुसैन अल सलातो वसलाम ऐसे काम करते हैं आमागी
[10:45]करते हैं अपने शियों को मुनम करते हैं लोगों को आमादा करते
[10:47]हैं बनूमैया के चेहरे को आश का करते हैं नतीजा क्या निकलता
[10:51]है कि कयाम कर्बला वुजूद के अंदर आता है यह कयाम कर्बला
[10:54]इमाम हसन के दौर के अंदर वजूद में नहीं आ सकता था
[10:58]अब जब ब वाक कर्बला रोनु मा होता है और लोग देखते
[11:04]हैं कि वह फास फजिर शख्स जो मसनद रसूल अल्लाह पर बैठा
[11:10]हुआ है जब रसूल अल्लाह के नवासे को रसूल अल्लाह के खानदान
[11:13]को इतना जुल्म इतने जुल्म सितम के साथ कत्ल कर देता है
[11:18]शहीद कर देता है और फिर असीर करता है तो लोगों के
[11:23]साथ क्या करेगा बाकी आम उम्मत के साथ क्या करेगा लि अब
[11:25]खौफ की फिजा बाज इलाकों के अंदर खौफ की फिजा आ जाती
[11:31]है आप देखि मदीने के अंदर क्या हुआ वाक हिरा यानी ऐसे
[11:37]मजलि में है इंसान तसव्वुर नहीं कर सकता मकाल की किताबों के
[11:41]अंदर देखें कर्बला के बाद की बात है यह यजीदी लश्कर मदीने
[11:46]के अंदर आता है रसूल अल्लाह के हरम को अस्तबल करार देता
[11:49]है अपना और उसके बाद सिर्फ जो बच्चों के साथ जनाया की
[11:55]है जुल्म सितम कि है कि बाज मकाल के अर बाकायदा बयान
[11:59]हुआ है कि ये छोटे-छोटे कमसन बच्चों को उछाल थे और नीचे
[12:01]नेजा रखते थे बच्चा आके उसके ऊपर गिरता था उनकी माओं के
[12:07]सामने इन बच्चों को दीवारों पर मार दिया करते थे यानी सोचे
[12:10]तसव्वुर करें और कई संगीन वाकया जो हम बयान नहीं कर सकते
[12:18]वो मदीने के अंदर पेश आते हैं अब यहां पर इमाम की
[12:25]क्या जिम्मेदारी है यह आवाम जो जर्रा बराबर मुकाम नहीं कर सकती
[12:28]यह आवाम जो खौफ का शिकार हो चुकी है यह खवास जो
[12:32]एक अपनी आराम दे जिंदगी को बर्बाद नहीं होना चाहते नहीं देखना
[12:38]चाहते कि यह इन अयाशियां से निकल आए अब इमाम जैनल आबदीन
[12:42]अ सलातो सलाम व जमीना फराम करते हैं कि इन्ह दोबारा फितरत
[12:45]की तरफ पलटा है हमारे पास रिवायत के अंदर है कि नासन
[12:51]इला सला इमाम हुसैन अ सलातो सलाम के बाद तमाम लोग मुर्ताद
[12:57]हो गए थे सिवाय तीन अफराद के या ऐसा नहीं था कि
[13:04]नमाज पढ़ना छोड़ दी थी रोजा रखना छोड़ दिया था कुरान पढ़ना
[13:08]छोड़ दिया था खाना काबा को छोड़ दिया था नहीं तमाम इबादत
[13:09]अंजाम दी जा रही थी लेकिन इमाम मासूम क्या कह रहे मुरत
[13:13]हो गए थे यानी क्या यानी रू दन से दूर हो गए
[13:16]थे इमाम वक्त से दूर हो गए थे और फिर सुना फिर
[13:21]आहिस्ता आस्ता इमाम जबन की तबली की वजह से उनके जिहाद के
[13:27]सबब अब यहां पर कयाम सेफ नहीं किया जा सकता क्यों क्योंकि
[13:29]लोग आमादा नहीं है यहां पर वो काम करना है जिसको दुश्मन
[13:33]अभी बर्बाद कर रहा है उस चीज को बचाना है जिसको दुश्मन
[13:38]खत्म करना चाहता है दुश्मन खौफ इजाद करना चाहता है इमाम ने
[13:40]एक ऐसा काम करना है कि खौफ इजाद ना हो लोगों के
[13:43]अंदर ऐसे अफराद आए यानी मिसाल के तौर पर गुलामों को खरीदा
[13:48]जाता था उनकी तरबियत की जाती थी उनको माश के अंदर बवाने
[13:50]मुबल भेजा जाता था दुआओं के अंदर हम देखें कि कितना जहद
[13:56]के ऊपर इमाम अ सलातो सलाम की ताकीद है दुनिया से दूरी
[14:01]के ऊपर ताकीद है क्यों क्योंकि जो माशे का एलीट क्लास थी
[14:05]जो माश के खवास थे जो अपने आप को रसूल अल्लाह के
[14:06]असब समझते थे अपने आप को दीन के ठेकेदार समझते थे यह
[14:11]सब दुनिया परस्ती के अंदर गर्क हो चुके थे अब इमाम की
[14:16]जिम्मेदारी है कि इनको पहले यह बताए कि दुनिया की हकीकत क्या
[14:18]है दीन कहां ले जाना चाहता है उसके बाद ही ये कोई
[14:22]कुर्बानी दे सकेंगे जब तक इनके लिए वाज नहीं है दुनिया की
[14:27]अयाशियां में गर्क है तो अब यहां इनको दुनिया से दूर करना
[14:29]दरह कीक जिहाद का मिस्क है क्यों क्योंकि हुकूमत चाहती है कि
[14:34]ये इन्हीं अयाशियां के अंदर गर्क रहे इन्हे अपना वजीफे का एहसास
[14:36]ना हो इसी तरह हम देखते हैं कि इसी दौर के अंदर
[14:41]येय जिस तरह धमकाया गया जिस तरह लालच दी गई यानी खवास
[14:46]को लालच दी जाती जो करता धरता अफराद है माशे के उनको
[14:51]लालच दी जाती आवाम को के अंदर खौफ हिरास फैलाया जाता और
[14:53]नतीजे में ये दोनों तबकात खामोश हो जाते इसके साथ-साथ जो एक
[15:00]और बुनियादी काम बनूमैया ने किया वो तहमी है वो इनको जाहिल
[15:02]करार देना यानी आवाम के अंदर शऊर पैदा ना करना आज भी
[15:08]आप देखें अपने मुल्क के अंदर देख ले कई इलाके ऐसे हैं
[15:13]वहां पे प्रॉब्लम क्या है वहां पे जो उस जगह का सरदार
[15:17]है वडेरा है वो वहां प स्कूल नहीं बनने देगा मदरसा नहीं
[15:20]बनने देगा क्यों क्योंकि उसे पता है कि जब ये तालीम हासिल
[15:25]कर लेंगे जब इन्हें दीन पता लग जाएगा जब इन्हें दुनिया पता
[15:27]लग जाएगी तो ये अपने हुकूक की बात करेंगे इनको अपना हद
[15:32]नजर आएगा यह तो हम अपने पाकिस्तान में देख रहे हैं यह
[15:34]चीजें और यह नई नहीं है यह उस वक्त से यही हथियार
[15:39]वही है तरीके का अलग हो गए लेकिन उनवान उसके वही है
[15:43]डराया धमकाया जाता है गायब कर दिया जाता है कत्ल कर दिया
[15:48]जाता है जाहिल रखा जाता है लालच दी जाती है यही तरीके
[15:52]का है आज हम अपने माश के अंदर भी देख रहे हैं
[15:55]उस वक्त भी बनूमैया यही काम कर रहे थे क्या करते थे
[15:58]मसलन गलत अका एक तो पब्लिक के अंदर शर नाए आप देखें
[16:02]एक दौर के अंदर अदीस पर पाबंदी लगी एक दौर के अंदर
[16:04]तफसीर कुरान की तफसीर बयान नहीं हो सकती पाबंदी लग रही है
[16:10]क्या खौफ है य अगर तफसीर बयान होगी तो हकीकत तक पहुंचेंगे
[16:14]अब इस दौर के अंदर सलाम की जिम्मेदारी क्या लोगों के अंदर
[16:18]से खौफ खत्म करें लोगों से तलब दुनिया को खत्म करें लोगों
[16:23]के अंदर इम शर और आगाही पैदा करे लि देख जब बनूमैया
[16:30]क्या नजरिया लेकर आते हैं जो हम देखते हैं कि आज बाज
[16:34]मुसलमानों के अंदर बा दफा हमारी जबान में भी जारी होता हैई
[16:35]जो अल्लाह चाहता है वो करता है इससे मुराद क्या है कि
[16:39]मैं अपनी जिम्मेदारी को अंजाम ना दूं वहां पर यही हो रहा
[16:43]था जब्र का अकीदा लाया गया कहा गया कि भाई हम तो
[16:45]मजबूर है अल्लाह चाहता है तो हम अच्छे काम करते हैं अल्लाह
[16:49]चाहता है तो हम बुरे काम करते हैं तो हमारे हाथ में
[16:52]तो नहीं है कोई सवाल करे तो कहा तुम अल्लाह की कुदरत
[16:55]को चैलेंज कर रहे हो या अल्लाह तुम अल्लाह से हट केय
[16:56]कुदरत रखते हो नहीं ये तो आप सही समझ नहीं पा रहे
[17:00]सलाम ने इस अकी को या उसका रद किया सही अद को
[17:05]बयान किया अब यह काम बनया क्यों कर रहा था क्योंकि अपनी
[17:11]हुकूमत को जस्टिफाई करना था लोगों के अंदर यह बताना था कि
[17:13]देखो अल्ला ने हाकिम किसको बनाया हमें बनाया आप देखें दरबार यजीद
[17:20]के अंदर जब अहले बैत से व मुखातिब होता है तो क्या
[17:23]कहता है कि देखा अल्ला ने तुम्हारे साथ क्या किया लोगों के
[17:28]अंदर क्या इजाद कर रहा है क्या ये नजरिया पैदा कर रहा
[17:32]है कि हम तो कुछ नहीं कर रहे हर काम कौन करता
[17:36]है अल्लाह करता है अब अच्छा करें तो भी अल्लाह है बुरा
[17:39]करें तो भी अल्लाह है हमारा तो काम ही नहीं है ये
[17:43]जब्र का अकीदा आमा अ सलातो सलाम ने इसके मुकाबिल जिहाद किया
[17:45]क्यों क्योंकि अगर यह अकीदा लोगों के अंदर स आयत कर जाता
[17:50]तो बनूमैया के खिलाफ कोई बगावत मुमकिन नहीं थी वो लोगों को
[17:55]कहते थे कि जब हमें अल्लाह ने बना दिया तो तुम कौन
[17:59]होते हो हमारी मुखालफत करने वाले अब देखि जब हमें जिहाद की
[18:04]जब सही तारीफ हमारे समझ आ जाएगी तो हमें नजर आएगा कि
[18:05]आमा सलातो सलाम अपनी पूरी जिंदगी जिहाद कर रहे थे हम जा
[18:13]जामिया में क्या गवाही देते हैं जाम फला ह का जिहाद क्या
[18:16]आप सब के सब एक नहीं आप सब के सब अल्लाह की
[18:24]राह में जिहाद करने वाले हैं जैसा जिहाद करने का हक है
[18:27]मैं गवाही देता हूं कि आप जिहा अल्ला की राह में जैसा
[18:31]जिहाद करने का हक है तमाम की नित हम गवाही दे रहे
[18:34]हैं य दलील है तमाम जिहाद कर रहे लेकिन तलवार तो नहीं
[18:39]उठाई कर्बला के बाद हमें तलवार नजर नहीं आती यानी अब क्या
[18:44]कैसे हम इसको जमा करें जब हम देखते हैं तो हमें नजर
[18:49]आता है कि देखें जिहाद की तारीफ क्या है जिहाद का लवी
[18:52]माना है यानी क्या कोशिश जद्दो जहद जिहाद सबीला अगर ल तारीफ
[18:59]की जाए तो अल्लाह की राह में कोशिश अल्लाह की राह में
[19:01]जद्दोजहद एक जिहाद का फिक माना है वो क्या है कयाम ब
[19:08]सेफ हम कहते हैं मुजाहिद है यानी क्या कि यानी लड़ते हुए
[19:13]यानी शहीद कौन होता है फिक तबार से जो लड़ते हुए शहीद
[19:15]हो जाए अल्लाह की राह में जंग लड़ रहा है तलवार से
[19:18]गन से टैंक से जो भी है मैदान जंग के अंदर है
[19:22]कयाम ब सेफ जिसे कहते कहा जाता है जिसमें खून बहाया जाता
[19:24]है इसके अंदर कत्ल हो जाए ये शहीद है य अगर यह
[19:28]कत्ल कर रहा है यह मुजाहिद है लेकिन एक जिहाद की कुरानी
[19:36]तारीफ भी है देखिए फि के अंदर बहुत सारे खास मसाइल होते
[19:39]हैं जैसे हम जकात के मामलात के अंदर आते हैं हमारे यहां
[19:43]शुभ बयान भी किया जाता है कि भाई कुरान ने इतना जकात
[19:47]जकात जकात कहा जो शिया है ये तो जकात इतनी सी चीजों
[19:48]के ऊपर इन्होंने कर दिया और बाकी चीजों से यह फरार इख्तियार
[19:52]करते हैं नहीं कुरान के अंदर जकात का माना है माल अल्लाह
[19:56]की राह में खर्च करना चाहे वो वाजिब की हद तक हो
[19:58]चाहे वो मुस्ताहब उसके अंदर खुम्स भी आता है यानी फिक खुम्स
[20:01]भी आता है फिक जकात भी आती है उसके अंदर फिरा भी
[20:05]आ जाता है उसके अंदर सदका मुस्ताहब सदका भी आ जाते हैं
[20:10]ये सब चीजें कुरान की इस्तल के अंदर जकात है लेकिन फिक
[20:11]के अंदर इनके अलग-अलग अनावी है जकात एक खास चीज को कहते
[20:15]हैं यानी खास पैसा निकालने को कहते हैं खम से खास पैसा
[20:17]निकालने को कहते हैं फितर खास पैसा निकालने को कहते हैं सदका
[20:22]खास पैसा निकालने को कहते हैं इंफाक के खास तरीके का के
[20:25]खर्च करने को कहते हैं ये मुख्तलिफ अनावी है जब हम कुरान
[20:31]के अंदर आते कुरान के अंदर एक जिहाद का माना है अले
[20:34]बैत की जनरल [संगीत] तालीमाबाद है तो इमाम हुसैन अ सलातो सलाम
[20:48]के बाद तो आमा ने जिहाद नहीं किया जब जिहाद नहीं किया
[20:51]तो फिर हम कैसे गवाही दे रहे हैं क्याला और ये हम
[20:56]नहीं दे रहे इमाम मासूम गवाही दे रहे हम तो दोहरा रहे
[20:59]हैं इसका मतलब क्या है कि जिहाद की डेफिनेशन कुछ और है
[21:05]जिहाद की तारीफ कुछ और है और आइमा सलातो सलाम यह काम
[21:10]अंजाम दे रहे थे उसकी क्या दलील है वो भी आपके सामने
[21:14]बयान होगा ब जिहाद की तारीफ क्या जिहाद की तारीफ है अल्लाह
[21:17]की राह में कोशिश यह जो लगवी तारीफ लेकिन कौन सी कोशिश
[21:24]अल्लाह की राह में वो कोशिश कि जिससे अल्लाह के दुश्मनों को
[21:28]खतरा उनको नुकसान पहुंचे उनके हद मुकम्मल ना हो पाए उनके हद
[21:33]के अंदर रुकावटें खड़ी की जाए यह है जिहाद य हमें आइमा
[21:38]की जिंदगी के अंदर नजर आता है तमाम आइमा की जिंदगी के
[21:41]अंदर नजर आता है और तमाम आइमा की जिंदगी के अंदर हमेशा
[21:44]नजर आता है कहीं भी गैप नहीं है कहीं भी वकफा नहीं
[21:48]है कहीं भी ताती नहीं है लिहाजा जब यह काम अंजाम दे
[21:55]रहे थे तो नतीजा निकलता था कि उस दौर के जो बादशाह
[21:57]होते थे जो हाकिम होते थे जो खलीफा होते थे वो इनको
[22:01]जिंदा दोनों में डालते थे इनके ऊपर जुल्म सितम करते थे इनको
[22:05]कत्ल और शहीद कर दिया करते थे क्यों सिर्फ इस से चंद
[22:06]अदीस बयान कर रहे अदीस तो उस वक्त और भी उलमा बयान
[22:11]कर रहे थे बहुत सारी और भी चीज थी लेकिन उनसे खौफ
[22:18]नहीं था देखिए हमेशा मयार ये नहीं है कि जालिम जिससे हमेशा
[22:23]खौफ खा रहा है वो हमेशा सही है नहीं लेकिन जो सही
[22:29]है से जालिम हमेशा खौफ खाएगा वो तमाम अफराद कि जिनसे जालिम
[22:32]खौफ खा रहा है वो सही नहीं हो सकते मुख्तलिफ [संगीत] है
[22:38]लेकिन एक शर्त उसके अंदर यह होनी चाहिए कि जालिम उससे खौफ
[22:44]खाए जालिम उससे खतरे का एहसास करे अगर वो यह नहीं कर
[22:49]र इसका मतलब इस शख्स के अंदर वो क्राइटेरिया जो आला सलाम
[22:52]ने बयान किया वो पूरा नहीं हो रहा तमाम आमा ने ये
[22:58]काम किया तो गवाही देते फिर हम आमा की जब जिंदगी में
[23:03]देखते हैं तो उन्हे जिदान में डाला गया उन्हें शहीद किया गया
[23:05]क्यों अदीस बयान कर रहे थे इमाम साद सलाम एक दफ दरूद
[23:09]भे मौला की जात के [प्रशंसा] ऊपर इमाम की जिंदगी को देखे
[23:17]तो हमें नजर आएगा कि वहां पर एक मकाम ऐसा आता है
[23:21]कि मंसूर जो इमाम का कातिल है इमाम का दुश्मन है व
[23:22]इमाम अ सला सलाम को कहता है कि आप मस्जिद मदीना में
[23:27]बैठे दर्स दे फतवा दे मैं आपको सपोर्ट करूंगा इमाम इंकार कर
[23:31]देते हैं यानी खाली क्योंकि इमाम को पता है कि अगर मैं
[23:37]इसके बनाए हुए मेंबर के इसके बनाए हुए प्लेटफॉर्म इसके बनाए हुए
[23:42]स्टेज से यह काम करूंगा तो अभी मैं वह काम नहीं कर
[23:44]सकता जो मेरा काम है लि तरबियत करते अपने अफराद की खुद
[23:50]नहीं जाते अपने असब की तरबियत करते हैं कि वो यह काम
[23:55]अंजाम दे लेकिन खुद उसका हिस्सा नहीं बनते क्यों क्योंकि इमाम की
[23:58]जिम्मेदारी है बाफ उमत की एक अलग जिम्मेदारी इमाम इस हवाले से
[24:04]बयान कर रहे सिर्फ चंद चीज इमाम बाक सलाम की जिंदगी से
[24:06]आपके सामने बयान करूं और जहम को तमाम करू एक दफा दरूद
[24:09]भे इमाम की जात के ऊपर मस हमें इमाम बाक सलाम की
[24:19]जिंदगी के अंदर हमारे सामने बयान नहीं होता कि इमाम आया कर्बला
[24:21]के बाद भी इमाम को असीर किया गया या नहीं किया गया
[24:26]जिदान में गए या नहीं गए हमारे सामने वाज नहीं है लेकिन
[24:29]जब हम तारीख की तरफ देखते हैं तो हमें नजर आता है
[24:31]किशा इने अब्दुल मलिक के दौर में यानी बनूमैया के खलीफा के
[24:36]दौर में इस हाकिम वक्त के दौर में इमाम अ सलातो सलाम
[24:38]को इमाम बाकर सलाम को मदीने से गिरफ्तार करकर शाम लेकर जाया
[24:44]जाता है यह कर्बला का वाकया नहीं है यानी इमाम अब इतने
[24:49]बड़े हो चुके हैं कि इमाम सादिक का बचपना चल रहा है
[24:50]और इमाम सादिक अ सला सलाम भी इमाम बाकर के साथ गिरफ्तार
[24:55]होकर मदीना से शाम जाता है अब जाहिर तो कर्बला तमाम हो
[25:02]गई ना कोई ऐसा काम नहीं हो रहा जो हुकूमत को खतरा
[25:06]नजर आए कोई तलवार नहीं उठा रहा तो क्यों इमाम को गिरफ्तार
[25:07]कर कर लेकर जाया जा रहा है खास रास्तों से लेकर जाया
[25:14]गया खास एहतमाम के साथ लेकर जाया गया फिर जब इमाम दरबार
[25:16]में जाते हैं तोशाम अपने दरबारियों से कहता है कि जब इमाम
[25:21]बाकर आएंगे तो मैं उनकी तबी करूंगा उनकी मजम्मत करूंगा और तुम
[25:27]सब भी मेरा साथ देना एक एक करके मजम्मत करना ताकि मिसाल
[25:31]के तौर पर इमाम के जो उनके ऊपर प्रेशर डाला जा सके
[25:37]उनको तंग किया जा सके अजियत की जा सके इमाम दरबार में
[25:39]आते हैं लोग एहतराम के लिए खड़े नहीं होते इमाम एक उमू
[25:44]सलाम करक या सबको अस्सलाम वालेकुम कहकर जाते हैं और जाकर कुर्सी
[25:48]के ऊपर जाकर बैठ जाते अभ उस वक्त दर हकीकत बादशाह वक्त
[25:55]की तौहीन है यानी इमाम उसको सलाम नहीं कर रहे एक जनरल
[25:58]उमू सलाम करते है वरना उस दौर के अंदर पहले अमीर के
[26:01]पास जाया जाता उसको सलाम किया जाता यानी ये खास प्रोटोकॉल है
[26:04]बादशाह का इमाम इस प्रोटोकॉल को खराब करता और बगैर इजाजत जाकर
[26:10]एक मसनद के ऊपर बैठ जाता है वो और देश में आ
[26:14]जाता है अब इमाम के ऊपर तोहमत लगाता है और तोहमत क्या
[26:16]लगाता है यानी दर हकीकत जो बोल रहा है उसके अंदर उसके
[26:23]पीछे वो खुद जुमला हकीकत नहीं है लेकिन उसके पीछे कुछ हका
[26:29]है जिसकी वजह से वो ये जुमला कर क्या कहता हैला मुन
[26:32]आप में से जो आता हैम बाकर की बात नहीं पहले कौन
[26:40]है इमाम सजाद मोहमद इम सजाद सला उससे पहले इम सलाम इमाम
[26:52]हसन सलाम ता आप में से जो आता है वह क्या करता
[27:00]है मुसलमानों के कका असल मुस्लिमीन मुसलमानों के दरमियान फिना फसाद फैलाता
[27:06]है वमा मामला व अपनी तरफ लोगों को बुलाता है और गुमान
[27:13]करता है कि इमाम वह है अब देखि यहां पर खुद एक
[27:18]बुनियादी तरीन मसला बुनियादी तरीन शुब है जो हमारे लिए क्लियर नहीं
[27:23]है हम इमाम क्या समझते हैं हम इमाम समझते हैं कि जो
[27:25]बस चंद अकाम हमें बताए बहुत अच्छा बहुत बड़ा फजीलत हो सबसे
[27:30]ज्यादा फजीलत वाला वो हो बस ना उस दौर के अंदर जब
[27:34]हम कहते हैं इमाम हम इमाम का मतलब क्या कहते अमीर मोमिनीन
[27:36]इमाम है रसूल अल्लाह के बाद यानी क्या यानी रसूल अल्लाह के
[27:42]बाद हमारे दीनी उमू हमारे दुनियावी उमू हमारी फर्जी जिंदगी हमारी हुकूम
[27:47]जिंदगी हमारी सियासी जिंदगी हमारी इजतिमा जिंदगी सबका रहबर और रहनुमा अगर
[27:51]कोई है तो कौन है वो अमीर मोमिनीन अली इने अबी तालिब
[27:57]अ सलातो सलाम और यही चीज इमाम साद सलाम हमें हज के
[28:00]दौरान या बनम का आखरी दौर है हज के दौरान बयान कर
[28:04]करते नजर आ रहे हैं हजारों का मजमा लोगों की तरफ रुख
[28:09]करके कहते हैं कि देखो यह इमाम नहीं है यानी उस वक्त
[28:13]इमाम कौन है जो बादशाह इमाम कौन है जो हाकिम है इमाम
[28:15]साद कहते देखो यह इमाम नहीं है इमाम कौन है इमाम रसूल
[28:18]अल्ला थे फिर अमीर मोमिनीन थे फिर इमाम हसन थे फिर इमाम
[28:20]हुसैन थे फिर इमाम अली इ हुसैन मोहम्मद इने अली और फिर
[28:26]मैं इमाम हूं तुम्हारा अगर इमाम का मतलब सिर्फ ये कि बहुत
[28:29]बा फजीलत हो ये बहुत सारे लोगों को मालूम था आज भी
[28:33]बहुत सारे लोग अमीर मोमिनीन को रसूल अल्लाह के बाद तमाम असब
[28:36]के ऊपर बा फजीलत जानते हैं लेकिन वो माना इमाम का नहीं
[28:42]मानते जो माना हम मानते हैं ह शम क्या कह रहा है
[28:46]इमाम बाकर अल सलाम से कि आप में से जो आता है
[28:50]गुमान करता है वो इमाम है यानी क्या और चंद ऐसे अल्फाज
[28:51]इस्तेमाल करता है जिसमें इमाम की तौहीन है यानी बयान ये करना
[28:55]चाह रहा है कि देखिए हुकूमत मेरे पास है बैतुल माल मेरे
[28:56]पास है टक्स मेरे पास जमा हो रहा है ऑर्डर मेरा चल
[29:00]रहा है तो आप अपने आपको को इमाम कैसे मान रहे और
[29:05]उसके बाद क्या होता है कि एक एक कर कर सब अफराद
[29:08]तहीन करना शुरू करते इमाम की और जब सब खामोश हो जाते
[29:12]हैं तो इमाम यह नहीं कहते कि तुम मेरे पर इजाम लगा
[29:15]रहे हो मैंने कुछ भी नहीं किया नहीं इमाम कहते हैं कि
[29:19]बनाला खुदा मुताल ने तुमसे पहले वालों की हिदायत भी हमारे जरिए
[29:29]की थी बनायम और तुम्हारे बाद वालों का जो इता है वह
[29:32]भी हमारे ऊपर करेगा तुम अभी इन छोटी सी जाहिरी हुकूमत के
[29:36]ऊपर खुश हो रहे हो लेकिन वह हुकूमत जो दामी होगी जिसके
[29:41]बाद कोई हुकूमत नहीं आएगी वह हुकूमत हमारी होगी अब देखि कितना
[29:45]बड़ा चैलेंज है हाकिम वक्त को कह रहे कि तुम्हारी हुकूमत बहुत
[29:49]मुख्तसर से अरसे के लिए है तुम इस पर खुश हो जाओ
[29:53]लेकिन हम जिस तरफ बढ़ रहे हैं हम जो काम अंजाम दे
[29:57]रहे हैं उसका नतीजा निकलेगा और क्यों निकलेगा क्योंकि कुरान ने गवाही
[30:00]दिया अल मुकीन के हम मुकीन में से हैं हम मुत है
[30:06]और कुरान गवाही देता है तकी कुरान गवाही दे रहा है के
[30:12]जो आक बतक बत से मुराद कयामत नहीं आत से इस दुनिया
[30:14]के अंदर ताम है व हमारे ऊपर होगा इस दुनिया का ताम
[30:20]अच्छा है इस दुनिया का ताम आत बखरी दुनिया के अंदर चैलेंज
[30:28]उस वक्त और यह वो वाकया बयान हुआ कि इसके बाद ह
[30:33]शम फैसला करता है कि इमाम को जिंदा में डाल दिया जाए
[30:35]जब जिंदा में डालता है तो देखता है इमाम के रवैए से
[30:38]इमाम की तबलीग से जो कारम है जो मसलन मजदूर है उसके
[30:42]हुकूमत के जो काम करने वाले हैं ये एक एक करके तब्दील
[30:43]हो रहे हैं परेशान हो जाता है कि कहीं इंकलाब ना आ
[30:47]जाए तो जो जेलर होता है उसका वो आके उसको गवाही दे
[30:50]कहता है कि भाई यह तो मसला हो जाएगा बाद में मेरे
[30:53]लिए भी मसला है लिहाज जल्द जल्द इनको रिहा कर दिया जाए
[30:55]और फिर इमाम को रिहा किया जाता है और उस रास्ते से
[30:59]मदीना पहुंचाया जाता है कि इमाम का लोगों के साथ राबता ना
[31:02]हो रिवायत के अंदर है कि इमाम जिस शहर से जाते थे
[31:04]बाजार के दरवाजे बंद कर दिए जाते थे दुकाने बंद कर दी
[31:09]जाती थी तीन दिन तक इमाम और इमाम के असब भूखा प्यासा
[31:11]रहे उस सफर के दौरान और फिर इमाम ने जब मुखातिब करना
[31:15]शुरू किया है लोगों को तो अब उसमें से चंद गैरत मंद
[31:19]अफराद निकले और लोगों को बोला कि इनको जानते हो यह कौन
[31:23]है और फिर लोगों ने आहिस्ता आहिस्ता कर कर इमाम के लिए
[31:27]अपने बाजारों को खोला अगर इमाम कुछ नहीं कर रहे थे अगर
[31:32]इमाम चंद फिक अकाम बयान कर रहे थे चंद अखलाकी अदीस बयान
[31:34]कर रहे थे जिससे ह शम को जाहिर कोई खतरा तो नहीं
[31:38]था देखिए हुकूमत उसके पास है टैक्स उसके पास है कई ऐसे
[31:43]मुहसीन जो दरबार से पैसा ले रहे उसके पास मौजूद है रसूल
[31:45]अल्लाह की अदीस नकल करने वाले जनाबे जोहरी अहले सुन्नत के यानी
[31:50]बड़े उलमा के अंदर आते हैं वो उसके पास मौजूद है किससे
[31:54]डर रहा है एक ऐसे शख्स से कि जो कुछ भी नहीं
[32:00]करता जिसका काम चंद अकाम बयान करना है नहीं कह रहा इमाम
[32:04]को क्या आप में से जो आता है व दरकी चैलेंज कर
[32:05]रहा हुकूमत के मुकाबिल हुकूमत खड़ी कर रहा है खतरे का एहसास
[32:10]कर र अपने लिए कि अगर मैंने इनको छोड़ दिया तो यह
[32:15]मेरी हुकूमत के लिए बाबा जान बन जाएंगे और यही तमाम आमा
[32:20]की जिंदगी के अंदर हमें नजर आता है काम कर रहे थे
[32:26]इमाम सा सलाम के जिंदगी के अंदर हम एक और रवया नजर
[32:28]आता इमाम बकायदा हदीस के अंदर बयान करते खवाहिश करते हैं किले
[32:37]मोहम्मद ली काश तुम में से काश अले बैत के मानने वालो
[32:40]में से काश सादाद में से कोई उठे और कयाम करे और
[32:43]उसका बजट मेरे हाथ में हो मैं उसको सपोर्ट करू माली तौर
[32:47]पर उसके अयाल को मैं सपोर्ट करू लेकिन इमाम खुद मैदान में
[32:49]नहीं जा सकते थे हालात मुख्तलिफ है अरे इसका मतलब क नहीं
[32:54]जिसने कयाम किया व सब सही है मैं फिर ही बात कर
[32:57]रहा हूं यह नहीं है कि हाकिम वक्त या जालिम जो भी
[33:01]उसके मुकाबिल हमेशा होगा वह हमेशा हक पर होगा नहीं लेकिन जो
[33:07]हक पर होगा वह हमेशा उस जालिम के मुकाबिल होगा ज तमाम
[33:10]आमा की जिंदगी के अंदर देखि इन्ह कत्ल किया गया इन्ह पहले
[33:15]जहर दिया गया यानी पहले कोशिश की गई इनको कंट्रोल किया जाए
[33:17]नजरबंद किया जाए इनको जिदान में डाला जाए और जब भी नतीजा
[33:22]नहीं निकला तो आखिर में मजबूर होते जाहिरी तौर पर उनके पास
[33:24]कोई चार नहीं बचता इमाम अ सलातो सलाम की त इम सलाम
[33:29]का काम इतना मोसर था कि व लोगों के तक सरात कर
[33:34]रहा था उससे खौफ खाते इमाम को कल करते एक दफ दरूद
[33:40]भे मोहम्मद [संगीत] मोहम्मद एक रिवायत सिर्फ आपके सामने बयान करूं औरतो
[33:47]को तमाम इमाम बाक सलाम से रिवायत है इमाम फरमाते हैं हदीस
[33:53]कुदसी है रसूलल्लाह से नकल करते हैं और दरकी खुदा मुताल का
[33:58]फरमान लोगों को बयान कर रहे यह हदीस मुख्तलिफ अल्फाज के साथ
[34:01]इमाम बाक सलाम से भी आई है और यही हदीस थोड़े से
[34:06]फर्क के साथ इमाम साद सलाम से भी हम तक पहुंची हैबी
[34:10]जाफर सलाम या बाक सलाम ने फरमाया किला रसूला सला अ वसल्लम
[34:18]के रसूलल्लाह ने फरमाया क्या फरमाया काला अजल के अल्लाह ताला ने
[34:22]फरमाया अब अल्लाह क्या फरमा रहा है लाला इमाम जा मला अल्ला
[34:34]कहता है कि तमन तमन तमन मैं उस कौम को अजाब दूंगा
[34:40]किस कौम को कि जो उमत जो इस्लाम की रयत होगी या
[34:46]अब मुसलमानों की बात हो रही है कु फार की बात नहीं
[34:49]हो रही है व कम जो इस्लाम की रयत में लेकिन उसका
[34:55]हाकिम उसका इमाम कौन है वो उस इमाम के तह जिंदगी कर
[34:57]रही है जिंदगी गुजार रही है जो जाहिर है जो जुलम करता
[35:03]है ले मला और अल्ला की जानिब से नहीं है न कातन
[35:11]चाहे व उम्मत इस्लामी उम्मत अपने इरादी आमाल के अंदर नेक और
[35:19]मुत की क्यों ना हो नमाज पढ़ रही हो हदा कर रही
[35:24]हो कुरान कर रही है उसका नमाज ू तमाम चीज परफेक्ट लेकिन
[35:27]जिसको बनवाने हाकिम कबूल किया जिसके ऊपर राजी हो गई है वह
[35:33]कौन है वह जायर है वह जालिम है वह अल्लाह की जानिब
[35:35]से नहीं है अब यह देखि किसके दौर में बयान हो रहा
[35:39]है कि एक तरफ इमाम अपनी इमामत के दावेदार है कह रहे
[35:43]कि हम इमाम है हम हाकिम है हम खलीफा रसूल है और
[35:47]एक जानिब बादशाह वक्त है व भी यही दावा कर रहे यहां
[35:48]पर अब इमाम दर हकीकत चैलेंज कर रहे हैं आम मुसलमानों को
[35:53]बता रहे हैं कि देखो अल्लाह अगर तुम इस सिस्टम के ऊपर
[35:58]राजी हो जा तो दर हकीकत क्या कर रहे हो तुम अल्लाह
[36:03]का अजाब तुम्हारे शामिल हाल हो और फिर इमाम आगे बयान करते
[36:05]हैं ना अल्ला कहता है कि मैं हतमान हतमान उस कम को
[36:15]बख दूंगा इलाम वो उमत जो इस्लाम के तह जिंदगी गुजार रही
[36:19]हो दान विलायत इमाम मल्ला उसका हाकिम सरपरस्त कौन हो एक इमाम
[36:29]आदिल अल्लाह की जानिब से और आगे अजीब जुमला स चाहे वह
[36:35]अपनी इरादी जिंदगी के अंदर जुल्म क्यों ना कर रही हो चाहे
[36:40]वह अपनी इरादी जिंदगी के अंदर अपनी नजी जिंदगी के अंदर गुनाहगार
[36:47]ही क्यों ना हो लेकिन अल्लाह कह रहा है इसने मेरे बंदे
[36:50]को अपना हाकिम बनाया है लिहाज मैं इसे बख्श दूंगा लेकिन वो
[36:57]जो जाहिरी अपने नेक आमाल के अंदर अब देखें हमारे तकादा एक
[37:00]तरफ अब उस उस वक्त के हालात को इंसान तसव्वुर करे कि
[37:06]कितनी सख्त गुफ्तगू इमाम अल सलातो अस्सलाम कर रहे हैं लोगों के
[37:09]सामने लोगों को बता रहे हैं ये दर हकीकत क्या है ये
[37:14]चैलेंज है उस वक्त के सिस्टम के मुकाबले में उस वक्त के
[37:16]निजाम के मुकाबले में और ये वो चीजें थी जो हमें हम
[37:24]देखते हैं कि तमाम आइमा के अंदर अब क्यों मैंने जो शुरू
[37:26]में बात की थी कि ये बाकायदा वाज तौर पर हम तक
[37:30]क्यों नहीं पहुंची हमें अवाल हमें ला बला कलाम इन चीजों को
[37:36]तलाश करना पड़ता है कि देखि यह आमा सलातो सलाम की यह
[37:37]तमाम जद्दो जहद उसूल के ऊपर कंप्रोमाइज नहीं था उसूल आमा बयान
[37:43]किया करते थे लेकिन फुआत के अंदर छोटी चीजों के अंदर आमा
[37:48]की तमाम जदो जहद मखिया तौर पर अंजाम पा रही थी जिसे
[37:54]हम तया कहते वो क्या था कि जो इमाम अ सलातो सलाम
[37:55]हमेशा तक ये नहीं है कि अपने उसूलों को छुपा लिया जाए
[37:59]जब हम आइमा की जिंदगी के अंदर देखें तो अक्सर जगह जो
[38:04]हमें तकिया नजर आ रहा है देखिए एक दफा फकी अबास है
[38:05]फिक मसाइल है उसके अंदर एक अलग तक है यानी हम अपने
[38:09]आमाल को ऐसा कर द कि सामने वाला पहचान ना सके लेकिन
[38:12]जब हम आइमा की जिंदगी के अंदर देखते हैं तो तकिया कौन
[38:17]सा तकिया है कि आइमा अ सलातो सलाम की जो सियासी या
[38:18]इजतेमा स्ट्रेज है वो जालिम तक ना पहुंचे इमाम का काम चलता
[38:25]रहे लोग आमादा होते रहे हां एक ऐसा वक्त आए आमा कहते
[38:30]देखो तुम हमारे अम के लिए आमादा हो कि जब हमारे अम
[38:31]महक होने का वक्त आए तो तुम लोग तैयार खड़े हो भूल
[38:35]ना जाओ फरामोश ना कर दो हां लेकिन अगर वक्त से पहले
[38:40]इमाम के राज फाश करना शुरू कर दो वक्त से पहले ऐसी
[38:44]हरकत शुरू कर दो के उसके नतीजे के अंदर उस वक्त का
[38:46]जालिम और जाबिर तुम्हारी असल स्ट्रेज समझ जाए और अब तुम्हें नाबूत
[38:53]करने लग जाए तो य ये भी गलत हैमा सला सलाम ने
[38:58]बाज मकामा पर लान किए अपने शयो के ऊपर जोमा की अदीस
[39:00]को दूसर को जाक ऐसे बयान कर देते समझ देख शिया आम
[39:06]बात नहीं थी आज गै बत के दौर के अंदर क्योंकि इमाम
[39:10]जमाना हमारे जमाने का इमाम पदा ग बत में तो हमारे लिए
[39:13]आसान हो गया जिंदगी गुजारना हमारे लिए हम समझते आसान है नहीं
[39:19]गै बत का दौर सखत तरीन दौर है किन अफराद के लिए
[39:23]जो उस तयो पर बाकी रह सके अमलन क्योंकि अगर सिर्फ जबानी
[39:27]कलाम बात है तो उसके अंदर उससे दुश्मन को खतरा नहीं है
[39:30]तश्य को खाता कहा जाता था रिवायत के अंदर क्यों क्योंकि ये
[39:36]खास लोग होते थे ये इतना आसान नहीं होता था शिया होना
[39:40]शिया रहना इतना आसान नहीं होता था लिहाजा जब हम इस तरह
[39:48]आइमा सलातो सलाम के अपने उसूल मोहकम करें उसूलों को सही तौर
[39:50]पर समझे उसूल दन अपने सही तौर पर समझे और अब उसके
[39:55]बाद आइमा अल सलातो सलाम की सीरत दर जुजी चीज फरुआ हम
[39:59]उन उसूल की बुनियाद के ऊपर तहलील करना शुरू करें तो हमारे
[40:01]नजदीक शु नहीं आएगा कि फला इमाम ने यह किया था फ
[40:06]इमाम ने यह क्यों किया था नहीं तमाम आमा दर हकीकत एक
[40:10]हकीकत है कु नूर वाहिद हम मशहूर मारूफ रिवायत हम करते हैं
[40:13]अलना मोहम्मद वसना मोहम्मद खर मोहम्मद व कुना मोहम्मद एक दफा दरूद
[40:20]भेजे अले बैत की जात के ऊपर खुदा आलम से कि खुदा
[40:28]मुताल हम सबको अहले बैत अ सलातो सलाम की सीरत को समझने
[40:30]और उस पर अमल करने की तौफीक नसीब फरमाए दुनिया में जहां
[40:35]जहां मोमिनीन कुफ्र इस्तकबाल के खिलाफ बड़सर पैका है खुदा वंदे मुताल
[40:39]उनकी तौफीक में इजाफा फरमाए हम सबको उनकी हिमायत की तौफीक नसीब
[40:43]फरमाए दुनिया में जहां जहां कुफ्र इस्तक बार इस्लाम के खिलाफ बरसरे
[40:50]पैका है खुदा वंदे मुताल उनको नीज तो नाबूत फरमाए हम सबको
[40:53]उनकी मुखालफत की तौफीक नसीब फरमाए इकलाब इस्लामी को इमाम जमाना के
[40:59]आलमी इंकलाब से मुत्त सिल फरमाए हम सबको इस इंकलाब की हिमायत
[41:02]करने की तौफीक नसीब फरमाए इमाम जमाना अलला ताला फरज शरीफ के
[41:06]जुहूर में ताजल फरमाए हम सबको उनके आवान अंसार और उनकी राह
[41:13]में शहादत नसीब फरमाए रब्बना तकल मिना इनत समी अलीम रहमत या
[41:17]अरहम रान पर मोहम्मद ली मोहम्मद सलावत
0 Comments
sort Sort By
- Top Comments
- Latest comments
Up next
5 Views · 23/07/22
3 Views · 23/07/24
5 Views · 23/07/25
10 Views · 25/08/03
