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Seerat e Rasool S.A.W.W. Nuqta e Wahdat Ummat | H.I. Jawad Haider Hashmi
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Record date: 08 Oct 2023 - سیرت رسول نقطہ وحدت امت
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2023 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
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Transcript
[0:13]बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन सुम सलातो वस्सलाम अला मुहम्मद वा
[0:26]तबी हरीन लालाला अजमा इला कियान अम्मा बाद काला फ किताब मजी
[0:38]बिस्मिल्ला रहमान रहीम ल कद कान लकम फ रसूला उसन हसना मन
[0:47]कान यरला य मल आखर वकला कसीरा पर मोहम्मद वाले मोहम्मद सवात
[1:02]हजरत रसूल अकरम सल्लल्लाहु अल वा वसल्लम और हजरत इमाम जाफर सादिक
[1:09]अल सलाम की विलादत बा और जमनी जो उनवान इसके अंदर है
[1:35]वह सहाब कराम और अहले बैत अर अ सलाम के हवाले से
[1:36]कि कुरान करीम के अंदर इनके हवाले से जो अल्लाह ताला ने
[1:42]आयात करीमा नाजिल फरमाई है उनकी जानिब भी इशारा किया जाए आप
[1:48]सलाम की विलादत बा के हवाले से जैसे हमारे दरमियान मशहूर है
[2:03]17 रबील अव्वल विलादत बासा दत की तारीख है अच्छा इसके अलावा
[2:10]दीगर जो तवारीख मिलती है उनमें 12 रबील अव्वल की तारीख भी
[2:16]है जो हमारे यहां अहले सुन्नत के यहां ज्यादा मशहूर है और
[2:19]इसी तरह इसके अलावा आठ रबील अव्वल की तारीख भी है और
[2:24]न रबील अव्वल की तारीख भी है आपकी विलादत बा सहादत की
[2:29]और बाज दीगर रिवायत के मुताबिक दो रबी अवल की तारीख भी
[2:32]मिलती है जिनमें आपकी विलादत हुई तो तलाफी बुनियाद पर जो इस
[2:38]वक्त मशहूर है और आम मुसलमानों के दरमियान शिया सुन्नी मुसलमानों के
[2:42]दरमियान जो मशहूर और काबिल कबूल रिवायत है वह 12 और 17
[2:47]है तो इमाम खुमैनी रहमतुल्ला अल ने बहरहाल पूरे 12 से लेकर
[2:50]17 रबील अव्वल तक के आयाम को हफ्ते विलादत के तौर पर
[2:55]हफ्ते वहदत के तौर पर मनाने का ऐलान किया ताकि मुसलमान इन
[2:58]तारीखी लाफा के अंदर पढ़ने के बजाय पूरे हफ्ते के दौरान आप
[3:06]सला वसल्लम की विलादत का और आपकी सीरत का तस्करा करें ताकि
[3:11]इसके जरिए मुसलमान आपस में जुड़े रहे और आपस में एक दूसरे
[3:14]से मरबूपल्ली उसवा करार दिया जो सरनामा कलाम में मैंने आपके सामने
[3:35]आयत करीमा तिलावत की है वह सूर अजाब की मशहूर आयत करीमा
[3:42]है जो आप सबको याद हैक कालक फ रसूला उसव हसना कि
[3:43]तुम्हारे लिए रसूल अकरम की जिंदगी में बेहतरीन नमूना है लि मन
[3:52]कान यरला लाख उन लोगों के लिए कि जो अल्लाह के ऊपर
[3:54]ईमान रखता है अल्लाह से उम्मीद रखता है और आखिरत की उम्मीद
[4:01]रखता है व जकर अल्लाह कसीरा और अल्लाह ताला का जिक्र कसरत
[4:05]के साथ करने वाले हैं उनके लिए आप सलाम की जिंदगी के
[4:11]अंदर बेहतरीन नमूना मौजूद है अच्छा हुजूर अकरम सलाम की जिंदगी से
[4:15]अगर हम उसवा हासिल करना चाहे बेहतरीन नमूना हासिल करना चाहे कि
[4:20]जो तमाम उम्मत के लिए मुश्तरका तौर पर रहमत हो और वहदत
[4:22]का बायस हो तो वह क्या है तो वह तबलीग इस्लाम से
[4:27]लेकर आपकी जिंदगी के एक एक मरहले पर मुश्त मिल है हुजूर
[4:33]अकरम ने कैसे दीन की तबलीग फरमाई यानी दीन की तबलीग के
[4:36]सिलसिले में हर तरह की मुश्किलात आप क्या है बर्दाश्त फरमा रहे
[4:41]हैं हर तरह की तकाली बर्दाश्त फरमा रहे हैं यानी इस्लाम ऐसा
[4:44]दीन है अल्लाह रब्बुल इज्जत का पैगाम वह पैगाम है कि जिसको
[4:50]पहुंचाने के खातिर हर तरह के मुश्किलात भी अगर पड़ जाए फिर
[4:54]भी वहां से पीछे नहीं हटना आपकी सीरत का यह क्या है
[5:00]एक मरकज नुक्ता है इस्लाम पंगे पैगाम हक को आप पहुंचाएंगे मुश्किलात
[5:03]आएंगे और जरूर आएंगे आपकी जिंदगी में आई मक्के के अंदर आप
[5:11]देख लीजिए इब्तिदा बसत से लेकर हिजरत फरमाने तक 13 साला जो
[5:14]आपकी जिंदगी का दौर मुश्किलात से भरपूर है आपके लान नबूवत से
[5:20]पहले कुरेश के लोग आपके दुश्मन नहीं है आपके साथ दोस्ती रखते
[5:26]हैं आपके साथ मोहब्बत का रिश्ता रखते हैं आपका एहतराम कर आपकी
[5:31]दिल से इज्जत करते हैं लेकिन यही लोग जैसे ही आप लान
[5:37]नबूवत फरमाते हैं लोगों को यह ऐलान करते हैं कि ला इला
[5:42]इलल्लाह तु तो यही लोग आपके जानी दुश्मन बन जाते हैं तो
[5:44]इसका मतलब है कि इस ऐलान की वजह से यह लोग आपसे
[5:48]दुश्मनी कर रहे हैं और कोई दुश्मनी नहीं है जाती नात नहीं
[5:54]है जाती इख्तिलाफ नहीं है खानदानी बजहर इलाफ नहीं है उससे पहले
[5:58]आपका एहतराम भी कर रहे हैं लेकिन आपके इस ऐलान की वजह
[6:03]से अब यह आपके जानी दुश्मन बन जाते हैं वही लोग कि
[6:07]जो कुछ अरसा पहले आपका एहतराम कर रहे थे अब आपके साथ
[6:09]इख्तिलाफ कर रहे हैं तो इससे मालूम यह होता है कि जो
[6:13]लोग आपसे इख्तिलाफ कर रहे हैं वह खानदानी दुश्मनी की वजह से
[6:18]नहीं वह आपके साथ किसी जाती नात की वजह से नहीं वह
[6:19]पैगाम हक की वजह से अल्लाह ताला के दीन की वजह से
[6:24]अल्लाह ताला की वहदा नियत के अकीदेअरेस्ट तबलीग की वजह से अगर
[6:32]आप अकीदत की तबलीग ना फरमाते और उनसे यह ना कहते कि
[6:38]ला इलाह इल्लल्लाह कहो तो यह भी आपकी मुखालफत ना करते आपके
[6:43]साथ दुश्मनी ना मोल लेते तो इससे मालूम यह होता है कि
[6:46]दीन इस्लाम और अल्लाह ताला के पैगाम के पहुंचाने की राह में
[6:52]मुश्किलात आएंगी कुछ लोग आपके मुखालिफ हो जाएंगे तो आपकी सीरत से
[6:55]जो हमारे लिए मरकज जो एक नुक्ता निकलता है वो क्या मुश्किलात
[6:59]अगर आती है तो आने [संगीत] पैगाम हक के सिलसिले में मुश्किलात
[7:04]भी आ जाएंगी मुश्किलात को बर्दाश्त करना होगा आप मुसलमान है चाहे
[7:08]आपका ताल्लुक किसी भी मसलक से हो हुजूर अकरम की नबूवत और
[7:12]रिसालत के ऊपर ईमान रखते हैं तो रखते हैं तो अल्लाह ताला
[7:14]के पैगाम को पहुंचाने के सिलसिले में मुश्किलात आएंगे आप मुशे के
[7:17]अंदर दीन का बेड़ा उठाकर सामने आएंगे कुछ लोग आपके मुखालिफ होंगे
[7:23]कुछ लोग आपकी मुखालफत करेंगे चिम गोइया करने लगेंगे आपके ऊपर इल्जाम
[7:28]तराश करेंगे य हुजूर अकरम सीरत के अंदर हमें मिलता है आपको
[7:32]नौजुबिल्लाह तरह तरह की तोहम तों का सामना करना पड़ा अब यह
[7:37]तोहमत क्यों लग रही है आपको नौजुबिल्लाह जादूगर कहा जाता है आपको
[7:40]नौजुबिल्लाह साहिर कहा जाता है आपके ऊपर दीगर इल्जा मात लगाए जाते
[7:46]हैं ठीक तो ये इल्जा मात क्यों लग रहे हैं पैगाम इलाही
[7:48]के पहुंचाने की वजह से लेकिन इन तमाम तोतों के जवाब पर
[7:55]क्या आप खामोश रहते हैं नहीं आपने जो बेड़ा उठाया था पैगाम
[8:00]हक को पहुंचाने का व आप पहुंचाते रहते हैं मुश्किलात अगर आ
[8:04]जाती है तो आ जाए लेकिन आपने पैगाम हक को जारी रखना
[8:09]है यह एक एक और इंतहा अहम नुक्ता जो हुजूर अकरम सलाम
[8:12]की हयाते तैबा और सीरत के अंदर जो नजर आ जाता है
[8:17]व य कि इस्तकामेश्वरी ह को पहुंचाने का सिलसिला जारी रखेंगे मसाइल
[8:33]मुश्किलात के मौके पर सबर करेंगे बर्दाश्त करेंगे लेकिन कोई ऐसा कदम
[8:41]नहीं उठाएंगे कि जिससे मिशन को नुकसान पहुंचे जिससे इस्लाम को नुकसान
[8:45]पहुंचे आप अपने इस मिशन के अंदर आगे बढ़ते चले जाते हैं
[8:50]य एक और इंतिहा अहम जो नुक्ता आपकी जिंदगी के अंदर आपकी
[8:53]सीरत तबा से सामने आ जाता है वह रहमत का पहलू है
[8:59]हुजूर अकरम सला के आलमीन हमने आपको नहीं भेजा मगर रहमत बनाकर
[9:04]तमाम आलमीन के लिए हुजूर अकरम सलाम की सीरत तबा के अंदर
[9:11]चाहे व मक्की दौर हो या मदनी दौर हो यह रहमत के
[9:16]आसार मुकम्मल तौर पर नजर आते हैं रहमत के जलवे कदम कदम
[9:21]पर नजर आते हैं यहां तक कि इन लोगों की जानिब से
[9:23]बदतर दुश्मनी भी सामने आती है आप उनके हक में बददुआ नहीं
[9:28]फरमाते आप उनके हक में दुआ फरमाते हैं जब आप तायफ तशरीफ
[9:32]ले गए ना कुरेश के लोगों से तंग आने आप तायफ गए
[9:36]और वहां से जब आप पत्थर खाकर वापस तशरीफ ला रहे थे
[9:37]तो अल्लाह ताला की जानिब से रिवायत के अंदर कि जिब्राईल अल
[9:42]सलाम आए फरिश्ते आए और कहा कि आप द आप इजाजत दें
[9:47]कि इनको पूरी बस्ती को उलट दे आपने इजाजत नहीं दी आपने
[9:49]फरमाया कि यह लोग मुझे नहीं जानते जब जान लेंगे तो ईमान
[9:54]लाएंगे ठी मेरी कौम अभी मुझे नहीं आपने उनके ऊपर अजाब के
[10:00]हवाले से इजाजत नहीं दी कि उनके पर अजाब नाजिल हो जाए
[10:02]यह आपकी रहमत का पहलू है आप हमेशा इस इंतजार में होते
[10:09]थे कि लोग कोई ऐसा मौका आ जाए कि लोग क्या है
[10:11]आपकी नबूवत और आपकी रिसालत की हकीकत को समझ जाए और दायरे
[10:16]इस्लाम की तरफ आ जाए अगर इस मौके पर आप इस रहमत
[10:21]का मुजहरा ना फरमाते और उन्हें जाने देते तो जा चुके होते
[10:23]फि नार हो चुके होते लेकिन आपने उन्हें मोहलत दी नतीजा क्या
[10:30]बाद में फते मक्का के बाद यह लोग भी द इस्लाम के
[10:32]अंदर आ गए द इस्लाम के अंदर यह लोग भी आ इसी
[10:38]तरह रहमत के हवाले से कुरान करीम के अंदर अल्लाह ताला ने
[10:42]खुद इरशाद फरमाया रला य तो आपकी रहमत है कि आप लोगों
[10:48]के यह मेहर इला है कि आप लोगों के लिए नरम दिल
[10:49]वाक हुए हैं ताली अगर आप सखत दिल होते सखत मिजाज होते
[10:59]आपके अंदर सख्ती होती तो लोग आपके इर्दगिर्द ना आते परा कं
[11:06]हो जाते लेकिन आज लोग आपके करीब आकर बैठ रहे हैं आपकी
[11:12]महफिल में अगर आकर बैठते हैं तो यह इस वजह से क्योंकि
[11:13]आप रहम दिल है आपके अंदर रहमत वाला पहलू पाया जाता है
[11:19]आप रहम दिल है आप नर्म मिजाज है सख्त मिजाज नहीं है
[11:24]संग दिल नहीं है इसकी वजह से आपके पास आ रहे हैं
[11:26]जंगे उहुद के मौके पर ये आयत करीमा नाजिल हो जाहिर है
[11:30]उस मौके पर लोग भाग गए थे जंग से भाग गए थे
[11:33]मुश्किलात का सामना जिसकी वजह से आपको मुश्किलात का सामना करना पड़ा
[11:36]मुश्किलात क्या है अगर वो लोग मैदान छोड़कर बाग ना जाते तो
[11:43]इतने सारे सहाब कराम शहीद ना हो जाते अगर वो जो उस
[11:49]दर्रे के ऊपर मुता थे अगर वह आपकी बात मान लेते तो
[11:50]मुसलमानों की शहादत इस तरह ना हो जाती 70 शहीद हो गए
[11:55]कोई मामूली तादाद नहीं 70 बहुत बड़ी तादाद थी इतनी बड़ी तादाद
[12:00]बाद में किसी और जंग के अंदर मुसलमान शहीद नहीं हुए किसी
[12:03]और जंग के अंदर मारे नहीं गए लेकिन इन तमाम मुश्किलात के
[12:07]बाव हजरत हमजा अ सलाम इसी के अंदर शहीद हो गए और
[12:09]आपके साथ जो सुलूक किया गया आपके लाश को जो मुसला किया
[12:13]गया वह इसी जंग के अंदर हुआ तो इन तमाम कामों के
[12:18]बावजूद इन तमाम सुस्ती हों के बावजूद आप क्या है उनके मामले
[12:23]में रहम दिली फरमा रहे और आपसे हुकम हो रहा है कि
[12:24]आप इनको माफ फरमा दें आप इनको माफ फरमाए इनके साथ मशवरा
[12:31]ले क्यों क्योंकि आप लोगों के लिए क्या है नरम दिल वाक
[12:34]हो तो ये आपकी रहमत के असरात और इसी तरह आप इससे
[12:38]आगे बढ़ लीजिए और देखें फत मक्का के मौके पर हुजूर अकरम
[12:41]सलाम जब मक्के मुकर्रमा फत फरमा लेते आठ हिजरी में और आठ
[12:47]हिजरी को जब आपने इंतिहा कामयाबी के साथ और एक खूबसूरत हिकमत
[12:53]मली के साथ मक्के मुकर्रमा को फत फरमाया कैसे फत फरमाए बगैर
[12:55]किसी जंग और जदल के बगैर किसी तलवार चलाने के तो उस
[13:00]मौके पर यह मक्के के सारे लोग आपकी गुलामी में आ गए
[13:02]उस जमाने का दस्तूर यही था ना कि जो मगलू कौम थी
[13:06]शिकस्त खोदा कौम थी वह फा कौम की गुलामी में आ जाती
[13:12]थी यह सब आपकी गुलामी में आ गए अब उस मौके पर
[13:18]आप अगर चाहते इंतकाम लेना ले सकते थे नहीं लिया ना सिर्फ
[13:23]इंतकाम नहीं बाज लोगों ने नारा लगाया कि अलम यमल मलमा आज
[13:29]तो इंतकाम का दिन है आज तो खून रेजी का दिन है
[13:33]आज कुरेश के लोगों से बदला लिए जाने का दिन है जब
[13:34]आप तक यह लान पहुंचा आप तक यह खबर पहुंची तो आपने
[13:38]ऐलान फरमाया उनसे कहा कि जाओ जाकर उनसे कहे यह लान यह
[13:42]नारा ना लगाए अलम यम मलहमा आज इंतकाम का दिन है खून
[13:44]रेजी का दिन है बल्कि यह कहे अलम यमल मरहमा आज रहमत
[13:50]का दिन है आज बख्श का दिन है आज माफ किए जाने
[13:54]का दिन है और वहां पर जब लोगों को आपने खाने काबा
[13:59]से बुतों को गिराए जाने के बाद बुतों का खात्मा करने के
[14:02]बाद खाने काबा की ततहीर के बाद जब आप वहां पर आए
[14:06]और उनके सामने जब आपने यह ऐलान फरमाया तो फिर यह नहीं
[14:11]कहा कि तुम लोग माफ इस सूरत में माफ किए जाओगे कि
[14:15]तुम इस्लाम कबूल कर लो जब आप मक्के में दाखिल हो रहे
[14:16]थे तो आपने यह कहा था कि जो जो अपने घर का
[14:19]दरवाजा बंद कर ले व बस क्या है उसके लिए अमान है
[14:22]यह नहीं कि जो इस्लाम कबूल कर ले उनके लिए अमान है
[14:27]जो कलमा पढ़ ले उनके लिए अमान हैय ऐसी कोई शर्त नहीं
[14:31]रखी यह आपकी रहमत थी अगर आप यह शर्त रखना चाहते थे
[14:36]रख सकते थे आपने कल कयामत तक तमाम आने वाले मुसलमानों के
[14:38]सामने यह पैगाम पहुंचा दिया इस्लाम जबरदस्ती मनवाया जाने वाला दीन नहीं
[14:43]है जबरदस्ती किसी के दिल में इस्लाम को नहीं बिठाया जा सकता
[14:48]यह नहीं कहा जा सकता कि इस्लाम कबूल करेंगे तो तुम बच
[14:50]जाओगे कलमा पढ़ लोगे तो बच जाओगे वरना नहीं बचोगे ऐसा नहीं
[14:55]कहा फरमाया कि जो अपना घर अपने घर का दरवाजा बंद रखेंगे
[14:59]वो बच जाएंगे उन लिए अमान है जो फला के घर में
[15:00]दाखिल हो जाए उनके लिए अमान है जो यह आबादी छोड़कर पहाड़
[15:05]के ऊपर चढ़ जाए उनके लिए अमान है ठीक यानी आपने और
[15:10]फिर बाद में जब उनको बुलाया तो उनके सामने आपने आम माफी
[15:14]का लान फरमा लाका जाओ मैंने तुम सबको आजाद कर दिया और
[15:18]सब आपके आजाद करदा गुलाम बन गए और आपकी इस रहमत का
[15:25]असर क्या हुआ आपकी इस आम माफी का सर क्या हुआ यह
[15:31]लोग के जो अब तक दुश्मन थे आपके कलमा पढ़कर मुसलमान हो
[15:36]गए दायरे इस्लाम के अंदर आ गए तो आपकी जिंदगी मुकम्मल तौर
[15:39]पर रहमत है आपने अपने अपनी हयात तैबा के अंदर उम्मत के
[15:47]सामने जो अपनी सीरत छोड़ी माफ करने का आम माफी का जो
[15:49]आपके साथ दुश्मनी कर रहे हैं उनके साथ भी माफी का मामला
[15:54]आप इख्तियार फरमा रहे तो यही वजह है कि हजरत रसूल अकरम
[16:00]सला की पूरी जिंदगी के हवाले से अल्लाह ताला ने फरमाया लक
[16:03]रसना पूरी जिंदगी के अंदर तुम्हारे लिए क्या है उसव हसना मौजूद
[16:10]है तबलीग इस्लाम के सिलसिले में आपके लिए उसव हसना मौजूद है
[16:12]तबलीग इस्लाम की राह में इस्तकामेश्वरी कैसे सुलूक करना है उसमें आपके
[16:30]लिए उसवा है अपने दोस्तों के साथ कैसे उठना बैठना है उसके
[16:36]लिए आपके लिए उसमें आपके लिए उसवा है अपने घर के अंदर
[16:38]अपनी बीवी बच्चों के साथ कैसे पेश आना है उसमें आपके लिए
[16:43]उसवा है और जंग और जदल के मौके पर भी जब मैदान
[16:48]जंग के अंदर भी हो तो वहां पर भी अखलाक यात का
[16:52]दामन कैसे थाम कर रहना है उसमें आपके लिए दु उसवा हसना
[16:57]है अपने दुश्मनों के साथ भी दुश्मनी में आगे ना बढ़ने में
[16:59]आपके लिए उसवा है पूरी हयात तैयबा और सीरत तैबा क्या है
[17:05]तमाम मुसलमानों के लेकर रहती दुनिया तक उसवा है कि अगर सीरत
[17:08]के किसी एक पहलू को भी अगर आप ले लेंगे तो हमारी
[17:12]जिंदगी के लिए हमारी बख्श के लिए हमारी नजात के लिए क्या
[17:16]है ये काफी होगा एक सवात पढ़ लीजिए मोहम्मद और आल मोहम्मद
[17:18]के ऊपर [संगीत] अल्ला अब इस मौजू के अगले नुक्ते की जानिब
[17:27]हम बढ़ते हैं के जिसमें कुराने करीम की आयात करीमा की रोशनी
[17:34]में आप सला वसल्लम के जो असब हैं और अहले बैत अर
[17:40]अल सलाम है उसके हवाले से क्या तालीमाबाद भाई से अर्ज भी
[17:51]किया था कि मौजू काफी वसी आपने इंतखाब किया है और इसके
[17:57]अंदर खुद चंद मौजू आत जो है वो बिहान है और इनमें
[18:02]से हर एक के ऊपर बहरहाल तफसील अलग-अलग अगर गुफ्तगू की जाए
[18:05]तो ज्यादा बेहतर लेकिन क्योंकि मौजू रखा गया है और आपके जहन
[18:11]में भी यह है तो इसलिए मैं चंद खसारी सबसे पहले अहले
[18:16]बैत अथर अल सलाम के हवाले से कुरान करीम की सिर्फ चंद
[18:22]एक मुंतखाब आयात करीमा का हम हवाला दे देते हैं और उसके
[18:25]बाद जो है आगे बढ़ लेते हैं आप जानते हैं कि सर
[18:30]इमरान आयत नंबर 61 के अंदर अल्लाह ताला ने मुबा हला के
[18:33]मौके पर इरशाद फरमाया कि फन मा जा मता नाना बनाक साना
[18:44]नास न फला का सर आल इमरान आयत नंबर 61 के जब
[18:52]नसरा नजरान के लोग आए और उन्होंने आपके साथ मुनाजरा किया पहले
[18:57]तो बहस की बहस जदल किया आपने उन्हें समझाया कि देखें किसी
[19:02]बंदे का बाप के बगैर इस दुनिया में आने का मतलब यह
[19:07]नहीं है कि वह अल्लाह ताला का बेटा है हजरत ईसा अल
[19:10]सलाम के हवाले से वह यही दावा कर रहे थे कि क्योंकि
[19:14]जनाब ईसा अल सलाम का कोई बाप नहीं है बगैर बाप के
[19:15]वह पैदा हो गए तो बस बाप कौन है अल्लाह ताला है
[19:19]तो आपने दलील के तौर पर इरशाद फरमाया था कि अगर हजरत
[19:25]ईसा अल सलाम बगैर बाप के अगर पैदा हो हजरत आदम और
[19:29]हव्वा तो बगर मां बाप के पैदा हो गए बगैर मां-बाप के
[19:31]इस दुनिया में फिर उनके बारे में क्या कहोगे लेकिन इसके बावजूद
[19:35]उन्होंने दलील को नहीं माना नहीं माना तो आखिर का नतीजा क्या
[19:38]मुबा हला करले आए दुआ कर लेते हैं दोनों एक दूसरे के
[19:44]में बददुआ कर लेते हैं जो झूठा होगा उसके ऊपर अल्लाह ताला
[19:48]की लानत हो और जिसके ऊपर अल्लाह ताला की लानत होगी वह
[19:50]क्या है अजाब नाजिल हो जाएगा और पता चलेगा कि जो बच
[19:54]जाए वो हक है और जो हलाक हो जाए वो क्या है
[19:56]बातिल था और उस मौके पर य आयते करीमा जब ये आयत
[20:00]करीमा नाजिल हो गई तो हजरत रसूल अकरम सल्ला वसल्लम हजरत अमीर
[20:05]मोमिनीन अली अल सलाम को अनफुरलेबल के अंदर और इन पाक हस्तियों
[20:22]को जब मैदान मुबा हला के अंदर व नसा नजरान के लोग
[20:24]देखते हैं तो उन्हें यकीन हो जाता है कि यह सच्चे हैं
[20:29]लेकिन सच्चा होने के यकीन होने के बावजूद ईमान नहीं लाते जजिया
[20:33]देकर अपने दीन के ऊपर बाकी रहने का ऐलान करते हैं होना
[20:35]तो यह चाहे ता कि ऐलान इस्लाम कबूल कर ले सच्चाई का
[20:39]इल्म हो गया ना कि ये सच्चे हैं और उनके अल्फाज बहरहाल
[20:44]इस आयत करीमा से मालूम यह होता है कि अहले बैत अर
[20:46]अलम सलाम कौन है कुरान करीम कीन आयात करीमा ने आकर बताया
[20:51]कि अहले बैत अथर वो है कि जिनको इस आयत करीमा के
[20:55]नुजूल के बाद आप मैदान मुबा हला के अंदर लेकर जा रहे
[20:57]हैं और वो सिवाय पंजतन पाक के कोई नहीं है कुराने करीम
[21:01]की इस आयत करीमा से यह बात वाज हो जाती है कि
[21:06]अहले बैत अहार में रसूल अम स के साथ साथ अमीर मोमिनीन
[21:10]की जाते गमी हजरत बीबी फातिमा जहरा सलाम अहा इमाम हसन अ
[21:12]सलाम और इमाम हुसैन की जात गराम असल बात पढ़ लीजिए मोहम्मद
[21:20]आल [संगीत] मोहम्मद जल्दी जल्दी मैं चंद आयात आपके सामने पेश करना
[21:25]चाहता हूं असल में तो इसलिए तेजी के साथ हम आगे बढ़
[21:30]रहे तफसील नहीं जा सर अजाब की आयत नंबर 33 आप सबको
[21:31]याद है बच्चे बच्चे को याद है अल्हम्दुलिल्लाह इमा रीला [संगीत] रा
[21:51]बहरहाल अल्लाह ताला का इरादा बस यही है कि अहले बैत आपसे
[21:56]हर तरह की नापाकी को दूर रख रख और ऐसे पाक पाकीजा
[22:00]रखे जैसे पाक रखने का हक है आय तहीर के उनवान से
[22:06]आप इसको जानते हैं और यह आयत करीमा बहर जिन हस्तियों के
[22:10]बारे में भी होगी उनकी इमत इससे साबित हो रही है वो
[22:12]पाक पाकीजा है और इससे मुराद कौन सी हस्तियां है रिवायत के
[22:17]अंदर आप देख लीजिए कि इस आयत करीमा के हवाले से रसूल
[22:22]अकरम सलाम के फराम भी मौजूद है कि इससे मुराद अली है
[22:24]फातिमा है हसन है और हुसैन अहले बैत अ मुसलाम के हवाले
[22:32]से और इसी तरह यह आयत करीमा हदीस किसा आप सबको याद
[22:34]है आप सब अक्सर हर हफ्ते इस हदीस किसा की तिलावत करते
[22:40]हैं इसी मौके की हदीस है जब आपने उस किसा के अंदर
[22:46]उस चादर ततहीर के अंदर पंजतन पाक को जमा फरमाया हजरत बीबी
[22:49]फातिमा जहरा सलामुला अलहा की चादर है और उस चादर के अंदर
[22:55][संगीत] अला उस चदर के अंदर हजरत रसूल अकरम तशरीफ फरमाए इमाम
[23:04]हसन तशरीफ लाते हैं आप भी आ जाते हैं इमाम हुसैन अल
[23:06]सलाम तशरीफ लाते हैं आप भी तशरीफ लाते हैं उसी चादर के
[23:09]नीचे अमीर मोमिनीन की जात ग्रामी आती है इजाजत लेकर वो भी
[23:13]आ जाते हैं और आखिर में जनाबे सैदा कनन सलाम उल्ला अलहा
[23:15]भी इजाजत लेते हैं और आप भी उसी चादर ततीर के अंदर
[23:19]तशरीफ लाते हैं जब उस चादर के अंदर यह पंजतन पाक जब
[23:24]आ गए अल्लाह ताला ने आयत करीमा नाजिल फरमाई तो इसका मतलब
[23:26]है कि अहले बैत से मुराद वो है कि जो इस चादर
[23:30]तहीर के नीचे हैं इसको सियाक और सेबाक के हवाले से देखना
[23:33]यह क्या है यह सही आयत करीमा किस मौके पर नाजिल हो
[23:39]रही है उसको आप देख लीजिए जाहिर है मुख्तलिफ आयात करीमा अल्लाह
[23:42]ताला ने कुरान करीम के अंदर अपनी खास मस्लत की बुनियाद पर
[23:47]खास मकामा पर रख दी लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि
[23:52]जहां आप आयत करीमा के माना और मफू को सिया को सबा
[23:53]के तनाज में देख ले और इस आयत करीमा के नुजूल के
[23:57]बाद रिवायत के अंदर आप देख लीजिए हुजूर अकरम सल्ला अलम का
[24:02]मामूल था कि आप जब भी मस्जिद के अंदर नमाज के लिए
[24:07]तशरीफ ले जाते तो हजरत बीबी फातिमा जहरा सलाम अलहा के घर
[24:09]के सामने खड़े होकर अस्सलाम वालेकुम या अहले बैत नबू कहकर खिताब
[24:12]फरमाते और उन्हे नमाज की दावत दे देते इस आयत करीमा के
[24:17]नुजूल के बाद रिवायत में बाज रिवायत के अंदर के छ महीने
[24:23]बाज रिवायत के अंदर कि नौ महीने आपका मामूल था रोजाना का
[24:25]मामूल था कि आप इस आयते करीमा के के बाद वहां पर
[24:29]अहले बैत के घर के दरवाजे पर खड़े होकर इस आयत करीमा
[24:34]की तिलावत भी फरमाते सलाम करते और नमाज की तरब देते और
[24:38]नमाज की दावत दे देते तो आपका अमल बता रहा है कि
[24:39]अहले बैत से मुराद यह हस्तियां है अहले बैत से मुराद यह
[24:44]घराना है कि जिस घराने के अंदर यह हस्तियां रहती है और
[24:48]व जनाब सद कोन सलामुला अलहा का घराना है एक इसके बाद
[24:51]सूर शूरा की आयत नंबर 22 है आप सबको याद है बच्चे
[24:58]बच्चे को अल्हम्दुलिल्लाह याद हैला हबीबा फरमा दीजिए कि मैं तुमसे कोई
[25:06]अजर सालत तलब नहीं करता सिवाय मेरे करीब तरीन रिश्तेदारों की मदत
[25:09]और मोहब्बत के पस इन हस्तियों की और आपसे पूछा गया कि
[25:14]या रस व कौन है कि जिनकी मोहब्बत और मोहब्बत मदत को
[25:17]उम्मत के ऊपर अल्लाह ताला ने फर्ज करार दे दिया इस आयत
[25:21]करीमा के अंदर तो आपने फरमाया फातिमा तोब आपने फरमाया कि वो
[25:27]फातिमा है आपके बाबा है और उसी तरह मौला कायनात की जात
[25:30]गिरामी हजरत इमाम हसन और इमाम हुसैन की जात गिरामी है आपने
[25:35]मिस्दा का तायन करके बताए कि इन हस्तियों से मुराद कौन है
[25:40]तो इन हस्तियों की मोहब्बत को अल्लाह ताला ने उम्मत के ऊपर
[25:43]फर्ज करार दे दिया कि इनकी मोहब्बत और मव दत क्या है
[25:47]उम्मत के ऊपर बतौर अजर रिसालत फर्ज है कि अगर वो मुसलमान
[25:50]है यकीनन है कलमा पढ़ने वाले तो उनके ऊपर फर्ज है कि
[25:55]व अपने दिलों के अंदर इनकी मोहब्बत को रखें और ये आम
[25:59]मोहब्बत नहीं अजर रिसालत के तरर हुजूर अकरम की आपने मैंने अर्ज
[26:03]किया अ आपके सामने मशक्कत को बर्दाश्त करके तकाली बर्दाश्त करके मुश्किलात
[26:08]बर्दाश्त करके इस्लाम के पैगाम को हम तक पहुंचाया उसके बदले में
[26:14]हम अगर आपकी खिदमत में कुछ अगर पेश कर सकते हैं वह
[26:16]आले अथर की मोहब्बत और मदत है कि जो अपने दिल में
[26:20]रख सकते हैं तो यह वह मोहब्बत है तो यह और इसी
[26:23]तरह सूरे हल अता की आयात करीमा को अगर आप देख ले
[26:28]कि जहां पर हस करीमन जब बीमार हो गए और बीमारी की
[26:30]वजह से बहरहाल रसूल खुदा सल्लल्लाहु अ वसल्लम के मशवरे से जब
[26:35]आपको यह बताया गया कि आप इनकी सेहत याबी के लिए नजर
[26:39]मानले मन्नत मान ले तो अल्लाह ताला इंशाल्लाह उसके तुफेल इनको सहत
[26:43]और सलामती अता फरमाए का और अमीर मोमिनीन अ सलाम और जनाबे
[26:48]सद कोन सलाम उल्ला अलहा ने मन्नत मानी बहरहाल जब उन्होंने मन्नत
[26:50]मानी तो बच्चों ने भी मन्नत मान ली और फिर रसूल खुदा
[26:55]सल्ला फिर उस मौके पर जब उनको सिहत और सलामती अता हो
[26:57]गई और मन्नत पूरा करने का वक्त जब आया तो रोजा रखा
[27:02]तीन दिन रोजा है और उस वक्त जो है जब इन्होंने खलास
[27:07]के साथ अपने माल को मिस्कीन और यतीम और असीर की खिदमत
[27:13]में पेश फरमाया और खुद पानी से इफ्तार फरमाया तो अल्लाह ताला
[27:16]ने आयत करीमा नाजिल फरमाई मुरा जो नजर पूरी करते हैं नजर
[27:26]पूरी करने के लिए रोजा रख जो नजर पूरी करते हैं और
[27:28]उस दिन से डरते हैं जिस दिन की बुराई हर तरफ फैली
[27:32]हुई होगी मिस्की सरा और अपनी ख्वाहिश के बावजूद मिस्कीन यतीम और
[27:41]असीर को खाना खिलाते हैं अपनी ख्वाहिश के बावजूद से मुराद क्या
[27:44]है भूख लगी हुई है खाना खाने का दिल कर रहा है
[27:49]यह रोटी खुद खाने का दिल कर रहा है लेकिन इसके बावजूद
[27:52]क्या है यतीम को दे रहे हैं मिस्कीन को दे रहे हैं
[27:56]और असीर को दे रहे हैं और फिर उसके बाद लान भी
[27:58]करते हैं इला जकरा कि हम यह जो कुछ दे रहे हैं
[28:07]यह अल्लाह रब्बुल इज्जत की राह में दे रहे और उससे ना
[28:08]तो हम कोई बदला चाहते हैं और कोई शुक्रिया चाहते हैं बगैर
[28:12]किसी शुक्रिया और बगैर किसी बदले के हम अल्लाह रब्बुल इज्जत की
[28:14]राह में यह चीजें पेश कर रहे हैं तो यह वह आयात
[28:18]करीमा है के जिन आयात करीमा में अल्लाह रब्बुल इज्जत ने अहले
[28:24]बैत अहार अल सलाम के मकाम और मरतबक बयान फरमाया और यह
[28:26]आयात कर जिन हस्तियों के हवाले से नाजिल हो गए वही अहले
[28:33]बैत है अहले बैत को इधर उधर तलाश करने की जरूरत नहीं
[28:35]है वही है कि जिनके बारे में आपने फरमाया कि वो चादर
[28:39]ततीर के अंदर जब आ गए थे तो हुजूर अम ने इरशाद
[28:42]फरमाया था अल्लाहु ला परवरदिगार यही मेरे अहल है अहले बैत कौन
[28:47]है यही है जो इस चादर तहीर के अंदर आए हैं तो
[28:52]कुरान करीम की आयात करीमा के अंदर बहरहाल अहले बैत अर अ
[28:55]सलाम के मकाम को और मरतबक अल्लाह ताला ने ने इन आयात
[29:00]करीमा के अंदर बयान फरमाया क्योंकि काफी तेजी के साथ आपके सामने
[29:03]मौजू के हवाले से चंद नुका पेश कर रहा हूं तो इसलिए
[29:07]सिर्फ खते सार के साथ चंद आयात पेश की है आयात करीमा
[29:11]की तदा इससे कहीं ज्यादा है अब उसके बाद अगले उनवान की
[29:14]जानिब अगर हम बढ़े सहाबा कराम के हवाले से कुरान करीम के
[29:19]अंदर जो अल्लाह रब्बुल इज्जत की जानिब से आयात करीमा जो नाजिल
[29:22]हो गई है ठीक है उनकी जानिब भी जरा जल्द जल्द हम
[29:26]इशारा कर लेते हैं और करीमा को जरा देख लेते हैं ताकि
[29:31]हमारे दिलों के अंदर बहल उनके हवाले से भी जो एक मफत
[29:38]है वह बढ़ जाए हकीकत का इल्म हो जाए सर मुबारक फ
[29:41]की आयत नंबर 18 के अंदर अल्लाह ताला ने इरशाद फरमाया है
[29:45]लरला मनी बाजरा सकी करबा अल्ला उन मोमिनीन से राजी हो गया
[30:02]जो दरख्त के नीचे आपकी बेयत कर रहे थे पस जो उनके
[30:04]दिलों में था वह अल्लाह को मालूम हो गया लिहाजा अल्लाह ने
[30:09]उन पर सुकून नाजिल किया और उन्हें करीबी फत इनायत फरमाई आप
[30:13]जानते हैं कि यह आयत करीमा सुले हुदबे मौके पर नाजिल हो
[30:19]गई सुले हुदबे मौके पर बहरहाल आप उमरे की नियत से आए
[30:22]थे लेकिन कुरेश के लोगों ने रास्ता रोक लिया हुदी बिया के
[30:25]मकाम पर रास्ता रोका और कहा हम आपको जाने नहीं देंगे कहा
[30:30]मुजा करराय और मुजक्र के बावजूद वह आपको इजाजत देने से इंकार
[30:33]उन्होंने किया तो बाद में बहरहाल आपने अपने कई नुमाइंदों को भेजा
[30:39]और फिर बाद में आपने वहां पर चकि बनूमैया के लोग थे
[30:41]तो आपने हजरत उस्मान को भेजा वहां पर लेकिन बहरहाल जाने के
[30:45]बाद उनके कत्ल की खबर यहां पर पहुंची तो हुजूर अकरम सल्लल्लाहु
[30:47]अल वसल्लम ने एक दरख्त के नीचे जो है सहाब कराम को
[30:52]तकरीबन आप रिवायत को अगर देखें 1400 लोग हैं 1400 लोग हैं
[30:55]जो इस सफर में आपके साथ शरीक हैं उनको वहां पर जमा
[30:57]फरमाया और उनसे आपने बेयत ले ली अब बेयत किस बात के
[31:02]ऊपर हो रही है इस बात के ऊपर हो रही है कि
[31:04]अगर यह लोग वैसे तो हम लड़ने के लिए नहीं आए जंग
[31:08]की नियत से तो नहीं आए थे हम आए थे उमरा करने
[31:11]की नियत से लेकिन अगर यह लोग लड़ना ही चाहते हैं तो
[31:12]हम लड़ने के लिए तैयार है यानी हम हुजूर अकरम सल्लल्लाहु सलम
[31:18]का साथ देंगे और आपकी कयादत में आपकी रहबरी में हम दुश्मनों
[31:24]के साथ कुरेश के साथ लोगों के साथ कुफा और मुशरिकीन के
[31:26]साथ अगर हमें लड़ना भी पड़े हम लड़ेंगे और मैदान छोड़कर भागने
[31:32]वाले हम नहीं जब इस इखलास के साथ हुजूर अकरम के दस्त
[31:34]मुबारक के ऊपर इन लोगों ने बेयत कर ली अल्लाह ताला ने
[31:38]आयत नाजिल फरमाई फरमाया कि बतक अल्लाह उन मोमिनीन से राजी हो
[31:44]गया जो दरख्त के नीचे आपकी बेत कर रहे थे यानी इस
[31:45]बेत के नतीजे में अल्लाह ताला ने अपनी रिजात का ऐलान इनके
[31:49]लिए फरमा दिया यह जो सहाब कराम का जब नाम आता है
[31:54]तो उनके साथ रजि अल्लाह अ इसी आयते करीमा और दूसरी आयते
[31:56]करीमा की वजह से कि जो अल्लाह ताला ने उनके हक में
[32:01]नाजिल फरमाई एकय इसी तरह अल्लाह ताला ने यहां पर यह भी
[32:09]फरमाया कि व साब मन मुजरी लसार नत सान रला जनारी अब
[32:20]सूरे मुबारक तौबा आयत नंबर 100 और मुहाजिरीन अंसार में से जिन
[32:29]लोगों ने सबसे पहले सबक की किस चीज में इस्लाम में इस्लाम
[32:31]कबूल करने में सबसे पहले सकत सकत की और जो नेक चाल
[32:37]चलन में उनके पेरो हुए यानी जो ताबी है अल्लाह उनसे राजी
[32:41]हुआ और वह अल्लाह से राजी हुए और अल्लाह ने उनके लिए
[32:44]ऐसी जन्नतें तैयार की है जिनके नीचे नहरें बहती होंगी उनमें वह
[32:50]अबद तक हमेशा रहेंगे यही अजीम कामयाबी है रिजय का ऐलान उस
[32:53]आयत में भी हुआ जब दरख्त के नीचे बैठकर उन्होंने हुजूर अकरम
[32:57]के दस्त मुबारक के ऊपर बेयत की और इसी तरह इस आयत
[33:02]करीमा के अंदर भी ऐलान हुआ कि जब इन लोगों ने इस्लाम
[33:03]कबूल करने में बाकी लोगों के ऊपर सबक ली अब यह सबक
[33:08]हासिल करने वाले एक तो मक्के मुकर्रमा के दौरान मक्की मुहाजिरीन में
[33:12]ऐसा अगर आप देखें तो इब्तिदा में इस्लाम कबूल करने वाले हिजरत
[33:17]से पहले इस्लाम कबूल करने वाले और अंसार के तबार से अगर
[33:20]आप देख ले मदीने वालों के तबार से तो बहरहाल उलमा ने
[33:24]बयान फरमाया एक तो बत उबा के मौके पर आकर ईमान कबूल
[33:28]करने वा वा और बेयत करने वाले वो और ज्यादा से ज्यादा
[33:30]बद्र से पहले जंगे बद्र से पहले ईमान लाने वाले वह सब
[33:35]क्या है इन साबिक में शामिल है और बाकी लोगों ने इनके
[33:39]इतबा में क्या है इनके रास्ते को अपनाया और फिर उनका साथ
[33:42]दिया तो यह सब कौन है वह है कि जिनसे अल्लाह रब्बुल
[33:46]इज्जत ने अपनी रिजय का ऐलान फरमाया इसी तरह सूर फत की
[33:51]आयत नंबर 3 को अगर आप देख लें तो यहां पर भी
[33:56]सहाबा कराम की तारीफ है तमजीद है मोहम्मद रसूलल्लाह स मोहम्मद तो
[33:59]बस अल्लाह के रसूल है ार र रार सुला ी मा म
[34:13]सुज अल्लाह मोहम्मद अल्लाह के रसूल है और जो लोग उनके साथ
[34:19]हैं वह कुफ फार पर सखत यानी इनके फजल बयान हो रहे
[34:24]साब कराम और जो लोग इनके साथ है वह कुफ फार पर
[34:27]सखत गीर है और आपस में बड़े मेहरबान हैं कुफर के खिलाफ
[34:30]सख्त है लेकिन आपस में बड़े मेहरबान है आप उन्हें रुकू सुजूद
[34:36]में देखते हैं वह अल्लाह की तरफ से फजल और खुशनूर के
[34:43]तलबगार हैं सजदों के असरात उनके चेहरों पर सजदों के असरात से
[34:46]उनके चेहरों पर निशान पड़े हुए हैं सजदे के निशानाथ उनके यही
[34:51]औसाफ रेत में भी है और इंजील में भी है और यहां
[34:52]से आगे मजीद तो ये क्या है सहाब कराम के हवाले से
[34:57]कि जो स के साथ है उनके सा साफ अपनों के साथ
[35:02]बड़े मेहरबान है और दुश्मनों के साथ बड़े सखत है दुश्मनों के
[35:07]खिलाफ य लोग बड़े सखत है और उनसे मुकाबला करने वाले हैं
[35:09]इसी तरह एक और मुकाम पर सूर फत की आयत नंबर 10
[35:14]के अंदर इरशाद फरमाया इ का उसी के तनाज में जो इससे
[35:20]पहले आपके सामने दरख के नीचे वाली आयत पेश की थी माला
[35:25]यला बकी जो लोग आपकी बत कर रहे हैं वह यकीनन अल्लाह
[35:31]की बेयत कर रहे हैं हबीब जो आपकी बेयत कर रहे व
[35:36]हकीकत में अल्लाह की बत कर रहे हैं अल्लाह का हाथ उनके
[35:40]हाथ के ऊपर है अल्लाह का हाथ उनके हाथ के ऊपर है
[35:42]पस जो अहद चिकनी करता है वह अपने साथ चिकनी करता है
[35:46]और जो इस अहद को पूरा करे जो जो उसने अल्लाह के
[35:50]साथ कर रखा है तो अल्लाह अन करीब उसे अजरे अजीम अता
[35:55]फरमाए का तो यहां पर भी आप देखें इनकी तारीफ और तमजीद
[35:57]कम की फरमाई अल्लाह रब्बुल जत ने इसी तरह सूर हदीद की
[36:05]आयत नंबर 10 जिसके अंदर अल्लाह ताला फरमाया ललाला ला कतल उला
[36:17]का द मत ला ला मालर और तुम्हे क्या हो गया है
[36:28]कि तुम राह खुदा में खर्च नहीं करते जबकि आसमानों और जमीन
[36:31]की मेरास अल्लाह के लिए है तुम में से जिन्होंने फत मक्का
[36:37]से पहले खर्च किया और किता किया वह दूसरों के बराबर नहीं
[36:44]हो सकते यानी फत मक्का से पहले ईमान लाने वाले और किता
[36:46]करने वाले सहाब कराम का मकाम मर्तबा ज्यादा है उनका मकाम और
[36:52]मर्तबा बुलंद है वो उनके बराबर नहीं हो सकते उनका दर्जा बहुत
[36:55]बड़ा है इन लोग लोगों से उन लोगों से जिन्होंने बाद में
[37:01]खर्च किया और मुकाबला किया बाद में से मुराद फत मक्का के
[37:03]बाद यानी फत मक्का के बाद ईमान लाने वाले और फत मक्का
[37:08]के बाद किता करने वाले लोगों से उन लोगों का दर्जा ज्यादा
[37:14]बुलंद है कि जिन्होंने फत मक्का से पहले ईमान और इस्लाम कबूल
[37:16]किया और जिहाद किया उनका मकाम और मर्तबा बुलंद है और ज्यादा
[37:20]है अलबत्ता अल्लाह ताला ने तो सबसे अच्छाई का वादा किया है
[37:26]और अल्लाह तो हमा आमाल से खूब आगाह है लासना अगरचे उनका
[37:32]दर्जा जो पहले वाले हैं उनका दर्जा ज्यादा है बाद वाले लोगों
[37:38]से लेकिन इसके बावजूद ईमान का और अच्छाई का जो वादा है
[37:41]वह सबसे यानी इन सारे लोगों से अल्लाह ताला ने नेकी का
[37:45]और अच्छाई का वादा फरमाया बाज बहल मुरी ने यहां पर अच्छाई
[37:50]से मुराद जन्नत भी ली है यानी अल्लाह ताला ने सबसे क्या
[37:52]है जन्नत का वादा लिया है जन्नत का वादा फरमाया कि जो
[37:58]फते मक्का से पहले ईमान लाए या फत मक्का के बाद ईमान
[38:02]लाए तो इससे नतीजा क्या निकल रहा है कि सारे सहाब कराम
[38:03]क्या है जन्नती है और सब जन्नतुल फिरदौस के अंदर जाने वाले
[38:09]हैं ठीक इससे एक नतीजा य और उसके बाद आप देखले सूरे
[38:14]निसा की आयत नंबर 95 सूर निसा वहां पर भी इसी तरह
[38:20]ला ल मुजा सबीला लाना ला मुजा मा सूरे निसा आय न
[38:42]95 बगैर किसी मजूरी के घर में बैठने वाले मोमिनीन और राहे
[38:46]खुदा में जान और माल से जिहाद करने वाले मोमिनीन यसा नहीं
[38:50]हो सकते बराबर नहीं हो सकते ठीक जो जिहाद नहीं कर रहे
[38:57]जो बगैर किसी जजर के अपने घरों में बैठे हुए हैं और
[38:59]वह जो मैदान जंग के अंदर जिहाद कर रहे हैं वह बराबर
[39:05]नहीं हो सकते अल्लाह ने बैठने बैठे रहने वालों के मुकाबले में
[39:08]जान और माल से जिहाद करने वालों का दर्जा ज्यादा रखा है
[39:12]जो बैठे हुए हैं उनसे ज्यादा उनका मकाम है कि जो मैदान
[39:17]में जिहाद कर रहे हैं उनका ज्यादा दर्जा रखा है गो अल्लाह
[39:22]ने सबके लिए नेक वादा फरमाया है अगर च उनका दर्जा ज्यादा
[39:25]है उनका मकाम लेकिन सबके लिए नेक वादा फरमाया है मगर बैठने
[39:34]वालों की निसबत जिहाद करने वालों को अजरे अजीम की फजीलत बख्शी
[39:39]है यकीनन जिहाद करने वालों का मकाम बहुत बुलंद है उनका मर्तबा
[39:44]बहुत ज्यादा है लेकिन वादा नेकी का सबसे है जो बैठे रहे
[39:46]उनसे भी और जो मैदान के अंदर आ गए उनसे भी तो
[39:50]यहां पर भीला हुसना हर एक से अल्लाह ताला ने हुसना का
[39:56]मैंने अर्ज किया हुसना का माना और जो उसकी तफसीर बयान की
[40:01]बाज लोगों ने जन्नत इससे मुराद ली है या इससे मुराद क्या
[40:04]इन सबके लिए अल्लाह ताला ने जन्नत का एक लिहाज से लान
[40:09]फरमा दिया तो यह आयात और भी चंद आयात करीमा है कई
[40:13]आयात करीमा जिनके अंदर मजीद जो है सहाब कराम की बहल फजीलत
[40:15]है और उनकी तारीफ वगैरह अल्लाह ताला ने कुरान करीम के अंदर
[40:19]बयान फरमाई हुई है ठीक तो अब क्या सवाल य है क्या
[40:28]सहाब कराम के हवाले से कुरान करीम के अंदर सिर्फ इस तरह
[40:33]की आयात है तारीफ पर मुश्त मिल आयात है या दीगर आयात
[40:37]भी है तो हम कुरान करीम की दीगर आयात करीमा को जब
[40:39]देखते हैं बाकी सरतो को जब देखते हैं तो वहां पर ऐसी
[40:43]आयत भी है कि जिन आयात करीमा के अंदर अल्लाह ताला ने
[40:48]सरज निश भी फरमाई है जिन आयात करीमा के अंदर अल्लाह ताला
[40:52]ने उनकी मजम्मत भी फरमाई हुई है यानी दोनों तरह की आयत
[40:55]हैं तारीफ वाली आयात करीमा भी है मुमत और सरज वाली आयात
[41:00]करीमा भी है ठीक तो उनमें से चंद आयात करीमा सिर्फ आपके
[41:02]सामने पेश करल ताकि दोनों तरह की आयात का एक मफू बल
[41:08]आपके सामने आ सके सूर मुबारक तबा की आयत नंबर 25 के
[41:14]अंदर अल्लाह ताला ने इशाद फरमाया लारा ठीक सूर तौबा में बकी
[41:30]बहुत से मकामा पर अल्लाह तुम्हारी मदद कर चुका है और हुनैन
[41:34]के दिन भी अल्लाह तुम अल्लाह ने तुम्हारी मदद की जंग हुनैन
[41:40]के मौके पर भी अल्लाह तु मदद की है जब तुम्हारी कसरत
[41:41]ने जंग हुनैन की बात हो रही है जब तुम्हारी कसरत ने
[41:45]तुम्हें गुरूर में मुब्तला कर दिया था मगर वह तुम्हारे कुछ भी
[41:53]काम ना आई तुम्हारी कसरत तुम्हारे काम ना आई और जमीन अपनी
[41:56]वसत के बावजूद तुम पर तंग हो गई फिर तुम पीठ फेर
[42:02]कर बाग बाग खड़े हुए थे मैदान छोड़कर भाग गए थे मुसलमान
[42:08]ज्यादा थे फते मक्का के मौके पर 100 हज मुसलमान थे फिर
[42:11]यहां पर नए मुसलमान 2000 थे तो 12000 के लश्कर के साथ
[42:17]हुजूर अकरम हुनैन के लिए निकले थे और उनकी तादाद तो कम
[42:21]थी उससे 4000 के करीब उनके थे मुसलमान पहली मर्तबा कसरत में
[42:24]थे अपने दुश्मनों से तो बाज कह रहे थे हम कौन हमें
[42:29]शिकस्त दे सकता है कौन हमें भगा सकता है हम तो इतनी
[42:33]बड़ी तादाद में है अब देखते हैं कौन हमारे मुकाबले में आज
[42:35]और जब वहां पर गए तो अचानक उन लोगों ने छुपकर ऐसा
[42:40]हमला किया मैदान छोड़कर भाग गए अल्लाह ताला ने यहां पर तुम
[42:42]गुरूर का शिकार हो रहे थे तकब्बल तुम्हारे काम ना आई यानी
[42:52]कसरत की वजह से बाद में फ कामयाबी मि कसरत की वजह
[42:57]से नहीं मिली ईमान शुजात की वजह से मिली ईमान की ताकत
[43:01]के साथ जब आप बाद में लड़े तो कामयाबी मिली कसरत और
[43:05]इन चीजों को देखकर अल्लाह ताला की के इसकी वजह से आपको
[43:07]का बल्कि मौका ऐसा आया था कि जमीन अपनी वसत के बावजूद
[43:11]तुम पर तंग हो गई थी और तुम पीठ फिर कर क्या
[43:14]है फेर कर भाग या हुजूर अकरम को छोड़कर भाग गए थे
[43:19]सिवाय चंद लोगों के जो यहां पर बैठे थे सूर आल इमरान
[43:20]की आयत करीमा को अगर आप देख ले तो वहां पर भी
[43:23]बहरहाल इस तरह की सरज निश वहां पर मिलती है कि जब
[43:27]उन्होंने हुजूर अकरम सलाम को जंग उहुद में साथ छोड़ा था तो
[43:31]जंग उहुद वाला मामला तो चला अ ये कहने कि इब्तिदा दौर
[43:33]का है लेकिन जंगे हुनैन वाला मामला तो आठ हिजरी का है
[43:37]यानी उस वक्त भी कुछ लोगों ने साथ छोड़ा और वह मैदान
[43:39]छोड़कर भाग गए पैगंबर अकरम उनको पीछे से बुलाते रहे लेकिन वह
[43:43]ऐसे भागे जा रहे थे जैसे हुजूर अम के बात आवाज सुन
[43:47]ही नहीं रहे थे इस तरह वह क्या है पहाड़ के ऊपर
[43:48]भागे सूर आल इमरान के अंदर अल्लाह ताला ने इन चीजों को
[43:52]वहां पर बयान फरमा दिया इसी तरह सूरे तौबा ही की आयत
[43:56]नंबर के अंदर इशाद हैमन मालक सीला ईमान वालो तुम्हें क्या हो
[44:08]गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि अल्लाह की राह
[44:10]में निकलो तो तुम जमीन से चिमक जाते हो अल्लाह की राह
[44:15]में निकलने के बजाय तुम जमीन से चिमक जाते हो अराया दुनिया
[44:21]मनया दुनिया मरा मा मता हया दुनिया फमा मता हया दुनिया फला
[44:29]कलील और उसके बाद फरमाया क्या तुम आखिरत की जगह दुनियावी जिंदगी
[44:35]को ज्यादा पसंद करते हो दुनियावी जिंदगी की मता तो आखिरत के
[44:39]मुकाबले में बहुत कम है हुजूर अकरम सलाम बहरहाल तबू के लिए
[44:47]लोगों को आमादा फरमा रहे थे न हिजरी का वाकया है न
[44:51]हिजरी के तनाज में जंग तबू के लिए मुसल आप लोगों को
[44:55]फरमा रहे हैं कि आ जाए रोमियो की जानिब से खतरा है
[45:00]मुसलमानों के ऊपर हमले का खतरा है तो लश्कर तैयार कर ले
[45:02]मुसलमानों मुसलमान वहां पर क्या है जिहाद के लिए निकलने के और
[45:06]कुछ लोग ऐसे थे कि जो जमीन से चिमटे हुए थे उठने
[45:10]के लिए तैयार ही नहीं थे आप बार-बार उन्हें बुला रहे और
[45:12]यह जो है जमीन के सा यानी और इनके हवाले से हुजूर
[45:16]अल्लाह ताला ने फरमाया क्या तुम्हारे लिए आखिरत से ज्यादा दुनिया तुम्हें
[45:22]पसंद है जबकि एक साहिबे ईमान को एक मोमिन को दुनिया आखरत
[45:26]दुनिया से ज्यादा क्या है आखरत मुकदम होनी चाहिए क्योंकि दुनिया की
[45:31]जिंदगी थोड़ी सी है आखरत की जिंदगी अबद और हमेशा रहने वाली
[45:36]जिंदगी तो यहां पर अल्लाह ताला ने क्या है उनके हवाले से
[45:41]सरज निश के अंदाज में य आयत करीमा नाजिल फरमा इसी तरह
[45:43]सूर अजाब की आयत नंबर 12 को अगर आप ले ले यहां
[45:47]पर इशाद मुना मरज मा वादल्ला रसूल इलारा और जब मुनाफिकन और
[45:59]दिलों में बीमारी रखने वाले कह रहे थे अल्लाह और उसके रसूल
[46:02]ने हमसे जो वादा किया था वह फरेब के सिवा कुछ ना
[46:06]था नौजुबिल्लाह मिन जालिक यह किस मौके की है जंगे खंदक के
[46:12]मौके की है जंगे खंदक में आप जानते हैं ना कि कुफा
[46:18]कुरेश 10000 हैं मुसलमान सिर्फ 3000 है और बड़ी मुश्किल से खंदक
[46:20]खोद के अपना बचाव कर रहे हैं तो और वह लोग उस
[46:24]तरफ है और यहां पे मुसलमान तो उस मौके पर एक तो
[46:29]मुनाफिकन का अलग तस्करा किया है ल मुनाफिक मुनाफिकन ने भी कहा
[46:32]और उसके अलावा किन लोगों ने उन लोगों ने कहा कि जिनके
[46:37]दिलो के अंदर मरज था यानी कमजोर ईमान वाले अफ कह रहे
[46:41]थे क्या कह रहे थे पैगंबर अने जो आपसे कहा है ना
[46:43]कि आपको कामयाबी मिलेगी अल्लाह की नुसरत आएगी यह सब फरेब है
[46:48]कुरान करीम के अल्लाह ताला ने उनकी सरज निश फरमाई तुम नबी
[46:50]के बारे में यह कह रहे हो हुजूर अकरम तुम्हें धोखा देंगे
[46:54]फरेब देंगे अल्लाह ताला ने यहां पर पर उनके लिए फरमाया कि
[46:57]इनके दिलों के अंदर मरज है बीमारी है जिसकी वजह से वह
[47:02]क्या है ऐसी बातें कर रहे हैं वरना हुजूर अकरम सला कैसे
[47:08]नज बिल्ला किसी को इस तरह फरमा सकते हैं और फिर फरमाया
[47:12]ला मुका मलक फर और जब उनमें से एक गुरुह कहने लगा
[47:20]यस वालो मदीने वालों तुम्हारे लिए यहां ठहरने की कोई गुंजाइश नहीं
[47:26]है वापस लौट जाओ हुजूर बला और क वापस लौट जाओ ी
[47:36]यरीला फरारा और फिर पस लो और उनमें से एक गुरुह नबी
[47:40]से इजाजत तलब कर रहा था मैदान से वापस जाने की इजाजत
[47:44]तलब कर रहा था क्या कहते यह कहते हुए हमारे घर खुले
[47:49]पड़े हैं मदीने के अंदर हमारे घर खुले पड़े हैं हमें जाने
[47:54]की इजाजत दीजिए हालांकि वह खुले नहीं थे वह सिर्फ भागना चा
[47:56]चाहते थे वह सिर्फ फरार चाहते थे इसलिए बहाने बना रहे थे
[48:00]इस इंतिहा खतरनाक मौके पर हुजूर अकरम सल्ला वसल्लम को वहां पर
[48:07]छोड़ कर क्या है भागने का बाज लोग जो है वो भागने
[48:11]की कोशिश कर रहे और बहाना भी बना रहे हैं झूठा बहाना
[48:12]हमारे घर खुले पड़े हैं हम जरा जाकर अपने घर को बंद
[48:17]बंद करके तो आ जाए दरवाजे खुले पड़े हैं वहां उसको ताला
[48:20]तो लगा के आ जाए अल्लाह ताला फरमा रहे इनके घर खुले
[48:21]नहीं है यह मैदान से भागने का बहाना कर रहे हैं यह
[48:26]रा इनकी एक लिहा से मुमत ला और अगर दुश्मन उन पर
[48:39]शहर के अतरा से घुस आते फिर उन्हे उस फित की तरफ
[48:44]दावत दी जाती तो व उसमें पड़ जाते और उसमें सिर्फ थोड़ा
[48:46]ही तवक करते यानी दुश्मन के लोग आकर कुरेश के लोग आकर
[48:52]इनको बुला लेते कि हमारे साथ आकर मिल जाओ मिलने के लिए
[48:56]तैयार हो जाते दुश्मन के साथ जाकर मिलने के लिए तैयार हो
[48:59]जाते तवक नहीं करते थोड़ा सा तवक करते चले जाते नलाला मन
[49:06]कब ला बार ला मसला लाक पहले यह लोग अल्लाह से अहद
[49:13]कर चुके थे कि पीठ नहीं फेरें और अल्लाह के साथ होने
[49:19]वाले अहद के बारे में बाज पुस उनसे होगी ठीक लेकिन इसके
[49:22]बावजूद यह लोग जा वहां से भागकर जाने के लिए तैयार थे
[49:26]और उधर से भागने की कोशिश कर रहे थे और फिर बाज
[49:37]लोगों के हवाले से अल्लाह ताला ने सूर आल इमरान के अंदर
[49:43]जो वहां पर थे पैगंबर अकरम सलाम की बहरहाल शहादत की खबर
[49:46]एक मौके पर पहुंची ठीक है तो उस मौके पर सब लोग
[49:50]आपको छोड़कर जो भागे तो उसके मौके पर फरमाया सूर आल इमरान
[49:54]आयत नंबर 144 ला रसूल मोहम्मद सला तो बस रसूल ही है
[50:00]कलत मन कस उनसे पहले और भी रसूल गुजर चुके हैं अ
[50:10]माता तिला क भला अगर यह वफात पा जाए या कतल कर
[50:18]दिए जाए तो क्या तुम उल्टे पाव उल्टे पाव फिर जाओगे यलाला
[50:26]ला और जो उल्टे पांव फिर जाएगा वह अल्लाह को कोई नुकसान
[50:30]नहीं पहुंचा सकेगा और अल्लाह अन करीब शुक्र गुजार को जजा देगा
[50:35]जंग उहुद के मौके पर जब अचानक वह हमला हुआ तो उस
[50:40]मौके पर एक मौका ऐसा आया के हुजूर अकरम सलाम की शहादत
[50:45]की खबर फैली किसी ने कह दिया कि मोहम्मद मारे गए हैं
[50:48]तो सब लोग भाग गए हालाकि हुजूर अकरम शहीद नहीं हुए थे
[50:52]लेकिन सब लोग भाग गए और पहाड़ की जानिब जो वो भागने
[50:56]लगे और भागते हुए यह कहने लगे अब इस दन के अंदर
[51:01]रहने का क्या फायदा अब दोबारा अपने पुराने आबा और अजदाद के
[51:03]दीन की तरफ हम वापस पलटते हैं और उससे जो है सरदार
[51:07]कुरेश से हम जरा अपने लिए अमान नामा भी हासिल कर लेते
[51:11]हैं ताकि वह हमें बख्श दे और हमें माफ कर दें यह
[51:16]कहते हुए लोग भाग रहे अल्लाह ताला ने फरमाया मोहम्मद तो अल्लाह
[51:18]के रसूल हैं अभी तो वैसे तो नहीं मारे गए आप शहीद
[51:23]नहीं हुए अगर मारे जाएं या अगर कत्ल हो जाएं अगर इस
[51:24]दुनिया से चले जाएं तो क्या तुम वापस उल्टे पांव फिर जाओगे
[51:29]अपने पुराने दन की जानिब अल्लाह ताला इल तुम वापस अपने आबा
[51:35]अजदाद के दन की जानिब तुम पलट जाओगे ठीक है हुजूर अकरम
[51:38]सला अगर नहीं है तो क्या हु आपका दन तो है आप
[51:42]जो दीन लेकर आए आप जो पैगाम लेकर वोह तो मौजूद है
[51:46]उस दन के ऊपर तुम बाकी इनके एक लिहाज से सरजन फरमाए
[51:49]और जो उल्टे पांव फिर जाएगा अल्लाह को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा
[51:52]जसे अल्लाह का क्या नुकसान होगा नुकसान होगा तो आपका ना होगा
[51:57]क्या आप य दन को छोड़कर दूसरी तरफ आप चले जा रहे
[52:01]हैं लेकिन जो अकब शुक्र गुजार है उनको तो अल्लाह ताला जजा
[52:03]देगा और उसके बाद अ जता लला जा त फर क्या तुम
[52:19]लोग यह समझते हो कि जन्नत में यूं ही चले जाओगे हालांकि
[52:24]अभी अल्लाह ने यह देखा ही नहीं कि तुम में से जिहाद
[52:28]करने वाले कौन हैं और सब्र करने वाले कौन हैं और तुम
[52:29]में से कुछ लोग ऐसे थे कि जो इससे पहले मौत की
[52:32]तमन्ना कर रहे थे ये वक्त आने से पहले जिहाद का ये
[52:35]वक्त आने से पहले मौत की तमन्ना कर रहे थे और तुम
[52:39]देख रहे थे उनको अपनी आंखों से तो यानी कुरान करीम की
[52:41]तमाम आयात करीमा का अगर आप जायजा ले तो वहां से एक
[52:46]बात साबित हो जाती एक बात जो है वो सामने आ जाती
[52:50]है कि जो अल्लाह और अल्लाह के रसूल की इता करें उनके
[52:54]लिए अल्लाह रब्बुल इज्जत की जानिब से अजर है ठीक है वला
[52:56]रसू और जो अल्लाह ताला और अल्लाह ताला के रसूल की नाफरमानी
[53:01]करें और उनके नक्श कदम पर अगर ना चले तो उनके लिए
[53:02]अल्लाह रब्बुल इज्जत की तरफ से जहन्नम का वादा फरमा है बहरहाल
[53:06]चंद आयात करीमा थी इन आयात करीमा की तफसील में हम इसलिए
[53:11]नहीं गए ताकि कोई सवाल फिर बाद में ना उठ जाए तो
[53:12]इसलिए हमने सिर्फ आयात को पेश करने का और आयात करीमा का
[53:16]तर्जुमा करने के ऊपर इफा किया है उसके ऊपर हाशिया नहीं लगाया
[53:21]है जाहिर है ठीक है तो इस वजह से वरना इनके ऊपर
[53:22]काफी ज्यादा गुफ्तगू की गुंजाइश है दुआ है परवरदिगार बहक मोहम्मद और
[53:28]आले मोहम्मद हमें कुरान करीम की आयात करीमा को पढ़ने और उनकी
[53:31]तालीमाबाद
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