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Sabeel Media | Jahez ke Demand karna? | Jahez Jaiz ya Haram! | Jahez in Islam | Dowry System?
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24/07/29
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#Nuqtenigah #Jahez #Dowry
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Transcript
[0:00]लड़की वालों से मुख्तलिफ बहानू से जहेज की मांग की जाती है
[0:04]बाइक और कार से बात शुरू होती है और कैश फ्लैट और
[0:08]बंगले तक बात पहुंच जाती है क्या इस तरीके से जहेज की
[0:10]डिमांड करना सही है क्या यह चीज दुरुस्त है इस्लाम की निगाह
[0:14]में जहेज की हैसियत क्या है और दीन उसे किस तरीके से
[0:19]देखता है आइए जानते हैं इस वीडियो में नुक्ता ए निगाह हौज
[0:21]इलमिया कुम की तुल्ला की जानिब से नश्र होने वाला ऐसा प्रोग्राम
[0:27]है जिसमें हमारी हर बात मुस्त और मुस्त दल यानी ऑथेंटिक और
[0:29]रेशनल होती है और तमाम पॉइंट्स जो पेश किए गए हैं डिस्क्रिप्शन
[0:32]में उनके रेफरेंसेस मौजूद हैं youtube0 पर लोगों ने हमारे चैनल को
[0:39]सब्सक्राइब नहीं किया है और सिर्फ 25 पर सब्सक्राइबर्स ने ही बेल
[0:43]आइकॉन को प्रेस किया है हम तमाम व्यूवर्स से दरख्वास्त करते हैं
[0:46]कि हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन को प्रेस करें
[0:51]ताकि हमारी लेटेस्ट वीडियोस आप तक पहुंच सके अजु बिल्ला मिन शैतान
[0:54]रम बिस्मिल्लाह रहमान रहीम जहेज का मांगना और उसका डिमांड करना हमारे
[0:57]समाज की बड़ी बुराइयों में से एक है हो सकता है कि
[1:00]जहेज की डिमांड और उसका लेना देना बहुत से लोगों की निगाह
[1:02]में छोटी सी बात हो लेकिन यह अमल हमारे समाज में कितनी
[1:06]बड़ी मुश्किलात पैदा करता है और कितनी ज्यादा बुराइयां पैदा करता है
[1:09]आइए देखते हैं इस रिपोर्ट में हिंदुस्तान में 1961 में डाओरी प्रोहिबिशन
[1:16]एक्ट के मुताबिक जहेज को इल्लीगल करार दिया गया लेकिन इसके बावजूद
[1:19]तमाम रिपोर्ट्स यह बताती हैं कि मुल्क में जहेज का रवाज बढ़ता
[1:22]ही जा रहा है एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुस्तान में 1995
[1:29]से 2005 तक जहेज की वजह से कत्ल की वारदात में 61
[1:31]पर इजाफा हुआ है और 93 पर केसेस की चार्जशीट फाइल हुई
[1:35]लेकिन उनमें से सिर्फ 1 तिहाई लोग ही मुजरिम साबित हो सके
[1:40]हैं और रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि अक्सर केसेस में औरतें
[1:42]जुल्म सह लेती हैं और एफआईआर भी दर्ज नहीं कराती हैं इससे
[1:47]यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह प्रॉब्लम हमारे समाज में
[1:49]कितनी शदीद हो गई है एक रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुस्तान में हर
[1:54]घंटा एक औरत का कत्ल इस वजह से होता है कि वह
[1:58]जहेज की मांग पूरी नहीं कर पाती है वहीं दूसरी तरफ ज्यादा
[2:00]जहेज की मांग की वजह से लड़की को बोझ समझा जाने लगा
[2:03]है और इस खौफ से कि जब यह बच्ची बड़ी होगी तो
[2:07]उसको जहेज देना पड़ेगा लड़कियों को मां के पेट में या उनके
[2:09]पैदा होने के बाद कत्ल कर दिया जाता है एक रिपोर्ट के
[2:14]मुताबिक आज हिंदुस्तान में 6 करोड़ लड़कियां लापता हैं जिनके बारे में
[2:18]ज्यादा तमाल इस बात का है कि उन्हें मार दिया गया है
[2:22]और हर दिन 2000 बच्चियों को या तो मां के पेट में
[2:26]या तो पैदा होने के बाद मार दिया जाता है इसके अलावा
[2:28]जहेज की वजह से शादीशुदा लड़कियों की एक बड़ी तादाद को या
[2:34]मैके भेज दिया जाता है या उनका तलाक हो जाता है इसके
[2:37]बर खिलाफ अगर आप इस्लामी मलिक खासतौर से ईरान में देखेंगे तो
[2:40]जहेज के सिलसिले में औरत के ऊपर जुल्म और तशदूद उसको मारना
[2:43]उसको घर से निकाल देना या कत्ल कर देना जैसी वारदातें नहीं
[2:46]होती हैं और इस्लामी तालीमाबाद दतें कम देखने को मिलती हैं लेकिन
[2:58]मोमिनीन के दरमियान यह फिगर्स भी नहीं होने चाहिए आइए अब देखते
[3:00]हैं कि जहेज के सिलसिले में इस्लाम का नुक्ता निगाह क्या है
[3:04]जब एक जवान शादी का इरादा करता है तो उसके सामने दो
[3:06]चीजें होती हैं एक महर दूसरा जहेज तो आइए पहले जान लेते
[3:11]हैं कि शरीयत में मेहर किसे कहा जाता है मेहर व माल
[3:15]रकम या पैसा है जिसकी अदायगी निकाह की मुनासिब से मर्द पर
[3:18]वाजिब होती है इमाम जाफर सादिक अलैहि सलाम का इरशाद है मेहर
[3:23]वही माल या चीज है जिस पर तरफ राजी हो जाएं अब
[3:26]वह कम हो या ज्यादा इसी तरह से कुरान मजीद में इरशाद
[3:28]होता है और औरतों के हक के मेहर खुश दिली से अदा
[3:32]करो अभी तक हमने कुरान और रवायत की रू से यह जाना
[3:36]कि मेहर किसे कहा जाता है आइए देखते हैं कि शरीयत में
[3:41]जहेज की डेफिनेशन क्या है जहेज उस सामान को कहते हैं जो
[3:43]दुल्हन अपने घर से लेकर अपने शौहर के घर आती है लेकिन
[3:47]शरीयत में लड़की या उसके घर वालों को जहेज देना वाजिब नहीं
[3:51]है और अगर वह जहेज लाती भी है तो उसकी मालिक वह
[3:52]खुद है तो लड़के वालों की तरफ से जहेज की डिमांड करना
[3:56]बिल्कुल ही सही नहीं होगा अब सवाल ये पैदा होता है कि
[4:00]हमारे समाज में जहेज की डिमांड का कल्चर कहां से आया है
[4:02]इस गलत रस्म की वजह क्या है आइए जानने की कोशिश करते
[4:06]हैं जहेज की डिमांड की पहली वजह लड़के वालों की लालच है
[4:10]जिसकी वजह से वह जहेज की डिमांड करते हैं इस्लाम ने लालच
[4:12]की सख्त मजम्मत की है एक शख्स ने मौला कायनात से आके
[4:15]सवाल किया कि मौला वह कौन सी जिल्लत है जो इंसान को
[4:20]सबसे ज्यादा जलील करती है तो मौला ने फरमाया कि दुनिया की
[4:22]लालच और जब इमाम अली अल सलाम से खुद उनकी शादी के
[4:26]सिलसिले में एक मुनाफिक ने आकर कहा ऐ अली आप तो अरब
[4:30]में सबसे बा फजल और अरब में सबसे बहादुर और शुजा हैं
[4:34]लेकिन आपने ऐसे घर में शादी की है कि जिसके पास एक
[4:35]दिन का खाना नहीं है अगर आप हमारी बेटी से शादी करते
[4:39]तो मैं अपना घर और आपका घर कीमती साजो सामान से भर
[4:44]देता तो इसके जवाब में मौला मुतकब्बीर बल्कि ईमान और तकवा को
[5:02]शादी का मेयार करार दिया है तो उनके सच्चे चाहने वालों के
[5:07]लिए भी यही मेयार होना चाहिए ना कि माल दुनिया ज इस
[5:09]की डिमांड और उसकी मांग की दूसरी वजह लड़के वालों का खुद
[5:13]को बतर समझना और लड़की वालों को कमतर और पस समझना है
[5:17]पहली बात तो यह कि इस्लाम में इस तरह का कोई कांसेप्ट
[5:19]नहीं पाया जाता है कि लड़के वाले बतर हैं बल्कि इस्लाम में
[5:24]फजीलत और बरतरी का मेयार ईमान और तकवा है इमाम जाफर साद
[5:28]अलैहि सलाम इस सिलसिले में यूं फरमाते हैं जो शख्स भी खुद
[5:30]को दूसरों से बतर और बेहतर समझे वह मुतकब्बीर यानी घमंड करने
[5:35]वालों में से है इसी तरह से कुरान मजीद में इरशाद होता
[5:40]है और अल्लाह मुतकब्बीर को हरगिज पसंद नहीं करता लड़के वालों की
[5:43]तरफ से जहेज के डिमांड की तीसरी वजह यह है कि जहेज
[5:48]को लड़के की तालीम एजुकेशन और परवरिश पर खर्च होने वाली रकम
[5:51]की भरपाई और उसका कंपनसेशन समझना है इस तरह का कोई कानून
[5:56]और तसव्वुर इस्लाम में नहीं पाया जाता है अब अगर आपने अपने
[5:57]बेटे को अच्छी एजुकेशन और तालीम दिलवाई है तो यह आपका फर्ज
[6:02]था और आपकी गर्दन पर आपके बेटे का हक है इस खर्च
[6:06]की भरपाई लड़की वालों से जहेज लेकर करवाई जाए तो यह सोच
[6:08]बिल्कुल बेहूदा और बातिल है जहेज की डिमांड और लेने देने की
[6:13]इस गलत रस्म की एक वजह लड़की वालों की तरफ से दिखावा
[6:14]और रियाकारी भी है रसूल खुदा सल्लल्लाहु अल वा वसल्लम दिखावा और
[6:18]रियाकारी के सिलसिले में यूं फरमाते हैं अल्लाह उस अमल को असलन
[6:24]कबूल ही नहीं करता जिसमें जर्रा बराबर रियाकारी या दिखावा पाया जाता
[6:28]हो इसके अलावा आयतुल्लाह सिस्तानी हाफिजहुल्लाह ने तजल मसाइल में बाज गुनाहों
[6:33]और हराम कामों की फेहरिस्त को जिक्र फरमाया है उसमें जहां दीगर
[6:39]गुनाहों का जिक्र है वहीं रियाकारी और दिखावे को भी गुनाह और
[6:42]हराम कामों में शुमार किया है जहज देने में दिखावे और शफ
[6:46]से काम लेना समाज में बहुत सी बड़ी मुश्किलात को पैदा करता
[6:48]है अगर आपके इस अमल से दूसरी लड़कियों की शादियों में रुकावटें
[6:53]पैदा होने लगे तो जान लीजिए कि इस गुनाह में आप भी
[6:54]शरीक होंगे जहेज की डिमांड और उसके लेने देने की एक और
[6:59]वजह देखाद देखी पियर प्रेशर यानी समाजी दबाव भी है ज्यादातर फैमिलीज
[7:02]समाजी दबाव की वजह से जहेज देने के ऊपर मजबूर होती हैं
[7:06]वो ये सोचती हैं कि अगर हम जहेज नहीं देंगे तो दूसरे
[7:10]क्या कहेंगे जिसकी वजह से समाज में बहुत ज्यादा मुश्किलात पैदा हो
[7:12]जाती हैं रहबर इंकलाब इस्लामी आयतुल्लाह खमना इस सिलसिले में फरमाते हैं
[7:16]घर वाले देखाद देखी के जरिए जहेज को एक बड़ी मुश्किल में
[7:21]तब्दील कर देते हैं और जब इस मुश्किल को वो खुद बर्दाश्त
[7:23]कर लेते और झेल लेते हैं तो फिर दूसरों का नंबर आता
[7:27]है कि वह इस मुश्किल को झेले और बर्दाश्त करें इसलिए कि
[7:32]जब आपने अपनी बेटी के जहेज के लिए इतना सामान इकट्ठा कर
[7:34]लिया तो फिर जो लोग देख रहे हैं उनकी जिम्मेदारी क्या होगी
[7:39]वह क्या सोचेंगे यह देखाद देखी कहां तक जाएगी यही वह मुश्किलात
[7:42]हैं जो माशे में पैदा हो गई हैं इस्लाम यह चाहता है
[7:46]कि ये चीजें ना हो बाज लोग जहेज के लिए अपने रिश्तेदारों
[7:49]पड़ोसियों दोस्तों और जान पहचान के लोगों को ध्यान में रखते हैं
[7:56]उन्हें देखते हैं यह भी गलत है आपको गौर करना है देखना
[8:00]है कि कौन सी चीज सही है है कौन सी चीज हक
[8:03]है उसे अंजाम दें कौन सी चीज हक है हक यह है
[8:04]कि दो लोगों की फैमिली को बस इतने सामान की जरूरत होती
[8:08]है कि वह सादा जिंदगी गुजार सके बाज लोग यह दलील देते
[8:11]हैं कि हम इसलिए जहेज लेते और देते हैं क्योंकि हमारे खानदान
[8:14]और इलाके में यह चीजें रायज हैं इस तरह की बेबुनियाद बातें
[8:18]और दलीलें हमारे समाज में बहुत ज्यादा बुराइयां पैदा करने का सबब
[8:21]बनती हैं अब अगर कोई यह कहता है कि मौलाना आपकी बातें
[8:24]कहने और सुनने में तो बहुत अच्छी लगती है लेकिन हमारा समाज
[8:29]ही ऐसा है हम अपने समाज को तब तब्दील नहीं कर सकते
[8:30]हैं तो इसका जवाब यह है कि समाज हमसे और आपसे बनता
[8:34]है समाज यानी हम और आप अगर हम और आप तब्दील होंगे
[8:38]तो समाज खुद बखुदा तब्दील होना शुरू हो जाएगा तो आइए समाज
[8:41]में राज इन चीजों को तब्दील करने की कोशिश करें क्योंकि यह
[8:45]अमल अल्लाह की खुशनूर और सवाब का सबब है जहेज की एक
[8:50]और वजह ताना जनी का खौफ है बहुत से मां-बाप सिर्फ इसलिए
[8:52]जहेज बल्कि ज्यादा जायज देते हैं कि उन्हें इस बात का खौफ
[8:57]होता है कि कहीं ऐसा ना हो कि बेटी के ससुराल वाले
[9:01]उसको जहेज ना देने की वजह से ताना देने लगे और उसे
[9:02]उनके तानों का सामना करना पड़े तो जहेज की डिमांड और उसके
[9:06]लेने देने के सिलसिले में जो रीजन बताए जाते हैं उनमें से
[9:10]किसी का भी ताल्लुक इस्लाम शरीयत और दीन से नहीं है सब
[9:13]के सब बेबुनियाद और बातिल हैं अब अगर यह सब जानने के
[9:17]बाद भी कोई शख्स जहेज मांगता है तो आप सब बेहतर जानते
[9:21]हैं कि मांगने वाले को क्या कहा जाता है इमाम जाफर सादिक
[9:23]अल सलाम इस सिलसिले में इस तरह फरमाते हैं हमारे शिया वह
[9:27]हैं जो लोगों से मांगते नहीं हैं चाहे वह भूख से मर
[9:31]क्यों ना जाएं तो अभी तक हमने जो बातें आपकी खिदमत में
[9:33]बयान की उसका नतीजा यह निकलता है कि लड़के वालों का लड़की
[9:37]वालों से जहेज की डिमांड करना और जहेज मांगना इस्लामी अखलाक के
[9:40]बिल्कुल मुखालिफ है खुदा रसूल और अहले बैत अल सलाम को यह
[9:45]बात बिल्कुल पसंद नहीं है अभी तक हमने आपकी खिदमत में बयान
[9:46]किया कि लड़के वालों की तरफ से जहेज की डिमांड करना और
[9:50]मांगना सही नहीं है लेकिन अगर लड़की खुद जहेज लेकर आ रही
[9:54]है तो इस्लाम इससे मना भी नहीं करता है लेकिन अगर लड़की
[9:56]जहेज लेकर आना चाहती है तो जरूरी है कि जहेज दोनों फैमिली
[10:02]के स्टेटस के मुताबिक हो लग्जरी और राफ का सबब ना हो
[10:03]बुरे कल्चर को ईजाद ना कर रहा हो इस सिलसिले में एक
[10:07]और अहम बात यह है कि अगर लड़की अपने घर से जहेज
[10:10]लेकर आ रही है तो उसे इस बात का ख्याल रहना चाहिए
[10:14]कि वह एहसान हरगिज ना जताए रसूल खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम
[10:18]इस बात की मजम्मत करते हुए फरमाते हैं अगर जमीन पर मौजूद
[10:23]तमाम सोने चांदी से बनी हुई चीज को भी औरत अपने शौहर
[10:24]के घर ले जाए और फिर किसी एक दिन भी शौहर पर
[10:28]एहसान जता दे और यह कहे कि तुम कौन हो यह सारा
[10:32]माल तो मेरा है उस सूरत में औरत का तमाम अजर सवाब
[10:36]जाय हो जाएगा वह सबसे ज्यादा इबादत करने वाली ही क्यों ना
[10:38]हो मगर यह कि वह तौबा कर ले और अपने शौहर से
[10:41]माफी मांग ले अब सवाल यह पैदा होता है कि दुल्हन जो
[10:45]जहेज लेकर आ रही है इसका मालिक कौन है इस्लामी नुक्ता निगाह
[10:49]से जहेज के सामान के मालिक खुद दुल्हन होती है इमाम जाफर
[10:52]सादिक अल सलाम इस सिलसिले में यूं फरमाते हैं इन दोनों पहाड़ों
[10:57]यानी मक्का और उसके अतरा में रहने वालों से पूछोगे तो वह
[10:59]तुम्हें बताएंगे कि औरत जहेज और सामान अलल ऐलान अपने घर से
[11:04]लेकर मर्द के घर आती है तो अगर औरत और मर्द में
[11:05]इख्तिलाफ हो जाए तो वोह जहेज और सामान जो औरत लेकर आई
[11:09]है वह उसी का है और उसको दे दिया जाएगा अक्सर यह
[11:13]देखा गया है कि दुल्हन जो जहेज लेकर आती है लड़के के
[11:17]घर वाले उसे अपने कब्जे में ले लेते हैं उसे इस्तेमाल करना
[11:18]शुरू कर देते हैं और उसकी इजाजत के बगैर उसे दूसरों को
[11:22]भी दे देते हैं और इख्तिलाफ की सूरत में उसे वापस भी
[11:24]नहीं करते हैं इस हदीस से हमें यह पैगाम मिलता है कि
[11:28]जहेज के सामान की मालिक औरत होती शौहर जहज के सामान का
[11:33]मालिक नहीं होता है अगर जहज का सामान मेहर के पैसे से
[11:34]भी लिया जाए तब भी उसकी मालिक औरत ही होगी क्योंकि महर
[11:39]औरत की जाती मिल्कियत होती है और लड़की का शौहर के घर
[11:44]जहेज लाने का मतलब यह नहीं होता है कि उसने शौहर को
[11:47]जहेज का मालिक बना दिया है या उस माल में उसे शरीक
[11:48]कर लिया है हां शौहर मामूल के मुताबिक उस सामान को इस्तेमाल
[11:52]जरूर कर सकता है अभी तक हमने आपकी खिदमत में बयान किया
[11:57]कि जहेज की डिमांड करना जहेज मांगना मुनासिब अमल नहीं है और
[11:59]इससे बहुत सी बुराइयां समाज में पैदा होती हैं इस्लाम के नुक्ता
[12:03]निगाह से भी जहेज की डिमांड करना और मांगना सही नहीं है
[12:05]अब आइए देखते हैं कि इसका राहे हल क्या है शादी महर
[12:10]और जहेज के सिलसिले में इमाम अली और हजरत जहरा को अपना
[12:15]रोल मॉडल बनाएं और उनकी पैरवी करें अल्लामा मजलिसी बिहाल अनवार में
[12:18]रवायत नकल करते हैं कि रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम ने
[12:22]हजरत अली अलैहि सलाम से सवाल किया या अली तुम्हारे पास शादी
[12:27]के लिए माल दुनिया में से क्या है आपने फरमाया लवार ऊंट
[12:31]और जिरा रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम ने हुक्म दिया कि
[12:35]जिरा को बेचकर इसकी रकम से मेहर अदा करो और रसूल खुदा
[12:37]सल्लल्लाहु अल वालि वसल्लम ने उसी रकम से जनाबे जहरा सलामुल्लाह अलैहा
[12:44]का जहेज खरीदा रवायत कहती है कि जहेज इतना कम था कि
[12:46]दो लोग उसे अपने हाथ से उठाकर ले जा सकते थे यानी
[12:50]पहले इमाम अली अल सलाम ने महर अदा किया और उसके बाद
[12:55]जनाबे जहरा सलामुल्लाह अलैहा का उसी माल से जहेज खरीदा गया इसका
[12:58]मतलब यह हुआ कि पहले मेहर अदा किया जाए ताकि उस माल
[13:03]से दुल्हन का जहेज लाया जा सके और यह बात रसूल खुदा
[13:05]सल्लल्लाहु अलैहि वा वसल्लम की सुन्नत भी है और इमाम अली और
[13:11]हजरत जहरा सलामुल्लाह अलमा की सीरत भी दूसरी बात यह कि तवक
[13:15]आत को कम रखा जाए और कम वसाय के साथ जिंदगी जीने
[13:16]का सलीका सीखा जाए इसके अलावा हर फैमिली को अपने स्टेटस के
[13:22]मुताबिक महर और जहज का इंतजाम करना चाहिए इस बात का ख्याल
[13:24]रहे कि कामयाब शादी का मेयार दुल्हा और दुल्हन का अखलाक है
[13:29]क्यों के जिंदगी में मोहब्बत और खुशी इसी अखलाक और स्पिरिचुअलिटी के
[13:33]जरिए से ही आती है कुरान करीम में अल्लाह ने मर्दों को
[13:38]खवातीन का सरपरस्त करार दिया है इरशाद होता है मर्द औरतों के
[13:41]मुहाफिज मुंतज हैं इसलिए कि अल्लाह ने बाज मर्दों को बाज औरतों
[13:48]पर फजीलत दी है चुनांचे बीवी का नानो नफक और उसके खर्च
[13:50]की जिम्मेदारी शौहर के ऊपर है इसी तरीके से घर की और
[13:54]खानवादी की जिम्मेदारी और वहां के खराज जात को पूरा करना मर्द
[13:57]के जिम्मे है लिहाजा मर्द के लिए मुनासिब नहीं है कि वह
[14:02]जहेज की डिमांड और उसकी मांग करें तो अब मर्द को चाहिए
[14:05]कि अपनी जिम्मेदारियों और फराइज को पूरा करते हुए अपनी इज्जत और
[14:09]वकार को महफूज रखें और जहेज की डिमांड करके खुद को जलील
[14:13]और उसवा ना करें दोस्तों हमने इस वीडियो में आपकी खिदमत में
[14:17]बयान किया कि इस्लामी नुक्ता निगाह से जहेज की क्या हैसियत और
[14:22]क्या अहमियत है और इस्लाम की निगाह में जहेज की डिमांड करना
[14:24]और जहेज मांगना मुनासिब और दुरुस्त अमल नहीं है इंशाल्लाह नुक्ता निगाह
[14:28]में एक नेट टॉपिक के साथ अगले हफ्ते आपकी खिदमत में हाजिर
[14:32]होंगे तब तक के लिए खुदा हाफिज
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