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Quran Kitab-e-Hidayat | H.I Mohammad Hussain
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anders
Record date: 28 Nov 2021 - قرآن کتاب ہدایت
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2021 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:00]झाल कि साउथ बिल्लाहे मिनस विद्वानों व जींद से मिलना है रहमान
[0:20]प्रणाम कि अल हमदुलिल्ला ही रब्बुल आलमीन है कि अस्सलातु वस्सलाम वायलेंस
[0:24]यह देना है वह दबी गिना है वह बिल्कुल लो बिना व
[0:34]फिफ्टीन अभिलेखों से मिल मुस्तुफा मन्नत में और सुनाओ यह वाला है
[0:44]ठीक है तो यह धप्पा हेर इन कि अल्लाह नॉमिनल ममता जमीन
[0:50]अलेही वसल्लम और अम्मा बार दहशत का आलम वह स्वर्णा हुआ था
[0:53]आयल पी पुरानी क्रीम उगिलह नशीला पाउडर अजीम इन हल्कू हैं यह
[1:04]दिल अतिथि पूर्व विश्व मीना मीना ना बाबा ना अजय को आज
[1:27]मम्मी ने कि राम एक अजीब तो लंबा कि मुझे जाना ने
[1:35]वक्तव्य शत्रु हैं कि अल्लाह ताला आप सब दोस्तों सलामत रखें आपकी
[1:40]हम आधा तब्बू हुजूर फ़रमाइए अपने बाहर का हमें निशान लगा ताला
[1:44]और मैं तो फिर आज एक तहसीन पेश करता हूं उंन जमाना
[1:52]ने मिलाते तस्वीरों को जो माफी इलाही या से माफी यह निवेश
[2:01]से SIM आज के नौजवानों को आशना करने के लिए इस तरह
[2:09]की महफ़िलें सजाते हैं अल्लाह ताला उनकी तो फिर कटे हुए धनिया
[2:13]वर्मा इंशाह अल्लाह हू है तो जिस मौजूद के ऊपर इस पुस्तक
[2:19]को करने की तौफीक हासिल कर रहा हूं वह है जीने और
[2:23]आने करीम किताबे हिदायत दी कि अल्लाह सुबहान व-ताला ने कि इंसान
[2:32]को हल्का फरमाया है और ने मति जिंदगी से हमें नवाजा तो
[2:37]जिस जाति मुक्त देश ने कि इंसान को नेमतें जिंदगी से नवाजा
[2:47]है उस जाति बारे ताला ने जिंदगी करने के उसूल भी बयान
[2:50]की हैं कि जिंदगी किस तरह हमें करनी चाहिए तो अल्लाह ही
[2:57]बेहतर बयान कर सकता है कि हमारा तरह जिंदगी कैसे होनी चाहिए
[3:04]क्योंकि हमारा हालिक परवरदिगार है हमारे हीरो सलाह से तमाम मौजूद से
[3:13]तमाम मखलूकात से ज्यादा हमारे हालित को मालूम है कि किन उसूलों
[3:18]के हमें पाबंद होना चाहिए ताकि दुनिया में भी सादत और कामयाबी
[3:22]हासिल करें और आलम में आखिर जोकर भरी जिंदगी है उसमें भी
[3:29]हम शुरू हो जाएं सुकून की जिंदगी गुजार सकें अ मैं तो
[3:35]जिंदगी के उसूल बयान करने के लिए अल्लाह तआला ने और आने
[3:41]करीम जैसी किताब को अपने हबीब हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहे
[3:47]वसल्लम ने [संगीत] की पहली झलक कि के तल पर मोहर पर
[3:57]बजरिया यह पहले अमीन नाज़िल फ़रमाया वक्त अंक वक्तन मुख्तलिफ मौकों पर
[4:02]मुख्तलिफ मन आशीर्वाद से मुख्तलिफ हालात में वक्त अंधभक्त अनाया तीसरी मंज़िल
[4:08]फ़रमाया और पौराणिक करीम के नजूल से स्थिति में और आंतक प्रक्रिया
[4:19]बुने थे यह साल के अरसे में कि तांबे हिदायत कामिल हो
[4:23]गई हैं तो आइए शरीफा हैं जो कि उन्होंने कलाम करार दिया
[4:32]था उसका तर्जुमा पहले आपके सामने में बयान करूं और मौजूद से
[4:35]मजबूत कुछ बातें हैं कुछ मारो ज्यादा आपके सामने पेश करने की
[4:39]में जसारत करूंगा मैं और अल्लाह सुबहान व-ताला सुरेश शर्मा की नौकरी
[4:47]आयत मे इरशाद फ़रमाता है कि इन हर्बल को या नहीं यह
[4:54]दिल अतिथि अब हम इन यह ताकि के लिए आता है लक्ष्य
[4:55]तहत है और ब्रह्म के विशेष स्वरुप फिर मुशाबहत उन डिफ़ाल्ट में
[5:02]से एक है यह नाइन न कमाने है बेशक वाशरी में आपको
[5:07]यह सबसे ज्यादा दिखाई देंगे इन न लवीना अनुसार यह तेल हम
[5:11]जन्नत सही जगह लोग जो ईमान लाए हैं और नए कमल अच्छे
[5:18]अच्छे काम करते उनके लिए भैंस आप जैसों के लिए कि आप
[5:19]नवाज 14 सालों के लिए पाबंद है ज्यादा और यह जाते शहीद
[5:25]शादाबी और बजाते हैं बतौर खास हमारी यह छोटे-छोटे बच्चे हैं माशा
[5:29]अल्लाह यह तो बहुत ही अल्लाह के प्यारे हैं अल्लाह के महबूब
[5:35]है बार फिर इससे आपकी हक में दुआ करते हैं खुश होते
[5:40]हैं देखो मेरे बंधुओं के छोटे-छोटे बच्चे हैं जिनका नाम में का
[5:42]जप नहीं है वह मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ते हैं है तो
[5:49]फरमाते हैं कि कि इन हलचल पुराना यह दिल आती ही आप
[5:57]लंबे घोषित यकीनन इन तमाम यकीनन बेशक इन नेहरा लुटाना यह पुराण
[6:01]आद्या इसमें सारा है यह पर ऑन यह दी रास्ता दिखाता है
[6:07]राह दिखाता है कौन तेरा आपको दुनिया में बहुत सारे मिलेंगे क्या
[6:10]आप और आप दिखाएंगे लेकिन गलत रास्ता दिखाया दिखाने वाली भी बहुत
[6:18]होंगे चाहिए सही राह से आपको गलत रास्ते पर ले जाने वाले
[6:20]लोग बहुत होंगे इनसे बच के रहना बहुत जरूरी है कि हर
[6:24]एक की बात न सुने बल्कि ऐसे लोगों की बात सुनने जो
[6:30]अधीन को समझ चुका है और आपको अच्छाई की तरफ वो और
[6:31]सच्चाई की तरह बुलाएं तो आप उनकी बात को मान है लेकिन
[6:37]आपको अगर प्रधान फाल्गुना की तरफ बुलाएं तो आप उनसे बचे रहेंगे
[6:43]तो रानी कर लीजिए एक ऐसी किताब है जी इन हैदरपोरा यह
[6:45]दिलाती ही यह कौन यकीनन बेशक यह पुराने चीज जो है यह
[6:53]दी रास्ता दिखाता है हिदायत करता है यह दिलाती थी कि यह
[7:00]कूर्म ऐसा रास्ता जो कि सबसे सीधा रास्ता है सबसे सीधा रास्ते
[7:03]की तरफ वो इंसान को डाइरैक्शन देता है इंसान की रहनुमाई फरमाता
[7:10]है तो क़ुरआने करीम पर अमल करें तो यकीनन जिस मंजिल पर
[7:13]पहुंचने के लिए अल्लाह ताला ने हमें फल किया उस मंजिले मक़सूद
[7:18]तक हम पहन सकेंगे अल्लाह ताला ने इंसान को बंधक बनाने के
[7:21]लिए आप के लिए उद्यत इबादत करने और बंदा बनने के लिए
[7:27]कुछ किया है वह गलत उज्जैन न बर्लिन शहर ला लिया वसूल
[7:32]जिन्हें इन स्कोप यह फर्क नहीं किया शिवाय है कि इबादत करें
[7:35]अल्लाह के अल्लाह का बंदा कर बने उदित के लिए तो वह
[7:42]दिया की मंजिल तक पहुंचने के लिए वाहिद रास्ता क़ुरआने करीम है
[7:48]है तो आगे फरमाते हैं कि कि वह व शूल मीनिंग और
[7:56]क़ुरआने करीम खुशी सुनाता है बशारत सुनाता है खुशखबरी सुनाता है किसके
[8:02]लिए मोमिन के लिए आप जैसे मोमिन के लिए बता रहा था
[8:07]आपके लिए बेस्ट हमदुल्लाह मोहित डायामीटर एल्बम इंवोल्व है कहना था कि
[8:10]जितना भी तालिबान सहित वर्णित सभी रुके अलार्म हनुमान हरिमोहन तो उस
[8:18]मौला की मोहब्बत हमारे दिलों में मौजूद हैं और इस्तेमाल करते हैं
[8:26]मासूम की तो आपके लिए भेजते हैं अल्ला ताला और उनके जरिए
[8:29]बशारत दे रहे हैं आपको कि वह उदरशूल मीडियम को बशारत देते
[8:36]हैं यह किस चीज की बशारत अन्ना लहू अजुरन कबीरा उनके लिए
[8:41]बहुत बड़ा सवाल है उनके लिए बहुत बड़ा अजीब है तो कुरान
[8:48]शरीफ किताब हिदायत है सीधा रास्ता दिखाने वाली किताब है युगल में
[8:55]3 व्यक्तियों की अदा करते मुस्लिम नाश तमाम लोगों की हिदायत के
[9:03]लिए की पुरानी क्रीम है तो इस हवाले से इंशाल्लाह कि कुछ
[9:07]बातें आप यह बात महसूस करूंगा कि और उनकी अहमियत क्या है
[9:13]और हमारी जिम्मेदारी पर आखिरी के हवाले से क्या है की पुरानी
[9:16]क्रीम जैसा कि आपको मालूम है कि मौज है कि मुझे से
[9:22]जिंदा वह जावेद है अब ताकि हम हत्या मत तक मौजूद रहे
[9:29]हो है और कि हर नवीन को अपने जमाने के हालात के
[9:34]मुताबित अल्लाह ताला ने मौजूद आता किया जैसा कि हजरत ऐसा के
[9:42]दौर में कि तिब्बत तिब्बत इलाज मोहाली जे वगैरह का चक्र था
[9:48]तब बहुत थे है तो रामदयाल मीणा ने इसी पेशे से मजबूत
[9:54]मौजूद आता फरमाया कि अंधों को बिना करने की ताकत मुर्दों को
[10:02]जिंदा कॉल करने की ताकत और बरस की बीमारी का इलाज यह
[10:08]तमाम ताकतें जिला पुलिस अधीक्षक वादा किया था है तो इसी तरह
[10:14]शहद हमारे नबी ए करीम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहे वसल्लम
[10:18]के जमाने में में शेरो-शायरी और अब कपड़ा चर्चा बड़े-बड़े शहर थे
[10:31]उस दौर में बड़े-बड़े पौधे के द्वारा थे जो अपने कलाम लिख
[10:37]कर की हानि का भय के द्वार पर लटका के रखते थे
[10:42]ताकि आने वाले उस कलाम को पढ़ने हैं तो मुकाबला होता था
[10:45]बड़े शहर आह बड़े वहां थे वह दबा दें और इस बात
[10:51]को समान समझते थे कि ज्यादा से ज्यादा अच्छे कलाम लिखें और
[10:57]लोग उसका नाम कुन कलाम को देखें और पढ़ें एक तो अदब
[11:01]के हवाले से बहुत आगे थे उस जमाने में तो इसीलिए हाथ
[11:06]से हमारे नबी ए करीम को दौरान यह समझ आता किया जो
[11:15]कि मौजूदा है कलामे ख़ुदा है और कुरआन जैसी किताब बड़े से
[11:20]बड़े पाए के द्वारा भी मंजे हुए वह दबी दौरान यह किताब
[11:27]नहीं ला सके दौरान में जो सूर्य है उस उसे एक छोटा
[11:32]ससुरा बड़े-बड़े द्वारा ला सकें चेहरा चैलेंज किया क़ुरआने करीम ने अल्लाह
[11:37]ताला ने जिसको तरह दी कहते हैं अरबी यह पुरानी याद की
[11:39]सलाह में तरह दी के तहत दी करने में चेंज करना चैलेंज
[11:43]किया बाद लोगों के जेहन में शुभेंदु का यह परिणाम है यात्रा
[11:51]हमारे नबी ने यह अपने तरफ से बनाया होगा तो इसके भी
[11:53]तब सिला बहुत हैं कि प्रथम रकम लिखते नहीं थे मैं इसमें
[11:59]राज है ताकि बाद में यह इल्जाम इतना तरसेगी पैगंबर तो लिखते
[12:05]थे तो कुरान तब लिखा है अपने हाथ से हो जी जी
[12:09]है तो क़ुरआने करीम मैं अल्लाह ताला ने कहा चैलेंज किया तरह
[12:17]दी किया चैलेंज किया कि अगर तुम्हें शक है यह के दौरान
[12:22]अल्लाह की तरफ से नहीं है बल्कि बंदे की तरफ से हैं
[12:24]और नबी की जानिब शहद तो तुम भी जो है इस तरह
[12:28]का कोई किताब ले आओ तुम भी इस तरह का कोई सुराग
[12:32]तुम भी इस तरह इनको तुम फ्राई भी निर्माण नजर ना अलावा
[12:37]आप देना है तू भी सूरत हमने तुम्हें मधोशिया दया तुम इनको
[12:40]तुम सारे तीन कि अगर रहित त मानी है शक ला रहे
[12:45]यह निदेशक ए में ला रही बर्फीली है ने इस किताब में
[12:49]कोई शक नहीं है कि रामलीला की जानिब से लाभ ही तो
[12:53]अगर तुम्हें शक है कि यह किताब अल्लाह की जानिब से नहीं
[12:58]है तो फिर कहें कि तुम कुरआन जैसी किताब लो अगर तुम
[13:02]ला सकते हैं बड़े-बड़े द्वारा है बड़े-बड़े मंजे हुए दबा है तो
[13:06]राम जैसी पर किताबों कोई भी ला सकते हैं ताकि बहुत सारे
[13:11]शहर और दबा दौरान के अदब याद को देखकर कुरान की आयात
[13:17]को पढ़कर दौरान जो अल्फाज इस्तेमाल हुआ था वह निहायत उम्दा अल्फाज
[13:21]तो बड़े-बड़े स्वरा ने कहा कि यह कला में विचार नहीं हो
[13:29]सकता है कोई भी बचा है जितना भी माहिर हो अदब याद
[13:30]के शो में इस तरह का तनाव नहीं ला सकता है तो
[13:35]उन शहर और दबाने दौरान पर विमान लें इस हवाले से क्यों
[13:43]विवश हो गए वह बिल्कुल बेबस हो गए और यह उनको यकीन
[13:47]हो गया कि यह अलार्म कुरान शरीफ की आयतें सूर्य कलाम जो
[13:50]है वह बशर का गुलाम नहीं है बल्कि खा लेते हैं अक्षर
[13:56]का कलाम है तो दौरान मौजूद है कई पैसों से मौज है
[14:01]बयान के बाद से मौजूद है अल्फाज के इंतिख़ाब के ऐतबार से
[14:04]मौजूदा है कलाम निहायत मौजूद है अब देखें सूर ए आर रहमान
[14:10]जिसको अ रुक उड़ान कहा जाता है यह जिंक उस अरे प्रमोद
[14:13]सूर्या SIM को काल के दौरान कहा जाता है और उनका दिल
[14:17]सूरह रहमान को अरुण सुक्रांत किस हद तक यह मुदईयन है यह
[14:23]जिंक और उत्सुक और उत्तम मानी है दुल्हन कुरान शरीफ की दुल्हन
[14:27]तब रखना हम जो अलार्म अल कुरान वेद कितने जो है शायराना
[14:33]अंदाज में लेकिन शेयर नहीं है शेयर नहीं है बल्कि लेकिन मॉनसून
[14:39]है सई वास नो तो आप यह इसके अ हैं तो इस
[14:42]वाले से बयान के इस्तेमाल से भी मौजूद है और हे मौजूद
[14:49]होने का एक पहलू है इल्मी है तब से एग्जाम से फिल्मी
[14:55]फिल्मी परिवार से भी मौजूद है क्यों मौजूद है क्योंकि अभी चौथी
[14:58]सदी में जो है बहुत सारे फलक याद के मां है बहुत
[15:02]सारे शायद आप बहुत सारे तत्व पेशेंट तैयार करते हैं इनकी सफाई
[15:08]कर चुके हैं लेकिन उस दौर में दौर में जब लोग अनपढ़
[15:12]से कोई दानिश्वर उस जमाने में नहीं थे प्रक्रिया के माहिर नहीं
[15:17]थे तो उस दौर में कैप्लर कि आपके बारे में नजरिया पेश
[15:20]किया अल्लाह ताला ने मुझे उनके बारे में तिल का तेल जमीनो-आसमान
[15:27]के बारे में इंसान की सफलता की मराहिल को बयान किया हालांकि
[15:31]कि तमाम इंसान इन तमाम चीजों से जाहिल थे कोई जानता नहीं
[15:36]था लेकिन अल्लाह ने कुरान की तरह मंत्री ने यह बयान अता
[15:41]फरमाए तो यह नियर थे भाषा पुराण मौज है सर यह दिन
[15:46]इसी तरह जाए यदि यदि है यह जा जा अभी और दूसरे
[15:47]पहलू है जो बहरहाल हमारे मौजों से ज्यादा वक्त नहीं है है
[15:54]तो कुरान उर्दू शायरी ओं के दौरान मौजूदा हुआ है इस हवाले
[16:05]से कि पुरा आंसुओं पौराणिक कलमा-कुरान के अल्फाज वही है जो हम
[16:11]स्कूल में जाकर या दिन या सेंटर में सीखते हैं अलिफ बा
[16:19]ता सा जीवन को मौज दान राजा सिंह साथ तय तक सैया
[16:23]जी वही 286 अरेबिक अल्फाबेट हुए दो 16 लेटेस्ट सैड स्टेटस है
[16:33]28 लेटस है उन्हीं पुरुषों उन्हें रूप से बने है लेकिन अल्लाह
[16:38]ताला ने अब हम लोग है इन्हें रूप से उनके है बुरे
[16:43]आफ बनाएं मुमकिन है ऐसे अलफाज़ बनाएं कि हमारे पास जाकर जवान
[16:46]पर जारी करें तो किसी दोस्त का कि से मोमिन का दिल
[16:51]टूट जाएं यह साफ करें लेकिन अल्लाह ताला यह कुदरत है कि
[16:56]अल्लाह ताला ने इन्हीं पूर्व पहली बार तथा से क़ुरआने करीम के
[16:59]अनुसार स्कोर बनाया जो के बाद इसे हिदायत है जो किराए से
[17:06]किराया तय जी कुरान शरीफ में टोटल 114 सो रहे हैं 100
[17:10]400 ग्र और उन्हें जरा इन थे होली कुरान से यह पुराण
[17:18]में 24000 है याद रखें ठीक है जी हां हों तो इन्हें
[17:25]चुनाव सूरत और सूरत में शेष उन्नतीस प्रेत का आवाज उन्नति सूर्य
[17:33]का शुरू जो है वह उसे मुक्ता आर्ट्स से होता है पुरुषों
[17:35]का ताल्लुक रखता है क्या है बताएं है माशाल्लाह भाई साहब आपका
[17:45]नाम क्या है हां जी बुरहानपुर बुरहानपुर ने सही जवाब दिया पूर्व
[17:49]प्रमुख त्यौहार वहीं उन्हें जो अब सूरतुल फ़ातिहा हां यह जो कि
[17:56]पहला सुर है उसके बाद सूरह बकरा सबसे बड़ा सो रहा है
[17:59]तब्दील सो रहा है सिंह जी तो तकरीबन ढाई पारी में मुश्तमिल
[18:08]है मैं तो सो रही है बकरा की शुरू जो है वह
[18:09]उस है बता समय बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम एलिफेंट इन आंवलों अलिफ लाम मीम इसको
[18:23]इसको मिलाकर नहीं पढ़ना है जी पढ़ना है आप में पढ़ते थे
[18:29]और पहले को वाले से मिला अलिफ लाम मीम और बहुत सारे
[18:38]ऐसे में से उन्नति की तस्वीर अलिफ लाम मीम और आपको बताया
[18:47]था और किसी के बहुत सारे हैं को शाल व श्रीफल आम
[18:54]स्वाद लाइन सीन कहां का फायनेंस बहुत हम इन पिंपल उन्हें गत
[18:58]जून शुरू तो इनको बुध गुरु शुक्र शनि पिता अजय को पढ़ना
[19:15]चाहिए इस्लाम को न किसी ने कहा हमारे अरेबिक लैंग्वेज में लिखते
[19:23]थे तो उन्होंने जो है कहा कि मेरा एक दोस्त था हैं
[19:27]उनको अल्लाह ताला हम एक बेटा था क्या तो हमारे दोस्त हमारे
[19:33]से कम लोग पूछा दोस्त कि आपके बेटे का नाम क्या रखा
[19:40]है अब तो जवाब दिया कि जहां पर बैठे तमाम अलग रखा
[19:41]है अगर अ का पूजन व भैया अंग्रेजी कोई नाम होगा शायद
[19:46]इस्लामी नाम तो नहीं है कलर मैं तो हर पता भी नहीं
[19:53]है इस्लाम है अपना फोन है देखिए कुरान खोलकर पुरानी लव यह
[19:55]फोन न मुसलमान है है तो फिर उसे ना कि अलिफ लाम
[20:03]रात को मिलाया है अ लगा मां बेटे का नाम गलत इस
[20:05]तरह के ना रखें आप जो है हमारी नदियों के नाम रखे
[20:09]पेन नंबर के नाम रखें मौला अली के नाम इमाम हुसैन आई
[20:12]में मानसून के नाम रखे शीघ्र अगर बेटी हो तो जनाब में
[20:16]जाना सनम लार है कि नाम और हल्का आप रखें जितना भी
[20:18]सेटिंग्स ने मुलाजिमों में से एक है कि नाम रखना चाहिए इस्लामिक
[20:22]तो यह कि उक्त दो अलग-अलग पढ़ना है एक हर खूब बबाल
[20:28]बाद साले हमसे मिलाए बगैर पढ़ने अलिफ लाम मीम हामीन अलिफ लाम
[20:31]रा कप है या टाइम सात बार शुल्क मुक्त ₹2000 मुझसे मिलने
[20:38]आओगे सर पर मुश्तमिल है ₹500 मुश्तमिल है जैसा कि आपको पता
[20:41]है तो मैं प्यार करना चाहता हूं फिर उपभोक्तावाद के बाद के
[20:47]दौरान का तज़किरा आता है की सूरह बकर के शुरू में अ
[20:52]थे वैली आफ फ्लावर मी दिल्ली कल की ताऊ बोला वहीं धुंधली
[20:59]मुद्दे प्रमुखता के बाद तुरंत ग्रह आप जितने में पुरुषों का ताकि
[21:07]देखेंगे का शरीर में उन्नति सूर्य की किरणों कप्तान से हुई मुलाकात
[21:11]के बाद क्या है जयपुर रामगंज करें यह पैगाम देना चाहता है
[21:17]कि क़ुरआने करीम जो कि मौजूदा है और आप जैसी किताब कोई
[21:19]नहीं ला सकता बड़े-बड़े मंजे हुए पाया कि वह दबी दौरान ऐसा
[21:24]सूरा 8 आयत लाने से आजिज है यह किंचित से बनी है
[21:30]किन चीज़ों से यही अलिफ लाम मीम के रूप से ही हाम
[21:35]से यही कहा IBN7 के जरिए इन्हें यह उसको इन्हीं और अधिक
[21:38]अल्फाबेट को इन्हीं गुणों के तहत जी को मिलाकर जोड़कर अल्लाह ताला
[21:45]ने इसे हम दाल पास बनाया कि इन फास्ट से जूमला बना
[21:48]आयत बनी सैया जी और मौजूदा हो गया मैं प्रमोद झा हो
[21:54]गया अब है तो यह जहाज के बारे में मौजूद के बारे
[21:56]में है है और हमारी क्या जिम्मेदारी है क़ुरान के बारे में
[22:02]कुरआन नाजिल हुआ है कि हम उसको पढ़ लें और उसमें तो
[22:08]दो गौर करें और शेयर करें सैया जी सबसे पहला पदक है
[22:12]दौरान की तालीम से अपने दिनों को रोशन करने के लिए है
[22:14]कि दौरान पढ़ना सीखें और कुरान पढ़ना सीखें सहज 15 साल की
[22:21]उम्र से कोशिश करनी चाहिए कुरान पढ़ना सीखें है और दौरान कुछ
[22:27]हद अर्लायर हद बीन लैड समय दूसरा अंग्रेजी बोलते हैं ना तो
[22:30]अंग्रेजी ने अगर बात करना चाहिए तो याद को अमेरिकन एक्सेंट या
[22:36]बर्तानिया के लिए जो मिल जाए तो हमारे बड़े शरीर में बर्तानिया
[22:40]कर ले जा राइस है सही है जिंक क्योंकि भरे शरीर में
[22:45]मुद्रित अपील की है बर्तन या कि हुकूमत यहां पर रही है
[22:51]तो बर्तानिया के लहजे में अंग्रेजी बाद बैंकों में अमेरिकन एक्सेंट है
[22:55]तो अंग्रेजी तो हम जो अंग्रेजों की तरह बात करना तो अगर
[23:02]समझते हैं हमारे बच्चे स्कूल में पढ़ने वाले हैं सैया जी उसको
[23:06]तरक्की की अलामत समझी जाती है तो इसी तरह दौरान शरीफ कौन
[23:11]सी सलमान जरीन है अरबी ज़बान में तो पैग़ंबरे अकरम हजरत मोहम्मद
[23:16]मुस्तफा लंबा अफेयर नहीं हुआ सा लगता है यहां पर मानते हैं
[23:26]कि यह तो राहुल पुराना भी अगला रविवार स्वाति अ यह तो
[23:34]लुटेरे अमेज़ इंपरेटिव फैला मरे सैया जी पहले अमर है और आपको
[23:38]आर्डर दे रहे हैं कि करात तो रोहित राहु कर आंतरिक राहुल
[23:43]को आना दौरान को खराब है का ब्याह आल्हा आल्हा रवि अरबी
[23:50]लहजे में अरबी लखन में सईंया सिंह अपने इलाज पहले में नहीं
[23:53]अरबी लहजे में कोशिश करो सीखने के बावूजद अगर उस तरह न
[23:58]पड़ सके तो कोई हर्ज नहीं है अल्लाताला हमारी ताकत से ज्यादा
[24:02]जो हुक्म नहीं देता सही है जि जितना बे हजरत बिलाल रहमतुल्लाह
[24:08]अलैह मौजूद रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम निहायत ईमानदार मार्फत रखने वाली शख्सियत
[24:16]थी मीणा लेकिन उसकी जबान में कुछ मामूली सी कमजोरी थी कि
[24:19]वह चीन को तलाश नहीं कर सकते थे अश हदों को अधिक
[24:25]पढ़ते थे और वही अल्लाह को मंजूर था की बौछारों ने कहा
[24:33]कि या रसूलल्लाह आप यह किसी गोरे कुछ सीमा खूबसूरत शशि कुमार
[24:37]सिंह बनाओ जो कि फ़साहत व बलाग़त में भी आगे हो कुरूप
[24:42]को सही तरफ उस कर सके तेरा मन भरमाए नहीं मौजूद सिर्फ
[24:49]बीमार है कि आज अगर चीज है उसका चेहरा सिया है कि
[24:52]अगर चीज वह सीन को तलाश नहीं कर सकता कि चीन के
[24:57]वजह से इन पर लेकिन यह उनकी ईमानदार पुलिस असिंचित हमारे साथ
[25:01]असिन चीज से विमान ए सईंया संचित हत्वा इन अक्रामक रिमाइंडर लाहे
[25:07]गतका आपको अगर टाइम पूरी हो जाए तो अमृत पिला दे रे
[25:12]ओ सैया जी मैं मेरे सामने खड़ी नहीं तो इतना करो ना
[25:17]तो मैं अल्लाह आपको अल्लाह के नजदीक की शराफत की अलामत खूबसूरती
[25:25]शोषण आवाज नहीं है बल्कि विमान है तवा है मार्फत है इन
[25:28]आक्रमणों को मैडम हुआ है अथवा कम अल्लाह ताला के नजदीक वहीं
[25:34]उस इंसान के लिए इज्जत है उस इंसान के लिए व्रत और
[25:36]व्यापार है जो तत्व्ाों तपा किसे कहते हैं जी हां आराम से
[25:42]बचना बुरे कामों से बचना और अच्छे काम को अंजाम देना चाहिए
[25:47]जी नमाज पढ़ना वालिदैन की दावेदारी करना अपील वाली दही नहीं अफसाना
[25:52]वॉल पेंट की दावेदारी करना चाहिए जी मामा कहते राम रखना अल
[25:58]हमदुल्लाह कुरान शरीफ में मौजूद है कि वह बिल वाले ही नहीं
[26:00]अफसाना अल्लाताला अपनी इबादत का हुक्म देने के बाद यह वाले दिन
[26:08]की इताअत और कुबेर है कि तालिबान की ताकत को मां-बाप के
[26:11]इंतजाम करो सही अपना कैरियर में क्या है मप्र में कि यह
[26:17]है कि अगर बाप अपने बेटे को डांटे तो जल्दी जो है
[26:22]वह पुलिस के 53 नंबर मिल जाता है अभी मिशन बाप मुझे
[26:29]डाल रहा है मेरा डेज है मुझे नाम रहा है है लेकिन
[26:32]इस्लाम क्या कहते हैं इस्लाम कहता है कि अगर बाप तुम्हें दाम
[26:37]पर तब भी जो है उसकी इज्जत करो बर्दाश्त करो और आपके
[26:42]सामने खुदा न खास्ता इसकी हत्या जबकि देश की न करो बल्कि
[26:46]अगर चीज आप बुरा हो लेकिन बच्चों को चाहिए और आपको चाहिए
[26:52]कि बाप की इज्जत करें खामोश रहे तो फिर जो है अल्लाताला
[26:54]है मैं आपसे खुश हो जाएंगे फिर इससे आप और दुरुद ओ
[27:00]सलाम भेजेंगे सही है जी यह पर आने करें तो हमारी जिम्मेदारी
[27:03]में यूज कर रहा था कि मौजों से नाटो की तिलावत करना
[27:08]कि यह तरल खुराना विहीन रविवार स्वास्थ्य मुझे मुझसे पूछेंगे कि मैं
[27:16]यह हम कितने फॉर्म पड़े कितनी आए थे पड़े तो कोई शक्ति
[27:19]नहीं है तो यह जरूरी नहीं है कि आप जो एक बार
[27:22]अपने आधार पर अपने जितना हो सकता है ज्यादा हो सकता आप
[27:28]छोटे और लंबी दौड़ सकते हैं जितना आपके बस में एक आयत
[27:34]2 आयत अब रो पड़े या आधा सपा समय पड़े अगर ज्यादा
[27:38]कि जब आप थके हुए नहीं है या अब आपने जज्बा है
[27:42]तो फिर जो है आदत सफा एक सवा दो सभी पढ़ ले
[27:46]लेकिन पढ़ना यह सही अंदाज में पड़ने चाहिए सही अंदाज में पढ़ने
[27:51]के लिए पहले तो जो है आपको सुनना था कि कितने लोग
[27:53]हमारे अल हमदुलिल्ला हमारी तो मीठी में कि नो है पढ़ने वाले
[28:01]अल्हम्दुलिल्लाह बहुत है यह इबादत है अलावे अधिग्रहण व्हेयर थे फादर थे
[28:05]मन का पढ़ते अल्हम्दुलिल्लाह लेकिन कुरान की तिलावत करने वाले भी इतने
[28:08]हैं क्यों नहीं है हालांकि हमारे नबी ए करीम ने फरमाया था
[28:13]कि मैं और अनुसार इस व्रत को छोड़कर जा रहा हूं सिर्फ
[28:18]इतना तो नहीं सिर्फ और उनको नहीं दौरान और इतना दोनों को
[28:21]छोड़कर जा रहा हूं ताकि तुम दोनों से नतमस्तक रहें और गुमराही
[28:26]से बच जाए जलालत से महफूज रहे तो चाहिए कि जिस तरफ
[28:33]लोहा पड़ते हैं माशाल्लाह मुरैना-भिंड सलाम की नजरे करम आप पर है
[28:37]मतलब हां पड़ते हैं पड़े अच्छी बातें स्वागत है बहुत मन कबत
[28:39]पढ़ते सलाम पड़ते हैं स्वस्थानी आप करते हैं यह भी इबादत है
[28:45]यह लें इससे मस्से होने के लिए लेकिन दौरान सभी नतमस्तक होने
[28:47]चाहिए यान है दर्ज कर रहा है को इंशाल्लाह आप सबको तौफीक
[28:52]अता फरमाएं अल्लाह ताला की दौरान अधिकारियों से मोती मस्जिद रहें क्योंकि
[28:57]हम जो अली वाले हैं कि हम मौला अली के शेर आया
[29:03]है तो मौला अली तो हमेशा कुरान के साथ होते थे और
[29:07]मुलायम फाल्गुन माल कुरान कुरान व हदीस पैगंबर की अधिवेशन के दौरान
[29:12]अली के साथ वाली हमेशा कुरान के साथ अली मोला अली अलैहिस्सलाम
[29:16]जयपुर आने ना तित बोलता पुराने अलार्म सलाम बोलता दौरान है और
[29:22]कुरान शरीफ मुताबिक शरीर मस्जिद में अहम कॉल के बढ़ते हैं वह
[29:25]कौड़ा ने स्मिथ है हारमोंस दौरान है अगर हम पड़े तो फिर
[29:30]यह आवाज में बदल जाएगी तो एक हदीस शरीफ है आपके सामने
[29:36]में बयान करूंगा कि जब अब देखेंगे अल्लाह और हमारे दरमियां जो
[29:40]राहत है सही है हलाकि वहां पर हमारे दिल में है और
[29:45]अल्लाह वो भी हमसे मोहब्बत करते हैं बंधुओं से मोहब्बत करते हैं
[29:49]है जितना मां-बाप अपने बच्चों से मोहब्बत करते उससे कई गुना ज्यादा
[29:55]क्या कई गुना आपके तैनात नहीं बता सकते हैं वे निहायत ही
[29:58]उन्नत ज्यादा गहरा प्रभाव दाल मीन अपने बंदों से मोहब्बत करता है
[30:03]मैं अपने बंधुओं की जहमत बीमारी रंजिश अल्लाह कुछ के लिए तकलीफदेह
[30:11]है तो देखें दोनों तरफ से रायता अल्लाह कि हम अल्लाह के
[30:16]जाने के अलावा की तरफ से बंधुओं की राह बतावै और बंदा
[30:21]अल्लाह के साथ किस तरह रायता इन करते तो कभी सारांश यही
[30:23]है कि जब तुम चाहो कि अल्लाह से बात करो ना ये
[30:29]हमला से बात करना चाहते हो हां भाई जोशुआ समय पसंद है
[30:34]जो जात हमें पसंद है जिस जाति मोहब्बत हमारे दिल में है
[30:36]उस लाओत्से राह बतावै करना चाहते हैं बात करना चाहते तो हम
[30:42]शरीर में के अंदर अल्लाह से बात करना चाहे कि क्या पढ़ो
[30:47]नमाज ए है कि जो नमाज आपने पढ़ पढ़ चुके हैं अल्लाह
[30:49]ताला आप सबको निवासियों में से निचला करार दे दें जी बादशाह
[30:56]दिशाओं में बच्चे जब अपनों सा लड़का जब घोषाल का हो जाए
[30:58]और बात हदीसों में सात साल की उम्र में नमाज पढ़ने की
[31:03]आदत करें सैया जी हमार करने की आदत ज्यादा अपने आप को
[31:08]तकलीफ हो ना डालें लेकिन नमाज पढ़ने का आदत करें ताकि बालिक
[31:10]होने के बाद ने मार्श ना बन जाए निमाज मांसानि आप पढ़
[31:16]सकें किंतु आदत डाली तो जब अल्लाह से बात करना चाहते हो
[31:19]और इसमें निर्मला से बात करना चाहते हो तो हमारा हो नमाज
[31:23]पढ़ो जब तुम चाहो के अल्लाह तुमसे बात करें कुरान शरीफ की
[31:28]तिलावत करें तो यह दो तरफा वे सफेद रहता है बंद और
[31:29]अल्लाह के दरमियान अल्लाह भी बंदे से बात कर रहा है और
[31:34]बंदर भी अपना से बात कर रहा है नीमच के जरिए बंगला
[31:37]से बात करता है और कुरान शरीफ वह के जरिए अल्लाह सुभानव
[31:41]तालाह बंदे से बात कर रहा है तो यह दो तरफ बता
[31:44]है दोस्ती और मोहोब्बत करावे तक हम रहे तो इंशाल्लाह अ की
[31:50]हिदायत के दरवाजे के सामने खुल जाते हैं को दुरुस्त अरे मोहम्मद
[31:54]आमिर मोहम्मद स.अ.
[31:56]कर दो कर दो का जिक्र तो कि एक जिम्मदारी यह है
[32:07]कि हमको राम को पढ़ने हैं कि ककरा घूमता यह शर्मनाक और
[32:13]जितना हो सके ना पड़े हो कि मैं पर मैं एक बार
[32:18]जरूर पढ़ो रोजाना अपनी किताबों सकता है जितना आपका दिल में बरदास
[32:22]कर सकता है सगे जी अपने आपको समझ में ना डालें तभी
[32:27]यह इंसान के दिल में मुख्तलिफ काला परछाई देखा अभी किसी चीज
[32:29]का शौक होता है कभी पुश योर खत्म था जब आपके घर
[32:32]में सूख जज्बा पैदा हो जाए कुरान शरीफ पढ़ चाहिए नहीं और
[32:36]उसके बाद यह तो पूर्व ही करना आयात के तर्जुमा भी पढ़ने
[32:39]तभी को बार सहज कुरआन करीम में तदब्बुर करें और करें फिर
[32:45]करें यह तदबीर करना भी इबादत है इबादत जैसा कि नमाज पढ़ने
[32:50]इबादत है रोजा रखना है वह उद्देश अर्पण है बाद अत्यंत हां
[32:55]प्रणाम आदत और तारे शेयर करना कुरान पढ़ना इबादत हैं लेकिन सोचना
[32:58]किसी भी काम को अंजाम देने से पहले सोचना था तब फिर
[33:03]करना चाहिए अगर मैं यह काम करूं तो उसका नतीजा अच्छा होगा
[33:05]कि नहीं होगा जल्दबाजी ना करें किसी का पैगाम अपना अच्छा लगा
[33:10]जल्दी कर बहुत सकता है कि पहुंचे तांगे है उसकी तरफ उस्ताद
[33:12]की तरफ को ले जा रहा है और तरीके उसके हाथ अगर
[33:15]अच्छा हो तो फिर जो है अब उस काम को अंजाम देने
[33:19]कि और फिर करना और आप मुझे जरुर करना यह देखा जी
[33:24]मैम आदत है जैसा कि हमारे प्यारे नबी के सहाबी हसरतें अब
[33:28]दूसरे अफ्तारी कि रहमतुल्ला आले के बारे में रिवायत है कि जिन
[33:33]पर दूसरों के अक्सर इबादत जाए तब और सोच है मैं नमाज
[33:40]और इबादत दी पढ़ते थे लेकिन कहीं इबादत निर्माण शुरू और मुस्तफा
[33:46]नवाज सिर्फ कहीं ज्यादा गहरा तदब्बुर करते हैं और फिर करते थे
[33:49]अक्षर व्वे इसमें है कि अक्षर वाई बांधती अभी इधर अत यह
[33:56]कुरु वाले भार हजरत अमीर व की इबादत ज्यादातर जो है तप
[34:02]और व्रत लेना है वृत देना कि दूसरे लोगों की बदबख्ती से
[34:09]दूसरे ग्रहों के अनुसार घुमाकर स्कूल लोग करते हैं दुनिया में इस
[34:12]वर्ष के धुंधला हमें लगता है लेकिन उन्हें अपना हमें इजाजत नहीं
[34:15]है कुना इंसान के दिल को सी यह करता इंसान के दिल
[34:20]को काला करता है और इसी दुनिया की ख़ुशी भी अल्लाह ताला
[34:26]उससे छीन लेता है तो यह न सोचें कि आप जो है
[34:30]खुदा ना खास्ता गलत फिल्में देखें ओन हंसा गलत तस्वीरें देखिए तो
[34:32]आप कोशिश है कि नहीं यह जो है निदामत और पश्चिम हमारे
[34:38]नक्श में जो लैपटॉप सिलवाना है जो मलामत करता है उससे यह
[34:40]हमारी तबीयत खराब होती है गुना के जरिए इंसान की तबीयत खराब
[34:44]होती है लेकिन हम लिए शहर के जरिए इंसान के दिल में
[34:49]खुशियां जाती है निवास के जरिए महिला को याद करना अल्लाह को
[34:51]याद करें तो यह मीना सुकून चैन के दिल में पैदा होता
[34:57]है एंग्जाइटी डिप्रेशन परेशानी सब खत्म हो जाते हैं हालांकि कृष्ण लीला
[35:00]ही तत्व इन उनको लोभ आ रहा हूं कि सिर्फ अल्लाह को
[35:07]याद करके इंसान सुकून पाता है तो मेरे ख्याल में बराबर मात्रा
[35:10]में वर्मा ने की टाइम आ गया है बातें और भी थी
[35:16]इंशाल्ला कभी मौका मिले तो इंशाल्लाह असीत इसी मौजूद सिमर ग्रोथ कुसमा
[35:20]रोजगार आपके सामने पेश करनी है कि इस आदत हासिल करूंगा अल्लाह
[35:24]ताला हम सब को और आयुर्वेद से मोती मस्जिद रहने की तौफीक
[35:31]अता फरमाए ताकि हम अपनी दुनिया को भी बात कर सकें और
[35:35]आलम में आपके रक्त तो भी आप बात कर सकें ओम शांति
[35:36]ओम
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