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Quds Day in Kashmir: Kashmiri Ladkiyon Ka Muh Tod Jawab SabeelVox
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26/03/14
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Lectures
Kashmiri girls share their views on Quds Day during the ongoing Iran–Israel tensions. A vox pop from Kashmir capturing public reactions and opinions. Quds Day in Kashmir, Kashmiri girls reaction, Kashmir vox pop, Iran Israel conflict, Palestine solidarity, Kashmir street interview. #QudsDay #Kashmir #KashmiriGirls #VoxPop #Palestine #IranIsrael #KashmirNews #StreetInterview #KashmirVoices #FreePalestine #QudsDayKashmir #KashmiriYouth
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Transcript
[0:00]हम लोग उन अरब मुालिक को दिखा रहे हैं जिन्होंने चूड़ियां पहनी
[0:03]है उनको दिखा रहे हैं कि हम अगर कहीं पे दुनिया के
[0:09]किसी भी कोने पे जुल्म हो हम चुप नहीं रह सकते। रहबर
[0:13]मोजम ने अपना खून देकर इस्लाम के शजरे तैबा को एक हयात
[0:19]नौ बख्शी। हम अगर झुकेंगे तो सिर्फ और सिर्फ अपने परवरदिगार के
[0:24]सामने झुकेंगे और दुनिया की कोई भी ताकत हमें नहीं झुका सकती
[0:29]है। क्यों है जरूरी फस्तीनियों के लिए आवाज उठाना?
[0:30]मेरे रहमत का फरमान है हर मजलूम के साथ कमर बस्ता हो
[0:37]जाओ। उसके साथ हो जाओ ताकि वो उस जुल्म से उस जालिम
[0:42]के जंगल से आजाद हो जाए। ये रमजान हमारे आका के बगैर
[0:47]ऐसे गुजरा है जैसे हम देख सकते हैं कि कूफा वालों के
[0:48]साथ जब इमाम अली अली सलाम शहीद हो गया था उनका रमजान
[0:53]कैसे गया होगा बहुत मैं मैं बयान ही नहीं कर सकता क्योंकि
[0:55]यतीम हो गए हम उनको अभी भी मिस कर रहे हैं और
[0:59]हम आप लोगों को वादा करते हैं कि कुछ्स आजाद होगा इंशाल्लाह
[1:04]इंशाल्लाह इंशा्लाह अस्सलाम वालेकुम आप जो मेरे पीछे हजारों की तादाद में
[1:07]लोग देख रहे हैं वो सिर्फ एक मकसद के लिए आज निकले
[1:11]हैं आज है यौमे कुर्स जो कि हमारे इमाम खुमेनी ने शुरू
[1:13]किया था जो कि फस्तीन के लिए आवाज उठाने का नाम है
[1:16]और आज हम हैं कश्मीर के बड़गांव में और यहां पे हजारों
[1:20]की तादाद में लोग निकले हैं सिर्फ इस मकसद से कि फिलस्तीन
[1:22]का नाम आगे ले जाना है और उन पे जो ऑपरेशन हो
[1:25]रहा है उसके खिलाफ आवाज उठाएंगे। तो चलते हैं देखते हैं आवाम
[1:28]की क्या सोच है और इनकी क्या आवाज है फस्तीनियों को लेकर
[1:30]और देखते हैं इनके क्या इमोशंस है। अस्सलाम वालेकुम। वालेकुम अस्सलाम। आज
[1:35]जो यौमे कुद्स है इसमें आपकी शिरकत का क्या मतलब है?
[1:38]आज क्या मकसद है आपका?
[1:41]योमे कुद्स जो है ये हमारे जैसे ईरान से इस्लामिक रिवोल्यूशन के
[1:44]जो लीडर्स थे फॉर एग्जांपल सैयद अली हुसैनी खामिनाई या फिर खुमैनी
[1:47]साहब थे या फिर अभी जो करंट है हमारे सैयद मुस्तबा खामनाई
[1:51]दे हैव मेड इट वाजिब हम सबके लिए कि हम लोग इसमें
[1:54]पार्टिसिपेट करें और इसका मेन मोटिव ये है दैट वी शुड लाइक
[1:59]वी एज अ शिया वी एज अ मुस्लिम शुड गेट लाइक हम
[2:03]लोग को खड़ा होना चाहिए अगेंस्ट ऑपरेशन चाहे कहीं पर भी हो
[2:05]रहा है अभी पूरी दुनिया जो है वो देख रही होगी होगी
[2:09]कि ऑपरेशन जो है मेनली अभी इस वक्त पैलेस्टाइन पे हो रहा
[2:13]है। तो पैलेस्टाइन नॉट ओनली पैलेस्टाइन लेबनॉन है, लेबन है या फिर
[2:17]ईरान है। तो वी आर हियर टू सपोर्ट दैट एंड वी आर
[2:20]हियर टू टेल देम कि हम लोग आप लोगों के साथ हैं।
[2:23]हमारे इस योमे कुद्स का असली मकसद ये है कि इमाम खुमैनी
[2:25]रहमतुल्लाह अला ने तब उस जमाने में कहा था कि सब जुमा
[2:31]यानी रमजान के आखिरी जुमा सब इकट्ठे हो जाएंगे। और ना के
[2:35]सिर्फ फस्तीनियों के लिए बल्कि दुनिया में जितने भी जालिम हैं उनके
[2:39]खिलाफ खड़े हो जाएंगे और जितने भी मजलूम है उनकी हिमायत के
[2:43]लिए हम अपनी आवाज उठाएंगे। हम लोग उन अरब मुालिक को दिखा
[2:46]रहे हैं जिन्होंने चूड़ियां पहनी है उनको दिखा रहे हैं कि हम
[2:48]अगर कहीं पे दुनिया के किसी भी कोने पे जुल्म हो हम
[2:51]चुप नहीं रह सकते हैं। अगर ये हमारी रिस्पांसिबिलिटी है। हमें उस
[2:56]जुल्म के खिलाफ आवाज उठानी है। हमें ह्यूमैनिटी दिखानी है। ये इंसानियत
[2:59]है जो हमें दिखानी है। हम लोग इन सब से नहीं डरते
[3:02]हैं। और ना ही हम डरेंगे और ना ही हमें डराया जाएगा।
[3:04]हम दिखाएंगे इनको कि शिया याने अली किसको कहते हैं। हमारे मौला
[3:09]ने हमें बोला है जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना हर मुसलमान पे
[3:11]वाजिब है। जो कि शायद आज के मुालिक आज के मुसलमान मुालिक
[3:14]ये चीज भूल गए हैं। लेकिन हम है उनको याद दिलाने के
[3:18]लिए ईरानी फर्स्ट ईरानी फर्स्ट सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह रहला खामनाई एस्टैब्लिश अलक
[3:23]इन 1979 इजराइल ऑक्यूपेशन ऑफ ईस्ट जरूरम। रिसेंटली हमारे आयतुल्ला सैयद अली
[3:32]खामिनाई की शहादत हुई। उसके लिए भी आज हम यहां पे इकट्ठे
[3:34]हुए हैं। वी हैव गैदर्ड हियर ताकि हम अपनी आवाज हम अपनी
[3:38]आवाज रेज कर सके जुल्म के खिलाफ जालिम के खिलाफ। एक्चुअली ऑन
[3:43]दिस कोड्स डे वी हैव ऑल गैदर्ड हियर टू स्टुड अगेंस्ट द
[3:51]ऑपरेशन एस्पेशली द ऑप्रेस द ऑपरेशन इंपोज्ड बाय अमेरिका एंड इजराइल। दे
[3:56]हैव अह बॉम्बर्ड इनोसेंट लाइव्स इन पैलेस्टाइन एंड नाउ इन ईरान। अह
[4:01]दे हैव वार्मेड जस्ट अह डाइवर्ट द अटेंशन ऑफ वर्ल्ड्स फ्रॉमस्टीन फाइल्स।
[4:06]दे हैव डाइवर्ट द अटेंशन ऑफ वर्ल्ड फ्रॉम देयर स्कैंडल्स। दे हैव
[4:14]मार्टियर्ड आवर रहबर सैयद अली खामनाई। ही हैज़ लेफ्ट दिस वर्ल्ड बट
[4:17]द रीज़न एंड द बिकॉज़ ही हैज़ बीन स्टुड फॉर विल नेवर
[4:22]डाई। आज आप जैसा आप जानते हैं आज का अल कुदस का
[4:25]दिन है। रमजान के आखरी जुम्मा को जो अलदस कहा जाता है।
[4:27]हम अलदस इसलिए बनाते हैं ताकि हम पूरी दुनिया में ये फैला
[4:31]सके कि फिलस्तीन की मजलूमियत क्या है और मक्सा जो अक्स मजिस
[4:34]है उसकी अहमियत को हम याद रख सके। यमे कुदसा ने तमाम
[4:38]मजलूम जहान के हक में खड़ा होना खुसूसन बैतुल मुकद्दस जो अभी
[4:45]इसराइल के इस जुल्म के तहत कब्जे में है और मुसलमानों को
[4:47]इजाजत नहीं मिल रही है जो वहां पर रह रहे हैं मुसलमान
[4:53]इब्तदा से वो चाहते हैं कि उस सर जमीन पे जाए सर
[4:56]सुजूद हो जाए नमाज अदा करें लेकिन उनको इजाजत नहीं मिले मिल
[4:59]रही है और अभी तक ये जुल्मो बर्बरियत जारी है लिहाजा यौमे
[5:05]कुस हम इसलिए मनाते हैं ताकि यह सदा एहतजाज बुलंद रहे कि
[5:08]कदस और बैतुल मुकद्दस मुसलमानों की वह जगह मुकद्दस जगह है जहां
[5:15]क़बले अव्वल मुस्लिमीन था। सयन जहां वो मुसलमानों पे या गैर मुसलमानों
[5:18]पे जहां पे मजलूमीन है हम उनकी हिमायत में खड़े हैं। चाहे
[5:22]हर जमीन में हो। रहबर के बगैर बुद्ध्स डे कैसा लग रहा
[5:26]है?
[5:24]रहबर के बगैर एक ऐसा है कि हमारे हमारे दिल में एक
[5:28]एक ऐसा हिस्सा है। रहबर एक इस ऐसा हिस्सा है जो हमेशा
[5:32]जिंदा रहेगा। मगर कहीं ना कहीं उनकी कमी बहुत ज्यादा महसूस हो
[5:34]रही है। हमें नहीं पता ये रमजान कैसे गुजरा है। ये रमजान
[5:38]हमारे आगा के बगैर ऐसे गुजरा है जैसे हम देख सकते हैं
[5:42]कि कूफा वालों के साथ जब इमाम अली अली सलाम शहीद हो
[5:43]गया था उनका रमजान कैसे गया होगा। ईद करीब है लेकिन हमारा
[5:47]आगा हमारे साथ नहीं है। इस ऐसी ईद ऐसी ईद हम अल्लाह
[5:51]से दुआ करते हैं ऐसी ईद किसी को नसीब ना हो जो
[5:55]ईद हमें नसीब हो। रहबर रहबर ने शहादत दे दी। लेकिन हम
[5:57]वादा करते हैं पूरे मुसलमान मुल्क से रहबर का जो मकसद है
[6:03]अलस उसको हम आजाद करके रहेंगे। हर एक मुसलमान हर एक श
[6:05]यानी अली का वादा है वो हम करेंगे। हम यहां पे हैं।
[6:09]हम इन्हीं को इन्हीं अरब मुालिक को बताना चाहते हैं इन्हीं को
[6:14]कि हम लोग हम लोग उनको ये बताना चाहते हैं कि अगर
[6:15]वो लोग हमारे घर बारों को उजाड़ दे। हमारे सारे बहन भाइयों
[6:19]को ज़बाह करें, कुर्बान करें। हमारे मां-बाप को कुर्बान करें। मगर हम
[6:23]उस चीज से नहीं हटेंगे। हम कुछ को आजाद करके रहेंगे और
[6:27]यह हर एक मुसलमान का वादा होना चाहिए जो कि बदकिस्मती से
[6:30]नहीं है। बहुत ही मैं मैं बयान ही नहीं कर सकता क्योंकि
[6:35]यतीम हो गए हम एक्चुअली बेसिकली सीरियसली मतलब कि मैं हमारे बचपन
[6:38]से सिखाया गया है कि हमारा रहबर इमाम जब मैं छोटा था
[6:43]मुझे मां बोल रही थी ये रहबर है उसको मतलब कि झूमो
[6:48]मतलब कि एक्चुअली सडनली मतलब कि एक जलजला हुआ जब रहबर हमारा
[6:51]शहीद हो गया हम क्या रहबर मोज़म सैयद अली खामना हमारे लिए
[6:56]सुकून का बायस थे उनका जब भी हम किसी मुसीबत में फंसते
[6:59]थे तो उनका चेहरा ही नाजरीन ही हमारी हमारी उस तस्कीन का
[7:05]जरिया था। ले हमें हम हमारे दिलों में इस वक्त गम है।
[7:07]मुसीबत है। हम हम गम में हैं। वी आर इन सोरो वी
[7:13]आर इन सोरो बट वी विल नेवर वी विल नेवर लेट आवर
[7:18]एनिमीज़ लेट आवर एनिमीज़। हम कभी अपने दुश्मनों को ये जुल्मो जादती
[7:24]और रहबरे मोज़म की शहादत इस कमजोरी की वजह नहीं बनेगी। हम
[7:28]रेजिस्टेंस को कंटिन्यू रखेंगे। रहबर मोज़म ने अपना खून देकर इस्लाम के
[7:33]शजरे तैबा को एक हयात नौ बख्श। उनके बगैर काफी ज्यादा अफसुर्दगी
[7:40]है। लेकिन ये शायद इसराइल इसराइली और अमेरिकी मालिक उनकी गलतफहमी होगी
[7:44]कि उनको शहीद कर देने से हमारी कमर खम हो गई होगी।
[7:50]लेकिन ऐसा नहीं है। उनकी शहादत ने हमारे खून को खोला है।
[7:52]जिसकी वजह से हमारी स्ट्रेंथ और ज्यादा बढ़ी है। और जैसे कि
[7:56]ये कहा भी जाता है दैट दीज़ गैदरिंग्स आर अनलॉफुल। बट लेट
[7:59]मी क्लियर वन लेट मी क्लियर जस्ट वन थिंग कि अनलॉफुल नहीं
[8:03]है। अंडर आर्टिकल 25 ऑफ़ द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन वी आर गिवन दिस
[8:06]राइट टू प्रैक्टिस आवर रिलीजियस बिलीफ्स एंड रिलीजियस एवरीथिंग प्रैक्टिस। आज के
[8:11]दिन के अकॉर्डिंगली हमारा रिलीजियस बिलीफ क्या है?
[8:13]हमारा रिलीजियस बिलीफ यही है कि आप जहां पे भी जुल्म देखते
[8:17]हैं, आपको उसके खिलाफ खड़े होना है। जैसे हमारे आयतुल्लाह इल उज्जमा
[8:19]सैयद अली खामना ही खड़े हुए थे। एंड देयर इज़ नो लेट
[8:23]मी क्लियर वन अनदर थिंग आल्सो। देयर इज़ नो एनी पॉलिटिकल इंटरेस्ट
[8:26]इन दिस। ये सिर्फ ह्यूमैनिटी का मामला है। आज का दिन मुझे
[8:30]उनके लिए बहुत ही अच्छा महसूस नहीं हो रहा है क्योंकि वो
[8:34]हम मतलब हमारे रहबर थे। हमारे लीडर थे, सुप्रीम लीडर थे। लेकिन
[8:36]आज उनके बिना कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है। दिल बहुत
[8:39]उदास है क्योंकि हमने कभी सोचा नहीं था कि कोई दिन ऐसा
[8:44]आएगा जिसमें हमें रहबर के बगैर कोई मतलब डे मनाना होगा। तो
[8:45]बहुत दिल बहुत उदास है आज। के शहादत बहाल हमारा मीरास है।
[8:51]हमारी मीरास है और हम शहादत के लिए जिंदगी गुजारते हैं। लेकिन
[8:54]जहां तक जाहरी तौर से हम पहला यौमे कुदस है। पहला जुमातुल
[9:00]विदा है जो हम अपने रहबर के बगैर बलोच कुरान का वादा
[9:04]है जो राहे खुदा में अपनी जान देते हैं। वो जिंदा हैं।
[9:06]उनके अफकार उनके रूहे मुकद्दस हमारे साथ हैं। वो इंशा्लाह जो पैगाम
[9:13]रहबर मुजम इंकलाब ने दिया था। हम उनसे वादो वफा करते हैं,
[9:15]अहद करते हैं। उस राह पे हम चलेंगे इंशाल्लाह चाहे हमें अपनी
[9:19]जाने भी नछावर करनी पड़े। बहुत दुखी महसूस हो रहा है कि
[9:23]हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा रहबर सैयद अली खान मनाई
[9:25]इतनी जल्दी हमसे दूर चले जाएगा। उनके बगैर सब वीरान लग रहा
[9:31]है। रहबर ने हमारे दिल पे एक ऐसा ऐसे निशान छोड़े हैं
[9:36]जो कि कभी भी कम नहीं हो सकते। हमारे रहबर मुआजम ने
[9:38]हमारे दिलों पे ऐसा राज किया था कि छोटा-छोटा बच्चा आप दुनिया
[9:44]में देखेंगे छोटे-छोटे बच्चे जिनसे हमने तसवुर ही नहीं किया होगा इनकी
[9:47]भी समझ में आया होगा कि रहबर कौन है बट दे आर
[9:51]क्राइंग फॉर रहबर दे आर मॉर्निंग फॉर हिम क्योंकि रहबर ऐसी शख्सियत
[9:55]थे जिनका नाम लेने से ही जिनकी तरफ देखने से ही हमें
[10:00]सुकून मिलता था ऐसे थे हमारे सुप्रीम लीडर महसूस बहुत ही अच्छा
[10:05]नहीं हो रहा है क्योंकि हम उनको अभी भी मिस कर रहे
[10:11]हैं। शहादत के लिए तमन्ना करते थे। अल्लाह ताला ने उनका वो
[10:14]तमन्ना पूरा किया। वो खून जो नाहक तेहरान में बहा गया वो
[10:22]जरूर रंग लाएगा। दुनिया में अदल कायम होगा। दुनिया में इंसाफ कायम
[10:27]होगा। क्यों इतना जरूरी है फस्तीन हमारे लिए?
[10:28]फस्तीन इसलिए जरूरी है क्योंकि फस्तीन जरूरी नहीं। इंसानियत जरूरी है। पहले
[10:32]हमारे लिए इंसानियत जरूरी है। फिर हमारे लिए फस्तीन जरूरी है। एंड
[10:37]ये हमारे रहबर का भी वादा था कि हम फस्तीन को आजाद
[10:42]जरूर कराएंगे। और जितने भी जुल्म सह रहे हैं उनके उनकी हमदर्दी
[10:45]में हम हमेशा बात करेंगे। के पहली शख्सियत और जो अहमियत है
[10:49]बैतुल मुकद्दस पे वो बैतुल मस्जिद अक्सा की है। सियन मकतबे आशूरा
[10:55]और मकतबे अमीर मोमिनीन अली सलातो सलाम और उम्मत जनाबे मोहम्मद मुस्तफा
[11:00]सल्लल्लाहु अल वसल्लम जिस जगह भी जहां कोई भी मजलूम को देखता
[11:05]है और जालिम को देखता है वहां हर मुसलमान का फरीजा यही
[11:08]है। हर मकत-ए-आशुरा का पैरो पैरोकार का यह फरीजा यह है कि
[11:14]वो मजलूम के साथ खड़ा हो जाए और जालिम के साथ इजहार
[11:16]नफरत करे। फस्तीनी जरूरी है क्योंकि उनपे बहुत ज्यादा जुल्म किया जा
[11:22]रहा है। ये जुल्म ह्यूमैनिटी इज वेरी इंपॉर्टेंट रोल। हमारी जिंदगी में
[11:27]इंसानियत होनी चाहिए। वो किसी भी कम्युनिटी से बिलोंग करता हो। इंशा्लाह
[11:31]इंशाल्लाह अल कुद्स तेरी अजमत की कसम आजाद तुझे करवाएंगे। इंशा्लाह आजाद
[11:36]होगा। फिलस्तीन आजाद होगा इंशाल्लाह। इसकी एक वजह है हमारे लिए फिलिस्तीन
[11:44]को क्योंकि फिलस्तीन हमारी एक इस्लामी पहचान है। हमारी गैरत है। यू
[11:47]एनओ का भी ये कहना है कि सही यूनियन ने इस जमीन
[11:52]को गस्ब किया हुआ है और ये गैरकानूनी कब्जा है। इस गैर
[11:53]कानूनी कब्ज़ के खिलाफ हमने ये एहतेजाज बुलंद किया। और हर एक
[11:59]इंसानियत का दर्द रखने वाले इंसान की ये जिम्मेदारी बनती है कि
[12:02]वो इसके खिलाफ आवाज बुलंद करें। हमारे लिए फस्तीन इसलिए जरूरी जरूरी
[12:08]है बिकॉज़ वहां पे बहुत मजलूम है जिनकी हिमायत के लिए हम
[12:12]यहां पे खड़ा हो गए हैं। क्योंकि उनकी हिमायत के लिए ये
[12:16]जो अरब मलिक के लोग हैं ये जो बाकी मुस्लिम कंट्रीज है
[12:21]या बाकी है वो जिन्होंने इसराइल को अपना फादर लैंड माना है।
[12:24]तो वो फिलस्तीनों के लिए उनके फेवर में कुछ भी नहीं बोल
[12:30]रहे हैं। तो इसीलिए हम सब फस्तीनों की हिमायत के लिए यहां
[12:33]पे उन्हें हम ये तस्लीह देते हैं कि हम उनके साथ हैं।
[12:36]चाहे हम जिंदा रहे या मर जाए हम उनके साथ हैं। इमाम
[12:39]खामनाई ने फस्तीन के लिए क्या किया था?
[12:42]उन्होंने सबसे पहले नॉट ओनली रिलेटेड टू फस्तीन मगर जहां पर भी
[12:47]ऑपरेशन हो गया वो खड़े हुए। वो उन्होंने उनके खिलाफ बोला और
[12:50]हम शिया जो है ना हम लोग इसी के लिए माने जाते
[12:52]हैं कि हम लोग चाहे कहीं पर भी इवन दो हमारे पास
[12:56]क्रिश्चियंस होते हैं दे आर लाइक यू ओनली स्टैंड अगेन यू ओनली
[13:01]स्टैंड फॉर मुस्लिम्स लेकिन जहां पर भी ऑपरेशन हो जाता है वी
[13:03]स्टैंड फॉर देम और दूसरी बात ये है कि आई वुड लाइक
[13:07]टू मेंशन हियर अबाउट द ईरान बिकॉज़ अभी इट इज़ द हॉट
[13:10]टॉपिक थ्रू आउट द होल वर्ल्ड इट इज ये कि आई जस्ट
[13:11]वांट टू क्वेश्चन टू ईच एंड एव्री अमेरिकन आउट देयर टू ईच
[13:15]एंड एव्री पीपल इनफैक्ट इंडिया के लोग जो कि बोलते हैं कि
[13:18]वहां पर रिजीम टीम चेंज होनी चाहिए ईरान में। लेकिन मेन चीज
[13:20]ये है कि मैं आप सबको एक सवाल करना चाहूंगी। ट्रंप ने
[13:24]खबीश ट्रंप ने सबसे पहले कहां पर उन्होंने हमला किया?
[13:26]दैट वाज़ एट द स्कूल ऑफ़ मीना वेयर ऑलमोस्ट 180 गर्ल्स गॉट
[13:31]मारियर्ड। एंड नाउ यू नॉनसेंस पीपल एक्सपेक्ट कि वहां पर ट्रंप की
[13:35]हुकूमत होनी चाहिए। अलकुद्स हमारा है रहेगा। और वी विल ऑलवेज ऑलवेज
[13:41]ऑलवेज स्टैंड फॉर द फॉर पैलेस्तीन एंड जहां पर भी ऑपरेशन हो।
[13:44]आप देख सकते हैं कि फस्तीन के पूरे जो भी फस्तीन के
[13:48]यहां पे है वो सारे रहबर की मतलब हमारी या हम अगर
[13:51]बोलेंगे कि वो शायद उनको जानते भी नहीं होंगे जब तक ये
[13:55]हदफ नहीं उठा। जब इमाम खुमेनी ने ये हदफ उठाया तब से
[13:59]लेके आज तक हमें लगता है कि फस्तीन का जो ओनली एंड
[14:01]ओनली होप था वो ईरान था। वो रहबर था। क्योंकि कहीं ना
[14:06]कहीं उनको यकीन है। उनको यकीन था। उनको यकीन है और उनका
[14:11]यकीन हमेशा हम बाकी लाएंगे कि कुछ आजाद होगा। उनको किसी भी
[14:14]अरब मुालिक से कोई मसला नहीं है। वो लोग नहीं चाहते हैं।
[14:17]वो लोग वो लोग यहीं से बोल रहे हैं कि ये लोग
[14:20]नहीं करेंगे। लेकिन ईरान एक ऐसी कंट्री है, हमारा रहबर एक ऐसा
[14:23]लीडर है जिन्होंने उनसे वादा किया है और बहुत हद तक उन्होंने
[14:26]उस वादे पे अमल भी किया है। क्योंकि इस वक्त अलामत है
[14:31]वैसे मजलूम दुनिया में फस्तीन हर कोई मजलूम जो होगा हमें अपने
[14:40]पैगंबर रहमत का फरमान है। हर मजलूम के साथ कमर बस्ता हो
[14:47]जाओ। उसके साथ हो जाओ ताकि वो उस जुल्म से उस जालिम
[14:51]के चंगल से आजाद हो जाए। जब से इंकलाब इस्लामी ईरान का
[14:56]आगाज हुआ बुनियाद पड़ी तब से बैतुल मुकद्दस की जो आवाज है
[14:59]यौमे कुदस है वो अलग तरीके से दुनिया तक पहुंची। पहले शायद
[15:04]मुसलमान या हम कहें कि एक मसलक फकत कुदस के लिए आवाज
[15:06]उठाता था। लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह आज बेरकत इंकलाब इस्लामी आज पूरी कायनात में
[15:12]कुदस के लिए आवाज उठाई जाती है। ऐसा इनके लोगों के लिए
[15:15]क्या मैसेज है?
[15:14]उनके लिए यह है कि अगर हम लोग आप लोगों के वहां
[15:18]पर साथ नहीं है। बट आई वांट टू टेल यू ऑल दैट
[15:21]हम लोग यहां पर हमेशा आप लोगों के लिए खड़े हैं। हमारा
[15:25]इस वक्त बस हमारा बस यह है कि हम लोग आप लोगों
[15:28]के लिए बात कर सकते हैं। हम लोग आप लोगों के लिए
[15:30]आवाज उठा सकते हैं। वी अनफॉर्चूनेटली अनफॉर्चूनेटली वी कैन नॉट सैक्रिफाइस आवर
[15:33]चिल्ड्रन। बट हम लोग आप लोगों को ये बताएंगे दैट वी आर
[15:37]रेडी टू गिव थाउजेंड्स एंड मिलियंस ऑफ़ कासिम सुलेमानी। थाउजेंड्स एंड मिलियंस
[15:41]ऑफ़ हिजबुल्ला सोल्जर्स फ्रॉम आवर कश्मीर एंड इंशा्लाह इंशा्लाह वी आर ऑलवेज
[15:44]हियर फॉर यू और हम लोग हमेशा आपके लिए साथ हैं और
[15:48]हमेशा हमेशा हम लोग जहां पर भी जुल्मत हो रही है वी
[15:52]आर अगेन दैट मैं उनसे ये बोलना चाहती हूं कि आप लोग
[15:55]मत समझो आप तनहा हो आप लोग तन्हा नहीं हो हम सब
[15:56]आपके साथ हैं। हम सब आपके जुल्म के खिलाफ आवाज उठाएंगे। आप
[16:00]देख सकते हैं कि हम कैसे आपके जुल्म के खिलाफ आवाज उठा
[16:03]रहे हैं जो हमारे रहबर ने किया। हमने अपने रहबर को कुर्बान
[16:06]किया उस चीज के लिए और हम आप लोगों को वादा करते
[16:09]हैं कि कुस आजाद होगा इंशा्लाह इंशा्लाह इंशा्लाह फैलेस्तीनियों के लिए हमारा
[16:15]पैगाम ये है कि हम उनको भी तन्हा नहीं छोड़ेंगे ये रेजिस्टेंस
[16:18]ये जुल्म के खिलाफ आवाज हमेशा बुलंद रहेगी अगर हमें अपनी जानों
[16:24]का नजराना भी पेश करना पड़ेगा आज जरूर हमारे सैयद अली खामनाई
[16:29]हमारे बीच नहीं है लेकिन उनको बिल्कुल भी ना उम्मीद नहीं होना
[16:31]है वी विल ऑलवेज स्टैंड फॉर देम वी ऑलवेज रेज आवर वॉइसेसेस
[16:34]फॉर फॉर देम अगर हम हमें कुर्बान भी होना पड़े हमारे मां-बाप
[16:37]को हमारे बच्चों को बहनों भाइयों को हम हो जाएंगे लेकिन हम
[16:42]तब तक उनकी आवाज उठाएंगे जब तक हम फिलिस्तीन को आजाद नहीं
[16:44]करवाएंगे और हम मस्जिद अल अक्सा में सब इकट्ठे होके नमाज नहीं
[16:50]अदा करेंगे। तो यह जज्बा था और जुर्रत थी हमारी कौम की
[16:55]कि आज फस्तीन के लिए आवाज उठी और हमारी कौम ने यह
[16:56]साबित कर दिया कि फिलस्तीन अकेला नहीं है। हम उनके साथ हैं।
[17:01]हमारी इन रैली से बस एक सदा निकलती है। ऐ फस्तीन के
[17:04]मजलूमों हम तुम्हारे साथ हैं। और इंशाल्लाह फस्तीन की कामयाबी होगी। ईरान
[17:07]की फतह होगी। और जो जुल्म है अभी इस पे इंशाल्लाह इस्लाम
[17:09]गालिब होगा। इस पे ईमान गालिब होगा। और जैसे कि हमेशा सच्चाई
[17:14]की जीत होती है। ईमान की जीत होती है। ईरान की जीत
[17:18]होगी। फस्तीन की जीत होगी और इंशाल्लाह मस्जिद अक्सा हमारी होगी। तो
[17:20]यह था आज का एपिसोड। उम्मीद है कि आपको पसंद आया होगा
[17:23]और यह जो कौम की आवाज है आप आगे पहुंचाए। इस वीडियो
[17:24]को शेयर करें और कमेंट्स में बताएं आपके लिए अगला वीडियो क्या
[17:30]होना चाहिए। बाकी दीजिए इजाजत। खुदा हाफिज।
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