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Public Reactions to Ayatullah Khamenei Death Shocking Responses | Sabeel Voxpop
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Public Reactions to Ayatullah Khamenei Death Shocking Responses | Sabeel Voxpop
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[0:03]उसका नेका दिल किसी का नहीं है अभी तक। जो मजलूम के
[0:08]साथ खड़ा होता है उसके साथ अल्लाह होता है। छोड़ के चले
[0:12]गए यतीम हुआ ऐसा लग रहा है। काश के हम उनकी जगह
[0:16]होते। ऐसा हाल हो रखा था उस समय उस कयामत से बस।
[0:19]यू कैन किल आवर रहबर। यू कैन किल आवर लीडर्स। बट यू
[0:22]कैन नॉट किल आवर बिलीव्स एंड अकीदा। हम कर्बला वाले हैं। हम
[0:27]अली वाले हैं। हमारी हुसैनी मां हमें यह दर्द देता है। सर
[0:30]घटाना है लेकिन झुकाना है। अब जो आगे के दिन होंगे इसराइल
[0:36]देखेगा, अमेरिका देखेगा इनकी नस्ल इसका अंजामगी। अब आगे चलके मुर्दाबाद मुर्दाबाद
[0:42]मुर्दाबाद मुर्दाबाद मुर्दाबाद। अस्सलाम वालेकुम। जैसे आपको पता है कि आज ईरान
[0:48]के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामिनाई को शहीद कर दिया गया। और अभी
[0:52]हम आए हैं दिल्ली के जंतरमंतर में और यहां पे हो रहा
[0:54]है इस वक्त सबसे बड़ा प्रोटेस्ट। हम अभी लोगों से बात करने
[0:58]की कोशिश करेंगे और देखेंगे उनकी क्या फीलिंग्स हैं इस इंसिडेंट के
[1:01]रिगार्डिंग। आज के प्रोटेस्ट में आने की क्या वजह है। आज हम
[1:05]यहां पे आए हैं ये दिखाने के लिए कि हम अपने रहबर
[1:09]के साथ खड़े हैं। अगर उनको शहीद करके वो चाहते हैं कि
[1:13]हमें कमजोर कर दें। तो ये बहुत बड़ी बेवकूफी और भूल है
[1:15]उनकी। क्योंकि आज हम यही दिखाने आए हैं कि भले ही हम
[1:19]आज रो रहे हैं। हम गमगीन है। हमारे दिल बहुत ही ज्यादा
[1:22]वी आर जस्ट सो अपसेट अबाउट एवरीथिंग। बट वी आर स्टिल स्टैंडिंग
[1:25]विथ द रहबर एंड रिगार्डलेस ऑफ़ व्हाट हैपेंस इन द फ्यूचर। हम
[1:30]तो जिंदा है ना हम हक के साथ रहेंगे। वो तो जाहिर
[1:35]है कि आज हमारे रहबर आयतुल्लाह सैयद अली खामनाई साहब की शहादत
[1:37]का दिन है। हम सबके दिल बहुत ज्यादा रंजीदा हैं। इस सिलसिले
[1:40]में यहां पर और तमाम मुल्क में और दुनिया भर में अब
[1:45]एतेजाज हो रहे हैं। और अब ये एक आवाम के लिए दुनिया
[1:50]भर की एक फैसला करने का एक मौका है। ये वक्त है
[1:53]कि वो किस तरफ हैं। वर्ल्ड आया है नया एब्सस्टीन क्लास। उस
[1:55]एस्टीन क्लास के लोग अब पूरी तरह खुल के सामने आ गए
[1:59]हैं। आज से 5 साल पहले जब हम ये जिक्र करते थे
[2:02]एस्टीन का तो हम कहलाते थे कांस्परेसी थेरिस्ट। लेकिन अब वो खुल
[2:05]के आ चुका है। वो खुल के वेनेजुएला पे उन्होंने उठा लिया
[2:07]उनका प्रेसिडेंट और भी तमाम जगह वो अब जिसकी लाठी उसकी भैंस
[2:11]वाला काम कर रहे हैं। जिसका जोर वहां हमला करो जो कमजोर
[2:16]है उसे दबाओ। तो अब हमें यह फैसला करना है कि हम
[2:17]किसकी तरफ हैं। देखिए सैयद अली खामनाई साहब पूरी दुनिया में माने
[2:24]हुए शियों के एक रहबर के तौर पे थे। हम उनको सुनते
[2:30]थे। उनके कलामात सुनते थे। सिर्फ थियोलॉजी से रिलेटेड नहीं, रिलजन से
[2:34]रिलेटेड नहीं लेकिन हिस्ट्री के ऊपर भी उनकी महारत थी। पोएट्री पे
[2:40]भी उनकी महारत थी और वो एक बहुत ही सच्चे और बड़े
[2:41]काबिल इंसान थे। मैं उस काबिलियत को सलाम करती हूं। उस जज्बे
[2:47]को सलाम करती हूं। उनकी रहबरी में ईरान ने आज वो मकाम
[2:53]हासिल किया है कि वो अमेरिका जैसे पावरफुल मुल्क से आग से
[2:55]आग मिला के और वो लड़ रहा है सिर्फ रहबर मुअजम की
[2:59]वजह से। तो आई हैव अ लॉट ऑफ रिस्पेक्ट फॉर द मैन।
[3:02]तो बहुत ज्यादा इमोशंस है लोगों में। लाइक इतना गुस्सा है, इतनी
[3:08]फीलिंग्स हैं, कहीं पे प्यार है ईरान के लिए, कहीं पे गुस्सा
[3:10]है इजराइल के लिए। तो बहुत ज्यादा मुश्किल है इस ये घड़ी
[3:15]इस कौम पे जैसे कि आयतुल्लाह खामिनाई को शहीद कर दिया गया
[3:17]क्या एज थी उनकी और ऐसी बात है कि वो छुपे नहीं
[3:21]उनको अपने घर में शहीद कर दिया गया तो हमारे लिए फक्र
[3:24]की बात है बाकी अभी और इंटरव्यूज करते हैं देखते हैं लोगों
[3:29]के क्या इमोशंस है आज के प्रोटेस्ट में आने की क्या वजह
[3:33]है जी आपकी आज जो हम इस प्रोटेस्ट में शरीक हुए हैं
[3:36]तो हम दुनिया को ये बताने आए हैं दुनिया के उन जालिमों
[3:41]को कि जिस तरह तरह उसने हमारे रहबर को शहीद किया है।
[3:46]हम उनके खिलाफ आवाज उठाने आए। हम जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने
[3:49]हम बताने आए हैं कि हम जुल्म के फेवर में नहीं है।
[3:54]हम जालिम के अगेंस्ट हैं। और रहबर मुजम ने ये बताया ये
[3:59]साबित कर दिया कि जुल्म के आगे झुका नहीं। जालिम के आगे
[4:02]झुका नहीं। अपने सर कटाया लेकिन दरसे कर्बला से ये सिखाया रहबर
[4:07]ने और हम हर उम्मते मुस्लिमा को यह बता कर गए हैं
[4:09]कि तुमने जालिम के खिलाफ आवाज उठाना है झुकना नहीं सर कटाना
[4:14]है लेकिन झुकना नहीं है देखिए यहां पर आज जिस तरीके से
[4:20]आयतुल्लाह खाने साहब का कत्ल किया गया और आज जिस तरह उनको
[4:22]शहीद किया गया है उसके लिए यहां पर सब लोग उनके सपोर्ट
[4:27]में और ईरान के सपोर्ट के साथ-साथ इजराइल और अमेरिका के खिलाफ
[4:31]एतजाज करने के लिए यहां इकट्ठा हुए हैं। जिस तरीके से हमारे
[4:38]आमनाई साहब पूरी इंसानियत के लिए एक तरीके से उन लोगों ने
[4:40]खड़े हुए थे। हर मजलूम के साथ खड़े थे। मगर जिस तरीके
[4:46]से अमेरिका ने उनको घर के अंदर मारा है। जिस तरीके से
[4:52]ये हमला किया गया। ये कत्ल है। ये किसी भी तरीके से
[4:54]इसको जस्टिफाई नहीं किया जा सकता। और उसी के खिलाफ उन्होंने न्याय
[4:59]इकट्ठा हुआ है। सो अभी हम आए हैं दरगाह शाह मर्दा और
[5:07]यहां पे लोगों की काफी ज्यादा भीड़ जमा होने लगी है और
[5:09]बिल्कुल गम का माहौल है क्योंकि रहबर सैयद अली खामनाई की शहादत
[5:13]का दिन है और उनके लिए यहां पे ताज़ियत पेश करेंगे इफ्तारी
[5:16]के बाद यहां पे होगा एक कैंडल मार्च उनके लिए उनकी शहादत
[5:23]पे बहुत बड़ा एक वाकया पेश आया है कि आप सबको पता
[5:24]है जो दुनिया जहान में जो लोग मौजूद हैं सबको पता है
[5:31]कि आज जालिम अमेरिका और जालिम इजराइल ने एक इंसानियत के हमदर्द
[5:36]एक इंसानियत के लीडरशिप जिसे कहें हम आयतुल्लाह अली खामनाई का शहीद
[5:42]करा है उनको और उन सबको याद करते हुए उनके साथियों को
[5:49]याद करते हुए दुनिया जहान में जहांजहां पे भी ना सिर्फ शियाने
[5:51]हैदरे करार ना सिर्फ अहले सुन्नत और मुसलमान दुनिया जहान में जहांजहां
[5:55]पे भी इंसान इंसानियत रखते हैं वो सब आज इकट्ठा इकठा हुए
[6:00]हैं। यही मैसेज देने के लिए आज हम दिल्ली के दरगा शाह
[6:02]मर्दा में इकट्ठा हुए हैं। और यह पैगाम देना चाहते हैं दुनिया
[6:07]जहान में जहांजहां पे भी जालिम अमेरिकन और जालिम इजराइल ही है
[6:10]कि हम आयतुल्लाह खामनाई की सोच को जिंदा रखेंगे। हम आयतुल्लाह खामनाई
[6:16]के मिशन को जिंदा रखेंगे और इंशाल्लाह उसी मिशन के साथ जब
[6:20]जब जरूरत पड़ेगी, जिस तरीके से जरूरत पड़ेगी, उनके पैगाम को जिंदा
[6:24]रखेंगे। आज वाकई एक उम्मते मुस्लिम के लिए खुसूसन मैं उम्मते अहले
[6:31]तश के लिए कहूंगा कि ये एक ऐसा दिन है कि जिसमें
[6:35]ऐसा महसूस हो रहा है कि हमारा एक ऐसा सरपरस्त जिसको जाने
[6:37]से एक यतीमी का एहसास हो रहा है उम्मत के लिए और
[6:43]एक बहुत बड़ा नुकसान बस अपना कम थोड़ा कम थोड़ा अपना गम
[6:48]का हल्का करने के लिए आए यहां पे क्योंकि हमारे जो रहबर
[6:50]मुजम है कल वो शहीद हो गए हैं हमें आज खुशखबर में
[6:55]लिया सुबह को तो बस थोड़ा जियारत के लिए आए थे कि
[6:59]थोड़ा दिल हल्का हो जाए महसूस बस हम रहबर के साथ थे
[7:04]रात साथ हैं और साथ रहेंगे हमें किसी चीज का कोई खौफ
[7:10]नहीं है कोई भी मुल्क या कोई भी दुश्मन हमें और हमारी
[7:15]आवाज को नहीं दबा सकता भले ही हमनाही साहब हमारे रहबर हैं
[7:18]और रहेंगे अब उनकी जैसे शहादत पेश आई है उनके सामने में
[7:25]तो ठीक है। एक जब जंग में लड़ाई होती है तो एक
[7:30]दोनों तरफ का नुकसान होता है। ठीक है। एक हमें बहुत बड़ा
[7:32]नुकसान हुआ है। लेकिन हम टूटे नहीं हैं। इंशाल्लाह इजराइल और अमेरिका
[7:38]को बिल्कुल निस्तोनाबूद करके छोड़ेंगे। जैसा कि खुमेनी साहब ने कहा था
[7:43]कि नक्शे से खत्म कर देंगे। इंशाल्लाह पूरी उम्मीद है कि इसे
[7:46]नक्शा ही खत्म कर देंगे इसका। आपकी क्या फीलिंग्स थी?
[7:50]आपके क्या इमोशंस थे?
[7:50]जब आपने सुना कि रहबर मुअज्जम शहीद हो चुके हैं। हमारी तरफ
[7:56]से ये प्रोग्राम मैं तो मेरा तो आज हम दोबारा यतीम हो
[8:02]गए। क्या ही कह सकते हैं। लेकिन ये नहीं है कि रहबर
[8:07]की शहीद हमें ये दर्स देता है। सबक रहबर हमें सबक देके
[8:09]जाते हैं कि तुम्हें लड़ना है आगे। जिस तरह कर्बला में जनाबे
[8:15]ज़ैनब सलामुल्लाह अलहा ने दरबार यजीद में लड़े थे। बहुत मुतासिर हूं।
[8:19]मुझे बहुत अफसोस हुआ है क्योंकि वो एक ऐसी शख्सियत थे कि
[8:25]जो जिनको हम लोग पर्सनली तो नहीं मिले लेकिन उनकी एक बड़ी
[8:29]कैरिस्मैटिक पर्सनालिटी थी। शायद वो अब बहुत मुश्किल से सदियों लगते हैं
[8:36]ऐसे इंसान को आने में और उनकी सच्चाई उनकी जुबान में छुपी
[8:41]थी जो वो कहते थे वो करके उन्होंने दिखाया और इमाम हुसैन
[8:44]के सच्चे नौकर निकले वो और शहीद शहादत का दर्जा उन्होंने पाया
[8:51]है। रोना आ रहा था और बहुत बुरी हालत थी। मतलब दिन
[8:52]भर ऐसा था उदासी का जैसे अपना कोई सगा मर जाता है।
[8:56]वही वाली वही वाली एक सिचुएशन थी हम सबकी। रात जो गुजरी
[8:59]है वह एक कयामत की रात रही है हर एक इंसान के
[9:03]ऊपर। तो सोना तो बिल्कुल नहीं हुआ। रात भर अपडेट पे चेक
[9:05]कर रहे थे। जाहिर है जितना भी मीडिया है सब जानते हैं
[9:08]कि कुछ ही ऑथेंटिकेट सोर्स है। उनमें से एक सोर्स आपका है
[9:10]सबील मीडिया। जब जाके ये खबर का पुख्ता यकीन हुआ तो वो
[9:14]वक्त से अभी तक का वक्त है कि शायद कुछ करने का
[9:19]दिल किसी का नहीं है अभी तक। तो यही सबको मैसेज है
[9:26]कि जब सुना तो एकदम से ऐसा लगा कि पैरों की तरह
[9:29]से जमीन से खिसक गई एकदम से बस ये था कि अपने
[9:33]घर फैमिली में था पर उस समय रो नहीं पाया पर ऐसा
[9:36]हाल हो रखा था उस समय बस कयामत से आ गई बस
[9:41]बेशक इसमें जो एक मोहब्बत करने वाला है खामनाई साहब से उसका
[9:44]रिएक्शन सबका ही एक जैसा है। दिल टूट गया था कुछ मिनट
[9:48]के लिए तो ऐसा लगा कि जैसे काश के हम उनकी जगह
[9:52]होते और उनप यह आफत ना आती हमारे ऊपर आती हम मर
[9:55]जाते लेकिन वो जिंदा रहते पूरा दिन जब के बाद से अब
[9:59]तक पूरा दिल ऐसा मायूस हुआ है कैसा महसूस हो रहा है
[10:01]बस ऐसा लग रहा है जैसे कोई छोड़ के चले गए यतीम
[10:04]हो गए ऐसा लग रहा है ऐसा लग रहा है क्योंकि हमारी
[10:08]जो रिप्रेजेंटेशन थी पूरे आलमी दुनिया में वो उन्हीं की बायस थी
[10:12]वो हमें रिप्रेजेंट करते थे उन्हीं की वजह से हम अपना सर
[10:14]बुलंद करके दुनिया कीज़ नजरों में नजरें डाल के बात कर सकते
[10:20]थे। तो ईरान का क्या जवाब होना चाहिए इस पे?
[10:20]मेरे ख्याल से एज अ सेल्फ रिस्पेक्टिंग नेशन ईरान को अपने दफा
[10:26]के लिए बिल्कुल लड़ने का पूरा हक है। ईरान को बिल्कुल हक
[10:32]है। हुसैनी है और हुसैनी खून है उनमें और वो आखिरी हद
[10:36]तक लड़ेंगे और लड़ना भी चाहिए। याद है कासिम सुलेमानी के शहादत
[10:41]के बाद ईरान का क्या जवाब था?
[10:43]आई रिमेंबर दैट वैरी क्लियरली एस एस व्हाट लाइक्स लास्ट डे। जस्ट
[10:47]नो इफ यू किल अस किल आवर कमांडर एंड यू क्रिएट अ
[10:52]वे बैक इन ईरान एंड देन यू क्रिएट द रहबर द सुप्रीम
[10:57]लीडर 300 मिलियंस ऑफ शी आर्स एंड बिलियंस ऑफ पीपल हु लव्ड
[10:59]हिम हु अडोर्ड हिम। यू थिंक दैट इज़ गोना एंड विथ दैट।
[11:03]देन लेट मी रिमाइंड यू अगेन। यू आर इन फॉर अ बिग
[11:07]सरप्राइज़। बिकॉज़ ईरान विल टेक द रिवेंज। एंड दिस टाइम विथ द
[11:10]बद्दुआ ऑफ एव्री चिल्ड्रन एंड वीमेन इनवॉल्व्ड यू कैन नॉट यू कैन
[11:15]किल आवर रहबर यू कैन किल आवर लीडर्स बट यू कैन नोट
[11:16]किल आवर बिलीव्स एंड अकीदा फिलहाल अभी एक ऐसा एक ऐसा खला
[11:22]पैदा हो गई है आगा के जाने से जिसको उभरने में यकीनन
[11:28]कुछ वक्त चाहिए और ईरान भी अपना जाहिर सी बात है ताबड़तोड़
[11:31]और मुस्तहकम जवाब जरूर देगा आप हथियारों से लोगों को तो मार
[11:37]सकते हैं विचारों को आइडियाज को और ख्यालात को नहीं मार सकते।
[11:39]ताूत हमें दड़वा के लड़वाना चाह रहे हैं। हम उसके चालों को
[11:45]समझ के हमें यूनाइट होके फस्तीन बहरेन शाम ईरान ईरान में जो
[11:52]मजलूम है उनके फेवर में आवाज उठाना है। हमेशा उठाएंगे इंशा्लाह। दुश्मन
[11:54]के लिए यह मैसेज है कि यह पैगाम यह ना सोचे कि
[11:59]आयतुल्लाह खामनाई अगर चले गए तो यह मैसेज ये पैगाम खत्म हो
[12:01]चुका है। आपको अगर शायद कर्बला से अगर दुश्मन ने सीखा होगा
[12:05]तो ये सीखा होना चाहिए उन्हें कि हमारे जिंदा से ज्यादा हमारे
[12:08]मरने के बाद असर ज्यादा रखते हैं। तो इमाम हुसैन की शहादत
[12:13]ये पैगाम आप सबको देती है। जितने भी अमेरिकन इजराइली और तमाम
[12:16]जितने भी इनके चाहने वाले हैं वो ये सब ये जान लें
[12:20]कि हमारे जिंदा से ज्यादा मरने के बाद असर छोड़ते हैं। यही
[12:25]वजह है कि आज कल जो अटैक हुआ है जिसमें आयतुल्लाह खामिनाई
[12:27]का शहीद किया गया है उनको कल के बाद से अब जो
[12:32]आगे के दिन होंगे वो इसराइल देखेगा अमेरिका देखेगा और उसका नस
[12:38]उनकी इनकी नस्ल इसका अंजाम भुगत देगी अब आगे जाके तो उनकी
[12:40]ख्वाहिश थी कि वो शहीद हो जाए उनकी ख्वाहिश पूरी हो गई
[12:43]उनकी ख्वाहिश थी वो दुआओं में भी यही मांगते थे और अल्लाह
[12:47]ने उनकी दुआ कबूल की और जहां भी है अच्छी जगह है
[12:52]ऊपर जाके मौला से मुलाकात करेंगे। इंशा्लाह इंशा्लाह कोई बात नहीं। तो
[12:58]लोगों से बात हुई कोई दुकान छोड़कर आया है। कोई जॉब छोड़
[13:00]कर आया है। कोई खेतीबाड़ी छोड़कर आया है। कोई आज काम पे
[13:04]नहीं गया है। बस इमाम खामिनाई की याद में उनको ताजियत प्रेजेंट
[13:06]करने के लिए इन जगहों पे आए हैं। रैलीज में आए हैं।
[13:10]कैंडल मार्चस में आए हैं। दरगाहों में आए हैं। हर एक जगह
[13:15]इमाम खामिनाई का नाम गूंज रहा है। बाकी ये है इस कौम
[13:16]की असलियत। कभी भी छुपते नहीं। कभी भी पीछे नहीं रहते। हमेशा
[13:21]आगे आते हैं। मजलूमियत की बात उठाते हैं। और आज के बाद
[13:23]से शिया और ज्यादा स्ट्रांग हो गया है। क्योंकि इनको एक होप
[13:27]मिल चुकी है कि हम भी शहीद होंगे। हमारे लिए शहीद होना
[13:32]कितना इंपॉर्टेंट है ये इमाम खामिनाई ने दिखा दिया। बाकी यहां के
[13:35]लोग इतने ज्यादा इमोशनल है। सीढ़ियों पे रो रहे हैं। अंदर रो
[13:37]रहे हैं। चलते फिरते किसी से बात कर लो। आंसू आ रहे
[13:41]हैं। इतनी ज्यादा इमोशनल वाइब है यहां पे। इतना ज्यादा इमोशनल एनवायरमेंट
[13:44]है यहां पे।
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