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[Majlis] Qayam e Fatimi Se Inqalab e Pakistan Tak Safar | H.I. Syed Yawar Abbas
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Record date: 25 Dec 2022 - قیام فاطمی سے انقلاب پاکستان تک سفر
AL-Mehdi Educational Society proudly presents new Executive Refresher Course for the year 2022 under the supervision of specialist Ulema and Scholars who will deliver though provoking lectures Every Weekend.
These video lectures are presented by aLmehdi educational society, Karachi for our youth.
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Transcript
[0:44][संगीत] अल्हम्दुलिल्लाह मोहम्मद मोहम्मद [संगीत] [संगीत] बुजुर्गों मोहतरमा और विराजमान ने अज़ीज़
[2:28]यम शहादत हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैह jindalon को हम eyame फ़ातिमा
[2:39]sitabir करते हैं अपने कम से बच्चों के लिए और नौजवानों के
[2:45]लिए गुजारिश के जनाबे सहारा अलैह सलातो सलाम की शहादत दिगंबर सल्लल्लाहु
[2:58]अलैहि वसल्लम [संगीत] की राहों से दुनिया के जाने से या 75
[3:14]दिन या 95 दिन 75 डेज़ या 95 डेज़ रसूल अल्लाह से
[3:23]जाना और फिर यह 75 दिन बाद या 95 दिन बाद 28
[3:29]सफर को दुनिया से जाहिर तौर पर पैगंबर रुखसत हुए उसी ऐतबार
[3:36]से जो 75 दिन की तादाद के एतबार से जो पहली ये
[3:43]तारीफ बनती है फ़ातिमा की वो है तेरा जमादिल अव्वल तेरा 95
[3:47]दिन के इतवार से बनती है सनी इसी वजह से ईरान और
[3:55]इराक में तेरा जमा दिल उल्लाह की जो शहादत की तारीफ है
[4:00]शुरू होता है उसको कहते हैं फ़ातिमा उल्हास में अव्वल और तीन
[4:08]जवान सहने के सिलसिले से जो मजा ए रहा है इसका सिलसिला
[4:12]है इसको कहते हैं फ़ातिमा सानिया यह फरक क्यों है dhairyaat के
[4:22]एतबार से अहले सुन्नत बरन ने भी जो रिवायत नकल किए खर्चे
[4:25]एक खोल और भी है 40 दिन के बाद कमी martbaat की
[4:30]रहमत से 40 दिन के बाद जनाब सदा की शहादत हुई है
[4:36]लेकिन ये दो कौल हमारे आजादा मौका है और kavitarin फिर 95
[4:39]दिन की रिवायत है जिससे तीन जवान साली बनती है वह कहते
[4:47]हैं वहां लग गया है दोनों एक ही तरह से लिखा जाता
[5:09]है सीन के बाद ओपन लगा देते हो जाएगा इसी तरीके से
[5:17]लिखते हैं लिखने का फर्क है नुक्ते ना होने का फर्क है
[5:22]ये भी एक लोग कहते हैं की इसकी वजह से भर पाया
[5:26]है पहले में अगर कहेंगे सब इन वख्स तो हो जाएगा 75
[5:27]दूसरे में कम शुरू हो जाएगा 95 बच्चों के लिए बात कर
[5:35]रहा था की 95 है या 75 दिन जनाब की शहादत है
[5:40]यह मुसल्ला में के जनाबे ज़हर है हसरत इस्लाम की शहादत सब
[5:42]ने लिखी है जो लोग शहादत को रद्द करते हैं या इनकार
[5:51]करते हैं उनसे इतना तो सवाल है की अगर आप ये कहते
[5:55]हैं की जनाबे सहारा की शहादत आके नहीं हुई पर आप कहते
[5:59]हैं की nagriktara सलाम बीमारी की वजह से तो वह बीमारी बताई
[6:06]जाए की 18 साल की खातून को कौन सी बीमारी हो जाती
[6:08]है या हो भी जाती हो तो अब बयान करेंगे क्या हुआ
[6:15]था डरे उनके पास इसका जवाब नहीं है इसका जवाब नहीं है
[6:20]यह तो सब मानते हैं की पैगंबर की एक हो या 4
[6:23]नहीं है हम चार नहीं मानता नहीं की बेटी मानते हैं ये
[6:27]तो मानते हैं ना की इस दुनिया से रुखसत हुई है दुख
[6:28]तक कब हुई कैसे हुई क्या हुआ उसके साथ सुकून करते हैं
[6:38]शहादत का बाप अगर खोलेंगे तो जरे उनके जो अपने मुश्किलात उनके
[6:45]लिए खड़ी हो जाएगी तकरीबन हमारे यहां भी अभी कुछ सालों सरवाइव
[6:56]जो है कराची में सबसे मरकज है सबसे बड़ा शहर है यहां
[7:05]जो होता है पाकिस्तान में होता है होनी चाहिए अभी तो कुछ
[7:14]भी नहीं है अभी तो कुछ भी नहीं किया है और मुहर्रम
[7:19]में कोई फर्क ना रह जाए इस जिम्मेदारी है देर से ही
[7:28]सही हुए मुहर्रम में फर्क ना करें फहद मियां उसी के तरीके
[7:40]से सारे शहर में वहां एक पंच माजरी से हो रही है
[7:44]या यह जो आखिरी साथ है इसमें जोर पकड़ता है या कम
[7:48]से कम जो ईरान 20 दिन तक नहीं ताकीद है [संगीत] सनी
[8:07]तक बकायदा करते हैं रह में भी और ईरान में कुछ कम
[8:19]है लेकिन ईरान में बहुत ज्यादा है और अभी से नहीं है
[8:21]ईरान के अंदर फटी नहीं है ये 20 22 दिन तकरीबन बहुत
[8:27]कदम है अब बहुत ज्यादा रोना है अब जाइए जो लोग जाते
[8:31]हैं चाहे देखें हुकूमत इस्लामी की तरफ से khusushan कितना है तमाम
[8:38]है पूरा हर्मन से ए करते हैं पूरा शहर से ए करते
[8:40]चाहे कोमो चाहे मचा दो क्यों हैं सर [संगीत] तो यह वही
[8:46]इसके अंदर फलसफा छुपा हुआ क्या फलता पाए वो छुपा हुआ है
[8:59]क़यामत सय्यद shauvaad ए गए सैयद शाह का जो हड़प है और
[9:08]जो फलता पाए और अजय सैयद शोहरत फल ऐसा हो सकता है
[9:12]इमाम हुसैन ने जिस मकसद के लिए कायम किया वो और हो
[9:14]और जो उनकी आजम बनाए उसका मकसद कुछ और हो हो सकता
[9:20]है एक ही है और होना चाहिए तो क्या आया इसका मकसद
[9:40]कायमे फ़ातिमा जहाज से अलग होगा कायम है कायम अभी तो ये
[9:48]बात पहुंचने में एक ऐसा लगेगा की जनाबे सलातो सलाम ने कायम
[9:52]किया है उनको होने वाली मुसीबतें उन पर बीतने वाले masaibon muskirat
[10:01]अपनी जगह और दर्द है दर्द है अमीर और मोमिन से लेकर
[10:08]हज़रत तक दर्द शाहिद फ़ातिमा की मुसीबत है अपना बाप है पूरा
[10:13]लेकिन इसको देखिए की इसी मुसीबत के अंदर क्या हुस्न छुपा हुआ
[10:20]है और क्या कमल छुपा हुआ है मुसीबत का मुसीबत है तो
[10:25]दूसरा भी उसका क्या होता है उसके अंदर छुपा हुआ हो जवान
[10:28]इसकी मिसाल में तो वो आपको कर्बला के लिए सलातो सलाम निकले
[10:36]तो बहुत सारे मौलाना जो कलम किए हैं बहुत khudbe दिए हैं
[10:41]उसके अंदर एक मशहूर मारु हज़रत हज़रत सैयद सौदा का जुमला है
[10:43]जब किसी ने पूछा की आप कहां जा रहे हैं किस लिए
[10:47]जा रहे हैं इसकी हैसियत darjiyat भी नहीं है इसको जवाब दे
[10:49]मौला पूछने वाले की रानी कातिला अल्लाह का इरादा ये है की
[11:01]मुझे कातिल देखिए क्या देखें कातिल भैया राहुल देखे मुझे कातील देखे
[11:18]मेरी मुस्कुराहट को असीर देखिए ये mashiyaten पर्वत है बधाई अगर आपके
[11:24]दोनों कलमे खातिर और जो कत्ल होना है शहादत और असर है
[11:31]basayat देखे तो मुसीबत भी मुसीबत है जिस शख्स ने इमामे हुसैन
[11:36]के कायम को ना समझा हो जिसने इमामत की मकसद को ना
[11:42]समझा हो जिसने और एक कदम कदम आगे बढ़े नबूवत के मकसद
[11:43]को ना समझो और एक कदम आगे बढ़े जिसने तौहीद के मकसद
[11:48]ना समझो इसको सिर्फ और सिर्फ जीरो जाना मुसीबत है वह सिर्फ
[11:59]तस्वीर का एक रूप देखेगा इसका जवाब कौन देगा इसका जवाब खुद
[12:07]अमनन कर्बला ने दिया दोनों जब चलें एक खत्म होने चला है
[12:20]एक असीरों ने चलाया सारा बधाई हम क्योंकि हमारे नजदीक कॉन्सेप्ट क्लियर
[12:26]नहीं है हमें उलझन होने लगी इससे क्या अजीब बात है और
[12:32]वह भी इतनी मुक़द्दस हस्तियां तेरी खुदा के कारखाने की सबसे कीमती
[12:38]makhalun सबसे kimalu किसने निकल रही है तो दुश्मन फतह हो गई
[13:02]क्या पता नहीं जब तक नहीं पता चलेगा जिस पर जंग बाते
[13:29]होनी है जब तक वो पॉइंट व्यू समझ में नहीं आया की
[13:33]आया मुकाबला क्या है उषा ने अपने अली का मौके क्या है
[13:42]की जिसके लिए हुसैन अपने अली अपनी जैसी जाट मुबारक हो कुर्बान
[13:44]करने निकले कितने kimatifon का वो जिसके लिए हुसैन अपना काट लो
[13:58]फिर कत्ल के बाद बहन की और नाम से इस्मत की हसरत
[14:01]को काबुल कर रहे हैं कहां होगा कातिल का मौके पता है
[14:20]इमामे हुसैन के सिलसिले से ये नहीं इस तरफ सोचे लेकिन एक
[14:22]और जुमला जब मिलता है कर्बला पर पहुंच गई कत्ल भी हो
[14:28]गए और असीर भी हो गए 11 मुहर्रम को जनाबे जैनब ने
[14:33]इसका जवाब दिया इमाम हुसैन आई है की मैं खातिर हूं और
[14:42]जैनब असीर हूं 11 मुहर्रम को जनाबे जैनब ने हुस्न कर्बला को
[14:45]बयान किया है की तुम कत्ल हो जाने में मुसीबत ना समझो
[14:49]एएसआई रोजाना में मुसीबत ना समझो इसके अंदर हुस्न जो छुपा हुआ
[14:54]है कब जब इब्ने जायद ने पूछा दरबार में अपने ज़ाकिर जनाब
[15:00]से सवाल हो रहा है तुमने अल्लाह की सुन्नत को अपने भाई
[15:03]के सिलसिले से कैसा पाया 11 मुहर्रम है अगला दिन है कातिल
[15:11]हो चुके हैं भाई कत्ल हो चुके हैं बेटे कदल हो चुके
[15:17]भांजे भतीजे सब चादर छीन चुकी है खुद अजीब है गहरी तौर
[15:23]पर वह कहता है हमला करता है उसे पता है की अगर
[15:28]यह इस वक्त इजहार मुसीबत करेंगी तो हम मौके में जीत जाएंगे
[15:35]हम अपने मौके में कामयाब हो जाएंगे हम इस मौसम को मुसीबत
[15:42]अदा करके हम इसको झुका देंगे क्योंकि अगर उसने ये का दिया
[15:47]की बहुत मेरे साथ जुल्म हुआ बहुत मेरे साथ मुश्किल हुई मेरे
[15:49]साथ ये हुआ मेरे साथ वो हुआ अगर ये सब ये कहेंगे
[15:53]वही समझ रही है कहेंगे की तुम उसके अंदर की भी यही
[15:58]है की अगर मुसीबत में मुकाला करो तो फिर आकर शिकवा करता
[16:01]है लेकिन जनाबे जैनब है इमाम हुसैन के निकलने पर इजाजत हुआ
[16:11]था ये इन्नल्लाहा shahiyan रानी कातिला वही रहो मुन्ना सब आया mashiyate
[16:16]परवरदिगार ये है की खुदा मुझे खलील देखे इनको असीर देके जनाबे
[16:19]जनाब करिए मुसीबत नहीं है जैसी उसने पूछा गया है तुमने अपने
[16:23]भाई की सिलसिले से खुदा की सुन्नत को क्या आता है पलट
[16:29]के कहती है मार आई तू इला जमीला जमन है कर्बला जमा
[16:36]लेकर भला वजह क्या है वजह एक तो मारे फटे परवरदिगार के
[16:41]उसे मार्ले पर हैं की जहां परवरदिगार की बारगाह में जितना देते
[16:44]हैं परेशान नहीं होते जितना देते हैं उतना खुश होते हैं जितना
[16:50]खर्च करते हैं जान देकर खुश हैं आदमी इस तरह से का
[17:00]पाए इसको की असीरी के बाद मुतमईन है यह मैं मुकदमा खाते
[17:07]नहीं कहा क्योंकि क़यामत में हम खुल के इस तरह नहीं का
[17:12]सकते जिस तरह यहां का सकते हैं बच्चों को देखिए आप कर्बला
[17:17]में मौजूद बच्चों को उन्होंने यानी क्रिया किया किस लिए किया आमतौर
[17:24]पर हम समझते हैं बच्चे प्यास की वजह कर रहे हैं घर
[17:27]से ऐसे ही है तबीयत इंसानियत इंसानियत करें हुसैन के muntakhabjuda बच्चे
[17:45]हैं ये अगर किसी को लेके आए हैं तो पूरे कमल से
[17:50]इस काबिल है की विलायत की recaud में कर्बला में हिस्सा ले
[17:55]इस काबिले छोटा था जब बच्चा भी वो गिरिया भी कर रहा
[18:01]है तो सिर्फ प्याज के लिए नहीं कर रहा किसके लिए कर
[18:05]रहा है उसका भी नौकरी वही है जो इमामे वक्त का मौका
[18:06]भैया आगे बढ़े ये फतह बच्चे क्यों गिरा कर रहे हैं अब
[18:17]बताइए शबे असुर या तारीख के एतबार से दिन कोई भी रहा
[18:18]हो रहा है सलाम को किस चीज ने हिदायत दी इस रुको
[18:26]देखिए यह बच्चों ने और उनके alatane हुडको हिदायत दी की नहीं
[18:34]दी सुनैना मुसीबत में आपने मसाब में तुम लोग हुसैन के बच्चे
[18:38]का रहे हैं कर्बला से लेकर शाम तक और कुएं तक सब
[18:46]जगह ये बच्चियों अगर रोते हैं तो इसलिए रोते हैं ताकि लोगों
[18:50]की हिदायत करें तो जिस घर के बच्चे लोगों की हिदायत के
[18:53]लिए रोते हो उसके लिए जनाबे जैनब जब खुदवा देती होंगी हिदायत
[19:01]बशर की हिदायत विलायत से इन हैरत होने के बाद लोगों को
[19:06]दोबारा मरकज filaayat पिलाना दोबारा उसने लाना है तुम बाजार से निकल
[19:16]गए हो बुलाया के इमामत के महबूब मार्केट से बाहर निकल गए
[19:22]हो और दूसरी तरफ से अगर आप देखिए गिरिया पर पाबंदी क्यों
[19:26]लगता है दुश्मन अगर इस गिरिया में कोई कुवैत नहीं है तो
[19:32]छोटे-छोटे बच्चों के गिरने से क्या होता है क्या होता है [प्रशंसा]
[19:44]और लोग जब इनके गिरी से हिदायत की तरफ आएंगे तो हमारा
[19:49]फैल होगा लेकिन दोनों कैसी जंग है मौके पर खुदा ने अपने
[19:55]अली या मौके पे हक मोहम्मद वह यही मौका है मोहम्मद यही
[20:01]है नबी है यही फाड़ नहीं है यही महत्व है और वो
[20:03]काबिल मुझे लोगों के शैतानों के तो मौके द इसमें कितना किरदार
[20:10]है इसी आंसू का तो समझते हैं इनको उनको रोकता है रोने
[20:17]से क्यों रोकता है इसमें रोकता है उसे पता है की आंसू
[20:21]हमारे सारे मौके का सत्यानाश कर देगा आज भी रोकता है ना
[20:26]मजलिस को रोकता क्यों रोकता है खर्च हम करते हैं रुक तो
[20:28]तुम क्यों देगा हम लोगों को एन जाने बच्चों को बड़ों को
[20:41]बुजुर्गों को ख्वातीन को कैसे कैसे करके अपने पेज पे लेके आते
[20:47]हैं तुम एक मजलिस करके सबको फिर वहां से ले जाते हो
[20:49]महसूस करने की चीज है ये कायम इमाम हुसैन का जिस तरीके
[20:57]से हम है उसको समझेंगे वो मौके पर मौके पे क्या है
[20:58]ला इलाहा इल्लल्लाह का ए का mashre में इंसानी मसरी में तौहीद
[21:10]के परचम को aamalan एलाना और लहराना तौहीद के परचम को अमल
[21:17]अमल तोहिद ए अमली फिक्री नहीं क्या होती है गुनाह कर सकता
[21:40]है तुम्हें मुश्किल आती है तो परेशान क्यों होते हैं तो हिदा
[21:54]मलिक कहां है इमामे हुसैन है वही फलसफा होगा ajayema में हुसैन
[22:04]का हुसैन का फलसफा है वही कायमे हज़रत सहारा का फल मेरा
[22:10]मौजूद इस वक्त का इस मुकदमे की बात क्या है क़यामत फटीमी
[22:15]से इंकलेट पाकिस्तान का तक का सफर पहले तो मरला ये है
[22:27]की जनाबे सहारा की 75 यह 95 दिन कायम है कायम इस
[22:32]कायम के अंदर जिसने जुल्म किया वह बताया की नहीं बचा अगर
[22:48]मुंह के बच्चा वही बताया है सलातो अस्सलाम [संगीत] जब मौलाना तशरीफ़
[23:04]ले मैं यहां बयान कर चुका हूं ना मौला तशरीफ़ ले ना
[23:08]मदीने में कर्बला के बाद पूरा क़यामत कर्बला निमता के अपनी जिम्मेदारी
[23:12]पुरी करके अभी मौलाना सज्जाद उतारे नहीं है सवारी से किसी ना
[23:18]के सवाल किया की कौन जीता मौलाना कोई तफसील बयान नहीं की
[23:24]है मौलाना सिर्फ बात की मौलाना का इसका जवाब के कौन जीता
[23:27]मस्जिदों के मनरो से होने वाली आजाने बताएंगे [संगीत] हान रुकी आया
[23:36]अज़ान में मोहम्मद का नाम बाकी रहा किसका मौके कामयाब है इसका
[23:51]मुकदमा कहां है इमाम हुसैन का मुकदमा कायम का मुकदमा क़यामत फ़ातिमा
[23:59]में पोशीदा है वहां के हालत और द इनके हालत और है
[24:06]किसके ज़माने के सामने आया है इमाम हुसैन की जमाने में उससे
[24:12]पहले नहीं है जरूरत है सलमान जैसे लोग हालत ऐसे नहीं है
[24:22]की यह भी कायम करें सिर्फ एक जाट है जो कायम करेगी
[24:28]इस वक्त और कुर्सी का कायम तमाम कैमा को आगे बढ़ाएगा बधाई
[24:30]लगता है खाटू ने 75 या 95 दिन जिसने मुसीबत है सही
[24:39]है घर के अंदर यह बताइए सवाल घर के अंदर एक खातून
[24:41]अगर हुए तो कितना जोर से रोएगी जा सकती है आपने सुना
[24:51]है ना की लोगों ने आकर कहा या दिन में रोया रात
[24:54]में रो का सुना है ना आपने [संगीत] [प्रशंसा] बर्बाद हो रहा
[25:11]है जो आगे का रहे द दिन में रो रात में ना
[25:17]इसलिए की मौके फोड़ा jaldal हो रहा है भाई आप कहती है
[25:21]जब भी खावटी इन जनाब के पास आती है उसे जख्मी हालत
[25:26]में और मुसीबत ज्यादा हालत में जब भी आती हैं जब आती
[25:31]है कभी मदीने की khwahisin आती है कभी किसी काबिले की आती
[25:33]है कभी किसी काबिले की आती है जो आता है उसके सामने
[25:38]अपना मौके रखती है गिरिया करती जाती हैं और रोते रोते उनको
[25:43]कहती है की इस वक्त अली के हक के लिए कायम करो
[25:49]धर्म है दरवाजे दरवाजे पे [संगीत] दस्तक दिए [संगीत] आपको देर हो
[26:19]गई है फ़ातिमा दरवाजे पर आए और दरवाजा खोला ना जाए कैसा
[26:29]महफिल mashray कितने था की नहीं [संगीत] एक लम्हे कायम से पीछे
[26:44]नहीं हटेगी गांव जा रहा हूं ना पूरे वजूद के साथ दिखा
[27:02]दिया मिलाया था पूरे वजूद के साथ जनाबे का और कायम की
[27:10]सबसे बड़ी तो जल्दी जनाबे सहारा के कायम की जो मैं अपने
[27:15]मौजो में दाखिल हूं सबसे बड़ी tajaldi कायम की जनाबे जा रहा
[27:18]है की कर्बला सबसे बड़ी क़यामत की तजल्ली सबसे बड़ी जनाबे इमाम
[27:25]हुसैन का ख्याल जिसको आप खुद महसूस किए द की हम हुसैन
[27:31]का कायम के तमाम एमाना बत्तील के मुकाबला पर हक दिवाकर के
[27:35]लिए कल मैं तोहिद के लिए इसको समझेंगे एक लफ्ज़ के दर
[27:58]इंसान इसको तसव्वुर कर सकता है नौजवानों में पैगंबर की बेशक और
[28:04]पैगंबर को जो महबूब किया खुदा ने पैगंबर की तमाम टिहरी और
[28:07]बेशक की तजल्ली ये कम किसे कहते हैं रसूल अल्लाह की बेशक
[28:14]और उनकी रिसालत और उनके महबूब सोने को जब परवरदिगार ने पुरी
[28:17]तसल्ली से और आप से जहां चमकाया है यानी यू कहूं मोहम्मद
[28:24]रसूलुल्लाह की सबसे कम तजल्ली क्या है या मोहम्मद रसूल अल्लाह की
[28:34]aabota है रसूल अल्लाह मिट जाए मैं हो जाए अगर मोहम्मद रसूल
[28:40]अल्लाह के बाद अली अल्लाह ना हो दिन कहेंगे राहत कहेंगे इतनी
[29:12]nuraniyat के बाद इतनी रोशनी के बाद ये दिन रात में कैसे
[29:17]बदल गया क्या हुआ अल्लाह को गायब करो माफ करो मैं क़यामत
[29:41]करूंगी ताकि उन वालीउल्लाह के परचम को उसी तरह रोशन करूंगा सल्लल्लाहु
[29:48]अलैहि वसल्लम खुदा बावन माने जो जो भी fajae जनाबे जा रहा
[30:05]है इस जागी से अभी फिलहाल फजल के बाप से नहीं tanhail
[30:10]के ना होने के बावजूद जिम्मेदारी क्या है अगर भारतीय जंग हो
[30:19]रही हो बातें ये चाह रहा हो की स्याही हो हा के
[30:24]जा रहा हूं की nuraniyat हो तो क्या जिम्मेदारी है हर विधायक
[30:26]के प्रथम को थमने वाले की क्या है सीरत आएगी तन्हाई की
[30:33]फिक्र मत करो अकेले होने की फिक्र मत करो कायम करो कायम
[30:42]डीआई करो तो नहीं है जिम्मेदारी ये कायम किया जाए शक को
[31:00]खत्म करने का हीरो शक्ति है विलायत के काबुल करने वाले हॉकी
[31:13]में इलाही को काबुल करने वाले दिल कितने हैं स्वास्थ्य में हरा
[31:25]भी ना शिद्दत है अगले ही अमीर कायनात के लिए लोगों ने
[31:32]कहा अली अलैहिस सलाम के लिए कहा की अली का अदालत में
[31:34]शाहिद होना आदिल के सिलसिले से अली के शाहिद होने ने उनको
[31:39]उनकी मेहराम में कत्ल करवा दिया हान की मैं इलाही की हुकूमत
[31:45]में जिंदगी गुजरने का सलीका हक में इलाही ए जाने के बाद
[31:51]उसे हक में इलाही को कुबूल कर लेना हुकमिल आई और विलायत
[31:56]के ए जाने के बाद उसको आंख बंद करके काबुल कर लेना
[32:00]कितने लोग हैं विलायत को मैं अपनी बात कर रहा हूं कितने
[32:08]लोग हैं विलायत आने के बाद इनके दिल में कोई छुपाना हो
[32:19]नौजवानों को आप जब अपने सर और सूरत को बनाने जाते हैं
[32:24]नई के पास फेडरर सर के पास आप उसको अपने आप को
[32:30]उसके सपूत करते नहीं करते नहीं करते जानते हो ना जानते हो
[32:39]कितना आप अपने आप को उसके सपोर्ट करते हैं हो सकता है
[32:43]की वो क्या है इधर कहो मुंह और आप इधर मुंह करें
[32:47]क्यों सूरज बिगड़ जाएगी उसका कोई मुखास थोड़ी हो उसमें मिलाई से
[33:14]लेकिन उसके सुपुर्द जितना इंसान अपने आप को करता है इतना ही
[33:20]hukmur करता है उसकी वजह यह है की वहां सूरज बिगड़ना jahirien
[33:26]दिख रहा है कुबूल ना करने से जो अंदर की सूरत बिगड़
[33:32]रही है ये दिख नहीं रही बीवी कहती है और बीवी सीधा
[33:43]से साबित करती हैं अकेले भी हो कायम करो एक दूसरी बात
[33:48]और आखिरी बात को क्या कभी तुम्हारे जहां में ये नहीं होना
[33:52]चाहिए ये हमारे की जो तब्दीली की रुकावटें हैं उसमें से एक
[33:56]ahamtarin रुकावट यही है की हमारे जहां में ये पहले ही होता
[34:00]है की नहीं हो सकता कोई कम हो अकेले भी और इस्तेमाल
[34:06]तो और पे तो और मुश्किल है सबसे पहले नहीं हो सकता
[34:12]कोई कम करने खड़े होकर नहीं हो सकता नहीं हो सकता की
[34:19]साथ इस नज़रिया के साथ इस फिक्र के साथ कुछ कर पाएंगे
[34:25]जो मेरा मौजूद maraboot के जनाबे दहला के कायम से हमने इंकलाब
[34:31]लाना है पाकिस्तान में लोगों ने सवाल किया की इंकलाब ईरान होना
[34:34]चाहिए था इंकलाब हिरन नहीं है इसलिए की पाकिस्तान में इंकलाब लाना
[34:39]है सवाल आया पाकिस्तान अभी अभी प्रैक्टिकल कर रहा हूं मैं अपने
[34:42]आपको जवाब दे पाकिस्तान में इंकलाब मुमकिन है फटी हो तुम है
[35:14]इंकलाब से पहले बदल के सवाल करते हैं ये ढाई हजार से
[35:21]ज्यादा पुरानी हुकूमत करने वाला ये शाह का खानदान इसे भगाया जाए
[35:24]भगाया जा सकता है क्या जवाब मिलेगा नहीं हो सकता है लोग
[35:42]मजाक उड़ते द मगर मुमकिन है की शौचालय जाए मामले का ये
[36:01]ज़मीन जो मेरी सर जमीन है जो मेरा मुल्क है जिससे मोहब्बत
[36:09]मुझे वाजिब है इसकी तब्दीली हो सकती है पहले जहां में जवान
[36:15]इस तसव्वुर को पैदा करें के हो सकती है तब्दीली वर्ण आप
[36:20]जाइए जरा कायम जो जनाब ने किया है अगर मैं और मुझमें
[36:24]जैसा कोई टपक को लेके जाए तो वो तो यही कहेगा ना
[36:28]नहीं हो सकता आप क्या कर रही है मेहनत करनी है खुदा
[36:29]अल्लाह कुछ नहीं होता उसे वक्त हो सकता है तुम्हें मुसीबत झेलनी
[36:47]पड़े उसे रात होता है की तुम्हारा पहलू टूटे है लेकिन बताइए
[36:55]पहली तोड़ने वाला कामयाब हुआ या जिस जो जख्मी हुआ वो कामयाब
[36:59]हुआ हमें समझा रही है नहीं हो सकता तो निकलने जिंदगी से
[37:07]तब्दीली के सिलसिले से चाहे फ़र्ज़ हो फर्ज के साथ भी यही
[37:12]मुश्किल है मैं कम मैं कहां तक दिल हो सकता हूं मैं
[37:14]कहां जा सकता हूं मैं कहां हूं मकाम आपको हासिल कर सकता
[37:19]हूं जिंदगी में नहीं है मजाक थोड़ी है खिदमत थोड़ी है ये
[37:33]14 मुकाम वासिल दिन के बाद मौजूद हो वही तसव्वुर करेंगे नहीं
[37:38]हो सकता जिंदगी से निकले बच्चों से गुजारिश है जवानों से निकले
[37:45]जहां से की नहीं हो सकता कुछ नहीं है हो सकता है
[37:50][संगीत] क्योंकि जब तक बुनियाद है ठीक नहीं होगी यही ना नहीं
[38:01]हो सकता ही मुश्किल बना हुआ है आपका अंदर जो छुपी हुई
[38:07]सलाई आते है वो जाया हो रही है और कल वो इसका
[38:12]जवाब देना है इसी सलाहियत का मैन अगर किसी बच्चे को हजार
[38:13]रुपए देकर भेजती है ना मजार तो उससे हजार का हिसाब लेती
[38:18]है आपको खुदा ने जहां भेजा ना सबसे ज्यादा देखे भेजा है
[38:24]आपने उसे घर में आंख खोलिए ना पहले से ही अली मौजूद
[38:30]था हुसैन मौजूद था जहां यह फ़ातिमा मौजूद था तो आपसे कैसा
[38:34]सवाल होना है फिर जितनी आपकी अगर मैंने इस्तेमाल की वहां का
[38:42]सकते हैं परवरदिगार को कोई नहीं सकता था मैं समाज रहा में
[38:47]रहते द हो ही नहीं सकता था दिल्ली के लिए कोशिश क्यों
[39:01]नहीं की का सकते की नहीं हो सकता था तुम्हारे सामने नहीं
[39:07]थी नहीं थी तुमने देखा नहीं की मैंने अकेले क्या-क्या किया क्या
[39:24]पाकिस्तान आज नहीं आने वाली नस्ल आएगी ये सही कर रहे द
[39:39]हो सकता है इतनी ताकत नहीं है सबसे ज्यादा रोशन किया है
[39:45]वो कहते हैं हमारी जिंदगी में नहीं होना है ही नहीं हमारी
[39:57]जिंदगी में सिर्फ होना है होगा जो करेंगे जो सोचेंगे वो होगा
[40:03]इंसान की सलाह देते हैं की अपने आप को अंडरस्टैंड और इसीलिए
[40:24]आपसे फिर सवाल भी सबसे ज्यादा है उसका हक नहीं अदा कर
[40:39]सकते द की खुदा ने एक नेमत और दी है क्या करने
[40:47]का फिर सवाल भी होना है क्योंकि जिस तरीके से जल्दी थी
[40:54]फ़ातिमा की तो जल्दी कर्बला थी fatmiya और कर्बला की तो जल्दी
[40:59]क्या है और अब फ़ातिमा कर्बला दोनों मैदान में आपका मेरा हिस्सा
[41:15]है सारी दुनिया की सूरत अल बदल रही है सारी दुनिया जो
[41:19]है वो intkalin कुदरत तक मसाला ए गया है ब्रिटिश एम्पायर से
[41:24]कुदरत muntakil हुई थी अमेरिका के पास आई थी अमेरिका की कुदरत
[41:33]ना थी ना है बिल्कुल तमाम खत्म होने पर खिताबत नहीं कर
[41:41]रहा हूं की हमें हुकूमत करने का हक है वो कहते हैं
[41:48]हमारी हुकूमत जब बनिए 80 साल से ज्यादा नहीं चलती कितने साल
[41:54]80 साल से ज्यादा 1948 में उन्होंने इसराइल बनाया कितने दिन रह
[42:00]गए अब उनकी हुकूमत अगर खत्म होगी तो तय है की ये
[42:07]intkalin कुदरत सड़क की तरफ है मशरख की तरफ है और मस्जिद
[42:12]की तरफ किसकी तरह अंदर किलों की कुदरत इसको महसूस करें लोकसभा
[42:19]कातिल करके हमने कामयाबी हासिल कर ली अब जब दोबारा जब ममता
[42:26]के लोग पता चलेगा की फ़ातिमा ने कामयाबी हासिल की है ना
[42:32]की बताया अभी के ऐलान है इनके अलावा इस्लामी हो शाहिद कदम
[42:39]सुलेमानी जैसे उनकी शहादत हो जब सबका सहारा की शहादत के कबर
[42:45]आता है सरदार का जो सरदार कहते हैं की जूस बना ही
[42:51]एड हज़रत सहारा नाजरीन जनाबे सहारा के अलावा नहीं है जब कभी
[43:01]किसी मुश्किल में गिरफ्तार में कहते हैं जब कभी किसी मुश्किल में
[43:04]गिरफ्तार हुए याद ही नहीं के जनाबे tabassul किया और mufase रहेगा
[43:10]वो मुमकिन ही नहीं है लेकिन जनाबे ए रहा था tabssul करना
[43:18]है कायमे जरूर के लिए जाती मुस्कुराहट अपनी जगह है वह भी
[43:24]मांगे असली है की बीवी मुझे सुर के काबिल बना दीजिए विलायत
[43:26]की बारगाह में मुझे वो रंग दे दे जो विलायत जिसे काबुल
[43:31]करती है इमाम जिसे कुबूल करती है मिल जाएगी मुझे जनाबे सैयद
[43:40]खेत का सिम का ही करीबी दोस्त है वो फरमाते हैं कासिम
[43:46]के kamaalaat में से ये ठेक तो उन्होंने अपने घर के वहां
[43:48]बैतूल सेहरा बनाया है इमाम बारगाह है जनाब जरा के नाम से
[43:52]जिसमें मजलिस होती है फ़ातिमा की हरम छोड़ के लोगों के और
[43:58]जो मजलिस में आने वाले मोमिनीन उनकी खिदमत के लिए जहाज छोड़
[44:01]के आते द तीन दिन फ़ातिमा के लिए कहते द तो लडूंगा
[44:22]उनके दोस्त कहते हैं जब मुशी पद जाते हैं तो रोशनी नहीं
[44:29]होती अंधेरा होता है की आप अंधेरे में पहुंचे रहे हो मजलिस
[44:37]में आपको पहचान की जरूरत नहीं है की खासियत काशी में है
[44:40]की नहीं है बस इसमें फ़ातिमा मेरा टुकड़ा है लोगों ने कैसा
[45:13]पास रखा है टुकड़े के टुकड़े टुकड़े कर दी एन पहलू सलामत
[45:23]ना बाजू सलाम एन रुखसार सलामत [संगीत] इस तरह कद्र की जाती
[45:47]है [संगीत] दीवार का सहारा लेके चले फरमाते हैं हमारी जड़ा पैगंबर
[46:18]की रहल से शहादत तक सो नहीं पाती थी इस काबिल नहीं
[46:26]थी की बिस्तर पर लेट सके मौला फरमाते हैं मौला फरमाते हैं
[46:35]जमीन पे दो जानू होके सोने की कोशिश किया करती थी अल्लाह
[46:40]हु अकबर क्या किया कैसी मुसीबत है [संगीत] और फिर आपने सन
[46:54]रखा है ना कितना सख्त है ना ये बीवी ने कहा आसमान
[46:58]ये बताओ मैं यह चाहती हूं की जब मैं दुनिया से जाऊं
[47:02]तो मेरा बदन ज़ाहिर ना हो kafantaher ना हो जाना हमारे यहां
[47:08]एक ताबूत बनाया जाता है वो इस किस्म का ताबूत है की
[47:10]उसमें जनाजा नज़र नहीं आता अस्मा मेरे लिए बना दोगी अस्मा ने
[47:20]कहा बीवी मैं आपके लिए बना दूंगी जनाबे अस्मा ने जनाबे सहारा
[47:24]के घर के सहन में वो ताबूत बनाना शुरू किया लड़कियों जोड़
[47:27]रही हैं ताबूत को बना रही हैं आप सच्चे दिल से बताइए
[47:33]अगर मैन का जनाजा घर में ताबूत बन रहा हो जब हसन
[47:38]देखते होंगे की मैन का ताबूत जब हुसैन देखते होंगे मैन का
[47:44]ताबूत जब जैनब देखती होंगी मैन का टैबू तो क्या बिताती होगी
[47:50]अल्लाह आपको कोई गम ना दे जिस तरह आप जनाबे सहारा के
[47:54]गम में रो रहे हैं अल्लाह आपको जनाबे साहब की पहलू में
[48:01]उनके करीब होने की वो तौफीक ilayat करते मौला से एक बार
[48:03]जरूर कहे मौला मैं जनाबे सहारा को रो रहा हूं मैं बीवी
[48:11]सैयद को रो रहा हूं आपको मालूम है आपको मालूम है इन
[48:20]आंसुओं की कितनी कद रहा जनाबे साबुन समान की बारगाह में वो
[48:22]कितना खुश होते हैं क्यों उनके दिल की आग कुछ कम होती
[48:30]है एक जमीन पर फक्कड़ मेहंदी है जिन्हें यह पता है की
[48:33]फ़ातिमा की कब्र कहां है सिर्फ एक मेहंदी [संगीत] और आपको मालूम
[48:43]है उसे वक्त जब आगे दरवाजे पे आग लगाई और जब डालता
[48:49]हुआ दरवाजा गिरा और जनाबे सैयद आने दो आवाज़ दी है आज
[48:53]तो लफत में इंडिया ने उसको नकल किया है जब जलता हुआ
[48:55]दरवाजा नहीं फिर एक बीवी पे गिरा पहली आवाज़ जो बुलंद हुई
[49:01]जनाबे सैयद आने का या फिर आप मुझे समान मेरा मौत से
[49:11]दूसरा कहते हैं उसे मौके पे जनाबे सैयदा ने पुकारा यहां अल्लाह
[49:17]हु अकबर अल्लाह हु अकबर मैं कहूंगा आपकी जानिब से बीवी से
[49:24]बीवी आपका शहर या अली का दे आपका शहर अली है सारी
[49:31]दुनिया उसको पुकारती है आदम ने उसको पुकारा न ने उसको पुकारा
[49:34]पैगंबर ने उसको पुकारा जनाबे सहारा या मेहंदी क्यों कहा या अली
[49:43]क्यों नहीं कहा पलट के जैन यही कहे अली है तो मैंने
[49:48]अपना पहलू [प्रशंसा] अल्लाह अल्लाह [संगीत] [संगीत] तौफीक नसीब फरमाए जनाबे कमर
[50:39]अब्बास ना कभी इब्ने सैयद खुर्शीद अली ना कभी फार्मा या दुश्मनों
[50:55]को बिल्कुल जनाबे सैयद कमर अब्बास ना केबी ने सैयद खुर्शीद अली
[51:17]ना कवि और प्रोफेसर से सांप की वालिदा के लिए एक मर्तबा
[51:21]सूरा अलहम का
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